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मंगलवार, 26 अक्टूबर 2021

मसीही विश्वास एवं शिष्यता - 26


मसीही विश्वासी के गुण (2) - प्रभु को प्राथमिक स्थान देता है 

सुसमाचारों में प्रभु यीशु मसीह द्वारा दिए गए मसीही विश्वासी के सात गुणों में से दूसरा गुण है कि वह प्रभु यीशु मसीह को अपने जीवन में प्राथमिक, सबसे उच्च स्थान देता है। प्रभु के शिष्य के लिए पारिवारिक एवं सांसारिक संबंधों से अधिक महत्वपूर्ण प्रभु के साथ उसका संबंध होना चाहिए:

 मत्ती 10:37 जो माता या पिता को मुझ से अधिक प्रिय जानता है, वह मेरे योग्य नहीं और जो बेटा या बेटी को मुझ से अधिक प्रिय जानता है, वह मेरे योग्य नहीं।

लूका 14:26 यदि कोई मेरे पास आए, और अपने पिता और माता और पत्नी और लड़के बालों और भाइयों और बहिनों वरन अपने प्राण को भी अप्रिय न जाने, तो वह मेरा चेला नहीं हो सकता।

प्रभु ने इसका उदाहरण स्वयं अपने व्यवहार के द्वारा दिखाया; प्रभु के लिए उसके अपने परिवार जनों से अधिक महत्वपूर्ण वे लोग थे जो उसकी बात सुनते और मानते थे: “और उस की माता और उसके भाई आए, और बाहर खड़े हो कर उसे बुलवा भेजा। और भीड़ उसके आसपास बैठी थी, और उन्होंने उस से कहा; देख, तेरी माता और तेरे भाई बाहर तुझे ढूंढते हैं। उसने उन्हें उत्तर दिया, कि मेरी माता और मेरे भाई कौन हैं? और उन पर जो उसके आस पास बैठे थे, दृष्टि कर के कहा, देखो, मेरी माता और मेरे भाई यह हैं। क्योंकि जो कोई परमेश्वर की इच्छा पर चले, वही मेरा भाई, और बहिन और माता है” (मरकुस 3:31-35)।

किन्तु इसका यह अभिप्राय नहीं है कि मसीही शिष्य को अपनी पारिवारिक जिम्मेदारियों के प्रति उदासीन या लापरवाह होना चाहिए। परमेश्वर के वचन और प्रयोजन में परिवार ही वह इकाई है जिसमें होकर हम परमेश्वर और उसके प्रेम को समझने पाते हैं। परमेश्वर ने हमारे लिए अपने आप को परिवार के सदस्यों, जैसे कि पिता, पुत्र, पति; और अपने लोगों के साथ अपने संबंध तथा उन लोगों के परस्पर संबंधों को भी पारिवारिक संबंधों जैसे कि पुत्र और पुत्रियों, पत्नी, भाई, आदि के द्वारा व्यक्त किया है। वचन परिवार के प्रति व्यक्ति की जिम्मेदारियों को भी सिखाता है:

निर्गमन 20:12 तू अपने पिता और अपनी माता का आदर करना, जिस से जो देश तेरा परमेश्वर यहोवा तुझे देता है उस में तू बहुत दिन तक रहने पाए।

लैव्यव्यवस्था 19:3 तुम अपनी अपनी माता और अपने अपने पिता का भय मानना, और मेरे विश्राम दिनों को मानना; मैं तुम्हारा परमेश्वर यहोवा हूं।

1 तीमुथियुस 5:8 पर यदि कोई अपनों की और निज कर के अपने घराने की चिन्ता न करे, तो वह विश्वास से मुकर गया है, और अविश्वासी से भी बुरा बन गया है।

प्रभु यीशु मसीह ने इस ज़िम्मेदारी को भी क्रूस की वेदना सहते हुए निभाया, जब उन्होंने अपनी माता मरियम की ज़िम्मेदारी अपने शिष्य यूहन्ना को सौंपी: “परन्तु यीशु के क्रूस के पास उस की माता और उस की माता की बहिन मरियम, क्‍लोपास की पत्नी, और मरियम मगदलीनी खड़ी थी। यीशु ने अपनी माता और उस चेले को जिस से वह प्रेम रखता था, पास खड़े देखकर अपनी माता से कहा; हे नारी, देख, यह तेरा पुत्र है। तब उस चेले से कहा, यह तेरी माता है, और उसी समय से वह चेला, उसे अपने घर ले गया” (यूहन्ना 19:25-27)।

साथ ही हम यह भी देखते हैं कि प्रभु की मण्डली के अगुवों को सबसे पहले परिवार की उचित देखभाल करने वाला होना चाहिए, तब ही वह मण्डली की देखभाल ठीक से कर सकेंगे: 

1 तीमुथियुस 3:4-5 अपने घर का अच्छा प्रबन्‍ध करता हो, और लड़के-बालों को सारी गम्भीरता से आधीन रखता हो। जब कोई अपने घर ही का प्रबन्‍ध करना न जानता हो, तो परमेश्वर की कलीसिया की रखवाली क्योंकर करेगा?

1 तीमुथियुस 3:12 सेवक एक ही पत्नी के पति हों और लड़के बालों और अपने घरों का अच्छा प्रबन्‍ध करना जानते हों।

पारिवारिक संबंधों से बढ़कर प्रभु को प्राथमिकता देने का अर्थ परिवार की अनदेखी करना नहीं है, वरन पारिवारिक जिम्मेदारियों की आड़ लेकर, प्रभु के कार्य की अनदेखी नहीं करना है। हमने मरकुस 3:14-15 में से शिष्य के लिए प्रभु के प्रयोजनों में से दूसरे प्रयोजन में देखा था कि प्रभु के शिष्य को जब और जहाँ प्रभु भेजे, तब और वहाँ जाने के लिए तैयार रहना चाहिए। हम यह भी देख चुके हैं कि प्रभु जब भी किसी व्यक्ति को अपने किसी कार्य के लिए भेजता है, तो उससे संबंधित सारी तैयारियों को पूरा कर लेने के बाद ही ऐसा करता है। इसलिए प्रभु के शिष्य को प्रभु में इस बात के लिए भरोसा रखना चाहिए कि यदि प्रभु उसे कहीं जाने या कुछ करने के लिए कह रहा है, तो प्रभु ने उसके परिवार से संबंधित जिम्मेदारियों के बारे में भी कुछ प्रयोजन कर के रखा होगा, और उस शिष्य की अनुपस्थिति में परिवार को कोई हानि नहीं होगी। साथ ही, शिष्य द्वारा अपने परिवार को प्रभु के हाथों में सौंप कर, प्रभु के कहे के अनुसार करने के लिए जाना, इस बात का अभी सूचक है कि वह शिष्य यह मानता और निभाता है कि उसके परिवार की देखभाल भी प्रभु ही करता है, न कि वह स्वयं; जो कि उसके विश्वास की परिपक्वता का सूचक एवं चिह्न है।

जो प्रभु को महत्व देते हैं, प्रभु उनको भी बहुत महत्व और प्रतिफल देता है: “यीशु ने कहा, मैं तुम से सच कहता हूं, कि ऐसा कोई नहीं, जिसने मेरे और सुसमाचार के लिये घर या भाइयों या बहिनों या माता या पिता या लड़के-बालों या खेतों को छोड़ दिया हो। और अब इस समय सौ गुणा न पाए, घरों और भाइयों और बहिनों और माताओं और लड़के-बालों और खेतों को पर उपद्रव के साथ और परलोक में अनन्त जीवन” (मरकुस 10:29-30)। 

यदि आप मसीही विश्वासी हैं, अपने आप को प्रभु यीशु मसीह का अनुयायी कहते हैं, तो प्रभु के सच्चे शिष्य की इस दूसरी पहचान की कसौटी पर आप कहाँ खड़े हैं? प्रभु, उसकी आज्ञाकारिता, और उस का वचन आपके जीवन में क्या महत्व रखता है; क्या स्थान पाता है? क्या आपने प्रभु को अपने जीवन में प्राथमिक तथा सर्वोच्च स्थान दिया है? वह राजाओं का राजा, प्रभुओं का प्रभु, सृष्टि का रचयिता एवं स्वामी और सर्वशक्तिमान परमेश्वर है; उसको उसकी महिमा और हस्ती के उपयुक्त स्थान न देना, उसका अपमान करना है। इसलिए यदि आप प्रभु के जन हैं, तो प्रभु को अपने जीवन में उसका सही आदर और स्थान भी प्रदान करें। 

और यदि आपने प्रभु की शिष्यता को अभी तक स्वीकार नहीं किया है, तो अपने अनन्त जीवन और स्वर्गीय आशीषों को सुनिश्चित करने के लिए अभी उसके पक्ष में अपना निर्णय कर लीजिए। जहाँ प्रभु की आज्ञाकारिता है, उसके वचन की बातों का आदर और पालन है, वहाँ प्रभु की आशीष और सुरक्षा भी है। प्रभु यीशु से अपने पापों के लिए क्षमा माँगकर, स्वेच्छा से तथा सच्चे मन से अपने आप को उसकी अधीनता में समर्पित कर दीजिए - उद्धार और स्वर्गीय जीवन का यही एकमात्र मार्ग है। आपको स्वेच्छा और सच्चे मन से प्रभु यीशु मसीह से केवल एक छोटी प्रार्थना करनी है, और साथ ही अपना जीवन उसे पूर्णतः समर्पित करना है। आप यह प्रार्थना और समर्पण कुछ इस प्रकार से भी कर सकते हैं, “प्रभु यीशु मैं आपका धन्यवाद करता हूँ कि आपने मेरे पापों की क्षमा और समाधान के लिए उन पापों को अपने ऊपर लिया, उनके कारण मेरे स्थान पर क्रूस की मृत्यु सही, गाड़े गए, और मेरे उद्धार के लिए आप तीसरे दिन जी भी उठे, और आज जीवित प्रभु परमेश्वर हैं। कृपया मेरे पापों को क्षमा करें, मुझे अपनी शरण में लें, और मुझे अपना शिष्य बना लें। मैं अपना जीवन आप के हाथों में समर्पित करता हूँ।” सच्चे और समर्पित मन से की गई आपकी एक प्रार्थना आपके वर्तमान तथा भविष्य को, इस लोक के और परलोक के जीवन को, अनन्तकाल के लिए स्वर्गीय एवं आशीषित बना देगी।

 

एक साल में बाइबल पढ़ें:

  • यिर्मयाह 9-11
  • 1 तिमुथियुस 6

सोमवार, 22 जून 2020

लक्ष्य


     मैं उस दिन को कभी नहीं भूलूँगा जब मुझे एक भोज के समय बिली ग्राहम के साथ बैठने का सौभाग्य मिला। मैं अपने आप को सम्मानित तो अनुभव कर रहा था, किन्तु घबरा भी रहा था कि मैं उन से क्या कहूँ? मुझे लगा कि बात-चीत आरम्भ करने के लिए उनसे यह पूछना अच्छा रहेगा कि इतने वर्षों की सेवकाई में उन्हें सबसे अच्छी बात क्या लगती थी। और यह पूछने के साथ ही, मैं घबरा कर खुद ही उन्हें संभावित उत्तर भी सुझाने लगा। क्या वह राष्ट्रपतियों, राजाओं, रानियों को जानना था? या सारे संसार में लाखों लोगों को सुसमाचार प्रचार करना था?

     इससे पहले कि मैं कोई और उत्तर सुझाता, बिली ग्राहम ने मुझे रोका और बिना किसी भी हिचकिचाहट के कहा, “मुझे सबसे अच्छा प्रभु यीशु के साथ संगति रखना लगता है। उसकी उपस्थिति का एहसास रखना, उसकी बुद्धिमानी से सीखना, उसके द्वारा मेरा मार्गदर्शन और निर्देशन किया जाना – यही मेरे लिए सबसे अधिक आनन्द का विषय रहा है।” उनकी बात सुनते ही तुरंत ही मुझे अपनी दुर्बलता का बोध भी हुआ और मेरे सामने एक चुनौती भी आई। दुर्बलता का बोध इसलिए क्योंकि इस प्रश्न के लिए संभवतः यह मेरा उत्तर नहीं होता; और चुनौती इसलिए क्योंकि मैं अब चाहता था कि यह मेरा भी उत्तर हो।

     परमेश्वर के वचन बाइबल में पौलुस के मन भी यही बात थी जब उसने प्रभु यीशु मसीह को जाननें की बहुमूल्यता के साथ अपनी सांसारिक उपलब्धियों की तुलना की और अपनी उपलब्धियों को व्यर्थ पाया। ज़रा सोचिए, हमारे जीवन कितने उत्तम और उपयोगी होंगे यदि प्रभु यीशु की संगति में रहना और उसके मार्गदर्शन में होकर कार्य करना हमारे जीवनों का सर्वोच्च लक्ष्य बन जाए। - जो स्टोवैल

 

परमेश्वर ने आपको जहाँ पर रखा है वहाँ पर विश्वासयोग्य रहने के लिए, 

प्रभु यीशु को अपने जीवन में प्रथम स्थान दें।


यहोवा यों कहता है, बुद्धिमान अपनी बुद्धि पर घमण्ड न करे, न वीर अपनी वीरता पर, न धनी अपने धन पर घमण्ड करे; परन्तु जो घमण्ड करे वह इसी बात पर घमण्ड करे, कि वह मुझे जानता और समझता है, कि मैं ही वह यहोवा हूँ, जो पृथ्वी पर करुणा, न्याय और धर्म के काम करता है; क्योंकि मैं इन्हीं बातों से प्रसन्न रहता हूँ। - यिर्मयाह 9:23-24

बाइबल पाठ: फिलिप्पियों 3:7-14

फिलिप्पियों 3:7 परन्तु जो जो बातें मेरे लाभ की थीं, उन्‍हीं को मैं ने मसीह के कारण हानि समझ लिया है।

फिलिप्पियों 3:8 वरन मैं अपने प्रभु मसीह यीशु की पहिचान की उत्तमता के कारण सब बातों को हानि समझता हूं: जिस के कारण मैं ने सब वस्‍तुओं की हानि उठाई, और उन्हें कूड़ा समझता हूं, जिस से मैं मसीह को प्राप्त करूं।

फिलिप्पियों 3:9 और उस में पाया जाऊं; न कि अपनी उस धामिर्कता के साथ, जो व्यवस्था से है, वरन उस धामिर्कता के साथ जो मसीह पर विश्वास करने के कारण है, और परमेश्वर की ओर से विश्वास करने पर मिलती है।

फिलिप्पियों 3:10 और मैं उसको और उसके मृत्युंजय की सामर्थ्य को, और उसके साथ दुखों में सहभागी हाने के मर्म को जानूँ, और उस की मृत्यु की समानता को प्राप्त करूं।

फिलिप्पियों 3:11 ताकि मैं किसी भी रीति से मरे हुओं में से जी उठने के पद तक पहुंचूं।

फिलिप्पियों 3:12 यह मतलब नहीं, कि मैं पा चुका हूं, या सिद्ध हो चुका हूं: पर उस पदार्थ को पकड़ने के लिये दौड़ा चला जाता हूं, जिस के लिये मसीह यीशु ने मुझे पकड़ा था।

फिलिप्पियों 3:13 हे भाइयों, मेरी भावना यह नहीं कि मैं पकड़ चुका हूं: परन्तु केवल यह एक काम करता हूं, कि जो बातें पीछे रह गई हैं उन को भूल कर, आगे की बातों की ओर बढ़ता हुआ।

फिलिप्पियों 3:14 निशाने की ओर दौड़ा चला जाता हूं, ताकि वह इनाम पाऊं, जिस के लिये परमेश्वर ने मुझे मसीह यीशु में ऊपर बुलाया है।    

 

एक साल में बाइबल: 

  • एस्तेर 6-8
  • प्रेरितों 6


बुधवार, 11 मार्च 2020

सर्वोच्च प्रशंसा



      खेलों से प्रेम करने वाले लोग अपनी पसंदीदा टीम या खिलाड़ियों की प्रशंसा करने के लिए बहुत कुछ करते हैं – वे उस टीम के प्रतीक चिन्ह वाले कपड़े पहनते हैं, अपनी पसंदीदा टीम और उसकी उपलब्धियों तथा उसके खिलाड़ियों के विषय सोशल मीडिया पर अपने विचार व्यक्त करते हैं, उनकी बड़ाई करते हैं, और वे यह स्पष्ट कर देते है कि उनकी निष्ठा किस के प्रति है। मेरे पास भी मेरी पसंदीदा टीम के टोपियाँ, टी-शर्ट्स, और मेरे द्वारा उनकी प्रशंसा में लिखी गई टिप्पणियाँ हैं। खेल और खिलाड़ियों के प्रति हमारी निष्ठा हमें इस बात की भी याद दिलाती है कि हमारी सबसे उच्च तथा सच्ची निष्ठा हमारे प्रभु परमेश्वर के प्रति होनी चाहिए।

      जब मैं परमेश्वर के वचन बाइबल को पढ़ता हूँ, तो दाऊद द्वारा लिखित भजन 34 एक ऐसी ही निःसंकोच निष्ठा का भजन है, जहाँ दाऊद हमारा ध्यान उस की और खींचता है जो संसार की किसी भी अन्य चीज़ से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है। दाऊद कहता है, “मैं हर समय यहोवा को धन्य कहा करूंगा” (पद 1), जो हमारा ध्यान हमारे जीवन की उन कमियों की ओर ले जाता है जो हमारे जीवनों में परमेश्वर के सत्य, ज्योति, और उद्धार का स्त्रोत न होने के कारण आ जाती हैं। जब दाऊद कहता है, “उसकी स्तुति निरन्तर मेरे मुख से होती रहेगी” (पद 1), तो हमारा ध्यान इस पर जाता है कि हम कितनी बार संसार और संसार के लोगों, संसार की बातों की प्रशंसा करते हैं, और कितनी बार हमारे मुख से हमारे प्रति परमेश्वर के प्रेम, उसके कार्यों, उसकी देखभाल और उसके प्रावधानों की प्रशंसा होती है। जब दाऊद कहता है, “मैं यहोवा पर घमण्ड करूंगा”(पद 2), तो हमें एहसास होता है कि हम अपनी छोटी-छोटी सफलताओं और उपलब्धियों पर तो बहुत घमण्ड करते हैं, परन्तु प्रभु यीशु से मिले उद्धार और परमेश्वर की संतान होने के दर्जे को लेकर हम कितना घमण्ड करते हैं?

      हमारा अपनी पसंदीदा खेल की टीमों में, अपनी रुचियों में, और अपनी उपलब्धियों में आनन्द लेना गलत नहीं है। परन्तु हमारी सर्वोच्च प्रशंसा और निष्ठा हमारे प्रभु परमेश्वर के लिए होनी चाहिए। - डेव ब्रैनन

सच्चे प्रेम की कसौटी सच्ची निष्ठा है।

हे देश देश के लोगो, हमारे परमेश्वर को धन्य कहो, और उसकी स्तुति में राग उठाओ – भजन 66:8

बाइबल पाठ: भजन 34:1-7
Psalms 34:1 मैं हर समय यहोवा को धन्य कहा करूंगा; उसकी स्तुति निरन्तर मेरे मुख से होती रहेगी।
Psalms 34:2 मैं यहोवा पर घमण्ड करूंगा; नम्र लोग यह सुनकर आनन्दित होंगे।
Psalms 34:3 मेरे साथ यहोवा की बड़ाई करो, और आओ हम मिलकर उसके नाम की स्तुति करें।
Psalms 34:4 मैं यहोवा के पास गया, तब उसने मेरी सुन ली, और मुझे पूरी रीति से निर्भय किया।
Psalms 34:5 जिन्होंने उसकी ओर दृष्टि की उन्होंने ज्योति पाई; और उनका मुंह कभी काला न होने पाया।
Psalms 34:6 इस दीन जन ने पुकारा तब यहोवा ने सुन लिया, और उसको उसके सब कष्टों से छुड़ा लिया।
Psalms 34:7 यहोवा के डरवैयों के चारों ओर उसका दूत छावनी किए हुए उन को बचाता है।

एक साल में बाइबल: 
  • व्यवस्थाविवरण 14-16
  • मरकुस 12:28-44



शनिवार, 10 फ़रवरी 2018

सर्वप्रथम


   मेरे मित्र के बेटे ने एक दिन अपने स्कूल की पोषाक के ऊपर एक स्पोर्ट्स कमीज़ पहन ली। वह अपनी मनपसंद टीम के लिए, जो उस संध्या एक महत्वपूर्ण खेल खेलने जा रही थी, अपना समर्थन दिखाना चाह रहा था। घर से बाहर निकलने से पहले उस स्पोर्ट्स कमीज़ के ऊपर उसने कुछ और डाल लिया – एक चेन जिसमें लगी लटकन पर लिखा था ‘यीशु’। उसके इस साधारण से कार्य ने एक महत्वपूर्ण और गहरे सत्य को प्रकट किया: हमारे जीवन की प्रत्येक बात में, प्रभु यीशु ही सर्वप्रथम, सर्वोच्च स्थान के हकदार हैं।

   परमेश्वर का वचन बाइबल हमें बताती है कि प्रभु यीशु ही “सब वस्‍तुओं में प्रथम है” (कुलुस्सियों 1:17)। प्रभु यीशु समस्त सृष्टि में सर्वोच्च हैं (पद 15-16); और “वही देह, अर्थात कलीसिया का सिर हैं” (पद 18)। इस बात के कारण उन्हें सब बातों में पहला स्थान मिलना चाहिए।

   जब अपने जीवन की प्रत्येक बात में हम प्रभु यीशु को आदर का सर्वोच्च स्थान देते हैं, तो उसका सत्य हमारे आस-पास के लोगों पर प्रकट हो जाता है। हमें विचार करना चाहिए कि, अपने कार्यस्थल में क्या हम सर्वप्रथम परमेश्वर के लिए कार्य कर रहे हैं या केवल अपने अधिकारी को प्रसन्न करने के लिए? (3:23); औरों के साथ हमारे व्यवहार में हम परमेश्वर के मानकों को कैसे प्रकट करते हैं? (12-14)। क्या अपने जीवन-यापन, अपनी दिनचर्या, अपनी मनपसंद गतिविधियों में हम उसे सर्वप्रथम स्थान देते हैं?

   जब हमारे जीवनों पर प्रभाव डालने वाले सबसे महत्वपूर्ण प्रभु यीशु होंगे, तो हमारे ह्रदयों में उनका सही स्थान – सर्वप्रथम, भी हो जाएगा। - जेनिफर बेन्सन शुल्ट


प्रभु यीशु को अपने जीवन की हर बात में सर्वप्रथम रखिए।

प्रभु परमेश्वर वह जो है, और जो था, और जो आने वाला है; जो सर्वशक्तिमान है: यह कहता है, कि मैं ही अल्फा और ओमेगा हूं। - प्रकाशितवाक्य 1:8

बाइबल पाठ: कुलुस्सियों 1:12-20
Colossians 1:12 और पिता का धन्यवाद करते रहो, जिसने हमें इस योग्य बनाया कि ज्योति में पवित्र लोगों के साथ मीरास में समभागी हों।
Colossians 1:13 उसी ने हमें अन्धकार के वश से छुड़ाकर अपने प्रिय पुत्र के राज्य में प्रवेश कराया।
Colossians 1:14 जिस में हमें छुटकारा अर्थात पापों की क्षमा प्राप्त होती है।
Colossians 1:15 वह तो अदृश्य परमेश्वर का प्रतिरूप और सारी सृष्‍टि में पहिलौठा है।
Colossians 1:16 क्योंकि उसी में सारी वस्‍तुओं की सृष्‍टि हुई, स्वर्ग की हो अथवा पृथ्वी की, देखी या अनदेखी, क्या सिंहासन, क्या प्रभुताएं, क्या प्रधानताएं, क्या अधिकार, सारी वस्तुएं उसी के द्वारा और उसी के लिये सृजी गई हैं।
Colossians 1:17 और वही सब वस्तुओं में प्रथम है, और सब वस्तुएं उसी में स्थिर रहती हैं।
Colossians 1:18 और वही देह, अर्थात कलीसिया का सिर है; वही आदि है और मरे हुओं में से जी उठने वालों में पहिलौठा कि सब बातों में वही प्रधान ठहरे।
Colossians 1:19 क्योंकि पिता की प्रसन्नता इसी में है कि उस में सारी परिपूर्णता वास करे।
Colossians 1:20 और उसके क्रूस पर बहे हुए लोहू के द्वारा मेल मिलाप कर के, सब वस्‍तुओं का उसी के द्वारा से अपने साथ मेल कर ले चाहे वे पृथ्वी पर की हों, चाहे स्वर्ग में की।


एक साल में बाइबल: 
  • लैव्यवस्था 8-10
  • मत्ती 25:31-46