ई-मेल संपर्क / E-Mail Contact

इन संदेशों को ई-मेल से प्राप्त करने के लिए अपना ई-मेल पता इस ई-मेल पर भेजें : rozkiroti@gmail.com / To Receive these messages by e-mail, please send your e-mail id to: rozkiroti@gmail.com

परिस्थितियां लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
परिस्थितियां लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

बुधवार, 7 फ़रवरी 2018

शान्ति


   क्लीवलैंड ब्राउन फुटबॉल कल्ब का आजीवन समर्थक होने के कारण मैं निराशाओं से होकर निकलना जानता हूँ। मेरी यह टीम, प्रतिस्पर्धाओं में इस खेल के सर्वोच्च स्तर की चैम्पियनशिप पर कभी न पहुंच पाने वाली चार टीमों में से एक है। परन्तु फिर भी इस टीम के अपने वफादार समर्थक हैं जो वर्ष-प्रतिवर्ष इसके साथ बने रहते हैं। परन्तु क्योंकि इन समर्थकों को अकसर निराशा ही का सामना करना पड़ता है, इसलिए इस टीम के गृह-स्टेडियम को “उदासी का कारखाना” कहा जाता है।

   पाप और निराशाओं से टूटा हुआ यह सँसार भी “उदासी का कारखाना” हो सकता है। यहाँ दिल दुखाने या निराश करने वाली बातों की उपलब्धता का कोई अन्त नहीं है। ये बातें चाहे हमारे अपने चुनावों के कारण हों या हमारे नियंत्रण से बाहर की बातों के कारण।

   परन्तु प्रभु यीशु मसीह के शिष्यों के पास एक अद्भुत आशा है, जो न केवल आने वाले जीवन के लिए है वरन आज के दिन के लिए भी है। परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रभु यीशु ने अपने अनुयायियों से कहा, “मैं ने ये बातें तुम से इसलिये कही हैं, कि तुम्हें मुझ में शान्‍ति मिले; संसार में तुम्हें क्‍लेश होता है, परन्तु ढाढ़स बांधो, मैं ने संसार को जीत लिया है” (यूहन्ना 16:33)। प्रभु यीशु मसीह द्वारा कहे गए इस कथन में ध्यान कीजिए कि उन्होंने किसी के भी द्वारा अनुभव हो सकने वाले संघर्षों या दुखों में किसी प्रकार की कोई भी कमी के किए जाने का आश्वासन दिए बिना, उन विपरीत और दुखदायी परिस्थितियों का प्रतिरोध, प्रभु से मिलने वाली शान्ति, आनन्द, और अंतिम विजय की प्रतिज्ञाओं से किया है।

   प्रभु यीशु में महान शान्ति उपलब्ध है; इतनी कि सँसार और जीवन से मिलने वाली कितनी भी, किसी भी विचलित या दुखदायी परिस्थिति में से होकर हम सुरक्षित और विजयी निकल सकें। - बिला क्राऊडर


हमारी आशा और शान्ति प्रभु यीशु मसीह में होकर हमें मिलती है।

और वह उन की आंखों से सब आंसू पोंछ डालेगा; और इस के बाद मृत्यु न रहेगी, और न शोक, न विलाप, न पीड़ा रहेगी; पहिली बातें जाती रहीं। - प्रकाशितवाक्य 21:4

बाइबल पाठ: यूहन्ना 16:28-33
John 16:28 मैं पिता से निकलकर जगत में आया हूं, फिर जगत को छोड़कर पिता के पास जाता हूं।
John 16:29 उसके चेलों ने कहा, देख, अब तो तू खोल कर कहता है, और कोई दृष्‍टान्‍त नहीं कहता।
John 16:30 अब हम जान गए, कि तू सब कुछ जानता है, और तुझे प्रयोजन नहीं, कि कोई तुझ से पूछे, इस से हम प्रतीति करते हैं, कि तू परमेश्वर से निकला है।
John 16:31 यह सुन यीशु ने उन से कहा, क्या तुम अब प्रतीति करते हो?
John 16:32 देखो, वह घड़ी आती है वरन आ पहुंची कि तुम सब तित्तर बित्तर हो कर अपना अपना मार्ग लोगे, और मुझे अकेला छोड़ दोगे, तौभी मैं अकेला नहीं क्योंकि पिता मेरे साथ है।
John 16:33 मैं ने ये बातें तुम से इसलिये कही हैं, कि तुम्हें मुझ में शान्‍ति मिले; संसार में तुम्हें क्‍लेश होता है, परन्तु ढाढ़स बांधो, मैं ने संसार को जीत लिया है।


एक साल में बाइबल: 
  • लैव्यवस्था 1-3
  • मत्ती 24:1-28



मंगलवार, 14 नवंबर 2017

सामर्थी


   वह खतरे का पूर्वाभास लिए हुए दूर से आने वाली ध्वनि के साथ आरंभ हुआ, और शीघ्र ही बढ़कर धरती कंपा देने वाले अनिष्ट-सूचक कोलाहाल में परिवर्तित हो गया। शीघ्र ही शत्रु के सैकड़ों युद्ध टैंक और हज़ारों सैनिक फ़िनलैंड के  उन थोड़े से सैनिकों को दिखाई देने लगे। सामने खड़ी मौत को देखकर फ़िनलैंड के एक सैनिक ने अपने साथियों का हौंसला बढ़ाने के उद्देश्य से कहा, "अब इतने लोगों को दफन करने के लिए स्थान कहाँ से लाएंगे?"

   फ़िनलैंड के उन सैनिकों द्वारा दूसरे विश्वयुद्ध में ऐसी दिलेरी दिखाने से लगभग 2600 वर्ष पूर्व, यहूदी नागरिकों ने अपने ऊपर आई ऐसी ही अभिभूत कर देने वाली परिस्थिति के प्रति इससे भिन्न प्रतिक्रिया दी। परमेश्वर का वचन बाइबल बताती है कि अश्शूर की सेना ने यरुशलेम की घेराबन्दी करके यरुशलेम के निवासियों को शहर की दीवारों के अन्दर फंसा लिया था, जहाँ भुखमरी फैलने लगी थी और उसके कारण मौत लोगों के समक्ष मंडरा रही थी। राजा हिज़किय्याह घबरा गया। परन्तु फिर उसने परमेश्वर से प्रार्थना की: "हे सेनाओं के यहोवा, हे करूबों पर विराजमान इस्राएल के परमेश्वर, पृथ्वी के सब राज्यों के ऊपर केवल तू ही परमेश्वर है; आकाश और पृथ्वी को तू ही ने बनाया है" (यशायाह 37:16)।

   प्रत्युत्तर में परमेश्वर ने अपने भविष्यद्वक्ता यशायाह के द्वारा अश्शूर के राजा सन्हेरीब के विरुद्ध कठोर शब्दों में कहा, "तू ने किस की नामधराई और निन्दा की है? और तू जो बड़ा बोल बोला और घमण्ड किया है, वह किस के विरुद्ध किया है? इस्राएल के पवित्र के विरुद्ध!" (पद 23); और यरुशलेम के लोगों को सांत्वना दी, "क्योंकि मैं अपने निमित्त और अपने दास दाऊद के निमित्त, इस नगर की रक्षा कर के उसे बचाऊंगा" (पद 35)। फिर परमेश्वर ने सन्हेरीब को पराजित और अश्शूर की सेना को नाश कर दिया (पद 36-38)।

   आज आपके सामने चाहे जो भी खतरा मंडरा रहा हो, स्मरण रखें कि हिज़किय्याह और यशायाह का परमेश्वर अभी भी राज्य कर रहा है, सभी परिस्थितियां उसके वश में हैं। वह हमारी आवाज़ को सुनना चाहता है जिससे कि अपने आप को हमारे पक्ष में सामर्थी दिखा सके। - टिम गुस्टफसन


परमेश्वर हमारी सबसे बड़ी समस्या से भी कहीं अधिक बड़ा है।

और यह समस्त मण्डली जान लेगी की यहोवा तलवार वा भाले के द्वारा जयवन्त नहीं करता, इसलिये कि संग्राम तो यहोवा का है, और वही तुम्हें हमारे हाथ में कर देगा। - 1 शमूएल 17:47

बाइबल पाठ: यशायाह 37:18-23; 31-38
Isaiah 37:18 हे यहोवा, सच तो है कि अश्शूर के राजाओं ने सब जातियों के देशों को उजाड़ा है 
Isaiah 37:19 और उनके देवताओं को आग में झोंका है; क्योंकि वे ईश्वर न थे, वे केवल मनुष्यों की कारीगरी, काठ और पत्थर ही थे; इस कारण वे उन को नाश कर सके। 
Isaiah 37:20 अब हे हमारे परमेश्वर यहोवा, तू हमें उसके हाथ से बचा जिस से पृथ्वी के राज्य राज्य के लोग जान लें कि केवल तू ही यहोवा है।
Isaiah 37:21 तब आमोस के पुत्र यशायाह ने हिजकिय्याह के पास यह कहला भेजा, इस्राएल का परमेश्वर यहोवा यों कहता है, तू ने जो अश्शूर के राजा सन्हेरीब के विषय में मुझ से प्रार्थना की है, 
Isaiah 37:22 उसके विषय यहोवा ने यह वचन कहा है, सिय्योन की कुमारी कन्या तुझे तुच्छ जानती है और ठट्ठों में उड़ाती है; यरूशलेम की पुत्री तुझ पर सिर हिलाती है।
Isaiah 37:23 तू ने किस की नामधराई और निन्दा की है? और तू जो बड़ा बोल बोला और घमण्ड किया है, वह किस के विरुद्ध किया है? इस्राएल के पवित्र के विरुद्ध! 
Isaiah 37:31 और यहूदा के घराने के बचे हुए लोग फिर जड़ पकड़ेंगे और फूलें-फलेंगे; 
Isaiah 37:32 क्योंकि यरूशलेम से बचे हुए और सिय्योन पर्वत से भागे हुए लोग निकलेंगे। सेनाओं का यहोवा अपनी जलन के कारण यह काम करेगा।
Isaiah 37:33 इसलिये यहोवा अश्शूर के राजा के विषय यों कहता है कि वह इस नगर में प्रवेश करने, वरन इस पर एक तीर भी मारने न पाएगा; और न वह ढाल ले कर इसके साम्हने आने वा इसके विरुद्ध दमदमा बान्धने पाएगा। 
Isaiah 37:34 जिस मार्ग से वह आया है उसी से वह लौट भी जाएगा और इस नगर में प्रवेश न करने पाएगा, यहोवा की यही वाणी है। 
Isaiah 37:35 क्योंकि मैं अपने निमित्त और अपने दास दाऊद के निमित्त, इस नगर की रक्षा कर के उसे बचाऊंगा।
Isaiah 37:36 तब यहोवा के दूत ने निकलकर अश्शूरियों की छावनी में एक लाख पचासी हजार पुरूषों को मारा; और भोर को जब लोग सवेरे उठे तब क्या देखा कि लोथ ही लोथ पड़ी हैं। 
Isaiah 37:37 तब अश्शूर का राजा सन्हेरीब चल दिया और लौटकर नीनवे में रहने लगा। 
Isaiah 37:38 वहां वह अपने देवता निस्रोक के मन्दिर में दण्डवत कर रहा था कि इतने में उसके पुत्र अद्रम्मेलेक और शरेसेन ने उसको तलवार से मारा और अरारात देश में भाग गए। और उसका पुत्र एसर्हद्दोन उसके स्थान पर राज्य करने लगा।

एक साल में बाइबल: 
  • विलापगीत 3-5
  • इब्रानियों 10:19-39


बुधवार, 9 दिसंबर 2015

परिस्थितियाँ


   परमेश्वर के भविष्यद्वक्ता योना और उसका परमेश्वर के निर्देशों का पालन ना करने की कहानी हमें सिखाती है कि कैसे परमेश्वर परिस्थितियों को, चाहे वे भली हों या बुरी, हमें जागरूक करने और हमें भला बनाने के लिए प्रयोग करता है। परमेश्वर के वचन बाइबल में योना की पुस्तक में हम देखते हैं कि परमेश्वर ने पाँच बार योना के लिए कुछ परिस्थितियाँ तैयार करीं, कुछ भली तो कुछ कष्टप्रद।

   हम योना 1:4 में पढ़ते हैं कि परमेश्वर ने उसकी आज्ञाकारिता से बचकर भाग रहे योना को लौटा लाने के लिए तूफान को भेजा, "तब यहोवा ने समुद्र में एक प्रचण्ड आंधी चलाई, और समुद्र में बड़ी आंधी उठी, यहां तक कि जहाज टूटने पर था" (योना 1:4)। जब उस जलपोत के नाविकों ने जाना कि उनके तूफान में फंसने का कारण योना ही है, तो योना के कहने पर उन्होंने उसे समुद्र में फेंक दिया (योना 1:15), जहाँ परमेश्वर ने पहले से उसके लिए एक बड़ा मच्छ ठहरा रखा था जिसने उसे निगल कर डूबने से बचा लिया (योना 1:17)। आगे चलकर हम पाते हैं कि परमेश्वर ने योना को कड़ी धूप से छाया देने के लिए एक पेड़ को उगाया (योना 4:6), और फिर परमेश्वर ने योना को समझाने के लिए पहले एक कीड़े को भेजा जिसने उस पेड़ को नाश करके योना पर से उसकी छाया को हटा दिया, फिर तेज़ लू और धूप को भेजा (योना 4:7-9)। इन सब परिस्थितियों के द्वारा परमेश्वर ने योना पर उसके बलवई तथा दयाविहीन मन को उजागर किया, योना को तैयार किया कि परमेश्वर उससे बात कर सके और उसे समझा सके।

   अपने जीवनों में जब हम भिन्न परिस्थितियों का सामना करते हैं तो हमें स्मरण रखना चाहिए कि चाहे आशीष हो या परेशानी, परमेश्वर की पूर्ण प्रभुता प्रत्येक बात और परिस्थिति पर रहती है। परमेश्वर हर परिस्थिति के द्वारा हमारे चरित्र का निर्माण करता रहता है (याकूब 1:1-5)। वह भली और कष्टप्रद, दोनों ही बातों को हमें सुधारने और हमारा मार्गदर्शन करने के लिए प्रयोग करता है। - डेनिस फिशर


परमेश्वर देता भी है और ले भी लेता है; हर बात से उसकी महिमा हो, उसका नाम धन्य हो।

हे मेरे भाइयों, जब तुम नाना प्रकार की परीक्षाओं में पड़ो तो इसको पूरे आनन्द की बात समझो, यह जान कर, कि तुम्हारे विश्वास के परखे जाने से धीरज उत्पन्न होता है। - याकूब 1:2-3

बाइबल पाठ: योना4:1-11
Jonah 4:1 यह बात योना को बहुत ही बुरी लगी, और उसका क्रोध भड़का। 
Jonah 4:2 और उसने यहोवा से यह कह कर प्रार्थना की, हे यहोवा जब मैं अपने देश में था, तब क्या मैं यही बात न कहता था? इसी कारण मैं ने तेरी आज्ञा सुनते ही तर्शीश को भाग जाने के लिये फुर्ती की; क्योंकि मैं जानता था कि तू अनुग्रहकारी और दयालु परमेश्वर है, विलंब से कोप करने वाला करूणानिधान है, और दु:ख देने से प्रसन्न नहीं होता। 
Jonah 4:3 सो अब हे यहोवा, मेरा प्राण ले ले; क्योंकि मेरे लिये जीवित रहने से मरना ही भला है। 
Jonah 4:4 यहोवा ने कहा, तेरा जो क्रोध भड़का है, क्या वह उचित है? 
Jonah 4:5 इस पर योना उस नगर से निकल कर, उसकी पूरब ओर बैठ गया; और वहां एक छप्पर बना कर उसकी छाया में बैठा हुआ यह देखने लगा कि नगर को क्या होगा? 
Jonah 4:6 तब यहोवा परमेश्वर ने एक रेंड़ का पेड़ लगा कर ऐसा बढ़ाया कि योना के सिर पर छाया हो, जिस से उसका दु:ख दूर हो। योना उस रेंड़ के पेड़ के कारण बहुत ही आनन्दित हुआ। 
Jonah 4:7 बिहान को जब पौ फटने लगी, तब परमेश्वर ने एक कीड़े को भेजा, जिसने रेंड़ का पेड़ ऐसा काटा कि वह सूख गया। 
Jonah 4:8 जब सूर्य उगा, तब परमेश्वर ने पुरवाई बहा कर लू चलाई, और घाम योना के सिर पर ऐसा लगा कि वह मूर्च्छा खाने लगा; और उसने यह कह कर मृत्यु मांगी, मेरे लिये जीवित रहने से मरना ही अच्छा है। 
Jonah 4:9 परमेश्वर ने योना से कहा, तेरा क्रोध, जो रेंड़ के पेड़ के कारण भड़का है, क्या वह उचित है? उसने कहा, हां, मेरा जो क्रोध भड़का है वह अच्छा ही है, वरन क्रोध के मारे मरना भी अच्छा होता। 
Jonah 4:10 तब यहोवा ने कहा, जिस रेंड़ के पेड़ के लिये तू ने कुछ परिश्रम नहीं किया, न उसको बढ़ाया, जो एक ही रात में हुआ, और एक ही रात में नाश भी हुआ; उस पर तू ने तरस खाया है। 
Jonah 4:11 फिर यह बड़ा नगर नीनवे, जिस में एक लाख बीस हजार से अधिक मनुष्य हैं, जो अपने दाहिने बाएं हाथों का भेद नहीं पहिचानते, और बहुत घरेलू पशु भी उस में रहते हैं, तो क्या मैं उस पर तरस न खाऊं?

एक साल में बाइबल: 
  • दानिय्येल 11-12
  • यहूदा