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मंगलवार, 16 अप्रैल 2013

पीड़ा और प्राप्ति


   एक फुटबॉल टीम के खिलाड़ीयों का मनोबल बढ़ाने के लिए प्रशिक्षण शिविर में प्रशिक्षकों ने प्रोत्साहित करने वाला एक वाक्य लिखी हुई टी-शर्ट्स पहन कर रखीं; वह वाक्य था: "तुम्हें प्रतिदिन चुनाव करना होगा -  आज के अनुशासन का कष्ट अथवा बाद में खेद की पीड़ा।" अनुशासन कठोर होता है, और अकसर हम उससे बचने के प्रयास करते हैं। लेकिन जीवन हो या खेल-कूद, कुछ पाने के लिए आज अनुशासन का थोड़ा सा कष्ट कल की बड़ी उपल्बधि का कारण होता है। यदि कष्ट उठाने को तैयार नहीं हैं तो कुछ प्राप्त करना भी असंभव होगा। युद्ध के मैदान में तैयारी और प्रशिक्षण का समय नहीं होता, यह तैयारी तो पहले से ही कर के रखनी होती है और अनुशासित जीवन ही चुनौतियों का सामना करने और उन पर विजयी होने में सक्षम होते हैं। या तो आप जीवन की चुनौतियों के लिए अपने आप को तैयार करे रखते हैं या फिर आपका जीवन "यदि केवल", "अगर", "काश कि मैंने" जैसे शब्दों तथा हार और खेद की पीड़ा से भरा होगा।

   किसी ने खेद की परिभाषा में कहा है कि "यह करे गए पिछले कार्यों और व्यवहार के प्रति सूझबूझपूर्ण एवं भावनात्मक नापसन्दगी है।" पीछे मुड़कर अपने गलत निर्णयों और कार्यों को देखना और उनके कारण मिली हार तथा निराशा के बोझ को उठाए रहना पीड़ादायक ही नहीं शिक्षाप्रद भी होता है। एक मसीही विश्वासी को उसका परमेश्वर पिता कभी नहीं छोड़ता; उस पीड़ा की अग्नि से परमेश्वर अपने विश्वासी जन के अन्दर की व्यर्थ बातों को भस्म करता है और उसे निर्मल करता है। यही स्थिति भजनकार की भी थी। अपने पाप और उसके कारण मिले पीड़ादायक अनुभवों के आधार पर उसने लिखा: "दुष्ट को तो बहुत पीड़ा होगी; परन्तु जो यहोवा पर भरोसा रखता है वह करुणा से घिरा रहेगा" (भजन 32:10)। ना केवल भजनकार ने अपनी गलती को पहचाना वरन उस पीड़ा में भी उसने परमेश्वर की उपस्थिति और सहायता को अनुभव किया।

   हर परिस्थिति में परमेश्वर पर भरोसा और समर्पण; उसके सामने अपने पापों का इनकार नहीं वरन अंगीकर और क्षमा याचना एक ऐसा जीवन प्रदान करते हैं जो खेद की पीड़ा से नहीं लेकिन परमेश्वर की आशीष से भरा होता है। यही हमारा प्रतिदिन का चुनाव है मसीही जीवन के अनुशासन का कष्ट या फिर खेद की पीड़ा। - बिल क्राउडर


वर्तमान के चुनाव भविष्य की आशीषें निर्धारित करते हैं।

जब मैं ने अपना पाप तुझ पर प्रगट किया और अपना अधर्म न छिपाया, और कहा, मैं यहोवा के साम्हने अपने अपराधों को मान लूंगा; तब तू ने मेरे अधर्म और पाप को क्षमा कर दिया। - भजन 32:5 

बाइबल पाठ: भजन 32
Psalms 32:1 क्या ही धन्य है वह जिसका अपराध क्षमा किया गया, और जिसका पाप ढ़ाँपा गया हो।
Psalms 32:2 क्या ही धन्य है वह मनुष्य जिसके अधर्म का यहोवा लेखा न ले, और जिसकी आत्मा में कपट न हो।
Psalms 32:3 जब मैं चुप रहा तब दिन भर कराहते कराहते मेरी हडि्डयां पिघल गईं।
Psalms 32:4 क्योंकि रात दिन मैं तेरे हाथ के नीचे दबा रहा; और मेरी तरावट धूप काल की सी झुर्राहट बनती गई।
Psalms 32:5 जब मैं ने अपना पाप तुझ पर प्रगट किया और अपना अधर्म न छिपाया, और कहा, मैं यहोवा के साम्हने अपने अपराधों को मान लूंगा; तब तू ने मेरे अधर्म और पाप को क्षमा कर दिया।
Psalms 32:6 इस कारण हर एक भक्त तुझ से ऐसे समय में प्रार्थना करे जब कि तू मिल सकता है। निश्चय जब जल की बड़ी बाढ़ आए तौभी उस भक्त के पास न पहुंचेगी।
Psalms 32:7 तू मेरे छिपने का स्थान है; तू संकट से मेरी रक्षा करेगा; तू मुझे चारों ओर से छुटकारे के गीतों से घेर लेगा।
Psalms 32:8 मैं तुझे बुद्धि दूंगा, और जिस मार्ग में तुझे चलना होगा उस में तेरी अगुवाई करूंगा; मैं तुझ पर कृपा दृष्टि रखूंगा और सम्मत्ति दिया करूंगा।
Psalms 32:9 तुम घोड़े और खच्चर के समान न बनो जो समझ नहीं रखते, उनकी उमंग लगाम और बाग से रोकनी पड़ती है, नहीं तो वे तेरे वश में नहीं आने के।
Psalms 32:10 दुष्ट को तो बहुत पीड़ा होगी; परन्तु जो यहोवा पर भरोसा रखता है वह करुणा से घिरा रहेगा।
Psalms 32:11 हे धर्मियों यहोवा के कारण आनन्दित और मगन हो, और हे सब सीधे मन वालों आनन्द से जयजयकार करो!

एक साल में बाइबल: 
  • 1 शमूएल 30-31 
  • लूका 13:23-35

सोमवार, 21 नवंबर 2011

असफलता की रचना

   मेंढक की शारीरिक संरचना ऐसी है कि वह अपने वातावरण के तापमान जैसे ही अपने शरीर के तापमान को करता रहता है। यदि धीरे-धीरे गर्म होते पानी में मेंढक को रखा जाए तो वह इस बात से अनभिज्ञ कि वह बढ़ते तापमान से मरने वाला है, अपने शरीर के तापमान को बढ़ाता रहता है और इससे पहले कि वह खतरे को भांपे, गर्म पानी द्वारा मौत उसे आ दबोचती है।

   पतरस का पतन भी अचानक घटने वाली घटना नहीं था, यह एक धीमे धीमे होने वाले आत्मिक पतन का नतीजा था। उसने प्रभु द्वारा अपने पकड़वाए जाने की चेतावनी को हलके में लिया और उसपर विश्वास नहीं किया, प्रभु यीशु के साथ अन्तिम भोज में जब प्रभु इस बारे में और सिखा रहा था तब पतरस अपने आत्मविश्वास और योग्यता के घमंड में था। फिर गतस्मनी के बाग़ में जब प्रभु ने उससे प्रार्थना के लिए कहा तो वह प्रार्थना करने की बजाए सो गया। जब उसी बाग़ में सैनिकों ने प्रभु को पकड़ने के लिए हाथ बढ़ाए तो पतरस ने शारीरिक प्रतिक्रीया के अन्तरगत अपनी तलवार निकाल कर चलाई और महापुरोहित के सेवक का कान काट डाला। और पतन का निम्न बिन्दु था अपने प्रभु के चेले के रूप में पहचाने जाने के बाद, भय से ग्रसित हो कर उसने तीन बार सेवक लड़की के सामने प्रभु का इन्कार किया।

   पतरस द्वारा प्रभु के इन्कार का दुख उन सभी मसीही विश्वासियों को पता है जिन्होंने विश्वास करने के बाद भी किसी न किसी रूप में अपने जीवन में प्रभु यीशु को ठोकर दी है और फिर उसका एहसास होने के बाद खेद में अपने हाथ मले हैं। पतरस के समान ही हमारी असफलताएं भी अचानक होने वाली घटना नहीं वरन एक पतन के सिलसिले का अन्त होती हैं जो किसी छोटी प्रतीत होने वाली अनआज्ञाकारिता या किसी घमण्ड से आरंभ होकर धीरे धीरे हमें भयानक अन्त तक ले आती हैं।

   इसलिए यह अनिवार्य है कि प्रतिदिन हम परमेश्वर पर निर्भर रहें और उसके वचन का पालन करते रहें। केवल यही एक तरीका है उस मेंढक के समान बिना पहचाने ही धीरे धीरे अपने आप को मृत्यु तक ले जाने से बचाने का। - मार्ट डी हॉन

मसीही जीवन में असफलता कभी अचानक नहीं होती, वह मसीही जीवन में आत्मिक पतन के सिलसिले का नतीजा होती है।

इसलिये जो समझता है, कि मैं स्थिर हूं, वह चौकस रहे कि कहीं गिर न पड़े। - १ कुरिन्थियों १०:१२

बाइबल पाठ: लूका २२:५४-६२

    Luk 22:54  फिर वे उसे पकड़ कर ले चले, और महायाजक के घर में लाए और पतरस दूर ही दूर उसके पीछे पीछे चलता था।
    Luk 22:55  और जब वे आंगन में आग सुलगा कर इकट्ठे बैठे, तो पतरस भी उन के बीच में बैठ गया।
    Luk 22:56  और एक लौंडी उसे आग के उजियाले में बैठे देख कर और उस की ओर ताक कर कहने लगी, यह भी तो उसके साथ था।
    Luk 22:57  परन्तु उस ने यह कह कर इन्‍कार किया, कि हे नारी, मैं उसे नहीं जानता।
    Luk 22:58  थोड़ी देर बाद किसी और ने उसे देख कर कहा, तू भी तो उन्‍हीं में से है: पतरस ने कहा, हे मनुष्य मैं नहीं हूं।
    Luk 22:59  कोई घंटे भर के बाद एक और मनुष्य दृढ़ता से कहने लगा, निश्‍चय यह भी तो उसके साथ था क्‍योंकि यह गलीली है।
    Luk 22:60  पतरस ने कहा, हे मनुष्य, मैं नहीं जानता कि तू क्‍या कहता है वह कह ही रहा था कि तुरन्‍त मुर्ग ने बांग दी।
    Luk 22:61  तब प्रभु ने घूम कर पतरस की ओर देखा, और पतरस को प्रभु की वह बात याद आई जो उस ने कही थी, कि आज मुर्ग के बांग देने से पहिले, तू तीन बार मेरा इन्‍कार करेगा।
    Luk 22:62  और वह बाहर निकल कर फूट फूट कर रोने लगा।
 
एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल १६-१७ 
  • याकूब ३

रविवार, 20 नवंबर 2011

खेद की दवा

   एक अधेड़ उम्र के व्यक्ति ने अपने आप को समाज और अपने चर्च के लोगों से अलग-थलग कर लिया क्योंकि वह अपने बीते दिनों की गलती के कारण अति खेदित था, जिस कारण उसका परिवार टूट कर बिखर गया। एक वृद्ध स्त्री को बार-बार उभारे जाने और संभाले जाने की आवश्यक्ता रहती है क्योंकि वह ५० वर्ष पूर्व के एक प्रेम संबंध के खेद को भूल नहीं पा रही है। एक जवान युवती को मनोवैज्ञानिक चिकित्सा की आवश्यक्ता रहती है क्योंकि वह अपने गर्भपात कराने के निर्णय के लिए अपने आप को क्षमा नहीं कर पा रही है और इस कारण सदा खेदित रहती है। खेद बहुत से मनुष्यों के जीवन में ज़हर घोल देता है और उनके आनन्द तथा शान्ति को छीन लेता है।

   लेकिन मसीही विश्वासी के पास इसकी दवा है। यदि किसी को खेदित होकर निकम्मा हो जाने का कोई कारण था तो वह था प्रभु यीशु का चेला पतरस। उसने बहुत कायरता का व्यवहार किया जब अपने प्रभु को अपने कई दावों के बावजूद वह गतस्मनी के बाग़ में अकेला छोड़कर भाग गया, और फिर प्रभु के पकड़वाए जाने के बाद अधिकारियों की सेवक लड़कियों के सामने तीन बार उसने इस बात का भी इन्कार कर दिया कि वह प्रभु यीशु को जानता है। बाद में उसे इस बात का ऐसा खेद हुआ कि वह अपने इस व्यवहार के लिए फूट-फूट कर रोया। लेकिन उसने अपनी असफलताओं को प्रभु के लिए अपनी सेवकाई में आड़े नहीं आने दिया - क्योंकि उसने प्रभु यीशु द्वारा दी गई क्षमा को स्वीकार किया और प्रभु यीशु ही से नई सामर्थ और नई आशा प्राप्त करी, जब तीन बार प्रभु यीशु ने उससे कहा, "मेरी भेड़ों की रखवाली कर"। प्रेरितों १:१५ में हम पतरस को पहले के समान पुनः चेलों की अगुवाई करते देखते हैं। प्रभु यीशु कि क्षमा को हृदय से ग्रहण करने और फिर स्वयं अपने आप को भी क्षमा करने के कारण पतरस अपने अतीत की कमज़ोरी को मसीह के लोहू के नीचे दबा सका और उस गलती के खेद द्वारा उत्पन्न हो सकने वाले निकम्मेपन पर जयवंत हो सका।

   जब हम अपने पापों को प्रभु यीशु के समक्ष पश्चाताप के साथ मान लेते हैं, तब हम उन्हें वहीं उसके कदमों पर छोड़ कर उन्हें भुला भी सकते हैं क्योंकि, "यदि हम अपने पापों को मान लें, तो वह हमारे पापों को क्षमा करने, और हमें सब अधर्म से शुद्ध करने में विश्वासयोग्य और धर्मी है" (१ युहन्ना १:९)।

   तब हम उस दुखदायी अतीत से आगे बढ़कर आनन्द के साथ उसकी सेवा में लग सकते हैं। खेद कभी हमारे आनन्द को नष्ट नहीं कर सकता क्योंकि प्रत्येक मसीही विश्वासी के पास खेद की कारगर दवा है। - हर्ब वैण्डर लुग्ट

जिन पापों को परमेश्वर ने अपनी क्षमा द्वारा मसीही विश्वासी के जीवन-वृतांत से हटा दिया है, उन्हें मसीही विश्वासी को अपने मन से भी हटा देना चाहिए।

और उन्‍हीं दिनों में पतरस भाइयों के बीच में जो एक सौ बीस व्यक्ति के लगभग इकट्ठे थे, खड़ा होकर कहने लगा। - प्रेरितों १:१५

बाइबल पाठ: यूहन्ना २१:१५-१९
    Joh 21:15  भोजन करने के बाद यीशु ने शमौन पतरस से कहा, हे शमौन, यूहन्ना के पुत्र, क्‍या तू इन से बढ़कर मुझ से प्रेम रखता है? उस ने उस से कहा, हां प्रभु तू तो जानता है, कि मैं तुझ से प्रीति रखता हूं: उस ने उस से कहा, मेरे मेमनों को चरा।
    Joh 21:16  उस ने फिर दूसरी बार उस से कहा, हे शमौन यूहन्ना के पुत्र, क्‍या तू मुझ से प्रेम रखता है? उस ने उन से कहा, हां, प्रभु तू जानता है, कि मैं तुझ से प्रीति रखता हूं: उस ने उस से कहा, मेरी भेड़ों की रखवाली कर।
    Joh 21:17  उस ने तीसरी बार उस से कहा, हे शमौन, यूहन्ना के पुत्र, क्‍या तू मुझ से प्रीति रखता है? पतरस उदास हुआ, कि उस ने उसे तीसरी बार ऐसा कहा कि क्‍या तू मुझ से प्रीति रखता है? और उस से कहा, हे प्रभु, तू तो सब कुछ जानता है: तू यह जानता है कि मैं तुझ से प्रीति रखता हूं: यीशु ने उस से कहा, मेरी भेड़ों को चरा।
    Joh 21:18  मैं तुझ से सच सच कहता हूं, जब तू जवान था, तो अपनी कमर बान्‍ध कर जहां चाहता था, वहां फिरता था; परन्‍तु जब तू बूढ़ा होगा, तो अपने हाथ लम्बे करेगा, और दूसरा तेरी कमर बान्‍धकर जहां तू न चाहेगा वहां तुझे ले जाएगा।
    Joh 21:19  उस ने इन बातों से पता दिया कि पतरस कैसी मृत्यु से परमेश्वर की महिमा करेगा; और यह कहकर, उस से कहा, मेरे पीछे हो ले।
 
एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल १४-१५ 
  • याकूब २

मंगलवार, 23 नवंबर 2010

टूटे संबंधों का खेद

ब्रिटेन के संगीत दल ’माईक और मैकैनिकस’ ने १९८० में एक बहुत प्रभावशाली और लोकप्रीय गीत The Living Years रिकॉर्ड किया। इस गीत में गीतकार अपने पिता की मृत्यु का शोक मनाता है, क्योंकि उनके संबंध तनाव और खामोशी से भरे थे न कि एक दूसरे के साथ अपने मन की बातें बांटने से। गीतकार बहुत दुखी और खेदित मन से कहता है कि "जो कुछ मैं उनसे कहना चाहता था वह न कह सका; काश मैंने उनके जीते जी अपने मन की बातें उनसे कह दी होतीं।"

राज दाउद भी इसी प्रकार अपने बेटे अबसलोम से टूटे संबंधों के कारण खेदित हुआ। अबसलोम क्रोधित था कि उसकी बहिन तमार के बलात्कारी अमनोन को दाउद ने दंड नही दिया, इसलियेअ अबसलोम अम्नोन की हत्या करके भाग गया (२ शमुएल १३:२१-३४)। दाउद का सेनपति योआब जानता था कि दाउद अपने भगोड़े बेटे के लिये तरसता है, इसलिये उसने योजना बनाई और अबसलोम को वापस राज्य में ले आया। लेकिन दाउद और अबसलोम के संबंध कभी ठीक नहीं हो सके। अबसलोम के मन की कड़ुवाहट ने एक ऐसे संघर्ष को जन्म दिया जिसमें बाप-बेटा एक दूसरे के विरोधी हो गए और युद्ध में अबसलोम की मृत्यु हुई (२ शमुएल १८:१४)। राजा दाउद के लिये यह एक कटु विजय थी, जिसमें उसने अपने मरे हुए बेटे और उससे टूटे हुए संबंध के लिये विलाप किया। लेकिन कोई खेद या विलाप दाउद के दुख को कम नहीं कर सकता था। यदि समय रहते संबंध सुधार लिये होते तो यह उसे अब यह समय न देखना पड़ता।

दाउद के खेद से हम टूटे संबंधों को समय रहते ठीक करने के विष्य में सीख सकते हैं। बिगड़ी बात को बनाने का प्रयास कुछ समय के लिये कष्टदायी हो सकता है, लेकिन समय रहते कुछ न करने का खेद उससे कहीं अधिक दुखदायी और सारे जीवन सताने वाला होगा।

प्रभु यीशु ने सिखाया: "इसलिये यदि तू अपनी भेंट वेदी पर लाए, और वहां तू स्मरण करे, कि मेरे भाई के मन में मेरी ओर से कुछ विरोध है, तो अपनी भेंट वहीं वेदी के साम्हने छोड़ दे और जाकर पहिले अपने भाई से मेल मिलाप कर तब आकर अपनी भेंट चढ़ा।" (मत्ती ५:२३, २४)

जैसे परमेश्वर ने प्रभु यीशु मसीह में होकर हमारे पापों को क्षमा किया है, यदि प्रभु यीशु का प्रेम हमारे मनों में हो तो वह हमें भी सामर्थ देता है कि हम भी क्षमा कर सकें "सब में श्रेष्‍ठ बात यह है कि एक दूसरे से अधिक प्रेम रखो, क्‍योंकि प्रेम अनेक पापों को ढ़ांप देता है।" ( १ पतरस ४:८) - बिल क्राउडर


टूटे संबंध ठीक किये जा सकते हैं, यदि प्रयास करने को तैयार हों तो।

तब राजा बहुत घबराया, और फाटक के ऊपर की अटारी पर रोता हुआ चढ़ने लगा और चलते चलते यों कहता गया, कि हाय मेरे बेटे अबसलोम ! मेरे बेटे, हाय ! मेरे बेटे अबसलोम ! भला होता कि मैं आप तेरी सन्ती मरता, हाय ! अबसलोम ! मेरे बेटे, मेरे बेटे !! - २ शमुएल १८:३३

बाइबल पाठ: २ शमुएल १८:३१-१९:४

तब कूशी भी आ गया, और कूशी कहने लगा, मेरे प्रभु राजा के लिये समाचार है। यहोवा ने आज न्याय करके तुझे उन सभों के हाथ से बचाया है जो तेरे विरुद्ध उठे थे।
राजा ने कूशी से पूछा, क्या वह जवान अर्थात अबसलोम कल्याण से है? कूशी ने कहा, मेरे प्रभु राजा के शत्रु, और जितने तेरी हानि के लिये उठे हैं, उनकी दशा उस जवान की सी हो।
तब राजा बहुत घबराया, और फाटक के ऊपर की अटारी पर रोता हुआ चढ़ने लगा? और चलते चलते यों कहता गया, कि हाय मेरे बेटे अबसलोम ! मेरे बेटे, हाय ! मेरे बेटे अबसलोम ! भला होता कि मैं आप तेरी सन्ती मरता, हाय ! अबसलोम ! मेरे बेटे, मेरे बेटे !!
तब योआब को यह समाचार मिला, कि राजा अबसलोम के लिये रो रहा है और विलाप कर रहा है।
इसलिये उस दिन की विजय सब लोगों की समझ में विलाप ही का कारण बन गयी, क्योंकि लोगों ने उस दिन सुना, कि राजा अपके बेटे के लिये खेदित है।
और उस दिन लोग ऐसा मुंह चुरा कर नगर में घुसे, जैसा लोग युद्ध से भाग आने से लज्जित होकर मुंह चुराते हैं।
और राजा मुंह ढांपे हुए चिल्ला चिल्ला कर पुकारता रहा, कि हाय मेरे बेटे अबसलोम ! हाय अबसलोम, मेरे बेटे, मेरे बेटे !

एक साल में बाइबल:
  • यहेजेकेल २०, २१
  • याकूब ५

शनिवार, 9 अक्टूबर 2010

आँसुओं के लिये खेद?

मेरी एक सहेली अपने जीवन में एक बड़ा परिवर्तन कर रही थी - ५० वर्ष से जिसके लिये वह कार्य करती रही, उसे छोड़कर अब वह एक नए काम के लिये जा रही थी। अपने सहकर्मियों से विदा लेते समय वह रोती भी जा रही थी और अपने आँसुओं के लिये क्षमा भी मांगती जा रही थी।

अपने आँसुओं के लिये हम कभी कभी खेदित क्यों होते हैं? शायद हम आँसुओं को कमज़ोरी की निशानी और हमारे चरित्र में किसी बात के लिये असहाय होने का सूचक मानते हैं और अपनी कमज़ोरी को लोगों के सामने लाना नहीं चाहते। या, हो सकता हो कि हमें लगता है कि हमारे आँसु दूसरों को दुखी कर रहे हैं इसलिये हम उनसे क्षमा मांगते हैं।

हमें स्मरण रखना चाहिये कि हमारी भावनाएं हमें परमेश्वर द्वारा दी गई हैं, हम उसके स्वरूप में सृजे गए हैं (उत्पत्ति १:२७)। परमेश्वर भी खेदित होता है, दुखी होता है - उत्पत्ति ६:६, ७ में बताया है कि वह अपने लोगों के पापों और उनके कारण जो उसमें और लोगों में विच्छेद आया, उससे वह दुखी और क्रोधित हुआ। देहधारी परमेश्वर, प्रभु यीशु, अपने मित्रों मरियम और मार्था के साथ उनके भाई लाज़र की मृत्यु पर शोकित हुआ, उसकी आत्मा दुखी हुई और इस दुख में वह सबके सामने रोया भी (यूहन्ना ११:२८-४४), किंतु अपने दुख के खुले प्रगटिकरण के लिये उसने किसी से क्षमा नहीं मांगी।

जब अन्ततः हम स्वर्ग पहुंचेंगे, तो वहां कोई दुख, वियोग या दर्द नहीं होगा। परमेश्वर हमारी आँखों से सब आँसु पोंछ डालेगा (प्रकाशितवाक्य २१:४); लेकिन तब तक जो आँसु बहते हैं उनके लिये खेदित होने और क्षमा मांगने की आवश्यक्ता नहीं है। - एनी सेटास


जब मन में सन्देह उठे कि क्या प्रभु यीशु मेरी परवाह करता है, तो उसके आँसुओं को स्मरण करना।

जब यीशु ने उस को और उन यहूदियों को जो उसके साथ आए थे रोते हुए देखा, तो आत्मा में बहुत ही उदास हुआ - यूहन्ना ११:३३


बाइबल पाठ: यूहन्ना ११:३२-४४

जब मरियम वहां पहुंची जहां यीशु था, तो उसे देखते ही उसके पांवों पर गिर के कहा, हे प्रभु, यदि तू यहां होता तो मेरा भाई न मरता।
जब यीशु ने उस को और उन यहूदियों को जो उसके साथ आए थे रोते हुए देखा, तो आत्मा में बहुत ही उदास हुआ, और घबरा कर कहा, तुम ने उसे कहां रखा है?
उन्‍होंने उस से कहा, हे प्रभु, चलकर देख ले।
यीशु के आंसू बहने लगे।
तब यहूदी कहने लगे, देखो, वह उस से कैसी प्रीति रखता था।
परन्‍तु उन में से कितनों ने कहा, क्‍या यह जिस ने अन्‍धे की आंखें खोली, यह भी न कर सका कि यह मनुष्य न मरता?
यीशु मन में फिर बहुत ही उदास होकर कब्र पर आया, वह एक गुफा थी, और एक पत्थर उस पर धरा था।
यीशु ने कहा पत्थर को उठाओ: उस मरे हुए की बहिन मार्था उस से कहने लगी, हे प्रभु, उस में से अब तो र्दुगंध आती है क्‍योंकि उसे मरे चार दिन हो गए।
यीशु ने उस से कहा, क्‍या मैं ने तुझ से न कहा कि यदि तू विश्वास करेगी, तो परमेश्वर की महिमा को देखेगी।
तब उन्‍होंने उस पत्थर को हटाया, फिर यीशु ने आंखें उठाकर कहा, हे पिता, मैं तेरा धन्यवाद करता हूं कि तू ने मेरी सुन ली है।
और मै जानता था, कि तू सदा मेरी सुनता है, परन्‍तु जो भीड़ आस पास खड़ी है, उन के कारण मैं ने यह कहा, जिस से कि वे विश्वास करें, कि तू ने मुझे भेजा है।
यह कहकर उस ने बड़े शब्‍द से पुकारा, कि हे लाजर, निकल आ।
जो मर गया या, वह कफन से हाथ पांव बन्‍धे हुए निकल आया और उसका मुंह अंगोछे से लिपटा हुआ था और यीशु ने उन से कहा, उसे खोलकर जाने दो।

एक साल में बाइबल:
  • यशायाह ३२, ३३
  • कुलुस्सियों १