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सोमवार, 3 जून 2024

Growth through God’s Word / परमेश्वर के वचन से बढ़ोतरी – 89

 

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आरम्भिक बातें – 50

बपतिस्मों – 30

आग तथा पानी से बपतिस्मा

 

    बपतिस्मे के हमारे इस अध्ययन में, बपतिस्मे के विषय कुछ कम समझी जाने वाली, और असमंजस में डालने वाली बातों के बारे में अभी तक हमने परमेश्वर के वचन बाइबल की शिक्षाओं के आधार पर कुछ अस्वीकार्य धारणाओं को देखा है; और हमने जाना है कि बाइबल के अनुसार बपतिस्मा केवल एक ही है, जो पानी में डुबकी के साथ दिया जाता है। साथ ही, न तो पवित्र आत्मा का बपतिस्मा बाइबल में कहीं लिखा गया है, और न ही मसीही विश्वासियों के लिए उसे अलग से प्राप्त करने की कोई शिक्षा बाइबल में कहीं दी गई है। इसी तथाकथित “पवित्र आत्मा का बपतिस्मा” से संबंधित एक और गलत शिक्षा है “आग का बपतिस्मा” जिसके बारे में हम आज के इस लेख में वचन की बातों के आधार पर देखेंगे। 

    मत्ती 3:11 में यूहन्ना बपतिस्मा देने वाले द्वारा कही गई बात “वह तुम्हें पवित्र आत्मा और आग से बपतिस्मा देगा” को लेकर भी गलत शिक्षाएं और व्याख्या दी जाती है कि पवित्र आत्मा का बपतिस्मा, आग का बपतिस्मा भी है। इसे समझने के लिए एक बार फिर “से” शब्द के अर्थ, प्रयोग, और महत्व पर ध्यान कीजिए, साथ ही यहाँ प्रयुक्त संयोजक शब्द “और” का भी ध्यान रखिए। इस पद में यूहन्ना यह नहीं कह रहा है कि “वह तुम्हें पवित्र आत्मा अर्थात आग से बपतिस्मा देगा”, जैसा कि यह गलत शिक्षा देने वाले इस पद को लेकर कहते और सिखाते हैं। किन्तु वाक्य स्पष्ट है वरन “वह तुम्हें पवित्र आत्मा और आग से बपतिस्मा देगा” - यानि कि प्रभु के पास दो वस्तुओं, या दो माध्यमों से दिए जाने वाले बपतिस्मे हैं - एक तो पवित्र आत्मा से, और दूसरा आग से। जिन्होंने प्रभु यीशु को स्वीकार कर लिया, उस पर विश्वास कर लिया, अर्थात उद्धार पा लिया, उन्हें स्वतः ही, विश्वास करते ही तुरंत पवित्र आत्मा मिल जाएगा। जैसा हम पहले देख चुके हैं, पवित्र आत्मा प्राप्त करना ही पवित्र आत्मा से बपतिस्मा मिल जाना है, जैसा कि प्रेरितों 1:5, तथा प्रेरितों 11:15-16 में लिखा और स्पष्ट किया गया है। जिन्होंने प्रभु को स्वीकार नहीं किया, उद्धार नहीं पाया, फिर वे अनन्त काल के लिए नरक की आग में डुबोए जाएंगे - उनके लिए फिर प्रभु के पास आग से बपतिस्मा है। नरक को बाइबल में एक “झील” कहा गया है, जिसमें शैतान और उसके अनुयायी अनन्तकाल के लिए डाल दिए जाएंगे, और पीड़ा में रहेंगे, “और उन का भरमाने वाला शैतान आग और गन्धक की उस झील में, जिस में वह पशु और झूठा भविष्यद्वक्ता भी होगा, डाल दिया जाएगा, और वे रात दिन युगानुयुग पीड़ा में तड़पते रहेंगे” (प्रकाशितवाक्य 20:10)। समस्त मानव जाति को इस भयंकर, अवर्णनीय, असहनीय पीड़ा से बचने का मार्ग और उपाय देने के लिए ही प्रभु यीशु मसीह स्वर्ग छोड़कर पृथ्वी पर आया था, और उसने हमें वह मार्ग बनाकर दे भी दिया है। अब उसके द्वारा सेंतमेंत में, केवल उस पर लाए गए विश्वास के द्वारा ग्रहण किए जाने वाले इस प्रयोजन को स्वीकार करना या न करना प्रत्येक का अपना व्यक्तिगत निर्णय है। 

    प्रेरितों 17:30-31 में जैसा लिखा है, आज जो जगत का उद्धारकर्ता है, जगत के अंत के समय, वही प्रभु जगत का न्यायी भी होगा। प्रत्येक व्यक्ति द्वारा, अपने पृथ्वी के जीवन काल के समय में लिए गए निर्णय के अनुसार, जिसने प्रभु यीशु को अपना व्यक्तिगत उद्धारकर्ता ग्रहण किया है वह प्रभु के साथ रहने के लिए स्वर्ग में जाएगा; किन्तु जिसने प्रभु यीशु को अस्वीकार किया है, वह अपने इस निर्णय के अनुसार, शैतान, जिसके साथ रहने का उसने निर्णय लिया है, के साथ नरक में जाएगा। तो हर एक व्यक्ति को प्रभु के हाथों इन दोनों माध्यमों में से एक न एक से बपतिस्मा मिलेगा - या तो पवित्र आत्मा से; अन्यथा आग से। इसीलिए प्रभु यीशु ने अपने शिष्यों को सचेत किया, “जो शरीर को घात करते हैं, पर आत्मा को घात नहीं कर सकते, उन से मत डरना; पर उसी से डरो, जो आत्मा और शरीर दोनों को नरक में नाश कर सकता है” (मत्ती 10:28)। 

    साथ ही यह भी ध्यान कीजिए कि प्रेरितों 2:3 में, प्रभु के शिष्यों द्वारा पवित्र आत्मा को प्राप्त करने के विषय में लिखा है, “और उन्हें आग की सी जीभें फटती हुई दिखाई दीं; और उन में से हर एक पर आ ठहरीं”; किन्तु इस घटना - आग की सी जीभों का आकर प्रभु के शिष्यों पर ठहर जाना और फिर उन्हें पवित्र आत्मा की सामर्थ्य प्राप्त होना, को न तो यहाँ पर और न ही कभी कहीं अन्य किसी स्थान पर “पवित्र आत्मा की आग से बपतिस्मा” कहा गया। जब कि यदि पवित्र आत्मा का बपतिस्मा पाना और आग से बपतिस्मा पाना एक ही होते, तो यह सबसे उपयुक्त अवसर एवं घटना होती इस बात को दिखाने और प्रमाणित करने के लिए कि पवित्र आत्मा का बपतिस्मा, यूहन्ना बपतिस्मा देने वाले के द्वारा कहा गया वह आग का बपतिस्मा ही है। किन्तु बाइबल स्पष्ट है कि पवित्र आत्मा का बपतिस्मा है ही नहीं; और पानी के समान, आग भी वह माध्यम है जिसमें उन्हें डाला जाएगा जिन्होंने प्रभु यीशु मसीह पर विश्वास नहीं किया है। उनके लिए यही वह आग का बपतिस्मा होगा।

    यदि आपने प्रभु की शिष्यता को अभी तक स्वीकार नहीं किया है, तो अपने अनन्त जीवन और स्वर्गीय आशीषों को सुनिश्चित करने के लिए अभी प्रभु यीशु के पक्ष में अपना निर्णय कर लीजिए। जहाँ प्रभु की आज्ञाकारिता है, उसके वचन की बातों का आदर और पालन है, वहाँ प्रभु की आशीष और सुरक्षा भी है। प्रभु यीशु से अपने पापों के लिए क्षमा माँगकर, स्वेच्छा से तथा सच्चे मन से अपने आप को उसकी अधीनता में समर्पित कर दीजिए - उद्धार और स्वर्गीय जीवन का यही एकमात्र मार्ग है। आपको स्वेच्छा और सच्चे मन से प्रभु यीशु मसीह से केवल एक छोटी प्रार्थना करनी है, और साथ ही अपना जीवन उसे पूर्णतः समर्पित करना है। आप यह प्रार्थना और समर्पण कुछ इस प्रकार से भी कर सकते हैं, “प्रभु यीशु, मैं अपने पापों के लिए पश्चातापी हूँ, उनके लिए आप से क्षमा माँगता हूँ। मैं आपका धन्यवाद करता हूँ कि आपने मेरे पापों की क्षमा और समाधान के लिए उन पापों को अपने ऊपर लिया, उनके कारण मेरे स्थान पर क्रूस की मृत्यु सही, गाड़े गए, और मेरे उद्धार के लिए आप तीसरे दिन जी भी उठे, और आज जीवित प्रभु परमेश्वर हैं। कृपया मुझे और मेरे पापों को क्षमा करें, मुझे अपनी शरण में लें, और मुझे अपना शिष्य बना लें। मैं अपना जीवन आप के हाथों में समर्पित करता हूँ।” सच्चे और समर्पित मन से की गई आपकी एक प्रार्थना आपके वर्तमान तथा भविष्य को, इस लोक के और परलोक के जीवन को, अनन्तकाल के लिए स्वर्गीय एवं आशीषित बना देगी।

 

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English Translation


The Elementary Principles – 50

Baptisms - 30

Baptism With Fire and Water

 

    So far, we have seen in our studies on Baptism, based on the teachings of the Word of God, the Bible, that despite some poorly understood, at times confusing, and Biblically unacceptable assumptions about baptism, Biblically the one and only true baptism is the one which is given by immersing in water.  Also, the baptism of the Holy Spirit is neither written anywhere in the Bible, nor is there any instruction in the Bible to receive it, by any Believer at any time. Another misconception related to this so called “baptism of the Holy Spirit” is the "baptism of fire," about which, based on the teachings of the Scripture, we will look at in today's article. 

    John the Baptist’s statement, "He will baptize you with the Holy Spirit and fire" in Matthew 3:11, is also often misinterpreted and wrongly taught as a form of the baptism of the Holy Spirit, i.e., it is wrongly taught that the baptism of fire stated by John here, is also about “baptism of the Holy Spirit”. To understand this, consider once again the meaning, usage, and significance of the word "with", as well as the conjunction "and" used here in this verse. Those giving wrong teachings about the Holy Spirit say and teach that in this verse John implied that the Holy Spirit and fire are the same; but take note that John is not saying that "He will baptize you with the Holy Spirit, i.e., with fire". But the sentence is clear, but "He will baptize you with the Holy Spirit and fire" - i.e., the Lord will baptize with one of two different mediums - with the Holy Spirit, and with fire. Those who have accepted the Lord Jesus, believed in Him, and are saved, they will automatically also receive the Holy Spirit immediately upon believing. As we have seen earlier, receiving the Holy Spirit is the same as being baptized with the Holy Spirit, as is written and explained in Acts 1:5, and Acts 11:15-16. Whereas those who do not accept the Lord, i.e., are not saved, they will be cast into the fire of hell for eternity - for them then the Lord has baptism with fire. Hell is called a "lake" in the Bible, in which Satan and his followers will be cast into, for eternity, and will be in torment, "The devil, who deceived them, was cast into the lake of fire and brimstone where the beast and the false prophet are. And they will be tormented day and night forever and ever" (Revelation 20:10). The Lord Jesus Christ left heaven and came to earth to prepare and give to all of mankind a way and a deliverance out of this terrible, indescribable, unbearable pain, and He has made available that way for everybody. Now it is a personal decision of each person, whether or not to accept this provision made freely available by the Lord. This provision from the Lord can only be accepted and applied to one’s life through the trust placed in him by the person.

    As it is written in Acts 17:30-31, He, who is the Savior of the world today, at the time of the end of the world, the same Lord will also be the Judge of the world. Everyone who has received the Lord Jesus as his personal Savior will go to heaven to stay with the Lord, according to the decision taken by each person during his earthly lifetime to be with the Lord. But whoever rejects the Lord Jesus, will, according to his decision of staying away from the Lord, go to hell to be with Satan, with whom he has decided to be. So, each person will be baptized by the Lord by one of these two mediums - either by the Holy Spirit; or else by fire. That is why the Lord Jesus cautioned his disciples, “And do not fear those who kill the body but cannot kill the soul. But rather fear Him who is able to destroy both soul and body in hell” (Matthew 10:28).

    Also note, in Acts 2:3, about the receiving of the Holy Spirit by the Lord's disciples, it is written, “Then there appeared to them divided tongues, as of fire, and one sat upon each of them”; But this event — the coming of the tongues as of fire and staying on the disciples of the Lord and then their receiving the power of the Holy Spirit — has never been called or referred to as "the baptism with the fire of the Holy Spirit", neither here nor anywhere else. Whereas if the baptism of the Holy Spirit and being baptized with fire were one and the same, this would be the most appropriate occasion and event to show and to prove that the baptism of the Holy Spirit was the same as with fire that was spoken by John the Baptist. But the Bible is clear that there is no baptism of the Holy Spirit; and the fire, like water, is only a medium into which those who have not believed in the Lord Jesus Christ will be cast. That would be the baptism of fire for them, the unbelievers in the Lord, those not saved by coming to faith in the Lord Jesus.

    If you have not yet accepted the discipleship of the Lord, make your decision in favor of the Lord Jesus now to ensure your eternal life and heavenly blessings. Where there is obedience to the Lord, where there is respect and obedience to His Word, there is also the blessing and protection of the Lord. Repenting of your sins, and asking the Lord Jesus for forgiveness of your sins, voluntarily and sincerely, surrendering yourself to Him - is the only way to salvation and heavenly life. You only have to say a short but sincere prayer to the Lord Jesus Christ willingly and with a penitent heart, and at the same time completely commit and submit your life to Him. You can also make this prayer and submission in words something like, “Lord Jesus, I am sorry for my sins and repent of them. I thank you for taking my sins upon yourself, paying for them through your life.  Because of them you died on the cross in my place, were buried, and you rose again from the grave on the third day for my salvation, and today you are the living Lord God and have freely provided to me the forgiveness, and redemption from my sins, through faith in you. Please forgive my sins, take me under your care, and make me your disciple. I submit my life into your hands." Your one prayer from a sincere and committed heart will make your present and future life, in this world and in the hereafter, heavenly and blessed for eternity.

 

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गुरुवार, 2 मार्च 2023

बपतिस्मे से संबंधित विवादास्पद बातें (15) / Baptism Related Controversies (15)

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आग तथा पानी से बपतिस्मा


    बपतिस्मे के हमारे इस अध्ययन में, बपतिस्मे के विषय कुछ कम समझी जाने वाली, और असमंजस में डालने वाली बातों के बारे में अभी तक हमने परमेश्वर के वचन बाइबल की शिक्षाओं के आधार पर कुछ अस्वीकार्य धारणाओं को देखा है; और हमने जाना है कि बाइबल के अनुसार बपतिस्मा केवल एक ही है, जो पानी में डुबकी के साथ दिया जाता है। साथ ही, न तो पवित्र आत्मा का बपतिस्मा बाइबल में कहीं लिखा गया है, और न ही मसीही विश्वासियों के लिए उसे अलग से प्राप्त करने की कोई शिक्षा बाइबल में कहीं दी गई है। इसी तथाकथित “पवित्र आत्मा का बपतिस्मा” से संबंधित एक और गलत शिक्षा है “आग का बपतिस्मा” जिसके बारे में हम आज के इस लेख में वचन की बातों के आधार पर देखेंगे।

 

मत्ती 3:11 में यूहन्ना बपतिस्मा देने वाले द्वारा कही गई बात “वह तुम्हें पवित्र आत्मा और आग से बपतिस्मा देगा” को लेकर भी गलत शिक्षाएं और व्याख्या दी जाती है कि पवित्र आत्मा का बपतिस्मा, आग का बपतिस्मा भी है। इसे समझने के लिए एक बार फिर “से” शब्द के अर्थ, प्रयोग, और महत्व पर ध्यान कीजिए, साथ ही यहाँ प्रयुक्त संयोजक शब्द “और” का भी ध्यान रखिए। इस पद में यूहन्ना यह नहीं कह रहा है कि “वह तुम्हें पवित्र आत्मा अर्थात आग से बपतिस्मा देगा”, जैसा कि यह गलत शिक्षा देने वाले इस पद को लेकर कहते और सिखाते हैं। किन्तु वाक्य स्पष्ट है वरन “वह तुम्हें पवित्र आत्मा और आग से बपतिस्मा देगा” - यानि कि प्रभु के पास दो वस्तुओं, या दो माध्यमों से दिए जाने वाले बपतिस्मे हैं - एक तो पवित्र आत्मा से, और दूसरा आग से। जिन्होंने प्रभु यीशु को स्वीकार कर लिया, उस पर विश्वास कर लिया, अर्थात उद्धार पा लिया, उन्हें स्वतः ही, विश्वास करते ही तुरंत पवित्र आत्मा मिल जाएगा। जैसा हम पहले देख चुके हैं, पवित्र आत्मा प्राप्त करना ही पवित्र आत्मा से बपतिस्मा मिल जाना है, जैसा कि प्रेरितों 1:5, तथा प्रेरितों 11:15-16 में लिखा और स्पष्ट किया गया है। जिन्होंने प्रभु को स्वीकार नहीं किया, उद्धार नहीं पाया, फिर वे अनन्त काल के लिए नरक की आग में डुबोए जाएंगे - उनके लिए फिर प्रभु के पास आग से बपतिस्मा है। नरक को बाइबल में एक “झील” कहा गया है, जिसमें शैतान और उसके अनुयायी अनन्तकाल के लिए डाल दिए जाएंगे, और पीड़ा में रहेंगे, “और उन का भरमाने वाला शैतान आग और गन्धक की उस झील में, जिस में वह पशु और झूठा भविष्यद्वक्ता भी होगा, डाल दिया जाएगा, और वे रात दिन युगानुयुग पीड़ा में तड़पते रहेंगे” (प्रकाशितवाक्य 20:10)। समस्त मानव जाति को इस भयंकर, अवर्णनीय, असहनीय पीड़ा से बचने का मार्ग और उपाय देने के लिए ही प्रभु यीशु मसीह स्वर्ग छोड़कर पृथ्वी पर आया था, और उसने हमें वह मार्ग बनाकर दे भी दिया है। अब उसके द्वारा सेंतमेंत में, केवल उस पर लाए गए विश्वास के द्वारा ग्रहण किए जाने वाले इस प्रयोजन को स्वीकार करना या न करना प्रत्येक का अपना व्यक्तिगत निर्णय है।

 

प्रेरितों 17:30-31 में जैसा लिखा है, आज जो जगत का उद्धारकर्ता है, जगत के अंत के समय, वही प्रभु जगत का न्यायी भी होगा। प्रत्येक व्यक्ति द्वारा, अपने पृथ्वी के जीवन काल के समय में लिए गए निर्णय के अनुसार, जिसने प्रभु यीशु को अपना व्यक्तिगत उद्धारकर्ता ग्रहण किया है वह प्रभु के साथ रहने के लिए स्वर्ग में जाएगा; किन्तु जिसने प्रभु यीशु को अस्वीकार किया है, वह अपने इस निर्णय के अनुसार, शैतान, जिसके साथ रहने का उसने निर्णय लिया है, के साथ नरक में जाएगा। तो हर एक व्यक्ति को प्रभु के हाथों इन दोनों माध्यमों में से एक न एक से बपतिस्मा मिलेगा - या तो पवित्र आत्मा से; अन्यथा आग से। इसीलिए प्रभु यीशु ने अपने शिष्यों को सचेत किया, “जो शरीर को घात करते हैं, पर आत्मा को घात नहीं कर सकते, उन से मत डरना; पर उसी से डरो, जो आत्मा और शरीर दोनों को नरक में नाश कर सकता है” (मत्ती 10:28)।

 

साथ ही यह भी ध्यान कीजिए कि प्रेरितों 2:3 में, प्रभु के शिष्यों द्वारा पवित्र आत्मा को प्राप्त करने के विषय में लिखा है, “और उन्हें आग की सी जीभें फटती हुई दिखाई दीं; और उन में से हर एक पर आ ठहरीं”; किन्तु इस घटना - आग की जीभों का आकर प्रभु के शिष्यों पर ठहर जाना और फिर उन्हें पवित्र आत्मा की सामर्थ्य प्राप्त होना, को न तो यहाँ पर और न ही कभी कहीं अन्य किसी स्थान पर “पवित्र आत्मा की आग से बपतिस्मा” कहा गया। जब कि यदि पवित्र आत्मा का बपतिस्मा पाना और आग से बपतिस्मा पाना एक ही होते, तो यह सबसे उपयुक्त अवसर एवं घटना होती इस बात को दिखाने और प्रमाणित करने के लिए कि पवित्र आत्मा का बपतिस्मा, यूहन्ना बपतिस्मा देने वाले के द्वारा कहा गया वह आग का बपतिस्मा ही है। किन्तु बाइबल स्पष्ट है कि पवित्र आत्मा का बपतिस्मा है ही नहीं; और पानी के समान, आग भी वह माध्यम है जिसमें उन्हें डाला जाएगा जिन्होंने प्रभु यीशु मसीह पर विश्वास नहीं किया है। उनके लिए यही वह आग का बपतिस्मा होगा।


यदि आप एक मसीही विश्वासी हैं, तो कृपया अपने जीवन को जाँच कर देख लें कि आप वास्तव में नया जन्म पाए हुए प्रभु यीशु के शिष्य हैं, पापों से छुड़ाए गए हैं तथा आप ने अपना जीवन प्रभु की आज्ञाकारिता में जीने के लिए उस को समर्पित किया है। आपके लिए यह अनिवार्य है कि आप परमेश्वर के वचन की सही शिक्षाओं को जानने के द्वारा एक परिपक्व विश्वासी बनें, तथा सभी शिक्षाओं को वचन की कसौटी पर परखने, और बेरिया के विश्वासियों के समान, लोगों की बातों को पहले वचन से जाँचने और उनकी सत्यता को निश्चित करने के बाद ही उनको स्वीकार करने और मानने वाले बनें (प्रेरितों 17:11; 1 थिस्सलुनीकियों 5:21)। अन्यथा शैतान द्वारा छोड़े हुए झूठे प्रेरित और भविष्यद्वक्ता मसीह के सेवक बन कर (2 कुरिन्थियों 11:13-15) अपनी ठग विद्या और चतुराई से आपको प्रभु के लिए अप्रभावी कर देंगे और आप के मसीही जीवन एवं आशीषों का नाश कर देंगे।

  

यदि आपने प्रभु की शिष्यता को अभी तक स्वीकार नहीं किया है, तो अपने अनन्त जीवन और स्वर्गीय आशीषों को सुनिश्चित करने के लिए अभी प्रभु यीशु के पक्ष में अपना निर्णय कर लीजिए। जहाँ प्रभु की आज्ञाकारिता है, उसके वचन की बातों का आदर और पालन है, वहाँ प्रभु की आशीष और सुरक्षा भी है। प्रभु यीशु से अपने पापों के लिए क्षमा माँगकर, स्वेच्छा से तथा सच्चे मन से अपने आप को उसकी अधीनता में समर्पित कर दीजिए - उद्धार और स्वर्गीय जीवन का यही एकमात्र मार्ग है। आपको स्वेच्छा और सच्चे मन से प्रभु यीशु मसीह से केवल एक छोटी प्रार्थना करनी है, और साथ ही अपना जीवन उसे पूर्णतः समर्पित करना है। आप यह प्रार्थना और समर्पण कुछ इस प्रकार से भी कर सकते हैं, “प्रभु यीशु मैं आपका धन्यवाद करता हूँ कि आपने मेरे पापों की क्षमा और समाधान के लिए उन पापों को अपने ऊपर लिया, उनके कारण मेरे स्थान पर क्रूस की मृत्यु सही, गाड़े गए, और मेरे उद्धार के लिए आप तीसरे दिन जी भी उठे, और आज जीवित प्रभु परमेश्वर हैं। कृपया मेरे पापों को क्षमा करें, मुझे अपनी शरण में लें, और मुझे अपना शिष्य बना लें। मैं अपना जीवन आप के हाथों में समर्पित करता हूँ।” सच्चे और समर्पित मन से की गई आपकी एक प्रार्थना आपके वर्तमान तथा भविष्य को, इस लोक के और परलोक के जीवन को, अनन्तकाल के लिए स्वर्गीय एवं आशीषित बना देगी। 

 

एक साल में बाइबल पढ़ें:

  • गिनती 26-27           

  • मरकुस 8:1-21      


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English Translation


Baptism With Fire and Water


So far, we have seen in our studies on Baptism, based on the teachings of the Word of God, the Bible, that despite some poorly understood, at times confusing, and Biblically unacceptable assumptions about baptism, Biblically the one and only true baptism is the one which is given by immersing in water.  Also, the baptism of the Holy Spirit is neither written anywhere in the Bible, nor is there any instruction in the Bible to receive it, by any Believer at any time. Another misconception related to this so called “baptism of the Holy Spirit” is the "baptism of fire," about which, based on the teachings of the Scripture, we will look at in today's article.

 

John the Baptist’s statement, "He will baptize you with the Holy Spirit and fire" in Matthew 3:11, is also often misinterpreted and wrongly taught as a form of the baptism of the Holy Spirit, i.e., it is wrongly taught that the baptism of fire stated by John here, is also about “baptism of the Holy Spirit”. To understand this, consider once again the meaning, usage, and significance of the word "with", as well as the conjunction "and" used here in this verse. Those giving wrong teachings about the Holy Spirit say and teach that in this verse John implied that the Holy Spirit and fire are the same; but take note that John is not saying that "He will baptize you with the Holy Spirit, i.e., with fire". But the sentence is clear, but "He will baptize you with the Holy Spirit and fire" - i.e., the Lord will baptize with one of two different mediums - with the Holy Spirit, and with fire. Those who have accepted the Lord Jesus, believed in Him, and are saved, they will automatically also receive the Holy Spirit immediately upon believing. As we have seen earlier, receiving the Holy Spirit is the same as being baptized with the Holy Spirit, as is written and explained in Acts 1:5, and Acts 11:15-16. Whereas those who do not accept the Lord, i.e., are not saved, they will be cast into the fire of hell for eternity - for them then the Lord has baptism with fire. Hell is called a "lake" in the Bible, in which Satan and his followers will be cast into, for eternity, and will be in torment, "The devil, who deceived them, was cast into the lake of fire and brimstone where the beast and the false prophet are. And they will be tormented day and night forever and ever" (Revelation 20:10). The Lord Jesus Christ left heaven and came to earth to prepare and give to all of mankind a way and a deliverance out of this terrible, indescribable, unbearable pain, and He has made available that way for everybody. Now it is a personal decision of each person, whether or not to accept this provision made freely available by the Lord. This provision from the Lord can only be accepted and applied to one’s life through the trust placed in him by the person.


As it is written in Acts 17:30-31, He, who is the Savior of the world today, at the time of the end of the world, the same Lord will also be the Judge of the world. Everyone who has received the Lord Jesus as his personal Savior will go to heaven to stay with the Lord, according to the decision taken by each person during his earthly lifetime to be with the Lord. But whoever rejects the Lord Jesus, will, according to his decision of staying away from the Lord, go to hell to be with Satan, with whom he has decided to be. So, each person will be baptized by the Lord by one of these two mediums - either by the Holy Spirit; or else by fire. That is why the Lord Jesus cautioned his disciples, “And do not fear those who kill the body but cannot kill the soul. But rather fear Him who is able to destroy both soul and body in hell” (Matthew 10:28).


Also note, in Acts 2:3, about the receiving of the Holy Spirit by the Lord's disciples, it is written, “Then there appeared to them divided tongues, as of fire, and one sat upon each of them”; But this event — the coming of the tongues of fire and staying on the disciples of the Lord and then their receiving the power of the Holy Spirit — has never been called or referred to as "the baptism with the fire of the Holy Spirit", neither here nor anywhere else. Whereas if the baptism of the Holy Spirit and being baptized with fire were one and the same, this would be the most appropriate occasion and event to show and to prove that the baptism of the Holy Spirit was the same as with fire that was spoken by John the Baptist. But the Bible is clear that there is no baptism of the Holy Spirit; and the fire, like water, is only a medium into which those who have not believed in the Lord Jesus Christ will be cast. That would be the baptism of fire for them, the unbelievers in the Lord, those not saved by coming to faith in the Lord Jesus.


If you are a Christian Believer, then please examine your life and make sure that you are actually a Born-Again disciple of the Lord, i.e., are redeemed from your sins, have submitted and surrendered your life to the Lord Jesus to live in obedience to Him and His Word. Whoever may be the preacher or teacher, but you should always, like the Berean Believers, first cross-check and test all teachings that you receive, from the Word of God. Only after ascertaining the truth and veracity of the teachings brought to you by men, should you accept and obey them (Acts 17:11; 1 Thessalonians 5:21). If you do not do this, the false apostles and prophets sent by Satan as ministers of Christ (2 Corinthians 11:13-15), will by their trickery, cunningness, and craftiness render you ineffective for the Lord and cause severe damage to your Christian life and your rewards.


If you have not yet accepted the discipleship of the Lord Jesus, then to ensure your eternal life and heavenly rewards, take a decision in favor of the Lord Jesus now. Wherever there is surrender and obedience towards the Lord Jesus, the Lord’s blessings and safety are also there. If you are still not Born Again, have not obtained salvation, or have not asked the Lord Jesus for forgiveness for your sins, then you have the opportunity to do so right now. A short prayer said voluntarily with a sincere heart, with heartfelt repentance for your sins, and a fully submissive attitude, “Lord Jesus, I confess that I have disobeyed You, and have knowingly or unknowingly, in mind, in thought, in attitude, and in deeds, committed sins. I believe that you have fully borne the punishment of my sins by your sacrifice on the cross, and have paid the full price of those sins for all eternity. Please forgive my sins, change my heart and mind towards you, and make me your disciple, take me with you." God longs for your company and wants to see you blessed, but to make this possible, is your personal decision. Will you not say this prayer now, while you have the time and opportunity to do so - the decision is yours. 


Through the Bible in a Year: 

  • Numbers 26-27

  • Mark 8:1-21


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बुधवार, 15 मार्च 2017

प्रार्थना


   1982 में द टुडे शो में, प्रसारित होने वाले बिली ग्राहम के साक्षात्कार से एक दिन पहले, उनके जन संपर्क निर्देशक, लैरी रॉस ने साक्षात्कार लेने वालों से कहा कि बिली ग्राहम को साक्षात्कार देने से पहले प्रार्थना करने के लिए एक व्यक्तिगत कमरे की आवश्यकता पड़ेगी। परन्तु जब बिली ग्राहम स्टूडियो पहुँचे तो उनके सहायक ने रॉस से कहा कि बिली ग्राहम को उस कमरे की आवश्यकता नहीं होगी, क्योंकि "श्री. ग्राहम प्रातः उठने के साथ ही प्रार्थना करना आरंभ कर देते हैं, वे नाश्ता खाते समय भी प्रार्थना कर रहे थे, कार में आते हुए मार्ग में वे प्रार्थना करते हुए आए, और संभवतः पूरे सक्षात्कार के समय वे प्रार्थना में होंगे।" बाद में रॉस ने कहा कि "एक युवा होने के नाते मेरे लिए यह सीखने के लिए बहुत महान पाठ था।"

   प्रार्थना में होना कोई घटना नहीं है; यह परमेश्वर के साथ संबंध में रहने का एक तरीका है। इस प्रकार का प्रगाढ़ संबंध तब विकसित होता है जब परमेश्वर के लोग प्रार्थना में रहने को जीवन शैली का अंग मान कर उसमें बने रहते हैं। परमेश्वर के वचन बाइबल में दिए गए भजन हमें प्रतिदिन प्रभु के लिए अपनी आवाज़ उठाकर दिन का आरंभ करने के लिए कहते हैं (भजन 5:3); अपने दिन को परमेश्वर के साथ वार्तालाप से भरने के लिए कहते हैं (भजन 55:17); और जब हम पर दोषारोपण किया जाए, हमारी निन्दा की जाए तो अपनेआप को पूर्णतः परमेश्वर के सामने प्रार्थना में समर्पित कर देने को कहते हैं (भजन 109:4)। हम प्रार्थना को जीवन के मार्ग के रूप में तब ही विकसित करते हैं यदि हम परमेश्वर के साथ लगातार बने रहना चाहते हैं (भजन 42:1-4; 84:1-2; 130:5-6)।

   जीवन की प्रत्येक परिस्थिति में परमेश्वर के साथ जुड़े रहने के लिए प्रार्थना ही माध्यम है। परमेश्वर के कान सदैव अपने बच्चों की ओर लगे रहते हैं। प्रार्थना वह माध्यम है जिसके द्वारा हम परमेश्वर से कभी भी, किसी भी परिस्थिति में, किसी भी बात के लिए अपने दिल की बात खुल कर कह सकते हैं, उससे मार्गदर्शन, शांति और सांत्वना प्राप्त कर सकते हैं, और प्रार्थना में दूसरों को भी उनकी आवशयकताओं के लिए उसके अनुग्रह के सिंहासन के सामने प्रस्तुत कर सकते हैं। - मार्विन विलियम्स


प्रार्थना में परमेश्वर आपके शब्दों से भी बढ़कर सुनता है; 
वह आपके हृदय को सुनता है।

परन्तु मैं तेरी सामर्थ्य का यश गाऊंगा, और भोर को तेरी करूणा का जयजयकार करूंगा। क्योंकि तू मेरा ऊंचा गढ़ है, और संकट के समय मेरा शरणस्थान ठहरा है। हे मेरे बल, मैं तेरा भजन गाऊंगा, क्योंकि हे परमेश्वर, तू मेरा ऊंचा गढ़ और मेरा करूणामय परमेश्वर है। - भजन 59:16-17

बाइबल पाठ: भजन 5
Psalms 5:1 हे यहोवा, मेरे वचनों पर कान लगा; मेरे ध्यान करने की ओर मन लगा। 
Psalms 5:2 हे मेरे राजा, हे मेरे परमेश्वर, मेरी दोहाई पर ध्यान दे, क्योंकि मैं तुझी से प्रार्थना करता हूं। 
Psalms 5:3 हे यहोवा, भोर को मेरी वाणी तुझे सुनाई देगी, मैं भोर को प्रार्थना कर के तेरी बाट जोहूंगा। 
Psalms 5:4 क्योंकि तू ऐसा ईश्वर नहीं जो दुष्टता से प्रसन्न हो; बुराई तेरे साथ नहीं रह सकती।
Psalms 5:5 घमंडी तेरे सम्मुख खड़े होने न पांएगे; तुझे सब अनर्थकारियों से घृणा है। 
Psalms 5:6 तू उन को जो झूठ बोलते हैं नाश करेगा; यहोवा तो हत्यारे और छली मनुष्य से घृणा करता है। 
Psalms 5:7 परन्तु मैं तो तेरी अपार करूणा के कारण तेरे भवन में आऊंगा, मैं तेरा भय मानकर तेरे पवित्र मन्दिर की ओर दण्डवत करूंगा। 
Psalms 5:8 हे यहोवा, मेरे शत्रुओं के कारण अपने धर्म के मार्ग में मेरी अगुवाई कर; मेरे आगे आगे अपने सीधे मार्ग को दिखा। 
Psalms 5:9 क्योंकि उनके मुंह में कोई सच्चाई नहीं; उनके मन में निरी दुष्टता है। उनका गला खुली हुई कब्र है, वे अपनी जीभ से चिकनी चुपड़ी बातें करते हैं। 
Psalms 5:10 हे परमेश्वर तू उन को दोषी ठहरा; वे अपनी ही युक्तियों से आप ही गिर जाएं; उन को उनके अपराधों की अधिकाई के कारण निकाल बाहर कर, क्योंकि उन्होंने तुझ से बलवा किया है।
Psalms 5:11 परन्तु जितने तुझ पर भरोसा रखते हैं वे सब आनन्द करें, वे सर्वदा ऊंचे स्वर से गाते रहें; क्योंकि तू उनकी रक्षा करता है, और जो तेरे नाम के प्रेमी हैं तुझ में प्रफुल्लित हों। 
Psalms 5:12 क्योंकि तू धर्मी को आशिष देगा; हे यहोवा, तू उसको अपने अनुग्रहरूपी ढाल से घेरे रहेगा।

एक साल में बाइबल: 

  • व्यवस्थाविवरण 26-27
  • मरकुस 14:27-53


शनिवार, 1 अक्टूबर 2016

रिवाज़


   मेरी बढ़ती उम्र में हमारे घर के जिन नियमों का हमें पालन करना होता था उन में से एक नियम था कि हम क्रोध को साथ लिए हुए सोने के लिए बिस्तर में नहीं जा सकते थे, जो कि परमेश्वर के वचन बाइबल में इफिसियों 4:26 पर आधारित था। सोने जाने से पहले हमें अपने सारे झगड़ों और परस्पर असहमतियों का निवारण करना होता था। इसके साथ का एक दूसरा नियम था कि सोने जाते समय हमारे माता-पिता हम भाई बहनों से कहते थे, "शुभ-रात्रि। हम तुम से प्रेम करते हैं" और प्रत्युत्तर में हम भी कहते थे, "शुभ-रात्रि। हम भी आपसे प्रेम करते हैं।"

   इस पारिवारिक रिवाज़ के महत्व को मैं हाल ही में और गहराई से समझने पाई। मेरी माँ फेफड़े के कैंसर के साथ मरणासन रोगियों की देखभाल करने वाले एक अस्पताल में भरती थीं, और उनकी उत्तर देने की क्षमता दिन-प्रतिदिन घटती जा रही थी। लेकिन प्रति-रात्रि उनके पास से जाने के समय मैं उन से कहती थी, "माँ, मैं आप से प्रेम करती हूँ।" और यद्यपि वे और कुछ कह पाने में असमर्थ थीं, लेकिन फिर भी वे उत्तर देतीं, "मैं भी तुम से प्रेम करती हूँ।" अपनी उस बढ़ती उम्र के समय में मैंने कभी नहीं सोचा था कि घर का यह रिवाज़, इतने वर्षों के बाद, मेरे लिए इतना बहुमूल्य उपहार बन जाएगा।

   समय और पुनरावृति अकसर हमारे रिवाज़ों से उनके अर्थ और महत्व को चुरा लेते हैं; लेकिन कुछ रिवाज़ बहुमूल्य आत्मिक सत्यों को स्मरण दिलाते रहने के माध्यम होते हैं। आज के समान ही, प्रथम शताब्दी के मसीही विश्वासियों ने भी प्रभु-भोज का दुरुपयोग किया था, जिससे उनके लिए उसका अर्थ और महत्व हल्का पड़ने लग गया था। लेकिन प्रेरित पौलुस ने उन लोगों से इसे बन्द कर देने के लिए नहीं कहा; वरन उन्हें स्मरण करवाया कि, "क्योंकि जब कभी तुम यह रोटी खाते, और इस कटोरे में से पीते हो, तो प्रभु की मृत्यु को जब तक वह न आए, प्रचार करते हो" (1 कुरिन्थियों 11:26)।

   ऐसे अर्थपूर्ण और महत्वपूर्ण रिवाज़ों को छोड़ नहीं देना चाहिए; वरन उनके सच्चे अर्थ और महत्व को लोगों के सामने लाना चाहिए, उन्हें पुनःस्थापित करना चाहिए। - जूली ऐकैरमैन लिंक


किसी भी रिवाज़ का अर्थ और महत्व खो सकता है; 
लेकिन इसका यह तात्पर्य नहीं है कि वह अर्थहीन या महत्वहीन हो गया है।

क्रोध तो करो, पर पाप मत करो: सूर्य अस्‍त होने तक तुम्हारा क्रोध न रहे। - इफिसियों 4:26

बाइबल पाठ: 1 कुरिन्थियों 11:23-34
1 Corinthians 11:23 क्योंकि यह बात मुझे प्रभु से पहुंची, और मैं ने तुम्हें भी पहुंचा दी; कि प्रभु यीशु ने जिस रात वह पकड़वाया गया रोटी ली। 
1 Corinthians 11:24 और धन्यवाद कर के उसे तोड़ी, और कहा; कि यह मेरी देह है, जो तुम्हारे लिये है: मेरे स्मरण के लिये यही किया करो। 
1 Corinthians 11:25 इसी रीति से उसने बियारी के पीछे कटोरा भी लिया, और कहा; यह कटोरा मेरे लोहू में नई वाचा है: जब कभी पीओ, तो मेरे स्मरण के लिये यही किया करो। 
1 Corinthians 11:26 क्योंकि जब कभी तुम यह रोटी खाते, और इस कटोरे में से पीते हो, तो प्रभु की मृत्यु को जब तक वह न आए, प्रचार करते हो। 
1 Corinthians 11:27 इसलिये जो कोई अनुचित रीति से प्रभु की रोटी खाए, या उसके कटोरे में से पीए, वह प्रभु की देह और लोहू का अपराधी ठहरेगा। 
1 Corinthians 11:28 इसलिये मनुष्य अपने आप को जांच ले और इसी रीति से इस रोटी में से खाए, और इस कटोरे में से पीए। 
1 Corinthians 11:29 क्योंकि जो खाते-पीते समय प्रभु की देह को न पहिचाने, वह इस खाने और पीने से अपने ऊपर दण्‍ड लाता है। 
1 Corinthians 11:30 इसी कारण तुम में से बहुत से निर्बल और रोगी हैं, और बहुत से सो भी गए। 
1 Corinthians 11:31 यदि हम अपने आप में जांचते, तो दण्‍ड न पाते। 
1 Corinthians 11:32 परन्तु प्रभु हमें दण्‍ड देकर हमारी ताड़ना करता है इसलिये कि हम संसार के साथ दोषी न ठहरें। 
1 Corinthians 11:33 इसलिये, हे मेरे भाइयों, जब तुम खाने के लिये इकट्ठे होते हो, तो एक दूसरे के लिये ठहरा करो। 
1 Corinthians 11:34 यदि कोई भूखा हो, तो अपने घर में खा ले जिस से तुम्हारा इकट्ठा होना दण्‍ड का कारण न हो: और शेष बातों को मैं आकर ठीक कर दूंगा।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 11-13
  • इफिसियों 4


शुक्रवार, 18 मार्च 2016

सुगन्ध


   कुछ सुगन्ध अविस्मर्णीय होती हैं। अभी हाल की बात है, मेरे पति की शेविंग क्रीम समाप्त होने को थी। मैंने कहा, "मैं कुछ खरीद लाऊँगी"; उन्होंने अपनी शेविंग क्रीम दिखाते हुए पूछा, "तुम यह वाली ही लाना; मुझे इसकी सुगन्ध बहुत पसन्द है - मेरे पिता भी सदा यही प्रयोग करते थे।" मैं यह सुनकर मुस्कुराई और मुझे अपने साथ घटी वह घटना स्मरण हो आई जब अचानक ही कहीं से मुझे उस शैम्पू की सुगन्ध आई थी जो मेरे बचपन में मेरी माँ मेरे बाल धोने के लिए प्रयोग करती थीं और उस सुगन्ध से मैं अपने बचपन की यादों में चली गई थी। मेरे और मेरे पति के अन्दर, सुगन्ध के कारण, एक भावनात्मक प्रतिक्रिया हुई थी और हम उन लोगों की सुखद यादों में चले गए थे जो हमारे प्रीय थे।

   ऑलिवर वेन्डल होम्स ने कहा था, "यादें, कलपनाएं, बीती भावनाएं और भावनात्मक प्रतिक्रियाएं किसी भी अन्य माध्यम की अपेक्षा सुगन्ध के द्वारा अधिक सरलता से जागृत हो जाती हैं।"

   इसलिए, कैसा रहे यदि हमारे जीवन ऐसे हों जो सुगन्ध के समान लोगों को हमारे प्रभु परमेश्वर की ओर आकर्षित करें? परमेश्वर के वचन बाइबल में 2 कुरिन्थियों 2:15 में प्रेरित पौलुस लिखता है: "क्योंकि हम परमेश्वर के निकट उद्धार पाने वालों, और नाश होने वालों, दोनों के लिये मसीह के सुगन्‍ध हैं।" अर्थात हमारे जीवन की सुगन्ध ना केवल परमेश्वर को भाने वाली हो, वरन उससे अन्य लोग भी परमेश्वर की ओर आकर्षित होने पाएं, ना कि हमारे कारण लोग परमेश्वर से दूर हों। हम मसीही विश्वासी जो प्रभु यीशु के बलिदान के महत्व को जानते और समझते हैं, हमारे पास यह सुअवसर है कि हम संसार में मसीह यीशु की सुगन्ध बनकर जीवन व्यतीत करें, मसीह यीशु के गुण और चरित्र को औरों को स्मरण कराते रहने के माध्यम बनें।

   मसीह यीशु की समानता में होने की मीठी सुगन्ध, जगत के उद्धारकर्ता की ओर लोगों को आकर्षित करने का अत्यन्त प्रभावी माध्यम बन सकता है। - सिंडी हैस कैसपर


जब हम परमेश्वर के साथ-साथ चलते हैं तो अपने पीछे एक ऐसी मोहक सुगन्ध छोड़ जाते हैं जो दूसरों को मसीह यीशु का अनुसरण करने के लिए प्रेरित करती है।

और प्रेम में चलो; जैसे मसीह ने भी तुम से प्रेम किया; और हमारे लिये अपने आप को सुखदायक सुगन्‍ध के लिये परमेश्वर के आगे भेंट कर के बलिदान कर दिया। - इफिसियों 5:2

बाइबल पाठ: 2 कुरिन्थियों 2:12-17
2 Corinthians 2:12 और जब मैं मसीह का सुसमाचार, सुनाने को त्रोआस में आया, और प्रभु ने मेरे लिये एक द्वार खोल दिया। 
2 Corinthians 2:13 तो मेरे मन में चैन न मिला, इसलिये कि मैं ने अपने भाई तितुस को नहीं पाया; सो उन से विदा हो कर मैं मकिदुनिया को चला गया। 
2 Corinthians 2:14 परन्तु परमेश्वर का धन्यवाद हो, जो मसीह में सदा हम को जय के उत्‍सव में लिये फिरता है, और अपने ज्ञान का सुगन्‍ध हमारे द्वारा हर जगह फैलाता है। 
2 Corinthians 2:15 क्योंकि हम परमेश्वर के निकट उद्धार पाने वालों, और नाश होने वालों, दोनों के लिये मसीह के सुगन्‍ध हैं। 
2 Corinthians 2:16 कितनों के लिये तो मरने के निमित्त मृत्यु की गन्‍ध, और कितनो के लिये जीवन के निमित्त जीवन की सुगन्‍ध, और इन बातों के योग्य कौन है? 
2 Corinthians 2:17 क्योंकि हम उन बहुतों के समान नहीं, जो परमेश्वर के वचन में मिलावट करते हैं; परन्तु मन की सच्चाई से, और परमेश्वर की ओर से परमेश्वर को उपस्थित जानकर मसीह में बोलते हैं। 

एक साल में बाइबल: 
  • व्यवस्थाविवरण 32-34
  • मरकुस 15:26-47


बुधवार, 25 जून 2014

उपयोग


   जेम्स को दिल की बीमारी थी और उसकी पत्नि बेक्की उसकी देखभाल किया करती थी। लेकिन जब यह देखभाल करना बेक्की के लिए कठिन होने लगा तब उन्होंने निर्णय लिया कि वे किसी ऐसे सेवा स्थान पर भर्ती हो जाएंगे जहाँ देखभाल में उन्हें सहायता मिल सके। बेक्की ने इसके लिए अनेक सेवा स्थान देखे। हर स्थान पर जाकर उसका पहला प्रश्न होता था, "क्या वे लोग भोजन को पका कर तरल या भर्ते के समान बनाते हैं?" बेक्की को सेवा स्थान में जेम्स के लिए सही भोजन मिल पाने की चिन्ता थी क्योंकि जेम्स ठोस भोजन निगल नहीं पाता था। आम तौर से बेक्की को अपने प्रश्न के उत्तर में "नहीं" ही सुनने को मिलता था, लेकिन फिर भी वह जेम्स की देखभाल के लिए सही स्थान खोजने के अपने प्रयास में लगी रही। अन्ततः एक मसीही सेवा स्थान पर उसे उत्तर में "हाँ" सुनने को मिला।

   यद्यपि जेम्स और बेक्की मसीह यीशु में विश्वास नहीं रखते थे और इस विषय को लेकर अपने एक पड़ौसी से उनकी कई बार बहस भी हो चुकी थी, फिर भी जेम्स की देखभाल के लिए उन्होंने उस मसीही सेवा स्थान में आकर रहना स्वीकार किया क्योंकि वहाँ उन्हें जेम्स की आवश्यकता के अनुसार भोजन मिल रहा था। वहाँ रहते हुए उन्होंने वहाँ होने वाली आराधना में जाना और परमेश्वर के वचन को सुनना आरंभ किया; उन्होंने वहाँ के लोगों द्वारा हो रही उनकी अच्छी देखभाल को भी देखा, और एक दिन जेम्स ने अपना जीवन प्रभु यीशु को समर्पित कर दिया। जेम्स का मानना है कि प्रभु अपने वचन के अनुसार उसका पीछा कर रहा था (यूहन्ना 6:44), और परमेश्वर ने भोजन का उपयोग उसे उस मसीही सेवा स्थान पर लाने के लिए किया, जहाँ उसे प्रभु के लोगों की सेवा पाने और परमेश्वर का वचन सुनने का अवसर मिला और वह मसीह यीशु में सारे संसार के सभी लोगों के लिए उपलब्ध पापों की क्षमा और उद्धार का सुसमाचार सुनने पाया, समझने पाया और उसपर विश्वास करने पाया।

   मन परिवर्तन परमेश्वर का कार्य है; अपने प्रेम में होकर परमेश्वर लोगों को अपने निकट खींचता है। इसके लिए वह परिस्थितियों का, अपने वचन बाइबल का, और यहाँ तक कि तरल या भर्तेनुमा किए गए भोजन का भी उपयोग करता है। मसीही विश्वासी होने के नाते परमेश्वर के लिए अपनी गवाही को लेकर उत्साहित रहें; वह आपको, आपके व्यवहार को और आपके वचनों को उन लोगों तक मसीह यीशु में उद्धार के सुसमाचार को पहुँचाने का उपयोग करेगा जिन्हें मसीह यीशु के सुसमाचार की आवश्यकता है। - ऐनी सेटास


प्रेम वह चुंबक है जो मसीही विश्वासियों को एक दूसरे के निकट और अविश्वासियों को मसीह यीशु के निकट ले लाता है।

और मैं यदि पृथ्वी पर से ऊंचे पर चढ़ाया जाऊंगा, तो सब को अपने पास खीचूंगा। - यूहन्ना 12:32

बाइबल पाठ: यूहन्ना 6:44-51
John 6:42 और उन्होंने कहा; क्या यह यूसुफ का पुत्र यीशु नहीं, जिस के माता पिता को हम जानते हैं? तो वह क्योंकर कहता है कि मैं स्वर्ग से उतरा हूं। 
John 6:43 यीशु ने उन को उत्तर दिया, कि आपस में मत कुड़कुड़ाओ। 
John 6:44 कोई मेरे पास नहीं आ सकता, जब तक पिता, जिसने मुझे भेजा है, उसे खींच न ले; और मैं उसको अंतिम दिन फिर जिला उठाऊंगा। 
John 6:45 भविष्यद्वक्ताओं के लेखों में यह लिखा है, कि वे सब परमेश्वर की ओर से सिखाए हुए होंगे। जिस किसी ने पिता से सुना और सीखा है, वह मेरे पास आता है। 
John 6:46 यह नहीं, कि किसी ने पिता को देखा परन्तु जो परमेश्वर की ओर से है, केवल उसी ने पिता को देखा है। 
John 6:47 मैं तुम से सच सच कहता हूं, कि जो कोई विश्वास करता है, अनन्त जीवन उसी का है। 
John 6:48 जीवन की रोटी मैं हूं। 
John 6:49 तुम्हारे बाप दादों ने जंगल में मन्ना खाया और मर गए। 
John 6:50 यह वह रोटी है जो स्वर्ग से उतरती है ताकि मनुष्य उस में से खाए और न मरे। 
John 6:51 जीवन की रोटी जो स्वर्ग से उतरी मैं हूं। यदि कोई इस रोटी में से खाए, तो सर्वदा जीवित रहेगा और जो रोटी मैं जगत के जीवन के लिये दूंगा, वह मेरा मांस है।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 94-96