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सोमवार, 11 सितंबर 2017

समर्पण


   मेरे पुरखे मिशिगन प्रांत में आकर बस जाने वालों आरंभिक लोगों में से थे। उन्होंने भूमि को साफ किया, खेती की, बग़ीचे उगाए, जिससे वे अपने परिवार और बच्चों का भरण-पोषण कर सकें। मेरे परिवार में खेती-बाड़ी के प्रति यह रुझान पीढ़ियों से चला आ रहा है। मेरे पिता का जन्म और पालन-पोषण भी मिशिगन के एक किसानी करने वाले परिवार में हुआ था और उन्हें बाग़बानी का शौक था। संभवतं इसी कारण मुझे भी बाग़बानी का और उपजाऊ मिट्टी की गन्ध का शौक है। मुझे सुगन्धित फूलों वाले पौधे और गुलाब के पौधे उगाना और उनकी देखभाल करना बहुत पसन्द है। यदि यह करने में खर-पतवार न हों तो बहुत अच्छा हो; परन्तु समय-समय पर मुझे खर-पतवार को निकालना होता है, बग़ीचे की सफाई करनी होती है।

   जब मुझे इस खर-पतवार के साथ जूझना पड़ता है तो मुझे एक और बाग़ स्मरण हो आता है - अदन की वाटिका। परमेश्वर का वचन बाइबल हमें बताती है कि वह परमेश्वर द्वारा लगाया गया सिध्द बाग़ था, जब तक कि आदम और हव्व द्वारा परमेश्वर की अनाज्ञाकारिता के पाप ने उसे बिगाड़ नहीं दिया। वहीं से आदम और हव्वा तथा उनके बाद के प्रत्येक बाग़बान के लिए खर-पतवार समस्या बन गए (उत्पत्ति 3:17-18)।

   इसके अतिरिक्त बाइबल एक और बाग़ के बारे में भी बताती है - गतसमनी का बाग़, जहाँ अदन की वाटिका में आरंभ हुए पाप के दुषपरिणामों को उलट देने के लिए प्रभु यीशु मसीह ने प्रार्थना में परमेश्वर पिता के समक्ष संघर्ष किया, और विनती की कि यदि संभव हो तो मनुष्यों के पाप के दोष को हटा देने के लिए कोई और मार्ग मिल सके। गतसमनी के बाग़ में प्रभु यीशु मसीह ने परमेश्वर पिता के आगे आज्ञाकारिता में सर झुका कर क्रूस पर मृत्यु की घोर यातना सहना स्वीकार करते हुए कहा, "तेरी इच्छा पूरी हो" (मत्ती 26:42)।

   क्योंकि प्रभु यीशु ने गतसमनी के बाग़ में समर्पण किया था, इसलिए आज संसार भर में सभी मनुष्यों के पास परमेश्वर के अनुग्रह में साधारण विश्वास द्वारा पापों की क्षमा और अनन्त आशीष के जीवन का मार्ग उपलब्ध है। आज जो भी सच्चे मन और स्वेच्छा से प्रभु परमेश्वर को अपना जीवन समर्पण करता है, परमेश्वर उसके जीवन से खर-पतवार निकाल कर, सफाई करके, उसे अपनी स्वर्गीय आशीषों से भर देता है। - जो स्टोवैल


समर्पण तथा विश्वास के बोने और उगाए जाने से, 
आत्मिक उन्नति और आशीष की फसल मिलती है।

तब मैं ने कहा, देख, मैं आ गया हूं, (पवित्र शास्त्र में मेरे विषय में लिखा हुआ है) ताकि हे परमेश्वर तेरी इच्छा पूरी करूं। - इब्रानियों 10:7 

बाइबल पाठ: मत्ती 26:36-42
Matthew 26:36 तब यीशु ने अपने चेलों के साथ गतसमनी नाम एक स्थान में आया और अपने चेलों से कहने लगा कि यहीं बैठे रहना, जब तक कि मैं वहां जा कर प्रार्थना करूं। 
Matthew 26:37 और वह पतरस और जब्‍दी के दोनों पुत्रों को साथ ले गया, और उदास और व्याकुल होने लगा। 
Matthew 26:38 तब उसने उन से कहा; मेरा जी बहुत उदास है, यहां तक कि मेरे प्राण निकला चाहते: तुम यहीं ठहरो, और मेरे साथ जागते रहो। 
Matthew 26:39 फिर वह थोड़ा और आगे बढ़कर मुंह के बल गिरा, और यह प्रार्थना करने लगा, कि हे मेरे पिता, यदि हो सके, तो यह कटोरा मुझ से टल जाए; तौभी जैसा मैं चाहता हूं वैसा नहीं, परन्तु जैसा तू चाहता है वैसा ही हो। 
Matthew 26:40 फिर चेलों के पास आकर उन्हें सोते पाया, और पतरस से कहा; क्या तुम मेरे साथ एक घड़ी भी न जाग सके? 
Matthew 26:41 जागते रहो, और प्रार्थना करते रहो, कि तुम परीक्षा में न पड़ो: आत्मा तो तैयार है, परन्तु शरीर दुर्बल है। 
Matthew 26:42 फिर उसने दूसरी बार जा कर यह प्रार्थना की; कि हे मेरे पिता, यदि यह मेरे पीए बिना नहीं हट सकता तो तेरी इच्छा पूरी हो।

एक साल में बाइबल: 
  • नीतिवचन 10-12
  • 2 कुरिन्थियों 4


शुक्रवार, 3 फ़रवरी 2017

बढ़ोतरी


   चीन में मुहावरों का प्रयोग आम बात है, और उनके मुहावरों के पीछे बहुधा कुछ नीति-कथाएं होती हैं। ऐसा ही एक मुहावरा "बढ़ने के लिए फसल को खींचना" सौंग राजवंश के शासन काल के समय के एक किसान से संबंधित है। वह किसान बहुत आतुर था कि चावल के पौधों की उसकी फसल तेज़ी से बढ़े; इसके लिए उसे एक उपाय सूझा - वह पौधों को थोड़ा सा खींचकर उन्हें लंबा कर देगा। दिन भर ऐसा करने के बाद उस किसान ने अपने चावल के खेत पर दृष्टि की, और देखकर प्रसन्न हुआ कि उसके खेत के पौधे पहले से कुछ बढ़े हुए दिखाई दे रहे थे। लेकिन उसका यह आनन्द थोड़े ही समय का था; क्योंकि अगले ही दिन उसने देखा कि सारे पौधे मुर्झा गए हैं, क्योंकि उसके कार्य से उनकी जड़ों को क्षति पहुँची थी।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में तिमुथियुस को लिखी अपनी पत्री में प्रभु यीशु में मिलने वाले उद्धार के सुसमाचार के प्रचार का कार्य करने वाले सेवक को किसान के समान बताया है। पौलुस ने तिमुथियुस को प्रोत्साहित करने के लिए लिखा कि खेती के समान, प्रभु यीशु के चेले बनाना एक लगातार चलते रहने वाला कठिन मेहनत का कार्य है। किसान के समान ही सेवक भी लोगों के जीवनों में हल जोतता है, परमेश्वर के वचन के बीज बोता है, उन बीजों के अंकुरित होने की प्रतीक्षा करता है, उनके लिए प्रार्थना करता है। हम सभी चाहते हैं कि हमारे परिश्रम का फल भी शीघ्र दिखाई दे, परन्तु बढ़ोतरी समय लेती है। और जैसा उपरोक्त चीनी मुहावरे की कहानी सिखाती है, उस बढ़ोतरी में तेज़ी लाने के प्रयास बहुधा लाभदायक नहीं वरन नुकसानदेह ही होते हैं। बाइबल टीकाकार विलियम हैंड्रिकसन ने लिखा: "यदि तिमुथियुस...परमेश्वर द्वारा उसे दिए गए कार्य को अच्छे से करने के लिए पूरा-पूरा प्रयास करेगा...तो वह दूसरों के जीवनों में उसे...उन महिमामय फलों का आरंभ दिखेगा जिनका उल्लेख गलतियों 5:22-23 में है।"

   जब हम विश्वासयोग्यता के साथ परिश्रम करते हैं, धीरज के साथ प्रभु परमेश्वर के समय की प्रतीक्षा करते हैं, तो परमेश्वर से मिलने वाली बढ़ोतरी और फल भी देखने पाते हैं। - पोह पैंग चिया


खेत जोतना तथा बीज बोना हमारा कार्य है;
उस परिश्रम से फसल उत्पन्न करना परमेश्वर का।

पर आत्मा का फल प्रेम, आनन्द, मेल, धीरज, और कृपा, भलाई, विश्वास, नम्रता, और संयम हैं; ऐसे ऐसे कामों के विरोध में कोई भी व्यवस्था नहीं। - गलतियों 5:22-23

बाइबल पाठ: 2 तिमुथियुस 2:1-6; 1 कुरिन्थियों 3:5-9
2 Timothy 2:1 इसलिये हे मेरे पुत्र, तू उस अनुग्रह से जो मसीह यीशु में है, बलवन्‍त हो जा। 
2 Timothy 2:2 और जो बातें तू ने बहुत गवाहों के साम्हने मुझ से सुनी हैं, उन्हें विश्वासी मनुष्यों को सौंप दे; जो औरों को भी सिखाने के योग्य हों। 
2 Timothy 2:3 मसीह यीशु के अच्‍छे योद्धा की नाईं मेरे साथ दुख उठा। 
2 Timothy 2:4 जब कोई योद्धा लड़ाई पर जाता है, तो इसलिये कि अपने भरती करने वाले को प्रसन्न करे, अपने आप को संसार के कामों में नहीं फंसाता 
2 Timothy 2:5 फिर अखाड़े में लड़ने वाला यदि विधि के अनुसार न लड़े तो मुकुट नहीं पाता। 
2 Timothy 2:6 जो गृहस्थ परिश्रम करता है, फल का अंश पहिले उसे मिलना चाहिए।

1 Corinthians 3:5 अपुल्लोस क्या है? और पौलुस क्या है? केवल सेवक, जिन के द्वारा तुम ने विश्वास किया, जैसा हर एक को प्रभु ने दिया। 
1 Corinthians 3:6 मैं ने लगाया, अपुल्लोस ने सींचा, परन्तु परमेश्वर ने बढ़ाया। 
1 Corinthians 3:7 इसलिये न तो लगाने वाला कुछ है, और न सींचने वाला, परन्तु परमेश्वर जो बढ़ाने वाला है। 
1 Corinthians 3:8 लगाने वाला और सींचने वाला दानों एक हैं; परन्तु हर एक व्यक्ति अपने ही परिश्रम के अनुसार अपनी ही मजदूरी पाएगा। 
1 Corinthians 3:9 क्योंकि हम परमेश्वर के सहकर्मी हैं; तुम परमेश्वर की खेती और परमेश्वर की रचना हो।

एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 31-33
  • मत्ती 22:1-22


सोमवार, 16 नवंबर 2015

श्रेय


   मैं और मेरे पति एक ग्रामीण इलाके में रहते हैं जिसके चारों ओर खेत ही खेत हैं। हमारे इस खेतीहर इलाके में अनेक स्थानों पर यह वाक्य लिखा हुआ है: ’यदि आज आपने भोजन किया है तो किसान के धन्यवादी हों।’ इसमें कोई दो राय नहीं कि किसान हमारे धन्यवाद के हकदार हैं; वे हर मौसम को झेलते हुए खेत जोतने की कड़ी मेहनत करते हैं, बीज बोते हैं, फसल की देखभाल करते हैं फिर अन्न काट कर बाज़ारों में पहुँचाते हैं जिससे सब लोगों को भोजन मिलता रहे, उन्हें भूखों परेशान ना होना पड़े।

   लेकिन जितनी बार मैं किसानों का धन्यवाद करती हूं, साथ ही उस परमेश्वर पिता की भी धन्यवादी होती हूँ जिसे इस सारे भोजन को बनाने, उगाने, उपलब्ध कराने का श्रेय जाता है। खेत में अन्न उगाने के लिए धरती में उपयुक्त गुण, सूरज की रौशनी, सींचने के लिए बारिश, धरती से निकल कर बाहर आने के लिए अँकुर को सामर्थ, अँकुर से पौधा और फिर पौधे में अन्न उगना आदि सब परमेश्वर की ओर से ही तो दिया जाता है। यद्यपि धरती और उसकी हर चीज़ परमेश्वर की है (भजन 24:1), परमेश्वर ने हम मनुष्यों को उसके रख-रखाव और देखभाल के लिए नियुक्त किया है। यह हमारी ज़िम्मेदारी है कि हम परमेश्वर द्वारा दिए गए संसाधनों का प्रयोग वैसे करें जैसा वह चाहता है, पृथ्वी पर उसके कार्य करने के लिए (भजन 115:16)।

   जैसे हम मनुष्य परमेश्वर की भौतिक सृष्टि के भंडारी हैं, हम समाज के लिए परमेश्वर की आत्मिक योजना को पूरा करने के लिए भी ज़िम्मेदार हैं। यह आत्मिक ज़िम्मेदारी निभाने के लिए हमें उनको योग्य आदर देना है जिन्हें उसने हमारा अधिकारी ठहराया है, हमें अपने कर अदा करने हैं और आपस में प्रेम से एक दूसरे के साथ रहना और निर्वाह करना है (रोमियों 13:7-8)। लेकिन एक बात है जिसका हकदार केवल परमेश्वर है - हमारी सारी स्तुति और हमारे द्वारा उसकी महिमा, क्योंकि सृष्टि की हर बात को बनाने, संचालित तथा संभव करने वाला केवल परमेश्वर ही है (भजन 96:8-9)। - जूली ऐकैरमैन लिंक


परमेश्वर के रहस्यमय तरीके हमारी असीमित आराधना के हकदार हैं।

यहोवा के नाम की ऐसी महिमा करो जो उसके योग्य है; भेंट ले कर उसके आंगनों में आओ! पवित्रता से शोभायमान हो कर यहोवा को दण्डवत करो; हे सारी पृथ्वी के लोगों उसके साम्हने कांपते रहो! - भजन 96:8-9

बाइबल पाठ: रोमियों13:1-10
Romans 13:1 हर एक व्यक्ति प्रधान अधिकारियों के आधीन रहे; क्योंकि कोई अधिकार ऐसा नहीं, जो परमेश्वर की ओर से न हो; और जो अधिकार हैं, वे परमेश्वर के ठहराए हुए हैं। 
Romans 13:2 इस से जो कोई अधिकार का विरोध करता है, वह परमेश्वर की विधि का साम्हना करता है, और साम्हना करने वाले दण्ड पाएंगे। 
Romans 13:3 क्योंकि हाकिम अच्छे काम के नहीं, परन्तु बुरे काम के लिये डर का कारण हैं; सो यदि तू हाकिम से निडर रहना चाहता है, तो अच्छा काम कर और उस की ओर से तेरी सराहना होगी; 
Romans 13:4 क्योंकि वह तेरी भलाई के लिये परमेश्वर का सेवक है। परन्तु यदि तू बुराई करे, तो डर; क्योंकि वह तलवार व्यर्थ लिये हुए नहीं और परमेश्वर का सेवक है; कि उसके क्रोध के अनुसार बुरे काम करने वाले को दण्ड दे। 
Romans 13:5 इसलिये आधीन रहना न केवल उस क्रोध से परन्तु डर से अवश्य है, वरन विवेक भी यही गवाही देता है। 
Romans 13:6 इसलिये कर भी दो, क्योंकि शासन करने वाले परमेश्वर के सेवक हैं, और सदा इसी काम में लगे रहते हैं। 
Romans 13:7 इसलिये हर एक का हक चुकाया करो, जिस कर चाहिए, उसे कर दो; जिसे महसूल चाहिए, उसे महसूल दो; जिस से डरना चाहिए, उस से डरो; जिस का आदर करना चाहिए उसका आदर करो।
Romans 13:8 आपस के प्रेम से छोड़ और किसी बात में किसी के कर्जदार न हो; क्योंकि जो दूसरे से प्रेम रखता है, उसी ने व्यवस्था पूरी की है। 
Romans 13:9 क्योंकि यह कि व्यभिचार न करना, हत्या न करना; चोरी न करना; लालच न करना; और इन को छोड़ और कोई भी आज्ञा हो तो सब का सारांश इस बात में पाया जाता है, कि अपने पड़ोसी से अपने समान प्रेम रख। 
Romans 13:10 प्रेम पड़ोसी की कुछ बुराई नहीं करता, इसलिये प्रेम रखना व्यवस्था को पूरा करना है।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 3-4
  • इब्रानियों 11:20-40


बुधवार, 9 फ़रवरी 2011

न परमेश्वर है, न आलू!

एक कम्यूनिस्ट देश में एक सामाजिक संसाधन अधिकारी गांव के एक किसान के पास पहुंचा और उसकी आलू की फसल के बारे जानना चाहा। किसान ने कहा "फसल तो बहुत बढ़िया रही।" अधिकरी प्रसन्न होकर बोला, "बहुत अच्छे, बहुत अच्छे - कितनी फसल हुई?" किसान ने बोला, "ओह, फसल तो परमेश्वर जैसी बढ़िया हुई।" अधिकारी की भृकुटि तन गई और वह सखत भाव से बोला, "कॉमरेड, तुम्हें नहीं भूलना चहिये कि हम किसी परमेश्वर में विश्वास नहीं करते और कोई परमेश्वर नहीं है।" किसान ने कहा, "जनाब आप सही कह रहे हैं, मैं भी वही कह रहा हूँ - न परमेश्वर है, न आलू!"

इस हास्य कथा में एक गहरा अर्थ छुपा है - परमेश्वर ही हर बात का स्त्रोत है - चाहे हम इसे माने या न माने। प्रेरित पौलुस ने अपने अविश्वासी श्रोताओं से कहा "क्‍योंकि हम उसी में जीवित रहते, और चलते-फिरते, और स्थिर रहते हैं" (प्रेरितों १७:२८)। उसने परमेश्वर के सृष्टि की रचना और संचालन के महान कार्यों को परमेश्वर के पुत्र प्रभु यीशु मसीह में केंद्रित दिखाया (कुलुस्सियों १:१६-१८)। उसके बिना हम एक सांस भी नहीं ले सकते, हमारे शरीर कुछ नहीं कर सकते और हमारी प्रतिदिन की आवश्यक्ताएं पूरी नहीं हो सकतीं; कहने का तात्पर्य यह है कि जीवन संभव नहीं है।

नास्तिकों ने अपने आप को कायल कर रखा है कि परमेश्वर नहीं है, लेकिन हम जो प्रभु यीशु मसीह के द्वारा परमेश्वर की संतान हैं, इससे भिन्न जानते हैं। लेकिन मुख्य प्रश्न तो यह है कि क्या हम अपने इस विश्वास को अपने जीवन द्वारा प्रदर्शित भी करते हैं?

प्रत्येक मसीही विश्वासी को प्रतिदिन अपनी प्रत्येक आवश्यक्ता के लिये अपने उद्धारकर्ता प्रभु पर आश्रित और आश्वस्त रहना चाहिये, और उसके अनुग्रहकारी हाथों से मिली अपनी प्रत्येक आशीश के लिये निरंतर उसका धन्यवादी और कृतज्ञ रहना चाहिए, और अपने जीवन से इस बात की गवाही संसार के समक्ष रखनी चाहिए। - डेनिस डी हॉन


संसाधनों और आवश्यक्ता पूर्ति की शेष कड़ियां किसी के भी हाथों में प्रतीत हों, पहली कड़ी सदा परमेश्वर ही के हाथ में होती है।

क्‍योंकि हम उसी में जीवित रहते, और चलते-फिरते, और स्थिर रहते हैं" - प्रेरितों १७:२८


बाइबल पाठ: कुलुस्सियों १:९-१९

इसी लिये जिस दिन से यह सुना है, हम भी तुम्हारे लिये यह प्रार्थना करने और बिनती करने से नहीं चूकते कि तुम सारे आत्मिक ज्ञान और समझ सहित परमेश्वर की इच्‍छा की पहिचान में परिपूर्ण हो जाओ।
ताकि तुम्हारा चाल-चलन प्रभु के योग्य हो, और वह सब प्रकार से प्रसन्न हो, और तुम में हर प्रकार के भले कामों का फल लगे, और परमेश्वर की पहिचान में बढ़ते जाओ।
और उस की महिमा की शक्ति के अनुसार सब प्रकार की सामर्थ से बलवन्‍त होते जाओ, यहां तक कि आनन्‍द के साथ हर प्रकार से धीरज और सहनशीलता दिखा सको।
और पिता का धन्यवाद करते रहो, जिस ने हमें इस योग्य बनाया कि ज्योति में पवित्र लोगों के साथ मीरास में समभागी हों।
उसी ने हमें अन्‍धकार के वश से छुड़ाकर अपने प्रिय पुत्र के राज्य में प्रवेश कराया।
जिस से हमें छुटकारा अर्थात पापों की क्षमा प्राप्‍त होती है।
वह तो अदृश्य परमेश्वर का प्रतिरूप और सारी सृष्‍टि में पहिलौठा है।
क्‍योंकि उसी में सारी वस्‍तुओं की सृष्‍टि हुई, स्‍वर्ग की हो अथवा पृथ्वी की, देखी या अनदेखी, क्‍या सिंहासन, क्‍या प्रभुतांए, क्‍या प्रधानताएं, क्‍या अधिकार, सारी वस्‍तुएं उसी के द्वारा और उसी के लिये सृजी गई हैं।
और वही सब वस्‍तुओं में प्रथम है, और सब वस्‍तुएं उसी में स्थिर रहती हैं।
और वही देह, अर्थात कलीसिया का सिर है, वही आदि है और मरे हुओं में से जी उठने वालों में पहिलौठा कि सब बातों में वही प्रधान ठहरे।
क्‍योंकि पिता की प्रसन्नता इसी में है कि उस में सारी परिपूर्णता वास करे।

एक साल में बाइबल:
  • लैव्यवस्था ६-७
  • मत्ती २५:१-३०