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बुधवार, 8 मार्च 2017

पवित्रता


   हम बहुधा ऐसे सर्वेक्षण देखते हैं जिनमें लोगों से पूछा जाता है कि क्या वे प्रसन्न हैं, या अपने काम से संतुष्ट हैं, या क्या जीवन का आनन्द ले रहे हैं, इत्यादि। परन्तु मैंने आज तक कभी कोई ऐसा सर्वेक्षण नहीं देखा है जिसमें पूछा गया हो "क्या आप पवित्रता का जीवन व्यतीत कर रहे हैं?" यदि आप से यह प्रश्न किया जाए तो अपने विषय में आप इस प्रश्न का क्या उत्तर देंगे?

   परमेश्वर के वचन बाइबल के शब्दों के एक शब्दकोष के अनुसार पवित्रता की परिभाषा है, "परमेश्वर के लिए पृथक होना और इस पृथक होने के अनुसार जीवन व्यतीत करना।" लेखक फ्रेड्रिक ब्युकनर ने कहा कि किसी व्यक्ति के चरित्र के बारे में लिखते समय, "उसमें पवित्रता को सजीव बनाने से कठिन और कुछ भी नहीं है।" उन्होंने आगे लिखा, "भलाई के सदगुण के समान, पवित्रता मनुष्यों का गुण है ही नहीं। पवित्रता ऐसा कुछ भी नहीं है जो मनुष्य कर सकें, वरन वह है जो परमेश्वर उनके अन्दर करता है।"

   बाइबल में रोमियों 6 में उस अद्भुत उपहार -’नए जीवन’ का चित्रण है जो परमेश्वर हमें मसीह यीशु में विश्वास लाने के द्वारा प्रदान करता है: "सो उस मृत्यु का बपतिस्मा पाने से हम उसके साथ गाड़े गए, ताकि जैसे मसीह पिता की महिमा के द्वारा मरे हुओं में से जिलाया गया, वैसे ही हम भी नए जीवन की सी चाल चलें" (रोमियों 6:4)। पवित्रता के अनुसरण का प्रयास प्रतिदिन तब ही होता है जब हम अपने पुराने चरित्र के अनुसार अपनी स्वार्थ-सिद्धी तथा आत्म-संतुष्टि के स्थान पर अपने आप को परमेश्वर का आज्ञाकारी बनाते हैं: "...परन्तु अब पाप से स्वतंत्र हो कर और परमेश्वर के दास बनकर तुम को फल मिला जिस से पवित्रता प्राप्त होती है, और उसका अन्त अनन्त जीवन है" (रोमियों 6:22)।

   क्या आप प्रतिदिन पवित्रता में बढ़ते जा रहे हैं? यदि आपने प्रभु यीशु में विश्वास से परमेश्वर के अनुग्रह और सामर्थ को अपना लिया है तो उसके द्वारा आपका भी गुंजायामान उत्तर हो सकता है, "हाँ! प्रतिदिन और अधिक।" - डेविड मैक्कैसलैण्ड


पवित्रता के खोजी होकर उसका अनुसरण करना जीवन अथवा मृत्यु का मामला है।

सब से मेल मिलाप रखने, और उस पवित्रता के खोजी हो जिस के बिना कोई प्रभु को कदापि न देखेगा। - इब्रानियों 12:14

बाइबल पाठ: रोमियों 6:12-23
Romans 6:12 इसलिये पाप तुम्हारे मरनहार शरीर में राज्य न करे, कि तुम उस की लालसाओं के आधीन रहो। 
Romans 6:13 और न अपने अंगो को अधर्म के हथियार होने के लिये पाप को सौंपो, पर अपने आप को मरे हुओं में से जी उठा हुआ जानकर परमेश्वर को सौंपो, और अपने अंगो को धर्म के हथियार होने के लिये परमेश्वर को सौंपो। 
Romans 6:14 और तुम पर पाप की प्रभुता न होगी, क्योंकि तुम व्यवस्था के आधीन नहीं वरन अनुग्रह के आधीन हो। 
Romans 6:15 तो क्या हुआ क्या हम इसलिये पाप करें, कि हम व्यवस्था के आधीन नहीं वरन अनुग्रह के आधीन हैं? कदापि नहीं। 
Romans 6:16 क्या तुम नहीं जानते, कि जिस की आज्ञा मानने के लिये तुम अपने आप को दासों की नाईं सौंप देते हो, उसी के दास हो: और जिस की मानते हो, चाहे पाप के, जिस का अन्त मृत्यु है, चाहे आज्ञा मानने के, जिस का अन्त धामिर्कता है।
Romans 6:17 परन्तु परमेश्वर का धन्यवाद हो, कि तुम जो पाप के दास थे तौभी मन से उस उपदेश के मानने वाले हो गए, जिस के सांचे में ढाले गए थे। 
Romans 6:18 और पाप से छुड़ाए जा कर धर्म के दास हो गए। 
Romans 6:19 मैं तुम्हारी शारीरिक दुर्बलता के कारण मनुष्यों की रीति पर कहता हूं, जैसे तुम ने अपने अंगो को कुकर्म के लिये अशुद्धता और कुकर्म के दास कर के सौंपा था, वैसे ही अब अपने अंगों को पवित्रता के लिये धर्म के दास कर के सौंप दो। 
Romans 6:20 जब तुम पाप के दास थे, तो धर्म की ओर से स्वतंत्र थे। 
Romans 6:21 सो जिन बातों से अब तुम लज्ज़ित होते हो, उन से उस समय तुम क्या फल पाते थे? 
Romans 6:22 क्योंकि उन का अन्त तो मृत्यु है परन्तु अब पाप से स्वतंत्र हो कर और परमेश्वर के दास बनकर तुम को फल मिला जिस से पवित्रता प्राप्त होती है, और उसका अन्त अनन्त जीवन है। 
Romans 6:23 क्योंकि पाप की मजदूरी तो मृत्यु है, परन्तु परमेश्वर का वरदान हमारे प्रभु मसीह यीशु में अनन्त जीवन है।

एक साल में बाइबल: 
  • व्यवस्थाविवरण 5-7
  • मरकुस 11:1-18


बुधवार, 14 अगस्त 2013

बाध्य?

   मेरे एक मित्र ने मुझे संसार भर के 20 सबसे सुन्दर चर्च भवनों की फोटो भेजीं। ये 20 चर्च भवन विश्व के उत्तर-पश्चिम गोलार्ध में स्थित आइसलैंड देश से लेकर दक्षिण-पूर्व गोलार्ध में स्थित भारत देश तक संसार भर में फैले हुए हैं और प्रत्येक चर्च वास्तुशिल्पकला का उत्कृष्ट और अनुपम नमूना है।

   यर्मियाह नबी के दिनों में इस्त्राएल के लिए परमेश्वर की उपासना का सबसे सुन्दर स्थान था यरूशालेम में स्थित मन्दिर जिसकी राजा योशिय्याह ने हाल ही में मरम्मत करवाई थी (2 इतिहास 34-35)। उस समय के इस्त्राएली लोग उस भवन इमारत से बहुत प्रभावित थे और उससे बहुत लगाव रखते थे (यर्मियाह 7:4), और उनकी यह मूर्खतापूर्ण धारणा थी कि उस मन्दिर के वहाँ होने के कारण परमेश्वर उन्हें उनके शत्रुओं से बचा कर रखने को बाध्य है। लेकिन इसके विप्रीत परमेश्वर ने अपने नबी यर्मियाह द्वारा इस्त्राएली लोगों तक यह सन्देश पहुँचाया कि उन लोगों के मन और जीवन में पाप बसा हुआ है जो उनकी उपासना को व्यर्थ कर दे रहा है (पद 3, 9-10)।

   बाइबल बताती है कि परमेश्वर उसके नाम से बनाई गई भव्य और सुन्दर इमारतों से प्रसन्न नहीं होता यदि उन इमारतों को उसके नाम के लिए उपयोग में लाने वालों के मन में पवित्रता की सुन्दरता बसी हुई नहीं है। ना ही परमेश्वर को एक बाहरी विधि सम्मत आराधना, रीति-रिवाज़ों एवं विधि-विधानों को मानना, नियत पर्वों का मनाया जाना और विशेष दिनों को उसके नाम से निर्धारित किया जाना भाता है यदि यह सब करने वालों के मन उसके प्रति सच्ची रीति से समर्पित और उनके जीवन उसके आज्ञाकारी ना हों; उसे दिखावे की बाहरी पवित्रता नहीं वरन मन की खरी पवित्रता और सच्चा समर्पण चाहिए। और ऐसे ही बाइबल के अनुसार यह भी व्यर्थ विचार है कि लोगों के धर्म-कर्म के कार्यों तथा आडंबर के कारण परमेश्वर उनकी किसी भी बात को मान लेने और हर हाल में उनकी रक्षा करने को बाध्य हो जाता है।

   बाइबल सिखाती है कि कोई भी परमेश्वर को कुछ करने के लिए विवश नहीं कर सकता; परमेश्वर अपने निर्णय स्वयं अपने संपूर्ण ज्ञान तथा अपनी सिद्ध समझ के अनुसार ही लेता है, किसी के द्वारा किसी रीति या कार्य से बाध्य होकर नहीं। क्योंकि हम मसीही विश्वासी परमेश्वर की आराधना उपासना करते हैं, बाइबल पढ़ते हैं, प्रार्थना करते हैं और अन्य मसीही विश्वासियों के साथ संगति करते हैं इसलिए परमेश्वर हमारे पक्ष में कुछ करते रहने को बाध्य रहता है - यह भी एक व्यर्थ विचार है। हमारा इन सब बातों को करने का उद्देश्य परमेश्वर को अपने पक्ष में विवश करना नहीं वरन उसके बारे में सीखना, उसकी इच्छाओं को जानना, अपने संबंध को उसके साथ सही बनाए रखना तथा और प्रगढ़ करते रहना है जिससे हम उसकी आज्ञाकारिता में, उसे समर्पित और उसे महिमा देने वाला जीवन जी सकें और हमारे जीवनों से लोग सच्चे जीवित परमेश्वर की सच्चाई को देख सकें और अनुभव कर सकें। - सी. पी. हिया


सदा स्मरण रखिए - परमेश्वर ना बाध्य हो सकता है और ना ही किया जा सकता है।

पर तुम एक चुना हुआ वंश, और राज-पदधारी याजकों का समाज, और पवित्र लोग, और (परमेश्वर की) निज प्रजा हो, इसलिये कि जिसने तुम्हें अन्धकार में से अपनी अद्भुत ज्योति में बुलाया है, उसके गुण प्रगट करो। - 1 पतरस 2:9

बाइबल पाठ: यर्मियाह 7:1-11
Jeremiah 7:1 जो वचन यहोवा की ओर से यिर्मयाह के पास पहुंचा वह यह है:
Jeremiah 7:2 यहोवा के भवन के फाटक में खड़ा हो, और यह वचन प्रचार कर, ओर कह, हे सब यहूदियो, तुम जो यहोवा को दण्डवत करने के लिये इन फाटकों से प्रवेश करते हो, यहोवा का वचन सुनो।
Jeremiah 7:3 सेनाओं का यहोवा जो इस्राएल का परमेश्वर है, यों कहता है, अपनी अपनी चाल और काम सुधारो, तब मैं तुम को इस स्थान में बसे रहने दूंगा।
Jeremiah 7:4 तुम लोग यह कह कर झूठी बातों पर भरोसा मत रखो, कि यही यहोवा का मन्दिर है; यही यहोवा का मन्दिर, यहोवा का मन्दिर।
Jeremiah 7:5 यदि तुम सचमुच अपनी अपनी चाल और काम सुधारो, और सचमुच मनुष्य-मनुष्य के बीच न्याय करो,
Jeremiah 7:6 परदेशी और अनाथ और विधवा पर अन्धेर न करो; इस स्थान में निर्दोष की हत्या न करो, और दूसरे देवताओं के पीछे न चलो जिस से तुम्हारी हानि होती है,
Jeremiah 7:7 तो मैं तुम को इस नगर में, और इस देश में जो मैं ने तुम्हारे पूर्वजों को दिया था, युग युग के लिये रहने दूंगा।
Jeremiah 7:8 देखो, तुम झूठी बातों पर भरोसा रखते हो जिन से कुछ लाभ नहीं हो सकता।
Jeremiah 7:9 तुम जो चोरी, हत्या और व्यभिचार करते, झूठी शपथ खाते, बाल देवता के लिये धूप जलाते, और दूसरे देवताओं के पीछे जिन्हें तुम पहिले नहीं जानते थे चलते हो,
Jeremiah 7:10 तो क्या यह उचित है कि तुम इस भवन में आओ जो मेरा कहलाता है, और मेरे साम्हने खड़े हो कर यह कहो कि हम इसलिये छूट गए हैं कि ये सब घृणित काम करें?
Jeremiah 7:11 क्या यह भवन जो मेरा कहलाता है, तुम्हारी दृष्टि में डाकुओं की गुफ़ा हो गया है? मैं ने स्वयं यह देखा है, यहोवा की यह वाणी है।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 89-90 
  • रोमियों 14


शुक्रवार, 15 फ़रवरी 2013

उद्देश्य


   "मेरे बालों को सूखने में इतना समय क्यों लग रहा है?" मैंने थोड़ा परेशान होते हुए अपने आप से प्रश्न किया। मैं जल्दी में थी और शरद ऋतु के ठण्डे मौसम में गीले बालों के साथ बाहर जाना नहीं चाहती थी। मैने अपने बाल सुखाने वाली मशीन को ध्यान से देखा और कारण सामने आ गया - अपनी भतीजी के उपयोग के लिए मैंने मशीन में उषमा का स्तर को ’मध्यम’ किया हुआ था, और अब अपने प्रयोग के लिए उसे पुनः ’उषम’ पर करना भूल गई थी। मैंने स्तर को अपनी आवश्यकता के अनुसार उषम किया और जल्द ही मेरे बाल सूख गए और मैं अपने काम पर बाहर निकल सकी।

   मैं कई बार विचार करती हूँ कि काश जीवन की परिस्थितियों को भी मैं उतनी ही सरलता से नियंत्रित और परिवर्तित कर सकती जैसे उस बाल सुखाने वाली मशीन को करती हूँ। यदि ऐसा हो पाता तो मैं अपने लिए जीवन की परिस्थितियों का स्तर ’हल्का’ ही रखती - ना बहुत ठण्डा और ना ही बहुत गर्म, बस आरामदेह। निश्चित बात है कि मैं कभी भी सताव की गर्मी और क्लेषों की ज्वाला को नहीं चुनती। लेकिन आत्मिक जीवन में हल्की गर्मी से काम नहीं चलता।

   परमेश्वर ने हम मसीही विश्वसियों को पवित्रता के लिए बुलाया है, पवित्र होना, अर्थात परमेश्वर के लिए पृथक होना - हर उस बात से जो परमेश्वर की दृष्टि में मलिन या अशुद्ध है; और पवित्रता जलाने वाला तापमान मांगती है। हमें परिशुद्ध करने के लिए कभी कभी परमेश्वर हमें दुख की भट्टी से होकर निकलने देता है। लेकिन साथ ही उसका अपने हर विश्वासी के साथ यह वायदा भी है कि "... जब तू आग में चले तब तुझे आंच न लगेगी, और उसकी लौ तुझे न जला सकेगी" (यशायाह ४३:२); ध्यान कीजिए, परमेश्वर ने ’यदि’ नहीं कहा, उसने कहा ’जब’, अर्थात ऐसा होना ही है। इसी संदर्भ में, प्रेरित पतरस ने अपनी पत्री में मसीही विश्वासियों को चिताया कि "हे प्रियों, जो दुख रूपी अग्‍नि तुम्हारे परखने के लिये तुम में भड़की है, इस से यह समझ कर अचम्भा न करो कि कोई अनोखी बात तुम पर बीत रही है" (१ पतरस ४:१२)।

   हम में से कोई नहीं जानता कि कब हमें अग्नि से होकर निकलना पड़ेगा, या जिस भट्टी से हमें निकलना होगा उसका तापमान कितना होगा। लेकिन हम इतना जानते हैं कि उस भट्टी से होकर निकलने देने में परमेश्वर का उद्देश्य हमें नाश करना नहीं वरन हमें शुद्ध और निर्मल करना है जिससे हम उसके लिए और भी अधिक उपयोगी हों तथा और भी अधिक उसकी महिमा का कारण ठहरें और हमारे जीवन उसकी आशीषों के फलों से भर जाएं। उस भट्टी में हम अकेले नहीं होंगे, हमारा परमेश्वर भी हमारे साथ होगा और सहायक होगा। - जूली ऐकैरमैन लिंक


हमारी पवित्रता को परिशुद्ध करने के लिए परमेश्वर हमारे आस-पास के तापमान को बढ़ा देता है।

जब तू जल में हो कर जाए, मैं तेरे संग संग रहूंगा और जब तू नदियों में हो कर चले, तब वे तुझे न डुबा सकेंगी; जब तू आग में चले तब तुझे आंच न लगेगी, और उसकी लौ तुझे न जला सकेगी। - यशायाह ४३:२

बाइबल पाठ: यशायाह ४३:१-१३
Isaiah 43:1 हे इस्राएल तेरा रचने वाला और हे याकूब तेरा सृजनहार यहोवा अब यों कहता है, मत डर, क्योंकि मैं ने तुझे छुड़ा लिया है; मैं ने तुझे नाम ले कर बुलाया है, तू मेरा ही है।
Isaiah 43:2 जब तू जल में हो कर जाए, मैं तेरे संग संग रहूंगा और जब तू नदियों में हो कर चले, तब वे तुझे न डुबा सकेंगी; जब तू आग में चले तब तुझे आंच न लगेगी, और उसकी लौ तुझे न जला सकेगी।
Isaiah 43:3 क्योंकि मैं यहोवा तेरा परमेश्वर हूं, इस्राएल का पवित्र मैं तेरा उद्धारकर्ता हूं। तेरी छुड़ौती में मैं मिस्र को और तेरी सन्ती कूश और सबा को देता हूं।
Isaiah 43:4 मेरी दृष्टि में तू अनमोल और प्रतिष्ठित ठहरा है और मैं तुझ से प्रेम रखता हूं, इस कारण मैं तेरी सन्ती मनुष्यों को और तेरे प्राण के बदले में राज्य राज्य के लोगों को दे दूंगा।
Isaiah 43:5 मत डर, क्योंकि मैं तेरे साथ हूं; मैं तेरे वंश को पूर्व से ले आऊंगा, और पच्छिम से भी इकट्ठा करूंगा।
Isaiah 43:6 मैं उत्तर से कहूंगा, दे दे, और दक्खिन से कि रोक मत रख; मेरे पुत्रों को दूर से और मेरी पुत्रियों को पृथ्वी की छोर से ले आओ;
Isaiah 43:7 हर एक को जो मेरा कहलाता है, जिस को मैं ने अपनी महिमा के लिये सृजा, जिस को मैं ने रचा और बनाया है।
Isaiah 43:8 आंख रहते हुए अन्धों को और कान रहते हुए बहिरों को निकाल ले आओ!
Isaiah 43:9 जाति जाति के लोग इकट्ठे किए जाएं और राज्य राज्य के लोग एकत्रित हों। उन में से कौन यह बात बता सकता वा बीती हुई बातें हमें सुना सकता है? वे अपने साक्षी ले आएं जिस से वे सच्चे ठहरें, वे सुन लें और कहें, यह सत्य है।
Isaiah 43:10 यहोवा की वाणी है कि तुम मेरे साक्षी हो और मेरे दास हो, जिन्हें मैं ने इसलिये चुना है कि समझ कर मेरी प्रतीति करो और यह जान लो कि मैं वही हूं। मुझ से पहिले कोई ईश्वर न हुआ और न मेरे बाद कोई होगा।
Isaiah 43:11 मैं ही यहोवा हूं और मुझे छोड़ कोई उद्धारकर्ता नहीं।
Isaiah 43:12 मैं ही ने समाचार दिया और उद्धार किया और वर्णन भी किया, जब तुम्हारे बीच में कोई पराया देवता न था; इसलिये तुम ही मेरे साक्षी हो, यहोवा की यह वाणी है।
Isaiah 43:13 मैं ही ईश्वर हूं और भविष्य में भी मैं ही हूं; मेरे हाथ से कोई छुड़ा न सकेगा; जब मैं काम करना चाहूं तब कौन मुझे रोक सकेगा।

एक साल में बाइबल: 
  • लैव्यवस्था १७-१८ 
  • मत्ती २७:२७-५०


रविवार, 16 दिसंबर 2012

महान आश्चर्यकर्म


   एक प्रसिद्ध ब्रिटिश सुसमाचार प्रचारक लियोनार्ड रैव्नहिल (१९०७-१९९४) ने एक बार कहा था: "परमेश्वर द्वारा किया जाने वाला एक महान अश्चर्यकर्म है कि वह एक पापी मनुष्य को पापी संसार में से लेकर उसे पवित्र बना दे और उसे फिर से पापी संसार में रख दे और फिर उस संसार में रहते हुए भी उस मनुष्य की पवित्रता को बनाए रखे।" परमेश्वर ने यही यशायाह भविष्यद्वक्ता के साथ किया जब परमेश्वर ने उसे अपने लोगों तक अपना सन्देश पहुँचाने के लिए नियुक्त किया।

   यहूदा के सफल राजाओं में से एक, राजा उज़्ज़ियाह की मृत्यु के बाद यशायाह को परमेश्वर का एक दर्शन मिला जिसमें यशायाह ने परमेश्वर को सृष्टि के अधिपति के रूप में अपनी महिमा में एक भव्य सिंहासन पर बैठे देखा। उस दर्शन में यशायाह ने देखा कि साराप (स्वर्गदूत) परमेश्वर की आराधना कर रहे हैं, उसे पवित्र, पराक्रमी और महिमावान कह रहे हैं।

   परमेश्वर की वास्तविकता को देख कर यशायाह को अपनी वास्तविकता का बोध हुआ, कि परमेश्वर के सम्मुख वह कैसा पापी और अपवित्र है, और यशायाह पुकार उठा "...हाय! हाय! मैं नाश हूआ; क्योंकि मैं अशुद्ध होंठ वाला मनुष्य हूं, और अशुद्ध होंठ वाले मनुष्यों के बीच में रहता हूं..." (यशायाह ६:५)। अपनी अपवित्रता और पाप के इस बोध ने उसे परमेश्वर के शुद्ध और पवित्र करने वाले अनुग्रह की आवश्यकता और उपलब्धता का एहसास कराया (पद ७); यशायाह शुद्ध और पवित्र किया गया और फिर परमेश्वर के वचन को लोगों तक पहुँचाने के लिए उसने परमेश्वर की पुकार को स्वीकार किया और नियुक्त किया गया। तब परमेश्वर ने यशायाह को एक अपवित्र संसार में अपवित्र लोगों के बीच में भेजा कि वह एक पवित्र जीवन व्यतीत करे और पवित्र परमेश्वर के बारे में लोगों को बताए।

   आज भी अपने विश्वासियों को परमेश्वर अपनी पवित्रता और उनकी वास्तविकता का बोध कराना चाहता है जिससे कि वे उसके अनुग्रह और पवित्रता की, उनके जीवनों में घोर आवश्यकता को पहचान सकें, उससे वह प्राप्त कर सकें और फिर उसके लिए उपयोगी पात्र बनकर उसके सन्देश को संसार में पहुँचाने वाले बन सकें। यह महान आश्चर्यकर्म वह आपके जीवन में भी करना चाहता है, यदि आप उसको समर्पण के लिए तैयार हैं। - मार्विन विलियम्स


पाप के अन्धकार से भरे जीवनों को परमेश्वर के अनुग्रह की ज्योति पवित्रता से रौशन कर देती है।

और उस ने उस से मेरे मुंह को छूकर कहा, देख, इस ने तेरे होंठों को छू लिया है, इसलिये तेरा अधर्म दूर हो गया और तेरे पाप क्षमा हो गए। - यशायाह ६:७

बाइबल पाठ: यशायाह ६:१-८
Isa 6:1  जिस वर्ष उज्जिय्याह राजा मरा, मैं ने प्रभु को बहुत ही ऊंचे सिंहासन पर विराजमान देखा; और उसके वस्त्र के घेर से मन्दिर भर गया। 
Isa 6:2  उस से ऊंचे पर साराप दिखाई दिए; उनके छ: छ: पंख थे; दो पंखों से वे अपने मुंह को ढांपे थे और दो से अपने पांवों को, और दो से उड़ रहे थे। 
Isa 6:3  और वे एक दूसरे से पुकार पुकार कर कह रहे थे: सेनाओं का यहोवा पवित्र, पवित्र, पवित्र है; सारी पृथ्वी उसके तेज से भरपूर है। 
Isa 6:4  और पुकारने वाले के शब्द से डेवढिय़ों की नेवें डोल उठीं, और भवन धूंए से भर गया। 
Isa 6:5  तब मैं ने कहा, हाय! हाय! मैं नाश हूआ; क्योंकि मैं अशुद्ध होंठ वाला मनुष्य हूं, और अशुद्ध होंठ वाले मनुष्यों के बीच में रहता हूं; क्योंकि मैं ने सेनाओं के यहोवा महाराजाधिराज को अपनी आंखों से देखा है! 
Isa 6:6  तब एक साराप हाथ में अंगारा लिए हुए, जिसे उस ने चिमटे से वेदी पर से उठा लिया था, मेरे पास उड़ कर आया। 
Isa 6:7  और उस ने उस से मेरे मुंह को छूकर कहा, देख, इस ने तेरे होंठों को छू लिया है, इसलिय तेरा अधर्म दूर हो गया और तेरे पाप क्षमा हो गए। 
Isa 6:8  तब मैं ने प्रभु का यह वचन सुना, मैं किस को भेंजूं, और हमारी ओर से कौन जाएगा? तब मैं ने कहा, मैं यहां हूं! मुझे भेज।

एक साल में बाइबल: 
  • अमोस ४-६ 
  • प्रकाशितवाक्य ७

गुरुवार, 10 मई 2012

स्वर्ग का एहसास

   कुछ समय पहले मेरी पत्नी की मुलाकात एक महिला से हुई जिसे यात्रा में सहायता की आवश्यक्ता थी। मेरी पत्नी को लगा कि यह बात परमेश्वर की ओर से है, और उसने उस महिला को अपनी कार में बैठा लिया। यात्रा के दौरान हुई बातचीत में उस महिला ने बताया कि वह भी एक मसीही विश्वासी है लेकिन मादक पदार्थों की लत से निकलने के लिए जूझ रही है। मेरी पत्नी ने प्रेम और आदर के साथ इस दुखी महिला की बातें सुनीं और उस के साथ बातचीत भी करी, उस के विश्वास को बढ़ाया। उस दुखी जन को उसकी हर परिस्थिति में उसके साथ बनी हुई परमेश्वर कि उपस्थिति का तथा स्वर्ग का एहसास कराने के साथ, मेरी पत्नी ने उसे एक अच्छे भविष्य की आशा भी दी।

   जब परमेश्वर ने मूसा को अपने निर्देशों के अनुसार एक पवित्र स्थान बनाने के लिए कहा, तो उसका एक उद्देश्य यह भी था कि उसके लोग उन के मध्य उस की उपस्थिति के एहसास के साथ रहें। बाद में जब राजा सुलेमान ने परमेश्वर के मन्दिर को बनवाया, तो उस के द्वारा भी लोगों को अपने बीच परमेश्वर के निवास के एहसास होता था (१ राजा ५-८)। फिर परमेश्वर का वह सिद्ध पवित्र स्थान, प्रभु यीशु मनुष्यों बीच डेरा करने आया (यूहन्ना १:१४)। इन सभी पवित्र स्थानों के द्वारा परमेश्वर की इच्छा रही है कि उसके जन सदा उनके साथ उसकी उपस्थिति के एहसास में जीवन बिताएं। जब प्रभु यीशु का स्वर्गारोहण हुआ तो उन्होंने अपने पवित्र आत्मा को अपने अनुयायियों के साथ रहने को भेजा ( यूहन्ना १४:१६-१७), जिस से उनके अनुयायी परमेश्वर के निवास स्थान और मन्दिर बन कर रहें (१ कुरिन्थियों ३:१६; ६:१९)।

   आज परमेश्वर के मन्दिर और निवास स्थान होने के कारण हम मसीही विश्वासियों को परमेश्वर की ओर से यह ज़िम्मेवारी सौंपी गई है कि हम इस पाप और अशांति से भरे संसार को परमेश्वर की उपस्थिति का एहसास कराएं। हमारे जीवनों में और हमारे जीवनों के द्वारा वे स्वर्ग का एहसास कर सकें, स्वर्ग के खोजी हो सकें और प्रभु यीशु को समर्पण द्वारा वे भी परमेश्वर के मन्दिर बनें। - मार्विन विलियम्स


वह मसीही विश्वासी जो दूसरों के लिए छोटे छोटे कार्य करने को तैयार है, परमेश्वर के लिए बड़े बड़े कार्य कर सकता है।
क्‍या तुम नहीं जानते, कि तुम परमेश्वर का मन्‍दिर हो, और परमेश्वर का आत्मा तुम में वास करता है? - १ कुरिन्थियों ३:१६
बाइबल पाठ: १ कुरिन्थियों ३:११-१७; ६:१५-२०
1Co 3:11  क्‍योंकि उस नेव को छोड़ जो पड़ी है, और वह यीशु मसीह है कोई दूसरी नेव नहीं डाल सकता।
1Co 3:12  और यदि कोई इस नेव पर सोना या चान्‍दी या बहुमोल पत्थर या काठ या घास या फूस का रद्दा रखता है।
1Co 3:13  तो हर एक का काम प्रगट हो जाएगा, क्‍योंकि वह दिन उसे बताएगा; इसलिये कि आग के साथ प्रगट होगा: और वह आग हर एक का काम परखेगी कि कैसा है?
1Co 3:14   जिस का काम उस पर बना हुआ स्थिर रहेगा, वह मजदूरी पाएगा।
1Co 3:15  और यदि किसी का काम जल जाएगा, तो हानि उठाएगा; पर वह आप बच जाएगा परन्‍तु जलते जलते।
1Co 3:16  क्‍या तुम नहीं जानते, कि तुम परमेश्वर का मन्‍दिर हो, और परमेश्वर का आत्मा तुम में वास करता है?
1Co 3:17  यदि कोई परमेश्वर के मन्‍दिर को नाश करेगा तो परमेश्वर उसे नाश करेगा, क्‍योंकि परमेश्वर का मन्‍दिर पवित्र है, और वह तुम हो।
1Co 6:15  क्‍या तुम नहीं जानते, कि तुम्हारी देह मसीह के अंग हैं सो क्‍या मैं मसीह के अंग लेकर उन्‍हें वेश्या के अंग बनाऊं कदापि नहीं।

1Co 6:16  क्‍या तुम नहीं जानते, कि जो कोई वेश्या से संगति करता है, वह उसके साथ एक तन हो जाता है क्‍योंकि वह कहता है, कि वे दोनों एक तन होंगे।
1Co 6:17   और जो प्रभु की संगति में रहता है, वह उसके साथ एक आत्मा हो जाता है।
1Co 6:18  व्यभिचार से बचे रहो: जितने और पाप मनुष्य करता है, वे देह के बाहर हैं, परन्‍तु व्यभिचार करने वाला अपनी ही देह के विरूद्ध पाप करता है।
1Co 6:19  क्‍या तुम नहीं जानते, कि तुम्हारी देह पवित्रात्मा का मन्‍दिर है जो तुम में बसा हुआ है और तुम्हें परमेश्वर की ओर से मिला है, और तुम अपने नहीं हो?
1Co 6:20   कयोंकि दाम देकर मोल लिये गए हो, इसलिये अपनी देह के द्वारा परमेश्वर की महिमा करो।
एक साल में बाइबल: 
  • २ राजा १०-१२ 
  • यूहन्ना १:२९-५१

मंगलवार, 24 अप्रैल 2012

स्वच्छ पर्यावरण

   प्रदूषण कितनी कुण्ठित कर देने वाली समस्या है! हर कोई इसके दुषप्रभाव का मारा हुआ है, किंतु फिर भी हर कोई इसके बढ़ते जाने में योगदान करता रहता है।

   प्रदूषण के अनेक रूप हैं, एक ऐसा रूप भी है जो समाज में व्याप्त तो है, किंतु जिसकी अकसर अवहेलना होती है; लेखक चार्ल्स स्विंडौल ने इसे ’शब्दों के प्रदूषण’ की संज्ञा दी है। यह वह प्रदूषण है जो कुड़कुड़ाने वालों, आलोचकों और निन्दकों के द्वारा बड़ी सहजता से फैलाया जाता है और समाज द्वारा इसे उतनी ही सहजता से स्वीकार भी किया जाता है। स्विंडौल लिखते हैं "नकारात्मक रवैये का यह विष अपने चारों ओर ऐसा निषेधात्मक वातावरण उत्पन्न कर देता है जहां हर बात की केवल बुराई पर ही ध्यान केंद्रित हो।"

   कुछ मसीही विश्वासी मित्रों को इस नकारत्मक शब्दों के प्रदूषण के विषय में चिंता हुई और उन्होंने निर्णय लिया कि वे इसके विरुद्ध कुछ अपने प्रयास करेंगे। उन्होंने निर्णय लिया कि आपसी बातचीत में एक सप्ताह तक किसी भी विषय पर कोई आलोचनात्मक या नकारात्मक शब्दों का प्रयोग नहीं करेंगे। उन्हें अचंभा हुआ यह देख कर कि उस सप्ताह में वे आपस में कितनी कम बातचीत कर पाए। उन्होंने अपना यह प्रयास ज़ारी रखा और उन्होंने पाया कि आपसी बातचीत को ज़ारी रखने के लिए उन्हें अपने संवाद कौशल और भाषा की शब्दावली को पुनः सीखने की आवश्यकता पड़ी।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस ने भी मसीही विश्वासियों को ऐसे ही निर्णायक कदम उठाने का आवाहन किया; इफीसियों को लिखी अपनी पत्री में पौलुस ने लिखा कि वे अपने पुराने मनुष्यत्व और उसके व्यवहार को जो परमेश्वर के पवित्र आत्मा को शोकित करता है उतार फेंकें और मसीह से मिला वह नया मनुष्यत्व पहन ले जो दूसरों को बनाने और बढ़ाने में सक्रीय रहता है। हमारे व्यवहार, विचार और वाणी में यह परिवर्तन केवल परमेश्वर के पवित्र आत्मा पर निर्भर रहने से ही संभव है, "आत्मा के अनुसार चलो, तो तुम शरीर की लालसा किसी रीति से पूरी न करोगे" (गलतियों ५:१६)।

   यदि हमें नकारात्मक शब्दों के प्रदूषण से बच कर अपने जीवन के पर्यावरण को स्वच्छ करना है तो पहले हमें इसका निर्णय लेना होगा, फिर परमेश्वर से सहायता कि प्रार्थना के साथ, परमेश्वर की आत्मा की सामर्थ से परमेश्वर के वचन और आज्ञाओं के पालन के द्वारा हम अपने आत्मिक पर्यावरण को स्वच्छ कर पाएंगे। - जोनी योडर


अपनी वाणी को स्वच्छ कीजीए और अपने वातावरण को प्रदूषित होने से बचाइए।
कोई गन्‍दी बात तुम्हारे मुंह से न निकले, पर आवश्यकता के अनुसार वही जो उन्नति के लिए उत्तम हो, ताकि उस से सुनने वालों पर अनुग्रह हो। - इफिसीयों ४:२९
बाइबल पाठ: इफिसीयों ४:१७-३२
Eph 4:17  इसलिये मैं यह कहता हूं, और प्रभु में जताए देता हूं कि जैसे अन्यजातीय लोग अपने मन की अनर्थ की रीति पर चलते हैं, तुम अब से फिर ऐसे न चलो।
Eph 4:18 क्‍योंकि उनकी बुद्धि अन्‍धेरी हो गई है और उस अज्ञानता के कारण जो उन में है और उनके मन की कठोरता के कारण वे परमेश्वर के जीवन से अलग किए हुए हैं।
Eph 4:19 और वे सुन्न होकर, लुचपन में लग गए हैं, कि सब प्रकार के गन्‍दे काम लालसा से किया करें।
Eph 4:20  पर तुम ने मसीह की ऐसी शिक्षा नहीं पाई।
Eph 4:21  वरन तुम ने सचमुच उसी की सुनी, और जैसा यीशु में सत्य है, उसी में सिखाए भी गए।
Eph 4:22  कि तुम अगले चालचलन के पुराने मनुष्यत्‍व को जो भरमाने वाली अभिलाषाओं के अनुसार भ्रष्‍ट होता जाता है, उतार डालो।
Eph 4:23  और अपने मन के आत्मिक स्‍वभाव में नये बनते जाओ।
Eph 4:24  और नये मनुष्यत्‍व को पहिन लो, जो परमेश्वर के अनुसार सत्य की धामिर्कता, और पवित्रता में सृजा गया है।
Eph 4:25  इस कारण झूठ बोलना छोड़ कर हर एक अपने पड़ोसी से सच बोले, क्‍योंकि हम आपस में एक दूसरे के अंग हैं।
Eph 4:26  क्रोध तो करो, पर पाप मत करो: सूर्य अस्‍त होने तक तुम्हारा क्रोध न रहे।
Eph 4:27  और न शैतान को अवसर दो।
Eph 4:28  चोरी करने वाला फिर चोरी न करे, वरन भले काम करने में अपने हाथों से परिश्रम करे; इसलिये कि जिसे प्रयोजन हो, उसे देने को उसके पास कुछ हो।
Eph 4:29 कोई गन्‍दी बात तुम्हारे मुंह से न निकले, पर आवश्यकता के अनुसार वही जो उन्नति के लिए उत्तम हो, ताकि उस से सुनने वालों पर अनुग्रह हो।
Eph 4:30  और परमेश्वर के पवित्र आत्मा को शोकित मत करो, जिस से तुम पर छुटकारे के दिन के लिये छाप दी गई है।
Eph 4:31 सब प्रकार की कड़वाहट और प्रकोप और क्रोध, और कलह, और निन्‍दा सब बैरभाव समेत तुम से दूर की जाए।
Eph 4:32  और एक दूसरे पर कृपाल, और करूणामय हो, और जैसे परमेश्वर ने मसीह में तुम्हारे अपराध क्षमा किए, वैसे ही तुम भी एक दूसरे के अपराध क्षमा करो। 
एक साल में बाइबल: 
  • २ शमूएल १९-२० 
  • लूका १८:१-२३

गुरुवार, 22 सितंबर 2011

प्रसन्नता और पवित्रता

   चर्च में बैठकर एक लंबे प्रचार को सुनने के बाद जब एक बालक झुंझलाया हुआ बाहर निकला, उसका चेहरा तमतमाया हुआ था; कारण था कि लंबे उपदेश को सुनते सुनते वह ऊब कर इधर-उधर ताक-झांक कर रहा था, और उसे नियंत्रण में रखने के लिए उसके पिता ने उसके कान उमेठा था। उसे देख कर चर्च के एक पदाधिकारी ने उससे पूछा, "क्या हुआ? तुम दुखी प्रतीत होते हो?" बालक ने उत्तर दिया, "जी हाँ, मैं दुखी हुँ। मुझे लगता है कि प्रसन्नता और पवित्रता, दोनो को एक साथ पा लेना कठिन है।"

   शायद उस बालक ने हम में से अधिकांश लोगों की भावना को व्यक्त किया था; लेकिन यह धारणा सही नहीं है। दक्षिण अफ्रीका में १९वीं सदी में कार्य करने वाले प्रचारक एन्ड्रयु मुरे ने इस सन्दर्भ में कहा, "सच्चे आनन्द के लिए पवित्रता अनिवार्य है; और सच्ची पवित्रता के लिए प्रसन्नता अनिवार्य है। यदि आप आनन्द चाहते हैं, आनन्द की भरपूरी चाहते हैं, एक ऐसा स्थाई आनन्द चाहते हैं जो कभी नष्ट नहीं हो सकता, तो जैसा परमेश्वर पवित्र है, आप भी पवित्र बनिए। पवित्र होना, आशीशित होना है; यदि आप पवित्र मसीही विश्वासी बनना चाहते हैं तो सर्वदा आनन्दित रहने वाले मसीही विश्वासी बन जाईए। परमेश्वर ने मसीह यीशु को आनन्द के तेल से अभिषिक्त किया, और वह भी अपने सब अनुयायियों को उसी से अभिषेक करता है। प्रभु यीशु के आनन्द को हमारे जीवनों में उसकी पवित्रता के साथ संचार करते रहना चाहिए। यदि उसके आनन्द का यह तेल हमारे जीवनों में नहीं है, तो पवित्रता के प्रयास की हमारी गाड़ी को चलने में बहुत कठिनाई होगी।

   जब हम पवित्रता और प्रसन्नता के इस संबंध को भली भांति सीख जाएंगे, हम आत्मिक परिपक्वता में और आगे बढ़ जाएंगे। - डेव एग्नर



जो पवित्र है, वह आनन्दित भी है।

धन्य हैं वे, जिन के मन शुद्ध हैं, क्‍योंकि वे परमेश्वर को देखेंगे। - मत्ती ५:८
 
बाइबल पाठ: १ पतरस १:१३-२२
    1Pe 1:13  इस कारण अपनी अपनी बुद्धि की कमर बान्‍ध कर, और सचेत रह कर उस अनुग्रह की पूरी आशा रखो, जो यीशु मसीह के प्रगट होने के समय तुम्हें मिलने वाला है।
    1Pe 1:14  और आज्ञाकारी बालकों की नाईं अपनी अज्ञानता के समय की पुरानी अभिलाषाओं के सदृश न बनो।
    1Pe 1:15  पर जैसा तुम्हारा बुलाने वाला पवित्र है, वैसे ही तुम भी अपने सारे चाल चलन में पवित्र बनो।
    1Pe 1:16  क्‍योंकि लिखा है, कि पवित्र बनो, क्‍योंकि मैं पवित्र हूं।
    1Pe 1:17  और जब कि तुम, हे पिता, कह कर उस से प्रार्थना करते हो, जो बिना पक्षपात हर एक के काम के अनुसार न्याय करता है, तो अपने परदेशी होने का समय भय से बिताओ।
    1Pe 1:18  क्‍योंकि तुम जानते हो, कि तुम्हारा निकम्मा चाल-चलन जो बाप-दादों से चला आता है उस से तुम्हारा छुटकारा चान्‍दी सोने अर्थात नाशमान वस्‍तुओं के द्वारा नहीं हुआ।
    1Pe 1:19  पर निर्दोष और निष्‍कलंक मेम्ने अर्थात मसीह के बहुमूल्य लोहू के द्वारा हुआ।
    1Pe 1:20  उसका ज्ञान तो जगत की उत्‍पत्ति के पहिले ही से जाना गया था, पर अब इस अन्‍तिम युग में तुम्हारे लिये प्रगट हुआ।
    1Pe 1:21  जो उसके द्वारा उस परमेश्वर पर विश्वास करते हो, जिस ने उसे मरे हुओं में से जिलाया, और महिमा दी; कि तुम्हारा विश्वास और आशा परमेश्वर पर हो।
    1Pe 1:22  सो जब कि तुम ने भाई-चारे की निष्‍कपट प्रीति के निमित्त सत्य के मानने से अपने मनों को पवित्र किया है, तो तन मन लगा कर एक दूसरे से अधिक प्रेम रखो।
 
एक साल में बाइबल: 
  • सभोपदेशक १०-१२ 
  • गलतियों १

मंगलवार, 20 सितंबर 2011

पवित्रता द्वारा आनन्द

   कुछ लोग मानते हैं कि सभी नियमों को ताक पर रखने, हर एक नियंत्रण से निकल जाने और अपनी मन मरज़ी ही कर पाने में सच्चा आनन्द है। उनकी धारणा है कि जब नियम और कानून ही नहीं होंगे तो सही-गलत में फर्क करने और निर्णय लेने का झंझट भी नहीं रहेगा। ऐसे ही धारणा रखने वाले एक व्यक्ति ने कहा, "मेरे लिए यह ज़्यादा ज़रूरी है कि मैं अपने जीवन का आनन्द लूँ न कि यह कि मैं सही-गलत के झंझट में पड़ा रहूँ। यह बात मैंने अपने सात वर्षीय पुत्र के साथ अपने संबंध द्वारा भली भांति समझ ली है। मैंने देखा है कि बार बार उसे कहना कि वह गलत है, सदा ही हमारे बीच अलगाव और दुखः उत्पन्न करता है।" संभवतः इस व्यक्ति ने कभी अपने पुत्र को यह समझने का प्रयास नहीं किया होगा कि वह गलत क्यों है और गलती के क्या परिणाम और नुकसान हो सकते हैं, बस केवल रौब मारकर या डांट-डपट कर ही अपनी बात व्यक्त करी होगी।

   यदि संसार में सभी इसी धारणा के अन्तर्गत अपने जीवन व्यतीत करने लगें तो आप स्वयं समझ सकते हैं कि संसार का क्या हाल हो जाएगा। वास्तविकता तो यह है कि हम जितना अधिक नियमों का पालन करते हैं, उतने ही अधिक स्वतंत्र और आनन्दित रहते हैं। यदि आपके पास वैद लाईसेंस है, आपकी गाड़ी के कागज़ात पूरे और सही हैं, आप यातयात के नियमों के पालन के साथ गाड़ी चला रहें है तो यदि मार्ग में कोई पुलिस वाला आपको रोके तो आप बिना हिचकिचाए, उससे नज़रें मिलाकर बात कर लेते हैं, किंतु यदि इन में से किसी एक में भी कोई कमी होगी तो आप ऐसा नहीं कर सकेंगे, आशंकित रहेंगे। इसी प्रकार जब तक वायुयान उड़ान के नियमों का पालन करता रहता है, वह अपनी उड़ान सरलता से भरता रहता है; जहाँ नियमों की अवहेलना हुई, विमान का और दूसरों का भारी नुकसान हो जाता है।

   यही बात नैतिक जीवन और नियमों पर भी लागू होती है। यदि हम अपने जीवन में पवित्रता और नैतिकता को लक्षय बनाए रखेंगे तो स्वतः ही जीवन में आनन्द भी मिलता रहेगा; किंतु यदि आनन्द प्राप्ति के लिए नैतिक मूल्यों और नियमों की अवहेलना करेंगे तो ना ही अनन्द रहेगा और ना ही जीवन। पाप, जो परमेश्वर के नियमों का उल्लंघन है, हमारे हर दुखः की जड़ और और हर परेशानी का कारण है। सांसारिक तथा शारीरिक आनन्द कुछ समय के लिए तो हमें बहला सकते हैं, लेकिन हमारी आत्मा को ना तो सन्तुष्ट कर सकते हैं और ना ही स्थाई होते हैं; और अधिकांशतः उनकी प्राप्ति के लिए नैतिक मूल्यों के साथ समझौता करना पड़ता है, जो अशांति को और बढ़ाता रहता है। पाप हमें परमेश्वर की संगति से दूर करता है और हमारे जीवन और आत्मा को उस सच्चे और चिरस्थाई आनन्द से वंचित करता है जो परमेश्वर की संगति से मिलता है। पवित्रता परमेश्वर की संगति से आती है, परमेश्वर से मिलती है। परमेश्वर का वचन हमें आश्वासन देता है कि "यदि हम अपने पापों को मान लें, तो वह हमारे पापों को क्षमा करने, और हमें सब अधर्म से शुद्ध करने में विश्वासयोग्य और धर्मी है" (१ युहन्ना १:९)।

   पाप को छुपाना या किसी प्रकार उसे ढांपने का प्रयास करना पाप का निवारण नहीं है। पाप केवल अंगीकार और क्षमा द्वारा हट सकता है। क्योंकि हर पाप अन्ततः परमेश्वर के विरुद्ध ही होता है, उसे क्षमा करने और उसके दुष्प्रभाव को हटा कर सच्चे आनन्द को प्रदान करना भी परमेश्वर के ही हाथ में है। परमेश्वर ने यह संभव करने के लिए ही प्रभु यीशु को सबके पापों के लिए बलिदान होने भेजा, कि उसमें होकर पापों की क्षमा मांगने वाले को पवित्रता और सच्चा आनन्द मिल सके। - डेनिस डी हॉन


केवल पाप ही है जो मसीही विश्वासी के आनन्द को नष्ट कर सकता है।

धन्य हैं वे जो धर्म के भूखे और प्यासे हैं क्योंकि वे तृप्त किए जाएंगे। - मत्ती ५:६
 
बाइबल पाठ: भजन ३२:१-११
    Psa 32:1  क्या ही धन्य है वह जिसका अपराध क्षमा किया गया, और जिसका पाप ढ़ांपा गया हो।
    Psa 32:2  क्या ही धन्य है वह मनुष्य जिसके अधर्म का यहोवा लेखा न ले, और जिसकी आत्मा में कपट न हो।
    Psa 32:3  जब मैं चुप रहा तक दिन भर कहरते कहरते मेरी हडि्डयां पिघल गई।
    Psa 32:4  क्योंकि रात दिन मैं तेरे हाथ के नीचे दबा रहा; और मेरी तरावट धूप काल की सी झुर्राहट बनती गई।
    Psa 32:5  जब मैं ने अपना पाप तुझ पर प्रगट किया और अपना अधर्म न छिपाया, और कहा, मैं यहोवा के साम्हने अपने अपराधों को मान लूंगा, तब तू ने मेरे अधर्म और पाप को क्षमा कर दिया।
    Psa 32:6  इस कारण हर एक भक्त तुझ से ऐसे समय में प्रार्थना करे जब कि तू मिल सकता है। निश्चय जब जल की बड़ी बाढ़ आए तौभी उस भक्त के पास न पहुंचेगी।
    Psa 32:7  तू मेरे छिपने का स्थान है; तू संकट से मेरी रक्षा करेगा; तू मुझे चारों ओर से छुटकारे के गीतों से घेर लेगा।
    Psa 32:8  मैं तुझे बुद्धि दूंगा, और जिस मार्ग में तुझे चलना होगा उस में तेरी अगुवाई करूंगा; मैं तुझ पर कृपादृष्टि रखूंगा और सम्मत्ति दिया करूंगा।
    Psa 32:9  तुम घोड़े और खच्चर के समान न बनो जो समझ नहीं रखते, उनकी उमंग लगाम और बाग से रोकनी पड़ती है, नहीं तो वे तेरे वश में नहीं आने के।
    Psa 32:10  दुष्ट को तो बहुत पीड़ा होगी; परन्तु जो यहोवा पर भरोसा रखता है वह करूणा से घिरा रहेगा।
    Psa 32:11  हे धर्मियों यहोवा के कारण आनन्दित और मगन हो, और हे सब सीधे मन वालों आनन्द से जयजयकार करो!
 
एक साल में बाइबल: 
  • सभोपदेशक ४-६ 
  • २ कुरिन्थियों १२

बुधवार, 23 फ़रवरी 2011

आत्मविशलेष्ण

प्रसिद्ध पाश्चात्य संगीत शास्त्री बीथोवेन के घर की देखरेख करने वाला, कुछ पर्यटकों को बीथोवन का घर घुमा रहा था। जब वे एक पुराने और आलीशान प्यानो के पास आए, तो बड़े आदर से उस प्यानो का ढक्कन उठाते हुए कहा, "यही वह प्यानो है जिस पर बैठ कर बीथोवन अपने संगीत की रचना करते थे।" तभी उन पर्यटकों में से एक युवती आगे बढ़ी और प्यानो के आगे बैठ गई तथा बीथोवन द्वारा रचित एक छोटी धुन उस प्यानो पर बजाने लगी। धुन समाप्त करके वह बड़े गर्व से उस ठगे से खड़े और विस्मित देखरेख करने वाले की ओर मुड़ी और बोली, "यहां आने वाले लोगों में से बहुतेरे ऐसे ही बीथोवन के प्यानों को बजाना चाहते होंगे, हैं ना?" उस देखरेख करने वाले ने बड़े सहज भाव से उत्तर दिया, "मैडम, पिछले ग्रीष्म ‌‍ॠतु में विश्व प्रसिद्ध प्यानो वादक श्रीमान पाद्रेवस्की यहां आये थे। उनके कुछ मित्रों ने उनसे इस प्यानो पर कुछ बजाने का निवेदन किया, लेकिन उन्हों ने बड़ी नम्रता से यह कहकर इन्कार कर दिया कि मैं इसके योग्य नहीं हूँ!"

जैसे जैसे हम अपने प्रभु की समानता में बढ़ते जाते हैं, हम उसके समक्ष अपनी औकात के और अपने पापों के प्रति बोझिल भी होते जाते हैं। यह विरोधाभास किसी विकृत आत्मविशलेष्ण का नतीजा नहीं है और न ही यह स्व्यं अपने प्रति किसी हीन भावना का द्योतक है। यह इस बात की सच्ची पहिचान है कि मसीह क्या है और हम क्या हैं और हमारी मसीह की समानता में ढलने की इच्छा कैसी है।

परमेश्वर की पवित्रता की झलक पाने के बाद यशायाह नबी चिल्ला उठा "...हाय! हाय! मैं नाश हूआ। क्योंकि मैं अशुद्ध होंठ वाला मनुष्य हूं, और अशुद्ध होंठ वाले मनुष्यों के बीच में रहता हूं; क्योंकि मैं ने सेनाओं के यहोवा महाराजाधिराज को अपनी आंखों से देखा है! " (यशायाह ६:५); अपनी तकलीफों और परीक्षाओं के अन्त में परमेश्वर के दर्शन पाने के बाद अय्युब ने विनम्रता सहित स्वीकार किया कि "...मुझे अपने ऊपर घृणा आती है, और मैं धूलि और राख में पश्चात्ताप करता हूँ।" (अय्युब ४२:६); और यूहन्ना बप्तिस्मा देने वाले ने प्रभु यीशु के विष्य में कहा "...जो मेरे बाद आने वाला है, वह मुझ से शक्तिशाली है; मैं उस की जूती उठाने के योग्य नहीं..."(मत्ती ३:११)।

परमेश्वर के समक्ष अपनी अयोग्यता की स्वस्थ स्वीकृति और पहिचान, हमें प्रभु की योग्यता पर निर्भरता बनाए रखने में सहायक होती है, और यही प्रभु की समानता में ढलते और बढ़ते जाने का राज़ है। - डेनिस डी हॉन


जब लोग सच्चे परमेश्वर की सच्ची पहिचान के साथ उसकी सच्ची उपासना करने लग जाते हैं, तो वे उसकी समानता में भी बढ़ने लग जाते हैं।

...जो मेरे बाद आने वाला है, वह मुझ से शक्तिशाली है; मैं उस की जूती उठाने के योग्य नहीं... - मत्ती ३:११


बाइबल पाठ: अय्युब ४२:१-६

तब अय्यूब ने यहोवा को उत्तर दिया;
मैं जानता हूँ कि तू सब कुछ कर सकता है, और तेरी युक्तियों में से कोई रुक नहीं सकती।
तू कौन है जो ज्ञान रहित होकर युक्ति पर परदा डालता है? परन्तु मैं ने तो जो नहीं समझता था वही कहा, अर्थात जो बातें मेरे लिये अधिक कठिन और मेरी समझ से बाहर थीं जिनको मैं जानता भी नहीं था।
मैं निवेदन करता हूं सुन, मैं कुछ कहूंगा, मैं तुझ से प्रश्न करता हूँ, तू मुझे बता दे।
मैंने कानों से तेरा समाचार सुना था, परन्तु अब मेरी आंखें तुझे देखती हैं;
इसलिये मुझे अपने ऊपर घृणा आती है, और मैं धूलि और राख में पश्चात्ताप करता हूँ।
एक साल में बाइबल:
  • गिनती ७-८
  • मरकुस ४:२१-४१