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बुधवार, 27 मई 2015

तूफान


   कहा जाता है कि वर्तमान इतोपिया देश में लाल सागर के तट पर स्थित प्राचीन देश अक्सुम के निवासियों ने खोज करी कि वर्षा ऋतु की तूफानी हवाओं के वेग को नाव में लगे पाल द्वारा वश में लेकर तेज़ी से नौकावाहन किया जा सकता है। इससे उन्होंने तेज़ हवाओं और ऊँची लहरों से डर कर रहने की बजाए, उन तूफानी परिस्थितियों को अपने लाभ के लिए उपयोग करना सीख लिया।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में भजन 107 भी हमारे लिए जीवन में तूफानों की भूमिका का एक उत्तम शब्दचित्र प्रस्तुत करता है। इस भजन में भजनकार वर्णन करता है कि कैसे परमेश्वर हमारे जीवन में तूफानों को आने देता है और फिर उनमें हमें सुरक्षित निकाल कर ले आता है जिससे हम हर परिस्थिति में उस पर विश्वास रखना सीख सकें।

   परेशान परिस्थितियों में परमेश्वर पर भरोसा बनाए रखना बाइबल में अनेक बार दोहराया गया विषय है। इब्रानियों के नाम लिखी पत्री के 11वें अध्याय में लेखक उन अनेक परमेश्वर के विश्वासी जनों का उल्लेख करता है जिन्होंने अपनी समस्याओं तथा विकट परिस्थितियों को परमेश्वर के प्रति अपने विश्वास को व्यक्त करने का अवसर बनाया और परमेश्वर के अनुग्रह, प्रावाधान तथा छुटकारे का अनुभव किया (इब्रानियों 11:33-34)।

   जीवन में अनेकों तूफानों का आना तो अवश्यंभावी हैं; उन तूफानों के प्रति चाहे हमारी प्रथम प्रतिक्रीया उन से बचकर भाग निकल पाने के प्रयास की हो, फिर भी हम परमेश्वर से प्रार्थना में माँग सकते हैं कि वह हमें उन तूफानों में उस पर अपने विश्वास को बनाए रखना सिखाए और उन तूफानों का उपयोग उसकी निकटता में बढ़ने तथा उस से आशीषें प्राप्त करने के लिए करना सिखाए। - डेनिस फिशर


मसीह यीशु के साथ तूफान से होकर निकलना मसीह यीशु के बिना आरामदायक जीवन जीने से बेहतर है।

इन्‍होंने विश्वास ही के द्वारा राज्य जीते; धर्म के काम किए; प्रतिज्ञा की हुई वस्तुएं प्राप्त की, सिंहों के मुंह बन्‍द किए। आग की ज्‍वाला को ठंडा किया; तलवार की धार से बच निकले, निर्बलता में बलवन्‍त हुए; लड़ाई में वीर निकले; विदेशियों की फौजों को मार भगाया। - इब्रानियों 11:33-34

बाइबल पाठ: भजन 107:23-32
Psalms 107:23 जो लोग जहाजों में समुद्र पर चलते हैं, और महासागर पर हो कर व्यापार करते हैं; 
Psalms 107:24 वे यहोवा के कामों को, और उन आश्चर्यकर्मों को जो वह गहिरे समुद्र में करता है, देखते हैं। 
Psalms 107:25 क्योंकि वह आज्ञा देता है, वह प्रचण्ड बयार उठ कर तरंगों को उठाती है। 
Psalms 107:26 वे आकाश तक चढ़ जाते, फिर गहराई में उतर आते हैं; और क्लेश के मारे उनके जी में जी नहीं रहता; 
Psalms 107:27 वे चक्कर खाते, और मतवाले की नाईं लड़खड़ाते हैं, और उनकी सारी बुद्धि मारी जाती है। 
Psalms 107:28 तब वे संकट में यहोवा की दोहाई देते हैं, और वह उन को सकेती से निकालता है। 
Psalms 107:29 वह आंधी को थाम देता है और तरंगें बैठ जाती हैं। 
Psalms 107:30 तब वे उनके बैठने से आनन्दित होते हैं, और वह उन को मन चाहे बन्दर स्थान में पहुंचा देता है। 
Psalms 107:31 लोग यहोवा की करूणा के कारण, और उन आश्चर्यकर्मों के कारण जो वह मनुष्यों के लिये करता है, उसका धन्यवाद करें। 
Psalms 107:32 और सभा में उसको सराहें, और पुरनियों के बैठक में उसकी स्तुति करें।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 इतिहास 1-3
  • यूहन्ना 10:1-23


रविवार, 7 जुलाई 2013

बच निकलना

   प्राचीन युनानी गाथाओं में एक व्यक्ति इकैरस का उल्लेख है जो अपनी बाहों पर मोम के साथ पंख चिपकाकर, उड़ान भरकर एक टापू से बच कर भाग निकला, लेकिन इस सफल उड़ान के उत्साह और जोश में वह उड़ते उड़ते सूर्य के इतना निकट आ गया कि सूर्य की गरमी से मोम पिघल गया, उसके पंख बाहों से अलग होकर गिर गए और वह भी नीचे समुद्र में गिरा और डूब कर मर गया। यह प्राचीन किंवदती दिखाती है कि पक्षियों के समान उड़ान भरने का सपना मनुष्य के मन में प्राचीन काल से ही रहा है। अन्ततः एक व्यक्ति, इव्स रौस्सी, ने इस कलपना को सच कर दिखाया और सन 2004 में स्विटज़रलैण्ड के जनेवा शहर के नज़दीक से उसने अपनी पहली उड़ान भरी। रौस्सी ने अपने लिए एक उषमा-प्रतिरोधक सूट बनवाया, अपनी पीठ पर एक छोटा किंतु शक्तिशाली इंजन तथा पंख बांधे और अपने शरीर को वायुयान के धड़ के समान प्रयोग किया और उड़ान भरी। इसके बाद वह अनेक बार ऐसी ही सफल उड़ान भर कर दिखा चुका है।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में भजनकार दाऊद ने भी पंख होने की तीव्र लालसा जताई है जिससे वह उड़कर अपने शत्रुओं से बच निकले: "और मैं ने कहा, भला होता कि मेरे कबूतर के से पंख होते तो मैं उड़ जाता और विश्राम पाता!" (भजन 55:6)। दाऊद के समान ही, जब हम तनाव, दुर्व्यवहार, कठिनाईयों, दुखों आदि का सामना करते हैं तो हमारा मन भी करता है कि काश हम भी उड़कर इन परिस्थितियों से कहीं दूर बच निकलते।

   लेकिन एक मसीही विश्वासी के पास एक अन्य और अधिक अच्छा विकल्प भी है जो उसे प्रभु यीशु से मिला है - परिस्थितियों से कहीं दूर बच निकलने की बजाए, प्रभु यीशु का खुला निमंत्रण है कि हर बात में उसके शरणागत हो जाएं: "हे सब परिश्रम करने वालों और बोझ से दबे लोगों, मेरे पास आओ; मैं तुम्हें विश्राम दूंगा। मेरा जूआ अपने ऊपर उठा लो; और मुझ से सीखो; क्योंकि मैं नम्र और मन में दीन हूं: और तुम अपने मन में विश्राम पाओगे" (मत्ती 11:28-29)।

   जीवन की परेशानियों से बच निकलने की लालसा रखने की बजाए, हमारे पास एक अधिक सहज और अति कारगर उपाय है - उन्हें प्रभु यीशु के पास लाकर उसे सौंप देना। बच निकलने की लालसा से हमें समाधान और विश्राम नहीं मिल सकता, किंतु प्रभु यीशु से अवश्य मिल सकता है। - बिल क्राउडर


परमेश्वर हमें सामर्थ देता है परिस्थितियों का सामना करने के लिए, उनसे बच कर भागने का प्रयास करने के लिए नहीं।

और मैं ने कहा, भला होता कि मेरे कबूतर के से पंख होते तो मैं उड़ जाता और विश्राम पाता! - भजन 55:6

बाइबल पाठ: भजन 55:1-8
Psalms 55:1 हे परमेश्वर, मेरी प्रार्थना की ओर कान लगा; और मेरी गिड़गिड़ाहट से मुंह न मोड़!
Psalms 55:2 मेरी ओर ध्यान देकर, मुझे उत्तर दे; मैं चिन्ता के मारे छटपटाता हूं और व्याकुल रहता हूं।
Psalms 55:3 क्योंकि शत्रु कोलाहल और दुष्ट उपद्रव कर रहें हैं; वे मुझ पर दोषारोपण करते हैं, और क्रोध में आकर मुझे सताते हैं।
Psalms 55:4 मेरा मन भीतर ही भीतर संकट में है, और मृत्यु का भय मुझ में समा गया है।
Psalms 55:5 भय और कंपकपी ने मुझे पकड़ लिया है, और भय के कारण मेरे रोंए रोंए खड़े हो गए हैं।
Psalms 55:6 और मैं ने कहा, भला होता कि मेरे कबूतर के से पंख होते तो मैं उड़ जाता और विश्राम पाता!
Psalms 55:7 देखो, फिर तो मैं उड़ते उड़ते दूर निकल जाता और जंगल में बसेरा लेता,
Psalms 55:8 मैं प्रचण्ड बयार और आन्धी के झोंके से बचकर किसी शरण स्थान में भाग जाता।

एक साल में बाइबल: 
  • अय्युब 34-35 
  • प्रेरितों 15:1-21