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बुधवार, 1 अक्टूबर 2025

The Holy Communion – 112 - The Conclusion of Participation (2) - Salvation is Eternal / प्रभु भोज – 112 - भाग लेने का निष्कर्ष (2) - उद्धार स्थाई है

 

प्रभु भोज 112

Click Here for the English Translation

भाग लेने का निष्कर्ष (2) - उद्धार स्थाई है

इस लेख पर आधारित चर्चा सुनने के लिये यहाँ क्लिक करें: लेख पर चर्चा का औडियो


    पिछले लेख में हमने देखा था कि निष्कर्ष के रूप में परमेश्वर पवित्र आत्मा ने पौलुस में होकर लिखवाया है 1 कुरिन्थियों 10:16-22 की जिन बातों को हम अभी तक देख चुके हैं, वे प्रभु की मेज़ में भाग लेने वालों पर स्वतः ही लागू हो जाती हैं। परमेश्वर के स्पष्ट निर्देशों और चेतावनियों के बावजूद, जो लोग अनुचित रीति से, रक रस्म या औपचारिकता के निर्वाह के लिये प्रभु की मेज़ में भाग लेते हैं, उन्हें फिर प्रभु को इसका हिसाब देने के लिये तैयार रहना चाहिये। साथ ही हमने लेख के अन्त में आकर उद्धार के स्थाई होने का भी उल्लेख किया था, जिसे समझना यहाँ पर कही गई परमेश्वर को रिस दिलाने की बात को समझने के लिये अनिवार्य है। आज हम उद्धार के स्थाई होने, कभी न खोने के बारे में संक्षेप में देखेंगे।

    जो परमेश्वर के जन हैं, वे उसके बच्चे, उसके परिवार का हिस्सा हैं, और उसकी अनमोल संपत्ति भी हैं। वह संसार के साथ समझौता करने के लिए, और विश्वास में बने रहने की बजाए शैतान के प्रलोभनों में गिर जाने के लिए अवश्य ही उनकी ताड़ना करेगा - यदि आवश्यक हुआ तो बहुत तीव्र ताड़ना भी करेगा, जैसा हम पहले देख चुके हैं; किन्तु कभी भी किसी को भी, उन्हें उससे दूर नहीं ले जाने देगा। एक बार जो परमेश्वर की संतान बन गया, उसकी देह का अंग बन गया, वह हमेशा, अनन्तकाल के लिए परमेश्वर की संतान और उसकी देह का अंग है। यद्यपि बाइबल इस बात के लिए बहुत स्पष्ट है, और कहीं पर भी ऐसा कोई उदाहरण नहीं दिया गया है कि किसी ने भी कभी भी अपने दुराचारी जीवन के कारण अपने उद्धार को खोया हो, लेकिन फिर भी शैतान ने बहुत से लोगों के मनों में यह बात बहुत दृढ़ता से बैठा दी है कि यदि भले कर्मों से सुरक्षित न रखा जाए, तो उद्धार खोया जा सकता है। बाइबल का तथ्य तो यही है कि उद्धार पाया हुआ व्यक्ति ताड़ना पा सकता है, और पाएगा भी, और स्वर्ग में छूछे हाथ भी प्रवेश करेगा, किन्तु उद्धार कभी नहीं खोएगा।

    अनाज्ञाकारिता के कारण उद्धार खोने के इस तर्क का एक और पहलू भी है; ऐसा, जो परमेश्वर के आधारभूत गुणों पर प्रहार करता है - उसके सर्वज्ञानी, अर्थात आदि से अंत के बारे में जानने (यशायाह 14:24; 46:10); और सर्वशक्तिमान परमेश्वर (यूहन्ना 10:28-29) होने पर। यदि किसी का उद्धार उसके व्यवहार के कारण खो सकता है, तो इसका तात्पर्य हुआ कि परमेश्वर ने जब उसे उद्धार दिया, उसके पश्चाताप करने, उसके प्रभु यीशु मसीह में विश्वास करने, उसके क्षमा माँगने को स्वीकार किया, तब परमेश्वर या तो जानता नहीं था, या फिर जान नहीं सकता था कि कुछ समय के बाद यह व्यक्ति शैतान के द्वारा गलत मार्ग पर डाल दिया जाएगा और उससे विमुख होकर उससे दूर चला जाएगा। इसलिए फिर वह अपने दावे के अनुरूप, सर्वज्ञानी परमेश्वर कैसे हो सकता है? दूसरी बात, यदि शैतान फुसलाने, प्रलोभन देने, डराने-धमकाने, झपटा मारकर छीन लेने, या किसी भी अन्य तरीके से किसी को परमेश्वर के हाथों में से निकाल कर ले जा सकता है, और परमेश्वर इस बारे में कुछ नहीं करने पाता है (मत्ती 12:29), तब तो फिर शैतान परमेश्वर से अधिक शक्तिशाली, चतुर, और सामर्थी है, और परमेश्वर फिर सर्वशक्तिमान नहीं है। लेकिन बाइबल का तथ्य है कि परमेश्वर शैतान को भी कुछ बातों को करने की अनुमति दे देता है (निर्गमन 9:16; रोमियों 9:17, 22) और फिर उन बातों के द्वारा अपने बच्चों के लिए कुछ भला करता है (रोमियों 8:28), जैसा कि अय्यूब के जीवन से भली भांति चित्रित किया गया है (अय्यूब 42:12; याकूब 5:11)। किन्तु जो परमेश्वर और उसके वचन को हल्के में लेते हैं, वे हल्के में बचने नहीं पाएंगे, उन्हें एक भारी कीमत चुकानी पड़ेगी, और कुछ तो छूछे हाथ ही अनन्तकाल में प्रवेश करेंगे (1 कुरिन्थियों 3:13-15)

    यदि आप एक मसीही विश्वासी हैं, और प्रभु की मेज़ में भाग लेते रहे हैं, तो कृपया अपने जीवन को जाँच कर देख लें कि आप वास्तव में पापों से छुड़ाए गए हैं तथा आप ने अपना जीवन प्रभु की आज्ञाकारिता में जीने के लिए उस को समर्पित किया है। आपके लिए यह अनिवार्य है कि आप परमेश्वर के वचन की सही शिक्षाओं को जानने के द्वारा एक परिपक्व विश्वासी बनें, तथा सभी शिक्षाओं को वचन की कसौटी पर परखने, और बेरिया के विश्वासियों के समान, लोगों की बातों को पहले वचन से जाँचने और उनकी सत्यता को निश्चित करने के बाद ही उनको स्वीकार करने और मानने वाले बनें (प्रेरितों 17:11; 1 थिस्सलुनीकियों 5:21)। अन्यथा शैतान द्वारा छोड़े हुए झूठे प्रेरित और भविष्यद्वक्ता मसीह के सेवक बन कर (2 कुरिन्थियों 11:13-15) अपनी ठग विद्या और चतुराई से आपको प्रभु के लिए अप्रभावी कर देंगे और आप के मसीही जीवन एवं आशीषों का नाश कर देंगे।

    यदि आपने प्रभु की शिष्यता को अभी तक स्वीकार नहीं किया है, तो अपने अनन्त जीवन और स्वर्गीय आशीषों को सुनिश्चित करने के लिए अभी प्रभु यीशु के पक्ष में अपना निर्णय कर लीजिए। जहाँ प्रभु की आज्ञाकारिता है, उसके वचन की बातों का आदर और पालन है, वहाँ प्रभु की आशीष और सुरक्षा भी है। प्रभु यीशु से अपने पापों के लिए क्षमा माँगकर, स्वेच्छा से तथा सच्चे मन से अपने आप को उसकी अधीनता में समर्पित कर दीजिए – उद्धार और स्वर्गीय जीवन का यही एकमात्र मार्ग है। आपको स्वेच्छा और सच्चे मन से प्रभु यीशु मसीह से केवल एक छोटी प्रार्थना करनी है, और साथ ही अपना जीवन उसे पूर्णतः समर्पित करना है। आप यह प्रार्थना और समर्पण कुछ इस प्रकार से भी कर सकते हैं, “प्रभु यीशु मैं आपका धन्यवाद करता हूँ कि आपने मेरे पापों की क्षमा और समाधान के लिए उन पापों को अपने ऊपर लिया, उनके कारण मेरे स्थान पर क्रूस की मृत्यु सही, गाड़े गए, और मेरे उद्धार के लिए आप तीसरे दिन जी भी उठे, और आज जीवित प्रभु परमेश्वर हैं। कृपया मेरे पापों को क्षमा करें, मुझे अपनी शरण में लें, और मुझे अपना शिष्य बना लें। मैं अपना जीवन आप के हाथों में समर्पित करता हूँ।” सच्चे और समर्पित मन से की गई आपकी एक प्रार्थना आपके वर्तमान तथा भविष्य को, इस लोक के और परलोक के जीवन को, अनन्तकाल के लिए स्वर्गीय एवं आशीषित बना देगी।


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हिन्दी में मसीही विश्वास की आधारभूत बातों पर बाइबल अध्ययन के लिए यहाँ क्लिक करें

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The Holy Communion – 112

English Translation

The Conclusion of Participation (2) - Salvation is Eternal

To listen to a discussion based on today's article click here: Discussion Audio



    In the previous article we had seen that God the Holy Spirit, as conclusion to the matter, through Paul, has had it written that the things we have seen so far from 1 Corinthians 10:16-22, automatically become applicable to those who participate in the Holy Communion. Despite God’s clear instructions and warnings, if people partake unworthily, or as a ritual, as fulfilling a formality, they should then be prepared to give an account to the Lord for doing this. Towards the end of the article we had mentioned about salvation being eternal, which is something that is necessary to understand, to be able to understand what has been mentioned here about the jealousy of God. Today, we will very briefly consider about salvation being eternal, and never being lost.

    Those who are God’s people, are also His children, His family, and are also His precious possession. He is very possessive about them. He will chasten them for their being wayward, for compromising with the world, and succumbing to the temptations brought by the devil instead of standing firm in faith, and if it is required, He will even chasten severely – as we have already seen; but will never let anyone take them away from Him. Once a child of God, once a part of His body, always, for eternity a child of God and a member of His body. Although the Bible is very clear about it, and there are no examples of anyone ever loosing their salvation because of their wayward life, but still, Satan has put this misconception very firmly into many people’s minds that salvation can be lost if it is not maintained by good works. The Biblical fact is that the saved person can be, and will be chastened, and enter heaven without any rewards because of his wayward life, but he will never loose his salvation.

    There is another aspect to this argument about loosing salvation because of disobedience to God; one that hits at the basic characteristics of God – His being omniscient, knowing the end from the beginning (Isaiah 14:24; 46:10), and His being the omnipotent God (John 10:28-29). If salvation can be lost because of the saved person’s behavior, then it implies that God when saving him, accepting his repentance, his coming to faith in the Lord Jesus, and his plea for forgiveness, either did not or could not know that in the days to come, this person will get misled by Satan and will walk away from Him. Therefore, God cannot be the omniscient God that He claims to be. Secondly, if Satan can entice, tempt, threaten, snatch, or in any other way, take away anyone out of God’s hands while God remains powerless or unable to do anything about it (Matthew 12:29), then Satan is stronger, or wiser, or more potent than God, and God is not omnipotent. But the Biblical fact is that God permits Satan to do certain things (Exodus 9:16; Romans 9:17, 22) and eventually even through those things works out good for His children (Romans 8:28), as is well illustrated by the life of Job (Job 42:12; James 5:11). But those who take the Lord and His Word lightly, will not escape lightly, they will have to pay a price, and some will even enter eternity empty-handed (1 Corinthians 3:13-15).

    If you are a Christian Believer and have been participating in the Lord’s Table, then please examine your life and make sure that you are actually a disciple of the Lord, i.e., are redeemed from your sins, have submitted and surrendered your life to the Lord Jesus to live in obedience to Him and His Word. You should also always, like the Berean Believers, first check and test all teachings that you receive from the Word of God, and only after ascertaining the truth and veracity of the teachings brought to you by men, should you accept and obey them (Acts 17:11; 1 Thessalonians 5:21). If you do not do this, the false apostles and prophets sent by Satan as ministers of Christ (2 Corinthians 11:13-15), will by their trickery, cunningness, and craftiness render you ineffective for the Lord and cause severe damage to your Christian life and your rewards.

    If you have not yet accepted the discipleship of the Lord Jesus, then to ensure your eternal life and heavenly rewards, take a decision in favor of the Lord Jesus now. Wherever there is surrender and obedience towards the Lord Jesus, the Lord’s blessings and safety are also there. If you are still not Born Again, have not obtained salvation, or have not asked the Lord Jesus for forgiveness for your sins, then you have the opportunity to do so right now. A short prayer said voluntarily with a sincere heart, with heartfelt repentance for your sins, and a fully submissive attitude, “Lord Jesus, I confess that I have disobeyed You, and have knowingly or unknowingly, in mind, in thought, in attitude, and in deeds, committed sins. I believe that you have fully borne the punishment of my sins by your sacrifice on the cross, and have paid the full price of those sins for all eternity. Please forgive my sins, change my heart and mind towards you, and make me your disciple, take me with you." God longs for your company and wants to see you blessed, but to make this possible, is your personal decision. Will you not say this prayer now, while you have the time and opportunity to do so – the decision is yours.

 

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शनिवार, 28 नवंबर 2020

चट्टान

 

         पिछले गर्मियों में मेरे पति और मैं ग्रामीण पेन्सिल्वेनिया में स्थित एक प्रसिद्ध मकान – फौलिंगवाटर्स को देखने गए। इसे वास्तुकार फ्रैंक लौएड राईट ने 1935 में परिकल्पना करके बनाया था। मैंने कभी उस मकान के समान कोई अन्य मकान नहीं देखा है। राईट ऐसा घर बनाना चाहता था जो मानो जैविक रीति से आस-पास के मैदान में से उगता हुआ प्रतीत हो, और वह अपने उद्देश्य में कामयाब रहा था। उसने वह घर वहाँ मौजूद एक झरने के चारों ओर बनाया था, और उसकी शैली में वहाँ की चट्टानों को देखा जा सकता है। हमारे गाईड ने हमें बताया कि उस घर को जो बात सुरक्षित बनाती थी वह यह थी कि उस घर का मुख्य केन्द्रीय भाग चट्टानों पर आधारित है।

         यह सुनकर मुझे परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रभु यीशु द्वारा अपने शिष्यों से कहे गए शब्द स्मरण हो आए। अपने द्वारा दिए गए पहाड़ी उपदेश में प्रभु यीशु ने शिष्यों को बताया था कि जो वह उन्हें सिखा रहा है वह उनके जीवन के लिए दृढ़ नींव बन जाएगा। यदि वे उसकी कही बातों को सुनें और उनका पालन करें, तो वे जीवन के किसी भी तूफ़ान का सफलता से सामना करने पाएँगे। इसकी तुलना में, जो सुनते हैं परन्तु मानते नहीं हैं, बालू पर बनाए हुए घर के समान होंगे (मत्ती 7:24-27)। बाद में पौलुस ने भी यही बात दोहराई, कि प्रभु यीशु मसीह ही मसीही विश्वासी के जीवन की नींव है, और हमें उसी पर टिकाऊ वस्तुओं द्वारा निर्माण करना है (1 कुरिन्थियों 3:11)।

         जब हम प्रभु यीशु की बातों को सुनते और मानते हैं, तब हम अपने जीवनों को स्थिर चट्टान समान नींव पर बनाते हैं, जो उस फौलिंगवाटर्स मकान के समान दिखने में सुन्दर, अद्भुत और चट्टान पर स्थिर बने रहने वाला होगा। - एमी पीटरसन

 

आप अपना जीवन किस पर आधारित कर के बना रहे हैं?


क्योंकि उस नींव को छोड़ जो पड़ी है, और वह यीशु मसीह है कोई दूसरी नींव नहीं डाल सकता। - 1 कुरिन्थियों 3:11

बाइबल पाठ: मत्ती 7:24-27

मत्ती 7:24 इसलिये जो कोई मेरी ये बातें सुनकर उन्हें मानता है वह उस बुद्धिमान मनुष्य के समान ठहरेगा जिसने अपना घर चट्टान पर बनाया।

मत्ती 7:25 और मेंह बरसा और बाढ़ें आईं, और आन्‍धियाँ चलीं, और उस घर पर टक्करें लगीं, परन्तु वह नहीं गिरा, क्योंकि उस की नींव चट्टान पर डाली गई थी।

मत्ती 7:26 परन्तु जो कोई मेरी ये बातें सुनता है और उन पर नहीं चलता वह उस निर्बुद्धि मनुष्य के समान ठहरेगा जिसने अपना घर बालू पर बनाया।

मत्ती 7:27 और मेंह बरसा, और बाढ़ें आईं, और आन्‍धियाँ चलीं, और उस घर पर टक्करें लगीं और वह गिरकर सत्यानाश हो गया।

 

एक साल में बाइबल: 

  • यहेजकेल 33-34
  • 1 पतरस 5

मंगलवार, 24 सितंबर 2019

निवास-स्थान



      मेरा पालन-पोषण अमेरिका के मिनिसोटा प्रदेश में हुआ, जो अपनी अनेकों सुन्दर झीलों के लिए प्रसिद्ध है। परमेश्वर की उस अनुपम सृष्टि की सुन्दरता का आनन्द लेने के लिए हम खुले इलाकों में कैम्पिंग के लिए जाया करते थे, परन्तु पतले कपड़े से बने तम्बुओं में सोना मुझे पसन्द नहीं था, विशेषकर तब जब बारिश हो और रिस कर तम्बू में आया पानी सारे स्लीपिंग बैग या बिस्तर को गीला कर दे।

      इसलिए मुझे अचरज होता है कि परमेश्वर के वचन बाइबल में विश्वास के एक नायक अब्राहम ने लगभग सौ वर्ष तम्बुओं में बिताए। जब अब्राहम की आयु पचहत्तर वर्ष की थी तब उसने परमेश्वर की बुलाहट को सुना, कि वो अपने देश को छोड़कर उस स्थान को जाए जहाँ पर परमेश्वर उसे आशीषित करेगा और उससे एक बड़ी जाति बनाएगा (उत्पत्ति 12:1-2)। अब्राहम ने परमेश्वर की बात पर विश्वास किया, उसकी आज्ञाकारिता में अपने घर और देश से अनजाने स्थान की ओर निकल पड़ा, इस विश्वास के साथ कि परमेश्वर अपनी कही हुई बात को पूरा भी करेगा। और अपने शेष जीवन भर, जब तक कि वह एक सौ पचहत्तर वर्ष की आयु में मर नहीं गया (25:7), वह अपने देश से दूर, तम्बुओं में ही निवास करता रहा।

      आज हमारी वह बुलाहट चाहे न हो जो अब्राहम की थी, कि वह खानाबदोशों का जीवन जीए, परन्तु जब हम इस सँसार और उसके लोगों के मध्य रहते और सेवा करते हैं, उनसे प्रेम करते हैं, तो हमें भी अपने किसी स्थाई निवास-स्थान की लालसा हो सकती है, जिसके साथ हम अपने आप को जुड़ा हुआ अनुभव कर सकें। जब कठिन परिस्थितियाँ और परेशानियां हमारे ‘तम्बुओं’ में दिक्कतें पैदा करें, तो अब्राहम के समान ही हम भी विश्वास के साथ अपने उस स्थाई निवास-स्थान की ओर देखें जिसका “बनानेवाला परमेश्वर है” (इब्रानियों 11:10)। और अब्राहम के समान ही, हम भी उस आशा पर भरोसा बनाए रखें कि परमेश्वर अपनी सृष्टि को नया कर रहा है, प्रभु यीशु मसीह में विश्वास द्वारा उसकी सन्तान बने हुओं के लिए एक उत्तम और स्वर्गीय निवास-स्थान  तैयार कर रहा है। - एमी बाउचर पाई

परमेश्वर हमारे जीवनों के लिए हमें दृढ़ आधार देता है।

तुम्हारा मन व्याकुल न हो, तुम परमेश्वर पर विश्वास रखते हो मुझ पर भी विश्वास रखो। मेरे पिता के घर में बहुत से रहने के स्थान हैं, यदि न होते, तो मैं तुम से कह देता क्योंकि मैं तुम्हारे लिये जगह तैयार करने जाता हूं। - यूहन्ना 14:1-2

बाइबल पाठ: उत्पत्ति 12:4-9; इब्रानियों 11:8-12
Genesis 12:4 यहोवा के इस वचन के अनुसार अब्राम चला; और लूत भी उसके संग चला; और जब अब्राम हारान देश से निकला उस समय वह पचहत्तर वर्ष का था।
Genesis 12:5 सो अब्राम अपनी पत्नी सारै, और अपने भतीजे लूत को, और जो धन उन्होंने इकट्ठा किया था, और जो प्राणी उन्होंने हारान में प्राप्त किए थे, सब को ले कर कनान देश में जाने को निकल चला; और वे कनान देश में आ भी गए।
Genesis 12:6 उस देश के बीच से जाते हुए अब्राम शकेम में, जहां मोरे का बांज वृक्ष है, पंहुचा; उस समय उस देश में कनानी लोग रहते थे।
Genesis 12:7 तब यहोवा ने अब्राम को दर्शन देकर कहा, यह देश मैं तेरे वंश को दूंगा: और उसने वहां यहोवा के लिये जिसने उसे दर्शन दिया था, एक वेदी बनाई।
Genesis 12:8 फिर वहां से कूच कर के, वह उस पहाड़ पर आया, जो बेतेल के पूर्व की ओर है; और अपना तम्बू उस स्थान में खड़ा किया जिसकी पच्छिम की ओर तो बेतेल, और पूर्व की ओर ऐ है; और वहां भी उसने यहोवा के लिये एक वेदी बनाई: और यहोवा से प्रार्थना की
Genesis 12:9 और अब्राम कूच कर के दक्खिन देश की ओर चला गया।

Hebrews 11:8 विश्वास ही से इब्राहीम जब बुलाया गया तो आज्ञा मानकर ऐसी जगह निकल गया जिसे मीरास में लेने वाला था, और यह न जानता था, कि मैं किधर जाता हूं; तौभी निकल गया।
Hebrews 11:9 विश्वास ही से उसने प्रतिज्ञा किए हुए देश में जैसे पराए देश में परदेशी रह कर इसहाक और याकूब समेत जो उसके साथ उसी प्रतिज्ञा के वारिस थे, तम्बूओं में वास किया।
Hebrews 11:10 क्योंकि वह उस स्थिर नेव वाले नगर की बाट जोहता था, जिस का रचने वाला और बनाने वाला परमेश्वर है।
Hebrews 11:11 विश्वास से सारा ने आप बूढ़ी होने पर भी गर्भ धारण करने की सामर्थ पाई; क्योंकि उसने प्रतिज्ञा करने वाले को सच्चा जाना था।
Hebrews 11:12 इस कारण एक ही जन से जो मरा हुआ सा था, आकाश के तारों और समुद्र के तीर के बालू की नाईं, अनगिनित वंश उत्पन्न हुआ।

एक साल में बाइबल: 
  • श्रेष्ठगीत 4-5
  • गलातियों 3



शुक्रवार, 28 दिसंबर 2018

प्रेम



      जून 2015 में पैरिस शहर के अधिकारियों ने पदयात्रियों के प्रयोग के लिए बने पुल पोंट-डे-आर्ट्स के किनारों की सांकलों पर से पैंतालीस टन वजन के ताले हटाए। प्रेमी जोड़े, अपने प्रेम भाव के प्रदर्शन के तौर पर तालों पर अपने नाम खरोंच कर उसे पुल की सांकलों पर लगा देते हैं और चाबी को नीचे बह रही सीएन नदी में फेंक देते हैं। हज़ारों बार इस परंपरा के निर्वाह के कारण वह पुल उस “प्रेम” के भार से इतना बोझिल हो गया कि अधिकारियों को उसके बने रहने पर शंका होने लगी, और उन्हें वे “प्रेम के बंधन” वहाँ से हटाने पड़े।

      उन तालों का उद्देश्य चिर-स्थाई प्रेम को व्यक्त करना था, परन्तु मानवीय प्रेम सदा ही बना नहीं रहता है। अंतरंग मित्रों में परस्पर मतभेद हो जाते हैं, संभव है कि जिन्हें वे कभी नहीं सुलझाएं। परिवार के सदस्यों में वाद-विवाद हो जाते हैं और वे एक दूसरे को कभी क्षमा न करें। एक पति और पत्नि एक-दूसरे से अलग होकर अपने अपने रास्तों पर इतनी दूर चले जा सकते हैं कि उन्हें स्मरण ही न आए कि उन्होंने विवाह किया ही क्यों था। मानवीय प्रेम अस्थिर हो सकता है।

      परन्तु एक स्थिर और सदा बने रहने वाला प्रेम  है – परमेश्वर का प्रेम। परमेश्वर के वचन बाइबल में भजनकार ने भजन 106:1 में कहा है “याह की स्तुति करो! यहोवा का धन्यवाद करो, क्योंकि वह भला है; और उसकी करूणा सदा की है!” समस्त पवित्र शास्त्र के प्रत्येक भाग में परमेश्वर के कभी न बदलने वाले और अटल प्रेम की प्रतिज्ञाएँ विद्यमान हैं। उसके इस प्रेम का सबसे महान प्रमाण है परमेश्वर द्वारा अपने पुत्र प्रभु यीशु मसीह का बलिदान देना ताकि जो कोई उसपर विश्वास करे वह नाश न हो परन्तु अनन्त जीवन पाए। साथ ही उसकी यह भी प्रतिज्ञा है कि ऐसी कोई भी बात, कोई भी वस्तु नहीं है जो हमें उसके प्रेम से अलग कर सके (रोमियों 8:38-39)।

      हम मसीही विश्वासी परमेश्वर के साथ उसके प्रेम के बंधन में सदा के लिए बन्ध गए हैं। - सिंडी हैस कैस्पर


मसीह यीशु की मृत्यु और पुनरुत्थान मेरे लिए परमेश्वर के प्रेम का माप हैं।

क्योंकि परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम रखा कि उसने अपना एकलौता पुत्र दे दिया, ताकि जो कोई उस पर विश्वास करे, वह नाश न हो, परन्तु अनन्त जीवन पाए।  - यूहन्ना  3:16

बाइबल पाठ: रोमियों 8: 29-39
Romans 8:29 क्योंकि जिन्हें उसने पहिले से जान लिया है उन्हें पहिले से ठहराया भी है कि उसके पुत्र के स्वरूप में हों ताकि वह बहुत भाइयों में पहिलौठा ठहरे।
Romans 8:30 फिर जिन्हें उसने पहिले से ठहराया, उन्हें बुलाया भी, और जिन्हें बुलाया, उन्हें धर्मी भी ठहराया है, और जिन्हें धर्मी ठहराया, उन्हें महिमा भी दी है।
Romans 8:31 सो हम इन बातों के विषय में क्या कहें? यदि परमेश्वर हमारी ओर है, तो हमारा विरोधी कौन हो सकता है?
Romans 8:32 जिसने अपने निज पुत्र को भी न रख छोड़ा, परन्तु उसे हम सब के लिये दे दिया: वह उसके साथ हमें और सब कुछ क्योंकर न देगा?
Romans 8:33 परमेश्वर के चुने हुओं पर दोष कौन लगाएगा? परमेश्वर वह है जो उन को धर्मी ठहराने वाला है।
Romans 8:34 फिर कौन है जो दण्ड की आज्ञा देगा? मसीह वह है जो मर गया वरन मुर्दों में से जी भी उठा, और परमेश्वर की दाहिनी ओर है, और हमारे लिये निवेदन भी करता है।
Romans 8:35 कौन हम को मसीह के प्रेम से अलग करेगा? क्या क्लेश, या संकट, या उपद्रव, या अकाल, या नंगाई, या जोखिम, या तलवार?
Romans 8:36 जैसा लिखा है, कि तेरे लिये हम दिन भर घात किए जाते हैं; हम वध होने वाली भेंडों के समान गिने गए हैं।
Romans 8:37 परन्तु इन सब बातों में हम उसके द्वारा जिसने हम से प्रेम किया है, जयवन्त से भी बढ़कर हैं।
Romans 8:38 क्योंकि मैं निश्चय जानता हूं, कि न मृत्यु, न जीवन, न स्वर्गदूत, न प्रधानताएं, न वर्तमान, न भविष्य, न सामर्थ्य, न ऊंचाई,
Romans 8:39 न गहिराई और न कोई और सृष्टि, हमें परमेश्वर के प्रेम से, जो हमारे प्रभु मसीह यीशु में है, अलग कर सकेगी।
                                                                                                                                                        

एक साल में बाइबल: 
  • ज़कर्याह 5-8
  • प्रकाशितवाक्य 19



मंगलवार, 4 अक्टूबर 2016

स्थाई


   हम आज एक ऐसी संस्कृति में रह रहे हैं जिसमें ’प्रयोग करो और फेंक दो’ का चलन अधिकाधिक होता जा रहा है। थोड़ा थम कर दैनिक उपयोग की उन वस्तुओं के बारे में सोचें जो उपयोग हो चुकने के बाद फेंके जाने के लिए ही बनाई जाती हैं - उस्तरे, पानी की बोतलें, लाईटर, कागज़ की प्लेटें, भोजन करने के लिए प्लास्टिक के बर्तन इत्यादि, सभी ऐसी वस्तुएं हैं जिनका प्रयोग करके उन्हें फेंक दिया जाता है और उनके स्थान पर ऐसा ही करने के लिए नई वस्तुएं ले ली जाती हैं।

   यह ’प्रयोग करो और फेंक दो’ का चलन हमारे परस्पर व्यवहार एवं संबंधों में भी दिखने और बढ़ने लगा है। कई बार रिश्तों में परस्पर सच्चा समर्पण एच्छिक प्रतीत होता है; विवाह संबंध स्थाई बने रहने के लिए संघर्षों से निकलते रहते हैं। लंबे समय से कार्य करने वाले कर्मचारी मालिकों या अधिकारियों द्वारा सेवानिवृति से पहले बर्खास्त कर दिए जाते हैं ताकि उनका स्थान सस्ते विकल्प ले सकें। उच्च कोटि के खिलाड़ी अधिक कमाई के लिए अपनी टीम छोड़ कर दूसरी टीम में चले जाते हैं। ऐसा लगता है कि कुछ भी स्थाई नहीं है।

   लेकिन हमारे कभी ना बदलने वाले प्रभु परमेश्वर का यह वायदा है कि उसका प्रेम भरा अनुग्रह उसके बच्चों के साथ सदा स्थाई बना रहेगा। परमेश्वर के वचन बाइबल के भजन 136 में भजनकार परमेश्वर के इसी स्थाई होने के वायदे का जश्न उसके कार्य, चरित्र और हैसियत के अचरज से संबंधित कथनों के द्वारा मनाता है। परमेश्वर से संबंधित अपने हर कथन के बाद भजनकार दोहराता है, "उसकी करुणा सदा की है"; चाहे वह कथन परमेश्वर की अद्भुत सृष्टि पर हो (पद 4-9), या अपने लोगों को बचाने के लिए किए गए उसके कार्य पर हो (पद 10-22) या फिर अपने लोगों के प्रति उसकी करुणापूर्ण देखभाल से संबंधित हो (पद 23-26)। हम परमेश्वर में सदा अपना भरोसा बनाए रख सकते हैं क्योंकि उसकी करुणा कभी कम नहीं होती; परमेश्वर की करुणा का स्थाई होना हमें हर परिस्थिति में आशा प्रदान करता रहता है।

   इसीलिए हम भी भजनकार के साथ यह कह सकते हैं: "यहोवा का धन्यवाद करो, क्योंकि वह भला है, और उसकी करूणा सदा की है" (पद 1)।


परमेश्वर का अनुग्रह अथाह; उसकी करुणा अनन्त और उसकी शांति अवर्णनीय है।

क्योंकि मैं यहोवा बदलता नहीं; इसी कारण, हे याकूब की सन्तान तुम नाश नहीं हुए। - मलाकी 3:6

बाइबल पाठ: भजन 136:1-11; 23-26
Psalms 136:1 यहोवा का धन्यवाद करो, क्योंकि वह भला है, और उसकी करूणा सदा की है। 
Psalms 136:2 जो ईश्वरों का परमेश्वर है, उसका धन्यवाद करो, उसकी करूणा सदा की है।
Psalms 136:3 जो प्रभुओं का प्रभु है, उसका धन्यवाद करो, उसकी करूणा सदा की है।
Psalms 136:4 उसको छोड़कर कोई बड़े बड़े अशचर्यकर्म नहीं करता, उसकी करूणा सदा की है। 
Psalms 136:5 उसने अपनी बुद्धि से आकाश बनाया, उसकी करूणा सदा की है। 
Psalms 136:6 उसने पृथ्वी को जल के ऊपर फैलाया है, उसकी करूणा सदा की है। 
Psalms 136:7 उसने बड़ी बड़ी ज्योतियों बनाईं, उसकी करूणा सदा की है। 
Psalms 136:8 दिन पर प्रभुता करने के लिये सूर्य को बनाया, उसकी करूणा सदा की है। 
Psalms 136:9 और रात पर प्रभुता करने के लिये चन्द्रमा और तारागण को बनाया, उसकी करूणा सदा की है। 
Psalms 136:10 उसने मिस्त्रियों के पहिलौठों को मारा, उसकी करूणा सदा की है।
Psalms 136:11 और उनके बीच से इस्राएलियों को निकाला, उसकी करूणा सदा की है। 
Psalms 136:23 उसने हमारी दुर्दशा में हमारी सुधि ली, उसकी करूणा सदा की है। 
Psalms 136:24 और हम को द्रोहियों से छुड़ाया है, उसकी करूणा सदा की है। 
Psalms 136:25 वह सब प्राणियों को आहार देता है, उसकी करूणा सदा की है। 
Psalms 136:26 स्वर्ग के परमेश्वर का धन्यवाद करो, उसकी करूणा सदा की है। 

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 20-22
  • इफिसियों 6