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सोमवार, 28 सितंबर 2020

इच्छा


         हमारे विवाह के आरंभिक समय में, मेरे अन्दर अपनी पत्नी की इच्छा जानकर उसके अनुसार करने के लिए संघर्ष रहता था। मैं सोचा करता था कि उसे क्या पसंद आएगा, कि हम संध्या को घर रहकर एक दूसरे के साथ समय बिताएं और भोजन करें, या बाहर किसी आकर्षक रेस्टोरेंट में जाकर बैठें और वहाँ भोजन करें? उसे क्या अच्छा लगेगा, कि मैं अपने मित्रों के साथ कुछ समय बिता कर आऊँ, या उसकी इच्छा होगी के मैं सप्ताहांत उसके साथ बिताने के लिए कार्य मुक्त रखूँ? फिर एक बार मैंने अटकलें लगाने और दुविधा में पड़ने के स्थान पर सीधे उसी से पूछ लेने का निर्णय लिया; मैंने उससे पूछा, “तुम्हारी इच्छा क्या है; तुम्हें क्या पसंद आएगा?” उसने उत्तर दिया, “मेरे लिए दोनों ही ठीक हैं; बस मुझे इसकी प्रसन्नता है कि तुम ने मेरे बारे में सोचा।”

         मेरे साथ ऐसे भी समय आए हैं जब मैंने कुछ बातों के लिए परमेश्वर की इच्छा जानने की बहुत लालसा रखी – यह कि मैं बिलकुल स्पष्ट जान लूँ कि परमेश्वर मुझ से क्या चाहता है – जैसे कि मैं कौन सी नौकरी करूं। मार्गदर्शन के लिए प्रार्थनाएं करना और परमेश्वर के वचन बाइबल को पढ़ने से मुझे कोई सुस्पष्ट उत्तर नहीं मिले। परन्तु एक उत्तर बिलकुल स्पष्ट था: मुझे परमेश्वर पर भरोसा बनाए रखना है, उसी को अपने सुख का मूल जानना है, और अपने मार्ग की चिंता को उसी पर छोड़ देना है (भजन 37:3-5)।

         तब मुझे यह बोध हुआ कि परमेश्वर अकसर हमें चुनने की स्वतंत्रता देता है – यदि हम अपने मार्गों से पहले उसके मार्गों को चुनते हैं। इसका स्पष्ट अर्थ है कि हम ऐसा कुछ नहीं करें जो गलत है, या उसे पसंद नहीं आएगा। यह कुछ भी अनैतिक, अधर्मी, या उसके साथ हमारे संबंधों की उन्नति के लिए सहायक न होने वाला हो सकता है। यदि ऐसे सभी विकल्पों को हटा दिया जाए, तो फिर जो विकल्प शेष रह जाते हैं, जो परमेश्वर को प्रसन्न करते हैं, हमें स्वतंत्रता है कि हम उनमें से कोई एक चुन लें।

         हमारा परमेश्वर पिता हमें – जो उसे अपने सुख का मूल जानते हैं, अपने मन की इच्छाएं पूरी करने देना चाहता है – वे जो उसे आदर और महिमा देती हैं। - लेस्ली कोह

 

क्या आपके निर्णय परमेश्वर को पसंद आते हैं?


हे जवान, अपनी जवानी में आनन्द कर, और अपनी जवानी के दिनों के मगन रह; अपनी मनमानी कर और अपनी आंखों की दृष्टि के अनुसार चल। परन्तु यह जान रख कि इन सब बातों के विषय में परमेश्वर तेरा न्याय करेगा। - सभोपदेशक 11:9

बाइबल पाठ: भजन 37:3-7, 23-24

भजन संहिता 37:3 यहोवा पर भरोसा रख, और भला कर; देश में बसा रह, और सच्चाई में मन लगाए रह।

भजन संहिता 37:4 यहोवा को अपने सुख का मूल जान, और वह तेरे मनोरथों को पूरा करेगा।

भजन संहिता 37:5 अपने मार्ग की चिन्ता यहोवा पर छोड़; और उस पर भरोसा रख, वही पूरा करेगा।

भजन संहिता 37:6 और वह तेरा धर्म ज्योति के समान, और तेरा न्याय दोपहर के उजियाले के समान प्रगट करेगा।

भजन संहिता 37:7 यहोवा के सामने चुपचाप रह, और धीरज से उसका आसरा रख; उस मनुष्य के कारण न कुढ़, जिसके काम सफल होते हैं, और वह बुरी युक्तियों को निकालता है!

भजन संहिता 37:23 मनुष्य की गति यहोवा की ओर से दृढ़ होती है, और उसके चलन से वह प्रसन्न रहता है;

भजन संहिता 37:24 चाहे वह गिरे तौभी पड़ा न रह जाएगा, क्योंकि यहोवा उसका हाथ थामे रहता है।

 

एक साल में बाइबल: 

  • यशायाह 5-6
  • इफिसियों 1


मंगलवार, 5 मार्च 2019

स्वागत और पहुनाई



      हमने एक भोज का आयोजन किया, जिसमें पाँच देशों के निवासियों के परिवार हमारे साथ भोजन करने के लिए सम्मिलित हुए, और वह हमारे लिए एक अद्भुत यादगार है। भोज के समय हमारे वार्तालाप में सभी सम्मिलित हुए, यह वार्तालाप एक या दो तक ही सीमित नहीं रहा। उपस्थित सभी लोगों ने लंडन शहर में जीवन के प्रति, उनके विभिन्न देशों से होने के परिदृश्य में होकर, अपने विचारों को साझा किया। उस संध्या की समाप्ति के बाद, मेरे पति और मैंने अनुभव किया कि हमने जितना दिया था, उससे कहीं अधिक हमें मिल गया था, जिसमें नए मित्र बनाने और भिन्न संसकृतियों के विषय सीखने से संबंधित भावनाओं का स्नेहिल एहसास भी था।

      परमेश्वर के वचन बाइबल में इब्रानियों को लिखी पत्री के अन्त में लेखक सामाजिक जीवन से संबंधित कुछ बातों के विषय कुछ निर्देश देता है, जिनमें से एक है कि उसके पाठक अतिथिसत्कार में लगे रहें। क्योंकि इस सेवा में “इस के द्वारा कितनों ने अनजाने स्‍वर्गदूतों की पहुनाई की है” (13:2)। संभव है कि लेखक के मन में अब्राहम और सारा का विचार हो, जिनके विषय हम उत्पत्ति 18:1-14 में देखते हैं कि उन्होंने कुछ अजनबियों का अपने निवास-स्थान में स्वागत किया, उनकी पहुनाई की, उन्हें उत्तम भोजन खिलाया। वे नहीं जानते थे कि वे स्वर्गदूतों की पहुनाई कर रहे हैं, जो उनके लिए आशीष का सन्देश लेकर आए थे।

      हम लोगों को अपने घरों में, उनसे कुछ प्राप्त करने के लिए स्वागत नहीं करते हैं, परन्तु बहुधा हम पहुनाई के द्वारा जितना देते हैं, उससे अधिक प्राप्त कर लेते हैं। प्रभु परमेश्वर के नाम में लोगों का स्वागत और पहुनाई करने के द्वारा हम प्रभु के प्रेम को औरों तक पहुँचने का माध्यम बनते हैं; स्वागत और पहुनाई में लगे रहें। - एमी बाउचर पाई


जब हम पहुनाई करते हैं, हम परमेश्वर की भलाई और उपहारों को बांटते हैं।

भाईचारे की प्रीति बनी रहे। पहुनाई करना न भूलना, क्योंकि इस के द्वारा कितनों ने अनजाने स्‍वर्गदूतों की पहुनाई की है। - इब्रानियों 13:1-2

बाइबल पाठ: उत्पत्ति 18:1-14
Genesis 18:1 इब्राहीम माम्रे के बांजो के बीच कड़ी धूप के समय तम्बू के द्वार पर बैठा हुआ था, तब यहोवा ने उसे दर्शन दिया:
Genesis 18:2 और उसने आंख उठा कर दृष्टि की तो क्या देखा, कि तीन पुरूष उसके साम्हने खड़े हैं: जब उसने उन्हे देखा तब वह उन से भेंट करने के लिये तम्बू के द्वार से दौड़ा, और भूमि पर गिरकर दण्डवत की और कहने लगा,
Genesis 18:3 हे प्रभु, यदि मुझ पर तेरी अनुग्रह की दृष्टि है तो मैं बिनती करता हूं, कि अपने दास के पास से चले न जाना।
Genesis 18:4 मैं थोड़ा सा जल लाता हूं और आप अपने पांव धोकर इस वृक्ष के तले विश्राम करें।
Genesis 18:5 फिर मैं एक टुकड़ा रोटी ले आऊं और उस से आप अपने जीव को तृप्त करें; तब उसके पश्चात आगे बढें: क्योंकि आप अपने दास के पास इसी लिये पधारे हैं। उन्होंने कहा, जैसा तू कहता है वैसा ही कर।
Genesis 18:6 सो इब्राहीम ने तम्बू में सारा के पास फुर्ती से जा कर कहा, तीन सआ मैदा फुर्ती से गून्ध, और फुलके बना।
Genesis 18:7 फिर इब्राहीम गाय बैल के झुण्ड में दौड़ा, और एक कोमल और अच्छा बछड़ा ले कर अपने सेवक को दिया, और उसने फुर्ती से उसको पकाया।
Genesis 18:8 तब उसने मक्खन, और दूध, और वह बछड़ा, जो उसने पकवाया था, ले कर उनके आगे परोस दिया; और आप वृक्ष के तले उनके पास खड़ा रहा, और वे खाने लगे।
Genesis 18:9 उन्होंने उस से पूछा, तेरी पत्नी सारा कहां है? उसने कहा, वह तो तम्बू में है।
Genesis 18:10 उसने कहा मैं वसन्त ऋतु में निश्चय तेरे पास फिर आऊंगा; और तब तेरी पत्नी सारा के एक पुत्र उत्पन्न होगा। और सारा तम्बू के द्वार पर जो इब्राहीम के पीछे था सुन रही थी।
Genesis 18:11 इब्राहीम और सारा दोनो बहुत बूढ़े थे; और सारा का स्त्रीधर्म बन्द हो गया था
Genesis 18:12 सो सारा मन में हंस कर कहने लगी, मैं तो बूढ़ी हूं, और मेरा पति भी बूढ़ा है, तो क्या मुझे यह सुख होगा?
Genesis 18:13 तब यहोवा ने इब्राहीम से कहा, सारा यह कहकर क्यों हंसी, कि क्या मेरे, जो ऐसी बुढिय़ा हो गई हूं, सचमुच एक पुत्र उत्पन्न होगा?
Genesis 18:14 क्या यहोवा के लिये कोई काम कठिन है? नियत समय में, अर्थात वसन्त ऋतु में, मैं तेरे पास फिर आऊंगा, और सारा के पुत्र उत्पन्न होगा।  


एक साल में बाइबल: 
  • गिनती 34-36
  • मरकुस 9:30-50



सोमवार, 4 मार्च 2019

समझता



      कभी-कभी मैं और मेरी पत्नि, हम एक दूसरे के वाक्यों को पूरा कर देते हैं। तीस वर्ष से अधिक के विवाहित जीवन में साथ रहते-रहते हम एक दूसरे के विचार और बात करने के बारे में बहुत अच्छे से परिचित हैं। कभी-कभी तो हमें वाक्य को पूरा भी नहीं करना पड़ता है; केवल एक शब्द या एक-दूसरे की ओर एक झलक ही हमारी सोच को एक दूसरे से व्यक्त करने के लिए पर्याप्त होती है।

      इसमें ऐसी सुख-शान्ति है जैसे पैरों में अच्छे से आ जाने वाले पुराने जूतों की जोड़ी को पहनने में मिलती है। हम कभी-कभी एक दूसरे को प्यार से “मेरी पुरानी जूती” भी कह देते हैं – जो ऐसा अभिवादन है जिसे तब तक समझ पाना कठिन है जब तक आप हमें अच्छे से नहीं जानते हों। वर्षों के साथ में हमारे संबंध की एक अपनी ही भाषा विक्सित हो गई है, जिनमें ऐसी अभिव्यक्तियाँ हैं जो दशकों के प्रेम और भरोसे का परिणाम हैं।

      ऐसे ही इस जानकारी में संतोष और सुख है कि परमेश्वर हमें भली-भांति जानता है और हमसे प्रेम बहुत करता है। परमेश्वर के वचन बाइबल में भजनकार दाऊद ने लिखा, “हे यहोवा, मेरे मुंह में ऐसी कोई बात नहीं जिसे तू पूरी रीति से न जानता हो” (भजन 139:4)। कल्पना कीजिए प्रभु यीशु के साथ बिना कुछ बोले वार्तालाप करने की, जिस में आप अपने हृदय की सभी बातें उससे निःसंकोच कहना चाहते हैं। परन्तु इससे पहले कि आप अपनी बात को शब्दों में लाने पाएँ, प्रभु आपकी ओर देखकर मुस्कुराता है और जो आप कहना चाहते हैं उसे व्यक्त कर देता है। यह जानने में कितना संतोष है कि हमें प्रभु परमेश्वर से वार्तालाप करने के लिए सही शब्दों का उपयोग करने की मजबूरी नहीं है। वह हमें जानता है, हमें अच्छे से समझता है। - जेम्स बैंक्स


परमेश्वर हमारे शब्दों से बढ़कर हमारे हृदयों को देखता है।

और हे मेरे पुत्र सुलैमान! तू अपने पिता के परमेश्वर का ज्ञान रख, और खरे मन और प्रसन्न जीव से उसकी सेवा करता रह; क्योंकि यहोवा मन को जांचता और विचार में जो कुछ उत्पन्न होता है उसे समझता है। यदि तू उसकी खोज में रहे, तो वह तुझ को मिलेगा; परन्तु यदि तू उसको त्याग दे तो वह सदा के लिये तुझ को छोड़ देगा। - 1 इतिहास 28:9

बाइबल पाठ: भजन 139:1-12
Psalms 139:1 हे यहोवा, तू ने मुझे जांच कर जान लिया है।
Psalms 139:2 तू मेरा उठना बैठना जानता है; और मेरे विचारों को दूर ही से समझ लेता है।
Psalms 139:3 मेरे चलने और लेटने की तू भली भांति छानबीन करता है, और मेरी पूरी चालचलन का भेद जानता है।
Psalms 139:4 हे यहोवा, मेरे मुंह में ऐसी कोई बात नहीं जिसे तू पूरी रीति से न जानता हो।
Psalms 139:5 तू ने मुझे आगे पीछे घेर रखा है, और अपना हाथ मुझ पर रखे रहता है।
Psalms 139:6 यह ज्ञान मेरे लिये बहुत कठिन है; यह गम्भीर और मेरी समझ से बाहर है।
Psalms 139:7 मैं तेरे आत्मा से भाग कर किधर जाऊं? वा तेरे साम्हने से किधर भागूं?
Psalms 139:8 यदि मैं आकाश पर चढूं, तो तू वहां है! यदि मैं अपना बिछौना अधोलोक में बिछाऊं तो वहां भी तू है!
Psalms 139:9 यदि मैं भोर की किरणों पर चढ़ कर समुद्र के पार जा बसूं,
Psalms 139:10 तो वहां भी तू अपने हाथ से मेरी अगुवाई करेगा, और अपने दाहिने हाथ से मुझे पकड़े रहेगा।
Psalms 139:11 यदि मैं कहूं कि अन्धकार में तो मैं छिप जाऊंगा, और मेरे चारों ओर का उजियाला रात का अन्धेरा हो जाएगा,
Psalms 139:12 तौभी अन्धकार तुझ से न छिपाएगा, रात तो दिन के तुल्य प्रकाश देगी; क्योंकि तेरे लिये अन्धियारा और उजियाला दोनों एक समान हैं।  


एक साल में बाइबल: 
  • गिनती 31-33
  • मरकुस 9:1-29



सोमवार, 8 जनवरी 2018

परिपूर्ण और संतोषजनक


   जब मैं युवा था, तो अपनी बात मनवाने के लिए मैं बहुधा दलील दिया दिया करता था, “परन्तु और सब भी तो कर रहे हैं,” और मुझे लगता था कि इस तर्क के सहारे मैं अपनी बात मनवा लूँगा। परन्तु मेरे माता-पिता मेरी बात मानने के लिए कभी इस तर्क के आगे नहीं झुके, यदि उन्हें लगा कि जो मैं कह अथवा चाह रहा हूँ वह असुरक्षित, अनुचित या मूर्खतापूर्ण है, मैं उस बात के लिए चाहे जितना अधीर और जोर देने वाला रहा हूँ, उन्होंने उसे कभी स्वीकार नहीं किया।

   जैसे जैसे हम बड़े होते जाते हैं, अपनी बात मनवाने या अपनी इच्छा पूरी करने के लिए हम अपने तर्कों और बहानों के खजाने में और नए तर्क तथा बहाने जोड़ते चले जाते हैं: “इससे किसी को कोई हानि नहीं होगी”, “यह गैरकानूनी नहीं है”, “पहले उसने मेरे साथ ऐसा किया”, “उसे पता नहीं चलेगा” आदि कितने ही ऐसे बहाने और तर्क हैं जिनके सहारे हम अपनी बात को ऊपर रखना चाहते हैं, पूरा होता हुआ देखना चाहते हैं। इन सभी और ऐसे ही अन्य सभी तर्कों के पीछे भावना होती है कि जो मैं चाहता हूँ, वही सबसे महत्वपूर्ण तथा सबसे अधिक आवश्यक है।

   अंततः यही त्रुटिपूर्ण सोच, परमेश्वर के संबंध में हमारे विचारों और विश्वास का आधार भी बन जाती है। एक झूठ जिसे हम बहुधा मानना चुन लेते हैं, है – सृष्टि का केन्द्र परमेश्वर नहीं वरन हम हैं। हमें लगने लगता है कि जब हम सँसार को अपनी इच्छाओं और पसन्द के अनुसार पुनःव्यवस्थित कर लेंगे तब हम प्रसन्न और निश्चिन्त हो जाएँगे। यह झूठ हमें युक्तिसंगत प्रतीत होता है क्योंकि यह हमें वह अपनी लालसाओं को पा लेने का शीघ्र और सरल उपाय लगता है। इस तर्क का आधार यह विचार है: “परमेश्वर प्रेम है; वह मुझे प्रसन्न देखना चाहता है; इसलिए जिस बात से मुझे प्रसन्नता मिलती है, वह उचित तथा परमेश्वर को स्वीकार भी होगी।” किंतु इस विचार के आधीन होकर कार्य करना अंततः प्रसन्नता और संतोष नहीं, दुःख ही लाता है।

   प्रभु यीशु ने उन लोगों से, जिन्होंने उस पर विश्वास करने का दावा किया, कहा कि वह सत्य ही है जो उन्हें वास्तव में स्वतंत्र करेगा (यूहन्ना 8:31-32)। परन्तु प्रभु ने सचेत भी किया: “मैं तुम से सच सच कहता हूं कि जो कोई पाप करता है, वह पाप का दास है” (पद 34)। सबसे उत्तम प्रसन्नता उस स्वतंत्रता से मिलती है जिसे हम इस सत्य ग्रहण कर लेने पर पाते हैं कि परिपूर्ण और संतोषजनक जीवन का आधार तथा मार्ग प्रभु यीशु मसीह ही है। - जूली ऐकैरमैन लिंक


सच्चे सुख और प्रसन्नता के लिए कोई छोटा मार्ग नहीं है।

तुम मुझ में बने रहो, और मैं तुम में: जैसे डाली यदि दाखलता में बनी न रहे, तो अपने आप से नहीं फल सकती, वैसे ही तुम भी यदि मुझ में बने न रहो तो नहीं फल सकते। मैं दाखलता हूं: तुम डालियां हो; जो मुझ में बना रहता है, और मैं उस में, वह बहुत फल फलता है, क्योंकि मुझ से अलग हो कर तुम कुछ भी नहीं कर सकते। - यूहन्ना 15:4-5

बाइबल पाठ: यूहन्ना 8:31-38
John 8:31 तब यीशु ने उन यहूदियों से जिन्हों ने उन की प्रतीति की थी, कहा, यदि तुम मेरे वचन में बने रहोगे, तो सचमुच मेरे चेले ठहरोगे।
John 8:32 और सत्य को जानोगे, और सत्य तुम्हें स्‍वतंत्र करेगा।
John 8:33 उन्होंने उसको उत्तर दिया; कि हम तो इब्राहीम के वंश से हैं और कभी किसी के दास नहीं हुए; फिर तू क्योंकर कहता है, कि तुम स्‍वतंत्र हो जाओगे?
John 8:34 यीशु ने उन को उत्तर दिया; मैं तुम से सच सच कहता हूं कि जो कोई पाप करता है, वह पाप का दास है।
John 8:35 और दास सदा घर में नहीं रहता; पुत्र सदा रहता है।
John 8:36 सो यदि पुत्र तुम्हें स्‍वतंत्र करेगा, तो सचमुच तुम स्‍वतंत्र हो जाओगे।
John 8:37 मैं जानता हूं कि तुम इब्राहीम के वंश से हो; तौभी मेरा वचन तुम्हारे हृदय में जगह नहीं पाता, इसलिये तुम मुझे मार डालना चाहते हो।
John 8:38 मैं वही कहता हूं, जो अपने पिता के यहां देखा है; और तुम वही करते रहते हो जो तुमने अपने पिता से सुना है।


एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 20-22
  • मत्ती 6:19-34


गुरुवार, 1 जनवरी 2015

भला जीवन

सभी पाठकों की नव वर्ष की शुभ-कामनाएं


   सुन्दरता, संपदा, सामर्थ, प्रेम, विवाहित जीवन, सुख आदि सभी अच्छी बातें हैं लेकिन वे सर्वोत्तम नहीं हैं। सर्वोत्तम है परमेश्वर का प्रेम - परमेश्वर के प्रेम का भागी होना तथा उससे प्रेम करना, उसका मित्र बन जाना, उसे अपने जीवन से महिमा देना। यही सर्वोत्तम जीवन व्यतीत करने की कुंजी है, क्योंकि ऐसा करने से ना केवल इस पृथ्वी के जीवन में संतुष्टि एवं आनन्द मिलता है (युहन्ना 10:10), वरन पृथ्वी के बाद के अनन्त जीवन के लिए भी सभी मसीही विश्वासियों के लिए संतुष्टि एवं आनन्द सुनिश्चित हो जाता है।

   इसीलिए यह आवश्यक है कि हम परमेश्वर के साथ संगति के लिए समय निकालें और उसके प्रेम में विश्राम लेते रहें - उस प्रेम में जिसमें होकर परमेश्वर ने मेरी और आपकी सृष्टि करी तथा संसार के सभी लोगों के उद्धार एवं पाप क्षमा के लिए प्रभु यीशु को बलिदान होने के लिए संसार में भेजा। यही प्रेम हमारे अस्तित्व कारण तथा हमारी आशीषों का आधार है।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में भजनकार ने जिस प्रकार इस बात को व्यक्त किया है वह मुझे बहुत पसन्द है: "परन्तु परमेश्वर के समीप रहना, यही मेरे लिये भला है; मैं ने प्रभु यहोवा को अपना शरणस्थान माना है, जिस से मैं तेरे सब कामों का वर्णन करूं" (भजन 73:28)।

   और, परमेश्वर के समीप रहने का तरीका क्या है? यह करने का एक तरीका है वह बात जो मैंने कई वर्ष पहले आरंभ करी थी और जिसे आप भी सरलता से कर सकते हैं: प्रति प्रातः परमेश्वर के वचन बाइबल में से प्रभु यीशु की जीवनी अर्थात सुसमाचारों (मत्ती, मरकुस, लूका, युहन्ना) में से एक खण्ड पढ़ें और उनमें ध्यान करें कि प्रभु यीशु ने क्या कहा, क्या किया - आखिरकर वह हमें परमेश्वर के बारे में बताने और उसके जीवन को प्रगट करने ही तो आया था (इब्रानियों 1:1-3)। फिर अपने आप को उस पढ़े गए खण्ड के घटनाक्रम में रखें, उसके किसी मुख्य पात्र के स्थान पर अपने आप को खड़ा करें और विचार करें कि यदि आप वहाँ होते तो आपकी प्रतिक्रीया या प्रत्युत्तर क्या होता? प्रभु यीशु के उस प्रेम और करुणा के बारे में ध्यान करें जो उसने आपके प्रति व्यक्त किया, और फिर उसे इन बातों के लिए धन्यवाद करें। - डेविड रोपर


सबसे बड़े अचरज की बात - प्रभु यीशु मुझे जैसे व्यक्ति से भी प्रेम करता है।

चोर किसी और काम के लिये नहीं परन्तु केवल चोरी करने और घात करने और नष्‍ट करने को आता है। मैं इसलिये आया कि वे जीवन पाएं, और बहुतायत से पाएं। - युहन्ना 10:10

बाइबल पाठ: भजन 73:21-28
Psalms 73:21 मेरा मन तो चिड़चिड़ा हो गया, मेरा अन्त:करण छिद गया था, 
Psalms 73:22 मैं तो पशु सरीखा था, और समझता न था, मैं तेरे संग रह कर भी, पशु बन गया था। 
Psalms 73:23 तौभी मैं निरन्तर तेरे संग ही था; तू ने मेरे दाहिने हाथ को पकड़ रखा। 
Psalms 73:24 तू सम्मति देता हुआ, मेरी अगुवाई करेगा, और तब मेरी महिमा कर के मुझ को अपने पास रखेगा। 
Psalms 73:25 स्वर्ग में मेरा और कौन है? तेरे संग रहते हुए मैं पृथ्वी पर और कुछ नहीं चाहता। 
Psalms 73:26 मेरे हृदय और मन दोनों तो हार गए हैं, परन्तु परमेश्वर सर्वदा के लिये मेरा भाग और मेरे हृदय की चट्टान बना है।। 
Psalms 73:27 जो तुझ से दूर रहते हैं वे तो नाश होंगे; जो कोई तेरे विरुद्ध व्यभिचार करता है, उसको तू विनाश करता है। 
Psalms 73:28 परन्तु परमेश्वर के समीप रहना, यही मेरे लिये भला है; मैं ने प्रभु यहोवा को अपना शरणस्थान माना है, जिस से मैं तेरे सब कामों का वर्णन करूं।

एक साल में बाइबल: 

  • उत्पत्ति 1-3
  • मत्ती 1


शुक्रवार, 12 दिसंबर 2014

सांत्वना


   अमेरिका के इतिहास में एक बहुत त्रासदीपूर्ण और दुखदायी घटना है 19वीं सदी के आरंभ में अमेरिका के मूल रेड इन्डियन निवासियों का ज़बर्दस्ती किया गया विस्थापन। उन मूल निवासियों ने बढ़ती हुई श्वेत आबादी के लोगों के साथ संधियाँ करी थीं, उनके साथ दुश्मनों के विरुद्ध युद्ध में सहयोग किया था, लेकिन बाद में उन्हीं लोगों को अपनी भूमि छोड़कर अन्य स्थानों पर जाकर बसने के लिए मजबूर कर दिया गया। सन 1838 की सर्दियों में चिरोकी कबीले के हज़ारों लोगों को पश्चिम की ओर 1000 मील की एक कठिन यात्रा करने के लिए मजबूर कर दिया गया। इस अन्याय के कारण उनमें से हज़ारों मर गए क्योंकि सर्दी के समय में इस लंबी और कठिन यात्रा को कर पाने के लायक कपड़े, जूतियाँ और आवश्यक वस्तुएं उनके पास नहीं थे; इसलिए उनकी इस यात्रा को "आँसुओं की यात्रा" कहा जाता है।

   आज भी संसार अन्याय, पीड़ा और मनोव्यथा से भरा हुआ है। आज भी बहुतेरों को अनेक कारणों से अपने जीवन में "आँसुओं की यात्रा" करनी पड़ती है; उन्हें लगता है कि उनकी पीड़ा को जानने और समझने वाला कोई नहीं है, कोई उनकी परवाह नहीं करता है। लेकिन प्रभु परमेश्वर हमारी पीड़ाओं को देखता है और हमारे दुखी हृदयों को सांत्वना भी देता है (2 कुरिन्थियों 1:3-5)। साथ ही वह उस आते समय कि भी आशा देता है जिसमें पाप और अन्याय का कोई दाग़ नहीं रहेगा; उस समय और उस स्थान पर "वह उन की आंखों से सब आंसू पोंछ डालेगा; और इस के बाद मृत्यु न रहेगी, और न शोक, न विलाप, न पीड़ा रहेगी; पहिली बातें जाती रहीं" (प्रकाशितवाक्य 21:4)।

   परमेश्वर ना केवल भविष्य में हमारे आँसुओं को पोंछने और हमें सांत्वना देने की आशा देता है, वायदा करता है, वरन जब हम विश्वास और समर्पण के साथ उसके पास अपने दुखों को लेकर आते हैं तो वह आज भी हमारे सभी आँसुओं को पोंछता है, हर परिस्थिति में हमें सांत्वना देता है। - बिल क्राउडर


जब परमेश्वर हमारे जीवन में परीक्षाओं को आने की अनुमति देता है तो साथ ही अपनी शान्ति तथा सांत्वना भी हमें उपलब्ध करवा देता है।

वह हमारे सब क्‍लेशों में शान्‍ति देता है; ताकि हम उस शान्‍ति के कारण जो परमेश्वर हमें देता है, उन्हें भी शान्‍ति दे सकें, जो किसी प्रकार के क्‍लेश में हों। - 2 कुरिन्थियों 1:4

बाइबल पाठ: प्रकाशितवाक्य 21:1-7
Revelation 21:1 फिर मैं ने नये आकाश और नयी पृथ्वी को देखा, क्योंकि पहिला आकाश और पहिली पृथ्वी जाती रही थी, और समुद्र भी न रहा। 
Revelation 21:2 फिर मैं ने पवित्र नगर नये यरूशलेम को स्वर्ग पर से परमेश्वर के पास से उतरते देखा, और वह उस दुल्हिन के समान थी, जो अपने पति के लिये सिंगार किए हो। 
Revelation 21:3 फिर मैं ने सिंहासन में से किसी को ऊंचे शब्द से यह कहते सुना, कि देख, परमेश्वर का डेरा मनुष्यों के बीच में है; वह उन के साथ डेरा करेगा, और वे उसके लोग होंगे, और परमेश्वर आप उन के साथ रहेगा; और उन का परमेश्वर होगा। 
Revelation 21:4 और वह उन की आंखों से सब आंसू पोंछ डालेगा; और इस के बाद मृत्यु न रहेगी, और न शोक, न विलाप, न पीड़ा रहेगी; पहिली बातें जाती रहीं। 
Revelation 21:5 और जो सिंहासन पर बैठा था, उसने कहा, कि देख, मैं सब कुछ नया कर देता हूं: फिर उसने कहा, कि लिख ले, क्योंकि ये वचन विश्वास के योग्य और सत्य हैं। 
Revelation 21:6 फिर उसने मुझ से कहा, ये बातें पूरी हो गई हैं, मैं अलफा और ओमिगा, आदि और अन्‍त हूं: मैं प्यासे को जीवन के जल के सोते में से सेंतमेंत पिलाऊंगा। 
Revelation 21:7 जो जय पाए, वही इन वस्‍तुओं का वारिस होगा; और मैं उसका परमेश्वर होऊंगा, और वह मेरा पुत्र होगा।

एक साल में बाइबल: 
  • तीतुस 1-3



बुधवार, 17 सितंबर 2014

अनुशासन


   लेरी गौटलिब, जो एक माँ भी हैं और चिकित्सक भी, कहती हैं कि वे माता-पिता जो अपने बच्चों को हर समय केवल खुश देखते रहने के प्रयास में लगे रहते है, वे वास्तव में अपने बच्चों को दुखी व्यसक बना रहे होते हैं। ऐसे अभिभावक बच्चों को अपने से चिपकाए रहते हैं, उन्हें संसार कि सच्चाईयों को अनुभव करने और उन सच्चाईयों का सामना करने की क्षमता विकसित करने से वंचित रखते हैं, जब उनके बच्चे गलती करते हैं तब वे उन्हें सुधारते नहीं वरन गलतियों को नज़रन्दाज़ कर देते हैं, उन्हें अनुशासित रहने और समाज के प्रति अपने दायित्वों को निभाने से रोके रहते हैं। बड़े होने पर उन बच्चों को फिर कटु अनुभवों से वास्तविकता का सामना करना सीखना पड़ता है और उनका व्यवहार स्वयं उनके लिए तथा दूसरों के लिए भी दुखदायी हो जाता है; कई बार जिसकी भरपाई बहुत भारी पड़ती है।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में भी ऐसे ही एक पिता के बारे में उल्लेख है - वह परमेश्वर का महापुरोहित था, लेकिन अपने बच्चों को परमेश्वर के भय में बड़ा नहीं कर सका। बाइबल में पुराने नियम की पुस्तक 1 शमूएल में हम एली महायाजक के बारे में लिखा पाते हैं। वहाँ यह तो नहीं लिखा कि जब उसके बच्चे छोटे थे तो उनके प्रति वह कैसा पिता था, परन्तु यह अवश्य लिखा है कि जब वे बच्चे बड़े हो गए और परमेश्वर के मन्दिर में कार्य करने लगे तब उनका व्यवहार कैसा था तथा उनके पिता का उनके प्रति रवैया कैसा था। एली के लड़के बड़े होकर स्वार्थी, लुच्चे, झगड़ालु बन गए थे तथा परमेश्वर के वचन की शिक्षाओं एवं लोगों की आवश्यकताओं का ध्यान रखने वाले नहीं वरन अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए परमेश्वर के मन्दिर और संसाधनों का प्रयोग करने वाले हो गए थे। आरंभ में एली ने उन्हें टोका, परन्तु उन्होंने एली की नहीं सुनी और एली ने भी उनके दुर्व्यवहार की अन्देखी करना आरंभ कर दिया और उनके कुकर्म के भोजन में सम्मिलित होने लगा। क्योंकि एली ने अपने बच्चों को परमेश्वर, उसके मन्दिर तथा उसके वचन से अधिक आदर दिया इसलिए परमेश्वर ने इन बातों के कारण एली को चेतावनी दी कि एक भयानक विनाश उनके सामने रखा है, और एली तथा उसके के बेटे परमेश्वर की चेतावनी के अनुसार अपना प्राण गंवा बैठे (1 शमूएल 2:29, 34; 4:17-18)।

   हम मसीही विश्वासी माता-पिता को यह सदा ध्यान रखना चाहिए कि परमेश्वर से मिली बच्चों की आशीष की हम कैसे परवरिश कर रहे हैं? क्या हम उन्हें अनुशासन में रखकर तथा परमेश्वर के वचन के अनुसार शिक्षा देकर बड़ा कर रहे हैं, यदि आवश्यक हो तो प्रेम के साथ ताड़ना का प्रयोग करके भी (नीतिवचन 13:24; 29:17; इब्रानियों 12:9-11)। जब हम बच्चों को अनुशासन तथा परमेश्वर के भय में बड़ा करेंगे तो हम उन्हें ज़िम्मेदार तथा परमेश्वर के भय में रहने और समाज की भलाई के लिए कार्य करने वाले व्यसकों के रूप में देखने का सुख भी पाएंगे। - मार्विन विलियम्स


बच्चों को अनुशासनहीन बनाना उनके प्रति प्रेमहीन होने का सूचक है।

जो बेटे पर छड़ी नहीं चलाता वह उसका बैरी है, परन्तु जो उस से प्रेम रखता, वह यत्न से उसको शिक्षा देता है। - नीतिवचन 13:24

बाइबल पाठ: 1 शमूएल 2:12, 27-36; 4:17-22
1 Samuel 2:12 एली के पुत्र तो लुच्चे थे; उन्होंने यहोवा को न पहिचाना। 
1 Samuel 2:27 और परमेश्वर का एक जन एली के पास जा कर उस से कहने लगा, यहोवा यों कहता है, कि जब तेरे मूलपुरूष का घराना मिस्र में फिरौन के घराने के वश में था, तब क्या मैं उस पर निश्चय प्रगट न हुआ था? 
1 Samuel 2:28 और क्या मैं ने उसे इस्राएल के सब गोत्रों में से इसलिये चुन नहीं लिया था, कि मेरा याजक हो कर मेरी वेदी के ऊपर चढ़ावे चढ़ाए, और धूप जलाए, और मेरे साम्हने एपोद पहिना करे? और क्या मैं ने तेरे मूलपुरूष के घराने को इस्राएलियों के कुल हव्य न दिए थे? 
1 Samuel 2:29 इसलिये मेरे मेलबलि और अन्नबलि जिन को मैं ने अपने धाम में चढ़ाने की आज्ञा दी है, उन्हें तुम लोग क्यों पांव तले रौंदते हो? और तू क्यों अपने पुत्रों का आदर मेरे आदर से अधिक करता है, कि तुम लोग मेरी इस्राएली प्रजा की अच्छी से अच्छी भेंटें खा खाके मोटे हो जाओ? 
1 Samuel 2:30 इसलिये इस्राएल के परमेश्वर यहोवा की यह वाणी है, कि मैं ने कहा तो था, कि तेरा घराना और तेरे मूलपुरूष का घराना मेरे साम्हने सदैव चला करेगा; परन्तु अब यहोवा की वाणी यह है, कि यह बात मुझ से दूर हो; क्योंकि जो मेरा आदर करें मैं उनका आदर करूंगा, और जो मुझे तुच्छ जानें वे छोटे समझे जाएंगे। 
1 Samuel 2:31 सुन, वे दिन आते हैं, कि मैं तेरा भुजबल और तेरे मूलपुरूष के घराने का भुजबल ऐसा तोड़ डालूंगा, कि तेरे घराने में कोई बूढ़ा होने न पाएगा। 
1 Samuel 2:32 इस्राएल का कितना ही कल्याण क्यों न हो, तौभी तुझे मेरे धाम का दु:ख देख पड़ेगा, और तेरे घराने में कोई कभी बूढ़ा न होने पाएगा। 
1 Samuel 2:33 मैं तेरे कुल के सब किसी से तो अपनी वेदी की सेवा न छीनूंगा, परन्तु तौभी तेरी आंखें देखती रह जाएंगी, और तेरा मन शोकित होगा, और तेरे घर की बढ़ती सब अपनी पूरी जवानी ही में मर मिटेंगें। 
1 Samuel 2:34 और मेरी इस बात का चिन्ह वह विपत्ति होगी जो होप्नी और पीनहास नाम तेरे दोनों पुत्रों पर पड़ेगी; अर्थात वे दोनों के दोनों एक ही दिन मर जाएंगे। 
1 Samuel 2:35 और मैं अपने लिये एक विश्वासयोग्य याजक ठहराऊंगा, जो मेरे हृदय और मन की इच्छा के अनुसार किया करेगा, और मैं उसका घर बसाऊंगा और स्थिर करूंगा, और वह मेरे अभिषिक्त के आगे सब दिन चला फिरा करेगा। 
1 Samuel 2:36 और ऐसा होगा कि जो कोई तेरे घराने में बचा रहेगा वह उसी के पास जा कर एक छोटे से टुकड़े चान्दी के वा एक रोटी के लिये दण्डवत कर के कहेगा, याजक के किसी काम में मुझे लगा, जिस से मुझे एक टुकड़ा रोटी मिले।

1 Samuel 4:17 उस समाचार देने वाले ने उत्तर दिया, कि इस्राएली पलिश्तियों के साम्हने से भाग गए हैं, और लोगों का बड़ा भयानक संहार भी हुआ है, और तेरे दोनों पुत्र होप्नी और पीनहास भी मारे गए, और परमेश्वर का सन्दूक भी छीन लिया गया है। 
1 Samuel 4:18 ज्योंही उसने परमेश्वर के सन्दूक का नाम लिया त्योंही एली फाटक के पास कुर्सी पर से पछाड़ खाकर गिर पड़ा; और बूढ़े और भारी होने के कारण उसकी गर्दन टूट गई, और वह मर गया। उसने तो इस्राएलियों का न्याय चालीस वर्ष तक किया था। 
1 Samuel 4:19 उसकी बहू पीनहास की स्त्री गर्भवती थी, और उसका समय समीप था। और जब उसने परमेश्वर के सन्दूक के छीन लिये जाने, और अपने ससुर और पति के मरने का समाचार सुना, तब उसको जच्चा का दर्द उठा, और वह दुहर गई, और उसके एक पुत्र उत्पन्न हुआ। 
1 Samuel 4:20 उसके मरते मरते उन स्त्रियों ने जो उसके आस पास खड़ी थीं उस से कहा, मत डर, क्योंकि तेरे पुत्र उत्पन्न हुआ है। परन्तु उसने कुछ उत्तर न दिया, और न कुछ ध्यान दिया। 
1 Samuel 4:21 और परमेश्वर के सन्दूक के छीन लिये जाने और अपने ससुर और पति के कारण उसने यह कहकर उस बालक का नाम ईकाबोद रखा, कि इस्राएल में से महिमा उठ गई! 
1 Samuel 4:22 फिर उसने कहा, इस्राएल में से महिमा उठ गई है, क्योंकि परमेश्वर का सन्दूक छीन लिया गया है।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 43-45


मंगलवार, 16 सितंबर 2014

सुख


   मेरी पत्नि अपनी व्यस्त दिनचर्या के कारण हमारे नाती-पोतों के साथ कभी कभी सप्ताह में थोड़ा ही समय बिताने पाती है। लेकिन जब कभी संभव होता है वह अपनी दिनचर्या के कार्यों के समय में बदलाव करके उनके साथ अधिक से अधिक समय बिताने का प्रयास करती है - किसी कर्तव्य के अन्तर्गत नहीं, वरन इसलिए क्योंकि वह उनसे प्रेम करती है। ऐसे समयों में जब मैं उसे उनके साथ देखता हूँ तो मुझे आभास होता है कि ’सुख’ शब्द का तात्पर्य क्या होता है।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में भजन 119 का लेखक परमेश्वर के वचन से उसे प्राप्त होने वाले सुख के बारे में लिखता है। इस भजन में वह आठ बार ’सुख’ से जुड़े शब्दों का प्रयोग करता है (पद 16, 24, 35, 47, 70, 77, 92, 174)। उदाहरण के लिए: "मैं तेरी विधियों से सुख पाऊंगा; और तेरे वचन को न भूलूंगा" (भजन 119:16); "क्योंकि मैं तेरी आज्ञाओं के कारण सुखी हूं, और मैं उन से प्रीति रखता हूं" (भजन 119:47)। भजनकार द्वारा ’सुख’ और उससे जुड़े हुए शब्दों का प्रयोग दिखाता है कि उसके लिए परमेश्वर के वचन के साथ समय बिताना ना तो कोई बोझ था और ना ही किसी कर्तव्य का पालन मात्र; क्योंकि वह परमेश्वर से तथा उसके वचन से प्रेम करता था। परमेश्वर से उसके निकट संबंध के कारण उसके मन में लालसा रहती थी कि वह परमेश्वर के बारे में और अधिक निकटता से जाने, तथा यह भी जाने कि उसका प्रीय उससे क्या कहना चाहता है।

   इसी प्रकार, यदि हमें भी परमेश्वर के वचन के अध्ययन को कर्तव्य नहीं वरन अपने आनन्द का स्त्रोत बनाना है तो हमें भी परमेश्वर के साथ अपने संबंध को और प्रगाढ़ बनाना होगा। जब हम यह स्मरण रखेंगे कि परमेश्वर हम से कितना प्रेम करता है और हमारे लिए उस प्रेम में होकर उसने क्या कुछ किया है तो उसके साथ समय बिताना हमारे लिए केवल कर्तव्य पालन नहीं वरन वास्तव में आनन्द की बात बन जाएगा, और हम भी भजनकार के साथ कह सकेंगे, "अहा! मैं तेरी व्यवस्था में कैसी प्रीति रखता हूं! दिन भर मेरा ध्यान उसी पर लगा रहता है" (भजन 119:97)। - सी. पी. हिया


हर समय हर परिस्थिति में परमेश्वर के वचन को अपने आनन्द का स्त्रोत बनाए रखिए।

इस कारण मैं तेरी आज्ञाओं को सोने से वरन कुन्दन से भी अधिक प्रिय मानता हूं। - भजन 119:127

बाइबल पाठ: भजन 119:41-48
Psalms 119:41 हे यहोवा, तेरी करूणा और तेरा किया हुआ उद्धार, तेरे वचन के अनुसार, मुझ को भी मिले; 
Psalms 119:42 तब मैं अपनी नामधराई करने वालों को कुछ उत्तर दे सकूंगा, क्योंकि मेरा भरोसा, तेरे वचन पर है। 
Psalms 119:43 मुझे अपने सत्य वचन कहने से न रोक क्योंकि मेरी आशा तेरे नियमों पर हैं। 
Psalms 119:44 तब मैं तेरी व्यवस्था पर लगातार, सदा सर्वदा चलता रहूंगा; 
Psalms 119:45 और मैं चोड़े स्थान में चला फिरा करूंगा, क्योंकि मैं ने तेरे उपदेशों की सुधि रखी है। 
Psalms 119:46 और मैं तेरी चितौनियों की चर्चा राजाओं के साम्हने भी करूंगा, और संकोच न करूंगा; 
Psalms 119:47 क्योंकि मैं तेरी आज्ञाओं के कारण सुखी हूं, और मैं उन से प्रीति रखता हूं। 
Psalms 119:48 मैं तेरी आज्ञाओं की ओर जिन में मैं प्रीति रखता हूं, हाथ फैलाऊंगा और तेरी विधियों पर ध्यान करूंगा।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 40-42


रविवार, 10 जून 2012

प्रार्थना

   एम्मा ग्रे ने, ९५ वर्ष की होकर, जून २००९ में अपनी जीवन यात्रा समाप्त करी। दो दशक से भी अधिक समय तक, वे एक बहुत विशाल मकान में, वहां की साफ-सफाई का कार्य करती रहीं। प्रति रात्रि, अपने कार्य को करने के उपरांत वे नियम से उस मकान में रहने वाले अपने अधिकारी के लिए आशीष, बुद्धिमानी और सुरक्षा की प्रार्थना करती थीं।

   एम्मा ने तो उस मकान में २४ वर्ष कार्य किया, किंतु उस मकान में रहने वाला अधिकारी लगभग प्रति ४ वर्ष बदल जाता था। अपनी सेवा के कार्यकाल में एम्मा ने प्रति रात्रि अमेरिका के छः राष्ट्रपतियों, आइज़िनहौवर, कैनिडी, जौनसन, निक्सन, फोर्ड और कार्टर, के लिए प्रार्थनाएं करीं।

   चाहे व्यक्तिगत रूप से एम्मा के लिए कोई भी उनका पसंदीदा राष्ट्रपति रहा हो, उनकी प्रार्थना प्रत्येक के लिए समान रहती थी। यह एम्मा को परमेश्वर के वचन बाइबल से मिले निर्देशों की आज्ञाकारिता में था, जहां १ तिमुथियुस २:१, २ में लिखा है: "अब मैं सब से पहिले यह उपदेश देता हूं, कि बिनती, और प्रार्थाना, और निवेदन, और धन्यवाद, सब मनुष्यों के लिये किए जाएं। राजाओं और सब ऊंचे पद वालों के निमित्त इसलिये कि हम विश्राम और चैन के साथ सारी भक्ति और गम्भीरता से जीवन बिताएं।" इस के आगे के पद बताते हैं कि लोगों के लिए प्रार्थना करना परमेश्वर को भाता है और वह चाहता है कि सब का उद्धार हो और वे सत्य को पहचानें।

   क्योंकि "यहोवा दुष्टों से दूर रहता है, परन्तु धमिर्यों की प्रार्थना सुनता है" (नीतिवचन १५:२९), एम्मा की प्रार्थनाओं का उन राष्ट्रपतियों के जीवन और कार्यविधि पर क्या क्या प्रभाव हुआ, यह आने वाला अनन्त ही उजागर करेगा, क्योंकि परमेश्वर का वचन यह भी बताता है कि "राजा का मन नालियों के जल की नाईं यहोवा के हाथ में रहता है, जिधर वह चाहता उधर उसको फेर देता है" (नीतिवचन २१:१)।

   एम्मा के समान, हम मसीही विश्वासियों को भी नियमित रूप से अपने अधिकारियों और अगुवों के लिए प्रार्थनाएं करते रहना चाहिएं जिससे उनके जीवन में परमेश्वर की शांति, बुद्धिमानी और आशीष रहे और उसके प्रतिफल स्वरूप हमारी सुख समृद्धि होती रहे। - सिंडी हैस कैस्पर


अगुवों और अधिकारियों को परमेश्वर के निमित प्रभावी बनाने के लिए, परमेश्वर के सम्मुख उनके लिए प्रार्थनाएं कीजिए।

राजाओं और सब ऊंचे पद वालों के निमित्त [प्रार्थना करो] इसलिये कि हम विश्राम और चैन के साथ सारी भक्ति और गम्भीरता से जीवन बिताएं। - १ तिमुथियुस २:२

बाइबल पाठ: १ तिमुथियुस २:१-८
1Ti 2:1  अब मैं सब से पहिले यह उपदेश देता हूं, कि बिनती, और प्रार्थना, और निवेदन, और धन्यवाद, सब मनुष्यों के लिये किए जाएं।
1Ti 2:2  राजाओं और सब ऊंचे पद वालों के निमित्त इसलिये कि हम विश्राम और चैन के साथ सारी भक्ति और गम्भीरता से जीवन बिताएं।
1Ti 2:3 यह हमारे उद्धारकर्ता परमेश्वर को अच्‍छा लगता, और भाता भी है।
1Ti 2:4  वह यह चाहता है, कि सब मनुष्यों का उद्धार हो, और वे सत्य को भली भांति पहिचान लें।
1Ti 2:5 क्‍योंकि परमेश्वर एक ही है: और परमेश्वर और मनुष्यों के बीच में भी एक ही बिचवई है, अर्थात मसीह यीशु जो मनुष्य है।
1Ti 2:6  जिस ने अपने आप को सब के छुटकारे के दाम में दे दिया ताकि उस की गवाही ठीक समयों पर दी जाए।
1Ti 2:7  मैं सच कहता हूं, झूठ नहीं बोलता, कि मैं इसी उद्देश्य से प्रचारक और प्रेरित और अन्यजातियों के लिये विश्वास और सत्य का उपदेशक ठहराया गया।
1Ti 2:8  सो मैं चाहता हूं, कि हर जगह पुरूष बिना क्रोध और विवाद के पवित्र हाथों को उठा कर प्रार्थना किया करें।


एक साल में बाइबल: 

  • २ इतिहास ३४-३६ 
  • यूहन्ना १९:१-२२