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गुरुवार, 27 अगस्त 2015

करुणा


   उस विशाल विज्ञापन पटल की ओर निगाह का ना जाना लगभग असंभव था; उस लाल पृष्ठभूमि वाले पटल पर बड़े बड़े सफेद अक्षरों से लिखा था, "इस वर्ष हज़ारों लोग अपनी ढिटाई के कारण मर जाएंगे!" बाद में मुझे मालुम पड़ा कि उसके जैसे सैंकड़ों और विज्ञापन पटल स्थान स्थान पर लगाए गए थे, और उनके संदेश का निशाना अधेड़ उम्र के वे हज़ारों लोग थे जो चिकित्सा जाँच करवाने से जान-बूझ कर बचते रहते थे और फिर ऐसी बीमारियों से मर जाते थे जिन से बचा जा सकता था।

   परमेश्वर के वचन बाइबल का 32वें भजन एक ऐसी ही बीमारी के बारे में है जिससे बचने का सरल और मुफ्त उपाय तो है लेकिन फिर भी प्रतिदिन संसार के हज़ारों लोग उस बीमारी और उसके अनन्तकालीन परिणामों की गंभीरता को नज़रंदाज़ करके अनन्तकाल के विनाश में चले जाते हैं। वह बीमारी है मनुष्य का पाप; जिसका बड़ा सरल, सब के लिए सेंत-मेंत उपलब्ध और सदैव कारगर उपाय विद्यमान है - अपने पापों का अंगीकार करके सच्चे, सीधे मन से प्रभु यीशु से उन पापों की क्षमा माँगना और अपना जीवन प्रभु को समर्पित कर देना।

   भजन 32 के पहले पाँच पद दोष को छुपाने से होने वाली पीड़ा और फिर उन पापों को परमेश्वर के समक्ष मान लेने से मिलने वाली क्षमा के आनन्द का वर्णन करते हैं। फिर आगे हम 6-8 पद में पाते हैं कि परमेश्वर लालसा रखता है कि हम अपने संकट में उससे सहायता लें, और जो उससे सहायता तथा मार्गदर्शन माँगते हैं, उन्हें वह देता भी है: "मैं तुझे बुद्धि दूंगा, और जिस मार्ग में तुझे चलना होगा उस में तेरी अगुवाई करूंगा; मैं तुझ पर कृपा दृष्टि रखूंगा और सम्मत्ति दिया करूंगा" (भजन 32:8)। आगे परमेश्वर सचेत भी करता है कि हम ढिटाई में ना पड़ें, जिस में से परमेश्वर को हमें बरबस निकालना पड़े, "तुम घोड़े और खच्चर के समान न बनो जो समझ नहीं रखते, उनकी उमंग लगाम और बाग से रोकनी पड़ती है, नहीं तो वे तेरे वश में नहीं आने के" (भजन 32:9)। भजन का अन्त परमेश्वर की करुणा के आश्वासन और उस करुणा के आनन्द के साथ होता है, "दुष्ट को तो बहुत पीड़ा होगी; परन्तु जो यहोवा पर भरोसा रखता है वह करूणा से घिरा रहेगा" (भजन 32:10)।

   क्या आप ने परमेश्वर की करुणा का लाभ उठा कर अपने अनन्तकाल को सुनिश्चित कर लिया है, या आप अभी भी अपनी ढिटाई में अनन्तकाल के विनाश को ही थामे हुए है? परमेश्वर की करुणा और क्षमा आप के लिए आज और अभी उपलब्ध है, उसे नज़रन्दाज़ मत कीजिए। - डेविड मैक्कैसलैंड


परमेश्वर की क्षमा को प्राप्त करने के लिए पहला कदम है यह अंगीकार करना कि हमें उस क्षमा की आवश्यकता है।

धन्य है वह पुरुष जो यहोवा पर भरोसा रखता है, जिसने परमेश्वर को अपना आधार माना हो। वह उस वृक्ष के समान होगा जो नदी के तीर पर लगा हो और उसकी जड़ जल के पास फैली हो; जब घाम होगा तब उसको न लगेगा, उसके पत्ते हरे रहेंगे, और सूखे वर्ष में भी उनके विषय में कुछ चिन्ता न होगी, क्योंकि वह तब भी फलता रहेगा। - यिर्मियाह 17:7-8 

बाइबल पाठ: भजन 32
Psalms 32:1 क्या ही धन्य है वह जिसका अपराध क्षमा किया गया, और जिसका पाप ढ़ाँपा गया हो। 
Psalms 32:2 क्या ही धन्य है वह मनुष्य जिसके अधर्म का यहोवा लेखा न ले, और जिसकी आत्मा में कपट न हो। 
Psalms 32:3 जब मैं चुप रहा तब दिन भर कराहते कराहते मेरी हडि्डयां पिघल गई। 
Psalms 32:4 क्योंकि रात दिन मैं तेरे हाथ के नीचे दबा रहा; और मेरी तरावट धूप काल की सी झुर्राहट बनती गई। 
Psalms 32:5 जब मैं ने अपना पाप तुझ पर प्रगट किया और अपना अधर्म न छिपाया, और कहा, मैं यहोवा के साम्हने अपने अपराधों को मान लूंगा; तब तू ने मेरे अधर्म और पाप को क्षमा कर दिया। 
Psalms 32:6 इस कारण हर एक भक्त तुझ से ऐसे समय में प्रार्थना करे जब कि तू मिल सकता है। निश्चय जब जल की बड़ी बाढ़ आए तौभी उस भक्त के पास न पहुंचेगी। 
Psalms 32:7 तू मेरे छिपने का स्थान है; तू संकट से मेरी रक्षा करेगा; तू मुझे चारों ओर से छुटकारे के गीतों से घेर लेगा।
Psalms 32:8 मैं तुझे बुद्धि दूंगा, और जिस मार्ग में तुझे चलना होगा उस में तेरी अगुवाई करूंगा; मैं तुझ पर कृपा दृष्टि रखूंगा और सम्मत्ति दिया करूंगा। 
Psalms 32:9 तुम घोड़े और खच्चर के समान न बनो जो समझ नहीं रखते, उनकी उमंग लगाम और बाग से रोकनी पड़ती है, नहीं तो वे तेरे वश में नहीं आने के।
Psalms 32:10 दुष्ट को तो बहुत पीड़ा होगी; परन्तु जो यहोवा पर भरोसा रखता है वह करूणा से घिरा रहेगा। 
Psalms 32:11 हे धर्मियों यहोवा के कारण आनन्दित और मगन हो, और हे सब सीधे मन वालों आनन्द से जयजयकार करो!

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 120-122
  • 1 कुरिन्थियों 9



शुक्रवार, 18 नवंबर 2011

करुणा भाव

   वे जिनका स्वास्थ्य अच्छा होता है कई बार उनकी उपेक्षा करते हैं जो इतने भाग्यवान नहीं हैं, और कभी कभी तो उनके साथ निष्ठुरता का व्यवहार भी करते हैं। मैंने कुछ अन्य युवकों को एक मन्द बुद्धि मनुष्य का मज़ाक बनाते देखा है; मैंने कुछ ऐसे लोगों को भी देखा है जो उनकी अन्देखी करते हैं जो या तो अपंग हैं या ’दिखने’ में भिन्न होते हैं।

   इसके विपरीत मैंने अपनी एक कुटुंबी को ऐसे लोगों के प्रति बहुत करुणामय देखा है जिनकी अन्य लोग उपेक्षा करते हैं। वे प्रति सप्ताह अपने समय का एक बड़ा भाग दो ऐसे वृद्धों कि देखभाल में लगाती हैं जिनका कोई सहायक नहीं है। उनकी गली में रहने वाले एक मानसिक रोगी से भी उनकी अच्छी मित्रता है, और लगभग प्रति दिन वह उनके पास कुछ पल के लिए मिलने आता है, और उसके चेहरे की खुशी बताती है कि इस छोटी सी मुलाकात से उसे कितनी प्रसन्नता होती है और मेरी कुटुंबी उसके जीवन में कितना आनन्द देती है।

   प्रभु यीशु ने भी सदा करुणा के साथ लोगों से व्यवहार किया। वह रोगियों और दुखियों के प्रति दयालु था और वे उसे घेरे रहते थे। उसने एक अन्धे व्यक्ति को चँगा करने से पहले उसका हाथ पकड़ कर उसे भीड़ से निकाला। वे बिमारों को, यहाँ तक कि कोढियों को भी छू कर चँगा करते थे, और दुष्टात्माओं से ग्रसित लोगों को दुष्टात्माओं से छुटकारा दिलवाने के लिए समय देते थे।

   मसीही विश्वासी की मसीह से समानता का एक सूचक है उसका ऐसे अभागे लोगों से किया गया व्यवहार। क्योंकि ये त्रस्त और अभागे लोग प्रत्युत्तर में हमें कुछ नहीं दे सकते इसलिए उनके प्रति हमारी भलाई वास्तव में निस्वार्थ होती है। उनके प्रति जिन्हें बहुत की आवश्यक्ता है लेकिन प्राप्त थोड़ा ही होता है, मसीह के समान करुणा भाव दिखाने के ऐसे प्रत्येक अवसर का हम मसीही विश्वासियों को स्वागत और उपयोग करना चाहिए। - हर्ब वैण्डर लुग्ट


जो प्रत्युत्तर में हमारी सहायता नहीं कर सकते, उनकी सहायता के लिए हाथ बढ़ाना हमारे मसीही प्रेम की परीक्षा है।

और एक कोढ़ी ने उसके पास आकर, उस से बिनती की, और उसके साम्हने घुटने टेक कर, उस से कहा; यदि तू चाहे तो मुझे शुद्ध कर सकता है। उस ने उस पर तरस खाकर हाथ बढ़ाया, और उसे छूकर कहा, मैं चाहता हूं तू शुद्ध हो जा। - मरकुस १:४०, ४१

बाइबल पाठ: मरकुस १:३२-४२
    Mar 1:32  सन्‍ध्या के समय जब सूर्य डूब गया तो लोग सब बीमारों को और उन्‍हें जिन में दुष्‍टात्मा थीं उसके पास लाए।
    Mar 1:33  और सारा नगर द्वार पर इकट्ठा हुआ।
    Mar 1:34  और उस ने बहुतों को जो नाना प्रकार की बीमारियों से दुखी थे, चंगा किया; और बहुत से दुष्‍टात्माओं को निकाला; और दुष्‍टात्माओं को बोलने न दिया, क्‍योंकि वे उसे पहचानती थीं।
    Mar 1:35  और भोर को दिन निकलने से बहुत पहिले, वह उठकर निकला, और एक जंगली स्थान में गया और वहां प्रार्थाना करने लगा।
    Mar 1:36  तब शमौन और उसके साथी उस की खोज में गए।
    Mar 1:37  जब वह मिला, तो उस से कहा; कि सब लोग तुझे ढूंढ रहे हैं।
    Mar 1:38  उस न उन से कहा, आओ; हम और कहीं आस पास की बस्‍तियों में जाएं, कि मैं वहां भी प्रचार करूं, क्‍योंकि मैं। इसी लिये निकला हूं।
    Mar 1:39  सो वह सारे गलील में उन की सभाओं में जा जाकर प्रचार करता और दुष्‍टात्माओं को निकालता रहा।
    Mar 1:40  और एक कोढ़ी ने उसके पास आकर, उस से बिनती की, और उसके साम्हने घुटने टेककर, उस से कहा; यदि तू चाहे तो मुझे शुद्ध कर सकता है।
    Mar 1:41  उस ने उस पर तरस खाकर हाथ बढ़ाया, और उसे छूकर कहा; मैं चाहता हूं तू शुद्ध हो जा।
    Mar 1:42  और तुरन्‍त उसका कोढ़ जाता रहा, और वह शुद्ध हो गया।
 
एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल ८-१० 
  • इब्रानियों १३

गुरुवार, 17 नवंबर 2011

सर्वाधिक महिमा

   प्रभु यीशु के अनेक सच्चे विश्वासी यह मानते हैं कि अस्वस्थता मनुष्य के लिए परमेश्वर की इच्छा में नहीं है। इसलिए हमें पूरा ज़ोर लगाकर चंगाई के लिए प्रार्थना करते रहना चाहिए और प्रार्थना के उत्तर में इन्कार को स्वीकार कभी नहीं करना चाहिए। उनका मानना है कि शारीरिक अस्वस्थता इसलिए बनी रहती है क्योंकि हम उसके आदी हो गए हैं; और इस से निकलने के लिए जो हमें चाहिए वह है और भी अधिक विश्वास। वे इस बात को विश्वास की कमी का सूचक मानते हैं जब प्रार्थना में परमेश्वर से लोग कहते हैं कि "यदि आपकी इच्छा हो तो..."।

   किंतु अपने क्रूस पर चढ़ाए जाने के लिए पकड़वाए जाने से पहले गतसमनी के बाग़ में प्रभु यीशु की प्रार्थना पर विचार करें। यद्यपि उनकी प्रार्थना किसी बीमारी के लिए नहीं वरन उस आने वाले दुख से निकल पाने के विष्य में थी जो वे भोगने को थे, उस प्रार्थना के लिए परमेश्वर का प्रत्युत्तर स्पष्ट दिखाता है कि उसकी महिमा हमेशा परिस्थितियों के तुरंत या नाटकीय रूप से निवारण द्वारा नहीं होती।

   प्रभु जो पाप से अनजान था, निष्पाप और निष्कलंक था, समस्त मानव जाति के पापों को अपने ऊपर लेने जा रहा था, सबके लिए पाप बनकर प्रत्येक व्यक्ति के लिए पाप का दण्ड भोगने जा रहा था। ऐसे में उसका विचिलित होना, और उसका प्रार्थना करना कि यदि सम्भव हो तो यह दुख का प्याला उसे ना पीना पड़े स्वभाविक था। लेकिन उस ने अपनी इच्छा मनवाने के लिए परमेश्वर को बाध्य नहीं किया; अपने भाव व्यक्त करने के पश्चात, जो भी होना हो उसने वह परमेश्वर के हाथों में छोड़ दिया, और अपने आप को उसकी आज्ञाकारिता को समर्पित कर दिया।

   अपने प्रभु के समान हमें भी अपने दुखों और आवश्यक्ताओं में अपने परमेश्वर के सन्मुख अपनी भावनाएं व्यक्त करने और प्रार्थनाएं करने की स्वतंत्रता है, लेकिन प्रभु के समान ही उन विषयों के लिए परमेश्वर की इच्छा पुरी होने देने की भी ज़िम्मेदारी है।

   नौर्वे के एक बाइबल शिक्षक ओले हैल्सबी ने कहा कि अपनी अस्वस्थताओं के लिए हमें कुछ इस प्रकार प्रार्थना करनी चाहिए: "प्रभु, यदि आपकी महिमा हो तो मुझे तुरंत ठीक कर दीजिए; यदि अधिक महिमा उस में हो तो धीरे धीरे ठीक कीजिए; यदि उससे भी अधिक महिमा उससे होती हो तो अपने दास को कुछ समय अस्वस्थ रहने दीजिए; और यदि उससे सर्वाधिक महिमा होती हो तो अपने दास को अपने पास स्वर्ग में बुला लीजिए।"

   हर बात में हमें यह विचार करना चाहिए कि परमेश्वर की सर्वाधिक महिमा किस बात से होगी? - डेनिस डी हॉन

यदि परमेश्वर किसी बात के लिए हमें इन्कार करता है तो वह इसलिए कि वो हमें कुछ बेहतर दे सके।

और वह थोड़ा आगे बढ़ा, और भूमि पर गिर कर प्रार्थना करने लगा, कि यदि हो सके तो यह घड़ी मुझ पर से टल जाए। और कहा, हे अब्‍बा, हे पिता, तुझ से सब कुछ हो सकता है; इस कटोरे को मेरे पास से हटा ले: तौभी जैसा मैं चाहता हूं वैसा नहीं, पर जो तू चाहता है वही हो। - मरकुस १४:३५, ३६

बाइबल पाठ: मरकुस १४:३२-३८
    Mar 14:32  फिर वे गतसमने नाम एक जगह में आए, और उस ने अपने चेलों से कहा, यहां बैठे रहो, जब तक मैं प्रार्थना करूं।
    Mar 14:33  और वह पतरस और याकूब और यूहन्ना को अपने साथ ले गया: और बहुत ही अधीर, और व्याकुल होने लगा।
    Mar 14:34  और उन से कहा, मेरा मन बहुत उदास है, यहां तक कि मैं मरने पर हूं: तुम यहां ठहरो, और जागते रहो।
    Mar 14:35  और वह थोड़ा आगे बढ़ा, और भूमि पर गिर कर प्रार्थना करने लगा, कि यदि हो सके तो यह घड़ी मुझ पर से टल जाए।
    Mar 14:36  और कहा, हे अब्‍बा, हे पिता, तुझ से सब कुछ हो सकता है; इस कटोरे को मेरे पास से हटा ले: तौभी जैसा मैं चाहता हूं वैसा नहीं, पर जो तू चाहता है वही हो।
    Mar 14:37  फिर वह आया, और उन्‍हें सोते पाकर पतरस से कहा, हे शमौन तू सो रहा है? क्‍या तू एक घड़ी भी न जाग सका?
    Mar 14:38  जागते और प्रार्थना करते रहो कि तुम परीक्षा में न पड़ो: आत्मा तो तैयार है, पर शरीर र्दुबल है।
 
एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल ५-७ 
  • इब्रानियों १२