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मंगलवार, 26 मई 2020

परवाह



     बचपन में मैं जब भी अपने आप को अकेला, या तिरस्कृत, या खेदित अनुभव करता था, तो मेरी माँ मुझे उभारने और प्रसन्न करने के लिए एक छोटा सा गीत गाने लगती थीं, “मुझे कोई नहीं चाहता है; सब मुझ से घृणा करते हैं; मुझे लगता है कि मुझे अब कीड़े ही खाने होंगे।” जब यह सुन कर मेरे चेहरे पर एक मुस्कान आती तो वह मेरे साथ बैठतीं और मुझे उन सभी संबंधों और कृतज्ञ होने के कारणों को समझातीं जो वास्तव में मेरे साथ थे।

     जब मैं परमेश्वर के वचन बाइबल में पढ़ता हूँ कि दाऊद को भी कुछ ऐसी ही अकेलेपन और उपेक्षा की भावनाओं का सामना करना पड़ा था, तो मुझे अपनी माँ का वही गीत स्मरण हो आता है। लेकिन मेरी भावनाओं के समान, दाऊद की वे दुखदायी भावनाएँ कोई बढ़ा-चढ़ा कर कही गई बात नहीं थीं। मैं तो मेरी उस आयु में सामान्यतः सभी को होने वाली भावनाएँ अनुभव करता था, किन्तु दाऊद के पास अकेला और उपेक्षित अनुभव करने के उचित और पर्याप्त कारण थे।

     दाऊद ने वे शब्द एक गुफा में लिखे थे, जहाँ वह शाउल से अपनी जान बचाने के लिए  छुपा हुआ था, क्योंकि शाउल दाऊद की जान लेना चाहता था (1 शमूएल 22:1; 24:3-10)। दाऊद ने शाउल की सेवा में कई वर्ष बिताए थे, और उसे पर्म्केश्वर की ओर से इस्राएल का भावी राजा अभिषेक किया जा चुका था (16:13), परन्तु अब उस का जीवन एक से दूसरे स्थान अपनी जान बचाने के लिए भागते हुए बीत रहा था। अपने उस अकेलेपन और जोखिम की स्थिति में दाऊद ने परमेश्वर को पुकारा, उसे अपना “शरणस्थान” और जीवन का भाग कहा (भजन 142:5)।

     दाऊद के समान हम भी, जब भी अकेला, उपेक्षित, और बेसहारा अनुभव करें, तो अपनी भावनाओं को परमेश्वर के सम्मुख व्यक्त कर सकते हैं, और उस के प्रेम में शरणस्थान पा सकते हैं। परमेश्वर हमारे अकेलेपन को कभी कम नहीं आंकता है। वह हमारे जीवन की गहरी अंधेरी गुफाओं में हमारा साथी बन कर रहना चाहता है। चाहे हमें लगे कि किसी को हमारी परवाह नहीं है, परन्तु परमेश्वर हमेशा हमारी परवाह करता है। - कर्स्टिन होल्म्बर्ग

हमारे जीवन के अकेलेपन के समयों में भी परमेश्वर सदा हमारे साथ है।

तेरे जीवन भर कोई तेरे साम्हने ठहर न सकेगा; जैसे मैं मूसा के संग रहा वैसे ही तेरे संग भी रहूंगा; और न तो मैं तुझे धोखा दूंगा, और न तुझ को छोडूंगा। - यहोशू 1:5

बाइबल पाठ: भजन 142
भजन संहिता 142:1 मैं यहोवा की दोहाई देता, मैं यहोवा से गिड़गिड़ाता हूं,
भजन संहिता 142:2 मैं अपने शोक की बातें उस से खोल कर कहता, मैं अपना संकट उस के आगे प्रगट करता हूं।
भजन संहिता 142:3 जब मेरी आत्मा मेरे भीतर से व्याकुल हो रही थी, तब तू मेरी दशा को जानता था! जिस रास्ते से मैं जाने वाला था, उसी में उन्होंने मेरे लिये फन्दा लगाया।
भजन संहिता 142:4 मैं ने दाहिनी ओर देखा, परन्तु कोई मुझे नहीं देखता है। मेरे लिये शरण कहीं नहीं रही, न मुझ को कोई पूछता है।
भजन संहिता 142:5 हे यहोवा, मैं ने तेरी दोहाई दी है; मैं ने कहा, तू मेरा शरणस्थान है, मेरे जीते जी तू मेरा भाग है।
भजन संहिता 142:6 मेरी चिल्लाहट को ध्यान देकर सुन, क्योंकि मेरी बड़ी दुर्दशा हो गई है! जो मेरे पीछे पड़े हैं, उन से मुझे बचा ले; क्योंकि वे मुझ से अधिक सामर्थी हैं।
भजन संहिता 142:7 मुझ को बन्दीगृह से निकाल कि मैं तेरे नाम का धन्यवाद करूं! धर्मी लोग मेरे चारों ओर आएंगे; क्योंकि तू मेरा उपकार करेगा।

एक साल में बाइबल: 
  • 1 इतिहास 28-29
  • यूहन्ना 9:24-41



शनिवार, 27 अप्रैल 2019

सहज



      मैं जैमैका में एक छोटे चर्च में खड़ा था, और मैंने अपने सबसे उत्तम तरीके से वहाँ उपस्थित लोगों से, उनकी भाषा में कहा, “वा गवान जैमैका?” प्रतिक्रिया मेरी आशा से बेहतर थी, और उपस्थित लोगों की मुस्कुराहटों और तालियों ने मेरा स्वागत किया। वास्तव में मैंने उन की भाषा में एक बहुत सामान्य अभिन्दन, “कैसे हो जैमैका?” ही बोला था, परन्तु उनके लिए इसका तात्पर्य था कि “मैं आपसे आपकी भाषा में बोलने का प्रयास करना चाहता हूँ।” निःसंदेह मैं इससे अधिक उनकी भाषा बोलना नहीं जानता था, परन्तु मेरे इस प्रयास से उन तक पहुँचने के लिए एक द्वार खुल गया था।

      परमेश्वर के वचन बाइबल में हम देखते हैं कि जब प्रेरित पौलुस अथेने के लोगों के सामने प्रभु यीशु मसीह के बारे में बताने के लिए खड़ा हुआ, तो उसने उन्हें अवगत करवा दिया कि वह उनकी संस्कृति को जानता था। पौलुस ने उनसे कहा कि उसने उनकी “अनजाने ईश्वर के लिए” बनाई गई वेदी को देखा था, और उसने उनके एक कवि का संदर्भ भी दिया। पौलुस द्वारा उन्हें सन्देश देने के बाद सब ने तो उसकी बात पर विश्वास नहीं किया, किन्तु कुछ ने कहा कि “यह बात हम तुझ से फिर कभी सुनेंगे” (प्रेरितों 17:32)।

      जब हम प्रभु यीशु तथा उनसे मिलने वाले उद्धार के संबंध में लोगों के साथ वार्तालाप करते हैं, तो पवित्रशास्त्र के पाठ हमें सिखाते हैं कि लोगों से संपर्क बनाने के लिए उनके समान भाषा सीखें (1 कुरिन्थियों 9:20-23 भी देखें)। जब हम औरों के जीवनों के हाल को जानेंगे, तो उनके साथ वह बाँटना अधिक सहज होगा जो परमेश्वर ने हमारे जीवनों में किया है। - डेव ब्रैनन


औरों को मसीह यीशु के विषय बताने से पहले 
उन्हें दिखाएँ कि आप उनकी कितनी परवाह करते हैं।

कि यदि तू अपने मुंह से यीशु को प्रभु जानकर अंगीकार करे और अपने मन से विश्वास करे, कि परमेश्वर ने उसे मरे हुओं में से जिलाया, तो तू निश्चय उद्धार पाएगा। क्योंकि धामिर्कता के लिये मन से विश्वास किया जाता है, और उद्धार के लिये मुंह से अंगीकार किया जाता है। - रोमियों 10:9-10

बाइबल पाठ: प्रेरितों 17:22-32
Acts 17:22 तब पौलुस ने अरियुपगुस के बीच में खड़ा हो कर कहा; हे अथेने के लोगों मैं देखता हूं, कि तुम हर बात में देवताओं के बड़े मानने वाले हो।
Acts 17:23 क्योंकि मैं फिरते हुए तुम्हारी पूजने की वस्‍तुओं को देख रहा था, तो एक ऐसी वेदी भी पाई, जिस पर लिखा था, कि अनजाने ईश्वर के लिये। सो जिसे तुम बिना जाने पूजते हो, मैं तुम्हें उसका समाचार सुनाता हूं।
Acts 17:24 जिस परमेश्वर ने पृथ्वी और उस की सब वस्‍तुओं को बनाया, वह स्वर्ग और पृथ्वी का स्‍वामी हो कर हाथ के बनाए हुए मन्‍दिरों में नहीं रहता।
Acts 17:25 न किसी वस्तु का प्रयोजन रखकर मनुष्यों के हाथों की सेवा लेता है, क्योंकि वह तो आप ही सब को जीवन और स्‍वास और सब कुछ देता है।
Acts 17:26 उसने एक ही मूल से मनुष्यों की सब जातियां सारी पृथ्वी पर रहने के लिये बनाईं हैं; और उन के ठहराए हुए समय, और निवास के सिवानों को इसलिये बान्‍धा है।
Acts 17:27 कि वे परमेश्वर को ढूंढ़ें, कदाचित उसे टटोल कर पा जाएं तौभी वह हम में से किसी से दूर नहीं!
Acts 17:28 क्योंकि हम उसी में जीवित रहते, और चलते-फिरते, और स्थिर रहते हैं; जैसे तुम्हारे कितने कवियों ने भी कहा है, कि हम तो उसी के वंश भी हैं।
Acts 17:29 सो परमेश्वर का वंश हो कर हमें यह समझना उचित नहीं, कि ईश्वरत्‍व, सोने या रूपे या पत्थर के समान है, जो मनुष्य की कारीगरी और कल्पना से गढ़े गए हों।
Acts 17:30 इसलिये परमेश्वर आज्ञानता के समयों में अनाकानी कर के, अब हर जगह सब मनुष्यों को मन फिराने की आज्ञा देता है।
Acts 17:31 क्योंकि उसने एक दिन ठहराया है, जिस में वह उस मनुष्य के द्वारा धर्म से जगत का न्याय करेगा, जिसे उसने ठहराया है और उसे मरे हुओं में से जिलाकर, यह बात सब पर प्रामाणित कर दी है।।
Acts 17:32 मरे हुओं के पुनरुत्थान की बात सुनकर कितने तो ठट्ठा करने लगे, और कितनों ने कहा, यह बात हम तुझ से फिर कभी सुनेंगे।

एक साल में बाइबल:  
  • 1 राजा 1-2
  • लूका 19:28-48



मंगलवार, 22 जनवरी 2019

चेहरा



      एक लेखक के रूप में मेरी अधिकांश जीविका दुःख की समस्या को संबोधित करने में व्यतीत हुई है। मैं बारंबार लौट कर उन्हीं प्रश्नों पर आ जाता हूँ, मानो एक ऐसे घाव को कुरेदता रहता हूँ जो कभी भरने का नहीं। मुझे अपने पाठकों की प्रतिक्रियाएं प्राप्त होती हैं, और उनकी दुखद कहानियाँ मेरी शंकाओं को एक मान्वीय चहरे प्रदान करती हैं। मुझे स्मरण है कि एक युवा पास्टर ने मुझे फोन करके प्रश्न किया, “अब भला मैं अपने युवाओं के समूह के साथ एक प्रेमी परमेश्वर के बारे में कैसे बात कर सकता हूँ?” – उसकी पत्नि और शिशु बच्ची ऐड्स से ग्रसित होकर मर रहे थे क्योंकि उन्हें एड्स से संक्रमित रक्त चढ़ा दिया गया था!

      मैंने सीख लिया है कि इस प्रकार के “क्यूँ?” प्रश्नों का उत्तर देने का प्रयास भी नहीं करूँ। उस पास्टर के पत्नि को वही एक संक्रमित खून की बोतल ही क्यों मिली? क्यों चक्रवाधि तूफ़ान ने एक नगर को तबाह कर दिया और पास के दूसरे नगर की कुछ हानि नहीं हुई? क्यों शारीरिक चंगाई के लिए की गई प्रार्थनाएं निरुत्तरित चली जाती हैं?

      लेकिन एक प्रश्न है जो मुझे अब वैसे परेशान नहीं करता है, जैसे पहले किया करता था – “क्या परमेश्वर को हमारी परवाह है?” मैं इस प्रश्न का केवल एक ही उत्तर जानता हूँ, और वह उत्तर है प्रभु यीशु मसीह। प्रभु यीशु मसीह में परमेश्वर ने हमें वह चेहरा दिया है जिसे देखने से हमें पता चल जाता है कि परमेश्वर इस दुःख से कराहते हुए सँसार की परवाह करता है कि नहीं।

      “क्या परमेश्वर को हमारी प्रवाह है?” हमारे पापों के लिए परमेश्वर के पुत्र की मृत्यु, जिससे अन्तः सारा दुःख, कष्ट, पीड़ा, और मृत्यु भी सदा के लिए समाप्त हो जाएँगी, ही इस प्रश्न का उत्तर है – “इसलिये कि परमेश्वर ही है, जिसने कहा, कि अन्धकार में से ज्योति चमके; और वही हमारे हृदयों में चमका, कि परमेश्वर की महिमा की पहिचान की ज्योति यीशु मसीह के चेहरे से प्रकाशमान हो” (2 कुरिन्थियों 4: 6)। - फिलिप यैंसी


हमारे प्रति परमेश्वर के प्रेम का विस्तार क्रूस पर मसीह यीशु की फ़ैली हुई बाहों के जितना है।

फिर मैं ने सिंहासन में से किसी को ऊंचे शब्द से यह कहते सुना, कि देख, परमेश्वर का डेरा मनुष्यों के बीच में है; वह उन के साथ डेरा करेगा, और वे उसके लोग होंगे, और परमेश्वर आप उन के साथ रहेगा; और उन का परमेश्वर होगा। और वह उन की आंखों से सब आंसू पोंछ डालेगा; और इस के बाद मृत्यु न रहेगी, और न शोक, न विलाप, न पीड़ा रहेगी; पहिली बातें जाती रहीं। - प्रकाशितवाक्य 21:3-4

बाइबल पाठ: 2 कुरिन्थियों 4: 1-11
2 Corinthians 4:1 इसलिये जब हम पर ऐसी दया हुई, कि हमें यह सेवा मिली, तो हम हियाव नहीं छोड़ते।
2 Corinthians 4:2 परन्तु हम ने लज्ज़ा के गुप्‍त कामों को त्याग दिया, और न चतुराई से चलते, और न परमेश्वर के वचन में मिलावट करते हैं, परन्तु सत्य को प्रगट कर के, परमेश्वर के साम्हने हर एक मनुष्य के विवेक में अपनी भलाई बैठाते हैं।
2 Corinthians 4:3 परन्तु यदि हमारे सुसमाचार पर परदा पड़ा है, तो यह नाश होने वालों ही के लिये पड़ा है।
2 Corinthians 4:4 और उन अविश्वासियों के लिये, जिन की बुद्धि को इस संसार के ईश्वर ने अन्‍धी कर दी है, ताकि मसीह जो परमेश्वर का प्रतिरूप है, उसके तेजोमय सुसमाचार का प्रकाश उन पर न चमके।
2 Corinthians 4:5 क्योंकि हम अपने को नहीं, परन्तु मसीह यीशु को प्रचार करते हैं, कि वह प्रभु है; और अपने विषय में यह कहते हैं, कि हम यीशु के कारण तुम्हारे सेवक हैं।
2 Corinthians 4:6 इसलिये कि परमेश्वर ही है, जिसने कहा, कि अन्धकार में से ज्योति चमके; और वही हमारे हृदयों में चमका, कि परमेश्वर की महिमा की पहिचान की ज्योति यीशु मसीह के चेहरे से प्रकाशमान हो।
2 Corinthians 4:7 परन्तु हमारे पास यह धन मिट्ठी के बरतनों में रखा है, कि यह असीम सामर्थ हमारी ओर से नहीं, वरन परमेश्वर ही की ओर से ठहरे।
2 Corinthians 4:8 हम चारों ओर से क्‍लेश तो भोगते हैं, पर संकट में नहीं पड़ते; निरूपाय तो हैं, पर निराश नहीं होते।
2 Corinthians 4:9 सताए तो जाते हैं; पर त्यागे नहीं जाते; गिराए तो जाते हैं, पर नाश नहीं होते।
2 Corinthians 4:10 हम यीशु की मृत्यु को अपनी देह में हर समय लिये फिरते हैं; कि यीशु का जीवन भी हमारी देह में प्रगट हो।
2 Corinthians 4:11 क्योंकि हम जीते जी सर्वदा यीशु के कारण मृत्यु के हाथ में सौंपे जाते हैं कि यीशु का जीवन भी हमारे मरनहार शरीर में प्रगट हो।
                                                                                                                                                        
एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 4-6
  • मत्ती 14: 22-36



सोमवार, 1 दिसंबर 2014

परवाह


   परमेश्वर के वचन बाइबल में भजनकार ने एक प्रश्न उठाया, "जब मैं आकाश को, जो तेरे हाथों का कार्य है, और चंद्रमा और तरागण को जो तू ने नियुक्त किए हैं, देखता हूं; तो फिर मनुष्य क्या है कि तू उसका स्मरण रखे, और आदमी क्या है कि तू उसकी सुधि ले?" (भजन 8:3-4)। बाइबल का पुराना नियम खण्ड इस प्रश्न के भिन्न रूपों से जूझता रहा है। मिस्त्र के दासत्व में कराह रहे इसत्राएली राष्ट्र को मूसा द्वारा दीए गए इस आश्वासन पर विश्वास करना असंभव लगा कि परमेश्वर को उनकी परवाह है और वह उन्हें शीघ्र ही दासत्व से निकालकर एक नए स्थान पर बसा देगा। स्भोपदेशक नामक बाइबल की पुस्तक का लेखक इसी प्रश्न को व्यंग के साथ प्रस्तुत करता है जब वह इस पुस्तक में बारंबर कहता है, "सब व्यर्थ है", अर्थात, क्या इस संसार में कुछ भी ऐसा है जो अर्थपूर्ण है?

   मैं भी इसी सन्देह के साथ जूझ रहा था जब मुझे निमंत्रण मिला कि मैं एक ऐसी सभा को संबोधित करूँ जिसके आयोजन की विषय-वस्तु थी बाइबल का यह पद: "देख, मैं ने तेरा चित्र हथेलियों पर खोदकर बनाया है; तेरी शहरपनाह सदैव मेरी दृष्टि के साम्हने बनी रहती है" (यशायाह 49:16)।

   बाइबल के जिस भाग से यह पद लिया गया था वह परमेश्वर का अपने लोगों को संबोधन था जब वे अपने इतिहास में एक निम्न बिंदु से होकर निकल रहे थे क्योंकि परमेश्वर ने अपने भविष्यद्वक्ता यशायाह द्वारा उन्हें बताया था कि वे बन्दी बना कर बाबुल ले जाए जाएंगे। अपने विषय यह भविष्यवाणी सुनकर इस्त्राएल के लोग कहने लगे, "...यहोवा ने मुझे त्याग दिया है, मेरा प्रभु मुझे भूल गया है" (यशायाह 49:14)। उनका यह विलाप सुनकर परमेश्वर ने उन्हें अनेक प्रतिज्ञाएं भी दीं जो यशायाह के 42 से 53 अध्याय में मिलती हैं और जिन्हें सेवकों के गीत भी कहा जाता है। इन प्रतिज्ञाओं में परमेश्वर इस्त्राएल के सामने शत्रुओं से छुटकारे और भविष्य की आशा को रखता है। इसी खण्ड में परमेश्वर आते समय में प्रभु यीशु के मानव अवतार के रूप में आने और संसार के पापों के निवारण तथा उद्धार का मार्ग तैयार कर के देने की भविष्यवाणी भी करता है।

   क्या वास्तव में परमेश्वर हम मनुष्यों की परवाह करता है? परमेश्वर के वचन बाइबल का ज़ोरदार ढंग से उत्तर है "हाँ" और इसका प्रमाण है प्रभु यीशु मसीह - यदि परमेश्वर को हमारी परवाह नहीं होती और वह हमसे प्रेम नहीं करता तो फिर उसे अपने पुत्र को हमारे पापों के बदले दण्ड उठाने और हमारे उद्धार पाने के लिए मारे जाने के लिए स्वर्ग के वैभव को छोड़कर संसार में दुख उठाने आने की आवश्यकता भी नहीं थी। क्योंकि परमेश्वर आपसे और मुझसे प्रेम रखता है, हमारी परवाह करता है इसीलिए आज भी हमारे लिए प्रभु यीशु में पापों की क्षमा और उद्धार प्राप्त करने का मार्ग उसने खुला रखा हुआ है। - फिलिप यैन्सी


प्रभु यीशु का आगमन इस बात का सर्वोच्च तथा अकाट्य प्रमाण है कि परमेश्वर हमारी परवाह करता है। - विलियम बार्कले

और किसी दूसरे के द्वारा उद्धार नहीं; क्योंकि स्वर्ग के नीचे मनुष्यों में और कोई दूसरा नाम नहीं दिया गया, जिस के द्वारा हम उद्धार पा सकें। - प्रेरितों 4:12

बाइबल पाठ: यशायाह 49:8-18
Isaiah 49:8 यहोवा यों कहता है, अपनी प्रसन्नता के समय मैं ने तेरी सुन ली, उद्धार करने के दिन मैं ने तेरी सहायता की है; मैं तेरी रक्षा कर के तुझे लोगों के लिये एक वाचा ठहराऊंगा, ताकि देश को स्थिर करे और उजड़े हुए स्थानों को उनके अधिकारियों के हाथ में दे दे; और बंधुओं से कहे, बन्दीगृह से निकल आओ; 
Isaiah 49:9 और जो अन्धियारे में हैं उन से कहे, अपने आप को दिखलाओ! वे मार्गों के किनारे किनारे पेट भरने पाएंगे, सब मुण्डे टीलों पर भी उन को चराई मिलेगी। 
Isaiah 49:10 वे भूखे और प्यासे होंगे, न लूह और न घाम उन्हें लगेगा, क्योंकि, वह जो उन पर दया करता है, वही उनका अगुवा होगा, और जल के सोतों के पास उन्हें ले चलेगा। 
Isaiah 49:11 और, मैं अपने सब पहाड़ों को मार्ग बना दूंगा, और मेरे राजमार्ग ऊंचे किए जाएंगे। 
Isaiah 49:12 देखो, ये दूर से आएंगे, और, ये उत्तर और पच्छिम से और सीनियों के देश से आएंगे। 
Isaiah 49:13 हे आकाश, जयजयकार कर, हे पृथ्वी, मगन हो; हे पहाड़ों, गला खोल कर जयजयकार करो! क्योंकि यहोवा ने अपनी प्रजा को शान्ति दी है और अपने दीन लोगों पर दया की है।
Isaiah 49:14 परन्तु सिय्योन ने कहा, यहोवा ने मुझे त्याग दिया है, मेरा प्रभु मुझे भूल गया है। 
Isaiah 49:15 क्या यह हो सकता है कि कोई माता अपने दूधपिउवे बच्चे को भूल जाए और अपने जन्माए हुए लड़के पर दया न करे? हां, वह तो भूल सकती है, परन्तु मैं तुझे नहीं भूल सकता। 
Isaiah 49:16 देख, मैं ने तेरा चित्र हथेलियों पर खोदकर बनाया है; तेरी शहरपनाह सदैव मेरी दृष्टि के साम्हने बनी रहती है। 
Isaiah 49:17 तेरे लड़के फुर्ती से आ रहे हैं और खण्डहर बनाने वाले और उजाड़ने वाले तेरे बीच से निकले जा रहे हैं। 
Isaiah 49:18 अपनी आंखें उठा कर चारों ओर देख, वे सब के सब इकट्ठे हो कर तेरे पास आ रहे हैं। यहोवा की यह वाणी है कि मेरे जीवन की शपथ, तू निश्चय उन सभों को गहने के समान पहिन लेगी, तू दुल्हिन की नाईं अपने शरीर में उन सब को बान्ध लेगी।

एक साल में बाइबल: 
  • गलतियों 1-3


शुक्रवार, 27 जून 2014

परवाह


   मेरी सास की मृत्यु के कई महीने बाद तक भी उनके अन्तिम दिनों में बड़े प्रेम और ध्यान से उनकी देखभाल करने वाले हस्पताल के लोगों से हमें कार्ड और पत्र आते रहे। उन कार्ड और पत्रों के द्वारा वे हमें उस दुख के समय में सांत्वना और प्रोत्साहन दे रहे थे, उस विछोह का सामना करने के मार्ग सुझा रहे थे। एक पत्र में लिखा था, "आपकी माँ के जन्मदिन की तिथि जैसे निकट आ रही है, हम भी उन्हें स्मरण कर रहे हैं और हमारी प्रार्थनाएं तथा विचार आपके एवें आपके परिवार के साथ हैं।" सहायता करने वाले ये अद्भुत लोग जानते और समझते हैं कि बिछुड़ने का दुख एक लंबी प्रक्रिया है जिसमें लगातार सहायता और सहारे की आवश्यकता होती है, इसलिए वो जो भी करते हैं उसमें गहरी सहानुभूति सम्मिलित होती है।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस ने मसीही विश्वासियों को लिखा, "तुम एक दूसरे के भार उठाओ, और इस प्रकार मसीह की व्यवस्था को पूरी करो" (गलतियों 6:2)। पाप स्वभाव के कारण शरीर के कार्य तो विनाशकारी, स्वार्थी और हानिकारक होते हैं (गलतियों 5:19-21) लेकिन प्रभु यीशु में उद्धार पाए हुए लोगों द्वारा परमेश्वर के आत्मा के अनुसार किए गए कार्य हैं: "पर आत्मा का फल प्रेम, आनन्द, मेल, धीरज, और कृपा, भलाई, विश्वास, नम्रता, और संयम हैं; ऐसे ऐसे कामों के विरोध में कोई भी व्यवस्था नहीं" (गलतियों 5:22-23)। मसीह यीशु में हमें मिलने वाली महान स्वतंत्रता एक दूसरे की परवाह और प्रेम के साथ एक दूसरे की सेवा करने की प्रेर्णा देती है।

   किसी दुख में पड़े हुए जन के लिए प्रेम और प्रोत्साहन का व्यवहार तपती झुलसाती गरमी में राहत देने वाली तथा तरोताज़ा कर देने वाली वर्षा के समान होता है। जब हम अर्थपूर्ण रीति से दूसरों की परवाह करते हैं, उनसे प्रेम का व्यवहार करते हैं तो यह उनमें नए जीवन की ताज़गी को प्रवाहित करता है, मुर्झाए हुओं को फिर से हरा-भरा करता है और हम मसीही विश्वासियों के लिए समस्त संसार के उद्धारकर्ता मसीह यीशु द्वारा दिए गए निर्देशों को पूरा करता है, मसीही चरित्र को संसार के सामने प्रकट करता है। - डेविड मैक्कैसलैंड


करुणा मसीह-समान प्रेम को कार्यकारी रूप में दिखाने का गुण है।

और उस से हमें यह आज्ञा मिली है, कि जो कोई अपने परमेश्वर से प्रेम रखता है, वह अपने भाई से भी प्रेम रखे। - 1 यूहन्ना 4:21

बाइबल पाठ: गलतियों 5:14-2
Galatians 5:14 क्योंकि सारी व्यवस्था इस एक ही बात में पूरी हो जाती है, कि तू अपने पड़ोसी से अपने समान प्रेम रख। 
Galatians 5:15 पर यदि तुम एक दूसरे को दांत से काटते और फाड़ खाते हो, तो चौकस रहो, कि एक दूसरे का सत्यानाश न कर दो।
Galatians 5:16 पर मैं कहता हूं, आत्मा के अनुसार चलो, तो तुम शरीर की लालसा किसी रीति से पूरी न करोगे। 
Galatians 5:17 क्योंकि शरीर आत्मा के विरोध में, और आत्मा शरीर के विरोध में लालसा करती है, और ये एक दूसरे के विरोधी हैं; इसलिये कि जो तुम करना चाहते हो वह न करने पाओ। 
Galatians 5:18 और यदि तुम आत्मा के चलाए चलते हो तो व्यवस्था के आधीन न रहे। 
Galatians 5:19 शरीर के काम तो प्रगट हैं, अर्थात व्यभिचार, गन्‍दे काम, लुचपन। 
Galatians 5:20 मूर्ति पूजा, टोना, बैर, झगड़ा, ईर्ष्या, क्रोध, विरोध, फूट, विधर्म। 
Galatians 5:21 डाह, मतवालापन, लीलाक्रीड़ा, और इन के जैसे और और काम हैं, इन के विषय में मैं तुम को पहिले से कह देता हूं जैसा पहिले कह भी चुका हूं, कि ऐसे ऐसे काम करने वाले परमेश्वर के राज्य के वारिस न होंगे। 
Galatians 5:22 पर आत्मा का फल प्रेम, आनन्द, मेल, धीरज, 
Galatians 5:23 और कृपा, भलाई, विश्वास, नम्रता, और संयम हैं; ऐसे ऐसे कामों के विरोध में कोई भी व्यवस्था नहीं। 
Galatians 5:24 और जो मसीह यीशु के हैं, उन्होंने शरीर को उस की लालसाओं और अभिलाषाओं समेत क्रूस पर चढ़ा दिया है।
Galatians 5:25 यदि हम आत्मा के द्वारा जीवित हैं, तो आत्मा के अनुसार चलें भी। 
Galatians 5:26 हम घमण्‍डी हो कर न एक दूसरे को छेड़ें, और न एक दूसरे से डाह करें। 
Galatians 6:1 हे भाइयों, यदि कोई मनुष्य किसी अपराध में पकड़ा भी जाए, तो तुम जो आत्मिक हो, नम्रता के साथ ऐसे को संभालो, और अपनी भी चौकसी रखो, कि तुम भी परीक्षा में न पड़ो। 
Galatians 6:2 तुम एक दूसरे के भार उठाओ, और इस प्रकार मसीह की व्यवस्था को पूरी करो।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 100-102