ई-मेल संपर्क / E-Mail Contact

इन संदेशों को ई-मेल से प्राप्त करने के लिए अपना ई-मेल पता इस ई-मेल पर भेजें : rozkiroti@gmail.com / To Receive these messages by e-mail, please send your e-mail id to: rozkiroti@gmail.com

मंगलवार, 9 नवंबर 2010

परमेश्वर से संगति की सच्ची लालसा

पास्टर टोज़र (१८९७ - १९६३) ने मसीही धर्मशास्त्रियों की जीवनीओं और लेखों का ऐसा गहन अध्ययन किया कि वह उनके बारे में सहजता से लेख लिखने के योग्य हो गया। अपने इन अध्ययनों के आधार पर उसने कहा: "बीते समय के इन पवित्र स्त्री और पुरुषों के निकट आईये और आप उनके अन्दर लगी हुई परमेश्वर की संगति के प्रति लालसा की आग की गर्मी को महसूस कर पाएंगे। ये लोग परमेश्वर की निकटता के लिये रोते थे, प्रार्थनाएं करते थे, दिन और रात उसकी उपस्थिति में रहने के लिये अन्तर्द्वन्द में रहते थे। उनकी इस लालसा पूरती, उनकी उस प्रचण्ड खोज के कारण, उसकी संगति के एहसास को और भी मधुर बना देती थी।"

भजन ४२ का लेखक पास्टर टोज़र द्वारा कही गई प्रचण्ड लालसा जैसी भावना रखता था। अपनी परमेश्वर की निकटता में आने की तीव्र लालसा को लेखक प्यासे हिरन द्वारा पानी की खोज की समानता के रूपक से व्यक्त करता है: "जैसे हरिणी नदी के जल के लिये हांफती है, वैसे ही, हे परमेश्वर, मैं तेरे लिये हांफता हूं। जीवते ईश्वर परमेश्वर का मैं प्यासा हूं, मैं कब जाकर परमेश्वर को अपना मुंह दिखाऊंगा?" (भजन ४२:१, २) उसकी यह लालसा इतनी तीव्र थी और उसका दुख इतना गहरा कि वह भोजन करने से अधिक आंसू पीता था (भजन ४२:३)। भजन के लेखक की लालसा की संतुष्टि, उसके परमेश्वर पर रखे गए भरोसे और उसकी उपस्थिति और सहायता के लिये करी गई उसकी आराधना में व्यक्त हुई (भजन ४२:५-८)।

परमेश्वर का वायदा है कि जो भी उसे सम्पूर्ण मन से खोजते हैं वह उन्हें कभी निराश नहीं करता "तब उस समय तुम मुझ को पुकारोगे और आकर मुझ से प्रार्थना करोगे और मैं तुम्हारी सुनूंगा। तुम मुझे ढूंढ़ोगे और पाओगे भी; क्योंकि तुम अपने सम्पूर्ण मन से मेरे पास आओगे" (यर्मियाह २९:१२, १३)। उसे केवल सच्चे मन से निकली सच्ची प्रार्थना चाहिये और वह उत्तर देगा, अन्य किसी चीज़ की उसे आवश्यक्ता नहीं है - न कोई धर्म, न कोई रीति-रिवाज़, न कोई अनुष्ठान, न कोई सांसारिक वस्तु की भेंट, न अपने शरीर को दुख देकर उसे रिझाने का प्रयत्न; केवल एक सच्ची पुकार, क्योंकि "टूटा मन परमेश्वर के योग्य बलिदान है; हे परमेश्वर, तू टूटे और पिसे हुए मन को तुच्छ नहीं जानता।" (भजन ५१:१७)।

जिनकी लालसा की पूर्ति हो जाती है, उनकी तृप्ति भी हो जाती है: "यीशु ने उन से कहा, जीवन की रोटी मैं हूं: जो मेरे पास आएगा वह कभी भूखा न होगा और जो मुझ पर विश्वास करेगा, वह कभी प्यासा न होगा। जो कुछ पिता मुझे देता है वह सब मेरे पास आएगा, उसे मैं कभी न निकालूंगा (यूहन्ना ६:३५, ३७)।

क्या आप में परमेश्वर की संगति की सच्ची लालसा है? क्या उस लालसा की पूर्ति के लिये आपने उस सच्चे परमेश्वर को सच्चे और टूटे मन से पुकारा है? उसे आपकी टूटे मन से निकली सच्ची प्रार्थना का इंतिज़ार है।


केवल यीशु, जो जीवते जल का स्त्रोत है, परमेश्वर के लिये प्यासी आत्मा को तृप्त कर सकता है।

जैसे हरिणी नदी के जल के लिये हांफती है, वैसे ही, हे परमेश्वर, मैं तेरे लिये हांफता हूं। - भजन ४२:१

बाइबल पाठ : भजन ४२

जैसे हरिणी नदी के जल के लिये हांफती है, वैसे ही, हे परमेश्वर, मैं तेरे लिये हांफता हूं।
जीवते ईश्वर परमेश्वर का मैं प्यासा हूं, मैं कब जाकर परमेश्वर को अपना मुंह दिखाऊंगा?
मेरे आंसू दिन और रात मेरा आहार हुए हैं; और लोग दिन भर मुझ से कहते रहते हैं, तेरा परमेश्वर कहां है?
मैं भीड़ के संग जाया करता था, मैं जयजयकार और धन्यवाद के साथ उत्सव करने वाली भीड़ के बीच में परमेश्वर के भवन को धीरे धीरे जाया करता था; यह स्मरण करके मेरा प्राण शोकित हो जाता है।
हे मेरे प्राण, तू क्यों गिरा जाता है? और तू अन्दर ही अन्दर क्यों व्याकुल है? परमेश्वर पर आशा लगाए रह, क्योंकि मैं उसके दर्शन से उद्धार पाकर फिर उसका धन्यवाद करूंगा।
हे मेरे परमेश्वर, मेरा प्राण मेरे भीतर गिरा जाता है, इसलिये मैं यर्दन के पास के देश से और हर्मोन के पहाड़ों और मिसगार की पहाड़ी के ऊपर से तुझे स्मरण करता हूं।
तेरी जलधाराओं का शब्द सुन कर जल, जल को पुकारता है, तेरी सारी तरंगों और लहरों में मैं डूब गया हूं।
तौभी दिन को यहोवा अपनी शक्ति और करूणा प्रगट करेगा, और रात को भी मैं उसका गीत गाऊंगा, और अपने जीवनदाता ईश्वर से प्रार्थना करूंगा।
मैं ईश्वर से जो मेरी चट्टान है कहूंगा, तू मुझे क्यों भूल गया? मैं शत्रु के अन्धेर के मारे क्यों शोक का पहिरावा पहिने हुए चलता फिरता हूं?
मेरे सताने वाले जो मेरी निन्दा करते हैं मानो उस में मेरी हडि्डयां चूर चूर होती हैं, मानो कटार से छिदी जाती हैं, क्योंकि वे दिन भर मुझ से कहते रहते हैं, तेरा परमेश्वर कहां है?
हे मेरे प्राण तू क्यों गिरा जाता है? तू अन्दर ही अन्दर क्यों व्याकुल है? परमेश्वर पर भरोसा रख, क्योंकि वह मेरे मुख की चमक और मेरा परमेश्वर है, मैं फिर उसका धन्यवाद करूंगा।

एक साल में बाइबल:
  • यर्मियाह ४६-४७
  • इब्रानियों ६

सोमवार, 8 नवंबर 2010

दुख में आनन्द

चित्रकला के थोड़े से ही सबक सीखने के बाद १० वर्षीय जोएल ने एक फूल का चित्र बनाने में अपना हाथ आज़माया। शारोन के गुलाब की रंगीन फोटो को देख कर उसने एक सुंदर चित्र बना लिया। जिस फोटो को देख कर जोएल ने चित्र बनाया था वह उसकी आन्टी के मृत्यु के दिन ली गई थी। जोएल की चित्रकला द्वारा वह फूल और उससे जुड़ी यादें परिवार के लोगों के लिये सजीव हो उठीं। एक तरफ तो जोएल का चित्र अपने निकट कुटुम्बी को खोने की याद दिला रहा था तो दूसरी तरफ जोएल की नयी प्रतिभा की पहिचान होने से परिवार को हर्ष भी था। यह परिवार के लिये दुख-सुख का मिला जुला अनुभव था, दुख में भी आनन्द की अनुभूति थी।

जब यहूदा के लोग ७० वर्ष की बाबुल की बन्धुआई से वापस यरुशलेम को लौटे तो उन्हों ने युद्ध मे ध्वस्त हो चुके मन्दिर के पुनः निर्माण का कार्य आरंभ किया। जब मन्दिर बन कर तैयार हो गया और उसके परमेश्वर को समर्पण का समय आया तो यह उपस्थित लोगों के लिये दुख और आनन्द दोनो ही की बात थी। कुछ तो आनन्द के गीत गा रहे थे तो कुछ, जिन्होंने पुराने मन्दिर, उसकी भव्यता और उसकी सुन्दरता को देखा था, पुरानी यादों के कारण ऊंची आवाज़ में विलप कर रहे थे। ऐसा माहौल हो गया था कि "... लोग, आनन्द के जय जयकार का शब्द, लोगों के रोने के शब्द से अलग पहिचान न सके..." (एज़रा ३:१३)।

मारथा, मरियम और लाज़र का अनुभव (यूहन्ना ११) दुख में भी भविष्य के आनन्द को दिखाता है। लाज़र की मृत्यु के कारण उसकी बहिनें मार्था और मरियम दुखी थीं, परन्तु "यीशु ने उस से कहा, पुनरूत्थान और जीवन मैं ही हूं, जो कोई मुझ पर विश्वास करता है वह यदि मर भी जाए, तौभी जीएगा। और जो कोई जीवता है, और मुझ पर विश्वास करता है, वह अनन्‍त काल तक न मरेगा" (यूहन्ना ११:२५, २६)।

भारी दुख में भी हमारे प्रभु यीशु का अपने लोगों को दिया गया आश्वासन और उसकी शांति उसमें मिलने वाले अनन्त आनन्द की ओर हमारा ध्यान खींच कर हमें दुख पर विजयी करती है और निराश या हताश नहीं होने देती।

क्या आप के पास प्रत्येक परिस्थिति में उपलब्ध प्रभु यीशु की वह शांति है जो भारी दुख में भी अनन्त आनन्द को स्मरण दिलाती है? - डेनिस फिशर


जीवन के सबसे कठिन और अन्धकारमय समय में भी मसीही विश्वासी के पास सबसे स्थायी और उत्तम शांति होती है।

यीशु ने उस से कहा, पुनरूत्थान और जीवन मैं ही हूं, जो कोई मुझ पर विश्वास करता है वह यदि मर भी जाए, तौभी जीएगा। और जो कोई जीवता है, और मुझ पर विश्वास करता है, वह अनन्‍त काल तक न मरेगा। - यूहन्ना ११:२५, २६

बाइबल पाठ: यूहन्ना ११:१९-२७

और बहुत से यहूदी मार्था और मरियम के पास उन के भाई के विषय में शान्‍ति देने के लिये आए थे।
सो मार्था यीशु के आने का समचार सुनकर उस से भेंट करने को गई, परन्‍तु मरियम घर में बैठी रही।
मार्था ने यीशु से कहा, हे प्रभु, यदि तू यहां होता, तो मेरा भाई कदापि न मरता।
और अब भी मैं जानती हूं, कि जो कुछ तू परमेश्वर से मांगेगा, परमेश्वर तुझे देगा।
यीशु ने उस से कहा, तेरा भाई जी उठेगा।
मार्था ने उस से कहा, मैं जानती हूं, कि अन्‍तिम दिन में पुनरूत्थान के समय वह जी उठेगा।
यीशु ने उस से कहा, पुनरूत्थान और जीवन मैं ही हूं, जो कोई मुझ पर विश्वास करता है वह यदि मर भी जाए, तौभी जीएगा।
और जो कोई जीवता है, और मुझ पर विश्वास करता है, वह अनन्‍त काल तक न मरेगा, क्‍या तू इस बात पर विश्वास करती है?
उस ने उस से कहा, हां हे प्रभु, मैं विश्वास कर चुकी हूं, कि परमेश्वर का पुत्र मसीह जो जगत में आने वाला था, वह तू ही है।

एक साल में बाइबल:
  • यर्मियाह ४३-४५
  • इब्रानियों ५

रविवार, 7 नवंबर 2010

अनाज्ञाकरिता के बहाने

स्कूल में संगीत आयोजनों का समय था और संगीत के विद्यार्थियों ने आती सभाओं के लिये अभ्यास की तैयारी आरंभ कर दी थी। संगीत शिक्षिका ने इस विष्य में विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों को दो बार, अलग अलग समय पर स्पष्ट सूचना और संबंधित निर्देश दे दिये थे, जिनमें अभ्यास का अनिवार्य होना और अभ्यास का समय भी साफ साफ बता दिया गया था।

फिर भी अभ्यास के दिन एक बच्चे की घबराई हुई माँ ने फोन करके जानना चाहा कि अभ्यास कब होना है और उसके बच्चे को कब पहुंचना है? एक और मां ने फोन करके कहा कि "हम बच्चे को उसके दादी के पास ले जा रहे हैं, इसलिये यदि वह अभ्यास में ना आ सका तो कोई फरक तो नहीं पड़ेगा?" शिक्षिका ने उन्हें याद दिलाया कि अभ्यास अनिवार्य है और आरंभ हो चुका है, बच्चों का अभ्यास में होना आवश्यक है। उसे उत्तर मिला "किसी ने मुझे इसके बारे में पहले क्यों नहीं बताया? मुझे यह सब अपने आप कैसे पता चलता?"

जैसे अपने स्पष्ट और समय से दिये गए निर्देशों और सूचनाओं के नज़रंदाज़ किये जाने से वह शिक्षिका दुःखी और परेशान हुई, क्या परमेश्वर भी उसकी स्पष्ट आज्ञाओं को नज़रंदाज़ करने वाले हमारे रवैये से दुःखी होता है?

१ थिस्सलुनिकियों में पौलुस हमें याद दिलाता है कि परमेश्वर की ओर से उसे मिला सन्देश हमें सिखाने के लिये है कि परमेश्वर को प्रसन्न करने वाला जीवन कैसे जीएं और उसके इन सन्देशों पर प्रभु यीशु की मुहर है (१ थिस्सलुनिकियों १:१, २)। अन्य पत्री में पौलुस समझता है कि हमारी अनआज्ञाकारिता और मनमाने रवैये से परमेश्वर दुःखी होता है (इफिसियों ४:३० - ५:२)।

हम यह ठान लें कि हम परमेश्वर के वचन को ध्यान से पढ़ेंगे और उसका पालन करेंगे - बिना कोई बहाना बनाए। - डेव ब्रैनन


हमारा, परमेश्वर और उसके वचन की उपेक्षा करने को समझा सकने के लिये, कोई उचित बहना है ही नहीं।

और परमेश्वर के पवित्र आत्मा को शोकित मत करो, जिस से तुम पर छुटकारे के दिन के लिये छाप दी गई है। - इफिसियों ४:३०


बाइबल पाठ: १ थिस्सलुनिकियों ४:१-१२

निदान, हे भाइयों, हम तुम से बिनती करते हैं, और तुम्हें प्रभु यीशु में समझाते हैं, कि जैसे तुम ने हम से योग्य चाल चलना, और परमेश्वर को प्रसन्न करना सीखा है, और जैसा तुम चलते भी हो, वैसे ही और भी बढ़ते जाओ।
क्‍योंकि तुम जानते हो, कि हम ने प्रभु यीशु की ओर से तुम्हें कौन कौन सी आज्ञा पहुंचाई।
क्‍योंकि परमेश्वर की इच्‍छा यह है, कि तुम पवित्र बनो: अर्थात व्यभिचार से बचे रहो।
और तुम में से हर एक पवित्रता और आदर के साथ अपने पात्र को प्राप्‍त करना जाने।
और यह काम अभिलाषा से नहीं, और न उन जातियों की नाईं, जो परमेश्वर को नहीं जानतीं।
कि इस बात में कोई अपने भाई को न ठगे, और न उस पर दांव चलाए, क्‍योंकि प्रभु इन सब बातों का पलटा लेने वाला है; जैसा कि हम ने पहिले तुम से कहा, और चिताया भी था।
क्‍योंकि परमेश्वर ने हमें अशुद्ध होने के लिये नहीं, परन्‍तु पवित्र होने के लिये बुलाया है।
इस कारण जो तुच्‍छ जानता है, वह मनुष्य को नहीं, परन्‍तु परमेश्वर को तुच्‍छ जानता है, जो अपना पवित्र आत्मा तुम्हें देता है।
किन्‍तु भाईचारे की प्रीति के विषय में यह अवश्य नहीं, कि मैं तुम्हारे पास कुछ लिखूं, क्‍योंकि आपस में प्रेम रखना तुम ने आप ही परमेश्वर से सीखा है।
और सारे मकिदुनिया के सब भाइयों के साथ ऐसा करते भी हो, पर हे भाइयों, हम तुम्हें समझाते हैं, कि और भी बढ़ते जाओ।
और जैसी हम ने तुम्हें आज्ञा दी, वैसे ही चुपचाप रहने और अपना अपना काम काज करने, और अपने अपने हाथों से कमाने का प्रयत्‍न करो।
कि बाहर वालों के साथ सभ्यता से बर्ताव करो, और तुम्हें किसी वस्‍तु की घटी न हो।

एक साल में बाइबल:
  • यर्मियाह ४०-४२
  • इब्रानियों ४

शनिवार, 6 नवंबर 2010

बाइबल का सजीव इतिहास

एक सिनेमा "Night at the Museum" एक अजायबघर के चौकीदार के रोमांचक अनुभवों का चित्रण है। उसका यह रोमांच आरंभ होता है जब रात में अजायबघर में प्रदर्शन के लिये रखे ऐतिहासिक लोगों के पुतले सजीव हो उठते हैं और अपनी मनमानी करने लगते हैं।

इस सिनेमा से प्रेरित होकर एक वास्तविक अजायबघर के निर्देशकों ने उस अजायबघर में ऐसा अनुभव उत्पन्न किया। उन्होंने अपने कर्मचारियों को अलग अलग काल के ऐतिहासिक लोगों की वेष भूषा में खड़ा किया, और वहां आने वाले बच्चों को कहा कि ऐतिहासिक पुतले सजीव होकर इधर उधर हो गये हैं, अब उन्हें उनके ऐतिहासिक क्रम में सही स्थान पर ले जाना है जिसमें बच्चों की सहायता चाहिये। बच्चों के लिये यह इतिहास सीखने का सजीव और कभी न भुलाए जाने वाला अनुभव बन गया।

बाइबल भी उसके पात्रों के रोमांचकारी अनुभवों की कहानियों से भरी हुई है। बच्चों को बाइबल की कहानियां याद कराना कोई उन्हें उबाने वाला काम नहीं है। मूसा के जीवन का ही उदाहरण लीजिये, शिशुकाल में बड़े नाटकीय ढंग से वह मृत्यु से बचा और राजमहल में पहुंचाया गया जहां एक राजकुमार की तरह उसकी परवरिश हुई। फिर अद्भुत रीति से वह परमेश्वर द्वारा बुलाया गया, सामर्थी किया गया और उसने अद्भुत आश्चर्यकर्म किये। परमेश्वर से उसकी दस आज्ञाओं और व्यवस्था को वह इस्त्रालियों के लिये लेकर आया और उन्हें उनके देश तक लेकर गया। उसके जीवन का एक एक भाग दिलचस्प है और बच्चों के लिये रोमांचकारी कहानी के रूप में प्रस्तुत किया जा सकता है। बाइबल ऐसे ही अद्भुत जीवनों की कहानियों से भरी पड़ी है।

बाइबल की शिक्षा भी है कि माँ-बाप अपने बच्चों को बीते इतिहास की बातें सिखाएं जिससे बच्चे परमेश्वर और उसके सामर्थ और उसकी बातों को जान सकें (निर्गमन १२, १३; व्यवस्थाविवरण ६)। बाइबल के पात्रों का इतिहास सजीव इतिहास है, उनके जीवन आज भी अपने पढ़ने और सीखने वालों से बातें करते हैं और ऐसी शिक्षाएं देते हैं जो संसार में उन्हें कहीं नहीं मिल सकतीं - शिक्षाएं जो उन्हें परमेश्वर के बारे में सिखातीं हैं।

बाइबल का पालन करके उसके इतिहास को अपने जीवन में सजीव कीजिये, आपके जीवन में परमेश्वर का कार्य सजीव हो उठेगा, क्योंकि यह वचन ही परमेश्वर है जो हमारे लिये प्रभु यीशु के रूप में देहधारी हुआ "आदि में वचन था, और वचन परमेश्वर के साथ था, और वचन परमेश्वर था। और वचन देहधारी हुआ, और अनुग्रह और सच्‍चाई से परिपूर्ण होकर हमारे बीच में डेरा किया, और हम ने उस की ऐसी महिमा देखी, जैसी पिता के एकलौते की महिमा" (यूहना १:१, १२)। - डेनिस फिशर



बाइबल के खज़ाने उन्हें ही मिलते हैं जो सच्चे मन से उनको खोजते हैं।

और ये आज्ञाएं जो मैं आज तुझ को सुनाता हूं वे तेरे मन में बनी रहें; और तू इन्हें अपने बाल बच्चों को समझा कर सिखाया करना... - व्यवस्थाविवरण ६:६, ७


बाइबल पाठ: निर्गमन १३:१४-१६

और आगे के दिनों में जब तुम्हारे पुत्र तुम से पूछें, कि यह क्या है? तो उन से कहना, कि यहोवा हम लोगों को दासत्व के घर से, अर्थात मिस्र देश से अपने हाथों के बल से निकाल लाया है।
उस समय जब फिरौन ने कठोर होकर हम को जाने देना न चाहा, तब यहोवा ने मिस्र देश में मनुष्य से लेकर पशु तक सब के पहिलौठों को मार डाला। इसी कारण पशुओं में से तो जितने अपनी अपनी मां के पहिलौठे नर हैं, उन्हें हम यहोवा के लिये बलि करते हैं; पर अपने सब जेठे पुत्रों को हम बदला देकर छुड़ा लेते हैं।
और यह तुम्हारे हाथों पर एक चिन्ह सा और तुम्हारी भौहों के बीच टीका सा ठहरे, क्योंकि यहोवा हम लोगों को मिस्र से अपने हाथों के बल से निकाल लाया है।

एक साल में बाइबल:
  • यर्मियाह ३७-३९
  • इब्रानियों ३

शुक्रवार, 5 नवंबर 2010

भली सफाई

हमारी पालतु कुतिया डौली को मिट्टी खोदना और उसमें लोटना बहुत पसंद है, जिस के कारण उसके बालों में मिट्टी भर जाती है और हमें उसे हर सप्ताह घर ही में स्नान कराना पड़ता है। लेकिन कभी कभी मिट्टी और कीचड़ उसके बालों में ऐसा जम जाता है कि हमें उसे एक पेशेवर सफाई करने वाले के पास ले जान पड़ता है। डौली को उस सफाई करने वाली स्त्री के पास जाना बिल्कुल पसंद नहीं है, क्योंकि वह हमेशा जल्दबाज़ी में रहती है, गुस्सेवाली है और कठोरता से व्यवहार करती है। उसकी दुकान के पास पहुंचते ही डौली निकल भागने का प्रयास करने लगती है और उसे दुकान के दरवाज़े से अन्दर ले जाना मुश्किल हो जाता है।

पिछले साल हमने निर्णय लिया कि हम किसी दूसरे सफाई करने वाले के पास डौली को ले जाकर देखते हैं और हमने पाया कि डौली चाहे इस बदलाव से आनन्दित तो नहीं थी, कुछ हद तक उसका प्रतिरोध फिर भी था, लेकिन वह पहले वाले के पास जाने की तरह दिक्कत भी नहीं देती थी। इसका कारण था कि नई सफाई करने वाली को उसकी गन्दगी निकलने के लिये डौली को कुछ कष्ट अवश्य देना पड़ता था, लेकिन इस प्रक्रिया में वह डौली से नरमी और प्रेम से व्यवहार करती थी।

जब पाप और गन्दगी हमारे हृदय में जमा हो जाती है, तो हमें भी सफाई की आवश्यक्ता होती है। भजनकार राजा दाऊद की तरह हमें भी परमेश्वर से आग्रह करना चाहिये कि वह हमारे मन और हृदय को जांचे और हमारे बुरे विचारों, रवैये और मार्गों को प्रगट करे (भजन १३९:२३, २४)। जब हमारी अन्तःस्थिति खुलेगी तो हमें कष्ट तो होगा, लेकिन उस सफाई और कष्ट में भी हमारे परमेश्वर का व्यवहार सदा प्रेम और नरमी का रहता है "देख, शान्ति ही के लिये मुझे बड़ी कडुआहट मिली; परन्तु तू ने स्नेह करके मुझे विनाश के गड़हे से निकाला है, क्योंकि मेरे सब पापों को तू ने अपनी पीठ के पीछे फेंक दिया है" (यशायाह ३८:१७)। इसलिये हम बिना भय के उसके पास आ सकते हैं।

परमेश्वर द्वारा हमारा जांचा जाना और साफ किया जाना, चाहे कुछ कष्टदायक हो, लेकिन हमारे भले के लिये यह आवश्यक है, और अनिवार्य है "उस से पहिले कि मैं दु:खित हुआ, मैं भटकता था परन्तु अब मैं तेरे वचन को मानता हूं; मुझे जो दु:ख हुआ वह मेरे लिये भला ही हुआ है, जिस से मैं तेरी विधियों को सीख सकूं" (भजन ११९:६७, ७१)।


पश्चताप का दर्द चंगाई का आनन्द देता है।

हे यहोवा, मुझ को जांच और परख; मेरे मन और हृदय को परख। क्योंकि तेरी करूणा तो मेरी आंखों के साम्हने है, और मैं तेरे सत्य मार्ग पर चलता रहा हूं। - भजन २६:२, ३


बाइबल पाठ: भजन १३९:१-१०, २३, २४

हे यहोवा, तू ने मुझे जांच कर जान लिया है।।
तू मेरा उठना बैठना जानता है, और मेरे विचारों को दूर ही से समझ लेता है।
मेरे चलने और लेटने की तू भली भांति छानबीन करता है, और मेरी पूरी चालचलन का भेद जानता है।
हे यहोवा, मेरे मुंह में ऐसी कोई बात नहीं जिसे तू पूरी रीति से न जानता हो।
तू ने मुझे आगे पीछे घेर रखा है, और अपना हाथ मुझ पर रखे रहता है।
यह ज्ञान मेरे लिये बहुत कठिन है यह गम्भीर और मेरी समझ से बाहर है।
मैं तेरे आत्मा से भाग कर किधर जाऊं? वा तेरे साम्हने से किधर भागूं?
यदि मैं आकाश पर चढूं, तो तू वहां है! यदि मैं अपना बिछौना अधोलोक में बिछाऊं तो वहां भी तू है!
यदि मैं भोर की किरणों पर चढ़ कर समुद्र के पार जा बसूं,
तो वहां भी तू अपने हाथ से मेरी अगुवाई करेगा, और अपने दहिने हाथ से मुझे पकड़े रहेगा।
हे ईश्वर, मुझे जांच कर जान ले! मुझे परख कर मेरी चिन्ताओं को जान ले!
और देख कि मुझ में कोई बुरी चाल है कि नहीं, और अनन्त के मार्ग में मेरी अगुवाई कर!

एक साल में बाइबल:
  • यर्मियाह ३४-३६
  • इब्रानियों २

गुरुवार, 4 नवंबर 2010

बीज बोइये और फसल काटिये

मैंने एक छोटी कहानी पढ़ी - एक आदमी बीजों की दुकान में बीज देख रहा था, उसे अचानक विचित्र दृश्य दिखाई दिया, वहां परमेश्वर बीज बेचने वाला बनकर खड़ा था। वह आदमी तुरंत परमेश्वर के पास गया और उससे पूछा "आप क्या बेच रहे हैं?" परमेश्वर ने पलट कर पूछा "आप क्या चाहते हैं; आपके दिल की क्या इच्छा है?" आदमी ने उतर दिया "मैं केवल अपने लिये ही नहीं, सारे संसार के लिये खुशी, शांति और भय से मुक्ति चाहता हूँ।" परमेश्वर मुस्कुराया और बोला, "मैं बीज बेचता हूँ, फल नहीं!"

परमेश्वर के वचन, बाइबल में पौलुस ने जीवन में परमेश्वर का आदर और आज्ञाकारिता वाले व्यवहार रूपी बीज बोने के महत्व पर ज़ोर दिया, "क्‍योंकि मनुष्य जो कुछ बोता है, वही काटेगा" (गलतियों ६:७)। यदि परमेश्वर की आशीशों के फल अनुभव करने हैं तो हमें अपना कर्तव्य भी निभाना होगा; उसके बिना यह सम्भव नहीं होगा।

इस कर्तव्य के निर्वाह में उन लोगों के उदाहरण का अनुसरण करना सहायक होगा जो अपने जीवनों में अच्छे बीज बोते रहे हैं। लेखक सैमुएल शूमेकर का कहना है कि अच्छा उदाहरण या तो हमें वैसा ही करने के लिये प्रेरित कर सकता है, यह हमें यह कहने के लिये बाध्य कर सकता है कि "हां, वह व्यक्ति ऐसा है। वह मेरी तरह गुस्से या अधीरता या चिंता से विचिलित नहीं होता। उसके स्वभाव में आनन्द है।" शूमेकर ने आगे कहा "शायद हम यह भूल जाते हैं कि उस व्यक्ति को मन की ऐसी शांति पाने के लिये बहुत संघर्ष करना पड़ा होगा, और जैसे संघर्ष कर के वह विजयी हुआ, हम भी वैसा ही संघर्ष करके विजयी हो सकते हैं।"

मसीही विश्वासी के लिये यह संघर्ष और आसान हो जाता है क्योंकि प्रभु यीशु ने अपने अनुयायीयों से वायदा किया "मैं तुम्हें शान्‍ति दिए जाता हूं, अपनी शान्‍ति तुम्हें देता हूं; जैसे संसार देता है, मैं तुम्हें नहीं देता: तुम्हारा मन न घबराए और न डरे" (यूहन्ना १४:२७)। संसार की हर परिस्थिति में मसीही विश्वासी के लिये शांति का स्रोत प्रभु यीशु है "मैं ने ये बातें तुम से इसलिये कही हैं, कि तुम्हें मुझ में शान्‍ति मिले। संसार में तुम्हें क्‍लेश होता है, परन्‍तु ढाढ़स बांधो, मैं ने संसार को जीत लिया है" (यूहन्ना १६:३३)।

क्या आप अपने आप से, अपने हालात से, अपने मन और जीवन की अशांति से परेशान हैं? प्रभु यीशु के पास आइये, समस्त संसार के लिये उसका खुला निमंत्रण है "हे सब परिश्रम करने वालों और बोझ से दबे लोगों, मेरे पास आओ; मैं तुम्हें विश्राम दूंगा। मेरा जूआ अपने ऊपर उठा लो, और मुझ से सीखो, क्‍योंकि मैं नम्र और मन में दीन हूं: और तुम अपने मन में विश्राम पाओगे" (मत्ती ११: २८, २९)। आज ही नये व्यवहार और नये जीवन के बीज बोना आरंभ कीजिए, परमेश्वर का आत्मा उन बीजों के फल आपके जीवन में उत्पन्न करेगा। - जोनी योडर


जो बीज हम आज बोएंगे, कल मिलने वाले फल उन्ही से निर्धारित होंगे।

...क्‍योंकि मनुष्य जो कुछ बोता है, वही काटेगा। - गलतियों ६:७


बाइबल पाठ: गलतियों ६:७-१०

धोखा न खाओ, परमेश्वर ठट्ठों में नहीं उड़ाया जाता, क्‍योंकि मनुष्य जो कुछ बोता है, वही काटेगा।
क्‍योंकि जो अपने शरीर के लिये बोता है, वह शरीर के द्वारा विनाश की कटनी काटेगा; और जो आत्मा के लिये बोता है, वह आत्मा के द्वारा अनन्‍त जीवन की कटनी काटेगा।
हम भले काम करने में हियाव न छोड़े, क्‍योंकि यदि हम ढीले न हों, तो ठीक समय पर कटनी काटेंगे।
इसलिये जहां तक अवसर मिले हम सब के साथ भलाई करें; विशेष करके विश्वासी भाइयों के साथ।

एक साल में बाइबल:
  • यर्मियाह ३२, ३३
  • इब्रानियों १

बुधवार, 3 नवंबर 2010

भय से सहायता

विभिन्न लोगों के लिये, भय विभिन्न अर्थ रखता है। पेशावर गोल्फ खिलाड़ी पैडरैग हैरिंगटन के लिये, भय प्रेरणा का कारण है जो उसे अपना सर्वोतम प्रदर्शन करने को उकसाता है। सन २००८ में, जब हैरिंगटन ने दो बड़ी प्रतियोगिताएं जीतीं, British Open और PGA Championship, तब उसने बताया " हां, भय मेरे जीवन का एक मुख्य भाग है। यद्यपि मैं कहना चाहुंगा कि मेरे पास विश्वास और धैर्य है तथा मैं शांत रहता हूँ, लेकिन वास्तविकता यह नहीं है। भय ही है जो मुझे आगे धकेलता है, भय ही है जो मुझे व्ययाम करने और अभ्यास करने को उकसाता है। मैं भय का उपयोग करके ही आगे बढ़ पाता हूँ।"

हो सकता है कि हैरिंगटन का यह भय असफलता का भय हो , या फिर अपने वर्चस्व को खोने का। उस भय का आधार जो भी हो, हैरिंगटन ने उसे अपने व्यवसायिक जीवन के लिये फायदेमन्द बना लिया है।

मसीही विश्वासी भी भय द्वारा सहायता पा सकते हैं। परमेश्वर का वचन बाइबल हमें चिताती है कि हम परमेश्वर के प्रति श्रद्धापूर्ण भय में जीवन व्यतीत करें। यह भय वह भय है जो सब प्रकार के भय से शेष्ट है। परमेश्वर का भय हमें उसके अनाज्ञाकारी होने या उसके मार्गों के विरोध में चलने के प्रति सचेत करता है। इस भय का अर्थ है हमारे महान परमेश्वर के प्रति आदर और श्रद्धा रखना, उसकी सिद्ध इच्छा की पूर्ति को समर्पित रहना और उसके ज्ञान और समझ के खोजी रहना और उनके अनुसार अपना जीवन चलाना। इसी कारण नीतिवचन ९:१० में लिखा है "यहोवा का भय मानना बुद्धि का आरम्भ है, और परमपवित्र ईश्वर को जानना ही समझ है।"

परमेश्वर के सही भय में रहकर हम इस अनिश्चित संसार में बुद्धिमानी से रह सकते हैं। - बिल क्राउडर


यदि परमेश्वर के भय में रहोगे तो फिर किसी अन्य भय से कभी भयभीत नहीं रहोगे।

यहोवा का भय मानना बुद्धि का आरम्भ है, और परमपवित्र ईश्वर को जानना ही समझ है। - नीतिवचन ९:१०


बाइबल पाठ: नीतिवचन ९:१-१२

बुद्धि ने अपना घर बनाया और उसके सातों खंभे गढ़े हुए हैं।
उस ने अपने पशु वध करके, अपने दाखमधु में मसाला मिलाया है, और अपनी मेज़ लगाई है।
उस ने अपनी सहेलियां, सब को बुलाने के लिये भेजी हैं; वह नगर के ऊंचे स्थानों की चोटी पर पुकारती है,
जो कोई भोला है वह मुड़कर यहीं आए! और जो निर्बुद्धि है, उस से वह कहती है,
आओ, मेरी रोटी खाओ, और मेरे मसाला मिलाए हुए दाखमधु को पीओ।
भोलों का संग छोड़ो, और जीवित रहो, समझ के मार्ग में सीधे चलो।
जो ठट्ठा करने वाले को शिक्षा देता है, सो अपमानित होता है, और जो दुष्ट जन को डांटता है वह कलंकित होता है।
ठट्ठा करने वाले को न डांट ऐसा न हो कि वह तुझ से बैर रखे, बुद्धिमान को डांट, वह तो तुझ से प्रेम रखेगा।
बुद्धिमान को शिक्षा दे, वह अधिक बुद्धिमान होगा; धर्मी को चिता दे, वह अपनी विद्या बढ़ाएगा।
यहोवा का भय मानना बुद्धि का आरम्भ है, और परमपवित्र ईश्वर को जानना ही समझ है।
मेरे द्वारा तो तेरी आयु बढ़ेगी, और तेरे जीवन के वर्ष अधिक होंगे।
यदि तू बुद्धिमान हो, तो बुद्धि का फल तू ही भोगेगा, और यदि तू ठट्ठा करे, तो दण्ड केवल तू ही भोगेगा।

एक साल में बाइबल:
  • यर्मियाह ३०, ३१
  • फिलेमौन