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मंगलवार, 18 जनवरी 2011

अविश्वास का खतरा

फ्रांस एवं जर्मनी के सन १८७०-७१ में युद्ध के समय एक ग्रहस्थ को अपने घर के निकट दो तोप के गोले मिले जो फटे नहीं थे। उनके खतरे से अन्भिज्ञ, उसने उन्हें उठाकर साफ किया, चमकाया और अपने घर में कमरा गरम करने को आग जलाने के स्थान के ऊपर की ताक पर सजा कर रख लिया। कुछ दिनों पश्चात उसका एक मित्र, जो युद्ध सामग्री का विशेषज्ञ था, उससे मिलने आया और उस ग्रहस्थ ने बड़े गर्व से अपने सजाए हुए उन तोप के गोलों को उसे दिखाया। उस मित्र ने कौतूहलवश उन गोलों की जांच करी और पाया कि वे अभी भी फट सकने के योग्य थे। उसने अपने ग्रहस्थ मित्र से कहा, "इन्हें तुरन्त आग के पास से दूर करो, ये अभी भी उतने ही घातक हैं जितने के अपने निर्माण के दिन थे।" अपने और परिवार के लिये उपस्थित भयानक खतरे से अनभिज्ञ वह ग्रहस्थ, स्वयं द्वारा उत्पन्न बहुत खतरनाक परिस्थिति में, सन्तोष से जी रहा था।

ऐसे ही बहुत से लोग, अपनी अज्ञानता से उत्पन्न इससे भी कहीं अधिक खतरनाक परिस्थिति में जीवन व्यतीत करे जा रहे हैं - नरक में मसीह रहित अनन्तकाल बिताने का खतरा। जान बूझकर अविश्वास के अपने निर्णय से उत्पन्न खतरे को पहचाने बिना, वे अपने ऊपर किसी भी क्षण आने वाले सर्वनाश के प्रति ज़रा भी चिंतित नहीं हैं।

प्रभु यीशु द्वारा मत्ती १३:३६-४३ में कहे गए शब्द, बाइबल में पाई जाने वाली सबसे गंभीर चेतावनियों में से हैं। ये "जीवते परमेश्वर के हाथों में पड़ना भयानक बात है" (इब्रानियों १०:३१) की सच्चाई को व्यक्त करते हैं। प्रभु यीशु ने नरक को भयानक अंधकार और पीड़ा का बाहरी स्थान (मत्ती २२:१३) और अनन्त आग का स्थान (मत्ती १८:८-९) बताया है।

हम प्रभु द्वारा बताए गए अविश्वास के खतरे और भयानक परिणामों को ज़रा भी हलका करके नहीं आंक सकते। प्रभु और उससे मिलने वाले उद्धार की भेंट के प्रति किया गया हमारा व्यक्तिगत निर्णय ही हमारे अनन्त भविष्य को निर्धारित करता है।

आपका निर्णय क्या है? आप अनन्त कहां बिताएंगे? - हेनरी बौश


प्रभु यीशु से उद्धार ग्रहण करने के विष्य में जो हिचकिचता है, वह अनन्त विनाश के खतरे में है।

और जो परमेश्वर को नहीं पहचानते, और हमारे प्रभु यीशु के सुसमाचार को नहीं मानते उन से पलटा लेगा। वे प्रभु के साम्हने से, और उसकी शक्ति के तेज से दूर होकर अनन्‍त विनाश का दण्‍ड पाएंगे। - २ थिस्सलोनिकियों १:८-९

बाइबल पाठ: मत्ती १३:३६-४३

तब वह भीड़ को छोड़ कर घर में आया, और उसके चेलों ने उसके पास आ कर कहा, खेत के जंगली दाने का दृष्‍टान्‍त हमें समझा दे।
उस ने उन को उत्तर दिया, कि अच्‍छे बीज का बोने वाला मनुष्य का पुत्र है।
खेत संसार है, अच्‍छा बीज राज्य के सन्‍तान, और जंगली बीज दुष्‍ट के सन्‍तान हैं।
जिस बैरी ने उन को बोया वह शैतान है; कटनी जगत का अन्‍त है: और काटने वाले स्‍वर्गदूत हैं।
सो जैसे जंगली दाने बटोरे जाते और जलाए जाते हैं वैसा ही जगत के अन्‍त में होगा।
मनुष्य का पुत्र अपने स्‍वर्गदूतों को भेजेगा, और वे उसके राज्य में से सब ठोकर के कारणों को और कुकर्म करने वालों को इकट्ठा करेंगे।
और उन्‍हें आग के कुंड में डालेंगे, वहां रोना और दांत पीसना होगा।
उस समय धर्मी अपने पिता के राज्य में सूर्य की नाई चमकेंगे; जिस के कान हों वह सुन ले।

एक साल में बाइबल:
  • उत्पत्ति ४३-४५
  • मत्ती १२:२४-५०

सोमवार, 17 जनवरी 2011

आता तूफान

मैं अपने मित्र के साथ झील में नाव में था और हम मछली पकड़ रहे थे। अचानक दूर हमने बादलों की गड़गड़ाहट की आवाज़ सुनी। वह आने वाले तूफान की चेतावनी थी। मुझे लगा कि अभी तूफान के आने में देर है, इसलिये मैं ने अपने अपने मित्र की बात पर ध्यान नहीं दिया कि हमें शीघ्र वापस किनारे पहुंच कर घर की ओर चल देना चाहिये। मैं सोच रहा था कि तूफान दिशा बदल कर हम से दूर निकल जाएगा। तभी परिस्थिति अचानक बदल गई, हवा में तेज़ी आ गई और हमारे ऊपर आकाश में बादल भरने लगे। यह देखकर हमने अपनी नाव के इंजन को चालू करने की कोशिश करी परन्तु वह नहीं चला। मेरा मित्र अपनी पूरी शक्ति से नाव खेने लगा और मैं इंजन चालू करने के प्रयास करता रहा। पानी में ऊंची लहरें उठने लगीं और तेज़ बारिश आरंभ हो गई, और तूफान की तेज़ हवा हमारी नाव को पतझड़ के पत्ते की तरह डगमगाने लगी। बड़ी मुशकिल से हम सही सलामत किनारे पहुंच पाए।

इस अनुभव ने मुझे एक बहुमूल्य शिक्षा और बड़ा सन्देश सिखाया - न्याय का दिन आ रहा है! वह दिन कहीं दूर प्रतीत तो हो सकता है, लेकिन वह अचानक ऊपर आ पड़ेगा और उस समय बचाव का कोई मार्ग नहीं रहेगा। जिन बातों पर हम अपनी सुरक्षा के लिये आज भरोसा करते हैं वे ऐन मौके पर मिथ्या सबित हो जाएंगी और हम गंभीर खतरे में पड़ जाएंगे।

जीवन के अन्त और न्याय के लक्षणों को पहिचन कर उनके प्रति जागृत रहने में ही सच्ची बुद्धिमानी है। अपने काम पर निकलने से पहले आज दर्पण में अपने आप को ग़ौर से देखिये और उन चिन्हों को पहिचानने का प्रयास कीजिए। सफेद होते बाल, चेहरे पर आती झुर्रियां, जोड़ों में बढ़ती अकड़ाहट और दुखन, काम करने से सांस का तेज़ हो जाना, कभी कभी चक्कर आ जाना, ये सब उस आने वाले ’तूफान’ के लक्षण हैं जो एक न एक दिन घेर ही लेगा।

इससे पहले कि बहुत देर हो जाए क्यों न मसीह यीशु में अपना शरणस्थान बना लें और सुरक्षित हो जाएं? अपने ’इंजन’ और अपनी ’नाव खेने’ की शक्ति पर भरोसा न रखें, ये न जाने कब धोखा दे जाएं। - एम. आर. डी हॉन


जब तक हम मृत्यु और मृत्यु के पश्चात के लिये तैयार न हों, हम जीने के लिये भी तैयार नहीं हैं।

...मनुष्यों के लिये एक बार मरना और उसके बाद न्याय का होना नियुक्त है। - इब्रानियों ९:२७


बाइबल पाठ: नीतिवचन २९:१-६

जो बार बार डांटे जाने पर भी हठ करता है, वह अचानक नाश हो जाएगा और उसका कोई भी उपाय काम न आएगा।
जब धर्मी लोग शिरोमणि होते हैं, तब प्रजा आनन्दित होती है; परन्तु जब दुष्ट प्रभुता करता है तब प्रजा हाथ मारती है।
जो पुरूष बुद्धि से प्रीति रखता है, अपने पिता को आनन्दित करता है; परन्तु वेश्याओं की संगति करने वाला धन को उड़ा देता है।
राजा न्याय से देश को स्थिर करता है, परन्तु जो बहुत घूस लेता है उसको उलट देता है।
जो पुरूष किसी से चिकनी चुपड़ी बातें करता है, वह उसके पैरों के लिये जाल लगाता है।
बुरे मनुष्य का अपराध फन्दा होता है, परन्तु धर्मी आनन्दित हो कर जयजयकार करता है।

एक साल में बाइबल:
  • उत्पत्ति ४१-४२
  • मत्ती १२:१-२३

रविवार, 16 जनवरी 2011

अव्श्यंभावी

इटली में स्थित पीसा की झुकती मीनार का गिर जाना तय है। वैज्ञानिकों का कहना है कि १७९ फुट उंची यह मीनार हर साल अधिक और अधिक झुकती जा रही है और अन्ततः इतनी अधिक झुक जाएगी कि वह निकट स्थित उसी रेस्टोरेन्ट पर जा गिरेगी जहां बैठ कर अब वैज्ञानिक उसके संबंध में अपनी शोध के परिणामों पर विचार करते हैं। पीसा शब्द का अर्थ है ’दलदली भूमी’ और इससे पता चलता है कि क्यों अपने निर्माण के पूरा होने से पहले ही वह मीनार झुकना आरंभ हो गई थी।

हम यह तो जानते हैं कि कुछ वस्तुएं, जैसे पीसा की झुकती मीनार का गिर जाना अव्श्यंभावी है, लेकिन उन का क्या जिन्हें हम स्थिरता और अटलता की मिसाल मानते हैं, जैसे अमेरिका का गोल्डेन गेट पुल, मिस्त्र के विशाल पिरामिड, भूमध्य सागर स्थित जिब्रॉलटर की चट्टान और भारत के हिमालय पर्वत श्रंखला? पीसा की मीनार की तरह ये सब भी ’कमज़ोर नींव’ पर टिके हैं और परमेश्वर द्वारा पूर्वनिर्धारित समय पर टूट कर गिर जाएंगे।

परमेश्वर के उस दिन और तब होने वाले विनाश के बारे में संभवतः हम विशेष चिंतित न हों, क्योंकि हमें लगता है कि उस न्याय के दिन के आने से पूर्व ही हम इस पृथ्वी से कूच कर चुके होंगे। परन्तु परमेश्वर के न्याय का सामना तो प्रत्येक को करना ही होगा, उस दिन के आने पर चाहे वे जीवित हों अथवा मृत्युओपरांत।

पतरस की प्रतिक्रिया, इस अव्श्यंभावी विनाश के बारे में जानने के बाद, लापरवाही की नहीं थी। उसने इस बात से प्रेरित होकर एक ऐसे समाज के बारे में सोचा जो अनन्त काल तक न्याय और धार्मिकता की नींव पर स्थिर बना रहेगा, जब ये सब वस्तुएं नाश हो चुकी होंगी। उसने अपना जीवन उस स्थिर चट्टान - प्रभु यीशु मसीह पर अपना जीवन बनाया, जो कभी नहीं टलेगा।

आज आपका दृष्टिकोण आने वाले अव्श्यंभावी न्याय के विष्य में क्या है? आपके जीवन की नींव किस पर है, कहीं किसी अस्थिर बात अथवा विचार पर तो नहीं? - मार्ट डी हॉन


इस संसार में हमारा मुख्य उद्देश्य आने वाले संसार के बारे में रुचि जागृत करना है।

तो जब कि ये सब वस्‍तुएं, इस रीति से पिघलने वाली हैं, तो तुम्हें पवित्र चाल चलन और भक्ति में कैसे मनुष्य होना चाहिए? - २ पतरस ३:११


बाइबल पाठ: २ पतरस ३:१०-१८

परन्‍तु प्रभु का दिन चोर की नाईं आ जाएगा, उस दिन आकाश बड़ी हड़हड़ाहट के शब्‍द से जाता रहेगा, और तत्‍व बहुत ही तप्‍त होकर पिघल जाएंगे, और पृथ्वी और उस पर के काम जल जाऐंगे।
तो जब कि ये सब वस्‍तुएं, इस रीति से पिघलने वाली हैं, तो तुम्हें पवित्र चाल चलन और भक्ति में कैसे मनुष्य होना चाहिए?
और परमेश्वर के उस दिन की बाट किस रीति से जोहना चाहिए और उसके जल्द आने के लिये कैसा यत्‍न करना चाहिए? जिस के कारण आकाश आग से पिघल जाएंगे, और आकाश के गण बहुत ही तप्‍त होकर गल जाएंगे।
पर उस की प्रतिज्ञा के अनुसार हम एक नए आकाश और नई पृथ्वी की आस देखते हैं जिन में धामिर्कता वास करेगी।
इसलिये, हे प्रियो, जब कि तुम इन बातों की आस देखते हो तो यत्‍न करो कि तुम शान्‍ति से उसके साम्हने निष्‍कलंक और निर्दोष ठहरो।
और हमारे प्रभु के धीरज को उद्धार समझो, जैसे हमारे प्रिय भाई पौलुस न भी उस ज्ञान के अनुसार जो उसे मिला, तुम्हें लिखा है।
वैसे ही उस ने अपनी सब पत्रियों में भी इन बातों की चर्चा की है जिन में कितनी बातें ऐसी है, जिनका समझना कठिन है, और अनपढ़ और चंचल लोग उन के अर्थों को भी पवित्र शास्‍त्र की और बातों की नाईं खींच तान कर अपने ही नाश का कारण बनाते हैं।
इसलिये हे प्रियो तुम लोग पहिले ही से इन बातों को जान कर चौकस रहो, ताकि अधमिर्यों के भ्रम में फंस कर अपनी स्थिरता को हाथ से कहीं खो न दो।
पर हमारे प्रभु, और उद्धारकर्ता यीशु मसीह के अनुग्रह और पहचान में बढ़ते जाओ। उसी की महिमा अब भी हो, और युगानुयुग होती रहे। आमीन।

एक साल में बाइबल:
  • उत्पत्ति ३९-४०
  • मत्ती ११

शनिवार, 15 जनवरी 2011

प्रभु का अप्रत्याशित समय

मेक्सिको देश का एक ज्वालामुखी पर्वत जो सालों से शांत था अचानक ही सक्रीय हो उठा और इतनी ज़ोर से फटा कि संसार का सबसे शक्तिशाली ज्वालामुखी हो गया। ७,३०० फुट ऊंचा एल चिचोन नाम का यह पर्वत सैंकड़ों सालों से निष्क्रीय पड़ा था। १९८० में सेंट हेलेन्स ज्वालामुखी भी अचानक सक्रीय हो उठा और ज्वालामुखी के फटने से उसका बर्फ से ढका सुन्दर शिखर धूल और भाप में बदल गया। इन पर्वतों के समीप रहने वाले लोगों ने इन पर्वतों में कभी इतने उग्र बदलाव की कल्पना भी नहीं की थी।

ये घटनाएं इतिहास में घटने वाली अप्रत्याशित घटनाओं का एक उदाहरण मात्र हैं, जो नूह के समय से होती आ रही हैं, जब परमेश्वर ने दुष्ट संसार का विनाश किया था। जैसे एल चिचोन और सेंट हेलेंस पर्वतों के समीप रहने वाले लोग निश्चिंत थे, नूह के पड़ौसी भी प्रलय से निश्चिंत थे। लेकिन उनमें विद्यमान दुराचार ने उनकी इस निश्चिंतता को और घातक बना दिया था। वे सोचते थे कि उनके भ्रष्ट और दुराचारी जीवन का कोई हिसाब नहीं लेगा, लेकिन परमेश्वर ने उनसे हिसाब मांगा, अप्रत्याशित रूप से नहीं, वरन उन्हे पूरी चेतावनी और सुधरने का अवसर देकर। किंतु उस चेतावनी और अवसर का उस समय के लोगों ने मज़ाक उड़ाया और मौका गंवा दिया।

कभी कभी हम भी ऐसे ही व्यवहार करते हैं कि जैसे हमें विश्वास हो कि परमेश्वर निष्क्रीय हो गया है, तथा हमें कभी कुछ होने वाला नहीं है, लेकिन यह केवल हमारा भ्रम है। तब, जैसे समय नूह के दिनों में पूरा हुआ और दुष्टता का दुषपरिणाम सामने आ गया, अभी वैसे ही संसार के पाप और दुष्टता के विरुद्ध परमेश्वर की चेतावनी और पश्चताप का अवसर है। प्रभु यीशु ने वायदा किया है कि वह एक दिन अचानक ही आ जाएगा और तब यह अवसर समाप्त हो जाएगा। जैसे नूह के समय में लोगों ने चेतावनी और अवसर का ठठा किया था, आज भी संसार प्रभु की चेतावनी, पश्चाताप के अवसर और प्रभु के दूसरे आगमन का ठठा करते हैं। लेकिन ऐसों को अप्रत्याशित रीति से प्रभु के न्याय का सामना करना पड़ेगा।

यह हमारे ऊपर है कि हम प्रभु और प्रभु की चेतावनी को कितनी गंभीरता से लेते हैं तथा जब आकस्मत उसका दूसरा आगमन हो तब हम अपने पाप में पाए जाते हैं अथवा पापों से पश्चाताप और प्रभु में विश्वास द्वारा प्रभु के साथ हो जाने वालों में। - मार्ट डी हॉन


न्याय में देर हो सकती है, परन्तु न्याय निश्चित है।

और यहोवा ने देखा, कि मनुष्यों की बुराई पृथ्वी पर बढ़ गई है, और उनके मन के विचार में जो कुछ उत्पन्न होता है सो निरन्तर बुरा ही होता है। तब यहोवा ने सोचा, कि मैं मनुष्य को जिसकी मैं ने सृष्टि की है पृथ्वी के ऊपर से मिटा दूंगा क्योंकि मैं उनके बनाने से पछताता हूं। - उत्पत्ति ६:५, ७

बाइबल पाठ: मत्ती २४:३४-४४

मैं तुम से सच कहता हूं, कि जब तक ये सब बातें पूरी न हो लें, तब तक यह पीढ़ी जाती न रहेगी।
आकाश और पृथ्वी टल जाएंगे, परन्‍तु मेरी बातें कभी न टलेंगी।
उस दिन और उस घड़ी के विषय में कोई नहीं जानता, न स्‍वर्ग के दूत, और न पुत्र, परन्‍तु केवल पिता।
जैसे नूह के दिन थे, वैसा ही मनुष्य के पुत्र का आना भी होगा।
क्‍योंकि जैसे जल-प्रलय से पहिले के दिनों में, जिस दिन तक कि नूह जहाज पर न चढ़ा, उस दिन तक लोग खाते-पीते थे, और उन में ब्याह शादी होती थी।
और जब तक जल-प्रलय आकर उन सब को बहा न ले गया, तब तक उन को कुछ भी मालूम न पड़ा; वैसे ही मनुष्य के पुत्र का आना भी होगा।
उस समय दो जन खेत में होंगे, एक ले लिया जाएगा और दूसरा छोड़ दिया जाएगा।
दो स्‍त्रियां चक्की पीसती रहेंगी, एक ले ली जाएगी, और दूसरी छोड़ दी जाएगी।
इसलिये जागते रहो, क्‍योंकि तुम नहीं जानते कि तुम्हारा प्रभु किस दिन आएगा।
परन्‍तु यह जान लो कि यदि घर का स्‍वामी जानता होता कि चोर किस पहर आएगा, तो जागता रहता और अपने घर में सेंध लगने न देता।
इसलिये तुम भी तैयार रहो, क्‍योंकि जिस घड़ी के विषय में तुम सोचते भी नहीं हो, उसी घड़ी मनुष्य का पुत्र आ जाएगा।

एक साल में बाइबल:
  • उत्पत्ति ३६-३८
  • मत्ती १०:२१-४२

शुक्रवार, 14 जनवरी 2011

झूठ का धोखा

टेक्सस प्रदेश का एक कॉलेज का छात्र स्थानीय नायक बन गया जब उसके विषय में लोगों को पता चला कि उसने एक महिला को तीन आक्रमणकारियों से बचाया। लेकिन कुछ समय पश्चात सारे देश में उसके नाम की दुषचर्चा हो गई जब ज्ञात हुआ कि उसकी यह कहानी झूठी थी। उस लज्जित छात्र को मानना पड़ा कि, जैसे उसने पहले दावा किया था, उसने किसी महिला की रक्षा करने के लिये कोई लड़ाई नहीं करी, वरन उसके शरीर पर आए चोट के निशान उसकी किसी से अपनी व्यक्तिगत लड़ाई के कारण थे।

इस छात्र को मिली क्षणिक ख्याति और फिर उससे भी अधिक मिली लज्जा, राजा सुलेमान द्वारा नीतिवचन में कही गई बात का उदाहरण है कि झूठ की उम्र थोड़ी ही होती है। शर्म छिपाने के लिये बोला गया झूठ, और भी अधिक शर्म का कारण बन जाता है। सत्य को न बताना, उस अस्त्य के परिणामों को सामने आने में कुछ समय तो देता है परन्तु साथ ही झूठ बोलने वाले को और भी बुरे झूठ और धोखे के जाल में फंसा भी देता है।

सत्य तो अनततः उजागर हो ही जाता है, नीतिवचन १२ हमें बताता है कि ऐसा क्यों होता है। परमेश्वर झूठ से घृणा करता है (पद २२) और झूठ को हिंसा का कारण मानता है (पद १८)। इस कारण झूठ ज्यादा समय तक बना नहीं रहता (पद १९)। झूठ बुरी युक्ति करने वाले लोगों की कार्यविधि है (पद २०)।

हम परमेश्वर के वचन और उस लज्जित छात्र के अनुभव से शिक्षा ले सकते हैं कि झूठ, किसी परिस्थिति से बच निकलने का आसान तरीका तो प्रतीत हो सकता है, लेकिन वह किसी भी परिस्थिति से बचाता नहीं है, वरन और बुरा फंसा देता है। - मार्ट डी हॉन


झूठ, किसी परिस्थिति से बचने के लिये, कायरों का प्रयास है।

सच्चाई सदा बनी रहेगी, परन्तु झूठ पल ही भर का होता है। - नीतिवचन १२:१९

बाइबल पाठ: नीतिवचन १२:१७-२२

जो सच बोलता है, वह धर्म प्रगट करता है, परन्तु जो झूठी साक्षी देता, वह छल प्रगट करता है।
ऐसे लोग हैं जिनका बिना सोच विचार का बोलना तलवार की नाई चुभता है, परन्तु बुद्धिमान के बोलने से लोग चंगे होते हैं।
सच्चाई सदा बनी रहेगी, परन्तु झूठ पल ही भर का होता है।
बुरी युक्ति करने वालों के मन में छल रहता है, परन्तु मेल की युक्ति करने वालों को आनन्द होता है।
धर्मी को हानि नहीं होती है, परन्तु दुष्ट लोग सारी विपत्ति में डूब जाते हैं।
झूठों से यहोवा को घृणा आती है परन्तु जो विश्वास से काम करते हैं, उन से वह प्रसन्न होता है।

एक साल में बाइबल:
  • उत्पत्ति ३३-३५
  • मत्ती १०:१-२०

गुरुवार, 13 जनवरी 2011

प्राकृतिक स्वभाव

कई साल पहले हमने एक रैकून (अमेरिका में पाया जाने वाला बड़ी सी गिलहरी जैसा जानवर) को अपने घर में पालतू पशु बनाया और उसका नाम जैसन रखा। वह घंटों हमारे पालतु कुत्ते से, जो नम्र और शांत स्वभाव का था, लड़ता रहता और उसे तंग करता रहता था। जैसन के व्यवहार का बिलकुल भरोसा नहीं किया जा सकता था। एक मिनिट वह हमारी गोदी में आकर लेट जाता तो दूसरे ही मिनिट वह खतरनाक शरारतें करने लगता। वह कबूतरों के अंडे खा जाता, कूड़ेदान को उलट-पुलट कर देता, फूलों की क्यारीयों को तहस-नहस कर देता; उसके यह विनाशकारी कार्य उसके प्राकृतिक स्वभाव के अनुसार थे। जैसन को चाहे कैसा भी पालतु रखने का प्रयास करो, उसका प्राकृतिक स्वभाव उसपर हावी हो ही जाता था।

जैसन के व्यवहार से मुझे मसीहियों में भी विद्यमान उनका पुराना मनुष्यत्व स्मरण आता है, चाहे अब पवित्र आत्मा उन में वास करता है। पौलुस इसे ’शरीर, जिसमें कोई अच्छी वस्तु वास नहीं करती’ (रोमियों ७:१८) कह कर संबोधित करता है। इस ’शरीर’ के स्वभाव को दबाया जा सकता है, नियंत्रित किया जा सकता है, लेकिन यह हमेशा अपनी मनमानी करने के अवसर की ताक में रहता है। यदि हम अपने आप को प्रतिदिन और प्रतिपल नियंत्रित रहने के लिये प्रभु के समर्पित नहीं रखते, तो मौका पाते ही यह ’शरीर’ अपना विनाशकारी, विलासी और स्वार्थी स्वभाव हम में दिखाने लग जाता है।

यद्यपि हम मसीह में एक नई सृष्टि हैं, तो भी आत्मिक जीवन में नए जन्में शिशु से व्यस्क होने तक हमें भी कई चरणों से होकर मसीही परिपक्वता तक पहुंचना होता है। इन चरणों में ’शारीर’ को अपना पुराना स्वभाव दिखाने के कई अवसर मिल सकते हैं और मिलते हैं। ऐसे में हम में जो पाप करने की क्षमता विद्यमामन रहती है, हमें उसे अपने पर हावी नहीं होने देना चाहिये। इसका एक ही उपाय है, परमेश्वर का आत्मा जो मसीह से जुड़ने के बाद हम में निवास करता है, हम उसके आधीन होकर उसी के चलाए चलें। परमेश्वर के वचन का पालन करके और उसके आत्मा के आधीन बने रहकर ही हम अपने ’शरीर’ के प्राकृतिक स्वभाव पर विजयी हो सकते हैं। - मार्ट डी हॉन


आत्मसंयम का भेद है अपना नियंत्रण परमेश्वर के आत्मा के हाथों में दे देना।

क्‍योंकि मैं जानता हूं, कि मुझ में अर्थात मेरे शरीर में कोई अच्‍छी वस्‍तु वास नहीं करती, इच्‍छा तो मुझ में है, परन्‍तु भले काम मुझ से बन नहीं पड़ते। - रोमियों ७:१८

बाइबल पाठ: गलतियों ५:१६-२६

पर मैं कहता हूं, आत्मा के अनुसार चलो, तो तुम शरीर की लालसा किसी रीति से पूरी न करोगे।
क्‍योंकि शरीर आत्मा के विरोध में लालसा करता है, और ये एक दूसरे के विरोधी हैं, इसलिये कि जो तुम करना चाहते हो वह न करने पाओ।
और यदि तुम आत्मा के चलाए चलते हो तो व्यवस्था के आधीन न रहे।
शरीर के काम तो प्रगट हैं, अर्थात व्यभिचार, गन्‍दे काम, लुचपन।
मूर्ति पूजा, टोना, बैर, झगड़ा, ईर्ष्या, क्रोध, विरोध, फूट, विधर्म।
डाह, मतवालापन, लीलाक्रीड़ा, और इन के ऐसे और और काम हैं, इन के विषय में मैं तुम को पहिले से कह देता हूं जैसा पहिले कह भी चुका हूं, कि ऐसे ऐसे काम करने वाले परमेश्वर के राज्य के वारिस न होंगे।
पर आत्मा का फल प्रेम, आनन्‍द, मेल, धीरज,
और कृपा, भालाई, विश्वास, नम्रता, और संयम हैं; ऐसे ऐसे कामों के विरोध में कोई व्यवस्था नहीं।
और जो मसीह यीशु के हैं, उन्‍होंने शरीर को उस की लालसाओं और अभिलाषाओं समेत क्रूस पर चढ़ा दिया है।
यदि हम आत्मा के द्वारा जीवित हैं, तो आत्मा के अनुसार चलें भी।
हम घमण्‍डी होकर न एक दूसरे को छेड़ें, और न एक दूसरे से डाह करें।

एक साल में बाइबल:
  • उत्पत्ति ३१-३२
  • मत्ती ९:१८-३८

बुधवार, 12 जनवरी 2011

आप बच नहीं सकते

डेटरोइट शहर में स्थित एक हाई स्कूल के कुछ छात्र, शहर में हो रहे रॉक संगीत के उत्सव में जाने के लिये बिना अनुमति लिये कक्षा से अनुपस्थित हुए। उन्हें लगा कि उनकी यह बात किसी को पता नहीं चलेगी और वे दण्ड से बच जाएंगे। लेकिन अगले दिन के अखबार में रॉक संगीत उत्सव की जो तसवीरें छपीं उनमें वे छात्र स्पष्ट दिखाई दे रहे थे। उनका वह चोरी छिपे जाना सब के सामने प्रगट हो गया और स्कूल के उप-प्रधानाध्यापक ने उन्हें बुला कर उनसे सफाई मांगी।

बाइबल बताती है कि हम अपने दुष्कर्म छुपा नहीं सकते। चाहे थोड़े समय के लिये हम उन्हें ढांप दें या कुछ और लंबे समय के लिये उनके परिणामों से बचते रहें, लेकिन एक समय वह आएगा जब हमें उनका सामना करना ही पड़ेगा, चाहे इस जीवन में नहीं तो इस जीवन के बाद। पौलुस ने लिखा "धोखा न खाओ, परमेश्वर ठट्ठों में नहीं उड़ाया जाता, क्‍योंकि मनुष्य जो कुछ बोता है, वही काटेगा।" (गलतियों ६:७)

जब कभी हमारे जीवन में कोई ऐसा पाप आए जिसे हम छुपा कर रखना चाहें, तो स्मरण रखें कि बेहतर होगा कि उसे छुपाने की बजाए उसे मान लें और छोड़ दें। या कभी कुछ ऐसा करने का प्रलोभन हो जो हम जानते हों कि गलत है, और हम सोचने लगें कि हम पकड़े नहीं जाएंगे, बात छिपी ही रहेगी, तो निश्चय कर लें कि ऐसी किसी बात की तरफ एक कदम भी नहीं बढ़ाएंगे, क्योंकि कुछ छुपा नहीं है जो प्रकट नहीं किया जाएगा।

चाहे उन छात्रों के समान हमारी तस्वीर अखबारों में न छपे, परन्तु हमारे काम कभी छिपे नहीं रहेंगे, हम उनकी जवाबदेही से बच नहीं सकते। - डेव एगनर


पाप का बीज चाहे छिपा कर बोया जाए, परन्तु उसकी फसल को छिपाया नहीं जा सकता।

क्योंकि हमारे अपराध तेरे साम्हने बहुत हुए हैं, हमारे पाप हमारे विरूद्ध साक्षी दे रहे हैं; हमारे अपराध हमारे संग हैं और हम अपने अधर्म के काम जानते हैं: - यशायाह ५९:१२


बाइबल पाठ: गलतियों ६:१-९

हे भाइयों, यदि कोई मनुष्य किसी अपराध में पकड़ा जाए, तो तुम जो आत्मिक हो, नम्रता के साथ ऐसे को संभालो, और अपनी भी चौकसी रखो, कि तुम भी परीक्षा में न पड़ो।
तुम एक दूसरे के भार उठाओ, और इस प्रकार मसीह की व्यवस्था को पूरी करो।
क्‍योंकि यदि कोई कुछ न होने पर भी अपने आप को कुछ समझता है, तो अपने आप को धोखा देता है।
पर हर एक अपने ही काम को जांच ले, और तब दूसरे के विषय में नहीं परन्‍तु अपने ही विषय में उसको घमण्‍ड करने का अवसर होगा।
क्‍योंकि हर एक व्यक्ति अपना ही बोझ उठाएगा।
जो वचन की शिक्षा पाता है, वह सब अच्‍छी वस्‍तुओं में सिखाने वाले को भागी करे।
धोखा न खाओ, परमेश्वर ठट्ठों में नहीं उड़ाया जाता, क्‍योंकि मनुष्य जो कुछ बोता है, वही काटेगा।
क्‍योंकि जो अपने शरीर के लिये बोता है, वह शरीर के द्वारा विनाश की कटनी काटेगा, और जो आत्मा के लिये बोता है, वह आत्मा के द्वारा अनन्‍त जीवन की कटनी काटेगा।
हम भले काम करने में हियाव न छोड़े, क्‍योंकि यदि हम ढीले न हों, तो ठीक समय पर कटनी काटेंगे।

एक साल में बाइबल:
  • उत्पत्ति २९-३०
  • मत्ती ९:१-१७