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शुक्रवार, 4 फ़रवरी 2011

ईमानदारी की ज़िम्मेवारी

काश यह संभव होता कि मैं सच्चे मन से कह पाता कि मैंने सदा अपना कहा हर वचन सच्चाई से निभाया है। मैं चाहता हूं कि मैं यह दावा कर सकूं कि मैंने अपने जीवन में और कुछ चाहे किया हो या न किया हो, परन्तु अपने वचन का पालन अवश्य किया है। लेकिन सच्चाई यही है कि मैं यह दावा नहीं कर सकता। न केवल मैंने उन को दुख दिया है जिन्होंने मुझ पर भरोसा किया, लेकिन अपने वायदे न निभा के अपने परमेश्वर को भी दुखी किया है।

परमेश्वर चाहता है कि मैं जो करने का वायदा करता हूं, वह करूं भी। भजन १५ इस विष्य में सन्देह का कोई स्थान नहीं छोड़ता। इस भजन में लिखा है कि परमेश्वर जिस मनुष्य के साथ रहना चाहता है उसका चरित्र और व्यवहार कैसा होता है: वह अपने चाल चलन में खरा, पूरे मन से ईमानदार, दूसरों के विष्य में झूठा नहीं, और जो कहे उसको सम्पूर्णतः निभाने वाला - चाहे इसके लिये उसे पीड़ा अथवा हानि ही क्यों न उठानी पड़े।

परमेश्वर ने अपने बड़े प्रेम में होकर मेरे पाप क्षमा किये हैं, और आज तक मेरे प्रति अपने प्रत्येक वायदे में पूर्णतः ईमानदार और विश्वासयोग्य रहा है। समय और परिस्थिति के कारण कभी उसे अपने वायदे टालने या बदलने का प्रयास नहीं किया, यहां तक कि मेरे उद्धार के लिये उसने अपने एकलौते पुत्र को भी बलिदान कर दिया।

परमेश्वर ने पाप को दण्डित करने, लेकिन फिर भी जिस किसी ने भी उस पर विश्वास करके उससे क्षमा मांगी, उसके प्रति दयावन्त होकर उसे क्षमा करने की अपनी वचबध्दता सदा निभाई है, चाहे उस व्यक्ति के पाप कैसे भी जघन्य क्यों न रहे हों, चाहे वह व्यक्ति अपनी दृष्टि में भी क्षमा के योग्य न रहा हो।

क्योंकि मेरा परमेश्वर ईमानदार है और अपने वचन का पूर्णतः पालन करता है, मुझे भी उसका पुत्र और अनुयायी होने के नाते, ऐसा ही जीवन बिताना है। उसमें किये गए अपने विश्वास और उससे मिली पापों की क्षमा को यदि मैं अपने ईमानदार जीवन और खरे चरित्र द्वारा संसार के समक्ष न रखूं, तो मेरा उसका पुत्र और अनुयायी होने का दावा करना व्यर्थ है।

जिसने इतनी दया और करुणा मेरे प्रति दिखाई कि मेरे लिये अपने आप को ही दे दिया उसके प्रति यह मेरी ईमानदारी की ज़िम्मेवरी है। - मार्ट डी हॉन


एक चीज़ है जिसे मसीही विश्वासी देकर भी रख सकता है - अपना वचन।

हे परमेश्वर तेरे तम्बू में कौन रहेगा?...जो शपथ खाकर बदलता नहीं चाहे हानि उठाना पड़े। - भजन १५:१, ४

बाइबल पाठ: भजन १५

हे परमेश्वर तेरे तम्बू में कौन रहेगा? तेरे पवित्र पर्वत पर कौन बसने पाएगा?
वह जो खराई से चलता और धर्म के काम करता है, और हृदय से सच बोलता है;
जो अपनी जीभ से निन्दा नहीं करता, और न अपने मित्र की बुराई करता, और न अपने पड़ोसी की निन्दा सुनता है;
वह जिसकी दृष्टि में निकम्मा मनुष्य तुच्छ है, और जो यहोवा के डरवैयों का आदर करता है, जो शपथ खाकर बदलता नहीं चाहे हानि उठाना पड़े;
जो अपना रूपया ब्याज पर नहीं देता, और निर्दोष की हानि करने के लिये घूस नहीं लेता है। जो कोई ऐसी चाल चलता है वह कभी न डगमगाएगा।

एक साल में बाइबल:
  • निर्गमन ३४-३५ मत्ती
  • २२:२३-४६

गुरुवार, 3 फ़रवरी 2011

सम्पूर्ण्तः विश्वासयोग्य

एक अधेड़ दम्पत्ति अपने शहर से बाहर छुट्टियां बिताने के लिये निकले। उनके नवविवाहित पुत्र और पुत्रवधु ने उनसे वायदा किया कि उनके पीछे वे दोनो उनके घर का ध्यान रखेंगे। उस अधेड़ दम्पत्ति को बाहर गए कुछ ज़्यादा समय नहीं बीता था कि उन्हें अपने घर की चिंता सताने लगी - यदि उनके पुत्र और पुत्रवधु लापरवाह रहे और घर का ध्यान नहीं रखा तो? यदि उन्होंने समय से डाक नहीं देखी और उनके कुछ चैक खो गए तो? यदि बच्चों ने समय से और ठीक से बगीचे की घास नहीं काटी तो पड़ौसी क्या सोचेंगे - आदि आदि कई चिंताएं सारी छुट्टी उनके मन में घर करे रहीं, और वे अपनी छुट्टी का ज़रा भी आनन्द नहीं लेने पाए।

जब वे घर लौटे तो पाया कि उनकी हर चिंता व्यर्थ थी, उनके पुत्र और पुत्रवधु ने अपना वायदा निभाया था और उनके पीछे घर की देखभाल बहुत अच्छे से की थी। तब उन्हें एहसास हुआ कि वे कितने मूर्ख थे और कैसे व्यर्थ ही चिंता करके अपनी सारी छुट्टियां खराब करते रहे।

कितनी ही बार हम मसीही विश्वासी भी परमेश्वर के वायदों पर पूरा भरोसा न करके, अपने जीवन को नाहक चिंताओं में व्यर्थ गंवाते रहते हैं। परमेश्वर अवश्य ही अपना प्रत्येक वायदा पूरा करता है।

यशायाह भविष्यद्वक्ता ने कहा: "घास तो सूख जाती, और फूल मुर्झा जाता है परन्तु हमारे परमेश्वर का वचन सदैव अटल रहेगा।" (यशायाह ४०:८)

जो वायदे परमेश्वर ने अपने बच्चों, अपने विश्वासियों से किये और जिनसे हम विश्वासियों का ढाढ़स बन्धता है, उनमें से कुछ ये हैं:
  • मत डर, क्योंकि मैं तेरे संग हूं, इधर उधर मत ताक, क्योंकि मैं तेरा परमेश्वर हूं; मैं तुझे दृढ़ करूंगा और तेरी सहायता करूंगा, अपने धर्ममय दाहिने हाथ से मैं तुझे सम्हाले रहूंगा। - यशायाह ४१:१०
  • जितने हथियार तेरी हानि के लिये बनाए जाएं, उन में से कोई सफल न होगा, और, जितने लोग मुद्दई होकर तुझ पर नालिश करें उन सभों से तू जीत जाएगा। यहोवा के दासों का यही भाग होगा, और वे मेरे ही कारण धर्मी ठहरेंगे, यहोवा की यही वाणी है। - यशायाह ५४:१७
  • धर्मी पर बहुत सी विपत्तियां पड़ती तो हैं, परन्त यहोवा उसको उन सब से मुक्त करता है। - भजन ३४:१९
  • क्योंकि यहोवा परमेश्वर सूर्य और ढाल है, यहोवा अनुग्रह करेगा, और महिमा देगा; और जो लोग खरी चाल चलते हैं उन से वह कोई अच्छा पदार्थ रख न छोड़ेगा। - भजन ८४:११

जिन्हें व्यर्थ शक करने और घबराए रहने की व्याधि है, वे परमेश्वर के किसी एक वायदे को थाम कर तो देखें कि परमेश्वर कैसा विश्वासयोग्य है। - डेव एगनर


हमारा चिंता करना इस बात का प्रमाण है कि हम अपनी समस्याओं पर अधिक और परमेश्वर के वायदों पर भरोसा कम रखते हैं।

मैं अपनी वाचा न तोडूंगा, और जो मेरे मुंह से निकल चुका है, उसे न बदलूंगा। - भजन ८९:३४


बाइबल पाठ: भजन ८९:३०-३७

यदि उसके वंश के लोग मेरी व्यवस्था को छोड़ें और मेरे नियमों के अनुसार न चलें,
यदि वे मेरी विधियों का उल्लंघन करें, और मेरी आज्ञाओं को न मानें,
तो मैं उनके अपराध का दण्ड सोंटें से, और उनके अधर्म का दण्ड कोड़ों से दूंगा।
परन्तु मैं अपनी करूणा उस पर से न हटाऊंगा, और न सच्चाई त्यागकर झूठा ठहरूंगा।
मैं अपनी वाचा न तोडूंगा, और जो मेरे मुंह से निकल चुका है, उसे न बदलूंगा।
एक बार मैं अपनी पवित्राता की शपथ खा चुका हूं मैं दाऊद को कभी धोखा न दूंगा।
उसका वंश सर्वदा रहेगा, और उसकी राजगद्दी सूर्य की नाईं मेरे सम्मुख ठहरी रहेगी।
वह चन्द्रमा की नाईं, और आकाशमण्डल के विश्वासयोग्य साक्षी की नाईं सदा बना रहेगा।

एक साल में बाइबल:
  • निर्गमन ३१-३३
  • मत्ती २२:१-२२

बुधवार, 2 फ़रवरी 2011

कुछ भी असंभव नहीं

परमेश्वर हमारी प्रत्येक आवश्यक्ता को पूरी कर सकता है। उसके लिये कुछ भी असंभव नहीं है। सारा को यह सत्य सीखना था।

परमेश्वर द्वारा इब्राहीम से उसकी सन्तान के लिये किया गया वायदा उत्पत्ति १७:२१ में लिखा है। इससे अगले अध्याय में, यही वायदा उससे फिर से दोहराया गया जब इब्राहीम अपने डेरे के बाहर परमेश्वर के तीन दूतों से बात कर रहा था। उस समय सारा डेरे के अन्दर इस वार्तालाप को सुन रही थी। उसे अपने बुढ़ापे की अवस्था में पुत्र होने की बात असंभव लगी, "सो सारा मन में हंस कर कहने लगी, मैं तो बूढ़ी हूं, और मेरा पति भी बूढ़ा है, तो क्या मुझे यह सुख होगा? तब यहोवा ने इब्राहीम से कहा, सारा यह कह कर क्यों हंसी, कि क्या मेरे, जो ऐसी बुढिय़ा हो गई हूं, सचमुच एक पुत्र उत्पन्न होगा? क्या यहोवा के लिये कोई काम कठिन है? नियत समय में, अर्थात वसन्त ऋतु में, मैं तेरे पास फिर आऊंगा, और सारा के पुत्र उत्पन्न होगा। " (उत्पत्ति १८:१२-१४)

मसीही विश्वासी होने के नाते हमें भी परमेश्वर की ओर से यही आश्वासन है - "क्या यहोवा के लिये कोई काम कठिन है?" इब्राहिम का परमेश्वर हमारा भी परमेश्वर है और वह सर्वशक्तिमान है। वह सृष्टि का सृष्टिकर्ता है, उसकी सामर्थ से बढ़कर कोई और सामर्थ नहीं है। कोई समस्या उसे विसमित नहीं कर सकती, कोई अवरोध उसे रोक नहीं सकता। हमारा स्वर्गीय पिता प्रत्येक परिस्थिति को नियंत्रित करता है। इस सत्य से हमें कैसा अद्भुत विश्वास और कैसी अद्भुत दिलासा मिलती है।

हमारा सर्वज्ञानी, सर्वव्यापी और सर्वशक्तिमान सृष्टिकर्ता परमेश्वर सार्वभौमिक है और सब कुछ कर सकता है। जब हम अपनी आवश्यक्ताएं, प्रार्थना में अपने स्वर्गीय पिता के सामने रखते हैं, यह सुनिश्चित करते हुए कि वे उसकी इच्छा के अनुरूप हैं, तो उसका आश्वासन हमारे साथ है कि उसका हमारे लिये कुछ भी करना असंभव नहीं है। - रिचर्ड डी हॉन


असंभव के लिये भी परमेश्वर पर भरोसा रखकर ही हम परमेश्वर की सामर्थ को आंक सकते हैं।

क्या यहोवा के लिये कोई काम कठिन है? - उत्पत्ति १८:१४


बाइबल पाठ: उत्पत्ति १८:१-१४

इब्राहीम मम्रे के बांजो के बीच कड़ी धूप के समय तम्बू के द्वार पर बैठा हुआ था, तब यहोवा ने उसे दर्शन दिया:
और उस ने आंख उठाकर दृष्टि की तो क्या देखा, कि तीन पुरूष उसके साम्हने खड़े हैं: जब उस ने उन्हें देखा तब वह उन से भेंट करने के लिये तम्बू के द्वार से दौड़ा, और भूमि पर गिर कर दण्डवत की और कहने लगा,
हे प्रभु, यदि मुझ पर तेरी अनुग्रह की दृष्टि है तो मैं बिनती करता हूं, कि अपने दास के पास से चले न जाना।
मैं थोड़ा सा जल लाता हूं और आप अपने पांव धोकर इस वृक्ष के तले विश्राम करें।
फिर मैं एक टुकड़ा रोटी ले आऊं और उस से आप अपने जीव को तृप्त करें, तब उसके पश्चात्‌ आगे बढें: क्योंकि आप अपने दास के पास इसी लिये पधारे हैं। उन्होंने कहा, जैसा तू कहता है वैसा ही कर।
सो इब्राहीम ने तम्बू में सारा के पास फुर्ती से जाकर कहा, तीन सआ मैदा फुर्ती से गून्ध, और फुलके बना।
फिर इब्राहीम गाय बैल के झुण्ड में दौड़ा, और एक कोमल और अच्छा बछड़ा लेकर अपने सेवक को दिया, और उसने फुर्ती से उसको पकाया।
तब उस ने मक्खन, और दूध, और वह बछड़ा, जो उस ने पकवाया था, लेकर उनके आगे परोस दिया, और आप वृझ के तले उनके पास खड़ा रहा, और वे खाने लगे।
उन्होंने उस से पूछा, तेरी पत्नी सारा कहां है? उस ने कहा, वह तो तम्बू में है।
उस ने कहा मैं वसन्त ऋतु में निश्चय तेरे पास फिर आऊंगा, और तब तेरी पत्नी सारा के एक पुत्र उत्पन्न होगा। और सारा तम्बू के द्वार पर जो इब्राहीम के पीछे था सुन रही थी।
इब्राहीम और सारा दोनो बहुत बूढ़े थे, और सारा का स्त्रीधर्म बन्द हो गया था;
सो सारा मन में हंस कर कहने लगी, मैं तो बूढ़ी हूं, और मेरा पति भी बूढ़ा है, तो क्या मुझे यह सुख होगा?
तब यहोवा ने इब्राहीम से कहा, सारा यह कह कर क्यों हंसी, कि क्या मेरे, जो ऐसी बुढिय़ा हो गई हूं, सचमुच एक पुत्र उत्पन्न होगा?
क्या यहोवा के लिये कोई काम कठिन है? नियत समय में, अर्थात वसन्त ऋतु में, मैं तेरे पास फिर आऊंगा, और सारा के पुत्र उत्पन्न होगा।

एक साल में बाइबल:
  • निर्गमन २९-३०
  • मत्ती २१:२३-४६

मंगलवार, 1 फ़रवरी 2011

आप उस पर सम्पूर्ण भरोसा रख सकते हैं

एक व्यक्ति एक घने जंगल में घूमने के लिये निकला। जंगल इतना घना था कि उस में खो जाना आसान था। जब दिन ढलने लगा तो उस ने सोचा कि अब घर वापस लौट चलना चाहिये। अपने दिशा ज्ञान के अनुसर काफी देर तक चलने के बाद भी जब उसे कोई पहचाना स्थान नहीं दीख पड़ा तो उसने अपना मार्ग जांचने के लिये अपनी जेब से कुतुबनुमा (compass) निकाल कर देखा, उसे तब मालूम पड़ा कि वह अपने अनुमान के अनुसार पूर्व दिशा में नहीं वरन वासतव में पश्चिम की ओर जा रहा था। लेकिन उस व्यक्ति को अपने दिशा ज्ञान पर इतना भरोसा था कि कुतुबनुमा से मिली जानकारी पर उसे भरोसा नहीं हुआ, उसे लगा कि कुतुबनुमा में कोई खराबी होगी। अपने इस विचार के कारण वह खिसियाकर अपने कुतुबनुमा को फेंकने पर ही था कि उसे ध्यान आया कि "मेरे इस कुतुबनुमा ने आज तक कभी मुझे धोखा नहीं दिया है, सदा मुझे सही मार्ग ही दिखाया है, इसलिये मुझे आज भी इसकी मान लेनी चहिये।" अपने उसी कुतुबनुमा की सहायता से वह व्यक्ति अनततः जंगल से बाहर निकल सका और सुरक्षित घर पहुंच सका - क्योंकि उसने अपनी समझ पर भरोसा रखना छोड़कर अपने भरोसेमंद सहायक पर भरोसा किया।

राजा सुलेमान ने अपनी प्रजा इस्त्राएल से परमेश्वर के बारे में कहा कि उसने "...ठीक अपने कथन के अनुसार अपनी प्रजा इस्राएल को विश्राम दिया है, जितनी भलाई की बातें उसने अपने दास मूसा के द्वारा कही थीं, उन में से एक भी बिना पूरी हुए नहीं रही।" - १ राजा ८:५६। परमेश्वर का यह आश्वासन उसके लोगों के लिये आज भी वैसा ही बना हुआ है जैसा राजा सुलेमान के समय में था।

परमेश्वर जो वायदा करता है, उसे पूरा भी करता है। उसके निर्देष सदा सम्पूर्णतया भरोसेमन्द रहते हैं, वह कभी किसी रीति से भी हमें भटकाता नहीं। यदि हम अपनी बुद्धि पर इतना भरोसा करते हैं कि उसके समक्ष हम परमेश्वर के विश्वसनीय वचन पर भरोसा नहीं कर पाते, तो निश्चय हम मुसीबत की ओर अग्रसर हैं और अवश्य ही किसी दिन भयानक विपित्ति में जा पड़ेंगे।

परमेश्वर का वचन आज तक न कभी टला है और न टलेगा - आप उस पर सम्पूर्ण भरोसा रख सकते हैं। - रिचर्ड डी हॉन


बाइबल सदा अपने विश्वासी को सही दिशा ही दिखाती है।

जिस ने ठीक अपने कथन के अनुसार अपनी प्रजा इस्राएल को विश्राम दिया है, जितनी भलाई की बातें उसने अपने दास मूसा के द्वारा कही थीं, उन में से एक भी बिना पूरी हुए नहीं रही। - १ राजा ८:५६


बाइबल पाठ: १ राजा ८:५४-६१

जब सुलैमान यहोवा से यह सब प्रार्थना गिड़गिड़ाहट के साथ कर चुका, तब वह जो घुटने टेके और आकाश की ओर हाथ फैलाए हुए था, सो यहोवा की वेदी के साम्हने से उठा,
और खड़ा हो, समस्त इस्राएली सभा को ऊंचे स्वर से यह कह कर आशीर्वाद दिया, कि धन्य है यहोवा,
जिस ने ठीक अपने कथन के अनुसार अपनी प्रजा इस्राएल को विश्राम दिया है, जितनी भलाई की बातें उसने अपने दास मूसा के द्वारा कही थीं, उन में से एक भी बिना पूरी हुए नहीं रही।
हमारा परमेश्वर यहोवा जैसे हमारे पुरखाओं के संग रहता था, वैसे ही हमारे संग भी रहे, वह हम को त्याग न दे और न हम को छोड़ दे।
वह हमारे मन अपनी ओर ऐसा फिराए रखे, कि हम उसके सब मार्गों पर चला करें, और उसकी आज्ञाएं और विधियां और नियम जिन्हें उसने हमारे पुरखाओं को दिया था, नित्य माना करें।
और मेरी ये बातें जिनकी मैं ने यहोवा के साम्हने बिनती की है, वह दिन और रात हमारे परमेश्वर यहोवा के मन में बनी रहें, और जैसा दिन दिन प्रयोजन हो वैसा ही वह अपने दास का और अपनी प्रजा इस्राएल का भी न्याय किया करे,
और इस से पृथ्वी की सब जातियां यह जान लें, कि यहोवा ही परमेश्वर है, और कोई दूसरा नहीं।
तो तुम्हारा मन हमारे परमेश्वर यहोवा की ओर ऐसी पूरी रीति से लगा रहे, कि आज की नाई उसकी विधियों पर चलते और उसकी आज्ञाएं मानते रहो।

एक साल में बाइबल:
  • निर्गमन २७-२८
  • मत्ती २१:१-२२

सोमवार, 31 जनवरी 2011

विश्वासयोग्य वचनदाता

मान लीजिए कि कोई बहुत धनी व्यक्ति आप को आश्वासन दे कि "मैं ने तुम्हारे लिये २५ लाख रुपये अलग रखे हैं और भविष्य में किसी दिन तुम्हें वे मिल जाएंगे" तो उन रुपयों की प्रतीक्षा में आप अधीर तो हो सकते हैं पर आप वायदा करने वाले व्यक्ति की प्रतिष्ठा के आधार पर जानते और मानते हैं कि रुपये आपको कभी न कभी अवश्य मिलेंगे। किंतु यदि उसी व्यक्ति ने आप से यह कहा होता कि "यदि सब कुछ ठीक ठाक रहा तो भविष्य मे शायद मैं तुम्हें कभी २५ लाख रुपये देने का विचार करुंगा" तो आप को वह रुपये पाने की कोई विशेष आशा नहीं होती, क्योंकि रुपयों का मिलना बहुत सी अनिश्चितताओं पर निर्भर हो जाता।

परमेश्वर के विधान में भी ऐसा ही है। उसकी प्रतिज्ञाएं भी स्वर्गीय समयकाल में पूरी हैं, और क्योंकि हम अभी अधूरा ही जानते हैं, इसलिये हमें उनके पूरा होने का सही समय पता नहीं है। लेकिन यह चिंता का विष्य नहीं है क्योंकि हमें पता है कि परमेश्वर अपना वायदा सदा पूरा करता है। उसके वायदे की कीमत कभी कम नहीं होती क्योंकि उन वायदों का आधार उसके चरित्र का असीम धन है। वह कभी बदलता नहीं, कभी भूलता नहीं। हमें उसके वायदों के पूरे होने में विलम्ब तो प्रतीत हो सकता है, लेकिन हम यह भी जानते हैं कि उसका प्रत्येक वायदा उसके वचन के समान खरा है।

हम में से बहुतों को कभी न कभी यह अनुभव अवश्य हुआ होगा कि किसी बात के लिये हम अपने सभी उपाय और संसाधन आज़्मा कर के निरुपाय हो चुके थे और तभी अचानक अद्भुत रीति से परमेश्वर ने सही समय पर अपनी सही सामर्थ प्रकट करी और हमें उस परिस्थिति से निकाल लिया। वह न धीमा था और न ढीला, सहायता का उसका समय और तरीका है और वह उसी के अन्तर्गत काम करता है।

इसलिये हमें विलम्ब के आभास से हतोसाहित नहीं होना चाहिये। हम बस उसके वायदों को स्मरण करते रहें और वह अपने समय और तरीके से उन्हें पूरा करता रहेगा। वह सम्पूर्ण रीति से विश्वासयोग्य वचनदाता है। - पौल वैन गौर्डर


मसीही विश्वासी का भविष्य परमेश्वर के वचन जैसा ही ज्योतिर्मान है।

और अपनी आशा के अंगीकार को दृढ़ता से थामें रहें, क्‍योंकि जिस ने प्रतिज्ञा किया है, वह सच्‍चा है। - इब्रानियों १०:२३


बाइबल पाठ: इब्रानियों १०:१९-२५
सो हे भाइयो, जब कि हमें यीशु के लोहू के द्वारा उस नए और जीवते मार्ग से पवित्र स्थान में प्रवेश करने का हियाव हो गया है।
जो उस ने परदे अर्थात अपने शरीर में से होकर, हमारे लिये अभिषेक किया है,
और इसलिये कि हमारा ऐसा महान याजक है, जो परमेश्वर के घर का अधिकरी है।
तो आओ हम सच्‍चे मन, और पूरे विश्वास के साथ, और विवेक को दोष दूर करने के लिये ह्रृदय पर छिड़काव लेकर, और देह को शुद्ध जल से धुलवा कर परमेश्वर के समीप जाएं।
और अपनी आशा के अंगीकार को दृढ़ता से थामें रहें, क्‍योंकि जिस ने प्रतिज्ञा किया है, वह सच्‍चा है।
और प्रेम, और भले कामों में उकसाने के लिये एक दूसरे की चिन्‍ता किया करें।
और एक दूसरे के साथ इकट्ठा होना ने छोड़ें, जैसे कि कितनों की रीति है, पर एक दूसरे को समझाते रहें और ज्यों ज्यों उस दिन को निकट आते देखो, त्यों त्यों और भी अधिक यह किया करो।

एक साल में बाइबल:
  • निर्गमन २५-२६
  • मत्ती २०:१७-३४

रविवार, 30 जनवरी 2011

सम्पूर्ण वज़न

मुझे बुज़ुर्ग चाचा औस्कर की प्रथम हवाई यात्रा की कहानी बहुत पसन्द है। उन्हें सदा ही हवाई यात्रा से डर लगता था और वे कभी हवाई जहाज़ पर जाने को तैयार नहीं होते थे। बड़ी मुश्किल से आखिरकर वे हवाई यात्रा के लिये मान गए। यात्रा के बाद उनके मित्रों ने पूछा, "क्यों, क्या हवाई यात्रा में मज़ा आया?" तो चाचा ने उत्तर दिया, "चलो, वैसे तो मैं जैसा सोचता था उतनी बुरी तो नहीं थी, लेकिन मैं यह भी बता दूं कि मैंने अपना पूरा भार उस जहाज़ पर नहीं डाला था।"

ऐसे ही हम में से कई मसीही भी हैं। मसीही विश्वासी होने के नाते हम जानते हैं कि हमारे पाप क्षमा हो गए हैं और हमें स्वर्ग जाने के अटल आश्वासन का आनन्द है, लेकिन इससे आगे हम प्रभु पर अपने प्रतिदिन के जीवन के लिये विश्वास नहीं करते। हम अपने प्रतिदिन की आवश्यक्तओं के लिये प्रभु पर निर्भर रहने का विश्वास नहीं जुटा पाते और उन्हें स्वयं अपनी सामर्थ और सूझ-बूझ से ही पूरी करना चाहते हैं - हम अपना पूरा वज़न प्रभु पर नहीं डाल देते। नतीजा होता है हमारे अन्दर भय, शक, अनिश्चितता घर बना लेतीं है, चिंताएं हमें घेरे रहती हैं और हम अपनी मसीही यात्रा का पूरा आनन्द नहीं उठाने पाते। कैसी विचित्र बात है, हमें प्रभु पर अनन्तकाल के लिये तो सम्पूर्ण भरोसा है, लेकिन अभी और यहां के लिये नहीं।

यदि हम प्रभु पर भविष्य की अपनी अनन्त नियति के लिये भरोसा रख सकते हैं, तो वर्तमान पर क्यों नहीं? वर्तमान के लिये भी हमें उसके वचन पर उतना ही भरोसा होना चाहिये, जितना भविष्य के लिये। जैसे अब्राहम अपने विश्वास में खरा रहा और डगमगाया नहीं, वैसे ही हमें भी अपने विश्वास में स्थिर रहना चाहिये।

यदि हम चिंता और भय के बोझ तले दबे हैं तो हम चाचा औस्कर के समान हैं - अपना पूरा बोझ डालने से डरने वाले। इसके बजाए हमें अब्राहम की तरह होना चाहिये जिसने "न अविश्वासी होकर परमेश्वर की प्रतिज्ञा पर संदेह किया, पर विश्वास में दृढ़ होकर परमेश्वर की महिमा की।" (रोमियों ४:२०)

जी हां, परमेश्वर सम्पूर्ण रीति से हर बात के लिये विश्वास योग्य है। हम निडर होकर उसपर अपना पूरा वज़न डाल सकते हैं। - रिचर्ड डी हॉन


सच्चा विश्वास यह जानता है कि परमेश्वर जो कहता है सदैव वह करता भी है।

और न अविश्वासी होकर परमेश्वर की प्रतिज्ञा पर संदेह किया, पर विश्वास में दृढ़ होकर परमेश्वर की महिमा की। - रोमियों ४:२०


बाइबल पाठ: रोमियों ४:१६-२५

इसी कारण वह विश्वास के द्वारा मिलती है, कि अनुग्रह की रीति पर हो, कि प्रतिज्ञा सब वंश के लिये दृढ़ हो, न कि केवल उसके लिये जो व्यवस्था वाला है, वरन उन के लिये भी जो इब्राहीम के समान विश्वास वाले हैं: वही तो हम सब का पिता है।
जैसा लिखा है, कि मैं ने तुझे बहुत सी जातियों का पिता ठहराया है उस परमश्‍ेवर के साम्हने जिस पर उस ने विश्वास किया और जो मरे हुओं को जिलाता है, और जो बातें हैं ही नहीं, उन का नाम ऐसा लेता है, कि मानो वे हैं।
उस ने निराशा में भी आशा रख कर विश्वास किया, इसलिये कि उस वचन के अनुसार कि तेरा वंश ऐसा होगा वह बहुत सी जातियों का पिता हो।
और वह जो एक सौ वर्ष का था, अपने मरे हुए से शरीर और सारा के गर्भ की मरी हुई की सी दशा जान कर भी विश्वास में निर्बल न हुआ।
और न अविश्वासी होकर परमेश्वर की प्रतिज्ञा पर संदेह किया, पर विश्वास में दृढ़ हो कर परमेश्वर की महिमा की।
और निश्‍चय जाना, कि जिस बात की उस ने प्रतिज्ञा की है, वह उसे पूरी करने को भी सामर्थी है।
इस कारण, यह उसके लिये धामिर्कता गिना गया।
और यह वचन, कि विश्वास उसके लिये धामिर्कता गिना गया, न केवल उसी के लिये लिखा गया,
वरन हमारे लिये भी जिन के लिये विश्वास धामिर्कता गिना जाएगा, अर्थात हमारे लिये जो उस पर विश्वास करते हैं, जिस ने हमारे प्रभु यीशु को मरे हुओं में से जिलाया।
वह हमारे अपराधों के लिये पकड़वाया गया, और हमारे धर्मी ठहरने के लिये जिलाया भी गया।

एक साल में बाइबल:
  • निर्गमन २३-२४
  • मत्ती २०:१-१६

शनिवार, 29 जनवरी 2011

सृष्टि की पाठशाला, परमेश्वर के अनपहचाने करिशमे

एक इंजीनियर श्री टी. सी. रोडी ने लिखा, "मेरे घर के आंगन में छः विशाल Oak (बांज) वृक्ष हैं जो १०० वर्ष से भी अधिक पुराने होंगे। उनके तले से लेकर चोटी तक के प्रत्येक पत्ते को हरा भरा रखने के लिये प्रतिदिन भारी मात्रा में उन तक पानी पहुंचाने की आवश्यक्ता होती है। एक इंजीनियर होने के नाते मैं जानता हूं कि मनुष्य द्वारा अभिकल्पित अथवा निर्मित ऐसा कोई भी पानी चढ़ाने का पम्प नहीं है जो इतना पानी इन पेड़ों के सघन लकड़ी के तने में से होकर इतनी ऊँचाई तक प्रवाहित कर सके, और वह भी लगातार, अविराम, बिना किसी खराबी या रखरखाव की आवश्यक्ता के। यदि पानी के प्रवाह में तने की लकड़ी के प्रतिरोध को ना भी लिया जाए, तो भी प्रत्येक पेड़ की जड़ों को ज़मीन से चोटी तक पानी चढाने के लिये ३,००० पौंड प्रति वर्ग फुट से अधिक के दबाव को पार करना होगा। लेकिन फिर भी यह परमेश्वर का अद्भुत करिशमा है कि जड़ें इतना पानी जमा भी करतीं हैं और उसे प्रत्येक पत्ते तक भी पहुंचाती हैं, बिल्कुल शांत और सहज रीति से, और हमें पता भी नहीं चलता।"

यह परमेश्वर के अनपहचाने करिशमों का केवल एक उदाहरण है। ऐसे न जाने कितने, और इससे भी न जाने कितने जटिल और कई उदाहरण सृष्टि की पाठशाला में विद्यमान हैं। परमेश्वर के इन्हीं अनपहचाने करिशमों के कारण हमारा जीवन प्रतिदिन पृथ्वी पर संभव है। प्रतिदिन परमेश्वर हमें अनगिनित आशीशों से नवाज़ता है और हम उन्हें ’प्रकृति के कार्य’ कह कर हलके में टाल जाते हैं, परमेश्वर को धन्यवाद देना तो दूर, बहुतेरे तो उसके असतित्व से ही इन्कार कर जाते हैं। लेकिन परमेश्वर का धैर्य और प्रेम फिर भी सबके प्रति बना रहता है और वह जीवन की आवश्यक्ताएं प्रदान करता रहता है।

प्रकृति परमेश्वर में हमारे विश्वास को बढ़ाती है। हज़ारों साल पहले परमेश्वर ने बुज़ुर्ग और निसन्तान अब्राहम से कहा कि आकाश की ओर देख और सितारों की संख्या पर ध्यान दे, जैसे तारे अनगिनित हैं वैसे ही तेरे वंश के लोग भी अनगिनित होंगे। वह बुज़ुर्ग समझ गया कि जो परमेश्वर उन अनगिनित सितारों को बना और चला सकता है, उस परमेश्वर के लिये उसकी बुज़ुर्गी में पुत्र देना कोई कठिन कार्य नहीं है। अब्राहम ने परमेश्वर की बात पर विश्वास किया और यह उसके लिये धार्मिकता गिना गया। अब्राहम और उसकी पत्नि के बुढापे में उन्हें सन्तान हुई और आज उसका वंश इस्त्राएल के रूप में जाना जाता है।

जब कभी अपनी किसी समस्या के समाधान के लिये परमेश्वर पर विश्वास करना कठिन हो रहा हो तो सृष्टि की पाठशाला में जा कर प्रकृति के सृजनकर्ता और संचलाक परमेश्वर के अद्भुत कार्यों पर ध्यान कीजिए। विचार कीजिए कि जो इतना सब इतनी सहजता से बना और चला सकता है, उसके लिये आपकी समस्या क्या कठिन है? फिर अपने बच्चोंके लिये उसके वचन और हमारी पाठ्य पुस्तक - पवित्र शास्त्र बाइबल में दिये गये उसके वायदों और आश्वासनों को स्मरण कीजिए, आपका विश्वास स्वतः ही जाग उठेगा और चिंताएं जाती रहेंगीं। - डेनिस डी हॉन


जो कुछ मैं ने देखा है वह सब मुझे मेरे सृष्टिकर्ता परमेश्वर पर प्रत्येक अन्देखी बात के लिये भी विश्वास रखने को प्रेरित करता है। - एमरसन

और उस ने उसको बाहर ले जा के कहा, आकाश की ओर दृष्टि कर के तारागण को गिन, क्या तू उनको गिन सकता है ? फिर उस ने उस से कहा, तेरा वंश ऐसा ही होगा। - उत्पत्ति १५:५


बाइबल पाठ: उत्पत्ति १५:१-६

इन बातों के पश्चात्‌ यहोवा को यह वचन दर्शन में अब्राम के पास पहुंचा, कि हे अब्राम, मत डर; तेरी ढाल और तेरा अत्यन्त बड़ा फल मैं हूं।
अब्राम ने कहा, हे प्रभु यहोवा मैं तो निर्वंश हूं, और मेरे घर का वारिस यह दमिश्की एलीएजेर होगा, सो तू मुझे क्या देगा ?
और अब्राम ने कहा, मुझे तो तू ने वंश नहीं दिया, और क्या देखता हूं, कि मेरे घर में उत्पन्न हुआ एक जन मेरा वारिस होगा।
तब यहोवा का यह वचन उसके पास पहुंचा, कि यह तेरा वारिस न होगा, तेरा जो निज पुत्र होगा, वही तेरा वारिस होगा।
और उस ने उसको बाहर ले जा के कहा, आकाश की ओर दृष्टि कर के तारागण को गिन, क्या तू उनको गिन सकता है? फिर उस ने उस से कहा, तेरा वंश ऐसा ही होगा।
उस ने यहोवा पर विश्वास किया और यहोवा ने इस बात को उसके लेखे में धर्म गिना।

एक साल में बाइबल:
  • निर्गमन २१-२२
  • मत्ती १९