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रविवार, 27 फ़रवरी 2011

दासत्व - स्वतंत्र होने के लिये!

अभी भी मेरे मस्तिष्क में उस तीर से बिंधे हुए लेकिन ज़िंदा और उड़ सकने वले कैनेडियन हंस का चित्र ताज़ा है। एक धनुर्धारी शिकरी का निशाना तो सही लगा, लेकिन वह हंस मरा नहीं। वह न केवल उस शिकारी से, परन्तु जानवरों और पक्षियों की रक्षा और देखभाल करने वाले लोगों से भी लगभग एक महीने तक बचता रहा। उसे पकड़ने के लिये उन्होंने उसे नशीले पदार्थ मिले दाने खिलाने की कोशिश करी, छोटी तोप जैसी मशीनों से जाल उस की ओर ऊंचाई तक फेंका, लेकिन वह पकड़ में नहीं आया। आखिरकर उसे मछली पकड़ने के जाल में फांसा गया, फिर पक्षियों के डाक्टरों ने ऑपरेशन द्वारा उसके शरीर में फंसा हुआ वह तीर निकाला, और फिर उसे आज़ाद कर दिया। यदि हंस सोचने की शक्ति रखते होंगे तो वह हंस बाद में सोचता होगा, क्यों वह इतने दिन तक इतनी मेहनत करके, अपने पकड़ने वालों से बचता रहा? उन्होंने तो उसकी भलाई के लिये ही उसे बन्धुआ बनाना चाहा था।

इस बन्धुआ बने हंस के अनुभव ने मुझे उन लोगों की याद दिलाई जिनके बारे में यूहन्ना ८ अध्याय में लिखा गया है। वे लोग भी अपनी गंभीर स्थिति के बारे में समझ नहीं पा रहे थे, और न ही प्रभु यीशु के उनके प्रति उद्देश्यों को समझ पा रहे थे। उन लोगों को लगा कि प्रभु यीशु उन्हें बन्धुआ बनाना चाहता है, क्योंकि प्रभु उनसे अपने जीवन उसे समर्पित करने और प्रभु के चेले बनने को कह रहा था। प्रभु ने उनसे याचना करी कि वे उसके आत्मिक दास बन जाएं, लेकिन वे नहीं समझ पाए कि प्रभु यह उनसे उन्हें उनके पाप के दोष से स्वतंत्र करने के लिये कह रहा था।

कुछ ऐसी ही गलतफहमी में रहकर आज भी लोग प्रभु यीशु मसीह के पास आना नहीं चाहते। वे पाप से बिंधे हुए इधर उधर बचते फिरते हैं, लेकिन जो उन्हें पाप से मुक्ति और उद्धार दे सकता है, उस प्रभु के आधीन नहीं होना चाहते। वे समझ नहीं पाते कि प्रभु का उद्देश्य उन्हें दास बनाना नहीं वरन उन्हें स्वतंत्र करना है - पाप और उसके दण्ड से स्वतंत्र, जो स्वतंत्रता और कहीं नहीं मिल सकती, और वह भी सेंत-मेत, केवल एक साधारण विश्वास से। यह स्वतंत्रता न केवल हमारे अनन्त भविष्य से संबंधित है, वरन पृथ्वी पर हमारे वर्तमान से भी संबंधित है क्योंकि प्रतिदिन मसीह के साथ चलने से हम उसके संरक्षण में बने रहते हैं।

प्रभु के दास होकर ही हम वासत्व में स्वतंत्र होते हैं। - मार्ट डी हॉन


उद्धार द्वारा आया परिवर्तन हमें हमारे पाप के बन्धनों से मुक्त कर देता है।


क्‍योंकि जो दास की दशा में प्रभु में बुलाया गया है, वह प्रभु का स्‍वतंत्र किया हुआ है: - १ कुरिन्थियों ७:२२



बाइबल पाठ: यूहन्ना ८:३१-४६


तब यीशु ने उन यहूदियों से जिन्‍होंने उस की प्रतीति की थी, कहा, यदि तुम मेरे वचन में बने रहोगे, तो सचमुच मेरे चेले ठहरोगे।
और सत्य को जानोगे, और सत्य तुम्हें स्‍वतंत्र करेगा।
उन्‍होंने उस को उत्तर दिया कि हम तो इब्राहीम के वंश से हैं और कभी किसी के दास नहीं हुए, फिर तू क्‍योंकर कहता है, कि तुम स्‍वतंत्र हो जाओगे?
यीशु ने उन को उत्तर दिया मैं तुम से सच सच कहता हूं कि जो कोई पाप करता है, वह पाप का दास है।
और दास सदा घर में नहीं रहता, पुत्र सदा रहता है।
सो यदि पुत्र तुम्हें स्‍वतंत्र करेगा, तो सचमुच तुम स्‍वतंत्र हो जाओगे।
मैं जानता हूं कि तुम इब्राहीम के वंश से हो तौभी मेरा वचन तुम्हारे ह्रृदय में जगह नहीं पाता, इसलिये तुम मुझे मार डालना चाहते हो।
मैं वही कहता हूं, जो अपने पिता के यहां देखा है और तुम वही करते रहते हो जो तुमने अपने पिता से सुना है।
उन्‍होंने उन को उत्तर दिया, कि हमारा पिता तो इब्राहीम है: यीशु ने उन से कहा, यदि तुम इब्राहीम के सन्‍तान होते, तो इब्राहीम के समान काम करते।
परन्‍तु अब तुम मुझ ऐसे मनुष्य को मार डालना चाहते हो, जिस ने तुम्हें वह सत्य वचन बताया जो परमेश्वर से सुना, यह तो इब्राहीम ने नहीं किया था।
तुम अपने पिता के समान काम करते हो: उन्‍होंने उस से कहा, हम व्यभिचार से नहीं जन्मे, हमारा एक पिता है अर्थात परमेश्वर।
यीशु ने उन से कहा यदि परमेश्वर तुम्हारा पिता होता, तो तुम मुझ से प्रेम रखते; क्‍योंकि मैं परमेश्वर में से निकल कर आया हूं मैं आप से नहीं आया, परन्‍तु उसी ने मुझे भेजा।
तुम मेरी बात क्‍यों नहीं समझते? इसलिये कि मेरा वचन सुन नहीं सकते।
तुम अपने पिता शैतान से हो, और अपने पिता की लालसाओं को पूरा करना चाहते हो। वह तो आरम्भ से हत्यारा है, और सत्य पर स्थिर न रहा, क्‍योंकि सत्य उस में है ही नहीं: जब वह झूठ बोलता, तो अपने स्‍वभाव ही से बोलता है, क्‍योंकि वह झूठा है, वरन झूठ का पिता है।
परन्‍तु मैं जो सच बोलता हूं, इसीलिये तुम मेरी प्रतीति नहीं करते।
तुम में से कौन मुझे पापी ठहराता है? और यदि मैं सच बोलता हूं, तो तुम मेरी प्रतीति क्‍यों नहीं करते?

एक साल में बाइबल:
  • गिनती १७-१९
  • मरकुस ६:३०-५६

शनिवार, 26 फ़रवरी 2011

कठिन परीक्षा की घड़ी

मौसम की जानकारी देने वाले ने अपने नक्शे को दिखाते हुए कहा "मुझे भय है कि स्थिति सुधरने से पहले और कठिन होगी।" उसकी यह भविष्यवाणी इस्त्राएल की प्रजा का चित्रण करती है, जब वे मिस्त्र के दासत्व से निकलने की बाट जोह रहे थे और परमेश्वर ने उनकी रिहाई की योजना बना रखी थी। लेकिन उनके लिये परिस्थितियां तेज़ी से बिगड़ने लगीं थीं। सताव और शोष्ण की तेज़ हवाएं अब भीष्ण तूफान का रूप ले रहीं थीं। कुछ समय पहले वे लोग बड़े उत्साह से अपनी रिहाई की बातें करते थे; परन्तु उनके लिये वही मूसा जो उनकी रिहाई का योजनाकार था, अब उनके दुखों का कारण बन गया था। फिरौन की नज़रों में यदि दासों के पास आज़ादी के स्वपन देखने का समय था, तो उनके पास बहुत अधिक समय था; इसलिये फिरौन ने उनके काम का बोझ बढ़ा दिया और काम के लिये आवश्यक सामग्री देना बन्द कर दिया और उनसे कहा कि अपनी सामग्री आप अर्जित करो, लेकिन काम में कोई कमी नहीं होगी, और उनके अगुवों की पिटाई करवाई। मूसा भी इस्त्राएलियों की इस दुर्दशा से विसमित होकर परमेश्वर के सामने स्पष्टिकरण के लिये विलाप करने लगा।

लेकिन समय ने दिखा दिया कि परमेश्वर की योजना में कोई बाधा नहीं थी। लोगों की वह भीड़ मिस्त्र की दासता से सदा के लिये निकलने के लिये तैयार करी जा रही थी, और सब कुछ समयबद्ध हो रहा था। परमेश्वर ने जान बूझकर हालात को सुधरने से पहले बिगड़ने दिया ताकि वे अपने विश्वास की परीक्षा द्वारा परमेश्वर की सामर्थ को देख सकें और उसपर अपने विश्वास को दृढ़ कर सकें।

यह घटना हमारे लिये एक शिक्षा और सांत्वना का स्त्रोत है। जब संसार हम पर चढ़ा चला आता है, और परिस्थितियां कठिन होती लगती हैं, हम इस बात द्वारा शांति पा सकते हैं कि हमारी स्थिति का निर्देशक संसार नहीं, वरन संसार पर प्रभुता करने वाला परमेश्वर है। - मार्ट डी हॉन


भोर से पहले ही रात सबसे अंधेरी होती है।

जो अपने ऊपर भरोसा रखता है, वह मूर्ख है; और जो बुद्धि से चलता है, वह बचता है। - नीतिवचन २८:२६


बाइबल पाठ: निर्गमन ६:१-८

तब यहोवा ने मूसा से कहा, अब तू देखेगा कि मैं फिरौन से क्या करूंगा; जिस से वह उनको बरबस निकालेगा, वह तो उन्हें अपने देश से बरबस निकाल देगा।
और परमेश्वर ने मूसा से कहा, कि मैं यहोवा हूं।
मैं सर्वशक्तिमान ईश्वर के नाम से इब्राहीम, इसहाक, और याकूब को दर्शन देता था, परन्तु यहोवा के नाम से मैं उन पर प्रगट न हुआ।
और मैं ने उनके साथ अपनी वाचा दृढ़ की है, अर्थात कनान देश जिस में वे परदेशी होकर रहते थे, उसे उन्हें दे दूं।
और इस्राएली जिन्हें मिस्री लोग दासत्व में रखते हैं उनका कराहना भी सुनकर मैं ने अपनी वाचा को स्मरण किया है।
इस कारण तू इस्राएलियों से कह, कि मैं यहोवा हूं, और तुम को मिस्रियों के बोझों के नीचे से निकालूंगा, और उनके दासत्व से तुम को छुड़ाऊंगा, और अपनी भुजा बढ़ाकर और भारी दण्ड देकर तुम्हें छुड़ा लूंगा,
और मैं तुम को अपनी प्रजा बनाने के लिये अपना लूंगा, और मैं तुम्हारा परमेश्वर ठहरूंगा और तुम जान लोगे कि मैं तुम्हारा परमेश्वर यहोवा हूं जो तुम्हें मिस्रियों के बोझों के नीचे से निकाल ले आया।
और जिस देश के देने की शपथ मैं ने इब्राहीम, इसहाक, और याकूब से खाई थी उसी में मैं तुम्हें पहुंचा कर उसे तुम्हारा भाग कर दूंगा। मैं तो यहोवा हूं।

एक साल में बाइबल:
  • गिनती १५-१६
  • मरकुस ६:१-२९

शुक्रवार, 25 फ़रवरी 2011

परमेश्वर की उपासना

परमेश्वर, सिद्ध पवित्र परमेश्वर, सच्ची उपासना के योग्य है। वह ही हमारा सृजनहार, पालनहार, तारणहार है। यदि उसका प्रेम भरा मार्गदर्शन और देख-रेख हमें उपलब्ध न हो तो हमारे जीवन के लिये कोई आशा न रहे। इसलिये हमें सर्वदा उसकी ऐसी उपासना करनी चाहिये जो उसके नाम को आदर और उसे सच्ची महिमा देती हो।

प्रभु यीशु ने सामरी स्त्री से अपनी बातचीत में कहा "परमेश्वर आत्मा है, और अवश्य है कि उसके भजन करने वाले आत्मा और सच्‍चाई से भजन करें।" (यूहन्ना ४:२४)

अपनी उत्कृष्ट पुस्तक "The Practice of the Presence of God" में लेखक भाई लौरेन्स इस का अर्थ इस प्रकार समझाते हैं "सच्चाई से परमेश्वर की आराधना करने का तातपर्य है कि परमेश्वर की वास्तविकता को जानना, उसके संपूर्ण गुणों को पहिचानना, अर्थात यह कि वह अपनी अनन्त संपूर्णता में सिद्ध, हर एक प्रकार कि बुराई से परे और समस्त दिव्यगुणों से परिपूर्ण है। किसी मनुष्य के पास उपासना करने का चाहे कोई बहुत ही छोटा प्रतीत होने वाला कारण ही क्यों न हो, लेकिन जब वह उपासना करे तो ऐसे महान परमेश्वर की उपासना उसे अपनी सारी सामर्थ से करनी चाहिये।"

हमें अपने आप से पूछने की आवश्यक्ता है कि जिस ने हमें बनाया है, क्या उसकी उपासना हम इस प्रकार करते हैं? क्या सदा अपने मन मस्तिष्क कि गहिराईयों से हम उसका आदर और मान बनाए रखते हैं? क्या जब हम उसके सन्मुख आते हैं तो उससे जिससे कोई बात छिपी नहीं है, जो मन की बात और मस्तिष्क के विचारों को भी जानता है, उसके सन्मुख अपने आप को पूरी सच्चाई से प्रस्तुत करते हैं या उससे कुछ छिपाते हुए, कोई बहाने बनाते हुए, अपने आप को सही प्रमाणित करने के प्रयास के साथ आते हैं? क्या वह जो है, हम उसकी हस्ती और उसके गुणों का अंगीकार करते हैं?

यदि उस सर्वसामर्थी, सर्वव्यापी और सर्वज्ञानी परमेश्वर की सच्ची उपासना करनी है तो यह केवल "आत्मा और सच्चाई" ही में हो सकती है। - डेव एग्नर


यदि जीवन में मसीह सबसे बहुमूल्य नहीं तो फिर उसका कोई मूल्य नहीं।

परमेश्वर आत्मा है, और अवश्य है कि उसके भजन करने वाले आत्मा और सच्‍चाई से भजन करें। - यूहन्ना ४:२४



बाइबल पाठ: यूहन्ना ४:९-२६

उस सामरी स्त्री ने उस से कहा, तू यहूदी होकर मुझ सामरी स्त्री से पानी क्‍यों मांगता है? (क्‍योंकि यहूदी सामरियों के साथ किसी प्रकार का व्यवहार नहीं रखते)।
यीशु ने उत्तर दिया, यदि तू परमेश्वर के वरदान को जानती, और यह भी जानती कि वह कौन है जो तुझ से कहता है मुझे पानी पिला तो तू उस से मांगती, और वह तुझे जीवन का जल देता।
स्त्री ने उस से कहा, हे प्रभु, तेरे पास जल भरने को तो कुछ है भी नहीं, और कूआं गहिरा है: तो फिर वह जीवन का जल तेरे पास कहां से आया?
क्‍या तू हमारे पिता याकूब से बड़ा है, जिस ने हमें यह कूआं दिया और आप ही अपने सन्‍तान, और अपने ढोरों समेत उस में से पीया?
यीशु ने उस को उत्तर दिया, कि जो कोई यह जल पीएगा वह फिर प्यासा होगा।
परन्‍तु जो कोई उस जल में से पीएगा जो मैं उसे दूंगा, वह फिर अनन्‍तकाल तक प्यासा न होगा: वरन जो जल मैं उसे दूंगा, वह उस में एक सोता बन जाएगा जो अनन्‍त जीवन के लिये उमड़ता रहेगा।
स्त्री ने उस से कहा, हे प्रभु, वह जल मुझे दे ताकि मैं प्यासी न होऊं और न जल भरने को इतनी दूर आऊं।
यीशु ने उस से कहा, जा, अपने पति को यहां बुला ला।
स्त्री ने उत्तर दिया, कि मैं बिना पति की हूं: यीशु ने उस से कहा, तू ठीक कहती है कि मैं बिना पति की हूं।
क्‍योंकि तू पांच पति कर चुकी है, और जिस के पास तू अब है वह भी तेरा पति नहीं; यह तू ने सच कहा है।
स्त्री ने उस से कहा, हे प्रभु, मुझे ज्ञात होता है कि तू भविष्यद्वक्ता है।
हमारे बाप-दादों ने इसी पहाड़ पर भजन किया: और तुम कहते हो कि वह जगह जहां भजन करना चाहिए यरूशलेम में है।
यीशु ने उस से कहा, हे नारी, मेरी बात की प्रतीति कर कि वह समय आता है कि तुम न तो इस पहाड़ पर पिता का भजन करोगे न यरूशलेम में।
तुम जिसे नहीं जानते, उसका भजन करते हो, और हम जिसे जानते हैं उसका भजन करते हैं; क्‍योंकि उद्धार यहूदियों में से है।
परन्‍तु वह समय आता है, वरन अब भी है जिस में सच्‍चे भक्त पिता का भजन आत्मा और सच्‍चाई से करेंगे, क्‍योंकि पिता अपने लिये ऐसे ही भजन करने वालों को ढूंढ़ता है।
परमेश्वर आत्मा है, और अवश्य है कि उसके भजन करने वाले आत्मा और सच्‍चाई से भजन करें।
स्त्री ने उस से कहा, मैं जानती हूं कि मसीह जो ख्रीस्‍तुस कहलाता है, आनेवाला है; जब वह आएगा, तो हमें सब बातें बता देगा।
यीशु ने उस से कहा, मैं जो तुझ से बोल रहा हूं, वही हूं।

एक साल में बाइबल:
  • गिनती १२-१४
  • मरकुस ५:२१-४३

गुरुवार, 24 फ़रवरी 2011

परमेश्वर पवित्र है

परमेश्वर ऐसा कुछ नहीं कर सकता जो उसके पवित्र चरित्र के अनुकूल न हो। क्योंकि परमेश्वर अपने स्वभाव से पवित्र और सिद्ध है, इसलिये उसके सारे गुण उसकी इस पवित्रता और सिद्धता को दर्शाते हैं। कुछ बातों पर ध्यान कीजिए:

१. पवित्र परमेश्वर होने के नाते वह अपनी धार्मिकता में सिद्ध है। हम उसकी इच्छा के आधीन बेखटके हो सकते हैं क्योंकि इब्राहिम द्वारा उत्पत्ति १८:२५ में उठाये गये प्रश्न "क्या सारी पृथ्वी का न्यायी न्याय न करे?" का एक ही उत्तर संभव हो सकता है - " हाँ "।

२. पवित्र परमेश्वर होने के नाते वह अपने न्याय में सिद्ध है। पौलुस ने कहा "...हम सब के सब परमेश्वर के न्याय सिंहासन के साम्हने खड़े होंगे।" (रोमियों १४:१०); पतरस ने लिखा "क्‍योंकि वह समय आ पहुंचा है, कि पहिले परमेश्वर के लोगों का न्याय किया जाए, और जब कि न्याय का आरम्भ हम ही से होगा तो उन का क्‍या अन्‍त होगा जो परमेश्वर के सुसमाचार को नहीं मानते?" (१ पतरस ४:१७); यूहन्ना, अविश्वासियों के संबंध में कहता है " ...उन में से हर एक के कामों के अनुसार उन का न्याय किया गया।" (प्रकाशितवाक्य २०:१३)।

३. पवित्र परमेश्वर होने के नाते वह अपने सदा सत्य होने में सिद्ध है। इस कारण हम उसके वचन पर सम्पूर्ण विश्वास कर सकते हैं। गिनती २३:१९ में लिखा है " ईश्वर मनुष्य नहीं, कि झूठ बोले, और न वह मनुष्य है, कि अपनी इच्छा बदले। क्या जो कुछ उस ने कहा उसे न करे? क्या वह वचन देकर उस पूरा न करे?"

४. पवित्र परमेश्वर होने के नाते वह अपनी विश्वासयोग्यता में सिद्ध है। यर्मियाह नबी ने लिखा " हम मिट नहीं गए, यह यहोवा की महान करुणा का फल है, क्योंकि उसकी दया अमर है। प्रति भोर वह नई होती रहती है; तेरी सच्चाई महान है।" (विलापगीत ३:२२, २३)

हम अपने धर्मी, न्यायी, सच्चे और विश्वासयोग्य परमेश्वर पर समपूर्ण भरोसा रख सकते हैं क्योंकि वह पवित्र है। - रिचर्ड डी हॉन


परमेश्वर की जो पवित्रता पापी को दोषी सिद्ध करती है, वही धर्मी को सांत्वना भी देती है।

...सेनाओं का यहोवा पवित्र, पवित्र, पवित्र है; सारी पृथ्वी उसके तेज से भरपूर है। - यशायाह ६:३


बाइबल पाठ: भजन ४८

हमारे परमेश्वर के नगर में, और अपने पवित्र पर्वत पर यहोवा महान और अति स्तुति के योग्य है!
सिय्योन पर्वत ऊंचाई में सुन्दर और सारी पृथ्वी के हर्ष का कारण है, राजाधिराज का नगर उत्तरीय सिरे पर है।
उसके महलों में परमेश्वर ऊंचा गढ़ माना गया है।
क्योंकि देखो, राजा लोग इकट्ठे हुए, वे एक संग आगे बढ़ गए।
उन्होंने आप ही देखा और देखते ही विस्मित हुए, वे घबराकर भाग गए।
वहां कंपकंपी ने उनको आ पकड़ा, और जच्चा की सी पीड़ाएं उन्हें होने लगीं।
तू पूर्वी वायु से तर्शीश के जहाजों को तोड़ डालता है।
सेनाओं के यहोवा के नगर में, अपने परमेश्वर के नगर में, जैसा हम ने सुना था, वैसा देखा भी है; परमेश्वर उसको सदा दृढ़ और स्थिर रखेगा।
हे परमेश्वर हम ने तेरे मन्दिर के भीतर तेरी करूणा पर ध्यान किया है।
हे परमेश्वर तेरे नाम के योग्य तेरी स्तुति पृथ्वी की छोर तक होती है। तेरा दहिना हाथ धर्म से भरा है;
तेरे न्याय के कामों के कारण सिय्योन पर्वत आनन्द करे, और यहूदा के नगर की पुत्रियां मगन हों!
सिय्योन के चारों ओर चलो, और उसकी परिक्रमा करो, उसके गुम्मटों को गिन लो,
उसकी शहरपनाह पर दृष्टि लगाओ, उसके महलों को ध्यान से देखो; जिस से कि तुम आने वाली पीढ़ी के लोगों से इस बात का वर्णन कर सको।
क्योंकि वह परमेश्वर सदा सर्वदा हमारा परमेश्वर है, वह मृत्यु तक हमारी अगुवाई करेगा।
एक साल में बाइबल:
  • गिनती ९-११
  • मरकुस ५:१-२०

बुधवार, 23 फ़रवरी 2011

आत्मविशलेष्ण

प्रसिद्ध पाश्चात्य संगीत शास्त्री बीथोवेन के घर की देखरेख करने वाला, कुछ पर्यटकों को बीथोवन का घर घुमा रहा था। जब वे एक पुराने और आलीशान प्यानो के पास आए, तो बड़े आदर से उस प्यानो का ढक्कन उठाते हुए कहा, "यही वह प्यानो है जिस पर बैठ कर बीथोवन अपने संगीत की रचना करते थे।" तभी उन पर्यटकों में से एक युवती आगे बढ़ी और प्यानो के आगे बैठ गई तथा बीथोवन द्वारा रचित एक छोटी धुन उस प्यानो पर बजाने लगी। धुन समाप्त करके वह बड़े गर्व से उस ठगे से खड़े और विस्मित देखरेख करने वाले की ओर मुड़ी और बोली, "यहां आने वाले लोगों में से बहुतेरे ऐसे ही बीथोवन के प्यानों को बजाना चाहते होंगे, हैं ना?" उस देखरेख करने वाले ने बड़े सहज भाव से उत्तर दिया, "मैडम, पिछले ग्रीष्म ‌‍ॠतु में विश्व प्रसिद्ध प्यानो वादक श्रीमान पाद्रेवस्की यहां आये थे। उनके कुछ मित्रों ने उनसे इस प्यानो पर कुछ बजाने का निवेदन किया, लेकिन उन्हों ने बड़ी नम्रता से यह कहकर इन्कार कर दिया कि मैं इसके योग्य नहीं हूँ!"

जैसे जैसे हम अपने प्रभु की समानता में बढ़ते जाते हैं, हम उसके समक्ष अपनी औकात के और अपने पापों के प्रति बोझिल भी होते जाते हैं। यह विरोधाभास किसी विकृत आत्मविशलेष्ण का नतीजा नहीं है और न ही यह स्व्यं अपने प्रति किसी हीन भावना का द्योतक है। यह इस बात की सच्ची पहिचान है कि मसीह क्या है और हम क्या हैं और हमारी मसीह की समानता में ढलने की इच्छा कैसी है।

परमेश्वर की पवित्रता की झलक पाने के बाद यशायाह नबी चिल्ला उठा "...हाय! हाय! मैं नाश हूआ। क्योंकि मैं अशुद्ध होंठ वाला मनुष्य हूं, और अशुद्ध होंठ वाले मनुष्यों के बीच में रहता हूं; क्योंकि मैं ने सेनाओं के यहोवा महाराजाधिराज को अपनी आंखों से देखा है! " (यशायाह ६:५); अपनी तकलीफों और परीक्षाओं के अन्त में परमेश्वर के दर्शन पाने के बाद अय्युब ने विनम्रता सहित स्वीकार किया कि "...मुझे अपने ऊपर घृणा आती है, और मैं धूलि और राख में पश्चात्ताप करता हूँ।" (अय्युब ४२:६); और यूहन्ना बप्तिस्मा देने वाले ने प्रभु यीशु के विष्य में कहा "...जो मेरे बाद आने वाला है, वह मुझ से शक्तिशाली है; मैं उस की जूती उठाने के योग्य नहीं..."(मत्ती ३:११)।

परमेश्वर के समक्ष अपनी अयोग्यता की स्वस्थ स्वीकृति और पहिचान, हमें प्रभु की योग्यता पर निर्भरता बनाए रखने में सहायक होती है, और यही प्रभु की समानता में ढलते और बढ़ते जाने का राज़ है। - डेनिस डी हॉन


जब लोग सच्चे परमेश्वर की सच्ची पहिचान के साथ उसकी सच्ची उपासना करने लग जाते हैं, तो वे उसकी समानता में भी बढ़ने लग जाते हैं।

...जो मेरे बाद आने वाला है, वह मुझ से शक्तिशाली है; मैं उस की जूती उठाने के योग्य नहीं... - मत्ती ३:११


बाइबल पाठ: अय्युब ४२:१-६

तब अय्यूब ने यहोवा को उत्तर दिया;
मैं जानता हूँ कि तू सब कुछ कर सकता है, और तेरी युक्तियों में से कोई रुक नहीं सकती।
तू कौन है जो ज्ञान रहित होकर युक्ति पर परदा डालता है? परन्तु मैं ने तो जो नहीं समझता था वही कहा, अर्थात जो बातें मेरे लिये अधिक कठिन और मेरी समझ से बाहर थीं जिनको मैं जानता भी नहीं था।
मैं निवेदन करता हूं सुन, मैं कुछ कहूंगा, मैं तुझ से प्रश्न करता हूँ, तू मुझे बता दे।
मैंने कानों से तेरा समाचार सुना था, परन्तु अब मेरी आंखें तुझे देखती हैं;
इसलिये मुझे अपने ऊपर घृणा आती है, और मैं धूलि और राख में पश्चात्ताप करता हूँ।
एक साल में बाइबल:
  • गिनती ७-८
  • मरकुस ४:२१-४१

मंगलवार, 22 फ़रवरी 2011

श्रद्धा

मेरे पिताजी परमेश्वर के प्रति श्रद्धालु व्यवहार बनाए रखने के लिये बड़े कट्टर थे। उनके समक्ष यदि कोई परमेश्वर को हल्के में संबोधित करता तो वे क्रुद्ध हो जाते। उनका नियम था कि जब वे सबके सामने बाइबल पढ़ें तो उनके परिवार जन सीधे और सतर्क बैठें, जैसे वे किसी उच्च पदाधिकरी के समक्ष बैठे हों। वे जब परमेश्वर को संबोधित करते थे तो उनके हावभाव से उनकी श्रद्धा और आश्चर्य प्रगट होता था कि हम पापी मनुष्य भी परम पवित्र सृष्टिकर्ता से वार्तालाप कर सकते हैं।

हमारा सर्वसामर्थी परमेश्वर चाहता है कि हम उसे "अब्बा, पिता" करके संबोधित करें, और वह हमें बिना किसी घबराहट या हिचकिचाहट के अपने समक्ष आने का निमंत्रण भी देता है। परन्तु बाइबल के सैंकड़ों खण्ड हैं जहां यह बात स्पष्ट करी गई है कि हमें परमेश्वर के प्रति श्रद्धा और भय का आचरण कभी नज़रांदज़ नहीं करना है।

निर्गमन १९ अध्याय में परमेश्वर का अपने लोगों को अपने निकट आने का निमंत्रण और उसकी उपस्थिति से उत्पन्न पराक्रमी और भय पैदा करने वाली घटनाओं का अद्भुत समागम है, जिससे इस्त्राएली लोग उसके प्रति श्रद्धा और भय को समझ सकें। जब इस्त्राएली प्रजा पर्वत के नीचे परमेश्वर की बात सुनने को जमा हुई और परमेश्वर पर्वत की चोटी पर उतरा तब पर्वत की चोटी से बड़ी आग और धुआं उठा, भीष्ण गड़गड़ाहट की दिल दहला देने वाली ध्वनि हुई और तेज़ बिजली आकाश में कौन्धने लगी। पर्वत कांपने लगा और तुरही का ऊंचा शब्द हुआ और तब इस्त्राएली लोगों ने परमेश्वर को मूसा से बात करते सुना और वे आदर, भय और श्रद्धा से भर गए।

परमेश्वर कितना महान और पवित्र है, उसकी तुलना में हम कितने छोटे और कमज़ोर हैं और हमारी कोई सामर्थ या पवित्रता तो है ही नहीं। लेकिन फिर भी हमारे प्रति वह अपने प्रेम को प्रभु यीशु मसीह में होकर प्रगट करता है और समस्त मानव जाति को, वे चाहे जो भी हों और जैसे भी हों, प्रभु यीशु में होकर अपने पास आने का खुला निमंत्रण देता है।

जब हम परमेश्वर के सन्मुख अपनी औकात का ध्यान रखते हैं तो हम भय के साथ उसकी सेवा और आनन्द के साथ उसकी संगति भी कर सकते हैं। - हर्ब वैन्डर लुग्ट


सच्ची उपासना परमेश्वर की सच्ची पहिचान से होती है।

डरते हुए यहोवा की उपासना करो, और कांपके हुए मगन हो। - भजन २:११


बाइबल पाठ: निर्गमन १९:१-१९

इस्त्राएलियों को मिस्र देश से निकले हुए जिस दिन तीन महीने बीत चुके, उसी दिन वे सीनै के जंगल में आए।
और जब वे रपीदीम से कूच करके सीनै के जंगल में आए, तब उन्होंने जंगल में डेरे खड़े किए; और वहीं पर्वत के आगे इस्त्राएलियों ने छावनी डाली।
तब मूसा पर्वत पर परमेश्वर के पास चढ़ गया, और यहोवा ने पर्वत पर से उसको पुकार कर कहा, याकूब के घराने से ऐसा कह, और इस्त्राएलियों को मेरा यह वचन सुना,
कि तुम ने देखा है कि मै ने मिस्रियों से क्या क्या किया, तुम को मानो उकाब पक्षी के पंखों पर चढ़ा कर अपने पास ले आया हूं।
इसलिये अब यदि तुम निश्चय मेरी मानोगे, और मेरी वाचा का पालन करोगे, तो सब लोगों में से तुम ही मेरा निज धन ठहरोगे, समस्त पृथ्वी तो मेरी है।
और तुम मेरी दृष्टि में याजकों का राज्य और पवित्र जाति ठहरोगे। जो बातें तुझे इस्त्राएलियों से कहनी हैं वे ये ही हैं।
तब मूसा ने आकर लोगों के पुरनियों को बुलवाया, और ये सब बातें, जिनके कहने की आज्ञा यहोवा ने उसे दी थी, उनको समझा दीं।
और सब लोग मिल कर बोल उठे, जो कुछ यहोवा ने कहा है वह सब हम नित करेंगे। लोगों की यह बातें मूसा ने यहोवा को सुनाईं।
तब यहोवा ने मूसा से कहा, सुन, मैं बादल के अंधियारे में होकर तेरे पास आता हूं, इसलिये कि जब मैं तुझ से बातें करूं तब वे लोग सुनें, और सदा तेरी प्रतीति करें। और मूसा ने यहोवा से लोगों की बातों का वर्णन किया।
तब यहोवा ने मूसा से कहा, लोगों के पास जा और उन्हें आज और कल पवित्र करना, और वे अपने वस्त्र धो लें,
और वे तीसरे दिन तक तैयार हो रहें, क्योंकि तीसरे दिन यहोवा सब लोगों के देखते सीनै पर्वत पर उतर आएगा।
और तू लोगों के लिये चारों ओर बाड़ा बान्ध देना, और उन से कहना, कि तुम सचेत रहो कि पर्वत पर न चढ़ो और उसके सिवाने को भी न छूओ और जो कोई पहाड़ को छूए वह निश्चय मार डाला जाए।
उसको कोई हाथ से तो न छूए, परन्तु वह निश्चय पत्थरवाह किया जाए, वा तीर से छेदा जाए; चाहे पशु हो चाहे मनुष्य, वह जीवित न बचे। जब महाशब्द वाले नरसिंगे का शब्द देर तक सुनाई दे, तब लोग पर्वत के पास आएं।
तब मूसा ने पर्वत पर से उतर कर लोगों के पास आकर उनको पवित्र कराया और उन्होंने अपने वस्त्र धो लिए।
और उस ने लोगों से कहा, तीसरे दिन तक तैयार हो रहो, स्त्री के पास न जाना।
जब तीसरा दिन आया तब भोर होते बादल गरजने और बिजली चमकने लगी, और पर्वत पर काली घटा छा गई, फिर नरसिंगे का शब्द बड़ा भरी हुआ, और छावनी में जितने लोग थे सब कांप उठे।
तब मूसा लोगों को परमेश्वर से भेंट करने के लिये छावनी से निकाल ले गया, और वे पर्वत के नीचे खड़े हुए।
और यहोवा जो आग में होकर सीनै पर्वत पर उतरा था, इस कारण समस्त पर्वत धुएं से भर गया, और उसका धुआं भट्टे का सा उठ रहा था, और समस्त पर्वत बहुत कांप रहा था
फिर जब नरसिंगे का शब्द बढ़ता और बहुत भारी होता गया, तब मूसा बोला, और परमेश्वर ने वाणी सुना कर उसको उत्तर दिया।

एक साल में बाइबल:
  • गिनती ४-६
  • मरकुस ४:१-२०

सोमवार, 21 फ़रवरी 2011

हमारा महान परमेश्वर

अमेरिका के जौर्जिया प्रांत में स्थित "स्टोन माऊंन्टेन" संसार का सबसे बड़ा उघाड़े हुए ग्रेनाईट चट्टान का पहाड़ है। उस १,७०० फुट चौड़े चट्टान के पटल पर दक्षिणी अमेरिका के तीन महान नेताओं के चेहरे तराशे गए हैं। यद्यपि यह पहाड़ और इसपर तराशी गई प्रतिमाएं विशाल हैं, फिर भी दूर से यह उतना आकर्षक नहीं लगता। इसकी महानता इसे देखने वाले को तभी अभिभूत करती है जब दर्शक इसके निकट आकर इसे निहारता है।

भजनकार एथन भजन ८९ में एक ऐसा ही सत्य परमेश्वर को जानने के संबंध में लिखता है। यह प्रेरणादायक भजन परमेश्वर की स्तुति से भरा है। भजनकार परमेश्वर की महानता, उसकी दया और विश्वासयोग्यता का वर्णन करता है। एथन यह सब कर सका क्योंकि वह अपने परमेश्वर को निकट से जानता था और उसके साथ एक निकट का व्यक्तिगत संबंध रखता था। भजन ८९ जैसे दर्शन उन्हीं को प्राप्त होते हैं जो परमेश्वर के निकट आते हैं और उसकी महानता से अभीभूत होते हैं।

हम जितना अपने परमेश्वर के निकट आते हैं उतना अधिक हम उसके प्रेम, सामर्थ और महानता का अनुभव करते हैं। एथन यहोवा के लिये गा सका "तेरी भुजा बलवन्त है; तेरा हाथ शक्तिमान और तेरा दहिना हाथ प्रबल है।" (भजन ८९:१३) और उसका उसके परमेश्वर के संबंध में यही ज्ञान उसके लिये आशीश बना। हम जितना अधिक उसके निकट आते जाएंगे, वह हमारे पक्ष में उतना अधिक महान होता जाएगा। - पौल वैन गोर्डर


परमेश्वर किसी का भी स्थान ले सकता है लेकिन परमेश्वर का स्थान कोई नहीं ले सकता।

क्योंकि आकाशमण्डल में यहोवा के तुल्य कौन ठहरेगा? बलवन्तों के पुत्रों में से कौन है जिसके साथ यहोवा की उपमा दी जाएगी? - भजन ८९:६


बाइबल पाठ: भजन ८९:५-१७

हे यहोवा, स्वर्ग में तेरे अद्भुत काम की, और पवित्रों की सभा में तेरी सच्चाई की प्रशंसा होगी।
क्योंकि आकाशमण्डल में यहोवा के तुल्य कौन ठहरेगा? बलवन्तों के पुत्रों में से कौन है जिसके साथ यहोवा की उपमा दी जाएगी?
ईश्वर पवित्रों की गोष्ठी में अत्यन्त प्रतिष्ठा के योग्य, और अपने चारों ओर सब रहने वालों से अधिक भययोग्य है।
हे सेनाओं के परमेश्वर यहोवा, हे याह, तेरे तुल्य कौन सामर्थी है? तेरी सच्चाई तो तेरे चारों ओर है!
समुद्र के गर्व को तू ही तोड़ता है, जब उसके तरंग उठते हैं, तब तू उनको शान्त कर देता है।
तू ने रहाब को घात किए हुए के समान कुचल डाला, और अपने शत्रुओं को अपने बाहुबल से तितर बितर किया है।
आकाश तेरा है, पृथ्वी भी तेरी है, जगत और जो कुछ उस में है, उसे तू ही ने स्थिर किया है।
उत्तर और दक्खिन को तू ही ने सिरजा; ताबोर और हेर्मोन तेरे नाम का जयजयकार करते हैं।
तेरी भुजा बलवन्त है, तेरा हाथ शक्तिमान और तेरा दाहिना हाथ प्रबल है।
तेरे सिंहासन का मूल, धर्म और न्याय है; करूणा और सच्चाई तेरे आगे आगे चलती है।
क्या ही धन्य है वह समाज जो आनन्द के ललकार को पहिचानता है; हे यहोवा वे लोग तेरे मुख के प्रकाश में चलते हैं,
वे तेरे नाम के हेतु दिन भर मगन रहते हैं, और तेरे धर्म के कारण महान हो जाते हैं।
क्योंकि तू उनके बल की शोभा है, और अपनी प्रसन्नता से हमारे सींग को ऊंचा करेगा।

एक साल में बाइबल:
  • गिनती १-३
  • मरकुस ३