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शनिवार, 5 मार्च 2011

व्यवस्था की समस्या

अमेरिका के आयकर विभाग में २५ वर्ष से कार्यरत एक अधिकारी को अपने आयकर की चोरी करने के लिये पकड़ा गया। जब यह खबर फैली, लगभग उसी समय समाचार पत्रों में एक और खबर भी प्रमुख रूप से प्रकाशित हुई - अपराधी मामलों का न्याय करने वाले कुछ न्यायाधिशों के अनैतिक चालचलन और बेईमानियों के बारे में। समाचार पत्रों ने समाज के समक्ष सवाल उठाया "न्यायियों का न्याय कौन करेगा?"

व्यवस्था और नियमों से भली भांति अवगत लोगों द्वारा व्यवस्था और नियमों का उल्लंघन केवल आयकर विभाग के अधिकारियों और न्यायाधीशों तक ही सीमित नहीं है। एक ऐसी भी व्यवस्था है जिसका उल्लंघन प्रत्येक व्यक्ति ने किया है - परमेश्वर की व्यवस्था। लेकिन इससे भी गंभीर बात यह है कि कुछ स्वधर्मी लोग परमेश्वर की व्यवस्था का उल्लंघन करने वाले होकर के भी उसका पालन करने के अपने अनुचित दावे में घमंड करते हैं। बिना शक, जिस व्यवस्था का पालन करने का वे दावा करते हैं, वही व्यवस्था उन्हें दोषी ठहराती है, उनके असली चेहरे को दिखाती है। परमेश्वर की व्यवस्था प्रत्येक स्वधर्मी घमंडी को उसकी वास्तविक्ता - व्यवस्था का उल्लंघन करने वाला के रूप में दिखा देती है। व्यवस्था की समस्या यही है कि व्यवस्था के नियमों के पालन में एक भी नियम की चूक या उल्लंघन से मनुष्य सारी व्यवस्था का दोषी ठहरता है "सो जितने लोग व्यवस्था के कामों पर भरोसा रखते हैं, वे सब श्राप के आधीन हैं, क्‍योंकि लिखा है, कि जो कोई व्यवस्था की पुस्‍तक में लिखी हुई सब बातों के करने में स्थिर नहीं रहता, वह श्रापित है।" (गलतियों ३:१०) "क्‍योंकि जो कोई सारी व्यवस्था का पालन करता है परन्‍तु एक ही बात में चूक जाए तो वह सब बातों मे दोषी ठहरा।" (याकूब २:१०)

रोमियों को लिखी अपनी पत्री में पौलुस स्पष्ट करता है कि व्यवस्था का उद्देश्य धर्मी ठहराना नहीं वरन परमेश्वर की पवित्रता का ज्ञान कराना और उस पवित्रता का मापदंड हमारे सामने रखना है जिससे हम पाप की पहचान कर सकें "क्‍योंकि व्यवस्था के कामों से कोई प्राणी उसके साम्हने धर्मी नहीं ठहरेगा, इसलिये कि व्यवस्था के द्वारा पाप की पहिचान होती है।" (रोमियों ३:२०) व्यवस्था इसलिये दी गई कि हमारी शिक्षक बन कर हमें मसीह के विश्वास तक लाए "पर विश्वास के आने से पहिले व्यवस्था की अधीनता में हमारी रखवाली होती थी, और उस विश्वास के आने तक जो प्रगट होने वाला था, हम उसी के बन्‍धन में रहे। इसलिये व्यवस्था मसीह तक पहुंचाने को हमारा शिक्षक हुई है, कि हम विश्वास से धर्मी ठहरें।" (गलतियों ३:२३, २४)

परमेश्वर की व्यवस्था का उपयोग कभी स्वधार्मिकता का घमंड संसार के समक्ष बघारने के लिये नहीं किया जाना चाहिये, वरन व्यवस्था का सही उपयोग है कि उसके सम्मुख अपने आप को रखकर हम अपनी पापमय दशा को पहचान सकें और जान सकें कि परमेश्वर की दया और अनुग्रह की हमें कितनी अधिक आवश्यक्ता है। जब हम अपनी स्वधार्मिकता पर नहीं वरन परमेश्वर की दया और अनुग्रह पर आधारित जीवन जीना आरंभ करेंगे, तब ही व्यवस्था की समस्या से मुक्ति पा सकेंगे "परन्‍तु जिस के बन्‍धन में हम थे उसके लिये मर कर, अब व्यवस्था से ऐसे छूट गए, कि लेख की पुरानी रीति पर नहीं, वरन आत्मा की नई रीति पर सेवा करते हैं।" (रोमियों ७:६) - मार्ट डी हॉन


मसीह यीशु में प्रत्येक जन व्यवस्था की समस्या का समाधान पा सकता है।

तू जो व्यवस्था के विषय में घमण्‍ड करता है, क्‍या व्यवस्था न मानकर, परमेश्वर का अनादर करता है? - रोमियों २:२३


बाइबल पाठ: रोमियों ७:१-६

हे भाइयो, क्‍या तुम नहीं जानते, मैं व्यवस्था के जानने वालों से कहता हूं, कि जब तक मनुष्य जीवित रहता है, तक तक उस पर व्यवस्था की प्रभुता रहती है?
क्‍योंकि विवाहिता स्त्री व्यवस्था के अनुसार अपने पति के जीते जी उस से बन्‍धी है, परन्‍तु यदि पति मर जाए, तो वह पति की व्यवस्था से छूट गई।
सो यदि पति के जीते जी वह किसी दूसरे पुरूष की हो जाए, तो व्यभिचारिणी कहलाएगी, परन्‍तु यदि पति मर जाए, तो वह उस व्यवस्था से छूट गई, यहां तक कि यदि किसी दूसरे पुरूष की हो जाए, तौभी व्यभिचारिणी न ठहरेगी।
सो हे मेरे भाइयो, तुम भी मसीह की देह के द्वारा व्यवस्था के लिये मरे हुए बन गए, कि उस दूसरे के हो जाओ, जो मरे हुओं में से जी उठा: ताकि हम परमेश्वर के लिये फल लाएं।
क्‍योंकि जब हम शारीरिक थे, तो पापों की अभिलाषायें जो व्यवस्था के द्वारा थीं, मृत्यु का फल उत्‍पन्न करने के लिये हमारे अंगों में काम करती थीं।
परन्‍तु जिस के बन्‍धन में हम थे उसके लिये मर कर, अब व्यवस्था से ऐसे छूट गए, कि लेख की पुरानी रीति पर नहीं, वरन आत्मा की नई रीति पर सेवा करते हैं।

एक साल में बाइबल:
  • गिनती ३४-३६
  • मरकुस ९:३०-५०

शुक्रवार, 4 मार्च 2011

स्वतंत्र कैसे हों?

हर कोई स्वतंत्रता चाहता है, लेकिन स्वतंत्रता के प्रयत्न कभी कभी बन्धनों में बांध देते हैं। बाइबल शिक्षिका हेन्रियेटा मीयरस सच्ची स्वतंत्रता का भेद जानती थीं। उन्होंने कहा, "पक्षी आकाश में स्वतंत्र है, लेकिन उसी पक्षी को आप पानी में डाल दीजिए और वह अपनी स्वतंत्रता खो देगा। इसी प्रकार एक मसीही विश्वासी भी जब तक परमेश्वर की आज्ञाकरिता में जीता है और परमेश्वर की इच्छा पूरी करता रहता है, स्वतंत्र है। यह परमेश्वर समर्पण का जीवन परमेश्वर की सन्तानों के लिये वैसे ही स्वभाविक है जैसे मछली के लिये जल और पक्षी के लिये आकाश में रहने का जीवन।"

बुद्धिमान राजा सुलेमान ने अपने पुत्र को समझाने के लिये उसे उपदेश दिया कि सच्ची स्वतंत्रता केवल परमेश्वर पर केंद्रित जीवन रीति द्वारा ही संभव है, क्योंकि परमेश्वर ने इसी के लिये ही हमारी सृष्टि करी है। इसकी तुलना में, जो कोई परमेश्वर के इस सत्य के विमुख चलता है, वह अवश्य ही बन्धुवाई में पड़ता है। नीतिवचन का १६वां अध्याय वर्णन करता है उस स्वतंत्रता और सन्तुष्टि का जो नम्रता, विश्वास, आत्म संयम और अच्छे बोल-चाल का पालन करने से मिलती है। साथ ही यह अध्याय चेतावनी भी देता है उस अवश्यंभावी बन्धुवाई के विष्य में जो उन लोगों के जीवन में आ जाती है जो विद्रोह, घमंड, बैर, द्वेष और दूसरों के लिये जानबूझ कर परेशानी खड़ी करने वालों को मिलती है।

बाइबल का नया नियम हमें प्रभु यीशु से परिचय करवाता है - हमारी स्वतंत्रता का एकमात्र आधार। हमारे उस सृष्टिकर्ता और उद्धारकर्ता ने कहा, "...यदि तुम मेरे वचन में बने रहोगे, तो सचमुच मेरे चेले ठहरोगे। और सत्य को जानोगे, और सत्य तुम्हें स्‍वतंत्र करेगा।" (यूहन्ना ८:३१, ३२)

सत्य को जानिये, सत्य ही आपको स्वतंत्र करेगा। - मार्ट डी हॉन


सच्ची स्वतंत्रता अपनी मनमर्ज़ी करने में नहीं वरन परमेश्वर की मर्ज़ी करने में है।

दुष्ट अपने ही अधर्म के कर्मों से फंसेगा, और अपने ही पाप के बन्धनों में बन्धा रहेगा। - नीतिवचन ५:२२

बाइबल पाठ: नीतिवचन १६:१६-३३
बुद्धि की प्राप्ति चोखे सोने से क्या ही उत्तम है! और समझ की प्राप्ति चान्दी से अति योग्य है।
बुराई से हटना सीधे लोगों के लिये राजमार्ग है, जो अपने चालचलन की चौकसी करता, वह अपने प्राण की भी रक्षा करता है।
विनाश से पहिले गर्व, और ठोकर खाने से पहिले घमण्ड होता है।
घमण्डियों के संग लूट बांट लने से, दीन लोगों के संग नम्र भाव से रहना उत्तम है।
जो वचन पर मन लगाता, वह कल्याण पाता है, और जो यहोवा पर भरोसा रखता, वह धन्य होता है।
जिसके ह्रृदय में बुद्धि है, वह समझ वाला कहलाता है, और मधुर वाणी के द्वारा ज्ञान बढ़ता है।
जिसके बुद्धि है, उसके लिये वह जीवन का सोता है, परन्तु मूढ़ों को शिक्षा देना मूढ़ता ही होती है।
बुद्धिमान का मन उसके मुंह पर भी बुद्धिमानी प्रगट करता है, और उसके वचन में विद्या रहती है।
मनभावने वचन मधु भरे छते की नाईं प्राणों को मीठे लगते, और हड्डियों को हरी-भरी करते हैं।
ऐसा भी मार्ग है, जो मनुष्य को सीधा देख पड़ता है, परन्तु उसके अन्त में मृत्यु ही मिलती है।
परिश्रमी की लालसा उसके लिये परिश्रम करती है, उसकी भूख तो उसको उभारती रहती है।
अधर्मी मनुष्य बुराई की युक्ति निकालता है, और उसके वचनों से आग लगा जाती है।
टेढ़ा मनुष्य बहुत झगड़े को उठाता है, और कानाफूसी करने वाला परम मित्रों में भी फूट करा देता है।
उपद्रवी मनुष्य अपने पड़ोसी को फुसला कर कुमार्ग पर चलाता है।
आंख मूंदने वाला छल की कल्पनाएं करता है, और ओंठ दबाने वाला बुराई करता है।
पक्के बाल शोभायमान मुकुट ठहरते हैं; वे धर्म के मार्ग पर चलने से प्राप्त होते हैं।
विलम्ब से क्रोध करना वीरता से, और अपने मन को वश में रखना, नगर के जीत लेने से उत्तम है।
चिट्ठी डाली जाती तो है, परन्तु उसका निकलना यहोवा ही की ओर से होता है।

एक साल में बाइबल:
  • गिनती ३१-३३
  • मरकुस ९:१-२९

गुरुवार, 3 मार्च 2011

महान उद्धारकर्ता

जब तत्कालीन अमरीकी राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन गुलाम प्रथा के विरुद्ध जंग जीत चुके और उनके द्वारा गुलामों की आज़ादी के घोष्णापत्र पर हस्ताक्षर करने का समय आया तो हस्ताक्षर करने के लिये उन्होंने दो बार कलम उठाई और वापस रख दी। अपने गृह मंत्री की ओर मुड़कर उन्होंने कहा, "मैं सुबह ९ बजे से लोगों से हाथ मिला रहा हूँ, अब मेरा दाहिना हाथ थक कर सुन्न हो गया है। इस घोष्णापत्र पर हस्ताक्षर करते समय यदि मेरा हाथ कांपा, तो बाद में इस घोष्णापत्र को देखने वाले लोग यही कहेंगे कि गुलामों की आज़ादी की घोष्णा करते समय अब्राहम लिंकन हिचकिचा रहा था।" इसके बाद उन्होंने कलम एक बार फिर उठाई और धीरे धीरे लेकिन स्थिर हाथ से अपना हस्ताक्षर उस घोष्णापत्र पर कर दिया। इस एतिहासक कार्य ने उन्हें एक महान मुक्तिदाता के रूप में संसार का प्रीय और आदरणीय नेता बना दिया।

लिंकन ने जिस से यह मुक्ति और समस्त मानव जाति का एक समान होने का पाठ सीखा वह उनसे भी कहीं अधिक महान उद्धारकर्ता है - प्रभु यीशु। प्रभु यीशु ने क्रूस पर अपने बलिदान द्वारा, अपने खून से पापों की गुलामी से हमारी स्वतंत्रता के घोष्णापत्र पर अपने हस्ताक्षर किये, और समस्त मानव जाति के लिये पाप से स्वतंत्रता का मार्ग खोल दिया।

ओस्वॉल्ड चैम्बरस ने लिखा, "यह कभी गंवारा मत कीजिए कि क्रूस मसीह के शहीद होने का चिन्ह है। क्रूस तो उस महान विजय का साधन था जिसने नरक की नेंव हिला दी। यीशु ने हर एक मानव पुत्र के लिये परमेश्वर से संपर्क करने का मार्ग तैयार कर के दे दिया।"

पौलुस ने लिखा "सो अब जो मसीह यीशु में हैं, उन पर दण्‍ड की आज्ञा नहीं" (रोमियों ८:१) - मसीह यीशु पर विश्वास द्वारा हम पाप के दण्ड से बच जाते हैं। इस विश्वास द्वारा हमारे अन्दर आकर निवास करने वाला परमेश्वर का आत्मा हमें पाप से विमुख होकर उसके लिये जी सकने की सामर्थ और मार्ग दर्शन देता है; तथा इस प्रकार जिया गया जीवन ही उस अति महान उद्धारकर्ता मसीह को सच्चा आदर देता है। - डेनिस डी हॉन


मसीह की खाली कब्र पूर्ण उद्धार का निश्चय है।

इसलिये जैसा एक अपराध सब मनुष्यों के लिये दण्‍ड की आज्ञा का कारण हुआ, वेसा ही एक धर्म का काम भी सब मनुष्यों के लिये जीवन के निमित्त धर्मी ठहराए जाने का कारण हुआ। - रोमियों ५:१८

बाइबल पाठ: रोमियों ५:१२-२१

इसलिये जैसा एक मनुष्य के द्वारा पाप जगत में आया, और पाप के द्वारा मृत्यु आई, और इस रीति से मृत्यु सब मनुष्यों में फैल गई, इसलिये कि सब ने पाप किया।
क्‍योंकि व्यवस्था के दिए जाने तक पाप जगत में तो था, परन्‍तु जहां व्यवस्था नहीं, वहां पाप गिना नहीं जाता।
तौभी आदम से लेकर मूसा तक मृत्यु ने उन लोगों पर भी राज्य किया, जिन्‍होंने उस आदम के अपराध की नाईं जो उस आने वाले का चिन्‍ह है, पाप न किया।
पर जैसा अपराध की दशा है, वैसी अनुग्रह के वरदान की नहीं, क्‍योंकि जब एक मनुष्य के अपराध से बहुत लोग मरे, तो परमेश्वर का अनुग्रह और उसका जो दान एक मनुष्य के, अर्थात यीशु मसीह के अनुग्रह से हुआ बहुतेरे लागों पर अवश्य ही अधिकाई से हुआ।
और जैसा एक मनुष्य के पाप करने का फल हुआ, वैसा ही दान की दशा नहीं, क्‍योंकि एक ही के कारण दण्‍ड की आज्ञा का फैसला हुआ, परन्‍तु बहुतेरे अपराधों से ऐसा वरदान उत्‍पन्न हुआ, कि लोग धर्मी ठहरे।
क्‍योंकि जब एक मनुष्य के अपराध के कराण मृत्यु ने उस एक ही के द्वारा राज्य किया, तो जो लोग अनुग्रह और धर्मरूमी वरदान बहुतायत से पाते हैं वे एक मनुष्य के, अर्थातयीशु मसीह के द्वारा अवश्य ही अनन्‍त जीवन में राज्य करेंगे।
इसलिये जैसा एक अपराध सब मनुष्यों के लिये दण्‍ड की आज्ञा का कारण हुआ, वेसा ही एक धर्म का काम भी सब मनुष्यों के लिये जीवन के निमित्त धर्मी ठहराए जाने का कारण हुआ।
क्‍योंकि जैसा एक मनुष्य के आज्ञा न मानने से बहुत लोग पापी ठहरे, वैसे ही एक मनुष्य के आज्ञा मानने से बहुत लोग धर्मी ठहरेंगे।
और व्यवस्था बीच में आ गई, कि अपराध बहुत हो, परन्‍तु जहां पाप बहुत हुआ, वहां अनुग्रह उस से भी कहीं अधिक हुआ।
कि जैसा पाप ने मृत्यु फैलाते हुए राज्य किया, वैसा ही हमारे प्रभु यीशु मसीह के द्वारा अनुग्रह भी अनन्‍त जीवन के लिये धर्मी ठहराते हुए राज्य करे।

एक साल में बाइबल:
  • गिनती २८-३०
  • मरकुस ८:२२-३८

बुधवार, 2 मार्च 2011

उपकारी बन्धन

मेरे बचपन के पसंदीदा कामों में से एक था पतंग उड़ाना। घंटों तक उस कागज़ की बनी ’चिड़िया’ को अपनी उंगली से अटके धागे के साथ अटखेलियां कराने में मुझे बड़ा मज़ा आता। यदि वह पतंग बोल सकती तो शायद कहती, "देखो मैं कैसे मज़े से इतनी ऊँचाई पर उड़ सकती हूँ, आकाश में लहरा सकती हूँ। यह सब उस लड़के के बावजूद जो इस धागे से मुझे बांधकर अपनी उंगली के इशारों से मुझे नचा रहा है, मुझे यह कतई पसंद नहीं है। यदि यह धागा मुझे बांधे हुए न होता तो मैं और भी कितना ऊँचा उड़ जाती, कहां कहां चली जाती।"

कभी कभी पतंग उड़ाते समय मेरा ध्यान बंट जाता और मैं धागे को ढीला छोड़ देता। ढील मिलते ही वह पतंग डगमगाती हुई नीचे की ओर आने लगती और यदि समय रहते मैं उसे न संभालता तो किसी पेड़ में फंस कर फट जाती और कभी उड़ने नहीं पाती। ऐसे में वह घमंडी पतंग क्या कहती? यदि वह सच्ची होती तो उसे मानना पड़ता कि जिस धागे और लड़के को वह रोकने वाले बन्धन समझ रही थी वे ही उसके उड़ सकने और सुरक्षित रहने के वास्तविक कारण थे। उनके नियंत्रण से ही उसका जीवन था, उसकी क्षमता थी, वह उड़ पाती थी।

हमारे मसीही जीवन की उन्नति का एक बड़ा कारण हमारे जीवन में आने वाली कठिनाईयां और बाधाएं हैं। हम इन परीक्षाओं के कारण अक्सर फड़फड़ाते हैं लेकिन यदि परमेश्वर इन्हें हमारे जीवनों से निकल दे तो हमारे जीवन उस ढील मिली पतंग की तरह डगमगाने वाले हो जाएंगे और कमज़ोर होकर कर नीचे की ओर गिरने लगेंगे। याकूब ने कहा "हे मेरे भाइयों, जब तुम नाना प्रकार की परीक्षाओं में पड़ो तो इसे पूरे आनन्‍द की बात समझो, यह जानकर, कि तुम्हारे विश्वास के परखे जाने से धीरज उत्‍पन्न होता है।" - याकूब १:२, ३

ये परीक्षाएं ही वे उपकारी बन्धन हैं जिन से बांध कर और अपनी निगरानी में रखकर परमेश्वर अपने बच्चों को उंचाईयों को छूते हुए देखना चाहता है। - पौल वैन गोर्डर


यदि जीवन मार्ग में परीक्षाओं के रोड़े ना होते तो जीवन मार्ग में सम्भलकर चलना भी नहीं होता।

हे मेरे भाइयों, जब तुम नाना प्रकार की परीक्षाओं में पड़ो तो इसे पूरे आनन्‍द की बात समझो, यह जानकर, कि तुम्हारे विश्वास के परखे जाने से धीरज उत्‍पन्न होता है। - याकूब १:२, ३

बाइबल पाठ: याकूब १:१-१२
परमेश्वर के और प्रभु यीशु मसीह के दास याकूब की ओर से उन बारहों गोत्रों को जो तित्तर बित्तर होकर रहते हैं नमस्‍कार पहुंचे।
हे मेरे भाइयों, जब तुम नाना प्रकार की परीक्षाओं में पड़ो
तो इसे पूरे आनन्‍द की बात समझो, यह जानकर, कि तुम्हारे विश्वास के परखे जाने से धीरज उत्‍पन्न होता है।
पर धीरज को अपना पूरा काम करने दो, कि तुम पूरे और सिद्ध हो जाओ और तुम में किसी बात की घटी न रहे।
पर यदि तुम में से किसी को बुद्धि की घटी हो, तो परमेश्वर से मांगे, जो बिना उलाहना दिए सब को उदारता से देता है और उस को दी जाएगी।
पर विश्वास से मांगे, और कुछ सन्‍देह न करे; क्‍योंकि सन्‍देह करने वाला समुद्र की लहर के समान है जो हवा से बहती और उछलती है।
ऐसा मनुष्य यह न समझे, कि मुझे प्रभु से कुछ मिलेगा।
वह व्यक्ति दुचित्ता है, और अपनी सारी बातों में चंचल है।
दीन भाई अपने ऊंचे पद पर घमण्‍ड करे।
और धनवान अपनी नीच दशा पर: क्‍योंकि वह घास के फूल की नाई जाता रहेगा।
क्‍योंकि सूर्य उदय होते ही कड़ी धूप पड़ती है और घास को सुखा देती है, और उसका फूल फड़ जाता है, और उस की शोभा जाती रहती है; उसी प्रकार धनवान भी अपने मार्ग पर चलते चलते धूल में मिल जाएगा।
धन्य है वह मनुष्य, जो परीक्षा में स्थिर रहता है क्‍योंकि वह खरा निकल कर जीवन का वह मुकुट पाएगा, जिस की प्रतिज्ञा प्रभु ने अपने प्रेम करने वालों को दी है।
एक साल में बाइबल:
  • गिनती २६-२७
  • मरकुस ८:१-२१

मंगलवार, 1 मार्च 2011

स्वतंत्रता का जीवन

हमारे इलाके के स्थानीय अखबार में एक ३९ वर्षीय ऐसे आदमी की खबर छपी जिसने अपने जीवन के केवल १६ महीने ही कारावास से बाहर बिताये थे। उसके जन्म के समय उसकी माता जेल में थी और वह भी उसके साथ १४ वर्ष की आयु तक जेल ही में बड़ा हुआ। जब उसे बाहर भेजा गया तो उसने कई जुर्म करे और वापस कारावास में आ गया। पूछे जाने पर उसने बताया कि, "मुझे यहां से बाहर रहना नहीं आता। यही मेरा घर है, और मैं सारी उम्र यहीं रहना चाहता हूँ।" इस अभागे मनुष्य को बन्धुवाई में ही सुरक्षा का अनुभव होता था, उसके लिये बन्धुवाई ही स्वतंत्रता थी।

इसी प्रकार कई लोगों को आत्मिक स्वतंत्रता के साथ परमेश्वर की सेवा करना बहुत कठिन और धार्मिक रीति रिवाज़ों के बाहरी दिखावे के साथ बने रहना अधिक आसान लगता है। यही कारण था कि प्रथम शताब्दी की गलतिया प्रांत में स्थित मसीही मंडली के कुछ लोगों को मूसा द्वारा दिये गए नियमों का पालन करना ज़्यादा आसान लगा, यद्यपि अब मसीह में आने के बाद उन नियमों के पालन करने की कोई बाध्यता उनपर नहीं थी। सम्भवतः उन्हें अपनी यह स्वतंत्रता घबरा देने वाली लगी, वे समझ नहीं सके कि इस स्वतंत्रता के साथ कैसे रहा जाए और वे वापस रीति रिवाज़ों के बन्धनों में चले जाना चाहते थे।

आज भी कई मसीही भी ऐसा ही करते हैं। वे अपनी धार्मिक सुरक्षा ऐसे विधि-विधानों में ढूंढते हैं जो केवल बाहरी रूप से "अच्छे व्यवहार" में बने रहने पर निर्भर हो। ऐसे लोगों के लिये क्या कुछ करना है, और क्या नहीं; कैसे रहना और जीना है, कैसे नहीं - यह उनकी संस्कृति और समाज निर्धारित करता है, बाइबल नहीं। वे स्वतंत्रता में नहीं, बन्धुवाई में जीना चाहते हैं।

संस्कृति और समाज का आदर तब ही सार्थक होता है जब हम अपने मनफिराव द्वारा बदले हुए जीवन को समाज में प्रदर्शित करें और समाज के समक्ष हम परमेश्वर के प्रति उससे मिले उद्धार के लिये धन्यवादी रहें। उद्धार द्वारा मिली स्वतंत्रता और जीवन उद्देश्य हमें समाज में और भी अधिक उपयोगी, ज़िम्मेदार और विश्वसनीय बना देता है, तथा परमेश्वर से प्राप्त उद्धार के जीवन और स्वत्रंत्रता की गवाही प्रस्तुत करता है।

वैधानिकता और रीति रिवाज़ों की दीवारों के पीछे छिप कर परमेश्वर द्वारा दी जाने वाली असली स्वतंत्रता से मुँह मत मोड़िये। - मार्ट डी हॉन


जो मसीह के बन्धुए हैं केवल वही वासत्व में स्वतंत्र हैं।

क्‍या तुम ऐसे निर्बुद्धि हो, कि आत्मा की रीति पर आरम्भ करके अब शरीर की रीति पर अन्‍त करोगे? - गलतियों ३:३

बाइबल पाठ: गलतियों ५:१-१४

मसीह ने स्‍वतंत्रता के लिये हमें स्‍वतंत्र किया है सो इसी में स्थिर रहो, और दासत्‍व के जूए में फिर से न जुतो।
देखो, मैं पौलुस तुम से कहता हूं, कि यदि खतना कराओगे, तो मसीह से तुम्हें कुछ लाभ न होगा।
फिर भी मैं हर एक खतना कराने वाले को जताए देता हूं, कि उसे सारी व्यवस्था माननी पड़ेगी।
तुम जो व्यवस्था के द्वारा धर्मी ठहरना चाहते हो, मसीह से अलग और अनुग्रह से गिर गए हो।
क्‍योंकि आत्मा के कारण, हम विश्वास से, आशा की हुई धामिर्कता की बाट जोहते हैं।
और मसीह यीशु में न खतना, न खतनारिहत कुछ काम का है, परन्‍तु केवल विश्वास जो प्रेम के द्वारा प्रभाव करता है।
तुम तो भली भांति दौड रहे थे, अब किस ने तुम्हें रोक दिया, कि सत्य को न मानो?
ऐसी सीख तुम्हारे बुलाने वाले की ओर से नहीं।
थोड़ा सा खमीर सारे गूंधे हुए आटे को खमीर कर डालता है।
मैं प्रभु पर तुम्हारे विषय में भरोसा रखता हूं, कि तुम्हारा कोई दूसरा विचार न होगा परन्‍तु जो तुम्हें घबरा देता है, वह कोई क्‍यों न हो दण्‍ड पाएगा।
परन्‍तु हे भाइयो, यदि मैं अब तक खतना का प्रचार करता हूं, तो क्‍यों अब तक सताया जाता हूं? फिर तो क्रूस की ठोकर जाती रही।
भला होता, कि जो तुम्हें डांवाडोल करते हैं, वे काट डाले जाते!
हे भाइयों, तुम स्‍वतंत्र होने के लिये बुलाए गए हो परन्‍तु ऐसा न हो, कि यह स्‍वतंत्रता शारीरिक कामों के लिये अवसर बने, वरन प्रेम से एक दूसरे के दास बनो।
क्‍योंकि सारी व्यवस्था इस एक ही बात में पूरी हो जाती है, कि तू अपने पड़ोसी से अपने समान प्रेम रख।

एक साल में बाइबल:
  • गिनती २३-२५
  • मरकुस ७:१४-३७

सोमवार, 28 फ़रवरी 2011

परमेश्वर की ’ज़बरदस्ती’?

एक मोटरसाईकिल चालकों का दल अपने राज्य की राजधानी की ओर जा रहा था। उनका उद्देश्य था वहां जाकर अनिवार्यतः हेल्मेट पहनने के नियम के विरोध में प्रदर्शन करना। उन्हें एक नियत स्थान पर जमा होकर कुछ भाष्ण देने थे और अपना विरोध दर्ज करने के लिये अपने हेल्मेट जलाने थे। लेकिन विरोध स्थल पर जाते हुए एक चालक अपनी मोटरसाईकिल का नियंत्रण खो बैठा और उसका गंभीर एक्सीडेंट हो गया। उसके सिर और चेहरे पर काफी गहरी चोटें आईं, जिन से वह बच जाता यदि उसने अपनी हेल्मेट पहनी हुई होती!

कभी कभी हम भी इन्हीं चालकों की तरह व्यवहार करते हैं। परमेश्वर द्वारा हमारे बचाव के लिये दिये गए नियम हमें अनुचित और बाधापूर्ण लगते हैं। यद्यपि हम परमेश्वर से प्रार्थना करते हैं और चाहते हैं कि उसकी सुरक्षा हमारे साथ बनी रहे, फिर भी उसके निर्देशों के विरुद्ध हम बलवा करते हैं, उनका पालन नहीं करते तथा परमेश्वर के भले उद्देश्यों का अनुचित अर्थ निकलते हैं; हम इस बात को समझना नहीं चाहते के परमेश्वर ने अपने प्रेम में हमारी भलाई और सुरक्षा के लिये ही ये नियम और निर्देश दिये हैं।

अनुशासन और नियमों के पालन से मुक्त होने से हमें अधिक खुशी, स्वतंत्रता, शांति और सुरक्षा मिल जाएगी - ऐसा भी नहीं है; वरन यह अवश्य है कि हम अपना आदर, अपने जीवन का उद्देश्य और अपनी सुरक्षा खो बैठेंगे। संसार भर में सामाजिक व्यवहार के आंकड़े गवाह हैं कि जिनके जीवनों में परमेश्वर का भय और आदर नहीं है, और जो अपनी मनमानी करने पर उतारू रहते हैं, उनके जीवनों में दुर्व्यवहार, तलाक, हिंसा, अशांति और शारीरिक एवं मान्सिक रोग अधिक पाए जाते हैं।

हम नहीं चाहते कि हमारे जीवन नियमों द्वारा बन्धे हों, परन्तु जब हम इसका विकल्प यशायाह के पहले अध्याय में पढ़ते हैं तो स्पष्ट हो जाता है कि परमेश्वर के नियम सदैव हमारी भलाई ही के लिये हैं। परमेश्वर ज़बरदस्ती का परमेश्वर नहीं, प्रेम का परमेश्वर है। - मार्ट डी हॉन


यदि आप अनुशासन का पालन नहीं करना चाहते तो नियमों को दोषी मत ठहराईये।

यहोवा कहता है, आओ, हम आपस में वादविवाद करें: तुम्हारे पाप चाहे लाल रंग के हों, तौभी वे हिम की नाईं उजले हो जाएंगे और चाहे अर्गवानी रंग के हों, तौभी वे ऊन के समान श्वेत हो जाएंगे। - यशायाह १:१८

बाइबल पाठ: यशायाह १:१-२०
आमोस के पुत्र यशायाह का दर्शन, जिसको उस ने यहूदा और यरूशलेम के विषय में उज्जियाह, योताम, आहाज, और हिजकिय्याह नाम यहूदा के राजाओं के दिनों में पाया।
हे स्वर्ग सुन, और हे पृथ्वी कान लगा क्योंकि यहोवा कहता है: मैं ने बाल-बच्चों का पालन पोषण किया, और उनको बढ़ाया भी, परन्तु उन्होंने मुझ से बलवा किया।
बैल तो अपने मालिक को और गदहा अपने स्वामी की चरनी को पहिचानता है, परन्तु इस्राएल मुझें नहीं जानता, मेरी प्रजा विचार नहीं करती।
हाय, यह जाति पाप से कैसी भरी है! यह समाज अधर्म से कैसा लदा हुआ है! इस वंश के लोग कैसे कुकर्मी हैं, ये लड़केबाले कैसे बिगड़े हुए हैं! उन्होंने यहोवा को छोड़ दिया, उन्होंने इस्राएल के पवित्र को तुच्छ जाना है! वे पराए बनकर दूर हो गए हैं।
तुम बलवा कर करके क्यों अधिक मार खाना चाहते हो? तुम्हारा सिर घावों से भर गया, और तुम्हारा ह्रृदय दु:ख से भरा है।
नख से सिर तक कहीं भी कुछ आरोग्यता नहीं, केवल चोट और कोड़े की मार के चिन्ह और सड़े हुए घाव हैं जो न दबाये गए, न बान्धे गए, न तेल लगाकर नरमाये गए हैं।
तुम्हारा देश उजड़ा पड़ा है, तुम्हारे नगर भस्म हो गए हैं तुम्हारे खेतों को परदेशी लोग तुम्हारे देखते ही निगल रहे हैं; वह परदेशियों से नाश किए हुए देश के समान उजाड़ है।
और सिय्योन की बेटी दाख की बारी में की झोंपड़ी की नाईं छोड़ दी गई है, वा ककड़ी के खेत में की छपरिया या घिरे हुए नगर के समान अकेली खड़ी है।
यदि सेनाओं का यहोवा हमारे थोड़े से लोगों को न बचा रखता, तो हम सदोम के समान हो जाते, और अमोरा के समान ठहरते।
हे सदोम के न्याइयों, यहोवा का वचन सुनो! हे अमोरा की प्रजा, हमारे परमेश्वर की शिक्षा पर कान लगा।
यहोवा यह कहता है, तुम्हारे बहुत से मेलबलि मेरे किस काम के हैं? मैं तो मेढ़ों के होमबलियों से और पाले हुए पशुओं की चर्बी से अघा गया हूं;
मैं बछड़ों वा भेड़ के बच्चों वा बकरों के लोहू से प्रसन्न नहीं होता। तुम जब अपने मुंह मुझे दिखाने के लिये आते हो, तब यह कौन चाहता है कि तुम मेरे आंगनों को पांव से रौंदो?
व्यर्थ अन्नबलि फिर मत लाओ; धूप से मुझे घृणा है। नये चांद और विश्रामदिन का मानना, और सभाओं का प्रचार करना, यह मुझे बुरा लगता है। महासभा के साथ ही साथ अनर्थ काम करना मुझ से सहा नहीं जाता।
तुम्हारे नये चांदों और नियत पर्वों के मानने से मैं जी से बैर रखता हूं; वे सब मुझे बोझ से जान पड़ते हैं, मैं उनको सहते सहते उकता गया हूं।
जब तुम मेरी ओर हाथ फैलाओ, तब मैं तुम से मुंह फेर लूंगा तुम कितनी ही प्रार्थना क्यों न करो, तौभी मैं तुम्हारी न सुनूंगा क्योंकि तुम्हारे हाथ खून से भरे हैं।
अपने को धोकर पवित्र करो: मेरी आंखों के साम्हने से अपने बुरे कामों को दूर करो भविष्य में बुराई करना छोड़ दो,
भलाई करना सीखो, यत्न से न्याय करो, उपद्रवी को सुधारो, अनाथ का न्याय चुकाओ, विधवा का मुकद्दमा लड़ो।
यहोवा कहता है, आओ, हम आपस में वादविवाद करें: तुम्हारे पाप चाहे लाल रंग के हों, तौभी वे हिम की नाईं उजले हो जाएंगे और चाहे अर्गवानी रंग के हों, तौभी वे ऊन के समान श्वेत हो जाएंगे।
यदि तुम आज्ञाकारी होकर मेरी मानो,
तो इस देश के उत्तम से उत्तम पदार्थ खाओगे और यदि तुम ने मानो और बलवा करो, तो तलवार से मारे जाओगे; यहोवा का यही वचन है।

एक साल में बाइबल:
  • गिनती २०-२२
  • मरकुस ७:१-१३

रविवार, 27 फ़रवरी 2011

दासत्व - स्वतंत्र होने के लिये!

अभी भी मेरे मस्तिष्क में उस तीर से बिंधे हुए लेकिन ज़िंदा और उड़ सकने वले कैनेडियन हंस का चित्र ताज़ा है। एक धनुर्धारी शिकरी का निशाना तो सही लगा, लेकिन वह हंस मरा नहीं। वह न केवल उस शिकारी से, परन्तु जानवरों और पक्षियों की रक्षा और देखभाल करने वाले लोगों से भी लगभग एक महीने तक बचता रहा। उसे पकड़ने के लिये उन्होंने उसे नशीले पदार्थ मिले दाने खिलाने की कोशिश करी, छोटी तोप जैसी मशीनों से जाल उस की ओर ऊंचाई तक फेंका, लेकिन वह पकड़ में नहीं आया। आखिरकर उसे मछली पकड़ने के जाल में फांसा गया, फिर पक्षियों के डाक्टरों ने ऑपरेशन द्वारा उसके शरीर में फंसा हुआ वह तीर निकाला, और फिर उसे आज़ाद कर दिया। यदि हंस सोचने की शक्ति रखते होंगे तो वह हंस बाद में सोचता होगा, क्यों वह इतने दिन तक इतनी मेहनत करके, अपने पकड़ने वालों से बचता रहा? उन्होंने तो उसकी भलाई के लिये ही उसे बन्धुआ बनाना चाहा था।

इस बन्धुआ बने हंस के अनुभव ने मुझे उन लोगों की याद दिलाई जिनके बारे में यूहन्ना ८ अध्याय में लिखा गया है। वे लोग भी अपनी गंभीर स्थिति के बारे में समझ नहीं पा रहे थे, और न ही प्रभु यीशु के उनके प्रति उद्देश्यों को समझ पा रहे थे। उन लोगों को लगा कि प्रभु यीशु उन्हें बन्धुआ बनाना चाहता है, क्योंकि प्रभु उनसे अपने जीवन उसे समर्पित करने और प्रभु के चेले बनने को कह रहा था। प्रभु ने उनसे याचना करी कि वे उसके आत्मिक दास बन जाएं, लेकिन वे नहीं समझ पाए कि प्रभु यह उनसे उन्हें उनके पाप के दोष से स्वतंत्र करने के लिये कह रहा था।

कुछ ऐसी ही गलतफहमी में रहकर आज भी लोग प्रभु यीशु मसीह के पास आना नहीं चाहते। वे पाप से बिंधे हुए इधर उधर बचते फिरते हैं, लेकिन जो उन्हें पाप से मुक्ति और उद्धार दे सकता है, उस प्रभु के आधीन नहीं होना चाहते। वे समझ नहीं पाते कि प्रभु का उद्देश्य उन्हें दास बनाना नहीं वरन उन्हें स्वतंत्र करना है - पाप और उसके दण्ड से स्वतंत्र, जो स्वतंत्रता और कहीं नहीं मिल सकती, और वह भी सेंत-मेत, केवल एक साधारण विश्वास से। यह स्वतंत्रता न केवल हमारे अनन्त भविष्य से संबंधित है, वरन पृथ्वी पर हमारे वर्तमान से भी संबंधित है क्योंकि प्रतिदिन मसीह के साथ चलने से हम उसके संरक्षण में बने रहते हैं।

प्रभु के दास होकर ही हम वासत्व में स्वतंत्र होते हैं। - मार्ट डी हॉन


उद्धार द्वारा आया परिवर्तन हमें हमारे पाप के बन्धनों से मुक्त कर देता है।


क्‍योंकि जो दास की दशा में प्रभु में बुलाया गया है, वह प्रभु का स्‍वतंत्र किया हुआ है: - १ कुरिन्थियों ७:२२



बाइबल पाठ: यूहन्ना ८:३१-४६


तब यीशु ने उन यहूदियों से जिन्‍होंने उस की प्रतीति की थी, कहा, यदि तुम मेरे वचन में बने रहोगे, तो सचमुच मेरे चेले ठहरोगे।
और सत्य को जानोगे, और सत्य तुम्हें स्‍वतंत्र करेगा।
उन्‍होंने उस को उत्तर दिया कि हम तो इब्राहीम के वंश से हैं और कभी किसी के दास नहीं हुए, फिर तू क्‍योंकर कहता है, कि तुम स्‍वतंत्र हो जाओगे?
यीशु ने उन को उत्तर दिया मैं तुम से सच सच कहता हूं कि जो कोई पाप करता है, वह पाप का दास है।
और दास सदा घर में नहीं रहता, पुत्र सदा रहता है।
सो यदि पुत्र तुम्हें स्‍वतंत्र करेगा, तो सचमुच तुम स्‍वतंत्र हो जाओगे।
मैं जानता हूं कि तुम इब्राहीम के वंश से हो तौभी मेरा वचन तुम्हारे ह्रृदय में जगह नहीं पाता, इसलिये तुम मुझे मार डालना चाहते हो।
मैं वही कहता हूं, जो अपने पिता के यहां देखा है और तुम वही करते रहते हो जो तुमने अपने पिता से सुना है।
उन्‍होंने उन को उत्तर दिया, कि हमारा पिता तो इब्राहीम है: यीशु ने उन से कहा, यदि तुम इब्राहीम के सन्‍तान होते, तो इब्राहीम के समान काम करते।
परन्‍तु अब तुम मुझ ऐसे मनुष्य को मार डालना चाहते हो, जिस ने तुम्हें वह सत्य वचन बताया जो परमेश्वर से सुना, यह तो इब्राहीम ने नहीं किया था।
तुम अपने पिता के समान काम करते हो: उन्‍होंने उस से कहा, हम व्यभिचार से नहीं जन्मे, हमारा एक पिता है अर्थात परमेश्वर।
यीशु ने उन से कहा यदि परमेश्वर तुम्हारा पिता होता, तो तुम मुझ से प्रेम रखते; क्‍योंकि मैं परमेश्वर में से निकल कर आया हूं मैं आप से नहीं आया, परन्‍तु उसी ने मुझे भेजा।
तुम मेरी बात क्‍यों नहीं समझते? इसलिये कि मेरा वचन सुन नहीं सकते।
तुम अपने पिता शैतान से हो, और अपने पिता की लालसाओं को पूरा करना चाहते हो। वह तो आरम्भ से हत्यारा है, और सत्य पर स्थिर न रहा, क्‍योंकि सत्य उस में है ही नहीं: जब वह झूठ बोलता, तो अपने स्‍वभाव ही से बोलता है, क्‍योंकि वह झूठा है, वरन झूठ का पिता है।
परन्‍तु मैं जो सच बोलता हूं, इसीलिये तुम मेरी प्रतीति नहीं करते।
तुम में से कौन मुझे पापी ठहराता है? और यदि मैं सच बोलता हूं, तो तुम मेरी प्रतीति क्‍यों नहीं करते?

एक साल में बाइबल:
  • गिनती १७-१९
  • मरकुस ६:३०-५६