ई-मेल संपर्क / E-Mail Contact

इन संदेशों को ई-मेल से प्राप्त करने के लिए अपना ई-मेल पता इस ई-मेल पर भेजें : rozkiroti@gmail.com / To Receive these messages by e-mail, please send your e-mail id to: rozkiroti@gmail.com

सोमवार, 16 मई 2011

स्तुति संगीत

एक पुरानी यहूदी किवदन्ती है कि जब परमेश्वर संसार की सृष्टि कर चुका तो उसने सभी स्वर्गदूतों को अपने पास बुलाया और उनसे पूछा कि वे इस रचना के विष्य में क्या विचार रखते हैं। उनमें से एक ने कहा, "बस एक बात की कमी है, यहाँ सृष्टिकर्ता की स्तुति नहीं सुनाई पड़ रही।" तब परमेश्वर ने संगीत सृजा, और वह हवा के बहने, पक्षियों की आवाज़ों और संसार की विभिन्न बातों में प्रकट होने लगा। परमेश्वर ने मनुष्य को संगीत की धुन पर गीत गाने का हुनर भी दिया, और सदियों से संगीत अनगिनित लोगों को प्रफुल्लित और आनन्दित करता आ रहा है।

संगीत परमेश्वर द्वारा दिये गये जीवन के उन अनुग्रहों में से है जिन्हें हम बहुत सामन्य समझते हैं और साधारणत्या उसकी कोई विशेष कीमत नहीं आंकते। यह एक ऐसा वरदान है जिसे हमने परमेश्वर से लेकर उसका सदुप्योग कम तथा दुरुप्योग अधिक किया है। हम संसार में संगीत के गलत प्रयोग और उसके साथ जुड़ी शर्मनाक व्यवहार की बातों को भली भांति जानते हैं। लेकिन भला संगीत परमेश्वर से मिली आशीश है; उससे दुखते हृदय सांत्वना पाते हैं, समयनुसार लोगों को प्रेर्णा मिलती है और विचिलित मन शांति पाते हैं। परमेश्वर की स्तुति संगीत में होकर हम अपने हृदयों को स्तुति में परम्श्वर के सम्मुख उठाते हैं और वह हमें मसीह के लिए जीने को प्रोत्साहित भी करता है।

हमें जब कभी मौका मिले, संगीत द्वारा अपने आत्मा की आवाज़ को अन्य विश्वासियों के साथ मिलाकर हम अपने हृदयों को परमेश्वर की स्तुति के लिए उठाएं, यह परमेश्वर को आदर देता है और हम विश्वासी भाई-बहिनों को उभारता है, आनन्दित करता है।

जब आप अन्य विश्वासियों के साथ मिलकर परमेश्वर की स्तुति गाएं तो स्तुति में संगीत के महत्व के एक नए एहसास के साथ ऐसा करें, परमेश्वर की महिमा के लिए एक नया गीत गाएं। - रिचर्ड डी हॉन


अपने भक्तों के सच्चे हृदय से निकले सतुति के गीतों से बढ़कर परमेश्वर के लिए कोई संगीत नहीं है।

हे सारी पृथ्वी के लोगों यहोवा का जयजयकार करो! आनन्द से यहोवा की आराधना करो! जयजयकार के साथ उसके सम्मुख आओ! - भजन १००:१, २


बाइबल पाठ: भजन १००

Psa 100:1 हे सारी पृथ्वी के लोगों यहोवा का जयजयकार करो!
Psa 100:2 आनन्द से यहोवा की आराधना करो! जयजयकार के साथ उसके सम्मुख आओ!
Psa 100:3 निश्चय जानो, कि यहोवा ही परमेश्वर है। उसी ने हम को बनाया, और हम उसी के हैं; हम उसकी प्रजा, और उसकी चराई की भेड़ें हैं।
Psa 100:4 उसके फाटकों से धन्यवाद, और उसके आंगनों में स्तुति करते हुए प्रवेश करो, उसका धन्यवाद करो, और उसके नाम को धन्य कहो!
Psa 100:5 क्योंकि यहोवा भला है, उसकी करूणा सदा के लिये, और उसकी सच्चाई पीढ़ी से पीढ़ी तक बनी रहती है।

एक साल में बाइबल:
  • २ राजा २४-२५
  • यूहन्ना ५:१-२४

रविवार, 15 मई 2011

आराधना

१९वीं शताब्दी के एक अविष्कारक जौन एरिकसन विश्व विख्यात वायलिन वादक ओले बुल के बचपन के मित्र थे; लेकिन वे कभी ओले के किसी संगीत समारोह में नहीं गए, क्योंकि उनका मानना था कि संगीत समय की बरबादी है। ओले अपने मित्र के इस रवैये से कभी हताश नहीं हुआ, और एक दिन वह अपने मित्र के कारखाने में पहुंचा और उसने अपना वायलिन बजाना आरंभ कर दिया। जौन एरिकसन ने पहले तो उसे रोकने का प्रयास किया, परन्तु जब अपने सभी कर्मचारियों को मंत्रमुग्ध होकर अपना सभी काम छोड़कर, संगीत का आनन्द लेते देखा तो उसने भी सुनना आरंभ कर दिया और थोड़ी ही देर में वह भी अपने कर्मचारियों के समान संगित से मंत्रमुग्ध हो गया। जब ओले ने वायलिन बजाना बन्द किया तो जौन उससे विनती करने लगा, "मत रुको! बजाते रहो! आज से पहले मैं ने न जाना था कि मैं अपने जीवन में क्या खोए बैठा हूँ।"

कुछ ऐसा ही हाल बहुतेरे मसीही विश्वासियों का है। वे परमेश्वर के वचन के अध्ययन, प्रार्थना और चर्च जाने के द्वारा अपने आत्मा का पोषण तो करते हैं, लेकिन जो परिपूर्ण्ता परमेश्वर उनके जीवनों मे चाहता है, वे उससे वंचित रहते हैं क्योंकि उनके जीवनों में परमेश्वर की आराधना नहीं है। न तो वे परमेश्वर की सृष्टि की सुन्दरता को निहरते हैं और न उस सृष्टि के रहस्यों को समझने का प्रयास करते हैं और वे परमेश्वर की विलक्षण प्रतिभा का आनन्द लेने और उसका गुणनुवाद करने से रह जाते हैं; कुछ अन्य प्रेर्णादायक स्तुति के संगीत में रुचि नही रखते। जिनके जीवनों में परमेश्वर की आराधना नहीं है, उनमें उसकी सभी बातों का संतुलित नज़रिया भी नहीं है।

भजनकार ऐसा नहीं था। उसने परमेश्वर को अपने जीवन के केंद्र में रखा और इससे उसका जीवन परिपूर्ण हुआ और वह परिपक्व बना। उसने परमेश्वर की सृष्टि को निहारने का समय निकाला और संगीत द्वारा परमेश्वर की प्रशंसा तथा आराधना का एक उत्तम साधन पाया। - हर्ब वैण्डर लुग्ट


कुछ लोग जो बातें सारे संसार का भ्रमण करके भी नहीं देख पाते, अन्य उससे अधिक अपने इर्द-गिर्द के स्थानों में ही देख लेते हैं।

याह की स्तुति करो! क्योंकि अपने परमेश्वर का भजन गाना अच्छा है; क्योंकि वह मनभावना है, उसकी स्तुति करनी मनभावनी है। - भजन १४७:१


बाइबल पाठ: भजन १४७

Psa 147:1 याह की स्तुति करो! क्योंकि अपने परमेश्वर का भजन गाना अच्छा है; क्योंकि वह मनभावना है, उसकी स्तुति करनी मनभावनी है।
Psa 147:2 यहोवा यरूशलेम को बसा रहा है, वह निकाले हुए इस्राएलियों को इकट्ठा कर रहा है।
Psa 147:3 वह खेदित मन वालों को चंगा करता है, और उनके शोक पर मरहम-पट्टी बान्धता है।
Psa 147:4 वह तारों को गिनता, और उन में से एक एक का नाम रखता है।
Psa 147:5 हमारा प्रभु महान और अति सामर्थी है, उसकी बुद्धि अपरम्पार है।
Psa 147:6 यहोवा नम्र लोगों को सम्भलता है, और दुष्टों को भूमि पर गिरा देता है।
Psa 147:7 धन्यवाद करते हुए यहोवा का गीत गाओ, वीणा बजाते हुए हमारे परमेश्वर का भजन गाओ।
Psa 147:8 वह आकाश को मेघों से छा देता है, और पृथ्वी के लिये मेंह की तैयारी करता है, और पहाड़ों पर घास उगाता है।
Psa 147:9 वह पशुओं को और कौवे के बच्चों को जो पुकारते हैं, आहार देता है।
Psa 147:10 न तो वह घोड़े के बल को चाहता है, और न पुरूष के पैरों से प्रसन्न होता है;
Psa 147:11 यहोवा अपने डरवैयों ही से प्रसन्न होता है, अर्थात उन से जो उसकी करूणा की आशा लगाए रहते हैं।
Psa 147:12 हे यरूशलेम, यहोवा की प्रशंसा कर! हे सिय्योन, अपने परमेश्वर की स्तुति कर!
Psa 147:13 क्योंकि उस ने तेरे फाटकों के खम्भों को दृढ़ किया है; और तेरे लड़के बालों को आशीष दी है।
Psa 147:14 और तेरे सिवानों में शान्ति देता है, और तुझ को उत्तम से उत्तम गेहूं से तृप्त करता है।
Psa 147:15 वह पृथ्वी पर अपनी आज्ञा का प्रचार करता है, उसका वचन अति वेग से दौड़ता है।
Psa 147:16 वह ऊन के समान हिम को गिराता है, और राख की नाईं पाला बिखेरता है।
Psa 147:17 वह बर्फ के टुकड़े गिराता है, उसकी की हुई ठण्ड को कौन सह सकता है?
Psa 147:18 वह आज्ञा देकर उन्हें गलाता है; वह वायु बहाता है, तब जल बहने लगता है।
Psa 147:19 वह याकूब को अपना वचन, और इस्राएल को अपनी विधियां और नियम बताता है।
Psa 147:20 किसी और जाति से उस ने ऐसा बर्ताव नहीं किया, और उसके नियमों को औरों ने नहीं जाना। याह की स्तुति करो।

एक साल में बाइबल:
  • २ राजा २२-२३
  • यूहन्ना ४:३१-५४

शनिवार, 14 मई 2011

बचकर भागने से समस्या

हमारे पालतु कुत्ते पर बहुत से पिस्सु हो गए। हमने उन्हें दूर करने के लिए पिस्सुओं के शैम्पू से उसे नहलाया, पिस्सु मारने वाले पाउडर को उस पर छिड़का और उसके बिस्तर को धुआँ दिया। हमने सोचा कि हम ने समस्या पर विजय पा ली है, लेकिन शीघ्र ही पिस्सु फिर दिखने लगे। ऐसा कई बार हुआ। हम अचंभित थे कि कहाँ से आ रहे थे ये पिस्सु? उसके भोजन से? उसके बिस्तर से? क्या हम से? नहीं, इन में से किसी से भी नहीं। हमारा कुत्ता अभी हाल ही में ’व्यसक’ हुआ था और वह अपने प्रत्येक नए आकर्षण की ओर भागने के लिए तत्पर रहता था। जैसे ही उसे दरवाज़ा ज़रा सा भी खुला मिलता, वह तुरंत अपनी मस्ती मिटाने के लिए बहर भाग जाता। फिर हम चाहे उसे कितना ही पुकारें, उसे बुलाएं या धमकाएं, वह हमारी कदापि नहीं सुनता था। हर अवसर पर वह बाहर भागता और समस्याओं के साथ वापस लौटता - अपने लिए भी और हमारे लिए भी।

इससे कुछ अधिक गंभीर रूप में, दाउद ने अपनी अदम्य लालसाओं और हठ पूर्वक करी गई गलतियों के दुषपरिणाम भोगे। जब उस पर परमेश्वर का हाथ भारी हुआ तो उसने अपनी गलती को पहचाना, और यह भी जाना कि परमेश्वर उसके साथ ऐसा उसे सुधारने के लिए और उसके कुकर्मों के दुषपरिणामों को उससे दूर करने के लिए कर रहा है (भजन ३८:२-५)।

यदि कोई कुत्ता भाग निकले और समस्याएं उत्पन्न कर ले तो उसे रोकने के लिए हम शायद ही कुछ कर पाएं, क्योंकि वह तो अपने नैसर्गिक गुण के वशिभूत है। लेकिन जब हम परमेश्वर से भागकर अपने ऊपर समस्याएं ले आएं, तो हमारे लिए परमेश्वर ही से सहायता है।

दाउद की तरह हम अपने ऊपर हो रहे परमेश्वर के भारी हाथ को पहचान कर उससे क्षमा मांग सकते हैं, और एक नई शुरूआत कर सकते हैं। इससे भी बेहतर है कि इसके पहले कि हमें परमेश्वर के दण्ड का सामना करना पड़े, हम पाप अंगीकार और पश्चाताप के साथ उसके पास आ जाएं।

परमेश्वर से भागने से कभी समस्या का समाधान नहीं होता। - मार्ट डी हॉन


आज्ञाकारिता का एक छोटा सा कदम आशीर्वाद की ओर एक बड़ी छलांग है।

मेरी मूढ़ता के कारण से मेरे कोड़े खाने के घाव बसाते हैं और सड़ गए हैं। मैं बहुत दुखी हूं और झूक गया हूं; दिन भर मैं शोक का पहिरावा पहिने हुए चलता फिरता हूं। - भजन ३८:५, ६

बाइबल पाठ: भजन ३८

Psa 38:1 हे यहोवा क्रोध में आकर मुझे झिड़क न दे, और न जलजलाहट में आकर मेरी ताड़ना कर!
Psa 38:2 क्योंकि तेरे तीर मुझ में लगे हैं, और मैं तेरे हाथ के नीचे दबा हूं।
Psa 38:3 तेरे क्रोध के कारण मेरे शरीर में कुछ भी आरोग्यता नहीं, और मेरे पाप के कारण मेरी हडि्डयों में कुछ भी चैन नहीं।
Psa 38:4 क्योंकि मेरे अधर्म के कामों में मेरा सिर डूब गया, और वे भारी बोझ की नाई मेरे सहने से बाहर हो गए हैं।
Psa 38:5 मेरी मूढ़ता के कारण से मेरे कोड़े खाने के घाव बसाते हैं और सड़ गए हैं।
Psa 38:6 मैं बहुत दुखी हूं और झूक गया हूं; दिन भर मैं शोक का पहिरावा पहिने हुए चलता फिरता हूं।
Psa 38:7 क्योंकि मेरी कमर में जलन है, और मेरे शरीर में आरोग्यता नहीं।
Psa 38:8 मैं निर्बल और बहुत ही चूर हो गया हूं; मैं अपने मन की घबराहट से कराहता हूं।
Psa 38:9 हे प्रभु मेरी सारी अभिलाषा तेरे सम्मुख है, और मेरा कराहना तुझ से छिपा नहीं।
Psa 38:10 मेरा हृदय धड़कता है, मेरा बल घटता जाता है और मेरी आंखों की ज्योति भी मुझ से जाती रही।
Psa 38:11 मेरे मित्र और मेरे संगी मेरी विपत्ति में अलग हो गए, और मेरे कुटुम्बी भी दूर जा खड़े हुए।
Psa 38:12 मेरे प्राण के ग्राहक मेरे लिये जाल बिछाते हैं, और मेरी हानि के यत्न करने वाले दुष्टता की बातें बोलते, और दिन भर छल की युक्ति सोचते हैं।
Psa 38:13 परन्तु मैं बहिरे की नाई सुनता ही नहीं, और मैं गूंगे के समान मूंह नहीं खोलता।
Psa 38:14 वरन मैं ऐसे मनुष्य के तुल्य हूं जो कुछ नहीं सुनता, और जिसके मुंह से विवाद की कोई बात नहीं निकलती।
Psa 38:15 परन्तु हे यहोवा, मैं ने तुझ ही पर अपनी आशा लगाई है; हे प्रभु, मेरे परमेश्वर, तू ही उत्तर देगा।
Psa 38:16 क्योंकि मैं ने कहा, ऐसा न हो कि वे मुझ पर आनन्द करें जो, जब मेरा पांव फिसल जाता है, तब मुझ पर अपनी बड़ाई मारते हैं।
Psa 38:17 क्योंकि मैं तो अब गिरने ही पर हूं, और मेरा शोक निरन्तर मेरे साम्हने है।
Psa 38:18 इसलिये कि मैं तो अपने अधर्म को प्रगट करूंगा, और अपने पाप के कारण खेदित रहूंगा।
Psa 38:19 परन्तु मेरे शत्रु फुर्तीले और सामर्थी हैं, और मेरे विरोधी बैरी बहुत हो गए हैं।
Psa 38:20 जो भलाई के बदले में बुराई करते हैं, वह भी मेरे भलाई के पीछे चलने के कारण मुझ से विरोध करते हैं।
Psa 38:21 हे यहोवा, मुझे छोड़ न दे! हे मेरे परमेश्वर, मुझ से दूर न हो!
Psa 38:22 हे यहोवा, हे मेरे उद्धारकर्ता, मेरी सहायता के लिये फुर्ती कर!

एक साल में बाइबल:
  • २ राजा ४-६
  • लूका २४:३६-५३

स्वच्छ हृदय की प्रार्थनाएं

पश्चिमी देश से आया एक पर्यटक एक मध्यपूर्व के देश में एक घर में आमंत्रित किया गया। उस घर में आने पर उसने देखा कि घर के एक सेवक ने उस घर के बेटे को एक बर्तन में पानी और एक गलीचा दिया। बेटे ने तीन बार अपने हाथ, पैर, मूँह, गला और कान धोए फिर गलीचा बिछा कर वह उसपर घुटने टेक कर बैठ गया और अपना सर झुका कर प्रार्थना करने लगा।

बाइबल के पुराने नियम में परमेश्वर के सन्मुख आते समय अपने आप को धो कर साफ कर लेने के लिए निर्देश हैं; ये इस बात को याद दिलाने के लिए थे कि परमेश्वर के सन्मुख स्व्च्छ मन से आएं, किसी पाप को मन में छुपाए हुए नहीं। दाउद ने भजन ६६ में लिखा, "यदि मैं मन में अनर्थ बात सोचता तो प्रभु मेरी न सुनता" (भजन ६६:१८); एक अन्य भजन में वह कहता है, "यहोवा के पर्वत पर कौन चढ़ सकता है? और उसके पवित्र स्थान में कौन खड़ा हो सकता है? जिसके काम निर्दोष और हृदय शुद्ध है, जिस ने अपने मन को व्यर्थ बात की ओर नहीं लगाया, और न कपट से शपथ खाई है। वह यहोवा की ओर से आशीष पाएगा, और अपने उद्धार करने वाले परमेश्वर की ओर से धर्मी ठहरेगा" (भजन २४:३-५)।

जो लोग पाप में बने हुए हैं, उनका यह आशा रखना कि परमेश्वर उनकी प्रार्थनाओं की ओर कान लगाएगा और उनका उत्तर देगा मूर्खता है। धर्मी मनुष्यों की प्रार्थनाएं ही प्रभावी प्रार्थनाएं होती हैं (याकूब ५:१६)। परमेश्वर का वचन हमें आश्वस्त करता है कि, "यदि हम अपने पापों को मान लें, तो वह हमारे पापों को क्षमा करने, और हमें सब अधर्म से शुद्ध करने में विश्वासयोग्य और धर्मी है" (१ यूहन्ना १:९)। परमेश्वर का वचन यह भी सिखाता है कि हम "प्रभु यीशु मसीह के नाम से और हमारे परमेश्वर के आत्मा से धोए गए, और पवित्र हुए और धर्मी ठहरे" (१ कुरिन्थियों ६:११) - परमेश्वर के साथ हमारा सही संबंध प्रभु यीशु में होकर ही संभव है।

स्वच्छ हृदय द्वारा मांगी गई प्रार्थनाएं ही वे प्रार्थनाएं हैं जिनकी ओर परमेश्वर के कान लगे रहते हैं और जिनका उत्तर वह देता है। - रिचर्ड डी हॉन


हमारी प्रार्थनाओं के शब्दों से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है प्रार्थना के समय हमारे हृदय की दशा।

तो आओ; हम सच्‍चे मन, और पूरे विश्वास के साथ, और विवेक का दोष दूर करने के लिये ह्रृदय पर छिड़काव लेकर, और देह को शुद्ध जल से धुलवाकर परमेश्वर के समीप जाएं। - इब्रानियों १०:२२


बाइबल पाठ: दानिय्येल ९:१-२०

Dan 9:1 मादी क्षयर्ष का पुत्र दारा, जो कसदियों के देश पर राजा ठहराया गया था,
Dan 9:2 उसके राज्य के पहिले वर्ष में, मुझ दानिय्येल ने शास्त्र के द्वारा समझ लिया कि यरूशलेम की उजड़ी हुई दशा यहोवा के उस वचन के अनुसार, जो यिर्मयाह नबी के पास पहुंचा था, कुछ वर्षों के बीतने पर अर्थात सत्तर वर्ष के बाद पूरी हो जाएगी।
Dan 9:3 तब मैं अपना मुख परमेश्वर की ओर कर के गिड़गिड़ाहट के साथ प्रार्थाना करने लगा, और उपवास कर, टाट पहिन, राख में बैठ कर वरदान मांगने लगा।
Dan 9:4 मैं ने अपने परमेश्वर यहोवा से इस प्रकार प्रार्थना की और पाप का अंगीकार किया, हे प्रभु, तू महान और भययोग्य परमेश्वर है, जो अपने प्रेम रखने और आज्ञा मानने वालों के साथ अपनी वाचा को पूरा करता और करूणा करता रहता है,
Dan 9:5 हम लोगों ने तो पाप, कुटिलता, दुष्टता और बलवा किया है, और तेरी आज्ञाओं और नियमों को तोड़ दिया है।
Dan 9:6 और तेरे जो दास नबी लोग, हमारे राजाओं, हाकिमों, पूर्वजों और सब साधारण लोगों से तेरे नाम से बातें करते थे, उनकी हम ने नहीं सुनी।
Dan 9:7 हे प्रभु, तू धर्मी है, परन्तु हम लोगों को आज के दिन लज्जित होना पड़ता है, अर्थात यरूशलेम के निवासी आदि सब यहूदी, क्या समीप क्या दूर के सब इस्राएली लोग जिन्हें तू ने उस विश्वासघात के कारण जो उन्होंने तेरा किया था, देश देश में बरबस कर दिया है, उन सभों को लज्जित होना पड़ता है।
Dan 9:8 हे यहोवा हम लोगों ने अपने राजाओं, हाकिमों और पूर्वजों समेत तेरे विरूद्ध पाप किया है, इस कारण हम को लज्जित होना पड़ता है।
Dan 9:9 परन्तु, यद्यपि हम अपने परमेश्वर प्रभु से फिर गए, तौभी तू दयासागर और क्षमा की खान है।
Dan 9:10 हम तो अपने परमेश्वर यहोवा की शिक्षा सुनने पर भी उस पर नहीं चले जो उस ने अपने दास नबियों से हमको सुनाई।
Dan 9:11 वरन सब इस्राएलियों ने तेरी व्यवस्था का उल्लंघन किया, और ऐसे हट गए कि तेरी नहीं सुनी। इस कारण जिस शाप की चर्चा परमेश्वर के दास मूसा की व्यवस्था में लिखी हुई है, वह शाप हम पर घट गया, क्योंकि हम ने उसके विरूद्ध पाप किया है।
Dan 9:12 सो उस ने हमारे और न्यायियों के विषय जो वचन कहे थे, उन्हें हम पर यह बड़ी विपत्ति डालकर पूरा किया है; यहां तक कि जैसी विपत्ति यरूशलेम पर पड़ी है, वैसी सारी धरती पर और कहीं नहीं पड़ी।
Dan 9:13 जैसे मूसा की व्यवस्था में लिखा है, वैसे ही यह सारी विपत्ति हम पर आ पड़ी है, तौभी हम अपने परमेश्वर यहोवा को मनाने के लिये न तो अपने अधर्म के कामों से फिरे, और ने तेरी सत्य बातों पर ध्यान दिया।
Dan 9:14 इस कारण यहोवा ने सोच विचार कर हम पर विपत्ति डाली है; क्योंकि हमारा परमेश्वर यहोवा जितने काम करता है उन सभों में धर्मी ठहरता है, परन्तु हम ने उसकी नहीं सुनी।
Dan 9:15 और अब, हे हमारे परमेश्वर, हे प्रभु, तू ने अपनी प्रजा को मिस्र देश से, बली हाथ के द्वारा निकाल लाकर अपना ऐसा बड़ा नाम किया, जो आज तक प्रसिद्ध है, परन्तु हम ने पाप किया है और दुष्टता ही की है।
Dan 9:16 हे प्रभु, हमारे पापों और हमारे पुरखाओं के अधर्म के कामों के कारण यरूशलेम की और तेरी प्रजा की, और हमारे आस पास के सब लोगों की ओर से नामधराई हो रही है; तौभी तू अपने सब धर्म के कामों के कारण अपना क्रोध और जलजलाहट अपने नगर यरूशलेम पर से उतार दे, जो तेरे पवित्र पर्वत पर बसा है।
Dan 9:17 हे हमारे परमेश्वर, अपने दास की प्रार्थना और गिड़गड़ाहट सुनकर, अपने उजड़े हुए पवित्रस्थान पर अपने मुख का प्रकाश चमका; हे प्रभु, अपने नाम के निमित्त यह कर।
Dan 9:18 हे मेरे परमेश्वर, कान लगाकर सुन, आंख खोलकर हमारी उजड़ी हुई दशा और उस नगर को भी देख जो तेरा कहलाता है? क्योंकि हम जो तेरे साम्हने गिड़गिड़ाकर प्रार्थना करते हैं, सो अपने धर्म के कामों पर नहीं, वरन तेरी बड़ी दया ही के कामों पर भरोसा रखकर करते हैं।
Dan 9:19 हे प्रभु, सुन ले; हे प्रभु, पाप क्षमा कर; हे प्रभु, ध्यान देकर जो करता है उसे कर, विलम्ब न कर; हे मेरे परमेश्वर, तेरा नगर और तेरी प्रजा तेरी ही कहलाती है इसलिये अपने नाम के निमित्त ऐसा ही कर।

एक साल में बाइबल:
  • २ राजा १५-१६
  • यूहन्ना ३:१-१८

शुक्रवार, 13 मई 2011

अंगीकार से स्वतंत्रता

एक छोटी कहानी है - एक बालक पत्थर फेंक कर निशाना लगा रहा था, खेलते खेलते गलती से परिवार की बतखों में से एक के पत्थर लगा और वह मर गई। बालक ने आस-पास देखा और जब उसे लगा के किसी ने उसकी यह हरकत नही देखी है, तो उसने मरी हुई बतख को मिट्टी में दबा दिया। शाम को जब वह घर आया तो रात के भोजन के बाद उसकी बहन ने उसे अलग बुलाकर कहा, "मैंने देखा तुमने बतख का क्या किया। अगर तुमने मेरे लिए बर्तन नहीं धोए तो मैं पिताजी को सब कुछ बता दूंगी।" डर के कारण बालक ने बहन की बात मान ली। इसके बाद तो बहन को उससे काम लेते रहने का रास्ता ही मिल गया। बार बार उसे वह डराती और अपने हिस्से के घर के काम उससे करवाती। थोड़े समय में बालक इससे परेशान हो गया, उसने हिम्मत जुटा कर अपने पिता के सामने अपनी गलती का बयान कर दिया। पिता ने तुरंत उसे गले से लगा लिया और बड़े प्यार से बोले, "मैं जानता हूँ, जब तुमसे वह बतख मरी तब मैं घर की खिड़की से सब देख रहा था। मैं यह भी जानता हूँ कि तुम्हारी बहन कैसे इस बात का तुमसे नाजायज़ फायदा उठा रही है। मैं इस इंतिज़ार में था कि कब तुम अपनी गलती का अंगीकार करोगे। जाओ, मैंने तुम्हें क्षमा किया, आगे से ध्यान रखना।" उस शाम जब बहन ने फिर उसे डरा कर अपना काम करवाना चाहा, तो बालक ने कहा, "मैंने अपनी गलती मान ली है, पिताजी को सब पता है। अब मैं तुम्हारे चुंगुल से स्वतंत्र हूँ।"

हमारी कितनी ही गलतियाँ हम अपने परमेश्वर पिता से छुपाते हैं, जबकि वह सब कुछ देखता और जानता है; और फिर बहानों और झूठ द्वारा अपने आप को सही दिखाने का प्रयास करते हैं, फलस्वरूप शैतान के हाथों में कठपुतली बन कर भारी मन से बोझिल जीवन व्यतीत करते रहते हैं। जबकि पिता परमेश्वर केवल इस प्रतीक्षा में रहता है कि हम अपने पाप का अंगीकार करें और वह हमें क्षमा करके हमारे जीवन के आनन्द को बहाल कर दे।

बाइबल में प्रभु यीशु ने इस बात को ’उड़ाऊ पुत्र’ के दृष्टांत द्वारा समझाया। इस पुत्र ने अपने बाप से सम्पत्ति का अपना हिस्सा लिया और दूसरे स्थान पर चला गया, तथा दोस्तों के साथ व्यर्थ जीवन में सारी सम्पत्ति उड़ा दी। कंगाली की हालत में, हर तरह से भूखा और मजबूर, उसे अपने बाप की याद आई और यह भी कि उसके बाप के नौकर उससे बेहतर हालत में रहते हैं। तब वह इस इरादे से बाप के पास चला कि जाकर अपनी गलती मान लेगा और बाप से मांगेगा कि उसे नौकर ही रख ले क्योंकि अब वह पुत्र होने के लायक नहीं है। लेकिन बाप के पास पहुंचते ही उसके लिए उम्मीद के विपरीत, सारी बात ही बदल गई। अभी बाप के सामने उसने अपने पश्चाताप की बात पूरी भी नहीं करी थी कि बाप ने उसे उसकी गन्दी हालत में ही बड़े प्यार से गले से लगा लिया और उसका खोया स्थान बहाल कर दिया तथा नौकरों से कहा कि उसके पुत्र के लौटने के उपलक्ष में एक बड़ा भोज तैयार किया जाए।

दाउद ने भी अंगीकार की स्वतंत्रता को अनुभव किया। भजन ३२ में उसने लिखा कि कैसे जब वह अपने पाप के विष्य में खामोश रहा तो उसे शारीरिक और मानसिक परेशानियों को झेलना पड़ा, लेकिन जैसे ही उसने परमेश्वर के सामने अपने पाप को मान लिया, उसे क्षमा दान मिल गया और उसका आनन्द और शरीर की सामर्थ उसे वापस मिल गई।

हमारा परमेश्वर पिता कभी हमें दण्ड देकर प्रसन्न नहीं होता "प्रभु यहोवा की यह वाणी है, क्या मैं दुष्ट के मरने से कुछ भी प्रसन्न होता हूँ? क्या मैं इस से प्रसन्न नहीं होता कि वह अपने मार्ग से फिरकर जीवित रहे?" (यहेजेकेल १८:२३); वह सदा हमें क्षमा पाने के अवसर देता रहता है और जैसे ही हम उसके सन्मुख अपने पाप का अंगीकार करते हैं, हमें उसका क्षमा दान और हमारे आनन्द की बहाली तुरंत मिल जाते हैं।

अंगीकार ही पाप के दासत्व से स्वतंत्रता का मार्ग है। - हर्ब वैण्डर लुग्ट


जब तक हम अपने पाप का सामना करने को तैयार नहीं हो जाते, हम कभी उन्हें अपने पीछे नहीं कर सकते।

जब मैं चुप रहा तब दिन भर कहरते कहरते मेरी हडि्डयां पिघल गई। - भजन ३२:८


बाइबल पाठ: लूका १५:११-२४

Luk 15:11 फिर उस ने कहा, किसी मनुष्य के दो पुत्र थे।
Luk 15:12 उन में से छुटके ने पिता से कहा कि हे पिता संपत्ति में से जो भाग मेरा हो, वह मुझे दे दीजिए। उस ने उन को अपनी संपत्ति बांट दी।
Luk 15:13 और बहुत दिन न बीते थे कि छुटका पुत्र सब कुछ इकट्ठा करके एक दूर देश को चला गया और वहां कुकर्म में अपनी संपत्ति उड़ा दी।
Luk 15:14 जब वह सब कुछ खर्च कर चुका, तो उस देश में बड़ा अकाल पड़ा, और वह कंगाल हो गया।
Luk 15:15 और वह उस देश के निवासियों में से एक के यहां जा पड़ा : उस ने उसे अपने खेतों में सूअर चराने के लिये भेजा।
Luk 15:16 और वह चाहता था, कि उन फलियों से जिन्‍हें सूअर खाते थे अपना पेट भरे; और उसे कोई कुछ नहीं देता था।
Luk 15:17 जब वह अपने आपे में आया, तब कहने लगा, कि मेरे पिता के कितने ही मजदूरों को भोजन से अधिक रोटी मिलती है, और मैं यहां भूखा मर रहा हूं।
Luk 15:18 मैं अब उठकर अपने पिता के पास जाऊंगा और उस से कहूंगा कि पिता जी मैं ने स्‍वर्ग के विरोध में और तेरी दृष्‍टि में पाप किया है।
Luk 15:19 अब इस योग्य नहीं रहा कि तेरा पुत्र कहलाऊं, मुझे अपने एक मजदूर की नाईं रख ले।
Luk 15:20 तब वह उठकर, अपने पिता के पास चला: वह अभी दूर ही था, कि उसके पिता ने उसे देखकर तरस खाया, और दौड़कर उसे गले लगाया, और बहुत चूमा।
Luk 15:21 पुत्र न उस से कहा पिता जी, मैं ने स्‍वर्ग के विरोध में और तेरी दृष्‍टि में पाप किया है और अब इस योग्य नहीं रहा, कि तेरा पुत्र कहलाऊं।
Luk 15:22 परन्‍तु पिता ने अपने दासों से कहा झट अच्‍छे से अच्‍छा वस्‍त्र निकालकर उसे पहिनाओ, और उसके हाथ में अंगूठी, और पांवों में जूतियां पहिनाओ।
Luk 15:23 और पला हुआ बछड़ा लाकर मारो ताकि हम खांए और आनन्‍द मनावें।
Luk 15:24 क्‍योंकि मेरा यह पुत्र मर गया था, फिर जी गया है : खो गया था, अब मिल गया है: और वे आनन्‍द करने लगे।

एक साल में बाइबल:
  • २ राजा १७-१८
  • यूहन्ना ३:१९-३६

बुधवार, 11 मई 2011

प्रभावी प्रार्थना

बालक जेसन द्वारा हुई गलती के लिए उसकी माँ ने उसे उसके कमरे में भेज दिया। कुछ देर अके बाद जेसन कमरे से बाहर माँ के पास वापस आ गया और बोला, "मैं अपने किए के बारे में विचार कर रहा था, और फिर मैंने प्रार्थना करी।" उसकी माँ को उसके इस व्यवहार से बहुत प्रसन्नता हुई, और उसे और प्रोत्साहित करने के लिए माँ ने जेसन से कहा, "यह तो बहुत अच्छी बात है। यदि तुम परमेश्वर से मांगोगे कि तुम्हें अच्छा बनाए, तो अवश्य ही वह ऐसा करेगा।" जेसन ने उत्तर दिया, "लेकिन मैंने प्रार्थना अपने अच्छे बनने के लिए थोड़े ही करी; मैंने परमेश्वर से मांगा कि वह मुझे सहने में तुम्हारी सहायता करे!"

जेसन की इस प्रार्थना के समान प्रार्थनाएं सामानयता करी जाती हैं। अधिकांशतः लोग यह स्वीकार करना नहीं चाहते कि वे किसी समस्या का कारण हो सकते हैं, इसलिए लोग अक्सर यही प्रार्थना करते हैं कि परमेश्वर संबंधित लोगों और परिस्थितियों को बदल दे। ऐसी प्रार्थनाएं समस्या के मुख्य कारण - हमारे अपने मन की दशा, को नज़रंदाज़ करके अन्य गैरज़रूरी बातों पर ध्यान केंद्रित करती हैं। अपनी परिस्थितियों के लिए प्रार्थना करना तब ही प्रभावी हो सकता है जब हम पहले अपने मन की दशा को ठीक से आँक कर उसे सही कर लें।

दाउद की प्रार्थना के भजन, भजन ५१ में, दाउद ने सर्वप्रथम अपने लिए परमेश्वर से दया की याचना करी (पद १)। फिर उसने अपने पाप का अंगीकार किया (पद ३), तब उसने परमेश्वर से स्वच्छ हृदय मांगा और अपने उद्धार के आनन्द की बहाली की प्रार्थना करी (पद १०,१२)। व्यभिचार और हत्या के अपने घिनौने पापों को मान लेने के लिए दाउद ने कोई बहाने नहीं बनाए।

परमेश्वर चाहता है कि जब हम उससे प्रार्थना करें तो हम पूरी ईमानदारी के साथ उसके पास आएं। इसके लिए हमें संघर्ष करना पड़ सकता है, क्योंकि ऐसी ईमानदारी से किया हुआ स्वयं विशलेषण और फिर उसका अंगीकार कठिन और दुखदायी होता है, लेकिन प्रभावी प्रार्थना की यही एकमात्र विधि है। - डेनिस डी हॉन


परमेश्वर ऐसों को भी क्षमा करने को सदा तैयार रहता है जो इस क्षमा के कदापि योग्य नहीं हैं।

मैं तो अपने अपराधों को जानता हूं, और मेरा पाप निरन्तर मेरी दृष्टि में रहता है। - भजन ५१:३


बाइबल पाठ: भजन ५१:१-१७

Psa 51:1 हे परमेश्वर, अपनी करूणा के अनुसार मुझ पर अनुग्रह कर; अपनी बड़ी दया के अनुसार मेरे अपराधों को मिटा दे।
Psa 51:2 मुझे भलीं भांति धोकर मेरा अधर्म दूर कर, और मेरा पाप छुड़ाकर मुझे शुद्ध कर!
Psa 51:3 मैं तो अपने अपराधों को जानता हूं, और मेरा पाप निरन्तर मेरी दृष्टि में रहता है।
Psa 51:4 मैं ने केवल तेरे ही विरूद्ध पाप किया, और जो तेरी दृष्टि में बुरा है, वही किया है, ताकि तू बोलने में धर्मी और न्याय करने में निष्कलंक ठहरे।
Psa 51:5 देख, मैं अधर्म के साथ उत्पन्न हुआ, और पाप के साथ अपनी माता के गर्भ में पड़ा।
Psa 51:6 देख, तू हृदय की सच्चाई से प्रसन्न होता है, और मेरे मन ही में ज्ञान सिखाएगा।
Psa 51:7 जूफा से मुझे शुद्ध कर, तो मैं पवित्र हो जाऊंगा, मुझे धो, और मैं हिम से भी अधिक श्वेत बनूंगा।
Psa 51:8 मुझे हर्ष और आनन्द की बातें सुना, जिस से जो हडि्डयां तू ने तोड़ डाली हैं वे मगन हो जाएं।
Psa 51:9 अपना मुख मेरे पापों की ओर से फेर ले, और मेरे सारे अधर्म के कामों को मिटा डाल।
Psa 51:10 हे परमेश्वर, मेरे अन्दर शुद्ध मन उत्पन्न कर, और मेरे भीतर स्थिर आत्मा नये सिरे से उत्पन्न कर।
Psa 51:11 मुझे अपने साम्हने से निकाल न दे, और अपने पवित्र आत्मा को मुझ से अलग न कर।
Psa 51:12 अपने किए हुए उद्धार का हर्ष मुझे फिर से दे, और उदार आत्मा देकर मुझे सम्भाल।
Psa 51:13 तब मैं अपराधियों को तेरा मार्ग सिखाऊंगा, और पापी तेरी ओर फिरेंगे।
Psa 51:14 हे परमेश्वर, हे मेरे उद्धारकर्ता परमेश्वर, मुझे हत्या के अपराध से छुड़ा ले, तब मैं तेरे धर्म का जयजयकार करने पाऊंगा।
Psa 51:15 हे प्रभु, मेरा मुंह खोल दे तब मैं तेरा गुणानुवाद कर सकूंगा।
Psa 51:16 क्योकि तू मेलबलि में प्रसन्न नहीं होता, नहीं तो मैं देता, होमबलि से भी तू प्रसन्न नहीं होता।
Psa 51:17 टूटा मन परमेश्वर के योग्य बलिदान है, हे परमेश्वर, तू टूटे और पिसे हुए मन को तुच्छ नहीं जानता।

एक साल में बाइबल:
  • २ राजा १३-१४
  • यूहन्ना २

मंगलवार, 10 मई 2011

सुधार की विधि

हमारे माता-पिता दो तरह से हमें सुधारते हैं; जब कोई बालक उद्दण्ड अथवा अनाज्ञाकारी होता है, तो उनका एक टेढ़ी नज़र से देखना बालक को उनकी नाराज़गी का सन्देश पहुँचा देता है। बालक जैसे ही अपने आप को सुधार लेता है, माता-पिता की टेढ़ी नज़र, प्यार की नज़र बन जाती है। लेकिन यदि बालक उनके टेढ़ी नज़र के सन्देश को नज़रंदाज़ करके अपनी उद्दण्डता या अनाज्ञाकारिता में बना रहे, तो फिर माता-पिता को उसे सुधारने के लिए कठोर कदम उठाने पड़ते हैं।

दाउद भी ऐसे ही अनुभव से होकर गुज़रा और भजन ३२ में उसने अपने अनुभव और उनसे मिली शिक्षाएं वर्णित करी हैं। उसके पाप के कारण दाउद पर परमेश्वर का हाथ बहुत भारी हुआ, और उस बोझ के तले उसे अपनी हड्डियाँ गलती हुई लगीं और उसके जीवन की तरावट सूख गई; उसने बत्शीबा से अपने व्यभिचार और उसके पति उरीयाह की हत्या करवाने के पाप को मान लिया (पद ३,४,५)। परमेश्वर से क्षमा याचना करने और पश्चाताप करने से परमेश्वर का भारी हाथ उस पर से हट गया, दाउद ने अपने आप को एक नया मनुष्य अनुभव किया और अपने आप को आशा से कहीं आधिक आशीशित पाया। इसलिए वह प्रत्येक उस विश्वासी से, जो किसी कारणवश पाप में गिर जाए, आग्रह करता है कि ऐसा होते ही तुरंत क्षमा की प्रार्थना कर ले (पद ६)।

दाउद ने कहा कि परमेश्वर हमारी अगुवाई अपनी आँख से करेगा, फिर आगे पद ९ में लिखा कि "तुम घोड़े और खच्चर के समान न बनो जो समझ नहीं रखते, उनकी उमंग लगाम और बाग से रोकनी पड़ती है, नहीं तो वे तेरे वश में नहीं आने के।" दाउद का तात्पर्य था कि परमेश्वर के पास हमें अपने पास वापस लौटा लाने के दो तरीके हैं - आँख से या लगाम और नकेल से।

यदि हम कभी भी पाप में पड़ें तो परमेश्वर चाहता है कि जैसे ही हमें पाप का बोध हो, हम तुरंत ही उस पाप का अंगीकार करके उसके लिए क्षमा माँग लें। वह नहीं चाहता कि हम नासमझ जानवरों के समान बनें जिन्हें लगाम और नकेल लगा कर ही सीधा रखा जा सकता है। परमेश्वर का हमारे प्रति प्रेम हमें कभी पाप में बने रहने नहीं देगा, वह हमें अवश्य ही सुधारेगा; लेकिन उसके सुधार की विधि हम पर निर्भर करती है; परमेश्वर तो अपनी नज़र के इशारे से ही हमें सुधारना चाहता है, परन्तु आवश्यक्ता पड़ने पर वह लगाम और नकेल का भी प्रयोग करने से नहीं हिचकिचाता। - डेनिस डी हॉन


हम परमेश्वर के जितना निकट बने रहते हैं, उतना ही स्पष्ट हम उसके मार्गदर्शन को देख-समझ पाते हैं।

मैं तुझे बुद्धि दूंगा, और जिस मार्ग में तुझे चलना होगा उस में तेरी अगुवाई करूंगा; मैं तुझ पर कृपादृष्टि रखूंगा और सम्मत्ति दिया करूंगा। तुम घोड़े और खच्चर के समान न बनो जो समझ नहीं रखते, उनकी उमंग लगाम और बाग से रोकनी पड़ती है, नहीं तो वे तेरे वश में नहीं आने के। - भजन ३२:८,९


बाइबल पाठ: भजन ३२

Psa 32:1 क्या ही धन्य है वह जिसका अपराध क्षमा किया गया, और जिसका पाप ढ़ापा गया हो।
Psa 32:2 क्या ही धन्य है वह मनुष्य जिसके अधर्म का यहोवा लेखा न ले, और जिसकी आत्मा में कपट न हो।
Psa 32:3 जब मैं चुप रहा तब दिन भर कहरते कहरते मेरी हडि्डयां पिघल गई।
Psa 32:4 क्योंकि रात दिन मैं तेरे हाथ के नीचे दबा रहा; और मेरी तरावट धूप काल की सी झुर्राहट बनती गई।
Psa 32:5 जब मैं ने अपना पाप तुझ पर प्रगट किया और अपना अधर्म न छिपाया, और कहा, मैं यहोवा के साम्हने अपने अपराधों को मान लूंगा तब तू ने मेरे अधर्म और पाप को क्षमा कर दिया।
Psa 32:6 इस कारण हर एक भक्त तुझ से ऐसे समय में प्रार्थना करे जब कि तू मिल सकता है। निश्चय जब जल की बड़ी बाढ़ आए तौभी उस भक्त के पास न पहुंचेगी।
Psa 32:7 तू मेरे छिपने का स्थान है, तू संकट से मेरी रक्षा करेगा, तू मुझे चारों ओर से छुटकारे के गीतों से घेर लेगा।
Psa 32:8 मैं तुझे बुद्धि दूंगा, और जिस मार्ग में तुझे चलना होगा उस में तेरी अगुवाई करूंगा; मैं तुझ पर कृपादृष्टि रखूंगा और सम्मत्ति दिया करूंगा।
Psa 32:9 तुम घोड़े और खच्चर के समान न बनो जो समझ नहीं रखते, उनकी उमंग लगाम और बाग से रोकनी पड़ती है, नहीं तो वे तेरे वश में नहीं आने के।
Psa 32:10 दुष्ट को तो बहुत पीड़ा होगी परन्तु जो यहोवा पर भरोसा रखता है वह करूणा से घिरा रहेगा।
Psa 32:11 हे धर्मियों यहोवा के कारण आनन्दित और मगन हो, और हे सब सीधे मन वालों आनन्द से जयजयकार करो!

एक साल में बाइबल:
  • २ राजा १०-१२
  • यूहन्ना १:२९-५१