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मंगलवार, 2 अगस्त 2011

सही नज़रिया

कभी कभी हमारे अपने दोष और कमियाँ हमें दूसरों में ऐसे दोष और कमियाँ दिखाते हैं जो वास्तव में होते नहीं हैं। एक औरत हमेशा अपने घर आने जाने वालों से अपनी पड़ौसन की गन्दी खिड़कियों के बारे में बातें करती थी। एक दिन एक मेहमान ने उसे सलाह दी कि क्यों नहीं वह अपनी खिड़कियाँ धो कर देखे। उस औरत ने अपने मेहमान की बात मान ली और ऐसा ही किया, और फिर विसमय से बोली, "मुझे तो विश्वास ही नहीं हो रहा, जैसे ही मैंने अपनी खिड़कियाँ धोईं, लगता है साथ ही पड़ौसन ने भी अपनी खिड़कियाँ धो लीं; देखो तो उसकी खिड़कियाँ कैसी चमक रही हैं!

आलोचना की प्रवृति दूसरों द्वारा किए जा रहे भले कार्यों के प्रति हमें अन्धा बना देती है। एक आदमी ने शहर के मुख्य चौक में पानी पीने के लिए स्थान का निर्माण करवाया। उस स्थान को देखकर शहर के कला समीक्षक ने उस निर्माण की वस्तुकला की आलोचना करी। निर्माण करवाने वाले आदमी को इस आलोचना से दुख हुआ, लेकिन उसने उससे केवल एक ही प्रश्न पूछा, "क्या जिस उद्देश्य के लिए यह बनाया गया है, वह पूरा हुआ है कि नहीं?" अब उत्तर सुनकर उसके प्रसन्न होने की बारी थी क्योंकि वह स्थान शहर के लोगों को बहुत लाभ पहुँचा रहा था और उनकी प्यास बुझा रहा था। कला समीक्षक ने निर्मित स्थान की कला को तो परखा किन्तु उपयोगिता की ओर ध्यान नहीं दिया, जबकि महत्व उपयोगिता का था, कला का नहीं।

प्रभु यीशु ने अपने चेलों को चिताया, "दोष मत लगाओ, कि तुम पर भी दोष न लगाया जाए" (मत्ती ७:१)। प्रभु भोज मे सम्मिलित होने से पहले के लिए भी परमेश्वर की चेतावनी है कि "इसलिये मनुष्य अपने आप को जांच ले और इसी रीति से इस रोटी में से खाए, और इस कटोरे में से पीए" (१ कुरिन्थियों ११:२८)। प्रभु के विश्वासियों से प्रभु का आत्मा कहता है, "अपने प्राण को परखो, कि विश्वास में हो कि नहीं? अपने आप को जांचो, क्‍या तुम अपने विषय में यह नहीं जानते, कि यीशु मसीह तुम में है? नहीं तो तुम निकम्मे निकले हो" (२ कुरिन्थियों १३:५)।

दूसरों की गलतियाँ ढूंढना बहुत आसान है, परन्तु अपनी गलतियाँ पहिचानने के लिए अपने अन्दर झाँकना होता है और संसार के मापदण्ड को नहीं परमेश्वर के मापदण्ड - परमेश्वर के वचन को उपयोग करना पड़ता है। परमेश्वर का वचन ही हमें वह सही नज़रिया प्रदान कर सकता है जिससे हम दूसरों के आलोचक बनने की बजाए स्व्यं अपने आप को जांचने वाले और अपनी गलतियों को पहचान कर उन्हें सुधारने वाले बन सकते हैं, जो परमेश्वर हम से चाहता है।


जब कभी आलोचना करने का मन हो तो ध्यान रखिए कि परमेश्वर सुन रहा है।

व्यवस्था देने वाला और हाकिम तो एक ही है, जिसे बचाने और नाश करने की सामर्थ है? तू कौन है, जो अपने पड़ोसी पर दोष लगाता है? - याकूब ४:१२


बाइबल पाठ: लूका ६:३७-४२

Luk 6:37 दोष मत लगाओ, तो तुम पर भी दोष नहीं लगाया जाएगा: दोषी न ठहराओ, तो तुम भी दोषी नहीं ठहराए जाओगे: क्षमा करो, तो तुम्हारी भी क्षमा की जाएगी।
Luk 6:38 दिया करो, तो तुम्हें भी दिया जाएगा: लोग पूरा नाप दबा दबाकर और हिला हिलाकर और उभरता हुआ तुम्हारी गोद में डालेंगे, क्‍योंकि जिस नाप से तुम नापते हो, उसी से तुम्हारे लिये भी नापा जाएगा।
Luk 6:39 फिर उस ने उन से एक दृष्‍टान्‍त कहा; क्‍या अन्‍धा, अन्‍धे को मार्ग बता सकता है? क्‍या दोनो गड़हे में नहीं गिरेंगे?
Luk 6:40 चेला अपने गुरू से बड़ा नहीं, परन्‍तु जो कोई सिद्ध होगा, वह अपने गुरू के समान होगा।
Luk 6:41 तू अपने भाई की आंख के तिनके को क्‍यों देखता है, और अपनी ही आंख का लट्ठा तुझे नहीं सूझता?
Luk 6:42 और जब तू अपनी ही आंख का लट्ठा नहीं देखता, तो अपने भाई से क्‍योंकर कह सकता है, हे भाई, ठहर जा तेरी आंख से तिनके को निकाल दूं? हे कपटी, पहिले अपनी आंख से लट्ठा निकाल, तब जो तिनका तेरे भाई की आंख में है, भली भांति देखकर निकाल सकेगा।

एक साल में बाइबल:
  • भजन ६०-६२
  • रोमियों ५

सोमवार, 1 अगस्त 2011

अनुचित दृष्टिकोण

एक प्रयोग के लिए शोधकर्ताओं ने कुछ लोगों को विशेष ऐनकें पहिना दीं जिनके शीशे विशेष प्रकार से बनाए गए थे। इन ऐनकों को पहिनने से चीज़ें उलटी दिखने लगती थीं, सीधी रेखाएं गोलाकार प्रतीत होती थीं और किसी आकार की सीमारेखाएं धुंधली और रंगीन प्रतीत होती थीं। कुछ दिन इन ऐनकों को पहिने रहने के बाद पहनने वालों ने शोधकर्ताओं को बताया कि आरंभ में अस्वभाविक दिखने वाले आकार, उलटी दिखने वाली चीज़ें और टेढ़ी रेखाएं धीरे धीरे समाप्त हो गईं और उनके स्थान पर संसार कि चीज़ें पहले के समान ही अपने स्वाभाविक रूप में दिखने लगीं। उनके मस्तिष्क ने उन ऐनकों से होकर आने वाले गलत जानकारी को पहिचान लिया था और उस जानकारी को स्वतः ही सुधार कर स्वाभाविक रूप में फिर से उसका सही आँकलन करना आरंभ कर दिया था। हमारे मस्तिष्क की यह कार्यकुशलता हमें परमेश्वर की ओर से मिला एक वर्दान है जिसके लिए हमें परमेश्वर का धन्यवादी होना चाहिए।

परमेश्वर के वचन बाइबल की पुस्तक नीतिवचन सिखाती है कि हमारा मन और मस्तिष्क आत्मिक बातों के लिए इसी कुशलता से काम नहीं करता। हमारा मन और मस्तिष्क हमें पाप के मायाजल में से निकाल पाने में असमर्थ है। हम अपने आप को निर्दोष और सही ही देखते रहते हैं यद्यपि हमारे मन की भावनाएं स्वार्थी, बुरी और पापी बनी रहती हैं तथा परमेश्वर के सामने हम पापी होते हैं। अपने आप को न्यायसंगत और सही ठहराने के लिए लोग अपने गलत व्यवहार का दोष अपने वातावरण पर या अपनी परिस्थितयों पर या अपने गलत पालन-पोषण पर लगाते हैं। वे अपने स्वार्थ, विद्रोह और नियमों के उल्लंघन को नहीं देखते, वरन अपने आप को मासूम और परिस्थितियों का पीड़ित बताते हैं। इस के द्वारा वे अपने अनैतिक और पापी विचार तथा व्यवहार को जायज़ ठहराते हैं। उनकी नज़र में उन में कोई दोष नहीं है और उनका मार्ग सही है।

लेकिन परमेश्वर कहता है "मन तो सब वस्तुओं से अधिक धोखा देने वाला होता है, उस में असाध्य रोग लगा है; उसका भेद कौन समझ सकता है? मैं यहोवा मन की खोजता और हृदय को जांचता हूँ ताकि प्रत्येक जन को उसकी चाल-चलन के अनुसार अर्थात उसके कामों का फल दूं" (यर्मियाह १७:९)। हम अपने आप को धोखे में रख सकते हैं परमेश्वर को नहीं; और एक न एक दिन प्रत्येक को अपना हिसाब उसे देना ही होगा। परमेश्वर का वचन बाइबल ही वह सही दृष्टिकोण हमें प्रदान करता है जिससे हर बात को परमेश्वर के दृष्टिकोण से देख पाने की सामर्थ हमें प्राप्त होती है, पाप का सही बोध मिलता है और परमेश्वर का आत्मा जो उसके प्रत्येक विश्वासी में निवास करता है, हमें हमारे गलत व्यवहार से पश्चाताप द्वारा ठीक होने के लिए मार्गदर्शन भी करता है।

अनुचित दृष्टिकोण से हटकर सही दृष्टिकोण अपनाना ही आते न्याय से बचने का मार्ग है। - मार्ट डी हॉन


पाप से अन्धी आँखों को ठीक करने के लिए बाइबल ही सही ऐनक है।

मनुष्य का सारा चालचलन अपनी दृष्टि में तो ठीक होता है, परन्तु यहोवा मन को जांचता है - नीतिवचन २१:२


बाइबल पाठ: नीतिवचन ३०:५-१३

Pro 30:5 ईश्वर का एक एक वचन ताया हुआ है; वह अपने शरणागतों की ढाल ठहरा है।
Pro 30:6 उसके वचनों में कुछ मत बढ़ा, ऐसा न हो कि वह तुझे डांटे और तू झूठा ठहरे।
Pro 30:7 मैं ने तुझ से दो वर मांगे हैं, इसलिये मेरे मरने से पहिले उन्हें मुझे देने से मुंह न मोड़:
Pro 30:8 अर्थात व्यर्थ और झूठी बात मुझ से दूर रख; मुझे न तो निर्धन कर और न धनी बना, प्रतिदिन की रोटी मुझे खिलाया कर।
Pro 30:9 ऐसा न हो, कि जब मेरा पेट भर जाए, तब मैं इन्कार करके कहूं कि यहोवा कौन है? वा अपना भाग खोकर चोरी करूं, और अपने परमेश्वर का नाम अनुचित रीति से लूं।
Pro 30:10 किसी दास की, उसके स्वामी से चुगली न करना, ऐसा न हो कि वह तुझे शाप दे, और तू दोषी ठहराया जाए।
Pro 30:11 ऐसे लोग हैं, जो अपने पिता को शाप देते और अपनी माता को धन्य नहीं कहते।
Pro 30:12 ऐसे लोग हैं जो अपनी दृष्टि में शुद्ध हैं, तौभी उनका मैल धोया नहीं गया।
Pro 30:13 एक पीढ़ी के लोग ऐसे हैं उनकी दृष्टि क्या ही घमण्ड से भरी रहती है, और उनकी आंखें कैसी चढ़ी हुई रहती हैं।

एक साल में बाइबल:
  • भजन ५७-५९
  • रोमियों ४

रविवार, 31 जुलाई 2011

दोषारोपण

प्रभु यीशु मसीह के अनुयायी फ्रैड ग्रिम ने, जो नियमों के पालन पर नज़र रखने वाले विभाग में कार्य करता था, अपना एक अनुभव बताया: एक परिवार कलह में पड़ा हुआ था, जिसके लिए पिता अपने पुत्र को दोषी ठहराता रहता था। यद्यपि वे पति पत्नि वर्षों से आपस में लड़ रहे थे, फिर भी पिता अपने पुत्र से यही कहता रहता था कि यदि किसी दिन मैं तुम्हें और तुम्हारी माँ को छोड़ कर चला गया तो यह तुम्हारी गलती के कारण होगा। एक दिन अचानक पति को अधरंग का दौरा पड़ा और वह मर गया। अब माँ ने भी अपने बेटे को ही अपनी पिता की मृत्यु के लिए दोषी ठहराया। वह लड़का बिलकुल टूट गया।

दूसरों को अपनी परेशानियों के लिए दोषी ठहराना न केवल अनन्यायपूर्ण है वरन क्रूर भी है और परमेश्वर को अति नापसन्द है। मिस्त्र से कनान देश की अपनी यात्रा के समय इस्त्राएल के लोगों ने भी यह किया। जब उन्हें पानी और भोजन की घटी हुई तो वे हड़बड़ा गए और उन्होंने अपनी परिस्थितियों के लिए अपने अगुवे मूसा और उसके भाई हारून को दोषी ठहराया। परमेश्वर ने दो बार तो उन्हें इस बात के लिए माफ कर दिया, लेकिन जब इस्त्राएलियों ने दोषारोपण को अपनी प्रवृति ही बना लिया तो परमेश्वर को उनके विरुद्ध कार्य करना पड़ा और उन्हें परमेश्वर से कठोर दण्ड का सामना करना पड़ा।

दोषारोपण बहुत हानिकारक हो सकता है। अकसर समस्या का कारण और समाधान दोनो ही हमारे पास ही होते हैं लेकिन हमारा अहम हमें इसे स्वीकार करने नहीं देता और हम दूसरों को अपनी परिस्थितियों के लिए ज़िम्मेदार ठहरा कर अपनी कमज़ोरी को छुपाना या अपने दायित्व से बचना चाहते हैं। ऐसा करके हम कुछ समय के लिए शायद समस्या से बच जाएं या उसके प्रभावों को टाल दें लेकिन यह कोई दीर्घ कालीन अथवा समुचित उपाय नहीं है। लोगों को हमारी प्रवृति पहचानने में अधिक समय नहीं लगेगा, और फिर हम और भी अधिक गंभीर समस्या में पड़ने से बच नहीं सकते।

दोषारोपण के स्थान पर हमें अपनी परिस्थिति का विशलेषण करने, अपनी कमियों और गलतियों को स्वीकार करने और परमेश्वर की सहायता से उन्हें सुधारने की आवश्यक्ता है। इसी मार्ग का अनुसरण कर के हम अपनी गलतियों से सीख भी सकेंगे, अपने आप को सुधार भी सकेंगे और और लोगों में अपनी विश्वासयोग्यता को बना भी सकेंगे। - हर्ब वैण्डर लुग्ट


दूसरों को दोषी ठहराकर हम परमेश्वर को प्रसन्न कभी नहीं कर सकेंगे।

जंगल में इस्राएलियों की सारी मण्डली मूसा और हारून के विरूद्ध बकझक करने लगी। - निर्गमन १६:२


बाइबल पाठ: निर्गमन १५:२२-१६:५

Exo 15:22 तब मूसा इस्राएलियों को लाल समुद्र से आगे ले गया, और वे शूर नाम जंगल में आए; और जंगल में जाते हुए तीन दिन तक पानी का सोता न मिला।
Exo 15:23 फिर मारा नाम एक स्थान पर पहुंचे, वहां का पानी खारा था, उसे वे न पी सके; इस कारण उस स्थान का नाम मारा पड़ा।
Exo 15:24 तब वे यह कह कर मूसा के विरूद्ध बकझक करने लगे, कि हम क्या पीएं ?
Exo 15:25 तब मूसा ने यहोवा की दोहाई दी, और यहोवा ने उसे एक पौधा बतला दिया, जिसे जब उस ने पानी में डाला, तब वह पानी मीठा हो गया। वहीं यहोवा ने उनके लिये एक विधि और नियम बनाया, और वहीं उस ने यह कह कर उनकी परीक्षा की,
Exo 15:26 कि यदि तू अपने परमेश्वर यहोवा का वचन तन मन से सुने, और जो उसकी दृष्टि में ठीक है वही करे, और उसकी सब विधियों को माने, तो जितने रोग मैं ने मिस्रियों पर भेजा है उन में से एक भी तुझ पर न भेजूंगा, क्योंकि मैं तुम्हारा चंगा करने वाला यहोवा हूं।
Exo 15:27 तब वे एलीम को आए, जहां पानी के बारह सोते और सत्तर खजूर के पेड़ थे और वहां उन्होंने जल के पास डेरे खड़े किए।
Exo 16:1 फिर एलीम से कूच करके इस्राएलियों की सारी मण्डली, मिस्र देश से निकलने के महीने के दूसरे महीने के पंद्रहवे दिन को, सीन नाम जंगल में, जो एलीम और सीनै पर्वत के बीच में है, आ पहुंची।
Exo 16:2 जंगल में इस्राएलियों की सारी मण्डली मूसा और हारून के विरूद्ध बकझक करने लगी।
Exo 16:3 और इस्राएली उन से कहने लगे, कि जब हम मिस्र देश में मांस की हांडियों के पास बैठ कर मनमाना भोजन खाते थे, तब यदि हम यहोवा के हाथ से मार डाले भी जाते तो उत्तम वही था, पर तुम हम को इस जंगल में इसलिये निकाल ले आए हो कि इस सारे समाज को भूखों मार डालो।
Exo 16:4 तब यहोवा ने मूसा से कहा, देखो, मैं तुम लोगों के लिये आकाश से भोजन वस्तु बरसाऊंगा और ये लोग प्रतिदिन बाहर जाकर प्रतिदिन का भोजन इकट्ठा करेंगे, इस से मैं उनकी परीक्षा करूंगा, कि ये मेरी व्यवस्था पर चलेंगे कि नहीं।
Exo 16:5 और ऐसा होगा कि छठवें दिन वह भोजन और दिनों से दूना होगा, इसलिये जो कुछ वे उस दिन बटोरें उसे तैयार कर रखें।

एक साल में बाइबल:
  • भजन ५४-५६
  • रोमियों ३

शनिवार, 30 जुलाई 2011

व्यक्तिगत ज़िम्मेदारी

सॉल्मन मछली की नैसर्गिक प्रवृति है कि जिस स्थान पर वह स्वयं पैदा हुई थी, समुंदर और नदियों मे सैंकड़ों मील का सफर तय कर के वे वहीं अपने अंडे देने भी आती हैं। एक तरह से वे एक अदृश्य शक्ति के वशीभूत होकर इस यात्रा और कार्य को पूरा करती हैं। लेकिन मनुष्य जानवरों से भिन्न है। हम अपने व्यवहार के लिए व्यक्तिगत रीति से ज़िम्मेदार हैं और अपने कार्यों के लिए किसी नैसर्गिक प्रक्रिया को दोषी नहीं ठहरा सकते।

अमेरिका में एक अपराधी, जिस पर अनेक हत्याओं का दोष था, मृत्यु दण्ड पाने से पहले बिलकुल अन्तिम समय में सर्वोच्च न्यायालय के एक फैसले से बचाया गया। उसका मानना है कि जानवरों का नैसर्गिक व्यवहार और मनुष्यों व्यवहार एक समान ही हैं। अपने द्वारा करी गई अनेक हत्याओं के विष्य में उसका कहना है कि "वे बस यों ही हो गईं"; उसकी धारणा है कि हत्याओं के लिए कोई अनजानी शक्ति ज़िम्मेदार है, जिसके आधीन उसने बन्दूक चलाई।

लगभग २५०० वर्ष पहले इस्त्राएलियों ने भी अपने अनुचित व्यवहार के लिए परमेश्वर से ऐसा ही बहाना बनाया। उन्होंने एक कहावत को उध्दरित करते हुए अपने व्यवहार का दोष अपने बाप-दादाओं के ऊपर मढ़ना चाहा। लेकिन अपने भविष्यद्वक्ता यहेजकेल द्वारा परमेश्वर ने उन्हें बताया कि वे इन बहानों द्वारा अपनी ज़िम्मेदारी से बच नहीं सकते। परमेश्वर ने उन्हें स्पष्ट कहा कि कोई भला आदमी अपनी दुष्ट सन्तान के कारण दोषी नहीं ठहरेगा और न ही कोई भली सन्तान अपने दुष्ट पिता के पापों के लिए दोषी ठहरेगी। सब को अपनी अपनी ज़िम्मेदारी उठानी पड़ेगी।

हमारी परिस्थिती चाहे कैसी भी क्यों न हो, हम अपने किये के लिए ज़िम्मेदार रहते हैं; संसार के कानून भी इस बात को मानते हैं, इसका पालन करते हैं और इसी आधार पर उन में दण्ड भी निर्धारित किए गए हैं। इसलिए हमारे लिए यही भला है कि हम अपने पापों के लिए परमेश्वर के सामने बहाने बनाने और परिस्थित्यों तथा अन्य लोगों को दोषी ठहराने के बजाए, अपने पापों का अंगीकार कर लें, परमेश्वर प्रभु यीशु से उनके लिए क्षमा माँग लें तथा समय रहते उनके दोष से मुक्त हो जाएं। - हर्ब वैन्डर लुग्ट


अकसर लोग अपनी मूर्खता को ’भाग्य’ कह कर अपनी ज़िम्मेदारी से बचना चाहते हैं।

देखो, सभों के प्राण तो मेरे हैं; जैसा पिता का प्राण, वैसा ही पुत्र का भी प्राण है; दोनों मेरे ही हैं। इसलिये जो प्राणी पाप करे वही मर जाएगा। - यहेजकेल १८:४


बाइबल पाठ: यहेजकेल १८:१-१८

Eze 18:1 फिर यहोवा का यह वचन मेरे पास पहुंचा,
Eze 18:2 तुम लोग जो इस्राएल के देश के विषय में यह कहावत कहते हो, कि जंगली अंगूर तो पुरखा लोग खाते, परन्तु दांत खट्टे होते हैं लड़के-बालों के, इसका क्या अर्थ है?
Eze 18:3 प्रभु यहोवा यों कहता है कि मेरे जीवन की शपथ, तुम को इस्राएल में फिर यह कहावत कहने का अवसर न मिलेगा।
Eze 18:4 देखो, सभों के प्राण तो मेरे हैं; जैसा पिता का प्राण, वैसा ही पुत्र का भी प्राण है; दोनों मेरे ही हैं। इसलिये जो प्राणी पाप करे वही मर जाएगा।
Eze 18:5 जो कोई धमीं हो, और न्याय और धर्म के काम करे,
Eze 18:6 और न तो पहाड़ों पर भोजन किया हो, न इस्राएल के घराने की मूरतों की ओर आंखें उठाई हों, न पराई स्त्री को बिगाड़ा हो, और न ऋतुमती के पास गया हो,
Eze 18:7 और न किसी पर अन्धेर किया हो वरन ऋणी को उसकी बन्धक फेर दी हो, न किसी को लूटा हो, वरन भूखे को अपनी रोटी दी हो और नंगे को कपड़ा ओढ़ाया हो,
Eze 18:8 न ब्याज पर रुपया दिया हो, न रुपए की बढ़ती ली हो, और अपना हाथ कुटिल काम से रोका हो, मनुष्य के बीच सच्चाई से न्याय किया हो,
Eze 18:9 और मेरी विधियों पर चलता और मेरे नियमों को मानता हुआ सच्चाई से काम किया हो, ऐसा मनुष्य धमीं है, वह निश्चय जीवित रहेगा, प्रभु यहोवा की यही वाणी है।
Eze 18:10 परन्तु यदि उसका पुत्र डाकू, हत्यारा, वा ऊपर कहे हुए पापों में से किसी का करने वाला हो,
Eze 18:11 और ऊपर कहे हुए उचित कामों का करने वाला न हो, और पहाड़ों पर भोजन किया हो, पराई स्त्री को बिगाड़ा हो,
Eze 18:12 दीन दरिद्र पर अन्धेर किया हो, औरों को लूटा हो, बन्धक न फेर दी हो, मूरतों की ओर आंख उठाई हो, घृणित काम किया हो,
Eze 18:13 ब्याज पर रुपया दिया हो, और बढ़ती ली हो, तो क्या वह जीवित रहेगा? वह जीवित न रहेगा? इसलिये कि उस ने ये सब घिनौने काम किए हैं वह निश्चय मरेगा और उसका खून उसी के सिर पड़ेगा।
Eze 18:14 फिर यदि ऐसे मनुष्य के पुत्र हों और वह अपने पिता के ये सब पाप देख कर भय के मारे उनके समान न करता हो।
Eze 18:15 अर्थात न तो पहाड़ों पर भोजन किया हो, न इस्राएल के घराने की मूरतों की ओर आंख उठाई हो, न पराई स्त्री को बिगाड़ा हो,
Eze 18:16 न किसी पर अन्धेर किया हो, न कुछ बन्धक लिया हो, न किसी को लूटा हो, वरन अपनी रोटी भूखे को दी हो, नंगे को कपड़ा ओढ़ाया हो,
Eze 18:17 दीन जन की हानि करने से हाथ रोका हो, ब्याज और बढ़ी न ली हो, मेरे नियमों को माना हो, और मेरी विधियों पर चला हो, तो वह अपने पिता के अधर्म के कारण न मरेगा, वरन जीवित ही रहेगा।
Eze 18:18 उसका पिता, जिस ने अन्धेर किया और लूटा, और अपने भाइयों के बीच अनुचित काम किया है, वही अपने अधर्म के कारण मर जाएगा।

एक साल में बाइबल:
  • भजन ५१-५३
  • रोमियों २

शुक्रवार, 29 जुलाई 2011

मुखौटे

हमारा समाज छल और दोगलेपन को प्रोत्साहन देता है। इससे पहले कि हमारे बच्चे स्कूल जाने लायक हों, वे छलावे और दिखावे के व्यवहार की आरंभिक शिक्षा प्राप्त कर चुके होते हैं, तथा कुछ समय और व्यतीत होते होते वे भी इस कला में अपने व्यसक जोड़ीदारों तथा अभिभावकों के समान ही निपुण भी हो जाते हैं।

समाज में इस बात का प्रचलन तो बुरा है ही, लेकिन इससे भी बुरा है जब यह बात और व्यवहार हमारे विश्वास के जीवन में भी दिखाई देने लगती है। जब इतवार को हमें चर्च में होते हैं, तो बड़ी कुशलता से वहाँ हम अपने आचरण को, दूसरे लोगों की अपेक्षा के अनुरूप, ’भले मसीही’ जैसा बना लेते हैं। अपने इस ’रविवारीय व्यवहार’ को बड़ी स्वभाविकता के साथ निभाते हुए हम सबसे अपने अन्दर के स्वार्थी, कंजूस और क्षमाविहीन व्यक्तित्व को सफलता पूर्वक छुपा लेते हैं और लोगों के सामने बड़े धर्मपरायण प्रतीत होते हैं।

प्रसिद्ध मसीही लेखक चार्लस स्विन्डौल ने अपनी एक पुस्तक Improving Your Serve में अपने एक अनुभव का उल्लेख किया। वे एक स्थान पर प्रचारक के रूप में आमंत्रित थे, और वे अपने साथ अपने बच्चों द्वारा उन्हें भेंट में कभी दिया गया रबर से बना एक मुखौटा ले गए। एक शाम जब उनके प्रचार का विष्य था वास्तविकता तथा विश्वसनियता, तो वह उस मुखौटे को लगाकर प्रचार करने लगे। जैसी कि उनकी उम्मीद थी, उपस्थित समूह उनके व्यवहार और प्रचार के विष्य के प्रतिकूल होने के कारण ज़ोर ज़ोर से हंसने लगे। फिर अपने मुखौटे को उतार कर उन्होंने टिप्पणी करी, "कितना विचित्र है कि लोग चेहरे पर लगे वास्तविक मुखौटों की असलियत को तुरंत पहचान लेते हैं, कोई उनसे छला नहीं जा सकता। लेकिन कितना आसान है चेहरों पर नकली तथा अदृश्य मुखौटे लगाए रखना, और लोग उन मुखौटों की वास्तविकता को नहीं पहचान पाते। मसीह के सेवक जिनके हृदय खरे हैं, उन्होंने अपने मुखौटे उतार फेंके हैं और समाज के सामने, अपने उद्धारकर्ता परमेश्वर के समान, अपनी वास्तविकता में जीवन व्यतीत करते हैं। ऐसे सेवकों पर परमेश्वर की विशेष आशीशें बनी रहती हैं।"

हम सब को अपने जीवनों में ढोंग तथा दोगलेपन के साथ संघर्ष करना पड़ता है। अदृश्य मुखौटे लगा कर हम संसार को छल सकते हैं, हृदयों को देखने तथा जाँचने वाले परमेश्वर को नहीं। लेकिन यदि हमारे हृदय खरे होंगे तो हमें अपने चेहरे मुखौटों के पीछे नहीं छुपाने की कोई आवश्यक्ता नहीं होगी। - डेव एग्नर


ढोंगी वह है जिसका ’रविवारीय व्यवहार’ उसके प्रतिदिन के वास्तविक व्यवहार से भिन्न होता है।

इसी रीति से तुम भी ऊपर से मनुष्यों को धर्मी दिखाई देते हो, परन्‍तु भीतर कपट और अधर्म से भरे हुए हो। - मत्ती २३:२८


बाइबल पाठ: मत्ती २३:२५-३३

Mat 23:25 हे कपटी शास्‍त्रियों, और फरीसियों, तुम पर हाय, तुम कटोरे और थाली को ऊपर ऊपर से तो मांजते हो परन्‍तु वे भीतर अन्‍धेर असंयम से भरे हुए हैं।
Mat 23:26 हे अन्‍धे फरीसी, पहिले कटोरे और थाली को भीतर से मांज कि वे बाहर से भी स्‍वच्‍छ हों।
Mat 23:27 हे कपटी शास्‍त्रियों, और फरीसियों, तुम पर हाय; तुम चूना फिरी हुई कब्रों के समान हो जो ऊपर से तो सुन्‍दर दिखाई देती हैं, परन्‍तु भीतर मुर्दों की हड्डियों और सब प्रकार की मलिनता से भरी हैं।
Mat 23:28 इसी रीति से तुम भी ऊपर से मनुष्यों को धर्मी दिखाई देते हो, परन्‍तु भीतर कपट और अधर्म से भरे हुए हो।
Mat 23:29 हे कपटी शास्‍त्रियों, और फरीसियों, तुम पर हाय; तुम भविष्यद्वक्ताओं की कब्रें संवारते और धमिर्यों की कब्रें बनाते हो।
Mat 23:30 और कहते हो, कि यदि हम अपके बाप-दादों के दिनों में होते तो भविष्यद्वक्ताओं की हत्या में उन के साझी न होते।
Mat 23:31 इस से तो तुम अपने पर आप ही गवाही देते हो, कि तुम भविष्यद्वक्ताओं के घातकों की सन्‍तान हो।
Mat 23:32 सो तुम अपने बाप-दादों के पाप का घड़ा भर दो।
Mat 23:33 हे सांपो, हे करैतों के बच्‍चो, तुम नरक के दण्‍ड से क्‍योंकर बचोगे?

एक साल में बाइबल:
  • भजन ४९-५०
  • रोमियों १

गुरुवार, 28 जुलाई 2011

धोखे का मार्ग

आजकल हर कोई अपनी इच्छापूर्ति के लिए अभिनय करने में कुशल है और कई बार सही व्यक्ति और छलावा करने वाले में फर्क बता पाना असंभव हो जाता है। मसीह की मण्डली में भी कई लोग ऐसे होते हैं जो बहुत भक्त और भले होने का व्यवहार करते हैं, इस धारणा में कि वे अपने इस व्यवहार से परमेश्वर को प्रसन्न कर लेंगे।

ऐसी धारणा रखने वाले, एक दन्तकथा वाले उस बकरे के समान हैं जिसे शेर होने का शौक चर्राया और अपनी इस इच्छा की पूर्ति के लिए उस ने अकड़ कर शेर के समान चलना, अपनी छोटी सी पूँछ को बड़ी अदा से हवा में लहराना आदि आरंभ कर दिया। अपनी मिमियाने की आवाज़ को भी उसने शेर की दहाड़ के समान करने का प्रयास किया। अब उसे लगने लगा कि वह भी शेर ही है। एक दिन अपनी इसी अकड़ में जंगल में घूमते हुए उसका सामना असली शेर से हो गया - आगे आप समझदार हैं।

अकसर वे लोग जिन्होंने मसीही विश्वासीयों के समान ही बोलना और व्यवहार करना सीख लिया है, यह मान लेते हैं कि वे भी मसीही विश्वासी हो गए हैं। लेकिन यदि उन्होंने कभी अपना व्यक्तिगत विश्वास मसीह यीशु में नहीं रखा, कभी अपने पापों का अंगीकार और उन से मसीह के नाम में पश्चाताप नहीं किया, कभी अपना जीवन मसीह यीशु को समर्पित नहीं किया, तो उनका विश्वासियों का सा व्यवहार अभिनय मात्र ही है, यथार्त नहीं। वे अभी उस ’निष्कपट विश्वास’ (२ तिमुथियुस १:५) से कोसों दूर हैं केवल जिसके द्वारा ही उद्धार संभव है।

यदि आप अपनी स्वयं निर्धारित धार्मिकता, अपने चर्च में हाज़िरी देने, भक्ति के हाव-भाव और बोलचाल, बाइबल की जानकारी, भले कार्यों आदि पर भरोसा रखकर परमेश्वर को प्रसन्न करने का अपना निश्चय बनाए हुए हैं, तो आप धोखे मे हैं। जैसे वास्तविक शेर का सामना होने पर ही बकरे ने अपनी सच्चाई को पहिचाना, लेकिन तब तक उसके लिए बहुत देर हो चुकी थी, वैसे ही बहुतेरे लोग जब मसीह के न्याय सिंहासन के सामने अपने आप को खड़ा पाएंगे तब ही उन्हें अपनी वास्तविकता का पता चलेगा, लेकिन उनके लिए भी तब बहुत देर हो चुकी होगी।

परमेश्वर के वचन बाइबल की स्पष्ट शिक्षा है कि केवल पापों के अंगीकार और मसीह के नाम में पापों से पश्चाताप और मसीह यीशु में विश्वास तथा समर्पण द्वारा ही हम उसके साथ स्वर्ग में होने के हकदार हो सकते हैं। - डेव एग्नर


अपनी वास्तविक्ता छुपाने के प्रयास में लगे रहने की बजाए, अपनी वास्तविक्ता को मान लेने और उद्धार के लिए परमेश्वर के मार्ग को स्वीकार कर लेने में ही बुद्धिमानी है।

अपने आप को परखो, कि विश्वास में हो कि नहीं; अपने आप को जांचो, क्‍या तुम अपने विषय में यह नहीं जानते, कि यीशु मसीह तुम में है? नहीं तो तुम निकम्मे निकले हो। पर मेरी आशा है, कि तुम जान लोगे, कि हम निकम्मे नहीं। - २ कुरिन्थियों १३:५, ६


बाइबल पाठ: २ कुरिन्थियों १३:१-१०

2Co 13:1 अब तीसरी बार तुम्हारे पास आता हूं: दो या तीन गवाहों के मुंह से हर एक बात ठहराई जाएगी।
2Co 13:2 जैसे मैं जब दूसरी बार तुम्हारे साथ था, सो वैसे ही अब दूर रहते हुए उन लोगों से जिन्‍होंने पहिले पाप किया, और और सब लोगों से अब पहिले से कहे देता हूं, कि यदि मैं फिर आऊंगा, तो नहीं छोडूंगा।
2Co 13:3 तुम तो इस का प्रमाण चाहते हो, कि मसीह मुझ में बोलता है, जो तुम्हारे लिये निर्बल नहीं परन्‍तु तुम में सामर्थी है।
2Co 13:4 वह निर्बलता के कारण क्रूस पर चढ़ाया तो गया, तौभी परमेश्वर की सामर्थ से जीवित है, हम भी तो उस में निर्बल हैं; परन्‍तु परमेश्वर की सामर्थ से जो तुम्हारे लिये है, उसके साथ जीएंगे।
2Co 13:5 अपने आप को परखो, कि विश्वास में हो कि नहीं; अपने आप को जांचो, क्‍या तुम अपने विषय में यह नहीं जानते, कि यीशु मसीह तुम में है? नहीं तो तुम निकम्मे निकले हो।
2Co 13:6 पर मेरी आशा है, कि तुम जान लोगे, कि हम निकम्मे नहीं।
2Co 13:7 और हम अपने परमेश्वर से प्रार्थना करते हैं, कि तुम कोई बुराई न करो; इसलिये नहीं, कि हम खरे देख पड़ें, पर इसलिये कि तुम भलाई करो, चाहे हम निकम्मे ही ठहरें।
2Co 13:8 क्‍योंकि हम सत्य के विरोध में कुछ नहीं कर सकते, पर सत्य के लिये कर सकते हैं।
2Co 13:9 जब हम निर्बल हैं, और तुम बलवन्‍त हो, तो हम आनन्‍दित होते हैं, और यह प्रार्थना भी करते हैं, कि तुम सिद्ध हो जाओ।
2Co 13:10 इस कारण मैं तुम्हारे पीठ पीछे ये बातें लिखता हूं, कि उपस्थित होकर मुझे उस अधिकार के अनुसार जिसे प्रभु ने बिगाड़ने के लिये नहीं पर बनाने के लिये मुझे दिया है, कड़ाई से कुछ करना न पड़े।

एक साल में बाइबल:
  • भजन ४६-४८
  • प्रेरितों २८

बुधवार, 27 जुलाई 2011

पहले जांचो-परखो, फिर मानो

नीचे दिया गया आज का बाइबल पद प्रभु यीशु के चेले और प्रेरित पतरस के जीवन से संबंधित एक प्रसंग से लिया गया है। पतरस दृढ़ भक्ति से प्रभु यीशु का अनुसरण करने वाला चेला था और गैर यहूदियों में भी प्रभु यीशु के नाम से सेवकाई करता था। उन दिनों में यहूदी समाज के लोग गैर यहूदियों तुच्छ जानते थे और उनसे कोई संबंध अथवा संपर्क नहीं रखते थे। एक समय जब कुछ यहूदी विश्वासी यरुशलेम से पतरस के पास आए तो अपने कुछ संकीर्ण मानसिकता वाले साथियों के कहने में आ कर वह अपने गैर यहूदी मित्रों से अलग हो गया, यह दिखाने को कि अन्य यहूदियों के समान वह भी गौर यहूदियों से कोई मेल-जोल नहीं रखता है। उन दिनों पौलुस प्रेरित भी वहीं पर था, उसे जब इस बात का पता चला तो उसने पतरस को उसके इस दोगलेपन के लिए आड़े हाथों लिया, क्योंकि पौलुस जानता था कि एक खरा और निष्कपट विश्वासी भी गलती कर सकता है और अपनी गलती से मसीह की सेवकाई को बहुत हानि पहुँचा सकता है, जिसे आरंभ में ही सुधारा जाना अनिवार्य है।

ऐसी गलती प्रत्येक मसीही विश्वासी के साथ घटित हो सकती है। आज भी कई मसीह के खरे और निष्कपट सेवक, अपनी कुछ अनुचित धारणाओं के कारण ऐसी ही गलती कर लेते हैं और उनकी इस असावधानी से मसीह के नाम के प्रसार में बाधा भी आ जाती है तथा लोगों का व्यक्तिगत नुकसान भी हो जाता है।

होबार्ट फ्रीमैन भी एक ऐसे ही बड़े समर्पित और खरे प्रचारक थे और उनकी सेवकाई द्वारा कई लोगों ने मसीह यीशु को अपना व्यक्तिगत उद्धारकर्ता ग्रहण किया। परमेश्वर और मसीह के प्रति उनके समर्पण तथा सेवाभाव में कोई कमी या कपट नहीं था और ना ही उनके जीवन मे कोई खोट थी। लेकिन उनकी एक गलत धारणा कई लोगों के लिए बहुत कष्ट का कारण भी बनी। वे चिकित्सकों को नापसन्द करते थे, उन्हें ’डाक्टरी देवता’ कहते थे और अपने अनुयायियों से डाक्टरों से चिकित्सा सेवा न ग्रहण करने के लिए कहते थे, जिस कारण उनके कई अनुयायियों को बहुत कष्टों का सामना भी करना पड़ा। उनकी इस धारणा के लिए बाइबल में कोई आधार नहीं है और ना ही ऐसी कोई शिक्षा मसीह यीशु या उनके चेलों ने कभी कहीं दी। यह केवल होबार्ट फ्रीमैन की अपनी धारणा थी जिसे वह अपने साथ जुड़े लोगों पर थोपते थे। कमी न उनके विश्वास में थी न उनके मसीही सेवकाई के प्रति समर्पण में, कमी थी तो एक विशेष बात को लेकर उनके परमेश्वर के वचन की समझ और व्याख्या में।

लोगों के खरे और भले जीवनों से प्रभावित होकर हम हर बात में उन्हें पूर्णतः विश्वास योग्य मान सकते हैं, लेकिन परमेश्वर का वचन बाइबल कभी हमें किसी भी बात के लिए अन्ध विश्वास करने के लिए नहीं कहती। बाइबल की स्पष्ट और खुली शिक्षा है कि, "सब बातों को परखो: जो अच्‍छी है उसे पकड़े रहो" (१ थिस्सुलिनीकियों ५:२१)। यद्यपि लोग बड़े भक्त, खरे और ईमानदार प्रतीत हो सकते हैं और हमें उनके जीवनों में कोई खोट नहीं दिखाई देता हो, लेकिन यह हमारा कर्तव्य है कि उनकी हर शिक्षा को हम पहले परमेश्वर के वचन से जाँचें (प्रेरितों १७:११) और वचनानुसार यदि खरी पाई जाएं तब ही मानें।

खरे लोग भी गलत हो सकते हैं। - हर्ब वैण्डर लुग्ट


गलती अकसर सच्चई के भेस में प्रस्तुत होती है।

पर जब कैफा अन्‍ताकिया में आया तो मैं ने उसके मुंह पर उसका साम्हना किया, क्‍योंकि वह दोषी ठहरा था। - गलतियों २:११


बाइबल पाठ: गलतियों २:११-२१
Gal 2:11 पर जब कैफा अन्‍ताकिया में आया तो मैं ने उसके मुंह पर उसका साम्हना किया, क्‍योंकि वह दोषी ठहरा था।
Gal 2:12 इसलिये कि याकूब की ओर से कितने लोगों के आने से पहिले वह अन्यजातियों के साय खाया करता था, परन्‍तु जब वे आए, तो खतना किए हुए लोगों के डर के मारे उन से हट गया और किनारा करने लगा।
Gal 2:13 और उसके साथ शेष यहूदियों ने भी कपट किया, यहां तक कि बरनबास भी उन के कपट में पड़ गया।
Gal 2:14 पर जब मैं ने देखा, कि वे सुसमाचार की सच्‍चाई पर सीधी चाल नहीं चलते, तो मैं ने सब के साम्हने कैफा से कहा, कि जब तू यहूदी होकर अन्यजातियों की नाईं चलता है, और यहूदियों की नाईं नहीं तो तू अन्यजातियों को यहूदियों की नाईं चलने को क्‍यों कहता है?
Gal 2:15 हम जो जन्म के यहूदी हैं, और पापी अन्यजातियों में से नहीं।
Gal 2:16 तौभी यह जानकर कि मनुष्य व्यवस्था के कामों से नहीं, पर केवल यीशु मसीह पर विश्वास करने के द्वारा धर्मी ठहरता है, हम ने आप भी मसीह यीशु पर विश्वास किया, कि हम व्यवस्था के कामों से नहीं पर मसीह पर विश्वास करने से धर्मी ठहरें; इसलिये कि व्यवस्था के कामों से कोई प्राणी धर्मी न ठहरेगा।
Gal 2:17 हम जो मसीह में धर्मी ठहरना चाहते हैं, यदि आप ही पापी निकलें, तो क्‍या मसीह पाप का सेवक है कदापि नहीं।
Gal 2:18 क्‍योंकि जो कुछ मैं ने गिरा दिया, यदि उसी को फिर बनाता हूं, तो अपने आप को अपराधी ठहराता हूं।
Gal 2:19 मैं जो व्यवस्था के द्वारा व्यवस्था के लिये मर गया, कि परमेश्वर के लिये जीऊं।
Gal 2:20 मैं मसीह के साथ क्रूस पर चढ़ाया गया हूं, और अब मैं जीवित न रहा, पर मसीह मुझ में जीवित है: और मैं शरीर में अब जो जीवित हूं तो केवल उस विश्वास से जीवित हूं, जो परमेश्वर के पुत्र पर है, जिस ने मुझ से प्रेम किया, और मेरे लिये अपने आप को दे दिया।
Gal 2:21 मैं परमेश्वर के अनुग्रह को व्यर्थ नहीं ठहराता, क्‍योंकि यदि व्यवस्था के द्वारा धामिर्कता होती, तो मसीह का मरना व्यर्थ होता।

एक साल में बाइबल:
  • भजन ४३-४५
  • प्रेरितों २७:२७-४४