ई-मेल संपर्क / E-Mail Contact

इन संदेशों को ई-मेल से प्राप्त करने के लिए अपना ई-मेल पता इस ई-मेल पर भेजें : rozkiroti@gmail.com / To Receive these messages by e-mail, please send your e-mail id to: rozkiroti@gmail.com

शनिवार, 21 जनवरी 2012

आपसी मित्र

   कल्पना कीजिए कि आप विदेश में किसी स्थान पर पहली बार गए हैं और एक सभा में अप्रत्याशित रूप से पहुंच जाते हैं - ऐसे लोगों के बीच जिनसे आप पहले कभी नहीं मिले, जो आपको ज़रा नहीं जानते और ना ही आप उन्हें जानते हैं, लेकिन फिर भी कुछ ही मिनिटों में एक ऐसा आपसी घनिष्ठ संबंध बन जाता है कि वे लोग आपसे सभा को संबोधित करने का अनुरोध करते हैं। यह तब ही संभव है जब दोनो लोगों के बीचे कोई ऐसा आपसी मित्र हो जो दोनो को जानता हो और दोनो के बीच के अनजानेपन की दूरी को दूर कर सके।

   यह घटना मेरे साथ हुई, जब मैं एक मिशनरी टीम को लेकर जमैका की डिस्कवरी बे पहुंचा। हमारे अमेरिका से रवाना होने से पहले, मेरे एक मित्र डोरेंट ब्राउन ने, जो जमैका के एक पास्टर हैं, हमसे वहां के एक चर्च में संगति के लिए जाने की सिफारिश करी। जब मैं और मेरा दल उस चर्च में पहुंचे तो हमने पास्टर डोरेंट ब्राउन का उल्लेख किया; हमें ना केवल चर्च के लोगों से स्वागत मिला वरन मुझ से चर्च में सन्देश देने के लिए भी आग्रह किया गया और हमारी टीम को वहां एक स्तुती गीत गाने का भी अवसर दिया गया।

   य्द्यपि इस घटना में पास्टर डोरेंट का नाम लेना महत्वपूर्ण तथा प्रभावी था, लेकिन मेरे विचार से इस गर्मजोशी से मिले स्वागत और आदर के लिए उससे भी अधिक महत्वपुर्ण और प्रभावी था वह आपसी मित्र जो मुझे पास्टर डोरेंट से, पास्टर डोरेंट को जमैका के उस चर्च तथा उसके सदस्यों से तथा हमारी टीम के प्रत्येक सदस्य को एक दूसरे से जोड़ता है - हमारा प्रभु यीशु।

   प्रभु यीशु में हम सबका विश्वास और उस विश्वास के द्वारा प्रभु की विश्व्यापी मण्डली का सद्स्य होना, संसार के प्रत्येक मसीही विश्वासी को एक परस्पर पारिवारिक संबंध में ले आता है जिसके कारण अनजानेपन के अवरोध दूर हो जाते हैं और अनजाने लोग प्रेम के बन्धन में जुड़कर एक साथ प्रभु के लिए कार्यकारी हो पाते हैं, प्रभु की महिमा करने पाते हैं। प्रभु यीशु एक ऐसा आपसी मित्र है जिसने हम सबके लिए अपनी जान दी (यूहन्ना १५:१३), और जितने उसपर विश्वास लाते हैं उन्हें वह पारिवारिक संबंध में ले आता है (१ पतरस २:१७)। जब आप किसी अनजाने व्यक्ति से मिलें और दोनो को पता लगे कि दोनो ही प्रभु यीशु के विश्वासी हैं, तब क्या आपने इस संबंध के प्रभाव को अनुभव किया है?

   प्रभु यीशु, हमारा उद्धारकर्ता, हमारा आपसी मित्र, जो अपने प्रेम ध्वजा के तले समस्त संसार के लोगों के हृदय को आपस में मिला देता है। - डेव ब्रैनन


जो मसीह यीशु की ओर आकर्षित हैं वे आपस में भी आकर्षित रहते हैं।

...परन्‍तु मैं ने तुम्हें मित्र कहा है, क्‍योंकि मैं ने जो बातें अपने पिता से सुनीं, वे सब तुम्हें बता दीं। - यूहन्ना १५:१५

बाइबल पाठ: यूहन्ना १५:९-१७
Joh 15:9  जैसा पिता ने मुझ से प्रेम रखा, मेरे प्रेम में बने रहो।
Joh 15:10  यदि तुम मेरी आज्ञाओं को मानोगे, तो मेरे प्रेम में बने रहोगे: जैसा कि मैं ने अपने पिता की आज्ञाओं को माना है, और उसके प्रेम में बना रहता हूं।
Joh 15:11  मैं ने ये बातें तुम से इसलिये कही हैं, कि मेरा आनन्‍द तुम में बना रहे, और तुम्हारा आनन्‍द पूरा हो जाए।
Joh 15:12  मेरी आज्ञा यह है, कि जैसा मैं ने तुम से प्रेम रखा, वैसा ही तुम भी एक दूसरे से प्रेम रखो।
Joh 15:13  इस से बड़ा प्रेम किसी का नहीं, कि कोई अपने मित्रों के लिये अपना प्राण दे।
Joh 15:14  जो कुछ मैं तुम्हें आज्ञा देता हूं, यदि उसे करो, तो तुम मेरे मित्र हो।
Joh 15:15 अब से मैं तुम्हें दास न कहूंगा, क्‍योंकि दास नहीं जानता, कि उसका स्‍वामी क्‍या करता है: परन्‍तु मैं ने तुम्हें मित्र कहा है, क्‍योंकि मैं ने जो बातें अपने पिता से सुनीं, वे सब तुम्हें बता दीं।
Joh 15:16 तुम ने मुझे नहीं चुना परन्‍तु मैं ने तुम्हें चुना है और तुम्हें ठहराया ताकि तुम जाकर फल लाओ, और तुम्हारा फल बना रहे, कि तुम मेरे नाम से जो कुछ पिता से मांगो, वह तुम्हें दे।
Joh 15:17  इन बातें की आज्ञा मैं तुम्हें इसलिये देता हूं, कि तुम एक दूसरे से प्रेम रखो।
 
एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन १-३ 
  • मत्ती १४:१-२१

शुक्रवार, 20 जनवरी 2012

पुनःनिर्देशित

   प्यानो वादक लिओन फ्लेशर ने अपने प्यानो वादन का औप्चारिक आरंभ १६ वर्ष की छोटी आयु में न्यू यॉर्क फिलहारमोनिक वाद्यवृंद के साथ कर लिया। इसके बाद उन्होंने कई अन्तर्राष्ट्रीय संगीत प्रतियोज्ञाताएं भी जीतीं और संसार भर के सर्वोत्तम संगीत गोष्ठियों में अपनी योग्यता प्रमाणित करी और यश पाया। किंतु ३७ वर्ष की आयु में वे नाड़ीतंत्र से संबंधित डिस्टोनिया नामक बिमारी का शिकार हो गए, जिसके कारण उनके दाहिने हाथ ने काम करना बन्द कर दिया। निराशा और एकाकीपन की एक अवधि के पश्चात उन्होंने संगीत सिखाना और वाद्यवृंद संचालन करना आरंभ कर दिया, क्योंकि, जैसा कि उन्होंने स्वयं कहा, उन्हें प्यानो से नहीं संगीत से अधिक प्रेम था।

   जब याकूब का प्रीय पुत्र युसुफ अपने ही भाईयों की ईर्ष्या के कारण, उनके द्वारा गुलामी में बेच दिया गया (उत्पत्ति ३७:१२-३६) तो वह भी अपनी निराशा और कुंठाओं में अकेला और खिसिया हुआ रह सकता था। परन्तु, युसुफ ने ऐसा नहीं किया, वह इन अनापेक्षित तथा विपरीत और निराशाजनक परिस्थितियों में भी परमेश्वर में मग्न रहा, और उत्पत्ति के ३९ अध्याय में हम चार बार लिखा हुआ पाते हैं कि परमेश्वर उसके साथ था (पद २, ३, २१, २३) तथा उसके कार्य परमेश्वर के प्रति उसके विश्वास को दिखाते थे। उसके उत्तम व्यवहार के द्वारा मिस्त्र के उसके स्वामियों ने पहचाना कि परमेश्वर उसके साथ है।

   अवश्य ही यूसुफ अपने गुलामी के समय में अपने अतीत और जीवन में जो कुछ उसने खोया था उसको सोचकर बहुत दुखी होता होगा, किंतु उसने इन बातों को अपने परमेश्वर और उसकी भलाई पर विश्वास पर हावी नहीं होने दिया, और परमेश्वर ने उचित समय पर उसे उन्नति के ऐसे शिखर पहुंचाया जिसकी कल्पना भी उस की सोच समझ से परे थी।

   जब हमारे सपने टूट जाते हैं तो हमारी प्रतिक्रिया कैसी होती है? क्या हम परमेश्वर से अपने सपनों से बढ़कर प्रेम करते हैं? क्या विपरीत और समझ से परे निराशाजनक परिस्थितियां परमेश्वर में हमारे विश्वास को डगमगा देती हैं? वह जो भला ही करने वाला परमेश्वर है, हमारी भलाई के ही लिए हमें संभवतः किसी अन्य ओर ले जाने का प्रयास कर रहा है; क्या हम उसके द्वारा पुनःनिर्देशित होने को तैयार हैं? क्या एक नई दिशा में जाने के उसके निर्देशों का पालन करने को रज़ामन्द हैं? अपने हर बच्चे के लिए परमेश्वर की हर योजना भलाई ही की है। उसके हाथों में समर्पित हो जाईए, आपका भविष्य आपकी कल्पना से भी अधिक भला और महिमामय होगा। - डेविड मैककैसलैंड


मनुष्य मन में अपने मार्ग पर विचार करता है, परन्तु यहोवा ही उसके पैरों को स्थिर करता है। - नीतिवचन १६:९

और यूसुफ अपने मिस्री स्वामी के घर में रहता था, और यहोवा उसके संग था; सो वह भाग्यवान पुरूष हो गया। - उत्पत्ति ३९:२

बाइबल पाठ: उत्पत्ति ३९:१-९
Gen 39:1  जब यूसुफ मिस्र में पहुंचाया गया, तब पोतीपर नाम एक मिस्री, जो फिरौन का हाकिम, और जल्लादों का प्रधान था, उस ने उसको इश्माएलियों के हाथ, से जो उसे वहां ले गए थे, मोल लिया।
Gen 39:2  और यूसुफ अपने मिस्री स्वामी के घर में रहता था, और यहोवा उसके संग था; सो वह भाग्यवान पुरूष हो गया।
Gen 39:3  और यूसुफ के स्वामी ने देखा, कि यहोवा उसके संग रहता है, और जो काम वह करता है उसको यहोवा उसके हाथ से सुफल कर देता है।
Gen 39:4  तब उसकी अनुग्रह की दृष्टि उस पर हुई, और वह उसकी सेवा टहल करने के लिये नियुक्त किया गया : फिर उस ने उसको अपने घर का अधिकारी बना के अपना सब कुछ उसके हाथ में सौप दिया।
Gen 39:5  और जब से उस ने उसको अपने घर का और अपनी सारी सम्पत्ति का अधिकारी बनाया, तब से यहोवा यूसुफ के कारण उस मिस्री के घर पर आशीष देने लगा; और क्या घर में, क्या मैदान में, उसका जो कुछ था, सब पर यहोवा की आशीष होने लगी।
Gen 39:6  सो उस ने अपना सब कुछ यूसुफ के हाथ में यहां तक छोड़ दिया: कि अपके खाने की रोटी को छोड़, वह अपनी सम्पत्ति का हाल कुछ न जानता था। और यूसुफ सुन्दर और रूपवान था।
Gen 39:7  इन बातों के पश्चात ऐसा हुआ, कि उसके स्वामी की पत्नी ने यूसुफ की ओर आंख लगाई, और कहा, मेरे साथ सो।
Gen 39:8  पर उस ने अस्वीकार करते हुए अपने स्वामी की पत्नी से कहा, सुन, जो कुछ इस घर में है मेरे हाथ में है; उसे मेरा स्वामी कुछ नहीं जानता, और उस ने अपना सब कुछ मेरे हाथ में सौप दिया है।
Gen 39:9  इस घर में मुझ से बड़ा कोई नहीं, और उस ने तुझे छोड़, जो उसकी पत्नी है, मुझ से कुछ नहीं रख छोड़ा; सो भला, मैं ऐसी बड़ी दुष्टता करके परमेश्वर का अपराधी क्योंकर बनूं?
 
एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति ४९-५० 
  • मत्ती १३:३१-५८

गुरुवार, 19 जनवरी 2012

आवश्यक विश्वासयोग्य सहायक

जब मैं और मेरी पत्नि किसी यात्रा की तैयारी कर रहे होते हैं, तो हमारे प्रथामिक कार्यों में से एक होता है उस इलाके के सड़कों के मानचित्र का अध्ययन करना। सड़कों के उस मार्गदर्शक मानचित्र को हम बड़े ध्यान से अध्ययन करते हैं, सबसे अच्छे मार्ग खोजते हैं, मार्गों के विकल्प खोजते हैं, कितनी दूरी हमें तय करनी होगी पता करते हैं, एक दिन में हम कितनी दूरी तय कर पाएंगे इसका अंदाज़ा लेते हैं, उस इलाके में देखने लायक रोचक स्थान और पर्यटल स्थल पता करते हैं और इस सारी जानकारी के आधार पर हहोने वाले अपने खर्चे का अंदाज़ा लगाते हैं। सारी यात्रा में यह मार्गदर्शक मानचित्र हमारे साथ रहता है, और हम बार बार उसे देखते रहते हैं, उसके अनुसार अपनी स्थिति का आंकलन करते रहते हैं और अपने विकल्प तैयार रखते हैं। हमारी यात्रा में वह हमारा ऐसा सहायक होता है जिसके बिना सुरक्षित और भली भांति यात्रा कर पाना संभव नहीं है।

   मसीही विश्वासियों के लिए, उनकी मसीही जीवन यात्रा में परमेश्वर का वचन बाइबल भी यही भूमिका निभाती है। उनकी जीवन यात्रा में ना केवल वह उनका मार्गदर्शन करती है, सही निर्णय लेने में सहायता करती है, वरन वह इससे भी कहीं बढ़कर है। परमेश्वर के वचन बाइबल को अनेक प्रकार से संबोधित किया गया है, जो उसके गुणों को दिखाता है; जैसे: 
  • मधु से मीठा (भजन १९:१०; ११९:१०३) 
  • मार्ग का दीपक और उजियाला (भजन ११९:१०५) 
  • वर्षा एवं हिम (यशायह ५५:१०, ११) 
  • आग (यर्मियाह २३:२९) 
  • हथौड़ा (यर्मियाह २३:२९) 
  • जल (इफिसियों ५:२६) 
  • तलवार (इफिसियों ६:१७) 
  • ठोस आहार (इब्रानियों ५:१२) 
  • दर्पण (याकूब १:२३) 
  • दूध (१ पतरस २:२)

   राजमार्ग के यात्रियों के समान, हम मसीही विश्वासी भी एक लंबी यात्रा पर हैं, जो जोखिम भरी भी हो सकती है। अपनी इस यात्रा में हमें कई निर्णय लेने होंगे, कई आवश्यक्ताएं हमारे सामने आएंगी, कई परिस्थितियों का सामना करना होगा। यह वचन हमें इन निर्णयों, आवश्यक्ताओं और परिस्थितियों को सही रीति से समझने और निभाने के लिए दिया गया है। हमारी जीवन यात्रा में यह हमारा आवश्यक तथा विश्वासयोग्य सहायक है, जिसे हमें अपने साथ सदा रखना चाहिए तथा जिसका ध्यानपूर्वक अध्ययन और परामर्श हमें करते रहना चाहिए। मसीही जीवन यात्रा इसके बिना संभव नहीं है। - डेव एग्नर


बाइबल एक कुतुबनुमा (कम्पास) के समान सदा सही दिशा दिखाती रहती है।

हे यहोवा, मुझे अपनी विधियों का मार्ग दिखा दे; तब मैं उसे अन्त तक पकड़े रहूंगा। - भजन ११९:३३

बाइबल पाठ: भजन ११९:१२९-१३६
Psa 119:129  तेरी चितौनियां अनूप हैं, इस कारण मैं उन्हें अपने जी से पकड़े हुए हूं।
Psa 119:130  तेरी बातों के खुलने से प्रकाश होता है; उस से भोले लोग समझ प्राप्त करते हैं।
Psa 119:131  मैं मुंह खोलकर हांफने लगा, क्योंकि मैं तेरी आज्ञाओं का प्यासा था।
Psa 119:132  जैसी तेरी रीति अपने नाम की प्रीति रखने वालों से है, वैसे ही मेरी ओर भी फिरकर मुझ पर अनुग्रह कर।
Psa 119:133  मेरे पैरों को अपने वचन के मार्ग पर स्थिर कर, और किसी अनर्थ बात को मुझ पर प्रभुता न करने दे।
Psa 119:134  मुझे मनुष्यों के अन्धेर से छुड़ा ले, तब मैं तेरे उपदेशों को मानूंगा।
Psa 119:135  अपने दास पर अपने मुख का प्रकाश चमका दे, और अपनी विधियां मुझे सिखा।
Psa 119:136  मेरी आंखों से जल की धारा बहती रहती है, क्योंकि लोग तेरी व्यवस्था को नहीं मानते।
एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति ४६-४८ 
  • मत्ती १३:१-३०

बुधवार, 18 जनवरी 2012

महिमा का पात्र

   पुरातत्वशास्त्री बारबरा मर्टज़ को मिस्त्र के प्राचीन फिरौन रैम्सेज़ द्वतीय से शिकायत है। अपनी पुस्तक Temples, Tombs, and Heiroglyphs में बारबरा लिखती हैं कि: "मिस्त्र की प्राचीन दीवारों पर हर जगह रैम्सेज़ के चेहरे, आकृति या नाम की उपस्थिति बेहद उबा देने वाली हो जाती है।" अपनी महिमा करवाने से कभी ना उबने वाले इस राजा ने मिस्त्र के धर्म का, जिस में राजा को देवता मानकर पूजा जाता था, भरपूरी से लाभ उठाया, और हर संभव स्थान पर अपनी कोई न कोई छवि स्थापित करवा दी जिससे उसे महिमा मिलती रहे।

   रैम्सेज़ के महिमा पाते रहने के इस व्यवहार की तुलना पौलुस और बरनाबास के व्यवहार से कीजिए। अपनी एक मिशनरी यात्रा के दौरान उन्हें ऐसी परिस्थिति का सामना करना पड़ा जहाँ लोग उन्हें महिमा देना चाहते थे, पर उन्होंने इन्कार कर दिया। लुस्त्रा नामक एक नगर में, जो मूर्तिपूजा में लिप्त था, उन्होंने यीशु के नाम में एक जन्म के लंगड़े को चंगा किया; चंगाई का यह अद्भुत कार्य देखकर उस नगर के लोग विस्मित हो गए और: "लोगों ने पौलुस का यह काम देखकर लुकाउनिया भाषा में ऊंचे शब्‍द से कहा; देवता हमारे पास उतर आए हैं" (प्रेरितों १४:११); फिर तुरंत ही लोगों ने उन्हें बलिदान चढ़ाने और उनकी पूजा करने के लिए तैयारी आरंभ कर दी। यह सब देखकर पौलुस और बरनाबास बहुत दुखी हुए और लोगों को ऐसा करने से रोकते हुए कहा: "हम भी तो तुम्हारे समान दु:ख-सुख भोगी मनुष्य हैं, और तुम्हें सुसमाचार सुनाते हैं, कि तुम इन व्यर्थ वस्‍तुओं से अलग होकर जीवते परमेश्वर की ओर फिरो, जिस ने स्‍वर्ग और पृथ्वी और समुद्र और जो कुछ उन में है बनाया" (प्रेरितों १४:१५)।

   आज हम मसीही विश्वासी चाहे अपौलुस और बरनाबास के समान परमेश्वर के लिए अद्भुत आश्चर्याकर्म ना कर पाते हों, लेकिन हर विश्वासी मसीह के लिए कुछ न कुछ तो कर ही सकता है, और बहुतेरे करते भी हैं। हमारा मसीही जीवन और कार्य संसार और संसार के लोग को प्रभावित कर, उन्हें इन कार्यों के कारण हमें आदर और महिमा देने को प्रेरित कर सकता है। यदि ऐसी स्थिति आए, तो पौलुस और बरनाबास के समान ही हमें महिमा के पात्र नहीं बनना, वरन उस सारी महिमा, यश, कीर्ति और आदर को महिमा के सच्चे पात्र - परमेश्वर प्रभु यीशु मसीह ही की ओर केंद्रित करना है तथा लोगों को उस जीवते सच्चे परमेश्वर के बारे में बताना है। - डेनिस फिशर


मनुष्य का सबसे महान लक्ष्य स्वयं महिमा पाना नहीं, महिमा के सच्चे पात्र - परमेश्वर प्रभु यीशु मसीह को महिमा देना है।

[परमेश्वर:] अपने निमित्त, हां अपने ही निमित्त मैं ने यह किया है, मेरा नाम क्यों अपवित्र ठहरे? अपनी महिमा मैं दूसरे को नहीं दूंगा। - यशायाह ४८:११

बाइबल पाठ: प्रेरितों १४:४-१८
Act 14:4  परन्‍तु नगर के लोगों में फूट पड़ गई थी; इस से कितने तो यहूदियों की ओर, और कितने प्रेरितों की ओर हो गए।
Act 14:5  परन्‍तु जब अन्यजाति और यहूदी उन का अपमान और उन्‍हें पत्थरवाह करने के लिये अपने सरदारों समत उन पर दौड़े।
Act 14:6  तो वे इस बात को जान गए, और लुकाउनिया के लुस्‍त्रा और दिरबे नगरों में, और आसपास के देश में चले गए।
Act 14:7   और वहां सुसमाचार सुनाने लगे।
Act 14:8  लुस्‍त्रा में एक मनुष्य बैठा था, जो पांवों का निर्बल था: वह जन्म ही से लंगड़ा था, और कभी न चला था।
Act 14:9   वह पौलुस को बातें करते सुन रहा था और इस ने उस की ओर टकटकी लगाकर देखा कि इस को चंगा हो जाने का विश्वास है।
Act 14:10  और ऊंचे शब्‍द से कहा, अपने पांवों के बल सीधा खड़ा हो: तब वह उछलकर चलने फिरने लगा।
Act 14:11  लोगों ने पौलुस का यह काम देखकर लुकाउनिया भाषा में ऊंचे शब्‍द से कहा; देवता हमारे पास उतर आए हैं।
Act 14:12  और उन्‍होंने बरनबास को ज्यूस, और पौलुस को हिरमेस कहा, क्‍योंकि यह बातें करने में मुख्य था।
Act 14:13  और ज्यूस के उस मन्‍दिर का पुजारी जो उस के नगर के साम्हने था, बैल और फूलों के हार फाटकों पर लाकर लोगों के साथ बलिदान करना चाहता था।
Act 14:14  परन्‍तु बरनबास और पौलुस प्रेरितों ने जब सुना, तो अपने कपड़े फाड़े, और भीड़ में लपक गए, और पुकारकर कहने लगे; हे लोगो तुम क्‍या करते हो?
Act 14:15  हम भी तो तुम्हारे समान दु:ख-सुख भोगी मनुष्य हैं, और तुम्हें सुसमाचार सुनाते हैं, कि तुम इन व्यर्थ वस्‍तुओं से अलग होकर जीवते परमेश्वर की ओर फिरो, जिस ने स्‍वर्ग और पृथ्वी और समुद्र और जो कुछ उन में है बनाया।
Act 14:16  उस ने बीते समयों में सब जातियों को अपने अपने मार्गों में चलने दिया।
Act 14:17  तौभी उस ने अपने आप को बे-गवाह न छोड़ा; किन्‍तु वह भलाई करता रहा, और आकाश से वर्षा और फलवन्‍त ऋतु देकर, तुम्हारे मन को भोजन और आनन्‍द से भरता रहा।
Act 14:18  यह कहकर भी उन्‍होंने लोगों को कठिनता से रोका कि उन के लिये बलिदान न करें।
 
एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति ४३-४५ 
  • मत्ती १२:२४-५०

मंगलवार, 17 जनवरी 2012

सबका मामला

   घटना १९५५ की है जब अमेरिका के दक्षिणी प्रांतों में अपनी रंग-भेद नीतियाँ गहरी पैठ बनाए हुई थीं। उत्तरी प्रांत शिकागो से एमेट टिल नामक एक काला युवक अपने रिशतेदारों से मिलने दक्षिणी प्रांत मिसिस्सिपी गया। एमेट ने वहाँ एक श्वेत महिला से बात करने का ’दुसाहस’ किया और उसके इस ’अपराध’ के कारण दो श्वेत लोगों ने उसकी निर्मम हत्या कर दी। उन दोनो पर मुकदमा चला और पंचों ने, जो सभी श्वेत तथा पुरुष थे, एक घंटे से भी कम समय में विचार-विमर्ष कर के उन दोनो को निर्दोष कहा तथा न्यायाधीश ने उन पंचों के निर्णय को सही माना तथा दोनो अभियुक्तों को बरी कर दिया। बाद में दोनो ने ’लाईफ’ पत्रिका को दिये एक साक्षात्कार में अपने अपराध को स्वीकार भी कर लिया किंतु उन्हें कोई सज़ा नहीं हुई।

   न्यायाधीश के पैसले के बाद एमेट की माँ ने कहा, "दो महीने पहले मेरे पास शिकागो में एक अच्छा घर था। मेरी अच्छी नौकरी थी। मेरा एक बेटा था। जब दक्षिणी प्रांतों में नीग्रो लोगों के साथ कुछ दुर्व्यवहार होता था तो मैं कहती थी, ’ये उनका अपना मामला है, मेरा इससे कोई लेना-देना नहीं है’। अब मैं जानती हूँ कि मैं कितनी गलत थी। मेरे पुत्र की हत्या ने मुझे दिखा दिया है कि संसार में कहीं भी कोई भी अन्याय हो, वह हम सब का मामला होता है।"

   दूसरों की चिंताओं को अपना बनाना ही परमेश्वर के वचन बाइबल में लैव्यवस्था १९:१८ "...एक दूसरे से अपने समान प्रेम रखना" का आह्वाहन है। प्रभु यीशु ने इस पद को उध्वत कर के उसकी व्याखया करी और समझाया कि इसका सार है कि प्रेम दिखाने के लिए स्थान या व्यक्ति की कोई सीमा ना रखें (मत्ती २२:३९; लूका १०:२५-३७)। हमारा पड़ौसी केवल वही नहीं है जो हमारे निकट रहता है; हर वह व्यक्ति जिसे हमारी सहायता की आवश्यक्ता है, हमारा पड़ौसी है। जैसे हम अपना ध्यान रखते हैं, वैसे ही दुसरों का भी ध्यान रखना चाहिए।

   अपने पड़ौसी से अपने समान प्रेम रखने का तात्पर्य है कि दूसरों पर हो रहे अत्याचार, उनके दुख और अन्यायों को अपना लेना। यह प्रत्येक मसीही विश्वासी का कर्तव्य है। - मार्विन विलियम्स


प्रेम का व्यावाहरिक रूप ही करुणा है।

पलटा न लेना, और न अपने जाति भाइयों से बैर रखना, परन्तु एक दूसरे से अपने समान प्रेम रखना; मैं यहोवा हूं। - लैव्यवस्था १९:१८

बाइबल पाठ: लैव्यवस्था १९:११-१८
Lev 19:11  तुम चोरी न करना, और एक दूसरे से न तो कपट करना, और न झूठ बोलना।
Lev 19:12  तुम मेरे नाम की झूठी शपथ खाके अपने परमेश्वर का नाम अपवित्र न ठहराना; मैं यहोवा हूं।
Lev 19:13  एक दूसरे पर अन्धेर न करना, और न एक दूसरे को लूट लेना। और मजदूर की मजदूरी तेरे पास सारी रात बिहान तक न रहने पाएं।
Lev 19:14  बहिरे को शाप न देना, और न अन्धे के आगे ठोकर रखना; और अपने परमेश्वर का भय मानना; मैं यहोवा हूं।
Lev 19:15  न्याय में कुटिलता न करना; और न तो कंगाल का पक्ष करना और न बड़े मनुष्यों का मुंह देखा विचार करना; उस दूसरे का न्याय धर्म से करना।
Lev 19:16  लूतरा बनके अपने लोगों में न फिरा करना, और एक दूसरे के लोहू बहाने की युक्तियां न बान्धना; मैं यहोवा हूं।
Lev 19:17  अपने मन में एक दूसरे के प्रति बैर न रखना; अपने पड़ोसी को अवश्य डांटना नहीं, तो उसके पाप का भार तुझ को उठाना पड़ेगा।
Lev 19:18  पलटा न लेना, और न अपने जाति भाइयों से बैर रखना, परन्तु एक दूसरे से अपने समान प्रेम रखना; मैं यहोवा हूं।
एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति ४१-४२ 
  • मत्ती १२:१-२३

सोमवार, 16 जनवरी 2012

जीवन का आदर

   दाऊद ने अपनी रचना किए जाने का वर्णन भजन १३९ में लिखा है, कैसे उसकी माँ के गर्भ में परमेश्वर ने उसे बनाया। इससे पहले कि दाऊद इस पृथ्वी पर जन्म लेता परमेश्वर उसके साथ संलग्न था, उसे जानता था, उससे प्रेम करता था।
   परमेश्वर ने अपनी पूर्वनिश्चित योजना के अनुसार दाऊद को व्यक्तित्व और रूप दिया। इस भजन में दाऊद एक अलंकार का रोचक प्रयोग करके कहता है कि परमेश्वर ने अपनी पुस्तक में उससे संबंधित अपनी योजना को लिखा और उस योजना को उसकी माता के गर्भ में कार्यान्वित किया: "तेरी आंखों ने मेरे बेड़ौल तत्व को देखा; और मेरे सब अंग जो दिन दिन बनते जाते थे वे रचे जाने से पहिले तेरी पुस्तक में लिखे हुए थे" (भजन १३९:१६)।
   इसे दूसरे रूप में देखें तो दाऊद अपने परमेश्वर पिता के प्रेम में उस पिता की एक अनुपम सृष्टि है। वह परमेश्वर के मन से निकली, परमेश्वर ही की कल्पनाओं का, परमेश्वर ही के हाथों द्वारा सृजा गया साकार रूप था। यह जो बात दाऊद के विषय में सत्य है, वही बात संसार के हर मनुष्य के विष्य में भी उतनी ही सत्य है। हम में से प्रत्येक परमेश्वर की अनुपम सृष्टि है।
   क्योंकि यह बात हम सब के लिए सत्य और खरी है, इसलिए हमें प्रत्येक जीवन का आदर करना चाहिए। हर मनुष्य हमारे आदर और प्रेम का पात्र है; चाहे वह गर्भस्थ शिशु हो या नया जन्मा बच्चा, सुन्दर और प्रीय लगने वाला बच्चा हो या थका-मान्दा झुर्रीदार बुज़ुर्ग, अमीर और संभ्रांत व्यक्ति हो या कंगाल और फटेहाल - सभी मनुष्य हमारे सृष्टिकर्ता की अद्भुत बुद्धि की रचना हैं।
   आईये दाऊद के साथ मिलकर अपने सृष्टिकर्ता से कहें, "मैं तेरा धन्यवाद करूंगा, इसलिये कि मैं भयानक और अद्भुत रीति से रचा गया हूं। तेरे काम तो आश्चर्य के हैं, और मैं इसे भली भांति जानता हूं" (भजन १३९:१४) और उसकी आराधना करें। - डेविड रोपर

समस्त जीवन परमेश्वर की रचना है और उसके द्वारा हस्ताक्षरित है।

मैं तेरा धन्यवाद करूंगा, इसलिये कि मैं भयानक और अद्भुत रीति से रचा गया हूं। - भजन १३९:१४

बाइबल पाठ: भजन १३९:१३-१८
Psa 139:13  मेरे मन का स्वामी तो तू है; तू ने मुझे माता के गर्भ में रचा।
Psa 139:14  मैं तेरा धन्यवाद करूंगा, इसलिये कि मैं भयानक और अद्भुत रीति से रचा गया हूं। तेरे काम तो आश्चर्य के हैं, और मैं इसे भली भांति जानता हूं।
Psa 139:15  जब मैं गुप्त में बनाया जाता, और पृथ्वी के नीचे स्थानों में रचा जाता था, तब मेरी हडि्डयां तुझ से छिपी न थीं।
Psa 139:16  तेरी आंखों ने मेरे बेड़ौल तत्व को देखा; और मेरे सब अंग जो दिन दिन बनते जाते थे वे रचे जाने से पहिले तेरी पुस्तक में लिखे हुए थे।
Psa 139:17  और मेरे लिये तो हे ईश्वर, तेरे विचार क्या ही बहुमूल्य हैं! उनकी संख्या का जोड़ कैसा बड़ा है।
Psa 139:18  यदि मैं उनको गिनता तो वे बालू के किनकों से भी अधिक ठहरते। जब मैं जाग उठता हूं, तब भी तेरे संग रहता हूं।
 
एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति ३९-४० 
  • मत्ती ११

रविवार, 15 जनवरी 2012

एक और अवसर

   घटना १५ जनवरी २००९ की है, अमेरिका की यू.एस.ऐरवेज़ की उड़ान संख्या १५४९ के १५५ यात्रियों को यह निश्चित लगा कि अब वे मृत्यु से कुछ ही पल दूर हैं। न्यू-यॉर्क शहर से उड़ान भरते समय उनका वायुयान उड़ती हुई बतखों के एक झुंड से टकराया और उसके दोनो इंजन क्षतिग्रस्त होकर बन्द हो गए। बिना इंजनों की शक्ति के वायुयान के चालकों ने यान को घने आबादी वाले इलाके के ऊपर से निकाला और फिर वायुयान के लाउडस्पीकर पर कप्तान ने यात्रियों के लिए घोषणा करी कि वे टकराव के झटके के लिए तैयार हो जाएं। इसके ९० सेकेंड बाद उन्होंने वह विमान न्यू-यॉर्क के साथ बहती हडसन नदी के बर्फीले पानी में उतार दिया, जहाँ बचाव नौकाएं यात्रियों की रक्षा के लिए तैयार थीं और उन्होंने तुरंत ही सभी यात्रियों और यान के चालक दल के सभी लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। लोगों ने इस घटना को हडसन का आश्चर्यकर्म कहा; सभी ने वायुयान के कप्तान और चालक दल की प्रशंसा करी तथा उन्हें बहुत बहुत धन्यवाद दिया। एक कृतज्ञ यात्री ने एक ही वाक्य में सारी बात बयान कर दी; उसने कहा, "हमें जीवन का एक और अवसर मिला है।"

   जब खतरे और विषम स्थितियाँ हमारे सामने होती हैं, तब हमें हर पल की कीमत का एहसास होता है। किंतु जब जीवन सामन्य रीति से चल रहा होता है तो समय कि बहुमूल्यता का ध्यान नहीं रहता और ना ही हम यह सोचते हैं कि हर दिन, हर पल हमारे लिए जीवन का एक और अवसर है। ना जाने कौन कौन से खतरे हमारे पास से होकर निकल गए, ना जाने किस किस बात से परमेश्वर ने हमें सुरक्षित रखा: "हम मिट नहीं गए; यह यहोवा की महाकरुणा का फल है, क्योंकि उसकी दया अमर है। प्रति भोर वह नई होती रहती है; तेरी सच्चाई महान है। मेरे मन ने कहा, यहोवा मेरा भाग है, इस कारण मैं उस में आशा रखूंगा" (विलापगीत ३:२२-२४)।

   परमेश्वर हमारा रक्षक और रखवाला है; हमें सदा उसके कृतज्ञ और धन्यवादी बने रहना चाहिए। परमेश्वर की भलाईयों, अनुग्रह, विश्वासयोग्यता और हमारे साथ उसकी लगातार बनी रहने वाली उपस्थिति के लिए हमें उसे अपनी आशा का अडिग और स्थिर आधार बना लेना चाहिए। सच्चे मन से निकली पाप-क्षमा और समर्पण की एक छोटी प्रार्थना अनन्त काल के लिए आपका भविष्य सुनिश्चित कर देगी।

   परमेश्वर हमें जीवन के जो अवसर दे रहा है, उन्हें व्यर्थ ना गवांएं, उनका भरपूरी से लाभ उठाएं, उसके लिए उपयोगी बनें और अपने जीवनों से उसे महिमा दें। - डेविड मैककैसलैंड


हमारा परमेश्वर अवसर देने वाला परमेश्वर है।

हम मिट नहीं गए; यह यहोवा की महाकरुणा का फल है, क्योंकि उसकी दया अमर है। प्रति भोर वह नई होती रहती है; तेरी सच्चाई महान है। मेरे मन ने कहा, यहोवा मेरा भाग है, इस कारण मैं उस में आशा रखूंगा। - विलापगीत ३:२२-२४

बाइबल पाठ: विलापगीत ३:२२-३३
Lam 3:22  हम मिट नहीं गए यह यहोवा की महाकरुणा का फल है, क्योंकि उसकी दया अमर है।
Lam 3:23  प्रति भोर वह नई होती रहती है; तेरी सच्चाई महान है।
Lam 3:24  मेरे मन ने कहा, यहोवा मेरा भाग है, इस कारण मैं उस में आशा रखूंगा।
Lam 3:25  जो यहोवा की बाट जोहते और उसके पास जाते हैं, उनके लिये यहोवा भला है।
Lam 3:26  यहोवा से उद्धार पाने की आशा रख कर चुपचाप रहना भला है।
Lam 3:27  पुरुष के लिये जवानी में जूआ उठाना भला है।
Lam 3:28  वह यह जान कर अकेला चुपचाप रहे, कि परमेश्वर ही ने उस पर यह बोझ डाला है;
Lam 3:29  वह अपना मुंह धूल में रखे, क्या जाने इस में कुछ आशा हो?
Lam 3:30  वह अपना गाल अपने मारने वाले की ओर फेरे, और नामधराई सहता रहे।
Lam 3:31  क्योंकि प्रभु मन से सर्वदा उतारे नहीं रहता,
Lam 3:32  चाहे वह दु:ख भी दे, तौभी अपनी करुणा की बहुतायत के कारण वह दया भी करता है;
Lam 3:33  क्योंकि वह मनुष्यों को अपने मन से न तो दबाता है और न दु:ख देता है।
एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति ३६-३८ 
  • मत्ती १०:२१-४२