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रविवार, 5 फ़रवरी 2012

निहारना

   अपने जीवन की संध्या में मैं केवल पेड़ों को बढ़ते हुए देखना चाहता हूँ। तीस से भी अधिक साल पहले मैंने अपने आंगन में एक पौधा लगाया था। आज हमारी खिड़की के बाहर वह अपनी परिपक्वता की भव्यता में खड़ा है, हर ऋतु में सुन्दर। मैं उसे निहारते रहना चाहता हूँ।

   हमारे आत्मिक प्रयासों के साथ भी कुछ ऐसा ही होता है। हम ने कई छोटे "पौधे" लगाए होंगे - वे लोग, हमने जिन को आत्मिक जीवन की शिक्षाएं दीं, उन्हें सींचा, ध्यान से उनकी देख भाल करी, उनका पोषण किया। हम "पौधे" तो लगा सकते हैं परन्तु उन पौधों को "पेड़" बनाना परमेश्वर ही कर सकता है।

   कभी कभी मुझे उन लोगों से कोई सन्देश आता है जिन्हें मैंने कई वर्ष पहले सिखाया था, और मैं यह जानकर आनन्दित होता हूँ कि अब वे बढ़ कर परिपक्व हो गए हैं और परमेश्वर के द्वारा बहुत उपयोग करे जा रहे हैं - मेरी किसी सहायता के बिना। यह मुझे हलके से समझाता है कि मेरा कार्य पौधा लगाना और कुछ समय के लिए उसे सींचने का हो सकता है, और उन्हें सिखाने का कि वे "प्रेम में सच्‍चाई से चलते हुए, सब बातों में उस में जा सिर है, अर्थात मसीह में बढ़ते जाएं" (इफिसीयों ४:१५); किंतु केवल परमेश्वर ही है जो उन्हें बढ़ा कर परिपक्व फलदायी पेड़ बना सकता है (१ कुरिन्थियों ३:६-७)।

   जर्मन धर्मशास्त्री हेलमुट थेइलिके ने लिखा, "वह मनुष्य जो समयानुसार अपनी पकड़ ढीली करना नहीं जानता, जो परमेश्वर में शांति और विश्वास के आनन्द को नहीं जानता - उसमें जो अपने उद्देश्य हमारी सहायता के बिना (या हमारे बावजूद) करना जानता है, उसके हाथों में छोड़ना नहीं जानता जो पौधों को पेड़ बना देता है...ऐसा मनुष्य अपने बुढ़ापे में केवल एक निराश और दुखी मनुष्य ही हो सकता है।"

   इसलिए, अब मेरी उम्र में शायद मैं एक-दो "पौधे" लगा लूँ और उनकी देखभाल करूं, लेकिन मुख्यतः मेरा समय तो "पेड़ों" को निहारने में ही गुज़रेगा। - डेविड रोपर

जो मसीह में आगे बढ़ते हैं वे औरों को भी आगे बढ़ाते हैं।

वह उस वृक्ष के समान है, जो बहती नालियों के किनारे लगाया गया है। और अपनी ऋतु में फलता है, और जिसके पत्ते कभी मुरझाते नहीं। इसलिये जो कुछ वह पुरूष करे वह सफल होता है। - भजन १:३

बाइबल पाठ: १ कुरिन्थियों ३:४-११

1Co 3:4  इसलिये कि जब एक कहता है, कि मैं पौलुस का हूं, और दूसरा कि मैं अपुल्लोस का हूं, तो क्‍या तुम मनुष्य नहीं?
1Co 3:5  अपुल्लोस क्‍या है और पौलुस क्‍या केवल सेवक, जिन के द्वारा तुम ने विश्वास किया, जैसा हर एक को प्रभु ने दिया।
1Co 3:6  मैं ने लगाया, अपुल्लोस ने सींचा, परन्‍तु परमेश्वर ने बढ़ाया।
1Co 3:7  इसलिये न तो लगाने वाला कुछ है, और न सींचने वाला, परन्‍तु परमेश्वर जो बढ़ाने वाला है।
1Co 3:8  लगाने वाला और सींचने वाला दानों एक हैं; परन्‍तु हर एक व्यक्ति अपने ही परिश्रम के अनुसार अपनी ही मजदूरी पाएगा।
1Co 3:9  क्‍योंकि हम परमेश्वर के सहकर्मी हैं; तुम परमेश्वर की खेती और परमेश्वर की रचना हो।
1Co 3:10  परमेश्वर के उस अनुग्रह के अनुसार, जो मुझे दिया गया, मैं ने बुद्धिमान राजमिस्री की नाईं नेव डाली, और दूसरा उस पर रद्दा रखता है; परन्‍तु हर एक मनुष्य चौकस रहे, कि वह उस पर कैसा रद्दा रखता है।
1Co 3:11  क्‍योंकि उस नेव को छोड़ जो पड़ी है, और वह यीशु मसीह है कोई दूसरी नेव नहीं डाल सकता।
 
एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन ३६-३८ 
  • मत्ती २३:१-२२

शनिवार, 4 फ़रवरी 2012

प्रश्न मूल्यों का

   अपनी एक यात्रा के दौरान मैंने एक ऐसा विज्ञापन देखा जो सोचने पर बाध्य करता था। विज्ञापन कारोबार प्रबंधकों की एक गोष्ठि के विषय में था, और उसमें लिखा था "किसी अगुवे का मूल्य उसके मूल्यों के सीधे अनुपात में है।" इस कथन की सार्थकता ने मुझे प्रभावित किया। हम जिस बात को मूल्य देते हैं, वही हमारे चरित्र को बनाती है, और अन्ततः निर्धारित करती है कि हम कैसे अगुवे होंगे या हम नेतृत्व कर भी पाएंगे कि नहीं। किंतु यह बात केवल नेताओं या प्रबंधकों या अगुवों पर ही लागू नहीं होती।

   मसीह के अनुयायियों के लिए मूल्यों का महत्व और भी अधिक हो जाता है। पौलुस ने कुलुस्से के मसीही विश्वासियों को अपनी पत्री में लिखा: "पृथ्वी पर की नहीं परन्‍तु स्‍वर्गीय वस्‍तुओं पर ध्यान लगाओ" (कुलुस्सियों ३:२)। यह लिखने में उसका उद्देश्य था कि मसीह के प्रभावी सन्देशवाहक होने के लिए हमारे मूल्यों का निर्धारण अस्थायी सांसारिक बातों से नहीं परन्तु चिरस्थायी स्वर्गीय बातों द्वारा होना चाहिए। इस संसार के जीवन में यह समझ और मानकर चलना कि हम यहां पर्यटक नहीं तीर्थयात्री हैं, ही हमारे दृष्टिकोण को स्पष्ट और केंद्रित रखेगा, और हम अपने उद्धारकर्ता प्रभु यीशु मसीह के सेवाकाई में प्रभावी हो पाएंगे।

   यह कहा जाता है कि हम एक ऐसे संसार में रहते हैं जो हर बात की भौतिक कीमत तो जानता है किंतु किसी बात का आत्मिक मूल्य और महत्व नहीं जानता। इस "अभी और यहां" के संसार में, हम मसीही विश्वासियों को उन बातों के द्वारा अपने मूल्य स्थापित करने हैं जो चिरस्थायी और सदाकालीन हैं - परमेश्वर और उसके वचन की बातें।

   दूसरे शब्दों में, एक मसीही विश्वासी का प्रभावी मूल्य उसे प्रभावित करने वाले मूल्यों के सीधे अनुपात में है। - बिल क्राउडर

सांसारिक वस्तुओं पर अपनी पकड़ ढीली किंतु आत्मिक वस्तुओं पर दृढ़ रखें।

पृथ्वी पर की नहीं परन्‍तु स्‍वर्गीय वस्‍तुओं पर ध्यान लगाओ। - कुलुस्सियों ३:२

बाइबल पाठ: कुलुस्सियों ३:१-११
Col 3:1  सो जब तुम मसीह के साथ जिलाए गए, तो स्‍वर्गीय वस्‍तुओं की खोज में रहो, जहां मसीह वर्तमान है और परमेश्वर के दाहिनी ओर बैठा है।
Col 3:2  पृथ्वी पर की नहीं परन्‍तु स्‍वर्गीय वस्‍तुओं पर ध्यान लगाओ।
Col 3:3  क्‍योंकि तुम तो मर गए, और तुम्हारा जीवन मसीह के साथ परमेश्वर में छिपा हुआ है।
Col 3:4   जब मसीह जो हमारा जीवन है, प्रगट होगा, तब तुम भी उसके साथ महिमा सहित प्रगट किए जाओगे।
Col 3:5  इसलिये अपने उन अंगो को मार डालो, जो पृथ्वी पर हैं, अर्थात व्यभिचार, अशुद्धता, दुष्‍कामना, बुरी लालसा और लोभ को जो मूर्ति पूजा के बराबर है।
Col 3:6   इन ही के कारण परमेश्वर का प्रकोप आज्ञा न मानने वालों पर पड़ता है।
Col 3:7  और तुम भी, जब इन बुराइयों में जीवन बिताते थे, तो इन्‍हीं के अनुसार चलते थे।
Col 3:8  पर अब तुम भी इन सब को अर्थात क्रोध, रोष, बैरभाव, निन्‍दा, और मुंह से गालियां बकना ये सब बातें छोड़ दो।
Col 3:9  एक दूसरे से झूठ मत बोलो क्‍योंकि तुम ने पुराने मनुष्यत्‍व को उसके कामों समेत उतार डाला है।
Col 3:10  और नए मनुष्यत्‍व को पहिन लिया है जो अपने सृजनहार के स्‍वरूप के अनुसार ज्ञान प्राप्‍त करने के लिये नया बनता जाता है।
Col 3:11  उस में न तो यूनानी रहा, न यहूदी, न खतना, न खतनारिहत, न जंगली, न स्‍कूती, न दास और न स्‍वतंत्र: केवल मसीह सब कुछ और सब में है।
 
एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन ३४-३५ 
  • मत्ती २२:२३-४६

शुक्रवार, 3 फ़रवरी 2012

प्रचार या प्रदर्शन

   मेरा एक बहुत वर्षों का पुराना मित्र और मार्गदर्शक अक्सर कहता है कि परमेश्वर के वचन बाइबल के अध्ययन में उसका उद्देश्य सदैव पढ़े गए को अपने व्यावाहरिक जीवन में लागू करना होता है। मैं उसके इस सीखे हुए को जीवन में लागू कीए जाने पर दिए गए ज़ोर की बहुत सराहना करता हूँ, क्योंकि हम जो बाइबल का अध्ययन करके फिर उसे सिखाते, प्रचार करते और उसके बारे में लिखते हैं, उनके लिए इस प्रबल वचन से संबंधित इन गतिविधियों को मात्र एक दिमाग़ी कसरत बना लेना बहुत आसान होता है।

   प्रसिद्ध बाइबल शिक्षक और टीकाकार ओस्वॉल्ड चैम्बर्स ने कहा था: "यह खतरा कि परमेश्वर की सन्तान उसके पवित्र वचन कि महानता और गूढ़ता के विषय में बेपरवाह हो जाए सदा बना रहता है। हम बाइबल की इन अद्भुत सच्चाईयों के बारे में प्रचार तो बहुत करने लगते हैं किंतु यह भूल जाते हैं कि उन्हीं बातों को हमारे जीवनों में प्रदर्शित भी होना चाहिए। सत्य की विवेचना करने को ही सत्य का पालन करना मान लेने की गलती कर बैठना; इस गलतफहमी में जीना कि क्योंकि हम बाइबल की बातों की व्याख्या कर लेते हैं इसलिए हम उनका पालन करने वाले भी हैं, बहुत आसान होता है"।

   प्रभु यीशु के एक चेले याकूब ने अपनी पत्री में मसीही विश्वासियों को लिखा: "पर जो व्यक्ति स्‍वतंत्रता की सिद्ध व्यवस्था पर ध्यान करता रहता है, वह अपने काम में इसलिये आशीष पाएगा कि सुनकर नहीं, पर वैसा ही काम करता है" (याकूब १:२५)। मुख्य बात शब्दों या लेखों द्वारा प्रचार करना नहीं वरन पालन करना है; उसे जीवन में जी कर दिखाना है।

  हम जब परमेश्वर के वचन का अध्ययन करें तो हमारे मन में उठने वाला पहला प्रश्न यह नहीं होना चाहिए कि "इसके बारे में क्या और कैसे प्रचार कर सकता हूँ?" वरन यह होना चाहिए कि "मैं इसे अपने जीवन में कैसे प्रदर्शित कर सकता हूँ?" - डेविड मैककैसलैंड


आज्ञाकारिता में उठाया एक कदम उस बात के बारे में वर्षों अध्ययन करने से बढ़कर है। - चैम्बर्स

परन्‍तु वचन पर चलने वाले बनो, और केवल सुनने वाले ही नहीं जो अपने आप को धोखा देते हैं। - याकूब १:२२
 
बाइबल पाठ: याकूब १:२१-२६
Jas 1:21   इसलिये सारी मलिनता और बैर भाव की बढ़ती को दूर करके, उस वचन को नम्रता से ग्रहण कर लो, जो हृदय में बोया गया और जो तुम्हारे प्राणों का उद्धार कर सकता है।
Jas 1:22  परन्‍तु वचन पर चलने वाले बनो, और केवल सुनने वाले ही नहीं जो अपने आप को धोखा देते हैं।
Jas 1:23  क्‍योंकि जो कोई वचन का सुनने वाला हो, और उस पर चलने वाला न हो, तो वह उस मनुष्य के समान है जो अपना स्‍वाभाविक मुंह दर्पण में देखता है।
Jas 1:24  इसलिये कि वह अपने आप को देखकर चला जाता, और तुरन्‍त भूल जाता है कि मैं कैसा था।
Jas 1:25  पर जो व्यक्ति स्‍वतंत्रता की सिद्ध व्यवस्था पर ध्यान करता रहता है, वह अपने काम में इसलिये आशीष पाएगा कि सुनकर नहीं, पर वैसा ही काम करता है।
Jas 1:26   यदि कोई अपने आप को भक्त समझे, और अपनी जीभ पर लगाम न दे, पर अपने हृदय को धोखा दे, तो उस की भक्ति व्यर्थ है।
 
एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन ३१-३३ 
  • मत्ती २२:१-२२

गुरुवार, 2 फ़रवरी 2012

प्रेम


   एक नई बाल सुखाने वाली मशीन ले लेना शायद मेरे लिए अधिक आसान होता। लेकिन कुछ पैसे बचा लेने के उद्देश्य से मैंने अपनी खराब मशीन की मरम्मत स्वयं ही करनी चाही। ठीक करने के लिए मशीन को खोलना था, और खोलने के लिए उसके हत्थे में गैहराई से बैठाए गए पेच को खोलकर निकालने की आवश्यक्ता थी। पेच खोलने का सबसे आसानी से उपलब्ध ’औज़ार’ था मेरा जेब में रखा हुआ छोटा सा चाकू। सो मैंने चाकू जेब से निकाल कर खोला और उसकी नोक से पेच खोलने का प्रयास करने लगा। ज़ोर लगाते ही चाकू का फल मुड़कर बन्द हुआ, मेरी ऊंगली पर लगा और उसे घायल कर दिया।

   इससे मैंने एक पाठ सीखा: मैं अपने आप से बहुत प्रेम रखता हूँ और अपनी आवश्यक्ताओं की पूर्ति के लिए वक्त बरबाद नहीं कर सकता। ऊंगली कटते ही मुझे उसकी चिंता हुई, तब यह विचार मेरे मन में बिल्कुल भी नहीं आया कि अभी मैं व्यस्त हूँ, इस चोट और बहते हुए खून के बारे में बाद में सोचेंगे, पहले यह कार्य पूरा कर लें। साथ ही मुझे पता चला कि मैं अपनी आवश्यकता के लिए अति संवेदनशील भी हूँ। मैंने तुरंत अपनी प्राथमिक चिकित्सा के लिए अपनी पत्नी और बच्चों को बुलाया, और उनसे अपनी चोट को बड़ी कोमलता से साफ करवाया, फिर उस पर ऐसे पट्टी बंधवाई कि बाद में पट्टी खोलने पर मेरे ऊंगली के बाल न उखड़ें, मुझे और तकलीफ ना हो। इस पूरे प्रकरण में मेरे सभी विचार, शब्द और क्रियाएं मेरे प्रति मेरे प्रेम ही से प्रेरित थे, मेरी तकलीफ पर ही केंद्रित थे।

   प्रभु यीशु अपने चेलों से चाहता है कि वे अपने पड़ौसी से भी अपने समान प्रेम रखें। इसका तात्पर्य है कि हम ऐसा प्रेम दिखाएं जिसमें वैसी ही तत्परता हो जैसी हम अपने प्रति रखते हैं; प्रेम जो दूसरे की आवश्यकता को देखे, पहचाने और उसकी पूर्ति से पहले आराम ना ले। ऐसा प्रेम जो नम्र और कोमल हो, विचार और ध्यान से कार्य करता हो। इस प्रेम का उदाहरण है प्रभु यीशु द्वारा दिया गया वह सामरी व्यक्ति का दृष्टांत जिसने करुणा और बलिदान के साथ एक सर्वथा अनजान घायल यात्री की सहायता करी।

   मसीही विश्वासी से, उसके पड़ौसियों के प्रति, परमेश्वर ऐसे ही प्रेम की आशा रखता है। - जो स्टोवेल


अपने पड़ौसी का मन आप केवल अपने मन ही के द्वारा छू सकते हैं।

...तू प्रभु अपने परमेश्वर से अपने सारे मन और अपने सारे प्राण और अपनी सारी शक्ति और अपनी सारी बुद्धि के साथ प्रेम रख; और अपने पड़ोसी से अपने समान प्रेम रख। - लूका १०:२७

बाइबल पाठ: लूका १०:२९-३७
Luk 10:29 परन्‍तु उस ने अपनी तईं धर्मी ठहराने की इच्‍छा से यीशु से पूछा, तो मेरा पड़ोसी कौन है?
Luk 10:30  यीशु ने उत्तर दिया; कि एक मनुष्य यरूशलेम से यरीहो को जा रहा था, कि डाकुओं ने घेरकर उसके कपड़े उतार लिए, और मार-पीट कर उसे अधमूआ छोड़कर चले गए।
Luk 10:31 और ऐसा हुआ कि उसी मार्ग से एक याजक(पुरोहित) जा रहा था: परन्‍तु उसे देख के कतराकर चला गया।
Luk 10:32  इसी रीति से एक लेवी(धर्मशास्त्री) उस जगह पर आया, वह भी उसे देख के कतराकर चला गया।
Luk 10:33 परन्‍तु एक सामरी यात्री वहां आ निकला, और उसे देखकर तरस खाया।
Luk 10:34 और उसके पास आकर और उसके घावों पर तेल और दाखरस डालकर पट्टियां बान्‍धी, और अपनी सवारी पर चढ़ाकर सराय में ले गया, और उस की सेवा टहल की।
Luk 10:35  दूसरे दिन उस ने दो दिनार निकालकर भटियारे को दिए, और कहा, इस की सेवा टहल करना, और जो कुछ तेरा और लगेगा, वह मैं लौटने पर तुझे भर दूंगा।
Luk 10:36  अब तेरी समझ में जो डाकुओं में घिर गया था, इन तीनों में से उसका पड़ोसी कौन ठहरा?
Luk 10:37  उस ने कहा, वही जिस ने उस पर तरस खाया: यीशु ने उस से कहा, जा, तू भी ऐसा ही कर।
एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन २९-३० 
  • मत्ती २१:२३-४६

बुधवार, 1 फ़रवरी 2012

लिखित वचन

   जनवरी २००९ में ESPN टेलिविज़न द्वारा एक फुटबॉल खिलाड़ी पेय्टन मैनिंग पर एक प्रभावी कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया। पेय्टन को राष्ट्रीय फुटबॉल संघ द्वारा वर्ष का सबसे बहुमूल्य खिलाड़ी घोषित किया गया था। लेकिन जो कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया वह फुटबॉल के बारे में नहीं, वरन पेय्टन के बारे में था। उस कार्यक्रम में बताया गया कि बीते कई वर्षों से जब कोई नामवर ज्येष्ठ फुटबॉल खिलाड़ी खेल से अवकाश लेता था तो पेय्टन उसे अपने हाथों से एक पत्र लिख कर उनके खेल के प्रति लगाव, योगदान और उनके चरित्र के लिए उनकी प्रशंसा करता और उन्हें इसके लिए धनयवाद देता था। पेय्टन के संबंध में जितने भी वरिष्ठ खिलाड़ियों से साक्षात्कार लिया गया, उन सब ने इस बात के लिए उस की सराहना करी और धन्यवादी हुए कि उनके समय के एक सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी ने अपना समय दूसरों की सराहना के लिए दिया।

   जब पेय्टन मैनिंग जैसे प्रख्यात व्यक्ति द्वारा लिखित चन्द शब्दों का इतना महत्व है, तो सोचिए परमेश्वर द्वारा लिखित वचन का कितना महत्व होगा; मनुष्य के कोई शब्द इस का बयान नहीं कर सकते। प्रेरित पौलुस ने लिखा: "जितनी बातें पहिले से लिखी गईं, वे हमारी ही शिक्षा के लिये लिखी गईं हैं कि हम धीरज और पवित्र शास्‍त्र की शान्‍ति के द्वारा आशा रखें" (रोमियों १५:४)।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में परमेश्वर द्वारा हमें दिया गया उसका व्यक्तिगत संदेश है जो हमें बताता है कि परमेश्वर हम से क्या चाहता है; यही वचन परमेश्वर के उस उद्देश्य की पूर्ति के लिए हमारा जीवन बदलने और सुधारने की क्षमता भी रखता है। उसने अपना जीवित वचन हमें इसीलिए दिया है कि हम जीवन तथा जीवन की परिस्थितियों और कठिनाईयों का सामना करने के लिए मार्गदर्शन और सामर्थ पा सकें, और अपनी आशा बनाए रख सकें।

   परमेश्वर का धन्यवादी हो कर उसके इस लिखित वचन का अध्ययन तथा पालन आरंभ कीजिए और अपने जीवन को संवरते सुधरते देखिए। बिलस क्राउडर


जो अपने मन से उसकी सुनते हैं, परमेश्वर अपने वचन से उन से बातें करता है।

जितनी बातें पहिले से लिखी गईं, वे हमारी ही शिक्षा के लिये लिखी गईं हैं कि हम धीरज और पवित्र शास्‍त्र की शान्‍ति के द्वारा आशा रखें। - रोमियों १५:४

बाइबल पाठ: रोमियों १५:४-१३
Rom 15:4 जितनी बातें पहिले से लिखी गईं, वे हमारी ही शिक्षा के लिये लिखी गईं हैं कि हम धीरज और पवित्र शास्‍त्र की शान्‍ति के द्वारा आशा रखें।
Rom 15:5 और धीरज, और शान्‍ति का दाता परमेश्वर तुम्हें यह वरदान दे, कि मसीह यीशु के अनुसार आपस में एक मन रहो।
Rom 15:6 ताकि तुम एक मन और एक मुंह होकर हमारे प्रभु यीशु मसीह के पिता परमेश्वर की बड़ाई करो।
Rom 15:7 इसलिये, जैसा मसीह ने भी परमेश्वर की महिमा के लिये तुम्हें ग्रहण किया है, वैसे ही तुम भी एक दूसरे को ग्रहण करो।
Rom 15:8 मैं कहता हूं, कि जो प्रतिज्ञाएं बाप-दादों को दी गई थीं, उन्‍हें दृढ़ करने के लिये मसीह, परमेश्वर की सच्‍चाई का प्रमाण देने के लिये खतना किए हुए लोगों का सेवक बना।
Rom 15:9  और अन्यजाति भी दया के कारण परमेश्वर की बड़ाई करें, जैसा लिखा है, कि इसलिये मैं जाति जाति में तेरा धन्यवाद करूंगा, और तेरे नाम के भजन गांगा।
Rom 15:10 फिर कहा है, हे जाति जाति के सब लोगों, उस की प्रजा के साथ आनन्‍द करो।
Rom 15:11 और फिर हे जाति जाति के सब लागो, प्रभु की स्‍तुति करो; और हे राज्य राज्य के सब लोगों, उसे सराहो।
Rom 15:12 और फिर यशायाह कहता है, कि यिशै की एक जड़ प्रगट होगी, और अन्यजातियों का हाकिम होने के लिये एक उठेगा, उस पर अन्यजातियां आशा रखेंगी।
Rom 15:13 सो परमेश्वर जो आशा का दाता है तुम्हें विश्वास करने में सब प्रकार के आनन्‍द और शान्‍ति से परिपूर्ण करे, कि पवित्रआत्मा की सामर्थ से तुम्हारी आशा बढ़ती जाए।
 
एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन २७-२८ 
  • मत्ती २१:१-२२

मंगलवार, 31 जनवरी 2012

साथ

   चन्द्रमा पर जाने वाले अंतरिक्ष यात्रियों पर बनी एक लघु फिल्म In the Shadow of the Moon में १९७२ में चांद पर भेजे गए अपोलो १६ यान के यात्री चार्ली ड्यूक की कहानी भी है। चार्ली और उसके साथ एक और अंतरिक्ष यात्री को चांद की सतह पर उतारा गया और वे तीन दिन तक वहां से चांद की चट्टानें एकत्रित करते रहे और प्रयोग करते रहे, फिर सुरक्षित वापस पृथ्वी पर लौट आए।

   बाद में चार्ली का आत्मिक परिवर्तन हुआ। चार्ली ने बताया कि एक मित्र ने उसे एक बाइबल अध्ययन में आमंत्रित किया; उस सभा के बाद चार्ली ने प्रभु यीशु से प्रार्थना करी, "मैं अपना जीवन आप को सौंपता हूं, यदि आप वास्तविक हैं तो मेरे जीवन में आईए।" इस प्रार्थना के बाद चार्ली ने एक अद्भुत शांति अपने अन्दर महसूस करी। यह अनुभव इतना गहरा और गंभीर था कि चार्ली अपने जीवन की यह घटना दूसरों के साथ बांटने लगा। अब चार्ली लोगों को बताने लगा कि "चांद पर मेरा चलना और रहना तीन दिन का ही था, और यह बहुत रोमांचकारी था; लेकिन परमेश्वर के साथ मेरा रहना और चलना अनन्तकाल का रोमांच है।"

   परमेश्वर का वचन बाइबल हमें एक और व्यक्ति के बारे में बताती है जो इस पृथ्वी पर रहते हुए भी परमेश्वर के साथ रहा और चला: "और हनोक परमेश्वर के साथ साथ चलता था; फिर वह लोप हो गया क्योंकि परमेश्वर ने उसे उठा लिया" (उत्पत्ति ५:२४)। परमेश्वर के साथ हनोक का रहना और चलना इतना घनिष्ठ था कि परमेश्वर उसे सीधे ही अनन्तता में ले गया: "विश्वास ही से हनोक उठा लिया गया, कि मृत्यु को न देखे, और उसका पता नहीं मिला; क्‍योंकि परमेश्वर ने उसे उठा लिया था, और उसके उठाए जाने से पहिले उस की यह गवाही दी गई थी, कि उस ने परमेश्वर को प्रसन्न किया है" (इब्रानियों ११:५)।

   चार्ली और हनोक, दोनो ही के जीवन से हम सीख सकते हैं कि मसीही विश्वासी के लिए जीवन यात्रा कैसी भी हो, उसका और परमेश्वर का साथ अनन्तकाल का है। - डेनिस फिशर


प्रतिदिन परमेश्वर की ज्योति में चलकर अनन्तकाल के लिए अपना लक्ष्य सुनिश्चित रखिए।

और हनोक परमेश्वर के साथ साथ चलता था; फिर वह लोप हो गया क्योंकि परमेश्वर ने उसे उठा लिया। - उत्पत्ति ५:२४

बाइबल पाठ: इब्रानियों ११:१-६
Heb 11:1  अब विश्वास आशा की हुई वस्‍तुओं का निश्‍चय, और अनदेखी वस्‍तुओं का प्रमाण है।
Heb 11:2  क्‍योंकि इसी के विषय में प्राचीनों की अच्‍छी गवाही दी गई।
Heb 11:3  विश्वास ही से हम जान जाते हैं, कि सारी सृष्‍टि की रचना परमेश्वर के वचन के द्वारा हुई है। यह नहीं, कि जो कुछ देखने में आता है, वह देखी हुई वस्‍तुओं से बना हो।
Heb 11:4  विश्वास ही से हाबिल ने कैन से उत्तम बलिदान परमेश्वर के लिये चढ़ाया; और उसी के द्वारा उसके धर्मी होने की गवाही भी दी गई: क्‍योंकि परमेश्वर ने उस की भेंटों के विषय में गवाही दी; और उसी के द्वारा वह मरने पर भी अब तक बातें करता है।
Heb 11:5  विश्वास ही से हनोक उठा लिया गया, कि मृत्यु को न देखे, और उसका पता नहीं मिला; क्‍योंकि परमेश्वर ने उसे उठा लिया था, और उसके उठाए जाने से पहिले उस की यह गवाही दी गई थी, कि उस ने परमेश्वर को प्रसन्न किया है।
Heb 11:6  और विश्वास बिना उसे प्रसन्न करना अनहोना है, क्‍योंकि परमेश्वर के पास आनेवाले को विश्वास करना चाहिए, कि वह है, और अपने खोजने वालों को प्रतिफल देता है।
एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन २५-२६ 
  • मत्ती २०:१७-३४

सोमवार, 30 जनवरी 2012

परदे के पीछे

   पास्टर और लेखक इर्विन लुटज़र ने लिखा: "जैसे ही परदा आपके प्रवेश के लिए खुलेगा और आप उस परदे के पीछे पहुंचेंगे, उसी क्षण आप या तो मसीह यीशु द्वारा स्वागत का आनन्द अनुभव करेंगे या अपने उस विनाश की पहली झलक देखेंगे, जैसा आपने कभी कल्पना भी नहीं किया होगा। दोनो ही हाल में आपका अनन्तकालीन भविष्य निर्धारित हो चुका होगा और फिर कभी किसी हाल नहीं बदल सकेगा।"

   परमेश्वर के वचन बाइबल के लूका रचित सुसमाचार में एक ऐसी ही घटना का छोटा सा ब्यान है जहां दो व्यक्ति उस परदे के पीछे, अपने अनन्तकालीन भविष्य के लिए पहुंचने वाले हैं। जब प्रभु यीशु मसीह को क्रूस पर चढ़ाया गया तो उनके साथ दो डाकू भी क्रूस पर चढ़ाए गए। मरकुस रचित सुसमाचार में दिए विविरण में, आरंभ में, वे दोनो ही क्रूस पर से प्रभु यीशु की निन्दा और भर्त्सना कर रहे थे (मरकुस १५:३२)।

   कुछ समय बाद, जब उन दोनो में से एक ने प्रभु यीशु की खराई और स्वयं अपनी पापमय दशा की ओर ध्यान किया, तब उस का मन बदला, और उसने दूसरे डाकू को डांटा। फिर उसने प्रभु यीशु से विनती करी कि जब वह अपने राज्य में आए तो उसकी सुधि ले। ये छोटी सी विनती उसके पश्चाताप और प्रभु यीशु में साधारण सच्चे विश्वास की सूचक थी। प्रभु यीशु ने उससे कहा, "...मैं तुझ से सच कहता हूं कि आज ही तू मेरे साथ स्वर्गलोक में होगा" (लूका २३:४३)। उस पश्चातापी डाकू के लिए उद्धार तत्काल था, उसी क्षण उसका अनन्तकाल का भविष्य निरधारित हो गया। अब उसे सुनिश्चित था कि वह अनन्तकाल कहां व्यतीत करेगा - प्रभु यीशु के साथ स्वर्ग में।

   अपने पापी होने का एहसास करना और पश्चाताप के साथ प्रभु यीशु में विश्वास करके अपना जीवन उसे समर्पित कर देना निर्धारित कर देता है कि हम अनन्तकाल कहां व्यतीत करेंगे; जब हमारे लिए परदा खुलेगा और हम परदे के पीछे लिए जाएंगे, तो हम कहां पहुंचेंगे। - मार्विन विलियम्स


आज प्रभु यीशु पर विश्वास करके अपना कल सुनिश्चित कर लें।

उस ने उस से कहा, मैं तुझ से सच कहता हूं कि आज ही तू मेरे साथ स्वर्गलोक में होगा। - लूका २३:४३

बाइबल पाठ: लूका २३:३९-४३
Luk 23:39  जो कुकर्मी लटकाए गए थे, उन में से एक ने उस की निन्‍दा करके कहा; क्‍या तू मसीह नहीं तो फिर अपने आप को और हमें बचा।
Luk 23:40  इस पर दूसरे ने उसे डांटकर कहा, क्‍या तू परमेश्वर से भी नहीं डरता तू भी तो वही दण्‍ड पा रहा है।
Luk 23:41  और हम तो न्यायानुसार दण्‍ड पा रहे हैं, क्‍योंकि हम अपने कामों का ठीक फल पा रहे हैं; पर इस ने कोई अनुचित काम नहीं किया।
Luk 23:42  तब उस ने कहा, हे यीशु, जब तू अपने राज्य में आए, तो मेरी सुधि लेना।
Luk 23:43  उस ने उस से कहा, मैं तुझ से सच कहता हूं कि आज ही तू मेरे साथ स्वर्गलोक में होगा।
 
एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन २३-२४ 
  • मत्ती २०:१-१६