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मंगलवार, 28 फ़रवरी 2012

वृद्धावस्था का देश

   लेखिका मेरी पाईफर ने अपनी पुस्तक Another Country कई वृद्ध लोगों से जो सत्तर, अस्सी, नव्वे की अवस्थाओं में थे और जीवन की कई परिस्थितियों का सामना कर रहे थे, मुलाकात करके उन अनुभवों के आधार पर लिखी। पाईफर ने बताया कि वे "वृद्धावस्था के देश को समझना चाहतीं थीं।" उन्होंने यह भी कहा कि "हमारा सामाजिक संगठन वृद्ध होने को आसान और आरामदायक होने के लिए प्रबन्धित नहीं है।" उनका निषकर्ष था कि इसका मूल कारण है कि जवान और वृद्ध एक दुसरे से पृथक और दूर हो गए हैं और इससे दोनो ही की हानि हुई है।

   यह सामाजिक प्रवृति जानबूझकर बनाई हुई नहीं है, लेकिन यह भी सत्य है कि बहुत से लोग वृद्धों के प्रति अपनी ज़िम्मेदारी को नज़रंदाज़ करते हैं, उसे टालते हैं, उससे जी चुराते हैं। यह आज के समाज की प्रवृति भी नहीं है; लगभग २००० वर्ष पूर्व, प्रभु यीशु के दिनों में भी यह प्रवृति उस समय के समाज में देखी जा सकती थी।

   परमेश्वर के वचन में मरकुस ७:९-१३ में प्रभु यीशु द्वारा धर्म के अगुवे फरीसियों द्वारा अपने पारिवारिक दायित्व से बचने के अनूठे तरीके के लिए उनकी भर्त्सना करी। ये फरीसी अपनी सांसारिक संपत्ति परमेश्वर के मन्दिर के नाम "कुर्बान" कर देते थे। अब जो परमेश्वर को दिया गया है, वह परिवार के वृद्धों के लिए कैसे प्रयोग हो सकता था? किंतु क्योंकि ये धर्म के अगुवे परमेश्वर के मंदिर से सम्बंधित थे और उसके लिए कार्य करते थे, इसलिए मंदिर की वस्तुओं का अपने लिए प्रयोग करना उनके लिए "जायज़" माना जाता था। इस प्रकार वे अपने धन को अपने लिए तो प्रयोग करने पाते थे किंतु अपने माता-पिता को उस धन से वंचित कर देते थे। उन लोगों ने अपनी इस परंपरा के मानने से परमेश्वर के वचन में माता-पिता का आदर करने की आज्ञा को तुच्छ किया और उसका उल्लंघन किया।

   हमारे बच्चे, हमारा कार्य, चर्च में हमारे कार्य हमें कई ओर खेंच सकते हैं, कई बातों में व्यस्त कर सकते हैं, लेकिन यह माता-पिता की देखभाल करने और उनका आदर करने के हमारे कर्त्वय और परमेश्वर की आज्ञा को अन्देखा करने के बहाने नहीं हो सकते। अपने वृद्ध जनों की यथासम्भव देखभाल करना और उनकी आवश्यक्ताओं को पूरा करने की जवाबदेही से हम बच नहीं सकते; परमेश्वर का वचन हमें चिताता है "पर यदि कोई अपनों की और निज करके अपने घराने की चिन्‍ता न करे, तो वह विश्वास से मुकर गया है, और अविश्वासी से भी बुरा बन गया है" (१ तिमुथियुस ५:८)।

   जब वह समय आए कि हमें "वृद्धावस्था के देश" में पदार्पण करना हो तो ध्यान रहे कि हमने अपने जीवन और अपने कार्यों से अपनी सन्तान के सम्मुख वह श्रेष्ठ उदाहरण रखा है जिसका अब वह अनुसरण करने वाले बनने वाले हैं। - डेनिस फिशर

माता-पिता का आदर करना हम उदाहरण से ही सीखते हैं।
पर यदि कोई अपनों की और निज करके अपने घराने की चिन्‍ता न करे, तो वह विश्वास से मुकर गया है, और अविश्वासी से भी बुरा बन गया है। - १ तिमुथियुस ५:८
 
बाइबल पाठ: मरकुस ७:१-१३
Mar 7:1  तब फरीसी और कई एक शास्त्री जो यरूशलेम से आए थे, उसके पास इकट्ठे हुए।
Mar 7:2  और उन्‍होंने उसके कई चेलों को अशुद्ध अर्थात बिना हाथ धोए रोटी खाते देखा।
Mar 7:3  क्‍योंकि फरीसी और सब यहूदी, पुरिनयों की रीति पर चलते हैं और जब तक भली भांति हाथ नहीं धो लेते तब तक नहीं खाते।
Mar 7:4  और बाजार से आकर, जब तक स्‍नान नहीं कर लेते, तब तक नहीं खाते; और बहुत सी और बातें हैं, जो उन के पास मानने के लिये पहुंचाई गई हैं, जैसे कटोरों, और लोटों, और तांबे के बरतनों को धोना-मांजना।
Mar 7:5  इसलिये उन फरीसियों और शास्‍त्रियों ने उस से पूछा, कि तेरे चेले क्‍यों पुरिनयों की रीतों पर नहीं चलते, और बिना हाथ धोए रोटी खाते हैं?
Mar 7:6  उस ने उन से कहा;. कि यशायाह ने तुम कपटियों के विषय में बहुत ठीक भविष्यद्ववाणी की, जैसा लिखा है, कि ये लोग होठों से तो मेरा आदर करते हैं, पर उन का मन मुझ से दूर रहता है।
Mar 7:7  और ये व्यर्थ मेरी उपासना करते हैं, क्‍योंकि मनुष्यों की आज्ञाओं को धर्मोपदेश करके सिखाते हैं।
Mar 7:8  क्‍योंकि तुम परमेश्वर की आज्ञा को टालकर मनुष्यों की रीतियों को मानते हो।
Mar 7:9  और उस ने उन से कहा, तुम अपनी रीतियों को मानने के लिये परमेश्वर आज्ञा कैसी अच्‍छी तरह टाल देते हो!
Mar 7:10  क्‍योंकि मूसा ने कहा है कि अपने पिता और अपनी माता का आदर कर; ओर जो कोई पिता वा माता को बुरा कहे, वह अवश्य मार डाला जाए।
Mar 7:11  परन्‍तु तुम कहते हो कि यदि कोई अपने पिता वा माता से कहे, कि जो कुछ तुझे मुझ से लाभ पहुंच सकता था, वह कुरबान अर्थात संकल्प हो चुका।
Mar 7:12  तो तुम उस को उसके पिता वा उस की माता की कुछ सेवा करने नहीं देते।
Mar 7:13  इस प्रकार तुम अपनी रीतियों से, जिन्‍हें तुम ने ठहराया है, परमेश्वर का वचन टाल देते हो; और ऐसे ऐसे बहुत से काम करते हो।
एक साल में बाइबल: 
  • गिनती २०-२२ 
  • मरकुस ७:१-१३

सोमवार, 27 फ़रवरी 2012

कमज़ोरी में सामर्थ

   कोई कमज़ोर दिखन नहीं चाहता, इसलिए हम सब किसी न किसी प्रकार से सामर्थी दिखने के प्रयास करते हैं। कोई भावनाओं के आवेश से दूसरों को नियंत्रित करने का प्रयास करता है तो कोई अपने व्यक्तित्व या बुद्धि से। यद्यपि ये बातें सामर्थ का भ्रम उत्पन्न करतीं हैं किंतु वास्तव में ये सब कमज़ोरी की निशानियाँ हैं।

   जो वास्तव में सामर्थी होते हैं वे अपनी सीमाओं को मान लेने से नहीं हिचकिचाते और ना ही अपनी कमज़ोरियों के प्रकट होने से घबराते हैं। उन्हें अपनी सामर्थ के लिए परमेश्वर पर अपने निर्भर होने को बताने में कोई संकोच नहीं होता। इसलिए वास्तविक सामर्थ अकसर संसार को कमज़ोरी प्रतीत होती है। जब प्रेरित पौलुस ने परमेश्वर से प्रार्थना करी कि उसकी व्यथा जो उसे परेशान कर रही थी उससे दूर हो जाए तो परमेश्वर का उत्तर था "...मेरा अनुग्रह तेरे लिये बहुत है, क्‍योंकि मेरी सामर्थ निर्बलता में सिद्ध होती है"; परमेश्वर से इस अप्रत्याशित उत्तर को पाकर पौलुस की प्रतिक्रिया और भी विसमित करने वाली थी; उसने कहा "...इसलिये मैं बड़े आनन्‍द से अपनी निर्बलताओं पर घमण्‍ड करूंगा, कि मसीह की सामर्थ मुझ पर छाया करती रहे। इस कारण मैं मसीह के लि्ये निर्बलताओं, और निन्‍दाओं में, और दरिद्रता में, और उपद्रवों में, और संकटों में, प्रसन्न हूं, क्‍योंकि जब मैं निर्बल होता हूं, तभी बलवन्‍त होता हूं" (२ कुरिन्थियों १२:९-१०)।

   प्रभु यीशु की इस पृथ्वी पर शारीरिक रूप में सेवकाई के अन्त के निकट उनके कुछ चेलों में, आते दिनों और समयों के लिए, प्रमुख स्थान पाने की होड़ लग गई। प्रभु यीशु ने इस बात को लेकर उनके आपसी विवाद को अवसर बनाया उन्हें समझाने का कि उसके राज्य में संसार के राज्य से बात अलग होती है, प्रमुख होने के तरीके भिन्न हैं: प्रभु यीशु ने उन्हें बताया कि परमेश्वर के राज्य में बड़ा वही है जो जानबूझकर कमज़ोरी और निम्नता का स्वरूप ले लेता है (मत्ती २०:२६)।

   यह एक कटु सत्य है और इसे स्वीकार कर लेना आसान नहीं है क्योंकि कमज़ोरी की सच्चाई को मानने कि बजाए सामर्थ के छल को दिखाना ही लोग अधिक पसन्द करते हैं और अपने जीवनों में यही निभाते रहते हैं। किंतु परमेश्वर चाहता है कि हम इस बात का एहसास करें कि सच्ची सामर्थ तभी आती है जब हम लोगों को नियंत्रित करने के प्रयासों की बजाए उनकी सेवा करने के अवसर ढ़ूंढने लगें और प्रयास करने लगें। - जूली एकरमैन लिंक


हमारी सबसे बड़ी कमज़ोरी में परमेश्वर की सबसे बड़ी सामर्थ प्रकट हो सकती है।

परन्‍तु तुम में ऐसा न होगा; परन्‍तु जो कोई तुम में बड़ा होना चाहे, वह तुम्हारा सेवक बने। - मत्ती २०:२६
 
बाइबल पाठ: मत्ती २०:२०-२८
Mat 20:20 जब जब्‍दी के पुत्रों की माता ने अपने पुत्रों के साथ उसके पास आकर प्रणाम किया, और उस से कुछ मांगने लगी।
Mat 20:21 उस ने उस से कहा, तू क्‍या चाहती है? वह उस से बोली, यह कह, कि मेरे ये दो पुत्र तेरे राज्य में एक तेरे दाहिने और एक तेरे बाएं बैठें।
Mat 20:22 यीशु ने उत्तर दिया, तुम नहीं जानते कि क्‍या मांगते हो जो कटोरा मैं पीने पर हूं, क्‍या तुम पी सकते हो? उन्‍होंने उस से कहा, पी सकते हैं।
Mat 20:23  उस ने उन से कहा, तुम मेरा कटोरा तो पीओगे पर अपने दाहिने बाएं किसी को बिठाना मेरा काम नहीं, पर जिन के लिये मेरे पिता की ओर से तैयार किया गया, उन्हीं के लिये है।
Mat 20:24  यह सुनकर, दसों चेले उन दोनों भाइयों पर क्रुद्ध हुए।
Mat 20:25 यीशु ने उन्‍हें पास बुलाकर कहा, तुम जानते हो, कि अन्य जातियों के हाकिम उन पर प्रभुता करते हैं, और जो बड़े हैं, वे उन पर अधिकार जताते हैं।
Mat 20:26 परन्‍तु तुम में ऐसा न होगा; परन्‍तु जो कोई तुम में बड़ा होना चाहे, वह तुम्हारा सेवक बने।
Mat 20:27 और जो तुम में प्रधान होना चाहे वह तुम्हारा दास बने।
Mat 20:28 जैसे कि मनुष्य का पुत्र, वह इसलिये नहीं आया कि उस की सेवा टहल की जाए, परन्‍तु इसलिये आया कि आप सेवा टहल करे और बहुतों की छुडौती के लिये अपने प्राण दे।
 
एक साल में बाइबल: 
  • गिनती १७-१९ 
  • मरकुस ६:३०-५६

रविवार, 26 फ़रवरी 2012

नया स्वामित्व

   हरमन वौउक ने दूसरे विश्वयुद्ध की पृष्ठभूमि पर आधारित एक बहुत रोचक उपन्यास लिखा है The Caine Mutiny जिसमें एक अद्भुत उदाहरण है जो इस बात को समझने में सहायता करता है कि जब कोई व्यक्ति परमेश्वर का अनुयायी हो जाता है तो उसके जीवन में क्या परिवर्तन आ जाता है।

   उस उपन्यास में, एक धनी और ऊंची जान-पहचान रखने वाले परिवार का नौजवान सदस्य नौसेना में भरती लेकर प्रशिक्षण के लिए आता है। उसकी मां उसे एक बड़ी और सुन्दर कार में लेकर प्रशिक्षण केंद्र पर छोड़ने आती है, और वहाँ बड़े प्यार से उसे विदा कहती है। नौजवान दरवाज़े पर खड़े पहरेदार से हाथ मिलाता है और दरवाज़े के अन्दर चला जाता है, दरवाज़ा उसके पीछे बन्द हो जाता है। तभी उस की माँ को विचार आता है कि पता नहीं उसके बेटे के पास उचित मात्रा में पैसा है कि नहीं, और वह दौड़ कर दरवाज़े पर आती है। दरवाज़े पर खड़ा पहरेदार उसे सम्मान पूर्वक अन्दर जाने से रोक देता है। वह अन्दर जाने का हट करती है किन्तु पहरेदार जाने नहीं देता। माँ दरवाज़े के अन्दर खड़े अपने बेटे को देख रही है और गुस्से में कहती है कि "वह मेरा बेटा है, मुझे उससे मिलने का हक है" और दरवाजे की कुँडी को हाथ से पकड़कर खोलने का प्रयास करती है। पहरेदार कुँडी पर से उसका हाथ हटाते हुए उत्तर देता है, "महोदया, मैं जानता हूँ कि वह आपका पुत्र है, किंतु अब पहले वह एक नौसैनिक है और उस पर उसके देश का पहला अधिकार है।"

   जब हम पापों की क्षमा के लिए प्रभु यीशु पर विश्वास लाते हैं और अपने जीवन उसे सौंप देते हैं, तो हम एक नए स्वामीत्व के आधीन आ जाते हैं। तब से हम नए आदेशों के आधीन कार्य करने वाले हो जाते हैं। अब हम प्रभु के हो जाते हैं। अब जो हमें आवश्यक लगता था उसका महत्व नहीं रहता। हमारे मूल्यांकन के मापदण्ड बदल जाते हैं। अब हमारी लालसा पूर्णतः अपने प्रभु परमेश्वर की आज्ञाकरिता में रहकर उससे प्रेम करना और उसकी सेवा करना हो जाती है (व्यवस्थाविवरण ६:५-६); और हमारा प्रभु हर परिस्थिति में हमारे साथ बना रहता है, हमें संभाले रहता है और हमारी आवश्य्क्ताओं को पूरा करता रहता है (मत्ती ६:३३)।

   क्या आप प्रभु के नए स्वामित्व के आधीन आएं हैं? - डेव एगनर

मसीह के अनुयायी मसीह ही से हर आज्ञा पाते हैं।

तू परमेश्वर अपने प्रभु से अपने सारे मन और अपने सारे प्राण और अपनी सारी बुद्धि के साथ प्रेम रख। - मत्ती २२:३७
 
बाइबल पाठ: व्यवस्थाविवरण ६:१-९
Deu 6:1  यह वह आज्ञा, और वे विधियां और नियम हैं जो तुम्हें सिखाने की तुम्हारे परमेश्वर यहोवा ने आज्ञा दी है, कि तुम उन्हें उस देश में मानो जिसके अधिक्कारी होने को पार जाने पर हो;
Deu 6:2  और तू और तेरा बेटा और तेरा पोता यहोवा का भय मानते हुए उसकी उन सब विधियों और आज्ञाओं पर, जो मैं तुझे सुनाता हूं, अपने जीवन भर चलते रहें, जिस से तू बहुत दिन तक बना रहे।
Deu 6:3  हे इस्राएल, सुन, और ऐसा ही करने की चौकसी कर; इसलिये कि तेरा भला हो, और तेरे पितरों के परमेश्वर यहोवा के वचन के अनुसार उस देश में जहां दूध और मधु की धाराएं बहती हैं तुम बहुत हो जाओ।
Deu 6:4  हे इस्राएल, सुन, यहोवा हमारा परमेश्वर है, यहोवा एक ही है;
Deu 6:5  तू अपने परमेश्वर यहोवा से अपने सारे मन, और सारे जीव, और सारी शक्ति के साथ प्रेम रखना।
Deu 6:6  और ये आज्ञाएं जो मैं आज तुझ को सुनाता हूं वे तेरे मन में बनी रहें;
Deu 6:7  और तू इन्हें अपने बालबच्चों को समझा कर सिखाया करना, और घर में बैठे, मार्ग पर चलते, लेटते, उठते, इनकी चर्चा किया करना।
Deu 6:8  और इन्हें अपने हाथ पर चिन्हानी करके बान्धना, और ये तेरी आंखों के बीच टीके का काम दें।
Deu 6:9  और इन्हें अपने अपने घर के चौखट की बाजुओं और अपने फाटकों पर लिखना।
 
एक साल में बाइबल: 
  • गिनती १५-१६ 
  • मरकुस ६:१-२९

शनिवार, 25 फ़रवरी 2012

कलपनाएं

   मैं और मेरे मित्र एक चित्रकला प्रदर्शनी देखने गए जो प्रभु यीशु द्वारा दी गई उड़ाऊ पुत्र की कहानी पर आधारित थी। हम सब यह सोच कर गए थे कि यह हमारे लिए एक गंभीर मनन और सीखने का अवसर होगा। हम प्रदर्शनी स्थल पर पहुंचे और जानकारी लेने वहाँ सहायता देनेवाले लोगों की मेज़ पर गए। उस मेज़ पर प्रदर्शनी से संबंधित जानकारी पुस्तिकाएं और विषय से संबंधित अन्य पुस्तकें रखी हुईं थीं, तथा प्रदर्शनी के स्थान की ओर इशारा करने वाला एक सूचना चिन्ह भी रखा था।

   सहायता देने वालों की उस मेज़ पर कुछ और भी रखा था जिसे देखकर हम सब मन ही मन अनुमान लगाने लगे कि चित्रकला के विषय के साथ इसका क्या संबंध हो सकता है - वह थी एक प्लेट जिस में रोटी थी, एक ग्लास और एक अंगोछा। हमने कलपना करी कि संभवतः यह उस भोज का सूचक होगा जो उड़ाऊ पुत्र के घर वापस लौटने पर उसके पिता ने आयोजित किया था, और पिता पुत्र के सम्बंध और सहभागिता को दिखाने कि लिए यहाँ रखा गया है। जब हमने उसे ज़रा ध्यानपूर्वक देखा तो समझ आया कि प्ल्र्ट कुछ गन्दी थी, रोटी खाने के बाद की बची हुई रोटी थी - कोई भोजन करने के बाद अपने भोजन की प्लेट ऐसे ही उस मेज़ पर प्रदर्शनी से संबंधित चीज़ों के साथ छोड़कर चला गया था। उस मेज़ पर रखे पुस्तक, पुस्तिकाओं और प्रदर्शनी संबंधित अन्य वस्तुओं से उस प्लेट, गिलास और अंगोछे का कोई लेना देना नहीं था; उन से संबंधित हमारी कलपनाएं बिलकुल गलत थीं।

   यह जान कर, अपनी कलपना की उड़ान पर, हम सब को अच्छी हंसी आई। लेकिन बाद में मैं यह सोचने लगी कि क्या संभव नहीं कि ऐसे ही हम कितनी बार परमेश्वर के वचन में वह सब देखने लगते हैं जो वहाँ है ही नहीं। यह मानकर चलने की बजाए कि बाइबल की किसी बात के विषय में हमारे विचार सही ही हैं, हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हमारी व्याख्या बाइबल में उस विषय पर दी गई सभी जानकारी के अनुकूल है कि नहीं। प्रेरित पतरस ने अपनी पत्री में मसीही विश्वासियों को इस बात के बारे में चिताते हुए लिखा: "पर पहिले यह जान लो कि पवित्र शास्‍त्र की कोई भी भविष्यद्वाणी किसी के अपने ही विचारधारा के आधार पर पूर्ण नहीं होती" (२ पतरस १:२०)।

   परमेश्वर के वचन को गंभीरता से लेना हमारा कर्तव्य है, उस की व्याख्या और चर्चा से पहले यह जाँच लेना अति आवश्यक है कि हम यह पवित्र आत्मा की प्रेर्णा से, वचन के संदर्भ का ध्यान रखते हुए और संपूर्ण वचन में उस विषय के बारे में कही गई बातों के अनुसार ही कुछ कहें; ना कि अपनी इच्छा के अनुसार और अपने अभिमान कि रक्षा करते हुए परमेश्वर के वचन को जैसे चाहें तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत करें। - ऐनी सेटास


संदर्भ से बाहर करी गई वचन की व्याख्या खतरनाक झूठ या अतिश्योक्ति हो सकती है।

अपने आप को परमेश्वर का ग्रहणयोग्य और ऐसा काम करने वाला ठहराने का प्रयत्‍न कर, जो लज्ज़ित होने न पाए, और जो सत्य के वचन को ठीक रीति से काम में लाता हो। - २ तिमुथियुस २:१५
 
बाइबल पाठ: २ पतरस १:१६-२१
2Pe 1:16 क्‍योंकि जब हम ने तुम्हें अपने प्रभु यीशु मसीह की सामर्थ का, और आगमन का समाचार दिया था तो वह चतुराई से गढ़ी हुई कहानियों का अनुकरण नहीं किया था वरन हम ने आप ही उसके प्रताप को देखा था।
2Pe 1:17  कि उस ने परमेश्वर पिता से आदर, और महिमा पाई जब उस प्रतापमय महिमा में से यह वाणी आई कि यह मेरा प्रिय पुत्र है जिस से मैं प्रसन्न हूं।
2Pe 1:18 और जब हम उसके साथ पवित्र पहाड़ पर थे, तो स्‍वर्ग से यही वाणी आते सुना।
2Pe 1:19 और हमारे पास जो भविष्यद्वक्ताओं का वचन है, वह इस घटना से दृढ़ ठहरा है और तुम यह अच्‍छा करते हो, कि जो यह समझ कर उस पर ध्यान करते हो, कि वह एक दीया है, जो अन्‍धियारे स्थान में उस समय तक प्रकाश देता रहता है जब तक कि पौ न फटे, और भोर का तारा तुम्हारे हृदयों में न चमक उठे।
2Pe 1:20 पर पहिले यह जान लो कि पवित्र शास्‍त्र की कोई भी भविष्यद्वाणी किसी के अपने ही विचारधारा के आधार पर पूर्ण नहीं होती।
2Pe 1:21 क्‍योंकि कोई भी भविष्यद्वाणी मनुष्य की इच्‍छा से कभी नहीं हुई पर भक्त जन पवित्र आत्मा के द्वारा उभारे जाकर परमेश्वर की ओर से बोलते थे।
 
एक साल में बाइबल: 
  • गिनती १२-१४ 
  • मरकुस ५:२१-४३

शुक्रवार, 24 फ़रवरी 2012

वास्तविक और खरा

   प्राचीन वस्तुओं को खरीदने-बेचने वाली एक दुकानदार को एक जीर्ण और बदरंग हुआ बेसबॉल कार्ड मिला। उस कार्ड को देखकर उसने अनुमान लगाया कि उसकी कीमत लगभग $१० ही होगी। उसने उसे बेचने के लिए ई-बे पर रख दिया, किंतु उसे सन्देह हुआ कि कहीं वह कार्ड उसके अनुमान से और अधिक मूल्यवान तो नहीं? इसलिए उसने ई-बे से उसे हटा कर एक व्यवसायिक मूल्य निर्धारण करने वाले विशेषग्य को वह कार्ड दिखाया। उस विशेषग्य ने उस कार्ड को देखकर पुष्टि करी कि सन १८६९ में बने उस कार्ड पर बना चित्र अमेरिका की प्रथम व्यावसायिक बेसबॉल टीम सिन्सिनाटी रेड स्टॉकिंग्स का ही था। वह कार्ड अन्ततः $७५,००० में बिका। यद्यपि वह कार्ड जीर्ण और बदरंग था किंतु जो सबसे महत्वपुर्ण बात थी वह थी उसका वास्तविक होना। उसकी वास्तविकता प्रमाणित होते ही उसकी कीमत बहुत बढ़ गई।

   सुसमाचार प्रचार के लिए निकले प्रेरित पौलुस और उसके साथियों को भी बहुत दुख उठाने पड़े और वे बदहाल हो गए। परमेश्वर के वचन के २ कुरिन्थियों ६ अध्याय में उनकी बाहरी परीक्षाओं, भीतरी गुणों और आत्मिक संसाधनों का वर्णन है। उनके जीवन की परिस्थितियों के बारे में कल्पना कीजिए जिनमें इन सब बातों ने मिलकर कार्य किया: पिटाई और धैर्य, कैद और दया, पीड़ाएं और प्रेम। यद्यपि उनके शरीर तोड़े गए, भावनाएं कुचली गईं और आत्मा परखी गई, फिर भी प्रभु यीशु में उनके विश्वास की वास्तविकता इन सब क्लेषों में भी चमकती हुई दिखाई दी। उन्होंने अपने विश्वास की खराई को प्रमाणित कर के दिखा दिया कि वे "शोक करने वालों के समान हैं, परन्‍तु सर्वदा आनन्‍द करते हैं; कंगालों के जैसे हैं, परन्‍तु बहुतों को धनवान बना देते हैं; ऐसे हैं जैसे हमारे पास कुछ नहीं तौभी सब कुछ रखते हैं" (२ कुरिन्थियों ६:१०) और सब कुछ सहते हुए भी हर परिस्थिति में विश्वासयोग्य और कह्रे रहे तथा स्थान स्थान पर मसीही विश्विसियों की मण्डलियां स्थापित करीं।

   मसीही विश्वास के हमारे जीवन में आत्मिक खराई को कोई विकल्प नहीं है; अपने विश्वास में हमें वास्तविक होना ही है, तब ही हम कार्यकारी हो पाएंगे। - डेविड मैककैसलैंड


मसीही विश्वास में दिखावे के बाहरी आचरण और ढोंग का कोई स्थान नहीं है।

परन्‍तु हर बात में परमेश्वर के सेवकों की नाई अपने सद्गुणों को प्रगट करते हैं, बड़े धैर्य से, क्‍लेशों से, दरिद्रता से, संकटो से। - २ कुरिन्थियों ६:४

बाइबल पाठ: २ कुरिन्थियों ६:३-१३
2Co 6:3  हम किसी बात में ठोकर खाने का कोई भी अवसर नहीं देते, कि हमारी सेवा पर कोई दोष न आए।
2Co 6:4 परन्‍तु हर बात में परमेश्वर के सेवकों की नाईं अपने सद्गुणों को प्रगट करते हैं, बड़े धैर्य से, क्‍लेशों से, दरिद्रता से, संकटो से।
2Co 6:5  कोड़े खाने से, कैद होने से, हुल्लड़ों से, परिश्रम से, जागते रहने से, उपवास करने से।
2Co 6:6  पवित्रता से, ज्ञान से, धीरज से, कृपालुता से, पवित्र आत्मा से।
2Co 6:7 सच्‍चे प्रेम से, सत्य के वचन से, परमेश्वर की सामर्थ से; धामिर्कता के हथियारों से जो दाहिने, बाएं हैं।
2Co 6:8 आदर और निरादर से, दुरनाम और सुनाम से, यद्यपि भरमाने वालों के जैसे मालूम होते हैं तौभी सच्‍चे हैं।
2Co 6:9  अनजानों के सदृश्य हैं तौभी प्रसिद्ध हैं; मरते हुओं के जैसे हैं और देखो जीवित हैं; मार खाने वालों के सदृश हैं परन्‍तु प्राण से मारे नहीं जाते।
2Co 6:10 शोक करने वालों के समान हैं, परन्‍तु सर्वदा आनन्‍द करते हैं, कंगालों के जैसे हैं, परन्‍तु बहुतों को धनवान बना देते हैं; ऐसे हैं जैसे हमारे पास कुछ नहीं तौभी सब कुछ रखते हैं।
2Co 6:11  हे कुरिन्थियों, हम ने खुलकर तुम से बातें की हैं, हमारा हृदय तुम्हारी ओर खुला हुआ है।
2Co 6:12  तुम्हारे लिये हमारे मन में कुछ सकेती नहीं, पर तुम्हारे ही मनों में सकेती है।
2Co 6:13  पर अपने लड़के-बाले जानकर तुम से कहता हूं, कि तुम भी उसके बदले में अपना हृदय खोल दो।


एक साल में बाइबल: 

  • गिनती ९-११ 
  • मरकुस ५:१-२०

गुरुवार, 23 फ़रवरी 2012

परदेशी देवता

   सुदूर पूर्व एशिया की अपनी यात्रा में मैंने एक असाधारण मन्दिर देखा जिसमें सैंकड़ों मूर्तियाँ रखी हुई थीं। हमारे मार्गदर्शक के अनुसार, वहाँ आने वाले श्रद्धालु उन सैंकड़ों मूर्तियों में से कोई से वह मूर्ति जो उनके किसी पूर्वज के सबसे अधिक समानता में हो उठाकर उससे प्रार्थना कर सकते थे।

   कुछ वर्ष पहले मैंने एक वियतनामी छात्र ले थाई के बारे में पढ़ा, वह भी पूर्वजों की उपासना करने वाले लोगों में से था। उसे अपनी मृतक दादी से प्रार्थना करने में सबसे अधिक शांति मिलती थी क्योंकि वह उनसे बहुत प्रेम करता था, उनके बहुत निकट था। यह उसके लिए बहुत आत्मीय और व्यक्तिगत था।

   लेकिन जब वह वियतनाम से अमेरिका पढ़ने के लिए आया तो ले थाई का परिचय मसीही विश्वास से हुआ। उसे यह अमेरिकी सोच-विचार पर आधारित एक काल्पनिक-कथा के समान लगा। उसके लिए यह किसी परदेशी देवता कि आराधाना करने के समान था।

   फिर क्रिसमस के त्यौहार पर एक मित्र ने उसे अपने घर आने का निमंत्रण दिया। वहां उसने एक मसीही विश्वासी परिवार में उनके विश्वास को कार्य करते देखा, एक बार फिर उसने प्रभु यीशु मसीह की कहानी सुनी। ले थाई ने ध्यानपूर्वक सुना। फिर उसने परमेश्वर के वचन में यूहन्ना रचित सुसमाचार के तीसरे अध्याय से "नया जन्म" पाने के बारे में पढ़ा और उसने प्रश्न पुछने आरंभ किए। उसके मन में पवित्र आत्मा ने कार्य करना आरंभ किया और कुछ समय पश्चात वह जान गया कि मसीही विश्वास कल्पनाओं पर नहीं सच्चाई पर आधारित है। उसने प्रभु यीशु को अपना व्यक्तिगत उद्धारकर्ता ग्रहण कर लिया।

   यदि कोई मसीही विश्वास को परदेशी देवता की आराधाना मानता है तो उसके साथ सुसमाचार बांटने में हमें संवेदनशील रहना चाहिए, मसीही विश्वास के यथार्थ को परखने और जांचने के लिए उसे समय देना चाहिए और उसके अपने परंपरागत विश्वास कि भर्तसना नहीं करनी चाहिए।

   आदर और प्रेम के साथ सुसमाचार बांटें फिर पवित्र आत्मा को अपना कार्य करने दें। - डेव ब्रैनन


यीशु की सच्चाई को सच्चाई से परखने वाला यथार्थ को पहचाने बिना नहीं रह सकते।

...कितनों ने कहा, यह बकवादी क्‍या कहना चाहता है? परन्‍तु औरों ने कहा, वह अन्य देवताओं का प्रचारक मालूम पड़ता है, क्‍योंकि वह यीशु का, और पुनरूत्थान का सुसमाचार सुनाता था। प्रेरितों १७:१८

बाइबल पाठ: प्रेरितों १७:१६-३१
Act 17:16  जब पौलुस अथेने में उन की बाट जोह रहा था, तो नगर को मूरतों से भरा हुआ देखकर उसका जी जल गया।
Act 17:17  सो वह आराधनालय में यहूदियों और भक्तों से और चौक में जो लोग मिलते थे, उन से हर दिन वाद-विवाद किया करता था।
Act 17:18 तब इपिकूरी और स्‍तोईकी पण्‍डितों में से कितने उस से तर्क करने लगे, और कितनों ने कहा, यह बकवादी क्‍या कहना चाहता है? परन्‍तु औरों ने कहा, वह अन्य देवताओं का प्रचारक मालूम पड़ता है, क्‍योंकि वह यीशु का, और पुनरूत्थान का सुसमाचार सुनाता था।
Act 17:19  तब वे उसे अपने साथ अरियुपगुस पर ले गए और पूछा, क्‍या हम जान सकते हैं, कि यह नया मत जो तू सुनाता है, क्‍या है?
Act 17:20  क्‍योंकि तू अनोखी बातें हमें सुनाता है, इसलिये हम जानना चाहते हैं कि इन का अर्थ क्‍या है?
Act 17:21  (इसलिये कि सब अथेनवी और परदेशी जो वहां रहते थे नई नई बातें कहने और सुनने के सिवाय और किसी काम में समय नहीं बिताते थे)।
Act 17:22  तब पौलुस ने अरियुपगुस के बीच में खड़ा होकर कहा; हे अथेने के लोगों मैं देखता हूं, कि तुम हर बात में देवताओं के बड़े माननेवाले हो।
Act 17:23 क्‍योंकि मैं फिरते हुए तुम्हारी पूजने की वस्‍तुओं को देख रहा था, तो एक ऐसी वेदी भी पाई, जिस पर लिखा था, कि अनजाने ईश्वर के लिये। सो जिसे तुम बिना जाने पूजते हो, मैं तुम्हें उसका समाचार सुनाता हूं।
Act 17:24 जिस परमेश्वर ने पृथ्वी और उस की सब वस्‍तुओं को बनाया, वह स्‍वर्ग और पृथ्वी का स्‍वामी होकर हाथ के बनाए हुए मन्‍दिरों में नहीं रहता।
Act 17:25 न किसी वस्‍तु का प्रयोजन रखकर मनुष्यों के हाथों की सेवा लेता है, क्‍योंकि वह तो आप ही सब को जीवन और स्‍वास और सब कुछ देता है।
Act 17:26 उस ने एक ही मूल से मनुष्यों की सब जातियां सारी पृथ्वी पर रहने के लिये बनाई हैं; और उन के ठहराए हुए समय, और निवास के सिवानों को इसलिये बान्‍धा है।
Act 17:27  कि वे परमेश्वर को ढूंढ़ें, कदाचित उसे टटोलकर पा जाएं तौभी वह हम में से किसी से दूर नहीं!
Act 17:28 क्‍योंकि हम उसी में जीवित रहते, और चलते-फिरते, और स्थिर रहते हैं; जैसे तुम्हारे कितने कवियों ने भी कहा है, कि हम तो उसी के वंश भी हैं।
Act 17:29 सो परमेश्वर का वंश होकर हमें यह समझना उचित नहीं, कि ईश्वरत्‍व, सोने या रूपे या पत्थर के समान है, जो मनुष्य की कारीगरी और कल्पना से गढ़े गए हों।
Act 17:30  इसलिये परमेश्वर आज्ञानता के समयों में अनाकानी करके, अब हर जगह सब मनुष्यों को मन फिराने की आज्ञा देता है।
Act 17:31 क्‍योंकि उस ने एक दिन ठहराया है, जिस में वह उस मनुष्य के द्वारा धर्म से जगत का न्याय करेगा, जिसे उस ने ठहराया है और उसे मरे हुओं में से जिलाकर, यह बात सब पर प्रामाणित कर दी है।


एक साल में बाइबल: 

  • गिनती ७-८ 
  • मरकुस ४:२१-४१

बुधवार, 22 फ़रवरी 2012

थोड़े समय वाले

   कई वर्ष पहले मैंने सेना में कार्य किया था, और मैं इस बात के लिए सदैव धन्यवादी रहूंगा कि मुझे अपने देश के लिए अपने जीवन के कुछ साल देने का अवसर मिला। सेना में बिताए उस समय में से जो समय मेरा सबसे यादगार समय रहा वह था मेरी सेवा के अन्तिम कुछ सप्ताह का, जब मैं एक "थोड़े समय वाला" बन गया था।

   "थोड़े समय वाले" वे सैनिक होते हैं जो शीघ्र ही सेवा-निवृत होने वाले होते हैं। उन्हें कोई विशेष कार्य नहीं सौंपे जाते, उनका वक्त सेवा-निवृति की कारवाई पुरी करने में निकलता है। वे दफतरों में जाकर अपने हिसाब-किताब चुकाने, सामान वापस करने, फार्म भरवाने आदि में ही लगे रहते हैं। उन दिनों के बारे में जो मुझे स्पष्ट स्मरण आता है वह है मेरी निश्चिंत और आनन्दित मन तथा हल्की चाल जिसके साथ मैं अपने सेवा-निवृति के कार्य पूरे कर रहा था, क्योंकि मुझे यह निश्चय था कि मैं अब अपने घर जा रहा हूँ।

   अब मैं बुज़ुर्ग हो गया हूँ, अब मैं फिर वही "थोड़े समय वाला" बन गया हूँ। थोड़े समय में मुझे इस शरीर से "छुट्टी" मिल जाएगी। इस विचार से अब फिर मेरी आत्मा उन्मुक्त है और मेरी चाल में हल्कापन है, क्योंकि मुझे फिर यह निश्चय है कि मैं अपने "घर" जाने वाला हूँ। इसी नज़रिए को प्रभु यीशु और उसके चेलों ने "आशा" कहा (प्रेरितों २४:१५; रोमियों ५:२, ५)।

   परमेश्वर के वचन बाइबल के अनुसार, "आशा" का अर्थ है निश्चय और विश्वास होना। प्रत्येक मसीही विश्वासी की यह दृढ़, अडिग और अमिट आशा है कि वह मृतकों में से अपने प्रभु के समान ही पुनः जी उठेगा और अनन्तकाल के अपने "घर" में उसका स्वागत होगा। बस यही वह अनन्त काल की आशा है जो अब मुझ "थोड़े समय वाले" के मन को आनन्दित और चाल को हल्का करती है।

   क्या आपके पास यह आशा है? - डेविड रोपर


पुनरुत्थित यीशु स्वर्ग से आएगा, अपनों को स्वर्ग ले जाने के लिए।

आशा से लज्ज़ा नहीं होती.... - रोमियों ५:५


बाइबल पाठ: रोमियों ५:१-५
Rom 5:1  सो जब हम विश्वास से धर्मी ठहरे, तो अपने प्रभु यीशु मसीह के द्वारा परमेश्वर के साथ मेल रखें।
Rom 5:2 जिस के द्वारा विश्वास के कारण उस अनुग्रह तक, जिस में हम बने हैं, हमारी पहुंच भी हुई, और परमेश्वर की महिमा की आशा पर घमण्‍ड करें।
Rom 5:3 केवल यही नहीं, वरन हम क्‍लेशों में भी घमण्‍ड करें, यही जानकर कि क्‍लेश से धीरज।
Rom 5:4 और धीरज से खरा निकलना, और खरे निकलने से आशा उत्‍पन्न होती है।
Rom 5:5 और आशा से लज्ज़ा नहीं होती, क्‍योंकि पवित्र आत्मा जो हमें दिया गया है उसके द्वारा परमेश्वर का प्रेम हमारे मन में डाला गया है।


एक साल में बाइबल: 

  • गिनती ४-६ 
  • मरकुस ४:१-२०