ई-मेल संपर्क / E-Mail Contact

इन संदेशों को ई-मेल से प्राप्त करने के लिए अपना ई-मेल पता इस ई-मेल पर भेजें : rozkiroti@gmail.com / To Receive these messages by e-mail, please send your e-mail id to: rozkiroti@gmail.com

मंगलवार, 20 मार्च 2012

विवाह

   विवाह परमेश्वर की ओर से दिया गया वह संस्थान है जो एक महान मिलन पर आधारित है। यह पवित्र और गंभीर है, स्त्री तथा पुरुष को एक अद्भुत एकता में बांधता है और मानव जाति की बढ़ोतरी, समाज की उन्नति तथा समाज में नैतिक मूल्यों के बने रहने का आधार है। समस्त संसार का इतिहास गवाह है कि जहाँ कहीं विवाह के पवित्र और गंभीर संबंध की अवहेलना करी गई है और इसे हल्के या छिछोरे रूप में लिया गया है, उस परिवार और समाज में गिरावट ही आई है और उस सभ्यता का पतन ही हुआ है। परमेश्वर इस संबंध की गरिमा को कितनी गंभीरता से लेता है, तथा इसकी पवित्रता को कितना बहुमूल्य आंकता है, इस बात का अंदाज़ा हम इसी से लगा सकते हैं कि परमेश्वर ने अपने और अपनी प्रजा के संबंध तथा प्रभु यीशु मसीह और उसकी मण्डली के आपसी संबंध को स्त्री-पुरुष के विवाह के संबंध द्वारा समझाया: "क्योकि तेरा कर्त्ता तेरा पति है, उसका नाम सेनाओं का यहोवा है; और इस्राएल का पवित्र तेरा छुड़ाने वाला है, वह सारी पृथ्वी का भी परमेश्वर कहलाएगा" (यशायाह ५४:५); " हे पतियों, अपनी अपनी पत्‍नी से प्रेम रखो, जैसा मसीह ने भी कलीसिया से प्रेम करके अपने आप को उसके लिये दे दिया" (इफिसियों ५:२५)।

   परमेश्वर का वचन बाइबल हमें इस पवित्र संबंध और इससे जुड़ी परमेश्वर की मनशा के बारे में बहुत कुछ बताती है; उदाहरणस्वरूप:
  •    विवाह दो भिन्न परिवारों से लेकर एक नए परिवार की स्थापना है: "इस कारण मनुष्य माता पिता को छोड़कर अपनी पत्‍नी से मिला रहेगा, और वे दोनों एक तन होंगे" (इफिसियों ५:३१)।
  •    विवाह परमेश्वर द्वारा दी गई शरीर की इच्छा की पूर्ति की पवित्र एवं लाभकारी विधि है: "परन्‍तु व्यभिचार के डर से हर एक पुरूष की पत्‍नी, और हर एक स्त्री का पति हो; तुम एक दूसरे से अलग न रहो, परन्‍तु केवल कुछ समय तक आपस की सम्मति से कि प्रार्थना के लिये अवकाश मिले, और फिर एक साथ रहो, ऐसा न हो, कि तुम्हारे असंयम के कारण शैतान तुम्हें परखे" (१ कुरिन्थियों ७:२, ५)।
  •    विवाह द्वारा एक परस्पर सहायक जोड़ी बनती है "भली पत्नी कौन पा सकता है? क्योंकि उसका मूल्य मूंगों से भी बहुत अधिक है। उसके पति के मन में उसके प्रति विश्वास है।.... वह अपने जीवन के सारे दिनों में उस से बुरा नहीं, वरन भला ही व्यवहार करती है" (नीतिवचन ३१:१०, १२)।
   
विवाह परमेश्वर द्वार दी गई विधि है जिसमें एक स्त्री और एक पुरुष एक साथ लाए जाकर एक ऐसे संबंध में जोड़े जाते हैं जिससे परमेश्वर का आदर और समाज की सहायता तथा उन्नति होती है। परमेश्वर की इच्छानुसार किया गया विवाह परमेश्वर की महिमा के लिए दो व्यक्तियों को जोड़ता है और उसी की महिमा के लिए एक नया परिवार बनाता है।

   अपने जीवन और समाज में विवाह कि पवित्रता और गरिमा को कभी कम ना होने दें। - डेव ब्रैनन

परमेश्वर ने पति और पत्नी को एक दुसरे के पूरक होने के लिए बनाया है।
 
इस कारण मनुष्य माता पिता को छोड़कर अपनी पत्‍नी से मिला रहेगा, और वे दोनों एक तन होंगे। - इफिसियों ५:३१
 
बाइबल पाठ: इफिसियों ५:२१-३३
Eph 5:21  और मसीह के भय से एक दूसरे के आधीन रहो।
Eph 5:22  हे पत्‍नियों, अपने अपने पति के ऐसे अधीन रहो, जैसे प्रभु के।
Eph 5:23  क्‍योंकि पति पत्‍नी का सिर है जैसे कि मसीह कलीसिया का सिर है; और आप ही देह का उद्धारकर्ता है।
Eph 5:24  पर जैसे कलीसिया मसीह के आधीन है, वैसे ही पत्‍नियां भी हर बात में अपने अपने पति के आधीन रहें।
Eph 5:25  हे पतियों, अपनी अपनी पत्‍नी से प्रेम रखो, जैसा मसीह ने भी कलीसिया से प्रेम करके अपने आप को उसके लिये दे दिया।
Eph 5:26  कि उस को वचन के द्वारा जल के स्‍नान से शुद्ध करके पवित्र बनाए।
Eph 5:27  और उसे एक ऐसी तेजस्‍वी कलीसिया बनाकर अपने पास खड़ी करे, जिस में न कलंक, न झुर्री, न कोई ऐसी वस्‍तु हो, वरन पवित्र और निर्दोष हो।
Eph 5:28  इसी प्रकार उचित है, कि पति अपनी अपनी पत्नी से अपनी देह के समान प्रेम रखे, जो अपनी पत्‍नी से प्रेम रखता है, वह अपने आप से प्रेम रखता है।
Eph 5:29  क्‍योंकि किसी ने कभी अपने शरीर से बैर नहीं रखा वरन उसका पालन-पोषण करता है, जैसा मसीह भी कलीसिया के साथ करता है;
Eph 5:30   इसलिये कि हम उस की देह के अंग हैं।
Eph 5:31  इस कारण मनुष्य माता पिता को छोड़कर अपनी पत्‍नी से मिला रहेगा, और वे दोनों एक तन होंगे।
Eph 5:32   यह भेद तो बड़ा है, पर मैं मसीह और कलीसिया के विषय में कहता हूं।
Eph 5:33  पर तुम में से हर एक अपनी पत्‍नी से अपने समान प्रेम रखे, और पत्‍नी भी अपने पति का भय माने।
 
एक साल में बाइबल: 
  • यहोशू ४-६ 
  • लूका १:१-२०

सोमवार, 19 मार्च 2012

वास्तविक सौन्दर्य

   मैं जब भी किराने की दुकान से सामान खरीदने जाता हूँ तो पैसे चुकाने के स्थान के साथ रखी हुई पत्रिकाओं के मंच पर लगाई गई पत्रिकाओं के मुख-चित्रों तथा शीर्षकों पर नज़र डालता हूँ। मैंने देखा है कि वे पत्रिकाएं या तो भोजन, शरीर को स्वस्थ और दुरुस्त रखने, शरीर और चेहरे को सुन्दर बनाने, शारीरिक व्यायाम के बारे में होती हैं या आर्थिक विष्यों पर अन्यथा विलास और वासना से संबंधित होती हैं। आत्मिक बातों के लिए कुछ नहीं मिलता।

   यह एक बड़ी समस्या है; लोगों का ध्यान अपने शरीर और उसकी लालसाओं पर इतना अधिक केंद्रित हो गया है कि वे उस से संबंधित सब कुछ पढ़ने मानने को तैयार रहते हैं, चाहे झूठ या मनगढ़ंत, कुछ भी हो। इसी कारण ऐसी पत्रिकाओं की बिकरी है और इन्हें छापने वाले लोगों के पास, दूसरों के अन्ध विश्वास के कारण, धन का कमाने का साधन है। अपने शरीर पर केंद्रित रहने के कारण लोग अपनी तुलना दूसरों से करते हैं, उनके समान दिखने के प्रयास करते हैं और फिर अपने ही जीवन में व्यर्थ बेचैनीयों और निराशाओं का सामना करते हैं।

   कुछ वर्ष पहले मेरे एक मित्र ने एक किशोर युवती के साथ हुई उसकी वार्तालाप के बारे में बताया। मेरे मित्र ने उस किशोरी से कहा, "आप बड़ी आत्मविश्वास से भरी लगती हैं; इसका क्या कारण है?" किशोरी ने उत्तर दिया; "हाँ मैं आत्मविश्वास से भरी हूँ क्योंकि मैं सुडौल और सुन्दर हूँ।" मेरे मित्र ने विलक्षण बुद्धिमता के साथ उसे उत्तर दिया, "क्षमा कीजिए, मुझे यह सुनकर दुख हुआ।" इस बात को सुनकर उस किशोरी ने विसमय से मेरे मित्र से पूछा, "ऐसा क्यों?" मेरे मित्र ने उत्तर दिया, "क्योंकि ऐसा नहीं है कि सदा ही आप ऐसी सुडौल और सुन्दर बनी रहेंगी। कभी भी कुछ भी हो सकता है; जब सुडौल और सुन्दर नहीं रहेंगी तब आपका क्या होगा?"

   परमेश्वर के वचन बाइबल में नीतिवचन की पुस्तक में बताया गया है कि आकर्षक होना मिथिया है और सुन्दरता क्षणिक है (नीतिवचन ३१:३०)। शारीरिक सुन्दरता के जाते रहने में कोई विशेष समय नहीं लगता; कोई उसे बनाए रखने के कितने भी प्रयास क्यों न कर ले, शारीरिक सुन्दरता कभी न कभी समाप्त होती ही है। लेकिन एक और सुन्दरता है जो समय के साथ निखरती जाती है - आत्मा की सुन्दरता; जो ना कभी धूमिल होती है और ना ही कभी समाप्त होती है।

   यही वह वास्तविक सौन्दर्य है जो सदा बना रहता है; क्योंकि यह विश्वास और पश्चाताप द्वारा तथा परमेश्वर के भय में बने रहने वालों को प्रभु यीशु से प्राप्त होता है और अनादि अनन्त परमेश्वर के समान, उन लोगों में अनन्त काल के लिए बना रहता है।

   क्षणिक और मिट जाने वाली शरीरिक सुन्दरता की चिंता छोड़ कर अनन्तकाल तक बनी रहने वाली आत्मिक सुन्दरता को प्रभु यीशु से प्राप्त कर लीजिए। - डेविड रोपर


मन की धार्मिकता चरित्र में सुन्दरता उत्पन्न करती है।

शोभा तो झूठी और सुन्दरता व्यर्थ है, परन्तु जो स्त्री यहोवा का भय मानती है, उसकी प्रशंसा की जाएगी।

बाइबल पाठ: नीतिवचन ३१:२१-३१
Pro 31:21  वह अपने घराने के लिये हिम से नहीं डरती, क्योंकि उसके घर के सब लोग लाल कपड़े पहिनते हैं।
Pro 31:22  वह तकिये बना लेती है, उसके वस्त्र सूक्ष्म सन और बैंजनी रंग के होते हैं।
Pro 31:23  जब उसका पति सभा में देश के पुरनियों के संग बैठता है, तब उसका सम्मान होता है।
Pro 31:24  वह सन के वस्त्र बनाकर बेचती है, और व्योपारी को कमरबन्द देती है।
Pro 31:25  वह बल और प्रताप का पहिरावा पहिने रहती है, और आने वाले काल के विषय पर हंसती है।
Pro 31:26  वह बुद्धि की बात बोलती है, और उसके वचन कृपा की शिक्षा के अनुसार होते हैं।
Pro 31:27  वह अपने घराने के चालचलन को ध्यान से देखती है, और अपनी रोटी बिना परिश्रम नहीं खाती।
Pro 31:28  उसके पुत्र उठ उठकर उसको धन्य कहते हैं, उनका पति भी उठकर उसकी ऐसी प्रशंसा करता है:
Pro 31:29  बहुत सी स्त्रियों ने अच्छे अच्छे काम तो किए हैं परन्तु तू उन सभों में श्रेष्ट है।
Pro 31:30  शोभा तो झूठी और सुन्दरता व्यर्थ है, परन्तु जो स्त्री यहोवा का भय मानती है, उसकी प्रशंसा की जाएगी।
Pro 31:31  उसके हाथों के परिश्रम का फल उसे दो, और उसके कार्यों से सभा में उसकी प्रशंसा होगी।


एक साल में बाइबल: 

  • यहोशू १-३ 
  • मरकुस १६

रविवार, 18 मार्च 2012

आप कौन हैं?

   यदि कोई आपसे पुछे कि "आप कौन हैं?", तो मेरा अंदाज़ा है कि आप अपने बारे में कुछ शब्द कहकर बताएंगे कि आप क्या कार्य करते हैं, जैसे कि "मैं एक नर्स हूँ" या "मैं बिजली मकैनिक हुँ" आदि। लेकिन वास्तव में यह तो वह है जो आप करते हैं, ना कि वह जो आप हैं! ज़रा सोचिए, जब आप वह करना छोड़ देंगे जो आप कर रहे हैं तो आप क्या होंगे? क्या आपका व्यवसाय आपकी पहचान बदलाता रहेगा? क्या व्यवसाय ना होने पर आपकी पहचान भी नहीं रहेगी?

   एक मसीही विश्वासी के लिए उसकी पहचान प्रभु यीशु के साथ उसके संबंध से है; और यही संबंध उसके व्यवहार को तय करता है। उदाहरण के लिए परमेश्वर के वचन बाइबल के एक चरित्र मत्ती को लीजिए। मत्ती, प्रभु यीशु के समय में, रोमी राज्य में एक रोमी कर्मचारी था और रोमी शासकों के लिए, अपने लोगों - यहूदियों से, कर वसूल करता था। उसके इस व्यवसाय ने उसे लालची और स्वार्थी बना रखा था और इस कारण वह अपने ही लोगों में तुच्छ समझा जाता था। लेकिन जिस दिन प्रभु यीशु उसके जीवन में आया, उसके लिए सब कुछ बदल गया। अब उसका व्यवहार भिन्न था, उसकी प्राथमिकताएं भिन्न थीं, उसका लालच जाता रहा, समाज में उसकी एक नई पहचान हो गई - प्रभु यीशु का अनुयायी। मत्ती ही ऐसा अकेला व्यक्ति नहीं था। परमेश्वर के वचन बाइबल में मत्ती रचित सुसमाचार में हम चार अन्य व्यक्तियों - पतरस, अन्द्रियास, याकूब और यूहन्ना के विष्य में भी पढ़ते हैं जो मछुआरे थे और सब कुछ छोड़कर प्रभु यीशु के पीछे हो लिए, और उनके जीवन बिलकुल बदल गए, प्रभु यीशु के अनुयायी के रूप में उनकी भी नई पहचान हो गई। तब से लेकर आज तक यह नई पहचान और नए व्यवहार का सिलसिला जारी है, हर उस व्यक्ति के लिए जो प्रभु यीशु पर विश्वास लाता है और अपने आप को उसे समर्पित कर देता है।

   प्रभु यीशु का व्यक्तित्व बाध्य कर देने वाला व्यक्तित्व है; प्रभु आज भी अनुयायीयों की खोज में है। जो उसके निमंत्रण को स्वीकार कर लेते हैं, स्वेच्छा से उसके पीछे चलने की ठान लेते हैं, वह उनके जीवन को एक नई पहचान, एक नया आयाम दे देता है। अब वे "प्रभु यीशु के अनुयायी" के रूप में जाने जाते हैं। इस नई पहचान के लिए किसी को अपना व्यवसाय बदलने की आवश्यक्ता नहीं है, वरन अनुयायी बनने के बाद उस व्यवसाय को करने की उनकी विधि में स्वतः ही परिवर्तन आने लग जाते हैं; क्योंकि अब वे लोग वही कार्य अपने प्रभु और उद्धारकर्ता यीशु के नाम और महिमा के लिए करने लगते हैं। अब उनके जीवन की प्राथमिकता अपने प्रभु और उद्धारकर्ता की आज्ञाकारिता में बने रहना और उसे ही महिमा देते रहना हो जाता है।

   यदि अगली बार कोई आपसे पूछे कि "आप कौन हैं?" तो क्या आप कहेंगे कि "मैं प्रभु यीशु का अनुयायी हूँ" ? - जो स्टोवेल


यदि आप प्रभु यीशु के अनुयायी हैं तो जीवन में आपको और किसी पहचान की कोई आवश्यक्ता नहीं है।

और [यीशु ने] उन से कहा, मेरे पीछे चले आओ, तो मैं तुम को मनुष्यों के पकड़ने वाले बनाऊंगा। - मत्ती ४:१९


बाइबल पाठ: मत्ती ४:१७-२५


Mat 4:17  उस समय से यीशु ने प्रचार करना और यह कहना आरम्भ किया, कि मन फिराओ क्‍योंकि स्‍वर्ग का राज्य निकट आया है।
Mat 4:18  उस ने गलील की झील के किनारे फिरते हुए दो भाइयों अर्थात शमौन को जो पतरस कहलाता है, और उसके भाई अन्‍द्रियास को झील में जाल डालते देखा, क्‍योंकि वे मछवे थे।
Mat 4:19   और उन से कहा, मेरे पीछे चले आओ, तो मैं तुम को मनुष्यों के पकड़ने वाले बनाऊंगा।
Mat 4:20  वे तुरन्‍त जालों को छोड़कर उसके पीछे हो लिए।
Mat 4:21  और वहां से आगे बढ़कर, उस ने और दो भाइयों अर्थात जब्‍दी के पुत्र याकूब और उसके भाई यूहन्ना को अपने पिता जब्‍दी के साथ नाव पर अपने जालों को सुधारते देखा, और उन्‍हें भी बुलाया
Mat 4:22  वे तुरन्‍त नाव और अपने पिता को छोड़कर उसके पीछे हो लिए।
Mat 4:23   और यीशु सारे गलील में फिरता हुआ उन की सभाओं में उपदेश करता और राज्य का सुसमाचार प्रचार करता, और लोगों की हर प्रकार की बीमारी और र्दुबलता को दूर करता रहा।
Mat 4:24  और सारे सूरिया में उसका यश फैल गया; और लोग सब बीमारों को, जो नाना प्रकार की बीमारियों और दुखों में जकड़े हुए थे, और जिन में दुष्‍टात्क़ाएं थीं और मिर्गी वालों और झोले के मारे हुओं को उसके पास लाए और उस ने उन्‍हें चंगा किया।
Mat 4:25  और गलील और दिकापुलिस और यरूशलेम और यहूदिया से और यरदन के पार से भीड़ की भीड़ उसके पीछे हो ली।


एक साल में बाइबल: 

  • व्यवस्थाविवरण ३२-३४ 
  • मरकुस १५:२६-४७

शनिवार, 17 मार्च 2012

भला परमेश्वर

   जब मेरा बहनोई चक, पश्चिमी अफ्रीका के माली देश में मिशनरी था तो वह एक सड़क दुर्घटना में घायल हो गया। चक अपनी मोटरसाइकिल पर जा रहा था कि अचानक सड़क पर उसके सामने एक आदमी आ गया। ब्रेक लगाते और बचाते बचाते हुए भी मोटरसाइकिल उस आदमी से टकराई और चक तथा उसकी मोटरसाइकिल सड़क पर २०० मीटर तक घिसटते चले गए। चक को बेहोशी की हालत में उठाकर अस्पताल लाया गया। कुछ समय बाद जब चक को होश आया तो डॉक्टर ने उससे कहा कि वह सचमुच सौभाग्यशाली है कि किसी गंभीर चोट से बच गया और जिससे टकराया था उसे भी कोई गंभीर चोट नहीं लगी। चक ने मुस्कुराते हुए कहा, "परमेश्वर भला है"।

   बाद में जब चक उस दिन की घटना पर विचार कर रहा था, और सोच रहा था कि अच्छा हुआ कि ना तो उसे ही कोई गंभीर चोट आई और ना ही उस व्यक्ति को जिस से वह टकराया था, तो उसके मन में बात उठी, "क्या होता यदि दोनों में से किसी एक की मृत्यु हो जाती? क्या तब भी वह परमेश्वर को भला ही कहता? क्या ऐसा होने से परमेश्वर के भले होने पर प्रश्न चिन्ह लग जाता?"

   जब हम किसी दुर्घटना या त्रासदी में पड़ें, तो परमेश्वर की भलाई पर सन्देह आना स्वाभाविक सा लगता है। क्या परमेश्वर सदा ही भला रहता है? जी हाँ, परमेश्वर सदा ही भला रहता है। परमेश्वर ने कभी यह वायदा नहीं किया कि उसके विश्वासियों पर कभी कोई तकलीफ या क्लेष नहीं होगा, लेकिन उसने यह वायदा अवश्य किया है कि हर तकलीफ और क्लेष में वह हमारे साथ ही होगा ( भजन ४६:७)। परमेश्वर ने कभी यह नहीं कहा कि उसके विश्वासियों को किसी विपत्ति का या भयानक परिस्थिति का सामना नहीं करना पड़ेगा, लेकिन यह अवश्य कहा है कि ऐसी हर परिस्थिति में उसका जन कभी अकेला नहीं होगा, उस जन की सहायता और सांत्वना के लिए वह भी उसके साथ उपस्थित रहेगा ( भजन २३:४)।

   परमेश्वर सदा ही भला है, हम चाहे जैसी भी परेशानी और दुख में से होकर निकल रहे हों। चाहे परिस्थिति हमारी समझ से बिल्कुल बाहर हो और हमें उसमें कुछ भी भला नज़र नहीं आ रहा हो, फिर भी परमेश्वर अन्ततः उस में से भी हमारे लिए भला ही करेगा, क्योंकि अपने बच्चों के लिए भले के अलावा वह और कुछ कर ही नहीं सकता, उनकी भलाई करने के अलावा और कुछ करना उसके चरित्र में ही नहीं है। इसलिए प्रत्येक मसीही विश्वासी परमेश्वर के वचन बाइबल के भविष्यद्वकता हबक्कूक के साथ मिलकर कह सकता है: "क्योंकि चाहे अंजीर के वृक्षों में फूल न लगें, और न दाखलताओं में फल लगें, जलपाई के वृक्ष से केवल धोखा पाया जाए और खेतों में अन्न न उपजे, भेड़शालाओं में भेड़-बकरियां न रहें, और न थानों में गाय बैल हों, तौभी मैं यहोवा के कारण आनन्दित और मगन रहूंगा, और अपने उद्धारकर्ता परमेश्वर के द्वारा अति प्रसन्न रहूंगा। यहोवा परमेश्वर मेरा बलमूल है, वह मेरे पांव हरिणों के समान बना देता है, वह मुझ को मेरे ऊंचे स्थानों पर चलाता है" (हबक्कूक३:१७-१९)।


परमेश्वर हमारे विश्वास को परखता है जिससे हम उसकी विश्वासयोग्यता पर विश्वास रख सकें।

यहोवा पिसे हुओं के लिये ऊंचा गढ़ ठहरेगा, वह संकट के समय के लिये भी ऊंचा गढ़ ठहरेगा। - भजन ९:९


बाइबल पाठ: भजन ४६
Psa 46:1  परमेश्वर हमारा शरणस्थान और बल है, संकट में अति सहज से मिलनेवाला सहायक।
Psa 46:2  इस कारण हम को कोई भय नहीं चाहे पृथ्वी उलट जाए, और पहाड़ समुद्र के बीच में डाल दिए जाएं;
Psa 46:3  चाहे समुद्र गरजे और फेन उठाए, और पहाड़ उसकी बाढ़ से कांप उठें।
Psa 46:4  एक नदी है जिसकी नहरों से परमेश्वर के नगर में अर्थात परमप्रधान के पवित्र निवास भवन में आनन्द होता है।
Psa 46:5  परमेश्वर उस नगर के बीच में है, वह कभी टलने का नहीं; पौ फटते ही परमेश्वर उसकी सहायता करता है।
Psa 46:6  जाति जाति के लोग झल्ला उठे, राज्य राज्य के लोग डगमगाने लगे; वह बोल उठा, और पृथ्वी पिघल गई।
Psa 46:7  सेनाओं का यहोवा हमारे संगे है, याकूब का परमेश्वर हमारा ऊंचा गढ़ है।
Psa 46:8  आओ, यहोवा के महाकर्म देखो, कि उस ने पृथ्वी पर कैसा कैसा उजाड़ किया है।
Psa 46:9  वह पृथ्वी की छोर तक लड़ाइयों को मिटाता है, वह धनुष को तोड़ता, और भाले को दो टुकड़े कर डालता है, और रथों को आग में झोंक देता है!
Psa 46:10  चुप हो जाओ, और जान लो, कि मैं ही परमेश्वर हूं। मैं जातियों में महान् हूं, मैं पृथ्वी भर में महान् हूं!
Psa 46:11  सेनाओं का यहोवा हमारे संग है, याकूब का परमेश्वर हमारा ऊंचा गढ़ है।


एक साल में बाइबल: 

  • व्यवस्थाविवरण ३०-३१ 
  • मरकुस १५:१-२५

शुक्रवार, 16 मार्च 2012

वास्तविक नायक

   लूई बी. न्यूमिल्लर अपनी नम्रता, ईमानदारी और गुणवन्ता के प्रति समर्पण के लिए विख्यात थे। Caterpillar Tractor Company के अध्यक्ष के रूप में सन १९४१-५४ तक उन्होंने दूसरे विश्वयुद्ध के चुनौती भरे समय के दौरान ज़मीन-ढुलाई के लिए भारी मशीनें बनाने वाली अपनी कंपनी का कुशल नेतृत्व किया और विश्व स्तर पर उसके कार्य को बढ़ाया। अपनी पुस्तक In Their Time: The Greatest Buisness Leaders of the Twentieth Century में लेखक मेयो और नौहिरा ने लूई न्यूमिल्लर के नेतृत्व को "सफल - बैग़र धूमधाम के" कहा। उन लेखकों के अनुसार, न्यूमिल्लर की महानता का चिन्ह था कि उन्होंने अपने व्यवसाय में से अपनी पहचान मिटा दी थी, बस अपनी कंपनी ही को पहचान और प्रशंसा का पात्र बना दिया था; उन्होंने नायक होने का गौरव कंपनी को दे दिया ना कि अपने लिए रखा।

   ऐसी ही निस्वार्थ सेवा का गुण हम परमेश्वर के वचन बाइबल के एक नायक यूहन्ना बप्तिस्मा देने वाले में पाते हैं। यूहन्ना एक गतिशील और प्रबल प्रचारक था किंतु उसने कभी अपने प्रचार और जीवन के उद्देश्य से नज़र नहीं हटाई। बार बार उसने अपने अनुयायियों और लोगों से कहा कि वह प्रभु यीशु मसीहे के लिए मार्ग तैयार करने आया है; वह मसीह नहीं है। जब यूहन्ना के अनुयायियों ने आकर यूहन्ना से शिकायत करी कि वह यीशु जिसे उसने बप्तिस्मा दिया अब स्वयं लोगों को बप्तिस्मा दे रहा है और चेले बना रहा है, तो यूहन्ना ने उन को उत्तर दिया: "तुम तो आप ही मेरे गवाह हो, कि मैं ने कहा, मैं मसीह नहीं, परन्‍तु उसके आगे भेजा गया हूं। अवश्य है कि वह बढ़े और मैं घटूं" (यूहन्ना ३:२८, ३०)।

   प्रभु यीशु मसीह के अनुयायी होने के नाते हम मसीही विश्वासियों के जीवन का उद्देश्य है कि हम अपने जीवनों द्वारा प्रभु यीशु को ऊँचे पर उठाएं, उसे ही महिमा दें ना कि मसीह के नाम में अपने लिए आदर और महिमा पाने की लालसा रखें। यदि मसीह के कार्य में और उसके लिए गवाही के जीवन में संसार में हमारी या हमारे कामों की पहचान नहीं भी होती है या अनदेखी होती है, तौ भी इससे खिन्न होने की बजाए, हमें फिर भी आनन्दित रहना चाहिए कि हमारे प्रभु के नाम को आदर और महिमा प्राप्त हुई; क्योंकि वास्तविक और हम सब का नायक तो वही है। हमारा प्रभु हमारे प्रत्येक कार्य और प्रत्येक बात को जानता है और समय आने पर हमें उनके योग्य प्रतिफल भी देगा, जो संसार से मिलने वाली किसी भी ख्याती से कहीं अधिक बढ़कर होंगे।

   संसार में उस वास्तविक नायक प्रभु यीशु मसीह को आदर और महिमा देना, उसके सच्चे और निस्वार्थ गवाह बनना और उसके समय की प्रतीक्षा करना ही हमारी महानता का चिन्ह है। - डेविड मैक्कैसलैंड


महान मसीही विश्वासी वही है जो अपने आप को गौण करके अपने जीवन में सारा आदर, महिमा और महानता सदा प्रभु यीशु को देता है।

अवश्य है कि वह बढ़े और मैं घटूं। - यूहन्ना ३:३०

बाइबल पाठ: यूहन्ना ३:२२-३१
Joh 3:22  इस के बाद यीशु और उसके चेले यहूदिया देश में आए, और वह वहां उन के साथ रहकर बपतिस्मा देने लगा।
Joh 3:23 और यूहन्ना भी शालेम् के निकट ऐनोन में बपतिस्मा देता था। क्‍योंकि वहां बहुत जल था और लोग आकर बपतिस्मा लेते थे।
Joh 3:24 क्‍योंकि यूहन्ना उस समय तक जेलखाने में नहीं डाला गया था।
Joh 3:25  वहां यूहन्ना के चेलों का किसी यहूदी के साथ शुद्धि के विषय में वाद-विवाद हुआ।
Joh 3:26 और उन्‍होंने यूहन्ना के पास आकर उस से कहा, हे रब्‍बी, जो व्यक्ति यरदन के पार तेरे साथ था, और जिस की तू ने गवाही दी है देख, वह बपतिस्मा देता है, और सब उसके पास आते हैं।
Joh 3:27 यूहन्ना ने उत्तर दिया, जब तक मनुष्य को स्‍वर्ग से न दिया जाए तब तक वह कुछ नहीं पा सकता।
Joh 3:28 तुम तो आप ही मेरे गवाह हो, कि मैं ने कहा, मैं मसीह नहीं, परन्‍तु उसके आगे भेजा गया हूं।
Joh 3:29 जिस की दुलहिन है, वही दूल्हा है: परन्‍तु दूल्हे का मित्र जो खड़ा हुआ उस की सुनता है, दूल्हे के शब्‍द से बहुत हर्षित होता है; अब मेरा यह हर्ष पूरा हुआ है।
Joh 3:30  अवश्य है कि वह बढ़े और मैं घटूं।
Joh 3:31 जो ऊपर से आता है, वह सर्वोत्तम है, जो पृथ्वी से आता है वह पृथ्वी का है, और पृथ्वी की ही बातें कहता है: जो स्‍वर्ग से आता है, वह सब के ऊपर है।


एक साल में बाइबल: 

  • व्यवस्थाविवरण २८-२९ 
  • मरकुस १४:५४-७२

गुरुवार, 15 मार्च 2012

प्रतिरक्षा की अंतिम पंक्ति

   अमेरिका के गृह युद्ध में गेट्सीबर्ग, पेन्सिलवेनिया की लड़ाई वह निर्णायक लड़ाई मानी जाती है जिसने युद्ध की दिशा अमेरिका के राष्ट्रवादियों के पक्ष में मोड़ दी थी। उस युद्ध का एक केंद्र बिन्दु था एक चट्टानी क्षेत्र में लड़ा गया युद्ध जहां कर्नल जोशुआ लौरेंस चैम्बरलेन और उनकी सेना २०वीं मेइन इन्फेन्ट्री ने मोर्चा संभाला हुआ था। यदि कॉनफैडेरेट सेना चेम्बरलेन की २०वीं मेइन इन्फेन्ट्री से पार हो पाते तो इतिहासकारों का मानना है कि फिर राष्ट्रवादियों की सेना कॉनफैडरेट सेनाओं से घिर जाती और सम्भवतः फिर वे युद्ध हार जाते। २०वीं मेइन इन्फेन्ट्री उस युद्ध में प्रतिरक्षा की अंतिम पंक्ति साबित हुई जिसने युद्ध को राष्ट्रवादियों के पक्ष में कर दिया।

   मसीह यीशु के अनुयायी भी एक महत्वपूर्ण युद्ध में लगे हैं - शैतान और उसकी सेनाओं और युक्तियों के साथ (इफिसियों ६:११)। इस युद्ध में खड़े रहने के लिए हमें हमारे सेनापति परमेश्वर से उसके हथियार बांध लेने का आवाहन है (इफिसियों ६:१०-१८)।

   गेट्सीबर्ग के उस युद्ध में मनुष्यों कि एक महान किंतु हार सकने की संभावना रखने वाली सेना प्रतिरक्षा की अंतिम पंक्ति बन कर खड़ी हुई थी, किंतु हमारे इस आत्मिक युद्ध में प्रतिरक्षा की हमारी अंतिम पंक्ति भी वही है जो आरंभिक पंक्ति है। हमारी प्रतिरक्षा ऐसी सामर्थ के द्वारा है सृष्टि में जिसका सामना कर सकने वाली और कोई सामर्थ नहीं है। प्रेरित पौलुस रोमियों ८:३१-३९ में बयान करता है कि हमारा एकमात्र और अडिग सहारा है प्रभु यीशु मसीह का हमारे प्रति प्रेम। यह प्रेम हमारा ऐसा सुरक्षाकवच है कि सृष्टि में ऐसी कोई सामर्थ नहीं है जो "हमें परमेश्वर के प्रेम से, जो हमारे प्रभु मसीह यीशु में है, अलग कर सकेगी" (रोमियों ८:३९)।

   जब कभी शत्रु अति प्रबल नज़र आए और ऐसा लगे कि अब कुछ नहीं हो सकता, तो प्रत्येक मसीही विश्वासी को स्मरण कर लेना चाहिए कि उसकी सुरक्षा की अंतिम पंक्ति इस सृष्टि का सृजनहार है, समस्त सृष्टि में जिसकी सामर्थ से बढ़कर कोई सामर्थ नहीं है, और हम उसके द्वारा जिस ने "हम से प्रेम किया है, जयवन्‍त से भी बढ़कर हैं" (रोमियों ८:३७)। - बिल क्राउडर


परमेश्वर की हर योजना विजय ही की योजना है।

परन्‍तु इन सब बातों में हम उसके द्वारा जिस ने हम से प्रेम किया है, जयवन्‍त से भी बढ़कर हैं। - रोमियों ८:३७
 
बाइबल पाठ: रोमियों ८:३१-३९
Rom 8:31  सो हम इन बातों के विषय में क्‍या कहें यदि परमेश्वर हमारी ओर है, तो हमारा विरोधी कौन हो सकता है
Rom 8:32  जिस ने अपने निज पुत्र को भी न रख छोड़ा, परन्‍तु उसे हम सब के लिये दे दिया: वह उसके साथ हमें और सब कुछ क्‍योंकर न देगा?
Rom 8:33  परमेश्वर के चुने हुओं पर दोष कौन लगाएगा? परमेश्वर वह है जो उनको धर्मी ठहराने वाला है।
Rom 8:34  फिर कौन है जो दण्‍ड की आज्ञा देगा? मसीह वह है जो मर गया वरन मुर्दों में से जी भी उठा, और परमेश्वर की दाहिनी ओर है, और हमारे लिये निवेदन भी करता है।
Rom 8:35  कौन हम को मसीह के प्रेम से अलग करेगा? क्‍या क्‍लेश, या संकट, या उपद्रव, या अकाल, या नंगाई, या जोखिम, या तलवार?
Rom 8:36  जैसा लिखा है, कि तेरे लिये हम दिन भर घात किए जाते हैं; हम वध होने वाली भेंडों की नाईं गिने गए हैं।
Rom 8:37  परन्‍तु इन सब बातों में हम उसके द्वारा जिस ने हम से प्रेम किया है, जयवन्‍त से भी बढ़कर हैं।
Rom 8:38  क्‍योंकि मैं निश्‍चय जानता हूं, कि न मृत्यु, न जीवन, न स्‍वर्गदूत, न प्रधानताएं, न वर्तमान, न भविष्य, न सामर्य, न ऊंचाई,
Rom 8:39  न गहिराई और न कोई और सृष्‍टि, हमें परमेश्वर के प्रेम से, जो हमारे प्रभु मसीह यीशु में है, अलग कर सकेगी।
एक साल में बाइबल: 
  • व्यवस्थाविवरण २६-२७ 
  • मरकुस १४:२७-५३

बुधवार, 14 मार्च 2012

बेजोड़ विशेषाधिकार

   अमेरिका के भूतपूर्व राष्ट्रपति John F. Kennedy के पुत्र John F. Kennedy Jr. और उनका एक मित्र बिल्ली को अमेरीकी नौसेना के युद्धपोत USS John F. Kennedy पर आने का निमंत्रण मिला। युद्धपोत को दिखने और उसके बारे में बताने के लिए नौसेना का एक कर्मचारी भी उअन्के साथ मार्गदर्शक के रूप में था। घूमते घूमते वे तीनों अनायास हि पोत के एक ऐसे क्षेत्र में पहुँच गए जो दर्शको के लिए वर्जित है। जब एक नौसेना अधिकारी ने उन्हें वहां रोका तो उनके मार्गदर्शक ने John F. Kennedy Jr. की ओर सम्केत करते हुए उस अधिकारी से कहा, "यह इनके पिताजी का पोत है।" यह सुनते ही वह अफसर "सावधान" की मुद्रा में खड़ा हो गया और John F. Kennedy Jr. को सलाम किया। उनके मार्गदर्शक ने बताया कि नौसेना में प्रथा है कि यदि किसी पोत का नाम किसी व्यक्ति के नाम पर रखा जाता है तो वह पोत उसि व्यक्ति का माना जाता है जिसके नाम पर उस पोत का नाम रखा गया। इस कारण क्योंकि उस पोत का नाम John F. Kennedy Jr. के पिता भूतपूर्व राष्ट्रपति John F. Kennedy के नाम पर रखा गया था इस लिए John F. Kennedy Jr. को उस पोत पर कुछ बेजोड़ विशेषाधिकार प्राप्त थे।

   यह एक महत्वपुर्ण आत्मिक सिद्धांत को भी दिखाता है। प्रेरित पौलुस ने लिखा कि मसीही विश्वासी होने के नाते हम, "... यीशु मसीह के द्वारा हम उसके लेपालक पुत्र हों" (इफिसियों १:४-५)। पापों से पश्चाताप और प्रभु यीशु में किए गए विश्वास के बाद जब हम उद्धार प्राप्त करके परमेश्वर के परिवार में सम्मिलित हो जाते हैं तो हम मसीही विश्वासियों को भी परमेश्वर की संतान होने के बेजोड़ विशेषाधिकार मिल जाते हैं। अब हमारी देह परमेश्वर के पवित्र आत्मा का मंदिर हो जाती है, और वह हम में वास करता है (१ कुरिन्थियों ६:१९-२०); हमें परमेश्वर को "हे अब्बा, हे पिता" कहकर पुकारने का अधिकार मिल जाता है (रोमियों ८:१५); हम मसीह यीशु के संगी वारिस बनाए गए हैं (रोमियों ८:१७); अब जो हम में है वह उस से जो संसार में है बड़ा है (१ युहन्ना ४:४); परमेश्वर सदा ही हमें मसीह यीशु में जय के उत्सव में लिए चलता है (२ कुरिन्थियों २:१४) और परमेश्वर के स्वर्गदूत हमारी सेवा-टहल करने वाली आत्माएं बन जाते हैं (इब्रानियों १:१३-१४)।

   जीवन की चुनौतियों से भरी राह में हम इन सभी बातों से सामर्थ ले सकते हैं तथा किसी भी मसीही विश्वासी को कभी निराशा का जीवन जीने या हारा हुआ महसूस करने की कोई आवश्यक्ता नहीं है। - डेनिस फिशर


मसीही विश्वासी की मीरास अनन्त काल के लिए निश्चित है।
और अपनी इच्‍छा की सुमति के अनुसार हमें अपने लिये पहिले से ठहराया, कि यीशु मसीह के द्वारा हम उसके लेपालक पुत्र हों - इफिसियों १:५
बाइबल पाठ: रोमियों ८:१२-१७
Rom 8:12  सो हे भाइयो, हम शरीर के कर्जदार नहीं, ताकि शरीर के अनुसार दिन काटें।
Rom 8:13 क्‍योंकि यदि तुम शरीर के अनुसार दिन काटोगे, तो मरोगे, यदि आत्मा से देह की क्रियाओं को मारोगे, तो जीवित रहोगे।
Rom 8:14  इसलिये कि जितने लोग परमेश्वर के आत्मा के चलाए चलते हैं, वे ही परमेश्वर के पुत्र हैं।
Rom 8:15 क्‍योंकि तुम को दासत्‍व की आत्मा नहीं मिली, कि फिर भयभीत हो परन्‍तु लेपालकपन की आत्मा मिली है, जिस से हम हे अब्‍बा, हे पिता कहकर पुकारते हैं।
Rom 8:16 आत्मा आप ही हमारी आत्मा के साथ गवाही देता है, कि हम परमेश्वर की सन्‍तान हैं।
Rom 8:17 और यदि सन्‍तान हैं, तो वारिस भी, वरन परमेश्वर के वारिस और मसीह के संगी वारिस हैं, जब कि हम उसके साथ दुख उठाएं कि उसके साथ महिमा भी पाएं।
एक साल में बाइबल: 
  • व्यवस्थाविवरण २३-२५ 
  • मरकुस १४:१-२६