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शनिवार, 24 मार्च 2012

सबसे बुरी संभावना

   जब मैं बाइबल स्कूल में पढ़ाता था तो कभी कभी यात्रा के समय अपनी ट्रेन की प्रतीक्षा करते समय, स्टेशन के एक होटल में बैठ कर विद्यार्थियों की उत्तर पुस्तिकाएं जांचने में समय व्यतीत करता था। मेरे समान अन्य यात्री भी वहां बैठकर आपने अपने काम में लगे ट्रेन की प्रतीक्षा कर रहे होते थे। ऐसे में एक सामन्य व्यवहार है कि बैठे यात्री दूसरे किसी यात्री की किसी बात पर अपनी प्रतिक्रिया नहीं देते, शांत रहते हैं। एक दिन ऐसे ही काम करते करते असावधानी में मैंने अपना कॉफी का भरा हुआ बड़ा कप अपने खुले हुए ब्रीफकेस में गिरा लिया और वे सारी उत्तर पुस्तिकाएं उस से खराब हो गईं। मेरे पास बैठा एक अन्य यात्री अपने आप को रोक नहीं सका और सुनाई दे सकने वाली आवाज़ में बोल उठा, "सबसे बुरी संभावना घटित हो ही गई!"

   उस यात्री की यह टिप्पणी तो एक अतिश्योक्ति थी, किंतु यह भी सच है कि हम में से हर एक जन किसी न किसी बात से अबसे अधिक डरता है; वह चाहे आर्थिक हानि हो, या परिवार के किसी सदस्य की हानि, या कैंसर जैसी कोई भयानक बिमारी या फिर कोई कठिनाई, इत्यादि। सबके मन में कुछ न कुछ रहता है जिस के घटित होने की आशंका हमारे मन में दुविधा उत्पन्न करती है।

   परमेशवर के वचन बाइबल में अय्युब की पुस्तक इन सबसे बुरी संभावनाओं के एक धर्मी व्यक्ति अय्युब के जीवन में घटित होने का वर्णन है। भयानक दुखों, असहनीय शारीरिक पीड़ाओं और समझ से बाहर परिस्थितियों में भी अय्युब ने परमेश्वर की भूमिका को सही रूप में समझा और कहा: "परन्तु वह जानता है, कि मैं कैसी चाल चला हूँ; और जब वह मुझे ता लेगा तब मैं सोने के समान निकलूंगा" (अय्युब २३:१०)। अय्युब के इस बुद्धिमानी से भरे कथन से हम दो बातें सीख सकते हैं: पहली यह कि हम जिससे सबसे अधिक आशंकित रहते हैं वही हमारे चरित्र कि परीक्षा और हमें सुधारने के लिए प्रयोग किया जा सकता है; और दूसरी यह कि हर परिस्थिति और परेशानी में परमेश्वर अपने बच्चों के साथ है और उस से पार निकल पाने के योग्य सामर्थ तथा सहायता देता है।

   प्रभु यीशु में विश्वास और पापों से पश्चाताप द्वारा परमेश्वर की संतान बनकर परमेश्वर से चिपटे रहें। वह सदा अपने वाय्दों में पक्का और अटल रहा है; उसने अपने बच्चों के पक्ष में होकर और सदैव उनकी भलाई ही के लिए कार्य करने का वायदा किया है, हमारी सबसे बुरी संभावना में भी। - डेनिस फिशर


जीवित परमेश्वर अपने बाचों के जीवन से भय निकालने में सक्षम है।

परन्तु वह जानता है, कि मैं कैसी चाल चला हूँ; और जब वह मुझे ता लेगा तब मैं सोने के समान निकलूंगा। - अय्युब २३:१०
बाइबल पाठ: अय्युब १:१-५,१३-२२
Job 1:1  ऊज़ देश में अय्यूब नाम एक पुरुष था; वह खरा और सीधा था और परमेश्वर का भय मानता और बुराई से परे रहता था।
Job 1:2  उसके सात बेटे और तीन बेटियां उत्पन्न हुई।
Job 1:3  फिर उसके सात हजार भेड़-बकरियां, तीन हजार ऊंट, पांच सौ जोड़ी बैल, और पांच सौ गदहियां, और बहुत ही दास-दासियां थीं; वरन उसके इतनी सम्पत्ति थी, कि पूरबियों में वह सब से बड़ा था।
Job 1:4  उसके बेटे उपने अपने दिन पर एक दूसरे के घर में खाने-पीने को जाया करते थे, और अपनी तीनों बहिनों को अपने संग खाने-पीने के लिये बुलवा भेजते थे।
Job 1:5  और जब जब जेवनार के दिन पूरे हो जाते, तब तब अय्यूब उन्हें बुलवाकर पवित्र करता, और बड़ी भोर उठकर उनकी गिनती के अनुसार होमबलि चढ़ाता था; क्योंकि अय्यूब सोचता था, कि कदाचित्‌ मेरे लड़कों ने पाप करके परमेश्वर को छोड़ दिया हो। इसी रीति अय्यूब सदैव किया करता था।
Job 1:13  एक दिन अय्यूब के बेटे-बेटियां बड़े भाई के घर में खाते और दाखमधु पी रहे थे;
Job 1:14  तब एक दूत अय्यूब के पास आकर कहने लगा, हम तो बैलों से हल जोत रहे थे, और गदहियां उनके पास चर रही थीं,
Job 1:15  कि शबा के लोग धावा करके उनको ले गए, और तलवार से तेरे सेवकों को मार डाला; और मैं ही अकेला बचकर तुझे समाचार देने को आया हूँ।
Job 1:16  वह अभी यह कह ही रहा था कि दूसरा भी आकर कहने लगा, कि परमेश्वर की आग आकाश से गिरी और उस से भेड़-बकरियां और सेवक जलकर भस्म हो गए; और मैं ही अकेला बचकर तुझे समाचार देने को आया हूँ।
Job 1:17  वह अभी यह कह ही रहा था, कि एक और भी आकर कहने लगा, कि कसदी लोग तीन गोल बान्धकर ऊंटों पर धावा करके उन्हें ले गए, और तलवार से तेरे सेवकों को मार डाला; और मैं ही अकेला बचकर तुझे समाचार देने को आया हूँ।
Job 1:18  वह अभी यह कह ही रहा था, कि एक और भी आकर कहने लगा, तेरे बेट-बेटियां बड़े भाई के घर में खाते और दाखमधु पीते थे,
Job 1:19  कि जंगल की ओर से बड़ी प्रचणड वायु चली, और घर के चारों कोनों को ऐसा झोंका मारा, कि वह जवानों पर गिर पड़ा और वे मर गए; और मैं ही अकेला बचकर तुझे समाचार देने को आया हूँ।
Job 1:20 तब अय्यूब उठा, और बागा फाड़, सिर मुंड़ाकर भूमि पर गिरा और दणडवत्‌ करके कहा,
Job 1:21  मैं अपनी मां के पेट से नंगा निकला और वहीं नंगा लौट जाऊंगा; यहोवा ने दिया और यहोवा ही ने लिया, यहोवा का नाम धन्य है।
Job 1:22  इन सब बातों में भी अय्यूब ने न तो पाप किया, और न परमेश्वर पर मूर्खता से दोष लगाया।
एक साल में बाइबल: 
  • यहोशू १६-१८ 
  • लूका २:१-२४

शुक्रवार, 23 मार्च 2012

पहचान गंध

   आप उसे देख नहीं सकते, छू नहीं सकते और ना ही सुन सकते हैं, परन्तु गंध प्रबल और प्रभावी होती है। कुछ फूलों, या इत्रों या किसी वस्तु की गंध तुरंत ही हम में भूतकाल की कुछ ऐसी यादें जगा देती है, कुछ ऐसे लोगों और स्थानों के स्मरण को ताज़ा कर देती है, जिन्हें हम अन्य किसी रीति से शायद स्मरण नहीं कर पाते।

   कुछ प्रसिद्ध लोगों के नाम पर कुछ सुगंधों के नाम रखे जाते हैं। प्रशंसक अपने प्रीय गायक या अभिनेत्री के नाम की सुगंध लगा कर अपनी पहचान उनके साथ बनाते हैं। बहुतेरी स्त्रियाँ किसी विशेष इत्र के प्रयोग के द्वारा अपनी याद लोगों में बैठाना चाहती हैं, उनका प्रयास होता है कि जब लोगों के पास वह सुगंध आए तो लोगों को उन ही की याद आने पाए। गंध के माध्यम से पहचान बनाना एक प्रभावी विधि है; किंतु यह विधि कोई नई बात नहीं है।

   गंध द्वारा पहचान बनाने की बात परमेश्वर ने आरंभ करी थी। परमेश्वर के वचन बाइबल में परमेश्वर ने इस्त्राएलियों के मध्य अपनी आराधना के स्थान पर एक विशेष रीति से तैयार करे गए सुगंधित द्रव्य के लगातार जलाए जाने के लिए कहा (निर्गमन ३०:३४-३५)। इस प्रकार का और इसी गंध का कोई अन्य द्रव्य बनाना लोगों के लिए वर्जित था (निर्गमन ३०:३७-३८), क्योंकि यह विशेष सुगंध लोगों के अन्दर परमेश्वर के स्मरण और उसकी आराधना की पहचान के लिए थी।

   आज संसार में भी एक ऐसी ही विशेष सुगंध के द्वारा परमेश्वर चाहता है कि संसार के लोग उसे पहचाने; एक गंध है जिसे उसने अपनी पहचान गंध बनाया है - उसके लोग, मसीही विश्वासी: "परन्‍तु परमेश्वर का धन्यवाद हो, जो मसीह में सदा हम को जय के उत्‍सव में लिये फिरता है, और अपने ज्ञान का सुगन्‍ध हमारे द्वारा हर जगह फैलाता है। क्‍योंकि हम परमेश्वर के निकट उद्धार पाने वालों, और नाश होने वालों, दोनो के लिये मसीह के सुगन्‍ध हैं" (२ कुरिन्थियों २:१४-१५)।

   यह तथ्य कि परमेश्वर इतनी प्रभावी रीति से अपनी पहचान हमारे साथ बनाता है, मेरे लिए वास्तव में एक नम्र कर देने वाला तथ्य है। यह मुझे बाध्य करता है कि मैं अपने आप को जांचूँ कि मेरे आस-पास के लोग मुझे और मेरे जीवन तथा व्यवहार को देखकर मेरे परमेश्वर के बारे में क्या सोचते हैं, उसके बारे में क्या धारणा बनाते हैं?

   हम मसीही विश्वासी ही संसार में अपने उद्धारकर्ता प्रभु यीशु की पहचान गंध हैं। ध्यान रखें कि यह गंध सुगंध ही रहे; हमारे जीवनों मे यह कभी भीनी ना हो, कभी लुप्त ना हो। - जूली ऐकैरमैन लिंक


परमेश्वर के लिए जीया गया जीवन एक मनभावनी सुगंध ही फैलाएगा।

परन्‍तु परमेश्वर का धन्यवाद हो, जो मसीह में सदा हम को जय के उत्‍सव में लिये फिरता है, और अपने ज्ञान का सुगन्‍ध हमारे द्वारा हर जगह फैलाता है। - २ कुरिन्थियों २:१४
बाइबल पाठ: २ कुरिन्थियों २:१४-१७
2Co 2:14  परन्‍तु परमेश्वर का धन्यवाद हो, जो मसीह में सदा हम को जय के उत्‍सव में लिये फिरता है, और अपने ज्ञान का सुगन्‍ध हमारे द्वारा हर जगह फैलाता है।
2Co 2:15  क्‍योंकि हम परमेश्वर के निकट उद्धार पाने वालों, और नाश होने वालों, दोनो के लिये मसीह के सुगन्‍ध हैं।
2Co 2:16  कितनो के लिये तो मरने के निमित्त मृन्यु की गन्‍ध, और कितनो के लिये जीवन के निमित्त जीवन की सुगन्‍ध, और इन बातों के योग्य कौन है?
2Co 2:17  क्‍योंकि हम उन बहुतों के समान नहीं, जो परमेश्वर के वचन में मिलावट करते हैं; परन्‍तु मन की सच्‍चाई से, और परमेश्वर की ओर से परमेश्वर को उपस्थित जान कर मसीह में बोलते हैं।
एक साल में बाइबल: 
  • यहोशू १३-१५ 
  • लूका १:५७-८०

गुरुवार, 22 मार्च 2012

प्रार्थना

   वॉशिंगटन पोस्ट के एक लेख में बताया गया कि एक लड़की ने एक महीने में अपने मोबाइल फोन द्वारा कुल मिलाकर ६४७३ संदेश भेजे और प्राप्त किए। अपने मित्रों से अपने इस लगातर संपर्क के बारे में उसने कहा कि अगर यह न हो तो वह जी नहीं सकती। शोधकर्ताओं का मानना है कि अमेरिका में मोबाइल फोन द्वारा किशोर युवक और युवतियाँ औसतन प्रति महीने २२०० संदेश भेजते या प्राप्त करते हैं।

   मेरे लिए यह लगातार चलने वाला संपर्क एक अद्भुत नमूना है उस वार्तालाप का जिसे मसीही विश्वासी परमेश्वर से प्रार्थना के रूप में जानते हैं और जिसमें उन्हें इसी प्रकार लगे रहने चाहिए। प्रेरित पौलुस ने अपने जीवन में दूसरों के लिए सदा प्रार्थना करते रहने का रवैया बना रखा था। उसने अपनी विभिन्न पत्रियों में लोगों को इसके बारे में बताया: "इसी लिये जिस दिन से यह सुना है, हम भी तुम्हारे लिये यह प्रा्र्थना करने और विनती करने से नहीं चूकते कि तुम सारे आत्मिक ज्ञान और समझ सहित परमेश्वर की इच्‍छा की पहिचान में परिपूर्ण हो जाओ" (कुलुस्सियों १:९); "और हर समय और हर प्रकार से आत्मा में प्रार्थना, और विनती करते रहो, और इसी लिये जागते रहो, कि सब पवित्र लोगों के लिये लगातार विनती किया करो" (इफिसियों ६:१८); "निरन्‍तर प्रार्थना मे लगे रहो" (१ थिस्सलुनिकीयों ५:१७)।

   मिशनरी फ्रैंक लौबैक ने, जिन लोगों से वह अपनी दिनचर्या में मिलते थे, उनके लिए अपनी लगातार प्रार्थना करते रहने की आदत के बारे में बताया। वे भी उन लोगों के लिए निरंतर परमेश्वर को संदेश भेजते या पाते रहते थे, एक प्रकार से वे परमेश्वर से लगातार संपर्क में बने रहते थे। लौबैक का मानना है कि प्रार्थना संसार में कार्यकारी सबसे सामर्थी शक्ति है, और वे कहते थे कि "मेरा कर्त्वय है कि मैं हर घड़ी परमेश्वर के साथ वार्तालाप में और उसकी इच्छानुसार कार्य करने की प्रतिक्रीया में लगा रहूँ।"

   जब हम मोबाइल फोन पर लगातर चलने वाले लोगों के एक दूसरे से संपर्क के बारे में पढ़ते और जानते हैं तो प्रेरित पौलुस द्वारा दिए गए आवाहन "निरन्‍तर प्रार्थना मे लगे रहो" का पालन करना असंभव नहीं हो सकता; आवश्यक्ता है इसके लिए हमारी इच्छा और सतत प्रयास की। - डेविड मैक्कैसलैंड


मसीही विश्वासी के लिए प्रार्थना करते रहना श्वास लेते रहने के समान ही स्वाभाविक होना चाहिए।

और हर समय और हर प्रकार से आत्मा में प्रार्थना, और विनती करते रहो, और इसी लिये जागते रहो, कि सब पवित्र लोगों के लिये लगातार विनती किया करो। - इफिसियों ६:१८

बाइबल पाठ: कुलुस्सियों १:२-१४
Col 1:3  हम तुम्हारे लिये नित प्रार्थना करके अपने प्रभु यीशु मसीह के पिता अर्थात परमेश्वर का धन्यवाद करते हैं।
Col 1:4 क्‍योंकि हम ने सुना है, कि मसीह यीशु पर तुम्हारा विश्वास है, और सब पवित्र लोगों से प्रेम रखते हो।
Col 1:5 उस आशा की हुई वस्‍तु के कारण जो तुम्हारे लिये स्‍वर्ग में रखी हुई है, जिस का वर्णन तुम उस सुसमाचार के सत्य वचन में सुन चुके हो।
Col 1:6 जो तुम्हारे पास पहुंचा है और जैसा जगत में भी फल लाता, और बढ़ता जाता है; अर्थात जिस दिन से तुम ने उस को सुना, और सच्‍चाई से परमेश्वर का अनुग्रह पहिचाना है, तुम में भी ऐसा ही करता है।
Col 1:7  उसी की शि्क्षा तुम ने हमारे प्रिय सहकर्मी इपफ्रास से पाई, जो हमारे लिये मसीह का विश्वासयोग्य सेवक है।
Col 1:8  उसी ने तुम्हारे प्रेम को जो आत्मा में है हम पर प्रगट किया।
Col 1:9  इसी लिये जिस दिन से यह सुना है, हम भी तुम्हारे लिये यह प्रार्यना करने और विनती करने से नहीं चूकते कि तुम सारे आत्मिक ज्ञान और समझ सहित परमेश्वर की इच्‍छा की पहिचान में परिपूर्ण हो जाओ।
Col 1:10  ताकि तुम्हारा चाल-चलन प्रभु के योग्य हो, और वह सब प्रकार से प्रसन्न हो, और तुम में हर प्रकार के भले कामों का फल लगे, और परमेश्वर की पहिचान में बढ़ते जाओ।
Col 1:11 और उस की महिमा की शक्ति के अनुसार सब प्रकार की सामर्थ से बलवन्‍त होते जाओ, यहां तक कि आनन्‍द के साथ हर प्रकार से धीरज और सहनशीलता दिखा सको।
Col 1:12  और पिता का धन्यवाद करते रहो, जिस ने हमें इस योग्य बनाया कि ज्योति में पवित्र लोगों के साथ मीरास में समभागी हों।
Col 1:13 उसी ने हमें अन्‍धकार के वश से छुड़ाकर अपने प्रिय पुत्र के राज्य में प्रवेश कराया।
Col 1:14 जिस से हमें छुटकारा अर्थात पापों की क्षमा प्राप्‍त होती है।
एक साल में बाइबल: 
  • यहोशू १०-१२ 
  • लूका १:३९-५६

बुधवार, 21 मार्च 2012

निर्मल शिक्षा

   कुछ समय पहले संसार को मालुम पड़ा कि चीन के कुछ दूध उत्पादक दूध में मेलामीन नामक पदार्थ से मिलावट कर रहे थे क्योंकि इस पदार्थ के होने से जांचने के समय दूध में, शरीर की बढ़ोतरी के लिए आवश्यक, प्रोटीन की मात्रा अधिक आंकी जाती थी। किंतु मिलावट वाले उस दूध में यह अधिक प्रोटीन होना भ्रामिक था वास्तविक नहीं, हानिकारक था लाभकारी नहीं। थोड़े समय में बहुत से बच्चे मर गए या गंभीर रूप से बीमार पड़ गए, ऐसी लाइलाज बीमारियों द्वारा जिनका प्रभाव सारी उम्र उनपर रहेगा। इस प्रकार का मिलावट का कार्य को नया नहीं है, कई अन्य देशों मे भी, इसी उद्देश्य से, जानवरों के चारे में मेलामीन पिछले लगभग ४० वर्षों से मिलाया जा रहा है, और इसके प्रभाव भी यही रहे हैं - बीमार अथवा मरे हुए जानवर। परमेश्वर द्वारा दी गई शुद्ध चीज़ों में मनुष्य द्वारा अपनी अक्ल से करी गई मिलावट सदैव ही मनुष्यों की हानि का कारण रही है, चाहे वह शारीरिक बातों में हो या आत्मिक।

   प्रेरित पतरस ने परमेश्वर के वचन को उस शुद्ध निर्मल दूध के समान बताया (१ पतरस २:२) जिसका नियमित प्रयोग आत्मिक शिशुओं की बढ़ोतरी के लिए अनिवार्य है। निर्मल का तात्पर्य है जिसमें कोई मलिनता, किसी दूषित पदार्थ की कोई मिलावट ना हो। आरंभिक मण्डली की स्थापना के साथ ही परमेश्वर के बैरियों और शैतान के लोगों द्वारा परमेश्वर की निर्मल और लाभकारी शिक्षाओं में मिलावट का कार्य आरंभ हो गया था, जो आज भी ज़ारी है। सबसे अधिक प्रयास किया जाता रहा है पश्चाताप द्वारा सेंतमेंत उद्धार की मूल शिक्षा को विधि-विधानों के पालन और भले कर्मों की अनिवार्यता द्वारा दूषित करने का।

   आरंभिक मण्डली में लोग प्रभु यीशु मसीह के क्रूस पर बलिदान और मृतकों में से पुनरुत्थान के साथ यहूदी धर्म के अनुसार खतना कराने को भी उद्धार के लिए आवश्यक कहने लगे थे (प्रेरितों १५:१)। तब प्रभु यीशु के अनुयायी और मित्र प्रेरित पतरस ने इस धारणा की भर्त्सना और खण्डन करते हुए केवल प्रभु यीशु के अनुग्रह ही को उद्धार के लिए आवश्यक बताते हुए कहा: "तो अब तुम क्‍यों परमेश्वर की परीक्षा करते हो कि चेलों की गरदन पर ऐसा जूआ रखो, जिसे न हमारे बापदादे उठा सके थे और न हम उठा सकते। हां, हमारा यह तो निश्‍चय है, कि जिस रीति से वे प्रभु यीशु के अनुग्रह से उद्धार पाएंगे उसी रीति से हम भी पाएंगे" (प्रेरितों १५:१०, ११)।

   प्रेरित पौलुस ने भी गलतिया के विश्वासियों को लिखी अपनी पत्री में उनके प्रभु यीशु के अनुग्रह से हटने के संबंध में लिखा: "मुझे आश्‍चर्य होता है, कि जिस ने तुम्हें मसीह के अनुग्रह से बुलाया उस से तुम इतनी जल्दी फिर कर और ही प्रकार के सुसमाचार की ओर झुकने लगे। परन्‍तु वह दूसरा सुसमाचार है ही नहीं: पर बात यह है, कि कितने ऐसे हैं, जो तुम्हें घबरा देते, और मसीह के सुसमाचार को बिगाड़ना चाहते हैं। परन्‍तु यदि हम या स्‍वर्ग से कोई दूत भी उस सुसमाचार को छोड़ जो हम ने तुम को सुनाया है, कोई और सुसमाचार तुम्हें सुनाए, तो श्रापित हो। जैसा हम पहिले कह चुके हैं, वैसा ही मैं अब फिर कहता हूं, कि उस सुसमाचार को छोड़ जिसे तुम ने ग्रहण किया है, यदि कोई और सुसमाचार सुनाता है, तो श्रापित हो। अब मैं क्‍या मनुष्यों को मानता हूं या परमेश्वर को? क्‍या मैं मनुष्यों को प्रसन्न करना चाहता हूं?" (गलतियों १:६-९)।

   सावधान रहिए; यदि कोई भी शिक्षा परमेश्वर के वचन बाइबल में दी गई परमेश्वर की शिक्षाओं से भिन्न हो, या बाइबल में दी गई शिक्षाओं में कुछ जोड़ती या घटाती हो तो वह परमेश्वर की ओर से नहीं है; वह तो परमेश्वर के निर्मल आत्मिक दूध में घातक मिलावट है। हो सकता है कि मनुष्यों और संसार के पैमाने पर उसमें आपको "भली बातों" की मात्रा अधिक प्रतीत पड़े, परन्तु अन्ततः उन मिलावटी बातों का प्रभाव हानिकारक और विनाषकारी ही होगा।

   "इसलिये सब प्रकार का बैरभाव और छल और कपट और डाह और बदनामी को दूर करके। नये जन्में हुए बच्‍चों की नाईं निर्मल आत्मिक दूध की लालसा करो, ताकि उसके द्वारा उद्धार पाने के लिये बढ़ते जाओ" (१ पतरस २:१, २)। - सी.पी. हिया


परमेश्वर का वचन संपूर्ण है; उसमें किसी बात के जोड़े जाने या घटाए जाने की कोई आवश्यक्ता नहीं है।
नये जन्में हुए बच्‍चों की नाईं निर्मल आत्मिक दूध की लालसा करो, ताकि उसके द्वारा उद्धार पाने के लिये बढ़ते जाओ। - १ पतरस २:२
बाइबल पाठ: प्रेरितों १५:१-११
Act 15:1  फिर कितने लोग यहूदिया से आकर भाइयों को सिखाने लगे कि यदि मूसा की रीति पर तुम्हारा खतना न हो तो तुम उद्धार नहीं पा सकते।
Act 15:2  जब पौलुस और बरनबास का उन से बहुत झगड़ा और वाद-विवाद हुआ तो यह ठहराया गया, कि पौलुस और बरनबास, और हम में से कितने और व्यक्ति इस बात के विषय में यरूशलेम को प्रेरितों और प्राचीनों के पास जांए।
Act 15:3  सो मण्‍डली ने उन्‍हें कुछ दूर तक पहुंचाया; और वे फीनीके ओर सामरिया से होते हुए अन्यजातियों को मन फेरने का समाचार सुनाते गए, और सब भाइयों को बहुत आनन्‍दित किया।
Act 15:4  जब यरूशलेम में पहुंचे, तो कलीसिया और प्रेरित और प्राचीन उन से आनन्‍द के साथ मिले, और उन्‍होंने बताया कि परमेश्वर ने उन के साथ होकर कैसे कैसे काम किए थे।
Act 15:5  परन्‍तु फरीसियों के पंथ में से जिन्‍होंने विश्वास किया था, उन में से कितनों ने उठ कर कहा, कि उन्‍हें खतना कराना और मूसा की व्यवस्था को मानने की आज्ञा देना चाहिए।
Act 15:6   तब प्रेरित और प्राचीन इस बात के विषय में विचार करने के लिये इकट्ठे हुए।
Act 15:7  तब पतरस ने बहुत वाद-विवाद के बाद खड़े होकर उन से कहा; हे भाइयो, तुम जानते हो, कि बहुत दिन हुए, कि परमेश्वर ने तुम में से मुझे चुन लिया, कि मेरे मुंह से अन्यजाति सुसमाचार का वचन सुनकर विश्वास करें।
Act 15:8  और मन के जांचने वाले परमेश्वर ने उन को भी हमारी नाई पवित्र आत्मा देकर उन की गवाही दी।
Act 15:9  और विश्वास के द्वारा उन के मन शुद्ध करके हम में और उन में कुछ भेद न रखा।
Act 15:10  तो अब तुम क्‍यों परमेश्वर की परीक्षा करते हो कि चेलों की गरदन पर ऐसा जूआ रखो, जिसे न हमारे बापदादे उठा सके थे और न हम उठा सकते।
Act 15:11  हां, हमारा यह तो निश्‍चय है, कि जिस रीति से वे प्रभु यीशु के अनुग्रह से उद्धार पाएंगे, उसी रीति से हम भी पाएंगे।
एक साल में बाइबल: 
  • यहोशू ७-९ 
  • लूका १:२१-३८

मंगलवार, 20 मार्च 2012

विवाह

   विवाह परमेश्वर की ओर से दिया गया वह संस्थान है जो एक महान मिलन पर आधारित है। यह पवित्र और गंभीर है, स्त्री तथा पुरुष को एक अद्भुत एकता में बांधता है और मानव जाति की बढ़ोतरी, समाज की उन्नति तथा समाज में नैतिक मूल्यों के बने रहने का आधार है। समस्त संसार का इतिहास गवाह है कि जहाँ कहीं विवाह के पवित्र और गंभीर संबंध की अवहेलना करी गई है और इसे हल्के या छिछोरे रूप में लिया गया है, उस परिवार और समाज में गिरावट ही आई है और उस सभ्यता का पतन ही हुआ है। परमेश्वर इस संबंध की गरिमा को कितनी गंभीरता से लेता है, तथा इसकी पवित्रता को कितना बहुमूल्य आंकता है, इस बात का अंदाज़ा हम इसी से लगा सकते हैं कि परमेश्वर ने अपने और अपनी प्रजा के संबंध तथा प्रभु यीशु मसीह और उसकी मण्डली के आपसी संबंध को स्त्री-पुरुष के विवाह के संबंध द्वारा समझाया: "क्योकि तेरा कर्त्ता तेरा पति है, उसका नाम सेनाओं का यहोवा है; और इस्राएल का पवित्र तेरा छुड़ाने वाला है, वह सारी पृथ्वी का भी परमेश्वर कहलाएगा" (यशायाह ५४:५); " हे पतियों, अपनी अपनी पत्‍नी से प्रेम रखो, जैसा मसीह ने भी कलीसिया से प्रेम करके अपने आप को उसके लिये दे दिया" (इफिसियों ५:२५)।

   परमेश्वर का वचन बाइबल हमें इस पवित्र संबंध और इससे जुड़ी परमेश्वर की मनशा के बारे में बहुत कुछ बताती है; उदाहरणस्वरूप:
  •    विवाह दो भिन्न परिवारों से लेकर एक नए परिवार की स्थापना है: "इस कारण मनुष्य माता पिता को छोड़कर अपनी पत्‍नी से मिला रहेगा, और वे दोनों एक तन होंगे" (इफिसियों ५:३१)।
  •    विवाह परमेश्वर द्वारा दी गई शरीर की इच्छा की पूर्ति की पवित्र एवं लाभकारी विधि है: "परन्‍तु व्यभिचार के डर से हर एक पुरूष की पत्‍नी, और हर एक स्त्री का पति हो; तुम एक दूसरे से अलग न रहो, परन्‍तु केवल कुछ समय तक आपस की सम्मति से कि प्रार्थना के लिये अवकाश मिले, और फिर एक साथ रहो, ऐसा न हो, कि तुम्हारे असंयम के कारण शैतान तुम्हें परखे" (१ कुरिन्थियों ७:२, ५)।
  •    विवाह द्वारा एक परस्पर सहायक जोड़ी बनती है "भली पत्नी कौन पा सकता है? क्योंकि उसका मूल्य मूंगों से भी बहुत अधिक है। उसके पति के मन में उसके प्रति विश्वास है।.... वह अपने जीवन के सारे दिनों में उस से बुरा नहीं, वरन भला ही व्यवहार करती है" (नीतिवचन ३१:१०, १२)।
   
विवाह परमेश्वर द्वार दी गई विधि है जिसमें एक स्त्री और एक पुरुष एक साथ लाए जाकर एक ऐसे संबंध में जोड़े जाते हैं जिससे परमेश्वर का आदर और समाज की सहायता तथा उन्नति होती है। परमेश्वर की इच्छानुसार किया गया विवाह परमेश्वर की महिमा के लिए दो व्यक्तियों को जोड़ता है और उसी की महिमा के लिए एक नया परिवार बनाता है।

   अपने जीवन और समाज में विवाह कि पवित्रता और गरिमा को कभी कम ना होने दें। - डेव ब्रैनन

परमेश्वर ने पति और पत्नी को एक दुसरे के पूरक होने के लिए बनाया है।
 
इस कारण मनुष्य माता पिता को छोड़कर अपनी पत्‍नी से मिला रहेगा, और वे दोनों एक तन होंगे। - इफिसियों ५:३१
 
बाइबल पाठ: इफिसियों ५:२१-३३
Eph 5:21  और मसीह के भय से एक दूसरे के आधीन रहो।
Eph 5:22  हे पत्‍नियों, अपने अपने पति के ऐसे अधीन रहो, जैसे प्रभु के।
Eph 5:23  क्‍योंकि पति पत्‍नी का सिर है जैसे कि मसीह कलीसिया का सिर है; और आप ही देह का उद्धारकर्ता है।
Eph 5:24  पर जैसे कलीसिया मसीह के आधीन है, वैसे ही पत्‍नियां भी हर बात में अपने अपने पति के आधीन रहें।
Eph 5:25  हे पतियों, अपनी अपनी पत्‍नी से प्रेम रखो, जैसा मसीह ने भी कलीसिया से प्रेम करके अपने आप को उसके लिये दे दिया।
Eph 5:26  कि उस को वचन के द्वारा जल के स्‍नान से शुद्ध करके पवित्र बनाए।
Eph 5:27  और उसे एक ऐसी तेजस्‍वी कलीसिया बनाकर अपने पास खड़ी करे, जिस में न कलंक, न झुर्री, न कोई ऐसी वस्‍तु हो, वरन पवित्र और निर्दोष हो।
Eph 5:28  इसी प्रकार उचित है, कि पति अपनी अपनी पत्नी से अपनी देह के समान प्रेम रखे, जो अपनी पत्‍नी से प्रेम रखता है, वह अपने आप से प्रेम रखता है।
Eph 5:29  क्‍योंकि किसी ने कभी अपने शरीर से बैर नहीं रखा वरन उसका पालन-पोषण करता है, जैसा मसीह भी कलीसिया के साथ करता है;
Eph 5:30   इसलिये कि हम उस की देह के अंग हैं।
Eph 5:31  इस कारण मनुष्य माता पिता को छोड़कर अपनी पत्‍नी से मिला रहेगा, और वे दोनों एक तन होंगे।
Eph 5:32   यह भेद तो बड़ा है, पर मैं मसीह और कलीसिया के विषय में कहता हूं।
Eph 5:33  पर तुम में से हर एक अपनी पत्‍नी से अपने समान प्रेम रखे, और पत्‍नी भी अपने पति का भय माने।
 
एक साल में बाइबल: 
  • यहोशू ४-६ 
  • लूका १:१-२०

सोमवार, 19 मार्च 2012

वास्तविक सौन्दर्य

   मैं जब भी किराने की दुकान से सामान खरीदने जाता हूँ तो पैसे चुकाने के स्थान के साथ रखी हुई पत्रिकाओं के मंच पर लगाई गई पत्रिकाओं के मुख-चित्रों तथा शीर्षकों पर नज़र डालता हूँ। मैंने देखा है कि वे पत्रिकाएं या तो भोजन, शरीर को स्वस्थ और दुरुस्त रखने, शरीर और चेहरे को सुन्दर बनाने, शारीरिक व्यायाम के बारे में होती हैं या आर्थिक विष्यों पर अन्यथा विलास और वासना से संबंधित होती हैं। आत्मिक बातों के लिए कुछ नहीं मिलता।

   यह एक बड़ी समस्या है; लोगों का ध्यान अपने शरीर और उसकी लालसाओं पर इतना अधिक केंद्रित हो गया है कि वे उस से संबंधित सब कुछ पढ़ने मानने को तैयार रहते हैं, चाहे झूठ या मनगढ़ंत, कुछ भी हो। इसी कारण ऐसी पत्रिकाओं की बिकरी है और इन्हें छापने वाले लोगों के पास, दूसरों के अन्ध विश्वास के कारण, धन का कमाने का साधन है। अपने शरीर पर केंद्रित रहने के कारण लोग अपनी तुलना दूसरों से करते हैं, उनके समान दिखने के प्रयास करते हैं और फिर अपने ही जीवन में व्यर्थ बेचैनीयों और निराशाओं का सामना करते हैं।

   कुछ वर्ष पहले मेरे एक मित्र ने एक किशोर युवती के साथ हुई उसकी वार्तालाप के बारे में बताया। मेरे मित्र ने उस किशोरी से कहा, "आप बड़ी आत्मविश्वास से भरी लगती हैं; इसका क्या कारण है?" किशोरी ने उत्तर दिया; "हाँ मैं आत्मविश्वास से भरी हूँ क्योंकि मैं सुडौल और सुन्दर हूँ।" मेरे मित्र ने विलक्षण बुद्धिमता के साथ उसे उत्तर दिया, "क्षमा कीजिए, मुझे यह सुनकर दुख हुआ।" इस बात को सुनकर उस किशोरी ने विसमय से मेरे मित्र से पूछा, "ऐसा क्यों?" मेरे मित्र ने उत्तर दिया, "क्योंकि ऐसा नहीं है कि सदा ही आप ऐसी सुडौल और सुन्दर बनी रहेंगी। कभी भी कुछ भी हो सकता है; जब सुडौल और सुन्दर नहीं रहेंगी तब आपका क्या होगा?"

   परमेश्वर के वचन बाइबल में नीतिवचन की पुस्तक में बताया गया है कि आकर्षक होना मिथिया है और सुन्दरता क्षणिक है (नीतिवचन ३१:३०)। शारीरिक सुन्दरता के जाते रहने में कोई विशेष समय नहीं लगता; कोई उसे बनाए रखने के कितने भी प्रयास क्यों न कर ले, शारीरिक सुन्दरता कभी न कभी समाप्त होती ही है। लेकिन एक और सुन्दरता है जो समय के साथ निखरती जाती है - आत्मा की सुन्दरता; जो ना कभी धूमिल होती है और ना ही कभी समाप्त होती है।

   यही वह वास्तविक सौन्दर्य है जो सदा बना रहता है; क्योंकि यह विश्वास और पश्चाताप द्वारा तथा परमेश्वर के भय में बने रहने वालों को प्रभु यीशु से प्राप्त होता है और अनादि अनन्त परमेश्वर के समान, उन लोगों में अनन्त काल के लिए बना रहता है।

   क्षणिक और मिट जाने वाली शरीरिक सुन्दरता की चिंता छोड़ कर अनन्तकाल तक बनी रहने वाली आत्मिक सुन्दरता को प्रभु यीशु से प्राप्त कर लीजिए। - डेविड रोपर


मन की धार्मिकता चरित्र में सुन्दरता उत्पन्न करती है।

शोभा तो झूठी और सुन्दरता व्यर्थ है, परन्तु जो स्त्री यहोवा का भय मानती है, उसकी प्रशंसा की जाएगी।

बाइबल पाठ: नीतिवचन ३१:२१-३१
Pro 31:21  वह अपने घराने के लिये हिम से नहीं डरती, क्योंकि उसके घर के सब लोग लाल कपड़े पहिनते हैं।
Pro 31:22  वह तकिये बना लेती है, उसके वस्त्र सूक्ष्म सन और बैंजनी रंग के होते हैं।
Pro 31:23  जब उसका पति सभा में देश के पुरनियों के संग बैठता है, तब उसका सम्मान होता है।
Pro 31:24  वह सन के वस्त्र बनाकर बेचती है, और व्योपारी को कमरबन्द देती है।
Pro 31:25  वह बल और प्रताप का पहिरावा पहिने रहती है, और आने वाले काल के विषय पर हंसती है।
Pro 31:26  वह बुद्धि की बात बोलती है, और उसके वचन कृपा की शिक्षा के अनुसार होते हैं।
Pro 31:27  वह अपने घराने के चालचलन को ध्यान से देखती है, और अपनी रोटी बिना परिश्रम नहीं खाती।
Pro 31:28  उसके पुत्र उठ उठकर उसको धन्य कहते हैं, उनका पति भी उठकर उसकी ऐसी प्रशंसा करता है:
Pro 31:29  बहुत सी स्त्रियों ने अच्छे अच्छे काम तो किए हैं परन्तु तू उन सभों में श्रेष्ट है।
Pro 31:30  शोभा तो झूठी और सुन्दरता व्यर्थ है, परन्तु जो स्त्री यहोवा का भय मानती है, उसकी प्रशंसा की जाएगी।
Pro 31:31  उसके हाथों के परिश्रम का फल उसे दो, और उसके कार्यों से सभा में उसकी प्रशंसा होगी।


एक साल में बाइबल: 

  • यहोशू १-३ 
  • मरकुस १६

रविवार, 18 मार्च 2012

आप कौन हैं?

   यदि कोई आपसे पुछे कि "आप कौन हैं?", तो मेरा अंदाज़ा है कि आप अपने बारे में कुछ शब्द कहकर बताएंगे कि आप क्या कार्य करते हैं, जैसे कि "मैं एक नर्स हूँ" या "मैं बिजली मकैनिक हुँ" आदि। लेकिन वास्तव में यह तो वह है जो आप करते हैं, ना कि वह जो आप हैं! ज़रा सोचिए, जब आप वह करना छोड़ देंगे जो आप कर रहे हैं तो आप क्या होंगे? क्या आपका व्यवसाय आपकी पहचान बदलाता रहेगा? क्या व्यवसाय ना होने पर आपकी पहचान भी नहीं रहेगी?

   एक मसीही विश्वासी के लिए उसकी पहचान प्रभु यीशु के साथ उसके संबंध से है; और यही संबंध उसके व्यवहार को तय करता है। उदाहरण के लिए परमेश्वर के वचन बाइबल के एक चरित्र मत्ती को लीजिए। मत्ती, प्रभु यीशु के समय में, रोमी राज्य में एक रोमी कर्मचारी था और रोमी शासकों के लिए, अपने लोगों - यहूदियों से, कर वसूल करता था। उसके इस व्यवसाय ने उसे लालची और स्वार्थी बना रखा था और इस कारण वह अपने ही लोगों में तुच्छ समझा जाता था। लेकिन जिस दिन प्रभु यीशु उसके जीवन में आया, उसके लिए सब कुछ बदल गया। अब उसका व्यवहार भिन्न था, उसकी प्राथमिकताएं भिन्न थीं, उसका लालच जाता रहा, समाज में उसकी एक नई पहचान हो गई - प्रभु यीशु का अनुयायी। मत्ती ही ऐसा अकेला व्यक्ति नहीं था। परमेश्वर के वचन बाइबल में मत्ती रचित सुसमाचार में हम चार अन्य व्यक्तियों - पतरस, अन्द्रियास, याकूब और यूहन्ना के विष्य में भी पढ़ते हैं जो मछुआरे थे और सब कुछ छोड़कर प्रभु यीशु के पीछे हो लिए, और उनके जीवन बिलकुल बदल गए, प्रभु यीशु के अनुयायी के रूप में उनकी भी नई पहचान हो गई। तब से लेकर आज तक यह नई पहचान और नए व्यवहार का सिलसिला जारी है, हर उस व्यक्ति के लिए जो प्रभु यीशु पर विश्वास लाता है और अपने आप को उसे समर्पित कर देता है।

   प्रभु यीशु का व्यक्तित्व बाध्य कर देने वाला व्यक्तित्व है; प्रभु आज भी अनुयायीयों की खोज में है। जो उसके निमंत्रण को स्वीकार कर लेते हैं, स्वेच्छा से उसके पीछे चलने की ठान लेते हैं, वह उनके जीवन को एक नई पहचान, एक नया आयाम दे देता है। अब वे "प्रभु यीशु के अनुयायी" के रूप में जाने जाते हैं। इस नई पहचान के लिए किसी को अपना व्यवसाय बदलने की आवश्यक्ता नहीं है, वरन अनुयायी बनने के बाद उस व्यवसाय को करने की उनकी विधि में स्वतः ही परिवर्तन आने लग जाते हैं; क्योंकि अब वे लोग वही कार्य अपने प्रभु और उद्धारकर्ता यीशु के नाम और महिमा के लिए करने लगते हैं। अब उनके जीवन की प्राथमिकता अपने प्रभु और उद्धारकर्ता की आज्ञाकारिता में बने रहना और उसे ही महिमा देते रहना हो जाता है।

   यदि अगली बार कोई आपसे पूछे कि "आप कौन हैं?" तो क्या आप कहेंगे कि "मैं प्रभु यीशु का अनुयायी हूँ" ? - जो स्टोवेल


यदि आप प्रभु यीशु के अनुयायी हैं तो जीवन में आपको और किसी पहचान की कोई आवश्यक्ता नहीं है।

और [यीशु ने] उन से कहा, मेरे पीछे चले आओ, तो मैं तुम को मनुष्यों के पकड़ने वाले बनाऊंगा। - मत्ती ४:१९


बाइबल पाठ: मत्ती ४:१७-२५


Mat 4:17  उस समय से यीशु ने प्रचार करना और यह कहना आरम्भ किया, कि मन फिराओ क्‍योंकि स्‍वर्ग का राज्य निकट आया है।
Mat 4:18  उस ने गलील की झील के किनारे फिरते हुए दो भाइयों अर्थात शमौन को जो पतरस कहलाता है, और उसके भाई अन्‍द्रियास को झील में जाल डालते देखा, क्‍योंकि वे मछवे थे।
Mat 4:19   और उन से कहा, मेरे पीछे चले आओ, तो मैं तुम को मनुष्यों के पकड़ने वाले बनाऊंगा।
Mat 4:20  वे तुरन्‍त जालों को छोड़कर उसके पीछे हो लिए।
Mat 4:21  और वहां से आगे बढ़कर, उस ने और दो भाइयों अर्थात जब्‍दी के पुत्र याकूब और उसके भाई यूहन्ना को अपने पिता जब्‍दी के साथ नाव पर अपने जालों को सुधारते देखा, और उन्‍हें भी बुलाया
Mat 4:22  वे तुरन्‍त नाव और अपने पिता को छोड़कर उसके पीछे हो लिए।
Mat 4:23   और यीशु सारे गलील में फिरता हुआ उन की सभाओं में उपदेश करता और राज्य का सुसमाचार प्रचार करता, और लोगों की हर प्रकार की बीमारी और र्दुबलता को दूर करता रहा।
Mat 4:24  और सारे सूरिया में उसका यश फैल गया; और लोग सब बीमारों को, जो नाना प्रकार की बीमारियों और दुखों में जकड़े हुए थे, और जिन में दुष्‍टात्क़ाएं थीं और मिर्गी वालों और झोले के मारे हुओं को उसके पास लाए और उस ने उन्‍हें चंगा किया।
Mat 4:25  और गलील और दिकापुलिस और यरूशलेम और यहूदिया से और यरदन के पार से भीड़ की भीड़ उसके पीछे हो ली।


एक साल में बाइबल: 

  • व्यवस्थाविवरण ३२-३४ 
  • मरकुस १५:२६-४७