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मंगलवार, 27 मार्च 2012

परमेश्वर के प्रति प्रेम

   अपने वैवाहिक जीवन के आरंभिक समय में ही मैंने जान लिया था कि मेरी पत्नि के हृदय तक पहुँचने का सबसे अच्छा मार्ग कौन सा है। दिन भर के कार्य के बाद एक रात मैं एक दर्जन लाल गुलाबों का गुलदस्ता लिए हुए घर पहुँचा, द्वार खोलने की घंटी बजाने के बाद मैंने गुलदस्ता अपनी पीठ के पीछे छुपा लिया, और फिर अन्दर आकर वह गुलदस्ता अपनी पत्नि के हाथों में रख दिया। उसने वे फूल लिए, उन्हें सूंघा, मुझे धन्यवाद दिया और उन्हें लेकर रसोई में चली गई। उसकी प्रतिक्रिया मेरी उम्मीद से कम थी, उसके व्यवहार में मुझे किसी बात की घटी खली।

   यह मेरे लिए एक पाठ था कि मेरी पत्नि के लिए फूलों का गुलदस्ता प्रेम प्रकट करने का प्रभावी माध्यम नहीं था। उसने मेरी भेंट की प्रशंसा करी, उसके लिए धन्यवाद भी किया किंतु मन ही मन वह उनकी कीमत और घर चलाने के खर्च में उससे पड़ने वाले प्रभाव के बारे में सोच रही थी; क्योंकि विद्यार्थी एवं नव-दम्पति होना खर्च पर पाबंदियां तो लगाता ही है। फिर जैसे मैं ने सीखा, मेरी पत्नि के लिए मेरा उसको दिया गया समय और उसका रखा गया ध्यान बहुत अधिक महत्व रखता था। जब भी मैं उसके साथ होते हुए अपना ध्यान किसी अन्य बात में बंटाए बिना उसकी ओर लगाए रखता हूँ, तो इतना ही उसे अपने आप को मेरे प्रेम का पात्र होने के जताने के लिए काफी है।

   क्या कभी आपने इस पर विचार किया कि परमेश्वर क्या चाहता है कि हम उसके प्रति अपने प्रेम की अभिव्यक्ति कैसे करें? इस संबंध में हमें एक इशारा १ यूहन्ना ४:२१ में मिलता है: "...जो कोई अपने परमेश्वर से प्रेम रखता है, वह अपने भाई से भी प्रेम रखे।" कैसी साधारण सी बात है, जब हम मसीह यीशु में अपने भाई-बहिनों के प्रति प्रेम रखते हैं, तो यही इस बात को भी दिखाता है कि हम परमेश्वर से भी प्रेम रखते हैं। जब हमारा आपसी प्रेम ऊपरी दिखावा नहीं वरन वास्तविक होता है तो यह हमारे परमेश्वर पिता को भी प्रसन्न करता है।

   इसलिए सच्चे मन से आपस में अपने प्रेम को अभिव्यक्त करने के अवसरों की तलाश में रहें; यह अभिव्यक्ति परमेश्वेर के प्रति आपके प्रेम की भी अभिव्यक्ति होगी। - जो स्टोवेल


परमेश्वर के प्रति अपने प्रेम को दिखाने के लिए, आपस में प्रेम बाँटते रहें।
हे प्रियों, जब परमेश्वर ने हम से ऐसा प्रेम किया, तो हम को भी आपस में प्रेम रखना चाहिए। - १ यूहन्ना ४:११
 
बाइबल पाठ: १ यूहन्ना ४:७-२१
1Jn 4:7  हे प्रियों, हम आपस में प्रेम रखें; क्‍योंकि प्रेम परमेश्वर से है: और जो कोई प्रेम करता है, वह परमेश्वर से जन्मा है, और परमेश्वर को जानता है।
1Jn 4:8  जो प्रेम नहीं रखता, वह परमेश्वर को नहीं जानता है, क्‍योंकि परमेश्वर प्रेम है।
1Jn 4:9   जो प्रेम परमेश्वर हम से रखता है, वह इस से प्रगट हुआ, कि परमेश्वर ने अपने एकलौते पुत्र को जगत में भेजा है, कि हम उसके द्वारा जीवन पाएं।
1Jn 4:10 प्रेम इस में नहीं कि हम ने परमेश्वर ने प्रेम किया, पर इस में है, कि उस ने हम से प्रेम किया; और हमारे पापों के प्रायश्‍चित्त के लिये अपने पुत्र को भेजा।
1Jn 4:11  हे प्रियों, जब परमेश्वर ने हम से ऐसा प्रेम किया, तो हम को भी आपस में प्रेम रखना चाहिए।
1Jn 4:12  परमेश्वर को कभी किसी ने नहीं देखा, यदि हम आपस में प्रेम रखें, तो परमेश्वर हम में बना रहता है, और उसका प्रेम हम में सिद्ध हो गया है।
1Jn 4:13 इसी से हम जानते हैं, कि हम उस में बने रहते हैं, और वह हम में; क्‍योंकि उस ने अपने आत्मा में से हमें दिया है।
1Jn 4:14  और हम ने देख भी लिया और गवाही देते हैं, कि पिता ने पुत्र को जगत का उद्धारकर्ता करके भेजा है।
1Jn 4:15  जो कोई यह मान लेता है, कि यीशु परमेश्वर का पुत्र है: परमेश्वर उस में बना रहता है, और वह परमेश्वर में।
1Jn 4:16  और जो प्रेम परमेश्वर हम से रखता है, उस को हम जान गए, और हमें उस की प्रतीति है; परमेश्वर प्रेम है: और जो प्रेम में बना रहता है, वह परमेश्वर में बना रहता है; और परमेश्वर उस में बना रहता है।
1Jn 4:17 इसी से प्रेम हम में सिद्ध हुआ, कि हमें न्याय के दिन हियाव हो; क्‍योंकि जैसा वह है, वैसे ही संसार में हम भी हैं।
1Jn 4:18 प्रेम में भय नहीं होता, वरन सिद्ध प्रेम भय को दूर कर देता है, क्‍योंकि भय से कष्‍ट होता है, और जो भय करता है, वह प्रेम में सिद्ध नहीं हुआ।
1Jn 4:19  हम इसलिये प्रेम करते हैं, कि पहिले उस ने हम से प्रेम किया।
1Jn 4:20 यदि कोई कहे, कि मैं परमेश्वर से प्रेम रखता हूं, और अपने भाई से बैर रखे, तो वह झूठा है: क्‍योंकि जो अपने भाई से, जिसे उस ने देखा है, प्रेम नहीं रखता, तो वह परमेश्वर से भी जिसे उस ने नहीं देखा, प्रेम नहीं रख सकता।
1Jn 4:21  और उस से हमें यह आज्ञा मिली है, कि जो कोई अपने परमेश्वर से प्रेम रखता है, वह अपने भाई से भी प्रेम रखे।
एक साल में बाइबल: 
  • न्यायियों १-३ 
  • लूका ४:१-३०

सोमवार, 26 मार्च 2012

आदर के योग्य

   एक राष्ट्रीय फुटबाल प्रतियोगिता के आरंभ में, खेल आरंभ होने से ठीक पहले कुर्ट वार्नर को उस वर्ष के सबसे अच्छे फुटबाल खिलाड़ी होने के लिए सम्मानित किया गया और पुरुस्कार दिया गया। यह वह सम्मान और पुरुस्कार था जो ना केवल खेल मैदान में उत्तम खेल के लिए वरन खेल मैदाने से बाहर अच्छे व्यवहार और समाज सेवा में किए गए प्रयासों के आधार पर दिया जाता है। पुरुस्कार ग्रहण करते समय कुर्ट ने, जो एक समर्पित मसीही विश्वासी भी है, कहा: "मैं नतमस्तक हूँ, परमेश्वर ने मुझे ऐसा अद्भुत जीवन दिया है जो दुसरों को प्रभावित करता है। मिल सकने वाले सभी सम्मानों और पुरुस्कारों में यह सम्मान और पुरुस्कार अलग ही स्थान रखता है, क्योंकि जिस बात का यह प्रतीक है, वह अनू्ठी है।" वह पुरुस्कार और सम्मान दूसरों के प्रति समर्पित होने और दूसरों के लिए उपयोगी होने के लिए था।

   जो दूसरों की सेवा करते हैं उनको सम्मानित करना कोई नई बात नहीं है। परमेश्वर के वचन बाइबल में भी इस का कई स्थानों पर वर्णन है। प्रेरित पौलुस ने फिलिप्पियों को लिखी अपनी पत्री में उन्हें स्मरण कराया कि जिन्होंने मसीह यीशु की सेवा के लिए अपने आप को समर्पित किया है उनका आदर करें। उसने उन्हें एक मसीही सेवक इपफ्रुदीतुस का स्मरण कराया, जिसने अपनी जान पर खेल कर मसीही विश्वासियों और फिलिप्पी के निवासियों की सेवा करी थी; और कहा के ऐसे सेवकों को सदा सम्मान और आदर की दृष्टि से देखें (फिलिप्पियों २:२९, ३०)। स्पष्ट है कि जब भी हम उन लोगों के बारे में ध्यान करें जो हमारे उद्धारकर्ता प्रभु यीशु की सेवाकाई में लगे हैं तो उन्हें अपने आदर और प्रशंसा तथा प्रोत्साहन का पात्र भी जाने।

   क्यों ना आज उन सेवकों को स्मरण करें जिन्होंने आपके लिए सेवकाई की है और उन्हें आदर दें, उन्हें अपना आभार प्रकट करें और धन्यवाद दें। - बिल क्राउडर


जब हम उनका आदर करते हैं जो परमेश्वर की सेवा करते हैं, तो हम परमेश्वर का भी आदर करते हैं।

इसलिये तुम प्रभु में उस से बहुत आनन्‍द के साथ भेंट करना, और ऐसों का आदर किया करना। क्‍योंकि वही मसीह के काम के लिये अपने प्राणों पर जोखिम उठा कर मरने के निकट हो गया था... - फिलिप्पियों २:२९, ३०

बाइबल पाठ: फिलिप्पियों २:१९-३०
Php 2:19  मुझे प्रभु यीशु में आशा है, कि मैं तीमुथियुस को तुम्हारे पास तुरन्‍त भेजूंगा, ताकि तुम्हारी दशा सुनकर मुझे शान्‍ति मिले।
Php 2:20  क्‍योंकि मेरे पास ऐसे स्‍वाभाव का कोई नहीं, जो शुद्ध मन से तुम्हारी चिन्‍ता करे।
Php 2:21  क्‍योंकि सब अपने स्‍वार्थ की खोज में रहते हैं, न कि यीशु मसीह की।
Php 2:22   पर उसको तो तुम ने परखा और जान भी लिया है, कि जैसा पुत्र पिता के साथ करता है, वैसा ही उस ने सुसमाचार के फैलाने में मेरे साथ परिश्रम किया।
Php 2:23  सो मुझे आशा है, कि ज्योंही मुझे जान पड़ेगा कि मेरी क्‍या दशा होगी, त्योंही मैं उसे तुरन्‍त भेज दूंगा।
Php 2:24   और मुझे प्रभु में भरोसा है, कि मैं आप भी शीघ्र आऊंगा।
Php 2:25   पर मैं ने इपफ्रुदीतुस को जो मेरा भाई, और सहकर्मी और संगी योद्धा और तुम्हारा दूत, और आवश्यक बातों में मेरी सेवा टहल करने वाला है, तुम्हारे पास भेजना अवश्य समझा।
Php 2:26  क्‍योंकि उसका मन तुम सब में लगा हुआ था, इस कारण वह व्याकुल रहता था क्‍योंकि तुम ने उस की बीमारी का हाल सुना था।
Php 2:27  और निश्‍चय वह बीमार तो हो गया था, यहां तक कि मरने पर था, परन्‍तु परमेश्वर ने उस पर दया की; और केवल उस ही पर नहीं, पर मुझ पर भी, कि मुझे शोक पर शोक न हो।
Php 2:28  इसलिये मैं ने उसे भेजने का और भी यत्‍न किया कि तुम उस से फिर भेंट करके आनन्‍दित हो जाओ और मेरा शोक घट जाए।
Php 2:29  इसलिये तुम प्रभु में उस से बहुत आनन्‍द के साथ भेंट करना, और ऐसों का आदर किया करना।
Php 2:30  क्‍योंकि वही मसीह के काम के लिये अपने प्राणों पर जोखिम उठाकर मरने के निकट हो गया था, ताकि जो घटी तुम्हारी ओर से मेरी सेवा में हुई, उसे पूरा करे।
 
एक साल में बाइबल: 
  • यहोशू २२-२४ 
  • लूका ३

रविवार, 25 मार्च 2012

और बेहतर

   पहले कैंसर फिर उसके कठिन इलाज से पास्टर डैन बहुत थक गए थे। अस्पताल में २ सप्ताह के इलाज के बाद अब वे अपने घर वापस जाने की राह देख रहे थे। घर जाने की इस प्रतीक्षा के समय के अपने एक ब्लॉग पोस्ट में उन्होंने लिखा: "आज पहले से बहुत बेहतर है,...अद्भुत बात है कि शरीर में पानी की मात्रा के ठीक होने से कितना फर्क पड़ता है,...इस सप्ताहांत घर जाकर आगे का इलाज वहीं चलाने की प्रतीक्षा में हूँ।"

   पास्टर डैन अपने घर तो पहुँचे, लेकिन कुछ ही दिनों में उनकी शारीरिक यात्रा भी समाप्त हो गई और वे अपने परमेश्वर के पास चले गए जिससे वे अपनी सारी देह और प्राण से प्रेम करते थे। बीमारी से उनकी देह चाहे कितनी भी कमज़ोर क्यों न हो गई हो, लेकिन उनकी आत्मा कभी कमज़ोर नहीं पड़ी, अन्त तक सामर्थी रही।
   उनकी मृत्यु के कुछ दिन पश्चात जब मैंने उनका ब्लॉग खोला तो उनके शब्द "पहले से बहुत बेहतर" जैसे मेरे सामने आकर खड़े हो गए। पढ़ते समय मेरी आँखों में आँसू थे लेकिन चेहरे पर मुस्कान थी; मैं भी जानती थी कि अब अपने परमेश्वर के साथ, पास्टर डैन, फिलिप्पियों १:२३ के समान, "पहले से बहुत बेहतर" स्थान में और दशा में हैं।

   हम सब मसीही विश्वासी एक न एक दिन उस "पहले से बहुत बेहतर" स्थान पर जाएंगे; ऐसा स्थान जिसके लिए हमारे परमेश्वर पिता ने हमसे वायदा किया है कि: "वह उन की आंखों से सब आंसू पोंछ डालेगा; और इस के बाद मृत्यु न रहेगी, और न शोक, न विलाप, न पीड़ा रहेगी; पहिली बातें जाती रहीं" (प्रकाशितवाक्य २१:४)।

   इस पार्थिव जीवन से आगे भी एक जीवन है। वह जीवन अनन्त काल का है, वहां शरीर और समय-काल की सीमाएं नहीं हैं, और उस जीवन को बिताने के लिए केवल दो ही स्थान हैं, उनमें से एक का चुनाव प्रत्येक जन को यहीं इसी पृथ्वी पर रहते हुए करना है। एक स्थान वह है जो प्रभु परमेश्वर यीशु मसीह ने अपने विश्वासियों के लिए तैयार किया है, जो परमेश्वर की उपस्थिति, संगति और मनुष्य की बुद्धि की समझ से बाहर परम आनन्द की बातों का स्थान है। दूसरा वह जो शैतान और उसके अनुयायियों के लिए तैयार किया गया है, वह परमेश्वर से दूर और मनुष्य की बुद्धि की समझ से बाहर परम पीड़ा और दुख का स्थान है। जिसने अब इस पृथ्वी पर प्रभु यीशु को ग्रहण करके उसके साथ बने रहने को स्वीकार नहीं किया, उसने स्वतः ही इस पार्थिव जीवन के बाद भी प्रभु यीशु के साथ होने के लिए भी इन्कार कर दिया है, और उसके लिए फिर वह दूसरा स्थान ही बचता है।

   क्या आपका चुनाव भी इस जीवन के बाद पास्टर डैन के समान उस "पहले से बहुत बेहतर" स्थान का ही है? - सिंडी हैस कैस्पर


स्वर्ग - वह स्थान जहां ना पीड़ा, ना अन्धकार, ना मृत्यु और ना आँसु हैं।

वह उन की आंखों से सब आंसू पोंछ डालेगा; और इस के बाद मृत्यु न रहेगी, और न शोक, न विलाप, न पीड़ा रहेगी; पहिली बातें जाती रहीं। - प्रकाशितवाक्य २१:४

बाइबल पाठ: प्रकाशितवाक्य २१:१-८
Rev 21:1  फिर मैं ने नये आकाश और नयी पृथ्वी को देखा, क्‍योंकि पहिला आकाश और पहिली पृथ्वी जाती रही थी, और समुद्र भी न रहा।
Rev 21:2  फिर मैं ने पवित्र नगर नये यरूशलेम को स्‍वर्ग पर से परमेश्वर के पास से उतरते देखा, और वह उस दुल्हिन के समान थी, जो अपने पति के लिये सिंगार किए हो।
Rev 21:3  फिर मैं ने सिंहासन में से किसी को ऊंचे शब्‍द से यह कहते सुना, कि देख, परमेश्वर का डेरा मनुष्यों के बीच में है; वह उन के साथ डेरा करेगा, और वे उसके लोग होंगे, और परमेश्वर आप उन के साथ रहेगा, और उन का परमेश्वर होगा।
Rev 21:4  और वह उन की आंखों से सब आंसू पोंछ डालेगा; और इस के बाद मृत्यु न रहेगी, और न शोक, न विलाप, न पीड़ा रहेगी; पहिली बातें जाती रहीं।
Rev 21:5  और जो सिंहासन पर बैठा था, उस ने कहा, कि देख, मैं सब कुछ नया कर देता हूं: फिर उस ने कहा, कि लिख ले, क्‍योंकि ये वचन विश्वास के योग्य और सत्य हैं।
Rev 21:6  फिर उस ने मुझ से कहा, ये बातें पूरी हो गई हैं, मैं अलफा और ओमेगा, आदि और अन्‍त हूं: मैं प्यासे को जीवन के जल के सोते में से सेंतमेंत पिलाऊंगा।
Rev 21:7  जो जय पाए, वही उन वस्‍तुओं का वारिस होगा; और मैं उसका परमेश्वर होऊंगा, और वह मेरा पुत्र होगा।
Rev 21:8  पर डरपोकों, और अविश्वासियों, और घिनौनों, और हत्यारों, और व्यभिचारियों, और टोन्‍हों, और मूतिर्पूजकों, और सब झूठों का भाग उस झील में मिलेगा, जो आग और गन्‍धक से जलती रहती है: यह दूसरी मृत्यु है।
एक साल में बाइबल: 
  • यहोशू १९-२१ 
  • लूका २:२५-५२

शनिवार, 24 मार्च 2012

सबसे बुरी संभावना

   जब मैं बाइबल स्कूल में पढ़ाता था तो कभी कभी यात्रा के समय अपनी ट्रेन की प्रतीक्षा करते समय, स्टेशन के एक होटल में बैठ कर विद्यार्थियों की उत्तर पुस्तिकाएं जांचने में समय व्यतीत करता था। मेरे समान अन्य यात्री भी वहां बैठकर आपने अपने काम में लगे ट्रेन की प्रतीक्षा कर रहे होते थे। ऐसे में एक सामन्य व्यवहार है कि बैठे यात्री दूसरे किसी यात्री की किसी बात पर अपनी प्रतिक्रिया नहीं देते, शांत रहते हैं। एक दिन ऐसे ही काम करते करते असावधानी में मैंने अपना कॉफी का भरा हुआ बड़ा कप अपने खुले हुए ब्रीफकेस में गिरा लिया और वे सारी उत्तर पुस्तिकाएं उस से खराब हो गईं। मेरे पास बैठा एक अन्य यात्री अपने आप को रोक नहीं सका और सुनाई दे सकने वाली आवाज़ में बोल उठा, "सबसे बुरी संभावना घटित हो ही गई!"

   उस यात्री की यह टिप्पणी तो एक अतिश्योक्ति थी, किंतु यह भी सच है कि हम में से हर एक जन किसी न किसी बात से अबसे अधिक डरता है; वह चाहे आर्थिक हानि हो, या परिवार के किसी सदस्य की हानि, या कैंसर जैसी कोई भयानक बिमारी या फिर कोई कठिनाई, इत्यादि। सबके मन में कुछ न कुछ रहता है जिस के घटित होने की आशंका हमारे मन में दुविधा उत्पन्न करती है।

   परमेशवर के वचन बाइबल में अय्युब की पुस्तक इन सबसे बुरी संभावनाओं के एक धर्मी व्यक्ति अय्युब के जीवन में घटित होने का वर्णन है। भयानक दुखों, असहनीय शारीरिक पीड़ाओं और समझ से बाहर परिस्थितियों में भी अय्युब ने परमेश्वर की भूमिका को सही रूप में समझा और कहा: "परन्तु वह जानता है, कि मैं कैसी चाल चला हूँ; और जब वह मुझे ता लेगा तब मैं सोने के समान निकलूंगा" (अय्युब २३:१०)। अय्युब के इस बुद्धिमानी से भरे कथन से हम दो बातें सीख सकते हैं: पहली यह कि हम जिससे सबसे अधिक आशंकित रहते हैं वही हमारे चरित्र कि परीक्षा और हमें सुधारने के लिए प्रयोग किया जा सकता है; और दूसरी यह कि हर परिस्थिति और परेशानी में परमेश्वर अपने बच्चों के साथ है और उस से पार निकल पाने के योग्य सामर्थ तथा सहायता देता है।

   प्रभु यीशु में विश्वास और पापों से पश्चाताप द्वारा परमेश्वर की संतान बनकर परमेश्वर से चिपटे रहें। वह सदा अपने वाय्दों में पक्का और अटल रहा है; उसने अपने बच्चों के पक्ष में होकर और सदैव उनकी भलाई ही के लिए कार्य करने का वायदा किया है, हमारी सबसे बुरी संभावना में भी। - डेनिस फिशर


जीवित परमेश्वर अपने बाचों के जीवन से भय निकालने में सक्षम है।

परन्तु वह जानता है, कि मैं कैसी चाल चला हूँ; और जब वह मुझे ता लेगा तब मैं सोने के समान निकलूंगा। - अय्युब २३:१०
बाइबल पाठ: अय्युब १:१-५,१३-२२
Job 1:1  ऊज़ देश में अय्यूब नाम एक पुरुष था; वह खरा और सीधा था और परमेश्वर का भय मानता और बुराई से परे रहता था।
Job 1:2  उसके सात बेटे और तीन बेटियां उत्पन्न हुई।
Job 1:3  फिर उसके सात हजार भेड़-बकरियां, तीन हजार ऊंट, पांच सौ जोड़ी बैल, और पांच सौ गदहियां, और बहुत ही दास-दासियां थीं; वरन उसके इतनी सम्पत्ति थी, कि पूरबियों में वह सब से बड़ा था।
Job 1:4  उसके बेटे उपने अपने दिन पर एक दूसरे के घर में खाने-पीने को जाया करते थे, और अपनी तीनों बहिनों को अपने संग खाने-पीने के लिये बुलवा भेजते थे।
Job 1:5  और जब जब जेवनार के दिन पूरे हो जाते, तब तब अय्यूब उन्हें बुलवाकर पवित्र करता, और बड़ी भोर उठकर उनकी गिनती के अनुसार होमबलि चढ़ाता था; क्योंकि अय्यूब सोचता था, कि कदाचित्‌ मेरे लड़कों ने पाप करके परमेश्वर को छोड़ दिया हो। इसी रीति अय्यूब सदैव किया करता था।
Job 1:13  एक दिन अय्यूब के बेटे-बेटियां बड़े भाई के घर में खाते और दाखमधु पी रहे थे;
Job 1:14  तब एक दूत अय्यूब के पास आकर कहने लगा, हम तो बैलों से हल जोत रहे थे, और गदहियां उनके पास चर रही थीं,
Job 1:15  कि शबा के लोग धावा करके उनको ले गए, और तलवार से तेरे सेवकों को मार डाला; और मैं ही अकेला बचकर तुझे समाचार देने को आया हूँ।
Job 1:16  वह अभी यह कह ही रहा था कि दूसरा भी आकर कहने लगा, कि परमेश्वर की आग आकाश से गिरी और उस से भेड़-बकरियां और सेवक जलकर भस्म हो गए; और मैं ही अकेला बचकर तुझे समाचार देने को आया हूँ।
Job 1:17  वह अभी यह कह ही रहा था, कि एक और भी आकर कहने लगा, कि कसदी लोग तीन गोल बान्धकर ऊंटों पर धावा करके उन्हें ले गए, और तलवार से तेरे सेवकों को मार डाला; और मैं ही अकेला बचकर तुझे समाचार देने को आया हूँ।
Job 1:18  वह अभी यह कह ही रहा था, कि एक और भी आकर कहने लगा, तेरे बेट-बेटियां बड़े भाई के घर में खाते और दाखमधु पीते थे,
Job 1:19  कि जंगल की ओर से बड़ी प्रचणड वायु चली, और घर के चारों कोनों को ऐसा झोंका मारा, कि वह जवानों पर गिर पड़ा और वे मर गए; और मैं ही अकेला बचकर तुझे समाचार देने को आया हूँ।
Job 1:20 तब अय्यूब उठा, और बागा फाड़, सिर मुंड़ाकर भूमि पर गिरा और दणडवत्‌ करके कहा,
Job 1:21  मैं अपनी मां के पेट से नंगा निकला और वहीं नंगा लौट जाऊंगा; यहोवा ने दिया और यहोवा ही ने लिया, यहोवा का नाम धन्य है।
Job 1:22  इन सब बातों में भी अय्यूब ने न तो पाप किया, और न परमेश्वर पर मूर्खता से दोष लगाया।
एक साल में बाइबल: 
  • यहोशू १६-१८ 
  • लूका २:१-२४

शुक्रवार, 23 मार्च 2012

पहचान गंध

   आप उसे देख नहीं सकते, छू नहीं सकते और ना ही सुन सकते हैं, परन्तु गंध प्रबल और प्रभावी होती है। कुछ फूलों, या इत्रों या किसी वस्तु की गंध तुरंत ही हम में भूतकाल की कुछ ऐसी यादें जगा देती है, कुछ ऐसे लोगों और स्थानों के स्मरण को ताज़ा कर देती है, जिन्हें हम अन्य किसी रीति से शायद स्मरण नहीं कर पाते।

   कुछ प्रसिद्ध लोगों के नाम पर कुछ सुगंधों के नाम रखे जाते हैं। प्रशंसक अपने प्रीय गायक या अभिनेत्री के नाम की सुगंध लगा कर अपनी पहचान उनके साथ बनाते हैं। बहुतेरी स्त्रियाँ किसी विशेष इत्र के प्रयोग के द्वारा अपनी याद लोगों में बैठाना चाहती हैं, उनका प्रयास होता है कि जब लोगों के पास वह सुगंध आए तो लोगों को उन ही की याद आने पाए। गंध के माध्यम से पहचान बनाना एक प्रभावी विधि है; किंतु यह विधि कोई नई बात नहीं है।

   गंध द्वारा पहचान बनाने की बात परमेश्वर ने आरंभ करी थी। परमेश्वर के वचन बाइबल में परमेश्वर ने इस्त्राएलियों के मध्य अपनी आराधना के स्थान पर एक विशेष रीति से तैयार करे गए सुगंधित द्रव्य के लगातार जलाए जाने के लिए कहा (निर्गमन ३०:३४-३५)। इस प्रकार का और इसी गंध का कोई अन्य द्रव्य बनाना लोगों के लिए वर्जित था (निर्गमन ३०:३७-३८), क्योंकि यह विशेष सुगंध लोगों के अन्दर परमेश्वर के स्मरण और उसकी आराधना की पहचान के लिए थी।

   आज संसार में भी एक ऐसी ही विशेष सुगंध के द्वारा परमेश्वर चाहता है कि संसार के लोग उसे पहचाने; एक गंध है जिसे उसने अपनी पहचान गंध बनाया है - उसके लोग, मसीही विश्वासी: "परन्‍तु परमेश्वर का धन्यवाद हो, जो मसीह में सदा हम को जय के उत्‍सव में लिये फिरता है, और अपने ज्ञान का सुगन्‍ध हमारे द्वारा हर जगह फैलाता है। क्‍योंकि हम परमेश्वर के निकट उद्धार पाने वालों, और नाश होने वालों, दोनो के लिये मसीह के सुगन्‍ध हैं" (२ कुरिन्थियों २:१४-१५)।

   यह तथ्य कि परमेश्वर इतनी प्रभावी रीति से अपनी पहचान हमारे साथ बनाता है, मेरे लिए वास्तव में एक नम्र कर देने वाला तथ्य है। यह मुझे बाध्य करता है कि मैं अपने आप को जांचूँ कि मेरे आस-पास के लोग मुझे और मेरे जीवन तथा व्यवहार को देखकर मेरे परमेश्वर के बारे में क्या सोचते हैं, उसके बारे में क्या धारणा बनाते हैं?

   हम मसीही विश्वासी ही संसार में अपने उद्धारकर्ता प्रभु यीशु की पहचान गंध हैं। ध्यान रखें कि यह गंध सुगंध ही रहे; हमारे जीवनों मे यह कभी भीनी ना हो, कभी लुप्त ना हो। - जूली ऐकैरमैन लिंक


परमेश्वर के लिए जीया गया जीवन एक मनभावनी सुगंध ही फैलाएगा।

परन्‍तु परमेश्वर का धन्यवाद हो, जो मसीह में सदा हम को जय के उत्‍सव में लिये फिरता है, और अपने ज्ञान का सुगन्‍ध हमारे द्वारा हर जगह फैलाता है। - २ कुरिन्थियों २:१४
बाइबल पाठ: २ कुरिन्थियों २:१४-१७
2Co 2:14  परन्‍तु परमेश्वर का धन्यवाद हो, जो मसीह में सदा हम को जय के उत्‍सव में लिये फिरता है, और अपने ज्ञान का सुगन्‍ध हमारे द्वारा हर जगह फैलाता है।
2Co 2:15  क्‍योंकि हम परमेश्वर के निकट उद्धार पाने वालों, और नाश होने वालों, दोनो के लिये मसीह के सुगन्‍ध हैं।
2Co 2:16  कितनो के लिये तो मरने के निमित्त मृन्यु की गन्‍ध, और कितनो के लिये जीवन के निमित्त जीवन की सुगन्‍ध, और इन बातों के योग्य कौन है?
2Co 2:17  क्‍योंकि हम उन बहुतों के समान नहीं, जो परमेश्वर के वचन में मिलावट करते हैं; परन्‍तु मन की सच्‍चाई से, और परमेश्वर की ओर से परमेश्वर को उपस्थित जान कर मसीह में बोलते हैं।
एक साल में बाइबल: 
  • यहोशू १३-१५ 
  • लूका १:५७-८०

गुरुवार, 22 मार्च 2012

प्रार्थना

   वॉशिंगटन पोस्ट के एक लेख में बताया गया कि एक लड़की ने एक महीने में अपने मोबाइल फोन द्वारा कुल मिलाकर ६४७३ संदेश भेजे और प्राप्त किए। अपने मित्रों से अपने इस लगातर संपर्क के बारे में उसने कहा कि अगर यह न हो तो वह जी नहीं सकती। शोधकर्ताओं का मानना है कि अमेरिका में मोबाइल फोन द्वारा किशोर युवक और युवतियाँ औसतन प्रति महीने २२०० संदेश भेजते या प्राप्त करते हैं।

   मेरे लिए यह लगातार चलने वाला संपर्क एक अद्भुत नमूना है उस वार्तालाप का जिसे मसीही विश्वासी परमेश्वर से प्रार्थना के रूप में जानते हैं और जिसमें उन्हें इसी प्रकार लगे रहने चाहिए। प्रेरित पौलुस ने अपने जीवन में दूसरों के लिए सदा प्रार्थना करते रहने का रवैया बना रखा था। उसने अपनी विभिन्न पत्रियों में लोगों को इसके बारे में बताया: "इसी लिये जिस दिन से यह सुना है, हम भी तुम्हारे लिये यह प्रा्र्थना करने और विनती करने से नहीं चूकते कि तुम सारे आत्मिक ज्ञान और समझ सहित परमेश्वर की इच्‍छा की पहिचान में परिपूर्ण हो जाओ" (कुलुस्सियों १:९); "और हर समय और हर प्रकार से आत्मा में प्रार्थना, और विनती करते रहो, और इसी लिये जागते रहो, कि सब पवित्र लोगों के लिये लगातार विनती किया करो" (इफिसियों ६:१८); "निरन्‍तर प्रार्थना मे लगे रहो" (१ थिस्सलुनिकीयों ५:१७)।

   मिशनरी फ्रैंक लौबैक ने, जिन लोगों से वह अपनी दिनचर्या में मिलते थे, उनके लिए अपनी लगातार प्रार्थना करते रहने की आदत के बारे में बताया। वे भी उन लोगों के लिए निरंतर परमेश्वर को संदेश भेजते या पाते रहते थे, एक प्रकार से वे परमेश्वर से लगातार संपर्क में बने रहते थे। लौबैक का मानना है कि प्रार्थना संसार में कार्यकारी सबसे सामर्थी शक्ति है, और वे कहते थे कि "मेरा कर्त्वय है कि मैं हर घड़ी परमेश्वर के साथ वार्तालाप में और उसकी इच्छानुसार कार्य करने की प्रतिक्रीया में लगा रहूँ।"

   जब हम मोबाइल फोन पर लगातर चलने वाले लोगों के एक दूसरे से संपर्क के बारे में पढ़ते और जानते हैं तो प्रेरित पौलुस द्वारा दिए गए आवाहन "निरन्‍तर प्रार्थना मे लगे रहो" का पालन करना असंभव नहीं हो सकता; आवश्यक्ता है इसके लिए हमारी इच्छा और सतत प्रयास की। - डेविड मैक्कैसलैंड


मसीही विश्वासी के लिए प्रार्थना करते रहना श्वास लेते रहने के समान ही स्वाभाविक होना चाहिए।

और हर समय और हर प्रकार से आत्मा में प्रार्थना, और विनती करते रहो, और इसी लिये जागते रहो, कि सब पवित्र लोगों के लिये लगातार विनती किया करो। - इफिसियों ६:१८

बाइबल पाठ: कुलुस्सियों १:२-१४
Col 1:3  हम तुम्हारे लिये नित प्रार्थना करके अपने प्रभु यीशु मसीह के पिता अर्थात परमेश्वर का धन्यवाद करते हैं।
Col 1:4 क्‍योंकि हम ने सुना है, कि मसीह यीशु पर तुम्हारा विश्वास है, और सब पवित्र लोगों से प्रेम रखते हो।
Col 1:5 उस आशा की हुई वस्‍तु के कारण जो तुम्हारे लिये स्‍वर्ग में रखी हुई है, जिस का वर्णन तुम उस सुसमाचार के सत्य वचन में सुन चुके हो।
Col 1:6 जो तुम्हारे पास पहुंचा है और जैसा जगत में भी फल लाता, और बढ़ता जाता है; अर्थात जिस दिन से तुम ने उस को सुना, और सच्‍चाई से परमेश्वर का अनुग्रह पहिचाना है, तुम में भी ऐसा ही करता है।
Col 1:7  उसी की शि्क्षा तुम ने हमारे प्रिय सहकर्मी इपफ्रास से पाई, जो हमारे लिये मसीह का विश्वासयोग्य सेवक है।
Col 1:8  उसी ने तुम्हारे प्रेम को जो आत्मा में है हम पर प्रगट किया।
Col 1:9  इसी लिये जिस दिन से यह सुना है, हम भी तुम्हारे लिये यह प्रार्यना करने और विनती करने से नहीं चूकते कि तुम सारे आत्मिक ज्ञान और समझ सहित परमेश्वर की इच्‍छा की पहिचान में परिपूर्ण हो जाओ।
Col 1:10  ताकि तुम्हारा चाल-चलन प्रभु के योग्य हो, और वह सब प्रकार से प्रसन्न हो, और तुम में हर प्रकार के भले कामों का फल लगे, और परमेश्वर की पहिचान में बढ़ते जाओ।
Col 1:11 और उस की महिमा की शक्ति के अनुसार सब प्रकार की सामर्थ से बलवन्‍त होते जाओ, यहां तक कि आनन्‍द के साथ हर प्रकार से धीरज और सहनशीलता दिखा सको।
Col 1:12  और पिता का धन्यवाद करते रहो, जिस ने हमें इस योग्य बनाया कि ज्योति में पवित्र लोगों के साथ मीरास में समभागी हों।
Col 1:13 उसी ने हमें अन्‍धकार के वश से छुड़ाकर अपने प्रिय पुत्र के राज्य में प्रवेश कराया।
Col 1:14 जिस से हमें छुटकारा अर्थात पापों की क्षमा प्राप्‍त होती है।
एक साल में बाइबल: 
  • यहोशू १०-१२ 
  • लूका १:३९-५६

बुधवार, 21 मार्च 2012

निर्मल शिक्षा

   कुछ समय पहले संसार को मालुम पड़ा कि चीन के कुछ दूध उत्पादक दूध में मेलामीन नामक पदार्थ से मिलावट कर रहे थे क्योंकि इस पदार्थ के होने से जांचने के समय दूध में, शरीर की बढ़ोतरी के लिए आवश्यक, प्रोटीन की मात्रा अधिक आंकी जाती थी। किंतु मिलावट वाले उस दूध में यह अधिक प्रोटीन होना भ्रामिक था वास्तविक नहीं, हानिकारक था लाभकारी नहीं। थोड़े समय में बहुत से बच्चे मर गए या गंभीर रूप से बीमार पड़ गए, ऐसी लाइलाज बीमारियों द्वारा जिनका प्रभाव सारी उम्र उनपर रहेगा। इस प्रकार का मिलावट का कार्य को नया नहीं है, कई अन्य देशों मे भी, इसी उद्देश्य से, जानवरों के चारे में मेलामीन पिछले लगभग ४० वर्षों से मिलाया जा रहा है, और इसके प्रभाव भी यही रहे हैं - बीमार अथवा मरे हुए जानवर। परमेश्वर द्वारा दी गई शुद्ध चीज़ों में मनुष्य द्वारा अपनी अक्ल से करी गई मिलावट सदैव ही मनुष्यों की हानि का कारण रही है, चाहे वह शारीरिक बातों में हो या आत्मिक।

   प्रेरित पतरस ने परमेश्वर के वचन को उस शुद्ध निर्मल दूध के समान बताया (१ पतरस २:२) जिसका नियमित प्रयोग आत्मिक शिशुओं की बढ़ोतरी के लिए अनिवार्य है। निर्मल का तात्पर्य है जिसमें कोई मलिनता, किसी दूषित पदार्थ की कोई मिलावट ना हो। आरंभिक मण्डली की स्थापना के साथ ही परमेश्वर के बैरियों और शैतान के लोगों द्वारा परमेश्वर की निर्मल और लाभकारी शिक्षाओं में मिलावट का कार्य आरंभ हो गया था, जो आज भी ज़ारी है। सबसे अधिक प्रयास किया जाता रहा है पश्चाताप द्वारा सेंतमेंत उद्धार की मूल शिक्षा को विधि-विधानों के पालन और भले कर्मों की अनिवार्यता द्वारा दूषित करने का।

   आरंभिक मण्डली में लोग प्रभु यीशु मसीह के क्रूस पर बलिदान और मृतकों में से पुनरुत्थान के साथ यहूदी धर्म के अनुसार खतना कराने को भी उद्धार के लिए आवश्यक कहने लगे थे (प्रेरितों १५:१)। तब प्रभु यीशु के अनुयायी और मित्र प्रेरित पतरस ने इस धारणा की भर्त्सना और खण्डन करते हुए केवल प्रभु यीशु के अनुग्रह ही को उद्धार के लिए आवश्यक बताते हुए कहा: "तो अब तुम क्‍यों परमेश्वर की परीक्षा करते हो कि चेलों की गरदन पर ऐसा जूआ रखो, जिसे न हमारे बापदादे उठा सके थे और न हम उठा सकते। हां, हमारा यह तो निश्‍चय है, कि जिस रीति से वे प्रभु यीशु के अनुग्रह से उद्धार पाएंगे उसी रीति से हम भी पाएंगे" (प्रेरितों १५:१०, ११)।

   प्रेरित पौलुस ने भी गलतिया के विश्वासियों को लिखी अपनी पत्री में उनके प्रभु यीशु के अनुग्रह से हटने के संबंध में लिखा: "मुझे आश्‍चर्य होता है, कि जिस ने तुम्हें मसीह के अनुग्रह से बुलाया उस से तुम इतनी जल्दी फिर कर और ही प्रकार के सुसमाचार की ओर झुकने लगे। परन्‍तु वह दूसरा सुसमाचार है ही नहीं: पर बात यह है, कि कितने ऐसे हैं, जो तुम्हें घबरा देते, और मसीह के सुसमाचार को बिगाड़ना चाहते हैं। परन्‍तु यदि हम या स्‍वर्ग से कोई दूत भी उस सुसमाचार को छोड़ जो हम ने तुम को सुनाया है, कोई और सुसमाचार तुम्हें सुनाए, तो श्रापित हो। जैसा हम पहिले कह चुके हैं, वैसा ही मैं अब फिर कहता हूं, कि उस सुसमाचार को छोड़ जिसे तुम ने ग्रहण किया है, यदि कोई और सुसमाचार सुनाता है, तो श्रापित हो। अब मैं क्‍या मनुष्यों को मानता हूं या परमेश्वर को? क्‍या मैं मनुष्यों को प्रसन्न करना चाहता हूं?" (गलतियों १:६-९)।

   सावधान रहिए; यदि कोई भी शिक्षा परमेश्वर के वचन बाइबल में दी गई परमेश्वर की शिक्षाओं से भिन्न हो, या बाइबल में दी गई शिक्षाओं में कुछ जोड़ती या घटाती हो तो वह परमेश्वर की ओर से नहीं है; वह तो परमेश्वर के निर्मल आत्मिक दूध में घातक मिलावट है। हो सकता है कि मनुष्यों और संसार के पैमाने पर उसमें आपको "भली बातों" की मात्रा अधिक प्रतीत पड़े, परन्तु अन्ततः उन मिलावटी बातों का प्रभाव हानिकारक और विनाषकारी ही होगा।

   "इसलिये सब प्रकार का बैरभाव और छल और कपट और डाह और बदनामी को दूर करके। नये जन्में हुए बच्‍चों की नाईं निर्मल आत्मिक दूध की लालसा करो, ताकि उसके द्वारा उद्धार पाने के लिये बढ़ते जाओ" (१ पतरस २:१, २)। - सी.पी. हिया


परमेश्वर का वचन संपूर्ण है; उसमें किसी बात के जोड़े जाने या घटाए जाने की कोई आवश्यक्ता नहीं है।
नये जन्में हुए बच्‍चों की नाईं निर्मल आत्मिक दूध की लालसा करो, ताकि उसके द्वारा उद्धार पाने के लिये बढ़ते जाओ। - १ पतरस २:२
बाइबल पाठ: प्रेरितों १५:१-११
Act 15:1  फिर कितने लोग यहूदिया से आकर भाइयों को सिखाने लगे कि यदि मूसा की रीति पर तुम्हारा खतना न हो तो तुम उद्धार नहीं पा सकते।
Act 15:2  जब पौलुस और बरनबास का उन से बहुत झगड़ा और वाद-विवाद हुआ तो यह ठहराया गया, कि पौलुस और बरनबास, और हम में से कितने और व्यक्ति इस बात के विषय में यरूशलेम को प्रेरितों और प्राचीनों के पास जांए।
Act 15:3  सो मण्‍डली ने उन्‍हें कुछ दूर तक पहुंचाया; और वे फीनीके ओर सामरिया से होते हुए अन्यजातियों को मन फेरने का समाचार सुनाते गए, और सब भाइयों को बहुत आनन्‍दित किया।
Act 15:4  जब यरूशलेम में पहुंचे, तो कलीसिया और प्रेरित और प्राचीन उन से आनन्‍द के साथ मिले, और उन्‍होंने बताया कि परमेश्वर ने उन के साथ होकर कैसे कैसे काम किए थे।
Act 15:5  परन्‍तु फरीसियों के पंथ में से जिन्‍होंने विश्वास किया था, उन में से कितनों ने उठ कर कहा, कि उन्‍हें खतना कराना और मूसा की व्यवस्था को मानने की आज्ञा देना चाहिए।
Act 15:6   तब प्रेरित और प्राचीन इस बात के विषय में विचार करने के लिये इकट्ठे हुए।
Act 15:7  तब पतरस ने बहुत वाद-विवाद के बाद खड़े होकर उन से कहा; हे भाइयो, तुम जानते हो, कि बहुत दिन हुए, कि परमेश्वर ने तुम में से मुझे चुन लिया, कि मेरे मुंह से अन्यजाति सुसमाचार का वचन सुनकर विश्वास करें।
Act 15:8  और मन के जांचने वाले परमेश्वर ने उन को भी हमारी नाई पवित्र आत्मा देकर उन की गवाही दी।
Act 15:9  और विश्वास के द्वारा उन के मन शुद्ध करके हम में और उन में कुछ भेद न रखा।
Act 15:10  तो अब तुम क्‍यों परमेश्वर की परीक्षा करते हो कि चेलों की गरदन पर ऐसा जूआ रखो, जिसे न हमारे बापदादे उठा सके थे और न हम उठा सकते।
Act 15:11  हां, हमारा यह तो निश्‍चय है, कि जिस रीति से वे प्रभु यीशु के अनुग्रह से उद्धार पाएंगे, उसी रीति से हम भी पाएंगे।
एक साल में बाइबल: 
  • यहोशू ७-९ 
  • लूका १:२१-३८