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बुधवार, 4 अप्रैल 2012

महत्वता

   विभिन्न खेल-कूद के दल अपने नाम विभिन्न सोच के साथ रखते हैं। कुछ इतिहास और इतिहास बनाने वाले नायकों से नाम लेते हैं, तो कोई प्रकृति और प्रकृति की सुन्दरता को नाम का आधार बनाते हैं। कुछ तो आकर्षक और चटक रंगों के नाम अपने दल पर ले लेते हैं। एक दल ने तो एक नाचीज़ घोंघे के नाम को ही अपना लिया!

   हुआ यों कि १९८० के दशक में सैंटा क्रूज़ में स्थित कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय ने खेल प्रतियोगिताओं में भाग लेना आरंभ ही किया था। इस विश्वविद्यालय के लोग, कुछ अन्य बड़े और नामी शिक्षण संस्थाओं द्वारा, खेल-कूद पर दिए जाने वाले अत्याधिक महत्व को इतना महत्वपूर्ण नहीं आँकते थे। इसलिए कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय की छात्र परिषद ने निर्णय लिया कि वे अपने दल का ऐसा नाम रखेंगे जो उनकी इस विचारधारा को भी दर्शाए और अन्य नामों से बिलकुल भिन्न भी हो। अपनी इसी सोच के अन्तर्गत उन्होंने अपने दल का नाम रखा "Banana Slug" जो एक पीला, लसलसा, धीमी गति से चलने वाला ऐसा घोंघा होता है जिसके ऊपर अन्य घोंघों की तरह कोई कठोर खोल नहीं होता। खेल कूद को दिए जाने वाले अत्याधिक महत्व पर, कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, द्वारा यह एक रोचक कटाक्ष था।

   मुझे खेल-कूद से सदा ही लगाव रहा है, इसलिए मैं यह भी जानता हूँ कि ये बहुत आसानी से और अनजाने ही आवश्यक्ता से अधिक महत्वपूर्ण बन सकते हैं। खेल-कूद का जीवन में अपना स्थान है, उनकी उपयोगिता है, किंतु उस स्थान और उपयोगिता के बाहर यदि वे जीवन के लिए अन्य आवश्यक बातों के समय और प्रयास में आड़े आने लगें तो भली बात बुरी बन जाती है। हमें अपने जीवनों में उनकी महत्वता को आँकने और उस के अनुसार अपने जीवन के लिए आवश्यक बातों की प्राथमिकता को निर्धारित करने की आवश्यकता है जिससे सब कार्य सुचारू रूप से चले, और एक के कारण दूसरे का नुकसान ना हो।

   प्रत्येक मसीही विश्वासी के लिए एक और बात है जिसका उसे सदा ध्यान रखना चाहिए - संसार के कार्य और परमेश्वर की बातों के बीच का तालमेल। जैसा हमारे प्रभु यीशु ने बताया था: "तू परमेश्वर अपने प्रभु से अपने सारे मन और अपने सारे प्राण और अपनी सारी बुद्धि के साथ प्रेम रख। बड़ी और मुख्य आज्ञा तो यही है। और उसी के समान यह दूसरी भी है, कि तू अपने पड़ोसी से अपने समान प्रेम रख" (मत्ती २२:३७-३९), यही जीवन में हमारी प्राथमिकता रहनी चाहिए। परमेश्वर के वचन बाइबल में परमेश्वर के भविष्यद्वक्ता मीका के द्वारा परमेश्वर ने अपनी प्रजा को समझाया था कि वे कैसे उसे प्रसन्न करने वाला जीवन जी सकते हैं; मीका ने परमेश्वर की ओर से कहा: "हे मनुष्य, वह तुझे बता चुका है कि अच्छा क्या है, और यहोवा तुझ से इसे छोड़ और क्या चाहता है, कि तू न्याय से काम करे, और कृपा से प्रीति रखे, और अपने परमेश्वर के साथ नम्रता से चले?" (मीका ६:८)।

   प्रत्येक मसीही विश्वासी के लिए यह अनिवार्य है कि उसके जीवन में परमेश्वर की जो उस से उम्मीदें हैं उन्हें छोड़ और कोई बात प्राथमिकता ना लेने पाए। यदि प्राथमिकताओं के सही आँकलन और निर्वाह में गलती हुई और संसार तथा संसार के कार्यों एवं बातों ने परमेश्वर का स्थान ले लिया तो इसके परिणाम उन के मसीही विश्वास और विश्वास के जीवन तथा आशीषों के लिए अति हानिकारक होंगे।

   आप के जीवन की महत्वता किस के लिए है - परमेश्वर या संसार? - बिल क्राउडर


अपनी प्राथमिकताएं निर्धारित करें; कम महत्व की बातों पर अधिक समय गँवाने से सावधान रहें।
हे मनुष्य, वह तुझे बता चुका है कि अच्छा क्या है, और यहोवा तुझ से इसे छोड़ और क्या चाहता है, कि तू न्याय से काम करे, और कृपा से प्रीति रखे, और अपने परमेश्वर के साथ नम्रता से चले? - मीका ६:८
बाइबल पाठ: मीका ६:१-८
Mic 6:1  जो बात यहोवा कहता है, उसे सुनो: उठकर, पहाड़ों के साम्हने वादविवाद कर, और टीले भी तेरी सुनने पाएं।
Mic 6:2  हे पहाड़ों, और हे पृथ्वी की अटल नेव, यहोवा का वादविवाद सुनो, क्योंकि यहोवा का अपनी प्रजा के साथ मुकद्दमा है, और वह इस्राएल से वादविवाद करता है।
Mic 6:3  हे मेरी प्रजा, मैं ने तेरा क्या किया, और क्या करके मैं ने तुझे उकता दिया है?
Mic 6:4  मेरे विरूद्ध साक्षी दे! मैं तो तुझे मिस्र देश से निकाल ले आया, और दासत्व के घर में से तुझे छुड़ा लाया, और तेरी अगुवाई करने को मूसा, हारून और मरियम को भेज दिया।
Mic 6:5  हे मेरी प्रजा, स्मरण कर, कि मोआब के राजा बालाक ने तेरे विरूद्ध कौन सी युक्ति की, और बोर के पुत्र बिलाम ने उसको क्या सम्मति दी? और शित्तीम से गिल्गाल तक की बातों का स्मरण कर, जिस से तू यहोवा के धर्म के काम समझ सके।
Mic 6:6  मैं क्या लेकर यहोवा के सम्मुख आऊं, और ऊपर रहने वाले परमेश्वर के साम्हने झुकूं? क्या मैं होमबलि के लिये एक एक वर्ष के बछड़े लेकर उसके सम्मुख आऊं?
Mic 6:7  क्या यहोवा हजारों मेढ़ों से, वा तेल की लाखों नदियों से प्रसन्न होगा? क्या मैं अपने अपराध के प्रायश्चित्त में अपने पहिलौठे को वा अपने पाप के बदले में अपने जन्माए हुए किसी को दूं?
Mic 6:8  हे मनुष्य, वह तुझे बता चुका है कि अच्छा क्या है, और यहोवा तुझ से इसे छोड़ और क्या चाहता है, कि तू न्याय से काम करे, और कृपा से प्रीति रखे, और अपके परमेश्वर के साथ नम्रता से चले?
एक साल में बाइबल: 
  • रूथ १-४ 
  • लूका ८:१-२५

मंगलवार, 3 अप्रैल 2012

लालसाएं

   शरद ऋतु लंबी चली है और ठंड भी बहुत रही है, अब मैं गरमी के लिए तरस रहा हूँ। मैं बिना पत्तों के सूने और नंगे पड़े पेड़ों और ज़मीन पर निर्जीव सूखे भूरे पत्तों को देखते देखते अघा गया हूँ। अब मेरी तीव्र लालसा है कि इन मरे हुए पत्तों के बीच में से नए हरे अँकुर फूटते हुए दिखाई दें, पेड़ फिर से हरे दिखने लगें और चारों ओर हरियाली के साथ फूलों का सुन्दर नज़ारा हो।

   किंतु जैसे जैसे मैं अपने प्रीय मौसम की लालसा करता हूँ, मुझे मेरी माँ की आवाज़ भी आती है, "अपनी ज़िन्दगी ऐसे ही प्रतीक्षाओं में ना बिता देना।"

   यदि आप मेरी जैसी प्रवृति वाले व्यक्ति हैं तो आप भी मेरे समान ही कुछ इस प्रकार की कल्पनाएं करते होंगे: "जब ऐसा और ऐसा होगा, तब मैं यह करूँगा..."; या, "यदि वह ऐसा करेगा, तब ही मैं भी यह करूँगा..."; या, "मुझे तब ही संतुष्टि मिलेगी जब..."; या, "मैं तो बस इस से प्रसन्न होऊँगा कि..."; इत्यादि।

   भविष्य की भलाई की लालसा में हम यह भूल जाते हैं कि प्रत्येक दिन, चाहे उस दिन मौसम या परिस्थितियाँ कैसी भी हों, परमेश्वर का दिया हुआ वरदान है, जिसे परमेश्वर ही की महिमा के लिए बिताया जाना चाहिए।

   लेखक रौन ऐश के अनुसार, "हम वहीं हैं जहाँ हमें होना चाहिए और हम वही सीख रहे हैं जो हमें सीखना चाहिए। बस अपने पथ पर बने रहिए क्योंकि आज के अनुभवों से परमेश्वर आपको वह सिखा रहा है जो कल की परिस्थितियों में आपके लिए उपयोगी होगा; आज उसने आपको वहाँ रखा है जहाँ से आप कल के लिए तैयार हो सकते हैं।"

   प्रत्येक ऋतु में भलाई करने और आनन्दित होने के लिए भी कारण होते हैं (सभोपदेशक ३:१२)। यह हम सब के लिए प्रतिदिन की चुनौती है कि हम हर दिन में करने के लिए कुछ भला और आनन्दित होने के लिए कोई कारण ढूँढ़ें, और फिर उस दिन में वह भलाई भी करें और उस आनन्द को भी मनाएं। - जूली ऐकैरमैन लिंक


हर ऋतु आनन्द का कोई कारण लाती है।
 
मैं ने जान लिया है कि मनुष्यों के लिये आनन्द करने और जीवन भर भलाई करने के सिवाय, और कुछ भी अच्छा नहीं; और यह भी परमेश्वर का दान है कि मनुष्य खाए-पीए और अपने सब परिश्रम में सुखी रहे। - सभोपदेशक ३:१२, १३
 
बाइबल पाठ: सभोपदेशक ३:१-१३
Ecc 3:1  हर एक बात का एक अवसर और प्रत्येक काम का, जो आकाश के नीचे होता है, एक समय है।
Ecc 3:2  जन्म का समय, और मरण का भी समय; बोने का समय, और बोए हुए को उखाड़ने का भी समय है;
Ecc 3:3  घात करने का समय, और चंगा करने का भी समय; ढा देने का समय, और बनाने का भी समय है;
Ecc 3:4  रोने का समय, और हंसने का भी समय; छाती पीटने का समय, और नाचने का भी समय है;
Ecc 3:5  पत्थर फेंकने का समय, और पत्थर बटोरने का भी समय; गले लगाने का समय, और गले लगाने से रुकने का भी समय है?
Ecc 3:6  ढूंढ़ने का समय, और खो देने का भी समय; बचा रखने का समय, और फेंक देने का भी समय है;
Ecc 3:7  फाड़ने का समय, और सीने का भी समय; चुप रहने का समय, और बोलने का भी समय है;
Ecc 3:8  प्रेम का समय, और बैर करने का भी समय; लड़ाई का समय, और मेल का भी समय है।
Ecc 3:9  काम करने वाले को अधिक परिश्रम से क्या लाभ होता है?
Ecc 3:10  मैं ने उस दु:ख भरे काम को देखा है जो परमेश्वर ने मनुष्यों के लिये ठहराया है कि वे उस में लगे रहें।
Ecc 3:11  उस ने सब कुछ ऐसा बनाया कि अपने अपने समय पर वे सुन्दर होते हैं; फिर उस ने मनुष्यों के मन में अनादि-अनन्त काल का ज्ञान उत्पन्न किया है, तौभी जो काम परमेश्वर ने किया है, वह आदि से अन्त तक मनुष्य बूझ नहीं सकता।
Ecc 3:12  मैं ने जान लिया है कि मनुष्यों के लिये आनन्द करने और जीवन भर भलाई करने के सिवाय, और कुछ भी अच्छा नहीं;
Ecc 3:13  और यह भी परमेश्वर का दान है कि मनुष्य खाए-पीए और अपने सब परिश्रम में सुखी रहे।
 
एक साल में बाइबल: 
  • न्यायियों १९-२१ 
  • लूका ७:३१-५०

सोमवार, 2 अप्रैल 2012

बचाव कार्य

   मैं कोलोरैडो प्रांत में रहता हूँ, और इस कारण पहाड़ों पर चढ़ना और चढ़ने के बारे में भी जानता हूँ। गर्मी की छुट्टियों में, सप्ताहांत के दिनों में मैं अनेक ऐसे लोगों को देखता हूँ जो पहाड़ों पर भ्रमण तथा जंगल और प्रकृति के सौन्दर्य के आनन्द के लिए आते हैं। उन्हें पहाड़ पर चढ़ने और जंगल में जाने के बारे में कोई समझ-बूझ या ज्ञान नहीं होता। वे साधारण चप्पलों और निक्करों को पहने, अपने साथ पीने के पानी की एक छोटी बोतल लिए सुबह के समय किसी पगडंडी पर चढ़ना आरंभ कर देते हैं। उनके पास कोई नक्शा नहीं होता, कोई दिशा सूचक यंत्र नहीं होता, बारिश से बचने के लिए कोई सामान नहीं होता। बिना किसी योजना के, बिना कुछ जाने समझे, वे बस आकर्षक दिखने वाली किसी भी राह पर चल निकलते हैं।

    मेरा पड़ौसी एक बचाव दल में स्वयंसेवक है। उसने मुझे कई घटनाएं बताईं हैं कि कैसे इन भटके हुए भ्रमणकारियों को उनके दल ने निश्चित मृत्यु की परिस्थित्यों से बचाया है। परिस्थिति कैसी भी क्यों न हो, उनका दल सहायता की प्रत्येक पुकार पर बचाव के लिए निकल पड़ता है। कभी भी ऐसा नहीं हुआ है कि उन्होंने किसी भटके हुए भ्रमण्कारी को डांटा हो कि "क्योंकि आपने पहाड़ और जंगल में भ्रमण के नियमों की अवहेलना करी है, इसलिए अपनी परिस्थिति के लिए आप ही ज़िम्मेदार हैं और अब आप ही को इसे भुगतना भी होगा।" उनका उद्देश्य बचाव है, और वे प्रत्येक जन की सहायता के लिए निकल पड़ते हैं, चाहे वह जन कैसी भी परिस्थिति में क्यों ना हो, या इस सहायता के लिए कितना भी अयोग्य क्यों हो।

   परमेश्वर के वचन बाइबल का मुख्य सन्देश भी बचाव है - समस्त मानव जाति का पाप और नरक से बचाव। जैसा प्रेरित पौलुस ने अपनी पत्री में लिखा है, हम में से कोई भी परमेश्वर के अनुग्रह के ’योग्य’ नहीं है। अपनी किसी योग्यता या उपलब्धि द्वारा हम परमेश्वर को हम पर अनुग्रह करने के लिए बाध्य नहीं कर सकते; और ना ही कोई इतना सक्षम है कि वह अपने किसी प्रयास से अपने आप को पाप चंगुल और पाप के दोष से बचा सके। पौलुस ने पुराने नियम में भजनकार के भजन को उद्ध्वत करते हुए लिखा: "जैसा लिखा है, कि कोई धर्मी नहीं, एक भी नहीं। कोई समझदार नहीं, कोई परमेश्वर का खोजने वाला नहीं। सब भटक गए हैं, सब के सब निकम्मे बन गए, कोई भलाई करने वाला नहीं, एक भी नहीं" (रोमियों ३:१०-११; भजन १४:१-३)। उन भटके हुए भ्रमणकारियों के समान हम तो केवल सहायता के लिए बचाव करने वाले को पुकार ही सकते हैं।

   लेकिन सुसमाचार यह है कि हमारी दशा और योग्यता कैसी भी क्यों ना हो, परमेश्वर बचाव की प्रत्येक पुकार को सुनता है और बचाव के लिए अपना हाथ आगे भी बढ़ाता है। क्योंकि बचाव उसका कार्य है और वह बचाव के लिए सदैव तत्पर और तैयार रहता है।

   क्या आपने अपने बचाव के लिए उसे पुकारा है? क्या आपने आपके बचाव के लिए बढ़े हुए उसके हाथ को थामा है? - फिलिप यैन्सी


मनफिराव, मन से पाप से फिर कर परमेश्वर की ओर मुड़ जाना है।
मैं तुम से कहता हूं कि इसी रीति से एक मन फिराने वाले पापी के विषय में परमेश्वर के स्‍वर्गदूतों के साम्हने आनन्‍द होता है। - लूका १५:१०
बाइबल पाठ: रोमियों ३:१०-२४
Rom 3:10  जैसा लिखा है, कि कोई धर्मी नहीं, एक भी नहीं।
Rom 3:11  कोई समझदार नहीं, कोई परमेश्वर का खोजने वाला नहीं।
Rom 3:12  सब भटक गए हैं, सब के सब निकम्मे बन गए, कोई भलाई करने वाला नहीं, एक भी नहीं।
Rom 3:13 उन का गला खुली हुई कब्र है: उन्हों ने अपनी जीभों से छल किया है: उन के होठों में सापों का विष है।
Rom 3:14  और उन का मुंह श्राप और कड़वाहट से भरा है।
Rom 3:15  उन के पांव लोहू बहाने को र्फुतीले हैं।
Rom 3:16 उन के मार्गों में नाश और क्‍लेष हैं।
Rom 3:17 उन्‍होंने कुशल का मार्ग नहीं जाना।
Rom 3:18  उन की आंखों के साम्हने परमेश्वर का भय नहीं।
Rom 3:19 हम जानते हैं, कि व्यवस्था जो कुछ कहती है उन्‍हीं से कहती है, जो व्यवस्था के आधीन हैं: इसलिये कि हर एक मुंह बन्‍द किया जाए, और सारा संसार परमेश्वर के दण्‍ड के योग्य ठहरे।
Rom 3:20 क्‍योंकि व्यवस्था के कामों से कोई प्राणी उसके साम्हने धर्मी नहीं ठहरेगा, इसलिये कि व्यवस्था के द्वारा पाप की पहिचान होती है।
Rom 3:21  पर अब बिना व्यवस्था परमेश्वर की धामिर्कता प्रगट हुई है, जिस की गवाही व्यवस्था और भविष्यद्वक्ता देते हैं।
Rom 3:22 अर्थात परमेश्वर की वह धामिर्कता, जो यीशु मसीह पर विश्वास करने से सब विश्वास करने वालों के लिये है; क्‍योंकि कुछ भेद नहीं।
Rom 3:23  इसलिये कि सब ने पाप किया है और परमेश्वर की महिमा से रहित हैं।
Rom 3:24 परन्‍तु उसके अनुग्रह से उस छुटकारे के द्वारा जो मसीह यीशु में है, सेंत मेंत धर्मी ठहराए जाते हैं।
एक साल में बाइबल: 
  • न्यायियों १६-१८ 
  • लूका ७:१-३०

रविवार, 1 अप्रैल 2012

परमेश्वर को आपका प्रयोजन है

   अपने पकड़वाए जाने और क्रूस पर चढ़ाए जाने से पहले प्रभु यीशु यरूशलेम आए। यरूशलेम में अपने प्रवेश की शाही सवारी के लिए उन्होंने एक गधे को चुना। उन्होंने अपने चेलों को निर्देष दिए कि वह गधा उन्हें कहां से मिलेगा, और यह भी कहा कि यदि कोई पूछे कि वे गधे को कहां ले जा रहे हैं तो उत्तर में कहें कि "...प्रभु को इस का प्रयोजन है और वह शीघ्र उसे यहां भेज देगा" (मरकुस ११:३)। कितनी विचित्र बात है कि अपने प्रयोजन के लिए परमेश्वर के पुत्र को इतने साधारण साधन की आवश्यक्ता थी। एलेक्ज़ैंडर मैकलैरन ने इस बात पर अपनी टिप्पणी में कहा: "मसीह हमारे पास भी इसी प्रकार से आता है। वह हमारे सारे बहानों को अनसुना करके हम से कहता है, ’मुझे तुम्हारा प्रयोजन है, यही काफी है।’ "

   ज़रा सोचिए! सृष्टि के सृष्टिकर्ता को हमारा प्रयोजन है और वह अपनी अनन्तकालीन योजना में हमें सम्मिलित करना चाहता है। यद्यपि वह सर्वसामर्थी है और किसी सृजे गए प्राणी का मोहताज नहीं है, फिर भी अपनी योजनाओं की पूर्ति के लिए उसने हम जैसे तुच्छ मनुष्यों को चाहा है; उन मनुष्यों को जो ना उसे जानते हैं, ना उसका आदर करते हैं और ना ही उसके आज्ञाकारी रहे हैं, वरन सब अपनी अपनी लालसाओं और अभिलाषाओं में अपनी अपनी राह चलते रहे हैं। किंतु वह हमारी ओर अपने अनुग्रह का हाथ बढ़ा कर कहता है, "मुझे तुम्हारा प्रयोजन है; मैं तुम्हें अपने कार्य के योग्य और सक्षम बनाऊंगा, मेरी ओर लौट आओ।" यदि इस संसार में उसे हमारी आवश्यक्ता नहीं होती तो वह हमें पाप से भरे संसार में छोड़ता भी नहीं। जैसे ही हम पश्चाताप, पापों की क्षमा और प्रभु यीशु में विश्वास द्वारा उद्धार पाते, वह हमें संसार के दुख और क्लेषों से उठाकर अपने पास स्वर्ग के अनन्त आनन्द में बैठा लेता। किंतु संसार के लिए उसकी योजना है, जिसकी पूर्ति के लिए उसे समर्पित कार्यकर्ता चाहिएं जो उसकी आज्ञानुसार उसके लिए कार्य करें।

   किसी ने असीसि के फ्रांसिस से पूछा कि वह परमेश्वर के लिए इतना कुछ कैसे करने पाए? फ्रांसिस ने उत्तर दिया, "शायद इसका यह कारण हो: परमेश्वर ने स्वर्ग से देखा और ढूंढ़ा कि संसार का सबसे कमज़ोर और छोटा व्यक्ति कौन है? तब उसकी निगाह मुझ पर पड़ी, और वह बोला मुझे वह मिल गया। अब इसमें होकर मैं कार्य करूंगा और यह घमण्डी नहीं होगा; यह इस बात का एहसास रखेगा कि मैं उसे केवल उसके तुच्छ और गौण होने के कारण ही प्रयोग कर पा रहा हूँ, उसकी अपनी किसी हैसियत, योग्यता या सामर्थ के कारण नहीं।"

   हो सकता है कि आप अपनी और संसार की नज़रों में छोटे और महत्वहीन हों, परन्तु परमेश्वर के लिए आप बहुत महत्वपुर्ण और उपयोगी हैं; इतने महत्वपूर्ण कि उसने आप के लिए अपने पुत्र को मरने भेज दिया जिससे आपका उसके साथ मेल-मिलाप हो सके। वह आज भी आपकी प्रतीक्षा में है कि आप उसकी ओर मुड़ें, समर्पण करें और वह आपको अपने लिए सक्षम बनाए।

   परमेश्वर को आपका प्रयोजन है, क्या आप परमेश्वर के लिए उपलब्ध हैं? - पौल वैन गोर्डर


परमेश्वर अपने असाधारण कार्यों के लिए साधारण मनुष्यों को ढूंढ़ता है।
 
यदि तुम से कोई पूछे, यह क्‍यों करते हो तो कहना, कि प्रभु को इस का प्रयोजन है; और वह शीघ्र उसे यहां भेज देगा। - मरकुस ११:३
 
बाइबल पाठ: मरकुस ११:१-७
Mar 11:1   जब वे यरूशलेम के निकट जैतून पहाड़ पर बैतफगे और बैतनिय्याह के पास आए, तो उस ने अपने चेलों में से दो को यह कहकर भेजा।
Mar 11:2  कि अपने साम्हने के गांव में जाओ, और उस में पंहुचते ही एक गदही का बच्‍चा जिस पर कभी कोई नहीं चढ़ा, बन्‍धा हुआ तुम्हें मिलेगा, उसे खोल लाओ।
Mar 11:3  यदि तुम से कोई पूछे, यह क्‍यों करते हो तो कहना, कि प्रभु को इस का प्रयोजन है; और वह शीघ्र उसे यहां भेज देगा।
Mar 11:4  उन्‍होंने जाकर उस बच्‍चे को बाहर द्वार के पास चौक में बन्‍धा हुआ पाया, और खोलने लगे।
Mar 11:5  और उन में से जो वहां खड़े थे, कोई कोई कहने लगे कि यह क्‍या करते हो, गदही के बच्‍चे को क्‍यों खोलते हो?
Mar 11:6  उन्‍होंने जैसा यीशु ने कहा था, वैसा ही उन से कह दिया; तब उन्‍होंने उन्‍हें जाने दिया।
Mar 11:7  और उन्‍होंने बच्‍चे को यीशु के पास लाकर उस पर अपने कपड़े डाले और वह उस पर बैठ गया।
 
एक साल में बाइबल: 
  • न्यायियों १३-१५ 
  • लूका ६:२७-४९

शनिवार, 31 मार्च 2012

क्षमा का सौन्दर्य

   लैरी और मेरी गेर्बेन्स पीछले १० वर्षों से परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रभु यीशु द्वारा लूका १५ में दिए गए "उड़ाऊ पुत्र" के दृष्टांत से संबंधित कलाकृतियों का संग्रह कर रहे हैं। उनके संग्रह में रेंब्रां और अन्य विख्यात चित्रकारों तथा कलाकरों की कृतियाँ मौजूद हैं जो इस दृष्टांत के विभिन्न पहलुओं पर आधारित हैं। जो कला संग्रह के रूप में आरंभ हुआ था, अब गेर्बेन्स दंपति के लिए प्रभु की सेवकाई का माध्यम बन गया है।

   गेर्बेन्स दंपति ने अपना यह संग्रह एक स्थानीय कॉलेज में प्रदर्शनी के लिए लगा रखा है। लैरी का कहना है कि, "कलाकारों ने हमारी सेवा करी है, हम चाहते हैं कि उनकी कलाकृतियाँ दुसरों की भी सेवा करें।"

   जब मैं उनकी प्रदर्शनी को देखती जा रही थी, मुझे उस उड़ाऊ पुत्र के मन की गहराईयों की आवश्यक्ता, उसके सच्चे पश्चाताप और उसके पिता द्वारा उसे क्षमा किए जाने की सुन्दरता को विभिन्न कलाकृतियों में व्यक्त देखा जिसने मेरे दिल को छू लिया।

   इस दृष्टांत के इस पुत्र के समान, जिसके पास अपने जीवन के लिए अपने पिता की इच्छा से भिन्न योजनाएं थीं और जिन्हें वह किसी भी कीमत पर पूरा करने के लिए ढीठ था, हम सब भी ढीठ रहे हैं। हम सब ने अपने परमेश्वर पिता से मूँह मोड़कर अपने ही मार्ग ले लिए हैं (रोमियों ३:१०-१२)। किंतु उस दृष्टांत के पिता के समान ही हमारा परमेश्वर पिता पश्चाताप के साथ लौट के आने वाले हर जन को क्षमा करने को तैयार बैठा है, प्रतीक्षा में है।

   यदि आप भी सच्चे पश्चाताप के साथ उस सच्चे परमेश्वर पिता को हृदय की गहराईयों से पुकारेंगे, "पिता जी मैं ने स्‍वर्ग के विरोध में और तेरी दृष्‍टि में पाप किया है" (लूका १५:१८), तो आप भी उसकी क्षमा के सौन्दर्य को देखने और अनुभव करने पाएंगे।

   यदि आज आप उस सच्चे परमेश्वर से दूर जाकर खड़े हैं, तो आज और अभी उसके पास लौट आएं; वह आपकी प्रतीक्षा में है। उसके प्रेम और क्षमा के आनन्द को स्वयं अनुभव कर के देखें। - ऐनी सेटास


जब परमेश्वर क्षमा करता है तो साथ ही वह पाप का दोष भी हटा देता है और आत्मा को भी बहाल कर देता है।

...वह अभी दूर ही था, कि उसके पिता ने उसे देखकर तरस खाया, और दौड़कर उसे गले लगाया, और बहुत चूमा। - लूका १५:२०
बाइबल पाठ: लूका १५:११-२४
Luk 15:11  फिर उस ने कहा, किसी मनुष्य के दो पुत्र थे।
Luk 15:12  उन में से छुटके ने पिता से कहा कि हे पिता संपत्ति में से जो भाग मेरा हो, वह मुझे दे दीजिए। उस ने उन को अपनी संपत्ति बांट दी।
Luk 15:13  और बहुत दिन न बीते थे कि छुटका पुत्र सब कुछ इकट्ठा करके एक दूर देश को चला गया और वहां कुकर्म में अपनी संपत्ति उड़ा दी।
Luk 15:14  जब वह सब कुछ खर्च कर चुका, तो उस देश में बड़ा अकाल पड़ा, और वह कंगाल हो गया।
Luk 15:15  और वह उस देश के निवासियों में से एक के यहां जा पड़ा : उस ने उसे अपने खेतों में सूअर चराने के लिये भेजा।
Luk 15:16 और वह चाहता था, कि उन फलियों से जिन्‍हें सूअर खाते थे अपना पेट भरे; और उसे कोई कुछ नहीं देता था।
Luk 15:17  जब वह अपने आपे में आया, तब कहने लगा, कि मेरे पिता के कितने ही मजदूरों को भोजन से अधिक रोटी मिलती है, और मैं यहां भूखा मर रहां हूं।
Luk 15:18 मैं अब उठ कर अपने पिता के पास जाऊंगा और उस से कहूंगा कि पिता जी मैं ने स्‍वर्ग के विरोध में और तेरी दृष्‍टि में पाप किया है।
Luk 15:19  अब इस योग्य नहीं रहा कि तेरा पुत्र कहलाऊं, मुझे अपने एक मजदूर की नाईं रख ले।
Luk 15:20  तब वह उठ कर, अपने पिता के पास चला: वह अभी दूर ही था, कि उसके पिता ने उसे देख कर तरस खाया, और दौड़ कर उसे गले लगाया, और बहुत चूमा।
Luk 15:21  पुत्र न उस से कहा; पिता जी, मैं ने स्‍वर्ग के विरोध में और तेरी दृष्‍टि में पाप किया है, और अब इस योग्य नहीं रहा, कि तेरा पुत्र कहलाऊं।
Luk 15:22  परन्‍तु पिता ने अपने दासों से कहा; झट अच्‍छे से अच्‍छा वस्‍त्र निकाल कर उसे पहिनाओ, और उसके हाथ में अंगूठी, और पांवों में जूतियां पहिनाओ।
Luk 15:23  और पला हुआ बछड़ा लाकर मारो ताकि हम खांए और आनन्‍द मनावें।
Luk 15:24  क्‍योंकि मेरा यह पुत्र मर गया था, फिर जी गया है : खो गय था, अब मिल गया है: और वे आनन्‍द करने लगे।
एक साल में बाइबल: 
  • न्यायियों ११-१२ 
  • लूका ६:१-२६

शुक्रवार, 30 मार्च 2012

राज्य और राज

   १९७७ में १५ वर्षीय केविन बौह और उसके एक और किशोर मित्र ने अपने मनोरंजन के लिए अपना ही एक राज्य बनाने का निर्णय लिया। उन्होंने एक नक्शा बनाया, एक झंडा बनाया और अपने राज्य में चलने वाले पैसे भी छपवाए; और मोलोशिया गणतंत्र की स्थापना कर ली। आज भी केविन बौह अपने छोटे से राष्ट्र को चलाते हैं, उसी उद्देश्य से जिसके साथ वह स्थापित किया गया - केवल अपने मनोरंजन के लिए। जब एक पत्रकार ने नेवाडा प्रांत में उनके उस १.३ एकड़ में फैले राज्य का दौरा किया, तो केविन ने उसे आश्वासन दिया कि वह अमेरिका को अपने सभी कर देते हैं, जिन्हें वे अमेरिका को दी गई "विदेशी सहायता" कहते हैं। केविन बौह ने माना कि यह सब केवल उनके मनोरंजन का साधन है, उनके व्यक्तिगत आनन्द के लिए ही है।

   हम में से शायद ही कोई होगा जो इस प्रकार का कोई सांसारिक राज्य अपने लिए बनाएगा, किंतु हम सब अपने अन्दर, अपने मन में एक राज्य बनाए रहते हैं, जिसपर किसका राज होगा, इसका निर्णय भी हम ही करते हैं। जो हमारे मन के राज्य पर राज करता है, वही हमारे जीवन को भी निर्देषित करता है और हमारे जीवनों में प्रगट होता है। परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पतरस ने लिखा: "पर मसीह को प्रभु जानकर अपने अपने मन में पवित्र समझो..." (१ पतरस ३:१५), अर्थात अपने अपने मन पर यीशु ही को अपना प्रभु मानो, उस ही को अपने मन पर राज करने दो।

   हम सबके अन्दर एक शक्ति है जो हमारे जीवनों को नियंत्रित करना चाहती है, हमें अपनी मन-मर्ज़ी करने के लिए उकसाती रहती है; चाहे वह हमारे मन का एक छोटा सा कोना ही हो जिसमें हम अपनी आत्मिक स्वतंत्रता अनुभव करना चाहते हैं और जहाँ हम किसी अन्य को बिलकुल भी जवाबदेह होना नहीं चाहते।

   किंतु वास्तविक स्वतंत्रता अपने मन को संपूर्णतः प्रभु यीशु के राज के आधीन कर देने में ही है, क्योंकि जहाँ प्रभु यीशु का राज है वहाँ उसकी शांति है, वहाँ भय नहीं है, वहाँ पवित्रता है, वहाँ उसकी सामर्थ है, वहाँ सर्वशक्तिमान द्वारा निर्देषित सामर्थी जीवन है।

   आपके मन के राज्य पर कौन राज करता है? क्या प्रभु यीशु? - डेविड मैक्कैसलैंड


जब यीशु हमारे जीवन का प्रभु होगा, तो हमारे पाँव उसके मार्गों पर चलेंगे।

पर मसीह को प्रभु जान कर अपने अपने मन में पवित्र समझो... - १ पतरस ३:१५
बाइबल पाठ: १ पतरस ३:८-१८
1Pe 3:8  निदान, सब के सब एक मन और कृपामय और भाईचारे की प्रीति रखने वाले, और करूणामय, और नम्र बनो।
1Pe 3:9 बुराई के बदले बुराई मत करो, और न गाली के बदले गाली दो; पर इस के विपरीत आशीष ही दो: क्‍योंकि तुम आशीष के वारिस होने के लिये बुलाए गए हो।
1Pe 3:10 क्‍योंकि जो कोई जीवन की इच्‍छा रखता है, और अच्‍छे दिन देखना चाहता है, वह अपनी जीभ को बुराई से, और अपने होंठों को छल की बातें करने से रोके रहे।
1Pe 3:11 वह बुराई का साथ छोड़े, और भलाई की करे; वह मेल मिलाप को ढूंढ़े, और उस के यत्‍न में रहे।
1Pe 3:12 क्‍योंकि प्रभु की आंखे धमिर्यों पर लगी रहती हैं, और उसके कान उन की विनती की ओर लगे रहते हैं, परन्‍तु प्रभु बुराई करने वालों के विमुख रहता है।
1Pe 3:13  और यदि तुम भलाई करने में उत्तेजित रहो तो तुम्हारी बुराई करने वाला फिर कौन है?
1Pe 3:14  और यदि तुम धर्म के कारण दुख भी उठाओ, तो धन्य हो; पर उन के डराने से मत डरो, और न घबराओ।
1Pe 3:15  पर मसीह को प्रभु जान कर अपने अपने मन में पवित्र समझो, और जो कोई तुम से तुम्हारी आशा के विषय में कुछ पूछे, तो उसे उत्तर देने के लिये सर्वदा तैयार रहो, पर नम्रता और भय के साथ।
1Pe 3:16 और विवेक भी शुद्ध रखो, इसलिये कि जिन बातों के विषय में वे जो तुम्हारे मसीही अच्‍छे चालचलन का अपमान करते हैं लज्ज़ित हों।
1Pe 3:17 क्‍योंकि यदि परमेश्वर की यही इच्‍छा हो, कि तुम भलाई करने के कारण दुख उठाओ, तो यह बुराई करने के कारण दुख उठाने से उत्तम है।
1Pe 3:18 इसलिये कि मसीह ने भी, अर्थात अधमिर्यों के लिये धर्मी ने पापों के कारण एक बार दुख उठाया, ताकि हमें परमेश्वर के पास पहुंचाए: वह शरीर के भाव से तो घात किया गया, पर आत्मा के भाव से जिलाया गया।
एक साल में बाइबल: 
  • न्यायियों ९-१० 
  • लूका ५:१७-३९

गुरुवार, 29 मार्च 2012

धन्यवादी

   हमारे मानव-संसाधन दल ने RBC Ministries में परस्पर संबंधों को प्रगाढ़ करने और उत्साहित करने के लिए एक कार्यक्रम बनाया है जो प्रभावी है, प्रोत्साहित करता है और कृतज्ञकता पर आधारित है।

   जब भी कोई कर्मचारी किसी दूसरे कर्मचारी को कोई अच्छा कार्य करते देखता है, तो वह हमारे मानव-संसाधन द्ल द्वारा बनाया गया एक विशेष धन्यवादी कार्ड लेकर अपनी प्रशंसा और प्रोत्साहन के कुछ शब्द लिखकर उसे दे देता है। जब हम प्रातः अपने अपने कार्य पर पहुँचते हैं और अपने लिए कोई धन्यवाद का कार्ड पाते हैं तो यह एक बहुत सुखद अनुभव होता है, प्रोत्साहित करता है और आपसी सम्बंधों को सुधारता है।

   क्या आपको नहीं लगता कि किसी अच्छे प्रकार से किए गए कार्य के लिए प्रशंसा मिलना भली बात है? क्या दूसरों से गर्मजोशी के साथ मिला धन्यवाद और प्रोत्साहन आपके दिन को संवार नहीं देता? क्या यह धन्यवाद, उस धन्यवाद देने वाले के साथ आपके संबंधों को कुछ बेहतर नहीं कर देता?

   धन्यवाद मिलना हर किसी को पसन्द आता है, परमेश्वर को भी। हमारा परमेश्वर पिता, उसके प्रति हमारे धन्यवाद की अभिव्यक्तियों से प्रसन्न होता है। यह उसकी इच्छा भी है कि उसके बच्चे उसके धन्यवादी रहें। परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस ने अपनी पत्रियों में लिखा: "हर बात में धन्यवाद करो: क्‍योंकि तुम्हारे लिये मसीह यीशु में परमेश्वर की यहीं इच्‍छा है" (१ थिस्सलुनीकियों ५:१८); और परमेश्वर के प्रति धन्यावादी होने को परमेश्वर की शांति प्राप्त करने का माध्यम बताया "किसी भी बात की चिन्‍ता मत करो: परन्‍तु हर एक बात में तुम्हारे निवेदन, प्रार्थना और विनती के द्वारा धन्यवाद के साथ परमेश्वर के सम्मुख अपस्थित किए जाएं। तब परमेश्वर की शान्‍ति, जो समझ से बिलकुल परे है, तुम्हारे हृदय और तुम्हारे विचारों को मसीह यीशु में सु्रक्षित रखेगी" (फिलिप्पियों ४:६, ७)।

   धन्यवाद वह कुंजी है जो बेहतर संबंधों के लिए द्वार खोलती है, मनुष्यों और परमेश्वर दोनो के साथ। धन्यवादी होने के अवसर ढूँढ़ते रहें, अपने सम्बंधों को बेहतर करते रहें, परमेश्वर से भी और मनुष्यों से भी।

   परमेश्वर का आदर करने, उसकी आराधना करने का सबसे बुनियादी तरीका है हर बात और हर परिस्थिति में उसके प्रति धन्यवादी होना और धन्यवादी बने रहना। - डेव ब्रैनन


परमेश्वर को ग्रहणयोग्य आराधना वही है जो उसके प्रति धन्यवादी और समर्पित मन से निकली हो।

यहोवा का धन्यवाद करो, उस से प्रार्थना करो, देश देश के लोगों में उसके कामों का प्रचार करो! - भजन १०५:१
बाइबल पाठ: भजन १०५:१-५
Psa 105:1  यहोवा का धन्यवाद करो, उस से प्रार्थना करो, देश देश के लोगों में उसके कामों का प्रचार करो!
Psa 105:2  उसके लिये गीत गाओ, उसके लिये भजन गाओ, उसके सब आश्चर्यकर्मों पर ध्यान करो!
Psa 105:3  उसके पवित्र नाम की बड़ाई करो; यहोवा के खोजियों का हृदय आनन्दित हो!
Psa 105:4  यहोवा और उसकी सामर्थ को खोजो, उसके दर्शन के लगातार खोजी बने रहो!
Psa 105:5  उसके किए हुए आश्चर्यकर्म स्मरण करो, उसके चमत्कार और निर्णय स्मरण करो!
एक साल में बाइबल: 
  • न्यायियों ७-८ 
  • लूका ५:१-१६