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शुक्रवार, 20 अप्रैल 2012

सांत्वना के लिए सामर्थ

   लोगों की कुछ आवश्यक्ताएं मन की गहराईयों से संबंधित होती हैं। अंग्रेज़ी भाषा के कवि एल्फ्रेड लॉर्ड टेनिसन ने लिखा, "कोई ऐसी सुबह नहीं है जिसकी शाम होते होते कहीं न कहीं कोई न कोई दिल न टूटा हो।"

   कभी कभी हमें ऐसे दुखी और टूटे हृदय वाले मित्रों या संबंधियों के पास जाना होता है जो मन की किसी गहरी पीड़ा से होकर निकल रहे होते हैं, और हमें समझ नहीं आता कि उन से क्या कहें, कैसे कहें। जो हमने अपने शिक्षकों और बुज़ुर्गों से सीखा है, वह उस दुख की घड़ी में, उन पर कुछ प्रभाव तो डाल सकता है, लेकिन जो शांति परमेश्वर के वचन से मिलती है, उस दुख की घड़ी में उन्हें वह कैसे प्रदान करें? परमेश्वर के वचन बाइबल में जैसा यशायाह भविष्यद्वक्ता कहता है, "प्रभु यहोवा ने मुझे सीखने वालों की जीभ दी है कि मैं थके हुए को अपने वचन के द्वारा संभालना जानूं" (यशायाह ५०:४), वैसी सामर्थ हम कैसे प्राप्त कर सकते हैं? यह तब ही संभव है जब जैसे यशायाह को वैसे ही हमें भी परमेश्वर स्वयं सिखाए।

   इसके लिए अनिवार्य है कि हम प्रभु यीशु के कदमों में बैठ कर उससे सीखें। जितना अधिक हम उससे पाएंगे, उतना अधिक हमारे पास दूसरों को देने के लिए होगा। जॉर्ज मैक्डौनल्ड परमेश्वर के साथ बिताए गए इस समय का चित्रण करते हुए कहते हैं "यह ऐसे है मानो परमेश्वर ही में हमें एक स्थान दिया गया है। उस स्थान में जा कर हमें दूसरों को प्रदान करने के लिए सामर्थ और प्रकाशन लाना है। हम इसी सेवा के लिए बने हैं।"

   जब हम एकांत में प्रार्थना के साथ परमेश्वर के वचन बाइबल पर मनन करते हैं, तो हम उस स्थान में होते हैं और परमेश्वर हम से बातें करता है। यह निजी एकांत मनन का समय ही वह स्थान है जहां से हम यशायाह के समान "सीखने वालों की जीभ" पाकर दुख की गहराईयों में पड़े लोगों के साथ सांत्वना बांटने के लिए सामर्थ और समझ पाते हैं जिस से हम निराश में डूबे लोगों को संभाल सकें। - डेविड रोपर


पहले परमेश्वर के हृदय से पाईए, फिर अपने हृद्य से उसे दूसरे के हृदय के साथ बांट लीजीए।
जो मैं तुम से अन्‍धियारे मे कहता हूं, उसे उजियाले में कहो; और जो कानों कान सुनते हो, उसे कोठों पर से प्रचार करो। - मत्ती १०:२७
बाइबल पाठ: यशायाह ५०:४, ५
Isa 50:4  प्रभु यहोवा ने मुझे सीखने वालों की जीभ दी है कि मैं थके हुए को अपने वचन के द्वारा संभालना जानूं। भोर को वह नित मुझे जगाता और मेरा कान खोलता है कि मैं शिष्य के समान सुनूं।
Isa 50:5  प्रभु यहोवा ने मेरा कान खोला है, और मैं ने विरोध न किया, न पीछे हटा।
एक साल में बाइबल: 
  • २ शमूएल ६-८ 
  • लूका १५:१-१०

बुधवार, 18 अप्रैल 2012

गलत अर्थ

   विलियम स्कोर्सबे १९वीं शताब्दी के एक समुद्री नाविक और अन्वेषक थे, जिन्होंने मसीही सेवकाई के लिए परमेश्वर की बुलाहट को माना और मसीही सेवकाई में लग गए। उनके सेवकाई के समय में भी नाविकों के दिशा सूचक यंत्र - कुतुबनुमा और उसकी कार्यविधि में उनकी रुचि बनी रही और अपने अनुसंधान से उन्होंने स्थापित किया कि सभी नवनिर्मित लोहे के जहाज़ अपना चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करते हैं जो उन के कुतुबनुमा पर प्रभाव डालता है और यह प्रभाव समुद्र में विभिन्न परिस्थितियों में बदलता रहता है, जिससे नाविक दिशा सूचक यंत्र से गलत दिशा लेकर घोर संकट में पड़ जाते हैं।

   कुतुबनुमा से मिली गलत दिशा और परमेशवर के वचन बाइबल के गलत अर्थ निकाले जाने के प्रभावों में बड़ी समानता है। प्रेरित पौलुस ने तिमुथियुस को आगाह किया कि वह "...कहानियों और अनन्‍त वंशावलियों पर मन न लगाएं, जिन से विवाद होते हैं" (१ तिमुथियुस १:४)। पौलुस ने आगे सिखाया कि परमेश्वर के वचन के सिद्धांतों में फेर-बदल करके लोग गलत शिक्षाओं में फंस जाते हैं और उससे कितनों का विश्वास रूपी जहाज़ डुब जाता है (पद १९); उसने ऐसे दो लोगों के नाम बताए - हुमिनयुस और सिकन्दर (पद २०) जो परमेश्वर के वचन के सही सिद्धांतों के स्थान पर गलत शिक्षाओं में पड़ने से इस नुकसान को उठा चुके थे।

   आज परमेश्वर के वचन बाइबल के सत्य पर हर ओर से प्रहार हो रहा है, यहां तक कि चर्च में भी कई गलत शिक्षाओं ने स्थान बना लिया है। हमारी व्यक्तिगत राय और विचार परमेश्वर के सिद्धांत बदल नहीं सकते। जीवन की यात्रा में परमेश्वर का वचन ही वह स्थिर दिशा सूचक है जो परिस्थितियों और लोगों के अनुसार नहीं बदलता; और बदलती परिस्थितियों में हमें उस वचन को ही अपना दिशा सूचक बनाना है, किंतु हर एक गलत  शिक्षा और गलत अर्थ से बच कर रहना है। इसीलिए परमेश्वर के वचन में लिखा है कि "मसीह के वचन को अपने हृदय में अधिकाई से बसने दो, और सिद्ध ज्ञान सहित एक दूसरे को सिखाओ, और चिताओ..." (कुलुस्सियों ३:१६)। - डेनिस फिशर


बुद्धिमानी की पहली पहचान है सत्य को जानना, और दूसरी है असत्य को पहचान पाना।
हे पुत्र तीमुथियुस, उन भविष्यद्ववाणियों के अनुसार जो पहिले तेरे विषय में की गई थीं, मैं यह आज्ञा सौंपता हूं, कि तू उन के अनुसार अच्‍छी लड़ाई को लड़ता रहे। और विश्वास और उस अच्‍छे विवेक को थामें रह जिसे दूर करने के कारण कितनों का विश्वास रूपी जहाज डूब गया। - १ तिमुथियुस १:१८-१९
बाइबल पाठ: कुलुस्सियों २:४-९
Col 2:4  यह मैं इसलिये कहता हूं, कि कोई मनुष्य तुम्हें लुभाने वाली बातों से धोखा न दे।
Col 2:5 क्‍योंकि मैं यदि शरीर के भाव से तुम से दूर हूं, तौभी आत्मिक भाव से तुम्हारे निकट हूं, और तुम्हारे विधि-अनुसार चरित्र और तुम्हारे विश्वास की जो मसीह में है दृढ़ता देखकर प्रसन्न होता हूं।
Col 2:6  सो जैसे तुम ने मसीह यीशु को प्रभु करके ग्रहण कर लिया है, वैसे ही उसी में चलते रहो।
Col 2:7 और उसी में जड़ पकड़ते और बढ़ते जाओ, और जैसे तुम सिखाए गए वैसे ही विश्वास में दृढ़ होते जाओ, और अत्यन्‍त धन्यवाद करते रहो।
Col 2:8 चौकस रहो कि कोई तुम्हें उस तत्‍व-ज्ञान और व्यर्थ धोखे के द्वारा अहेर न करे ले, जो मनुष्यों के परम्पराई मत और संसार की आदि शिक्षा के अनुसार है, पर मसीह के अनुसार नहीं।
Col 2:9 क्‍योंकि उस में ईश्वरत्‍व की सारी परिपूर्णता सदेह वास करती है।
एक साल में बाइबल: 
  • २ शमूएल ३-५ 
  • लूका १४:२५-३५

मंगलवार, 17 अप्रैल 2012

खामोशी

   कभी कभी किसी झूठे दोषारोपण के लिए खामोशी ही सही प्रत्युत्तर होता है, और कभी कभी किसी बात के लिए खामोश रहना अनुचित होता है। 
   जब प्रभु यीशु को धर्मसभा के सामने ला कर खड़ा किया गया और उसपर दोष मढ़े गए तो वह खामोश रहा (मरकुस १४:५३-६१)। वह जानता था कि उस परिस्थिति में अपना बचाव करना व्यर्थ है क्योंकि अधिकारी तो उसे दोषी ठहराकर उस का दण्ड निर्धारित भी कर चुके थे, जो चल रहा था वह उस दण्ड के निर्णय को लागू करने से पहले करी जाने वाली मात्र औपचारिकता थी, वहां उसे अपनी कोई सफाई देने का अवसर नहीं दिया जा रहा था और ना ही दण्ड के बदले जाने की कोई संभावना थी। खामोश रहकर वह यशायाह भविष्यद्वक्ता द्वारा उसके विष्य में करी गई भविष्यवाणी "वह सताया गया, तौभी वह सहता रहा और अपना मुंह न खोला; जिस प्रकार भेड़ वध होने के समय वा भेड़ी ऊन कतरने के समय चुपचाप शान्त रहती है, वैसे ही उस ने भी अपना मुंह न खोला" (यशायाह ५३:७) भी पूरी कर रहा था। किंतु इसी प्रभु यीशु ने, इन्हीं धर्मशास्त्रियों को उनके झूठ और दोषारोपण के लिए लताड़ा भी था, और उन्हें चुनौती भी दी थी कि उसमें कोई पाप साबित कर के दिखा दें (यूहन्ना ८:१३-५९)।

   एक पास्टर ने अपने चर्च के कार्य से इस्तीफा दे दिया क्योंकि चर्च के कुछ सदस्यों ने उसके बारे में गलत बातें चर्च मण्डली में फैलाईं थीं। उस पास्टर का मानना था कि उन परिस्थितियों में उसका अपनी प्रतिरक्षा करना उसके मसीही विश्वास के आचार के विरुद्ध होता। कभी कभी ऐसा होता है, किंतु उस परिस्थिति में बेहतर होता कि वह पास्टर स्वभाव ही से बखेड़ा खड़ा करने वाले उन लोगों का सामना करता, उनके झूठे आरोपों की पोल खोलता और अपना इस्तीफा देने की बजाए उन लोगों को चर्च के सामने गलती मानने या फिर अनुशासन का सामना करने में से एक चुनने को कहता।

   खामोश रहना गलत करने वालों को गलती करते रहने के लिए प्रोतसाहित भी कर सकता है। किंतु यदि हम केवल अपने आहत अहम के बचाव के लिए या मनुष्यों में अपनी महत्वता को प्रमाणीत करने के लिए ही प्रत्युत्तर देना चाहते हैं, तो मौन रहना और परमेश्वर के समय और न्याय की प्रतीक्षा करना ही बेहतर है।

   क्या आप पर झूठा दोषारोपण किया जा रहा है? यदि आप को लगता है कि प्रत्युत्तर देना व्यर्थ है, या आपका प्रत्युत्तर आपके चोट खाए अहम की रक्षा ही के अन्तर्गत है, तो परमेश्वर से सहने का अनुग्रह मांगें और खामोश रहें। परन्तु यदि आप समझते हैं कि गलत करने वालों को और उनकी गलती को सुधारने या किसी अन्याय को सुधारने का आपके पास उचित अवसर है तो उसके लिए परमेश्वर से सामर्थ और सदबुद्धि मांग कर अवश्य ही अपनी खामोशी तोड़िए और उचित कार्यवाही कीजिए। - हर्ब वैण्डर लुग्ट


खामोशी बहूमूल्य होती है; यदि आप बात को सुधार नहीं सकते तो खामोशी को बनाए रखिए।
तब महायाजक ने बीच में खड़े होकर यीशु से पूछा, कि तू कोई उत्तर नहीं देता ये लोग तेरे विरोध में क्‍या गवाही देते हैं? परन्‍तु वह मौन साधे रहा, और कुछ उत्तर न दिया: महायाजक ने उस से फिर पूछा, क्‍या तू उस परम धन्य का पुत्र मसीह है? - मरकुस १४:६०-६१
बाइबल पाठ: मरकुस १४:५३-६५
Mar 14:53  फिर वे यीशु को महायाजक के पास ले गए, और सब महायाजक और पुरिनए और शास्त्री उसके यहां इकट्ठे हो गए।
Mar 14:54  पतरस दूर ही दूर से उसके पीछे पीछे महायाजक के आंगन के भीतर तक गया, और प्यादों के साथ बैठ कर आग तापने लगा।
Mar 14:55  महायाजक और सारी महासभा यीशु के मार डालने के लिये उसके विरोध में गवाही की खोज में थे, पर न मिली।
Mar 14:56 क्‍योंकि बहुतेरे उसके विरोध में झूठी गवाही दे रहे थे, पर उन की गवाही एक सी न थी।
Mar 14:57  तब कितनों ने उठकर उस पर यह झूठी गवाही दी।
Mar 14:58 कि हम ने इसे यह कहते सुना है कि मैं इस हाथ के बनाए हुए मन्‍दिर को ढ़ा दूंगा, और तीन दिन में दूसरा बनाऊंगा, जो हाथ से न बना हो।
Mar 14:59  इस पर भी उन की गवाही एक सी न निकली।
Mar 14:60 तब महायाजक ने बीच में खड़े होकर यीशु से पूछा, कि तू कोई उत्तर नहीं देता ये लोग तेरे विरोध में क्‍या गवाही देते हैं?
Mar 14:61 परन्‍तु वह मौन साधे रहा, और कुछ उत्तर न दिया: महायाजक ने उस से फिर पूछा, क्‍या तू उस परम धन्य का पुत्र मसीह है?
Mar 14:62  यीशु ने कहा, हां मैं हूं: और तुम मनुष्य के पुत्र को सर्वशक्तिमान की दाहिनी और बैठे, और आकाश के बादलों के साथ आते देखोगे।
Mar 14:63 तब महायाजक ने अपने वस्‍त्र फाड़कर कहा, अब हमें गवाहों का क्‍या प्रयोजन है?
Mar 14:64 तुम ने यह निन्‍दा सुनी: तुम्हारी क्‍या राय है? उन सब ने कहा, वह वध के योग्य है।
Mar 14:65 तब कोई तो उस पर थूकने, और कोई उसका मुंह ढांपने और उसे घूंसे मारने, और उस से कहने लगे, कि भविष्यद्वाणी कर: और प्यादों ने उसे लेकर थप्‍पड़ मारे।
एक साल में बाइबल: 
  • २ शमूएल १-२ 
  • लूका १४:१-२४

सोमवार, 16 अप्रैल 2012

खज़ाने के पात्र

   यह कहा जाता है कि प्राचीन रोमी साम्राज्य जैतून के तेल से चलता था। जैतून का तेल उस समय भोजन पकाने, स्नान, सौन्दर्य-प्रसाधन बनाने, धार्मिक अनुष्ठान और संस्कारों, दीए जलाने और औषधि के रूप में होता था। कई दशकों तक दक्षिणी स्पेन से जैतून का तेल मिट्टी के घड़ों में पानी जहाज़ों द्वारा रोम तक लाया जाता था। फिर, क्योंकि वे घड़े वापस भेजने के लायक नहीं होते थे इसलिए फेंक दिए जाते थे, और लगभग २५ करोड़ टूटे घड़ों के उन टुकड़ों से वहां एक पहाड़ सा बन गया जो Monte Testaccio कहलाता है और रोम की टाइबर नदी के किनारे स्थित है। उन घड़ों की अपनी ना कोई सुन्दरता थी और ना कोई कीमत, जो भी उनकी कीमत और उपयोगिता थी वह उसमें रखी गई वस्तु के द्वारा ही थी।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में पौलुस प्रेरित द्वारा कुरिन्थुस की मण्डली को लिखी दूसरी पत्री में, मण्डली के लोगों को उसके कथन "परन्‍तु हमारे पास यह धन मिट्ठी के बरतनों में रखा है, कि यह असीम सामर्थ हमारी ओर से नहीं, वरन परमेश्वर ही की ओर से ठहरे" (२ कुरिन्थियों ४:७) का अर्थ समझना कठिन नहीं रहा होगा।

   उन मिट्टी के घड़ों के समान, हमारे शरीर भी क्षणिक, कभी भी टूट सकने या क्षतिग्रस्त हो सकने वाले और दीर्घकालीन उपयोग के लिए अयोग्य हैं। हमें कभी नहीं भूलना चाहिए कि हमारे शरीरों की वास्तविक कीमत हमारे बाहरी स्वरूप और सुन्दरता से नहीं वरन जो हम में विद्यमान है, उससे है। यदि मसीह और परमेश्वर का आत्मा हम में वास करता है, तो यही है जो हमारे शरीरों को वास्तव में बहूमूल्य और उपयोगी बनाता है।

   हम तो अपने आप में असामर्थी मिट्टी के पात्र हैं, जो प्रभु यीशु में विश्वास और पापों से पश्चाताप के द्वारा परमेश्वर के उपयोग के लिए बहूमूल्य बन जाते हैं और परमेश्वर का आत्मा हम में निवास करता है। परमेश्वर के इस अनुग्रह को अपना कर ऐसे जीवन जीएं जो संसार में मसीह की गवाही दे और दूसरों को भी इस बहूमूल्य खज़ाने का पात्र बनने के लिए आकर्षित करे। - डेविड मैक्कैसलैंड


मेरे जीवन से तब ही मसीह सबसे स्पष्ट दिखाई देता है जब मैं पृष्ठभूमि में हो जाता हूँ।
परन्‍तु हमारे पास यह धन मिट्ठी के बरतनों में रखा है, कि यह असीम सामर्थ हमारी ओर से नहीं, वरन परमेश्वर ही की ओर से ठहरे। - २ कुरिन्थियों ४:७
बाइबल पाठ: २ कुरिन्थियों ४:१-११
2Co 4:1  इसलिये जब हम पर ऐसी दया हुई, कि हमें यह सेवा मिली, तो हम हियाव नहीं छोड़ते।
2Co 4:2  परन्‍तु हम ने लज्ज़ा के गुप्‍त कामों को त्याग दिया, और न चतुराई से चलते, और न परमेश्वर के वचन में मिलावट करते हैं, परन्‍तु सत्य को प्रगट करके, परमेश्वर के साम्हने हर एक मनुष्य के विवेक में अपनी भलाई बैठाते हैं।
2Co 4:3  परन्‍तु यदि हमारे सुसमाचार पर परदा पड़ा है, तो यह नाश होने वालों ही के लिये पड़ा है।
2Co 4:4  और उन अविश्वासियों के लिये, जिन की बुद्धि को इस संसार के ईश्वर ने अन्‍धी कर दी है, ताकि मसीह जो परमेश्वर का प्रतिरूप है, उसके तेजोमय सुसमाचार का प्रकाश उन पर न चमके।
2Co 4:5  क्‍योंकि हम अपने को नहीं, परन्‍तु मसीह यीशु को प्रचार करते हैं, कि वह प्रभु है; और उसके विषय में यह कहते हैं, कि हम यीशु के कारण तुम्हारे सेवक हैं।
2Co 4:6  इसलिये कि परमेश्वर ही है, जिस ने कहा, कि अन्‍धकार में से ज्योति चमके; और वही हमारे हृदयों में चमका, कि परमेश्वर की महिमा की पहिचान की ज्योति यीशु मसीह के चेहरे से प्रकाशमान हो।
2Co 4:7  परन्‍तु हमारे पास यह धन मिट्ठी के बरतनों में रखा है, कि यह असीम सामर्थ हमारी ओर से नहीं, वरन परमेश्वर ही की ओर से ठहरे।
2Co 4:8  हम चारों ओर से क्‍लेश तो भोगते हैं, पर संकट में नहीं पड़ते; निरूपाय तो हैं, पर निराश नहीं होते।
2Co 4:9  सताए तो जाते हैं, पर त्यागे नहीं जाते; गिराए तो जाते हैं, पर नाश नहीं होते।
2Co 4:10  हम यीशु की मृत्यु को अपनी देह में हर समय लिये फिरते हैं, कि यीशु का जीवन भी हमारी देह में प्रगट हो।
2Co 4:11 क्‍योंकि हम जीते जी सर्वदा यीशु के कारण मृत्यु के हाथ में सौंपे जाते हैं कि यीशु का जीवन भी हमारे मरणहार शरीर में प्रगट हो।
एक साल में बाइबल: 
  • १ शमूएल ३०-३१ 
  • लूका १३:२३-३५

रविवार, 15 अप्रैल 2012

बदलाव के पात्र

   धर्मशास्त्र और धर्म संबंधी ४ वर्ष के प्रशिक्षण के बाद जब मैंने अपनी प्रथम सेवकाई में प्रवेश किया, तो मेरे पास परिवर्तन लाने की एक लंबी सूची थी। एक नया पास्टर होने के नाते, मेरा विचार था कि मेरी सेवकाई के स्थान में परिवर्तन लाने के लिए मुझे वहां लाया गया है, किंतु परमेश्वर ने उस स्थान और वहां के लोगों के द्वारा मुझे ही बदल दिया।

   उस स्थान की चर्च समीति के सदस्य मेरे सहायता में तत्पर तो थे किंतु प्रत्येक प्राशासनिक महत्व की बात में वे बड़ी सूक्ष्मता से मेरे द्वारा सावधानी बरत जाने को निश्चित करते थे। उन्होंने कभी मेरे पाँव ज़मीन से हटने नहीं दिए; उन्होंने सुनिश्चित किया कि मैं दूसरों के साथ मिल कर और दूसरों के विचारों का ध्यान रखते हुए ही प्रत्येक निर्णय लूँ और प्रत्येक कार्य करूँ जिससे अन्ततः सारे चर्च की मण्डली की बढ़ोतरी हो और किसी को मनमुटाव का अवसर ना रहे।

   हम अकसर सोचते हैं कि परमेश्वर ने हमें अपने आस-पास के स्थान पर वहां बदलाव लाने के लिए रखा है, परन्तु वास्तविकता यह होती है कि परमेश्वर हमें छाँट-तराश के हमें बदलना और निखारना चाहता है। जो कोई परमेश्वर की इस योजना के आधीन होकर अपने आप को उसके हाथों में छोड़ देता है, वह "...वह आदर का बरतन, और पवित्र ठहरेगा; और स्‍वामी के काम आएगा, और हर भले काम के लिये तैयार होगा" (२ तिमुथियुस २:२१)। अपनी इस योजना के अन्तर्गत परमेश्वर कुछ बड़े ही अनपेक्षित व्यक्तियों, अनपेक्षित स्थानों और अनपेक्षित अनुभवों को हमें जीवन के कुछ कठिन पाठ सिखाने के लिए उपयोग करता है। और फिर, जब हमें प्रतीत होता है कि हम सीख चुके हैं, तो जीवन का एक और नया पाठ हमारे सामने आ जाता है।

   अभी कुछ समय पहले ही मैंने अपनी सेवकाई में एक नया कार्य आरंभ किया है। अब इतने वर्षों के कार्य के बाद तो मुझे एक बुज़ुर्ग और अनुभवी कार्यकर्ता होना चाहिए था, किंतु मैं पाता हूँ कि मैं अभी भी सीख ही रहा हूँ, परमेश्वर अभी भी मुझ में बदलाव ला रहा है, मैं अभी भी बेहतर किया जा रहा हूँ। मैं अचंभित हूँ कि परमेश्वर अपने श्रेष्ठ उद्देश्यों के लिए मुझे अभी भी निखार रहा है, मेरे लिए कुछ और नई योजनाएं बना रहा है, मुझे कुछ नए तरीकों से कार्य करना सिखा रहा है।

   यदि आप भी बदलाव के पात्र बनना चाहते हैं तो बदलाव के सच्चे कर्ता के हाथों में अपने आप को छोड़ दें, उसका प्रतिरोध ना करें। हर बदलाव में परमेश्वर का उद्देश्य केवल आपकी भलाई और आप में होकर उसकी महिमा का होना ही है। - जो स्टोवैल


जब हम स्वयं बदले जाएंगे, हम बदलाव के पात्र तब ही बन सकेंगे।
 
यदि कोई अपने आप को इन से शुद्ध करेगा, तो वह आदर का बरतन, और पवित्र ठहरेगा; और स्‍वामी के काम आएगा, और हर भले काम के लिये तैयार होगा। - २ तिमुथियुस २:२१
 
बाइबल पाठ: २ तिमुथियुस २:१९-२६
2Ti 2:19  तौभी परमेश्वर की पक्की नेव बनी रहती है, और उस पर यह छाप लगी है, कि प्रभु अपनों को पहिचानता है, और जो कोई प्रभु का नाम लेता है, वह अधर्म से बचा रहे।
2Ti 2:20 बड़े घर में न केवल सोने-चान्‍दी ही के, पर काठ और मिट्टी के बरतन भी होते हैं; कोई कोई आदर, और कोई कोई अनादर के लिये।
2Ti 2:21 यदि कोई अपने आप को इन से शुद्ध करेगा, तो वह आदर का बरतन, और पवित्र ठहरेगा; और स्‍वामी के काम आएगा, और हर भले काम के लिये तैयार होगा।
2Ti 2:22  जवानी की अभिलाषाओं से भाग, और जो शुद्ध मन से प्रभु का नाम लेते हैं, उन के साथ धर्म, और विश्वास, और प्रेम, और मेल-मिलाप का पीछा कर।
2Ti 2:23 पर मूर्खता, और अविद्या के विवादों से अलग रह; क्‍योंकि तू जानता है, कि उन से झगड़े होते हैं।
2Ti 2:24 और प्रभु के दास को झगड़ालू होना न चाहिए, पर सब के साथ कोमल और शिक्षा में निपुण, और सहनशील हो।
2Ti 2:25 और विरोधियों को नम्रता से समझाए, क्‍या जाने परमेश्वर उन्‍हें मन फिराव का मन दे, कि वे भी सत्य को पहिचानें।
2Ti 2:26 और इस के द्वारा उस की इच्‍छा पूरी करने के लिये सचेत होकर शैतान के फंदे से छूट जाए।
 
एक साल में बाइबल: 
  • १ शमूएल २७-२९ 
  • लूका १३:१-२२

शनिवार, 14 अप्रैल 2012

अदृश्य सेवक

   मैं अपने हाथों के नाखून साफ करने और संवारने में लगी हुई थी, मेरा ध्यान अपने दोनो हाथों के कार्यों के प्रति गया, और मुझे अपने दाहिने हाथ पर दया आई। मेरा दाहिना हाथ ही सबसे अधिक कार्य करता है, किंतु मेरे बाएं हाथ को अधिक प्रशंसा मिलती है! मेरा दाहिना हाथ, बाएं हाथ के नाखूनों पर कुशलता और सुन्दरता से पॉलिश लगाता है, उनकी सफाई करता है और उन्हें सुन्दर बना के रखता है; मेरे बाएं हाथ में यह निपुणता नहीं है, इसलिए दाहिने हाथ के लिए प्रत्युत्तर में वह वैसे कार्य ही नहीं कर पाता। बाएं हाथ से दाहिने हाथ पर लगी पॉलिश बिखरी हुई और असमान होती है, इसलिए कम निपुण बाएं हाथ की अपेक्षा, निपुण और कार्यकुशल दाहिना हाथ देखने में भद्दा, और बांया हाथ सुन्दर प्रतीत होता है। काम कोई करता है, प्रशंसा का पात्र कोई और बन जाता है।

   इन बातों के बारे में सोचते सोचते, मेरा ध्यान इसी से संबंधित एक और बात की ओर गया - मेरे चर्च के लोगों की ओर। जहां मैं आराधना के लिए जाती हूँ उस चर्च में बहुत से लोग हैं जो अपने कौशल और मेहनत के द्वारा दूसरों के लिए जीवन आसान कर देते हैं। किंतु ये मेहनती लोग शायद ही कभी किसी की नज़रों में आते हों, क्योंकि वे ऐसे काम करते हैं कि लोगों का ध्यान उनकी बजाए किसी अन्य की ओर जाता है। यह अनुचित लगता है कि इतनी मेहनत कोई करे और फिर उसे, प्रशंसा तो दूर, कोई पहिचान भी ना मिले।

   किंतु वे मसीही विश्वासी जो वास्तव में सेवा-भाव से कार्य करते हैं, इस नज़रिए से इन बातों को नहीं देखते। वे सदा दूसरों को महत्व देते हैं (रोमियों १२:१०), क्योंकि वे जानते हैं कि परमेश्वर वह देखता है जो मनुष्य नहीं देखता - और सही समय पर उन्हें परमेश्वर से अपना प्रतिफल भी भरपूरी से मिलेगा (मत्ती ६:४, ६, १८; १ कुरिन्थियों १२:२४)।

   क्या आज आप इस बात को लेकर दुखी हैं कि आपकी कड़ी मेहनत का श्रेय और प्रशंसा कोई और ले रहा है? निराश मत हों, धैर्य रखें। परमेश्वर हर बात का हिसाब रखता है, और न्याय तथा धार्मिकता के साथ हर बात का हिसाब चुकाएगा भी। मसीह का कोई भी अदृश्य सेवक अपने प्रतिफल से कभी भी वंचित न रहेगा। - जूली ऐकैरमैन लिंक


मसीह के लिए किए गए किसी भी कार्य की उपेक्षा नहीं होती।

तू मेरे मारे मारे फिरने का हिसाब रखता है; तू मेरे आंसुओं को अपनी कुप्पी में रख ले! क्या उनकी चर्चा तेरी पुस्तक में नहीं है? - भजन ५६:८
बाइबल पाठ: रोमियों १२:१-११
Rom 12:1  इसलिये हे भाइयों, मैं तुम से परमेश्वर की दया स्मरण दिला कर बिनती करता हूं, कि अपने शरीरों को जीवित, और पवित्र, और परमेश्वर को भावता हुआ बलिदान कर के चढ़ाओ: यही तुम्हारी आत्मिक सेवा है।
Rom 12:2 और इस संसार के सदृश न बनो, परन्‍तु तुम्हारी बुद्धि के नये हो जाने से तुम्हारा चाल-चलन भी बदलता जाए, जिस से तुम परमेश्वर की भली, और भावती, और सिद्ध इच्‍छा अनुभव से मालूम करते रहो।
Rom 12:3 क्‍योंकि मैं उस अनुग्रह के कारण जो मुझ को मिला है, तुम में से हर एक से कहता हूं, कि जैसा समझना चाहिए, उस से बढ़ कर कोई भी अपने आप को न समझे पर जैसा परमेश्वर ने हर एक को परिमाण के अनुसार बांट दिया है, वैसा ही सुबुद्धि के साथ अपने को समझे।
Rom 12:4 क्‍योंकि जैसे हमारी एक देह में बहुत से अंग हैं, और सब अंगों का एक ही सा काम नहीं।
Rom 12:5  वैसा ही हम जो बहुत हैं, मसीह में एक देह हो कर आपस में एक दूसरे के अंग हैं।
Rom 12:6  और जब कि उस अनुग्रह के अनुसार जो हमें दिया गया है, हमें भिन्न भिन्न वरदान मिले हैं, तो जिस को भविष्यद्वाणी का दान मिला हो, वह विश्वास के परिमाण के अनुसार भविष्यद्वाणी करे।
Rom 12:7  यदि सेवा करने का दान मिला हो, तो सेवा में लगा रहे, यदि कोई सिखाने वाला हो, तो सिखाने में लगा रहे।
Rom 12:8 जो उपदेशक हो, वह उपदेश देने में लगा रहे, दान देने वाला उदारता से दे, जो अगुआई करे, वह उत्‍साह से करे, जो दया करे, वह हर्ष से करे।
Rom 12:9 प्रेम निष्‍कपट हो, बुराई से घृणा करो, भलाई मे लगे रहो।
Rom 12:10 भाईचारे के प्रेम से एक दूसरे पर दया रखो; परस्‍पर आदर करने में एक दूसरे से बढ़ चलो।
Rom 12:11 प्रयत्‍न करने में आलसी न हो; आत्मिक उन्माद में भरो रहो, प्रभु की सेवा करते रहो।
एक साल में बाइबल: 
  • १ शमूएल २५-२६ 
  • लूका १२:३२-५९

शुक्रवार, 13 अप्रैल 2012

सदैव जागरूक

   सभी स्तनधारी जीवों में, जिराफ सबसे कम सोता है। जिराफ के सोने का समय, २४ घंटों में से १०मिनिट से २ घंटे के बीच, और औसतन १.९ घंटे प्रतिदिन का ही होता है। लगभग लगातार ही जागते रहने वाले इस जीव की हम मनुष्यों के साथ इस मामले में कोई समानता नहीं है। यदि किसी मनुष्य में इतना कम सोने की प्रवृति हो तो उसे अनिद्रारोग (Insomnia) माना जाता है और चिकित्सा लेने की आवश्यक्ता पड़ती है। किंतु जिराफ के लिए यह "कम" सोना कोई रोग नहीं है, परमेश्वर ने उसे ऐसा ही बनाया है, यह उसके लिए सामन्य है।

   यदि आप सोचते हैं कि २४ में से केवल १.९ घंटे की नींद कोई खास नींद नहीं है, तो अपने सृष्टिकर्ता परमेश्वर के बारे में सोचिए जो कभी नहीं सोता, सदा अपनी सृष्टि के लिए जागरूक रहता है।

   हमारे प्रति परमेश्वर के लगातार बने रहने वाले ध्यान के लिए परमेश्वर के वचन बाइबल में भजनकार कहता है, "वह तेरे पांव को टलने न देगा, तेरा रक्षक कभी न ऊंघेगा" (भजन १२१:३)। इस भजन में भजनकार स्पष्ट करता है कि परमेश्वर का यह सदैव जागरूक रहना हमारी भलाई के लिए है। इसी भजन के ५वें पद में भजनकार परमेश्वर को हमारा रक्षक बताता है। परमेश्वर हमें संभाले रहता है, हमारी चिंता करता है, हमारी रक्षा करता है। हमारा सदैव जागरूक परमेश्वर सदैव हमारी भलाई ही में लगा रहता है। एक स्तुति गीत में जैसे गीतकार ने लिखा: "वह ना कभी सोता है, ना कभी ऊँघता है; वह रात-दिन मेरी रखवाली करता है"।

   क्या आज आप परेशानियों का सामना कर रहे हैं? उसकी ओर मुड़िए जो आपके लिए सदैव जागरूक रहता है। अपना जीवन और अपने जीवन का हर पल उस परमेश्वर के हाथों में समर्पित कर दीजिए क्योंकि, "यहोवा तेरे आने जाने में तेरी रक्षा अब से लेकर सदा तक करता रहेगा" (भजन १२१:८)। - बिल क्राउडर


वह जो सृष्टि को थामे और संभाले हुए है, आपको भी कभी अस्थिर होने या गिरने नहीं देगा।

वह तेरे पांव को टलने न देगा, तेरा रक्षक कभी न ऊंघेगा। - भजन १२१:३
 
बाइबल पाठ: भजन १२१
Psa 121:1  मैं अपनी आंखें पर्वतों की ओर लगाऊंगा। मुझे सहायता कहां से मिलेगी?
Psa 121:2  मुझे सहायता यहोवा की ओर से मिलती है, जो आकाश और पृथ्वी का कर्त्ता है।
Psa 121:3  वह तेरे पांव को टलने न देगा, तेरा रक्षक कभी न ऊंघेगा।
Psa 121:4  सुन, इस्राएल का रक्षक, न ऊंघेगा और न सोएगा।
Psa 121:5  यहोवा तेरा रक्षक है; यहोवा तेरी दहिनी ओर तेरी आड़ है।
Psa 121:6  न तो दिन को धूप से, और न रात को चांदनी से तेरी कुछ हानि होगी।
Psa 121:7  यहोवा सारी विपत्ति से तेरी रक्षा करेगा; वह तेरे प्राण की रक्षा करेगा।
Psa 121:8  यहोवा तेरे आने जाने में तेरी रक्षा अब से लेकर सदा तक करता रहेगा।
 
एक साल में बाइबल: 
  • १ शमूएल २२-२४ 
  • लूका १२:१-३१