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मंगलवार, 1 मई 2012

संतुष्टि

   जिग-सौ पज़ल के चित्र को पूर्ण बना पाने की संतुष्टि के लिए हमें उस चित्र के सभी भागों की आवश्यक्ता होती है। कई प्रकार से जीवन भी कुछ ऐसा ही है। हम अपने दिन अपने जीवन के बिखरे हुए टुकड़ों को जमा करने और फिर उन्हें ठीक से जोड़ कर एक अच्छा और पूर्ण चित्र बनाने में लगे रहते हैं, किंतु फिर भी कभी कभी लगता है कि कोई भाग कहीं ग़ायब है, चित्र अधूरा है और संतुष्टि नहीं है।

   ऐसे में थोड़ा रुक कर जांचना आवश्यक है कि क्या हम चित्र को पूरा करने के लिए गलत भागों को लगाने के प्रयास तो नहीं कर रहे? यद्यपि हम जानते हैं कि जिस जीवन में परमेश्वर केंद्रबिंदु नहीं है वह जीवन अपने सबसे महत्वपूर्ण भाग से रहित है, क्या फिर भी हम ऐसे जीवन व्यतीत कर रहे हैं मानों परमेश्वर हमारे लिए कोई विशेष महत्व नहीं रखता? चाहे हम नियमित रूप से चर्च जाते हों, आराधना में सम्मिलित होते हों, तो भी क्या परमेश्वर हमारे जीवन में सबसे अधिक महत्व रखता है? कई बार हम परमेश्वर से अपनी दूरी के आदी हो जाते हैं, उस की कमी हमें कुछ विशेष नहीं खलती, और हमारे लिए पाप में पड़ जाना या समझौता कर लेना सरल हो जाता है, बिना यह एहसास रखे कि इस से हमारे जीवन का एक बहुत महत्वपूर्ण भाग नष्ट हो रहा है।

   लेकिन हम चाहे परमेश्वर से कितने ही दूर चले जाएं, वह सदा हमें अपने पास लाने के प्रयासों में लगा रहता है, क्योंकि उसकी लालसा यही रहती है कि उस की संतान उसके पास रहे। परमेश्वर ने अपने वचन बाइबल में अपने नबी यशायाह द्वारा अपनी प्रजा से कहलवाया: "जो भोजनवस्तु नहीं है, उसके लिये तुम क्यों रूपया लगाते हो, और, जिस से पेट नहीं भरता उसके लिये क्यों परिश्रम करते हो? मेरी ओर मन लगा कर सुनो, तब उत्तम वस्तुएं खाने पाओगे और चिकनी चिकनी वस्तुएं खाकर सन्तुष्ट हो जाओगे" (यशायाह ५५:२)।

   यदि आपके जीवन से भी कुछ खोया हुआ प्रतीत होता है, तो स्मरण रखिए कि केवल परमेश्वर ही है जो आपको भरपूरी से संतुष्टि और संपूर्ण तृप्ति दे सकता है। उसे ही अपने जीवन के चित्र को पूर्ण करने दीजिए। उसकी संतुष्टि स्थाई संतुष्टि है। - जो स्टोवैल


प्रत्येक मन में ऐसी लालसाएं हैं जिन्हें केवल यीशु ही तृप्त कर सकता है।
जो भोजनवस्तु नहीं है, उसके लिये तुम क्यों रूपया लगाते हो, और, जिस से पेट नहीं भरता उसके लिये क्यों परिश्रम करते हो? मेरी ओर मन लगा कर सुनो, तब उत्तम वस्तुएं खाने पाओगे और चिकनी चिकनी वस्तुएं खाकर सन्तुष्ट हो जाओगे। - यशायाह ५५:२
बाइबल पाठ: यशायाह ५५:१-६
Isa 55:1  अहो सब प्यासे लोगो, पानी के पास आओ, और जिनके पास रूपया न हो, तुम भी आकर मोल लो और खाओ! दाखमधु और दूध बिन रूपए और बिना दाम ही आकर ले लो।
Isa 55:2  जो भोजनवस्तु नहीं है, उसके लिये तुम क्यों रूपया लगाते हो, और, जिस से पेट नहीं भरता उसके लिये क्यों परिश्रम करते हो? मेरी ओर मन लगा कर सुनो, तब उत्तम वस्तुएं खाने पाओगे और चिकनी चिकनी वस्तुएं खाकर सन्तुष्ट हो जाओगे।
Isa 55:3  कान लगाओ, और मेरे पास आओ; सुनो, तब तुम जीवित रहोगे, और मैं तुम्हारे साथ सदा की वाचा बान्धूंगा अर्थात दाऊद पर की अटल करूणा की वाचा।
Isa 55:4  सुनो, मैं ने उसको राज्य राज्य के लोगों के लिये साक्षी और प्रधान और आज्ञा देने वाला ठहराया है।
Isa 55:5  सुन, तू ऐसी जाति को जिसे तू नहीं जानता बुलाएगा, और ऐसी जातियां जो तुझे नहीं जानतीं तेरे पास दौड़ी आएंगी, वे तेरे परमेश्वर यहोवा और इस्राएल के पवित्र के निमित्त यह करेंगी, क्योंकि उस ने तुझे शोभायमान किया है।
Isa 55:6  जब जब यहोवा मिल सकता है तब तक उसकी खोज में रहो, जब तक वह निकट है तब तक उसे पुकारो;
एक साल में बाइबल: 
  • १ राजा १०-११ 
  • लूका २१:२०-३८

सोमवार, 30 अप्रैल 2012

सहारा

   एक सुसमाचार सभा में वक्ता अपने सन्देश में समझा रहा था कि प्रभु यीशु मसीह में बने रहने और हर परीक्षा में उस पर पूर्णतः विश्वास करने का तात्पर्य क्या है। अपने सन्देश को समाप्त करते समय उन्होंने कई बार दोहराया कि इसका अर्थ है कि हर बात और हर परिस्थित के लिए आप विश्वास करेंगे कि ’इस बात के लिए मुझे यीशु का सहारा है’।

   सन्देश के बाद सभा में उपस्थित श्रोताओं को समय दिया गया कि वे अपने अनुभव बताएं और इस संबंध में अपने जीवन से गवाही दें। एक महिला ने उठ कर कहा, "कुछ मिनिट पहले मुझे एक सन्देश मिला कि मेरी माँ बहुत बिमार हैं और मुझे पहली गाड़ी से घर पहुँचकर उनसे मिल लेना चाहिए। तुरंत मैं जान गई कि आज का यह सन्देश मेरे लिए था। मैंने ऊपर की ओर देख कर कहा ’इस बात के लिए मुझे यीशु का सहारा है’ और उसी क्षण एक अद्भुत शांति और सामर्थ्य से मेरा मन भर गया, मेरी चिन्ताएं दूर हो गईं।"

   इस बात के कोई तीन या चार सप्ताह पश्चात उस प्रचारक को उसी महिला का एक पत्र मिला, जिसमें उस ने लिखा था, "उस दिन के दिए गए सन्देश के लिए एक बार फिर आपका धन्यवाद। तब से मेरे लिए जीवन एक निरन्तर विजय का स्तुति गीत बन गया है, क्योंकि मैं अब जान गई हूँ कि जीवन में चाहे जो भी परिस्थिति क्यों ना आए, हर बात के लिए मुझे यीशु का सहारा है।"

   उस मसीही विश्वासी महिला ने अपने उद्धारकर्ता मसीह यीशु में उसे पा लिया था जिसका वायदा है कि वह उन्हें हर आग और जल से उबार कर सुख से भर देगा (भजन ६६:१२)। यदि आप भी किसी परीक्षा में हैं या किसी बात से निराश हैं, तो स्मरण रखिए, हर बात के लिए आपको यीशु का सहारा उपलब्ध है। जो हाथ विश्वास से एक बार उसके हाथ में रख दिया जाता है उसे वह न कभी छोड़ता है और ना कभी त्यागता है। - हेनरी जी. बौश


यदि हर परिस्थिति में हम मसीह में बने हुए पाए जाते हैं, तो हर परिस्थिति में हमें मसीह हमारे साथ खड़ा मिलेगा।
तुम्हारा स्‍वभाव लोभरिहत हो, और जो तुम्हारे पास है, उसी पर संतोष किया करो, क्‍योंकि उस ने आप ही कहा है, कि मैं तुझे कभी न छोडूंगा, और न कभी तुझे त्यागूंगा। - इब्रानियों १३:५
बाइबल पाठ: भजन ६६:१-२०
Psa 66:1  हे सारी पृथ्वी के लोगों, परमेश्वर के लिये जयजयकार करो;
Psa 66:2  उसके नाम की महिमा का भजन गाओ, उसकी स्तुति करते हुए, उसकी महिमा करो।
Psa 66:3  परमेश्वर से कहो, कि तेरे काम क्या ही भयानक हैं! तेरी महासामर्थ्य के कारण तेरे शत्रु तेरी चापलूसी करेंगे।
Psa 66:4  सारी पृथ्वी के लोग तुझे दण्डवत् करेंगे, और तेरा भजन गाएंगे, वे तेरे नाम का भजन गाएंगे।
Psa 66:5  आओ परमेश्वर के कामों को दखो, वह अपने कार्यों के कारण मनुष्यों को भययोग्य देख पड़ता है।
Psa 66:6  उस ने समुद्र को सूखी भूमि कर डाला, वे महानद में से पांव पावं पार उतरे। वहां हम उसके कारण आनन्दित हुए,
Psa 66:7  जो पराक्रम से सर्वदा प्रभुता करता है, और अपनी आंखों से जाति जाति को ताकता है। हठीले अपने सिर न उठाएं।
Psa 66:8  हे देश देश के लोगो, हमारे परमेश्वर को धन्य कहो, और उसकी स्तुति में राग उठाओ,
Psa 66:9  जो हम को जीवित रखता है, और हमारे पांव को टलने नहीं देता।
Psa 66:10  क्योंकि हे परमेश्वर तू ने हम को जांचा, तू ने हमें चान्दी की नाईं ताया था।
Psa 66:11  तू ने हम को जाल में फंसाया, और हमारी कटि पर भारी बोझ बान्धा था;
Psa 66:12  तू ने घुड़चढ़ों को हमारे सिरों के ऊपर से चलाया, हम आग और जल से होकर गए, परन्तु तू ने हम को उबार के सुख से भर दिया है।
Psa 66:13  मैं होमबलि लेकर तेरे भवन में आऊंगा मैं उन मन्नतों को तेरे लिये पूरी करूंगा,
Psa 66:14  जो मैं ने मुंह खोल कर मानीं, और संकट के समय कही थीं।
Psa 66:15  मैं तुझे मोटे पशुओं के होमबलि, मेढ़ों की चर्बी के धूप समेत चढ़ऊंगा; मैं बकरों समेत बैल चढ़ाऊंगा।
Psa 66:16  हे परमेश्वर के सब डरवैयों आकर सुनो, मैं बताऊंगा कि उस ने मेरे लिये क्या क्या किया है।
Psa 66:17  मैं ने उसको पुकारा, और उसी का गुणानुवाद मुझ से हुआ।
Psa 66:18  यदि मैं मन में अनर्थ बात सोचता तो प्रभु मेरी न सुनता।
Psa 66:19  परन्तु परमेश्वर ने तो सुना है, उस ने मेरी प्रार्थना की ओर ध्यान दिया है।
Psa 66:20  धन्य है परमेश्वर, जिस ने न तो मेरी प्रार्थना अनसुनी की, और न मुझ से अपनी करूणा दूर कर दी है! 
एक साल में बाइबल: 
  • २ शमूएल १४-१५ 
  • लूका १७:१-१९

ईमानदारी दिवस

   अमेरिका में आज का दिन "ईमानदारी दिवस" के नाम से जाना जाता है। अप्रैल की ३० तारीख के लिए यह उपनाम कोई बहुत प्रचलित नाम नहीं है, किंतु फिर भी महत्वपूर्ण अवश्य है। लेखक एम. हिर्ष गोल्डबर्ग ने १९९० के दशक में इसे ईमानदार लोगों का आदर करने और ईमानदारी को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से स्थापित किया था। उनका अप्रैल माह के इस अन्तिम दिन को ईमानदारी दिवस के लिए चुनने का कारण था कि अप्रैल माह का पहला दिन असत्य को समर्पित रहता है, सारे विश्व में इसे ’अप्रैल फूल्स दिवस’ के रूप में माना जाता है और उस दिन असत्य द्वारा लोगों के मूर्ख बनाए जाने के प्रयास किए जाते हैं, इसलिए गोल्डबर्ग ने चाहा कि अप्रैल का अन्त एक उत्तम नैतिक स्तर पर होना चाहिए।

   ईमानदारी दिवस एक अच्छा समय है कि हम इस गुण का मूल्यांकन इस संबंध में परमेश्वर के वचन की शिक्षाओं के आधार पर करें। जीवन में हर बात में ईमानदारी इतनी सरल नहीं है जितनी प्रतीत होती है, किंतु ईमानदारी का जीवन व्यतीत करने के हमारे सच्चे प्रयास परमेश्वर को प्रसन्न अवश्य करते हैं।

   ईमानदारी की समझ आरंभ होती है, हमारे अनुकर्णीय सर्वोच्च उदाहरण परमेश्वर के चरित्र से। परमेश्वर का वचन बाइबल हमें बताती है कि परमेश्वर: 
  • सत्य है (व्यवस्थाविवरण ३२:४); 
  • वह कभी झूठ या असत्य नहीं बोल सकता (गिनती २३:१९, इब्रानियों ६:१८); 
  • वह दोगलेपन से घृणा करता है (नीतिवचन ६:१६-१९)। 

बाइबल यह भी बताती है कि सभी असत्य और झूठ का उदग्म शैतान ही से है ( यूहन्ना ८:४४)।

   अपने जीवनों के लिए हम बाइबल से लिए गए इन खण्डों पर ध्यान कर सकते हैं: 
  • धर्मी जन झूठ से घृणा करता है (नीतिवचन १३:५); 
  • प्रेम सत्य से आनन्दित होता है (१ कुरिन्थियों १३:६); 
  • झूठ बोलना पुराने मनुष्यत्व का भाग है (कुलुस्सियों ३:९); 
  • उन्नति के लिए छल, पाखण्ड और कपट को छोड़ना अनिवार्य है (१ पतरस २:१) और 
  • धार्मिकता प्रकट करने के लिए केवल सत्य ही बोलना है (नीतिवचन १२:१७)।

   आईए केवल अप्रैल के इस अन्तिम दिन को ही नहीं, वरन अपने जीवन के प्रत्येक दिन को हम "ईमानदारी दिवस" के रूप में मनाएं। - डेव ब्रैनन


जो लोग परमेश्वर के वचन पर विश्वास करते हैं उनके अपने वचन भी विश्वासयोग्य रहने चाहिएं।
झूठों से यहोवा को घृणा आती है परन्तु जो विश्वास से काम करते हैं, उन से वह प्रसन्न होता है। - नीतिवचन १२:२२
बाइबल पाठ: नीतिवचन १२:१७-२२
Pro 12:17  जो सच बोलता है, वह धर्म प्रगट करता है, परन्तु जो झूठी साक्षी देता, वह छल प्रगट करता है।
Pro 12:18  ऐसे लोग हैं जिनका बिना सोचविचार का बोलना तलवार की नाई चुभता है, परन्तु बुद्धिमान के बोलने से लोग चंगे होते हैं।
Pro 12:19  सच्चाई सदा बनी रहेगी, परन्तु झूठ पल ही भर का होता है।
Pro 12:20  बुरी युक्ति करने वालों के मन में छल रहता है, परन्तु मेल की युक्ति करने वालों को आनन्द होता है।
Pro 12:21  धर्मी को हानि नहीं होती है, परन्तु दुष्ट लोग सारी विपत्ति में डूब जाते हैं।
Pro 12:22  झूठों से यहोवा को घृणा आती है परन्तु जो विश्वास से काम करते हैं, उन से वह प्रसन्न होता है।
एक साल में बाइबल: 
  • १ राजा ८-९ 
  • लूका २१:१-१९

रविवार, 29 अप्रैल 2012

व्यस्त जीवन

   क्या आपका लगता हि कि आपका जीवन बहुत व्यस्त है? कारोबार के निर्णय और उन्हें पूरा करने की समय सीमाएं, कार्य को पूरा करने के दबाव, बच्चों को शिक्षा और कार्यक्रमों में लाने-लेजाने के दबाव इत्यादि क्या आपके जीवन में व्यक्तिगत बातों के लिए समय के आभाव को उत्पन्न करते हैं? ऐसी परिस्थितियों में यह सोचना बहुत आसान है कि, "काश मेरे पास निभाने के लिए इतनी सारी ज़िम्मेवारियाँ नहीं होतीं, फिर मैं भी परमेश्वर के साथ एक निकट संबंध में चल पाता।"

   यदि ऐसा है तो लेखक सी.एस.ल्यूइस द्वारा कही बात पर ध्यान कीजिए, उन्होंने कहा कि "प्रभु यीशु के समान व्यस्त व्यक्ति और कोई नहीं था। हमारे लिए अनुसरण करने का नमूना हमारा प्रभु यीशु ही है; वह यीशु जो सदा ही हमें अपनी बढ़ई की दुकान में कार्यरत, या सड़क पर, या भीड़ में, या आलोचनाओं, बाधाओं और विरोध का सामना करते, या उसके निज समय में लोगों के हस्ताक्षेप होते हुए मिलता है। वही मानव परिस्थितियों में ईश्वरीय जीवन सफलता से जी के दिखाने का उदाहरण है।"

   परमेश्वर के वचन बाइबल में मरकुस १:२१-३५ में हम प्रभु यीशु के जीवन के एक दिन के बारे में पढ़ते हैं; उस व्यस्त दिन के अन्त को देखिए "सन्‍ध्या के समय जब सूर्य डूब गया तो लोग सब बीमारों को और उन्‍हें जिन में दुष्‍टात्मा थीं उसके पास लाए। और सारा नगर द्वार पर इकट्ठा हुआ। और उस ने बहुतों को जो नाना प्रकार की बीमारियों से दुखी थे, चंगा किया; और बहुत से दुष्‍टात्माओं को निकाला, और दुष्‍टात्माओं को बोलने न दिया, क्‍योंकि वे उसे पहचानती थीं" (मरकुस १:२-३४)। और फिर हम पढ़ते हैं कि अगले दिन यीशु तड़के ही उठकर प्रार्थना करने को एकांत में निकल गया (मरकुस १:३५), जहां उसने फिर अपने पिता परमेश्वर से, उस आरंभ हुए दिन की व्यस्तता के लिए निर्देष और सामर्थ प्राप्त करी। यही हमारे प्रभु की सफलता का राज़ था - पिता परमेश्वर से लगातार बनी संगति और पवित्र आत्मा पर निर्भर होकर कार्य करना।

   आज भी प्रभु के विश्वासियों के लिए यही उनकी भी सफलता की कुंजी है, परमेश्वर पिता के साथ लगातार बनी रहने वाली संगति और परमेश्वर के निर्देषानुसार पवित्र आत्मा की आज्ञाकारिता और सामर्थ में कार्य करना।

   क्या आप का जीवन व्यस्त है? प्रभु यीशु के उदाहरण का अनुसरण कीजिए, परमेश्वर के साथ बातचीत के लिए एक समय निरधारित करके रख लीजिए और फिर परमेश्वर पर निर्भर कीजिए कि वह प्रत्येक दिन की आवश्यक्ताओं के लिए आपको मार्गदर्शन दे और योग्य सामर्थ से परिपूर्ण करे। - डेनिस फिशर


अपने जीवन के सन्तुलन को बनाए रखने के लिए प्रभु यीशु पर आलम्बित हो जाइए।
और भोर को दिन निकलने से बहुत पहिले, वह उठकर निकला, और एक जंगली स्थान में गया और वहां प्रार्थना करने लगा। - मरकुस १:३५
बाइबल पाठ: मरकुस १:२१-३५
Mar 1:21  और वे कफरनहूम में आए, और वह तुरन्‍त सब्‍त के दिन सभा के घर में जाकर उपदेश करने लगा।
Mar 1:22  और लोग उसके उपदेश से चकित हुए, क्‍योंकि वह उन्‍हें शास्‍त्रियों की नाईं नहीं, परन्‍तु अधिकारी की नाईं उपदेश देता था।
Mar 1:23   और उसी समय, उन की सभा के घर में एक मनुष्य था, जिस में एक अशुद्ध आत्मा थी।
Mar 1:24  उस ने चिल्लाकर कहा, हे यीशु नासरी, हमें तुझ से क्‍या काम? क्‍या तू हमें नाश करने आया है? मैं तुझे जानता हूं, तू कौन है परमेश्वर का पवित्र जन!
Mar 1:25   यीशु ने उसे डांटकर कहा, चुप रह, और उस में से निकल जा।
Mar 1:26  तब अशुद्ध आत्मा उस को मरोड़ कर, और बड़े शब्‍द से चिल्ला कर उस में से निकल गई।
Mar 1:27  इस पर सब लोग आश्‍चर्य करते हुए आपस में वाद-विवाद करने लगे कि यह क्‍या बात है यह तो कोई नया उपदेश है! वह अधिकार के साथ अशुद्ध आत्माओं को भी आज्ञा देता है, और वे उस की आज्ञा मानती हैं।
Mar 1:28  सो उसका नाम तुरन्‍त गलील के आस पास के सारे देश में हर जगह फैल गया।
Mar 1:29  और वह तुरन्‍त आराधनालय में से निकल कर, याकूब और यूहन्ना के साय शमौन और अन्‍द्रियास के घर आया।
Mar 1:30  और शमौन की सास ज्‍वर से पीड़ित थी, और उन्‍होंने तुरन्‍त उसके विषय में उस से कहा।
Mar 1:31  तब उस ने पास जाकर उसका हाथ पकड़ के उसे उठाया, और उसका ज्‍वर उस पर से उतर गया, और वह उन की सेवा-टहल करने लगी।
Mar 1:32  सन्‍ध्या के समय जब सूर्य डूब गया तो लोग सब बीमारों को और उन्‍हें जिन में दुष्‍टात्मा थीं उसके पास लाए।
Mar 1:33   और सारा नगर द्वार पर इकट्ठा हुआ।
Mar 1:34  और उस ने बहुतों को जो नाना प्रकार की बीमारियों से दुखी थे, चंगा किया; और बहुत से दुष्‍टात्माओं को निकाला, और दुष्‍टात्माओं को बोलने न दिया, क्‍योंकि वे उसे पहचानती थीं।
Mar 1:35   और भोर को दिन निकलने से बहुत पहिले, वह उठकर निकला, और एक जंगली स्थान में गया और वहां प्रार्थना करने लगा।
एक साल में बाइबल: 
  • १ राजा ६-७ 
  • लूका २०:२७-४७

शनिवार, 28 अप्रैल 2012

सेवकाई का जीवन

   एमी कारमाईकल (१८६७-१९५१) जब एक छोटी लड़की थी तो अपनी भूरी आंखों की बजाए अपने समाज के अन्य लोगों के समान नीली आंखें चाहती थी। उसने परमेश्वर से इसके बारे में बहुत प्रार्थनाएं भी करीं, और जब परमेश्वर ने उसकी नहीं सुनी, तो वह बहुत निराश भी हुई। फिर जब वह २० वर्ष की हुई तो उसे परमेश्वर की ओर से परमेश्वर की सेवकाई के लिए बुलाहट अनुभव हुई, और कई स्थानों पर सेवकाई के बाद वह दक्षिण भारत में आकर सेवकाई करने लगी, जहां उन्होंने ५५ वर्ष तक यह सेवकाई करी। भारत में अपनी सेवकाई के समय एमी ने परमेश्वर द्वारा उसे नीली नहीं वरन भूरी आंखें दिए जाने और इस विषय में उसकी प्रार्थनाओं के अनसुने होने की बुद्धिमता को पहचाना, क्योंकि अपनी सेवकाई के दौरान कई बार उसे ऐसे स्थानों पर जाना पड़ा जहां उसके रंग-रूप के कारण उसे कठिनाई हो सकती थी। वह अपने शरीर पर रंग लगाकर, अन्य निवासियों जैसे गहरे रंग की तो हो जाती थी किंतु यदि उसकी आंखें नीली होतीं तो वह झट पहचान ली जाती; अब लगाए गए गहरे रंग और भूरी आंखों के कारण वह सरलता से उन स्थानों में प्रवेश कर सकती थी।

   परमेश्वर के वचन में भजनकार लिखता है कि, "निश्चय जानो, कि यहोवा ही परमेश्वर है। उसी ने हम को बनाया, और हम उसी के हैं; हम उसकी प्रजा, और उसकी चराई की भेड़ें हैं" (भजन १००:३)। जिसने हमें बनाया है, उसने हमारी रचना के अनुसार ही हमारे लिए उद्देश्य भी निर्धारित किया है। जब हम अपनी इच्छाओं को सर्वोपरी करने के बजाए, अपने सृष्टिकर्ता परमेश्वर की बुद्धिमता और योजनाओं पर अपने आप को छोड़ देते हैं, और उसकी आज्ञाकारिता में जीवन व्यतीत करते हैं, तब ही हम उसके लिए कार्यकारी हो सकते हैं। इसी में हमारी आशीशें हैं, हमारी स्वतंत्रता और सुरक्षा है।

   एमी ने समर्पण की इस सामर्थ और सत्य को जाना और माना। उससे जब मसीही सेवकाई के जीवन के बारे में पूछा गया तो उसका उत्तर था, "मसीही सेवकाई का जीवन मसीह के लिए मरने के अवसर हैं।" एमी का यह उत्तर उसके प्रभु मसीह यीशु के कथन पर आधारित था, "क्‍योंकि जो कोई अपना प्राण बचाना चाहे, वह उसे खोएगा; और जो कोई मेरे लिए अपना प्राण खोएगा, वह उसे पाएगा" (मत्ती १६:२५)।

   मसीही सेवकाई का जीवन इस से कुछ भिन्न नहीं है - मसीह को सच्चा संपूर्ण समर्पण और प्रभु की आज्ञाकारिता में प्राण देने तक आज्ञाकरी तथा विश्वासयोग्य रहना। प्रभु करे कि सेवकाई के प्रति यही हमारी भी भावना हो। - ऐनी सेटास


परमेश्वर के हाथों में निर्विवाद छोड़े गए जीवन से अधिक सुरक्षित और स्वतंत्र कोई जीवन नहीं है।
क्‍योंकि जो कोई अपना प्राण बचाना चाहे, वह उसे खोएगा; और जो कोई मेरे लिए अपना प्राण खोएगा, वह उसे पाएगा। - मत्ती १६:२५
बाइबल पाठ: मत्ती १६:२४-२८
Mat 16:24  तब यीशु ने अपने चेलों से कहा, यदि कोई मेरे पीछे आना चाहे, तो अपने आप का इन्‍कार करे और अपना क्रूस उठाए, और मेरे पीछे हो ले।
Mat 16:25  क्‍योंकि जो कोई अपना प्राण बचाना चाहे, वह उसे खोएगा; और जो कोई मेरे लिए अपना प्राण खोएगा, वह उसे पाएगा।
Mat 16:26  यदि मनुष्य सारे जगत को प्राप्‍त करे, और अपने प्राण की हानि उठाए, तो उसे क्‍या लाभ होगा? या मनुष्य अपने प्राण के बदले में क्‍या देगा?
Mat 16:27  मनुष्य का पुत्र अपने स्‍वर्गदूतों के साथ अपने पिता की महिमा में आएगा, और उस समय वह हर एक को उसके कामों के अनुसार प्रतिफल देगा।
Mat 16:28  मैं तुम से सच कहता हूं, कि जो यहां खड़े हैं, उन में से कितने ऐसे हैं कि जब तक मनुष्य के पुत्र को उसके राज्य में आते हुए न देख लेंगे, तब तक मृत्यु का स्‍वाद कभी न चखेंगे।
एक साल में बाइबल: 
  • १ राजा ३-५ 
  • लूका २०:१-२६

शुक्रवार, 27 अप्रैल 2012

अपने बड़े नाम के कारण

   प्राचीन इस्त्राएल का समाज गिलगाल में एकत्रित हुआ कि अपने प्रथम राजा, शाउल, का राज्याभिषेक करे (१ शमूएल ११:१५)। परमेश्वर ने इस्त्राएल से वायदा किया था कि वह ही उनकी देखभाल करेगा और उनकी सुरक्षा होगा, और परमेश्वर ऐसा करता भी आया था। किंतु अपने आस-पास की अन्य जातियों और उनके व्यवहार को देख कर इस्त्राएल ने परमेश्वर से मांग करी कि उन्हें भी अन्य जातियों के समान एक राजा चाहिए। परमेश्वर इस बात से प्रसन्न तो नहीं हुआ लेकिन फिर भी उसने अपने नबी शमूएल से कहा कि शाउल को राजा नियुक्त कर दे, और साथ ही अपनी प्रजा को आश्वासन दिलवाया, "यहोवा तो अपने बड़े नाम के कारण अपनी प्रजा को न तजेगा, क्योंकि यहोवा ने तुम्हें अपनी ही इच्छा से अपनी प्रजा बनाया है" (१ शमूएल १२:२२)। यह परमेश्वर के प्रेम और विश्वासयोग्यता का प्रमाण है कि जिसे वह अपना लेता है, उसे फिर कभी नहीं तजता; किसी परिस्थिति में नहीं, किसी भी कारण से नहीं।

    परमेश्वर का वचन बाइबल प्रत्येक मसीही विश्वासी को आज भी यही आश्वासन देती है। हम विश्वासी उसकी निज प्रजा हैं (१ पतरस २:९), और वह हमें कभी नहीं तजेगा, यद्यपि वह जानता है कि हम कमज़ोर पड़कर उसे छोड़ देंगे; वह यह भी जानता है कि हम कमज़ोर, टूट जाने वाले और पाप में पड़ जाने में भी सक्षम हैं। परन्तु उसके लिए यह कोई नई बात नहीं है, वह हमारे विषय में यह बातें पहले से ही जानता है, फिर भी उसने हमें अपने निकट बुलाया है और हमें यह अधिकार दिया कि हम उसे "हे अब्बा, हे पिता" कह कर संबोधित कर सकें (रोमियों ८:१५)। हम मसीही विश्वासियों के उद्धार की निश्चितता हमारे अपने किसी प्रयास, किसी योग्यता अथवा किसी कार्य पर निर्भर नहीं है, वरन परमेश्वर के चरित्र पर आधारित है (१ यूहन्ना ५:२०)।

   यह निश्चितता और परमेश्वर का यह आश्वासन हमें पाप करते रहने या पाप में बने रहने के लिए कदापि कोई बहाना या अवसर नहीं प्रदान करता है। प्रेरित पौलुस ने लिखा, "सो हम क्‍या कहें? क्‍या हम पाप करते रहें, कि अनुग्रह बहुत हो? कदापि नहीं, हम जब पाप के लिए मर गए तो फिर आगे को उस में क्‍योंकर जीवन बिताएं?" (रोमियों ६:१, २)। हमारा व्यवहार और दिन-प्रतिदिन के कार्यों में हमारे चुनाव परमेश्वर के नाम और प्रतिष्ठा, संसार के समक्ष मसीही गवाही और परमेश्वर के साथ हमारी सहभागिता की ओर संसार के लोगों का ध्यान लेकर जाते हैं। इसलिए अपनी जीवन शैली और व्यवहार में हमें संपूर्ण प्रयास के साथ परमेश्वर और उसके नाम के प्रति वफादार रहना है कि हम में होकर उसपर कोई आंच नहीं आए। किंतु साथ ही हमें यह आश्वासन भी है कि यदि हम कहीं कमज़ोर भी पड़ गए, और हमसे कोई गलती या पाप भी हो गया, तौ भी परमेश्वर हमें, जो मसीह यीशु में होकर वास्तव में उसके हो चुके हैं, कभी नहीं छोड़ेगा, कभी नहीं त्यागेगा ( इब्रानियों १३:५)।

   हम निश्चिंत रह सकते हैं कि जिसे प्रभु परमेश्वर अपने अनुग्रह में होकर उद्धार देता है, अपने बड़े नाम के कारण उसकी रक्षा भी करता है - सदैव और सर्वदा। - डेविड रोपर


परमेश्वर के कभी न बदलने वाले अनुग्रह में रोप कर स्थापित किए हुए जीवन वहां से कभी उखाड़े नहीं जा सकते।
तुम्हारा स्‍वभाव लोभरिहत हो, और जो तुम्हारे पास है, उसी पर संतोष किया करो? क्‍योंकि उस ने आप ही कहा है, कि मैं तुझे कभी न छोडूंगा, और न कभी तुझे त्यागूंगा। - इब्रानियों १३:५
बाइबल पाठ: रोमियों ८:२८-३९
Rom 8:28  और हम जानते हैं, कि जो लोग परमेश्वर से प्रेम रखते हैं, उन के लिए सब बातें मिल कर भलाई ही को उत्‍पन्न करती है? अर्थात उन्‍हीं के लिए जो उस की इच्‍छा के अनुसार बुलाए हुए हैं।
Rom 8:29  क्‍योंकि जिन्‍हें उस ने पहिले से जान लिया है उन्‍हें पहिले से ठहराया भी है कि उसके पुत्र के स्‍वरूप में हों ताकि वह बहुत भाइयों में पहिलौठा ठहरे।
Rom 8:30  फिर जिन्‍हें उस ने पहिले से ठहराया, उन्‍हें बुलाया भी, और जिन्‍हें बुलाया, उन्‍हें धर्मी भी ठहराया है, और जिन्‍हें धर्मी ठहराया, उन्‍हें महिमा भी दी है।
Rom 8:31  सो हम इन बातों के विषय में क्‍या कहें यदि परमेश्वर हमारी ओर है, तो हमारा विरोधी कौन हो सकता है?
Rom 8:32  जिस ने अपने निज पुत्र को भी न रख छोड़ा, परन्‍तु उसे हम सब के लिए दे दिया: वह उसके साथ हमें और सब कुछ क्‍योंकर न देगा?
Rom 8:33   परमेश्वर के चुने हुओं पर दोष कौन लगाएगा? परमेश्वर वह है जो उनको धर्मी ठहराने वाला है।
Rom 8:34  फिर कौन है जो दण्‍ड की आज्ञा देगा? मसीह वह है जो मर गया वरन मुर्दों में से जी भी उठा, और परमेश्वर की दाहिनी ओर है, और हमारे लिए निवेदन भी करता है।
Rom 8:35  कौन हम को मसीह के प्रेम से अलग करेगा? क्‍या क्‍लेश, या संकट, या उपद्रव, या अकाल, या नंगाई, या जोखिम, या तलवार?
Rom 8:36   जैसा लिखा है, कि तेरे लिए हम दिन भर घात किए जाते हैं; हम वध होने वाली भेंडों की नाईं गिने गए हैं।
Rom 8:37  परन्‍तु इन सब बातों में हम उसके द्वारा जिस ने हम से प्रेम किया है, जयवन्‍त से भी बढ़ कर हैं।
Rom 8:38  क्‍योंकि मैं निश्‍चय जानता हूं, कि न मृत्यु, न जीवन, न स्‍वर्गदूत, न प्रधानताएं, न वर्तमान, न भविष्य, न सामर्थ, न ऊंचाई,
Rom 8:39  न गहिराई और न कोई और सृष्‍टि, हमें परमेश्वर के प्रेम से, जो हमारे प्रभु मसीह यीशु में है, अलग कर सकेगी।
एक साल में बाइबल: 
  • १ राजा १, २ 
  • लूका १९:२८-४८

गुरुवार, 26 अप्रैल 2012

मानवता का विश्व

   फोटोग्राफर औगस्ट सैन्डर्स, १९२० और ३० में जर्मन समाज को चित्रों द्वारा दर्शाने के लिए निकला। अपने कैमरे द्वारा उसने कारखानों के मज़दूरों, उद्योगपतियों, अभिनेत्रियों, गृहणियों, नाट्ज़ियों और यहूदियों के चित्र उतारे और समाज की एक रूपरेखा प्रदर्शित करी। चाहे उसका यह प्रयास उसके अपने निवास स्थान कोलोन और उसके आस-पास के इलाके तक ही सीमित था, तो भी वह, जैसे पत्रकार डेविड प्रौपसन ने Wall Street Journal में लिखा, "मानवता के एक विश्व को सीमाओं में बंधा हुआ" दिखा सका।

   डेविड प्रौपसन द्वार प्रयुक्त यह वाक्यांश मुझे आज भी समाज और लोगों पर उतना ही लागू दिखता है। हम जहां कहीं भी जाएं, हमारे मार्ग विभिन्न लोगों के मार्गों से मिलते और उन्हें काटते हुए निकलते हैं; सभी अपनी अपनी सीमाओं और चिन्ताओं में बंधे हुए, जीवन के अर्थ को खोजते हुए।

   कई वर्षों तक, रोमी कैद में डाले जाने से पहले, प्रेरित पौलुस मसीही विश्वास के प्रचार के लिए यात्राएं करता रहा। वह जहां कहीं भी जाता, प्रभु यीशु में मिलने वाले उद्धार के बारे में लोगों को बताता क्योंकि उसे उनकी परवाह थी और वह उन्हें पाप और पाप के प्रतिफल अनन्त विनाश से बचाना चाहता था। परमेश्वर के वचन में ’प्रेरितों के काम’ नामक पुस्तक का अन्त पौलुस के रोमी कैद में पड़े होने के साथ होता है, और उस स्थिति में भी वह "जो उसके पास आते थे, उन सब से मिलता रहा और बिना रोक टोक बहुत निडर होकर परमेश्वर के राज्य का प्रचार करता और प्रभु यीशु मसीह की बातें सिखाता रहा" (प्रेरितों २८:३१)।

   अपनी सीमाओं और बन्धनों से चिन्तित होने के बजाए, पौलुस ने उन बन्धनों को ही सुसमाचार प्रचार का अवसर बना लिया। यह हमारे लिए भी मार्गदर्शक है; हमारे चहुंओर भी मानवता का एक विश्व विद्यमान है, हमारी पहुंच में है; आवश्यकता है पौलुस के समान ही उन तक मसीह यीशु में सेंतमेंत पापों की क्षमा और उद्धार के सुसमाचार को पहुंचाने की। - डेविड मैक्कैसलैण्ड


सुसमाचार वह अन्मोल तोहफा है जो समस्त मानव जाति को मुफ्त दिया गया है।
और जो उसके पास आते थे, उन सब से मिलता रहा और बिना रोक टोक बहुत निडर होकर परमेश्वर के राज्य का प्रचार करता और प्रभु यीशु मसीह की बातें सिखाता रहा। - प्रेरितों २८:३१
बाइबल पाठ: प्रेरितों २८:१६-३१
Act 28:16  जब हम रोम में पहुंचे, तो पौलुस को एक सिपाही के साथ जो उस की रखवाली करता था, अकेले रहने की आज्ञा हुई।
Act 28:17  तीन दिन के बाद उस ने यहूदियों के बड़े लोगों को बुलाया, और जब वे इकट्ठे हुए तो उन से कहा, हे भाइयों, मैं ने अपने लोगों के या बापदादों के व्यवहारों के विरोध में कुछ भी नहीं किया, तौभी बन्‍धुआ होकर यरूशलेम से रोमियों के हाथ सौंपा गया।
Act 28:18  उन्‍होंने मुझे जांच कर छोड़ देना चाहा, क्‍योंकि मुझ में मृत्यु के योग्य कोई दोष न था।
Act 28:19  परन्‍तु जब यहूदी इस के विरोध में बोलने लगे, तो मुझे कैसर की दोहाई देनी पड़ी: न यह कि मुझे अपने लोगों पर कोई दोष लगाना था।
Act 28:20  इसलिये मैं ने तुम को बुलाया है, कि तुम से मिलूं और बातचीत करूं, क्‍योंकि इस्‍त्राएल की आशा के लिये मैं इस जंजीर से जकड़ा हुआ हूं।
Act 28:21  उन्‍होंने उस से कहा, न हम ने तेरे विषय में यहूदियों से चिट्ठियां पाईं, और न भाइयों में से किसी ने आकर तेरे विषय में कुछ बताया, और न बुरा कहा।
Act 28:22  परन्‍तु तेरा विचार क्‍या है वही हम तुझ से सुनना चाहते हैं, क्‍योंकि हम जानते हैं, कि हर जगह इस मत के विरोध में लोग बातें कहते हैं।
Act 28:23  तब उन्‍होंने उसके लिये एक दिन ठहराया, और बहुत लोग उसके यहां इकट्ठे हुए, और वह परमेश्वर के राज्य की गवाही देता हुआ, और मूसा की व्यवस्था और भाविष्यद्वक्ताओं की पुस्‍तकों से यीशु के विषय में समझा समझाकर भोर से सांझ तक वर्णन करता रहा।
Act 28:24  तब कितनों ने उन बातों को मान लिया, और कितनों ने प्रतीति न की।
Act 28:25  जब आपस में एक मत न हुए, तो पौलुस के इस एक बात के कहने पर चले गए, कि पवित्र आत्मा ने यशायाह भविष्यद्वक्ता के द्वारा तुम्हारे बापदादों से अच्‍छा कहा, कि जाकर इन लोगों से कह।
Act 28:26  कि सुनते तो रहोगे, परन्‍तु न समझोगे, और देखते तो रहोगे, परन्‍तु न बूझोगे।
Act 28:27  क्‍योंकि इन लोगों का मन मोटा, और उन के कान भारी हो गए, और उन्‍होंने अपनी आंखें बन्‍द की हैं, ऐसा न हो कि वे कभी आंखों से देखें, और कानों से सुनें, और मन से समझें और फिरें, और मैं उन्‍हें चंगा करूं।
Act 28:28  सो तुम जानो, कि परमेश्वर के इस उद्धार की कथा अन्यजातियों के पास भेजी गई है, और वे सुनेंगे।
Act 28:29  जब उस ने यह कहा तो यहूदी आपस में बहुत विवाद करने लगे और वहां से चले गए।
Act 28:30  और वह पूरे दो वर्ष अपने भाड़े के घर में रहा।
Act 28:31  और जो उसके पास आते थे, उन सब से मिलता रहा और बिना रोक टोक बहुत निडर होकर परमेश्वर के राज्य का प्रचार करता और प्रभु यीशु मसीह की बातें सिखाता रहा।
एक साल में बाइबल: 
  • २ शमूएल २३-२४ 
  • लूका १९:१-२७