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रविवार, 26 अगस्त 2012

बुज़ुर्ग या बेहतर?


   हम जानने लगते हैं कि हम उम्र में बढ़ रहे हैं जब हम कहना आरंभ कर देते हैं कि, "क्या आप विश्वास कर सकते हैं कि ये व्यावासायिक खिलाड़ी कितनी कम उम्र के हैं?" और बुज़ुर्ग होने का यह निश्चित चिन्ह है जब आप अपने किसी हम-उम्र मित्र से मिलने पर उससे यह नहीं पूछते, "कैसे हो?" परन्तु, जैसे उसे देखकर अचरज हुआ हो, उस से कहते हैं, "अरे तुम तो बड़े अच्छे और स्वस्थ दिख रहे हो!"

   उम्र में बढ़ना अवश्यंभावी है, इसे टाला या रोका नहीं जा सकता। दुर्भाग्यवश हमारा समाज हमें इसे छुपाना और इससे भयभीत रहना सिखाता है। परन्तु उम्र में बढ़ना मसीही विश्वासियों के लिए अद्भुत बात है और और उनके बेहतर होते जाने का समय भी। जैसे प्रेरित पौलुस ने परमेश्वर के वचन बाइबल में लिखा : "इसलिये हम हियाव नहीं छोड़ते; यद्यपि हमारा बाहरी मनुष्यत्‍व नाश भी होता जाता है, तौभी हमारा भीतरी मनुष्यत्‍व दिन प्रतिदिन नया होता जाता है" (२ कुरिन्थियों ४:१६)।

   जैसे कि शारीरिक चिन्ह प्रगट करते हैं कि हम उम्र में बढ़ रहे हैं, वैसे ही कुछ बातें प्रगट करती हैं कि हम बेहतर हो रहे हैं। बजाए इसके कि उम्र के साथ साथ वे अधिक चिड़चिड़ाने और खिसियाने वाले बनें, या असहनशील होते जाएं, या लोगों से प्रेमपूर्ण व्यवाहार छोड़ दें, एक प्रौढ़ मसीही विश्वासी क्षमा करने, दूसरों की चिंता और देखभाल करने तथा प्रेमपूर्ण व्यवाहार प्रदर्शित करने में और बेहतर होता जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि उसके लिए बढ़ती उम्र अपने उद्धारकर्ता प्रभु यीशु की समानता में बढ़ते जाने की जीवन यात्रा का एक भाग ही है। इसका तात्पर्य है कि मसीही विश्वासियों के लिए समय के साथ साथ मसीह की समानता में अपने मन और अपनी प्रवृत्तियों को ढालते जाना एक स्वाभाविक बात है और उनके जीवन मसीह के चरित्र और दिल जीत लेने वाले स्वभाव को अधिकाधिक प्रतिबिंबित करते रहते हैं।

   इसलिए आइये, उम्र बढ़ने के साथ मसीह की समानता में और अधिक ढलने के अवसर का और भी अधिक लाभ उठाएं। तब हमारे मित्र तथा आस-पास वाले पहचानेंगे कि हम बुज़ुर्ग नहीं बेहतर होते जा रहे हैं। - जो स्टोवैल


मसीह के अनुयायी होने के कारण केवल बुज़ुर्ग ही ना हों, वरन साथ ही बेहतर भी होते जाएं।

इसलिये हम हियाव नहीं छोड़ते; यद्यपि हमारा बाहरी मनुष्यत्‍व नाश भी होता जाता है, तौभी हमारा भीतरी मनुष्यत्‍व दिन प्रतिदिन नया होता जाता है। - २ कुरिन्थियों ४:१६

बाइबल पाठ: २ कुरिन्थियों ४:१६-१८
2Co 4:16  इसलिये हम हियाव नहीं छोड़ते; यद्यपि हमारा बाहरी मनुष्यत्‍व नाश भी होता जाता है, तौभी हमारा भीतरी मनुष्यत्‍व दिन प्रतिदिन नया होता जाता है। 
2Co 4:17  क्‍योंकि हमारा पल भर का हल्का सा क्‍लेश हमारे लिये बहुत ही महत्‍वपूर्ण और अनन्‍त जीवन महिमा उत्‍पन्न करता जाता है। 
2Co 4:18  और हम तो देखी हुई वस्‍तुओं को नहीं परन्‍तु अनदेखी वस्‍तुओं को देखते रहते हैं, क्‍योंकि देखी हुई वस्‍तुएं थोड़े ही दिन की हैं, परन्‍तु अनदेखी वस्‍तुएं सदा बनी रहती हैं।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन ११९:८९-१७६ 
  • १ कुरिन्थियों ८

शनिवार, 25 अगस्त 2012

अभिलाषाएं


   डायना और डेव को, जब दिन गर्म हो और सूर्य चमक रहा हो तो अपनी स्की पर झील में पानी के ऊपर इधर से उधर विचरण करना अच्छा लगता है। एक सुबह जब मौसम थोड़ा ठंडा था और बादल भी थे तो डायना डेव को स्कीइंग के लिए मना नहीं सकी, इसलिए उसने अकेले ही स्कीइंग करने की ठान ली। स्कीइंग करना आरंभ करने पर उसे पता चला कि वहां झील के पानी के ऊपर बहुत ठंडा था और वह कुछ गर्मी पाने के लिए बादलों की छाया के बीच यहां-वहां चमकते सूर्य के स्थानों के पीछे स्की लेकर भागती रही, किंतु जब तक वह उस स्थान पर पहुँचती, बादल वहां भी छाया कर देते और उसे फिर से कोई ऐसा स्थान ढूंढना पड़ता जहां सूर्य चमक रहा हो। कुछ देर के बाद उसे अपने इन प्रयासों की व्यर्थता का एहसास हुआ और वह पानी से बाहर आ गई, क्योंकि जिस आनन्द की उसे अभिलाषा थी वह उसे नहीं मिला।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में हम पाते हैं राजा सुलेमान ने एक अन्य प्रकार से संतुष्टि पाने के लिए अभिलाषाओं का पीछा किया (सभोपदेशक २:१)। सभोपदेशक पुस्तक के दूसरे अध्याय के पहले ११ पदों में ही सुलेमान बताता है कि उसने संतुष्टि पाने के लिए जिन अभिलाषाओं का पीछा किया वे थीं आनन्द, विनोद, मदिरा, बुद्धि, मकान, बाग़-बग़ीचे, धन, संपत्ति, संगीत, वासना और हर प्रकार की इच्छापूर्ति। इन सब का पीछा करने और भोगने के बाद उसका निष्कर्ष था, "तब मैं ने फिर से अपने हाथों के सब कामों को, और अपने सब परिश्रम को देखा, तो क्या देखा कि सब कुछ व्यर्थ और वायु को पकड़ना है, और संसार में कोई लाभ नहीं" (सभोपदेशक २:११)। सुलेमान अपनी इस पुस्तक का आरंभ करता है सांसारिक अभिलाषाओं की व्यर्थता को बताने से, "उपदेशक का यह वचन है, कि व्यर्थ ही व्यर्थ, व्यर्थ ही व्यर्थ! सब कुछ व्यर्थ है" (सभोपदेशक १:२) और इस पुस्तक के अन्त में उसका बुद्धिमतापूर्ण निष्कर्ष था, "सब कुछ सुना गया; अन्त की बात यह है कि परमेश्वर का भय मान और उसकी आज्ञाओं का पालन कर; क्योंकि मनुष्य का सम्पूर्ण कर्त्तव्य यही है। क्योंकि परमेश्वर सब कामों और सब गुप्त बातों का, चाहे वे भली हों या बुरी, न्याय करेगा" (सभोपदेशक १२:१३, १४)।

   कहीं आप भी उन ही अभिलाषाओं के पीछे तो नहीं भाग रहे हैं जिनके पीछे राजा सुलेमान था? यदि हां, तो जान लीजिए कि यह एक व्यर्थ प्रयास है। सच्ची संतुष्टि अभिलाषाओं के पीछे भागने से नहीं केवल एकमात्र सच्चे परमेश्वर प्रभु यीशु को जानने और उसकी आज्ञाकरिता में रहने से मिलती है। व्यर्थ अभिलाषाओं के पीछे अपना जीवन व्यर्थ मत कीजिए; परमेश्वर के वचन बाइबल और उन के अनुभवों से सीखिए जो इस मार्ग पर चलकर देख चुके हैं। - ऐने सेटास


केवल परमेश्वर ही एक खाली हृदय को भर सकता है।

तब मैं ने फिर से अपने हाथों के सब कामों को, और अपने सब परिश्रम को देखा, तो क्या देखा कि सब कुछ व्यर्थ और वायु को पकड़ना है, और संसार में कोई लाभ नहीं। - सभोपदेशक २:११

बाइबल पाठ: सभोपदेशक २:१-११
Ecc 2:1  मैं ने अपने मन से कहा, चल, मैं तुझ को आनन्द के द्वारा जांचूंगा; इसलिये आनन्दित और मगन हो। परन्तु देखो, यह भी व्यर्थ है। 
Ecc 2:2  मैं ने हंसी के विषय में कहा, यह तो बावलापन है, और आनन्द के विषय में, उस से क्या प्राप्त होता है? 
Ecc 2:3  मैं ने मन में सोचा कि किस प्रकार से मेरी बुद्धि बनी रहे और मैं अपने प्राण को दाखमधु पीने से क्योंकर बहलाऊं और क्योंकर मूर्खता को थामे रहूं, जब तक मालूम न करूं कि वह अच्छा काम कौन सा है जिसे मनुष्य जीवन भर करता रहे। 
Ecc 2:4  मैं ने बड़े बड़े काम किए; मैं ने अपने लिये घर बनवा लिए और अपने लिये दाख की बारियां लगवाईं; 
Ecc 2:5  मैं ने अपने लिये बारियां और बाग लगावा लिए, और उन में भांति भांति के फलदाई वृक्ष लगाए। 
Ecc 2:6  मैं ने अपने लिये कुण्ड खुदवा लिए कि उन से वह वन सींचा जाए जिस में पौधे लगाए जाते थे। 
Ecc 2:7  मैं ने दास और दासियां मोल लीं, और मेरे घर में दास भी उत्पन्न हुए; और जितने मुझ से पहिले यरूशलेम में थे उन से कहीं अधिक गाय-बैल और भेड़-बकरियों का मैं स्वामी था। 
Ecc 2:8  मैं ने चान्दी और सोना और राजाओं और प्रान्तों के बहुमूल्य पदार्थों का भी संग्रह किया; मैं ने अपने लिये गवैयों और गाने वालियों को रखा, और बहुत सी कामिनियां भी, जिन से मनुष्य सुख पाते हैं, अपनी कर लीं।
Ecc 2:9  इस प्रकार मैं अपने से पहिले के सब यरूशलेमवासियों से अधिक महान और धनाढय हो गया; तौभी मेरी बुद्धि ठिकाने रही। 
Ecc 2:10  और जितनी वस्तुओं के देखने की मैं ने लालसा की, उन सभों को देखने से मैं न रूका; मैं ने अपना मन किसी प्रकार का आनन्द भोगने से न रोका क्योंकि मेरा मन मेरे सब परिश्रम के कारण आनन्दित हुआ; और मेरे सब परिश्रम से मुझे यही भाग मिला। 
Ecc 2:11  तब मैं ने फिर से अपने हाथों के सब कामों को, और अपने सब परिश्र्म को देखा, तो क्या देखा कि सब कुछ व्यर्थ और वायु को पकड़ना है, और संसार में कोई लाभ नहीं।

एक साल में बाइबल: 

  • भजन ११९:१-८८ 
  • १ कुरिन्थियों ७:२०-४०

शुक्रवार, 24 अगस्त 2012

संतुष्टि


   एक कवि ने लिखा था: "मनुष्य स्वभाव ही से मूर्ख है। जब गर्म होता है तो उसे ठंडा चाहिए; जब ठंड होती है तो उसे गर्मी चाहिए। जो नहीं है, सदा ही बस वही चाहिए।" यह बात मानवीय स्वभाव का कितना सटीक चित्रण है।

   इसलिए जब हम परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस द्वारा फिलिप्पियों ४:११ में लिखी गई बात "यह नहीं कि मैं अपनी घटी के कारण यह कहता हूं; क्‍योंकि मैं ने यह सीखा है कि जिस दशा में हूं, उसी में सन्‍तोष करूं" पढ़ते हैं तो अचरज के साथ यह कह उठना कि, "क्या यह संभव है?" स्वाभाविक ही है।

   पौलुस के लिए यह संभव था; फिलिप्पियों ४:१२-१३ जीवन के प्रति पौलुस के रवैये को बताता है: "मैं दीन होना भी जानता हूं और बढ़ना भी जानता हूं: हर एक बात और सब दशाओं में तृप्‍त होना, भूखा रहना, और बढ़ना-घटना सीखा है। जो मुझे सामर्थ देता है उस में मैं सब कुछ कर सकता हूं।" परमेश्वर के साथ पौलुस का संबंध उसके पास सांसारिक बातों के होने या ना होने पर निर्भर नहीं था; उसकी संतुष्टि परिस्थितियों पर नहीं वरन उसके उद्धारकर्ता और प्रभु यीशु के साथ संबंध पर आधारित थी।

   पौलुस स्मरण दिलाता है कि संतुष्टि रातों-रात नहीं आ जाती; यह एक ऐसी बात है जो व्यक्तिगत अनुभव से समझी-सीखी जाती है। समय और अनुभवों के साथ जैसे जैसे परमेश्वर के साथ हमारा संबंध प्रगाढ़ और स्थिर होता जाता है, हम अपने आप पर कम और परमेश्वर पर अधिक भरोसा करना सीखते जाते हैं और फिर हमारी निर्भरता अपनी नहीं वरन उसकी सामर्थ पर हो जाती है। पौलुस यह बात जान चुका था, और इसीलिए वह अपनी हर परिस्थिति और आवश्यक्ता के लिए अपने प्रभु और उद्धारकर्ता पर निर्भर रहता था, उससे सामर्थ प्राप्त करता था।

   आज आपकी कोई भी परिस्थिति या आवश्यक्ता क्यों ना हो उद्धाकर्ता प्रभु यीशु पर विश्वास करने और प्रार्थना के द्वारा हर बात के लिए सामर्थ और संतुष्टि आपके लिए उपलब्ध है। - एल्बर्ट ली


हमें संतुष्टि भी वहीं से मिलती है जहां से उद्धार मिलता है - प्रभु यीशु से।

हर बात में धन्यवाद करो: क्‍योंकि तुम्हारे लिये मसीह यीशु में परमेश्वर की यही इच्‍छा है। - १ थिस्सुलुनिकीयों

बाइबल पाठ: फिलिप्पियों ४:४-१३
Php 4:4  प्रभु में सदा आनन्‍दित रहो; मैं फिर कहता हूं, आनन्‍दित रहो। 
Php 4:5   तुम्हारी कोमलता सब मनुष्यों पर प्रगट हो: प्रभु निकट है। 
Php 4:6  किसी भी बात की चिन्‍ता मत करो: परन्‍तु हर एक बात में तुम्हारे निवेदन, प्रार्थना और बिनती के द्वारा धन्यवाद के साथ परमेश्वर के सम्मुख अपस्थित किए जाएं। 
Php 4:7  तब परमेश्वर की शान्‍ति, जो समझ से बिलकुल परे है, तुम्हारे हृदय और तुम्हारे विचारों को मसीह यीशु में सुरिक्षित रखेगी।
Php 4:8   निदान, हे भाइयों, जो जो बातें सत्य हैं, और जो जो बातें आदरणीय हैं, और जो जो बातें उचित हैं, और जो जो बातें पवित्र हैं, और जो जो बातें सुहावनी हैं, और जो जो बातें मनभावनी हैं, निदान, जो जो सदगुण और प्रशंसा की बातें हैं, उन्‍हीं पर ध्यान लगाया करो। 
Php 4:9   जो बातें तुम ने मुझ से सीखीं, और ग्रहण की, और सुनी, और मुझ में देखीं, उन्‍हीं का पालन किया करो, तब परमेश्वर जो शान्‍ति का सोता है तुम्हारे साथ रहेगा।
Php 4:10  मैं प्रभु में बहुत आनन्‍दित हूं कि अब इतने दिनों के बाद तुम्हारा विचार मेरे विषय में फिर जागृत हुआ है; निश्‍चय तुम्हें आरम्भ में भी इस का विचार था, पर तुम्हें अवसर न मिला। 
Php 4:11  यह नहीं कि मैं अपनी घटी के कारण यह कहता हूं; क्‍योंकि मैं ने यह सीखा है कि जिस दशा में हूं, उसी में सन्‍तोष करूं। 
Php 4:12  मैं दीन होना भी जानता हूं और बढ़ना भी जानता हूं: हर एक बात और सब दशाओं में तृप्‍त होना, भूखा रहना, और बढ़ना-घटना सीखा है। 
Php 4:13   जो मुझे सामर्थ देता है उस में मैं सब कुछ कर सकता हूं।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन ११६-११८
  • १ कुरिन्थियों ७:१-१९

गुरुवार, 23 अगस्त 2012

बचपन से आरंभ


   हम लोग रात्रि के भोजन के लिए एकत्रित होकर बैठे ही थे, कि हमारी ३ वर्षीय पोती चिंतित स्वर में बोल उठी - "हमने अभी भोजन के लिए ध्न्यवाद की प्रार्थना नहीं करी है!" हमने देखा कि एक व्यक्ति ने बैठते ही कुछ खाना आरंभ कर दिया था, जो हमारी पोती के लिए अनहोना और परेशानी का कारण था; क्योंकि वह जानती थी कि परमेश्वर को धन्यवाद दिए बिना हम भोजन आरंभ नहीं करते।

   उसकी यह चिंता एक अच्छा संकेत था; इससे यह पता चल रहा था कि हमारी पोती में एक अच्छी आदत, जो उसने अपने जीवन के आरंभ से अपने परिवार में देखी और सीखी थी, घर करना आरंभ कर चुकी थी और यह उसके जीवन भर उसके साथ रहेगी। यह छोटी सी बात उसे अभी उसकी छोटी उम्र से ही प्रार्थना और परमेश्वर के धन्यवादी होने के महत्व को सीखने में सहायक है, जो आगे चलकर उसे जीवन कि कई जटिल परिस्थितियों में सहायता और शांति पाने का मार्ग होगा।

   आज के इस समय में जब हर बात में मसीही विश्वास का कड़ा विरोध संसार भर में हो रहा है, बच्चों को मसीही विश्वास की शिक्षाओं के साथ बड़ा करना सरल नहीं है। कई माता-पिता चिंतित रहते हैं कि कैसे बच्चों को अपने प्रभु पर विश्वास करना और उसके भय में जीना सिखाएं, कैसे परमेश्वर के प्रति सही रवैया उनके मनों में डालें। परमेश्वर के वचन बाइबल में नीतिवचन नामक पुस्तक इस में सहायक है। नीतिवचन की शिक्षाएं सिखातीं हैं माता-पिता द्वारा दिए गए श्रेष्ठ निर्देश इस बात की कुंजी हैं (नीतिवचन १:८)। वैसे तो ये बातें किसी भी उम्र में सीखी-सिखाई जा सकती हैं किंतु बचपन ही से माता-पिता द्वारा बच्चों को बुद्धि कि बात सुनने (नीतिवचन २:२), यत्न से समझ-बूझ प्राप्त करने (नीतिवचन २:३), परमेश्वर के भय को मानने (नीतिवचन २:५), माता-पिता की शिक्षाओं को स्मरण रखने (नीतिवचन ३:१), भले-बुरे को समझने की शिक्षाएं दी जानीं चाहिएं (नीतिवचन ४:१-४) जिससे आती उम्र में वे परमेश्वर की निकटता और उसके वचन कि आज्ञाकारिता में स्थिर खड़े रह सकें।

   यदि आपके पास बच्चे या नाती-पोते हैं उन्हें इन भली शिक्षाओं को सिखाना बचपन ही से आरंभ कर दीजिए। आज का बोया-सींचा हुआ अच्छा बीज कल उनके जीवन में भले फल लाएगा। - डेव ब्रैनन


आपके बच्चों के कल का चरित्र, उनके जीवनों में आज बोई गई बातों पर निर्भर करता है।

हे मेरे पुत्र, यदि तू मेरे वचन ग्रहण करे, और मेरी आज्ञाओं को अपने हृदय में रख छोड़े,...तो तू यहोवा के भय को समझेगा, और परमेश्वर का ज्ञान तुझे प्राप्त होगा। नीतिवचन २:१,५

बाइबल पाठ: नीतिवचन २
Pro 2:1  हे मेरे पुत्र, यदि तू मेरे वचन ग्रहण करे, और मेरी आज्ञाओं को अपने हृदय में रख छोड़े, 
Pro 2:2  और बुद्धि की बात ध्यान से सुने, और समझ की बात मन लगाकर सोचे; 
Pro 2:3  और प्रवीणता और समझ के लिये अति यत्न से पुकारे, 
Pro 2:4  ओर उसको चान्दी की नाईं ढूंढ़े, और गुप्त धन के समान उसी खोज में लगा रहे; 
Pro 2:5  तो तू यहोवा के भय को समझेगा, और परमेश्वर का ज्ञान तुझे प्राप्त होगा। 
Pro 2:6  क्योंकि बुद्धि यहोवा ही देता है; ज्ञान और समझ की बातें उसी के मुंह से निकलती हैं। 
Pro 2:7  वह सीधे लोगों के लिये खरी बुद्धि रख छोड़ता है; जो खराई से चलते हैं, उनके लिये वह ढाल ठहरता है। 
Pro 2:8  वह न्याय के पथों की देख भाल करता, और अपने भक्तों के मार्ग की रक्षा करता है। 
Pro 2:9  तब तू धर्म और न्याय, और सीधाई को, निदान सब भली-भली चाल समझ सकेगा; 
Pro 2:10  क्योंकि बुद्धि तो तेरे हृदय में प्रवेश करेगी, और ज्ञान तुझे मनभाऊ लगेगा; 
Pro 2:11  विवेक तुझे सुरक्षित रखेगा, और समझ तेरी रक्षक होगी; 
Pro 2:12  ताकि तुझे बुराई के मार्ग से, और उलट फेर की बातों के कहने वालों से बचाए, 
Pro 2:13  जो सीधाई के मार्ग को छोड़ देते हैं, ताकि अन्धेरे मार्ग में चलें; 
Pro 2:14  जो बुराई करने से आनन्दित होते हैं, और दुष्ट जन की उलट फेर की बातों में मगन रहते हैं; 
Pro 2:15  जिनकी चालचलन टेढ़ी मेढ़ी और जिनके मार्ग बिगड़े हुए हैं।
Pro 2:16  तब तू पराई स्त्री से भी बचेगा, जो चिकनी चुपड़ी बातें बोलती है, 
Pro 2:17  और अपनी जवानी के साथी को छोड़ देती, और जो अपने परमेश्वर की वाचा को भूल जाती है।
Pro 2:18  उसका घर मृत्यु की ढलान पर है, और उसी डगरें मरे हुओं के बीच पहुंचाती हैं? 
Pro 2:19  जो उसके पास जाते हैं, उन में से कोई भी लौट कर नहीं आता, और न वे जीवन का मार्ग पाते हैं।
Pro 2:20  तू भले मनुष्यों के मार्ग में चल, और धमिर्यों की बाट को पकड़े रह। 
Pro 2:21  क्योंकि धर्मी लोग देश में बसे रहेंगे, और खरे लोग ही उस में बने रहेंगे। 
Pro 2:22  दुष्ट लोग देश में से नाश होंगे, और विश्वासघाती उस में से उखाड़े जाएंगे।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन ११३-११५ 
  • १ कुरिन्थियों ६

बुधवार, 22 अगस्त 2012

विश्वासयोग्य


   लेखक सी. एस. ल्युइस द्वारा एक काल्पनिक मायावी देश ’नारनिया’ पर आधारित लिखे गए बच्चों के उपन्यास मसीही विश्वास के सत्य को चित्रित करते हैं। इस श्रंखला में ’प्रिंस कैस्पियन’ कहानी है एक अत्याचारी और क्रूर राजा की जिसने नारनिया की गद्दी हथिया ली। राजा के भतीजे छोटे राजकुमार कैस्पियन ने नारनिया के एक महान सम्राट के बारे में सुना है जो बुराई की सामर्थ को तोड़ने के लिए मरकर फिर से जी उठा। क्रूर राजा इस महान सम्राट की बातों को काल्पनिक कहानी कहकर उसकी उपेक्षा करता है, किंतु राजकुमार कैस्पियन उसकी सत्यता को जता देता है।

   इस कहानी में लेखक ल्युइस का उद्देश्य था यह दिखाना कि कैसे प्रभु यीशु को लोग प्राचीन किंवदन्ति कहकर उपेक्षा करते हैं, किंतु वह सत्य है। बाइबल संबंधी आधुनिक पुरतत्व-विशेषज्ञों की खोजों ने ऐतिहासिक प्रमाणों द्वारा यह प्रमाणित कर दिया है कि प्रभु यीशु का आलौकिक जीवन कोई कल्पना नहीं वरन ऐतिहासिक सत्य है। ब्रिटिश म्युज़ियम के भूतपूर्व निर्देशक सर फ्रेडरिक केन्यन भी परमेश्वर के वचन बाइबल की विश्वासयोग्यता के संबंध में यही विश्वास रखते थे; उन्होंने लिखा, "नए नियम कि पुस्तकों की वास्तविकता और खराई अब प्रमाणित मानी जा सकती है।"

   प्रेरितों ने भी प्रभु यीशु के जीवन के बारे में यही कहा था; प्रेरित पतरस ने लिखा, "क्‍योंकि जब हम ने तुम्हें अपने प्रभु यीशु मसीह की सामर्थ का, और आगमन का समाचार दिया था तो वह चतुराई से गढ़ी हुई कहानियों का अनुकरण नहीं किया था वरन हम ने आप ही उसके प्रताप को देखा था" (२ पतरस १:१६)। प्रेरित युहन्ना ने भी लिखा, "उस जीवन के वचन के विषय में जो आदि से था, जिसे हम ने सुना, और जिसे अपनी आंखों से देखा, वरन जिसे हम ने ध्यान से देखा और हाथों से छूआ" (१ युहन्ना १:१)।

   इसमें किसी सन्देह या अविश्वास की गुंजाइश नहीं है कि प्रभु यीशु के जीवन, मरण और पुनरुत्थान का वृतांत एक सच्ची और प्रमाणित घटना है और वही पापों से क्षमा देने वाला उद्धारकर्ता परमेश्वर है। - डेनिस फिशर


इस परिवर्तनशील संसार में आप परमेश्वर के अपरिवर्तनीय वचन बाइबल पर भरोसा रख सकते हैं।

यह जीवन प्रगट हुआ, और हम ने उसे देखा, और उस की गवाही देते हैं, और तुम्हें उस अनन्‍त जीवन का समाचार देते हैं, जो पिता के साथ था, और हम पर प्रगट हुआ। - १ युहन्ना १:२

बाइबल पाठ: २ पतरस १:१२-१९; १ युहन्ना १:१-७
2Pe 1:12   इसलिये यद्यपि तुम ये बातें जानते हो, और जो सत्य वचन तुम्हें मिला है, उस में बने रहते हो, तौभी मैं तुम्हें इन बातों की सुधि दिलाने को सर्वदा तैयार रहूंगा। 
2Pe 1:13   और मैं यह अपने लिये उचित समझता हूं, कि जब तक मैं इस डेरे में हूं, तब तक तुम्हें सुधि दिला कर उभारता रहूं। 
2Pe 1:14  क्‍योंकि यह जानता हूं, कि मसीह के वचन के अनुसार मेरे डेरे के गिराए जाने का समय शीघ्र आने वाला है। 
2Pe 1:15  इसलिये मैं ऐसा यत्‍न करूंगा, कि मेरे कूच करने के बाद तुम इन सब बातों को सर्वदा स्मरण कर सको। 
2Pe 1:16  क्‍योंकि जब हम ने तुम्हें अपने प्रभु यीशु मसीह की सामर्थ का, और आगमन का समाचार दिया था तो वह चतुराई से गढ़ी हुई कहानियों का अनुकरण नहीं किया था वरन हम ने आप ही उसके प्रताप को देखा था। 
2Pe 1:17   कि उस ने परमेश्वर पिता से आदर, और महिमा पाई जब उस प्रतापमय महिमा में से यह वाणी आई कि यह मेरा प्रिय पुत्र है जिस से मैं प्रसन्न हूं। 
2Pe 1:18  और जब हम उसके साथ पवित्र पहाड़ पर थे, तो स्‍वर्ग से यही वाणी आते सुना। 
2Pe 1:19  और हमारे पास जो भविष्यद्वक्ताओं का वचन है, वह इस घटना से दृढ़ ठहरा है और तुम यह अच्‍छा करते हो, कि जो यह समझ कर उस पर ध्यान करते हो, कि वह एक दीया है, जो अन्‍धियारे स्थान में उस समय तक प्रकाश देता रहता है जब तक कि पौ न फटे, और भोर का तारा तुम्हारे हृदयों में न चमक उठे। 

1Jn 1:1  उस जीवन के वचन के विषय में जो आदि से था, जिसे हम ने सुना, और जिसे अपनी आंखों से देखा, वरन जिसे हम ने ध्यान से देखा, और हाथों से छूआ। 
1Jn 1:2 (यह जीवन प्रगट हुआ, और हम ने उसे देखा, और उस की गवाही देते हैं, और तुम्हें उस अनन्‍त जीवन का समाचार देते हैं, जो पिता के साथ था, और हम पर प्रगट हुआ)। 
1Jn 1:3  जो कुछ हम ने देखा और सुना है उसका समाचार तुम्हें भी देते हैं, इसलिये कि तुम भी हमारे साथ सहभागी हो, और हमारी यह सहभागिता पिता के साथ, और उसके पुत्र यीशु मसीह के साथ है। 
1Jn 1:4 और ये बातें हम इसलिये लिखते हैं, कि हमारा आनन्‍द पूरा हो जाए।। 
1Jn 1:5 जो समाचार हम ने उस से सुना, और तुम्हें सुनाते हैं, वह यह है कि परमेश्वर ज्योति हैं: और उस में कुछ भी अन्‍धकार नहीं। 
1Jn 1:6 यदि हम कहें, कि उसके साथ हमारी सहभागिता है, और फिर अन्‍धकार में चलें, तो हम झूठे हैं: और सत्य पर नहीं चलते। 
1Jn 1:7  पर यदि जैसा वह ज्योति में है, वैसे ही हम भी ज्योति में चलें, तो एक दूसरे से सहभागिता रखते हैं; और उसके पुत्र यीशु मसीह का लोहू हमें सब पापों से शुद्ध करता है।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन ११०-११२ 
  • १ कुरिन्थियों ५

मंगलवार, 21 अगस्त 2012

वायदे


   जब कोई लंबी सांस भर कर दुखी आवाज़ में कहता है, ’वायदे-वायदे’ तो अधिकांशतः यह किसी के द्वारा उससे किया गया वायदा पूरा ना करने के कारण होता है। यह जितना अधिक गंभीर या जितनी अधिक बार होता है, उतनी ही गहरी आह उस टूटे वायदे के लिए भरी जाती है।

   क्या आपको कभी ऐसा लगा कि परमेश्वर ने अपने वायदे पूरे नहीं किए? यह एक विचार बनकर आरंभ होता है और धीरे धीरे बढ़कर प्रवृत्ति का रूप ले लेता है। परमेश्वर के वचन बाइबल का महान नायक ईब्राहिम, जिसे बाइबल में ’विश्वासियों का पिता’ और जिसके परमेश्वर मे दृढ़ विश्वास को उसकी धार्मिकता माना गया, भी इससे अछूता नहीं था।

   परमेश्वर ने इब्राहिम से वायदा किया, "और मैं तुझ से एक बड़ी जाति बनाऊंगा, और तुझे आशीष दूंगा, और तेरा नाम बड़ा करूंगा, और तू आशीष का मूल होगा" (उत्पत्ति १२:२), और इसके २५ वर्ष के बाद उसका उत्तराधिकारी पुत्र इसहाक पैदा हुआ (उत्पत्ति २१:५)। इस २५ वर्ष के समय में इब्राहिम ने सन्तान ना होने के लिए अपनी निराशा व्यक्त करी और परमेश्वर से प्रश्न किया (उत्पत्ति १५:२); अपनी पत्नि सारा के कहने पर सारा की दासी के द्वारा एक पुत्र भी पाया (उत्पत्ति १६:१५)।

   इन सभी उतार-चढ़ावों में परमेश्वर अपने वायदे के बारे में इब्राहिम को स्मरण दिलाता रहा और उससे कहता रहा कि वह परमेश्वर के साथ विश्वासयोग्यता से चलता रहे, अपने विश्वास को डगमगाने ना दे (उत्पत्ति १७:२)।

   जब कभी हम बाइबल में दिए गए परमेश्वर के किसी वायदे पर विश्वास करके उसे अपने जीवन में मांग लेते हैं, चाहे वह मन की शांति के लिए हो, साहस के लिए हो, अथवा हमारी किसी आवश्यक्ता की पूर्ति के लिए हो, तब हम अपने आप को परमेश्वर के हाथों में और उसके समयानुसार वायदे की पूर्ति के लिए समर्पित कर देते हैं। परमेश्वर के समय की प्रतीक्षा करते हुए हमें प्रतीत हो सकता है कि वह हमें भूल गया है, किंतु वह अपनी प्रतिज्ञाओं में विश्वासयोग्य और कभी ना भूलने वाला परमेश्वर है। अपने समय और अपने तरीके से वह अपना वायदा अवश्य पूरा करेगा, और जिस रीति से पूरा करेगा वह हमारे लिए सर्वोत्तम और सबसे अधिक लाभकारी होगी।

   वायदे का निश्चय हमारे मनों में और पूर्ति का समय परमेश्वर के हाथों में रहता है। - डेविड मैक्कैसलैंड


परमेश्वर का प्रत्येक वायदा उसके ज्ञान, सामर्थ और प्रेम पर आधारित रहता है।

सो सारा को इब्राहीम से गर्भवती हो कर उसके बुढ़ापे में उसी नियुक्त समय पर जो परमेश्वर ने उस से ठहराया था एक पुत्र उत्पन्न हुआ। - उत्पत्ति २१:२

बाइबल पाठ: उत्पत्ति १२:१-४; २१:१-७
Gen 12:1  यहोवा ने अब्राम से कहा, अपने देश, और अपनी जन्मभूमि, और अपने पिता के घर को छोड़कर उस देश में चला जा जो मैं तुझे दिखाऊंगा। 
Gen 12:2  और मैं तुझ से एक बड़ी जाति बनाऊंगा, और तुझे आशीष दूंगा, और तेरा नाम बड़ा करूंगा, और तू आशीष का मूल होगा। 
Gen 12:3  और जो तुझे आशीर्वाद दें, उन्हें मैं आशीष दूंगा, और जो तुझे कोसे, उसे मैं शाप दूंगा; और भूमण्डल के सारे कुल तेरे द्वारा आशीष पाएंगे। 
Gen 12:4  यहोवा के इस वचन के अनुसार अब्राम चला; और लूत भी उसके संग चला; और जब अब्राम हारान देश से निकला उस समय वह पचहत्तर वर्ष का था। 
Gen 21:1  सो यहोवा ने जैसा कहा था वैसा ही सारा की सुधि लेके उसके साथ अपने वचन के अनुसार किया। 
Gen 21:2  सो सारा को इब्राहीम से गर्भवती होकर उसके बुढ़ापे में उसी नियुक्त समय पर जो परमेश्वर ने उस से ठहराया था एक पुत्र उत्पन्न हुआ। 
Gen 21:3  और इब्राहीम ने अपने पुत्र का नाम जो सारा से उत्पन्न हुआ या इसहाक रखा। 
Gen 21:4  और जब उसका पुत्र इसहाक आठ दिन का हुआ, तब उस ने परमेश्वर की आज्ञा के अनुसार उसका खतना किया। 
Gen 21:5  और जब इब्राहीम का पुत्र इसहाक उत्पन्न हुआ तब वह एक सौ वर्ष का था। 
Gen 21:6  और सारा ने कहा, परमेश्वर ने मुझे प्रफुल्लित कर दिया है; इसलिये सब सुनने वाले भी मेरे साथ प्रफुल्लित होंगे। 
Gen 21:7  फिर उस ने यह भी कहा, कि क्या कोई कभी इब्राहीम से कह सकता था, कि सारा लड़कों को दूध पिलाएगी? पर देखो, मुझ से उसके बुढ़ापे में एक पुत्र उत्पन्न हुआ।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन १०७-१०९ 
  • १ कुरिन्थियों ४

सोमवार, 20 अगस्त 2012

परिपक्व


   एक दिन एक दुकान पर जन्मदिन की बधाई सन्देश के कार्ड देखते समय मुझे एक कार्ड दिखाई दिया जिसपर लिखा था, "बचपन सब के लिए एक ही बार आता है किंतु कुछ लोगों के लिए बचपना सारी उम्र बना रहता है।" इस कार्ड का सन्देश मुझे बड़ा रोचक लगा; बचपन की बातों में बने रहने और कभी बड़े ना होने में कुछ आकर्षक लगता है। लेकिन हम सभी जानते हैं कि सदा अपरिपक्व रहना भी ठीक नहीं है, और उम्र के साथ यदि परिपक्वता ना हो तो यह चिंता का विषय बन जाता है।

   मसीही विश्वासियों को भी अपने विश्वास में परिपक्व होना अनिवार्य है। पापों के पश्चाताप और क्षमा तथा नए जन्म के बाद जब हम प्रभु यीशु के अनुयायी बनते हैं तो अत्मिक बचपने से परिपक्वता और प्रौढ़ होना भी हम में दिखना चाहिए। परमेश्वर का वचन हम विश्वासियों को चुनौती देता है कि प्रभु की समानता में बढ़ने और परिपक्व होने में प्रयत्नशील रहें।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में समस्याओं से भरी कुरिन्थुस की मण्डली को प्रेरित पौलुस ने लिखा कि उनकी समस्याओं की जड़ उनकी आत्मिक अपरिपक्वता में है: "हे भाइयों, मैं तुम से इस रीति से बातें न कर सका, जैसे आत्मिक लोगों से; परन्‍तु जैसे शारीरिक लोगों से, और उन से जो मसीह में बालक हैं" (१ कुरिन्थियों ३:१)।

   हम कैसे आत्मिक बचपन से मसीही परिपक्वता में आ सकते हैं? प्रेरित पतरस ने लिखा, "पर हमारे प्रभु, और उद्धारकर्ता यीशु मसीह के अनुग्रह और पहचान में बढ़ते जाओ" (२ पतरस ३:१८)। यह बढ़ना परमेश्वर के वचन पर मनन करने और प्रार्थना करने में समय बिताने के द्वारा होता है (भजन ११९:९७-१०४; प्रेरितों १:१४)।

   समस्याओं से भरी कुरिन्थुस की उस अपरिपक्व मण्डली के समान, क्या हमारे जीवनों की समस्याओं का कारण हमारी आत्मिक अपरिपक्वता तो नहीं? कहीं यह हमारे अपरिपक्वता से परिपक्वता की ओर बढ़ने का समय तो नहीं? - बिल क्राउडर


जब विश्वास को सींचा जाता है तो आत्मिक वृद्धि होती है।

हे भाइयों, मैं तुम से इस रीति से बातें न कर सका, जैसे आत्मिक लोगों से; परन्‍तु जैसे शारीरिक लोगों से, और उन से जो मसीह में बालक हैं। - १ कुरिन्थियों ३:१

बाइबल पाठ: १ कुरिन्थियों ३:१-१७
1Co 3:1  हे भाइयों, मैं तुम से इस रीति से बातें न कर सका, जैसे आत्मिक लोगों से; परन्‍तु जैसे शारीरिक लोगों से, और उन से जो मसीह में बालक हैं। 
1Co 3:2  में ने तुम्हें दूध पिलाया, अन्न न खिलाया; क्‍योंकि तुम उस को न खा सकते थे; वरन अब तक भी नहीं खा सकते हो। 
1Co 3:3  क्‍योंकि अब तक शारीरिक हो, इसलिये, कि जब तुम में डाह और झगड़ा है, तो क्‍या तुम शारीरिक नहीं और मनुष्य की रीति पर नहीं चलते? 
1Co 3:4  इसलिये कि जब एक कहता है, कि मैं पौलुस का हूं, और दूसरा कि मैं अपुल्लोस का हूं, तो क्‍या तुम मनुष्य नहीं? 
1Co 3:5  अपुल्लोस क्‍या है? और पौलुस क्‍या? केवल सेवक, जिन के द्वारा तुम ने विश्वास किया, जैसा हर एक को प्रभु ने दिया। 
1Co 3:6  मैं ने लगाया, अपुल्लोस ने सींचा, परन्‍तु परमेश्वर ने बढ़ाया। 
1Co 3:7  इसलिये न तो लगाने वाला कुछ है, और न सींचने वाला, परन्‍तु परमेश्वर जो बढ़ाने वाला है। 
1Co 3:8  लगाने वाला और सींचने वाला दानों एक हैं; परन्‍तु हर एक व्यक्ति अपने ही परिश्रम के अनुसार अपनी ही मजदूरी पाएगा। 
1Co 3:9  क्‍योंकि हम परमेश्वर के सहकर्मी हैं; तुम परमेश्वर की खेती और परमेश्वर की रचना हो। 
1Co 3:10  परमेश्वर के उस अनुग्रह के अनुसार, जो मुझे दिया गया, मैं ने बुद्धिमान राजमिस्त्री की नाईं नेव डाली, और दूसरा उस पर रद्दा रखता है; परन्‍तु हर एक मनुष्य चौकस रहे, कि वह उस पर कैसा रद्दा रखता है। 
1Co 3:11  क्‍योंकि उस नेव को छोड़ जो पड़ी है, और वह यीशु मसीह है कोई दूसरी नेव नहीं डाल सकता। 
1Co 3:12  और यदि कोई इस नेव पर सोना या चान्‍दी या बहुमोल पत्थर या काठ या घास या फूस का रद्दा रखता है। 
1Co 3:13  तो हर एक का काम प्रगट हो जाएगा, क्‍योंकि वह दिन उसे बताएगा; इसलिये कि आग के साथ प्रगट होगा: और वह आग हर एक का काम परखेगी कि कैसा है? 
1Co 3:14   जिस का काम उस पर बना हुआ स्थिर रहेगा, वह मजदूरी पाएगा। 
1Co 3:15  और यदि किसी का काम जल जाएगा, तो हानि उठाएगा; पर वह आप बच जाएगा परन्‍तु जलते जलते।
1Co 3:16  क्‍या तुम नहीं जानते, कि तुम परमेश्वर का मन्‍दिर हो, और परमेश्वर का आत्मा तुम में वास करता है? 
1Co 3:17  यदि कोई परमेश्वर के मन्‍दिर को नाश करेगा तो परमेश्वर उसे नाश करेगा; क्‍योंकि परमेश्वर का मन्‍दिर पवित्र है, और वह तुम हो।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन १०५-१०६ 
  • १ कुरिन्थियों ३