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मंगलवार, 18 सितंबर 2012

समझ से बाहर


   अमेरिका के मध्य-पश्चिम इलाके के जंगलों और बहते पानी के सोतों के आस-पास रहने और बड़े होने से उस इलाके के प्राकृतिक सौन्दर्य तथा वन्य-जीवन से मैं सदा ही बहुत प्रभावित रहा हूँ। परन्तु हाल ही में कैलिफोर्निया के समुद्र-तट पर अपनी एक यात्रा में बड़े बड़े समुद्री जीव-जन्तुओं के दृश्यों और समुद्र में उनकी अटखेलियों तथा कैलिफोर्निया के अति विशाल रेडवुड पेड़ों के जंगल को देखकर मैं मन्त्र-मुग्ध सा रह गया। यह सब, जो परमेश्वर द्वारा रचि गयी प्रकृति के लाखों जीव-जन्तुओं और उनके आपसी ताल-मेल के साथ रहने और बढ़ने के कुछ नमूने ही हैं, हमें परमेश्वर की बुद्धि और समझ-बूझ का आभास देते हैं।

   परमेश्वर के वचन बाइबल के अनुसार, प्रकृति की अनुपम जटिल विविधता और सौन्दर्यता का उद्देश्य केवल विसमय उत्पन्न करना ही नहीं है। प्रकृति के रहस्य हमें परमेश्वर के कार्य करने के तरीकों को भी दिखाते और समझाते हैं और कई बार किसी किसी के जीवन में बयान और समझ से बाहर तकलीफों और परेशानियों को भी आ लेने देने को समझने में सहायता करते है।

   इसका एक उदाहरण हम अय्युब की गाथा में पाते हैं। जब अय्युब को अपनी उन तकलीफों का सामना करना पड़ रहा था तब वह नहीं जानता था कि परमेश्वर उसका और उसके विश्वास का इतना आदर करता है कि उसने शैतान को उसे और परमेश्वर में उसके विश्वास को तकलीफों और नुकसानों के द्वारा परखने की अनुमति दी है, क्योंकि परमेश्वर जानता था कि अय्युब उन सब में खरा उतरेगा और उसका विश्वास डगमगाएगा नहीं।

   अय्युब की गाथा के अध्ययन के बाद जो निष्कर्ष निकल कर सामने आता है वह यह है कि वह सृष्टिकर्ता जिसके पास प्रकृति के अचरज बनाने की समझ-बूझ है, उसके पास हमारी अपनी समझ से बाहर तकलीफों को हमारे जीवन में आने देने के उद्देश्यों और कारणों की भी समझ है और हम उसपर इन सब बातों में भी पूरा पूरा भरोसा रख सकते हैं।

   अपनी परीक्षा के अंत में, अय्युब अपनी स्वधार्मिकता के छल को और परमेश्वर की पवित्रता को और भी बेहत्र समझने पाता है और परमेश्वर के सामने नतमस्तक, अय्युब कहता है: "मैं जानता हूँ कि तू सब कुछ कर सकता है, और तेरी युक्तियों में से कोई रुक नहीं सकती। मैं कानों से तेरा समाचार सुना था, परन्तु अब मेरी आंखें तुझे देखती हैं; इसलिये मुझे अपने ऊपर घृणा आती है, और मैं धूलि और राख में पश्चात्ताप करता हूँ" - (अय्युब ४२:२,५,६)। 

   समझ से बाहर अपनी परिस्थितियों और क्लेषों में भी अय्युब के समान ही हम भी अपने परमेश्वर में ऐसा ही विश्वास रख सकते हैं; क्योंकि चाहे जो कुछ भी क्यों ना हो जाए, वह जो करेगा हमारे भले ही के लिए करेगा। - मार्ट डी हॉन


प्रकृति और जीवन के अचरज प्रकृति और जीवन के सृष्टिकर्ता परमेश्वर को जानने और उसकी आराधना करने को प्रेरित करते हैं।

मैं कानों से तेरा समाचार सुना था, परन्तु अब मेरी आंखें तुझे देखती हैं; इसलिये मुझे अपने ऊपर घृणा आती है, और मैं धूलि और राख में पश्चात्ताप करता हूँ। - (अय्युब ४२:५-६)

बाइबल पाठ: अय्युब ३६:२२-३३
Job 36:22  देख, ईश्वर अपने सामर्ध्य से बड़े बड़े काम करता है, उसके समान शिक्षक कौन है? 
Job 36:23  किस ने उसके चलने का मार्ग ठहराया है? और कौन उस से कह सकता है, कि तू ने अनुचित काम किया है? 
Job 36:24  उसके कामों की महिमा और प्रशंसा करने को स्मरण रख, जिसकी प्रशंसा का गीत मनुष्य गाते चले आए हैं। 
Job 36:25  सब मनुष्य उसको ध्यान से देखते आए हैं, और मनुष्य उसे दूर दूर से देखता है। 
Job 36:26  देख, ईश्वर महान और हमारे ज्ञान से कहीं परे है, और उसके वर्ष की गिनती अनन्त है। 
Job 36:27  क्योंकि वह तो जल की बूंदें ऊपर को खींच लेता है वे कुहरे से मेंह होकर टपकती हैं, 
Job 36:28  वे ऊंचे ऊंचे बादल उंडेलते हैं और मनुष्यों के ऊपर बहुतायत से बरसाते हैं। 
Job 36:29  फिर क्या कोई बादलों का फैलना और उसके मणडल में का गरजना समझ सकता है? 
Job 36:30  देख, वह अपने उजियाले को चहुँ ओर फैलाता है, और समुद्र की थाह को ढांपता है। 
Job 36:31  क्योंकि वह देश देश के लोगों का न्याय इन्हीं से करता है, और भोजन-वस्तुएं बहुतायत से देता है। 
Job 36:32  वह बिजली को अपने हाथ में लेकर उसे आज्ञा देता है कि दुश्मन पर गिरे। 
Job 36:33  इसकी कड़क उसी का समाचार देती है पशु भी प्रगट करते हैं कि अन्धड़ चढ़ा आता है।

एक साल में बाइबल: 
  • नीतिवचन ३०-३१ 
  • २ कुरिन्थियों ११:१-१५

सोमवार, 17 सितंबर 2012

प्रोत्साहन


   मैं अपने पोते के आठवीं कक्षा के फुटबाल खेल को देखने गया हुआ था। खेल के समय रेफरी ने पेनल्टी की सूचना दी और खेल को रोका। खेलने वालों ने कुछ गलती करी थी और रेफरी को उसके लिए खेल रोकना पड़ा। खेल का आंखों देखा हाल वर्णन करने वाले ने घोषणा करी, ’खेल मैदान पर पेनलटी दिए जाने का समय है और गलती करने वाले इसके भागी हैं।" मैंने मन में सोचा, आज ऐसे ही कई चर्चों में भी उनकी गतिविधियां रोक कर उन्हें सुधारे जाने की आवश्यक्ता है।

   ऐसा नहीं है कि चर्च की अगुवाई करने वाले पास्टर सिद्ध होते हैं, उन से कोई गलती नहीं होती। यदि हम ऐसे किसी चर्च की तलाश में हैं तो वह कहीं नहीं मिलेगा। परमेश्वर की बुलाहट है कि हम अपने आत्मिक जीवन के अगुवों का आदर करें, विशेषकर उनका जो हमें वचन सुनाने और सिखाने में परिश्रम करते हैं (१ तिमुथियुस १:५)। मेरे विचार से इस संसार का सबसे कठिन काम पास्टर का काम है। हम एक जटिल, द्रुत गति से चलने वाले और कृत्रिमता से भरे संसार में रहते हैं, और पास्टरों के लिए हमारी अपेक्षाएं भी बहुत ऊँची तथा असंभव होती हैं; जो हम अपने जीवन में सोच नहीं सकते उसे पास्टर के जीवन में देखना चाहते हैं।

   इसलिए हमें एक परिवर्तन लाने की आवश्यक्ता है। केवल पास्टरों से ऊँची ऊँची उम्मीदें रखने की बजाए, हम स्वयं ही उच्च स्तर के चर्च सदस्य क्यों ना बन जाएं और अपने पास्टरों का धन्यवाद और प्रोत्साहन के शब्दों द्वारा आदर करना आरंभ कर दें। हमारा थोड़ा सा प्रयास हमारे पास्टरों को आनन्द और उत्साह के साथ हमारे बीच में सेवकाई करने के लिए उत्तेजित करेगा, उन से होने वाली गलतियां भी कम हो जाएंगीं और हम भी उनकी सेवकाई से और अधिक लाभान्वित हो सकेंगे। प्रत्येक सदस्य द्वारा व्यक्तिगत रवैये में किए गए सुधार का एक छोटा सा प्रयास समस्त मण्डली में बड़े प्रतिफल लाएगा। - जो स्टोवैल


अपने पास्टर के केवल आलोचक ही मत बनें, वरन साथ ही उनके सहपरिश्रमी और उन्हें प्रोत्साहित करने वाले भी बनें।

जो प्राचीन अच्‍छा प्रबन्‍ध करते हैं, विशेष करके वे जो वचन सुनाने और सिखाने में परिश्रम करते हैं, दो गुने आदर के योग्य समझे जाएं। - १ तिमुथियुस ५:१७

बाइबल पाठ: १ तिमुथियुस ५:१७-२५
1Ti 5:17 जो प्राचीन अच्‍छा प्रबन्‍ध करते हैं, विशेष करके वे जो वचन सुनाने और सिखाने में परिश्रम करते हैं, दो गुने आदर के योग्य समझे जाएं। 
1Ti 5:18 क्‍योंकि पवित्र शास्‍त्र कहता है, कि दांवने वाले बैल का मुंह न बान्‍धना, क्‍योंकि मजदूर अपनी मजदूरी का हकदार है। 
1Ti 5:19  कोई दोष किसी प्राचीन पर लगाया जाए तो बिना दो या तीन गवाहों के उस को न सुन। 
1Ti 5:20  पाप करने वालों को सब के साम्हने समझा दे, ताकि और लोग भी डरें। 
1Ti 5:21 परमेश्वर, और मसीह यीशु, और चुने हुए स्‍वर्गदूतों को उपस्थित जानकर मैं तुझे चितौनी देता हूं कि तू मन खोलकर इन बातों को माना कर, और कोई काम पक्षपात से न कर। 
1Ti 5:22  किसी पर शीघ्र हाथ न रखना और दूसरों के पापों में भागी न होना: अपने आप को पवित्र बनाए रख। 
1Ti 5:23  भविष्य में केवल जल ही का पीने वाला न रह, पर अपने पेट के और अपने बार बार बीमार होने के कारण थोड़ा थोड़ा दाखरस भी काम में लाया कर। 
1Ti 5:24  कितने मनुष्यों के पाप प्रगट हो जाते हैं, और न्याय के लिये पहिले से पहुंच जाते हैं, पर कितनों के पीछे से आते हैं। 
1Ti 5:25  वैसे ही कितने भले काम भी प्रगट होते हैं, और जो ऐसे नहीं होते, वे भी छिप नहीं सकते।

एक साल में बाइबल: 
  • नीतिवचन २७-२९ 
  • २ कुरिन्थियों १०

रविवार, 16 सितंबर 2012

एक और इतवार?


   एक इतवार चर्च के बाद, दोपहर के समय, मैं अपने पड़ौस में टहलने निकला। एक पडौसी अपने घर के सामने, सड़क के किनारे की घास काट रहा था और हम दोनो ने एक दुसरे से औपचारिकता वाला ’नमस्कार; कैसे हैं’ कहा; उसने उत्तर दिया, ’बस एक और इतवार’ बाद में मैं सोचने लगा कि ऐसा कहने से उसका क्या तात्पर्य था? क्या वह कहना चाह रहा था कि, ’कुछ विशेष नहीं, मैं तो हमेशा की तरह, अपनी नित्यक्रियाएं ही पूरी कर रहा हूँ।’

   कई बार लोगों के लिए चर्च जाना भी एक नित्यकर्म बन कर रह जाता है; बस एक और इतवार, एक और बार उन्हीं क्रियाओं का वैसे ही दोहराया जाना, इससे अधिक कुछ नहीं। लेकिन आरंभिक चर्च में ऐसा नहीं था (प्रेरितों २:४१-४७)। लोगों का परमेश्वर की आराधना के लिए एक साथ जमा होना उनके लिए एक आनन्द और उत्तेजना का विषय होता था। उस समय चर्च आरंभ ही हुआ था और सभी नए विश्वासी थे, इसलिए वे सभी उत्साहित रहते थे। लेकिन हमारे लिए क्या है? हम इतवार कि आराधना को उत्साहवर्धक और आनन्दमय बनाने के लिए क्या कर सकते हैं? यदि पहले चर्च की वह उत्सुक्ता और परमेश्वर की उपस्थिति में होने का एहसास हमारे साथ हो तो पहले चर्च वाली उत्तेजना और आनन्द भी हमारे साथ रहेगा। 

   प्रत्येक इतवार हम व्यक्तिगत रीति से कम से कम चार बातें अपने लिए अवश्य कर सकते हैं:

   १. परमेश्वर के साथ मिलने के पूर्वाभास के साथ जाएं। यद्यपि परमेश्वर हर समय हमारे साथ रहता है (इब्रानियों १३:५), लेकिन जब हम उसके चाहने और जानने वालों के साथ सामूहिक रूप से एकत्रित होते हैं तो उसकी एक विशेष उपस्थिति वहां पर होती है (मत्ती १८:२०; याकूब ४:८)। ऐसे में हम एक दूसरे के साथ और परमेश्वर के साथ अपने बोझ और अपने धन्यवाद तथा आराधना की बातें बांट सकते हैं, एक दूसरे के लिए प्रार्थना कर सकते हैं और एक दुसरे के लिए परमेश्वर का धन्यवाद कर सकते हैं।

   २. परमेश्वर के बारे में सीखने की इच्छा से जाइए। परमेश्वर के वचन के सत्य हमें सदा ही प्रोत्साहित करने और मार्ग दिखाने वाले होते हैं (भजन ११९:१०५)। परमेश्वर से उसकी बात सुनने सीखने की मनसा और इस इच्छा के अनुसार तैयार किया गया मन, आते दिनों के लिए परमेश्वर के वचन से कुछ न कुछ नया मार्गदर्शन अवश्य प्राप्त करेगा।

   ३. दूसरों के साथ संगति करने की इच्छा से जाईए। मसीही विश्वास की इस यात्रा में हमें एक दुसरे के साथ की आवश्यक्ता है। एक दुसरे को प्रोत्साहित करने, विश्वास में बढ़ने में उत्तेजित करने और एक दूसरे के लिए प्रार्थनाएं करने से हम एक दुसरे को इस यात्रा में प्रोत्साहित कर सकते हैं, एक दूसरे का साथ निभा सकते हैं (इब्रानियों १०:२४-२५); उन्हें अकेलेपन या भटकने से बचा कर रख सकते हैं।

   ४. परमेश्वर से प्रार्थना के साथ जाएं कि वह हमारे मनों को तैयार करे, एक नया जोश हम में भरे, कि यह हमारे लिए ’बस एक और इतवार’ न बने। - ऐने सेटास


यदि आप आत्मिक भोजन से तृप्त होना चाहते हैं तो परमेश्वर के वचन की भूख के साथ चर्च जाएं।

और वे प्ररितों से शिक्षा पाने, और संगति रखने में और रोटी तोड़ने में और प्रार्थना करने में लौलीन रहे। - प्रेरितों २:४२

बाइबल पाठ: प्रेरितों २:४१-४७
Act 2:41  सो जिन्‍होंने उसका वचन ग्रहण किया उन्‍होंने बपतिस्मा लिया; और उसी दिन तीन हजार मनुष्यों के लगभग उन में मिल गए। 
Act 2:42   और वे प्ररितों से शिक्षा पाने, और संगति रखने में और रोटी तोड़ने में और प्रार्थना करने में लौलीन रहे।
Act 2:43  और सब लोगों पर भय छा गया, और बहुत से अद्भुत काम और चिन्‍ह प्रेरितों के द्वारा प्रगट होते थे। 
Act 2:44  और वे सब विश्वास करने वाले इकट्ठे रहते थे, और उन की सब वस्‍तुएं साझे की थीं। 
Act 2:45   और वे अपनी अपनी सम्पत्ति और सामान बेच बेचकर जैसी जिस की आवश्यकता होती थी बांट दिया करते थे। 
Act 2:46  और वे प्रति दिन एक मन होकर मन्‍दिर में इकट्ठे होते थे, और घर घर रोटी तोड़ते हुए आनन्‍द और मन की सीधाई से भोजन किया करते थे। 
Act 2:47  और परमेश्वर की स्‍तुति करते थे, और सब लोग उन से प्रसन्न थे: और जो उद्धार पाते थे, उनको प्रभु प्रति दिन उन में मिला देता था।

एक साल में बाइबल: 
  • नीतिवचन २५-२६ 
  • २ कुरिन्थियों ९

शनिवार, 15 सितंबर 2012

वास्तविक


   मेरे घर में, मेरे कार्यस्थल में दीवार पर लटका वास्तविकता का एक प्रमाणपत्र मेरे सबसे मनपसन्द चीज़ों में से एक है। उस प्रमाण पत्र पर अमेरिका की अंतरिक्ष यान की उड़ान ११० की मुहर लगी है जो अप्रैल २००२ में अंतरिक्ष भेजा गया था। एटलांटिस नामक अंतरिक्ष यान में रेक्स वॉलहैम एक उड़ान विशेषज्ञ थे, जो अपने साथ अंतरिक्ष में हमारी Our Daily Bread का एक लेख ’परमेश्वर की महिमा देखना’ ले कर गए थे। रेक्स वॉलहैम ने ही मुझे वह प्रमाणपत्र भेजा था, यह प्रमाणित करने के लिए कि वह लेख-पृष्ठ वास्तव में धरती के वायुमण्डल से बाहर अंतरिक्ष में गया है।

   हमें कभी कभी ऐसे दस्तावेज़ों की आवश्यक्ता होती है - वे जो सच को प्रमाणित कर सकें। यदि मैं वह लेख-पृष्ठ किसी को दिखा कर कहता कि यह आंतरिक्ष में होकर आया है तो लोग मुझ पर शक करते क्योंकि मेरे पास इस बात का कोई प्रमाण नहीं होता। लेकिन रेक्स वॉलहैम द्वारा भेजे गए उस प्रमाणपत्र ने मुझे वह प्रमाण दे दिया जिससे किसी के लिए अब शक की कोई संभावना नहीं रही, और जो चाहे उस की जांच कर सकता है और भरोसा कर सकता है।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पतरस ने अपनी पहली पत्री में परमेश्वर के अनुग्रह के अपने सन्देश के विषय में ऐसा ही एक प्रमाणपत्र दिया है। उस पत्री के पांचवें अध्याय में पतरस ने लिखा, "मैं ने सिलवानुस के हाथ, जिस मैं विश्वासयोग्य भाई समझता हूं, संक्षेप में लिख कर तुम्हें समझाया है और यह गवाही दी है कि परमेश्वर का सच्‍चा अनुग्रह यही है, इसी में स्थिर रहो" (पद १२)। पतरस अपने पाठकों को आश्वस्त कर रहा था कि उस पत्री में जो आशा, साहस और क्लेष उठाने के सन्देश उसने लिखे हैं, वे परमेश्वर के अनुग्रह को दिखाते हैं और सब वास्तविक हैं।

   क्या आप परमेश्वर के अनुग्रह के प्रमाणों के खोजी हैं? पतरस कि पहली पत्री पढ़कर देख लीजिए और आश्वस्त हो जाईए कि उसके सन्देश वास्तविक हैं, सार्थक हैं। - डेव ब्रैनन


परमेश्वर पर विश्वास का अर्थ है उसके जीवते और पवित्र वचन पर विश्वास रखना।

मैं ने सिलवानुस के हाथ, जिस मैं विश्वासयोग्य भाई समझता हूं, संक्षेप में लिख कर तुम्हें समझाया है और यह गवाही दी है कि परमेश्वर का सच्‍चा अनुग्रह यही है, इसी में स्थिर रहो। - १ पतरस ५:१२

बाइबल पाठ: १ पतरस १:३-१२
1Pe 1:3  हमारे प्रभु यीशु मसीह के परमेश्वर और पिता का धन्यवाद दो, जिस ने यीशु मसीह को मरे हुओं में से जी उठने के द्वारा, अपनी बड़ी दया से हमें जीवित आशा के लिये नया जन्म दिया। 
1Pe 1:4  अर्थात एक अविनाशी और निर्मल, और अजर मीरास के लिये। 
1Pe 1:5 जो तुम्हारे लिये स्‍वर्ग में रखी है, जिस की रक्षा परमेश्वर की सामर्थ से, विश्वास के द्वारा उस उद्धार के लिये, जो आने वाले समय में प्रगट होने वाली है, की जाती है। 
1Pe 1:6  और इस कारण तुम मगन होते हो, यद्यपि अवश्य है कि अब कुछ दिन तक नाना प्रकार की परीक्षाओं के कारण उदास हो। 
1Pe 1:7  और यह इसलिये है कि तुम्हारा परखा हुआ विश्वास, जो आग से ताए हुए नाशमान सोने से भी कहीं, अधिक बहुमूल्य है, यीशु मसीह के प्रगट होने पर प्रशंसा, और महिमा, और आदर का कारण ठहरे। 
1Pe 1:8 उस से तुम बिन देखे प्रेम रखते हो, और अब तो उस पर बिन देखे भी विश्वास करके ऐसे आनन्‍दित और मगन होते हो, जो वर्णन से बाहर और महिमा से भरा हुआ है। 
1Pe 1:9 और अपने विश्वास का प्रतिफल अर्थात आत्माओं का उद्धार प्राप्‍त करते हो। 
1Pe 1:10 इसी उद्धार के विषय में उन भविष्यद्वक्ताओं ने बहुत ढूंढ़-ढांढ़ और जांच-पड़ताल की, जिन्‍होंने उस अनुग्रह के विषय में जो तुम पर होने को था, भविष्यद्वाणी की थी। 
1Pe 1:11 उन्‍होंने इस बात की खोज की कि मसीह का आत्मा जो उन में था, और पहिले ही से मसीह के दुखों की और उन के बाद होने वाली महिमा की गवाही देता था, वह कौन से और कैसे समय की ओर संकेत करता था। 
1Pe 1:12  उन पर यह प्रगट किया गया, कि वे अपनी नहीं वरन तुम्हारी सेवा के लिये ये बातें कहा करते थे, जिन का समाचार अब तुम्हें उन के द्वारा मिला जिन्‍होंने पवित्र आत्मा के द्वारा जो स्‍वर्ग से भेजा गया: तुम्हें सुसमाचार सुनाया, और इन बातों को स्‍वर्गदूत भी ध्यान से देखने की लालसा रखते हैं।

एक साल में बाइबल: 
  • नीतिवचन २२-२४ 
  • २ कुरिन्थियों ८

शुक्रवार, 14 सितंबर 2012

ज्ञान और ध्यान


   एक सन्ध्या, एक छोटी गौरैया उड़कर हमारे घर के अन्दर आ गई। हम उसे बाहर का रास्ता दिखाने में लग गए। जैसे ही उसके निकट पहुँचते, वह डर के मारे उड़कर किसी अन्य स्थान पर जा बैठती। इससे पहले कि हम उसे बाहर निकाल पाते, उस गौरैया ने अपनी घबराहट में घर के कई चक्कर लगा लिए। उसकी घबराहट उसकी छाती में दिखाई दे रही उसके दिल के तेज़ धड़कन से प्रगट थी। हमारी सहायता के प्रयास वह समझ नहीं पा रही थी और अपने ही प्रयासों में थकती जा रही थी।

   कभी कभी हम भी उस घबराई हुई छोटी चिड़िया के समान ही होते हैं - चिंतित, अस्त-व्यस्त और आगे क्या होगा इससे आशंकित। अपनी इस मनःस्थिति में हमें परमेश्वर की सहायता और मार्गदर्शन के हाथ भी भयावह लगते हैं। लेकिन परमेश्वर हमारी प्रत्येक परिस्थिति को जानता है; हमारे संसार की हर बात को वह देखता और जानता है। क्योंकि "यहोवा की आंखें सब स्थानों में लगी रहती हैं, वह बुरे भले दोनों को देखती रहती हैं" (नीतिवचन १५:३), उसकी निगाहों तथा ध्यान से कुछ भी बचकर नहीं निकल सकता, और वह हमारी छोटी से छोटी बात को भी जानता है "तुम्हारे सिर के बाल भी सब गिने हुए हैं" (मत्ती १०:३०); ऐसे में मुझे प्रभु यीशु की कही बात "क्‍या पैसे में दो गौरैये नहीं बिकतीं? तौभी तुम्हारे पिता की इच्‍छा के बिना उन में से एक भी भूमि पर नहीं गिर सकती" (मत्ती १०:२९) से बहुत सांत्वना मिलती है।

   यह अद्भुत बात है कि परमेश्वर हमारी छोटी से छोटी बात का भी ध्यान रखता है और संसार में एक छोटा पक्षी भी उसके ज्ञान के बिना नहीं गिर सकता। जिसे हमारी इन छोटी छोटी बातों का ध्यान है, उसे हमारी बड़ी और महत्वपुर्ण बातों तथा आवश्यक्ताओं और चिंताओं का भी ज्ञान है, वह उनका ध्यान रखता है। जब कभी हम सहायता के लिए उससे प्रार्थना करते हैं, उसका उत्तर उसके इसी ज्ञान और ध्यान के अनुसार होता है।

   चिंतित रहकर फड़फड़ाते रहने और थकने की बजाए उसके हाथों में शांत होकर अपने आप को छोड़ दें। वह जो करेगा, भला और सर्वोत्तम ही करेगा। - जेनिफर बेन्सन शुल्ड्ट


उसकी दृष्टि गौरैये पर भी रहती है, और मैं जानता हूँ कि वह मेरा भी ध्यान रखता है।

क्‍या पैसे में दो गौरैये नहीं बिकतीं? तौभी तुम्हारे पिता की इच्‍छा के बिना उन में से एक भी भूमि पर नहीं गिर सकती। - मत्ती १०:२९

बाइबल पाठ: मत्ती १०:२७-३३
Mat 10:27  जो मैं तुम से अन्‍धियारे मे कहता हूं, उसे उजियाले में कहो; और जो कानों कान सुनते हो, उसे कोठों पर से प्रचार करो। 
Mat 10:28  जो शरीर को घात करते हैं, पर आत्मा को घात नहीं कर सकते, उन से मत डरना; पर उसी से डरो, जो आत्मा और शरीर दोनों को नरक में नाश कर सकता है। 
Mat 10:29 क्‍या पैसे मे दो गौरैये नहीं बिकतीं? तौभी तुम्हारे पिता की इच्‍छा के बिना उन में से एक भी भूमि पर नहीं गिर सकती। 
Mat 10:30  तुम्हारे सिर के बाल भी सब गिने हुए हैं। 
Mat 10:31  इसलिये, डरो नहीं; तुम बहुत गौरैयों से बढ़ कर हो। 
Mat 10:32 जो कोई मनुष्यों के साम्हने मुझे मान लेगा, उसे मैं भी स्‍वर्गीय पिता के साम्हने मान लूंगा। 
Mat 10:33 पर जो कोई मनुष्यों के साम्हने मेरा इन्‍कार करेगा उस से मैं भी अपने स्‍वर्गीय पिता के साम्हने इन्‍कार करूंगा।

एक साल में बाइबल: 
  • नीतिवचन १९-२१ 
  • २ कुरिन्थियों ७

गुरुवार, 13 सितंबर 2012

संयम


   दुसरे विश्वयुद्ध के निर्णायक समय में संगठित सेना के सर्वोच्च सेनापति ड्वाईट डी. आईज़नहावर संसार के सबसे शक्तिशाली व्यक्ति थे। उनके नेतृत्व में, संसार के इतिहास में जल-थल सेना का सबसे बड़ा जमावड़ा, युरोप को नाट्ज़ी प्रभुसत्ता से छुड़ाने के लिए तैयार हुआ। इतनी विशाल सेना का संचालन आईज़नहावर कैसे करने पाए? इस प्रश्न के उत्तर का एक भाग है उनकी अन्य और भिन्न प्रवृत्ति के लोगों के साथ भी मिलकर कार्य कर पाने की विलक्षण प्रतिभा।

   लेकिन जो बात बहुत से लोग नहीं जानते वह यह है कि आईज़नहावर बचपन से ऐसे नहीं थे, वरन इसके विपरीत स्कूल के दिनों में वे अकसर अन्य बच्चों के साथ लड़ते-झगड़ते रहते थे। लेकिन उनकी माता एक बहुत संयमी और ध्यान रखने वाली महिला थीं जो उन्हें परमेश्वर के वचन बाइबल से सिखाती रहती थीं। एक बार जब वे ऐसी ही किसी लड़ाई में लगी आईज़नहावर की चोटों की मरहम-पट्टी कर रहीं थीं तो उन्होंने परमेश्वर के वचन बाइबल में नीतिवचन १६:३२ में लिखे पद को उनके सामने रखा, "विलम्ब से क्रोध करना वीरता से, और अपने मन को वश में रखना, नगर के जीत लेने से उत्तम है"। वर्षों बाद आईज़नहावर ने इसके बारे में लिखा, "माँ से हुए उस वार्तालाप को मैं अपने जीवन के सबसे मुल्यवान समयों में मानता हूँ।" निश्चय ही संयम और क्रोध को वश में करने की उस शिक्षा ही ने आईज़नहावर को दुसरों के साथ मिलकर कार्य करने और प्रभावी होने वाला बनाया और इतनी ऊँचाईयों तक पहुँचाया।

   हम सब के जीवनों में ऐसे समय अवश्य ही आएंगे जब किसी अन्य व्यक्ति पर क्रोध और आवेश में आकर कुछ कहने और करने का मन होगा। लेकिन ये ही संयम दिखाने के सबसे बहुमूल्य अवसर हैं जहां परमेश्वर और उसके वचन की सहायता से, अपने उद्धारकर्ता प्रभु यीशु के समान, हम ना केवल अपने क्रोध को वश में रखना और धैर्य से काम लेना सीख सकते हैं, वरन ऐसा करके संसार के लोगों में प्रभावी और परमेश्वर की महिमा का कारण भी बन सकते हैं।

   एक नम्र और संयमी आत्मा ही प्रभावी और प्रभु को प्रीय आत्मा है। - डेनिस फिशर


जो क्रोध पर जयवन्त है वह एक बहुत प्रबल शत्रु पर जयवन्त है।

विलम्ब से क्रोध करना वीरता से, और अपने मन को वश में रखना, नगर के जीत लेने से उत्तम है। - नीतिवचन १६:३२

बाइबल पाठ: नीतिवचन १६:२१-३३
Pro 16:21  जिसके हृदय में बुद्धि है, वह समझ वाला कहलाता है, और मधुर वाणी के द्वारा ज्ञान बढ़ता है। 
Pro 16:22  जिसके बुद्धि है, उसके लिये वह जीवन का सोता है, परन्तु मूढ़ों को शिक्षा देना मूढ़ता ही होती है। 
Pro 16:23  बुद्धिमान का मन उसके मुंह पर भी बुद्धिमानी प्रगट करता है, और उसके वचन में विद्या रहती है। 
Pro 16:24  मनभावने वचन मधुभरे छते की नाईं प्राणों को मीठे लगते, और हड्डियों को हरी-भरी करते हैं। 
Pro 16:25  ऐसा भी मार्ग है, जो मनुष्य को सीधा देख पड़ता है, परन्तु उसके अन्त में मृत्यु ही मिलती है। 
Pro 16:26  परिश्रमी की लालसा उसके लिये परिश्रम करती है, उसकी भूख तो उसको उभारती रहती है। 
Pro 16:27  अधर्मी मनुष्य बुराई की युक्ति निकालता है, और उसके वचनों से आग लग जाती है। 
Pro 16:28  टेढ़ा मनुष्य बहुत झगड़े को उठाता है, और कानाफूसी करने वाला परम मित्रों में भी फूट करा देता है। 
Pro 16:29  उपद्रवी मनुष्य अपने पड़ोसी को फुसलाकर कुमार्ग पर चलाता है। 
Pro 16:30  आंख मूंदने वाला छल की कल्पनाएं करता है, और ओंठ दबाने वाला बुराई करता है। 
Pro 16:31  पक्के बाल शोभायमान मुकुट ठहरते हैं; वे धर्म के मार्ग पर चलने से प्राप्त होते हैं। 
Pro 16:32  विलम्ब से क्रोध करना वीरता से, और अपने मन को वश में रखना, नगर के जीत लेने से उत्तम है। 
Pro 16:33  चिट्ठी डाली जाती तो है, परन्तु उसका निकलना यहोवा ही की ओर से होता है।

एक साल में बाइबल: 
  • नीतिवचन १६-१८ 
  • २ कुरिन्थियों ६

बुधवार, 12 सितंबर 2012

भिन्न लक्ष्य


   व्यावसायिक गोल्फ खिलाड़ी बायर्न नेल्सन के लिए १९४५ विलक्षण वर्ष था। जिन ३० प्रतियोगिताओं में उसने भाग लिया, उनमें से १८ उसने जीतीं, जिनमें से ११ में वह लगातार विजयी रहा। यदि वह चाहता तो अपने इस व्यवसायिक खेलने को आगे बढ़ा कर और ऊँचाईयों पर ले कर जा सकता था और अपने समय का सर्वश्रेष्ठ गोल्फ खिलाड़ी बन सकता था। किंतु यह उसका लक्ष्य नहीं था। उसका लक्ष्य था गोल्फ द्वारा इतना पैसा कमा लेना कि वह एक पशु-पालन और कृषि फार्म खरीद सके जहां वह अपनी शेष आयु वह कार्य करने में व्यतीत करे जो उसकी पहली पसन्द है। नेल्सन ने ३४ वर्ष की आयु में ही गोल्फ से अवकाश ले लिया और कृषि तथा पशु-पालन करने वाला बन गया। उसके लक्ष्य भिन्न थे।

   संसार इस प्रकार की विचारधारा को मूर्खता मान सकता है क्योंकि वह उस हृदय को नहीं समझता जो संसार से संसार की धन-दौलत और प्रसिद्धि अर्जित करने की बजाए मन की सच्ची शांति और संतुष्टि की लालसा रखता है। यह विशेषकर तब और भी अधिक लागू होता है जब कोई यह निर्णय उद्धारकर्ता प्रभु यीशु के लिए जीने के लिए करता है। किंतु संसार की समझ में जो मूर्खता है वह ही हमारे लिए अपने प्रभु से संबंधित और संसार के लक्ष्यों से भिन्न लक्ष्यों को संसार ही के समक्ष रखने के लिए एक उत्तम अवसर बन जाता है। इसी संदर्भ में प्रेरित पौलुस ने लिखा, "परन्‍तु परमेश्वर ने जगत के मूर्खों को चुन लिया है, कि ज्ञान वालों को लज्ज़ित करे; और परमेश्वर ने जगत के निर्बलों को चुन लिया है, कि बलवानों को लज्ज़ित करे" (१ कुरिन्थियों १:२७)।

   परमेश्वर के राज्य के मूल्यों के अनुसार जीवन व्यतीत करना हमें संसार की नज़रों में मूर्ख ठहरा सकता है, लेकिन यही निर्णय संसार के सामने परमेश्वर को महिमा देने का माध्यम भी बन जाता है, जिसका प्रतिफल परमेश्वर से मिलने वाली ऐसी मूल्यवान, अद्भुत और चिरस्थायी अशीष है जो संसार ना कभी दे सकता है और ना कभी जिसकी कलपना भी कर सकता है। - बिल क्राउडर


जीवन के आदर्श मूल्य व्यर्थ हैं यदि वे परमेश्वर के मूल्यों के अनुरूप नहीं।

परन्‍तु परमेश्वर ने जगत के मूर्खों को चुन लिया है, कि ज्ञान वालों को लज्ज़ित करे; और परमेश्वर ने जगत के निर्बलों को चुन लिया है, कि बलवानों को लज्ज़ित करे। - १ कुरिन्थियों १:२७

बाइबल पाठ: १ कुरिन्थियों १:१८-३१
1Co 1:18  क्‍योंकि क्रूस की कथा नाश होने वालों के निकट मूर्खता है, परन्‍तु हम उद्धार पाने वालों के निकट परमेश्वर की सामर्थ है। 
1Co 1:19  क्‍योंकि लिखा है, कि मैं ज्ञानवानों के ज्ञान को नाश करूंगा, और समझदारों की समझ को तुच्‍छ कर दूंगा। 
1Co 1:20  कहां रहा ज्ञानवान? कहां रहा शास्त्री? कहां इस संसार का विवादी? क्‍या परमेश्वर ने संसार के ज्ञान को मूर्खता नहीं ठहराया? 
1Co 1:21  क्‍योंकि जब परमेश्वर के ज्ञान के अनुसार संसार ने ज्ञान से परमेश्वर को न जाना तो परमेश्वर को यह अच्‍छा लगा, कि इस प्रकार की मूर्खता के द्वारा विश्वास करने वालों को उद्धार दे। 
1Co 1:22  यहूदी तो चिन्‍ह चाहते हैं, और यूनानी ज्ञान की खोज में हैं। 
1Co 1:23  परन्‍तु हम तो उस क्रूस पर चढ़ाए हुए मसीह का प्रचार करते हैं जो यहूदियों के निकट ठोकर का कारण, और अन्यजातियों के निकट मूर्खता है। 
1Co 1:24  परन्‍तु जो बुलाए हुए हैं क्‍या यहूदी, क्‍या यूनानी, उन के निकट मसीह परमेश्वर की सामर्थ, और परमेश्वर का ज्ञान है। 
1Co 1:25  क्‍योंकि परमेश्वर की मूर्खता मनुष्यों के ज्ञान से ज्ञानवान है; और परमेश्वर की निर्बलता मनुष्यों के बल से बहुत बलवान है।
1Co 1:26   हे भाइयों, अपने बुलाए जाने को तो सोचो, कि न शरीर के अनुसार बहुत ज्ञानवान, और न बहुत सामर्थी, और न बहुत कुलीन बुलाए गए। 
1Co 1:27  परन्‍तु परमेश्वर ने जगत के मूर्खों को चुन लिया है, कि ज्ञान वालों को लज्ज़ित करे; और परमेश्वर ने जगत के निर्बलों को चुन लिया है, कि बलवानों को लज्ज़ित करें। 
1Co 1:28  और परमेश्वर ने जगत के नीचों और तुच्‍छों को, वरन जो हैं भी नहीं उन को भी चुन लिया, कि उन्‍हें जो हैं, व्यर्थ ठहराए। 
1Co 1:29  ताकि कोई प्राणी परमेश्वर के साम्हने घमण्‍ड न करने पाए। 
1Co 1:30  परन्‍तु उसी की ओर से तुम मसीह यीशु में हो, जो परमेश्वर की ओर से हमारे लिये ज्ञान ठहरा अर्थात धर्म, और पवित्रता, और छुटकारा। 
1Co 1:31  ताकि जैसा लिखा है, वैसा ही हो, कि जो घमण्‍ड करे वह प्रभु में घमण्‍ड करे।

एक साल में बाइबल: 
  • नीतिवचन १३-१५ 
  • २ कुरिन्थियों ५