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शुक्रवार, 12 अक्टूबर 2012

रंग


   पेड़ जो बसन्त और गर्मियों में हरे होते हैं वे शरतकाल में पीले, नारंगी या भूरे क्यों हो जाते हैं? पेड़ों की पत्तियों का हरा रंग उनमें पाए जाने वाले क्लोरोफिल नामक पदर्थ के कारण होता है जो सूर्य की रौशनी से लाल और नीले रंग की किरणें सोख कर उनकी ऊर्जा से हवा की कार्बन-डाई-ऑक्साईड को अपने भोजन के लिए प्रयुक्त करता है और हवा में ऑक्सीजन वापस दे देता है। लाल और नीले रंग की किरणें सोख लेने से बची हुई प्रतिबिंबित हरी किरणें हमें दिखाई देती हैं और इसीलिए हमें पत्ते और पेड़ हरे दिखाई देते हैं। शरत ऋतु में जब दिन छोटे होते हैं तो कम रौशनी के कारण पत्तों में क्लोरोफिल के बनने और कार्य करने में फर्क आता है और उसकी मात्रा भी पत्तों में बदलती जाती है जिससे अलग अलग रंग दिखने लगते हैं।

   हम रंगों को जीवन की बातों से जोड़ कर देखते हैं, जैसे हरे रंग को नवजीवन और सही का सूचक होने, लाल रंग को खतरे का सूचक, सफेद को सादगी, ईमानदारी और पवित्रता का सूचक इत्यादि। हमारे द्वारा पहने हुए वस्त्रों का रंग भी हमारे मन की स्थिति को दर्शाता है और देखने वालों को हमारे बारे में एक मूक सन्देश देता है। यदि कोई किसी बात में लिप्त हो जाता है, तो उसके लिए हम कहते हैं कि यह तो उस रंग में रंग गया है। जैसे रंग बिना शब्दों के बहुत कुछ कह जाते हैं और उन्हें देखकर समझने वाले बहुत कुछ समझ सकते हैं, वैसे ही प्रकृति की अन्य वस्तुएं भी परमेश्वर के अस्तित्व, उसकी सामर्थ और उसकी महिमा के बारे में बहुत कुछ कहती रहती हैं। परमेश्वर के वचन बाइबल में पौलुस प्रेरित ने रोमियों के विश्वासियों को इस संदर्भ में लिखा: "...उसके अनदेखे गुण, अर्थात उस की सनातन सामर्थ, और परमेश्वरत्‍व जगत की सृष्‍टि के समय से उसके कामों के द्वारा देखने में आते हैं..." (रोमियों १:२०)।

   परमेश्वर ने अपने आप को हम पर अनेक रीति से प्रकट किया है। वह हमारे मनों में भी अपनी बातों को डालता है: "इसलिये कि परमेश्वर के विषय में ज्ञान उन के मनों में प्रगट है, क्‍योंकि परमेश्वर ने उन पर प्रगट किया है" (रोमियों १:१९); वह अपनी सृष्टि में होकर भी हमसे बातें करता है; उसने अपना जीवित वचन भी हमारे हाथों में रखा है; और "इन दिनों के अन्‍त में हम से पुत्र के द्वारा बातें की, जिसे उस ने सारी वस्‍तुओं का वारिस ठहराया और उसी के द्वारा उस ने सारी सृष्‍टि रची है" (इब्रानियों १:२)।

   अपने चारों ओर शांत मन से देखिए और विचार कीजिए। परमेश्वर अपने आप को प्रकट कर रहा है और आप से बातें करना चाहता है। जैसे हम सामन्य रीति से अपने जीवन और कार्यों से संबंधित बातों का विशलेषण करते हैं और उन्हें जांचने तथा परखने के बाद उन्हें स्वीकार या अस्वीकार करते हैं, वैसे ही परमेश्वर की सृष्टि की बातों का विशलेषण करके देखिए। सृष्टि का ताना-बाना और उसका अविराल सुचारू रूप से कार्य करते रहना उसके सृष्टिकर्ता की ओर इशारा कर रहा है। अविश्वास के रंग में ना रंगें, परमेश्वर पर विश्वास करें क्योंकि उसके रंग हर ओर विद्यमान हैं।


परमेश्वर की महिमा उसकी सृष्टि से विदित है।

आकाश ईश्वर की महिमा वर्णन कर रहा है; और आकशमण्डल उसकी हस्तकला को प्रगट कर रहा है। - भजन १९:१

बाइबल पाठ: भजन १९:१-१४
Psa 19:1  आकाश ईश्वर की महिमा वर्णन कर रहा है; और आकशमण्डल उसकी हस्तकला को प्रगट कर रहा है। 
Psa 19:2  दिन से दिन बातें करता है, और रात को रात ज्ञान सिखाती है। 
Psa 19:3  न तो कोई बोली है और न कोई भाषा जहां उनका शब्द सुनाई नहीं देता है। 
Psa 19:4  उनका स्वर सारी पृथ्वी पर गूंज गया है, और उनके वचन जगत की छोर तक पहुंच गए हैं। उन में उस ने सूर्य के लिये एक मण्डप खड़ा किया है, 
Psa 19:5  जो दुल्हे के समान अपने महल से निकलता है। वह शूरवीर की नाईं अपनी दौड़ दौड़ने को हर्षित होता है। 
Psa 19:6  वह आकाश की एक छोर से निकलता है, और वह उसकी दूसरी छोर तक चक्कर मारता है; और उसकी गर्मी सबको पहुंचती है।
Psa 19:7  यहोवा की व्यवस्था खरी है, वह प्राण को बहाल कर देती है; यहोवा के नियम विश्वासयोग्य हैं, साधारण लोगों को बुद्धिमान बना देते हैं; 
Psa 19:8  यहोवा के उपदेश सिद्ध हैं, हृदय को आनन्दित कर देते हैं; यहोवा की आज्ञा निर्मल है, वह आंखों में ज्योति ले आती है; 
Psa 19:9  यहोवा का भय पवित्र है, वह अनन्तकाल तक स्थिर रहता है; यहोवा के नियम सत्य और पूरी रीति से धर्ममय हैं। 
Psa 19:10  वे तो सोने से और बहुत कुन्दन से भी बढ़कर मनोहर हैं; वे मधु से और टपकने वाले छत्ते से भी बढ़कर मधुर हैं। 
Psa 19:11  और उन्हीं से तेरा दास चिताया जाता है; उनके पालन करने से बड़ा ही प्रतिफल मिलता है। 
Psa 19:12  अपनी भूलचूक को कौन समझ सकता है? मेरे गुप्त पापों से तू मुझे पवित्र कर। 
Psa 19:13  तू अपने दास को ढिठाई के पापों से भी बचाए रख; वह मुझ पर प्रभुता करने न पाएं! तब मैं सिद्ध हो जाऊंगा, और बड़े अपराधों से बचा रहूंगा।
Psa 19:14  मेरे मुंह के वचन और मेरे हृदय का ध्यान तेरे सम्मुख ग्रहण योग्य हों, हे यहोवा परमेश्वर, मेरी चट्टान और मेरे उद्धार करनेवाले!

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह ३९-४० 
  • कुलुस्सियों ४

गुरुवार, 11 अक्टूबर 2012

अनुस्मारक


   जब आप अपने कंप्यूटर को चालू करते हैं तो उसके पटल पर क्या दृश्य रहता है? आप उस पटल पर दिखने के लिए अपने परिवार या किसी प्रीय जन की कोई फोटो लगा सकते हैं, या कोई प्राकृतिक दृश्य, अथवा अपने किसी पसन्दीदा कलाकार, नायक या खेल-कूद प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाले जन का चित्र लगा सकते हैं। यह आपको उन लोगों का, उनकी उपलब्धियों का, उनकी बातों का स्मरण दिलाता है।

   कुछ लोग कलाकार की कलपना द्वारा बनाए गए प्रभु यीशु के चित्र को लगाते हैं। एक व्यक्ति ने मुझे बताया कि वह बहुत समय से इंटरनैट पर उपलब्ध अश्लील चित्रों और सामग्री से जूझ रहा था। कभी वह उस संघर्ष में विजयी होता तो कभी पराजित होकर फिर उन्हीं व्यर्थ चित्रों और बातों में पड़ जाता, और इससे उसकी अपने जीवन से निराशा बढ़ती जा रही थी। अन्ततः उसने पाया कि अपने कंप्यूटर के एक कोने में प्रभु यीशु के चित्र को लगाने से वह अपनी इस समस्या पर स्थाई विजय पा सका। जिसने अपने प्राण उसके लिए बलिदान किए, उसके लगातार दिखाई देते रहने वाले स्मरण को अपने समक्ष रखने से उसके मन से उन इंटरनैट के स्थानों का आकर्षण मिट सका।

   ऐसा नहीं था कि प्रभु यीशु का वह कालपनिक चित्र किसी सामर्थी मन्त्र या जादू का कार्य कर रहा था, या उस चित्र में कोई शक्ति थी जो उस व्यक्ति या उसके कंप्यूटर को प्रभावित कर रही थी। बात साधारण सी थी, उस चित्र द्वारा वह व्यक्ति परमेश्वर के वचन बाइबल में पौलुस प्रेरित द्वारा कुलुस्सियों के विश्वासियों को लिखी पत्री में दी गई शिक्षा को बार बार स्मरण कर पाता था कि "क्‍योंकि तुम तो मर गए, और तुम्हारा जीवन मसीह के साथ परमेश्वर में छिपा हुआ है। इसलिये अपने उन अंगो को मार डालो, जो पृथ्वी पर हैं, अर्थात व्यभिचार, अशुद्धता, दुष्‍कामना, बुरी लालसा और लोभ को जो मूर्ति पूजा के बराबर है" (कुलुस्सियों ३:३, ५); और यह स्मरण उसे उन अश्लील स्थानों पर जाने से रोक देता था।

   जब हम अपनी आंखें प्रभ यीशु की ओर लगाए रखते हैं तो यह हमारे लिए एक शक्तिशाली अनुस्मारक होता है कि हम अब संसार के नहीं प्रभु के जन हैं, संसार के लिए नहीं प्रभु के लिए जीना ही हमारा ध्येय है: "और वह इस निमित्त सब के लिये मरा, कि जो जीवित हैं, वे आगे को अपने लिये न जीएं परन्‍तु उसके लिये जो उन के लिये मरा और फिर जी उठा" (२ कुरिन्थियों ५:१५)।

   क्या आप भी किसी समस्या से जूझ रहे हैं जो आपके आत्मिक जीवन को उठने नहीं दे रही है? अपने सामने प्रभु यीशु का कोई अनुस्मारक रखिए - बाइबल का कोई पद या कोई चित्र; कोई ऐसी बात जो आपका ध्यान प्रभु यीशु की ओर खींचती रहे। यह अनुस्मारक पूजे जाने या उसके आगे सिर झुकाने के लिए कतई नहीं हो, वरन केवल और केवल  आपको स्मरण दिलाते रहने के लिए कि आप अपने नहीं हैं, प्रभु यीशु के हैं; और आपके जीवन से प्रभु की महिमा होनी है: "क्‍या तुम नहीं जानते, कि तुम्हारी देह पवित्रात्मा का मन्‍दिर है जो तुम में बसा हुआ है और तुम्हें परमेश्वर की ओर से मिला है, और तुम अपने नहीं हो; क्योंकि दाम देकर मोल लिये गए हो, इसलिये अपनी देह के द्वारा परमेश्वर की महिमा करो" (१ कुरिन्थियों ६:१९-२०)। - जो स्टोवैल


पाप से अपने को दूर बनाए रखने का सबसे अच्छा उपाय है कि पाप और अपने बीच में प्रभु यीशु को खड़ा कर लें।

पृथ्वी पर की नहीं परन्‍तु स्‍वर्गीय वस्‍तुओं पर ध्यान लगाओ। - कुलुस्सियों ३:२

बाइबल पाठ: कुलुस्सियों ३:१-१०
Col 3:1  सो जब तुम मसीह के साथ जिलाए गए, तो स्‍वर्गीय वस्‍तुओं की खोज में रहो, जहां मसीह वर्तमान है और परमेश्वर के दाहिनी ओर बैठा है। 
Col 3:2  पृथ्वी पर की नहीं परन्‍तु स्‍वर्गीय वस्‍तुओं पर ध्यान लगाओ। 
Col 3:3  क्‍योंकि तुम तो मर गए, और तुम्हारा जीवन मसीह के साथ परमेश्वर में छिपा हुआ है। 
Col 3:4   जब मसीह जो हमारा जीवन है, प्रगट होगा, तब तुम भी उसके साथ महिमा सहित प्रगट किए जाओगे। 
Col 3:5  इसलिये अपने उन अंगो को मार डालो, जो पृथ्वी पर हैं, अर्थात व्यभिचार, अशुद्धता, दुष्‍कामना, बुरी लालसा और लोभ को जो मूर्ति पूजा के बराबर है। 
Col 3:6   इन ही के कारण परमेश्वर का प्रकोप आज्ञा न मानने वालों पर पड़ता है। 
Col 3:7  और तुम भी, जब इन बुराइयों में जीवन बिताते थे, तो इन्‍हीं के अनुसार चलते थे। 
Col 3:8  पर अब तुम भी इन सब को अर्थात क्रोध, रोष, बैरभाव, निन्‍दा, और मुंह से गालियां बकना ये सब बातें छोड़ दो। 
Col 3:9  एक दूसरे से झूठ मत बोलो क्‍योंकि तुम ने पुराने मनुष्यत्‍व को उसके कामों समेत उतार डाला है। 
Col 3:10 और नए मनुष्यत्‍व को पहिन लिया है जो अपने सृजनहार के स्‍वरूप के अनुसार ज्ञान प्राप्‍त करने के लिये नया बनता जाता है।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह ३७-३८ 
  • कुलुस्सियों ३

बुधवार, 10 अक्टूबर 2012

आंकलन


   लोकप्रीयता क्षणिक होती है; जो आज लोकप्रीय है वह कल तुच्छ समझा जा सकता है। किसी भी राजनैतिज्ञ से यह पूछ कर देख लीजिए। वे अपनी लोकप्रीयता के आंकलन पर नज़र रखते हैं और साथ ही इस पर भी कि कहीं कोई और तो उनसे अधिक लोकप्रीय नहीं होता जा रहा। अपनी लोकप्रीयता के कारण वे चुनाव जीतते हैं परन्तु अपनी नीतियों, कार्यों और कथनों के द्वारा वे लोकप्रीयता गवां भी सकते हैं। कभी कभी यह जन भावनाओं के विरुद्ध किसी खरी बात पर बने रहने के कारण भी हो सकता है।

   प्रभु यीशु के साथ भी एक समय ऐसा ही हुआ। परमेश्वर के वचन बाइबल में युहन्ना ६ अध्याय में हम इस बात को पाते हैं। प्रभु की लोकप्रीयता ५००० से अधिक की भीड़ को भोजन कराने के बाद अपने चरम सीमा पर थी; लोग उन्हें भविष्यद्वक्ता कहने लगे और राजा बनाना चाहते थे (यूहन्ना ६:१४-१५)। किंतु जब उन्होंने लोगों से कहा कि वे परमेश्वर की इच्छा पूरी करने के लिए स्वर्ग से उतरे हैं तो यह लोकप्रीयता घट गई (६:३८), और लोगों की प्रतिक्रीया हो गई कि "यह अपने आप को क्या समझता है?" (६:४१)

   जब प्रभु यीशु ने कहा कि स्वर्ग से उतरी जीवन की रोटी वे ही हैं (६:५१-५२) तो यह उन के पीछे हो लेने वालों की समझ से बाहर था "इसलिये  उसके चेलों में से बहुतों ने यह सुनकर कहा, कि यह बात नागवार है; इसे कौन सुन सकता है?" (६:६०); और इस बात की व्याख्या को सुनकर तो उन में से बहुतेरे प्रभु को छोड़ कर चल दिए (६:६६)।

   वह भीड़ प्रभु यीशु के पीछे तब तक ही थी जब तक प्रभु उनकी आवश्यक्ताओं को पूरा करते रहे और उन लोगों के मन के अनुसार बातें करते रहे। जैसे ही प्रभु यीशु ने उनसे एक समर्पण चाहा तो यह उनके लिए नागवार हो गया। जो रह गए थे, "तब यीशु ने उन बारहों से कहा, क्‍या तुम भी चले जाना चाहते हो?" (६:६७) तो "शमौन पतरस ने उस को उत्तर दिया, कि हे प्रभु हम किस के पास जाएं? अनन्‍त जीवन की बातें तो तेरे ही पास हैं (६:६८)।"

   आज आपका आंकलन प्रभु यीशु के लिए क्या है? क्या आप संसार में उसकी लोकप्रीयता के आधार पर अपना फैसला लेना चाहते हैं या उसकी खराई और सच्चाई के अनुसार? क्या पतरस के समान प्रभु यीशु के पक्ष में निर्णय लेने और उसे जीवन समर्पण करके अनन्त जीवन का भागी होने का फैसला आपका भी फैसला है? ध्यान दीजिएगा, अनन्त जीवन की बातें तो प्रभु यीशु ही के पास हैं। - सी. पी. हीया


प्रभु यीशु को समर्पण जीवन भर के लिए प्रतिदिन के समर्पण की बुलाहट है।

इस पर उसके चेलों में से बहुतेरे उल्टे फिर गए और उसके बाद उसके साथ न चले। - युहन्ना ६:६६

बाइबल पाठ: युहन्ना ६:४७-५१; ५७-६९
Joh 6:47 मैं तुम से सच सच कहता हूं, कि जो कोई विश्वास करता है, अनन्‍त जीवन उसी का है। 
Joh 6:48  जीवन की रोटी मैं हूं। 
Joh 6:49  तुम्हारे बापदादों ने जंगल में मन्ना खाया और मर गए। 
Joh 6:50 यह वह रोटी है जो स्‍वर्ग से उतरती है ताकि मनुष्य उस में से खाए और न मरे। 
Joh 6:51 जीवन की रोटी जो स्‍वर्ग से उतरी मैं हूं। यदि कोई इस रोटी में से खाए, तो सर्वदा जीवित रहेगा और जो रोटी मैं जगत के जीवन के लिये दूंगा, वह मेरा मांस है। 
Joh 6:57  जैसा जीवते पिता ने मुझे भेजा और मैं पिता के कारण जीवित हूं वैसा ही वह भी जो मुझे खाएगा मेरे कारण जीवित रहेगा। 
Joh 6:58 जो रोटी स्‍वर्ग से उतरी यही है, बापदादों के समान नहीं कि खाया, और मर गए: जो कोई यह रोटी खाएगा, वह सर्वदा जीवित रहेगा। 
Joh 6:59  ये बातें उस ने कफरनहूम के एक आराधनालय में उपदेश देते समय कहीं। 
Joh 6:60  इसलिये उसके चेलों में से बहुतों ने यह सुनकर कहा, कि यह बात नागवार है; इसे कौन सुन सकता है? 
Joh 6:61 यीशु ने अपने मन में यह जान कर कि मेरे चेले आपस में इस बात पर कुड़कुड़ाते हैं, उन से पूछा, क्‍या इस बात से तुम्हें ठोकर लगती है? 
Joh 6:62 और यदि तुम मनुष्य के पुत्र को जहां वह पहिले था, वहां ऊपर जाते देखोगे, तो क्‍या होगा? 
Joh 6:63  आत्मा तो जीवनदायक है, शरीर से कुछ लाभ नहीं: जो बातें मैं ने तुम से कहीं हैं वे आत्मा हैं, और जीवन भी हैं। 
Joh 6:64 परन्‍तु तुम में से कितने ऐसे हैं जो विश्वास नहीं करते: क्‍योंकि यीशु तो पहिले ही से जानता था कि जो विश्वास नहीं करते, वे कौन हैं और कौन मुझे पकड़वाएगा। 
Joh 6:65  और उस ने कहा, इसी लिये मैं ने तुम से कहा था कि जब तक किसी को पिता की ओर यह वरदान न दिया जाए तक तक वह मेरे पास नहीं आ सकता। 
Joh 6:66  इस पर उसके चेलों में से बहुतेरे उल्टे फिर गए और उसके बाद उसके साथ न चले। 
Joh 6:67 तब यीशु ने उन बारहों से कहा, क्‍या तुम भी चले जाना चाहते हो? 
Joh 6:68 शमौन पतरस ने उस को उत्तर दिया, कि हे प्रभु हम किस के पास जाएं? अनन्‍त जीवन की बातें तो तेरे ही पास हैं। 
Joh 6:69  और हम ने विश्वास किया, और जान गए हैं, कि परमेश्वर का पवित्र जन तू ही है।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह ३४-३६ 
  • कुलुस्सियों २

मंगलवार, 9 अक्टूबर 2012

निशाना


   यदि हम सावधान ना रहे तो हम भी उस व्यक्ति के समान हो जाएंगे जो अपने आप को बड़ा तीरंदाज़ मानता था क्योंकि उसका निशाना हमेशा सही लगता था। परन्तु उसकी सफलता का राज़ एक धोखा था; वह पहले तीर चलाता था, फिर जहां तीर जाकर लगता था उसे मध्य रखकर उसके चारों ओर निशाने के गोले बना देता था।

   अपनी कल्पना के अनुसार जीना और अपनी इच्छानुसार कार्य करना और फिर यह सोचना कि हमने जो किया वह सही किया बहुत सरल है। ऐसा करके जीवन के लक्ष्यों से दूर होते हुए भी हम अपने आप को ठीक लक्ष्य पर मानते रहते हैं। परमेश्वर के वचन बाइबल में नीतिवचन १४:१२ में लिखा है: "ऐसा मार्ग है, जो मनुष्य को ठीक देख पड़ता है, परन्तु उसके अन्त में मृत्यु ही मिलती है।"

   हमें बदला लेना, धन बटोरना, सुख-विलास के पीछे भागना, गाली देने और कोसने वालों को पलट कर गाली देना और कोसना उचित लग सकता है, परन्तु परमेश्वर के मार्ग हमारे मार्गों से भिन्न हैं। परमेश्वर ने जो लक्ष्य हमारे लिए बना रखे हैं वे हैं दुख देने वालों को क्षमा करना, ज़रूरतमन्दों की खुले दिल से सहायता करना, अपने आप को नहीं वरन परमेश्वर को प्रसन्न करने के लिए जीवन जीना और ताड़ना देने वालों की ओर दूसरा गाल फेर देना। हमें भजनकार के समान प्रार्थना करनी चाहिए कि "हे यहोवा अपना मार्ग मुझे दिखा, तब मैं तेरे सत्य मार्ग पर चलूंगा, मुझ को एक चित्त कर कि मैं तेरे नाम का भय मानूं" (भजन ८६:११) और परमेश्वर द्वारा दिए तथा दिखाए हुए मार्ग पर चलना तथा बने रहना चाहिए।

   इस सही निशाने को साधने के लिए हम सबको सहायता की आवश्यकता होती है। इसी उद्देश्य से परमेश्वर ने हमें अपना वचन बाइबल दिया है, जिसमें उसके सभी निशाने दिए हुए हैं। जब हम अपने जीवन के निशाने को उसके निशानों के अनुसार साधते हैं तब हम सदा ही सही निशाने पर होते हैं। - जो स्टोवैल


परमेश्वर के मार्ग हमारे जीवनों के लिए निशाने हैं।

यहोवा अपना मार्ग मुझे दिखा, तब मैं तेरे सत्य मार्ग पर चलूंगा, मुझ को एक चित्त कर कि मैं तेरे नाम का भय मानूं। - भजन ८६:११

बाइबल पाठ: भजन ८६
Psa 86:1  हे यहोवा कान लगाकर मेरी सुन ले, क्योंकि मैं दीन और दरिद्र हूं। 
Psa 86:2  मेरे प्राण की रक्षा कर, क्योंकि मैं भक्त हूं; तू मेरा परमेश्वर है, इसलिये अपने दास का, जिसका भरोसा तुझ पर है, उद्धार कर। 
Psa 86:3  हे प्रभु मुझ पर अनुग्रह कर, क्योंकि मैं तुझी को लगातार पुकारता रहता हूं। 
Psa 86:4  अपने दास के मन को आनन्दित कर, क्योंकि हे प्रभु, मैं अपना मन तेरी ही ओर लगाता हूं। 
Psa 86:5  क्योंकि हे प्रभु, तू भला और क्षमा करने वाला है, और जितने तुझे पुकारते हैं उन सभों के लिये तू अति करूणामय है। 
Psa 86:6  हे यहोवा मेरी प्रार्थना की ओर कान लगा, और मेरे गिड़गिड़ाने को ध्यान से सुन। 
Psa 86:7  संकट के दिन मैं तुझ को पुकारूंगा, क्योंकि तू मेरी सुन लेगा।
Psa 86:8  हे प्रभु देवताओं में से कोई भी तेरे तुल्य नहीं, और ना किसी के काम तेरे कामों के बराबर हैं। 
Psa 86:9  हे प्रभु जितनी जातियों को तू ने बनाया है, सब आकर तेरे साम्हने दणडवत् करेंगी, और तेरे नाम की महिमा करेंगी। 
Psa 86:10  क्योंकि तू महान् और आश्चर्यकर्म करने वाला है, केवल तू ही परमेश्वर है। 
Psa 86:11  हे यहोवा अपना मार्ग मुझे दिखा, तब मैं तेरे सत्य मार्ग पर चलूंगा, मुझ को एक चित्त कर कि मैं तेरे नाम का भय मानूं। 
Psa 86:12  हे प्रभु हे मेरे परमेश्वर मैं अपने सम्पूर्ण मन से तेरा धन्यवाद करूंगा, और तेरे नाम की महिमा सदा करता रहूंगा। 
Psa 86:13  क्योंकि तेरी करूणा मेरे ऊपर बड़ी है; और तू ने मुझ को अधोलोक की तह में जाने से बचा लिया है।
Psa 86:14  हे परमेश्वर अभिमानी लोग तो मेरे विरूद्ध उठे हैं, और बलात्कारियों का समाज मेरे प्राण का खोजी हुआ है, और वे तेरा कुछ विचार नहीं रखते। 
Psa 86:15  परन्तु प्रभु दयालु और अनुग्रहकारी ईश्वर है, तू विलम्ब से कोप करने वाला और अति करूणामय है। 
Psa 86:16  मेरी ओर फिरकर मुझ पर अनुग्रह कर; अपने दास को तू शक्ति दे, और अपनी दासी के पुत्र का उद्धार कर।
Psa 86:17  मुझे भलाई का कोई लक्षण दिखा, जिसे देखकर मेरे बैरी निराश हों, क्योंकि हे यहोवा तू ने आप मेरी सहायता की और मुझे शान्ति दी है।

एक साल में बाइबल: 
यशायाह ३२-३३ 
कुलुस्सियों १

सोमवार, 8 अक्टूबर 2012

स्वर्ग


   वसन्त उत्सव होने वाला था और हमारे चर्च के युवा उसकी तैयारी में लगे हुए थे। उत्सव का विषय था मर्सीमी द्वारा गाया हुआ गीत I Can Only Imagine (मैं केवल कल्पना कर सकता हूँ) और हमारे चर्च के युवाओं ने उस्व गीत के आधार पर स्वर्ग की अपनी कल्पना को दिखाने का सोचा। उन्होंने उस उत्सव के हॉल में भिन्न प्रकार की रौशनियों, स्टायरोफोम तथा अन्य वस्तुओं के प्रयोग से स्वर्ग को दिखाने का प्रयास किया।

   हमारी बेटी मेलिस्सा भी इस प्रयास में सम्मिलित थी। जब मैं हॉल के अन्दर देखने गया कि उन युवक-युवतियों के प्रयास कैसे चल रहे हैं तब मेलिस्सा छत की ऊँची कड़ियों से सितारे लटकाने में लगी हुई थी। उत्सव की रात को हमने मेलिस्सा के साथियों द्वारा उत्सव का प्रसंग गीत भी सुना और हम सब अपने मनों में कल्पना कर रहे थे यह दूर का स्थान स्वर्ग कैसा होगा। हम में से किसी को इस बात का ज़रा भी आभास तक नहीं था कि ६ सप्ताह बाद ही मेलिस्सा इस पृथ्वी को छोड़ उस स्वर्ग देश में सदा के लिए चली जाएगी; उत्सव के एक छोटे से अन्तराल में ही जो सबके लिए काल्पनिक था वह उसके लिए वास्तविक हो जाएगा।

   प्रभु यीशु ने हमें स्वर्ग के बारे में बताया जिससे हम वहां के विषय में चिंतित ना हों। प्रभु ने कहा, "तुम्हारा मन व्याकुल न हो, तुम परमेश्वर पर विश्वास रखते हो मुझ पर भी विश्वास रखो। मेरे पिता के घर में बहुत से रहने के स्थान हैं, यदि न होते, तो मैं तुम से कह देता क्‍योंकि मैं तुम्हारे लिये जगह तैयार करने जाता हूं" (युहन्ना १४:१-२)।

   स्वर्ग तैयार मन वालों के लिए तैयार किया हुआ स्थान है। एक ऐसा स्थान जो हम मनुष्यों की कल्पना से कहीं अधिक सुन्दर, भव्य और गौरवपूर्ण है। यह वह स्थान है जहां हमारे दिवंगत मसीही विश्वासी प्रीय जन परमेश्वर के साथ हैं और एक दिन हम भी होंगे; और वहीं उसके तथा उनके साथ आनन्दित रहेंगे।

   स्वर्ग की कल्पना और प्रतीक्षा कीजिए और उसकी आशा में आनन्दित रहिए क्योंकि वहां परमेश्वर "उन की आंखों से सब आंसू पोंछ डालेगा; और इस के बाद मृत्यु न रहेगी, और न शोक, न विलाप, न पीड़ा रहेगी; पहिली बातें जाती रहीं" (प्रकाशितवाक्य २१:४)। - डेव ब्रैनन


प्रभु यीशु वहां हमारे लिए स्थान तैयार कर रहा है, और यहां हमें उस स्थान के लिए तैयार कर रहा है।

फिर मैं ने सिंहासन में से किसी को ऊंचे शब्‍द से यह कहते सुना, कि देख, परमेश्वर का डेरा मनुष्यों के बीच में है; वह उन के साथ डेरा करेगा, और वे उसके लोग होंगे, और परमेश्वर आप उन के साथ रहेगा, और उन का परमेश्वर होगा। और वह उन की आंखों से सब आंसू पोंछ डालेगा; और इस के बाद मृत्यु न रहेगी, और न शोक, न विलाप, न पीड़ा रहेगी; पहिली बातें जाती रहीं। - प्रकाशितवाक्य २१:३-४

बाइबल पाठ: युहन्ना १४:१-६
Joh 14:1  तुम्हारा मन व्याकुल न हो, तुम परमेश्वर पर विश्वास रखते हो मुझ पर भी विश्वास रखो। 
Joh 14:2  मेरे पिता के घर में बहुत से रहने के स्थान हैं, यदि न होते, तो मैं तुम से कह देता क्‍योंकि मैं तुम्हारे लिये जगह तैयार करने जाता हूं। 
Joh 14:3  और यदि मैं जाकर तुम्हारे लिये जगह तैयार करूं, तो फिर आकर तुम्हें अपने यहां ले जाऊंगा, कि जहां मैं रहूं वहां तुम भी रहो। 
Joh 14:4  और जहां मैं जाता हूं तुम वहां का मार्ग जानते हो। 
Joh 14:5  थोमा ने उस से कहा, हे प्रभु, हम नहीं जानते कि तू कहां जाता है तो मार्ग कैसे जानें? 
Joh 14:6  यीशु ने उस से कहा, मार्ग और सच्‍चाई और जीवन मैं ही हूं; बिना मेरे द्वारा कोई पिता के पास नहीं पहुंच सकता।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह ३०-३१ 
  • फिलिप्पियों ४

रविवार, 7 अक्टूबर 2012

सहभागिता


   बहुत से चर्चों में अक्तूबर महीने का पहला इतवार विश्व प्रभु भोज इतवार के रूप में मनाया जाता है। यह वह दिन होता है जब इन चर्च के सदस्य संसार भर में स्थित अन्य चर्चों के सदस्यों की सहभागिता के एहसास के साथ प्रभु भोज में सम्मिलित होते हैं। यह पर्व मेरे लिए एक बहुत अर्थपूर्ण समय बन गया है।

   एक बार कुछ ऐसा हुआ कि मैं इस इतवार वाले दिन हवाई अड्डे पर एक लंबी उड़ान की प्रतीक्षा में बैठा था, और चर्च में प्रभु भोज में सम्मिलित हो पाना मेरे लिए संभव नहीं था। अकेले बैठे हुए मैं परमेश्वर के वचन बाइबल से सुसमाचारों में लिखित प्रभु यीशु के चेलों के साथ मनाए गए उस अन्तिम भोज, उसके पकड़वाए जाने और क्रूस पर चढ़ाए जाने के विवरण पढ़ने लगा। फिर मैंने प्रेरित पौलुस द्वारा कुरिन्थुस के विश्वासियों को लिखी अपनी पहली पत्री में प्रभु भोज के महत्व को समझाने वाले उस खंड को भी पढ़ा जिसे चर्चों में प्रभु भोज के समय अकसर पढ़ा जाता है - १ कुरिन्थियों ११:२३-३१; और इन बातों पर मनन करने लगा। वहां हवाई अड्डे पर बैठे हुए ही कुछ सामन्यतः उपलब्ध पदार्थों को चर्च में प्रभु भोज के लिए प्रयुक्त रोटी और रस के रूप में प्रयोग करके मैंने प्रभु के बलिदान और मृत्यु का स्मरण किया, और अन्य ऐसे अनेक मसीही विश्वासियों के साथ एक गहरी सहभागिता अनुभव करी जो वर्जित होने के कारण प्रभु यीशु के नाम में एकत्रित नहीं हो पाते या किसी मजबूरी से अन्य विश्वासियों के साथ एकत्रित हो पाने में असमर्थ हैं।

   आज आप कहीं भी क्यों ना हों, आपकी परिस्थितियां कैसी भी क्यों ना हों, प्रभु यीशु के क्रूस पर दिए गए बलिदान के स्मरण द्वारा आप सामर्थ पाएं और आनन्दित हों, "क्‍योंकि जब कभी तुम यह रोटी खाते, और इस कटोरे में से पीते हो, तो प्रभु की मृत्यु को जब तक वह न आए, प्रचार करते हो" (१ कुरिन्थियों ११:२६)। - डेविड मैक्कैसलैंड


मसीही सहभागिता से आनन्द और सामर्थ मिलती है।

क्‍योंकि जब कभी तुम यह रोटी खाते, और इस कटोरे में से पीते हो, तो प्रभु की मृत्यु को जब तक वह न आए, प्रचार करते हो। - १ कुरिन्थियों ११:२६

बाइबल पाठ: १ कुरिन्थियों ११:२३-३१
1Co 11:23 क्‍योंकि यह बात मुझे प्रभु से पहुंची, और मैं ने तुम्हें भी पहुंचा दी, कि प्रभु यीशु ने जिस रात पकड़वाया गया रोटी ली। 
1Co 11:24  और धन्यवाद करके उसे तोड़ी, और कहा, कि यह मेरी देह है, जो तुम्हारे लिये है: मेरे स्मरण के लिये यही किया करो। 
1Co 11:25  इसी रीति से उस ने बियारी के पीछे कटोरा भी लिया, और कहा, यह कटोरा मेरे लोहू में नई वाचा है: जब कभी पीओ, तो मेरे स्मरण के लिये यही किया करो। 
1Co 11:26 क्‍योंकि जब कभी तुम यह रोटी खाते, और इस कटोरे में से पीते हो, तो प्रभु की मृत्यु को जब तक वह न आए, प्रचार करते हो। 
1Co 11:27  इसलि्ये जो कोई अनुचित रीति से प्रभु की रोटी खाए, या उसके कटोरे में से पीए, वह प्रभु की देह और लोहू का अपराधी ठहरेगा। 
1Co 11:28  इसलिये मनुष्य अपने आप को जांच ले और इसी रीति से इस रोटी में से खाए, और इस कटोरे में से पीए। 
1Co 11:29 क्‍योंकि जो खाते-पीते समय प्रभु की देह को न पहिचाने, वह इस खाने और पीने से अपने ऊपर दण्‍ड लाता है। 
1Co 11:30  इसी कारण तुम में से बहुत से निर्बल और रोगी हैं, और बहुत से सो भी गए। 
1Co 11:31 यदि हम अपने आप को जांचते, तो दण्‍ड न पाते।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह २८-२९ 
  • फिलिप्पियों ३

शनिवार, 6 अक्टूबर 2012

यात्रा


   अपनी पुस्तक The First Man में लेखक जेम्स हैन्सन ने चन्द्रमा पर उतरने वाले प्रथम मनुष्य नील आर्मस्ट्रौंग की इस चन्द्रमा यात्रा का विवरण लिखा है। लेखक बताता है कि इस यात्रा के अन्त में प्रत्येक अन्तरिक्ष यात्री को अपनी यात्रा के बारे में एक विवरण भरकर देना था। इस विवरण में उनकी यात्रा के आरंभ स्थान टैक्सस स्थित ह्युस्टन से फ्लोरिडा स्थित केप कैनावरल जाना, फिर अंत्रिक्ष यान द्वारा चन्द्रमा तक, और वहां से वापसी करके प्रशांत महासागर में उतरना; फिर हवाए द्वीप समूह ले जाया जाना और अन्त में लौट कर फिर टैक्सस स्थित ह्युस्टन वापस पहुँचने का सारा ब्यौरा लिखा गया था। यह विवरण उस एतिहासिक यात्रा और उससे संबंधित गन्तव्य स्थानों की कैसी अद्भुत सूची है!

   मानव इतिहास में एक और यात्रा का विवरण दर्ज है; ऐसी यात्रा जो अन्य सभी यात्राओं से बिलकुल भिन्न और जिसका उद्देश्य अद्भुत है। यह यात्रा है जगत के उद्धारकर्ता प्रभु यीशु की यात्रा, जो स्वर्ग से आरंभ हुई, जिसका पहला गन्तव्य स्थान इस्त्राएल के बेतलेहम की एक गौशाला में स्थित चरनी और यात्रा का माध्यम कुँवारी कन्या से जन्म था; फिर वहां से, दुश्मनों से बचने के लिए, मिस्त्र देश को प्लायन हुआ। फिर मिस्त्र से लौटकर इस्त्राएल के छोटे से कस्बे नाज़रथ में बढ़ई बनकर रहना, लगभग ३० वर्ष की आयु में परमेश्वरीय सेवाकाई का आरंभ और इसके लिए इस्त्राएल के इलाकों में परमेश्वर के राज्य और उद्धार के सुसमाचार का प्रचार और लोगों को चंगा करते हुए पैदल घूमना। लगभग साढ़े तीन साल की सेवकाई के बाद झूठे इलज़ाम में फंसाया जाना, कलवरी के क्रूस पर बलिदान होना, तीन दिन कब्र में दफन रहकर तीसरे दिन मृतकों से जी उठना, ४० दिन तक लोगों और चेलों के समक्ष रहना और उनके देखते हुए वापस स्वर्ग पर उठा लिया जाना और पिता परमेश्वर के दाहिने हाथ जा बैठना। इस यात्रा का उद्देश्य: समस्त मानव जाति को पापों से क्षमा और उद्धार का मार्ग देना।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में फिलिप्पियों को लिखी पौलुस प्रेरित की पत्री में समस्त संसार को उद्धार का मार्ग प्रदान करने वाली इस यात्रा से संबंधित बातें लिखी मिलती हैं। एक बाइबल टीकाकार ने इस खंड को आराधना और स्तुति का गीत कहा है जो उस दुख उठाने वाले आज्ञाकारी सेवक की प्रशंसा में लिखा गया जिसने अपनी स्वर्ग की महिमा छोड़ी और इस संसार में आ गया कि समस्त मानव जाति के लिए दुख उठाए और उन्हें पापों से मुक्ति का मार्ग दे। परमेश्वर द्वारा निर्धारित इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए वह क्रूस की अपमानित तथा अति पीड़ादायक मृत्यु सहने तक आज्ञाकारी रहा। इस कारण परमेश्वर ने भी उसे सर्वोच्च कर दिया।

   हमारे उद्धारकर्ता की इस अद्भुत यात्रा और इस यात्रा के विवरण से हमारे मन उसके प्रति श्रद्धा, आदर और भक्ति के साथ समर्पण, आराधना और धन्यवाद से भर जाने चाहिएं। - डेनिस फिशर


परमेश्वर ने अन्तता से मानव इतिहास की सीमाओं में प्रवेश किया जिस से कि मनुष्यों को उन सीमाओं से निकल कर उसके साथ अन्तता में स्थान मिल सके।

जैसा मसीह यीशु का स्‍वभाव था वैसा ही तुम्हारा भी स्‍वभाव हो। - फिलिप्पियों २:५

बाइबल पाठ: फिलिप्पियों २:१-११
Php 2:1  सो यदि मसीह में कुछ शान्‍ति और प्रेम से ढाढ़स और आत्मा की सहभागिता, और कुछ करूणा और दया है। 
Php 2:2  तो मेरा यह आनन्‍द पूरा करो कि एक मन रहो और एक ही प्रेम, एक ही चित्त, और एक ही मनसा रखो। 
Php 2:3  विरोध या झूठी बड़ाई के लिये कुछ न करो पर दीनता से एक दूसरे को अपने से अच्‍छा समझो। 
Php 2:4  हर एक अपनी ही हित की नहीं, वरन दूसरों की हित की भी चिन्‍ता करे। 
Php 2:5  जैसा मसीह यीशु का स्‍वभाव था वैसा ही तुम्हारा भी स्‍वभाव हो। 
Php 2:6  जिस ने परमेश्वर के स्‍वरूप में होकर भी परमेश्वर के तुल्य होने को अपने वश में रखने की वस्‍तु न समझा। 
Php 2:7  वरन अपने आप को ऐसा शून्य कर दिया, और दास का स्‍वरूप धारण किया, और मनुष्य की समानता में हो गया। 
Php 2:8   और मनुष्य के रूप में प्रगट होकर अपने आप को दीन किया, और यहां तक आज्ञाकारी रहा, कि मृत्यु, हां, क्रूस की मृत्यु भी सह ली। 
Php 2:9  इस कारण परमेश्वर ने उसको अति महान भी किया, और उसको वह नाम दिया जो सब नामों में श्रेष्‍ठ है। 
Php 2:10 कि जो स्‍वर्ग में और पृथ्वी पर और जो पृथ्वी के नीचे हैं वे सब यीशु के नाम पर घुटना टेकें। 
Php 2:11  और परमेश्वर पिता की महिमा के लिये हर एक जीभ अंगीकार कर ले कि यीशु मसीह ही प्रभु है।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह २६-२७ 
  • फिलिप्पियों २