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सोमवार, 19 नवंबर 2012

समझौते का जीवन


   मैं और मेरी पत्नि मार्टी इंगलैंड, उसके इतिहास, संसकृति और लोगों को चाहने लगे। जब कभी हमारा वहाँ जाना होता तो हमारे सबसे पसंदीदा कार्यक्रमों में से एक होता था खुले मैदानों में आयोजित संगीत सभाओं में, जिन्हें प्रौम भी कहा जाता है, जाना। प्राचीन ज़मींदारों के बड़े-बड़े घरों के आस-पास के विशाल घास के मैदानों पर आयोजित यह कार्यक्रम बहुत मोहक होते हैं। इनमें से सबसे उत्तम होता है प्रौम की अंतिम रात का कार्यक्रम जिसमें आतिशबाज़ी होती है, और सभी लोग इंगलैंड के छोटे छोटे झंडे हाथ में लिए और हिलाते हुए इंगलैंड के प्रति देश-भक्ति के गीत बड़े उत्साह के साथ गाते हैं।

   हम भी बड़े उत्साह के साथ इन सभी बातों में सम्मिलित होने लगे - तब तक जब तक हमारे बच्चे हमारे साथ एक गर्मी की छुट्टीयां मनाने आए। वे भी हमारे साथ प्रौम देखने गए और हमें ब्रिटेन के नागरिकों के साथ मिलकर ब्रिटेन के प्रति देश-भक्ति के गीत गाते और उनका झंडा लहराते देख वे अवाक रह गए। मुझे अभी भी उन गीतों के ऊपर सुनाई देने के लिए उनके चिल्लाने की आवाज़ स्मरण है, जब उन्होंने विसम्य के साथ कहा, "आप यह क्या कर रहे हैं? हम तो अमरीकी नागरिक हैं!"

   मैं सोचता हूँ कि परमेश्वर भी हम मसीही विश्वासियों को अनपेक्षित कार्यों, गलत जीवन शैली और संसार के साथ समझौते का जीवन जीते तथा अपने स्वर्गीय देश के प्रति अपनी ज़िम्मेदारियों को भूलकर सांसारिक बातों में उलझते देखकर ऐसे ही प्रतिक्रीया देता होगा: "यह तुम क्या कर रहे हो? ऐसा जीवन कैसे व्यतीत कर सकते हो? तुम स्वर्गीय राज्य के निवासी हो, वहां की बातें संसार के सामने रखो ना कि संसार की बातें अपनाओ।"

   परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पतरस स्मरण दिलाता है कि हम मसीही विश्वासी संसार से पृथक करके एक पवित्र समाज बनाए गए हैं। इसका तात्पर्य है कि परमेश्वर ने हमें उसकी पवित्रता को संसार के सामने प्रदर्शित करने का माध्यम बनाया है, हमें हमारे उद्धारकर्ता प्रभु यीशु के जीवन और चरित्र को जी कर दिखाने की ज़िम्मेदारी सौंपी है। जैसे अपने प्रति क्रूर और शत्रुतापूर्ण व्यवहार में भी वह अपने आताताईयों के प्रति क्षमाशील, अनुग्रहकारी और दयालु रहा, जैसे उसने सच्चाई और खराई का जीवन जीया तथा अपनी बातों से कभी नहीं पलटा, हमें भी वैसा ही व्यवहार और जीवन संसार के सामने प्रदर्शित करना है।

   यदि आप भी प्रभु यीशु के पवित्र स्वर्गीय साम्राज्य के नागरिक हैं तो उसकी पवित्रता और प्रेम के ध्वज को संसार में ऊँचा रखिए, संसार के साथ समझौते का जीवन अपनाकर उसे लज्जित मत कीजिए।


प्रभु यीशु के प्रति हमारी वफादारी हमारे जीवनों में दिखाई और सुनाई देनी चाहिए।

पर तुम एक चुना हुआ वंश, और राज-पदधारी, याजकों का समाज, और पवित्र लोग, और (परमेश्वर की) निज प्रजा हो, इसलिये कि जिस ने तुम्हें अन्‍धकार में से अपनी अद्भुत ज्योति में बुलाया है, उसके गुण प्रगट करो। - १ पतरस २:९

बाइबल पाठ: १ पतरस २:९-१७
1Pe 2:9  पर तुम एक चुना हुआ वंश, और राज-पदधारी, याजकों का समाज, और पवित्र लोग, और (परमेश्वर की) निज प्रजा हो, इसलिये कि जिस ने तुम्हें अन्‍धकार में से अपनी अद्भुत ज्योति में बुलाया है, उसके गुण प्रगट करो। 
1Pe 2:10  तुम पहिले तो कुछ भी नहीं थे, पर अब परमेश्वर ही प्रजा हो: तुम पर दया नहीं हुई थी पर अब तुम पर दया हुई है।
1Pe 2:11  हे प्रियों मैं तुम से बिनती करता हूं, कि तुम अपने आप को परदेशी और यात्री जान कर उस सांसारिक अभिलाषाओं से जो आत्मा से युद्ध करती हैं, बचे रहो। 
1Pe 2:12  अन्यजातियों में तुम्हारा चालचलन भला हो; इसलिये कि जिन जिन बातों में वे तुम्हें कुकर्मी जान कर बदनाम करते हैं, वे तुम्हारे भले कामों को देख कर उन्‍हीं के कारण कृपा दृष्‍टि के दिन परमेश्वर की महिमा करें।
1Pe 2:13  प्रभु के लिये मनुष्यों के ठहराए हुए हर एक प्रबन्‍ध के आधीन में रहो, राजा के इसलिये कि वह सब पर प्रधान है। 
1Pe 2:14  और हाकिमों के, क्‍योंकि वे कुकिर्मयों को दण्‍ड देने और सुकिर्मयों की प्रशंसा के लिये उसके भेजे हुए हैं। 
1Pe 2:15  क्‍योंकि परमेश्वर की इच्‍छा यह है, कि तुम भले काम करने से निर्बुद्धि लोगों की अज्ञानता की बातों को बन्‍द कर दो। 
1Pe 2:16  और अपने आप को स्‍वतंत्र जानो पर अपनी इस स्‍वतंत्रता को बुराई के लिये आड़ न बनाओ, परन्‍तु अपने आप को परमेश्वर के दास समझ कर चलो। 
1Pe 2:17  सब का आदर करो, भाइयों से प्रेम रखो, परमेश्वर से डरो, राजा का सम्मान करो।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल ११-१३ 
  • याकूब १

रविवार, 18 नवंबर 2012

व्यर्थ भोजन


   बहुत से देशों में बच्चों में मोटापा बहुत बढ़ गया है जो उनके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है और आगे चलकर अनेक समस्याओं को उत्पन्न करेगा। इसका एक मुख्य कारण है भोजन से संबंधित गलत आदतें और व्यर्थ भोजन सामग्री का सेवन।

   व्यर्थ भोजन सामग्री का तात्पर्त्य उस भोजन सामग्री से है जो स्वाद में तो अच्छा होता है किंतु पौष्टिक तथा संतुलित आहार नहीं होता। ऐसे भोजन में वसा (चिकनाई या तैल पदार्थ) तथा उष्णता अधिक होते हैं जो शरीर में एकत्रित होते रहते हैं और शरीर के अनेक अंगों पर हानिकारक प्रभाव डालते रहते हैं जिनसे बाद में बहुत से रोग हो जाते हैं। ऐसे व्यर्थ भोजन के उदाहरण हैं चिप्स, सोडा युक्त ठंडे पेय, मिठाईयां-केक-पेस्ट्री इत्यादि, कुछ फास्ट-फूड दुकानों पर मिलने वाले भोजन आदि।

   जैसे कुछ प्रकार का शारीरिक भोजन व्यर्थ और हानिकारक होता है, वैसे ही कई प्रकार का आत्मिक भोजन भी व्यर्थ और हानिकारक होता है। व्यर्थ शारीरिक भोजन के समान ही यह व्यर्थ आत्मिक भोजन भी सामान्य आत्मिक भोजन की वस्तुओं से ही बनाया जाता है, दिखने और स्वाद में भी अच्छा लगता है किंतु इसके दीर्घ-कालीन परिणाम अति हानिकारक होते हैं। मसीही विश्वासियों को तो इससे खासकर बहुत सावधान रहना चाहिए।

   यह व्यर्थ आत्मिक भोजन कोई "भिन्न सुसमाचार" (गलतियों १:६) से लेकर मसीही विश्वास द्वारा शारीरिक लाभ और संपदा में बढ़ोतरी तथा झूठी धार्मिकता की बातों तक कुछ भी हो सकता है। कुछ मसीही विश्वास के गीतों तथा पुस्तकों में भी यह गलत शिक्षाएं पाई जाती हैं। ऐसे आत्मिक भोजन के प्रयोग से आत्मिक भूख मिटने का आभास तो हो सकता है किंतु आत्मिक बढ़ोतरी नहीं होगी, वरन आगे चलकर आत्मिक हानि ही होगी।

   परमेश्वर के वचन में इब्रानियों की पत्री में सचेत किया गया है: "नाना प्रकार के और ऊपरी उपदेशों से न भरमाए जाओ, क्‍योंकि मन का अनुग्रह से दृढ़ रहना भला है, न कि उन खाने की वस्‍तुओं से जिन से काम रखने वालों को कुछ लाभ न हुआ" (इब्रानियों १३:९)। गलत शिक्षाएं हमारे लिए हानिकारक हैं, उनसे कोई लाभ नहीं होता क्योंकि वे हमें ना तो पाप की सामर्थ पर जयवंत होना सिखाती हैं और ना ही हमारी आत्मिक वृद्धि में योगदान करती हैं। परन्तु जैसे प्रेरित पौलुस ने तिमुथियुस को सिखाया, परमेश्वर के वचन बाइबल के सत्य और परमेश्वर के आत्मा की प्रेर्णा से उपयोग द्वारा हमारी आत्मिक भूख भी तृप्त होती है और आत्मिक स्वास्थ्य भी मिलता है।

   व्यर्थ भोजन से बचें - चाहे वाह शारीरिक हो अथवा आत्मिक, और नित्य परमेश्वर के वचन के अध्ययन द्वारा अपने आत्मिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ और उन्नत रखें। - डेनिस फिशर


परमेश्वर के वचन के सत्यों पर नित्य भोजन करते रहने से हम झूठी और व्यर्थ बातों के स्वाद को पहचान पाने में सक्षम हो जाएंगे।

नाना प्रकार के और ऊपरी उपदेशों से न भरमाए जाओ, क्‍योंकि मन का अनुग्रह से दृढ़ रहना भला है, न कि उन खाने की वस्‍तुओं से जिन से काम रखने वालों को कुछ लाभ न हुआ। - इब्रानियों १३:९

बाइबल पाठ: गलतियों १:६-१२; २ तिमुथियुस ३:१२-१७
Gal 1:6  मुझे आश्‍चर्य होता है, कि जिस ने तुम्हें मसीह के अनुग्रह से बुलाया उस से तुम इतनी जल्दी फिर कर और ही प्रकार के सुसमाचार की ओर झुकने लगे। 
Gal 1:7  परन्‍तु वह दूसरा सुसमाचार है ही नहीं: पर बात यह है, कि कितने ऐसे हैं, जो तुम्हें घबरा देते, और मसीह के सुसमाचार को बिगाड़ना चाहते हैं। 
Gal 1:8  परन्‍तु यदि हम या स्‍वर्ग से कोई दूत भी उस सुसमाचार को छोड़ जो हम ने तुम को सुनाया है, कोई और सुसमाचार तुम्हें सुनाए, तो श्रापित हो। 
Gal 1:9  जैसा हम पहिले कह चुके हैं, वैसा ही मैं अब फिर कहता हूं, कि उस सुसमाचार को छोड़ जिसे तुम ने ग्रहण किया है, यदि कोई और सुसमाचार सुनाता है, तो श्रापित हो। अब मैं क्‍या मनुष्यों को मानता हूं या परमेश्वर को? क्‍या मैं मनुष्यों को प्रसन्न करना चाहता हूं? 
Gal 1:10  यदि मैं अब तक मनुष्यों को प्रसन्न करता रहता, तो मसीह का दास न होता।
Gal 1:11  हे भाइयो, मैं तुम्हें जताए देता हूं, कि जो सुसमाचार मैं ने सुनाया है, वह मनुष्य का सा नहीं। 
Gal 1:12 क्‍योंकि वह मुझे मनुष्य की ओर से नहीं पहुंचा, और न मुझे सिखाया गया, पर यीशु मसीह के प्रकाश से मिला।

2Ti 3:12  पर जितने मसीह यीशु में भक्ति के साथ जीवन बिताना चाहते हैं वे सब सताए जाएंगे। 
2Ti 3:13 और दुष्‍ट, और बहकाने वाले धोखा देते हुए, और धोखा खाते हुए, बिगड़ते चले जाएंगे। 
2Ti 3:14 पर तू इन बातों पर जो तू ने सीखीं हैं और प्रतीति की थी, यह जानकर दृढ़ बना रह, कि तू ने उन्‍हें किन लोगों से सीखा था; 
2Ti 3:15 और बालकपन से पवित्र शास्‍त्र तेरा जाना हुआ है, जो तुझे मसीह पर विश्वास करने से उद्धार प्राप्‍त करने के लिये बुद्धिमान बना सकता है। 
2Ti 3:16 हर एक पवित्रशास्‍त्र परमेश्वर की प्रेरणा से रचा गया है और उपदेश, और समझाने, और सुधारने, और धर्म की शिक्षा के लिये लाभदायक है। 
2Ti 3:17 ताकि परमेश्वर का जन सिद्ध बने, और हर एक भले काम के लि्ये तत्‍पर हो जाए।

एक साल में बाइबल: 

  • यहेजकेल ८-१० 
  • इब्रानियों १३

शनिवार, 17 नवंबर 2012

स्वच्छ और उपयोगी


   जब हम अपने हाथों को गन्दगी और कीटाणुओं से स्वच्छ करने के लिए धोते हैं, तो क्या वास्तव में हम ही उन्हें स्वच्छ करते हैं? उत्तर हाँ और नहीं दोनो ही है। हाँ इसलिए क्योंकि यह हमारे निर्णय, हमारे प्रयास और हमारी इच्छा से होता है, और नहीं इसलिए क्योंकि स्वच्छ करने का वास्तविक कार्य तो वह साबुन और पानी करते हैं जिनका हम प्रयोग करते हैं; हमारा निर्णय, प्रयास और इच्छा तो उन स्वच्छ करने में सक्षम माध्यमों को कार्यकारी होने देता है।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पुलुस ने तिमुथियुस को अपनी दूसरी पत्री में लिखा: "यदि कोई अपने आप को इन से शुद्ध करेगा, तो वह आदर का बरतन, और पवित्र ठहरेगा; और स्‍वामी के काम आएगा, और हर भले काम के लिये तैयार होगा" (२ तिमुथियुस २:२१); पौलुस के कहने का तात्पर्य यह नहीं था कि हमारे पास अपने आप को पापों से शुद्ध करने की क्षमता है, वरन यह कि हम स्वेच्छा से अपने आप को उस माध्यम को समर्पित करें जो हमें पापों से शुद्ध करने और हमें परमेश्वर की दृष्टी में धर्मी कर देने में सक्षम है - अर्थात प्रभु यीशु मसीह को। इसी संदर्भ में, अपनी एक और पत्री में, पौलुस ने लिखा, "और उस में पाया जाऊं; न कि अपनी उस धामिर्कता के साथ, जो व्यवस्था से है, वरन उस धामिर्कता के साथ जो मसीह पर विश्वास करने के कारण है, और परमेश्वर की ओर से विश्वास करने पर मिलती है" (फिलिप्पियों ३:९)।

   जब हम प्रभु यीशु मसीह को ग्रहण करते हैं तो उसकी मृत्यु और पुनरुत्थान हमें पाप के दण्ड और हमें बान्ध कर रखने वाली पाप की शक्ति से मुक्त कर देते हैं। यदि हम फिर कभी पाप में पड़ें भी, तब भी यह पुनः स्वच्छ हो पाने की सुविधा हमें प्रभु यीशु में उपलब्ध रहती है: "यदि हम अपने पापों को मान लें, तो वह हमारे पापों को क्षमा करने, और हमें सब अधर्म से शुद्ध करने में विश्वासयोग्य और धर्मी है" (१ यूहन्ना १:९)।

   पाप और उसके दुष्परिणामों से मिली यह अद्भुत स्वतंत्रता हमें जवानी की अभिलाषाओं से मुँह मोड़ने तथा धार्मिकता अर्थात सही व्यवहार, विश्वास अर्थात सही आधार, प्रेम अर्थात सही प्रत्युत्तर और मेल-मिलाप अर्थात सही उद्देश्य जैसे सद्गुणों के पीछे बढ़ने में सक्षम करती है। जब हम अपने निर्णय, प्रयास और इच्छा से अपने आप को प्रभु यीशु को समर्पित करते हैं और उसके आत्मा को अपने अन्दर कार्य करने देते हैं तो वह हमें स्वच्छ और परमेश्वर के लिए उपयोगी बनाता है।

   क्या आप स्वच्छ और परमेश्वर के लिए उपयोगी होने को तैयार हैं? - एलबर्ट ली


सही सोच ही जीवन को सही रीति से जीने का मार्गदर्शन करती है।

जवानी की अभिलाषाओं से भाग; और जो शुद्ध मन से प्रभु का नाम लेते हैं, उन के साथ धर्म, और विश्वास, और प्रेम, और मेल-मिलाप का पीछा कर। - २ तिमुथियुस २:२२

बाइबल पाठ: २ तिमुथियुस २:२०-२६
2Ti 2:20  बड़े घर में न केवल सोने-चान्‍दी ही के, पर काठ और मिट्टी के बरतन भी होते हैं; कोई कोई आदर, और कोई कोई अनादर के लिये। 
2Ti 2:21  यदि कोई अपने आप को इन से शुद्ध करेगा, तो वह आदर का बरतन, और पवित्र ठहरेगा; और स्‍वामी के काम आएगा, और हर भले काम के लिये तैयार होगा। 
2Ti 2:22   जवानी की अभिलाषाओं से भाग; और जो शुद्ध मन से प्रभु का नाम लेते हैं, उन के साथ धर्म, और विश्वास, और प्रेम, और मेल-मिलाप का पीछा कर। 
2Ti 2:23  पर मूर्खता, और अविद्या के विवादों से अलग रह; क्‍योंकि तू जानता है, कि उन से झगड़े होते हैं। 
2Ti 2:24   और प्रभु के दास को झगड़ालू होना न चाहिए, पर सब के साथ कोमल और शिक्षा में निपुण, और सहनशील हो। 
2Ti 2:25  और विरोधियों को नम्रता से समझाए, क्‍या जाने परमेश्वर उन्‍हें मन फिराव का मन दे, कि वे भी सत्य को पहिचानें। 
2Ti 2:26  और इस के द्वारा उस की इच्‍छा पूरी करने के लिये सचेत होकर शैतान के फंदे से छूट जाएं।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल ५-७ 
  • इब्रानियों १२

शुक्रवार, 16 नवंबर 2012

संपूर्ण निष्ठा


   अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त वायलिन वादक मिदोरी का मानना है कि ध्यानपूर्वक और निष्ठा से किया गया अभ्यास ही सफलता की कुंजी है। वे प्रतिवर्ष ९० कार्यक्रमों में वायलिन वादन करती हैं और प्रतिदिन ५-६ घंटे अभ्यास करती हैं। उन्होंने एक साक्षात्कार में कहा: "मुझे अपने काम के लिए अभ्यास कि बहुत आवश्यकता रहती है; अभ्यास में व्यय किए समय का उतना महत्व नहीं है जितना उस निष्ठा का है जिस के साथ अभ्यास किया जाता है। मैं छात्रों को देखती हूँ, वे साज़ बजाते हैं और उसे अभ्यास कहते हैं, परन्तु ना वे ध्यान से सुनते हैं और ना देखते हैं। यदि आप अपनी अध्ययन पुस्तक अपने सामने खोल के बैठ जाएं तो क्या इसका अर्थ है कि आप अध्ययन कर रहे हैं?"

   यही सिद्धांत हमारे मसीही विश्वास के जीवन पर भी लागू होता है। प्रेरित पौलुस ने तिमुथियुस को लिखा: "अपने आप को परमेश्वर का ग्रहणयोग्य और ऐसा काम करने वाला ठहराने का प्रयत्‍न कर, जो लज्ज़ित होने न पाए, और जो सत्य के वचन को ठीक रीति से काम में लाता हो" (२ तिमुथियुस २:१५)। निष्ठा का अर्थ है अविरल, अथक सच्चा प्रयास और यह किसी भी कार्य के प्रति असावधान और ध्यान-रहित होने के विपरीत है। निष्ठा परमेश्वर के साथ हमारे हर संबंध पर लागू होती है।

   जैसे एक संगीतकार श्रेष्ठता के लिए निष्ठापूर्ण रीति से प्रयासरत रहता है, हम मसीही विश्वासीयों को भी परमेश्वर की सेवकाई, उसकी स्वीकृति और उसके वचन के श्रेष्ठता से बांटे जाने के लिए निष्ठापूर्ण रीति से प्रयासरत रहना चाहिए। 

   क्या आज आपने संपूर्ण निष्ठा के साथ परमेश्वर के वचन का अध्ययन और परमेश्वर से प्रार्थना करी तथा उसकी बात सुनी है? - डेविड मैक्कैसलैंड


परमेश्वर उनसे बात-चीत करता है जो उसकी सुनने को तैयार होते हैं; और उनकी सुनता है जो प्रार्थना में उसके पास आते हैं।

अपने आप को परमेश्वर का ग्रहणयोग्य और ऐसा काम करने वाला ठहराने का प्रयत्‍न कर, जो लज्ज़ित होने न पाए, और जो सत्य के वचन को ठीक रीति से काम में लाता हो। - २ तिमुथियुस २:१५

बाइबल पाठ: २ तिमुथियुस २:३-१६
2Ti 2:3 मसीह यीशु के अच्‍छे योद्धा की नाईं मेरे साथ दुख उठा। 
2Ti 2:4  जब कोई योद्धा लड़ाई पर जाता है, तो इसलिये कि अपने भरती करने वाले को प्रसन्न करे, अपने आप को संसार के कामों में नहीं फंसाता; 
2Ti 2:5  फिर अखाड़े में लड़ने वाला यदि विधि के अनुसार न लड़े तो मुकुट नहीं पाता। 
2Ti 2:6  जो गृहस्थ परिश्रम करता है, फल का अंश पहिले उसे मिलना चाहिए। 
2Ti 2:7  जो मैं कहता हूं, उस पर ध्यान दे और प्रभु तुझे सब बातों की समझ देगा। 
2Ti 2:8  यीशु मसीह को स्मरण रख, जो दाऊद के वंश से हुआ, और मरे हुओं में से जी उठा; और यह मेरे सुसमाचार के अनुसार है। 
2Ti 2:9  जिस के लिये मैं कुकर्मी की नाईं दुख उठाता हूं, यहां तक कि कैद भी हूं; परन्‍तु परमेश्वर का वचन कैद नहीं। 
2Ti 2:10  इस कारण मैं चुने हुए लोगों के लिये सब कुछ सहता हूं, कि वे भी उस उद्धार को जो मसीह यीशु में हैं अनन्‍त महिमा के साथ पाएं। 
2Ti 2:11  यह बात सच है, कि यदि हम उसके साथ मर गए हैं तो उसके साथ जीएंगे भी। 
2Ti 2:12  यदि हम धीरज से सहते रहेंगे, तो उसके साथ राज्य भी करेंगे : यदि हम उसका इन्‍कार करेंगे तो वह भी हमारा इन्‍कार करेगा। 
2Ti 2:13  यदि हम अविश्वासी भी हों तौभी वह विश्वासयोग्य बना रहता है, क्‍योंकि वह आप अपना इन्‍कार नहीं कर सकता।
2Ti 2:14  इन बातों की सुधि उन्‍हें दिला, और प्रभु के साम्हने चिता दे, कि शब्‍दों पर तर्क-वितर्क न किया करें, जिन से कुछ लाभ नहीं होता, वरन सुनने वाले बिगड़ जाते हैं। 
2Ti 2:15  अपने आप को परमेश्वर का ग्रहणयोग्य और ऐसा काम करने वाला ठहराने का प्रयत्‍न कर, जो लज्ज़ित होने न पाए, और जो सत्य के वचन को ठीक रीति से काम में लाता हो। 
2Ti 2:16  पर अशुद्ध बकवाद से बचा रह; क्‍योंकि ऐसे लोग और भी अभक्ति में बढ़ते जाएंगे।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल ३-४ 
  • इब्रानियों ११:२०-४०

गुरुवार, 15 नवंबर 2012

दूरीयां पाट दीजिए


   जर्मनी के एक शहर में कुछ अमरीकी मिशनरी सुसमाचार प्रचार के लिए अपनी बस के पास खड़े थे। वे लोगों से वार्तालाप के अवसर ढूंढ रहे थे जिस से फिर उन तक उद्धार के सुसमाचार को पहुँचाएं। वहां के दो युवकों ने उपद्रव करके उन्हें परेशान करने की ठानी, और वे अपने सिर पर खोपड़ी और हड्डी के निशान बने पटुके बांधे हुए उन मिशनरीयों की ओर गड़बड़ी करने के लिए बढ़े। लेकिन उन मिशनरीयों ने बड़ी गर्म-जोशी और सहृदयता से उनका स्वागत किया और बड़े प्रेम से उनसे वार्तालाप आरंभ किया; यह उन युवकों के लिए अप्रत्याशित था। वे कुछ देर वहां रुके और उन्होंने प्रभु यीशु में पापों की क्षमा और उद्धार का सुसमाचार सुना। एक ने उसी दिन प्रभु यीशु को अपना निज उद्धारकर्ता ग्रहण कर लिया और दूसरे ने अगले दिन यह कर लिया।

   वे दोनों युवक और वे मिशनरी संस्कृति में, नागरिकता में, उद्देश्यों में एक दूसरे से बहुत भिन्न थे। एक अन्धकार में थे और अन्धकार के साम्राज्य को फैलाना चाहते थे, तो दूसरे जीवन की ज्योति लोगों के मनों में प्रज्वलित करना चाहते थे। उन दोनों के बीच एक बड़ी दूरी थी, किंतु निस्वार्थ प्रेम और प्रेम पूर्ण वार्तालाप ने वह दूरी सहजता से पाट दी और उद्धार के सुसमाचार को सुनने तथा स्वीकार करने के लिए मनों को तैयार कर दिया।

   क्या आप भी आज इसी विभिन्न प्रकार की भिन्नता की समस्या का सामना कर रहे हैं जिस से लोगों से संपर्क और वार्तालाप आरंभ करना आपको कठिन लगता है? निस्वार्थ प्रेम का प्रदर्शन और प्रेम पूर्ण वार्तालाप को आज़माईये। प्रभु यीशु का प्रेम जिसने स्वर्ग और पृथ्वी की दूरी पाट दी वह संसार की हर दूरी को पाटने में सक्षम है, उसी प्रेम को अपने जीवन में दिखा कर सभी दूरीयां पाट दीजिए। - डेव ब्रैनन


पाप के अंधकार से भरे संसार में प्रभु यीशु उद्धार का मार्ग और परमेश्वर की ज्योति है।

...और वह[यीशु] उसके[लेवी के] घर में भोजन करने बैठे; और बहुत से चुंगी लेने वाले और पापी यीशु और उसके चेलों के साथ भोजन करने बैठे; क्‍योंकि वे बहुत से थे, और उसके पीछे हो लिये थे। - मरकुस २:१५

बाइबल पाठ: मरकुस २:१३-१७
Mar 2:13  वह फिर निकलकर झील के किनारे गया, और सारी भीड़ उसके पास आई, और वह उन्‍हें उपदेश देने लगा। 
Mar 2:14   जाते हुए उस ने हलफई के पुत्र लेवी को चुंगी की चौकी पर बैठे देखा, और उस से कहा, मेरे पीछे हो ले। 
Mar 2:15  और वह उठ कर, उसके पीछे हो लिया: और वह उसके घर में भोजन करने बैठे; और बहुत से चुंगी लेने वाले और पापी यीशु और उसके चेलों के साथ भोजन करने बैठे; क्‍योंकि वे बहुत से थे, और उसके पीछे हो लिये थे। 
Mar 2:16  और शास्‍त्रियों और फरीसियों ने यह देख कर, कि वह तो पापियों और चुंगी लेने वालों के साथ भोजन कर रहा है, उसक चेलों से कहा, वह तो चुंगी लेने वालों और पापियों के साय खाता-पीता है!! 
Mar 2:17  यीशु ने यह सुन कर, उन से कहा, भले चंगों को वैद्य की आवश्यकता नहीं, परन्‍तु बीमारों को है: मैं धमिर्यों को नहीं, परन्‍तु पापियों को बुलाने आया हूं।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल १-२ 
  • इब्रानियों ११:१-१९

बुधवार, 14 नवंबर 2012

विश्वास


   किसी काम पर लगे नए कार्यकर्ताओं को निराश करने का सबसे कारगर तरीका है उस कार्य पर काम कर रहे वरिष्ठ लोगों द्वारा उनकी आलोचना। इसीलिए अच्छे प्रबंधक प्रयास करते हैं कि वे नए कार्यकर्ताओं को ऐसे वरिष्ठ लोगों के साथ रखें जो व्यर्थ आलोचना और तानों से उन्हें सुरक्षित रख सकें और उनका उत्साह बढ़ाते रहें।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में हन्ना नामक स्त्री एक ऐसा पात्र है जो हमारे लिए आलोचना और हृदय की गहरी अपूर्ण इच्छाओं की तकलीफों का सामना करने में एक ऐसा ही परामर्शदाता और उत्साहवर्धक सहायक बन सकती है (१ शमूएल १:१-१८)। हन्ना बांझ थी और एक ऐसे पति से जो उसकी मनःस्थिति समझता नहीं था, ताने मारते रहने वाली एक सौतन से और एक आलोचनात्मक पुरोहित के बीच घिरी हुई थी। अपनी इस विकट परिस्थिति में परमेश्वर पर अपने विश्वास और उसके सामने अपने मन की स्थिति बयान करने के द्वारा हन्ना ने मार्ग पाया (१ शमूएल १:१०)। परमेश्वर ने हन्ना के हृदय की गहराईयों से निकली प्रार्थना सुनी और उत्तर में उसे पुत्र दिया।

   परमेश्वर ने हमारी सृष्टि इसलिए करी है कि हम उसके साथ संबंध में बने रहें। हम परमेश्वर के साथ अपने संबंध को जितना घनिश्ठ करते जाते हैं, उतना ही अधिक हम उसकी सामर्थ को भी अपने जीवन में कार्यकारी होने का अवसर बढ़ाते जाते हैं। परमेश्वर से करी गई वे प्रार्थनाएं जो हमारी वेदनाओं और मन के दुखों तथा हमारी भावनाओं को व्यक्त करती हैं अवश्य ही परमेश्वर को स्वीकार्य हैं क्योंकि वे परमेश्वर में हमारे विश्वास को व्यक्त करती हैं।

   जो बातें हमें तकलीफ पहुँचाती हैं - चाहे वे समस्याएं हों या हमारी इच्छाएं, जब हम उन्हें उस के हाथों में सौंप देते हैं जो उनका निवारण कर सकता है तो हम उस से एक सही दृष्टिकोण, मार्ग और शान्ति भी पाते हैं। - रैंडी किलगोर


प्रार्थना में बिना शब्दों के हृदय को उंडेलना, बिना हृदय के शब्दों को प्रवाहित करने से भला होता है।

मैं ऊंचे शब्द से यहोवा को पुकारता हूं, और वह अपने पवित्र पर्वत पर से मुझे उत्तर देता है। - भजन ३:४

बाइबल पाठ: १ शमूएल १:१-१८
1Sam 1:1  एप्रैम के पहाड़ी देश के रामतैम सोपीम नाम नगर का निवासी एल्काना नाम पुरूष था, वह एप्रेमी था, और सूप के पुत्र तोहू का परपोता, एलीहू का पोता, और यरोहाम का पुत्र था।
1Sam 1:2  और उसके दो पत्नियां थीं; एक का तो नाम हन्ना और दूसरी का पनिन्ना था। और पनिन्ना के तो बालक हुए, परन्तु हन्ना के कोई बालक न हुआ।
1Sam 1:3  वह पुरूष प्रति वर्ष अपने नगर से सेनाओं के यहोवा को दण्डवत करने और मेलबलि चढ़ाने के लिये शीलो में जाता था; और वहां होप्नी और पीनहास नाम एली के दोनों पुत्र रहते थे, जो यहोवा के याजक थे।
1Sam 1:4  और जब जब एल्काना मेलबलि चढ़ाता था तब तब वह अपनी पत्नी पनिन्ना को और उसके सब बेटे-बेटियों को दान दिया करता था;
1Sam 1:5  परन्तु हन्ना को वह दूना दान दिया करता था, क्योंकि वह हन्ना से प्रीति रखता था; तौभी यहोवा ने उसकी कोख बन्द कर रखी थी।
1Sam 1:6  परन्तु उसकी सौत इस कारण से, कि यहोवा ने उसकी कोख बन्द कर रखी थी, उसे अत्यन्त चिढ़ाकर कुढ़ाती रहती थीं।
1Sam 1:7  और वह तो प्रति वर्ष ऐसा ही करता था; और जब हन्ना यहोवा के भवन को जाती थी तब पनिन्ना उसको चिढ़ाती थी। इसलिये वह रोती और खाना न खाती थी।
1Sam 1:8  इसलिये उसके पति एल्काना ने उस से कहा, हे हन्ना, तू क्यों रोती है? और खाना क्यों नहीं खाती? और मेरा मन क्यों उदास है? क्या तेरे लिये मैं दस बेटों से भी अच्छा नहीं हूं?
1Sam 1:9  तब शीलो में खाने और पीने के बाद हन्ना उठी। और यहोवा के मन्दिर के चौखट के एक अलंग के पास एली याजक कुर्सी पर बैठा हुआ था।
1Sam 1:10  और यह मन में व्याकुल हो कर यहोवा से प्रार्थना करने और बिलख बिलखकर रोने लगी।
1Sam 1:11  और उसने यह मन्नत मानी, कि हे सेनाओं के यहोवा, यदि तू अपनी दासी के दु:ख पर सचमुच दृष्टि करे, और मेरी सुधि ले, और अपनी दासी को भूल न जाए, और अपनी दासी को पुत्र दे, तो मैं उसे उसके जीवन भर के लिये यहोवा को अर्पण करूंगी, और उसके सिर पर छुरा फिरने न पाएगा।
1Sam 1:12  जब वह यहोवा के साम्हने ऐसी प्रार्थना कर रही थी, तब एली उसके मुंह की ओर ताक रहा था।
1Sam 1:13  हन्ना मन ही मन कह रही थी; उसके होंठ तो हिलते थे परन्तु उसका शब्द न सुन पड़ता था; इसलिये एली ने समझा कि वह नशे में है।
1Sam 1:14  तब एली ने उस से कहा, तू कब तक नशे में रहेगी? अपना नशा उतार।
1Sam 1:15  हन्ना ने कहा, नहीं, हे मेरे प्रभु, मैं तो दु:खिया हूं; मैं ने न तो दाखमधु पिया है और न मदिरा, मैं ने अपने मन की बात खोल कर यहोवा से कही है।
1Sam 1:16  अपनी दासी को ओछी स्त्री न जान जो कुछ मैं ने अब तक कहा है, वह बहुत ही शोकित होने और चिढ़ाई जाने के कारण कहा है।
1Sam 1:17  एली ने कहा, कुशल से चली जा; इस्राएल का परमेश्वर तुझे मन चाहा वर दे।
1Sam 1:18  उसे ने कहा, तेरी दासी तेरी दृष्टि में अनुग्रह पाए। तब वह स्त्री चली गई और खाना खाया, और उसका मुंह फिर उदास न रहा।

एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति ७-९ 
  • मत्ती ३

मंगलवार, 13 नवंबर 2012

ज़िम्मेदारी


   मैं और मेरी पत्नी एक शॉपिंग मॉल में खरीद्दारी के लिए रखा सामान देख रहे थे। हम एक स्थान पर पहुँचे जहां टी शर्ट रखे हुए थे, और मैं उन टी शर्ट्स और उनपर लिखे मनोरंजक वाक्यों को देखने लगा। एक टी शर्ट पर लिखे वाक्य ने मुझे विचलित किया; उसपर लिखा था "कितने अधिक मसीही और कितने कम शेर।" यह वाक्य प्रथम ईसवीं में मसीही विश्वासियों पर ढाए जाने वाले सताव पर आधारित था। रोमी साम्राज्य के उस काल में मसीही विश्वासियों को मनोरंजन के लिए शेरों के आगे फेंक दिया जाता था और लोग मनोरंजनशालाओं जमा होकर शेरों द्वारा उनके फाड़ खाए जाने का तमाशा देखते थे। यह वाक्य और इसका संदर्भ हमारे लिए कतई मनोरंजक नहीं था।

   मसीही विश्वासियों का सताया जाना कोई मज़ाक नहीं है। प्रथम ईसवीं के उन विश्वासियों के इस प्रकार के क्रूर मनोरंजन द्वारा परखे जाने से कुछ पहले ही प्रेरित पौलुस ने अपनी एक पत्री में चिताया था, "पर जितने मसीह यीशु में भक्ति के साथ जीवन बिताना चाहते हैं वे सब सताए जाएंगे" (२ तिमुथियुस ३:१२)। यह सताया जाना तो अवश्यंभावी है, और प्रत्येक मसीही विश्वासी के लिए गंभीर विषय होना चाहिए, क्योंकि हर पल और हर क्षण संसार भर में कहीं ना कहीं मसीही विश्वासी लोग इस उत्पीड़न का सामना कर रहे हैं।

   हम इस बारे में क्या कर सकते हैं? सबसे पहली बात तो हम उनके लिए प्रार्थना कर सकते हैं कि जो इस सताव में से होकर निकल रहे हैं परमेश्वर उन्हें इस दुख में शांति और सांत्वना दे। दूसरे, जो इस उत्पीड़न के कारण मारे या कैद में डाल दिए जाते हैं उनके परिवारों की देख-रेख और सहायता के लिए हम अपना हाथ बढ़ा सकते हैं। तीसरा, हम अपने आप को अभी से प्रार्थना द्वारा तैयार कर सकते हैं कि जब यह परीक्षा की घड़ी हम पर आए तो हम परखे जाने के लिए तैयार पाए जाएं, अपने उद्धारकर्ता प्रभु यीशु का इन्कार ना करें।

   जब प्रेरित पौलुस अपने मसीही विश्वास के कारण कैद में डाला गया तो वहां पर भी उसके द्वारा प्रदर्शित साहस और विश्वास ने औरों की भी हिम्मत बढ़ाई कि वे भी अपने विश्वास में दृढ़ बने रहें (फिलिप्पियों १:१४)। प्रभु यीशु में पापों की क्षमा और उद्धार तथा अनन्त जीवन के सुसमाचार के प्रचार में सम्मिलित हो जाएं। आपकी प्रार्थनाएं और सुसमाचार में आपका सहयोग सताव से निकल रहे विश्वासियों के लिए प्रोत्साहन होगा। - बिल क्राउडर


जब हम प्रभु परमेश्वर के सामने घुटनों पर आते हैं तो संसार के सामने खड़ा हो सकने की सामर्थ को पाते हैं।

पर जितने मसीह यीशु में भक्ति के साथ जीवन बिताना चाहते हैं वे सब सताए जाएंगे। - २ तिमुथियुस ३:१२

बाइबल पाठ: फिलिप्पियों १:१२-२१
Php 1:12  हे भाइयों, मैं चाहता हूं, कि तुम यह जान लो, कि मुझ पर जो बीता है, उस से सुसमाचार ही की बढ़ती हुई है। 
Php 1:13  यहां तक कि कैसरी राज्य की सारी पलटन और शेष सब लोगों में यह प्रगट हो गया है कि मैं मसीह के लिये कैद हूं। 
Php 1:14 और प्रभु में जो भाई हैं, उन में से बहुधा मेरे कैद होने के कारण, हियाव बान्‍ध कर, परमेश्वर का वचन निधड़क सुनाने का और भी हियाव करते हैं। 
Php 1:15  कितने तो डाह और झगड़े के कारण मसीह का प्रचार करते हैं और कितने भली मनसा से। 
Php 1:16  कई एक तो यह जान कर कि मैं सुसमाचार के लिये उत्तर देने को ठहराया गया हूं प्रेम से प्रचार करते हैं। 
Php 1:17 और कई एक तो सीधाई से नहीं पर विरोध से मसीह की कथा सुनाते हैं, यह समझ कर कि मेरी कैद में मेरे लिये क्‍लेश उत्‍पन्न करें। 
Php 1:18 सो क्‍या हुआ केवल यह, कि हर प्रकार से चाहे बहाने से, चाहे सच्‍चाई से, मसीह की कथा सुनाई जाती है, और मैं इस से आनन्‍दित हूं, और आनन्‍दित रहूंगा भी। 
Php 1:19 क्‍योंकि मैं जानता हूं, कि तुम्हारी बिनती के द्वारा, और यीशु मसीह की आत्मा के दान के द्वारा इस का प्रतिफल मेरा उद्धार होगा। 
Php 1:20  मैं तो यही हादिर्क लालसा और आशा रखता हूं, कि मैं किसी बात में लज्ज़ित न होऊं, पर जैसे मेरे प्रबल साहस के कारण मसीह की बड़ाई मेरी देह के द्वारा सदा होती रही है, वैसा ही अब भी हो चाहे मैं जीवित रहूं वा मर जाऊं। 
Php 1:21  क्‍योंकि मेरे लिये जीवित रहना मसीह है, और मर जाना लाभ है।

एक साल में बाइबल: 
  • विलापगीत १-२ 
  • इब्रानियों १०:१-१८