ई-मेल संपर्क / E-Mail Contact

इन संदेशों को ई-मेल से प्राप्त करने के लिए अपना ई-मेल पता इस ई-मेल पर भेजें : rozkiroti@gmail.com / To Receive these messages by e-mail, please send your e-mail id to: rozkiroti@gmail.com

गुरुवार, 6 दिसंबर 2012

परिवर्तन


   अमेरीकी गुप्त सेवा (United States Secret Service) का गठन सन १८६५ में नकली मुद्रा बनाने वालों से अमेरीकी मुद्रा - डॉलर, और अमेरीकी आर्थिक व्यवस्था की रक्षा करने के लिए हुआ था। एक निश्चित उद्देश्य से स्थापित इस कानून तथा देश की रखवाली करने वाली संस्था के उद्देश्यों में १९०२ में परिवर्तन किया गया। यद्यपि अब इस संस्था के कार्य अनेक प्रकार के हैं किंतु आज वे मुख्यतः अमेरीकी राष्ट्रपति की सुरक्षा के लिए जाने जाते हैं। उनके कार्यों और ज़िम्मेदारियों में यह एक अति महत्वपूर्ण दिशा परिवर्तन था।

   किंतु थिस्सलुनीकियों के मसीही विश्वासियों के जीवन में आए, और प्रत्येक मसीही विश्वासी के जीवन में मसीही विश्वास में आने से होने वाले परिवर्तन के सामने यह कुछ भी नहीं है। मसीही विश्वास द्वारा जीवन में होने वाले परिवर्तन के प्रभाव दूर दूर तक लोगों को दिखाई देते हैं, जैसे थिस्सलुनीकियों के विश्वासियों के जीवन में दिखाई दिए। प्रेरित पौलुस ने उन्हें लिखी अपनी पत्री में उनके विश्वास और संमर्पण की सराहना करते हुए उन्हें लिखा: "यहां तक कि मकिदुनिया और अखया के सब विश्वासियों के लिये तुम आदर्श बने। क्‍योंकि तुम्हारे यहां से न केवल मकिदुनिया और अखया में प्रभु का वचन सुनाया गया, पर तुम्हारे विश्वास की जो परमेश्वर पर है, हर जगह ऐसी चर्चा फैल गई है, कि हमें कहने की आवश्यकता ही नहीं। क्‍योंकि वे आप ही हमारे विषय में बताते हैं कि तुम्हारे पास हमारा आना कैसा हुआ; और तुम क्‍योंकर मूरतों से परमेश्वर की ओर फिरे ताकि जीवते और सच्‍चे परमेश्वर की सेवा करो" (१ थिस्सलुनीकियों १:७-९)।

   थिस्सलुनीकियों के विश्वासियों के जीवनों में आया यह परिवर्तन अद्भुत था - उन्होंने मूरतों को पूजना छोड़कर जीवते सच्चे परमेश्वर में विश्वास किया, प्रभु यीशु में पापों की क्षमा और विश्वास द्वारा परमेश्वर से अपना व्यक्तिगत संबंध जोड़ा; और इस परिवर्तन से आए प्रभाव तथा बदलाव सब लोगों के सामने विदित थे, यहां तक कि थिस्सलुनीकिए के वे विश्वासी अब अन्य लोगों के लिए आदर्श बन गए।

   क्या आज मसीही विश्वास में आने के बाद हमारे जीवनों में भी ऐसा परिवर्तन लोगों को दिखाई देता है? क्या हमें और हमारे जीवन को देखकर लोग मसीह यीशु की ओर आकर्षित होते हैं? क्या हमारे मसीही विश्वास की चर्चा लोगों को एक भले जीवन के लिए प्रोत्साहित करती है? - बिल क्राउडर


मसीह यीशु के साथ विश्वास द्वारा जुड़ जाना किसी ज्ञान और बुद्धि की बात नहीं वरन मन और जीवन का संपूर्ण परिवर्तन है।

क्‍योंकि वे आप ही हमारे विषय में बताते हैं कि तुम्हारे पास हमारा आना कैसा हुआ; और तुम क्‍योंकर मूरतों से परमेश्वर की ओर फिरे ताकि जीवते और सच्‍चे परमेश्वर की सेवा करो। - १ थिस्सलुनीकियों १:९

बाइबल पाठ: १ थिस्सलुनीकियों १:१-१०
1Th 1:1 पौलुस और सिलवानुस और तीमुथियुस की ओर से थिस्‍सलुनिकियों की कलीसिया के नाम जो परमेश्वर पिता और प्रभु यीशु मसीह में है। अनुग्रह और शान्‍ति तुम्हें मिलती रहे।
1Th 1:2  हम अपनी प्रार्थनाओं में तुम्हें स्मरण करते और सदा तुम सब के विषय में परमेश्वर का धन्यवाद करते हैं। 
1Th 1:3  और अपने परमेश्वर और पिता के साम्हने तुम्हारे विश्वास के काम, और प्रेम का परिश्रम, और हमारे प्रभु यीशु मसीह में आशा की धीरता को लगातार स्मरण करते हैं। 
1Th 1:4  और हे भाइयो, परमेश्वर के प्रिय लोगों हम जानतें हैं, कि तुम चुने हुए हो। 
1Th 1:5 क्‍योंकि हमारा सुसमाचार तुम्हारे पास न केवल वचन मात्र ही में वरन सामर्थ और पवित्र आत्मा, और बड़े निश्‍चय के साथ पहुंचा है; जैसा तुम जानते हो, कि हम तुम्हारे लिये तुम में कैसे बन गए थे। 
1Th 1:6 और तुम बड़े क्‍लेश में पवित्र आ्त्मा के आनन्‍द के साथ वचन को मानकर हमारी और प्रभु की सी चाल चलने लगे। 
1Th 1:7  यहां तक कि मकिदुनिया और अखया के सब विश्वासियों के लिये तुम आदर्श बने। 
1Th 1:8 क्‍योंकि तुम्हारे यहां से न केवल मकिदुनिया और अखया में प्रभु का वचन सुनाया गया, पर तुम्हारे विश्वास की जो परमेश्वर पर है, हर जगह ऐसी चर्चा फैल गई है, कि हमें कहने की आवश्यकता ही नहीं। 
1Th 1:9 क्‍योंकि वे आप ही हमारे विषय में बताते हैं कि तुम्हारे पास हमारा आना कैसा हुआ; और तुम क्‍योंकर मूरतों से परमेश्वर की ओर फिरे ताकि जीवते और सच्‍चे परमेश्वर की सेवा करो। 
1Th 1:10 और उसके पुत्र के स्‍वर्ग पर से आने की बाट जोहते रहो जिसे उस ने मरे हुओं में से जिलाया, अर्थात यीशु की, जो हमें आने वाले प्रकोप से बचाता है।

एक साल में बाइबल: 
  • दानिय्येल ३-४ 
  • १ यूहन्ना ५

बुधवार, 5 दिसंबर 2012

अन्त और अनन्त


   पत्रकार मिच अल्बॉम, ३० सितिंबर २००९ को, मंच पर ९१ वर्षीय अर्नी हारवेल का साक्षात्कार ले रहे थे। अर्नी अमेरीकी खेल जगत के एक बहुत लोकप्रीय व्यक्तित्व रहे थे। उन्होंने ५० वर्ष से भी अधिक का समय खेलों के रेडियों प्रसारण में बिताया था, मुख्यतः वे डेट्रॉइट टाइगर्स नामक बेसबॉल टीम से संबंधित प्रसारण के साथ जुड़े होते थे। खेल जगत से जुड़े उनके समय में उनकी नम्रता, अनुकंपा और प्रेम ने सभी को प्रभावित किया था तथा उन से मिलने वाले प्रत्येक जन पर एक अमिट छाप छोड़ी थी।

   उस साक्षात्कार से कुछ ही पहले अर्नी ने लोगों को बताया था कि वे लाइलाज कैंसर से पीड़ित हैं। किंतु इस साक्षात्कार में हो रहे वार्तालाप में वे नहीं चाहते थे कि लोग उनके बारे में दुखी हों और उनसे सहानुभूति रखें। वरन अर्नी चाहते थे कि वे १९६१ की उस रात्रि और उनके जीवन पर पड़े उसके प्रभावों के बारे में बातचीत करें जब उन्होंने प्रभु यीशु मसीह को अपन निज उद्धारकर्ता स्वीकार किया था। अपने इस अंतिम साक्षात्कार, वार्तालाप और विदाई में उन्होंने अपनी बात का समापन इन शब्दों से किया: "मैं यह तो नहीं जानता कि मेरे पास कितने और दिन बचे हैं, परन्तु मैं यह अवश्य जानता हूँ कि मैं किस की बाहों में जा रहा हूँ और यह भी कि स्वर्ग कितना अद्भुत स्थान होगा।"

   अर्नी को आने वाले उस अति-विशिष्ट का स्पष्ट पूर्वानुमान था क्योंकि वे जानते थे कि उनका जीवन और अनन्त किस के हाथों में सुरक्षित है। वे जानते थे कि परमेश्वर ने उनके लिए एक महिमामय और अनन्त काल का स्थान तैयार कर के रखा हुआ है (यूहन्ना १४:२-३; फिलिप्पियों १:२१-२३), इसीलिए वे मृत्यु का सामना बिना किसी भय और पछतावे के साथ कर सके और मृत्यु के समक्ष भी परमेश्वर की महिमा कर सके।

   क्या मृत्यु से सामना होने पर आपका रवैया भी अर्नी के समान ही होगा? क्या आपको पता है और विश्वास है कि आप संसार से अंतिम विदाई के बाद किसके पास होंगे? क्या संसार से आपकी अंतिम विदाई किसी अनिशचितता और दुख में नहीं, वरन अर्नी के समान ही आपके लिए भी निशचित तौर से अनन्त आनन्द में प्रवेश करने का द्वार ही होगी?

   संसार की हर उपलब्धि के बाद भी एक अन्त है; और उस अन्त के बाद एक अनन्त है। अन्ततः आपके लिए वह अनन्त कहां और कैसा होगा, यही एक मात्र और महत्वपूर्ण प्रश्न रह जाता है जिसका उत्तर प्रत्येक जन को स्वयं ही और इस जीवन में ही तैयार करना होगा। क्या इस एक मात्र और महत्वपूर्ण प्रश्न का उत्तर आपने तैयार कर लिया है? - डेव ब्रैनन


मसीही विश्वासी के लिए मृत्यु का अर्थ है स्वर्ग, आनन्द और अनन्त तक परमेश्वर का साथ।

हे भाइयो, चौकस रहो, कि तुम में ऐसा बुरा और अविश्वासी न मन हो, जो जीवते परमेश्वर से दूर हट जाए। वरन जिस दिन तक आज का दिन कहा जाता है, हर दिन एक दूसरे को समझाते रहो, ऐसा न हो, कि तुम में से कोई जन पाप के छल में आकर कठोर हो जाए। - इब्रानियों ३:१२-१३

बाइबल पाठ: २ कुरिन्थियों ५:६-११
2Co 5:6  सो हम सदा ढाढ़स बान्‍धे रहते हैं और यह जानते हैं कि जब तक हम देह में रहते हैं, तब तक प्रभु से अलग हैं। 
2Co 5:7  क्‍योंकि हम रूप को देख कर नहीं, पर विश्वास से चलते हैं। 
2Co 5:8  इसलिये हम ढाढ़स बान्‍धे रहते हैं, और देह से अलग होकर प्रभु के साथ रहना और भी उत्तम समझते हैं। 
2Co 5:9   इस कारण हमारे मन की उमंग यह है, कि चाहे साथ रहें, चाहे अलग रहें पर हम उसे भाते रहें। 
2Co 5:10 क्‍योंकि अवश्य है, कि हम सब का हाल मसीह के न्याय आसन के साम्हने खुल जाए, कि हर एक व्यक्ति अपने अपने भले बुरे कामों का बदला जो उस ने देह के द्वारा किए हों पाए।
2Co 5:11  सो प्रभु का भय मान कर हम लोगों को समझाते हैं और परमेश्वर पर हमारा हाल प्रगट है; और मेरी आशा यह है, कि तुम्हारे विवेक पर भी प्रगट हुआ होगा।

एक साल में बाइबल: 
  • दानिय्येल १-२ 
  • १ यूहन्ना ४

मंगलवार, 4 दिसंबर 2012

प्रेर्णा तथा परिश्रम


   मेरे दादा तथा नाना, दोनो ही को बागबानी में बहुत रुचि थी, जैसे मेरे अन्य कई मित्रों को भी है। मुझे भी सुन्दर बगीचों में जाना बहुत अच्छा लगाता है; उनसे मुझे प्रेर्णा मिलती है और मेरी भी इच्छा होती है कि मैं भी अपने आंगन में ऐसे ही सुन्दर बगीचे बनाऊं। किंतु मेरी समस्या रहती है बगीचा लगाने की प्रेर्णा पाने से आगे बढ़कर बगीचा लगाने के परिश्रम को करना। मेरे मन में आने वाले अच्छे विचार कार्यान्वित नहीं हो पाते क्योंकि मैं उन्हें वास्तविकता तक लाने की मेहनत नहीं करती, उन के लिए समय नहीं लगाती।

   यही सिद्धांत हमारे आत्मिक जीवनों में भी कार्य करता है। हम कुछ लोगों की गवाही सुन कर, परमेश्वर द्वारा उनके जीवन में किए जा रहे, तथा उन में होकर दूसरों के जीवन में हो रहे अद्भुत कार्यों के बारे में जानकर अचंभित हो सकते हैं। हम एक अच्छा प्रचार सन्देश और अच्छे स्तुति गीत सुनकर और भी अधिक कटिबद्धता से परमेश्वर का अनुसरण करने कि ठान सकते हैं। परन्तु चर्च या सभाग्रह से बाहर आने के बाद वहां किए गए अपने निर्णय को कार्यान्वित करना हमारे लिए कठिन हो जाता है।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में याकूब की पत्री में ऐसे मसीही विश्वासियों के लिए लिखा गया है कि वे उन लोगों के समान हैं जो दर्पण में अपना स्वाभाविक चेहरा देखते तो हैं परन्तु दिखाई देने वाले विकारों को ठीक करने के लिए कुछ प्रयास नहीं करते; देखने के बाद वे जैसे थे वैसे ही लौट जाते हैं (याकूब १:२३-२४)। वे परमेश्वर का वचन सुनते तो हैं परन्तु उनके जीवनों में वह कार्यकारी नहीं होता। याकूब कहता है कि हमें केवल सुनने वाला ही नहीं वरन कार्य करने वाला भी बनना है।

   जब दूसरों द्वारा हो रहे भले और अद्भुत कार्यों के बारे में केवल सुनने द्वारा मिली प्रेर्णा से आगे बढ़कर हम स्वयं परिश्रम करके कार्य करना आरंभ करते हैं, तब ही हमारे अन्दर बोया गया परमेश्वर के वचन का बीज हमारे जीवनों को सुन्दर और भले आत्मिक फूलों तथा फलों से भरा बगीचा बनाने पाएगा, जो फिर दूसरों के लिए प्रेर्णा स्त्रोत हो सकेगा। - जूली एकैरमैन लिंक


कार्य करने से ही जीवन उन्नति पाता है।

परन्‍तु वचन पर चलने वाले बनो, और केवल सुनने वाले ही नहीं जो अपने आप को धोखा देते हैं। - याकूब १:२२

बाइबल पाठ: याकूब १:१९-२७
Jas 1:19  हे मेरे प्रिय भाइयो, यह बात तुम जानते हो: इसलिये हर एक मनुष्य सुनने के लिये तत्‍पर और बोलने में धीरा और क्रोध में धीमा हो। 
Jas 1:20  क्‍योंकि मनुष्य का क्रोध परमेश्वर के धर्म का निर्वाह नहीं कर सकता है। 
Jas 1:21   इसलिये सारी मलिनता और बैर भाव की बढ़ती को दूर करके, उस वचन को नम्रता से ग्रहण कर लो, जो हृदय में बोया गया और जो तुम्हारे प्राणों का उद्धार कर सकता है। 
Jas 1:22  परन्‍तु वचन पर चलने वाले बनो, और केवल सुनने वाले ही नहीं जो अपने आप को धोखा देते हैं। 
Jas 1:23  क्‍योंकि जो कोई वचन का सुनने वाला हो, और उस पर चलने वाला न हो, तो वह उस मनुष्य के समान है जो अपना स्‍वाभाविक मुंह दर्पण में देखता है। 
Jas 1:24  इसलिये कि वह अपने आप को देख कर चला जाता, और तुरन्‍त भूल जाता है कि मैं कैसा था। 
Jas 1:25  पर जो व्यक्ति स्‍वतंत्रता की सिद्ध व्यवस्था पर ध्यान करता रहता है, वह अपने काम में इसलिये आशीष पाएगा कि सुनकर नहीं, पर वैसा ही काम करता है। 
Jas 1:26   यदि कोई अपने आप को भक्त समझे, और अपनी जीभ पर लगाम न दे पर अपने हृदय को धोखा दे, तो उस की भक्ति व्यर्थ है। 
Jas 1:27  हमारे परमेश्वर और पिता के निकट शुद्ध और निर्मल भक्ति यह है, कि अनाथों और विधवाओं के क्‍लेश में उन की सुधि लें, और अपने आप को संसार से निष्‍कलंक रखें।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल ४७-४८ 
  • १ यूहन्ना ३


सोमवार, 3 दिसंबर 2012

परमेश्वर के हस्ताक्षर


   मेरे एक मित्र का घर झील के किनारे बना है; घर का एक भाग झील तक जाता है। घर के अन्दर की दीवारों पर कई फोटो टंगे हैं, प्रत्येक फोटो भिन्न ऋतुओं में झील तक जाने वाले भाग से सूर्यास्त के समय झील और उसके आस-पास के इलाके की ली गई है। सभी फोटो बहुत सुन्दर हैं किंतु कोई भी दो फोटो एक समान नहीं हैं। उन फोटो को देखकर मुझे मेरे एक अन्य मित्र द्वारा सूर्यास्त के बारे में कही गई बात स्मरण हो आती है; सूर्यास्त को परिभाषित करते हुए उस मित्र ने कहा था: "दिन के अन्त पर परमेश्वर के सुन्दर हस्ताक्षर!"

   परमेश्वर के अनुपम हस्ताक्षर ना केवल प्रत्येक सूर्यास्त पर होते हैं वरन उस की प्रत्येक संतान पर भी होते हैं। मुझे सदा ही यह देखकर आनन्द होता है कि कैसे प्रत्येक व्यक्ति अन्य किसी भी व्यक्ति से भिन्न होता है। परमेश्वर असीम रूप से रचनात्मक है और उसकी यह रचनात्मक प्रतिभा हमारे शरीर की भिन्नता, भिन्न व्यक्तित्वों, योग्यताओं, पसन्द-नापसन्द, जीवन के प्रति रवैये, परिस्थितियों के प्रति प्रतिक्रीया आदि में दिखाई देती है; प्रत्येक जन एक अनुपम सृष्टि है, कोई किसी की प्रतिलिपि नहीं है।

   यही विलक्षण अनुपमता हम मण्डली अर्थात मसीह यीशु की देह में भी देखते हैं। उस देह में हम देखते हैं कि कैसे भिन्न आत्मिक वरदान आपस में संबंधित होते हैं और मिलकर एक साथ परमेश्वर के उद्देश्यों की पूर्ति और उस की महिमा के लिए कार्य कर सकते हैं। परमेश्वर के वचन बाइबल में १ कुरिन्थियों १२:४-६ में हम पढ़ते हैं: "वरदान तो कई प्रकार के हैं, परन्‍तु आत्मा एक ही है। और सेवा भी कई प्रकार की है, परन्‍तु प्रभु एक ही है। और प्रभावशाली कार्य कई प्रकार के हैं, परन्‍तु परमेश्वर एक ही है, जो सब में हर प्रकार का प्रभाव उत्‍पन्न करता है।"

   परमेश्वर के हस्ताक्षर जो उसकी रचि प्रकृति में इतने स्पष्ट विदित हैं, उसके लोगों में भी पाए जाते हैं। इस विविधता में होकर भी एक ही लक्ष्य और कार्य को संपन्न कराने वाला अद्भुत परमेश्वर हम मसीही विश्वासियों का प्रेमी पिता भी है जो हमारी हर आवश्यकता को जानता है और उसे पूरा करता है। उसकी विलक्षण सामर्थ पर विश्वास रखें और उसके द्वारा दिए गए वरदानों को उस की महिमा के लिए उपयोग करते रहें। - सिंडी हैस कैसपर


परमेश्वर के हस्ताक्षर उसकी सृष्टि में दिखाई देते हैं।

तब परमेश्वर ने जो कुछ बनाया था, सब को देखा, तो क्या देखा, कि वह बहुत ही अच्छा है। - उत्पत्ति १:३१

बाइबल पाठ: उत्पत्ति १:२७-३१
Gen 1:27  तब परमेश्वर ने मनुष्य को अपने स्वरूप के अनुसार उत्पन्न किया, अपने ही स्वरूप के अनुसार परमेश्वर ने उसको उत्पन्न किया, नर और नारी करके उस ने मनुष्यों की सृष्टि की। 
Gen 1:28  और परमेश्वर ने उनको आशीष दी : और उन से कहा, फूलो-फलो, और पृथ्वी में भर जाओ, और उसको अपने वश में कर लो; और समुद्र की मछलियों, तथा आकाश के पक्षियों, और पृथ्वी पर रेंगने वाले सब जन्तुओं पर अधिकार रखो। 
Gen 1:29  फिर परमेश्वर ने उन से कहा, सुनो, जितने बीज वाले छोटे छोटे पेड़ सारी पृथ्वी के ऊपर हैं और जितने वृक्षों में बीज वाले फल होते हैं, वे सब मैं ने तुम को दिए हैं, वे तुम्हारे भोजन के लिये हैं : 
Gen 1:30  और जितने पृथ्वी के पशु, और आकाश के पक्षी, और पृथ्वी पर रेंगने वाले जन्तु हैं, जिन में जीवन के प्राण हैं, उन सब के खाने के लिये मैं ने सब हरे हरे छोटे पेड़ दिए हैं; और वैसा ही हो गया। 
Gen 1:31  तब परमेश्वर ने जो कुछ बनाया था, सब को देखा, तो क्या देखा, कि वह बहुत ही अच्छा है। तया सांझ हुई फिर भोर हुआ। इस प्रकार छठवां दिन हो गया।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल ४५-४६ 
  • १ यूहन्ना २


रविवार, 2 दिसंबर 2012

ताज़गी के समय


   आपको सबसे अधिक ताज़गी किस से प्राप्त होती है? किसी गर्म दिन में कुछ ठंडा पीने से? दोपहर में नींद लेने से? स्तुति और आराधना के गीत सुनने से?

   परमेश्वर के वचन बाइबल में ताज़गी के अर्थ को अनेक शारीरिक और आत्मिक बातों के साथ जोड़ा गया है। वचन में हम सबत के दिन विश्राम द्वारा ताज़गी पाने के बारे में पढ़ते हैं (निर्गमन २३:१२); शारीरिक परिश्रम के बाद ठंडे पानी से मिलने वाली ताज़गी के बारे में पढ़ते हैं (न्यायियों १५:१८-१९); मनमोहक संगीत द्वारा शांति पाने के विषय में पढ़ते हैं (१ शमूएल १६:२३); प्रोत्साहित करने वाली संगति के बारे में पढ़ते हैं (२ तिमुथियुस १:१६)।

   प्रेरित पतरस ने पिन्तेकुस्त के दिन आई आत्मिक शांति के बारे में अपने श्रोताओं को बताते हुए कहा "इसलिये, मन फिराओ और लौट आओ कि तुम्हारे पाप मिटाए जाएं, जिस से प्रभु के सम्मुख से विश्रान्‍ति के दिन आएं" (प्रेरितों ३:१९)। पतरस का यह कथन उसके यहूदी श्रोताओं के लिए विशेषकर अर्थपूर्ण था क्योंकि वह भविष्य में मसीह यीशु के आने वाले शासन तथा शांति से संबंधित था। इसी आत्मिक शांति और नए जीवन का सुसमाचार ग़ैर-यहूदी अन्य-जातियों को भी इसी आशय से दिया गया (प्रेरितों १०)।

   आज हम मसीही विश्वासी इसी ताज़गी का अनुभव अपने मनों को शांत और स्थिर कर के परमेश्वर के वचन बाइबल के अध्ययन और प्रार्थना में बिताए गए समय द्वारा कर सकते हैं। जब हम एकांत में परमेश्वर के साथ समय बिताते हैं तो उसकी शांति और आनन्द हमारे मनों को भर देती है और हमारी आत्मा ताज़गी पाती है।

   परमेश्वर से संपर्क और आत्मिक ताज़गी पाने की इस सहज विधि के लिए परमेश्वर का धन्यवाद करें और इसका भरपूरी से लाभ उठाएं। - डेनिस फिशर


जब हम परमेश्वर के निकट आते हैं तो हमारे मन ताज़गी पाते हैं और हमारी सामर्थ बहाल हो जाती है।

इसलिये, मन फिराओ और लौट आओ कि तुम्हारे पाप मिटाए जाएं, जिस से प्रभु के सम्मुख से विश्रान्‍ति के दिन आएं। - प्रेरितों ३:१९

बाइबल पाठ: फिलिप्पियों ४:४-९
Php 4:4 प्रभु में सदा आनन्‍दित रहो; मैं फिर कहता हूं, आनन्‍दित रहो। 
Php 4:5  तुम्हारी कोमलता सब मनुष्यों पर प्रगट हो: प्रभु निकट है। 
Php 4:6 किसी भी बात की चिन्‍ता मत करो: परन्‍तु हर एक बात में तुम्हारे निवेदन, प्रार्थना और बिनती के द्वारा धन्यवाद के साथ परमेश्वर के सम्मुख अपस्थित किए जाएं। 
Php 4:7 तब परमेश्वर की शान्‍ति, जो समझ से बिलकुल परे है, तुम्हारे हृदय और तुम्हारे विचारों को मसीह यीशु में सुरिक्षित रखेगी।
Php 4:8  निदान, हे भाइयों, जो जो बातें सत्य हैं, और जो जो बातें आदरणीय हैं, और जो जो बातें उचित हैं, और जो जो बातें पवित्र हैं, और जो जो बातें सुहावनी हैं, और जो जो बातें मनभावनी हैं, निदान, जो जो सदगुण और प्रशंसा की बातें हैं, उन्‍हीं पर ध्यान लगया करो। 
Php 4:9  जो बातें तुम ने मुझ से सीखीं, और ग्रहण की, और सुनी, और मुझ में देखीं, उन्‍हीं का पालन किया करो, तब परमेश्वर जो शान्‍ति का सोता है तुम्हारे साथ रहेगा।

एक साल में बाइबल: 

  • यहेजकेल ४२-४४ 
  • १ यूहन्ना १

शनिवार, 1 दिसंबर 2012

बैसाखी?


   मसीही विश्वास का उपहास करने वाले कहते हैं कि यह किसी बैसाखी के समान ही है - प्रभु यीशु में लोग केवल इसलिए विश्वास रखते हैं क्योंकि वे अपने आप में कमज़ोर होते हैं और उनके लिए धर्म की बैसाखी के बिना जीवन व्यतीत करना संभव नहीं। संभवतः इन उपहास करने वाले लोगों ने मसीही विश्वास के लिए यात्नाएं सहने और भारी दुख तथा पीड़ा उठाने वाले लोगों के बारे में नहीं सुना है, जिन्होंने भीष्ण अत्याचारों का सामना करने और सहने पर भी अपने विश्वास से मुँह नहीं मोड़ा। इतना सब सहने पर भी स्थिर बने रहने की शक्ति किसी कमज़ोर व्यक्ति के बस की बात नहीं है।

   सुदूर पुर्व के एक देश में, अपने मसीही विश्वास के कारण, एक डॉक्टर को ढाई वर्ष जेल में रख कर उसे ’पुनःशिक्षित’ किया गया जिससे वह इस विश्वास से निकल जाए। जेल से छोड़े जाने के कुछ समय बाद ही उसे फिर हिरासत में लेना पड़ा क्योंकि अब वह अपने चर्च में मसीही विश्वास की उन्नति और स्थिरता के लिए और भी बढ़-चढ़ कर कार्य कर रहा था।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस के जीवन के बारे में विचार कीजिए, जिसने मसीही विश्वास में आने के बाद अपना रुतबा, हैसियत, पद सब कुछ गंवा दिया; उसके मित्र और साथी उसके शत्रु बन गए और मसीही विश्वास के प्रचार के कारण उसे जेल, कोड़े, उपहास और मृत्यु के जोखिम बार-बार उठाने पड़े (२ कुरिन्थियों ११:१६-२९)।

   ये मसीही विश्वासी किसी बैसाखी का सहारा नहीं ढूँढ रहे थे; इनके मनों में कुछ गंभीर और अति-आवश्यक था जिसे संसार के लोगों में हर कीमत पर पहुँचाना इनकी ज़िम्मेदारी थी, और वे उस ज़िम्मेदारी को हर कीमत चुका कर ही निभा रहे थे। परमेश्वर के साथ उनका एक व्यक्तिगत रिश्ता था, एक ऐसा रिश्ता जो मसीह यीशु के क्रूस पर दिए बलिदान पर लाए विश्वास से बना था। अपने इस विश्वास के कारण अब वे सृष्टिकर्ता परमेश्वर की सन्तान बन गए थे और अपने इस राजपद पाने को संसार के सामने घोषित करने के सौभाग्य के लिए वे कुछ भी सहने और बलिदान करने के लिए तैयार थे।

   इनमें से कोई भी व्यर्थ बातों में फंसा अपाहिज नहीं था जिसे किसी बैसाखी की आवश्यकता हो; इनकी सामर्थ और शक्ति संसार कि किसी भी सामर्थ और शक्ति से बढ़कर थी।

   मसीही विश्वास एक बैसाखी? कदापि नहीं! प्रभु यीशु मसीह में विश्वास संसार की कठिनाईयों से बचकर सुरक्षा में रहने का माध्यम नहीं है, वरन यह संसार में अन्धकार कि शक्तियों को खुली चुनौती देकर उनसे जूझने का निमंत्रण है, जिसके लिए प्रत्येक विश्वासी को एक भारी कीमत चुकाने को सदा तैयार रहना चाहिए। यह अपने उद्धारकर्ता के समान ही प्रतिदिन अपना क्रूस उठाकर (लूका ९:२३) उसके पीछे पीछे चलने और दुख उठाने का नाम है। - डेव ब्रैनन


क्योंकि मसीह यीशु ने हमारे लिए क्रूस सह लिया इसलिए हम उसके लिए क्रूस उठाए फिरते हैं।

उस ने सब से कहा, यदि कोई मेरे पीछे आना चाहे, तो अपने आप से इन्‍कार करे और प्रति दिन अपना क्रूस उठाए हुए मेरे पीछे हो ले। क्‍योंकि जो कोई अपना प्राण बचाना चाहेगा वह उसे खोएगा, परन्‍तु जो कोई मेरे लिय अपना प्राण खोएगा वही उसे बचाएगा। - लूका ९:२३-२४

बाइबल पाठ: २ कुरिन्थियों ४:८-१८
2Co 4:8  हम चारों ओर से क्‍लेश तो भोगते हैं, पर संकट में नहीं पड़ते; निरूपाय तो हैं, पर निराश नहीं होते। 
2Co 4:9  सताए तो जाते हैं, पर त्यागे नहीं जाते; गिराए तो जाते हैं, पर नाश नहीं होते। 
2Co 4:10  हम यीशु की मृत्यु को अपनी देह में हर समय लिये फिरते हैं; कि यीशु का जीवन भी हमारी देह में प्रगट हो। 
2Co 4:11 क्‍योंकि हम जीते जी सर्वदा यीशु के कारण मृत्यु के हाथ में सौंपे जाते हैं कि यीशु का जीवन भी हमारे मरणहार शरीर में प्रगट हो। 
2Co 4:12  सो मृत्यु तो हम पर प्रभाव डालती है और जीवन तुम पर। 
2Co 4:13  और इसलिये कि हम में वही विश्वास की आत्मा है, (जिस के विषय में लिखा है, कि मैं ने विश्वास किया, इसलिये मैं बोला) सो हम भी विश्वास करते हैं, इसी लिये बोलते हैं। 
2Co 4:14 क्‍योंकि हम जानते हैं, जिस ने प्रभु यीशु को जिलाया, वही हमें भी यीशु में भागी जानकर जिलाएगा, और तुम्हारे साथ अपने साम्हने उपस्थित करेगा। 
2Co 4:15 क्‍योंकि सब वस्‍तुएं तुम्हारे लिये हैं, ताकि अनुग्रह बहुतों के द्वारा अधिक होकर परमेश्वर की महिमा के लिये धन्यवाद भी बढ़ाए।
2Co 4:16 इसलिये हम हियाव नहीं छोड़ते; यद्यपि हमारा बाहरी मनुष्यत्‍व नाश भी होता जाता है, तौभी हमारा भीतरी मनुष्यत्‍व दिन प्रतिदिन नया होता जाता है। 
2Co 4:17 क्‍योंकि हमारा पल भर का हल्का सा क्‍लेश हमारे लिये बहुत ही महत्‍वपूर्ण और अनन्‍त महिमा उत्‍पन्न करता जाता है। 
2Co 4:18 और हम तो देखी हुई वस्‍तुओं को नहीं परन्‍तु अनदेखी वस्‍तुओं को देखते रहते हैं, क्‍योंकि देखी हुई वस्‍तुएं थोड़े ही दिन की हैं, परन्‍तु अनदेखी वस्‍तुएं सदा बनी रहती हैं।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल ४०-४१ 
  • २ पतरस ३

शुक्रवार, 30 नवंबर 2012

किया; करेंगे


   कुछ अधिक पुरानी बात नहीं है, जब संसार भर में इसाई समाज में "WWJD - What Would Jesus Do"  अर्थात "यीशु ऐसे में क्या करते" का नारा बहुत प्रचलित हुआ। लोग यह नारा लिखे हुए कड़े पहने रहते थे, इस आशय से कि वह कड़ा और उस पर लिखा नारा उनके लिए एक स्मरण कराने का माध्यम होगा - जब वे कठिन परिस्थितियों में या किसी दुविधा में हों तो कोई भी निर्णय लेने से पहले विचार कर लें कि यदि प्रभु यीशु उस परिस्थित में होते तो क्या करते, और फिर उसी के अनुसार अपना निर्णय लें। जब हम अपने उद्धाकर्ता प्रभु को आदर और महिमा देने वाला जीवन जीने के प्रयत्नशील रहते हैं तो हमारे लिए यह भी आवश्यक है कि हम अपने निर्णयों और प्रवृतियों को अपने प्रभु द्वारा दिए गए उदाहरणों के अनुकूल रखें।

   हाल ही में मैं एक चर्च में था जहां मुझे इस नारे से मिलता-जुलता किंतु कुछ भिन्न संदेश लिखा मिला। वहां लिखा था "WDJD - What Did Jesus Do?" अर्थात, "यीशु ने क्या करके दिया है?" यह वास्तव में अधिक महत्वपुर्ण प्रश्न है, क्योंकि इस प्रश्न के उत्तर के प्रति गंभीरता और समझदारी में ही हमारा भविष्य निहित है। अपने संसार के जीवन काल में जो कुछ प्रभु यीशु ने किया, उसमें से सबसे महत्वपुर्ण और उसके संसारमें आने का एकमात्र उद्देश्य वह है जिसके बारे में हम १ कुरिन्थियों १५:३-४ में लिखा पाते हैं: "...पवित्र शास्‍त्र के वचन के अनुसार यीशु मसीह हमारे पापों के लिये मर गया। और गाड़ा गया, और पवित्र शास्‍त्र के अनुसार तीसरे दिन जी भी उठा।"

   प्रभु यीशु ने क्या करके दिया है? उसने हमारे पापों और अपराधों का दोष अपने ऊपर लेकर हमारे स्थान पर उनका दण्ड सहा; वह हमारे स्थान पर मारा गया और फिर मुर्दों में से जी उठा; वह हमारे लिए पाप और मृत्यु पर जयवन्त हुआ जिससे अब हम जो उस पर विश्वास करते और स्वेच्छा से उसे अपना जीवन समर्पित करते हैं उसकी धार्मिकता और उसके जीवन के भागी हो जाएं। सच्चाई यही है कि जब तक प्रभु यीशु ने हमारे लिए जो करके दे दिया है हम उसे स्वीकार ना कर लें,  तब तक हम कभी वह समझ नहीं पाएंगे जो वह हमारे जीवनों में कर सकता है और करेगा।

   हम सब के जीवनों में "WWJD" तथा "WDJD" दोनो ही महत्वपूर्ण हैं, किंतु सबसे महत्वपूर्ण है प्रभु यीशु के प्रति हमारा रवैया और उसके साथ हमारा संबंध। प्रभु के प्रति सही रवैये और उससे सही संबंध के बाद ही हम जो प्रभु ने किया और जो वह करेगा उसके यथार्त एवं महत्व को वास्तव में जान सकते हैं। - बिल क्राउडर


हमारा उद्धार हमारे द्वारा करे गए कार्यों से नहीं वरन प्रभु यीशु द्वारा करे गए कार्य से है।

इसी कारण मैं ने सब से पहिले तुम्हें वही बात पहुंचा दी, जो मुझे पहुंची थी, कि पवित्र शास्‍त्र के वचन के अनुसार यीशु मसीह हमारे पापों के लिये मर गया। और गाड़ा गया, और पवित्र शास्‍त्र के अनुसार तीसरे दिन जी भी उठा। - १ कुरिन्थियों १५:३-४

बाइबल पाठ: १ कुरिन्थियों १५:१-११
1Co 15:1  हे भाइयों, मैं तुम्हें वही सुसमाचार बताता हूं जो पहिले सुना चुका हूं, जिसे तुम ने अंगीकार भी किया था और जिस में तुम स्थिर भी हो। 
1Co 15:2  उसी के द्वारा तुम्हारा उद्धार भी होता है, यदि उस सुसमाचार को जो मैं ने तुम्हें सुनाया था स्मरण रखते हो; नहीं तो तुम्हारा विश्वास करना व्यर्थ हुआ। 
1Co 15:3 इसी कारण मैं ने सब से पहिले तुम्हें वही बात पहुंचा दी, जो मुझे पहुंची थी, कि पवित्र शास्‍त्र के वचन के अनुसार यीशु मसीह हमारे पापों के लिये मर गया। 
1Co 15:4 और गाड़ा गया, और पवित्र शास्‍त्र के अनुसार तीसरे दिन जी भी उठा। 
1Co 15:5  और कैफा को तब बारहों को दिखलाई दिया। 
1Co 15:6  फिर पांच सौ से अधिक भाइयों को एक साथ दिखाई दिया, जिन में से बहुतेरे अब तक वर्तमान हैं पर कितने सो गए। 
1Co 15:7  फिर याकूब को दिखाई दिया तब सब प्रेरितों को दिखाई दिया। 
1Co 15:8  और सब के बाद मुझ को भी दिखाई दिया, जो मानो अधूरे दिनों का जन्मा हूं। 
1Co 15:9  क्‍योंकि मैं प्ररितों में सब से छोटा हूं, वरन प्ररित कहलाने के योग्य भी नहीं, क्‍योंकि मैं ने परमेश्वर की कलीसिया को सताया था। 
1Co 15:10 परन्‍तु मैं जो कुछ भी हूं, परमेश्वर के अनुग्रह से हूं: और उसका अनुग्रह जो मुझ पर हुआ, वह व्यर्थ नहीं हुआ परन्तु मैं ने उन सब से बढ़कर परिश्रम भी किया: तौभी यह मेरी ओर से नहीं हुआ परन्‍तु परमेश्वर के अनुग्रह से जो मुझ पर था। 
1Co 15:11  सो चाहे मैं हूं, चाहे वे हों, हम यही प्रचार करते हैं, और इसी पर तुम ने विश्वास भी किया।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल ३७-३९ 
  • २ पतरस २