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सोमवार, 4 फ़रवरी 2013

परिवर्तन


   मेरे मित्र टिम डेविस को अपने बचपन का वह समय याद है जब वह अपने माता-पिता के साथ ट्रिनिडैड में था, और इंग्लैंड की महारानी इलज़ाबेथ उस छोटे से स्थान पर आईं थीं। टिम भी अपने माता-पिता तथा उस भीड़ के साथ महारानी को देखने गया, और शेष भीड़ के साथ उस मार्ग के किनारे हाथ में झंडा लिए हुए वह भी खड़ा हुआ। जिस मार्ग से होकर महारानी को निकलना था उसे अच्छे से साफ करके खूब सजाया गया था। कुछ समय पश्चात महारानी की सवारी आई, पहले पैदल सैनिक, फिर घोड़ों पर सैनिकों का दस्ता, फिर महारानी की गाड़ी जिस में से महारानी इलज़ाबेथ अपने हाथ हिलाकर भीड़ के अभिवादन को स्वीकार कर रहीं थीं। महारानी और भीड़ एक दुसरे को देखकर मुस्कुरा रहे थे, भीड़ उत्साहित और प्रफुल्लित थी, किंतु भीड़ और महारानी का परस्पर कोई व्यक्तिगत परिचय या संबंध नहीं था। टिम और अन्य लोगों के देखते देखते राजसी सवारी का वह जलूस आगे बढ़ गया और फिर सब अपने अपने घरों और कार्यों को लौट गए। कुछ ही समय के बाद उस मार्ग से सारी सजावट हटा ली गई, मार्ग फिर से पहले के समान हो गया और कुछ समय पश्चात पता भी नहीं चलता था कि महारानी इसी मार्ग पर आईं थीं। टिम ने कहा, "वे राजसी अधिकारी आए और शहर के मार्गों से होकर चले गए; शहर में या लोगों में कोई स्थाई परिवर्तन नहीं आया।"

   हम मसीही विश्वासियों के लिए भी एक दिन वह था जब हमारे व्यक्तिगत निमंत्रण पर परमेश्वर का पुत्र तथा जगत का उद्धाकर्ता हमारे दिलों में आया। कुछ ने उसे अपने दिलों में बैठा लिया और उनके मनों को उसने अपने पवित्र आत्मा का मन्दिर बना लिया (१ कुरिन्थियों ६:१९), उनके मनों को स्वच्छ किया और अब भी करता रहता है, उनके जीवन बदल गए तथा यह सुधार दिन-प्रतिदिन ज़ारी रहता है। लेकिन अनेक ऐसे भी हैं जिन्होंने केवल उसे अपने अन्दर से होकर निकलने भर दिया है, अपने अन्दर रहने और कार्य करने का स्थान तथा अनुमति नहीं दी है; कुछ समय के लिए उनके जीवनों में कुछ भला परिवर्तन दिखाई देता है किंतु समय के साथ सब कुछ फिर से पहले जैसा हो जाता है। ये लोग इसी भ्रम में जीते हैं और संसार के सामने भी इस असत्य को रखते हैं कि वे मसीही विश्वासी हैं, और उनके जीवन मसीही विश्वासी होने का गलत उदहरण संसार के सामने प्रस्तुत करते हैं; जब कि वास्तविकता इस से विपरीत है। इस एक सच्चाई के अनेक अति महत्वपूर्ण आयाम हैं। यदि मसीह यीशु हमारे हृदय में विराजमान है और हमारा मन परमेश्वर की पवित्र आत्मा का मन्दिर है तो अवश्यंभावी है कि उसकी उपस्थिति हमारे जीवनों के अन्दर कुछ स्थायी परिवर्तन लाएगी जो स्वयं हमें तथा हमारे सम्पर्क में आने वाले लोगों पर प्रगट होंगे तथा मसीह की महिमा के कारण ठहरेंगे। हमारी वार्तालाप की विधि विषय और प्रयुक्त शब्द, हमारा व्यवहार विशेषकर जब कोई जानकार हमें देखने वाला ना हो, लोगों के साथ हमारे संबंध और व्यवहार, हमारा अपनी ज़िम्मेवरियों एवं अपने अधिकारियों के प्रति रवैया, सांसारिक उपलब्धियों एवं धन-संपत्ति तथा उन के महत्व तथा उपयोग के प्रति हमारा रवैया, हमारे शत्रुओं के प्रति हमारी मनसा और हमारा व्यवहार इत्यादि; जीवन की हर छोटी बड़ी बात में यह परिवर्तन दिखाई देगा।

   यदि आप मसीही विश्वासी हैं तो अपने जीवन को जाँच के देखिए कि मसीह यीशु को अपने जीवन में आमंत्रित करने के बाद क्या आपके जीवन में स्थाई रूप से कुछ बदला है, और क्या यह परिवर्तन ज़ारी है? क्या आपके आस-पास के लोग और आपके प्रीय जन इस परिवर्तन को अनुभव करते हैं? यदि नहीं तो गंभीरता से विचार कीजिए और जांचिए कि कहीं ऐसा तो नहीं है कि आपने मसीह यीशु को हृदय में स्थान देने की बजाए उसे अपने अन्दर से होकर जाने भर का केवल समय और मार्ग भर दिया हो। आपके निमंत्रण पर वह आया और उसके साथ ही थोड़े समय का भला परिवर्तन भी आया; फिर ठहरने के स्थाई स्थान और आपके जीवन को स्वच्छ तथा परिवर्तित करने के कार्य की अनुमति के अभाव में उसे आगे बढ़ जाना पड़ा और आप उसे आगे विदा करके अपने जीवन में पहले जैसे ही रह गए?

   मसीह यीशु को आमंत्रित करके अपने मनों में उसे स्थाई स्थान दीजिए और वह आपके जीवन में स्थाई परिवर्तन ले आएगा। - जो स्टोवैल


यदि मसीह यीशु ने हमारे अन्दर स्थाई निवास पाया है तो संसार और सांसारिकता को हमारे अन्दर स्थान नहीं मिलेगा।

क्या तुम नहीं जानते, कि तुम्हारी देह पवित्रात्मा का मन्दिर है; जो तुम में बसा हुआ है और तुम्हें परमेश्वर की ओर से मिला है, और तुम अपने नहीं हो? - १ कुरिन्थियों ६:१९

बाइबल पाठ: १ कुरिन्थियों ६:१२-२०
1 Corinthians6:12 सब वस्तुएं मेरे लिये उचित तो हैं, परन्तु सब वस्तुएं लाभ की नहीं, सब वस्तुएं मेरे लिये उचित हैं, परन्तु मैं किसी बात के आधीन न हूंगा।
1 Corinthians6:13 भोजन पेट के लिये, और पेट भोजन के लिये है, परन्तु परमेश्वर इस को और उसको दोनों को नाश करेगा, परन्तु देह व्यभिचार के लिये नहीं, वरन प्रभु के लिये; और प्रभु देह के लिये है।
1 Corinthians6:14 और परमेश्वर ने अपनी सामर्थ से प्रभु को जिलाया, और हमें भी जिलाएगा।
1 Corinthians6:15 क्या तुम नहीं जानते, कि तुम्हारी देह मसीह के अंग हैं? सो क्या मैं मसीह के अंग ले कर उन्हें वेश्या के अंग बनाऊं? कदापि नहीं।
1 Corinthians6:16 क्या तुम नहीं जानते, कि जो कोई वेश्या से संगति करता है, वह उसके साथ एक तन हो जाता है? क्योंकि वह कहता है, कि वे दोनों एक तन होंगे।
1 Corinthians6:17 और जो प्रभु की संगति में रहता है, वह उसके साथ एक आत्मा हो जाता है।
1 Corinthians6:18 व्यभिचार से बचे रहो: जितने और पाप मनुष्य करता है, वे देह के बाहर हैं, परन्तु व्यभिचार करने वाला अपनी ही देह के विरुद्ध पाप करता है।
1 Corinthians6:19 क्या तुम नहीं जानते, कि तुम्हारी देह पवित्रात्मा का मन्दिर है; जो तुम में बसा हुआ है और तुम्हें परमेश्वर की ओर से मिला है, और तुम अपने नहीं हो?
1 Corinthians6:20 क्योंकि दाम देकर मोल लिये गए हो, इसलिये अपनी देह के द्वारा परमेश्वर की महिमा करो।

एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन ३४-३५ 
  • मत्ती २२:२३-४६


रविवार, 3 फ़रवरी 2013

सच्चा आदर


   सूज़न बॉयल नामक एक महिला ने अपना अधिकांश वयस्क जीवन अपनी बिल्ली तथा अपनी वृद्ध माँ की देखभाल और चर्च में गीत गाने में बिताया था। वह देखने में कोई महान गायक नहीं लगती थी। इसीलिए जब यह अधेड़ उम्र की साधारण सी दिखने वाली महिला एक संगीत प्रत्योगिता में भाग लेने के लिए गीत गाने खड़ी हुई तो उपस्थित श्रोताओं को हंसी आ गई। उन श्रोताओं के इस तिरिस्कारपूर्ण व्यवहार पर सूज़न ने प्रत्योगिता से अपने कदम नहीं खींचे; उपस्थित भीड़ पर ध्यान दिए बिना उसने गाया और बहुत अच्छा गाया और उन्हीं श्रोताओं ने उसे खड़े होकर अभिन्दन तथा आदर दिया।

   चर्च के प्रारंभिक दिनों की बात है, परमेश्वर का सेवक स्तिफनुस, मसीह यीशु में अपने विश्वास के कारण विरोधी भीड़ के सामने खड़ा किया गया और धर्म के अगुवों और अधिकारियों के सामने उस पर धर्म के विरुद्ध बोलने और परमेश्वर की निन्दा करने के झूठा दोषारोपण किया गया। प्रत्युत्तर में स्तिफनुस ने उन सब के सामने धर्म के नाम पर उन लोगों के पाखंड और दोगलेपन का वर्णन किया तथा परमेश्वर के वचन की सच्चाईयों को रखा जिससे उसके मसीह यीशु में विश्वास की पुष्टि होती थी। अपने प्रत्युत्तर के अन्त में उसने कहा: "देखो, मैं स्वर्ग को खुला हुआ, और मनुष्य के पुत्र को परमेश्वर के दाहिनी ओर खड़ा हुआ देखता हूं" (प्रेरितों ७:५६)। यह सुनकर क्रुद्ध भीड़ तथा धर्म के अगुवों और अधिकारियों ने उसे पत्थरवाह करके मार डाला, लेकिन स्वर्ग में जगत के उद्धाकर्ता और परमेश्वर के पुत्र ने अपने सिंहासन से खड़े होकर उसका स्वागत किया, उसे आदर दिया।

   अधिकांश मसीही विश्वासियों को इस प्रकार के घोर विरोध और बैर का सामना तो नहीं करना पड़ता, लेकिन हम सब मसीही विश्वासियों को प्रभु में स्थिर बने रहने की आवश्यकता है (फिलिप्पियों ४:१) क्योंकि अपने विश्वास के लिए हम कभी भी परखे जा सकते हैं। संसार के लोगों के दबाव तथा विरोध मसीह यीशु के लिए हमारी आवाज़ को शांत ना करने पाएं। मसीह यीशु में उद्धार और पापों की क्षमा के सुसमाचार को संसार के लोगों की भीड़ का अनुमोदन कम ही मिलता है, किंतु यह सुसमाचार का प्रचार ही हमें परमेश्वर से आदर दिलवाता है - और केवल यही आदर स्थायी और सच्चा है। - जेनिफर बेन्सन शुल्ट


यदि परमेश्वर की आज्ञाकारिता में और यीशु के नाम के लिए आपको विरोध का सामना करना पड़ रहा है तो यह इस बात का सूचक है कि आप सही मार्ग पर हैं।

देखो, मैं स्वर्ग को खुला हुआ, और मनुष्य के पुत्र को परमेश्वर के दाहिनी ओर खड़ा हुआ देखता हूं। - प्रेरितों ७:५६

बाइबल पाठ: प्रेरितों ६:८-१५; ७:५१-६०
Acts6:8 स्‍तिुफनुस अनुग्रह और सामर्थ में परिपूर्ण हो कर लोगों में बड़े बड़े अद्भुत काम और चिन्ह दिखाया करता था।
Acts6:9 तब उस अराधनालय में से जो लिबरतीनों की कहलाती थी, और कुरेनी और सिकन्‍दिरया और किलिकिया और एशीया के लोगों में से कई एक उठ कर स्‍तिुफनुस से वाद-विवाद करने लगे।
Acts6:10 परन्तु उस ज्ञान और उस आत्मा का जिस से वह बातें करता था, वे साम्हना न कर सके।
Acts6:11 इस पर उन्‍होंने कई लोगों को उभारा जो कहने लगे, कि हम ने इस को मूसा और परमेश्वर के विरोध में निन्‍दा की बातें कहते सुना है।
Acts6:12 और लोगों और प्राचीनों और शास्‍त्रियों को भड़काकर चढ़ आए और उसे पकड़कर महासभा में ले आए।
Acts6:13 और झूठे गवाह खड़े किए, जिन्हों ने कहा कि यह मनुष्य इस पवित्र स्थान और व्यवस्था के विरोध में बोलना नहीं छोड़ता।
Acts6:14 क्योंकि हम ने उसे यह कहते सुना है, कि यही यीशु नासरी इस जगह को ढ़ा देगा, और उन रीतों को बदल डालेगा जो मूसा ने हमें सौंपी हैं।
Acts6:15 तब सब लोगों ने जो सभा में बैठे थे, उस की ओर ताक कर उसका मुखड़ा स्वर्गदूत का सा देखा।
Acts7:51 जैसा तुम्हारे बाप दादे करते थे, वैसे ही तुम भी करते हो।
Acts7:52 भविष्यद्वक्ताओं में से किस को तुम्हारे बाप दादों ने नहीं सताया, और उन्होंने उस धर्मी के आगमन का पूर्वकाल से सन्‍देश देने वालों को मार डाला, और अब तुम भी उसके पकड़वाने वाले और मार डालने वाले हुए।
Acts7:53 तुम ने स्‍वर्गदूतों के द्वारा ठहराई हुई व्यवस्था तो पाई, परन्तु उसका पालन नहीं किया।
Acts7:54 ये बातें सुनकर वे जल गए और उस पर दांत पीसने लगे।
Acts7:55 परन्तु उसने पवित्र आत्मा से परिपूर्ण हो कर स्वर्ग की ओर देखा और परमेश्वर की महिमा को और यीशु को परमेश्वर की दाहिनी ओर खड़ा देखकर।
Acts7:56 कहा; देखों, मैं स्वर्ग को खुला हुआ, और मनुष्य के पुत्र को परमेश्वर के दाहिनी ओर खड़ा हुआ देखता हूं।
Acts7:57 तब उन्होंने बड़े शब्द से चिल्लाकर कान बन्‍द कर लिये, और एक चित्त हो कर उस पर झपटे।
Acts7:58 और उसे नगर के बाहर निकाल कर पत्थरवाह करने लगे, और गवाहों ने अपने कपड़े उतार रखे।
Acts7:59 और वे स्‍तिुफनुस को पत्थरवाह करते रहे, और वह यह कहकर प्रार्थना करता रहा; कि हे प्रभु यीशु, मेरी आत्मा को ग्रहण कर।
Acts7:60 फिर घुटने टेककर ऊंचे शब्द से पुकारा, हे प्रभु, यह पाप उन पर मत लगा, और यह कहकर सो गया: और शाऊल उसके बध में सहमत था।

एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन ३१-३३
  •  मत्ती २२:१-२२


शनिवार, 2 फ़रवरी 2013

प्रार्थना


   हम सभी का, जो कंप्यूटर पर कार्य करते हैं, यह अनुभव होगा कि थोड़े थोड़े समय बाद कंप्यूटर के कार्य करने की गति शिथिल होने लगती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि विभिन्न प्रोग्राम और दस्तावेज़ों पर कार्य करते करते जब हम अपने कार्य को ’सेव’ करते हैं तो कंप्यूटर उस कार्यांश को हार्ड-डिस्क पर संजो देता है। धीरे धीरे कार्यांश के ये टुकड़े हार्ड-डिस्क पर कई जगह छित्रे हुए संजोए जाते हैं और इनपर कार्य करने के लिए पहले कंप्यूटर को इन्हें भिन्न स्थनों से खोज कर एकत्रित करना होता है और फिर आगे के कार्य के लिए प्रस्तुत करना होता है जिस में समय अधिक लगता है। इस समस्या के समाधान के लिए लोग एक विशेष प्रोग्राम प्रयोग करते हैं जो कंप्यूटर की हार्ड-डिस्क को ’डीफ्रैगमैन्ट’ करता है, अर्थात उन छित्रे हुए कार्यांशों को जमा करके सही क्रम में एकीकृत करता है जिससे उन्हें पुनः प्रयोग के लिए समय व्यय ना हो। इससे कंप्यूटर की कार्य गति फिर से ठीक हो जाती है।

   कंप्यूटर के समान, हमारा जीवन भी ऐसे ही टुकड़ों में बंट जाता है और हमारी जीवन गति शिथिल होने लगती है, कार्य अस्त-व्यस्त होने लगते हैं और जीवन में खींचातानी बढ़ने लगती है। जब हम किसी बात पर ध्यान लगाने का प्रयास कर रहे होते हैं तो कोई और परिस्थिति हमारी भावनाओं पर प्रहार कर रही होती है। हर ओर से कोई न कोई माँग हमारा ध्यान और कार्य चाहती है। हम प्रयास करते हैं कि सभी माँगों को पूरा कर सकें किंतु दिमाग़ केंद्रित नहीं रह पाता, मन शांत नहीं हो पाता और शरीर साथ नहीं देता। जीवन के दबावों और मांगों के आगे हम अपने आपको थका और अयोग्य अनुभव करने लगते हैं।

   हाल ही में मैंने एक सभा में भाग लिया जिसमें बांटे गए पर्चों में से एक में एक प्रार्थना भी थी जो मेरी दशा को बयान कर रही थी। प्रार्थना में लिखा था: "प्रभु मैं बिखरा हुआ, अशांत और अधूरे मन का हो गया हूँ।"

   राजा दाऊद भी ऐसे अनुभव से होकर निकला था (भजन ५५:२)। उसने प्रार्थना में अपनी हालत परमेश्वर के सामने रखी; प्रातः, दोपहर, संध्या वह परमेश्वर के आगे प्रार्थना में लगा रहा। उसे निश्चय था कि परमेश्वर उसकी प्रार्थना को सुनेगा और उत्तर देगा (पद १७)। परमेश्वर ने ऐसा ही किया और दाऊद कहने पाया: "जो लड़ाई मेरे विरुद्ध मची थी उस से उसने मुझे कुशल के साथ बचा लिया है" (भजन ५५:१८); और इस बात से प्रेर्णा लेकर उसने आगे कहा: "अपना बोझ यहोवा पर डाल दे वह तुझे सम्भालेगा; वह धर्मी को कभी टलने न देगा" (भजन ५५:२२)।

   प्रार्थना हमारे बिखरे हुए जीवन को एकीकृत करके संजो देती है। जब हम अपने बोझों को परमेश्वर पर डाल देते हैं और उसके निर्देषों तथा मार्गों पर चलने का निर्णय ले लेते हैं तो परमेश्वर हमें वह भी बताता है जो हमें करना है, और वह भी बताता है जो वह करेगा। परमेश्वर पर भरोसा रखें और प्रार्थना की सामर्थ को समझें।  - जूली एकैरमैन लिंक


जब सांसारिक व्यस्तता के कारण प्रार्थना का समय सबसे कम होता है, उसी दशा में हमें प्रार्थना की सामर्थ की सबसे अधिक आवश्यकता होती है।

अपना बोझ यहोवा पर डाल दे वह तुझे सम्भालेगा; वह धर्मी को कभी टलने न देगा। - भजन ५५:२२

बाइबल पाठ: भजन ५५:१-८
Psalms55:1 हे परमेश्वर, मेरी प्रार्थना की ओर कान लगा; और मेरी गिड़गिड़ाहट से मुंह न मोड़!
Psalms55:2 मेरी ओर ध्यान देकर, मुझे उत्तर दे; मैं चिन्ता के मारे छटपटाता हूं और व्याकुल रहता हूं।
Psalms55:3 क्योंकि शत्रु कोलाहल और दुष्ट उपद्रव कर रहें हैं; वे मुझ पर दोषारोपण करते हैं, और क्रोध में आकर मुझे सताते हैं।
Psalms55:4 मेरा मन भीतर ही भीतर संकट में है, और मृत्यु का भय मुझ में समा गया है।
Psalms55:5 भय और कंपकपी ने मुझे पकड़ लिया है, और भय के कारण मेरे रोंए रोंए खड़े हो गए हैं।
Psalms55:6 और मैं ने कहा, भला होता कि मेरे कबूतर के से पंख होते तो मैं उड़ जाता और विश्राम पाता!
Psalms55:7 देखो, फिर तो मैं उड़ते उड़ते दूर निकल जाता और जंगल में बसेरा लेता,
Psalms55:8 मैं प्रचण्ड बयार और आन्धी के झोंके से बचकर किसी शरण स्थान में भाग जाता।

एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन २९-३० 
  • मत्ती २१:२३-४६

शुक्रवार, 1 फ़रवरी 2013

धोखा और अनुग्रह


   धोखे और छल-कपट की सच्ची घटनाएं कहानीयों से भी अधिक विस्मयकारी हो सकती हैं। एक समाचार पत्र में छपे समाचार के अनुसार एक महिला ने खरीददारी के बाद दुकानदार को १५०० डॉलर चुकाने के लिए १०लाख डॉलर का नकली नोट थमाया। पुलिस द्वारा पकड़े जाने और पूछ-ताछ करने पर उस महिला ने कहा कि वह अपने पूर्व-पति के द्वारा बहकायी गई, जो कि स्थान स्थान के सिक्के और नोट जमा करने का शौक रखता था और उसी ने उसे वह १०लाख डॉलर का नोट दिया था। यह भी उस महिला का एक बहाना ही था, क्योंकि यह मानना असंभव है कि जब सरकार ने इतनी बड़ी रकम का कोई नोट कभी ज़ारी ही नहीं किया तो उस महिला ने उस नोट को असली कैसे मान लिया, और १५०० की खरीददारी के लिए इतनी बड़ी रकम का नोट क्यों दिया?

   यह एक अच्छा उदाहरण है कि लोग कैसे अपने अन्दर झूठ और धोखे को छुपाए रहते हैं और मौका पड़ने पर दूसरों को भी उसका शिकार बनाना चाहते हैं। परमेश्वर ने अपने वचन बाइबल में यर्मियाह भविष्यद्वक्ता के द्वारा लोगों को चिताया: "मन तो सब वस्तुओं से अधिक धोखा देने वाला होता है, उस में असाध्य रोग लगा है; उसका भेद कौन समझ सकता है?" (यर्मियाह १७:९)। यह चेतावनी कुछ लोगों के लिए नहीं थी, मानो केवल कुछ को ही धोखेबाज़ी की आदत हो; यह बात सभी के लिए थी - हर एक का मन इस असाध्य रोग से ग्रसित है और अपने अपने वक्त तथा अवसर के अनुसार सब के मन का यह रोग प्रकट होता रहता है। इसीलिए यर्मियाह आगे कहता है कि परमेश्वर लोगों के बाहरी स्वरूप एवं व्यवहार को नहीं वरन हर एक के मन को परखता और जांचता है और मन की दशा के अनुसार प्रतिफल देता है।

   परमेश्वर का प्रेम और अनुग्रह इसी में है कि वह हमारे प्रति धैर्य रखता है, सहिषुण रहता है और हमारे मन की दशा के अनुसार यह प्रतिफल वह हमें तुरंत नहीं दे देता वरन हमें पश्चाताप करने और क्षमा मांगने का अवसर देता रहता है, क्योंकि समस्त संसार के लिए पापों की क्षमा और उद्धार का मार्ग उसने अपने पुत्र प्रभु यीशु के क्रूस पर बलिदान के द्वारा दे दिया है। वह संसार के हर एक जन के सामने किसी न किसी रूप में बार बार यह पश्चाताप और क्षमा का अवसर रखता है जिससे वे अपने पापों में बने रहकर उसके न्याय का सामना ना करने पाएं वरन उसके अनुग्रह का लाभ उठाकर अनन्त आशीष के जीवन को पा लें। उसके इस अनुग्रह को स्वीकार करना या अन्देखा करना, यह प्रत्येक व्यक्ति का अपना निर्णय है।

   अपने मन पर नहीं परमेश्वर के अनुग्रह पर विश्वास करें; मन तो धोखेबाज़ है, केवल परमेश्वर ही भला और विश्वासयोग्य है, वह कभी आपको हानि में नहीं पड़ने देगा। - मार्ट डी हॉन


धोखे और विनाशकारी प्रवृतियों से भरे संसार में केवल भले और विश्वासयोग्य परमेश्वर पर विश्वास और उसकी आज्ञाकारिता ही सुरक्षित रहने का एकमात्र मार्ग है।

मन तो सब वस्तुओं से अधिक धोखा देने वाला होता है, उस में असाध्य रोग लगा है; उसका भेद कौन समझ सकता है? - यर्मियाह १७:९

बाइबल पाठ: यर्मियाह १७:५-११
Jeremiah17:5 यहोवा यों कहता है, श्रापित है वह पुरुष जो मनुष्य पर भरोसा रखता है, और उसका सहारा लेता है, जिसका मन यहोवा से भटक जाता है।
Jeremiah17:6 वह निर्जल देश के अधमूए पेड़ के समान होगा और कभी भलाई न देखेगा। वह निर्जल और निर्जन तथा लोनछाई भूमि पर बसेगा।
Jeremiah17:7 धन्य है वह पुरुष जो यहोवा पर भरोसा रखता है, जिसने परमेश्वर को अपना आधार माना हो।
Jeremiah17:8 वह उस वृक्ष के समान होगा जो नदी के तीर पर लगा हो और उसकी जड़ जल के पास फैली हो; जब घाम होगा तब उसको न लगेगा, उसके पत्ते हरे रहेंगे, और सूखे वर्ष में भी उनके विषय में कुछ चिन्ता न होगी, क्योंकि वह तब भी फलता रहेगा।
Jeremiah17:9 मन तो सब वस्तुओं से अधिक धोखा देने वाला होता है, उस में असाध्य रोग लगा है; उसका भेद कौन समझ सकता है?
Jeremiah17:10 मैं यहोवा मन की खोजता और हृदय को जांचता हूँ ताकि प्रत्येक जन को उसकी चाल-चलन के अनुसार अर्थात उसके कामों का फल दूं।
Jeremiah17:11 जो अन्याय से धन बटोरता है वह उस तीतर के समान होता है जो दूसरी चिडिय़ा के दिए हुए अंडों को सेती है, उसकी आधी आयु में ही वह उस धन को छोड़ जाता है, और अन्त में वह मूढ़ ही ठहरता है।

एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन २७-२८ 
  • मत्ती २१:१-२२

गुरुवार, 31 जनवरी 2013

अनुग्रह


   एशिया के एक बड़े और व्यस्त शहर में मुझे सड़क के किनारों और पटरियों को लोगों से भरे हुए देखकर अचरज हुआ। वहाँ भरी हुई भीड़ के कारण बिलकुल भी पाँव रखने का भी स्थान प्रतीत नहीं हो रहा था परन्तु फिर भी सब जल्दी में चलते हुए, एक-दूसरे से बेख़बर और अपनी ही किसी न किसी बात में व्यस्त दिख रहे थे।

   उसी भीड़ में मुझे एक धीमी और दिल छू लेने वाली बाँसुरी की आवाज़ सुनाई दी। कोई था जो वहाँ पर सुप्रसिद्ध आराधाना गीत "Amazing Grace" (अद्भुत अनुग्रह) बजा रहा था। वह भीड़ उस बजाने वाले और उसके संगीत, दोनो ही से बेपरवाह थी किंतु वह बजाए जा रहा था। वह परमेश्वर के अद्भुत प्रेम का एक संगीतमय संदेश उन सब के लिए दे रहा था जो या तो उस गीत को जानते थे और उसकी धुन सुनकर गीत के शब्दों को स्मरण करते और उन पर मनन करते, या जो उस धुन से आकर्षित होकर और जानकारी लेना चाहते।

   वह धुन भीड़ के लिए परमेश्वर के प्रेम पर ध्यान लगाने और जगत के उद्धारकर्ता के पास आने का निमंत्रण था - जिसके सुनने के कान हों वह सुन ले (मत्ती १३:९)। जैसा सुसमाचार के साथ सदा होता आया है, सुसमाचार सुनने वालों में से कुछ लोग उस पर विश्वास करके मसीही विश्वास के संकरे मार्ग पर चलने का निर्णय ले लेते हैं; शेष परमेश्वर के अनुग्रह और प्रेम के उस निमंत्रण को अन्देखा और अस्वीकार करके अपने उसी सरल और चौड़े मार्ग पर ही बने रहते हैं जो अन्ततः अनन्त विनाश को ले जाता है। प्रभु यीशु ने सचेत किया है: "सकेत फाटक से प्रवेश करो, क्योंकि चौड़ा है वह फाटक और चाकल है वह मार्ग जो विनाश को पहुंचाता है; और बहुतेरे हैं जो उस से प्रवेश करते हैं" (मत्ती ७:१३)।

   परमेश्वर ने अपने पुत्र प्रभु यीशु मसीह को संसार में इसीलिए भेजा और क्रूस पर बलिदान होने दिया ताकि सारे संसार को उद्धार और परमेश्वर के राज्य में प्रवेश का मार्ग मिल जाए "क्योंकि परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम रखा कि उसने अपना एकलौता पुत्र दे दिया, ताकि जो कोई उस पर विश्वास करे, वह नाश न हो, परन्तु अनन्त जीवन पाए" (यूहन्ना ३:१६)। मार्ग तो परमेश्वर ने सब के लिए खोल दिया है, परन्तु उस मार्ग पर चलना हर व्यक्ति का अपना निर्णय है। अब जो कोई सच्चे मन और सहज विश्वास से मसीह यीशु को अपना उद्धारकर्ता स्वीकार करता है और अपने पापों से पश्चाताप करता है वह परमेश्वर के राज्य में प्रवेश और अनन्त आशीष का जीवन पाता है। परमेश्वर का महान अनुग्रह यही है कि हमारे जीवन की अन्तिम सांस तक वह हमसे हमारे पापों के अनुसार नहीं वरन अपने प्रेम में क्षमा और बहाली का व्यवहार करने को तैयार रहता है। जिसने इस जीवन का यह अवसर गवाँ दिया, उसे उस जीवन में फिर परमेश्वर के प्रेम का नहीं उसके न्याय का सामना करना होगा।

   परमेश्वर के इस अनुग्रह को अपने जीवन में व्यर्थ ना जाने दें, आज ही अपना मार्ग चुन लें क्योंकि कल क्या होगा यह किसी को पता नहीं है। - बिल क्राउडर


प्रभु यीशु को ग्रहण करना अर्थात उद्धार को प्राप्त करना।

क्योंकि सकेत है वह फाटक और सकरा है वह मार्ग जो जीवन को पहुंचाता है, और थोड़े हैं जो उसे पाते हैं। - मत्ती ७:१४

बाइबल पाठ: मत्ती ७:१३-२३
Matthew7:13 सकेत फाटक से प्रवेश करो, क्योंकि चौड़ा है वह फाटक और चाकल है वह मार्ग जो विनाश को पहुंचाता है; और बहुतेरे हैं जो उस से प्रवेश करते हैं।
Matthew7:14 क्योंकि सकेत है वह फाटक और सकरा है वह मार्ग जो जीवन को पहुंचाता है, और थोड़े हैं जो उसे पाते हैं।
Matthew7:15 झूठे भविष्यद्वक्ताओं से सावधान रहो, जो भेड़ों के भेष में तुम्हारे पास आते हैं, परन्तु अन्दर से फाड़ने वाले भेडिए हैं।
Matthew7:16 उन के फलों से तुम उन्हें पहचान लोग क्या झाडिय़ों से अंगूर, वा ऊंटकटारों से अंजीर तोड़ते हैं?
Matthew7:17 इसी प्रकार हर एक अच्छा पेड़ अच्छा फल लाता है और निकम्मा पेड़ बुरा फल लाता है।
Matthew7:18 अच्छा पेड़ बुरा फल नहीं ला सकता, और न निकम्मा पेड़ अच्छा फल ला सकता है।
Matthew7:19 जो जो पेड़ अच्छा फल नहीं लाता, वह काटा और आग में डाला जाता है।
Matthew7:20 सो उन के फलों से तुम उन्हें पहचान लोगे।
Matthew7:21 जो मुझ से, हे प्रभु, हे प्रभु कहता है, उन में से हर एक स्वर्ग के राज्य में प्रवेश न करेगा, परन्तु वही जो मेरे स्‍वर्गीय पिता की इच्छा पर चलता है।
Matthew7:22 उस दिन बहुतेरे मुझ से कहेंगे; हे प्रभु, हे प्रभु, क्या हम ने तेरे नाम से भविष्यद्वाणी नहीं की, और तेरे नाम से दुष्टात्माओं को नहीं निकाला, और तेरे नाम से बहुत अचम्भे के काम नहीं किए?
Matthew7:23 तब मैं उन से खुलकर कह दूंगा कि मैं ने तुम को कभी नहीं जाना, हे कुकर्म करने वालों, मेरे पास से चले जाओ।

एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन २५-२६ 
  • मत्ती २०:१७-३४

बुधवार, 30 जनवरी 2013

प्रत्यक्ष


   लड़कियों की सॉफ्टबॉल खेल स्पर्धा थी। खेल के अम्पायर ने लड़कियों के पीछे अपना स्थान लिया, खेल आरंभ हुआ और थोड़ी देर में पीछे से कुछ आवाज़ें आनी शुरू हो गईं, फिर थोड़ी ही समय बाद एक खिलाड़ी कि माँ ने कहना आरंभ कर दिया "हमें नया अम्पायर चहिए! हमें नया अम्पायर चहिए!" उस माँ के आलाप के पीछे-पीछे कुछ अन्य माताओं ने भी यही दोहराना आरम्भ कर दिया। अम्पायर मुस्कुराया, पीछे की भीड़ की ओर मुड़ा और ऊँची आवाज़ में कहना आरंभ कर दिया "हमें नए अभिभावक चाहिएं! हमें नए अभिभावक चाहिएं!" अभिभावकों का शोर यह सुनते ही शाँत हो गया।

   माता-पिता के लिए यह बहुत अनिवार्य है कि वे कैसा उदाहरण अपने बच्चों के समक्ष रखते हैं, क्योंकि बच्चे उनकी हर बात देखते हैं और उससे सीखते हैं। परमेश्वर का वचन बाइबल मसीही विश्वासी माता-पिता के लिए कुछ निर्देष देती है जिससे वे अपने बच्चों में अच्छी आदतें और आचरण बचपन से ही डाल सकें:
  • बच्चों के लिए और बच्चों के साथ प्रार्थना करें - जिससे वे परमेश्वर से बात करना सीख सकें, "प्रार्थना में लगे रहो, और धन्यवाद के साथ उस में जागृत रहो" (कुलुस्सियों ४:२)।

  • उन्हें बाइबल से सिखाएं और सुनाएं - जिससे वे परमेश्वर के वचन की सच्चाई को सीख सकें, "और तू इन्हें अपने बाल-बच्चों को समझाकर सिखाया करना, और घर में बैठे, मार्ग पर चलते, लेटते, उठते, इनकी चर्चा किया करना" (व्यवस्थाविवरण ६:७)।

  • उन्हें प्रभु यीशु मसीह के बारे में सिखाएं - जिससे वे बचपन से ही जगत के उद्धारकर्ता पर विश्वास करना सीख सकें, "यीशु ने उसको उत्तर दिया; कि मैं तुझ से सच सच कहता हूं, यदि कोई नये सिरे से न जन्मे तो परमेश्वर का राज्य देख नहीं सकता" (यूहन्ना ३:३)।


   बच्चों के सामने एक अच्छा उदाहरण रखने का सर्वोत्तम मार्ग है अपने विश्वास को उनके प्रत्यक्ष जी कर दिखाना। जो वे प्रत्येक्ष देखेंगे, उसी पर विश्वास करेंगे और उसे ही अपनाएंगे। यह बहुत महत्वपूर्ण है कि आपके बिना कुछ बोले ही आपके जीवन आपके बच्चों को क्या सिखा रहे हैं। जो वे आज सीखेंगे उसे कल करेंगे। - सिंडी हैस कैसपर


बच्चों को अपने अभिभावकों के गुणों विरासत में चाहे ना भी मिलें, परन्तु बच्चे अपने अभिभावकों के मूल्यों और आदर्शों को सहजता से अपना लेते हैं।

लड़के को शिक्षा उसी मार्ग की दे जिस में उसको चलना चाहिये, और वह बुढ़ापे में भी उस से न हटेगा। - नीतिवचन २२:६

बाइबल पाठ: व्यवस्थाविवरण ११:१८-२१
Deuteronomy11:18 इसलिये तुम मेरे ये वचन अपने अपने मन और प्राण में धारण किए रहना, और चिन्हानी के लिये अपने हाथों पर बान्धना, और वे तुम्हारी आंखों के मध्य में टीके का काम दें।
Deuteronomy11:19 और तुम घर में बैठे, मार्ग पर चलते, लेटते-उठते इनकी चर्चा कर के अपने लड़के-बालों को सिखाया करना।
Deuteronomy11:20 और इन्हें अपने अपने घर के चौखट के बाजुओं और अपने फाटकों के ऊपर लिखना;
Deuteronomy11:21 इसलिये कि जिस देश के विषय में यहोवा ने तेरे पूर्वजों से शपथ खाकर कहा था, कि मैं उसे तुम्हें दूंगा, उस में तुम्हारे और तुम्हारे लड़के-बालों की दीर्घायु हो, और जब तक पृथ्वी के ऊपर का आकाश बना रहे तब तक वे भी बने रहें।

एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन २३-२४ 
  • मत्ती २०:१-१६

मंगलवार, 29 जनवरी 2013

निष्कर्ष


   इन्टरनैट पर एक ऑन्लाइन पत्रिका, ’स्मिथ मैगज़ीन’ ने, जो सदस्यों द्वारा आपस में कथा-कहानी बांटने के द्वारा आनन्द भाव फैलाने के लिए है, अपने पाठकों के सामने एक रोचक चुनौती रखी - केवल अंग्रज़ी भाषा के छः शब्द प्रयोग करके अपने जीवन को बयान करें। हज़ारों लोगों ने प्रत्युत्तर में अपनी जीवन समीक्षाएं भेजीं, जिनमें आनन्द-विनोद भी था जैसे "प्यारी पत्नी, अच्छे बच्चे - मैं धनवान" और दुखी मन भी थे, जैसे "साठ का हूँ; अभी तक अभिभावकों को क्षमा नहीं कर पाया हूँ"।

   मैं कलपना करने लगा कि परमेश्वर के वचन में दी गई जीवनी के आधार पर यदि राजा सुलेमान को अपने जीवन को ऐसे ही संक्षेप में कहना होता तो वह क्या कहता? संभवतः अपनी जवानी के दिनों में वह कहता, "परमेश्वर ने मुझे बेहिसाब धन और बुद्धिमता प्रदान की है" (१ राजा १०:२३); और अपने जीवन के अन्त की ओर आकर कहता, "मैंने जैसा प्रचार किया था, काश वैसा ही आचरण भी किया होता।"

   राजा सुलेमान का शासन काल इस्त्राएल के इतिहास में शांति और समृद्धि का समय था। सुलेमान, जिसने लड़कपन में ही परमेश्वर के दर्शन, आशीष और सामर्थ के साथ अपना राज्य आरंभ किया था, उम्र बढ़ने के साथ अपनी समृद्धि में परमेश्वर से दूर हो गया क्योंकि उसने बहुत सी परदेशी स्त्रियों के साथ ब्याह रचा लिए थे और उन स्त्रियों ने उसे अपने देवी-देवताओं की उपासना में उलझा लिया, सच्चे परमेश्वर से विमुख कर दिया; और एक आदर्ष जीवन नष्ट हो गया तथा उससे परमेश्वर अप्रसन्न हो गया, और राजा सुलेमान अपनी आशीषें गवां बैठा। सुलेमान ने अपने अनुभवों के आधार पर लिखी सभोपदेशक पुस्तक में अनेक बार ’व्यर्थ’ शब्द का प्रयोग किया है। यह सांसारिकता के जीवन, सांसारिक उपलब्धियों, ज्ञान, वासना और शारीरक संतुष्टि से अन्ततः कुछ भी चिरस्थायी और शांतिप्रद प्राप्त ना हो पाने के कारण जीवन से उसके मोह-भंग को दिखाता है। हर प्रकार के सांसारिक सुख-विलास से आनन्द पाने का प्रयास कर के देख लेने बाद सुलेमान का अन्तिम निष्कर्ष वही था जो आरंभ में ही उससे परमेश्वर ने कह दिया था - परमेश्वर कि आज्ञाकारिता में बने रहना।

   इस बुद्धिमान राजा ने, जिसके पास सब परमेश्वर की आशीषस्वरूप कुछ था और जिसने अपनी अनाज्ञाकारिता द्वारा सब कुछ गंवा दिया, उसी ने अपने सभी अनुभवों पर गहराई से चिंतन कर के अपनी सभोपदेशक की पुस्तक का अन्त इन शब्दों से किया: "सब कुछ सुना गया; अन्त की बात यह है कि परमेश्वर का भय मान और उसकी आज्ञाओं का पालन कर; क्योंकि मनुष्य का सम्पूर्ण कर्त्तव्य यही है। क्योंकि परमेश्वर सब कामों और सब गुप्त बातों का, चाहे वे भली हों या बुरी, न्याय करेगा" (सभोपदेशक १२:१३-१४)।

   सुलेमान राजा द्वारा अपने जीवन के अनुभवों के आधार पर दिया गया यह निष्कर्ष हम सब के लिए एक गंभीर चेतावनी भी है और मार्गदर्शक भी। किसके जीवन का अन्त कब हो जाएगा, कोई नहीं जानता। अन्त कभी भी हो, किंतु विचार करने की बात यह है कि क्या हम परमेश्वर को अपने जीवनों का हिसाब देने के लिए वास्तव में हर समय तैयार हैं? जो उसकी आज्ञाकारिता में जीवन व्यतीत करते हैं वे उसे हिसाब देने के लिए सदा तैयार भी रहते हैं। - डेविड मैक्कैसलैंड


परमेश्वर की आज्ञाकारिता ही परमेश्वर की आशीषों की कुंजी है।

सब कुछ सुना गया; अन्त की बात यह है कि परमेश्वर का भय मान और उसकी आज्ञाओं का पालन कर; क्योंकि मनुष्य का सम्पूर्ण कर्त्तव्य यही है। - सभोपदेशक १२:१३

बाइबल पाठ: १ राजा ११:१-१०
1 Kings11:1 परन्तु राजा सुलैमान फ़िरौन की बेटी, और बहुतेरी और पराये स्त्रियों से, जो मोआबी, अम्मोनी, एदोमी, सीदोनी, और हित्ती थीं, प्रीति करने लगा।
1 Kings11:2 वे उन जातियों की थीं, जिनके विषय में यहोवा ने इस्राएलियों से कहा था, कि तुम उनके मध्य में न जाना, और न वे तुम्हारे मध्य में आने पाएं, वे तुम्हारा मन अपने देवताओं की ओर नि:सन्देह फेरेंगी; उन्हीं की प्रीति में सुलैमान लिप्त हो गया।
1 Kings11:3 और उसके सात सौ रानियां, और तीन सौ रखेलियां हो गई थीं और उसकी इन स्त्रियों ने उसका मन बहका दिया।
1 Kings11:4 सो जब सुलैमान बूढ़ा हुआ, तब उसकी स्त्रियों ने उसका मन पराये देवताओं की ओर बहका दिया, और उसका मन अपने पिता दाऊद की नाईं अपने परमेश्वर यहोवा पर पूरी रीति से लगा न रहा।
1 Kings11:5 सुलैमान तो सीदोनियों की अशतोरेत नाम देवी, और अम्मोनियों के मिल्कोम नाम घृणित देवता के पीछे चला।
1 Kings11:6 और सुलैमान ने वह किया जो यहोवा की दृष्टि में बुरा है, और यहोवा के पीछे अपने पिता दाऊद की नाईं पूरी रीति से न चला।
1 Kings11:7 उन दिनों सुलैमान ने यरूशलेम के साम्हने के पहाड़ पर मोआबियों के कमोश नाम घृणित देवता के लिये और अम्मोनियों के मोलेक नाम घृणित देवता के लिये एक एक ऊंचा स्थान बनाया।
1 Kings11:8 और अपनी सब पराये स्त्रियों के लिये भी जो अपने अपने देवताओं को धूप जलातीं और बलिदान करती थीं, उसने ऐसा ही किया।
1 Kings11:9 तब यहोवा ने सुलैमान पर क्रोध किया, क्योंकि उसका मन इस्राएल के परमेश्वर यहोवा से फिर गया था जिसने दो बार उसको दर्शन दिया था।
1 Kings11:10 और उसने इसी बात के विषय में आज्ञा दी थी, कि पराये देवताओं के पीछे न हो लेना, तौभी उसने यहोवा की आज्ञा न मानी।

एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन २१-२२ 
  • मत्ती १९