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गुरुवार, 7 फ़रवरी 2013

रक्षक स्वर्गदूत


   जब हमारी नातिन जूलिया एक छोटी बच्ची थी तो हम उसे अपने साथ पहाड़ों की एक यात्रा पर लेकर गए। घुमावदार पहाड़ी मार्गों से होकर निकलने, गहरी घाटियों और गगनचुंबी चट्टानों को देखने के बाद जूलिया और उसकी नानी आपस में यात्रा के संबंध में बातचीत कर रहे थे; मेरी पत्नी ने जूलिया से कहा, "जब तुम्हारे नाना गाड़ी चला रहे होते हैं तो मुझे डर नहीं लगता क्योंकि मेरा मानना है कि उनके ऊपर एक रक्षक स्वर्गदूत रखा गया है।" यात्रा मार्ग से प्रभावित जूलिया ने तपाक से उत्तर दिया, "लेकिन मेरा मानना है कि एक नहीं रक्षक स्वर्गदूतों की पूरी सेना उन्हें संभालती होगी।"

   अनजाने में ही उस छोटी बच्ची के मुँह से परमेश्वर के वचन का तथ्य निकल गया। भजनकार ने कहा: "परमेश्वर के रथ बीस हजार, वरन हजारों हजार हैं; प्रभु उनके बीच में है, जैसे वह सीनै पवित्र स्थान में है" (भजन ६८:१७)। पवित्र बाइबल में परमेश्वर को ’सेनाओं का यहोवा’ कह के भी संबोधित किया गया है, और स्वर्गदूत परमेश्वर की सेना है। प्रभु यीशु को पकड़वाए जाने के समय प्रभु ने इसी तथ्य के संदर्भ में अपने चेले पतरस से कहा था: "क्या तू नहीं समझता, कि मैं अपने पिता से बिनती कर सकता हूं, और वह स्‍वर्गदूतों की बारह पलटन से अधिक मेरे पास अभी उपस्थित कर देगा?" (मत्ती २६:५३) परमेश्वर का वचन बाइबल हमें बताती है कि परमेश्वर ने अपने इन्हीं स्वर्गदूतों को हम मसीही विश्वासियों की सेवा-टहल करने वाली आत्माएं कर दिया है (इब्रानियों १:१३-१४)।

   बाइबल में राजाओं के वृतान्त में हम पढ़ते हैं कि अराम देश कि सेना ने परमेश्वर के भविष्यद्वकता एलीशा के नगर को घेर लिया; एलीशा निश्चिंत था किंतु उसका सेवक घबरा कर पूछने लगा "हाय! मेरे स्वामी, हम क्या करें?" तब एलिशा ने उत्तर दिया, "मत डर; क्योंकि जो हमारी ओर हैं, वह उन से अधिक हैं, जो उनकी ओर हैं" और फिर एलीशा की प्रार्थना पर परमेश्वर ने उस सेवक की आँखें खोल दीं कि वह आलौकिक को देख सके और तब सेवक ने देखा कि "एलीशा के चारों ओर का पहाड़ अग्निमय घोड़ों और रथों से भरा हुआ है" (२ राजा ६:१५-१७) - सेनाओं के यहोवा की सेना उसके जन के साथ विद्यमान थी।

   चाहे हम उन्हें अपनी शारीरिक आँखों से नहीं देख पाते लेकिन हम मसीही विश्वासी इस बात से सदा आश्वस्त रह सकते हैं कि परमेश्वर ने अपने स्वर्गदूतों को हमारे चारों ओर नियुक्त किया हुआ है और हमें आभास भी नहीं होने पाता कि हमारे विरुद्ध होने वाले शत्रु शैतान के कितने और कैसे कैसे हमले वे विफल कर देते हैं। परमेश्वर की आज्ञा के बिना और उसकी निर्धारित सीमा के बाहर कोई भी शक्ति हमें छू भी नहीं सकती यह हम अय्युब की पुस्तक के १ एवं २ अध्याय में स्पष्ट देखते हैं।

   हम मसीही विश्वासियों के जीवनों में जो भी होता है वह हमारी भलाई तथा जगत के उद्धारकर्ता प्रभु यीशु की महिमा के लिए ही होता है। इसलिए यदि दुख-क्लेषों से होकर निकलना भी पड़े तो लेश-मात्र भी विचलित ना हों वरन उनमें भी परमेश्वर की महिमा करें। - डेविड रोपर


परमेश्वर के लोग परमेश्वर के स्वर्गदूतों के संरक्षण में रहते हैं।

क्योंकि वह अपने दूतों को तेरे निमित्त आज्ञा देगा, कि जहां कहीं तू जाए वे तेरी रक्षा करें। - भजन ९१:११

बाइबल पाठ: २ राजा ६:८-१७
2 Kings6:8 ओैर अराम का जाजा इस्राएल से युद्ध कर रहा था, और सम्मति कर के अपने कर्मचारियों से कहा, कि अमुक स्थान पर मेरी छावनी होगी।
2 Kings6:9 तब परमेश्वर के भक्त ने इस्राएल के राजा के पास कहला भेजा, कि चौकसी कर और अमुक स्थान से हो कर न जाना क्योंकि वहां अरामी चढ़ाई करने वाले हैं।
2 Kings6:10 तब इस्राएल के राजा ने उस स्थान को, जिसकी चर्चा कर के परमेश्वर के भक्त ने उसे चिताया था, भेज कर, अपनी रक्षा की; और उस प्रकार एक दो बार नहीं वरन बहुत बार हुआ।
2 Kings6:11 इस कारण अराम के राजा का मन बहुत घबरा गया; सो उसने अपने कर्मचारियों को बुला कर उन से पूछा, क्या तुम मुझे न बताओगे कि हम लोगों में से कौन इस्राएल के राजा की ओर का है? उसके एक कर्मचारी ने कहा, हे मेरे प्रभु! हे राजा! ऐसा नहीं,
2 Kings6:12 एलीशा जो इस्राएल में भविष्यद्वक्ता है, वह इस्राएल के राजा को वे बातें भी बताया करता है, जो तू शयन की कोठरी में बोलता है।
2 Kings6:13 राजा ने कहा, जा कर देखो कि वह कहां है, तब मैं भेज कर उसे पकड़वा मंगाऊंगा। और उसको यह समाचार मिला कि वह दोतान में है।
2 Kings6:14 तब उसने वहां घोड़ों और रथों समेत एक भारी दल भेजा, और उन्होंने रात को आकर नगर को घेर लिया।
2 Kings6:15 भोर को परमेश्वर के भक्त का टहलुआ उठा और निकल कर क्या देखता है कि घोड़ों और रथों समेत एक दल नगर को घेरे हुए पड़ा है। और उसके सेवक ने उस से कहा, हाय! मेरे स्वामी, हम क्या करें?
2 Kings6:16 उसने कहा, मत डर; क्योंकि जो हमारी ओर हैं, वह उन से अधिक हैं, जो उनकी ओर हैं।
2 Kings6:17 तब एलीशा ने यह प्रार्थना की, हे यहोवा, इसकी आंखें खोल दे कि यह देख सके। तब यहोवा ने सेवक की आंखें खोल दीं, और जब वह देख सका, तब क्या देखा, कि एलीशा के चारों ओर का पहाड़ अग्निमय घोड़ों और रथों से भरा हुआ है।

एक साल में बाइबल: 
  • लैव्यवस्था १-३ 
  • मत्ती २४:१-२८


बुधवार, 6 फ़रवरी 2013

पक्षपात


   समाचार पत्र वॉशिंगटन पोस्ट में पूर्वधारणा एवं पक्षपात पर एक लेख प्रकाशित हुआ जिसमें बताया गया कि शोध कर्ताओं ने पाया है कि लगभग सभी लोग किसी न किसी रूप में और कुछ न कुछ मात्रा में पूर्वधारणा एवं पक्षपात रखते हैं और यह रवैया उनमें भी पाया जाता है जो इसके विरोधी हैं। मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि हमारे स्वाभिमान का प्रमुख भाग उस भावना से आता है जो हमारे एक विशेष समुदाय अथवा वर्ग से जुड़े होने के कारण हमें अपने आप को दूसरों से बेहतर आँकने देती है। पक्षपात को पराजित करना सरल नहीं है - परमेश्वर के लोगों और समुदाय में भी नहीं!

   प्रेरित पौलुस द्वारा परमेश्वर के वचन बाइबल में कुलुस्से के मसीही विश्वासियों को लिखे शब्द हम मसीही विश्वासियों को आज भी निर्देषित करते हैं कि हमारे व्यवहार और हमारे शब्दों में किसी भी प्रकार का कोई भेदभाव दिखाई नहीं देना चाहिए क्योंकि मसीह यीशु में हर भेदभाव मिट गया है और हम मसीह के स्वरूप में ढाले जा रहे हैं: "और नए मनुष्यत्‍व को पहिन लिया है जो अपने सृजनहार के स्‍वरूप के अनुसार ज्ञान प्राप्त करने के लिये नया बनता जाता है। उस में न तो यूनानी रहा, न यहूदी, न खतना, न खतनारिहत, न जंगली, न स्‍कूती, न दास और न स्‍वतंत्र: केवल मसीह सब कुछ और सब में है" (कुलुस्सियों ३:१०-११)। इसलिए बड़े-छोटे या ऊँच-नीच अथवा पक्षपात की बजाए हमारे परस्पर व्यवहार में करुणा, दया, नम्रता, कोमलता और धीरज दिखाई देने चाहिएं (पद १२) और इन सब के ऊपर प्रेम जो सिद्धता का कटिबन्ध है (पद १४) विद्यमान होना चाहिए।

   मसीह यीशु की देह अर्थात उसकी मण्डली में जाति, वर्ग, वर्ण, रंग अथवा राष्ट्रीयता के आधार पर किसी को कोई वरियता नहीं है क्योंकि क्रूस के द्वारा मसीह यीशु ने हम सब को अपने आप में एक कर दिया है ताकि हम एक दूसरे के साथ सदैव ही ईमानदारी, आदर और प्रेम में व्यवहार करें। मसीही विश्वासियों को अपनी नहीं वरन परमेश्वर के पुत्र एवं अपने तथा जगत के उद्धारकर्ता प्रभु यीशु की महिमा के लिए प्रयत्नशील रहना चाहिए। - डेविड मैक्कैसलैंड


पक्षपात प्रकट को विकृत कर देता है, वार्तालाप में असत्य मिला देता है और जहाँ कार्यान्वित होता है वहाँ विनाश ले आता है।

उस में न तो यूनानी रहा, न यहूदी, न खतना, न खतनारिहत, न जंगली, न स्‍कूती, न दास और न स्‍वतंत्र: केवल मसीह सब कुछ और सब में है। - कुलुस्सियों ३:११

बाइबल पाठ: कुलुस्सियों ३:८-१७
Colossians3:8 पर अब तुम भी इन सब को अर्थात क्रोध, रोष, बैरभाव, निन्‍दा, और मुंह से गालियां बकना ये सब बातें छोड़ दो।
Colossians3:9 एक दूसरे से झूठ मत बोलो क्योंकि तुम ने पुराने मनुष्यत्‍व को उसके कामों समेत उतार डाला है।
Colossians3:10 और नए मनुष्यत्‍व को पहिन लिया है जो अपने सृजनहार के स्‍वरूप के अनुसार ज्ञान प्राप्त करने के लिये नया बनता जाता है।
Colossians3:11 उस में न तो यूनानी रहा, न यहूदी, न खतना, न खतनारिहत, न जंगली, न स्‍कूती, न दास और न स्‍वतंत्र: केवल मसीह सब कुछ और सब में है।
Colossians3:12 इसलिये परमेश्वर के चुने हुओं की नाईं जो पवित्र और प्रिय हैं, बड़ी करूणा, और भलाई, और दीनता, और नम्रता, और सहनशीलता धारण करो।
Colossians3:13 और यदि किसी को किसी पर दोष देने को कोई कारण हो, तो एक दूसरे की सह लो, और एक दूसरे के अपराध क्षमा करो: जैसे प्रभु ने तुम्हारे अपराध क्षमा किए, वैसे ही तुम भी करो।
Colossians3:14 और इन सब के ऊपर प्रेम को जो सिद्धता का कटिबन्‍ध है बान्‍ध लो।
Colossians3:15 और मसीह की शान्‍ति जिस के लिये तुम एक देह हो कर बुलाए भी गए हो, तुम्हारे हृदय में राज्य करे, और तुम धन्यवादी बने रहो।
Colossians3:16 मसीह के वचन को अपने हृदय में अधिकाई से बसने दो; और सिद्ध ज्ञान सहित एक दूसरे को सिखाओ, और चिताओ, और अपने अपने मन में अनुग्रह के साथ परमेश्वर के लिये भजन और स्‍तुतिगान और आत्मिक गीत गाओ।
Colossians3:17 और वचन से या काम से जो कुछ भी करो सब प्रभु यीशु के नाम से करो, और उसके द्वारा परमेश्वर पिता का धन्यवाद करो।

एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन ३९-४० 
  • मत्ती २३:२३-३९


मंगलवार, 5 फ़रवरी 2013

स्थिर आधार


   अमेरिका के कैलिफोर्निया प्रांत के हेवर्ड शहर ने सन १९३१ में अपना प्रथम नगरसभा ग्रह बनाया। वह सभा ग्रह बहुत भव्य था, उसमें प्रयुक्त निर्माण शैली अद्भुत थी और उस समय उसकी निर्माण की लागत $१००,००० थी। उस भव्य तथा आलीशान इमारत के साथ एक ही समस्या थी - वह कैलिफोर्निया की हेवर्ड दोष रेखा पर बनी थी और धरती की उस दोष रेखा में चल रही अविरल गतिविधि के कारण वह इमारत धीरे धीरे दो भागों में विभाजित होने लगी। सन १९८९ में आए एक भूकम्प के कारण वह इमारत इस हाल में आ गई है कि अब उससे लगातार बने खतरे के कारण लोगों का वहां जाना वर्जित कर दिया गया है।

   अस्थिर नेंव और आधार पर निर्माण करना बुद्धिमता नहीं है। यह बात केवल भवन निर्माण ही नहीं वरन जीवन निर्माण के लिए भी सत्य है। प्रभु यीशु ने इस सत्य को एक दृष्टांत के द्वारा समझाया: "परन्तु जो कोई मेरी ये बातें सुनता है और उन पर नहीं चलता वह उस निर्बुद्धि मनुष्य की नाईं ठहरेगा जिसने अपना घर बालू पर बनाया। और मेंह बरसा, और बाढ़ें आईं, और आन्‍धियां चलीं, और उस घर पर टक्करें लगीं और वह गिरकर सत्यानाश हो गया" (मत्ती ७:२६-२७)।

   इस संसार के लगातार बदलते नैतिक स्तर और सही-गलत की पहचान लोगों को उल्झनों में डालने और उन्हें भरमाने वाले हो सकते हैं। जो आज के समाज एवं संसकृति के अनुसार सही हैं वे कल गलत कहे जा सकते हैं, जो कल अनुचित था वह आज उचित माना जा सकता है; किंतु परमेश्वर के स्थिर और अटल वचन बाइबल की बातें युगानुयुग कभी नहीं बदलतीं। हम अपने देश और संसार की घटानाओं में, उनके प्रति व्यकत प्रतिक्रीयाओं में, सिनेमा, टी.वी. तथा मनोरंजन के साधनों पर प्रस्तुत कार्यक्रमों में, लोक चर्चाओं आदि में स्पष्ट देखते हैं कि कुछ ही वर्षों में नैतिक, सामाजिक, उचित-अनुचित इत्यादि के स्तर और निर्धारण मानक कैसे बदल गए हैं। लेकिन बाइबल में जो गलत था वह अब भी गलत है और सही था वह अब भी सही है; समय, काल, सभ्यता और संसकृति के साथ बाइबल की कोई बात कभी ना बदली है और ना गलत साबित हुई है। इसीलिए बाइबल की शिक्षाओं और बातों को अपना स्थिर आधार बनाकर उस के अनुसार जीवन निर्माण करना ही बुद्धिमानी है। इसीलिए प्रभु यीशु ने कहा: "इसलिये जो कोई मेरी ये बातें सुनकर उन्हें मानता है वह उस बुद्धिमान मनुष्य की नाईं ठहरेगा जिसने अपना घर चट्टान पर बनाया। और मेंह बरसा और बाढ़ें आईं, और आन्‍धियां चलीं, और उस घर पर टक्करें लगीं, परन्तु वह नहीं गिरा, क्योंकि उस की नेव चट्टान पर डाली गई थी" (मत्ती ७:२४-२५)।

   अन्ततः हम सब को अपने जीवनों का हिसाब देने परमेश्वर के समक्ष खड़े होना ही है और तब परमेश्वर का वचन ही हमारे न्याय का आधार होगा (यूहन्ना १२:४८), तो क्यों ना उस वचन और उसकी शिक्षाओं को अभी से अपने जीवनों में स्थान दें और उनका पालन करें? - डेनिस फिशर


अपने जीवनों को एक मात्र स्थिर आधार - मसीह यीशु पर खड़ा कीजिए।

यीशु मसीह कल और आज और युगानुयुग एकसा है। - इब्रानियों १३:८

बाइबल पाठ: यूहन्ना १२:४४-५०
John12:44 यीशु ने पुकार कर कहा, जो मुझ पर विश्वास करता है, वह मुझ पर नहीं, वरन मेरे भेजने वाले पर विश्वास करता है।
John12:45 और जो मुझे देखता है, वह मेरे भेजने वाले को देखता है।
John12:46 मैं जगत में ज्योति हो कर आया हूं ताकि जो कोई मुझ पर विश्वास करे, वह अन्धकार में न रहे।
John12:47 यदि कोई मेरी बातें सुनकर न माने, तो मैं उसे दोषी नहीं ठहराता, क्योंकि मैं जगत को दोषी ठहराने के लिये नहीं, परन्तु जगत का उद्धार करने के लिये आया हूं।
John12:48 जो मुझे तुच्‍छ जानता है और मेरी बातें ग्रहण नहीं करता है उसको दोषी ठहराने वाला तो एक है: अर्थात जो वचन मैं ने कहा है, वही पिछले दिन में उसे दोषी ठहराएगा।
John12:49 क्योंकि मैं ने अपनी ओर से बातें नहीं कीं, परन्तु पिता जिसने मुझे भेजा है उसी ने मुझे आज्ञा दी है, कि क्या क्या कहूं और क्या क्या बोलूं
John12:50 और मैं जानता हूं, कि उस की आज्ञा अनन्त जीवन है इसलिये मैं जो बोलता हूं, वह जैसा पिता ने मुझ से कहा है वैसा ही बोलता हूं।

एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन ३६-३८ 
  • मत्ती २३:१-२२


सोमवार, 4 फ़रवरी 2013

परिवर्तन


   मेरे मित्र टिम डेविस को अपने बचपन का वह समय याद है जब वह अपने माता-पिता के साथ ट्रिनिडैड में था, और इंग्लैंड की महारानी इलज़ाबेथ उस छोटे से स्थान पर आईं थीं। टिम भी अपने माता-पिता तथा उस भीड़ के साथ महारानी को देखने गया, और शेष भीड़ के साथ उस मार्ग के किनारे हाथ में झंडा लिए हुए वह भी खड़ा हुआ। जिस मार्ग से होकर महारानी को निकलना था उसे अच्छे से साफ करके खूब सजाया गया था। कुछ समय पश्चात महारानी की सवारी आई, पहले पैदल सैनिक, फिर घोड़ों पर सैनिकों का दस्ता, फिर महारानी की गाड़ी जिस में से महारानी इलज़ाबेथ अपने हाथ हिलाकर भीड़ के अभिवादन को स्वीकार कर रहीं थीं। महारानी और भीड़ एक दुसरे को देखकर मुस्कुरा रहे थे, भीड़ उत्साहित और प्रफुल्लित थी, किंतु भीड़ और महारानी का परस्पर कोई व्यक्तिगत परिचय या संबंध नहीं था। टिम और अन्य लोगों के देखते देखते राजसी सवारी का वह जलूस आगे बढ़ गया और फिर सब अपने अपने घरों और कार्यों को लौट गए। कुछ ही समय के बाद उस मार्ग से सारी सजावट हटा ली गई, मार्ग फिर से पहले के समान हो गया और कुछ समय पश्चात पता भी नहीं चलता था कि महारानी इसी मार्ग पर आईं थीं। टिम ने कहा, "वे राजसी अधिकारी आए और शहर के मार्गों से होकर चले गए; शहर में या लोगों में कोई स्थाई परिवर्तन नहीं आया।"

   हम मसीही विश्वासियों के लिए भी एक दिन वह था जब हमारे व्यक्तिगत निमंत्रण पर परमेश्वर का पुत्र तथा जगत का उद्धाकर्ता हमारे दिलों में आया। कुछ ने उसे अपने दिलों में बैठा लिया और उनके मनों को उसने अपने पवित्र आत्मा का मन्दिर बना लिया (१ कुरिन्थियों ६:१९), उनके मनों को स्वच्छ किया और अब भी करता रहता है, उनके जीवन बदल गए तथा यह सुधार दिन-प्रतिदिन ज़ारी रहता है। लेकिन अनेक ऐसे भी हैं जिन्होंने केवल उसे अपने अन्दर से होकर निकलने भर दिया है, अपने अन्दर रहने और कार्य करने का स्थान तथा अनुमति नहीं दी है; कुछ समय के लिए उनके जीवनों में कुछ भला परिवर्तन दिखाई देता है किंतु समय के साथ सब कुछ फिर से पहले जैसा हो जाता है। ये लोग इसी भ्रम में जीते हैं और संसार के सामने भी इस असत्य को रखते हैं कि वे मसीही विश्वासी हैं, और उनके जीवन मसीही विश्वासी होने का गलत उदहरण संसार के सामने प्रस्तुत करते हैं; जब कि वास्तविकता इस से विपरीत है। इस एक सच्चाई के अनेक अति महत्वपूर्ण आयाम हैं। यदि मसीह यीशु हमारे हृदय में विराजमान है और हमारा मन परमेश्वर की पवित्र आत्मा का मन्दिर है तो अवश्यंभावी है कि उसकी उपस्थिति हमारे जीवनों के अन्दर कुछ स्थायी परिवर्तन लाएगी जो स्वयं हमें तथा हमारे सम्पर्क में आने वाले लोगों पर प्रगट होंगे तथा मसीह की महिमा के कारण ठहरेंगे। हमारी वार्तालाप की विधि विषय और प्रयुक्त शब्द, हमारा व्यवहार विशेषकर जब कोई जानकार हमें देखने वाला ना हो, लोगों के साथ हमारे संबंध और व्यवहार, हमारा अपनी ज़िम्मेवरियों एवं अपने अधिकारियों के प्रति रवैया, सांसारिक उपलब्धियों एवं धन-संपत्ति तथा उन के महत्व तथा उपयोग के प्रति हमारा रवैया, हमारे शत्रुओं के प्रति हमारी मनसा और हमारा व्यवहार इत्यादि; जीवन की हर छोटी बड़ी बात में यह परिवर्तन दिखाई देगा।

   यदि आप मसीही विश्वासी हैं तो अपने जीवन को जाँच के देखिए कि मसीह यीशु को अपने जीवन में आमंत्रित करने के बाद क्या आपके जीवन में स्थाई रूप से कुछ बदला है, और क्या यह परिवर्तन ज़ारी है? क्या आपके आस-पास के लोग और आपके प्रीय जन इस परिवर्तन को अनुभव करते हैं? यदि नहीं तो गंभीरता से विचार कीजिए और जांचिए कि कहीं ऐसा तो नहीं है कि आपने मसीह यीशु को हृदय में स्थान देने की बजाए उसे अपने अन्दर से होकर जाने भर का केवल समय और मार्ग भर दिया हो। आपके निमंत्रण पर वह आया और उसके साथ ही थोड़े समय का भला परिवर्तन भी आया; फिर ठहरने के स्थाई स्थान और आपके जीवन को स्वच्छ तथा परिवर्तित करने के कार्य की अनुमति के अभाव में उसे आगे बढ़ जाना पड़ा और आप उसे आगे विदा करके अपने जीवन में पहले जैसे ही रह गए?

   मसीह यीशु को आमंत्रित करके अपने मनों में उसे स्थाई स्थान दीजिए और वह आपके जीवन में स्थाई परिवर्तन ले आएगा। - जो स्टोवैल


यदि मसीह यीशु ने हमारे अन्दर स्थाई निवास पाया है तो संसार और सांसारिकता को हमारे अन्दर स्थान नहीं मिलेगा।

क्या तुम नहीं जानते, कि तुम्हारी देह पवित्रात्मा का मन्दिर है; जो तुम में बसा हुआ है और तुम्हें परमेश्वर की ओर से मिला है, और तुम अपने नहीं हो? - १ कुरिन्थियों ६:१९

बाइबल पाठ: १ कुरिन्थियों ६:१२-२०
1 Corinthians6:12 सब वस्तुएं मेरे लिये उचित तो हैं, परन्तु सब वस्तुएं लाभ की नहीं, सब वस्तुएं मेरे लिये उचित हैं, परन्तु मैं किसी बात के आधीन न हूंगा।
1 Corinthians6:13 भोजन पेट के लिये, और पेट भोजन के लिये है, परन्तु परमेश्वर इस को और उसको दोनों को नाश करेगा, परन्तु देह व्यभिचार के लिये नहीं, वरन प्रभु के लिये; और प्रभु देह के लिये है।
1 Corinthians6:14 और परमेश्वर ने अपनी सामर्थ से प्रभु को जिलाया, और हमें भी जिलाएगा।
1 Corinthians6:15 क्या तुम नहीं जानते, कि तुम्हारी देह मसीह के अंग हैं? सो क्या मैं मसीह के अंग ले कर उन्हें वेश्या के अंग बनाऊं? कदापि नहीं।
1 Corinthians6:16 क्या तुम नहीं जानते, कि जो कोई वेश्या से संगति करता है, वह उसके साथ एक तन हो जाता है? क्योंकि वह कहता है, कि वे दोनों एक तन होंगे।
1 Corinthians6:17 और जो प्रभु की संगति में रहता है, वह उसके साथ एक आत्मा हो जाता है।
1 Corinthians6:18 व्यभिचार से बचे रहो: जितने और पाप मनुष्य करता है, वे देह के बाहर हैं, परन्तु व्यभिचार करने वाला अपनी ही देह के विरुद्ध पाप करता है।
1 Corinthians6:19 क्या तुम नहीं जानते, कि तुम्हारी देह पवित्रात्मा का मन्दिर है; जो तुम में बसा हुआ है और तुम्हें परमेश्वर की ओर से मिला है, और तुम अपने नहीं हो?
1 Corinthians6:20 क्योंकि दाम देकर मोल लिये गए हो, इसलिये अपनी देह के द्वारा परमेश्वर की महिमा करो।

एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन ३४-३५ 
  • मत्ती २२:२३-४६


रविवार, 3 फ़रवरी 2013

सच्चा आदर


   सूज़न बॉयल नामक एक महिला ने अपना अधिकांश वयस्क जीवन अपनी बिल्ली तथा अपनी वृद्ध माँ की देखभाल और चर्च में गीत गाने में बिताया था। वह देखने में कोई महान गायक नहीं लगती थी। इसीलिए जब यह अधेड़ उम्र की साधारण सी दिखने वाली महिला एक संगीत प्रत्योगिता में भाग लेने के लिए गीत गाने खड़ी हुई तो उपस्थित श्रोताओं को हंसी आ गई। उन श्रोताओं के इस तिरिस्कारपूर्ण व्यवहार पर सूज़न ने प्रत्योगिता से अपने कदम नहीं खींचे; उपस्थित भीड़ पर ध्यान दिए बिना उसने गाया और बहुत अच्छा गाया और उन्हीं श्रोताओं ने उसे खड़े होकर अभिन्दन तथा आदर दिया।

   चर्च के प्रारंभिक दिनों की बात है, परमेश्वर का सेवक स्तिफनुस, मसीह यीशु में अपने विश्वास के कारण विरोधी भीड़ के सामने खड़ा किया गया और धर्म के अगुवों और अधिकारियों के सामने उस पर धर्म के विरुद्ध बोलने और परमेश्वर की निन्दा करने के झूठा दोषारोपण किया गया। प्रत्युत्तर में स्तिफनुस ने उन सब के सामने धर्म के नाम पर उन लोगों के पाखंड और दोगलेपन का वर्णन किया तथा परमेश्वर के वचन की सच्चाईयों को रखा जिससे उसके मसीह यीशु में विश्वास की पुष्टि होती थी। अपने प्रत्युत्तर के अन्त में उसने कहा: "देखो, मैं स्वर्ग को खुला हुआ, और मनुष्य के पुत्र को परमेश्वर के दाहिनी ओर खड़ा हुआ देखता हूं" (प्रेरितों ७:५६)। यह सुनकर क्रुद्ध भीड़ तथा धर्म के अगुवों और अधिकारियों ने उसे पत्थरवाह करके मार डाला, लेकिन स्वर्ग में जगत के उद्धाकर्ता और परमेश्वर के पुत्र ने अपने सिंहासन से खड़े होकर उसका स्वागत किया, उसे आदर दिया।

   अधिकांश मसीही विश्वासियों को इस प्रकार के घोर विरोध और बैर का सामना तो नहीं करना पड़ता, लेकिन हम सब मसीही विश्वासियों को प्रभु में स्थिर बने रहने की आवश्यकता है (फिलिप्पियों ४:१) क्योंकि अपने विश्वास के लिए हम कभी भी परखे जा सकते हैं। संसार के लोगों के दबाव तथा विरोध मसीह यीशु के लिए हमारी आवाज़ को शांत ना करने पाएं। मसीह यीशु में उद्धार और पापों की क्षमा के सुसमाचार को संसार के लोगों की भीड़ का अनुमोदन कम ही मिलता है, किंतु यह सुसमाचार का प्रचार ही हमें परमेश्वर से आदर दिलवाता है - और केवल यही आदर स्थायी और सच्चा है। - जेनिफर बेन्सन शुल्ट


यदि परमेश्वर की आज्ञाकारिता में और यीशु के नाम के लिए आपको विरोध का सामना करना पड़ रहा है तो यह इस बात का सूचक है कि आप सही मार्ग पर हैं।

देखो, मैं स्वर्ग को खुला हुआ, और मनुष्य के पुत्र को परमेश्वर के दाहिनी ओर खड़ा हुआ देखता हूं। - प्रेरितों ७:५६

बाइबल पाठ: प्रेरितों ६:८-१५; ७:५१-६०
Acts6:8 स्‍तिुफनुस अनुग्रह और सामर्थ में परिपूर्ण हो कर लोगों में बड़े बड़े अद्भुत काम और चिन्ह दिखाया करता था।
Acts6:9 तब उस अराधनालय में से जो लिबरतीनों की कहलाती थी, और कुरेनी और सिकन्‍दिरया और किलिकिया और एशीया के लोगों में से कई एक उठ कर स्‍तिुफनुस से वाद-विवाद करने लगे।
Acts6:10 परन्तु उस ज्ञान और उस आत्मा का जिस से वह बातें करता था, वे साम्हना न कर सके।
Acts6:11 इस पर उन्‍होंने कई लोगों को उभारा जो कहने लगे, कि हम ने इस को मूसा और परमेश्वर के विरोध में निन्‍दा की बातें कहते सुना है।
Acts6:12 और लोगों और प्राचीनों और शास्‍त्रियों को भड़काकर चढ़ आए और उसे पकड़कर महासभा में ले आए।
Acts6:13 और झूठे गवाह खड़े किए, जिन्हों ने कहा कि यह मनुष्य इस पवित्र स्थान और व्यवस्था के विरोध में बोलना नहीं छोड़ता।
Acts6:14 क्योंकि हम ने उसे यह कहते सुना है, कि यही यीशु नासरी इस जगह को ढ़ा देगा, और उन रीतों को बदल डालेगा जो मूसा ने हमें सौंपी हैं।
Acts6:15 तब सब लोगों ने जो सभा में बैठे थे, उस की ओर ताक कर उसका मुखड़ा स्वर्गदूत का सा देखा।
Acts7:51 जैसा तुम्हारे बाप दादे करते थे, वैसे ही तुम भी करते हो।
Acts7:52 भविष्यद्वक्ताओं में से किस को तुम्हारे बाप दादों ने नहीं सताया, और उन्होंने उस धर्मी के आगमन का पूर्वकाल से सन्‍देश देने वालों को मार डाला, और अब तुम भी उसके पकड़वाने वाले और मार डालने वाले हुए।
Acts7:53 तुम ने स्‍वर्गदूतों के द्वारा ठहराई हुई व्यवस्था तो पाई, परन्तु उसका पालन नहीं किया।
Acts7:54 ये बातें सुनकर वे जल गए और उस पर दांत पीसने लगे।
Acts7:55 परन्तु उसने पवित्र आत्मा से परिपूर्ण हो कर स्वर्ग की ओर देखा और परमेश्वर की महिमा को और यीशु को परमेश्वर की दाहिनी ओर खड़ा देखकर।
Acts7:56 कहा; देखों, मैं स्वर्ग को खुला हुआ, और मनुष्य के पुत्र को परमेश्वर के दाहिनी ओर खड़ा हुआ देखता हूं।
Acts7:57 तब उन्होंने बड़े शब्द से चिल्लाकर कान बन्‍द कर लिये, और एक चित्त हो कर उस पर झपटे।
Acts7:58 और उसे नगर के बाहर निकाल कर पत्थरवाह करने लगे, और गवाहों ने अपने कपड़े उतार रखे।
Acts7:59 और वे स्‍तिुफनुस को पत्थरवाह करते रहे, और वह यह कहकर प्रार्थना करता रहा; कि हे प्रभु यीशु, मेरी आत्मा को ग्रहण कर।
Acts7:60 फिर घुटने टेककर ऊंचे शब्द से पुकारा, हे प्रभु, यह पाप उन पर मत लगा, और यह कहकर सो गया: और शाऊल उसके बध में सहमत था।

एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन ३१-३३
  •  मत्ती २२:१-२२


शनिवार, 2 फ़रवरी 2013

प्रार्थना


   हम सभी का, जो कंप्यूटर पर कार्य करते हैं, यह अनुभव होगा कि थोड़े थोड़े समय बाद कंप्यूटर के कार्य करने की गति शिथिल होने लगती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि विभिन्न प्रोग्राम और दस्तावेज़ों पर कार्य करते करते जब हम अपने कार्य को ’सेव’ करते हैं तो कंप्यूटर उस कार्यांश को हार्ड-डिस्क पर संजो देता है। धीरे धीरे कार्यांश के ये टुकड़े हार्ड-डिस्क पर कई जगह छित्रे हुए संजोए जाते हैं और इनपर कार्य करने के लिए पहले कंप्यूटर को इन्हें भिन्न स्थनों से खोज कर एकत्रित करना होता है और फिर आगे के कार्य के लिए प्रस्तुत करना होता है जिस में समय अधिक लगता है। इस समस्या के समाधान के लिए लोग एक विशेष प्रोग्राम प्रयोग करते हैं जो कंप्यूटर की हार्ड-डिस्क को ’डीफ्रैगमैन्ट’ करता है, अर्थात उन छित्रे हुए कार्यांशों को जमा करके सही क्रम में एकीकृत करता है जिससे उन्हें पुनः प्रयोग के लिए समय व्यय ना हो। इससे कंप्यूटर की कार्य गति फिर से ठीक हो जाती है।

   कंप्यूटर के समान, हमारा जीवन भी ऐसे ही टुकड़ों में बंट जाता है और हमारी जीवन गति शिथिल होने लगती है, कार्य अस्त-व्यस्त होने लगते हैं और जीवन में खींचातानी बढ़ने लगती है। जब हम किसी बात पर ध्यान लगाने का प्रयास कर रहे होते हैं तो कोई और परिस्थिति हमारी भावनाओं पर प्रहार कर रही होती है। हर ओर से कोई न कोई माँग हमारा ध्यान और कार्य चाहती है। हम प्रयास करते हैं कि सभी माँगों को पूरा कर सकें किंतु दिमाग़ केंद्रित नहीं रह पाता, मन शांत नहीं हो पाता और शरीर साथ नहीं देता। जीवन के दबावों और मांगों के आगे हम अपने आपको थका और अयोग्य अनुभव करने लगते हैं।

   हाल ही में मैंने एक सभा में भाग लिया जिसमें बांटे गए पर्चों में से एक में एक प्रार्थना भी थी जो मेरी दशा को बयान कर रही थी। प्रार्थना में लिखा था: "प्रभु मैं बिखरा हुआ, अशांत और अधूरे मन का हो गया हूँ।"

   राजा दाऊद भी ऐसे अनुभव से होकर निकला था (भजन ५५:२)। उसने प्रार्थना में अपनी हालत परमेश्वर के सामने रखी; प्रातः, दोपहर, संध्या वह परमेश्वर के आगे प्रार्थना में लगा रहा। उसे निश्चय था कि परमेश्वर उसकी प्रार्थना को सुनेगा और उत्तर देगा (पद १७)। परमेश्वर ने ऐसा ही किया और दाऊद कहने पाया: "जो लड़ाई मेरे विरुद्ध मची थी उस से उसने मुझे कुशल के साथ बचा लिया है" (भजन ५५:१८); और इस बात से प्रेर्णा लेकर उसने आगे कहा: "अपना बोझ यहोवा पर डाल दे वह तुझे सम्भालेगा; वह धर्मी को कभी टलने न देगा" (भजन ५५:२२)।

   प्रार्थना हमारे बिखरे हुए जीवन को एकीकृत करके संजो देती है। जब हम अपने बोझों को परमेश्वर पर डाल देते हैं और उसके निर्देषों तथा मार्गों पर चलने का निर्णय ले लेते हैं तो परमेश्वर हमें वह भी बताता है जो हमें करना है, और वह भी बताता है जो वह करेगा। परमेश्वर पर भरोसा रखें और प्रार्थना की सामर्थ को समझें।  - जूली एकैरमैन लिंक


जब सांसारिक व्यस्तता के कारण प्रार्थना का समय सबसे कम होता है, उसी दशा में हमें प्रार्थना की सामर्थ की सबसे अधिक आवश्यकता होती है।

अपना बोझ यहोवा पर डाल दे वह तुझे सम्भालेगा; वह धर्मी को कभी टलने न देगा। - भजन ५५:२२

बाइबल पाठ: भजन ५५:१-८
Psalms55:1 हे परमेश्वर, मेरी प्रार्थना की ओर कान लगा; और मेरी गिड़गिड़ाहट से मुंह न मोड़!
Psalms55:2 मेरी ओर ध्यान देकर, मुझे उत्तर दे; मैं चिन्ता के मारे छटपटाता हूं और व्याकुल रहता हूं।
Psalms55:3 क्योंकि शत्रु कोलाहल और दुष्ट उपद्रव कर रहें हैं; वे मुझ पर दोषारोपण करते हैं, और क्रोध में आकर मुझे सताते हैं।
Psalms55:4 मेरा मन भीतर ही भीतर संकट में है, और मृत्यु का भय मुझ में समा गया है।
Psalms55:5 भय और कंपकपी ने मुझे पकड़ लिया है, और भय के कारण मेरे रोंए रोंए खड़े हो गए हैं।
Psalms55:6 और मैं ने कहा, भला होता कि मेरे कबूतर के से पंख होते तो मैं उड़ जाता और विश्राम पाता!
Psalms55:7 देखो, फिर तो मैं उड़ते उड़ते दूर निकल जाता और जंगल में बसेरा लेता,
Psalms55:8 मैं प्रचण्ड बयार और आन्धी के झोंके से बचकर किसी शरण स्थान में भाग जाता।

एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन २९-३० 
  • मत्ती २१:२३-४६

शुक्रवार, 1 फ़रवरी 2013

धोखा और अनुग्रह


   धोखे और छल-कपट की सच्ची घटनाएं कहानीयों से भी अधिक विस्मयकारी हो सकती हैं। एक समाचार पत्र में छपे समाचार के अनुसार एक महिला ने खरीददारी के बाद दुकानदार को १५०० डॉलर चुकाने के लिए १०लाख डॉलर का नकली नोट थमाया। पुलिस द्वारा पकड़े जाने और पूछ-ताछ करने पर उस महिला ने कहा कि वह अपने पूर्व-पति के द्वारा बहकायी गई, जो कि स्थान स्थान के सिक्के और नोट जमा करने का शौक रखता था और उसी ने उसे वह १०लाख डॉलर का नोट दिया था। यह भी उस महिला का एक बहाना ही था, क्योंकि यह मानना असंभव है कि जब सरकार ने इतनी बड़ी रकम का कोई नोट कभी ज़ारी ही नहीं किया तो उस महिला ने उस नोट को असली कैसे मान लिया, और १५०० की खरीददारी के लिए इतनी बड़ी रकम का नोट क्यों दिया?

   यह एक अच्छा उदाहरण है कि लोग कैसे अपने अन्दर झूठ और धोखे को छुपाए रहते हैं और मौका पड़ने पर दूसरों को भी उसका शिकार बनाना चाहते हैं। परमेश्वर ने अपने वचन बाइबल में यर्मियाह भविष्यद्वक्ता के द्वारा लोगों को चिताया: "मन तो सब वस्तुओं से अधिक धोखा देने वाला होता है, उस में असाध्य रोग लगा है; उसका भेद कौन समझ सकता है?" (यर्मियाह १७:९)। यह चेतावनी कुछ लोगों के लिए नहीं थी, मानो केवल कुछ को ही धोखेबाज़ी की आदत हो; यह बात सभी के लिए थी - हर एक का मन इस असाध्य रोग से ग्रसित है और अपने अपने वक्त तथा अवसर के अनुसार सब के मन का यह रोग प्रकट होता रहता है। इसीलिए यर्मियाह आगे कहता है कि परमेश्वर लोगों के बाहरी स्वरूप एवं व्यवहार को नहीं वरन हर एक के मन को परखता और जांचता है और मन की दशा के अनुसार प्रतिफल देता है।

   परमेश्वर का प्रेम और अनुग्रह इसी में है कि वह हमारे प्रति धैर्य रखता है, सहिषुण रहता है और हमारे मन की दशा के अनुसार यह प्रतिफल वह हमें तुरंत नहीं दे देता वरन हमें पश्चाताप करने और क्षमा मांगने का अवसर देता रहता है, क्योंकि समस्त संसार के लिए पापों की क्षमा और उद्धार का मार्ग उसने अपने पुत्र प्रभु यीशु के क्रूस पर बलिदान के द्वारा दे दिया है। वह संसार के हर एक जन के सामने किसी न किसी रूप में बार बार यह पश्चाताप और क्षमा का अवसर रखता है जिससे वे अपने पापों में बने रहकर उसके न्याय का सामना ना करने पाएं वरन उसके अनुग्रह का लाभ उठाकर अनन्त आशीष के जीवन को पा लें। उसके इस अनुग्रह को स्वीकार करना या अन्देखा करना, यह प्रत्येक व्यक्ति का अपना निर्णय है।

   अपने मन पर नहीं परमेश्वर के अनुग्रह पर विश्वास करें; मन तो धोखेबाज़ है, केवल परमेश्वर ही भला और विश्वासयोग्य है, वह कभी आपको हानि में नहीं पड़ने देगा। - मार्ट डी हॉन


धोखे और विनाशकारी प्रवृतियों से भरे संसार में केवल भले और विश्वासयोग्य परमेश्वर पर विश्वास और उसकी आज्ञाकारिता ही सुरक्षित रहने का एकमात्र मार्ग है।

मन तो सब वस्तुओं से अधिक धोखा देने वाला होता है, उस में असाध्य रोग लगा है; उसका भेद कौन समझ सकता है? - यर्मियाह १७:९

बाइबल पाठ: यर्मियाह १७:५-११
Jeremiah17:5 यहोवा यों कहता है, श्रापित है वह पुरुष जो मनुष्य पर भरोसा रखता है, और उसका सहारा लेता है, जिसका मन यहोवा से भटक जाता है।
Jeremiah17:6 वह निर्जल देश के अधमूए पेड़ के समान होगा और कभी भलाई न देखेगा। वह निर्जल और निर्जन तथा लोनछाई भूमि पर बसेगा।
Jeremiah17:7 धन्य है वह पुरुष जो यहोवा पर भरोसा रखता है, जिसने परमेश्वर को अपना आधार माना हो।
Jeremiah17:8 वह उस वृक्ष के समान होगा जो नदी के तीर पर लगा हो और उसकी जड़ जल के पास फैली हो; जब घाम होगा तब उसको न लगेगा, उसके पत्ते हरे रहेंगे, और सूखे वर्ष में भी उनके विषय में कुछ चिन्ता न होगी, क्योंकि वह तब भी फलता रहेगा।
Jeremiah17:9 मन तो सब वस्तुओं से अधिक धोखा देने वाला होता है, उस में असाध्य रोग लगा है; उसका भेद कौन समझ सकता है?
Jeremiah17:10 मैं यहोवा मन की खोजता और हृदय को जांचता हूँ ताकि प्रत्येक जन को उसकी चाल-चलन के अनुसार अर्थात उसके कामों का फल दूं।
Jeremiah17:11 जो अन्याय से धन बटोरता है वह उस तीतर के समान होता है जो दूसरी चिडिय़ा के दिए हुए अंडों को सेती है, उसकी आधी आयु में ही वह उस धन को छोड़ जाता है, और अन्त में वह मूढ़ ही ठहरता है।

एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन २७-२८ 
  • मत्ती २१:१-२२