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शनिवार, 16 मार्च 2013

प्रार्थना के उत्तर


   जब हम परमेश्वर के पास प्रार्थना में आते हैं तो कुछ बातें निश्चित हैं और कुछ ऐसी हैं जिनके बारे में हम एकदम से नहीं जान पाते; जैसे, हमें यह परमेश्वर से आशवासन है कि यदि हम प्रभु यीशु में होकर उसे अपना पिता परमेश्वर जानते हैं तो वह हमारी प्रत्येक प्रार्थना को अवश्य सुनेंगा और अपने समय तथा विधि में उसका उत्तर भी देगा। यह उत्तर हाँ भी हो सकता है, ना भी हो सकता है, ’अभी कुछ समय प्रतीक्षा करो’ भी हो सकता है, या कुछ अनूठा और अनेपक्षित भी हो सकता है जैसा दानिय्येल भविष्यद्वकता ने पाया; उस ने अपनी प्रार्थना का जो उत्तर पाया वह ना केवल अद्भुत था वरन उसकी हर कलपना से परे था।

   परमेश्वर के भविष्यद्वकता दानिय्येल ने यर्मियाह भविष्यद्वकता की पुस्तक के अध्ययन से जाना कि इस्त्राएल के दास्तव के निर्धारित 70 वर्ष पूरे होने वाले थे, और वह अपने लोगों के लिए परमेश्वर से प्रार्थना और विनती करने में जुट गया कि इस छुटकारे में विलंब ना हो और परमेश्वर अपनी दया-दृष्टि अपने लोगों इस्त्राएल पर बनाए (दानिय्येल 9:2, 19)। दानिय्येल की प्रार्थना का उत्तर तुरंत आया और अद्भुत रीति से आया। उसके प्रार्थना करते करते ही परमेश्वर का एक प्रधान स्वर्गदूत जिब्राइल उत्तर लेकर उसके पास आया। परमेश्वर का वह उत्तर जितना शीघ्र था, उतना ही विसमयकारी भी था। दानिय्येल ने प्रार्थना करी थी इस्त्राएल की बन्धुवाई के 70 वर्षों के बारे में, परमेश्वर ने उसे भविष्य में होने वाली घटनाओं को ’७० सप्ताह’ की भविष्यवाणी के रूप में दे दिया। दानिय्येल केवल वर्तमान की आस में था किंतु परमेश्वर ने उसे हज़ारों वर्ष आगे आने वाला भविष्य भी दिखा दिया।

   हमारा परिपेक्ष चाहे वर्तमान ही हो, लेकिन परमेश्वर समय और काल से बंधा नहीं है, और हमें वह भी बता सकता है जिसकी हमने कलपना भी ना करी हो। लेकिन यह निश्चित है कि परमेश्वर अपने बच्चों की प्रार्थनाओं को सुनता है, उनका उत्तर देता है और हर बात में सदा उनका भला करता है, जिससे वे जानते और मानते रहें कि वह ही आदर, स्तुति और महिमा के योग्य एकमात्र जीवता और सच्चा परमेश्वर है। - डेव ब्रैनन


परमेश्वर के उत्तर हमारी प्रार्थनाओं की सीमाओं से परे तथा हमारी उम्मीदों से बढ़कर भी हो सकते हैं।

हे प्रभु, सुन ले; हे प्रभु, पाप क्षमा कर; हे प्रभु, ध्यान देकर जो करता है उसे कर, विलम्ब न कर; हे मेरे परमेश्वर, तेरा नगर और तेरी प्रजा तेरी ही कहलाती है; इसलिये अपने नाम के निमित्त ऐसा ही कर। - दानिय्येल 9:19

बाइबल पाठ: दानिय्येल 9:1-9, 20-24
Daniel 9:1 मादी क्षयर्ष का पुत्र दारा, जो कसदियों के देश पर राजा ठहराया गया था,
Daniel 9:2 उसके राज्य के पहिले वर्ष में, मुझ दानिय्येल ने शास्त्र के द्वारा समझ लिया कि यरूशलेम की उजड़ी हुई दशा यहोवा के उस वचन के अनुसार, जो यिर्मयाह नबी के पास पहुंचा था, कुछ वर्षों के बीतने पर अर्थात सत्तर वर्ष के बाद पूरी हो जाएगी।
Daniel 9:3 तब मैं अपना मुख परमेश्वर की ओर कर के गिड़गिड़ाहट के साथ प्रार्थना करने लगा, और उपवास कर, टाट पहिन, राख में बैठ कर वरदान मांगने लगा।
Daniel 9:4 मैं ने अपने परमेश्वर यहोवा से इस प्रकार प्रार्थना की और पाप का अंगीकार किया, हे प्रभु, तू महान और भययोग्य परमेश्वर है, जो अपने प्रेम रखने और आज्ञा मानने वालों के साथ अपनी वाचा को पूरा करता और करूणा करता रहता है,
Daniel 9:5 हम लोगों ने तो पाप, कुटिलता, दुष्टता और बलवा किया है, और तेरी आज्ञाओं और नियमों को तोड़ दिया है।
Daniel 9:6 और तेरे जो दास नबी लोग, हमारे राजाओं, हाकिमों, पूर्वजों और सब साधारण लोगों से तेरे नाम से बातें करते थे, उनकी हम ने नहीं सुनी।
Daniel 9:7 हे प्रभु, तू धर्मी है, परन्तु हम लोगों को आज के दिन लज्जित होना पड़ता है, अर्थात यरूशलेम के निवासी आदि सब यहूदी, क्या समीप क्या दूर के सब इस्राएली लोग जिन्हें तू ने उस विश्वासघात के कारण जो उन्होंने तेरा किया था, देश देश में बरबस कर दिया है, उन सभों को लज्जित होना पड़ता है।
Daniel 9:8 हे यहोवा हम लोगों ने अपने राजाओं, हाकिमों और पूर्वजों समेत तेरे विरुद्ध पाप किया है, इस कारण हम को लज्जित होना पड़ता है।
Daniel 9:9 परन्तु, यद्यपि हम अपने परमेश्वर प्रभु से फिर गए, तौभी तू दयासागर और क्षमा की खानि है।
Daniel 9:20 इस प्रकार मैं प्रार्थना करता, और अपने और अपने इस्राएली जाति भाइयों के पाप का अंगीकार करता हुआ, अपने परमेश्वर यहोवा के सम्मुख उसके पवित्र पर्वत के लिये गिड़गिड़ाकर बिनती करता ही था,
Daniel 9:21 तब वह पुरूष जिब्राएल जिस मैं ने उस समय देखा जब मुझे पहिले दर्शन हुआ था, उसने वेग से उड़ने की आज्ञा पाकर, सांझ के अन्नबलि के समय मुझ को छू लिया; और मुझे समझाकर मेरे साथ बातें करने लगा।
Daniel 9:22 उसने मुझ से कहा, हे दानिय्येल, मैं तुझे बुद्धि और प्रविणता देने को अभी निकल आया हूं।
Daniel 9:23 जब तू गिड़गिड़ाकर बिनती करने लगा, तब ही इसकी आज्ञा निकली, इसलिये मैं तुझे बताने आया हूं, क्योंकि तू अति प्रिय ठहरा है; इसलिये उस विषय को समझ ले और दर्शन की बात का अर्थ बूझ ले।
Daniel 9:24 तेरे लोगों और तेरे पवित्र नगर के लिये सत्तर सप्ताह ठहराए गए हैं कि उनके अन्त तक अपराध का होना बन्द हो, और पापों को अन्त और अधर्म का प्रायश्चित्त किया जाए, और युगयुग की धामिर्कता प्रगट हो; और दर्शन की बात पर और भविष्यवाणी पर छाप दी जाए, और परमपवित्र का अभिषेक किया जाए।

एक साल में बाइबल: 
  • व्यवस्थाविवरण 28-29 
  • मरकुस 14:54-72

शुक्रवार, 15 मार्च 2013

दृष्टिकोण


   अमेरिका के टैक्सस प्रांत के लोग अपने पशु-पालन के बड़े-बड़े फार्म और हर बात में शेखी बघारने के लिए जाने जाते थे और इन बातों से संबंधित उनके विषय में अनेक विनोदी लघु-कथाएं प्रचलित हैं। ऐसी ही कथाओं में से मेरी एक प्रीय कथा है:  "टैक्सस का एक फार्म मालिक जर्मनी गया हुआ था और वहां के एक पशु-पालन फार्म के मालिक को उसके काम के बारे में सलाह देने लगा। इसी वार्तालाप के दौरान टेक्सस वाले ने जर्मनी वाले से पूछा कि उसकी ज़मीन का नाप कितना है; जर्मनी वाले ने उत्तर दिया ’एक वर्ग मील’। फिर जर्मनी वाले ने टैक्सस वाले से भी यही बात पूछी, तो टैक्सस वाले ने अपने अंदाज़ में उत्तर दिया, ’यदि मैं सूर्योदय के साथ अपनी गाड़ी में चलना आरंभ करूँ, तो सूर्यास्त होने तक भी मैं अपनी ज़मीन के एक छोर से दूसरे छोर तक नहीं पहुँच पाता।’ जर्मनी वाले ने संवेदना में सिर हिलाते हुए उत्तर दिया, ’ मैं आपकी व्यथा समझ सकता हूँ; मेरे पास भी कभी ऐसी ही परेशान कर देने वाली पुरानी और बेकार गाड़ी हुआ करती थी!’ "

   मज़ाक तो अपने स्थान पर अच्छा है, लेकिन साथ ही यह कहानी हमें सही दृष्टिकोण के महत्व को भी सिखाती है। यह सही दृष्टिकोण होना केवल सांसारिक जीवन की बातों में ही नहीं, आत्मिक जीवन की बातों में भी महत्वपूर्ण है। परमेश्वर के वचन बाइबल में ग़लत दृष्टिकोण रखने वाली एक मसीही मण्डली का उल्लेख है - प्रकाशितवाक्य 3:14-22। अपने बाह्य स्वरूप में वह मण्डली काफी धनी थी। उनके पास सांसारिक वस्तुओं की बहुतायत थी और वे सोचने लगे थे कि अब उन्हें किसी भी बात की आवश्यकता नहीं है, यहाँ तक कि प्रभु यीशु की भी नहीं, जिसे उन्होंने मण्डली के बाहर कर दिया था।

   लेकिन प्रभु यीशु का दृष्टिकोण उनके लिए भिन्न था। वह उनकी वास्तविक दशा भली-भांति जानता था। उनके दुर्व्यवहार के बावजूद वह उनसे प्रेम रखता था, उनका भला चाहता था और वापस उनमें आकर उनके साथ संगति करना चाहता था। प्रभु यीशु ने उन्हें उन की वास्तविक दशा बताई: "...यह नहीं जानता, कि तू अभागा और तुच्‍छ और कंगाल और अन्‍धा, और नंगा है" (पद 17), उन्हें सलाह दी कि वे मन फिराएं और उससे असली और कभी नष्ट ना होने वाला धन ले लें, अर्थात पवित्रता, अच्छा चरित्र, धार्मिकता और बुद्धिमता तथा उनके पास वापस अन्दर आकर उनके साथ संगति करने की अपनी इच्छा प्रगट करी।

   कहीं सांसारिक उपलब्धियों और बातों की चकाचौंध ने हमें भी तो अपनी वास्तविक दशा से अनभिज्ञ बनाकर किसी गलत दृष्टिकोण में तो नहीं फंसा लिया है? प्रभु यीशु का निमंत्रण संसार के प्रत्येक जन के लिए खुला है, वह हर एक से प्रेम रखता है, उसने हर एक जन के पापों के लिए अपने प्राण दिए और आज स्वेच्छा से उसके पास आने वाले हर जन को वह पापों की क्षमा, उद्धार और परमेश्वर की संगति में अनन्त जीवन देने को तैयार है; उनके पाप स्वभाव के स्थान पर उन्हें अपनी धार्मिकता का स्वभाव देने को तैयार है।

   सही दृष्टिकोण अपनाएं, वास्तविकता को जांचें-परखें और पहचानें और प्रभु यीशु से अनन्त आशीषों को प्राप्त कर लें। - जो स्टोवैल


सबसे ग़रीब वही है जिसके पास केवल संसार का धन ही है।

तू जो कहता है, कि मैं धनी हूं, और धनवान हो गया हूं, और मुझे किसी वस्तु की घटी नहीं, और यह नहीं जानता, कि तू अभागा और तुच्‍छ और कंगाल और अन्‍धा, और नंगा है। - प्रकाशितवाक्य 3:17

बाइबल पाठ: प्रकाशितवाक्य 3:14-22
Revelation 3:14 और लौदीकिया की कलीसिया के दूत को यह लिख, कि, जो आमीन, और विश्वासयोग्य, और सच्चा गवाह है, और परमेश्वर की सृष्‍टि का मूल कारण है, वह यह कहता है।
Revelation 3:15 कि मैं तेरे कामों को जानता हूं कि तू न तो ठंडा है और न गर्म: भला होता कि तू ठंडा या गर्म होता।
Revelation 3:16 सो इसलिये कि तू गुनगुना है, और न ठंडा है और न गर्म, मैं तुझे अपने मुंह में से उगलने पर हूं।
Revelation 3:17 तू जो कहता है, कि मैं धनी हूं, और धनवान हो गया हूं, और मुझे किसी वस्तु की घटी नहीं, और यह नहीं जानता, कि तू अभागा और तुच्‍छ और कंगाल और अन्‍धा, और नंगा है।
Revelation 3:18 इसी लिये मैं तुझे सम्मति देता हूं, कि आग में ताया हुआ सोना मुझ से मोल ले, कि धनी हो जाए; और श्वेत वस्‍त्र ले ले कि पहिन कर तुझे अपने नंगेपन की लज्ज़ा न हो; और अपनी आंखों में लगाने के लिये सुर्मा ले, कि तू देखने लगे।
Revelation 3:19 मैं जिन जिन से प्रीति रखता हूं, उन सब को उलाहना और ताड़ना देता हूं, इसलिये सरगर्म हो, और मन फिरा।
Revelation 3:20 देख, मैं द्वार पर खड़ा हुआ खटखटाता हूं; यदि कोई मेरा शब्द सुन कर द्वार खोलेगा, तो मैं उसके पास भीतर आ कर उसके साथ भोजन करूंगा, और वह मेरे साथ।
Revelation 3:21 जो जय पाए, मैं उसे अपने साथ अपने सिंहासन पर बैठाऊंगा, जैसा मैं भी जय पा कर अपने पिता के साथ उसके सिंहासन पर बैठ गया।
Revelation 3:22 जिस के कान हों वह सुन ले कि आत्मा कलीसियाओं से क्या कहता है।

एक साल में बाइबल: 
  • व्यवस्थाविवरण 26-27 
  • मरकुस 14:27-53


गुरुवार, 14 मार्च 2013

प्रश्न और उत्तर


   मेरे एक मित्र का वयस्क पुत्र एक दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गया और उसकी देखभाल करने के लिए मेरे मित्र को दो बार नौकरी छोड़नी पड़ी। उसी वर्ष उसकी पत्नि भी ३० वर्ष के वैवाहिक जीवन के बाद एक बीमारी से जाती रही। तब से उसके पास कोई उत्तर नहीं होता जब उसका पुत्र प्रश्न करता है कि यह सब उनके साथ क्यों हुआ।

   लेकिन उसने अपने एक स्वपन के बारे में बताया जिसे देखने के बाद वह बहुत सन्तुष्ट और शांत अनुभव करने लगा। उसने स्वपन देखा कि वह एक ऐसे स्थान पर है जहाँ बहुत प्रकाश है, बहुत से लोगों की भीड़ है और एक व्यक्ति उसके सभी प्रश्नों के उत्तर दे रहा है। प्रत्येक उत्तर इतना सटीक और सार्थक था कि उसकी सारी शंकाएं जाती रहीं और वह यह भी समझ सका कि क्यों पृथ्वी पर वह इन उत्तरों को नहीं पा सका। फिर उसी स्वपन में वह अपने पुत्र के पास आया, लेकिन जब उसने अपने पुत्र को वही उत्तर समझाने चाहे तो उसे कोई भी उत्तर याद नहीं आया, लेकिन इससे भी उसे कोई परेशानी नहीं हुई। और तब वह जाग उठा।

   मेरे मित्र के अनुभव ने मुझे परमेश्वर के एक मित्र का स्मरण कराया जिसके प्रश्न भी अनुत्तरित थे (अय्युब 7:20-21)। अन्ततः जब परमेश्वर ने अय्युब से अपनी सृष्टि के अद्भुत आश्चर्यों के दर्शन में होकर बात करी तब अय्युब परमेश्वर की योजना को समझने पाया और उसने अपने प्रश्नों के उत्तर से भी कुछ उत्तम प्राप्त किया - अनन्त जीवन। तब ही अय्युब शांति पा सका और समझ सका कि परमेश्वर की हर योजना भली ही है और परमेश्वर पर हर परिस्थिति में और हर बात के लिए विश्वास रखना ही सबसे उत्तम बात है। - मार्ट डी हॉन


प्रश्नों के उत्तर पाने से भी भला है उस परमेश्वर पर विश्वास रखना जिसके पास उत्तर भी हैं और कारण भी।

मैं कानों से तेरा समाचार सुना था, परन्तु अब मेरी आंखें तुझे देखती हैं; - अय्युब 42:5

बाइबल पाठ: अय्युब 42:1-6
Job 42:1 तब अय्यूब ने यहोवा को उत्तर दिया;
Job 42:2 मैं जानता हूँ कि तू सब कुछ कर सकता है, और तेरी युक्तियों में से कोई रुक नहीं सकती।
Job 42:3 तू कौन है जो ज्ञान रहित हो कर युक्ति पर परदा डालता है? परन्तु मैं ने तो जो नहीं समझता था वही कहा, अर्थात जो बातें मेरे लिये अधिक कठिन और मेरी समझ से बाहर थीं जिन को मैं जानता भी नहीं था।
Job 42:4 मैं निवेदन करता हूं सुन, मैं कुछ कहूंगा, मैं तुझ से प्रश्न करता हूँ, तू मुझे बता दे।
Job 42:5 मैं कानों से तेरा समाचार सुना था, परन्तु अब मेरी आंखें तुझे देखती हैं;
Job 42:6 इसलिये मुझे अपने ऊपर घृणा आती है, और मैं धूलि और राख में पश्चात्ताप करता हूँ।

एक साल में बाइबल: 
  • व्यवस्थाविवरण 23-25 
  • मरकुस 14:1-26


बुधवार, 13 मार्च 2013

ऊर्जा का स्त्रोत


   चौकलेट सामान्यतः लोगों का एक पसंदीदा पदार्थ है जिससे मिठास और उर्जा दोनो ही प्राप्त होते हैं। ब्रिटिश औटो टैक्निशियन्स ने इस मीठे खाद्य पदार्थ का एक अनूठा उपयोग निकाला है। वारविक विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने एक रेसिंग कार बनाई है जो वनस्पति तेलों और चौकलेट से चलती है। इस अनोखे इन्धन से चलने वाली यह कार 135 मील प्रति घंटा की रफतार तक जा सकती है।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में भी भोजन से मिली ऊर्जा का एक विलक्षण उदाहरण दिया गया है। कार्मेल पर्वत पर परमेश्वर ने एलियाह के द्वारा एक अद्भुत और महान कार्य करवाया और यहोवा ही परमेश्वर है प्रमाणित करने के लिए एलियाह के कहने पर आसमान से आग गिराई और वेदी पर रखी हुई बलि को भस्म कर दिया। इस आत्मिक पराकाष्ठा के बाद एलियाह को हत्या की धमकी मिली जिससे वह घोर निराशा में आ गया और वहाँ से भाग खड़ा हुआ। एलियाह की निराशा के समय में परमेश्वर ने एक स्वर्गदूत द्वारा उसे भोजन और जल पहुँचाया; उस भोजन से मिली ऊर्जा असाधारण थी: "...और उसी भोजन से बल पाकर चालीस दिन रात चलते चलते परमेश्वर के पर्वत होरेब को पहुंचा" (1 राजा 19:8)।

   जैसे हमारे शरीरों को शारीरिक बल के लिए ऊर्जा की आवश्यकता होती है, वैसे ही हमारी आत्मा को भी आत्मिक बल के लिए आत्मिक ऊर्जा कि आवश्यकता होती है। परमेश्वर का वचन बाइबल ही वह आत्मिक भोजन है जो आत्मा को सामर्थ देता है। इसीलिए भजनकार ने परमेश्वर के वचन के लिए लिखा: "यहोवा की व्यवस्था खरी है, वह प्राण को बहाल कर देती है; यहोवा के नियम विश्वासयोग्य हैं, साधारण लोगों को बुद्धिमान बना देते हैं; यहोवा के उपदेश सिद्ध हैं, हृदय को आनन्दित कर देते हैं; यहोवा की आज्ञा निर्मल है, वह आंखों में ज्योति ले आती है;" (भजन 19:7-8)। 

   प्रभु यीशु के लिए परमेश्वर की आज्ञाकारिता ही उसका भोजन अर्थात ऊर्जा का स्त्रोत थी: "यीशु ने उन से कहा, मेरा भोजन यह है, कि अपने भेजने वाले की इच्छा के अनुसार चलूं और उसका काम पूरा करूं" (यूहन्ना 4:34); और प्रभु यीशु ने कहा: "जिस के पास मेरी आज्ञा है, और वह उन्हें मानता है, वही मुझ से प्रेम रखता है, और जो मुझ से प्रेम रखता है, उस से मेरा पिता प्रेम रखेगा, और मैं उस से प्रेम रखूंगा, और अपने आप को उस पर प्रगट करूंगा।...यदि कोई मुझ से प्रेम रखे, तो वह मेरे वचन को मानेगा, और मेरा पिता उस से प्रेम रखेगा, और हम उसके पास आएंगे, और उसके साथ वास करेंगे" (यूहन्ना 14:21, 23)।

   परमेश्वर के वचन बाइबल को अपनी आत्मिक ऊर्जा का स्त्रोत बना लीजिए, वह जीवन की हर परिस्थिति में काम आएगी, सही मार्गदर्शन देगी और आपको परमेश्वर की संगति में बनाए रखेगी। - डेनिस फिशर


परमेश्वर अपने वचन के द्वारा हमारा पोषण करता है।

हर एक पवित्रशास्‍त्र परमेश्वर की प्रेरणा से रचा गया है और उपदेश, और समझाने, और सुधारने, और धर्म की शिक्षा के लिये लाभदायक है। - 2 तिमुथियुस 3:16

बाइबल पाठ: 1 राजा 19:1-8
1 Kings 19:1 तब अहाब ने ईज़ेबेल को एलिय्याह के सब काम विस्तार से बताए कि उसने सब नबियों को तलवार से किस प्रकार मार डाला।
1 Kings 19:2 तब ईज़ेबेल ने एलिय्याह के पास एक दूत के द्वारा कहला भेजा, कि यदि मैं कल इसी समय तक तेरा प्राण उनका सा न कर डालूं तो देवता मेरे साथ वैसा ही वरन उस से भी अधिक करें।
1 Kings 19:3 यह देख एलिय्याह अपना प्राण ले कर भागा, और यहूदा के बेर्शेबा को पहुंच कर अपने सेवक को वहीं छोड़ दिया।
1 Kings 19:4 और आप जंगल में एक दिन के मार्ग पर जा कर एक झाऊ के पेड़ के तले बैठ गया, वहां उसने यह कह कर अपनी मृत्यु मांगी कि हे यहोवा बस है, अब मेरा प्राण ले ले, क्योंकि मैं अपने पुरखाओं से अच्छा नहीं हूँ।
1 Kings 19:5 वह झाऊ के पेड़ तले लेटकर सो गया और देखो एक दूत ने उसे छूकर कहा, उठ कर खा।
1 Kings 19:6 उसने दृष्टि कर के क्या देखा कि मेरे सिरहाने पत्थरों पर पकी हुई एक रोटी, और एक सुराही पानी धरा है; तब उसने खाया और पिया और फिर लेट गया।
1 Kings 19:7 दूसरी बार यहोवा का दूत आया और उसे छूकर कहा, उठ कर खा, क्योंकि तुझे बहुत भारी यात्रा करनी है।
1 Kings 19:8 तब उसने उठ कर खाया पिया; और उसी भोजन से बल पाकर चालीस दिन रात चलते चलते परमेश्वर के पर्वत होरेब को पहुंचा।

एक साल में बाइबल: 
  • व्यवस्थाविवरण 20-22 
  • मरकुस 13:21-37


मंगलवार, 12 मार्च 2013

दर्शन


   संसार की सबसे शक्तिशाली दूरबीनों में से एक ’ग्रैन टेलिस्कोपियो कैनरिस’ कैनरी द्वीप समूह के ला पालोमा में एक शान्त हो चुके ज्वालामुखी के शिखर पर स्थित है। इसका उद्घाटन सन २००९ में स्पेन के राजा कार्लोस ने किया था। इस दूरबीन से नक्षत्र और सितारे का बहुत ही स्पष्ट दिखाई देते हैं क्योंकि 7,870 फीट की ऊँचाई पर स्थित होने के कारण यह बादलों के ऊपर है, वहाँ की हवा साफ और बिना नमी की है तथा हवा के प्रवाह में हलचल नहीं होती। भूमध्य रेखा के निकट स्थित होने के कारण खगोलशास्त्रियों के लिए इस दूरबीन से समस्त उत्तरी खगोलीय गोलार्ध तथा दक्षिणी खगोलीय गोलार्ध के कुछ भाग का अध्ययन करना संभव है।

   प्रभु यीशु भी अपने चेलों को परमेश्वर को समर्पित जीवन के गुण सिखाने के लिए एक पहाड़ पर ले गए। वहाँ पर उन्होंने चेलों को सिखाया कि उनका व्यवहार उनके लिए परमेश्वर के दर्शन को निर्धारित करेगा। परमेश्वर को स्पष्ट जानने के लिए पहाड़ की नहीं वरन चरित्र और परमेश्वर की आज्ञाकारिता कि ऊँचाई आवश्यक है। प्रभु यीशु के उस पहाड़ी उपदेश में से एक वाक्य है: "धन्य हैं वे, जिन के मन शुद्ध हैं, क्योंकि वे परमेश्वर को देखेंगे" (मत्ती 5:8)। यह उन थोड़े से लोगों के लिए नहीं है जो अपने प्रयासों से इसे संभव करना चाहते हैं, वरन उन सभी के लिए है जो दीन और नम्र होकर प्रभु यीशु को स्वीकार कर लेते हैं।

   मन की शुद्धि उन्हीं के लिए संभव है जिनके पाप प्रभु यीशु में क्षमा हो गए हों। यह पाप क्षमा का अवसर आज भी संसार के सब लोगों के लिए परमेश्वर की ओर से सेंत-मेंत उपलब्ध है। परमेश्वर का संसार के सभी लोगों को आश्वासन है कि "यदि हम अपने पापों को मान लें, तो वह हमारे पापों को क्षमा करने, और हमें सब अधर्म से शुद्ध करने में विश्वासयोग्य और धर्मी है" (1 यूहन्ना 1:9)।

   पहाड़ की ऊँचाई सितारों को देखने के लिए एक उत्तम स्थान है, लेकिन परमेश्वर के दर्शन के लिए पाप से क्षमा पाया हुआ तथा पाप से परिवर्तित हृदय चाहिए। क्या आपने परमेश्वर के आश्वासन को मानकर प्रभु यीशु को अपने उद्धारकर्ता के रूप में स्वीकार कर लिया है? - डेविड मैक्कैसलैंड


परमेश्वर के स्पष्ट दर्शन पाने के लिए प्रभु यीशु पर दृष्टि केंद्रित करें।

धन्य हैं वे, जिन के मन शुद्ध हैं, क्योंकि वे परमेश्वर को देखेंगे। - मत्ती 5:8

बाइबल पाठ: मत्ती 5:1-12
Matthew 5:1 वह इस भीड़ को देखकर, पहाड़ पर चढ़ गया; और जब बैठ गया तो उसके चेले उसके पास आए।
Matthew 5:2 और वह अपना मुंह खोल कर उन्हें यह उपदेश देने लगा,
Matthew 5:3 धन्य हैं वे, जो मन के दीन हैं, क्योंकि स्वर्ग का राज्य उन्‍हीं का है।
Matthew 5:4 धन्य हैं वे, जो शोक करते हैं, क्योंकि वे शांति पाएंगे।
Matthew 5:5 धन्य हैं वे, जो नम्र हैं, क्योंकि वे पृथ्वी के अधिकारी होंगे।
Matthew 5:6 धन्य हैं वे जो धर्म के भूखे और प्यासे हैं, क्योंकि वे तृप्त किये जाएंगे।
Matthew 5:7 धन्य हैं वे, जो दयावन्‍त हैं, क्योंकि उन पर दया की जाएगी।
Matthew 5:8 धन्य हैं वे, जिन के मन शुद्ध हैं, क्योंकि वे परमेश्वर को देखेंगे।
Matthew 5:9 धन्य हैं वे, जो मेल करवाने वाले हैं, क्योंकि वे परमेश्वर के पुत्र कहलाएंगे।
Matthew 5:10 धन्य हैं वे, जो धर्म के कारण सताए जाते हैं, क्योंकि स्वर्ग का राज्य उन्‍हीं का है।
Matthew 5:11 धन्य हो तुम, जब मनुष्य मेरे कारण तुम्हारी निन्दा करें, और सताएं और झूठ बोल बोलकर तुम्हरो विरोध में सब प्रकार की बुरी बात कहें।
Matthew 5:12 आनन्‍दित और मगन होना क्योंकि तुम्हारे लिये स्वर्ग में बड़ा फल है इसलिये कि उन्होंने उन भविष्यद्वक्ताओं को जो तुम से पहिले थे इसी रीति से सताया था।

एक साल में बाइबल: 
  • व्यवस्थाविवरण 17-19 
  • मरकुस 13:1-20


सोमवार, 11 मार्च 2013

बहुतायत


   घर के बाहर से अचानक ही खुशी से चिल्लाने और शोर मचाने की आवाज़ें आने लगीं, और मैंने जानना चाहा कि ऐसा क्या हुआ है जिस से बाहर इतना आनन्द है। मैंने खिड़की के पर्दों के बीच से झांककर बाहर देखा तो पाया कि सड़क के किनारे लगा आग बुझाने के लिए पानी लाने वाला मोटा पाइप फट गया है और उसमें से पानी बड़ी तेज़ी से और मोटी धार में निकल रहा है और दो बच्चे उस बहते पानी में मज़े से खेल रहे हैं।

   उस प्रवाह को देखकर मुझे स्मरण आया कि कैसे परमेश्वर भी अपने बच्चों पर अपनी आशीषें प्रवाहित करता रहता है, और यह कितना आवश्यक है कि हम स्मरण रखें कि "धन्य है प्रभु, जो प्रति दिन हमारा बोझ उठाता है; वही हमारा उद्धारकर्ता ईश्वर है" (भजन 68:19)।

   यद्यपि मैं जानती हूँ कि परमेश्वर ने अनगिनित आशीषें मेरे जीवन में उण्डेली हैं, लेकिन जब अचानक ही कार खराब हो जाती है, या मेरा परिवार फ्लू संक्रमण से बीमार हो जाता है, या कहीं रिश्तों में खटास आने लगती है, या किसी बात से असन्तोष मन में आ जाता है तब परमेश्वर की आशीषों के प्रति मेरी दृष्टि धुंधला जाती है। तब वे आशीषें मोटी धार और तेज़ प्रवाह के समान नहीं वरन नल के टपकते हुए प्रवाह के समान लगने लगती हैं।

   संभवतः इसी कारण दाऊद ने भजन 103 में लिखा कि "हे मेरे मन, यहोवा को धन्य कह, और उसके किसी उपकार को न भूलना" (भजन 103:2)। और फिर हमारी सहायता के लिए वह परमेश्वर से मिली आशीषों की सूची देता है; वह हमें स्मरण दिलाता है कि परमेश्वर हमारे अधर्म को क्षमा करता है, हमें बीमारियों से स्वस्थ करता है, हमारे जीवन को नाश से बचाता है, हमारे सिर पर करुणा और दया का मुकुट बान्धता है और हमारी लालसाओं को उत्तम पदार्थों से तृप्त करता है (भजन 103:3-5)।

   आज यह समय है कि हम अपनी अन्धेरों, कुंठाओं तथा निराशाओं से बाहर झांक कर परमेश्वर से हर समय बहुतायत से मिलने वाली जीवन की देखरेख और आशीषों को स्मरण करें, उनके लिए उसका धन्यवाद करें और उसमें अपने विश्वास को पुनः दृढ़ करें। - जेनिफर बेन्सन शुल्ट


परमेश्वर से मिली आशीषों की गिनती को जोड़ के देखिए; इससे आपका आनन्द कई गुणा बढ़ जाएगा।

हे मेरे मन, यहोवा को धन्य कह, और उसके किसी उपकार को न भूलना। - भजन 103:2

बाइबल पाठ: भजन 103:1-13
Psalms 103:1 हे मेरे मन, यहोवा को धन्य कह; और जो कुछ मुझ में है, वह उसके पवित्र नाम को धन्य कहे!
Psalms 103:2 हे मेरे मन, यहोवा को धन्य कह, और उसके किसी उपकार को न भूलना।
Psalms 103:3 वही तो तेरे सब अधर्म को क्षमा करता, और तेरे सब रोगों को चंगा करता है,
Psalms 103:4 वही तो तेरे प्राण को नाश होने से बचा लेता है, और तेरे सिर पर करूणा और दया का मुकुट बान्धता है,
Psalms 103:5 वही तो तेरी लालसा को उत्तम पदार्थों से तृप्त करता है, जिस से तेरी जवानी उकाब की नाईं नई हो जाती है।।
Psalms 103:6 यहोवा सब पिसे हुओं के लिये धर्म और न्याय के काम करता है।
Psalms 103:7 उसने मूसा को अपनी गति, और इस्राएलियों पर अपने काम प्रगट किए।
Psalms 103:8 यहोवा दयालु और अनुग्रहकरी, विलम्ब से कोप करने वाला और अति करूणामय है।
Psalms 103:9 वह सर्वदा वादविवाद करता न रहेगा, न उसका क्रोध सदा के लिये भड़का रहेगा।
Psalms 103:10 उसने हमारे पापों के अनुसार हम से व्यवहार नहीं किया, और न हमारे अधर्म के कामों के अनुसार हम को बदला दिया है।
Psalms 103:11 जैसे आकाश पृथ्वी के ऊपर ऊंचा है, वैसे ही उसकी करूणा उसके डरवैयों के ऊपर प्रबल है।
Psalms 103:12 उदयाचल अस्ताचल से जितनी दूर है, उसने हमारे अपराधों को हम से उतनी ही दूर कर दिया है।
Psalms 103:13 जैसे पिता अपने बालकों पर दया करता है, वैसे ही यहोवा अपने डरवैयों पर दया करता है।

एक साल में बाइबल: 
  • व्यवस्थाविवरण 14-16 
  • मरकुस 12:28-44


रविवार, 10 मार्च 2013

प्रार्थना


   मैंने एक माँ द्वारा अपने बच्चों के लिए स्थापित किए गए ’5 मिनिट’ के नियम के बारे में पढ़ा। उस माँ ने अपने घर में यह नियम बनाया हुआ था कि प्रतिदिन स्कूल जाने के लिए निकलने से 5 मिनिट पहले सब बच्चों को तैयार होकर माँ के पास एकत्रित हो जाना है। उस समय में वह उन में से प्रत्येक के लिए उनका नाम लेकर प्रार्थना करती, दिन भर के लिए परमेश्वर की सुरक्षा तथा आशीष उनपर माँगती, फिर उनमें से प्रत्येक को चुम्बन देकर स्कूल के लिए विदा करती। यदि पड़ौस का कोई बच्चा उस समय वहाँ होता तो यही प्रार्थना और सप्रेम विदाई उस बच्चे के लिए भी की जाती। कई वर्ष बाद एक बच्चे ने बताया कि इस अनुभव ने उसके मन में इस बात को स्थापित किया कि प्रार्थना दैनिक जीवन के लिए कितनी आवश्यक है।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में भजन 102 का लेखक प्रार्थना के महत्व को जानता था। इस भजन के आरंभ में लिखा गया है: "दीन जन की उस समय की प्रार्थना जब वह दुख का मारा अपने शोक की बातें यहोवा के सामेन खोलकर कहता हो।" भजनकार ने लिखा: "हे यहोवा, मेरी प्रार्थना सुन; मेरी दोहाई तुझ तक पहुंचे! मेरे संकट के दिन अपना मुख मुझ से न छिपा ले; अपना कान मेरी ओर लगा; जिस समय मैं पुकारूं, उसी समय फुर्ती से मेरी सुन ले!" (भजन 102:1-2)। अपनी दोहाई देने के बाद भजनकार लिखता है: "क्योंकि यहोवा ने अपने ऊंचे और पवित्र स्थान से दृष्टि कर के स्वर्ग से पृथ्वी की ओर देखा है, ताकि बन्धुओं का कराहना सुने, और घात होन वालों के बन्धन खोले;" (भजन 102:19-20)।

   परमेश्वर आपकी चिंता करता है और आपकी प्रार्थना सुनना चाहता है। चाहे आपकी प्रार्थना छोटी हो या आप समय लगाकर अपने हृदय की वेदना उसे बयान करें, प्रतिदिन प्रार्थना में उसके साथ समय अवश्य बिताएं। यह ना केवल आपके लिए लाभकारी और आशीषमय होगा, वरन आपका यह व्यवहार और विश्वास आपके किसी निकट जन या परिवार जन के लिए भी एक अच्छा उदाहरण बन सकेगा और उसके जीवन को आशीषित करेगा। - ऐने सेटास


प्रार्थना, परमेश्वर की आवश्यकता हमारे जीवनों में होने की स्वीकृति है।

वह लाचार की प्रार्थना की ओर मुंह करता है, और उनकी प्रार्थना को तुच्छ नहीं जानता। - भजन 102:17

बाइबल पाठ: भजन 102:1-20
Psalms 102:1 हे यहोवा, मेरी प्रार्थना सुन; मेरी दोहाई तुझ तक पहुंचे!
Psalms 102:2 मेरे संकट के दिन अपना मुख मुझ से न छिपा ले; अपना कान मेरी ओर लगा; जिस समय मैं पुकारूं, उसी समय फुर्ती से मेरी सुन ले!
Psalms 102:3 क्योंकि मेरे दिन धुएं की नाईं उड़े जाते हैं, और मेरी हडि्डयां लुकटी के समान जल गई हैं।
Psalms 102:4 मेरा मन झुलसी हुई घास की नाईं सूख गया है; और मैं अपनी रोटी खाना भूल जाता हूं।
Psalms 102:5 कराहते कराहते मेरा चमड़ा हडि्डयों में सट गया है।
Psalms 102:6 मैं जंगल के धनेश के समान हो गया हूं, मैं उजड़े स्थानों के उल्लू के समान बन गया हूं।
Psalms 102:7 मैं पड़ा पड़ा जागता रहता हूं और गौरे के समान हो गया हूं जो छत के ऊपर अकेला बैठता है।
Psalms 102:8 मेरे शत्रु लगातार मेरी नामधराई करते हैं, जो मेरे विराध की धुन में बावले हो रहे हैं, वे मेरा नाम ले कर शपथ खाते हैं।
Psalms 102:9 क्योंकि मैं ने रोटी की नाईं राख खाई और आंसू मिला कर पानी पीता हूं।
Psalms 102:10 यह तेरे क्रोध और कोप के कारण हुआ है, क्योंकि तू ने मुझे उठाया, और फिर फेंक दिया है।
Psalms 102:11 मेरी आयु ढलती हुई छाया के समान है; और मैं आप घास की नाईं सूख चला हूं।
Psalms 102:12 परन्तु हे यहोवा, तू सदैव विराजमान रहेगा; और जिस नाम से तेरा स्मरण होता है, वह पीढ़ी से पीढ़ी तक बना रहेगा।
Psalms 102:13 तू उठ कर सिय्योन पर दया करेगा; क्योंकि उस पर अनुग्रह करने का ठहराया हुआ समय आ पहुंचा है।
Psalms 102:14 क्योंकि तेरे दास उसके पत्थरों को चाहते हैं, और उसकी धूलि पर तरस खाते हैं।
Psalms 102:15 इसलिये अन्यजातियां यहोवा के नाम का भय मानेंगी, और पृथ्वी के सब राजा तेरे प्रताप से डरेंगे।
Psalms 102:16 क्योंकि यहोवा ने सिय्योन को फिर बसाया है, और वह अपनी महिमा के साथ दिखाई देता है;
Psalms 102:17 वह लाचार की प्रार्थना की ओर मुंह करता है, और उनकी प्रार्थना को तुच्छ नहीं जानता।
Psalms 102:18 यह बात आने वाली पीढ़ी के लिये लिखी जाएगी, और एक जाति जो सिरजी जाएगी वही याह की स्तुति करेगी।
Psalms 102:19 क्योंकि यहोवा ने अपने ऊंचे और पवित्र स्थान से दृष्टि कर के स्वर्ग से पृथ्वी की ओर देखा है,
Psalms 102:20 ताकि बन्धुओं का कराहना सुने, और घात होन वालों के बन्धन खोले;

एक साल में बाइबल: 
  • व्यवस्थाविवरण 11-13 
  • मरकुस 12:1-27