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रविवार, 31 मार्च 2013

असत्य?


   बात 1980 के दशक की है, कंप्यूटर प्रोग्राम बनाने वाले दो भाईयों जॉन तथा थौमस नौल ने कंप्यूटर प्रोग्राम द्वारा चित्रों में परिवर्तन और सुधार करने के प्रयोग आरंभ किए। लोगों और सॉफ्टवेयर कंपनियों ने उन्हें सनकी कहा, उनका उपहास किया क्योंकि उन दिनों में फोटो उतारने वाले कंप्यूटर प्रयोग नहीं करते थे। उन भाइयों ने अपने प्रोग्राम को पहले-पहल नाम दिया ’डिस्पले’, फिर उसे बदल कर ’इमाजिनेटर’ कहा और अन्ततः प्रोग्राम का नाम हुआ फोटोशॉप! आज संसार भर में फोटोशॉप घर पर ही छोटी-मोटी छेड़-छाड़ से लेकर व्यावसायिक स्तर पर चित्रों को संवारने, सुधारने, उनमें कई परिवर्तन करने के लिए उपयोग होने वाला एक बहुत लोकप्रीय और उपयोगी प्रोग्राम है, यहाँ तक कि जब कोई चित्र बहुत अच्छा या अद्भुत दिखता है तो लोग कहते हैं कि अवश्य ही वह ’फोटोशॉप’ किया हुआ चित्र होगा!

   संसार के इतिहास की उस पहली ईस्टर प्रातः जब कुछ स्त्रियां प्रभु यीशु की देह पर सुगंधित द्रव्य लगाने के लिए उसकी कब्र पर पहुँचीं तो उन्हें कब्र खाली मिली, और वहाँ बैठे स्वर्गदूत ने उन से कहा "वह यहां नहीं, परन्तु जी उठा है; स्मरण करो; कि उसने गलील में रहते हुए तुम से कहा था" (लूका 24:6)। जब उन स्त्रियों ने जाकर यह बात प्रभु यीशु के चेलों को बताई तो "उन की बातें उन्हें कहानी सी समझ पड़ीं, और उन्होंने उन की प्रतीति न की" (लूका 24:11)। स्त्रियों द्वारा लाए गए समाचार के प्रति उन चेलों की आरंभिक प्रतिक्रीया वही थी जो इस बात को सुनकर आज भी संसार के लोगों की होती है - बकवास! पागलपन! अविश्वसनीय!

   यदि किसी ने घटनाक्रम और प्रमाणों को छेड़-छाड़ करके बदल दिया है और प्रभु यीशु का पुनरुत्थान चतुराई से लोगों पर थोपी गई एक मनगढ़ंत कहानी है, तो संसार की अन्य किंवदंतीयों के समान, पिछले लगभग दो हज़ार वर्षों से संसार भर में करोड़ों लोगों का हर साल इस दिन इस पुनरुत्थान के आनन्द को मनाना एक झूठी कहानी को मनाना ही है। किंतु यदि प्रभु यीशु वास्तव में फिर से जी उठा है तो फिर जो कुछ उसने पाप क्षमा, जीवन और मन परिवर्तन की अनिवार्यता और अनन्त जीवन के बारे में कहा वह भी सत्य है। प्रभु यीशु की खाली कब्र और प्रभु यीशु के संबंध में इतिहास के प्रमाण संसार के सामने खुले हैं, कोई भी उन्हें देख सकता है, जाँच सकता है, अपने निषकर्ष स्वयं निकाल सकता है।

   यह पुनरुत्थान एक अकाट्य सत्य है जिसे कितने ही लोगों ने आज़मा के देखा और जाना है कि वास्तव में प्रभु यीशु मारा गया, गाड़ा गया और तीसरे दिन मुर्दों से जी भी उठा। उसकी कब्र खाली है और उसके अनुयायीयों के बदले हुए जीवन प्रमाण हैं कि वह अपने अनुयायीयों के मनों में रहता है।

   इस सत्य के अर्थ और परिणामों पर ज़रा विचार कीजिए; प्रभु यीशु के जीवन और शिक्षाओं का अध्ययन कीजिए, सत्य स्वयं ही आपके सामने होगा। प्रभु यीशु और पाप क्षमा के उसके प्रेम भरे निमंत्रण को नज़रंदाज़ करके आप एक ऐसा जोखिम उठा रहे हैं, जिसकी फिर कोई भरपाई नहीं है। - डेविड मैक्कैसलैंड


प्रभु यीशु का पुनरुत्थान एक ऐतिहासिक सत्य है जो प्रत्युत्तर में विश्वास की माँगता है।

यह बात सच और हर प्रकार से मानने के योग्य है, कि मसीह यीशु पापियों का उद्धार करने के लिये जगत में आया - 1 तिमुथियुस 1:15

बाइबल पाठ: लूका 24:1-12
Luke 24:1 परन्तु सप्‍ताह के पहिले दिन बड़े भोर को वे उन सुगन्‍धित वस्‍तुओं को जो उन्होंने तैयार की थीं, ले कर कब्र पर आईं।
Luke 24:2 और उन्होंने पत्थर को कब्र पर से लुढ़का हुआ पाया।
Luke 24:3 और भीतर जा कर प्रभु यीशु की लोथ न पाई।
Luke 24:4 जब वे इस बात से भौंचक्की हो रही थीं तो देखो, दो पुरूष झलकते वस्‍त्र पहिने हुए उन के पास आ खड़े हुए।
Luke 24:5 जब वे डर गईं, और धरती की ओर मुंह झुकाए रहीं; तो उन्होंने उन ने कहा; तुम जीवते को मरे हुओं में क्यों ढूंढ़ती हो?
Luke 24:6 वह यहां नहीं, परन्तु जी उठा है; स्मरण करो; कि उसने गलील में रहते हुए तुम से कहा था।
Luke 24:7 कि अवश्य है, कि मनुष्य का पुत्र पापियों के हाथ में पकड़वाया जाए, और क्रूस पर चढ़ाया जाए; और तीसरे दिन जी उठे।
Luke 24:8 तब उस की बातें उन को स्मरण आईं।
Luke 24:9 और कब्र से लौटकर उन्होंने उन ग्यारहों को, और, और सब को, ये बातें कह सुनाईं।
Luke 24:10 जिन्हों ने प्रेरितों से ये बातें कहीं, वे मरियम मगदलीनी और योअन्ना और याकूब की माता मरियम और उन के साथ की और स्‍त्रियां भी थीं।
Luke 24:11 परन्तु उन की बातें उन्हें कहानी सी समझ पड़ीं, और उन्होंने उन की प्रतीति न की।
Luke 24:12 तब पतरस उठ कर कब्र पर दौड़ गया, और झुककर केवल कपड़े पड़े देखे, और जो हुआ था, उस से अचम्भा करता हुआ, अपने घर चला गया।

एक साल में बाइबल: 
  • न्यायीयों 11-12 
  • लूका 6:1-26


शनिवार, 30 मार्च 2013

खुले द्वार


   हम में से अधिकांशतः अपने जीवनों में कभी ना कभी इस अनुभव से होकर निकले हैं जब हम किसी चीज़ की ऐसी लालसा करते हैं कि उसे पाने के लिए कुछ भी कर गुज़रते हैं, यह जानते हुए भी वह लालसा या हमारा मार्ग अनुचित अथवा गलत है और बाद में अपनी इस ढिठाई और मूर्खता के लिए पछताते हैं। परमेश्वर की जानबूझ कर करी गई अनाज्ञाकारिता के परिणामों के कारण हम अपने आप से क्षुब्ध हो सकते हैं, हो रहे दुषपरिणामों से स्तब्ध हो सकते हैं और मन मसोस कर उन्हें सहने के लिए बाध्य हो सकते हैं। लेकिन फिर भी आगे के लिए एक मार्ग हमें सदा उपलब्ध है - क्षमा याचना और पश्चाताप।

   जब इस्त्राएल के लोगों ने मांग करी कि अन्य जाति के लोगों के समान उन्हें भी अपने ऊपर एक राजा चाहिए तो परमेश्वर के भविष्यद्वकता शमूएल ने उन्हें समझाया कि परमेश्वर ही उनका राजा है और परमेश्वर के स्थान पर किसी मनुष्य के राजा बनाने के दुषपरिणामों के बारे में चिताया (1 शमूएल 8:4-9)। लेकिन इस्त्राएली नहीं माने और परमेश्वर ने उन्हें उनकी इच्छानुसार एक राजा दे दिया। जब थोड़े समय में अपनी इस मूर्खता का उन्हें एहसास हुआ तो उन्होंने फिर से शमूएल से इसके लिए सहायता और प्रार्थना मांगी (1 शमूएल 12:19)। शमूएल ने उन्हें सांत्वना दी और आगे के लिए मार्ग बताया: "शमूएल ने लोगों से कहा, डरो मत; तुम ने यह सब बुराई तो की है, परन्तु अब यहोवा के पीछे चलने से फिर मत मुड़ना; परन्तु अपने सम्पूर्ण मन से उस की उपासना करना" (1 शमूएल 12:20)।

   हम बीते हुए कल को लौटा के नहीं ला सकते और ना ही उस की बातों को पलट सकते हैं, लेकिन हम आज ऐसे कार्य अवश्य कर सकते हैं जो आने वाले कल के लिए लाभकारी हों। शमूएल ने इस्त्राएलियों के लिए प्रार्थना करने और उन्हें सही मार्ग की शिक्षा देने का आश्वासन दिया और इसके कारगर होने के लिए उसने केवल एक शर्त उनके सामने रखी: "केवल इतना हो कि तुम लोग यहोवा का भय मानो, और सच्चाई से अपने सम्पूर्ण मन के साथ उसकी उपासना करो; क्योंकि यह तो सोचो कि उसने तुम्हारे लिये कैसे बड़े बड़े काम किए हैं" (1 शमूएल 12:24)।

   परमेश्वर आज भी हमें बुलाता है। हम चाहे कितने ही परमेश्वर से विमुख, ढीठ, अनाज्ञाकारी और स्वार्थी रहे हों, किंतु प्रभु यीशु में हमारे लिए परमेश्वर से क्षमा के द्वार सदा खुले हैं और सृष्टिकर्ता परमेश्वर अपनी हर एक सृष्टि से मिले रहना चाहता है, उन्हें नष्ट होते देखना नहीं चाहता। बस नम्रता के साथ अपनी गलती को मान लें और विश्वास के साथ प्रभु यीशु से क्षमा को ग्रहण कर लें। अनन्त आशीषें और शांति का जीवन आपकी राह तक रहा है। - डेविड मैक्कैसलैंड


बीते हुए कल की बातों से आने वाले कल की आशीषों को दबा ना दें।

हे भाइयों, मेरी भावना यह नहीं कि मैं पकड़ चुका हूं: परन्तु केवल यह एक काम करता हूं, कि जो बातें पीछे रह गई हैं उन को भूल कर, आगे की बातों की ओर बढ़ता हुआ निशाने की ओर दौड़ा चला जाता हूं, ताकि वह इनाम पाऊं, जिस के लिये परमेश्वर ने मुझे मसीह यीशु में ऊपर बुलाया है। - फिलिप्पियों 3:13-14

बाइबल पाठ: 1 शमूएल 12:19-25
1 Samuel 12:19 और सब लोगों ने शमूएल से कहा, अपने दासों के निमित्त अपने परमेश्वर यहोवा से प्रार्थना कर, कि हम मर न जाएं; क्योंकि हम ने अपने सारे पापों से बढ़कर यह बुराई की है कि राजा मांगा है।
1 Samuel 12:20 शमूएल ने लोगों से कहा, डरो मत; तुम ने यह सब बुराई तो की है, परन्तु अब यहोवा के पीछे चलने से फिर मत मुड़ना; परन्तु अपने सम्पूर्ण मन से उस की उपासना करना;
1 Samuel 12:21 और मत मुड़ना; नहीं तो ऐसी व्यर्थ वस्तुओं के पीछे चलने लगोगे जिन से न कुछ लाभ पहुंचेगा, और न कुछ छुटकारा हो सकता है, क्योंकि वे सब व्यर्थ ही हैं।
1 Samuel 12:22 यहोवा तो अपने बड़े नाम के कारण अपनी प्रजा को न तजेगा, क्योंकि यहोवा ने तुम्हें अपनी ही इच्छा से अपनी प्रजा बनाया है।
1 Samuel 12:23 फिर यह मुझ से दूर हो कि मैं तुम्हारे लिये प्रार्थना करना छोड़कर यहोवा के विरुद्ध पापी ठहरूं; मैं तो तुम्हें अच्छा और सीधा मार्ग दिखाता रहूंगा।
1 Samuel 12:24 केवल इतना हो कि तुम लोग यहोवा का भय मानो, और सच्चाई से अपने सम्पूर्ण मान के साथ उसकी उपासना करो; क्योंकि यह तो सोचो कि उसने तुम्हारे लिये कैसे बड़े बड़े काम किए हैं।
1 Samuel 12:25 परन्तु यदि तुम बुराई करते ही रहोगे, तो तुम और तुम्हारा राजा दोनों के दोनों मिट जाओगे।

एक साल में बाइबल: 
  • न्यायीयों 9-10 
  • लूका 5:17-39


शुक्रवार, 29 मार्च 2013

बोझ


   पाप के दुषपरिणामों को देर-सवेर किसी ना किसी रूप में हम सब अनुभव करते ही हैं। कभी यह हमारे अपने पापों के कारण हो सकता है, जिनकी शर्म और जीवन में आई असफलता हमें दबाव में ला सकती है; या फिर यह कड़ुवा अनुभव और आत्मा पर दबाव किसी अन्य जन के पापों के कारण हो सकता है - किसी ऐसे जन के कारण जिससे हमें झूठ, या विश्वासघात, या परित्याग, या उपहास, या बेईमानी मिली हो, या जिसने अपने स्वार्थ के लिए हमारा मूर्ख बनाया हो।

   उस समय के बारे में सोचिए जब अपने या किसी दूसरे के पाप के इस दुषपरिणाम का बोझ आप पर इतना था कि आप अपने बिस्तर या कुर्सी से उठ कर बाहर निकल पाना असंभव महसूस कर रहे थे, शरीर निढाल और आत्मा कुंठित थी। अब उन दुःखद परिणामों के बोझ के बारे में विचार करें जो आपके परिवार, आपकी मण्डली, आपके पड़ौस के सम्मिलित पापों के कारण होगा। इस पर ऐसे ही दुःखद परिणामों का वह बोझ भी जोड़ दें जो आपके शहर, प्रांत, देश और संसार के पापों के कारण आया। और अब ज़रा अन्दाज़ा लगाने का प्रयास करें उस बोझ के बारे में जो सृष्टि के आरंभ से अब तक समस्त संसार के लोगों के पापों के कारण बना और फिर इसमें वह बोझ भी जोड़ दें जो अब से लेकर सृष्टि के अन्त और न्याय समय तक के लोगों के पापों के कारण होगा। यदि आप में इस बोझ का अनुमान लगा पाने की क्षमता है, तो आप उस बोझ को और उसकी भयानकता को कुछ हद तक समझ सकते हैं जो प्रभु यीशु ने अपने ऊपर लेकर संसार के पापों के लिए जिसकी कीमत चुकाई।

   इस बोझ के कारण यदि वह क्रूस पर चढ़ाए जाने की पूर्व-सन्ध्या में अपने प्राण पर एक असहनीय दबाव अनुभव कर रहा था (मत्ती 26:36-44), तो इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं है। वह यह भी जानता था कि कुछ समय बाद और फिर अगले दिन उसका यह बोझ और भी बढ़ने वाला है - अब से सारी रात की घोर यातना के बाद अगले दिन वह जीवित ही कीलों से काठ में ठोक दिया जाएगा और वहाँ क्रूस पर संसार के पाप का बोझ अपने ऊपर लेकर लटके हुए, जहाँ एक एक सांस का लेना भी उस वर्णन और सहने से बाहर वेदना को बढ़ाता था, उसे अपने परमेश्वर पिता का उससे मुँह मोड़ लेना भी सहना पड़ेगा। उस पाप के बोझ और उसके दुषपरिणामों की वेदना की कलपना मात्र भी, जो प्रभु यीशु ने हम सबके लिए सही, हम मनुष्यों की बुद्धि की क्षमता से बाहर है।

   पाप ने प्रभु यीशु को परीक्षा की चरम सीमा तक परखा। सृष्टि के इतिहास और लेखों को जाँच कर देख लीजिए, कोई परीक्षा, कोई दुःख, कोई वेदना उस शारीरिक और आत्मिक तकलीफ के निकट भी नहीं आ सकती जो प्रभु यीशु ने संसार के बदले सह ली। संसार के सभी लोगों के लिए उसके प्रेम ने सब सह लिया, उस प्रेम ने उसे उस बोझ को उठा लेने की सामर्थ दी और वह उस परीक्षा से जयवन्त होकर निकला। प्रभु यीशु के क्रूस पर दिए गए बलिदान और पुनरुत्थान के कारण आज हम जानते हैं कि पाप अब हार गया है, प्रभु यीशु में होकर पाप पर विजयी जीवन संभव है, प्रभु यीशु द्वारा परमेश्वर के साथ हमारे मेल-मिलाप का मार्ग खुल गया है।

   क्या आप अभी भी अपने पाप का बोझ स्वयं ही उठाए रखना चाहते हैं जबकि प्रभु यीशु ने उस बोझ की कीमत पहले से ही आपके लिए चुका दी है और उसका निवारण कर दिया है? साधारण विश्वास के साथ यह बोझ और अपना जीवन उसे सौंप दें और बदले में उससे परमेश्वर की धार्मिकता ले लें - इससे सरल, सहज और लाभदायक आदान-प्रदान भला और क्या हो सकता है? - जूली ऐकैरमैन लिंक


प्रभु यीशु की खाली कब्र पाप और मृत्यु पर हमारी विजय का निश्चय है।

क्योंकि उसने अपना प्राण मृत्यु के लिये उण्डेल दिया, वह अपराधियों के संग गिना गया; तौभी उसने बहुतों के पाप का बोझ उठ लिया, और, अपराधियों के लिये बिनती करता है। - याशायाह 53:12

बाइबल पाठ: इब्रानीयों 2:9-18
Hebrews 2:9 पर हम यीशु को जो स्‍वर्गदूतों से कुछ ही कम किया गया था, मृत्यु का दुख उठाने के कारण महिमा और आदर का मुकुट पहिने हुए देखते हैं; ताकि परमेश्वर के अनुग्रह से हर एक मनुष्य के लिये मृत्यु का स्‍वाद चखे।
Hebrews 2:10 क्योंकि जिस के लिये सब कुछ है, और जिस के द्वारा सब कुछ है, उसे यही अच्छा लगा कि जब वह बहुत से पुत्रों को महिमा में पहुंचाए, तो उन के उद्धार के कर्ता को दुख उठाने के द्वारा सिद्ध करे।
Hebrews 2:11 क्योंकि पवित्र करने वाला और जो पवित्र किए जाते हैं, सब एक ही मूल से हैं: इसी कारण वह उन्हें भाई कहने से नहीं लजाता।
Hebrews 2:12 पर कहता है, कि मैं तेरा नाम अपने भाइयों को सुनाऊंगा, सभा के बीच में मैं तेरा भजन गाऊंगा।
Hebrews 2:13 और फिर यह, कि मैं उस पर भरोसा रखूंगा; और फिर यह कि देख, मैं उन लड़कों सहित जिसे परमेश्वर ने मुझे दिए।
Hebrews 2:14 इसलिये जब कि लड़के मांस और लोहू के भागी हैं, तो वह आप भी उन के समान उन का सहभागी हो गया; ताकि मृत्यु के द्वारा उसे जिसे मृत्यु पर शक्ति मिली थी, अर्थात शैतान को निकम्मा कर दे।
Hebrews 2:15 और जितने मृत्यु के भय के मारे जीवन भर दासत्‍व में फंसे थे, उन्हें छुड़ा ले।
Hebrews 2:16 क्योंकि वह तो स्‍वर्गदूतों को नहीं वरन इब्राहीम के वंश को संभालता है।
Hebrews 2:17 इस कारण उसको चाहिए था, कि सब बातों में अपने भाइयों के समान बने; जिस से वह उन बातों में जो परमेश्वर से सम्बन्‍ध रखती हैं, एक दयालु और विश्वास योग्य महायाजक बने ताकि लोगों के पापों के लिये प्रायश्‍चित्त करे।
Hebrews 2:18 क्योंकि जब उसने परीक्षा की दशा में दुख उठाया, तो वह उन की भी सहायता कर सकता है, जिन की परीक्षा होती है।

एक साल में बाइबल: 
  • न्यायीयों 7-8 
  • लूका 5:1-16


गुरुवार, 28 मार्च 2013

महिमा


   कैन्सस प्रांत की २००९ प्रांतीय हाई-स्कूल स्पर्धाओं में एक बड़ी विचित्र घटना घटी। जिस टीम ने 3,200 मीटर महिला रिले दौड़ में जीत पाई उसे अयोग्य ठहराकर पदक लेने से रोक दिया गया। जो इसके बाद हुआ वह और भी विचित्र था, जिस टीम को विजयी घोषित करके स्वर्ण पदक दिया गया, उन्होंने अपने पदक जाकर अयोग्य ठहराई गई टीम को दे दिए।

   हुआ यूँ था कि पहले विजय पाने वाली सेन्ट मेरीस कोलगन स्कूल की टीम को नीरिक्षण करने वाले अम्पायरों ने इसलिए अयोग्य ठहराया क्योंकि रिले का डंडा थमाते हुए एक लड़की ने अपना ट्रैक छोड़ दिया था। इस कारण दूसरे नंबर पर आने वाली मरानथा एकैडमी कि टीम को प्रथम स्थान पर घोषित किया गया और उन्हें स्वर्ण पदक का हकदार माना गया। जब मरानथा एकैडमी की लड़कियों ने सेन्ट मेरीस कोलगन की लड़कियों के उतरे हुए उदास चेहरे देखे तो उन्होंने वे पदक जाकर उन्हें दे दिए।

   उन लड़कीयों ने ऐसा क्यों किया? मरानथा एकैडमी की प्रशिक्षिका ने बताया, इस वर्ष हमारा उद्देश्य था कि हम अपनी नहीं परमेश्वर की महिमा के लिए स्पर्धाओं में भाग लेंगे। और उनके इस कार्य से उनका यह ध्येय पूरा भी हुआ क्योंकि इस घटना की चर्चा सारे प्रांत में दूर दूर तक हुई और परमेश्वर के नाम को महिमा मिली।

   जब हम अपने स्वार्थ और उपलब्धियों की नहीं वरन दूसरों के हित की चिन्ता करके कार्य करते हैं तो परमेश्वर के नाम को महिमा मिलने के अवसर बनते हैं। दूसरों के साथ प्रेम और करुणा में होकर व्यवहार करना हमारे प्रेमी और करुणामय परमेश्वर पिता के बारे में उनकी रुचि जागृत करने का एक अच्छा तरीका है। - डेव ब्रैनन


यदि हम परमेश्वर से प्रेम करते हैं तो लोगों की सेवा भी करेंगे।

और तुम इसी के लिये बुलाए भी गए हो क्योंकि मसीह भी तुम्हारे लिये दुख उठा कर, तुम्हें एक आदर्श दे गया है, कि तुम भी उसके चिन्ह पर चलो। - 1 पतरस 2:21

बाइबल पाठ: फिलिप्पियों 2:4-11
Philippians 2:4 हर एक अपनी ही हित की नहीं, वरन दूसरों की हित की भी चिन्‍ता करे।
Philippians 2:5 जैसा मसीह यीशु का स्‍वभाव था वैसा ही तुम्हारा भी स्‍वभाव हो।
Philippians 2:6 जिसने परमेश्वर के स्‍वरूप में हो कर भी परमेश्वर के तुल्य होने को अपने वश में रखने की वस्तु न समझा।
Philippians 2:7 वरन अपने आप को ऐसा शून्य कर दिया, और दास का स्‍वरूप धारण किया, और मनुष्य की समानता में हो गया।
Philippians 2:8 और मनुष्य के रूप में प्रगट हो कर अपने आप को दीन किया, और यहां तक आज्ञाकारी रहा, कि मृत्यु, हां, क्रूस की मृत्यु भी सह ली।
Philippians 2:9 इस कारण परमेश्वर ने उसको अति महान भी किया, और उसको वह नाम दिया जो सब नामों में श्रेष्ठ है।
Philippians 2:10 कि जो स्वर्ग में और पृथ्वी पर और जो पृथ्वी के नीचे है; वे सब यीशु के नाम पर घुटना टेकें।
Philippians 2:11 और परमेश्वर पिता की महिमा के लिये हर एक जीभ अंगीकार कर ले कि यीशु मसीह ही प्रभु है।

एक साल में बाइबल: 
  • न्यायीयों 4-6 
  • लूका 4:31-44


बुधवार, 27 मार्च 2013

अधूरा सच


   परमेश्वर के बारे में सही जानकारी रखना हम सब के लिए अति आवश्यक है। अधूरी जानकारी गलत धारणाओं को और गलत व्यवहार को जन्म देती है और हमें परमेश्वर की आज्ञाकारिता में बने रहने नहीं देती, हमारी आशीषों के मार्ग में रुकावट बन जाती है। यर्मियाह नबी के समय में धर्म के अगुवे लोगों को मन-गढ़ंत बातों से भरमा रहे थे और लोगों को गलत मार्ग पर डाल रहे थे। उनके इस असत्य के कारण लोग परमेश्वर के सही स्वरूप को नहीं जान पा रहे थे (यर्मियाह 25:25-32)।

   इसी प्रकार परमेश्वर के नाम पर लोगों को मन-गढ़ंत बातें सुनाने वाले आज भी बहुतेरे हैं। कुछ लोग परमेश्वर को एक क्रोधी, प्रतिशोधी और गलतीयों के लिए दण्ड देने को तत्पर परमेश्वर के रूप में प्रस्तुत करते हैं जिससे लोगों को डरा कर, परमेश्वर के क्रोध को शांत करने तथा उसको प्रसन्न करने के बहाने से लोगों से अच्छी कमाई कर सकें। परन्तु परमेश्वर ने अपने नाम को जब मूसा पर प्रकट किया तो कहा: "और यहोवा उसके साम्हने हो कर यों प्रचार करता हुआ चला, कि यहोवा, यहोवा, ईश्वर दयालु और अनुग्रहकारी, कोप करने में धीरजवन्त, और अति करूणामय और सत्य, हजारों पीढिय़ों तक निरन्तर करूणा करने वाला, अधर्म और अपराध और पाप का क्षमा करने वाला है,..." (निर्गमन 34:6)।

   कुछ अन्य हैं जो अपनी मन-मानी करने और असत्य का जीवन व्यतीत करके संसार मे समृद्धि प्राप्त करने के लिए परमेश्वर के न्याय से मुँह मोड़ कर रहना चाहते हैं और दुसरों को भी यही सिखाते हैं। वे इस बात को लेकर चलते हैं कि परमेश्वर तो दयालु और प्रेमी परमेश्वर है, वह ऐसे ही सब क्षमा कर देगा, सब व्यवहार को अनदेखा कर देगा। लेकिन अपने नाम की इसी व्याख्या में परमेश्वर ने मूसा से यह भी कहा "...परन्तु दोषी को वह किसी प्रकार निर्दोष न ठहराएगा, वह पितरों के अधर्म का दण्ड उनके बेटों वरन पोतों और परपोतों को भी देने वाला है" (निर्गमन 34:6)। परमेश्वर ने मूसा को यह भी चिताया: "झूठे मुकद्दमे से दूर रहना, और निर्दोष और धर्मी को घात न करना, क्योंकि मैं दुष्ट को निर्दोष न ठहराऊंगा" (निर्गमन 23:7)।

   परमेश्वर खरा न्यायी और प्रेमी पिता दोनों ही है। जो उसकी चेतावनियों को अनसुना करके अपनी मन-मरज़ी में और पापों मे बने रहते हैं उन्हें उसके न्याय का सामना करना पड़ेगा, परन्तु जो उस की बात मानकर पापों से पश्चाताप कर लेते हैं अपने जीवन उसे समर्पित कर देते हैं वे पाप क्षमा की आशीष और उसके प्रेमी पिता होने की करुणा को अनुभव करते हैं। दोनों में से केवल एक ही बात पर ज़ोर देना और दूसरी को नज़रंदाज़ करना परमेश्वर के विषय में अधूरा सच बयान करना है।

   परमेश्वर नहीं चाहता कि कोई भी व्यक्ति नाश हो, वह सबको मन फिराव, पाप क्षमा और उद्धार का अवसर देता रहता है: "प्रभु अपनी प्रतिज्ञा के विषय में देर नहीं करता, जैसी देर कितने लोग समझते हैं; पर तुम्हारे विषय में धीरज धरता है, और नहीं चाहता, कि कोई नाश हो; वरन यह कि सब को मन फिराव का अवसर मिले" (2 पतरस 3:9)। लेकिन उसका यह धैर्य और विलंब से कोप करना हमारे लिए मनमानी करने और उसकी चेतावनीयों को नज़रंदाज़ करने का बहाना नहीं होना चाहिए, क्योंकि उसका न्याय कभी भी अनपेक्षित रूप में आ जाएगा और जब आएगा तब किसी को कोई अवसर नहीं रहेगा (2 पतरस 3:10)। किसी अधूरे सच पर नहीं वरन सच्चे परमेश्वर के सच्चे स्वरूप प्रभु यीशु और उसके जीवते वचन बाइबल पर ही विश्वास रखिए।

   क्या आप अभी उसके सामने खड़े होने के लिए तैयार हैं? - जूली ऐकैरमैन लिंक


परमेश्वर का सामना सबको करना ही है; यह आपके हाथ में है कि आप उससे न्यायी के रूप में मिलना चाहते हैं या पिता के।

यहोवा की यह भी वाणी है कि जो बिना मेरे भेजे वा बिना मेरी आज्ञा पाए स्वप्न देखने का झूठा दावा कर के भविष्यद्वाणी करते हैं, और उसका वर्णन कर के मेरी प्रजा को झूठे घमण्ड में आकर भरमाते हैं, उनके भी मैं विरुद्ध हूँ; और उन से मेरी प्रजा के लोगों का कुछ लाभ न हेगा। - यर्मियाह 25:32

बाइबल पाठ: 2 पतरस 3:9-18
2 Peter 3:9 प्रभु अपनी प्रतिज्ञा के विषय में देर नहीं करता, जैसी देर कितने लोग समझते हैं; पर तुम्हारे विषय में धीरज धरता है, और नहीं चाहता, कि कोई नाश हो; वरन यह कि सब को मन फिराव का अवसर मिले।
2 Peter 3:10 परन्तु प्रभु का दिन चोर की नाईं आ जाएगा, उस दिन आकाश बड़ी हड़हड़ाहट के शब्द से जाता रहेगा, और तत्‍व बहुत ही तप्‍त हो कर पिघल जाएंगे, और पृथ्वी और उस पर के काम जल जाऐंगे।
2 Peter 3:11 तो जब कि ये सब वस्तुएं, इस रीति से पिघलने वाली हैं, तो तुम्हें पवित्र चाल चलन और भक्ति में कैसे मनुष्य होना चाहिए।
2 Peter 3:12 और परमेश्वर के उस दिन की बाट किस रीति से जोहना चाहिए और उसके जल्द आने के लिये कैसा यत्‍न करना चाहिए; जिस के कारण आकाश आग से पिघल जाएंगे, और आकाश के गण बहुत ही तप्‍त हो कर गल जाएंगे।
2 Peter 3:13 पर उस की प्रतिज्ञा के अनुसार हम एक नए आकाश और नई पृथ्वी की आस देखते हैं जिन में धामिर्कता वास करेगी।।
2 Peter 3:14 इसलिये, हे प्रियो, जब कि तुम इन बातों की आस देखते हो तो यत्‍न करो कि तुम शान्‍ति से उसके साम्हने निष्‍कलंक और निर्दोष ठहरो।
2 Peter 3:15 और हमारे प्रभु के धीरज को उद्धार समझो, जैसे हमारे प्रिय भाई पौलुस न भी उस ज्ञान के अनुसार जो उसे मिला, तुम्हें लिखा है।
2 Peter 3:16 वैसे ही उसने अपनी सब पत्रियों में भी इन बातों की चर्चा की है जिन में कितनी बातें ऐसी है, जिनका समझना कठिन है, और अनपढ़ और चंचल लोग उन के अर्थों को भी पवित्र शास्त्र की और बातों की नाईं खींच तान कर अपने ही नाश का कारण बनाते हैं।
2 Peter 3:17 इसलिये हे प्रियो तुम लोग पहिले ही से इन बातों को जान कर चौकस रहो, ताकि अधर्मियों के भ्रम में फंस कर अपनी स्थिरता को हाथ से कहीं खो न दो।
2 Peter 3:18 पर हमारे प्रभु, और उद्धारकर्ता यीशु मसीह के अनुग्रह और पहचान में बढ़ते जाओ। उसी की महिमा अब भी हो, और युगानुयुग होती रहे। आमीन।

एक साल में बाइबल: 
  • न्यायीयों 1-3 
  • लूका 4:1-30


मंगलवार, 26 मार्च 2013

सही पहचान


   प्रसिद्ध समुद्री यात्री क्रिस्टोफर कोलम्बस की यात्राओं के बारे में सभी ने पढ़ा होगा। उनकी एक यात्रा से संबंधित कहानी है कि जब उनके पोत जैमिका के तट के पास लंगर डाल कर खड़े हुए थे तो उनकी भोजन सामग्री लगभग समाप्त हो चली। ऐसे में वहाँ के मूल निवासीयों ने उन्हें भोजन उपलब्ध कराया, लेकिन धीरे धीरे यह भी घटने लगा और भोजन के आभाव में नाविकों को परेशानी होने लगी। खगोल विद्या की पुस्तकों के द्वारा कोलम्बस जानता था कि शीघ्र ही चन्द्रग्रहण आने वाला है। उसने द्वीप निवासीयों के अगुवों को बुलाया और उन से कहा कि परमेश्वर उनके इस स्वार्थी बर्ताव से खिन्न है और चेतावनी के रूप में शीघ्र ही चन्द्रमा को अंधेरा कर देगा। पहले तो द्वीप के निवासी कोलम्बस का उपहास करने लगे, परन्तु जब चन्द्र-ग्रहण लगा तो वे डर गए और उन्हें तुरंत भोजन वस्तुएं दे दीं। तब कोलम्बस ने उन से कहा कि वह परमेश्वर से प्रार्थना करेगा और परमेश्वर चन्द्रमा को फिर से रौशन कर देगा। चाहे कोलम्बस की परिस्थिति को देखते हुए उसकी इस कुटिलता के लिए हम उसके साथ सहानुभूति रख सकते हैं, परन्तु सत्य तो यही है कि उसने परमेश्वर के नाम को अपनी स्वार्थ सिद्धी के लिए प्रयोग किया, भोले और अनजान लोगों को परमेश्वर के नाम से धोखा दिया, जो सर्वथा अनुचित था।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में इस प्रकार के व्यवहार का कोई समर्थन नहीं है। प्रेरित पौलुस ने कुरिन्थुस की मण्डली को लिखी अपनी दूसरी पत्री में परमेश्वर के नाम द्वारा छलने वाले धूर्त लोगों के संबंध में लिखा: "क्योंकि हम उन बहुतों के समान नहीं, जो परमेश्वर के वचन में मिलावट करते हैं; परन्तु मन की सच्चाई से, और परमेश्वर की ओर से परमेश्वर को उपस्थित जानकर मसीह में बोलते हैं" (2 कुरिन्थियों 2:17)। अपनी अन्य पत्रियों में भी पौलुस ने इस बात के बारे में चिताया है।

   हम मसीही विश्वासियों को बहुत चौंकन्ना रहना है कि हम अपनी मनसा को ऊपर रखने के लिए परमेश्वर के वचन का दुरूपयोग नहीं करें, और ना ही इस पवित्र वचन की व्याख्या स्वार्थ-सिद्धी के लिए करें वरन परमेश्वर को समर्पित मन और जीवन के अनुरूप परमेश्वर के वचन के सत्य लोगों के साथ ईमानदारी और खराई के साथ बाँटें। अपने वचन और व्यवहार, दोनो के द्वारा संसार को जगत के उद्धारकर्ता मसीह यीशु की सही पहचान देना हमारा कर्तव्य है। - डेनिस फिशर


परमेश्वर के वचन को लोगों के साथ बाँटने का उद्देश्य अपनी समृद्धि नहीं लोगों की उन्नति है।

और मैं तुम से कहता हूं, कि जो जो निकम्मी बातें मनुष्य कहेंगे, न्याय के दिन हर एक बात का लेखा देंगे। - मत्ती 12:36

बाइबल पाठ: रोमियों 16:17-18; फिलिप्पियों 3:17-19
Romans 16:17 अब हे भाइयो, मैं तुम से बिनती करता हूं, कि जो लोग उस शिक्षा के विपरीत जो तुम ने पाई है, फूट पड़ने, और ठोकर खाने के कारण होते हैं, उन्हें ताड़ लिया करो; और उन से दूर रहो।
Romans 16:18 क्योंकि ऐसे लोग हमारे प्रभु मसीह की नहीं, परन्तु अपने पेट की सेवा करते है; और चिकनी चुपड़ी बातों से सीधे सादे मन के लोगों को बहका देते हैं।

Philippians 3:17 हे भाइयो, तुम सब मिलकर मेरी सी चाल चलो, और उन्हें पहिचान रखो, जो इस रीति पर चलते हैं जिस का उदाहरण तुम हम में पाते हो।
Philippians 3:18 क्योंकि बहुतेरे ऐसी चाल चलते हैं, जिन की चर्चा मैं ने तुम से बार बार किया है और अब भी रो रोकर कहता हूं, कि वे अपनी चालचलन से मसीह के क्रूस के बैरी हैं।
Philippians 3:19 उन का अन्‍त विनाश है, उन का ईश्वर पेट है, वे अपनी लज्ज़ा की बातों पर घमण्‍ड करते हैं, और पृथ्वी की वस्‍तुओं पर मन लगाए रहते हैं।

एक साल में बाइबल: 
  • यहोशू 22-24 
  • लूका 3


सोमवार, 25 मार्च 2013

असफल और अविश्वासयोग्य?


   जब कभी मेरी पत्नि को कुछ ऐसा खाना बनाना होता है जिसका कोई भाग कोयले की आँच पर सेक कर या तंदूर में डाल कर पकाया जाय तो यह सेकना और तंदूर का काम करना मेरी जिम्मेवारी होती है। यद्यपि मैं कोई बहुत अच्छा बावर्ची नहीं हूँ लेकिन कोयलों पर या तंदूर में सिकते हुए भोजन से उठने वाली गन्ध मुझे बहुत अच्छी लगती है, और यह करते हुए कुछ बीती बातें भी स्मरण हो आती हैं। इसलिए परमेश्वर के वचन बाइबल में यूहन्ना २१:९ में "कोयले की आग" के उल्लेख ने मेरा ध्यान खींचा, और मैं सोचने लगा कि क्यों अविश्वासयोग्य रहे पतरस की प्रभु यीशु द्वारा पुनःबुलाहट के इस वृतांत में यूहन्ना ने इस आग का भी ज़िक्र किया?

   इस अध्याय के पहले तीन पद पढ़ने से यह स्पष्ट है कि पतरस मछली पकड़ने के अपने पुराने व्यवसाय की ओर फिर से लौट रहा था। इससे कुछ दिन पहले पतरस बड़े बड़े दावे करने के बावजूद भी प्रभु यीशु का तीन बार इन्कार कर चुका था, और तीनों बार यह कार्य आग पर हाथ सेकते हुए प्रभु के विरोधियों के साथ मिल-बैठकर पतरस द्वारा भी आग पर हाथ सेकने समय हुआ (यूहन्ना 18:17-18)। तो अब जब पतरस प्रभु का इन्कार कर लोगों की नज़रों से गिर चुका, तो फिर वापस अपने पुराने धंधे में लौट जाने में क्या बुरा हो सकता था?

   जब पतरस और उसके साथी रात भर झील में जाल डालते रहे, तो उनके जाने बिना किनारे पर प्रभु यीशु आया और वहाँ पर उनके लिए आग जलाई और नाश्ता तैयार कर दिया। क्या यह आग जलाना केवल संयोग था? मैं ऐसा नहीं सोचता। उस जलती हुई आग और प्रभु यीशु की वहाँ उपस्थिति ने अवश्य ही पतरस के मन में कुछ ही दिन पहले की वे शर्मनाक यादें जगा दी होंगी जब अपनी जान के जोखिम से बचने के लिए उसने एक और आग के पास प्रभु का तीन बार इन्कार किया था। लेकिन प्रभु यीशु ने उससे किसी दुर्भावना में होकर व्यवहार नहीं किया। उसने पतरस को प्रेम से बुलाया, उसे नाश्ता कराया और फिर से उसे अपने लिए सेवकाई करने की ज़िम्मेदारी सौंप दी।

   ज़रा विचार कीजिए, हमारी असफलताओं और अविश्वासयोग्यता के बावजूद भी प्रभु यीशु हमें त्यागता नहीं, ना ही हमें लज्जित करता है; वरन वह अपने बड़े प्रेम में होकर हमें फिर से खड़ा करता है, सामर्थ देता है, और फिर से अपनी सेवकाई के लिए तैयार करके उसके लिए भेजता है। यदि केवल सिद्ध और योग्य लोग उसके लिए कार्य कर सकते तो क्या प्रभु यीशु को कार्य करने के लिए संसार में से कोई मिलता? यह प्रभु यीशु की महिमा और महानता है कि वह संसार के पापी, पराजित और अयोग्य लोगों को ले लेता है, ऐसों को जो जिनके लिए वह जानता है कि वे उसके प्रति वफादार भी नहीं रह पाएंगे, लेकिन फिर भी उन्हें स्वर्गीय सामर्थ और योग्यता से भरकर स्वर्गीय सेवकाई के लिए संसार में भेजता है, उनकी कमज़ोरीयों और असफलताओं में उनके प्रति धैर्यवान और सहिषुण रहता है, उनके गिरने पर भी उन्हें दुत्कारता नहीं, त्यागता नहीं वरन फिर से प्रेम सहित उठाकर खड़ा करता है और फिर से तैयार कर के फिर से उसी सेवकाई के लिए भेजता है।

   जो अपना हाथ एक बार प्रभु के हाथों में दे देता है, वह सदा सदा के लिए प्रभु का जन हो जाता है; प्रभु उसे फिर कभी नहीं छोड़ता, कभी नहीं त्यागता, और सदा उससे प्रेम करता है, सदा उसकी भलाई ही करता है। क्या आपने प्रभु यीशु के प्रेम को स्वीकार कर के अपना हाथ प्रभु यीशु के हाथों में दे दिया है? - जो स्टोवैल


सिद्ध ना होना हमें परमेश्वर की सेवकाई के अयोग्य नहीं करता; यह केवल उसकी करुणा पर हमारी निर्भरता को और दृढ़ कर देता है।

मनुष्य की गति यहोवा की ओर से दृढ़ होती है, और उसके चलन से वह प्रसन्न रहता है; चाहे वह गिरे तौभी पड़ा न रह जाएगा, क्योंकि यहोवा उसका हाथ थामे रहता है। - भजन 37:23-24

बाइबल पाठ: यूहन्ना 21:3-17
John 21:3 शमौन पतरस ने उन से कहा, मैं मछली पकड़ने को जाता हूं: उन्होंने उस से कहा, हम भी तेरे साथ चलते हैं: सो वे निकलकर नाव पर चढ़े, परन्तु उस रात कुछ न पकड़ा।
John 21:4 भोर होते ही यीशु किनारे पर खड़ा हुआ; तौभी चेलों ने न पहचाना कि यह यीशु है।
John 21:5 तब यीशु ने उन से कहा, हे बालकों, क्या तुम्हारे पास कुछ खाने को है? उन्होंने उत्तर दिया कि नहीं।
John 21:6 उसने उन से कहा, नाव की दाहनी ओर जाल डालो, तो पाओगे, तब उन्होंने जाल डाला, और अब मछिलयों की बहुतायत के कारण उसे खींच न सके।
John 21:7 इसलिये उस चेले ने जिस से यीशु प्रेम रखता था पतरस से कहा, यह तो प्रभु है: शमौन पतरस ने यह सुनकर कि प्रभु है, कमर में अंगरखा कस लिया, क्योंकि वह नंगा था, और झील में कूद पड़ा।
John 21:8 परन्तु और चेले डोंगी पर मछिलयों से भरा हुआ जाल खींचते हुए आए, क्योंकि वे किनारे से अधिक दूर नहीं, कोई दो सौ हाथ पर थे।
John 21:9 जब किनारे पर उतरे, तो उन्होंने कोएले की आग, और उस पर मछली रखी हुई, और रोटी देखी।
John 21:10 यीशु ने उन से कहा, जो मछिलयां तुम ने अभी पकड़ी हैं, उन में से कुछ लाओ।
John 21:11 शमौन पतरस ने डोंगी पर चढ़कर एक सौ तिर्पन बड़ी मछिलयों से भरा हुआ जाल किनारे पर खींचा, और इतनी मछिलयां होने से भी जाल न फटा।
John 21:12 यीशु ने उन से कहा, कि आओ, भोजन करो और चेलों में से किसी को हियाव न हुआ, कि उस से पूछे, कि तू कौन है? क्योंकि वे जानते थे, कि हो न हो यह प्रभु ही है।
John 21:13 यीशु आया, और रोटी ले कर उन्हें दी, और वैसे ही मछली भी।
John 21:14 यह तीसरी बार है, कि यीशु ने मरे हुओं में से जी उठने के बाद चेलों को दर्शन दिए।
John 21:15 भोजन करने के बाद यीशु ने शमौन पतरस से कहा, हे शमौन, यूहन्ना के पुत्र, क्या तू इन से बढ़कर मुझ से प्रेम रखता है? उसने उस से कहा, हां प्रभु तू तो जानता है, कि मैं तुझ से प्रीति रखता हूं: उसने उस से कहा, मेरे मेमनों को चरा।
John 21:16 उसने फिर दूसरी बार उस से कहा, हे शमौन यूहन्ना के पुत्र, क्या तू मुझ से प्रेम रखता है? उसने उन से कहा, हां, प्रभु तू जानता है, कि मैं तुझ से प्रीति रखता हूं: उसने उस से कहा, मेरी भेड़ों की रखवाली कर।
John 21:17 उसने तीसरी बार उस से कहा, हे शमौन, यूहन्ना के पुत्र, क्या तू मुझ से प्रीति रखता है? पतरस उदास हुआ, कि उसने उसे तीसरी बार ऐसा कहा; कि क्या तू मुझ से प्रीति रखता है? और उस से कहा, हे प्रभु, तू तो सब कुछ जानता है: तू यह जानता है कि मैं तुझ से प्रीति रखता हूं: यीशु ने उस से कहा, मेरी भेड़ों को चरा।

एक साल में बाइबल: 
  • यहोशू 19-21 
  • लूका 2:25-52