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शुक्रवार, 5 अप्रैल 2013

स्वाद


   एक दोपहर की बात है, एंजेला ने अपनी बेटी एलियाना को चार टौफियाँ दीं और उससे बड़े स्पष्ट शब्दों में दृढ़ता से कहा कि आज के लिए उसे बस इतनी ही मिलेंगी, इससे अधिक और इसके बाद एक भी नहीं। एंजेला के देखते देखते उस बच्ची एलियाना ने तीन टौफियाँ तो बड़ी जल्दी जल्दी खालीं परन्तु चौथी को खाने में उसने बहुत समय लगाया। एलियाना ने उस दिन की उस अन्तिम टौफी को धीरे धीरे चूसा, कभी वह उसे अपने मुँह से निकालती और उसका एक छोटा सा टुकड़ा दाँतों से काट कर चूसती, कभी मुँह के बाहर ही उसपर जीभ फेरकर उसका स्वाद लेती। अपनी उस दिन की उस अन्तिम टौफी को खत्म कर लेने में एलियाना ने पूरे 45 मिनिट लगाए। एंजेला अपनी बेटी की यह करतूत बड़ी दिलचस्पी से देखती रही। एंजेला को एहसास हुआ कि वह एलियाना को एक महत्वपूर्ण पाठ सीखते देख रही है - स्वाद लेने और रस तथा आनन्द का अन्तिम कतरा तक निकाल पाने का पाठ।

   कुछ ऐसी ही आशा परमेश्वर भी हमसे अपने वचन बाइबल के पढ़े जाने के प्रति रखता है। वह चाहता है कि हम समय लगाकर, मनन कर के, गंभीरता और अर्थपूर्ण रीति से उसके वचन का अध्ययन करें, जिससे उसका पूरा पूरा स्वाद ले सकें, उसकी गहराईयों को समझ सकें और उसकी संगति का आनन्द उठा सकें। दाउद ने कहा, "चखकर देखो कि यहोवा कैसा भला है!" (भजन 34:8)। प्रभु यीशु ने स्पष्ट कहा है कि उसके वचन के साथ समय बिताना ही उसके प्रति हमारे प्रेम का सूचक है, परमेश्वर के साथ समय बिताना है, जो यह करते हैं परमेश्वर भी उनसे प्रेम करता है और उनके साथ वास करता है: "जिस के पास मेरी आज्ञा है, और वह उन्हें मानता है, वही मुझ से प्रेम रखता है, और जो मुझ से प्रेम रखता है, उस से मेरा पिता प्रेम रखेगा, और मैं उस से प्रेम रखूंगा, और अपने आप को उस पर प्रगट करूंगा। यीशु ने उसको उत्तर दिया, यदि कोई मुझ से प्रेम रखे, तो वह मेरे वचन को मानेगा, और मेरा पिता उस से प्रेम रखेगा, और हम उसके पास आएंगे, और उसके साथ वास करेंगे।" (यूहन्ना 14:21, 23)।

   परमेश्वर के वचन का स्वाद लेना सीखिए - उसपर मनन करने के द्वारा, अपने हृदय में उसे बसा लेने के द्वारा, उसका पालन करने के द्वारा, उसे दूसरों के साथ बांटने के द्वारा, दूसरों को इस जीवते वचन की सामर्थ और प्रतिभा बताने के द्वारा और आप पाएंगे कि आपके अपने जीवन का स्वाद संसार की कड़ुवाहट से भरने की बजाए ईश्वरीय सुगन्ध और मिठास से भर जाएगा। - सिंडी हैस कैस्पर


हम मसीही विश्वासीयों सबसे बड़ा सौभाग्य परमेश्वर का स्वाद लेते रहना है।

चखकर देखो कि यहोवा कैसा भला है! क्या ही धन्य है वह पुरूष जो उसकी शरण लेता है। - भजन 34:8

बाइबल पाठ: भजन 34:1-10
Psalms 34:1 मैं हर समय यहोवा को धन्य कहा करूंगा; उसकी स्तुति निरन्तर मेरे मुख से होती रहेगी।
Psalms 34:2 मैं यहोवा पर घमण्ड करूंगा; नम्र लोग यह सुनकर आनन्दित होंगे।
Psalms 34:3 मेरे साथ यहोवा की बड़ाई करो, और आओ हम मिलकर उसके नाम की स्तुति करें।
Psalms 34:4 मैं यहोवा के पास गया, तब उसने मेरी सुन ली, और मुझे पूरी रीति से निर्भय किया।
Psalms 34:5 जिन्होंने उसकी ओर दृष्टि की उन्होंने ज्योति पाई; और उनका मुंह कभी काला न होने पाया।
Psalms 34:6 इस दीन जन ने पुकारा तब यहोवा ने सुन लिया, और उसको उसके सब कष्टों से छुड़ा लिया।
Psalms 34:7 यहोवा के डरवैयों के चारों ओर उसका दूत छावनी किए हुए उन को बचाता है।
Psalms 34:8 चखकर देखो कि यहोवा कैसा भला है! क्या ही धन्य है वह पुरूष जो उसकी शरण लेता है।
Psalms 34:9 हे यहोवा के पवित्र लोगों, उसका भय मानो, क्योंकि उसके डरवैयों को किसी बात की घटी नहीं होती!
Psalms 34:10 जवान सिंहों को तो घटी होती और वे भूखे भी रह जाते हैं; परन्तु यहोवा के खोजियों को किसी भली वस्तु की घटी न होवेगी।

एक साल में बाइबल: 
  • 1 शमूएल 1-3 
  • लूका 8:26-56


गुरुवार, 4 अप्रैल 2013

उलझनें


   ब्राज़ील के फिलिप मस्सा को सिंगापुर में सितंबर 2008 में आयोजित कार ग्राँ-प्री रेस का विजेता होना चाहिए था, लेकिन एक चूक ने सब बदल दिया। रेस में अग्रणीय स्थान पर चल रहे फिलिप ने ईंधन डलवाने के लिए कार अन्दर करी और ईंधन डलवाने के बाद, इससे पहले कि ईंधन की नली और पाइप अलग किया जाता, अपनी कार चला दी। कार से उलझी हुई नली और पाइप को निकालने में हुई देरी के कारण फिलिप को प्रथम की बजाए १३वाँ स्थान पाने पर ही सन्तोष करना पड़ा।

   इस संसार में बहुत सी लुभावनी बातें हैं जो हमारा ध्यान आकर्षित करके हमें अपने वासत्विक लक्ष्य से भटका देती हैं, जैसे हमारे कुछ शौक, सिनेमा, मौज-मस्ती, कंप्यूटर खेल, टी.वी. कार्यक्रम इत्यादि। ये और ऐसी अन्य बातें आरंभ होती हैं विश्राम और तनाव दूर करने की गतिविधियों के रूप में और धीरे धीरे बढ़कर ऐसी लत बन जाती हैं जो हमारा बहुत सा उपयोगी समय ले लेती हैं और स्वयं तनाव का एक कारण हो जाती हैं। इनमें उलझकर हम मसीही विश्वासी अपने मूल उद्देश्य - प्रभु यीशु में पापों की क्षमा और उद्धार का प्रचार तथा अपने जीवनों से परमेश्वर को महिमा देना और उसकी सेवकाई में लगे रहना, में शिथिल पड़ जाते हैं या उससे भटक जाते हैं।

   प्रेरित पुलुस ने अपने युवा साथी तिमुथियुस को भी उन सांसारिक उलझनों से बचकर रहने की चेतावनी दी जिनके कारण आत्मिक जीवन में पिछड़ापन आ जाता है। उसने तिमुथियुस को चिताया कि अपने प्रभु यीशु और उसके कार्यों से संसार की कोई बात उसके ध्यान को बंटाने ना पाए। पौलुस ने तिमुथियुस को समझाया कि क्यों उसे संसार कि बातों में उलझने से बचना है - जिससे वह अपने प्रभु को प्रसन्न कर सके। प्रेरित यूहन्ना ने भी अपनी पत्री में मसीही विश्वासीयों को संसार की बातों में उलझने से बचने के लिए लिखा क्योंकि, "क्योंकि जो कुछ संसार में है, अर्थात शरीर की अभिलाषा, और आंखों की अभिलाषा और जीविका का घमण्‍ड, वह पिता की ओर से नहीं, परन्तु संसार ही की ओर से है। और संसार और उस की अभिलाषाएं दोनों मिटते जाते हैं, पर जो परमेश्वर की इच्छा पर चलता है, वह सर्वदा बना रहेगा।" (1 यूहन्ना 2:17-18)।

   आज आपका मसीही विश्वास का जीवन कैसा है? क्या आपके जीवन से प्रभु का उद्देश्य पूरा हो रहा है? कहीं सांसारिक बातों में उलझ कर आप अपनी आशीषें तो गवाँ नहीं दे रहे हैं? - सी. पी. हिया


हम मसीही विश्वासी इस संसार मे रहते अवश्य हैं परन्तु हमारी नागरिकता और उद्देश्य स्वर्गीय हैं।

जब कोई योद्धा लड़ाई पर जाता है, तो इसलिये कि अपने भरती करने वाले को प्रसन्न करे, अपने आप को संसार के कामों में नहीं फंसाता - 2 तिमुथियुस 2:4

बाइबल पाठ: - 2 तिमुथियुस 2:1-7
2 Timothy 2:1 इसलिये हे मेरे पुत्र, तू उस अनुग्रह से जो मसीह यीशु में है, बलवन्‍त हो जा।
2 Timothy 2:2 और जो बातें तू ने बहुत गवाहों के साम्हने मुझ से सुनी हैं, उन्हें विश्वासी मनुष्यों को सौंप दे; जो औरों को भी सिखाने के योग्य हों।
2 Timothy 2:3 मसीह यीशु के अच्‍छे योद्धा की नाईं मेरे साथ दुख उठा।
2 Timothy 2:4 जब कोई योद्धा लड़ाई पर जाता है, तो इसलिये कि अपने भरती करने वाले को प्रसन्न करे, अपने आप को संसार के कामों में नहीं फंसाता
2 Timothy 2:5 फिर अखाड़े में लड़ने वाला यदि विधि के अनुसार न लड़े तो मुकुट नहीं पाता।
2 Timothy 2:6 जो गृहस्थ परिश्रम करता है, फल का अंश पहिले उसे मिलना चाहिए।
2 Timothy 2:7 जो मैं कहता हूं, उस पर ध्यान दे और प्रभु तुझे सब बातों की समझ देगा।

एक साल में बाइबल: 
  • रूत 1-4 
  • लूका 8:1-25


बुधवार, 3 अप्रैल 2013

परीक्षण


   हर साल मैं अपने सालाना स्वास्थ्य-परीक्षण के लिए अपने डॉक्टर के पास जाता हूँ और वह मेरे शरीर को टटोलकर, दबाकर, एक्स-रे, रक्त-जाँच, ई.सी.जी. तथा अन्य परीक्षणों के द्वारा मेरी जाँच करता है। यह समय चिन्ता और आशंकाओं का होता है, क्योंकि मैं नहीं जानता कि परीक्षणों का नतीजा क्या दिखाएगा और डॉक्टर क्या बताएगा, लेकिन फिर भी इसे करवाना आवश्यक होता है जिससे मैं अपने शरीर के स्वास्थ होने की स्थिति जान सकूँ और आगे के लिए वे निर्णय ले सकूँ, जो बढ़ती मेरी उम्र के लिए लाभदायक हों।

   यही बात आत्मिक जीवन में भी लागू होती है, विशेषकर एक मसीही विश्वासी के लिए। हम मसीही विश्वासीयों को कुछ कुछ समय बाद रुककर अपने मन और जीवन की जाँच कर लेना ज़रूरी है जिससे हम किसी अनुचित बात को अपने जीवन में पलने बढ़ने ना दें। इस आत्मिक जाँच का एक स्थान है प्रभु भोज के समय प्रभु की मेज़ के सम्मुख। प्रेरित पौलुस ने कुरिन्थियों की मण्डली के मसीही विश्वासीयों को इसके बारे में लिखा और समझाया क्योंकि उनमें से बहुतेरे अयोग्य रीति से प्रभु की मेज़ में भाग ले रहे थे। पौलुस ने कहा, "इसलिये मनुष्य अपने आप को जांच ले और इसी रीति से इस रोटी में से खाए, और इस कटोरे में से पीए" (1 कुरिन्थियों 11:28)।

   प्रभु यीशु की मृत्यु द्वारा हमें पापों से मिली क्षमा और उसकी मृत्यु के महत्व तथा परिणामों को स्मरण करना और साथ में उसकी उपस्थिति में अपने आप को जाँचना, हमारा अपने आप से संबंधित विचारों और व्यवहार को बड़ी गहराई और गंभीरता से स्पष्ट कर देता है। जब हम परीक्षण के लिए अपने मन खोलकर प्रभु के सामने आते हैं तो प्रभु हमें हमारे जीवन की वो बातें दिखाता है जो मसीही जीवन के लिए असंगत और अनुचित हैं। इस गहन परीक्षण और अपनी वासत्विक आत्मिक दशा की पहचान के बाद हम पश्चाताप के साथ प्रभु की ओर मुड़ सकते हैं अपनी गलतीयों के लिए उससे क्षमा मांगकर सामर्थ पा सकते हैं, मार्गदर्शन पा सकते हैं और आते समय के लिए तैयार हो सकते हैं। प्रभु की मेज़ का यही उद्देश्य है - कि मनुष्य अपने आप को जाँच ले। 

   प्रभु नहीं चाहता कि हम अपने जीवनों में गलतीयों और पापों का बोझ लेकर उनके दुषपरिणामों को भोगते हुए आगे बढ़ें। इसीलिए उसने यह प्रयोजन किया ताकि उसके जन कभी अपनी आशीषों से वंचित ना होने पाएं। प्रभु भोज में सम्मिलित होने का समय आत्म-परीक्षण का समय है जहाँ से प्रभु हमें स्वस्थ और सामर्थी होके आगे बढ़ने और कार्य करने के लिए भेजना चाहता है। - बिल क्राउडर


प्रभु के सम्मुख आत्म-परीक्षण करने से किसी मसीही विश्वासी को बचना नहीं चाहिए।

पर हर एक अपने ही काम को जांच ले, और तब दूसरे के विषय में नहीं परन्तु अपने ही विषय में उसको घमण्‍ड करने का अवसर होगा। - गलतियों 6:4

बाइबल पाठ: 1 कुरिन्थियों 11:23-32
1 Corinthians 11:23 क्योंकि यह बात मुझे प्रभु से पहुंची, और मैं ने तुम्हें भी पहुंचा दी; कि प्रभु यीशु ने जिस रात वह पकड़वाया गया रोटी ली।
1 Corinthians 11:24 और धन्यवाद कर के उसे तोड़ी, और कहा; कि यह मेरी देह है, जो तुम्हारे लिये है: मेरे स्मरण के लिये यही किया करो।
1 Corinthians 11:25 इसी रीति से उसने बियारी के पीछे कटोरा भी लिया, और कहा; यह कटोरा मेरे लोहू में नई वाचा है: जब कभी पीओ, तो मेरे स्मरण के लिये यही किया करो।
1 Corinthians 11:26 क्योंकि जब कभी तुम यह रोटी खाते, और इस कटोरे में से पीते हो, तो प्रभु की मृत्यु को जब तक वह न आए, प्रचार करते हो।
1 Corinthians 11:27 इसलिये जो कोई अनुचित रीति से प्रभु की रोटी खाए, या उसके कटोरे में से पीए, वह प्रभु की देह और लोहू का अपराधी ठहरेगा।
1 Corinthians 11:28 इसलिये मनुष्य अपने आप को जांच ले और इसी रीति से इस रोटी में से खाए, और इस कटोरे में से पीए।
1 Corinthians 11:29 क्योंकि जो खाते-पीते समय प्रभु की देह को न पहिचाने, वह इस खाने और पीने से अपने ऊपर दण्‍ड लाता है।
1 Corinthians 11:30 इसी कारण तुम में से बहुत से निर्बल और रोगी हैं, और बहुत से सो भी गए।
1 Corinthians 11:31 यदि हम अपने आप में जांचते, तो दण्‍ड न पाते।
1 Corinthians 11:32 परन्तु प्रभु हमें दण्‍ड देकर हमारी ताड़ना करता है इसलिये कि हम संसार के साथ दोषी न ठहरें।

एक साल में बाइबल: 
  • न्यायीयों 19-21 
  • लूका 7:31-50


मंगलवार, 2 अप्रैल 2013

करुणा


   फोर्ट कार्सन, कोलारैडो में अपने 2 वर्ष के सेनाध्यक्ष काल में मेजर जनर्ल मार्क ग्रैहम दुसरों के प्रति अपने व्यवहार और संवेदनशीलता के लिए प्रसिद्ध और प्रीय हो गए। अमेरीकी सेना के उनके एक साथी ने कहा, "मैंने कभी ऐसा सेना अधिकारी नहीं देखा जो सैनिकों और उनके परिवारों के बारे में इतना चिंतित रहता हो।" अपने एक बेटे के आत्महत्या कर लेने और दूसरे बेटे के युद्धभूमि पर शहीद हो जाने के बाद जनर्ल मार्क और उनकी पत्नि कैरल ने अपना जीवन उन सैनिकों और उनके परिवारों की सहायता को समर्पित कर दिया जो किसी तनाव, विषाद या व्यक्तिगत हानि से होकर निकल रहे हों।

   परमेश्वर के वचन बाइबल के प्रेरितों के कार्य पुस्तक में एक ऐसे ही चरित्र का उल्लेख है जो दूसरों की देखभाल और चिन्ता के लिए जाना जाता था। उसका नाम तो यूसुफ था किंतु उस आरंभिक मसीही मण्डली में वह बरनबास अर्थात ’प्रोत्साहन का पुत्र’ नाम से अधिक जाना जाता था। वह बरनाबास ही था जिसने मसीही विश्वास में नए आए पौलुस पर, जो उस समय शाउल कहलाता था, और उसके विश्वास की सार्थकता पर पहले पहल विश्वास किया, जब मण्डली के बाकी लोग उसे शंका की दृष्टि से देखते थे (प्रेरितों 9:26-27)। बाद में बरनबास ही पौलुस को विश्वासियों को सिखाने के लिए तरसुस से अन्ताकिया लेकर आया (प्रेरितों 11:25-26)। अपनी एक पूर्व प्रचार यात्रा पर असफल रहने और यात्रा छोड़कर लौट जाने वाले यूहन्ना मरकुस को एक और अवसर देने की वकालत करने वाला भी बरनबास ही था (प्रेरितों 15:36-38); आगे चलकर यही मर्कुस आरांभिक मसीही विश्वासी मण्डली में बहुत उपयोगी बना और उसके द्वारा रचित प्रभु यीशु की जीवनी आज बाइबल की एक पुस्तक है।

   करुणा, सह-हृदयता, सहायता को तत्परता, मन के वे भाव हैं जो कार्यों द्वारा ही जाने जाते हैं। इसीलिए परमेश्वर ने अपने वचन में हम मसीही विश्वासियों के लिए निर्देश दिया है कि "इसलिये परमेश्वर के चुने हुओं की नाईं जो पवित्र और प्रिय हैं, बड़ी करूणा, और भलाई, और दीनता, और नम्रता, और सहनशीलता धारण करो" (कुलुस्सियों 3:12)।

   परमेश्वर के हम पर हुए अनुग्रह को दूसरों के प्रति व्यवहार में नित-प्रायः प्रदर्शित करना हमारे मसीही विश्वासी होने का प्रमाण है। - डेविड मैक्कैसलैंड


सच्ची करुणा कार्यों में बोलती है।

क्योंकि वह एक भला मनुष्य था; और पवित्र आत्मा से परिपूर्ण था: और और बहुत से लोग प्रभु में आ मिले। - प्रेरितों के कार्य 11:24

बाइबल पाठ: प्रेरितों के कार्य 11:19-26
Acts 11:19 सो जो लोग उस क्‍लेश के मारे जो स्‍तिफनुस के कारण पड़ा था, तित्तर बित्तर हो गए थे, वे फिरते फिरते फीनीके और कुप्रुस और अन्‍ताकिया में पहुंचे; परन्तु यहूदियों को छोड़ किसी और को वचन न सुनाते थे।
Acts 11:20 परन्तु उन में से कितने कुप्रुसी और कुरेनी थे, जो अन्‍ताकिया में आकर युनानियों को भी प्रभु यीशु का सुसमचार की बातें सुनाने लगे।
Acts 11:21 और प्रभु का हाथ उन पर था, और बहुत लोग विश्वास कर के प्रभु की ओर फिरे।
Acts 11:22 तब उन की चर्चा यरूशलेम की कलीसिया के सुनने में आई, और उन्होंने बरनबास को अन्‍ताकिया भेजा।
Acts 11:23 वह वहां पहुंचकर, और परमेश्वर के अनुग्रह को देखकर आनन्‍दित हुआ; और सब को उपदेश दिया कि तन मन लगाकर प्रभु से लिपटे रहो।
Acts 11:24 क्योंकि वह एक भला मनुष्य था; और पवित्र आत्मा से परिपूर्ण था: और और बहुत से लोग प्रभु में आ मिले।
Acts 11:25 तब वह शाऊल को ढूंढने के लिये तरसुस को चला गया।
Acts 11:26 और जब उन से मिला तो उसे अन्‍ताकिया में लाया, और ऐसा हुआ कि वे एक वर्ष तक कलीसिया के साथ मिलते और बहुत लोगों को उपदेश देते रहे, और चेले सब से पहिले अन्‍ताकिया ही में मसीही कहलाए।

एक साल में बाइबल: 
  • न्यायीयों 16-18 
  • लूका 7:1-30


सोमवार, 1 अप्रैल 2013

पुनरुत्थान और जीवन


   प्रभु यीशु ने कहा, "पुनरुत्थान और जीवन मैं ही हूँ!" ऐसा दबंग दावा करना एक बात है और उसे प्रमाणित करना दूसरी। लेकिन प्रभु यीशु ने मृतकों में से पुनरुत्थान के द्वारा अपने इस दावे को प्रमाणित भी कर दिखाया।

   जॉर्ज मैकडौनल्ड ने लिखा, "यदि आप यह विश्वास करते हैं कि परमेश्वर का पुत्र मारा गया और फिर मृतकों में से जी उठा, तो आपका जीवन और भविष्य उस अनन्त काल के प्रभात से परिपूर्ण है जो जीवन के पहाड़ों के ऊपर उदय हो रहा है, और आपके पास एक ऐसी आशा है जिसकी कलपना भी किसी कवि की उच्चतम कलपना से परे है।"

   परमेश्वर का पुत्र मारा गया और फिर जी उठा और उसका यह पुनरुत्थान इस बात का निश्चय है कि उसपर विश्वास करने वालों को भी परमेश्वर अनन्त काल के आशीषित जीवन के लिए ऐसे ही पुनः जीवित कर उठाएगा; एक सोचने, समझने, स्मरण और संवेदना रखने वाले स्वरूप तथा व्यक्तित्व में वे सदा काल तक परमेश्वर के साथ जीवित रहेंगे।

   प्रभु यीशु के विश्वासी अपने उन प्रीय जनों और संबंधियों से फिर से मिलने और उनके साथ हमेशा के लिए बने रहने, जिन्हें मृत्यु ने हम से अलग कर दिया है; सदा ही एक ऐसे स्थान पर निवास करने जहाँ कोई दुखः नहीं है; हमें सब कुछ देने वाले अपने उद्धारकर्ता और प्रेमी तथा करुणामय प्रभु को हमेशा देखते रहने और सदा उसके साथ बने रहने का जीवन आदि कुछ बातें हैं जो हमारे मनों में परमेश्वर द्वारा दी गई अनन्त की आशा और सदा काल के जीविन के साथ जुड़ी हैं।

   केवल इतना ही नहीं, क्योंकि हमारे पास उस आते जीवन का निश्चय और धन्य आशा है, इसलिए हम इस कमज़ोर और दुखों से ग्रसित शरीर में पृथ्वी का अपना यह थोड़ा सा समय शांति के साथ बिता सकते हैं; हम यहाँ की दरिद्रता और कठिनाईयाँ सह सकते हैं; हम एकाकीपन, मनोव्यथा और क्लेष सह सकते हैं "क्योंकि हमारा पल भर का हल्का सा क्‍लेश हमारे लिये बहुत ही महत्‍वपूर्ण और अनन्त महिमा उत्पन्न करता जाता है" (2 कुरिन्थियों 4:17)।

   प्रभु यीशु का पुनरुत्थान उसके सभी विश्वासियों के लिए इस जीवन में बेबयान शांति और स्वर्ग में अनन्त जीवन का निश्चय है। क्या यह निश्चय और भविष्य की आशा आपके पास भी है? - डेविड रोपर


प्रभु यीशु का पुनरुत्थान मसीही विश्वास की नींव है।

यीशु ने उस से कहा, पुनरुत्थान और जीवन मैं ही हूं, जो कोई मुझ पर विश्वास करता है वह यदि मर भी जाए, तौभी जीएगा। - यूहन्ना 11:26

बाइबल पाठ: 1 कुरिन्थियों 15:1-11
1 Corinthians 15:1 हे भाइयों, मैं तुम्हें वही सुसमाचार बताता हूं जो पहिले सुना चुका हूं, जिसे तुम ने अंगीकार भी किया था और जिस में तुम स्थिर भी हो।
1 Corinthians 15:2 उसी के द्वारा तुम्हारा उद्धार भी होता है, यदि उस सुसमाचार को जो मैं ने तुम्हें सुनाया था स्मरण रखते हो; नहीं तो तुम्हारा विश्वास करना व्यर्थ हुआ।
1 Corinthians 15:3 इसी कारण मैं ने सब से पहिले तुम्हें वही बात पहुंचा दी, जो मुझे पहुंची थी, कि पवित्र शास्त्र के वचन के अनुसार यीशु मसीह हमारे पापों के लिये मर गया।
1 Corinthians 15:4 ओर गाड़ा गया; और पवित्र शास्त्र के अनुसार तीसरे दिन जी भी उठा।
1 Corinthians 15:5 और कैफा को तब बारहों को दिखाई दिया।
1 Corinthians 15:6 फिर पांच सौ से अधिक भाइयों को एक साथ दिखाई दिया, जिन में से बहुतेरे अब तक वर्तमान हैं पर कितने सो गए।
1 Corinthians 15:7 फिर याकूब को दिखाई दिया तब सब प्रेरितों को दिखाई दिया।
1 Corinthians 15:8 और सब के बाद मुझ को भी दिखाई दिया, जो मानो अधूरे दिनों का जन्मा हूं।
1 Corinthians 15:9 क्योंकि मैं प्रेरितों में सब से छोटा हूं, वरन प्रेरित कहलाने के योग्य भी नहीं, क्योंकि मैं ने परमेश्वर की कलीसिया को सताया था।
1 Corinthians 15:10 परन्तु मैं जो कुछ भी हूं, परमेश्वर के अनुग्रह से हूं: और उसका अनुग्रह जो मुझ पर हुआ, वह व्यर्थ नहीं हुआ परन्तु मैं ने उन सब से बढ़कर परिश्रम भी किया: तौभी यह मेरी ओर से नहीं हुआ परन्तु परमेश्वर के अनुग्रह से जो मुझ पर था।
1 Corinthians 15:11 सो चाहे मैं हूं, चाहे वे हों, हम यही प्रचार करते हैं, और इसी पर तुम ने विश्वास भी किया।

एक साल में बाइबल: 
  • न्यायीयों 13-15 
  • लूका 6:27-49


रविवार, 31 मार्च 2013

असत्य?


   बात 1980 के दशक की है, कंप्यूटर प्रोग्राम बनाने वाले दो भाईयों जॉन तथा थौमस नौल ने कंप्यूटर प्रोग्राम द्वारा चित्रों में परिवर्तन और सुधार करने के प्रयोग आरंभ किए। लोगों और सॉफ्टवेयर कंपनियों ने उन्हें सनकी कहा, उनका उपहास किया क्योंकि उन दिनों में फोटो उतारने वाले कंप्यूटर प्रयोग नहीं करते थे। उन भाइयों ने अपने प्रोग्राम को पहले-पहल नाम दिया ’डिस्पले’, फिर उसे बदल कर ’इमाजिनेटर’ कहा और अन्ततः प्रोग्राम का नाम हुआ फोटोशॉप! आज संसार भर में फोटोशॉप घर पर ही छोटी-मोटी छेड़-छाड़ से लेकर व्यावसायिक स्तर पर चित्रों को संवारने, सुधारने, उनमें कई परिवर्तन करने के लिए उपयोग होने वाला एक बहुत लोकप्रीय और उपयोगी प्रोग्राम है, यहाँ तक कि जब कोई चित्र बहुत अच्छा या अद्भुत दिखता है तो लोग कहते हैं कि अवश्य ही वह ’फोटोशॉप’ किया हुआ चित्र होगा!

   संसार के इतिहास की उस पहली ईस्टर प्रातः जब कुछ स्त्रियां प्रभु यीशु की देह पर सुगंधित द्रव्य लगाने के लिए उसकी कब्र पर पहुँचीं तो उन्हें कब्र खाली मिली, और वहाँ बैठे स्वर्गदूत ने उन से कहा "वह यहां नहीं, परन्तु जी उठा है; स्मरण करो; कि उसने गलील में रहते हुए तुम से कहा था" (लूका 24:6)। जब उन स्त्रियों ने जाकर यह बात प्रभु यीशु के चेलों को बताई तो "उन की बातें उन्हें कहानी सी समझ पड़ीं, और उन्होंने उन की प्रतीति न की" (लूका 24:11)। स्त्रियों द्वारा लाए गए समाचार के प्रति उन चेलों की आरंभिक प्रतिक्रीया वही थी जो इस बात को सुनकर आज भी संसार के लोगों की होती है - बकवास! पागलपन! अविश्वसनीय!

   यदि किसी ने घटनाक्रम और प्रमाणों को छेड़-छाड़ करके बदल दिया है और प्रभु यीशु का पुनरुत्थान चतुराई से लोगों पर थोपी गई एक मनगढ़ंत कहानी है, तो संसार की अन्य किंवदंतीयों के समान, पिछले लगभग दो हज़ार वर्षों से संसार भर में करोड़ों लोगों का हर साल इस दिन इस पुनरुत्थान के आनन्द को मनाना एक झूठी कहानी को मनाना ही है। किंतु यदि प्रभु यीशु वास्तव में फिर से जी उठा है तो फिर जो कुछ उसने पाप क्षमा, जीवन और मन परिवर्तन की अनिवार्यता और अनन्त जीवन के बारे में कहा वह भी सत्य है। प्रभु यीशु की खाली कब्र और प्रभु यीशु के संबंध में इतिहास के प्रमाण संसार के सामने खुले हैं, कोई भी उन्हें देख सकता है, जाँच सकता है, अपने निषकर्ष स्वयं निकाल सकता है।

   यह पुनरुत्थान एक अकाट्य सत्य है जिसे कितने ही लोगों ने आज़मा के देखा और जाना है कि वास्तव में प्रभु यीशु मारा गया, गाड़ा गया और तीसरे दिन मुर्दों से जी भी उठा। उसकी कब्र खाली है और उसके अनुयायीयों के बदले हुए जीवन प्रमाण हैं कि वह अपने अनुयायीयों के मनों में रहता है।

   इस सत्य के अर्थ और परिणामों पर ज़रा विचार कीजिए; प्रभु यीशु के जीवन और शिक्षाओं का अध्ययन कीजिए, सत्य स्वयं ही आपके सामने होगा। प्रभु यीशु और पाप क्षमा के उसके प्रेम भरे निमंत्रण को नज़रंदाज़ करके आप एक ऐसा जोखिम उठा रहे हैं, जिसकी फिर कोई भरपाई नहीं है। - डेविड मैक्कैसलैंड


प्रभु यीशु का पुनरुत्थान एक ऐतिहासिक सत्य है जो प्रत्युत्तर में विश्वास की माँगता है।

यह बात सच और हर प्रकार से मानने के योग्य है, कि मसीह यीशु पापियों का उद्धार करने के लिये जगत में आया - 1 तिमुथियुस 1:15

बाइबल पाठ: लूका 24:1-12
Luke 24:1 परन्तु सप्‍ताह के पहिले दिन बड़े भोर को वे उन सुगन्‍धित वस्‍तुओं को जो उन्होंने तैयार की थीं, ले कर कब्र पर आईं।
Luke 24:2 और उन्होंने पत्थर को कब्र पर से लुढ़का हुआ पाया।
Luke 24:3 और भीतर जा कर प्रभु यीशु की लोथ न पाई।
Luke 24:4 जब वे इस बात से भौंचक्की हो रही थीं तो देखो, दो पुरूष झलकते वस्‍त्र पहिने हुए उन के पास आ खड़े हुए।
Luke 24:5 जब वे डर गईं, और धरती की ओर मुंह झुकाए रहीं; तो उन्होंने उन ने कहा; तुम जीवते को मरे हुओं में क्यों ढूंढ़ती हो?
Luke 24:6 वह यहां नहीं, परन्तु जी उठा है; स्मरण करो; कि उसने गलील में रहते हुए तुम से कहा था।
Luke 24:7 कि अवश्य है, कि मनुष्य का पुत्र पापियों के हाथ में पकड़वाया जाए, और क्रूस पर चढ़ाया जाए; और तीसरे दिन जी उठे।
Luke 24:8 तब उस की बातें उन को स्मरण आईं।
Luke 24:9 और कब्र से लौटकर उन्होंने उन ग्यारहों को, और, और सब को, ये बातें कह सुनाईं।
Luke 24:10 जिन्हों ने प्रेरितों से ये बातें कहीं, वे मरियम मगदलीनी और योअन्ना और याकूब की माता मरियम और उन के साथ की और स्‍त्रियां भी थीं।
Luke 24:11 परन्तु उन की बातें उन्हें कहानी सी समझ पड़ीं, और उन्होंने उन की प्रतीति न की।
Luke 24:12 तब पतरस उठ कर कब्र पर दौड़ गया, और झुककर केवल कपड़े पड़े देखे, और जो हुआ था, उस से अचम्भा करता हुआ, अपने घर चला गया।

एक साल में बाइबल: 
  • न्यायीयों 11-12 
  • लूका 6:1-26


शनिवार, 30 मार्च 2013

खुले द्वार


   हम में से अधिकांशतः अपने जीवनों में कभी ना कभी इस अनुभव से होकर निकले हैं जब हम किसी चीज़ की ऐसी लालसा करते हैं कि उसे पाने के लिए कुछ भी कर गुज़रते हैं, यह जानते हुए भी वह लालसा या हमारा मार्ग अनुचित अथवा गलत है और बाद में अपनी इस ढिठाई और मूर्खता के लिए पछताते हैं। परमेश्वर की जानबूझ कर करी गई अनाज्ञाकारिता के परिणामों के कारण हम अपने आप से क्षुब्ध हो सकते हैं, हो रहे दुषपरिणामों से स्तब्ध हो सकते हैं और मन मसोस कर उन्हें सहने के लिए बाध्य हो सकते हैं। लेकिन फिर भी आगे के लिए एक मार्ग हमें सदा उपलब्ध है - क्षमा याचना और पश्चाताप।

   जब इस्त्राएल के लोगों ने मांग करी कि अन्य जाति के लोगों के समान उन्हें भी अपने ऊपर एक राजा चाहिए तो परमेश्वर के भविष्यद्वकता शमूएल ने उन्हें समझाया कि परमेश्वर ही उनका राजा है और परमेश्वर के स्थान पर किसी मनुष्य के राजा बनाने के दुषपरिणामों के बारे में चिताया (1 शमूएल 8:4-9)। लेकिन इस्त्राएली नहीं माने और परमेश्वर ने उन्हें उनकी इच्छानुसार एक राजा दे दिया। जब थोड़े समय में अपनी इस मूर्खता का उन्हें एहसास हुआ तो उन्होंने फिर से शमूएल से इसके लिए सहायता और प्रार्थना मांगी (1 शमूएल 12:19)। शमूएल ने उन्हें सांत्वना दी और आगे के लिए मार्ग बताया: "शमूएल ने लोगों से कहा, डरो मत; तुम ने यह सब बुराई तो की है, परन्तु अब यहोवा के पीछे चलने से फिर मत मुड़ना; परन्तु अपने सम्पूर्ण मन से उस की उपासना करना" (1 शमूएल 12:20)।

   हम बीते हुए कल को लौटा के नहीं ला सकते और ना ही उस की बातों को पलट सकते हैं, लेकिन हम आज ऐसे कार्य अवश्य कर सकते हैं जो आने वाले कल के लिए लाभकारी हों। शमूएल ने इस्त्राएलियों के लिए प्रार्थना करने और उन्हें सही मार्ग की शिक्षा देने का आश्वासन दिया और इसके कारगर होने के लिए उसने केवल एक शर्त उनके सामने रखी: "केवल इतना हो कि तुम लोग यहोवा का भय मानो, और सच्चाई से अपने सम्पूर्ण मन के साथ उसकी उपासना करो; क्योंकि यह तो सोचो कि उसने तुम्हारे लिये कैसे बड़े बड़े काम किए हैं" (1 शमूएल 12:24)।

   परमेश्वर आज भी हमें बुलाता है। हम चाहे कितने ही परमेश्वर से विमुख, ढीठ, अनाज्ञाकारी और स्वार्थी रहे हों, किंतु प्रभु यीशु में हमारे लिए परमेश्वर से क्षमा के द्वार सदा खुले हैं और सृष्टिकर्ता परमेश्वर अपनी हर एक सृष्टि से मिले रहना चाहता है, उन्हें नष्ट होते देखना नहीं चाहता। बस नम्रता के साथ अपनी गलती को मान लें और विश्वास के साथ प्रभु यीशु से क्षमा को ग्रहण कर लें। अनन्त आशीषें और शांति का जीवन आपकी राह तक रहा है। - डेविड मैक्कैसलैंड


बीते हुए कल की बातों से आने वाले कल की आशीषों को दबा ना दें।

हे भाइयों, मेरी भावना यह नहीं कि मैं पकड़ चुका हूं: परन्तु केवल यह एक काम करता हूं, कि जो बातें पीछे रह गई हैं उन को भूल कर, आगे की बातों की ओर बढ़ता हुआ निशाने की ओर दौड़ा चला जाता हूं, ताकि वह इनाम पाऊं, जिस के लिये परमेश्वर ने मुझे मसीह यीशु में ऊपर बुलाया है। - फिलिप्पियों 3:13-14

बाइबल पाठ: 1 शमूएल 12:19-25
1 Samuel 12:19 और सब लोगों ने शमूएल से कहा, अपने दासों के निमित्त अपने परमेश्वर यहोवा से प्रार्थना कर, कि हम मर न जाएं; क्योंकि हम ने अपने सारे पापों से बढ़कर यह बुराई की है कि राजा मांगा है।
1 Samuel 12:20 शमूएल ने लोगों से कहा, डरो मत; तुम ने यह सब बुराई तो की है, परन्तु अब यहोवा के पीछे चलने से फिर मत मुड़ना; परन्तु अपने सम्पूर्ण मन से उस की उपासना करना;
1 Samuel 12:21 और मत मुड़ना; नहीं तो ऐसी व्यर्थ वस्तुओं के पीछे चलने लगोगे जिन से न कुछ लाभ पहुंचेगा, और न कुछ छुटकारा हो सकता है, क्योंकि वे सब व्यर्थ ही हैं।
1 Samuel 12:22 यहोवा तो अपने बड़े नाम के कारण अपनी प्रजा को न तजेगा, क्योंकि यहोवा ने तुम्हें अपनी ही इच्छा से अपनी प्रजा बनाया है।
1 Samuel 12:23 फिर यह मुझ से दूर हो कि मैं तुम्हारे लिये प्रार्थना करना छोड़कर यहोवा के विरुद्ध पापी ठहरूं; मैं तो तुम्हें अच्छा और सीधा मार्ग दिखाता रहूंगा।
1 Samuel 12:24 केवल इतना हो कि तुम लोग यहोवा का भय मानो, और सच्चाई से अपने सम्पूर्ण मान के साथ उसकी उपासना करो; क्योंकि यह तो सोचो कि उसने तुम्हारे लिये कैसे बड़े बड़े काम किए हैं।
1 Samuel 12:25 परन्तु यदि तुम बुराई करते ही रहोगे, तो तुम और तुम्हारा राजा दोनों के दोनों मिट जाओगे।

एक साल में बाइबल: 
  • न्यायीयों 9-10 
  • लूका 5:17-39