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सोमवार, 10 जून 2013

उपाधि

   आपके नाम के लगी आपकी उपाधि आपकी श्रेणी की सूचक है और निर्धारित करती है कि आपके आस-पास विद्यमान लोगों के संदर्भ में आपके प्रति कैसा व्यवहार किया जाएगा - यदि आपकी उपाधि आपको समाज के शीर्ष वर्ग में दिखाती है तो लोगों का व्यावहार भी उसके अनुरूप होगा, और यदि सामान्य वर्ग में दिखाती है तो फिर व्यवहार भी सामान्य ही होगा। परमेश्वर के वचन बाइबल में पौलुस के नाम के साथ उपाधि जुड़ी है "प्रेरित" अर्थात "भेजा हुआ" (1 तिमुथियुस 1:1)।

   पौलुस के लिए यह उपाधि किसी गर्व का नहीं वरन एक अप्रत्याशित चमत्कार के स्मरण को बनाए रखने का कारण थी। उस ने यह पदवी अपनी किसी योग्यता अथवा परिश्रम के द्वारा कमाई नहीं थी, वरन यह पदवी उसे प्रदान करी गई थी; वह "...मसीह यीशु की आज्ञा से मसीह यीशु का प्रेरित है..."। दूसरे शब्दों में, पौलुस का प्रेरित होना किसी मानवीय योजना के द्वारा नहीं वरन एक ईश्वरीय प्रबंध था।

   पौलुस अपने बारे में लिखता है कि मसीह यीशु पर विश्वास लाने और उसे अपना जीवन समर्पण करने से पहले वह उसकी "...निन्‍दा करने वाला, और सताने वाला, और अन्‍धेर करने वाला था..." (1 तिमुथियुस 1:13)। मसीह यीशु के नाम और उसके अनुयायियों के प्रति अपने इसी व्यवहार के कारण वह अपने आप को संसार का सबसे बड़ा पापी भी मानता था (1 तिमुथियुस 1:15, 16)। लेकिन साथ ही उसने यह भी पहचाना कि यह सब करने के बावजूद, परमेश्वर के अनुग्रह ही से वह अब प्रभु यीशु का प्रेरित था और उस "सनातन राजा" के लिए कार्य करने को उपयुक्त ठहराया गया और नियुक्त किया गया था (1 तिमुथियुस 1:16, 17)।

   जैसे यह पौलुस के लिए अप्रत्याशित और विस्मयकारी था, वैसे ही आज भी सभी मसीही विश्वासियों के लिए भी उनका परमेश्वर के द्वारा अनुग्रह से पापों से बचाया जाना और परमेश्वर के कार्य के लिए उपयोग किया जाना भी है। पौलुस के समान ही उस राजाओं के राजा प्रभु यीशु ने, हमारे मसीही विश्वास में आने से पहले की हमारी दशा और व्यवहार के बावजूद, हमें भी संसार में अपने सन्देश के साथ भेजा है (मत्ती 28:18-20, प्रेरितों 1:8)। उसने हमें अपने राज्दूत नियुक्त किया है (2 कुरिन्थियों 5:20) कि हम उसके राज्य के सुसमाचार को समस्त संसार में फैलाएं।

   पौलुस के समान ही हम भी नम्रता के साथ यह पहचान लें और मान लें कि यह पदवी और सम्मान हमारी किसी योग्यता या सामर्थ से हमने नहीं कमाया है वरन परमेश्वर के अनुग्रह से हमें प्रदान किया गया है। संसार के उद्धारकर्ता और सृष्टि के परमेश्वर का प्रतिनिधि होना और प्रतिदिन उसके सनातन सत्य वचन, मसीह यीशु में सारे संसार के सभी लोगों को सेंत-मेंत उपलब्ध पापों की क्षमा और उद्धार के सुसमाचार को दूसरों तक पहुँचाना केवल हमारा कर्तव्य ही नहीं वरन हमारे लिए सौभाग्य भी है। - सी. पी. हिया


परमेश्वर ने संसार के साथ बाँटने को एक सन्देश आपको सौंपा है; आपकी ज़िम्मेदारी उसे अपने पास रखना नहीं, उसे बाँटते ही रहना है।

पौलुस की ओर से जो यीशु मसीह का दास है, और प्रेरित होने के लिये बुलाया गया, और परमेश्वर के उस सुसमाचार के लिये अलग किया गया है। - रोमियों 1:1 

बाइबल पाठ: 1 तिमुथियुस 1:1, 12-17
1 Timothy 1:1 पौलुस की ओर से जो हमारे उद्धारकर्ता परमेश्वर, और हमारी आशा-स्थान मसीह यीशु की आज्ञा से मसीह यीशु का प्रेरित है, तिमुथियुस के नाम जो विश्वास में मेरा सच्चा पुत्र है।
1 Timothy 1:12 और मैं, अपने प्रभु मसीह यीशु का, जिसने मुझे सामर्थ दी है, धन्यवाद करता हूं; कि उसने मुझे विश्वास योग्य समझकर अपनी सेवा के लिये ठहराया।
1 Timothy 1:13 मैं तो पहिले निन्‍दा करने वाला, और सताने वाला, और अन्‍धेर करने वाला था; तौभी मुझ पर दया हुई, क्योंकि मैं ने अविश्वास की दशा में बिन समझे बूझे, ये काम किए थे।
1 Timothy 1:14 और हमारे प्रभु का अनुग्रह उस विश्वास और प्रेम के साथ जो मसीह यीशु में है, बहुतायत से हुआ।
1 Timothy 1:15 यह बात सच और हर प्रकार से मानने के योग्य है, कि मसीह यीशु पापियों का उद्धार करने के लिये जगत में आया, जिन में सब से बड़ा मैं हूं।
1 Timothy 1:16 पर मुझ पर इसलिये दया हुई, कि मुझ सब से बड़े पापी में यीशु मसीह अपनी पूरी सहनशीलता दिखाए, कि जो लोग उस पर अनन्त जीवन के लिये विश्वास करेंगे, उन के लिये मैं एक आदर्श बनूं।
1 Timothy 1:17 अब सनातन राजा अर्थात अविनाशी अनदेखे अद्वैत परमेश्वर का आदर और महिमा युगानुयुग होती रहे। आमीन।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 इतिहास 34-36 
  • यूहन्ना 19:1-22


रविवार, 9 जून 2013

विचार

   मैं और मेरी पत्नि कार से एक यात्रा पर जा रहे थे, और एक स्थान पर दोपहर का भोजन करने के लिए रुके। भोजन के उपरान्त जब हमने बाहर निकल कर देखा तो पाया कि हमारी कार का एक शीशा टूटा हुआ है। उस एक झलक में ही मैंने पहचान लिया कि हम अपनी कार में सामने लगे दिशा निर्देशक यन्त्र को हटा कर छिपाना भूल गए थे और चोर ने उसे उठा लिया। मैंने पिछली सीट पर झाँक कर देखा तो मेरा लैपटौप तथा पासपोर्ट और चैकबुक भी नहीं थे।

   बाद में उस शाम, बहुत से फोन करने और बढ़ती चिन्ताओं में कई घन्टे बिताने के बाद एक सुखद अचरज की बात सामने आई। जब मैंने अपना सूटकेस खोला और कपड़े बाहर निकालने लगा, तो मेरे सामने मेरा वह सब सामान - मेरा लैपटौप तथा पासपोर्ट और चैकबुक पड़े थे, जिनके लिए मैं सोच रहा था कि वे उस दिशा निर्देशक यन्त्र के साथ चुरा लिए गई हैं। एकाएक मैं अपनी आँखों पर विश्वास नहीं कर सका; और तब मुझे स्मर्ण आया कि इस बार मैंने अपना यह सब सामान, आदत के अनुसार पिछली सीट पर नहीं रखा था वरन कपड़ों के साथ सूटकेस में रख दिया था और सूटकेस कार की डिग्गी में बन्द करके रख दिया था। कार के टूटे शीशे और चोरी की हड़बड़ाहट में मेरे विचार मुझे किसी अन्य ही दिशा में ले गए जब कि मेरा सामान मेरे ही पास सुरक्षित पड़ा था।

   कभी-कभी मौके की हड़बड़ाहट में हमारा दिमाग़ और हमारे विचार हमें सही आंकलन नहीं करने देते और हमें लगता है कि हम बहुत नुकसान में पड़ गए हैं जबकि ऐसा होता नहीं है। ऐसा ही दाऊद के साथ भी हुआ, और वह यह समझ बैठा कि परमेश्वर ने उसे छोड़ दिया है। बाद में जब उसे वास्तविकता का एहसास हुआ तो वह समझ पाया कि उसका भय और आशंका निराधार हैं और परमेश्वर पर उसका विश्वास सही है, और तब वह हानि की संभावना उसके लिए परमेश्वर की स्तुति के एक गीत को रचने की प्रेर्णा बन गई (भजन 13:5-6)।

   दाऊद के इस आनन्द ने हमारे लिए भी एक उदाहरण रखा है - यदि हमारा जीवन परमेश्वर में सुरक्षित है (कुलुस्सियों 3:3) तो हमसे कोई भी कभी भी वह नहीं छीन सकता जो हमारे लिए सबसे महत्वपूर्ण और बहुमूल्य है। - मार्ट डी हॉन


अपने मन को अपने मस्तिष्क के विचारों पर नहीं वरन अपने प्रति परमेश्वर के प्रेम पर आधारित रखें।

हे परमेश्वर तू कब तक? क्या सदैव मुझे भूला रहेगा? तू कब तक अपना मुखड़ा मुझ से छिपाए रहेगा? - भजन 13:1 

बाइबल पाठ: भजन 13; कुलुस्सियों 3:1-4
Psalms 13:1 हे परमेश्वर तू कब तक? क्या सदैव मुझे भूला रहेगा? तू कब तक अपना मुखड़ा मुझ से छिपाए रहेगा?
Psalms 13:2 मैं कब तक अपने मन ही मन में युक्तियां करता रहूं, और दिन भर अपने हृदय में दुखित रहा करूं, कब तक मेरा शत्रु मुझ पर प्रबल रहेगा?
Psalms 13:3 हे मेरे परमेश्वर यहोवा मेरी ओर ध्यान दे और मुझे उत्तर दे, मेरी आंखों में ज्योति आने दे, नहीं तो मुझे मृत्यु की नींद आ जाएगी;
Psalms 13:4 ऐसा न हो कि मेरा शत्रु कहे, कि मैं उस पर प्रबल हो गया; और ऐसा न हो कि जब मैं डगमगाने लगूं तो मेरे शत्रु मगन हों।
Psalms 13:5 परन्तु मैं ने तो तेरी करूणा पर भरोसा रखा है; मेरा हृदय तेरे उद्धार से मगन होगा।
Psalms 13:6 मैं परमेश्वर के नाम का भजन गाऊंगा, क्योंकि उसने मेरी भलाई की है।

Colossians 3:1 सो जब तुम मसीह के साथ जिलाए गए, तो स्‍वर्गीय वस्‍तुओं की खोज में रहो, जहां मसीह वर्तमान है और परमेश्वर के दाहिनी ओर बैठा है।
Colossians 3:2 पृथ्वी पर की नहीं परन्तु स्‍वर्गीय वस्‍तुओं पर ध्यान लगाओ।
Colossians 3:3 क्योंकि तुम तो मर गए, और तुम्हारा जीवन मसीह के साथ परमेश्वर में छिपा हुआ है।
Colossians 3:4 जब मसीह जो हमारा जीवन है, प्रगट होगा, तब तुम भी उसके साथ महिमा सहित प्रगट किए जाओगे।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 इतिहास 32-33 
  • यूहन्ना 18:19-40


शनिवार, 8 जून 2013

उद्देश्य


   मेरी पत्नि मार्टी बहुत अच्छा भोजन बनाती है। व्यस्त दिनचर्या के बाद शाम को आराम से बैठकर उसके बनाए भोजन का स्वाद तथा आनन्द लेना बहुत भला लगता है। कभी-कभी शाम के भोजन के बाद वह कुछ अन्य छोटे-मोटे कार्य करने में व्यस्त हो जाती है, और मेरे लिए दो ही विकल्प रह जाते हैं - बैठकर टेलिविज़न देखूँ, या फिर रसोई की साफ-सफाई करूँ। जब मैं अपने भले व्यवहार को प्रदर्शित करने की मनोदशा में होता हूँ, तो मैं अपनी आस्तीनें चढ़ा कर रसोई में जुट जाता हूँ और सब गन्दे बर्तनों की सफाई कर देता हूँ। यह सब करते हुए मेरा उद्देश्य रहता है कि इस सब को देखकर जब मार्टी कृतज्ञता के कुछ शब्द कहे, जैसे "अरे वाह जो, क्या बात है! वैसे तुम्हें यह करने की आवश्यकता नहीं थी" तो मैं तुरंत प्रत्युत्तर में उससे कह सकूँ, "मैंने तो यह सब बस तुम्हारे प्रति अपने प्रेम को जताने के लिए किया था"।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रभु यीशु ने इफसुस की मण्डली को इसलिए डाँटा क्योंकि उन्होंने प्रभु यीशु के प्रति "अपना पहला सा प्रेम" छोड़ दिया था (प्रकाशितवाक्य 2:4)। उस मण्डली के लोग बहुत कुछ कर तो रहे थे, लेकिन उनके वे भले कार्य प्रभु यीशु के प्रति प्रेम के कारण नहीं थे। यद्यपि प्रभु यीशु ने उनके धीरज और विश्वास में बने रहने की प्रशंसा करी, लेकिन मसीह यीशु के दृष्टिकोण से उनका यह सब परिश्रम व्यर्थ था क्योंकि इन भले कार्यों को करने में उनका उद्देश्य सही नहीं था।

   मसीही विश्वास में भला व्यवहार मसीह की उपासना के समान है। अपने विश्वास की परीक्षाओं का सामना करना, क्षमाशील होना, दूसरों की सेवा करना, एक दूसरे से प्रेम रखना आदि सभी बातें प्रभु से कोई शाबाशी पाने, पीठ थपथाए जाने या मण्डली में प्रशंसा पाने और नाम कमाने के उद्देश्य से नहीं वरन प्रगट रूप में अपने मसीही विश्वास को जी कर दिखाने और मसीह यीशु के प्रति अपने प्रेम को प्रगट करने के अवसर होने चाहिएं।

   ज़रा सोच कर देखिए, मसीह यीशु के प्रति अपने प्रेम को प्रगट करने के लिए आपने कोई "भला" कार्य आखिरी बार कब किया था? - जो स्टोवैल


व्यावाहरिक प्रेम ही वस्तविक प्रेम है।

पर मुझे तेरे विरुद्ध यह कहना है कि तू ने अपना पहिला सा प्रेम छोड़ दिया है। - प्रकाशितवाक्य 2:4 

बाइबल पाठ: प्रकाशितवाक्य 2:1-7
Revelation 2:1 इफिसुस की कलीसिया के दूत को यह लिख, कि, जो सातों तारे अपने दाहिने हाथ में लिये हुए है, और सोने की सातों दीवटों के बीच में फिरता है, वह यह कहता है कि
Revelation 2:2 मैं तेरे काम, और परिश्रम, और तेरा धीरज जानता हूं; और यह भी, कि तू बुरे लोगों को तो देख नहीं सकता; और जो अपने आप को प्रेरित कहते हैं, और हैं नहीं, उन्हें तू ने परख कर झूठा पाया।
Revelation 2:3 और तू धीरज धरता है, और मेरे नाम के लिये दु:ख उठाते उठाते थका नहीं।
Revelation 2:4 पर मुझे तेरे विरुद्ध यह कहना है कि तू ने अपना पहिला सा प्रेम छोड़ दिया है।
Revelation 2:5 सो चेत कर, कि तू कहां से गिरा है, और मन फिरा और पहिले के समान काम कर; और यदि तू मन न फिराएगा, तो मैं तेरे पास आकर तेरी दीवट को उस स्थान से हटा दूंगा।
Revelation 2:6 पर हां तुझ में यह बात तो है, कि तू नीकुलइयों के कामों से घृणा करता है, जिन से मैं भी घृणा करता हूं।
Revelation 2:7 जिस के कान हों, वह सुन ले कि आत्मा कलीसियाओं से क्या कहता है: जो जय पाए, मैं उसे उस जीवन के पेड़ में से जो परमेश्वर के स्‍वर्गलोक में है, फल खाने को दूंगा।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 इतिहास 30-31 
  • यूहन्ना 18:1-18


शुक्रवार, 7 जून 2013

विश्वास का तात्पर्य

   स्मुरना के इलाके के बिशप पॉलीकार्प (ई० 59-155) को, उनके मसीही विश्वास और प्रचार के कारण रोमी अधिकारियों ने बन्धक बना लिया और उन से कहा कि यदि वे कैद से मुक्त होना चाहते हैं तो मसीह यीशु को कोसें और उसकी निन्दा करें। पॉलीकार्प का उत्तर था, "छियासी वर्षों से मैं उसकी सेवा करता आया हूँ, और उसने आज तक कभी मेरी कोई हानि नहीं की है। मैं अपने मुक्तिदाता राजा की निन्दा कैसे कर सकता हूँ?" रोमी अधिकारी ने धमकी दी, "यदि तू अपनी मनशा नहीं बदलेगा तो तुझे आग के हवाले कर दिया जाएगा।" पॉलीकार्प अपने निर्णय पर अडिग रहा, और उसे लठ्ठे से बांधकर आग के हवाले कर दिया गया जिससे उसकी मृत्यु हो गई।

   इससे सदियों पहले, तीन जवानों - शदरक, मीशक और अबदनेगो को भी परमेश्वर पर अपने विश्वास के कारण ऐसी ही परिस्थिति का सामना करना पड़ा था। उन्होंने भी राजा नबूकदनेस्सर द्वारा जारी राजा की प्रतिमा के आगे गिरने और उसकी उपासना करने की आज्ञा की अवहेलना की थी क्योंकि वे अपने परमेश्वर यहोवा पर विश्वास रखते थे और केवल उसी की उपासना करते थे। राजा नबूकदनेस्सर ने उनके सामने विकल्प रखा, या तो मेरी प्रतिमा की उपासना स्वीकार करो अथवा आग के भट्टे में झोंके जानो को तैयार हो जाओ। उन तीनों जवानों का राजा को उत्तर था, "...हे नबूकदनेस्सर, इस विषय में तुझे उत्तर देने का हमें कुछ प्रयोजन नहीं जान पड़ता। हमारा परमेश्वर, जिसकी हम उपासना करते हैं वह हम को उस धधकते हुए भट्टे की आग से बचाने की शक्ति रखता है; वरन हे राजा, वह हमें तेरे हाथ से भी छुड़ा सकता है। परन्तु, यदि नहीं, तो हे राजा तुझे मालूम हो, कि हम लोग तेरे देवता की उपासना नहीं करेंगे, और न तेरी खड़ी कराई हुई सोने की मूरत को दण्डवत करेंगे" (दानिय्येल 3:16-18)। उन तीनों को आग के भट्टे में झोंक दिया गया परन्तु आग उन तीनों का कुछ भी नहीं बिगाड़ सकी; जब उन्हें भट्टे से बाहर निकाला गया तो ना तो उनके कपड़े या बाल झुलसे थे और ना ही उनमें आग की कोई गन्ध थी।

   एक ही परमेश्वर के प्रति एक समान विश्वास के लिए एक समान दण्ड, किन्तु दो भिन्न परिणाम - एक आग से जल कर मर गया तो दूसरे आग से अछूते बाहर आ गए। मसीही विश्वास के इन दिग्गजों की गवाही सिखाती है कि मसीही विश्वास में परमेश्वर पर विश्वास का तात्पर्य केवल परमेश्वर की क्षमताओं अथवा हर बात में इच्छित परिणामों की आशा पर विश्वास ही नहीं है वरन सच्चे विश्वास का अर्थ है, चाहे परमेश्वर परिस्थिति से छुड़ाए या ना छुड़ाए, उसपर अडिग अविचिलित विश्वास बनाए रखना। परिस्थिति का अन्जाम चाहे कुछ भी हो, परमेश्वर परमेश्वर ही है और हर बात के लिए अन्तिम निर्णय उसी का है। हम मसीही विश्वासियों का कर्तव्य अपने विश्वास को बनाए रखना है - केवल परिस्थितियों के अनुकूल परिणामों के अनुसार नहीं, वरन, सदा सर्वदा। - एलबर्ट ली


जीवन कठिन है, पर परमेश्वर भला है - हर समय और हर बात में।

स्‍त्रियों ने अपने मरे हुओं को फिर जीवते पाया; कितने तो मार खाते खाते मर गए; और छुटकारा न चाहा; इसलिये कि उत्तम पुनरुत्थान के भागी हों। - इब्रानियों 11:35 

बाइबल पाठ: इब्रानियों 11:32-40
Hebrews 11:32 अब और क्या कहूँ क्योंकि समय नहीं रहा, कि गिदोन का, और बाराक और समसून का, और यिफतह का, और दाऊद का और शामुएल का, और भविष्यद्वक्ताओं का वर्णन करूं।
Hebrews 11:33 इन्‍होंने विश्वास ही के द्वारा राज्य जीते; धर्म के काम किए; प्रतिज्ञा की हुई वस्तुएं प्राप्त की, सिंहों के मुंह बन्‍द किए।
Hebrews 11:34 आग की ज्‍वाला को ठंडा किया; तलवार की धार से बच निकले, निर्बलता में बलवन्‍त हुए; लड़ाई में वीर निकले; विदेशियों की फौजों को मार भगाया।
Hebrews 11:35 स्‍त्रियों ने अपने मरे हुओं को फिर जीवते पाया; कितने तो मार खाते खाते मर गए; और छुटकारा न चाहा; इसलिये कि उत्तम पुनरुत्थान के भागी हों।
Hebrews 11:36 कई एक ठट्ठों में उड़ाए जाने; और कोड़े खाने; वरन बान्‍धे जाने; और कैद में पड़ने के द्वारा परखे गए।
Hebrews 11:37 पत्थरवाह किए गए; आरे से चीरे गए; उन की परीक्षा की गई; तलवार से मारे गए; वे कंगाली में और क्‍लेश में और दुख भोगते हुए भेड़ों और बकिरयों की खालें ओढ़े हुए, इधर उधर मारे मारे फिरे।
Hebrews 11:38 और जंगलों, और पहाड़ों, और गुफाओं में, और पृथ्वी की दरारों में भटकते फिरे।
Hebrews 11:39 संसार उन के योग्य न था: और विश्वास ही के द्वारा इन सब के विषय में अच्छी गवाही दी गई, तौभी उन्हें प्रतिज्ञा की हुई वस्तु न मिली।
Hebrews 11:40 क्योंकि परमेश्वर ने हमारे लिये पहिले से एक उत्तम बात ठहराई, कि वे हमारे बिना सिद्धता को न पहुंचे।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 इतिहास 28-29 
  • यूहन्ना 17


गुरुवार, 6 जून 2013

परीक्षाएं


  एक दोपहर मित्र गोष्ठी के साथ भोजन करते हुए बात-चीत के दौरान एक मित्र ने कहा कि मिशिगन झील में, जो समुद्र से काफी दूर एक स्वच्छ पानी की झील है, एक बार बुल-शार्क मछली द्वारा हमला होने की खबर आ चुकी है। हमारे लिए यह इतना असंभव विचार था कि हम ने इस बात को ठठ्ठों में उड़ा दिया। फिर मैंने इस पर खोज करने का सोचा और इन्टरनैट पर इसके बारे में ढूँढ़ने लगा। वहाँ मुझे मिला कि 1955 में एक ऐसा दावा किया गया था, लेकिन इस दावे की कभी पुष्टि नहीं होने पाई। शार्क! मिशिगन झील में! यदि यह सत्य भी है तो भी एक बहुत दुर्लभ और असामान्य घटना है।

   कितना अच्छा होता यदि हमारे लिए कठिनाईयों और परीक्षाओं का सामना करना भी मिशिगन झील के शार्क हमले के समान ही होता - अति दुर्लभ और असामान्य! लेकिन ऐसा है नहीं। सभी को कठिनाईयों और परीक्षाओं का सामना सामान्यता करना ही होता है; बस जब हमें सामना करना पड़ता है तो हम यही सोचते हैं कि काश ऐसा नहीं होता। इसी लिए प्रेरित पतरस ने पहली शताब्दी के मसीही विश्वासीयों को, जो अपने मसीही विश्वास के कारण घोर अत्यचार और अति विषम परिस्थितियों से होकर निकल रहे थे, लिखी अपनी पत्री में लिखा, "हे प्रियों, जो दुख रूपी अग्‍नि तुम्हारे परखने के लिये तुम में भड़की है, इस से यह समझ कर अचंभा न करो कि कोई अनोखी बात तुम पर बीत रही है" (1 पतरस 4:12)।

   मसीही विश्वासीयों के लिए इस प्रकार की परीक्षाएं कोई अनहोनी या अस्वाभाविक बात नहीं है, वरन उनकी विश्वास यात्रा का एक अनिवर्य भाग है - आखिर शैतान अपने चंगुल से बच निकलने वालों को शांति से कैसे रहने देगा? वह तो अपनी सारी शक्ति और सभी सहायकों द्वारा उनके जीवन को यथासंभव कठिन बनाने का भरसक प्रयास करेगा ही। लेकिन इस दुख रूपी अग्नि में ताए जाकर ही हमारा मसीही विश्वास खरे कुन्दन सा स्वच्छ और बहूमूल्य होकर निकलता है। इस ताए जाने से ही हमारे मसीही विश्वास के जीवन से संबंधित सभी व्यर्थ बातें भी भस्म हो जाती हैं तथा अपने किसी स्वार्थ में होकर या झूठे या दिखावे के विश्वास में मसीह यीशु का अनुकरण करने वालों की छाँटाई भी इससे हो जाती है। शैतान जो युक्तियाँ अपने अनुयायीयों द्वारा मसीही विश्वासियों को सताने के लिए प्रयोग करता है, परमेश्वर उन्हीं के द्वारा उसके ही अनुयायियों की वास्तविकता और उनकी दुष्ट मानसिकता को संसार पर प्रगट कर देता है तथा अपनी मण्डली को भेड़ की खाल में छिपे भेड़ियों से शुद्ध करने के लिए प्रयोग कर लेता है।

   परमेश्वर का प्रेम अपनी सन्तान के प्रति कभी कम नहीं होता, वह उन्हें कभी नहीं छोड़ता, कभी नहीं त्यागता। हर कठिनाई, अत्याचार, विषम परिस्थिति में वह उनके साथ बना रहता है, उन्हें सामर्थ देता है, सहने की शक्ति और परिस्थिति के उपयुक्त शांति देता है, और उनकी इस गवाही को शैतान के प्रयोजनों को विफल करने, अपने अनुयायियों को बड़े प्रतिफल देने तथा उन्हें अपनी महिमा का कारण होने वाला बना लेता है। परीक्षाओं से विचलित ना हों, परीक्षाओं में अपनी मसीही गवाही बनाए रखें - यह आपके लिए अद्भुत प्रतिफलों को प्राप्त करने और परमेश्वर को अपने जीवन से महिमा देने का एक सामर्थी माध्यम हैं। - बिल क्राउडर


अपने प्रेम की रौशनी से परमेश्वर हमारे जीवन की काली घटाओं पर एक सुन्दर, चमकीला और आकर्षक मेघधनुष बना देता है।

हे प्रियों, जो दुख रूपी अग्‍नि तुम्हारे परखने के लिये तुम में भड़की है, इस से यह समझ कर अचंभा न करो कि कोई अनोखी बात तुम पर बीत रही है। - 1 पतरस 4:12

बाइबल पाठ: 1 पतरस 4:12-19
1 Peter 4:12 हे प्रियों, जो दुख रूपी अग्‍नि तुम्हारे परखने के लिये तुम में भड़की है, इस से यह समझ कर अचम्भा न करो कि कोई अनोखी बात तुम पर बीत रही है।
1 Peter 4:13 पर जैसे जैसे मसीह के दुखों में सहभागी होते हो, आनन्द करो, जिस से उसकी महिमा के प्रगट होते समय भी तुम आनन्‍दित और मगन हो।
1 Peter 4:14 फिर यदि मसीह के नाम के लिये तुम्हारी निन्‍दा की जाती है, तो धन्य हो; क्योंकि महिमा का आत्मा, जो परमेश्वर का आत्मा है, तुम पर छाया करता है।
1 Peter 4:15 तुम में से कोई व्यक्ति हत्यारा या चोर, या कुकर्मी होने, या पराए काम में हाथ डालने के कारण दुख न पाए।
1 Peter 4:16 पर यदि मसीही होने के कारण दुख पाए, तो लज्ज़ित न हो, पर इस बात के लिये परमेश्वर की महिमा करे।
1 Peter 4:17 क्योंकि वह समय आ पहुंचा है, कि पहिले परमेश्वर के लोगों का न्याय किया जाए, और जब कि न्याय का आरम्भ हम ही से होगा तो उन का क्या अन्‍त होगा जो परमेश्वर के सुसमाचार को नहीं मानते?
1 Peter 4:18 और यदि धर्मी व्यक्ति ही कठिनता से उद्धार पाएगा, तो भक्तिहीन और पापी का क्या ठिकाना?
1 Peter 4:19 इसलिये जो परमेश्वर की इच्छा के अनुसार दुख उठाते हैं, वे भलाई करते हुए, अपने अपने प्राण को विश्वासयोग्य सृजनहार के हाथ में सौंप दें।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 इतिहास 25-27 
  • यूहन्ना 16


बुधवार, 5 जून 2013

शुद्ध और स्वच्छ


   एक अन्तर्राष्ट्रीय पुस्तक सम्मेलन में लेखक अपनी लिखी पुस्तकों को खरीदने वालों को उन्हें हस्ताक्षारित कर के दे रहे थे। एक फ्रांसिसी लेखक की एक पुस्तक को एक स्त्री ने उठाया, सरसरी नज़र से उसके पन्ने पलटे और उस का आंकलन किया, फिर लंबी साँस भरते हुए बोली, "आखिर, एक साफ-सुथरी कहानी वाली पुस्तक!" उस लेखक ने शालीनता से उत्तर दिया, "महोदया, मैं स्वच्छ सोचता हूँ इसीलिए स्वच्छ लिखता हूँ।" वह लेखक वैसा ही छपने को देता था जैसा कि वह अन्दर से था, क्योंकि प्रभु यीशु में विश्वास के द्वारा उसका जीवन अन्दर से शुद्ध और स्वच्छ हो गया था।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में यूहन्ना के 15 अध्याय में प्रभु यीशु की अपने शिष्यों को एक फलवंत जीवन के लिए दी गई शिक्षाएं हैं जिनका सार है कि उन्हें प्रभु यीशु में उनका लगातार बने रहना है। इस बात को समझाने के लिए प्रभु यीशु ने दाखलता, उसकी डालियों और उसके फलवंत होने के चित्रण का प्रयोग किया है; इस चित्रण में वे एक स्थान पर चेलों से कहते हैं, "तुम तो उस वचन के कारण जो मैं ने तुम से कहा है, शुद्ध हो" (यूहन्ना 15:3)। यहाँ जिस शब्द का अनुवाद "शुद्ध" हुआ है, उस के बारे में बाइबल ज्ञाता तथा बाइबल में प्रयुक्त युनानी भाषा के विद्वान डब्ल्यु. ई. वाईन कहते हैं कि मूल युनानी भाषा में इस शब्द का अर्थ है, "किसी भी अशुद्धता और मिलावट से रहित, दाग़रहित, निष्कलंक"।

   मनुष्य का मन केवल प्रभु यीशु द्वारा मिलने वाली पापों की क्षमा और उसके लहु से धोये जाने से ही शुद्ध और स्वच्छ किया जा सकता है और प्रभु यीशु ही की सामर्थ से मन शुद्ध तथा स्वच्छ बना भी रह सकता है। हम कई बार असफल हो जाते हैं, पाप से समझौते कर बैठते हैं, सांसारिकता में फिसल जाते हैं; लेकिन परमेश्वर प्रभु यीशु का वायदा है कि "यदि हम अपने पापों को मान लें, तो वह हमारे पापों को क्षमा करने, और हमें सब अधर्म से शुद्ध करने में विश्वासयोग्य और धर्मी है" (1 यूहन्ना 1:9)। यह शुद्धता, स्वच्छता और पुनः-नवीनिकरण किसी बाहरी क्रिया-कलापों या विधि-विधानों द्वारा नहीं, वरन हमारे अन्दर से, हमारे मन के शुद्धिकरण द्वारा ही संभव है और प्रभु यीशु में सदा उपलब्ध है।

   प्रभु यीशु ने अपने बलिदान तथा अपने वचन के द्वारा समस्त मानव जाति के लिए पापों की क्षमा तथा अन्दर से शुद्ध और स्वच्छ होने का मार्ग खोल दिया है। जो कोई स्वेच्छा से अपने पापों की क्षमा प्रभु यीशु से माँगता है और अपना जीवन उसे समर्पित करता है, वह प्रभु यीशु द्वारा शुद्ध और स्वच्छ किया जाता है। प्रभु यीशु के हर शिष्य, हर मसीही विश्वासी का यह कर्तव्य है कि वह अपने आचरण और बातचीत द्वारा अपने इस शुद्ध और स्वच्छ होने को प्रदर्षित करे; यह ना केवल उसके प्रभु यीशु में बने होने का प्रमाण है वरन दूसरों को प्रभु यीशु के प्रति आकर्षित करने के लिए एक सक्षम गवाही भी है। - डेविड मैक्कैसलैंड


परमेश्वर से किया गया पाप-अंगीकार, परमेश्वर से मिलने वाली शुद्धता और स्वच्छता को जीवन में ले आता है।

पर जैसा तुम्हारा बुलाने वाला पवित्र है, वैसे ही तुम भी अपने सारे चाल चलन में पवित्र बनो। क्योंकि लिखा है, कि "पवित्र बनो, क्योंकि मैं पवित्र हूं"। - 1 पतरस 1:15-16

बाइबल पाठ: यूहन्ना 15:1-8
John 15:1 सच्ची दाखलता मैं हूं; और मेरा पिता किसान है।
John 15:2 जो डाली मुझ में है, और नहीं फलती, उसे वह काट डालता है, और जो फलती है, उसे वह छांटता है ताकि और फले।
John 15:3 तुम तो उस वचन के कारण जो मैं ने तुम से कहा है, शुद्ध हो।
John 15:4 तुम मुझ में बने रहो, और मैं तुम में: जैसे डाली यदि दाखलता में बनी न रहे, तो अपने आप से नहीं फल सकती, वैसे ही तुम भी यदि मुझ में बने न रहो तो नहीं फल सकते।
John 15:5 मैं दाखलता हूं: तुम डालियां हो; जो मुझ में बना रहता है, और मैं उस में, वह बहुत फल फलता है, क्योंकि मुझ से अलग हो कर तुम कुछ भी नहीं कर सकते।
John 15:6 यदि कोई मुझ में बना न रहे, तो वह डाली की नाईं फेंक दिया जाता, और सूख जाता है; और लोग उन्हें बटोरकर आग में झोंक देते हैं, और वे जल जाती हैं।
John 15:7 यदि तुम मुझ में बने रहो, और मेरी बातें तुम में बनी रहें तो जो चाहो मांगो और वह तुम्हारे लिये हो जाएगा।
John 15:8 मेरे पिता की महिमा इसी से होती है, कि तुम बहुत सा फल लाओ, तब ही तुम मेरे चेले ठहरोगे।

एक साल में बाइबल: 2 इतिहास 23-24 यूहन्ना 15

मंगलवार, 4 जून 2013

प्रभावी


   पिछले कुछ वर्षों में मुझे आठ बार किशोरों के साथ मिशनरी यात्रा करने का सौभाग्य मिला। अपने उन अनुभवों से मैंने सीखा है कि किशोर मसीह यीशु के लिए प्रभावी होने में किसी से कम नहीं होते - उन्होंने मेरे अपने जीवन और दूसरों के जीवन पर भी बहुत प्रभाव डाला है। साथ ही मैंने यह भी देखा है कि वे किशोर जो सबसे अधिक प्रभावकारी हुए, उनके जीवन उन गुणों से भरे हुए थे जिनके विषय में प्रेरित पौलुस ने तिमुथियुस को लिखा था। तिमुथियुस को लिखी अपनी पहली पत्री में पौलुस ने उसे समझाया कि जवान होने अर्थात अन्य लोगों की अपेक्षा अपने उम्र में कम होने के कारण उसे मसीही सेवकाई के लिए अपने आप को कमज़ोर या अयोग्य नहीं समझना चाहिए। पौलुस ने उससे कहा कि वह स्वयं अन्य विश्वासियों के लिए एक आदर्श बने, और कुछ गुण बताए जिनमें उसे यह उदाहरण प्रस्तुत करना है। 
   
   मैंने देखा है कि वे जवान जो मसीह यीशु के लिए प्रभावी होते हैं उनमें पौलुस द्वारा तिमुथियुस को बताए गए ये गुण बहुतायत से कार्यकारी दिखाई देते हैं। जिन गुणों में आदर्श होने के लिए पौलुस ने तिमुथियुस से कहा, और जो मसीह यीशु के लिए प्रभावी लोगों वे हैं:
  • वचन - वे अपने वचनों और बातों पर नियंत्रण रखते हैं, गलत या ओछी बातें नहीं करते और उनके वचन परमेश्वर को महिमा देने वाले होते हैं।
  • आचरण - वे आचरण और व्यवहार में विवेक और बुद्धिमानी प्रदर्शित करते हैं और उनका आचरण संसार के सामने मसीही विश्वास की एक सजीव गवाही होता है।
  • प्रेम - वे परमेश्वर और मनुष्यों दोनों से प्रेम करने की प्रभु यीशु मसीह की शिक्षा (मत्ती 22:37-39) का पालन करते हैं और अपने प्रेमपूर्ण व्यवहार से दिलों को जीत लेते हैं।
  • विश्वास - वे मसीह यीशु में अपने विश्वास को अपने जीवन में जी कर दिखाते हैं।
  • पवित्रता - वे नैतिक और सैद्धांतिक दोनो ही रूपों में पवित्रता का जीवन जीते हैं; उनके चरित्र भी शुद्ध होते हैं और मसीही जीवन जीने के उन के सिद्धांत भी परमेश्वर के वचन के अनुरूप ही होते हैं।


   ऐसा जीवन जीने वाले जवान हम सभी के लिए जीवन जीने के स्तर का अद्भुत मापदण्ड स्थापित करते हैं। पौलुस के ये निर्देश केवल जवानों या किशोरों के लिए नहीं हैं। 

   हम सभी मसीही विश्वासीयों को अपने अपने स्थानों में वचन, आचरण, प्रेम, विश्वास और पवित्रता में एक आदर्श होना चाहिए। तभी हम अपने और संसार के उद्धारकर्ता प्रभु यीशु के लिए एक प्रभावी जीवन व्यतीत करने पाएंगे। - डेव ब्रैनन


परमेश्वर के वचन बाइबल पर सबसे अर्थपूर्ण टीका बाइबल की शिक्षानुसार व्यतीत होने वाला जीवन है।

कोई तेरी जवानी को तुच्‍छ न समझने पाए; पर वचन, और चाल चलन, और प्रेम, और विश्वास, और पवित्रता में विश्वासियों के लिये आदर्श बन जा। - 1 तिमुथियुस 4:12 

बाइबल पाठ: 1 तिमुथियुस 4:6-16
1 Timothy 4:6 यदि तू भाइयों को इन बातों की सुधि दिलाता रहेगा, तो मसीह यीशु का अच्छा सेवक ठहरेगा: और विश्वास और उस अच्‍छे उपदेश की बातों से, जा तू मानता आया है, तेरा पालन-पोषण होता रहेगा।
1 Timothy 4:7 पर अशुद्ध और बूढिय़ों की सी कहानियों से अलग रह; और भक्ति के लिये अपना साधन कर।
1 Timothy 4:8 क्योंकि देह की साधना से कम लाभ होता है, पर भक्ति सब बातों के लिये लाभदायक है, क्योंकि इस समय के और आने वाले जीवन की भी प्रतिज्ञा इसी के लिये है।
1 Timothy 4:9 और यह बात सच और हर प्रकार से मानने के योग्य है।
1 Timothy 4:10 क्योंकि हम परिश्रम और यत्‍न इसी लिये करते हैं, कि हमारी आशा उस जीवते परमेश्वर पर है; जो सब मनुष्यों का, और निज कर के विश्वासियों का उद्धारकर्ता है।
1 Timothy 4:11 इन बातों की आज्ञा कर, और सिखाता रह।
1 Timothy 4:12 कोई तेरी जवानी को तुच्‍छ न समझने पाए; पर वचन, और चाल चलन, और प्रेम, और विश्वास, और पवित्रता में विश्वासियों के लिये आदर्श बन जा।
1 Timothy 4:13 जब तक मैं न आऊं, तब तक पढ़ने और उपदेश और सिखाने में लौलीन रह।
1 Timothy 4:14 उस वरदान से जो तुझ में है, और भविष्यद्वाणी के द्वारा प्राचीनों के हाथ रखते समय तुझे मिला था, निश्‍चिन्‍त न रह।
1 Timothy 4:15 उन बातों को सोचता रह, और इन्हीं में अपना ध्यान लगाए रह ताकि तेरी उन्नति सब पर प्रगट हो। अपनी और अपने उपदेश की चौकसी रख।
1 Timothy 4:16 इन बातों पर स्थिर रह, क्योंकि यदि ऐसा करता रहेगा, तो तू अपने, और अपने सुनने वालों के लिये भी उद्धार का कारण होगा।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 इतिहास 21-22 
  • यूहन्ना 14