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सोमवार, 29 जुलाई 2013

भरपूरी का जीवन

   दार्शनिक चिन्तन करते हैं "भरपूरी का जीवन क्या है और यह कहाँ मिलता है?" जब कभी मैं यह प्रश्न सुनता हूँ, मुझे अपना मित्र रॉय का स्मरण हो आता है। रॉय एक शान्त, नम्र, सुशील व्यक्ति था जो कभी प्रतिष्ठा या सम्मान पाने की लालसा नहीं रखता था। उसे अपनी दैनिक आवश्यकताओं की भी कोई चिन्ता नहीं रहती थी, उसने यह चिन्ता अपने स्वर्गीय परमेश्वर पिता के हाथों में छोड़ी हुई थी। उसे बस एक ही बात की चिन्ता थी - अपने स्वर्गीय परमेश्वर पिता की इच्छा को पूरा करते रहना। उसका दृष्टीकोण स्वर्गीय था और उसे देख कर मुझे सदा स्मरण आता था कि इस पृथ्वी पर हम केवल यात्री ही तो हैं।

   रॉय पिछले पतझड़ में संसार से जाता रहा। उसकी यादगार में रखी गई सभा में बहुत से मित्रों ने अपने जीवन पर उसके जीवन से पड़े प्रभाव के बारे में बताया। बहुत से लोग उसकी दयालुता, निस्वार्थ दान, नम्रता और विनम्र अनुकंपा के बारे में बोले। वह सब के लिए परमेश्वर के निस्वार्थ प्रेम का सजीव उदाहरण था। उस सभा के बाद रॉय का बेटा उसके रहने के स्थान एक वृद्ध-आश्रम पर गया कि अपने पिता की सांसारिक संपत्ति को ले और वह स्थान खाली करके आश्रम को वापस लौटा दे; उसे वहाँ मिले बस दो जोड़ी जूते, कुछ शर्ट और पैन्ट और कुछ छोटा-मोटा सामान। वह यह सब एक स्थानीय धर्मार्थ कार्य करने वाले संगठन को सौंप कर आ गया।

   जैसा कुछ लोगों के अनुसार एक भरपूर जीवन होता है, वैसा जीवन रॉय के पास कभी नहीं था, लेकिन उसका जीवन परमेश्वर के प्रति भले कार्यों से भरा हुआ था। जॉर्ज मैकडौन्लड ने लिखा था, "कौन है जो स्वर्ग और पृथ्वी का स्वामी है; वह जिसके पास हज़ार बंगले हैं या वह जिसके पास एक भी रहने का ऐसा स्थान नहीं जिसका वह मालिक हो किंतु ऐसे दस स्थान हों जहाँ जाकर यदि वह द्वार खटखटकाए तो वहाँ तुरंत उल्लास की लहर दौड़ जाए?"

   रॉय के पास सांसारिक संपत्ति तो नहीं थी, लेकिन बेशक रॉय का जीवन भरपूरी का जीवन था और इस का राज़ था परमेश्वर के साथ उसका संबंध जिसने उसके दृष्टिकोण को सांसारिक नहीं स्वर्गीय बना दिया था। परमेश्वर के साथ उसके ऐसे संबंध के कारण ही संसार तथा संसार के लोगों के साथ उसका हर संबंध विलक्षण था, प्रेरित करने वाला था, सकारात्मक था। क्योंकि उसका जीवन परमेश्वर को प्रशंसा देता था, परमेश्वर ने उसे संसार में प्रशंसनीय बना दिया था। जितना वह हर बात के लिए परमेश्वर की ओर देखता रहता था, परमेश्वर ने उतना ही लोगों को उसकी ओर देखने वाला बना दिया।

   रॉय का जीवन उदाहरण है उस भरपूरी का जो परमेश्वर को अपने जीवन में प्रथम स्थान देने से आती है। - डेविड रोपर


परमेश्वर को जाने बिना भरपूरी का जीवन जान पाना संभव नहीं।

और अब, हे इस्राएल, तेरा परमेश्वर यहोवा तुझ से इसके सिवाय और क्या चाहता है, कि तू अपने परमेश्वर यहोवा का भय मानें, और उसके सारे मार्गों पर चले, उस से प्रेम रखे, और अपने पूरे मन और अपने सारे प्राण से उसकी सेवा करे - व्यवस्थाविवरण 10:12

बाइबल पाठ: कुलुस्सियों 3:1-11
Colossians 3:1 सो जब तुम मसीह के साथ जिलाए गए, तो स्‍वर्गीय वस्‍तुओं की खोज में रहो, जहां मसीह वर्तमान है और परमेश्वर के दाहिनी ओर बैठा है।
Colossians 3:2 पृथ्वी पर की नहीं परन्तु स्‍वर्गीय वस्‍तुओं पर ध्यान लगाओ।
Colossians 3:3 क्योंकि तुम तो मर गए, और तुम्हारा जीवन मसीह के साथ परमेश्वर में छिपा हुआ है।
Colossians 3:4 जब मसीह जो हमारा जीवन है, प्रगट होगा, तब तुम भी उसके साथ महिमा सहित प्रगट किए जाओगे।
Colossians 3:5 इसलिये अपने उन अंगो को मार डालो, जो पृथ्वी पर हैं, अर्थात व्यभिचार, अशुद्धता, दुष्‍कामना, बुरी लालसा और लोभ को जो मूर्ति पूजा के बराबर है।
Colossians 3:6 इन ही के कारण परमेश्वर का प्रकोप आज्ञा न मानने वालों पर पड़ता है।
Colossians 3:7 और तुम भी, जब इन बुराइयों में जीवन बिताते थे, तो इन्‍हीं के अनुसार चलते थे।
Colossians 3:8 पर अब तुम भी इन सब को अर्थात क्रोध, रोष, बैरभाव, निन्‍दा, और मुंह से गालियां बकना ये सब बातें छोड़ दो।
Colossians 3:9 एक दूसरे से झूठ मत बोलो क्योंकि तुम ने पुराने मनुष्यत्‍व को उसके कामों समेत उतार डाला है।
Colossians 3:10 और नए मनुष्यत्‍व को पहिन लिया है जो अपने सृजनहार के स्‍वरूप के अनुसार ज्ञान प्राप्त करने के लिये नया बनता जाता है।
Colossians 3:11 उस में न तो यूनानी रहा, न यहूदी, न खतना, न खतनारिहत, न जंगली, न स्‍कूती, न दास और न स्‍वतंत्र: केवल मसीह सब कुछ और सब में है।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 49-50 
  • रोमियों 1


रविवार, 28 जुलाई 2013

उपवास

   कुछ वर्ष पहले हमारे चर्च में हमने परमेश्वर के वचन बाइबल के पुराने नियम में मिलाप वाले तम्बू को विषय बनाकर एक अध्ययन श्रंखला करी थी। जब इस श्रंखला में मेज़ पर रखी भेंट की रोटियों का विषय आया तो मैंने कुछ ऐसा किया जो उससे पहले कभी नहीं किया था - मैंने कई दिनों तक भोजन तज कर उपवास रखा। मैंने उपवास इसलिए रखा क्योंकि मैं परमेश्वर के वचन "...इसलिये कि वह तुझ को सिखाए कि मनुष्य केवल रोटी ही से नहीं जीवित रहता, परन्तु जो जो वचन यहोवा के मुंह से निकलते हैं उन ही से वह जीवित रहता है" (व्यवस्थाविवरण 8:3) की सच्चाई को व्यक्तिगत रीति से अनुभव करना चाहता था। मैं चाहता था कि मैं किसी विवशता के अन्तर्गत नहीं वरन पूर्ण स्वेच्छा से एक ऐसी वस्तु का इन्कार करूँ जिससे मैं बहुत प्रेम रखता था - भोजन, उसके लिए जिससे मैं और भी अधिक प्रेम रखता हूँ - परमेश्वर।

   जब मैंने यह उपवास रखा तो प्रभु यीशु मसीह की उपवास से संबंधित शिक्षाओं (मत्ती 6:16-18) का पालन भी किया। इस खंड में प्रभु यीशु ने पहले एक नकारात्मक आज्ञा दी: "जब तुम उपवास करो, तो कपटियों की नाईं तुम्हारे मुंह पर उदासी न छाई रहे, क्योंकि वे अपना मुंह बनाए रहते हैं, ताकि लोग उन्हें उपवासी जानें; मैं तुम से सच कहता हूं, कि वे अपना प्रतिफल पा चुके" (मत्ती 6:16)। फिर एक सकारात्मक आज्ञा दी: "परन्तु जब तू उपवास करे तो अपने सिर पर तेल मल और मुंह धो" (मत्ती 6:17)। इन दोनों आज्ञाओं के द्वारा प्रभु यीशु ने सिखाया कि हमें परमेश्वर के लिए कोई कार्य दूसरों को अपनी ओर आकर्षित करने या उन पर प्रभाव डालने के उद्देश्य से नहीं करना है। हमारे यह कार्य परमेश्वर के प्रति प्रेम और आराधना का एक व्यक्तिगत बलिदान और उपासना हैं जिसमें किसी प्रकार के धार्मिक घमण्ड या किसी विवशता का कोई स्थान नहीं है। यह समझाने के बाद प्रभु यीशु ने इस बात के पालन पर आधारित आशीष की प्रतिज्ञा भी दी: "ताकि लोग नहीं परन्तु तेरा पिता जो गुप्‍त में है, तुझे उपवासी जाने; इस दशा में तेरा पिता जो गुप्‍त में देखता है, तुझे प्रतिफल देगा" (मत्ती 6:18)।

   मसीही विश्वास में उपवास रखना ना कोई विवशता है और ना ही परमेश्वर हमें इसके लिए बाध्य करता है कि उसकी निकटता में आने के लिए हम अपने आप को किसी भोजन वस्तु से वंचित करें। परमेश्वर की इच्छा यही है कि हम अपने जीवनों को उसके निर्देशों और नियमों के अनुसार संचालित करते रहें और संसार के समान जीने से बचे रहें, यही अपने आप में एक उपवास है जिसका परमेश्वर की नज़रों में बड़ा मोल है और जिसका परमेश्वर से प्रतिफल महान है (यशायाह 58:1-14)। - मार्विन विलियम्स


परमेश्वर के निकट आने के लिए संसार की लालसाओं से दूरी बना लेना लाभदायक होता है।

सावधान रहो! तुम मनुष्यों को दिखाने के लिये अपने धर्म के काम न करो, नहीं तो अपने स्‍वर्गीय पिता से कुछ भी फल न पाओगे। - मत्ती 6:1

बाइबल पाठ: यशायाह 58:1-14
Isaiah 58:1 गला खोल कर पुकार, कुछ न रख छोड़, नरसिंगे का सा ऊंचा शब्द कर; मेरी प्रजा को उसका अपराध अर्थात याकूब के घराने को उसका पाप जता दे।
Isaiah 58:2 वे प्रति दिन मेरे पास आते और मेरी गति बूझने की इच्छा ऐसी रखते हैं मानो वे धर्मी लोग हैं जिन्होंने अपने परमेश्वर के नियमों को नहीं टाला; वे मुझ से धर्म के नियम पूछते और परमेश्वर के निकट आने से प्रसन्न होते हैं।
Isaiah 58:3 वे कहते हैं, क्या कारण है कि हम ने तो उपवास रखा, परन्तु तू ने इसकी सुधि नहीं ली? हम ने दु:ख उठाया, परन्तु तू ने कुछ ध्यान नहीं दिया? सुनो, उपवास के दिन तुम अपनी ही इच्छा पूरी करते हो और अपने सेवकों से कठिन कामों को कराते हो।
Isaiah 58:4 सुनो, तुम्हारे उपवास का फल यह होता है कि तुम आपस में लड़ते और झगड़ते और दुष्टता से घूंसे मारते हो। जैसा उपवास तुम आजकल रखते हो, उस से तुम्हारी प्रार्थना ऊपर नहीं सुनाई देगी।
Isaiah 58:5 जिस उपवास से मैं प्रसन्न होता हूं अर्थात जिस में मनुष्य स्वयं को दीन करे, क्या तुम इस प्रकार करते हो? क्या सिर को झाऊ की नाईं झुकाना, अपने नीचे टाट बिछाना, और राख फैलाने ही को तुम उपवास और यहोवा को प्रसन्न करने का दिन कहते हो?
Isaiah 58:6 जिस उपवास से मैं प्रसन्न होता हूं, वह क्या यह नहीं, कि, अन्याय से बनाए हुए दासों, और अन्धेर सहने वालों का जुआ तोड़कर उन को छुड़ा लेना, और, सब जुओं को टुकड़े टुकड़े कर देना?
Isaiah 58:7 क्या वह यह नहीं है कि अपनी रोटी भूखों को बांट देना, अनाथ और मारे मारे फिरते हुओं को अपने घर ले आना, किसी को नंगा देखकर वस्त्र पहिनाना, और अपने जातिभाइयों से अपने को न छिपाना?
Isaiah 58:8 तब तेरा प्रकाश पौ फटने की नाईं चमकेगा, और तू शीघ्र चंगा हो जाएगा; तेरा धर्म तेरे आगे आगे चलेगा, यहोवा का तेज तेरे पीछे रक्षा करते चलेगा।
Isaiah 58:9 तब तू पुकारेगा और यहोवा उत्तर देगा; तू दोहाई देगा और वह कहेगा, मैं यहां हूं। यदि तू अन्धेर करना और उंगली मटकाना, और, दुष्ट बातें बोलना छोड़ दे,
Isaiah 58:10 उदारता से भूखे की सहायता करे और दीन दु:खियों को सन्तुष्ट करे, तब अन्धियारे में तेरा प्रकाश चमकेगा, और तेरा घोर अन्धकार दोपहर का सा उजियाला हो जाएगा।
Isaiah 58:11 और यहोवा तुझे लगातार लिये चलेगा, और काल के समय तुझे तृप्त और तेरी हड्डियों को हरी भरी करेगा; और तू सींची हुई बारी और ऐसे सोते के समान होगा जिसका जल कभी नहीं सूखता।
Isaiah 58:12 और तेरे वंश के लोग बहुत काल के उजड़े हुए स्थानों को फिर बसाएंगे; तू पीढ़ी पीढ़ी की पड़ी हुई नेव पर घर उठाएगा; तेरा नाम टूटे हुए बाड़े का सुधारक और पथों का ठीक करने वाला पड़ेगा।
Isaiah 58:13 यदि तू विश्रामदिन को अशुद्ध न करे अर्थात मेरे उस पवित्र दिन में अपनी इच्छा पूरी करने का यत्न न करे, और विश्रामदिन को आनन्द का दिन और यहोवा का पवित्र किया हुआ दिन समझ कर माने; यदि तू उसका सम्मान कर के उस दिन अपने मार्ग पर न चले, अपनी इच्छा पूरी न करे, और अपनी ही बातें न बोले,
Isaiah 58:14 तो तू यहोवा के कारण सुखी होगा, और मैं तुझे देश के ऊंचे स्थानों पर चलने दूंगा; मैं तेरे मूलपुरूष याकूब के भाग की उपज में से तुझे खिलाऊंगा, क्योंकि यहोवा ही के मुख से यह वचन निकला है।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 46-48 
  • प्रेरितों 28


शनिवार, 27 जुलाई 2013

रिश्वत

   एक देश में यात्रा करते समय हमने पाया कि पक्की सड़कों पर बड़े बड़े गड्ढे हो गए थे जिनके कारण ठीक से गाड़ी चलाना कठिन हो गया था। मेरे पति ने हमारे टैक्सी चालक से इस के बारे में पूछा तो उसने कहा कि ये गड्ढे भारी ट्रकों द्वारा निर्धारित सीमा से अधिक मात्रा में भार लेकर चलने के कारण हुए थे। जब भी पुलिस वाले उन ट्रक वालों को रोकते तो वे ट्रक वाले पुलिस वालों को रिश्वत देकर दण्ड से बच निकलते। ऐसा करने से पुलिस और ट्रक वाले तो अपनी कमाई कर लेते थे लेकिन क्षति अन्य वाहन चालकों और सामान्य जनता की होती थी जो इन सड़कों के बनाने के लिए कर भी चुकाती थी, फिर खराब सड़कों के कारण परेशानी भी उठाती थी।

   सभी प्रकार की रिश्वत इतनी प्रत्यक्ष नहीं होती, कुछ प्रकार की रिश्वत अप्रत्यक्ष भी होती है; और हर रिश्वत वित्तीय भी नहीं होती। चापलूसी भी एक प्रकार कि रिश्वत ही है जो शब्दों के द्वारा दी जाती है। यदि कोई हमारे बारे में अच्छी अच्छी बातें कहता रहे और हमारी प्रशंसा करता रहे और हम इस कारण से उसे अन्य लोगों की बजाए अधिक महत्व दें और उसकी गलतीयों की अनदेखी करें या उन पर पर्दा डालें तो यह रिश्वतखोरी के समान  ही है। परमेश्वर की नज़र में हर प्रकार का पक्षपात अन्याय है। इस बारे में हम परमेश्वर के दृष्टिकोण को इस बात से भी समझ सकते हैं कि जब परमेश्वर ने इस्त्राएल को मिस्त्र के दासत्व से निकाल कर कनान देश में लाकर बसाया तो उन्हें चिताया कि उनका वहाँ बना रहना उनके परस्पर न्यायपूर्ण व्यवहार पर निर्भर करेगा: "तुम न्याय न बिगाड़ना; तू न तो पक्षपात करना; और न तो घूस लेना, क्योंकि घूस बुद्धिमान की आंखें अन्धी कर देती है, और धर्मियों की बातें पलट देती है। जो कुछ नितान्त ठीक है उसी का पीछा पकड़े रहना, जिस से तू जीवित रहे, और जो देश तेरा परमेश्वर यहोवा तुझे देता है उसका अधिकारी बना रहे" (व्यवस्थाविवरण 16:19-20 )।

   रिश्वत दूसरों को न्याय से वंचित करती है, जो परमेश्वर के चरित्र के विरुद्ध है: "क्योंकि तुम्हारा परमेश्वर यहोवा वही ईश्वरों का परमेश्वर और प्रभुओं का प्रभु है, वह महान पराक्रमी और भय योग्य ईश्वर है, जो किसी का पक्ष नहीं करता और न घूस लेता है" (व्यवस्थाविवरण 10:17)। जैसा परमेश्वर का चरित्र है, वैसा ही चरित्र वह अपने लोगों में भी देखना चाहता है: "पर जैसा तुम्हारा बुलाने वाला पवित्र है, वैसे ही तुम भी अपने सारे चाल चलन में पवित्र बनो। क्योंकि लिखा है, कि पवित्र बनो, क्योंकि मैं पवित्र हूं" (1 पतरस 1:15-16)।

   परमेश्वर की इस इच्छा को पूरा करना हम मसीही विश्वासियों का कर्तव्य है। - जूली ऐकैरमैन लिंक


रिश्वतखोरी से पक्षपात होता है; प्रेम से न्याय आता है।

घूस न लेना, क्योंकि घूस देखने वालों को भी अन्धा कर देता, और धर्मियों की बातें पलट देता है। - निर्गमन 23:8 

बाइबल पाठ: व्यवस्थाविवरण 10:12-22
Deuteronomy 10:12 और अब, हे इस्राएल, तेरा परमेश्वर यहोवा तुझ से इसके सिवाय और क्या चाहता है, कि तू अपने परमेश्वर यहोवा का भय मानें, और उसके सारे मार्गों पर चले, उस से प्रेम रखे, और अपने पूरे मन और अपने सारे प्राण से उसकी सेवा करे,
Deuteronomy 10:13 और यहोवा की जो जो आज्ञा और विधि मैं आज तुझे सुनाता हूं उन को ग्रहण करे, जिस से तेरा भला हो?
Deuteronomy 10:14 सुन, स्वर्ग और सब से ऊंचा स्वर्ग भी, और पृथ्वी और उस में जो कुछ है, वह सब तेरे परमेश्वर यहोवा ही का है;
Deuteronomy 10:15 तौभी यहोवा ने तेरे पूर्वजों से स्नेह और प्रेम रखा, और उनके बाद तुम लोगों को जो उनकी सन्तान हो सर्व देशों के लोगों के मध्य में से चुन लिया, जैसा कि आज के दिन प्रगट है।
Deuteronomy 10:16 इसलिये अपने अपने हृदय का खतना करो, और आगे को हठीले न रहो।
Deuteronomy 10:17 क्योंकि तुम्हारा परमेश्वर यहोवा वही ईश्वरों का परमेश्वर और प्रभुओं का प्रभु है, वह महान्‌ पराक्रमी और भय योग्य ईश्वर है, जो किसी का पक्ष नहीं करता और न घूस लेता है।
Deuteronomy 10:18 वह अनाथों और विधवा का न्याय चुकाता, और परदेशियों से ऐसा प्रेम करता है कि उन्हें भोजन और वस्त्र देता है।
Deuteronomy 10:19 इसलिये तुम भी परदेशियों से प्रेम भाव रखना; क्योंकि तुम भी मिस्र देश में परदेशी थे।
Deuteronomy 10:20 अपने परमेश्वर यहोवा का भय मानना; उसी की सेवा करना और उसी से लिपटे रहना, और उसी के नाम की शपथ खाना।
Deuteronomy 10:21 वही तुम्हारी स्तुति के योग्य है; और वही तेरा परमेश्वर है, जिसने तेरे साथ वे बड़े महत्व के और भयानक काम किए हैं, जिन्हें तू ने अपनी आंखों से देखा है।
Deuteronomy 10:22 तेरे पुरखा जब मिस्र में गए तब सत्तर ही मनुष्य थे; परन्तु अब तेरे परमेश्वर यहोवा ने तेरी गिनती आकाश के तारों के समान बहुत कर दिया है।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 43-45 
  • प्रेरितों 27:27-44


शुक्रवार, 26 जुलाई 2013

दृढ़ प्रतिज्ञा

   कोहरे के कारण कार के शीशे धुँधला गए थे और ऐन्जी ठीक से बाहर का दृश्य देख नहीं पा रही थी और अन्जाने में ही उसने कार एक सामने से आते हुए ट्रक के मार्ग में मोड़ दी। दुर्घटना भयानक थी, ऐन्जी जीवित तो बच गई लेकिन उसके मस्तिष्क को भारी क्षति पहुँची और वह कुछ भी बोलने में और अपनी देखभाल आप ही कर पाने में बिलकुल असमर्थ हो गई।

   तब से अब तक कई वर्ष बीत चुके हैं और मैं ऐन्जी के माता-पिता का हौंसला देखकर चकित होता हूँ। हाल ही में मैंने उनसे पूछा, "इस कटु अनुभव से होकर आप कैसे निकलने पाए?" ऐन्जी के पिता ने कुछ विचार करके उत्तर दिया, "सच कहूँ तो यह केवल इसलिए संभव हो सका क्योंकि हम परमेश्वर के निकट बने रहे। उसी ने हमें यह सामर्थ दी कि हम इस दुर्घटना को सह सकें और इससे उभर सकें।" ऐन्जी की माँ ने भी सहमति जताते हुए कहा कि दुर्घटना के तुरंत बाद उनका दुख और शोक इतना गहरा था कि उन्हें कोई आशा नहीं थी कि वे फिर कभी आनन्दित हो पाएंगे।

   ऐन्जी के माता-पिता ने इस दुख और निराशा में परमेश्वर को अपना सहारा बनाया और उसपर निर्भर होकर रहने लगे, और उन्होंने पाया कि अनेक अनपेक्षित आत्मिक और भौतिक प्रावधान और मार्ग ऐन्जी की देखभाल करने एवं ऐन्जी तथा सारे परिवार की सहायता के लिए उपलब्ध होने लगे उनके साथ खड़े होने लगे। चाहे ऐन्जी कभी बोलने नहीं पाएगी, लेकिन वह माता-पिता की देखभाल के प्रत्युत्तर में मुस्कराती है, जो उन्हें आनन्दित करता है। आज भी ऐन्जी के माता-पिता का मनपसन्द बाइबल पद है" "क्योंकि उसका क्रोध, तो क्षण भर का होता है, परन्तु उसकी प्रसन्नता जीवन भर की होती है। कदाचित् रात को रोना पड़े, परन्तु सबेरे आनन्द पहुंचेगा" (भजन 30:5)।

   क्या आप भी किसी बड़े दुख का सामना कर रहे हैं? प्रभु यीशु को अपना सहारा बना लीजिए, उसके आश्रय में आजाईए। उसकी दृढ़ प्रतिज्ञा है कि वह आपको विश्राम देगा (मत्ती 11:28) और आपके वर्तमान आँसुओं के बावजूद एक आनन्दमय भविष्य आपके लिए तैयार रहेगा। - डेनिस फिशर


अपने सभी दुख प्रभु यीशु को सौंप दें और उससे उसकी अनन्तकाल की शांति ले लें।

हे सब परिश्रम करने वालों और बोझ से दबे लोगों, मेरे पास आओ; मैं तुम्हें विश्राम दूंगा। मेरा जूआ अपने ऊपर उठा लो; और मुझ से सीखो; क्योंकि मैं नम्र और मन में दीन हूं: और तुम अपने मन में विश्राम पाओगे। क्योंकि मेरा जूआ सहज और मेरा बोझ हल्का है। - मत्ती 11:28-30

बाइबल पाठ: भजन 30:5
Psalms 30:1 हे यहोवा मैं तुझे सराहूंगा, क्योंकि तू ने मुझे खींचकर निकाला है, और मेरे शत्रुओं को मुझ पर आनन्द करने नहीं दिया।
Psalms 30:2 हे मेरे परमेश्वर यहोवा, मैं ने तेरी दोहाई दी और तू ने मुझे चंगा किया है।
Psalms 30:3 हे यहोवा, तू ने मेरा प्राण अधोलोक में से निकाला है, तू ने मुझ को जीवित रखा और कब्र में पड़ने से बचाया है।
Psalms 30:4 हे यहोवा के भक्तों, उसका भजन गाओ, और जिस पवित्र नाम से उसका स्मरण होता है, उसका धन्यवाद करो।
Psalms 30:5 क्योंकि उसका क्रोध, तो क्षण भर का होता है, परन्तु उसकी प्रसन्नता जीवन भर की होती है। कदाचित् रात को रोना पड़े, परन्तु सबेरे आनन्द पहुंचेगा।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 40-42 
  • प्रेरितों 27:1-26


गुरुवार, 25 जुलाई 2013

आनन्द

   मैं सदा ही ग्रीष्म काल के आने की बाट जोहता हूँ। ठंड के एक लम्बे समय के पश्चात धूप की गर्मी में बाहर निकलना, बेसबॉल खेलना, समुद्र तट पर विचरण करना और दोस्तों के साथ रात को बाहर आग पर खाना पकाकर खाना और बातचीत में समय बिताना आदि सब ऐसे आनन्द हैं जिनकी प्रतीक्षा ठंड के मौसम के बाद मुझे रहती है। लेकिन आनन्द मनाना और मौज करना किसी ऋतु पर निर्भर नहीं है; ऋतु कोई भी हो, क्या हम सब को अच्छा भोजन, मित्रों के साथ समय बिताना और बातचीत करना या परिवार के साथ समय बिताना आनन्दित नहीं करता?

   आनन्द मनाना और मौज करना अपने आप में कोई बुरी बात नहीं है, परमेश्वर ने हमें आनन्दित रहने के लिए ही बनाया है और सृष्टि की चीज़ें दी हैं। परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस लिखता है: "इस संसार के धनवानों को आज्ञा दे, कि वे अभिमानी न हों और चंचल धन पर आशा न रखें, परन्तु परमेश्वर पर जो हमारे सुख के लिये सब कुछ बहुतायत से देता है" (1 तिमुथियुस 6:17)। ना केवल परमेश्वर हमारे सुख के लिए हमें बहुतायत से देता है, वरन बाइबल में अन्य स्थानों पर इस बहुतायत से मिलने वाले अच्छे भोजन, अच्छे मित्रों, अच्छे वैवाहिक संबंधों आदि के सदुपयोग से मिलने वाले भले आनन्द का उल्लेख भी है। लेकिन यह दृष्टिकोण रखना कि इन सांसारिक बातों से स्थाई और वास्तविक आनन्द मिल जाएगा एक भ्रम है।

   स्थाई और वास्तविक आनन्द संसार के अल्प कालीन रोमांच और ऐसा रोमांच देने वाली वस्तुओं में नहीं अपितु सृष्टिकर्ता परमेश्वर के साथ एक दीर्घकालीन निकट संबंध बनाने और उसे गहरा बनाते जाने में है। राजा सुलेमान ने भी इस बात को सीखा और पहचाना, लेकिन कुछ कटु अनुभवों के बाद; उसने अपने आप को संसार और संसार के भोग-विलास में लिप्त कर लिया, लेकिन नतीजा एक व्यर्थता का अनुभव ही था: "और जितनी वस्तुओं के देखने की मैं ने लालसा की, उन सभों को देखने से मैं न रूका; मैं ने अपना मन किसी प्रकार का आनन्द भोगने से न रोका क्योंकि मेरा मन मेरे सब परिश्रम के कारण आनन्दित हुआ; और मेरे सब परिश्रम से मुझे यही भाग मिला। तब मैं ने फिर से अपने हाथों के सब कामों को, और अपने सब परिश्रम को देखा, तो क्या देखा कि सब कुछ व्यर्थ और वायु को पकड़ना है, और संसार में कोई लाभ नहीं" (सभोपदेशक 2:10-11)। इसलिए इसमें कोई आश्चर्य नहीं कि अपने सब अनुभवों के आधार पर उसने चिताया कि सांसारिक भोग-विलास के आनन्द के पीछे भागने वाले अन्ततः नुक्सान में ही रहेंगे "जो रागरंग से प्रीति रखता है, वह कंगाल होता है; और जो दाखमधु पीने और तेल लगाने से प्रीति रखता है, वह धनी नहीं होता" (नीतिवचन 21:17)।

   जिस स्थाई और वास्तविक आनन्द कि हमें तलाश है, उसकी प्राप्ति और तृप्ति उसी से होती है जो सब वस्तुओं का बनाने वाला और उन्हें हमें देने वाला है। सृष्टिकर्ता और उद्धारकर्ता प्रभु यीशु के साथ एक दृढ़ संबंध बना लीजिए, उसकी संगति से मिलने वाले अद्भुत आनन्द को चखने के बाद फिर सांसारिक बातों का आनन्द फीका ही लगेगा। - जो स्टोवैल


आपके जीवन का उद्देश्य क्या है - अपना सुख-विलास या परमेश्वर की प्रसन्नता?

सब कुछ सुना गया; अन्त की बात यह है कि परमेश्वर का भय मान और उसकी आज्ञाओं का पालन कर; क्योंकि मनुष्य का सम्पूर्ण कर्त्तव्य यही है। क्योंकि परमेश्वर सब कामों और सब गुप्त बातों का, चाहे वे भली हों या बुरी, न्याय करेगा। - सभोपदेशक 12:13-14 

बाइबल पाठ: सभोपदेशक 2:1-11
Ecclesiastes 2:1 मैं ने अपने मन से कहा, चल, मैं तुझ को आनन्द के द्वारा जांचूंगा; इसलिये आनन्दित और मगन हो। परन्तु देखो, यह भी व्यर्थ है।
Ecclesiastes 2:2 मैं ने हंसी के विषय में कहा, यह तो बावलापन है, और आनन्द के विषय में, उस से क्या प्राप्त होता है?
Ecclesiastes 2:3 मैं ने मन में सोचा कि किस प्रकार से मेरी बुद्धि बनी रहे और मैं अपने प्राण को दाखमधु पीने से क्योंकर बहलाऊं और क्योंकर मूर्खता को थामे रहूं, जब तक मालूम न करूं कि वह अच्छा काम कौन सा है जिसे मनुष्य जीवन भर करता रहे।
Ecclesiastes 2:4 मैं ने बड़े बड़े काम किए; मैं ने अपने लिये घर बनवा लिये और अपने लिये दाख की बारियां लगवाईं;
Ecclesiastes 2:5 मैं ने अपने लिये बारियां और बाग लगावा लिये, और उन में भांति भांति के फलदाई वृक्ष लगाए।
Ecclesiastes 2:6 मैं ने अपने लिये कुण्ड खुदवा लिये कि उन से वह वन सींचा जाए जिस में पौधे लगाए जाते थे।
Ecclesiastes 2:7 मैं ने दास और दासियां मोल लीं, और मेरे घर में दास भी उत्पन्न हुए; और जितने मुझ से पहिले यरूशलेम में थे उन से कहीं अधिक गाय-बैल और भेड़-बकरियों का मैं स्वामी था।
Ecclesiastes 2:8 मैं ने चान्दी और सोना और राजाओं और प्रान्तों के बहुमूल्य पदार्थों का भी संग्रह किया; मैं ने अपने लिये गवैयों और गानेवालियों को रखा, और बहुत सी कामिनियां भी, जिन से मनुष्य सुख पाते हैं, अपनी कर लीं।
Ecclesiastes 2:9 इस प्रकार मैं अपने से पहिले के सब यरूशलेमवासियों अधिक महान और धनाढय हो गया; तौभी मेरी बुद्धि ठिकाने रही।
Ecclesiastes 2:10 और जितनी वस्तुओं के देखने की मैं ने लालसा की, उन सभों को देखने से मैं न रूका; मैं ने अपना मन किसी प्रकार का आनन्द भोगने से न रोका क्योंकि मेरा मन मेरे सब परिश्रम के कारण आनन्दित हुआ; और मेरे सब परिश्रम से मुझे यही भाग मिला।
Ecclesiastes 2:11 तब मैं ने फिर से अपने हाथों के सब कामों को, और अपने सब परिश्रम को देखा, तो क्या देखा कि सब कुछ व्यर्थ और वायु को पकड़ना है, और संसार में कोई लाभ नहीं।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 37-39 
  • प्रेरितों 26


बुधवार, 24 जुलाई 2013

निकट रहें

   मैं अपनी सहेली के साथ एक यात्रा पर थी, और किसी कारण से मेरी सहेली काफी विचलित और अधीर थी। अपनी इस मनःस्थिति के कारण, एयरपोर्ट पहुँचने पर उसे ध्यान नहीं रहा कि उसने अपना पासपोर्ट और टिकिट आदि कहाँ रखे हुए हैं। जब लाइन में उसका नम्बर आया तो इन सब को ढूँढ निकालने में काफी समय लगा और उतने समय तक वहाँ के कर्मचारी बड़े धीरज के साथ उसकी सहायता करते रहे। जब जाँच की सारी कार्यवाही हो गई और उसे प्रवेश का अनुमति-पत्र मिल गया तो मेरी सहेली ने उस कर्मचारी से पूछा, "अब आगे क्या करना है और कहाँ जाना है?" उस कर्मचारी ने मुस्कुराते हुए मेरी ओर इशारा किया और कहा, "बस अपनी सहेली के निकट बनी रहिए और उनके साथ-साथ चलती रहिए।"

   जीवन की परेशानियों और दुख के समयों का सामना करने के लिए यह एक अच्छी सलाह है - अपने मित्रों के निकट बने रहें। हमारा सबसे अच्छा और सबसे निकटतम मित्र है हमारा उद्धारकर्ता प्रभु यीशु, और उसमें विश्वास द्वारा उसकी मण्डली के सदस्य हो जाने के बाद वह हमें मण्डली के अन्य सदस्यों के साथ सहभागिता में ले आता है जिससे हम एक दूसरे का ध्यान रखें, एक दूसरे का सहारा बनें और आवश्यकतानुसार एक दूसरे को उभारते और सुधारते रहें।

   प्रेरित पतरस ने अपनी पहली पत्री एक ऐसे मसीही विश्वसीयों के समूह को लिखी जो अपने मसीही विश्वास के कारण बहुत दुखों का सामना कर रहे थे और जिन्हें एक दूसरे के साथ और सहायता की आवश्यकता थी। इस पत्री के चौथे अध्याय में पतरस ने उन्हें समझाया कि वे एक दूसरे के प्रति प्रेम को बनाए रखें, एक दूसरे के लिए प्रार्थनाएं करें, एक दूसरे की पहुनाई में लगे रहें और अपने आत्मिक वरदानों का उपयोग एक दूसरे की भलाई और सेवा के लिए करते रहें (पद 7-10)। परमेश्वर के वचन बाइबल में अन्य स्थानों पर भी हम ऐसे ही निर्देश पाते हैं - जैसे परमेश्वर हमें सांत्वना देता है वैसे ही हम भी दूसरों को सांत्वना देने वाले बनें (2 कुरिन्थियों 1:3-4); हम एक दुसरे को प्रेम में बढ़ावा देने और उभारने वाले बनें (1 थिस्सलुनीकियों 5:11)।

   जब जीवन कठिन हो जाए और हम थकित अनुभव करें तो अच्छे मित्रों के निकट रहना सदा ही लाभदायक रहता है, लेकिन सबसे लाभदायक होता है प्रभु यीशु के निकट रहना, वह हमें कभी नहीं छोड़ता और कभी नहीं त्यागता (इब्रानियों 13:5)। - ऐनी सेटास


मसीही मित्रों का साथ मसीह का साथ भी बनाए रखता है।

इस कारण एक दूसरे को शान्‍ति दो, और एक दूसरे की उन्नति के कारण बनो, निदान, तुम ऐसा करते भी हो। - 1 थिस्सलुनीकियों 5:11

बाइबल पाठ: 1 पतरस 4:7-11
1 Peter 4:7 सब बातों का अन्‍त तुरन्त होने वाला है; इसलिये संयमी हो कर प्रार्थना के लिये सचेत रहो।
1 Peter 4:8 और सब में श्रेष्ठ बात यह है कि एक दूसरे से अधिक प्रेम रखो; क्योंकि प्रेम अनेक पापों को ढांप देता है।
1 Peter 4:9 बिना कुड़कुड़ाए एक दूसरे की पहुनाई करो।
1 Peter 4:10 जिस को जो वरदान मिला है, वह उसे परमेश्वर के नाना प्रकार के अनुग्रह के भले भण्‍डारियों की नाईं एक दूसरे की सेवा में लगाए।
1 Peter 4:11 यदि कोई बोले, तो ऐसा बोले, मानों परमेश्वर का वचन है; यदि कोई सेवा करे; तो उस शक्ति से करे जो परमेश्वर देता है; जिस से सब बातों में यीशु मसीह के द्वारा, परमेश्वर की महिमा प्रगट हो: महिमा और साम्राज्य युगानुयुग उसी की है। आमीन।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 35-36 
  • प्रेरितों 25


मंगलवार, 23 जुलाई 2013

दृष्टि

   मेरा घर अमेरिका के कोलारैडो में है। एक दिन वहाँ अपने घर बैठे बैठे ही मैंने गूगल मैप्स का उपयोग करके अफ्रीका में स्थित कीन्या देश के नैरोबी शहर के उस इलाके को विस्तार से देखा जहाँ मेरा परिवार दो दशक पहले रहा करता था। अपने कंप्यूटर स्क्रीन पर सैटलाईट द्वारा लिए और प्रेशित करे गए चित्र पर मैं वहाँ की सड़कें, इमारतें आदि देख सका और उन्हें पहचान सका। कुछ क्षेत्रों पर तो मैं बिलकुल नीचे गली के स्तर तक जा सका और वहाँ से मैं अपने चारों ओर ऐसे देखने पाया मानों मैं स्वयं ही नीचे गली में खड़ा होकर अपने आस-पास के मकान और स्थान आदि देख रहा हूँ। जो मुझे नीचे गली के स्तर पर आने के बाद नहीं दिख पाता था उसे मैं अपने दृश्य स्तर में थोड़ा और ऊपर जाकर देख सकता था। मैं निर्धारित कर सकता था कि मुझे कितना दृश्य, कितनी बारीकी से, किस दिशा से, कितनी देर तक देखना है। अमेरिका में बैठे बैठे अफ्रीका के मनचाहे इलाके को इतने विस्तरपूर्वक देख पाना, यह एक बड़ा अद्भुत अनुभव था। इस अनुभव ने मुझे यह समझने में सहायता करी कि जब मनुष्य अपने द्वारा बनाए उपकरणों की सहायता से दूर बैठे ही इतने विस्तार और प्रकार से किसी भी स्थान को बारीकी से देख सकता है तो परमेश्वर हमारे जीवनों और पृथ्वी की बातों को कितने अधिक विस्तार और बारीकी से देखता होगा तथा उनकी जानकारी रखता होगा।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में भजनकार ने परमेश्वर के पृथ्वी को देखने के बारे में लिखा: "यहोवा स्वर्ग से दृष्टि करता है, वह सब मनुष्यों को निहारता है; अपने निवास के स्थान से वह पृथ्वी के सब रहने वालों को देखता है" (भजन 33:13-14)। भजनकार आगे लिखता है कि परमेश्वर सबके कार्यों पर दृष्टि रखता है, उनके विचारों को जानता है और जो उस पर विश्वास रखते हैं और उसे समर्पित जीवन व्यतीत करते हैं उनकी रक्षा करता है।

   जो एक कंप्यूटर और सैटलाईट नहीं कर सकते, वह परमेश्वर कर सकता है - हमारे मन के अन्दर कि हर बात और हर प्रयोजन को वह भली-भांति जानता है। वह हमारी वास्तविकता जानता है और हमारी कोई मनसा उससे छिपी नहीं है, लेकिन तब भी वह हमसे प्रेम रखता है, हमारे प्रति सहनशील है, हमारी भलाई ही की योजनाएं बनाता है। इसीलिए वह चाहता है कि बजाए उससे दूर रहने के, हम उसपर विश्वास करके उसके निकट बने रहें, हर बात में उसको समर्पित रहें, उसकी आज्ञाकारिता में रहें और चलें, क्योंकि जो हम अपने स्तर पर नहीं देख पाते वह अपने स्तर पर होकर पहले से देखता और जानता है और आने वाली हानि से बचने के उपाय हमें सुझाता है। परमेश्वर की दृष्टि से कोई ओझल नहीं रह सकता, और जिन्होंने उसे अपना जीवन समर्पित किया है उनकी सुरक्षा और भलाई के लिए उन पर तो वह विशेष बारीकी से अपनी दृष्टि बनाए रखता है।

   हम मसीही विश्वासियों के लिए यह एक बहुत शांतिदायक और उत्साहवर्धक बात है कि हम अपने प्रभु और उद्धारकर्ता की दृष्टि से कभी ओझल नहीं रहते। वह सदा हम पर अपनी दृष्टि बनाए रखता है और अपनी आँख की पुतली के समान हमारी रक्षा करता है: "...क्योंकि जो तुम को छूता है, वह मेरी आंख की पुतली ही को छूता है" (ज़कर्याह 2:8)। - डेविड मैक्कैसलैंड


अपनी दृष्टि परमेश्वर कि ओर लगाए रखें क्योंकि उसकी दृष्टि सदा आप पर बनी रहती है।

क्योंकि प्रभु की आंखे धर्मियों पर लगी रहती हैं, और उसके कान उन की बिनती की ओर लगे रहते हैं, परन्तु प्रभु बुराई करने वालों के विमुख रहता है। - 1 पतरस 3:12 

बाइबल पाठ: भजन 33:12-22
Psalms 33:12 क्या ही धन्य है वह जाति जिसका परमेश्वर यहोवा है, और वह समाज जिसे उसने अपना निज भाग होने के लिये चुन लिया हो!
Psalms 33:13 यहोवा स्वर्ग से दृष्टि करता है, वह सब मनुष्यों को निहारता है;
Psalms 33:14 अपने निवास के स्थान से वह पृथ्वी के सब रहने वालों को देखता है,
Psalms 33:15 वही जो उन सभों के हृदयों को गढ़ता, और उनके सब कामों का विचार करता है।
Psalms 33:16 कोई ऐसा राजा नहीं, जो सेना की बहुतायत के कारण बच सके; वीर अपनी बड़ी शक्ति के कारण छूट नहीं जाता।
Psalms 33:17 बच निकलने के लिये घोड़ा व्यर्थ है, वह अपने बड़े बल के द्वारा किसी को नहीं बचा सकता है।
Psalms 33:18 देखो, यहोवा की दृष्टि उसके डरवैयों पर और उन पर जो उसकी करूणा की आशा रखते हैं बनी रहती है,
Psalms 33:19 कि वह उनके प्राण को मृत्यु से बचाए, और अकाल के समय उन को जीवित रखे।
Psalms 33:20 हम यहोवा का आसरा देखते आए हैं; वह हमारा सहायक और हमारी ढाल ठहरा है।
Psalms 33:21 हमारा हृदय उसके कारण आनन्दित होगा, क्योंकि हम ने उसके पवित्र नाम का भरोसा रखा है।
Psalms 33:22 हे यहोवा जैसी तुझ पर हमारी आशा है, वैसी ही तेरी करूणा भी हम पर हो।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 33-34 
  • प्रेरितों 24