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शुक्रवार, 8 नवंबर 2013

पड़ौस


   आपके रहने का स्थान आप को कुछ बातों का ध्यान रखने और मानने के लिए सावधान करता है; यदि आप ऐसा नहीं करते तो आप स्वयं और आपके द्वारा आपके पड़ौसी भी कठिनाईयों में पड़ सकते हैं। उदाहरण के लिए मेरे रहने के स्थान को ही लीजिए। हमारे इलाके में कूड़ा उठाने वाला मंगलवार की प्रातः ही आता है, इसलिए यह मेरी ज़िम्मेदारी है कि मैं सोमवार की देर रात को ही कूड़ा उठा कर बाहर सड़क की पटरी के किनारे पर रख दूँ। यदि मैं अपने घर का कूड़ा प्रतिदिन ही बाहर रखता रहूँ तो निश्चय ही मेरे पड़ौसी मुझे से अप्रसन्न रहेंगे, एतराज़ करेंगे। फिर, मेरे घर के आस-पास बहुत से छोटे बच्चे हैं जो बाहर खेलते रहते हैं, कभी-कभी वे अपनी गेंद या अन्य किसी खेल अथवा खिलौने के पीछे अचानक ही बाहर सड़क पर भाग कर आ जाते हैं, बिना यह देखे कि कोई गाड़ी तो नहीं आ रही है। इसलिए हम लोगों ने सड़क पर बहुत से संकेत लगा रखे हैं जिससे गाड़ी चलाने वालों को ध्यान रहे कि वे गाड़ी बहुत धीरे से चलाएं और बच्चों का ध्यान रखें। मुझे भी अपनी गाड़ी वहाँ धीरे से और ध्यान से चलानी होती है। निश्चय ही मेरा रहने का स्थान मेरे व्यवहार को निर्धारित करता है।

   हम मसीही विश्वासियों को भी यह ध्यान रखना चाहिए कि परमेश्वर ने "...हमें अन्धकार के वश से छुड़ाकर अपने प्रिय पुत्र के राज्य में प्रवेश कराया" (कुलुस्सियों 1:13)। अब प्रभु यीशु के राज्य और उस के पड़ौस में रहने के कारण हमारे व्यवहार में कुछ ऐसे मूलभूत परिवर्तन दिखाई देने चाहिएं जो हमारे आत्मिक ठिकाने के अनुरूप हों। इसीलिए रोम के विश्वासियों को लिखी अपनी पत्री में पौलुस उन्हें स्मरण दिलाता है कि परमेश्वर का राज्य सांसारिक बातों को लेकर तर्क और झगड़ों का स्थान नहीं है वरन धार्मिकता, शांति और आनन्द का स्थान है (रोमियों 14:17); अर्थात हमारे जीवन परमेश्वर के आत्मिक मानकों के अनुसार, तथा दूसरों को शांति एवं आनन्द देने वाले होने चाहिएं। जब हम ऐसे जीवन व्यतीत करते हैं तो यह ना केवल अन्य लोगों को वरन परमेश्वर को भी भाता है, प्रसन्न करता है (पद 18)।

  मसीही विश्वासी होने के नाते, यदि आप एक ऐसा पड़ौस बना लेंगे, तो भला कौन वहाँ नहीं रहना चाहेगा? - जो स्टोवैल


यदि आप परमेश्वर के राज्य के निवासी हैं, तो यह आप की जीवन-शैली में प्रकट होना चाहिए।

और धर्म का फल शांति और उसका परिणाम सदा का चैन और निश्चिन्त रहना होगा। - यशायाह 32:17

बाइबल पाठ: रोमियों 14:13-19
Romans 14:13 सो आगे को हम एक दूसरे पर दोष न लगाएं पर तुम यही ठान लो कि कोई अपने भाई के साम्हने ठेस या ठोकर खाने का कारण न रखे। 
Romans 14:14 मैं जानता हूं, और प्रभु यीशु से मुझे निश्चय हुआ है, कि कोई वस्तु अपने आप से अशुद्ध नहीं, परन्तु जो उसको अशुद्ध समझता है, उसके लिये अशुद्ध है। 
Romans 14:15 यदि तेरा भाई तेरे भोजन के कारण उदास होता है, तो फिर तू प्रेम की रीति से नहीं चलता: जिस के लिये मसीह मरा उसको तू अपने भोजन के द्वारा नाश न कर। 
Romans 14:16 अब तुम्हारी भलाई की निन्दा न होने पाए। 
Romans 14:17 क्योंकि परमेश्वर का राज्य खाना पीना नहीं; परन्तु धर्म और मिलाप और वह आनन्द है; 
Romans 14:18 जो पवित्र आत्मा से होता है और जो कोई इस रीति से मसीह की सेवा करता है, वह परमेश्वर को भाता है और मनुष्यों में ग्रहण योग्य ठहरता है। 
Romans 14:19 इसलिये हम उन बातों का प्रयत्न करें जिनसे मेल मिलाप और एक दूसरे का सुधार हो।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 43-45 
  • इब्रानियों 5


गुरुवार, 7 नवंबर 2013

निशाना और उद्देश्य


   ट्रैक्टर चलाने का वह मेरा पहला दिन था। प्रातः की ठण्डी बयार खेत से होकर बह रही थी; मैंने ट्रैक्टर के ईंजन को चलाया और उसकी आवाज़ के सामने खेत से आती झींगुरों की आवाज़ दब गई। मैंने जोतने वाले हल को नीचे धरती पर किया, ट्रैक्टर को गियर में डाला और खेत जोतता हुआ चल दिया। मैं ट्रैक्टर की शक्ति के बारे में सोचने लगा, उस पर लगे तेल, गति, ईंजन की कार्य-स्थिति आदि बताने वाले विभिन्न गेज पर नज़र दौड़ाने लगा, ट्रैक्टर घुमाने के लिए लगे स्टेरिंग को निहारने लगा। खेत के दुसरे छोर पर पहुँच कर मैंने इस आशा से पीछे मुड़ कर देखा कि जोती हूई भूमि पर हल से एक सीधी रेखा बनी हुई होगी, लेकिन मेरी आशा के विपरीत वह तो साँप की चाल के समान एक टेढ़ी-मेढ़ी रेखा थी।

   मैं समझ गया; मुझसे कहा गया था कि ट्रैक्टर चलाते समय ध्यान इधर-उधर नहीं वरन सामने लगी बाड़ के एक खंबे पर नज़र लगाए रखकर चलाना। सामने लगे उस खंबे पर नज़र लगाए रहने से ध्यान इधर-उधर नहीं जाता और चलाने वाला इस बात के लिए आश्वस्त रहता है कि खेत सीधी रेखाओं में जोता जा रहा है। वापस लौटते में मैंने ऐसा ही किया; अब मेरा ध्यान ट्रैक्टर की विभिन्न बातों पर नहीं वरन सामने वाले खंबे पर लगा हुआ था। इस बार दुसरे छोर पर पहुँच कर जब मैंने पीछे मुड़कर देखा तो जुताई की रेखा वास्तव में सीधी थी। पहले मैं एक बिन्दु पर केन्द्रित नहीं था, इसलिए जुताई की रेखा टेढ़ी-मेढ़ी रही, लेकिन दूसरी बार जब मैं एक बिन्दु पर ध्यान लगा कर जोतने लगा तब रेखा सीधी रही।

   मसीही जीवन को सिधाई से जीने का भी यही रहस्य है - मसीह यीशु पर ध्यान लगाए रखकर उसी की ओर बढ़ते चले जाना। प्रेरित पौलुस ने भी इसी बात को फिलिप्पियों के विश्वासियों को लिखी अपनी पत्री में बताया। पौलुस कहता है कि ना केवल उसने अपने ध्यान को इधर-उधर भटकने नहीं दिया (फिलिप्पियों 3:8, 13), वरन उसने अपना निशाना भी निर्धारित किया (पद 8, 14), यह ध्यान में रखते हुए कि इसका कैसा परिणाम होगा (पद 9-11), और दूसरों के लिए वह कैसा उदाहरण बनेगा (पद 16-17)।

   पौलुस के समान ही यदि हम मसीह यीशु पर ध्यान केंद्रित रखें तो हम भी अपने जीवन के लिए परमेश्वर के उद्देश्य को सीधी रीति से पूरा करने पाएंगे। आपका निशाना और उद्देश्य क्या है? कहीं संसार की लुभावनी बातें और सांसारिक उपलब्धियों का आकर्षण आप को आप के वास्तविक निशाने से भटका तो नहीं रहा है? - रैण्डी किल्गोर


जब आप अपनी नज़रें मसीह यीशु पर बनाए रखेंगे तो संसार की लुभावनी बातें और सांसारिक उपलब्धियों की चाह आपको सीधे मार्ग से भटकाने नहीं पाएंगी।

निशाने की ओर दौड़ा चला जाता हूं, ताकि वह इनाम पाऊं, जिस के लिये परमेश्वर ने मुझे मसीह यीशु में ऊपर बुलाया है। - फिलिप्पियों 3:14

बाइबल पाठ: फिलिप्पियों 3:8-17
Philippians 3:8 वरन मैं अपने प्रभु मसीह यीशु की पहिचान की उत्तमता के कारण सब बातों को हानि समझता हूं: जिस के कारण मैं ने सब वस्‍तुओं की हानि उठाई, और उन्हें कूड़ा समझता हूं, जिस से मैं मसीह को प्राप्त करूं। 
Philippians 3:9 और उस में पाया जाऊं; न कि अपनी उस धामिर्कता के साथ, जो व्यवस्था से है, वरन उस धामिर्कता के साथ जो मसीह पर विश्वास करने के कारण है, और परमेश्वर की ओर से विश्वास करने पर मिलती है। 
Philippians 3:10 और मैं उसको और उसके मृत्युंजय की सामर्थ को, और उसके साथ दुखों में सहभागी हाने के मर्म को जानूँ, और उस की मृत्यु की समानता को प्राप्त करूं। 
Philippians 3:11 ताकि मैं किसी भी रीति से मरे हुओं में से जी उठने के पद तक पहुंचूं। 
Philippians 3:12 यह मतलब नहीं, कि मैं पा चुका हूं, या सिद्ध हो चुका हूं: पर उस पदार्थ को पकड़ने के लिये दौड़ा चला जाता हूं, जिस के लिये मसीह यीशु ने मुझे पकड़ा था। 
Philippians 3:13 हे भाइयों, मेरी भावना यह नहीं कि मैं पकड़ चुका हूं: परन्तु केवल यह एक काम करता हूं, कि जो बातें पीछे रह गई हैं उन को भूल कर, आगे की बातों की ओर बढ़ता हुआ। 
Philippians 3:14 निशाने की ओर दौड़ा चला जाता हूं, ताकि वह इनाम पाऊं, जिस के लिये परमेश्वर ने मुझे मसीह यीशु में ऊपर बुलाया है। 
Philippians 3:15 सो हम में से जितने सिद्ध हैं, यही विचार रखें, और यदि किसी बात में तुम्हारा और ही विचार हो तो परमेश्वर उसे भी तुम पर प्रगट कर देगा। 
Philippians 3:16 सो जहां तक हम पहुंचे हैं, उसी के अनुसार चलें।
Philippians 3:17 हे भाइयो, तुम सब मिलकर मेरी सी चाल चलो, और उन्हें पहिचान रखो, जो इस रीति पर चलते हैं जिस का उदाहरण तुम हम में पाते हो।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 40-42 
  • इब्रानियों 4


बुधवार, 6 नवंबर 2013

अनुभव और अवसर


   अपने ब्राज़ील के दौरे के समय मैं इगुआज़ु जल-प्रपात देखने गया जो संसार के सबसे बड़े जल-प्रपातों में से एक है। वह विशाल जल-प्रपात वास्तव में विस्मयकारी है। लेकिन इगुआज़ु के बारे में जिस बात ने मुझे सबसे अधिक प्रभावित किया वह ना तो उसका वह विस्मयकारी दृश्य था और ना ही वहां से उठने वाली पानी की विलक्षण बौछार थी; मुझे सबसे अधिक प्रभावित करने वाली बात थी उस जल-प्रपात की आवाज़। वह आवाज़ इतनी तेज़ थी कि और कुछ सुन पाना असंभव था, मुझे ऐसा लग रहा था मानो मैं आवाज़ के अन्दर हूँ। वह एक ज़बर्दस्त अनुभव था जिसमें मैंने जाना कि मैं कितना छोटा हूँ।

   बाद में एक समय जब मैं बाइबल पढ़ रहा था तब प्रेरित यूहन्ना द्वारा प्रकाशितवाक्य 1:15 में कही गई बात मुझे स्मरण हो आई। पतमोस के टापू पर यूहन्ना ने पुनर्जीवित हो उठे प्रभु यीशु का दर्शन पाया। प्रेरित यूहन्ना ने उस दर्शन में दिखे प्रभु यीशु के महिमामय रूप और उसके वस्त्रों आदि का वर्णन किया, और यह भी कि उस रूप में देखकर यूहन्ना प्रभु यीशु के आगे खड़ा नहीं रह सका, मुर्दा सा प्रभु के चरणों के पर गिर पड़ा। उस वर्णन में यूहन्ना ने प्रभु यीशु की आवाज़ के लिए लिखा, "...उसका शब्द बहुत जल के शब्द की नाईं था" (प्रकाशितवाक्य 1:15)।

   जब तक मैं इगाज़ु जल-प्रपात को देख कर और उसकी भीषण गर्जन को सुनकर नहीं आया था, मैं पूरी तरह से यूहन्ना द्वारा कही इस बात को समझ नहीं पाया था; इगाज़ु पर मैंने जाना कि आवाज़ द्वारा अभिभूत हो जाने का अर्थ क्या होता है। जैसे उस जल-प्रपात ने मुझे अपने छोटे होने का एहसास कराया था, मैं समझ सका कि प्रभु यीशु के महिमय रूप के सामने और उसके शब्दों को सुनकर यूहन्ना का क्या हाल हुआ होगा; इसलिए मेरे लिए अब यह कोई अचरज की बात नहीं है कि यूहन्ना मुर्दा सा प्रभु यीशु के चरणों पर गिर पड़ा।

   संभव है यह वर्णन आपको भी महिमामय प्रभु यीशु के सम्मुख खड़े होने के अनुभव की कलपना करने और कुछ हद तक समझ पाने में सहायता करेगा; क्योंकि संसार के प्रत्येक जन को एक ना एक दिन उसके सामने खड़ा होना ही है। अब यह निर्णय आपका है कि आप जब उसके सामने प्रस्तुत होंगे तब वह आपका न्यायी होकर आपके पापों का अनन्तकालीन दण्ड आपको सुनाएगा, या आपका उद्धारकर्ता होने के कारण स्वर्ग के अपने राज्य में अनन्तकाल के लिए आपका स्वागत करेगा।

   अभी इस पृथ्वी पर रहते हुए आपको यह समय है, प्रभु यीशु से पापों की क्षमा मांगकर, उसे अपना जीवन समर्पित कर के, बाद में उसके सामने शर्मिंदा तथा दण्ड के भागी होने से बच जाएं। इस पृथ्वी से विदा होने के बाद यह अवसर फिर कभी नहीं मिलेगा। - बिल क्राउडर


मसीह यीशु आपके लिए क्या है - दण्डाधिकारी या उद्धारकर्ता एवं आशीषदाता!

और उसके पांव उत्तम पीतल के समान थे जो मानो भट्टी में तपाए गए हों; और उसका शब्द बहुत जल के शब्द की नाईं था। - प्रकाशितवाक्य 1:15

बाइबल पाठ: प्रकाशितवाक्य 1:9-17
Revelation 1:9 मैं यूहन्ना जो तुम्हारा भाई, और यीशु के क्‍लेश, और राज्य, और धीरज में तुम्हारा सहभागी हूं, परमेश्वर के वचन, और यीशु की गवाही के कारण पतमुस नाम टापू में था। 
Revelation 1:10 कि मैं प्रभु के दिन आत्मा में आ गया, और अपने पीछे तुरही का सा बड़ा शब्द यह कहते सुना।
Revelation 1:11 कि जो कुछ तू देखता है, उसे पुस्‍तक में लिख कर सातों कलीसियाओं के पास भेज दे, अर्थात इफिसुस और स्मुरना, और पिरगमुन, और थुआतीरा, और सरदीस, और फिलेदिलफिया, और लौदीकिया में। 
Revelation 1:12 और मैं ने उसे जो मुझ से बोल रहा था; देखने के लिये अपना मुंह फेरा; और पीछे घूम कर मैं ने सोने की सात दीवटें देखीं। 
Revelation 1:13 और उन दीवटों के बीच में मनुष्य के पुत्र सरीखा एक पुरूष को देखा, जो पांवों तक का वस्‍त्र पहिने, और छाती पर सुनहला पटुका बान्‍धे हुए था। 
Revelation 1:14 उसके सिर और बाल श्वेत ऊन वरन पाले के से उज्ज़वल थे; और उस की आंखे आग की ज्‍वाला की नाईं थी। 
Revelation 1:15 और उसके पांव उत्तम पीतल के समान थे जो मानो भट्टी में तपाए गए हों; और उसका शब्द बहुत जल के शब्द की नाईं था। 
Revelation 1:16 और वह अपने दाहिने हाथ में सात तारे लिये हुए था: और उसके मुख से चोखी दोधारी तलवार निकलती थी; और उसका मुंह ऐसा प्रज्‍वलित था, जैसा सूर्य कड़ी धूप के समय चमकता है। 
Revelation 1:17 जब मैं ने उसे देखा, तो उसके पैरों पर मुर्दा सा गिर पड़ा और उसने मुझ पर अपना दाहिना हाथ रख कर यह कहा, कि मत डर; मैं प्रथम और अन्‍तिम और जीवता हूं।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 37-39 
  • इब्रानियों 3


मंगलवार, 5 नवंबर 2013

शांति


   हमारे चर्च का एक अगुवा, टेड, पहले पुलिस अधिकारी हुआ करता था। उस समय, एक बार एक हिंसा की घटना की खबर पाकर टेड और उसका एक साथी पुलिस वाला उस स्थान पर पहुँचे, जहाँ स्थिति विकट हो गई। एक आदमी ने किसी दूसरे को चाकू मारा और फिर चाकू से टेड पर हमला करने का प्रयास किया। टेड के साथी पुलिस वाले ने बचाने के लिए उस आदमी पर गोली चलाई लेकिन गोली टेड के लग गई। चाकू वाला हमलावर तो पकड़ लिया गया, किंतु टेड को एम्बुलेंस में अस्पताल के लिए रवाना करा गया। एम्बुलेंस में टेड का साथी पुलिस वाला अपनी चूक के कारण बहुत परेशान और दुखी था, लेकिन टेड परमेश्वर के पवित्र आत्मा की ओर से एक अद्भुत शांति को अपने ऊपर बहता महसुस कर रहा था। उस शांति के कारण टेड ज़रा भी विचिलित नहीं हुआ और अपनी जान को खतरा होते हुए भी टेड अपने साथी पुलिस वाले को ढाढ़स के शब्द भी कह सका, और उसे उभार भी सका।

   प्रभु यीशु ने क्रूस पर चढ़ाए जाने से कुछ ही घंटे पहले अपने विश्वासियों को अपनी शांति देने का वायदा किया। प्रभु यीशु ने उस समय अपने चेलों से कहा: "मैं तुम्हें शान्‍ति दिए जाता हूं, अपनी शान्‍ति तुम्हें देता हूं; जैसे संसार देता है, मैं तुम्हें नहीं देता: तुम्हारा मन न घबराए और न डरे" (यूहन्ना 14:27)। उसका यही वायदा आज भी प्रत्येक मसीही विश्वासी के लिए वैसा ही बना हुआ है जैसा तब चेलों के लिए था। प्रभु यीशु के वायदे के अनुसार, परमेश्वर पवित्र आत्मा से मिलने वाली यह अद्भुत शांति प्रत्येक मसीही विश्वासी ने अनुभव करी है।

   आपका सबसे बड़ा डर क्या है? वह चाहे कुछ भी हो, परन्तु एक मसीही विश्वासी होने के नाते यह सदा स्मरण रखें कि यदि आपको उस डर का प्रत्यक्ष सामना भी करना पड़ा, तो उस परिस्थिति में प्रभु यीशु आपके साथ होगा। जब उस पर विश्वास बनाए रखेंगे और प्रार्थना द्वारा उससे सामर्थ प्राप्त करेंगे, "तब परमेश्वर की शान्‍ति, जो समझ से बिलकुल परे है, तुम्हारे हृदय और तुम्हारे विचारों को मसीह यीशु में सुरिक्षत रखेगी" (फिलिप्पियों 4:7)। - डेनिस फिशर


शांति पाने का भेद है प्रत्येक चिन्ता को परमेश्वर के हाथों में सौंप देना।

मैं ने ये बातें तुम से इसलिये कही हैं, कि तुम्हें मुझ में शान्‍ति मिले; संसार में तुम्हें क्‍लेश होता है, परन्तु ढाढ़स बांधो, मैं ने संसार को जीत लिया है। - यूहन्ना 16:33

बाइबल पाठ: यूहन्ना 14:16-27
John 14:16 और मैं पिता से बिनती करूंगा, और वह तुम्हें एक और सहायक देगा, कि वह सर्वदा तुम्हारे साथ रहे। 
John 14:17 अर्थात सत्य का आत्मा, जिसे संसार ग्रहण नहीं कर सकता, क्योंकि वह न उसे देखता है और न उसे जानता है: तुम उसे जानते हो, क्योंकि वह तुम्हारे साथ रहता है, और वह तुम में होगा। 
John 14:18 मैं तुम्हें अनाथ न छोडूंगा, मैं तुम्हारे पास आता हूं। 
John 14:19 और थोड़ी देर रह गई है कि फिर संसार मुझे न देखेगा, परन्तु तुम मुझे देखोगे, इसलिये कि मैं जीवित हूं, तुम भी जीवित रहोगे। 
John 14:20 उस दिन तुम जानोगे, कि मैं अपने पिता में हूं, और तुम मुझ में, और मैं तुम में। 
John 14:21 जिस के पास मेरी आज्ञा है, और वह उन्हें मानता है, वही मुझ से प्रेम रखता है, और जो मुझ से प्रेम रखता है, उस से मेरा पिता प्रेम रखेगा, और मैं उस से प्रेम रखूंगा, और अपने आप को उस पर प्रगट करूंगा। 
John 14:22 उस यहूदा ने जो इस्करियोती न था, उस से कहा, हे प्रभु, क्या हुआ की तू अपने आप को हम पर प्रगट किया चाहता है, और संसार पर नहीं। 
John 14:23 यीशु ने उसको उत्तर दिया, यदि कोई मुझ से प्रेम रखे, तो वह मेरे वचन को मानेगा, और मेरा पिता उस से प्रेम रखेगा, और हम उसके पास आएंगे, और उसके साथ वास करेंगे। 
John 14:24 जो मुझ से प्रेम नहीं रखता, वह मेरे वचन नहीं मानता, और जो वचन तुम सुनते हो, वह मेरा नहीं वरन पिता का है, जिसने मुझे भेजा।
John 14:25 ये बातें मैं ने तुम्हारे साथ रहते हुए तुम से कहीं। 
John 14:26 परन्तु सहायक अर्थात पवित्र आत्मा जिसे पिता मेरे नाम से भेजेगा, वह तुम्हें सब बातें सिखाएगा, और जो कुछ मैं ने तुम से कहा है, वह सब तुम्हें स्मरण कराएगा। 
John 14:27 मैं तुम्हें शान्‍ति दिए जाता हूं, अपनी शान्‍ति तुम्हें देता हूं; जैसे संसार देता है, मैं तुम्हें नहीं देता: तुम्हारा मन न घबराए और न डरे।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 34-36 
  • इब्रानियों 2


सोमवार, 4 नवंबर 2013

सर्व-उपयोगी

   लेखक सी. एस. ल्यूइस कहते हैं कि धार्मिक सिद्धांत सूप (भोजन के साथ लिया जाने वाला तरल रसा) के समान होते हैं; कुछ तो गाढ़े और अपारदर्शी तथा अन्य पतले और पारदर्शक। परमेश्वर के वचन बाइबल में भी कई ऐसे ही गहन और समझने के लिए मनन माँगने वाले सिद्धाँत हैं, रहस्यमय, जटिल और जिनकी गूढ़ता अति प्रवीण व्यक्तियों को भी चुनौती देती है। उदाहरणस्वरूप रोमियों 9:18 को ही लीजिए: "सो वह जिस पर चाहता है, उस पर दया करता है; और जिसे चाहता है, उसे कठोर कर देता है।" लेकिन उसी बाइबल में ऐसे सिद्धांत भी हैं जो बिलकुल स्पष्ट और समझने, मानने में सरल हैं; भला 1 यूहन्ना 4:16 "...परमेश्वर प्रेम है: जो प्रेम में बना रहता है, वह परमेश्वर में बना रहता है; और परमेश्वर उस में बना रहता है" से अधिक सरल और सर्वमान्य और क्या होगा?

   पंद्रहवीं शताबदी के एक लेखक जौन कैमरून ने इस विषय को समझाने के लिए कहा, "उसी घास के मैदान से गाय-बैल घास खा लेते हैं, पक्षी दाने आदि से पेट भर लेते हैं, और किसी मनुष्य को वहाँ दबा कोई खज़ाना भी प्राप्त हो सकता है। इसी प्रकार परमेश्वर के उस एक ही वचन में तरह तरह की विशेषताएं और बातें हैं जिनसे भिन्न लोग, भिन्न आवश्यकताओं और परिस्थितियों के अनुसार, भिन्न स्तर की बातें और मार्गदर्शन पा सकते हैं। यह वचन वह है जिसमें मेमना चर सकता है, हाथी तैर सकता है, बच्चों के पेट दूध से भरे जा सकते हैं, और प्रौढ़ ठोस भोजन से तृप्त किए जा सकते हैं।"

   बुद्धि और ज्ञान के सभी खज़ाने परमेश्वर के वचन बाइबल में विद्यमान हैं - यह समुद्र के समान अथाह भी है जिसकी गहराई अति प्रबुद्ध मनुष्य भी नहीं पाने पाते और समुद्र तट के समान उथला भी है जहाँ साधारण सामन्य समझ रखने वाले बच्चे भी आसानी से खेल सकते हैं, आनन्दित हो सकते हैं।

   ना तो बाइबल से घबराएं और ना ही उसे पढ़ने से हिचकिचाएं वरन उसमें डुबकी लगाएं। बाइबल सब के लिए लाभकारी है, सर्व-उपयोगी है; आखिर परमेश्वर द्वारा अपनी सृष्टि को उसके लाभ और मार्गदर्शन के लिए दिया गया वचन है! - डेविड रोपर


परमेश्वर अपने वचन के द्वारा बातें करता है; आप से भी, यदि आप उस की वाणी सुनने के लिए तैयार हों, उसे समय दें।

यहोवा की व्यवस्था खरी है, वह प्राण को बहाल कर देती है; यहोवा के नियम विश्वासयोग्य हैं, साधारण लोगों को बुद्धिमान बना देते हैं; - भजन 19:7

बाइबल पाठ: 2 तिमुथियुस 3:14-17
2 Timothy 3:14 पर तू इन बातों पर जो तू ने सीखीं हैं और प्रतीति की थी, यह जानकर दृढ़ बना रह; कि तू ने उन्हें किन लोगों से सीखा था 
2 Timothy 3:15 और बालकपन से पवित्र शास्त्र तेरा जाना हुआ है, जो तुझे मसीह पर विश्वास करने से उद्धार प्राप्त करने के लिये बुद्धिमान बना सकता है। 
2 Timothy 3:16 हर एक पवित्रशास्‍त्र परमेश्वर की प्रेरणा से रचा गया है और उपदेश, और समझाने, और सुधारने, और धर्म की शिक्षा के लिये लाभदायक है। 
2 Timothy 3:17 ताकि परमेश्वर का जन सिद्ध बने, और हर एक भले काम के लिये तत्‍पर हो जाए।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 32-33 
  • इब्रानियों 1


रविवार, 3 नवंबर 2013

जल

   मंगल ग्रह पर पानी ढूँढने के लिए अमेरिका ने लाखों डॉलर खर्च कर दिए हैं। कुछ समय पहले अमेरिकी अन्तरिक्ष संस्था, नासा ने दो रोबोट उपग्रह, मंगल ग्रह पर उतारे, यह जानने के लिए कि वहाँ पानी है या कभी था कि नहीं। अमेरिका ऐसा क्यों कर रहा है? जो वैज्ञानिक उन दोनों रोबोट उपग्रहों से आने वाले आँकड़ों का अध्ययन कर रहें हैं, वे पता लगाने का प्रयास कर रहे हैं कि मंगल पर कभी जीवन था कि नहीं; एवं वरतमान में संभव है कि नहीं। जीवन के लिए जल का होना अनिवार्य है, अगर पहले वहाँ जल था तो जीवन भी होने की संभावना है और यदि जल अब भी है तो आगे भी वहाँ जीवन को कायम रखना संभव हो पाएगा।

   लगभग दो हज़ार वर्ष पहले भी दो जन इस्त्राएल स्थित सामारिया के इलाके में जल की खोज में थे। उन में से एक वहीं के गाँव कि एक स्त्री थी और दूसरा गलील के इलाके का एक पुरुष था। उन दोनों की भेंट सुखार नामक एक गाँव के निकट एक कुएँ पर हुई। उस मुलाकात के दौरान उन दोनों में एक वार्तालाप हुआ, जिससे उस पुरुष अर्थात प्रभु यीशु मसीह को वह मिला जो वह ढूँढ रहा था और उस स्त्री को अनन्त जीवन का वह जल मिल गया जिसके, और जिसकी आवश्यकता के बारे में उसे पहले पता भी नहीं था (यूहन्ना 4:5-15)।

   जल आत्मिक और शारीरिक दोनों ही जीवनों के लिए अनिवार्य है। उस स्त्री के लिए प्रभु यीशु मसीह के पास एक अनेपक्षित आश्चर्य था - अनन्त जीवन का जल, अर्थात स्वयं प्रभ यीशु में विश्वास। आत्मिक जीवन के लिए प्रभु यीशु ही वह निर्मल, स्फूर्तिदायक और ताज़गी देने वाला जल है जो अपने पर विश्वास लाने वालों के जीवन को नया कर देता है, अनन्त स्वर्गीय जीवन का अधिकारी बना देता है (यूहन्ना 4:14)।

   क्या आज आप किसी ऐसे को जानते हैं जो जीवन के जल के लिए प्यासा है? कोई ऐसा जिसकी आत्मा की प्यास इस संसार से बुझ नहीं पा रही है? उसका परिचय जीवन के जल, प्रभु यीशु मसीह से करवाईए; आत्मा की प्यास केवल उस जीवन जल से ही बुझ सकती है। - डेव ब्रैनन


केवल प्रभु यीशु जो जीवन जल है आत्मा की प्यास बुझा सकता है।

यीशु ने उन से कहा, जीवन की रोटी मैं हूं: जो मेरे पास आएगा वह कभी भूखा न होगा और जो मुझ पर विश्वास करेगा, वह कभी प्यासा न होगा। - यूहन्ना 6:35

बाइबल पाठ: यूहन्ना 4:1-15
John 4:1 फिर जब प्रभु को मालूम हुआ, कि फरीसियों ने सुना है, कि यीशु यूहन्ना से अधिक चेले बनाता, और उन्हें बपतिस्मा देता है। 
John 4:2 (यद्यपि यीशु आप नहीं वरन उसके चेले बपतिस्मा देते थे)। 
John 4:3 तब यहूदिया को छोड़कर फिर गलील को चला गया। 
John 4:4 और उसको सामरिया से हो कर जाना अवश्य था। 
John 4:5 सो वह सूखार नाम सामरिया के एक नगर तक आया, जो उस भूमि के पास है, जिसे याकूब ने अपने पुत्र यूसुफ को दिया था। 
John 4:6 और याकूब का कूआं भी वहीं था; सो यीशु मार्ग का थका हुआ उस कूएं पर यों ही बैठ गया, और यह बात छठे घण्टे के लगभग हुई। 
John 4:7 इतने में एक सामरी स्त्री जल भरने को आई: यीशु ने उस से कहा, मुझे पानी पिला। 
John 4:8 क्योंकि उसके चेले तो नगर में भोजन मोल लेने को गए थे। 
John 4:9 उस सामरी स्त्री ने उस से कहा, तू यहूदी हो कर मुझ सामरी स्त्री से पानी क्यों मांगता है? (क्योंकि यहूदी सामरियों के साथ किसी प्रकार का व्यवहार नहीं रखते)। 
John 4:10 यीशु ने उत्तर दिया, यदि तू परमेश्वर के वरदान को जानती, और यह भी जानती कि वह कौन है जो तुझ से कहता है; मुझे पानी पिला तो तू उस से मांगती, और वह तुझे जीवन का जल देता। 
John 4:11 स्त्री ने उस से कहा, हे प्रभु, तेरे पास जल भरने को तो कुछ है भी नहीं, और कूआं गहिरा है: तो फिर वह जीवन का जल तेरे पास कहां से आया? 
John 4:12 क्या तू हमारे पिता याकूब से बड़ा है, जिसने हमें यह कूआं दिया; और आप ही अपने सन्तान, और अपने ढोरों समेत उस में से पीया? 
John 4:13 यीशु ने उसको उत्तर दिया, कि जो कोई यह जल पीएगा वह फिर प्यासा होगा। 
John 4:14 परन्तु जो कोई उस जल में से पीएगा जो मैं उसे दूंगा, वह फिर अनन्तकाल तक प्यासा न होगा: वरन जो जल मैं उसे दूंगा, वह उस में एक सोता बन जाएगा जो अनन्त जीवन के लिये उमड़ता रहेगा। 
John 4:15 स्त्री ने उस से कहा, हे प्रभु, वह जल मुझे दे ताकि मैं प्यासी न होऊं और न जल भरने को इतनी दूर आऊं।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 30-31 
  • फिलेमोन


शनिवार, 2 नवंबर 2013

मूँह

   मैं अपने कुछ मित्रों के साथ बातें करते हुए मार्ग पर चल रहा था कि अचानक ही मुझे ठोकर लगी और मैं मूँह के बल गिर पड़ा। मुझे गिरने के बारे में ज़्यादा तो स्मरण नहीं है पर इतना स्मरण है कि मेरा मूँह सड़क की गन्दगी और मिट्टी से भर गया। उफ! कितना बुरा स्वाद था, मैं तुरंत ही अपनी चोट की परवाह करने से पहले ही अपने मूँह को साफ करने और गन्दगी को बाहर निकाल देने के प्रयासों में लग गया, लेकिन वह बुरा स्वाद बहुत देर तक मेरे मूँह में बना रहा और मुझे परेशान करता रहा। जो तब मेरे मूँह में गया, उससे मुझे कोई आनन्द तो कतई नहीं मिला, लेकिन अपने मूँह की रखवाली करना मैंने अवश्य सीख लिया।

   मूँह में जो जाता है हम उसके बारे में तो सचेत रहते हैं, और हमें रहना भी चाहिए, नहीं तो कोई हानिकारक पदार्थ हमारे अन्दर जा सकता है, लेकिन परमेश्वर का वचन बाइबल हमें बताती है कि जो मूँह से बाहर आता है, उसके प्रति हमें और भी अधिक सचेत रहना चाहिए। जब बाइबल में नीतिवचन के लेखक ने लिखा: "बुद्धिमान ज्ञान का ठीक बखान करते हैं, परन्तु मूर्खों के मुंह से मूढ़ता उबल आती है" (नीतिवचन 15:2), तो जो शब्द हिन्दी में ’उबल’ अनुवादित हुआ है उसका मूल भाषा में अर्थ है "प्रचण्ड वेग से बाहर आना"। मूँह से निकली बात वापस नहीं ली जा सकती और अविवेकपूर्ण दोषारोपण, क्रोध भरे शब्द, गाली बकना आदि मूँह से बाहर आने वाली वो बातें हैं जो बेहिसाब और जीवन भर के लिए हानि पहुँचा सकती हैं।

   प्रेरित पौलुस ने इसके बारे में बड़ी स्पष्टता से कहा: "कोई गन्‍दी बात तुम्हारे मुंह से न निकले, पर आवश्यकता के अनुसार वही जो उन्नति के लिये उत्तम हो, ताकि उस से सुनने वालों पर अनुग्रह हो" (इफिसियों 4:29)। इससे पहले वह कहता है कि कोई झूठ नहीं केवल सच मूँह से निकले (पद 25) और फिर इसके आगे कहता है, "सब प्रकार की कड़वाहट और प्रकोप और क्रोध, और कलह, और निन्‍दा सब बैरभाव समेत तुम से दूर की जाए" (इफिसियों 4:31), अर्थात किसी के चरित्र पर कोई लांछन ना लगाया जाए। जो भी हमारे मूँह से बाहर आए वह हितकर और प्रेरक होना चाहिए।

   जो हमारे मूँह में जाता है उसकी तो हम उसके अन्दर जाने से पहले भली-भांति जाँच परख करते हैं, और यह उचित भी है। लेकिन जो मूँह से बाहर आता है क्या उसके प्रति भी हम उतने ही चिंतित और परखने वाले रहते हैं जबकि बाहर आने वाले के प्रति तो हमें और भी अधिक कड़ा नियंत्रण रखना चाहिए। हमारे मसीही जीवन और गवाही तथा हमारे द्वारा हमारे तथा समस्त संसार के उद्धारकर्ता प्रभु यीशु की महिमा के लिए यह अनिवार्य है कि हम अपने मूँह से बाहर आने वाली बातों के प्रति अति संवेदनशील एवं सचेत रहें और बहुत नाप-तोल कर ही कोई बात मूँह से बाहर आने दें। - डेव एग्नर


अपने मन के विचारों के प्रति सावधान रहें - वे कभी भी शब्द बनकर मूँह से बाहर आ सकते हैं।

इस कारण झूठ बोलना छोड़कर हर एक अपने पड़ोसी से सच बोले, क्योंकि हम आपस में एक दूसरे के अंग हैं। - इफिसियों 4:25

बाइबल पाठ: नीतिवचन 15:1-7
Proverbs 15:1 कोमल उत्तर सुनने से जलजलाहट ठण्डी होती है, परन्तु कटुवचन से क्रोध धधक उठता है। 
Proverbs 15:2 बुद्धिमान ज्ञान का ठीक बखान करते हैं, परन्तु मूर्खों के मुंह से मूढ़ता उबल आती है। 
Proverbs 15:3 यहोवा की आंखें सब स्थानों में लगी रहती हैं, वह बुरे भले दोनों को देखती रहती हैं। 
Proverbs 15:4 शान्ति देने वाली बात जीवन-वृक्ष है, परन्तु उलट फेर की बात से आत्मा दु:खित होती है। 
Proverbs 15:5 मूढ़ अपने पिता की शिक्षा का तिरस्कार करता है, परन्तु जो डांट को मानता, वह चतुर हो जाता है। 
Proverbs 15:6 धर्मी के घर में बहुत धन रहता है, परन्तु दुष्ट के उपार्जन में दु:ख रहता है। 
Proverbs 15:7 बुद्धिमान लोग बातें करने से ज्ञान को फैलाते हैं, परन्तु मूर्खों का मन ठीक नहीं रहता।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 27-29 
  • तीतुस 3