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मंगलवार, 15 अप्रैल 2014

शांत और विश्राम से


   जब मेरे नेत्र विशेषज्ञ मुझे शांत होकर विश्राम करने का परामर्ष देते हैं तो मैं वैसा ही करती हूँ; मैं उन से बहस नहीं करती, उनकी अनाज्ञाकारी नहीं होती और उनके पीठ पीछे अपने आप को काम में व्यस्त नहीं कर लेती। क्यों? क्योंकि मैं जानती हूँ कि वे एक बहुत प्राख्यात नेत्र विशेज्ञ हैं, वे मेरी दृष्टि को बचाए रखने का प्रयास कर रहे हैं और इस कार्य में उन्हें मेरा पर्याप्त सहयोग चाहिए। उनके निर्देशों की अवहेलना कर के अपनी मन मर्ज़ी करना मेरे लिए मूर्खता होगी।

   तो, जब मैं शारीरिक बातों के लिए एक चिकित्सक के निर्देशों का पालन इतनी गंभीरता से करती हूँ तो आत्मिक बातों के लिए परमेश्वर के निर्देशों का पालन करने में आनाकानी क्यों करती हूँ? यदि मैं एक मनुष्य के कहने पर शांत होकर विश्राम करने को तैयार हो जाती हूँ जिससे मुझे लाभ हो सके तो परमेश्वर के कहने पर शांत होकर विश्राम करने को तैयार क्यों नहीं होती? जैसे शारीरिक स्वास्थ्य के लिए वैसे ही आत्मिक स्वास्थ्य के लिए भी शांत हो जाना और उचित विश्राम करना अति आवश्यक है। परमेश्वर ने विश्राम को इतना महत्व दिया है कि उसे जीवन की लय में पिरो दिया है। बिना पर्याप्त विश्राम के हम ठीक से कोई भी कार्य नहीं कर पाते, हमारी शक्ति क्षीण होने लगती है, हमारी गलतियाँ करने की प्रवृति बढ़ने लगती है। यही हमारे आत्मिक जीवन में भी होता है यदि हम कुछ थम के, शांत होकर, परमेश्वर के साथ बैठकर कुछ समय व्यतीत ना करें।

   जब परमेश्वर के नबी एलियाह ने दुष्ट राजा आहाब और उसकी पत्नि इज़ेबेल का सामना किया तो उस तनावपूर्ण संघर्ष के बाद वह थक गया। परमेश्वर ने उसकी सेवा करने के लिए अपना एक दूत भेजा, और शांत हो जाने के बाद एलियाह के पास परमेश्वर का वचन आया। उस समय उस तनाव की स्थिति में एलियाह को लग रहा था कि केवल वह ही परमेश्वर के प्रति वफादार है और उसके लिए कार्य कर रहा है। लेकिन परमेश्वर ने उसे बताया कि अभी उसके अलावा 7000 और लोग हैं जिन्होंने बाल देवता के आगे घुटने नहीं टेके हैं।

   हो सकता है कि हमें लगे कि यदि हम शांत होकर विश्राम करने लगेंगे तो फिर कैसे काम चलेगा; हमारे कार्य किए बिना क्या हो सकेगा? लेकिन वे यह भूल जाते हैं कि यदि वे शांत होकर विश्राम नहीं करेंगे तो उसका परिणाम क्या होगा? क्योंकि शारीरिक या आत्मिक रीति से थकित होकर तो हम कुछ भी सही नहीं कर सकते। जब हम शांत और विश्राम में होते हैं तब ही शरीर और आत्मा को स्वस्थ करने की क्रियाएं हमारे जीवनों में कार्य कर पाती हैं और हमें और अधिक कार्य के लिए तैयार तथा मज़बूत कर पाती हैं।

   जैसे मेरे लिए आवश्यक था कि मैं अपने नेत्र विशेषज्ञ की बात मानकर अपनी दृष्टि को ठीक रखने के लिए शांत और विश्राम में हो जाऊँ, वैसे ही हम सब को परमेश्वर की बात मानकर शांत और एकाग्र होकर उसके साथ समय बिताने की आवश्यकता है जिससे हमारे शरीर और मन स्वस्थ रहें। - जूली ऐकैअरमैन लिंक


हमारी सबसे बड़ी सामर्थ हमारा परमेशवर के सम्मुख शांत होकर खड़े रहना और उसपर भरोसा रखना ही है।

चुप हो जाओ, और जान लो, कि मैं ही परमेश्वर हूं। मैं जातियों में महान हूं, मैं पृथ्वी भर में महान हूं! - भजन 46:10

बाइबल पाठ: 1 राजा 19:1-18
1 Kings 19:1 तब अहाब ने ईज़ेबेल को एलिय्याह के सब काम विस्तार से बताए कि उसने सब नबियों को तलवार से किस प्रकार मार डाला। 
1 Kings 19:2 तब ईज़ेबेल ने एलिय्याह के पास एक दूत के द्वारा कहला भेजा, कि यदि मैं कल इसी समय तक तेरा प्राण उनका सा न कर डालूं तो देवता मेरे साथ वैसा ही वरन उस से भी अधिक करें। 
1 Kings 19:3 यह देख एलिय्याह अपना प्राण ले कर भागा, और यहूदा के बेर्शेबा को पहुंच कर अपने सेवक को वहीं छोड़ दिया। 
1 Kings 19:4 और आप जंगल में एक दिन के मार्ग पर जा कर एक झाऊ के पेड़ के तले बैठ गया, वहां उसने यह कह कर अपनी मृत्यु मांगी कि हे यहोवा बस है, अब मेरा प्राण ले ले, क्योंकि मैं अपने पुरखाओं से अच्छा नहीं हूँ। 
1 Kings 19:5 वह झाऊ के पेड़ तले लेटकर सो गया और देखो एक दूत ने उसे छूकर कहा, उठ कर खा। 
1 Kings 19:6 उसने दृष्टि कर के क्या देखा कि मेरे सिरहाने पत्थरों पर पकी हुई एक रोटी, और एक सुराही पानी धरा है; तब उसने खाया और पिया और फिर लेट गया। 
1 Kings 19:7 दूसरी बार यहोवा का दूत आया और उसे छूकर कहा, उठ कर खा, क्योंकि तुझे बहुत भारी यात्रा करनी है। 
1 Kings 19:8 तब उसने उठ कर खाया पिया; और उसी भोजन से बल पाकर चालीस दिन रात चलते चलते परमेश्वर के पर्वत होरेब को पहुंचा। 
1 Kings 19:9 वहां वह एक गुफा में जा कर टिका और यहोवा का यह वचन उसके पास पहुंचा, कि हे एलिय्याह तेरा यहां क्या काम? 
1 Kings 19:10 उन ने उत्तर दिया सेनाओं के परमेश्वर यहोवा के निमित्त मुझे बड़ी जलन हुई है, क्योकि इस्राएलियों ने तेरी वाचा टाल दी, तेरी वेदियों को गिरा दिया, और तेरे नबियों को तलवार से घात किया है, और मैं ही अकेला रह गया हूँ; और वे मेरे प्राणों के भी खोजी हैं। 
1 Kings 19:11 उसने कहा, निकलकर यहोवा के सम्मुख पर्वत पर खड़ा हो। और यहोवा पास से हो कर चला, और यहोवा के साम्हने एक बड़ी प्रचण्ड आन्धी से पहाड़ फटने और चट्टानें टूटने लगीं, तौभी यहोवा उस आन्धी में न था; फिर आन्धी के बाद भूंईडोल हूआ, तौभी यहोवा उस भूंईडोल में न था। 
1 Kings 19:12 फिर भूंईडोल के बाद आग दिखाई दी, तौभी यहोवा उस आग में न था; फिर आग के बाद एक दबा हुआ धीमा शब्द सुनाईं दिया।
1 Kings 19:13 यह सुनते ही एलिय्याह ने अपना मुंह चद्दर से ढांपा, और बाहर जा कर गुफा के द्वार पर खड़ा हुआ। फिर एक शब्द उसे सुनाईं दिया, कि हे एलिय्याह तेरा यहां क्या काम? 
1 Kings 19:14 उसने कहा, मुझे सेनाओं के परमेश्वर यहोवा के निमित्त बड़ी जलन हुई, क्योंकि इस्राएलियों ने तेरी वाचा टाल दी, और तेरी वेदियों को गिरा दिया है और तेरे नबियों को तलवार से घात किया है; और मैं ही अकेला रह गया हूँ; और वे मेरे प्राणों के भी खोजी हैं। 
1 Kings 19:15 यहोवा ने उस से कहा, लौटकर दमिश्क के जंगल को जा, और वहां पहुंचकर अराम का राजा होने के लिये हजाएल का, 
1 Kings 19:16 और इस्राएल का राजा होने को निमशी के पोते येहू का, और अपने स्थान पर नबी होने के लिये आबेलमहोला के शापात के पुत्र एलीशा का अभिषेक करना। 
1 Kings 19:17 और हजाएल की तलवार से जो कोई बच जाए उसको येहू मार डालेगा; और जो कोई येहू की तलवार से बच जाए उसको एलीशा मार डालेगा। 
1 Kings 19:18 तौभी मैं सात हजार इस्राएलियों को बचा रखूंगा। ये तो वे सब हैं, जिन्होंने न तो बाल के आगे घुटने टेके, और न मुंह से उसे चूमा है। 

एक साल में बाइबल: 
  • 1 इतिहास 4-6


सोमवार, 14 अप्रैल 2014

एक साथ


   वर्षों से वैज्ञानिक चकित थे कि चीटींयों की एक प्रजाति, जिनके शरीर पानी से भारी होते हैं, बाढ़ में बचे कैसे रह जाते हैं जबकि सामान्य ज्ञान के अनुसार उन्हें डूब कर नष्ट हो जाना चाहिए। कैसे उन चीटींयों का पूरा झुण्ड अपने आप को तैरता हुआ बेड़ा बनाकर हफतों तक तैरता रह सकता है? लॉस एन्जलैस टाइम्स अखबार के एक लेख में बताया गया कि जौर्जिया तकनीकी संस्थान के इन्जीनियरों ने इस बात का भेद पता लगा लिया है, और बताया कि यह कैसे होता है कि अलग अलग हुई वे चीटींयाँ पानी में तैरते रहने के लिए संघर्ष करती हैं लेकिन एक झुण्ड में वे आसानी से तैर लेती हैं। उन इन्जीनियरों ने अपने अध्ययन में पाया कि उन चीटींयों के शरीर पर बारीक रोएं होते हैं जिनमें हवा के बुलबुले फंस जाते हैं और जब चीटींयाँ एक झुण्ड में आपस में चिपकी हुई होती हैं तो उन सबके बीच में फंसी वह हवा उन्हें तैरता रखना के लिए पर्याप्त होती है।

   परमेश्वर के वचन बाइबल के नए नियम खण्ड में अनेक बार यह कहा गया है कि मसीही विश्वासियों को बचे रहने तथा आत्मिक जीवन में बढ़ते रहने के लिए एक दूसरे के साथ जुड़े और गुंथे हुए रहना चाहिए। इफिसुस की मण्डली को लिखी अपनी पत्री में प्रेरित पौलुस कहता है: "वरन प्रेम में सच्चाई से चलते हुए, सब बातों में उस में जो सिर है, अर्थात मसीह में बढ़ते जाएं। जिस से सारी देह हर एक जोड़ की सहायता से एक साथ मिलकर, और एक साथ गठकर उस प्रभाव के अनुसार जो हर एक भाग के परिमाण से उस में होता है, अपने आप को बढ़ाती है, कि वह प्रेम में उन्नति करती जाए" (इफीसियों 4:15-16)। पौलुस ने रोमियों के विश्वासियों को लिखे अपने पत्र में उन्हें लिखा, "क्योंकि जैसे हमारी एक देह में बहुत से अंग हैं, और सब अंगों का एक ही सा काम नहीं। वैसा ही हम जो बहुत हैं, मसीह में एक देह हो कर आपस में एक दूसरे के अंग हैं" (रोमियों 12:4-5)।

   इब्रानियों की पत्री का लेखक लिखता है, "और एक दूसरे के साथ इकट्ठा होना ने छोड़ें, जैसे कि कितनों की रीति है, पर एक दूसरे को समझाते रहें; और ज्यों ज्यों उस दिन को निकट आते देखो, त्यों त्यों और भी अधिक यह किया करो" (इब्रानियों 10:25)। प्रभु यीशु ने हम मसीही विश्वासियों को साथ रहने और साथ बढ़ने के लिए ठहराया है; अलग अलग रहने से हम ना तो उन्नति कर पाएंगे और ना ही सुरक्षित रहने पाएंगे, वरन संसार की बातों की बाढ़ में डूब जाने के खतरे में बने रहेंगे। प्रभु में होकर तथा एक साथ रहकर हम हर तूफान का सामना सफलता से कर सकेंगे। समझदारी एक साथ बने रहने में ही है। - डेविड मैक्कैसलैंड


मसीही विश्वासी जब एक साथ खड़े रहते हैं तब मज़बूत बने रहते हैं।

और वे प्रेरितों से शिक्षा पाने, और संगति रखने में और रोटी तोड़ने में और प्रार्थना करने में लौलीन रहे। - प्रेरितों 2:42

बाइबल पाठ: इफीसियों 4:1-16
Ephesians 4:1 सो मैं जो प्रभु में बन्‍धुआ हूं तुम से बिनती करता हूं, कि जिस बुलाहट से तुम बुलाए गए थे, उसके योग्य चाल चलो। 
Ephesians 4:2 अर्थात सारी दीनता और नम्रता सहित, और धीरज धरकर प्रेम से एक दूसरे की सह लो। 
Ephesians 4:3 और मेल के बन्ध में आत्मा की एकता रखने का यत्‍न करो। 
Ephesians 4:4 एक ही देह है, और एक ही आत्मा; जैसे तुम्हें जो बुलाए गए थे अपने बुलाए जाने से एक ही आशा है। 
Ephesians 4:5 एक ही प्रभु है, एक ही विश्वास, एक ही बपतिस्मा। 
Ephesians 4:6 और सब का एक ही परमेश्वर और पिता है, जो सब के ऊपर और सब के मध्य में, और सब में है। 
Ephesians 4:7 पर हम में से हर एक को मसीह के दान के परिमाण से अनुग्रह मिला है। 
Ephesians 4:8 इसलिये वह कहता है, कि वह ऊंचे पर चढ़ा, और बन्‍धुवाई को बान्‍ध ले गया, और मनुष्यों को दान दिए। 
Ephesians 4:9 (उसके चढ़ने से, और क्या पाया जाता है केवल यह, कि वह पृथ्वी की निचली जगहों में उतरा भी था। 
Ephesians 4:10 और जो उतर गया यह वही है जो सारे आकाश से ऊपर चढ़ भी गया, कि सब कुछ परिपूर्ण करे)। 
Ephesians 4:11 और उसने कितनों को भविष्यद्वक्ता नियुक्त कर के, और कितनों को सुसमाचार सुनाने वाले नियुक्त कर के, और कितनों को रखवाले और उपदेशक नियुक्त कर के दे दिया। 
Ephesians 4:12 जिस से पवित्र लोग सिद्ध हों जाएं, और सेवा का काम किया जाए, और मसीह की देह उन्नति पाए। 
Ephesians 4:13 जब तक कि हम सब के सब विश्वास, और परमेश्वर के पुत्र की पहिचान में एक न हो जाएं, और एक सिद्ध मनुष्य न बन जाएं और मसीह के पूरे डील डौल तक न बढ़ जाएं। 
Ephesians 4:14 ताकि हम आगे को बालक न रहें, जो मनुष्यों की ठग-विद्या और चतुराई से उन के भ्रम की युक्तियों की, और उपदेश की, हर एक बयार से उछाले, और इधर-उधर घुमाए जाते हों। 
Ephesians 4:15 वरन प्रेम में सच्चाई से चलते हुए, सब बातों में उस में जो सिर है, अर्थात मसीह में बढ़ते जाएं। 
Ephesians 4:16 जिस से सारी देह हर एक जोड़ की सहायता से एक साथ मिलकर, और एक साथ गठकर उस प्रभाव के अनुसार जो हर एक भाग के परिमाण से उस में होता है, अपने आप को बढ़ाती है, कि वह प्रेम में उन्नति करती जाए।

एक साल में बाइबल: 
  • 1 इतिहास 1-3


रविवार, 13 अप्रैल 2014

परिवर्तन


   कहा जाता है कि लोग परिवर्तन को नापस्न्द करते हैं। लेकिन वास्तविकता यह है कि हम उस ही परिवर्तन को नापसन्द करते हैं जिस के बारे में हम सोचते हैं कि उससे कोई कष्ट या हानि होगी। उदाहरणस्वरूप, यदि बेहतर पगार और अधिक प्रभाव रखने वाली नौकरी हमें मिल रही हो तो हम सहर्ष उसे स्वीकार कर लेंगे, और संबंधित परिवर्तनों से होने वाली असुविधा को झेलने में कोई आनाकानी नहीं करेंगे; यदि हमें और बेहतर पड़ौस तथा बड़ा मकान आसान शर्तों पर रहने को मिल रहा हो तो हमें घर बदलने में कोई आपत्ति नहीं होती। कहने का तात्पर्य है कि हम परवर्तन से नहीं परिवर्तन से होने वाले संभावित हानि से डरते हैं, चाहे वह हानि शारीरिक हो, मनोवैज्ञानिक हो अथवा भावनात्मक हो।

   लेकिन परिवर्तन जीवन में अवश्यंभावी भी है और आवश्यक भी। यदि सब कुछ सदा वैसे का वैसा ही रहे तो इसका अर्थ है कि कुछ उन्नति नहीं हो रही है। लेकिन हम मसीही विश्वासियों के पास एक चरवाहा है - प्रभु यीशु, जो हमें हर परिवर्तन में मार्गदर्शन देता है और सदा ही बेहतर स्थानों पर लेकर चलता है। जैसे इस्त्राएलियों के साथ हुआ था, वाचा किए हुए उस नए और बेहतर स्थान तक पहुँचना, अविश्वास और ढिठाई के कारण कठिन भी हो सकता है। मिस्त्र की गुलामी से निकालकर जब परमेश्वर इस्त्राएलियों को वाचा किए हुए कनान देश को लेकर चला तो वे परिस्थितियों को देखकर परमेश्वर के विरुद्ध कुड़कुड़ाए (निर्गमन 15:24; गिनती 14:2) और उन्हें अपनी यात्रा में अनेक कठिनाईयों और दुखों का सामना करना पड़ा।

   इसके विपरीत प्रभु यीशु का उदाहरण है जो एक ही सप्ताह के अन्दर लोगों का अगुवा होने से, सब के द्वारा तिरिस्कृत होने वाला हो गया। वह अच्छा चरवाहा फसह के बलिदान का मेमना बन गया। लेकिन क्योंकि प्रभु यीशु ने परमेश्वर की आज्ञाकारिता में स्वेच्छा से सब दुख सह लिया, परमेश्वर ने भी उसे सब से शिरोमणि कर दिया (यूहन्ना 10:11; फिलिप्पियों 2:8-9)।

   हर परिवर्तन सुखद हो यह आनिवार्य नहीं, लेकिन उस परिवर्तन के लिए जब हमारा मार्गदर्शक वह हो जो हमसे बेहद प्रेम रखता है और सदा हमारा भला ही चाहता है, तो फिर हमें परिवर्तन से डरने की आवश्यकता नहीं है। अपने आप को विश्वास के साथ अपने अच्छे चरवाहे के हाथों में छोड़ दें, वह जो भी करेगा आपकी भलाई के लिए ही करेगा। - जूली ऐकैरमैन लिंक


प्रभु यीशु मसीह में विश्वास परिवर्तन के तूफानी समुद्र में भी हमें स्थिर रखेगा।

और मनुष्य के रूप में प्रगट हो कर अपने आप को दीन किया, और यहां तक आज्ञाकारी रहा, कि मृत्यु, हां, क्रूस की मृत्यु भी सह ली। इस कारण परमेश्वर ने उसको अति महान भी किया, और उसको वह नाम दिया जो सब नामों में श्रेष्ठ है। कि जो स्वर्ग में और पृथ्वी पर और जो पृथ्वी के नीचे है; वे सब यीशु के नाम पर घुटना टेकें। - फिलिप्पियों 2:8-10

बाइबल पाठ: यूहन्ना 10:7-18
John 10:7 तब यीशु ने उन से फिर कहा, मैं तुम से सच सच कहता हूं, कि भेड़ों का द्वार मैं हूं। 
John 10:8 जितने मुझ से पहिले आए; वे सब चोर और डाकू हैं परन्तु भेड़ों ने उन की न सुनी। 
John 10:9 द्वार मैं हूं: यदि कोई मेरे द्वारा भीतर प्रवेश करे तो उद्धार पाएगा और भीतर बाहर आया जाया करेगा और चारा पाएगा। 
John 10:10 चोर किसी और काम के लिये नहीं परन्तु केवल चोरी करने और घात करने और नष्‍ट करने को आता है। मैं इसलिये आया कि वे जीवन पाएं, और बहुतायत से पाएं। 
John 10:11 अच्छा चरवाहा मैं हूं; अच्छा चरवाहा भेड़ों के लिये अपना प्राण देता है। 
John 10:12 मजदूर जो न चरवाहा है, और न भेड़ों का मालिक है, भेड़िए को आते हुए देख, भेड़ों को छोड़कर भाग जाता है, और भेड़िय़ा उन्हें पकड़ता और तित्तर बित्तर कर देता है। 
John 10:13 वह इसलिये भाग जाता है कि वह मजदूर है, और उसको भेड़ों की चिन्‍ता नहीं। 
John 10:14 अच्छा चरवाहा मैं हूं; जिस तरह पिता मुझे जानता है, और मैं पिता को जानता हूं। 
John 10:15 इसी तरह मैं अपनी भेड़ों को जानता हूं, और मेरी भेड़ें मुझे जानती हैं, और मैं भेड़ों के लिये अपना प्राण देता हूं। 
John 10:16 और मेरी और भी भेड़ें हैं, जो इस भेड़शाला की नहीं; मुझे उन का भी लाना अवश्य है, वे मेरा शब्द सुनेंगी; तब एक ही झुण्ड और एक ही चरवाहा होगा। 
John 10:17 पिता इसलिये मुझ से प्रेम रखता है, कि मैं अपना प्राण देता हूं, कि उसे फिर ले लूं। 
John 10:18 कोई उसे मुझ से छीनता नहीं, वरन मैं उसे आप ही देता हूं: मुझे उसके देने का अधिकार है, और उसे फिर लेने का भी अधिकार है: यह आज्ञा मेरे पिता से मुझे मिली है।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 राजा 23-25


शनिवार, 12 अप्रैल 2014

वचन का मनन


   मेरी आँखें हड़बड़ाकर खुल गईं, लेकिन मेरा कमरा तो अभी अन्धेरा ही था; यह जानकर कि अभी उठना काफी जलदी होगा, मैंने लंबी सांस ली, अपने तकिए को ठीक किया और फिर से सोने का प्रयास करने लगी। लेकिन दुर्भाग्यवश आते दिन में करने के लिए रखे हुए कार्यों की एक लंबी सूची मुझे परेशान करने लगी और मैं फिर सो नहीं पाई।

   यदि कभी आप कार्यों की अधिकाई से अभिभूत हुए हैं, अपने आप को दबाव में अनुभव किया है, तो आप मेरी स्थिति को समझ पाएंगे; आप समझ पाएंगे कि कितना परेशान करना वाला होता है खुली आँखों से अन्धेरी छत की ओर ताकते रहना जबकि उस समय आपको गहरी नींद में होना चाहिए। परमेश्वर के वचन बाइबल में भजन 119 का लेखक भी इस अनुभव से अनजान नहीं था, इसीलिए उसने लिखा: "मैं ने पौ फटने से पहिले दोहाई दी; मेरी आशा तेरे वचनों पर थी" (भजन 119:147)।

   भजनकार की निद्राविहीन रातों में परमेश्वर का वचन उसकी सांत्वना का माध्यम था। चाहे वह नींद उड़ा देने वाली अपनी समस्या को दूर नहीं भी कर सका, लेकिन फिर भी वह कहता है: "मेरी आंखें रात के एक एक पहर से पहिले खुल गईं, कि मैं तेरे वचन पर ध्यान करूं" (भजन 119:148)। ऐसी विनिद्र रातों में वह अपनी समस्याओं पर नहीं वरन परमेश्वर के वचन पर मनन करता था। अपनी इस आदत के कारण ही वह कह सका, "अहा! मैं तेरी व्यवस्था में कैसी प्रीति रखता हूं! दिन भर मेरा ध्यान उसी पर लगा रहता है" (भजन 119:97)।

   जब चिंताएं आपको सताएं तो स्मरण रखें, "क्योंकि परमेश्वर का वचन जीवित, और प्रबल, और हर एक दोधारी तलवार से भी बहुत चोखा है, और जीव, और आत्मा को, और गांठ गांठ, और गूदे गूदे को अलग कर के, वार पार छेदता है; और मन की भावनाओं और विचारों को जांचता है" (इब्रानियों 4:12), इसलिए बाइबल का कोई खण्ड लेकर उस पर मनन करना आरंभ कर दें। हमारी कोई भी चिंता परमेश्वर के वचन के आगे टिक नहीं सकती। - जेनिफर बेन्सन शुल्ट


केवल परमेश्वर ही हमारे हृदयों को स्थिर और मस्तिष्क को शांत कर सकता है।

पहरूए जितना भोर को चाहते हैं, हां, पहरूए जितना भोर को चाहते हैं, उस से भी अधिक मैं यहोवा को अपने प्राणों से चाहता हूं। - भजन 130:6

बाइबल पाठ: भजन 119:145-152
Psalms 119:145 मैं ने सारे मन से प्रार्थना की है, हे यहोवा मेरी सुन लेना! मैं तेरी विधियों को पकड़े रहूंगा। 
Psalms 119:146 मैं ने तुझ से प्रार्थना की है, तू मेरा उद्धार कर, और मैं तेरी चितौनियों को माना करूंगा। 
Psalms 119:147 मैं ने पौ फटने से पहिले दोहाई दी; मेरी आशा तेरे वचनों पर थी। 
Psalms 119:148 मेरी आंखें रात के एक एक पहर से पहिले खुल गईं, कि मैं तेरे वचन पर ध्यान करूं। 
Psalms 119:149 अपनी करूणा के अनुसार मेरी सुन ले; हे यहोवा, अपनी रीति के अनुसार मुझे जीवित कर। 
Psalms 119:150 जो दुष्टता में धुन लगाते हैं, वे निकट आ गए हैं; वे तेरी व्यवस्था से दूर हैं। 
Psalms 119:151 हे यहोवा, तू निकट है, और तेरी सब आज्ञाएं सत्य हैं। 
Psalms 119:152 बहुत काल से मैं तेरी चितौनियों को जानता हूं, कि तू ने उनकी नेव सदा के लिये डाली है।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 राजा 21-22


शुक्रवार, 11 अप्रैल 2014

खुले द्वार


   डेनमार्क के दार्शनिक सोरेन कर्कगार्ड (1813-1855) ने लिखा था: "यदि मुझे किसी एक वस्तु की इच्छा करने का अवसर होता तो मैं दौलत, ताकत आदि की इच्छा नहीं करता, वरन एक ऐसे दृष्टिकोण की जो संभावनाओं को देखने और पहचानने के लिए सदा तत्पर और तैयार रहे।"

   परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस भी अपने जीवन में मसीही सेवकाई के अवसरों के प्रति सदा सचेत बना रहता था। उसे जब जहाँ अवसर मिलता था वह मसीह यीशु में विश्वास के द्वारा पाप से क्षमा और उद्धार का सुसमाचार देता था। जब उसे बन्दी बनाकर राज्यपाल फेलिक्स के सामने लाया गया, उसने फेलिक्स के सामने सुसमाचार सुनाया (प्रेरितों 24:24)। जब वह सिलास के साथ बन्दीगृह में डाला गया, उन्होंने बन्दियों और जेलर को सुसमाचार सुनाया (फिलिप्पियों 16:25-34) और बाद में जब पौलुस को रोम में बन्दी बना कर भेजा गया तो उसने वहाँ भी सुसमाचार सुनाया और वहाँ से पत्रियाँ लिखकर मसीही विश्वासियों की मण्डलियों के लोगों को मसीह यीशु के लिए कार्यरत रहने के लिए उभारा (फिलिप्पियों 1:12-18)।

   कुरिन्थुस की मण्डली को लिखे अपने पत्र में पौलुस ने लिखा कि वह उसकी इच्छा तो है कि उनके पास आकर कुछ समय उनके साथ बिताए, लेकिन इफसुस में मिले सेवकाई के एक अवसर के कारण अभी उसका इफसुस में रहना अधिक आवश्यक है: "परन्तु मैं पेन्‍तिकुस्‍त तक इफिसुस में रहूंगा। क्योंकि मेरे लिये एक बड़ा और उपयोगी द्वार खुला है, और विरोधी बहुत से हैं" (1 कुरिन्थियों 16:8-9)। पौलुस ने अपनी मसीही सेवकाई में औरों को भी उनकी प्रार्थनाओं के द्वारा संभागी कर लिया, क्योंकि वह उनसे निवेदन करता था कि वे उसके लिए प्रार्थना करें जिससे वह मसीह के सुसमाचार को स्पष्टता से बता सके (कुलुस्सियों 4:3)।

   परमेश्वर से प्रार्थना करें कि वह आपको मसीही सेवकाई के लिए खुले द्वार दिखाए। जो आप देखने पाएंगे वह आपको भी चकित कर देगा। - डेनिस फिशर


परमेश्वर द्वार के एक ओर ’अवसर’ लिखता है और दूसरी ’उत्तरदायित्व’।

और इस के साथ ही साथ हमारे लिये भी प्रार्थना करते रहो, कि परमेश्वर हमारे लिये वचन सुनाने का ऐसा द्वार खोल दे, कि हम मसीह के उस भेद का वर्णन कर सकें जिस के कारण मैं कैद में हूं। - कुलुस्सियों 4:3 

बाइबल पाठ: 1 कुरिन्थियों 16:1-12
1 Corinthians 16:1 अब उस चन्‍दे के विषय में जो पवित्र लोगों के लिये किया जाता है, जैसी आज्ञा मैं ने गलतिया की कलीसियाओं को दी, वैसा ही तुम भी करो। 
1 Corinthians 16:2 सप्‍ताह के पहिले दिन तुम में से हर एक अपनी आमदनी के अनुसार कुछ अपने पास रख छोड़ा करे, कि मेरे आने पर चन्‍दा न करना पड़े। 
1 Corinthians 16:3 और जब मैं आऊंगा, तो जिन्हें तुम चाहोगे उन्हें मैं चिट्ठियां देकर भेज दूंगा, कि तुम्हारा दान यरूशलेम पहुंचा दें। 
1 Corinthians 16:4 और यदि मेरा भी जाना उचित हुआ, तो वे मेरे साथ जाएंगे। 
1 Corinthians 16:5 और मैं मकिदुनिया हो कर तुम्हारे पास आऊंगा क्योंकि मुझे मकिदूनिया हो कर तो जाना ही है। 
1 Corinthians 16:6 परन्तु सम्भव है कि तुम्हारे यहां ही ठहर जाऊं और शरद ऋतु तुम्हारे यंहा काटूं, तब जिस ओर मेरा जाना हो, उस ओर तुम मुझे पहुंचा दो। 
1 Corinthians 16:7 क्योंकि मैं अब मार्ग में तुम से भेंट करना नहीं चाहता; परन्तु मुझे आशा है, कि यदि प्रभु चाहे तो कुछ समय तक तुम्हारे साथ रहूंगा। 
1 Corinthians 16:8 परन्तु मैं पेन्‍तिकुस्‍त तक इफिसुस में रहूंगा। 
1 Corinthians 16:9 क्योंकि मेरे लिये एक बड़ा और उपयोगी द्वार खुला है, और विरोधी बहुत से हैं।
1 Corinthians 16:10 यदि तीमुथियुस आ जाए, तो देखना, कि वह तुम्हारे यहां निडर रहे; क्योंकि वह मेरी नाईं प्रभु का काम करता है। 
1 Corinthians 16:11 इसलिये कोई उसे तुच्‍छ न जाने, परन्तु उसे कुशल से इस ओर पहुंचा देना, कि मेरे पास आ जाए; क्योंकि मैं उस की बाट जोह रहा हूं, कि वह भाइयों के साथ आए। 
1 Corinthians 16:12 और भाई अपुल्लोस से मैं ने बहुत बिनती की है कि तुम्हारे पास भाइयों के साथ जाए; परन्तु उसने इस समय जाने की कुछ भी इच्छा न की, परन्तु जब अवसर पाएगा, तब आ जाएगा।

एक साल में बाइबल: 2 राजा 18-20

गुरुवार, 10 अप्रैल 2014

नम्र व्यवहार


   बॉस्टन के भीड़-भाड़ वाले इलाके के मार्ग की एक सुरंग में मेरी कार खराब होकर रुक गई। मेरे अगल बगल से बच कर निकलते हुए अन्य कार चालक उन्हें हो रही असुविधा के कारण अपने क्रोध और कुण्ठा को व्यक्त करते हुए निकलने लगे। कुछ समय पश्चात कार ठीक करने वालों ने अपनी गाड़ी भेजकर मेरी गाड़ी खींचकर मरम्मत के लिए मंगा ली, और कार को ठीक कर के मुझे वापस सौंप दिया। कुछ दिन के बाद कार फिर खराब हो गई और मुझे अन्तर्राज्य राजमार्ग पर रात के दो बजे फिर फंसा दिया। मैंने फिर से गाड़ी मंगाई, जो आई और कार को खींचकर मरम्मत के लिए ले गई। लेकिन अब की बार कुछ और बात साथ हो गई - मेरे दुर्भाग्यवश मरम्मत की दुकान द्वारा प्रयोग करे जाने वाला कार खड़ी करने का स्थान, स्थानीय बेसबॉल टीम के खेलने के समय सार्वजनिक कार खड़े करने के स्थान के रूप में भी प्रयोग होता था। जिस दिन मुझे कार वापस मिलनी थी वह उस टीम के खेलने का दिन था; इसलिए जब मैं संध्या को अपना कार्य समाप्त करके अपनी कार को लेने के लिए पहुँचा तो मुझे मेरी कार 30 अन्य कारों से घिरी खड़ी मिली, जहाँ से बाहर निकल पाना संभव नहीं था!

   यह देखकर मैंने क्या किया? बस यूँ समझ लीजिए कि मेरी प्रतिक्रिया मसीही चरित्र के अनुसार नहीं थी। मैं भी वापस मरम्मत की दुकान पर पहुँच कर अन्य लोगों के समान ही चिल्लाने और भला-बुरा कहने लगा। यह करते हुए थोड़ी देर में मुझे एहसास हुआ कि मेरे ऐसा करने से वहाँ उपस्थित मरम्मत करने वाले कर्मचारियों का रवैया, जो स्वयं भी अब दिन की समाप्ति पर अपने अपने घरों को लौटकर जाने की तैयारी में थे, मेरे प्रति और उदासीन तथा सहायता ना करने वाला होता जा रहा था। मैं स्वयं ही अपनी सहायता करने के उद्देश्य से खिसिया हुआ, पैर पटकता हुआ दुकान के बन्द दरवाज़े पर पहुँचा और उन्हें हिला हिला कर खोलने का असफल प्रयास करने लगा। असफलता से मेरा क्रोध और भी बढ़ गया था, और मेरे क्रोध, खिसियाहट और असफलता को देखकर वे कर्मचारी हंसने लगे, मेरा ठट्टा करने लगे।

   कुण्ठित और क्रोधित मैं वापस मुड़कर बाहर की ओर चला ही था कि मुझे यह एहसास हुआ कि मैंने मसीही चरित्र से कितना विपरीत व्यवहार किया है। अपने इस व्यवहार से शर्मिंदा होकर मैं लौट कर उन कर्मचारियों के पास आया और उनसे बोला, "मैं शर्मिंदा हूँ, कृप्या मुझे क्षमा कर दीजिए"। मेरी यह बात सुनकर वे अवाक रह गए; उन्होंने वे बन्द दरवाज़े मेरे लिए खोल दिए और मुझे अन्दर आ लेने दिया। मैंने नम्र होकर उनसे कहा कि एक मसीही विश्वासी होने के नाते मुझे ऐसा अभद्र व्यवहार नहीं करना चाहिए था; यह उनके लिए और भी अचरज की बात थी। कुछ ही मिनिटों में वे सब मिलकर मेरे लिए मेरी कार के चारों तरफ खड़ी अन्य कारों को हटाने लगे, और कुछ ही समय में मुझे अपनी कार निकाल कर ले जाने का रास्ता मिल गया।

   मैंने एक महत्वपूर्ण सबक सीख लिया था, चिड़चिड़े और क्रोधित व्यवहार की अपेक्षा नम्र व्यवहार अधिक कारगर होता है और परिस्थितियों को अनुकूल बनाने में सहायक होता है। - रैंडी किल्गोर


नम्र व्यवहार कठोर हृदय को तोड़ने का माध्यम बन जाता है।

विरोध या झूठी बड़ाई के लिये कुछ न करो पर दीनता से एक दूसरे को अपने से अच्छा समझो। हर एक अपनी ही हित की नहीं, वरन दूसरों की हित की भी चिन्‍ता करे। जैसा मसीह यीशु का स्‍वभाव था वैसा ही तुम्हारा भी स्‍वभाव हो। - फिलिप्पियों 2:3-5

बाइबल पाठ: नीतिवचन 15:1-5
Proverbs 15:1 कोमल उत्तर सुनने से जलजलाहट ठण्डी होती है, परन्तु कटुवचन से क्रोध धधक उठता है। 
Proverbs 15:2 बुद्धिमान ज्ञान का ठीक बखान करते हैं, परन्तु मूर्खों के मुंह से मूढ़ता उबल आती है। 
Proverbs 15:3 यहोवा की आंखें सब स्थानों में लगी रहती हैं, वह बुरे भले दोनों को देखती रहती हैं। 
Proverbs 15:4 शान्ति देने वाली बात जीवन-वृक्ष है, परन्तु उलट फेर की बात से आत्मा दु:खित होती है। 
Proverbs 15:5 मूढ़ अपने पिता की शिक्षा का तिरस्कार करता है, परन्तु जो डांट को मानता, वह चतुर हो जाता है।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 राजा 15-17


बुधवार, 9 अप्रैल 2014

निरंतर प्रयासरत


   मेरे पति ने जब हमारे घर के सामने वाले बरामदे के ऊपर छत डाली तो उन्होंने आशा रखी कि कसी दिन कोई पक्षी वहाँ अपना घोंसला बनाएगा, इसलिए उन्होंने उसके लिए कोने के खम्बे के पास थोड़ी सी तिरछी जगह छोड़ दी। बाद में हमें यह देखकर बड़ी हंसी आई कि कुछ रौबिन चिड़ियाँ उस स्थान पर बैठने के लिए आपस में लड़ रही हैं। एक चिड़िया घोंसला बनाने के लिए कुछ तिनके लाती और वहाँ रखती लेकिन उनकी आपसी लड़ाई के कारण वे तिरछे स्थान से फिसल कर नीचे गिर जाते। खम्बे के नीचे तिनकों और घास-फूस के ढेर लगने लगे लेकिन घोंसला किसी का भी नहीं बन पा रहा था। फिर कुछ दिन तक बारिश आती रही, और हमने देखा कि एक घोंसला बन ही गया। घोंसला बनाने वाली मादा रौबिन ने गीली मिट्टी और घास को मिलाकर घोंसला बनाना आरंभ किया, जो उस तिरछे स्थान पर चिपक गया, गिरा नहीं, और उसे वहाँ रहने का वह स्थान मिल गया। उस चिड़िया के निरंतर प्रयासरत रहने ने उसे परिस्थिति पर विजयी बना दिया।

   निरंतर प्रयासरत रहने की यह भावना प्रेर्णादायक होती है और मसीही विश्वास के जीवन के लिए बहुत आवश्यक है। मसीह को आदर देने वाला जीवन जीने के प्रयास में हमें अवश्य ही कठिनाईयों का सामना करना पड़ता है जो हमें कुँठित और निराश बना सकता है। लेकिन जब हम अपनी सामर्थ पर नहीं वरन परमेश्वर पर भरोसा रखकर उन कठिनाईयों का सामना करते हैं, तो हमें आगे बढते रहने की प्रेर्णा मिलती रहती है, चाहे हमारी कठिनाईयों का समाधान हमें दिखाई ना भी दे। परमेश्वर के वचन बाइबल में लिखा है, "हम भले काम करने में हियाव न छोड़े, क्योंकि यदि हम ढीले न हों, तो ठीक समय पर कटनी काटेंगे" (गलतियों 6:9)।

   क्या हमारा प्रेमी परमेश्वर पिता कुछ असंभव प्रतीत होने वाली परिस्थितियों के द्वारा आपको जीवन में निरंतर प्रयासरत बने रहने का पाठ सिखाने का प्रयास कर रहा है? निढाल होकर पीछे ना हटें, प्रयासरत रहें, क्योंकि परमेश्वर उन परिस्थितियों के द्वारा आप में चरित्र और उस चरित्र द्वारा आशा उत्पन्न कर रहा है (रोमियों 5:3-4)। - सिंडी हैस कैसपर


जब संसार कहता है, "हार मान लो" तब आशा कहती है, "एक बार और प्रयास करो"।

हे मेरे भाइयों, जब तुम नाना प्रकार की परीक्षाओं में पड़ो तो इसको पूरे आनन्द की बात समझो, यह जान कर, कि तुम्हारे विश्वास के परखे जाने से धीरज उत्पन्न होता है। पर धीरज को अपना पूरा काम करने दो, कि तुम पूरे और सिद्ध हो जाओ और तुम में किसी बात की घटी न रहे। याकूब 1:2-4

बाइबल पाठ: रोमियों 5:1-8
Romans 5:1 ​सो जब हम विश्वास से धर्मी ठहरे, तो अपने प्रभु यीशु मसीह के द्वारा परमेश्वर के साथ मेल रखें। 
Romans 5:2 जिस के द्वारा विश्वास के कारण उस अनुग्रह तक, जिस में हम बने हैं, हमारी पहुंच भी हुई, और परमेश्वर की महिमा की आशा पर घमण्ड करें। 
Romans 5:3 केवल यही नहीं, वरन हम क्लेशों में भी घमण्ड करें, यही जानकर कि क्लेश से धीरज। 
Romans 5:4 ओर धीरज से खरा निकलना, और खरे निकलने से आशा उत्पन्न होती है। 
Romans 5:5 और आशा से लज्ज़ा नहीं होती, क्योंकि पवित्र आत्मा जो हमें दिया गया है उसके द्वारा परमेश्वर का प्रेम हमारे मन में डाला गया है। 
Romans 5:6 क्योंकि जब हम निर्बल ही थे, तो मसीह ठीक समय पर भक्तिहीनों के लिये मरा। 
Romans 5:7 किसी धर्मी जन के लिये कोई मरे, यह तो र्दुलभ है, परन्तु क्या जाने किसी भले मनुष्य के लिये कोई मरने का भी हियाव करे। 
Romans 5:8 परन्तु परमेश्वर हम पर अपने प्रेम की भलाई इस रीति से प्रगट करता है, कि जब हम पापी ही थे तभी मसीह हमारे लिये मरा।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 राजा 11-14