ई-मेल संपर्क / E-Mail Contact

इन संदेशों को ई-मेल से प्राप्त करने के लिए अपना ई-मेल पता इस ई-मेल पर भेजें : rozkiroti@gmail.com / To Receive these messages by e-mail, please send your e-mail id to: rozkiroti@gmail.com

सोमवार, 28 जुलाई 2014

सृष्टि


   एक खगोल शास्त्री ने अन्दाज़ा लगाया कि करोड़ों वर्ष पहले मंगल ग्रह से जीवाणु पृथ्वी पर आ गिरे, और उन जीवाणुओं के क्रमिक विकास द्वारा ही धरती तरह तरह के प्राणियों से भर गई है। विज्ञान पर भरोसा रखने वाले अनेक लोग पृथ्वी पर जीवन के आरंभ का कारण दूरस्त अंतरिक्ष में खोज रहे हैं, वे तरह तरह के अन्दाज़े लगाते हैं, मत प्रतिपादित करते हैं किंतु आज तक भी यह नहीं जान पाए कि पृथ्वी पर जीवन कैसे आरंभ हुआ क्योंकि वे परमेश्वर के वचन बाइबल में स्पष्ट लिखित बात को मानने से इंकार करते हैं कि परमेश्वर ने ही हर प्रकार के जीव जन्तु और मानव की सृष्टि की और उन्हें पृथ्वी पर रखा है।

   ये लोग यह तो मानने को तैयार हैं कि किसी भी रीति से जीवन को ना संभाल सकने वाले मंगल ग्रह पर जीवन आरंभ हुआ और वहाँ तो विकसित नहीं होने पाया परन्तु बिना किसी अन्तरिक्ष यान के जीवन की संभावना के बिलकुल प्रतिकूल अन्तरिक्ष की लाखों मील की दूरी तय करके वह जीवन पृथ्वी पर जीवित पहुँच भी गया और अपने मूल ग्रह से बिलकुल पृथक ग्रह और वहाँ के अलग ही वातावरण में उसे जीवित बने रहने, बढ़ने तथा अनेक रूप से विकसित होते रहने के लायक वातावरण भी मिल गया; लेकिन वे यह कदापि मानने को तैयार नहीं हैं कि परमेश्वर है और उसने ही पृथ्वी को जीवन संभाल सकने के योग्य बनाया है, और अनेक प्रकार के जीव-जन्तुओं की सृष्टि करके प्रत्येक को अपने अपने स्थान पर फलने-फूलने को रखा है; वे यह भी मानने को कदापि तैयार नहीं हैं कि परमेश्वर ने ही मानव जाति की सृष्टि करी और अपनी श्वास के द्वार उसे जीवन प्रदान किया (उत्पत्ति 1:27)।

   उन लोगों के लिए परमेश्वर द्वारा सृष्टि की रचना के आश्चर्यक्रम को स्वीकार करने से सरल है यह स्वीकार करना कि बिना किसी आरंभिक वस्तु के ही सब कुछ स्वतः ही आरंभ हो गया, सुचारू रूप से स्थापित हो गया और कार्य करने लगा और सुनियोजित रीति से बढ़ने और विकसित भी होने लगा। इन लोगों को परमेश्वर के वचन बाइबल में अय्युब को दी गई सलाह, "हे अय्यूब! इस पर कान लगा और सुन ले; चुपचाप खड़ा रह, और ईश्वर के आश्चर्यकर्मों का विचार कर" (अय्युब 37:14) पर गंभीरता से सोचना चाहिए। साथ ही परमेश्वर ने जो प्रश्न अय्युब से किया था, "जब मैं ने पृथ्वी की नेव डाली, तब तू कहां था? यदि तू समझदार हो तो उत्तर दे" (अय्युब 38:4), उसका उत्तर भी देना चाहिए।

   भला हो कि हम परमेश्वर के अस्तित्व और उसकी अद्भुत सृजन की सामर्थ पर विश्वास करें, उसकी विलक्षण सृष्टि को सराहें और हमें बनाने तथा हमारी देख-भाल करने के लिए उसका धन्यवाद करें। - डेव ब्रैनन


केवल परमेश्वर ही है जो कुछ नहीं से सब कुछ बना सकता है।

आकाश ईश्वर की महिमा वर्णन कर रहा है; और आकशमण्डल उसकी हस्तकला को प्रगट कर रहा है। - भजन 19:1

बाइबल पाठ: अय्युब 38:3-18
Job 38:3 पुरुष की नाईं अपनी कमर बान्ध ले, क्योंकि मैं तुझ से प्रश्न करता हूँ, और तू मुझे उत्तर दे। 
Job 38:4 जब मैं ने पृथ्वी की नेव डाली, तब तू कहां था? यदि तू समझदार हो तो उत्तर दे। 
Job 38:5 उसकी नाप किस ने ठहराई, क्या तू जानता है उस पर किस ने सूत खींचा? 
Job 38:6 उसकी नेव कौन सी वस्तु पर रखी गई, वा किस ने उसके कोने का पत्थर बिठाया, 
Job 38:7 जब कि भोर के तारे एक संग आनन्द से गाते थे और परमेश्वर के सब पुत्र जयजयकार करते थे? 
Job 38:8 फिर जब समुद्र ऐसा फूट निकला मानो वह गर्भ से फूट निकला, तब किस ने द्वार मूंदकर उसको रोक दिया; 
Job 38:9 जब कि मैं ने उसको बादल पहिनाया और घोर अन्धकार में लपेट दिया, 
Job 38:10 और उसके लिये सिवाना बान्धा और यह कहकर बेंड़े और किवाड़ लगा दिए, कि 
Job 38:11 यहीं तक आ, और आगे न बढ़, और तेरी उमंडने वाली लहरें यहीं थम जाएं? 
Job 38:12 क्या तू ने जीवन भर में कभी भोर को आज्ञा दी, और पौ को उसका स्थान जताया है, 
Job 38:13 ताकि वह पृथ्वी की छोरों को वश में करे, और दुष्ट लोग उस में से झाड़ दिए जाएं? 
Job 38:14 वह ऐसा बदलता है जैसा मोहर के नीचे चिकनी मिट्टी बदलती है, और सब वस्तुएं मानो वस्त्र पहिने हुए दिखाई देती हैं। 
Job 38:15 दुष्टों से उनका उजियाला रोक लिया जाता है, और उनकी बढ़ाई हुई बांह तोड़ी जाती है। 
Job 38:16 क्या तू कभी समुद्र के सोतों तक पहुंचा है, वा गहिरे सागर की थाह में कभी चला फिरा है? 
Job 38:17 क्या मृत्यु के फाटक तुझ पर प्रगट हुए, क्या तू घोर अन्धकार के फाटकों को कभी देखने पाया है? 
Job 38:18 क्या तू ने पृथ्वी की चौड़ाई को पूरी रीति से समझ लिया है? यदि तू यह सब जानता है, तो बतला दे।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 4-6


रविवार, 27 जुलाई 2014

प्रोत्साहक


   लोगों के अन्दर पाए जाने वाले गुणों में से एक जिसकी मैं बहुत सराहना करती हूँ है शान्त रीति से, बिना सामने आए, प्रोत्साहन देते रहना। मुझे स्मरण है जब मैं अस्पताल में कुछ समय भर्ती रहने के पश्चात घर लौटी तो मेरी एक सहेली, जैकी - जिसका स्वयं भी कुछ दिन पहले ही एक ऑपरेशन हुआ था, ने मुझे एक पुस्तक भेजी जिसमें परमेश्वर द्वारा हम से की गई प्रतिज्ञाएं लिखीं थी।

   मेरे अंकल बॉब उन लोगों के प्रति बहुत धन्यवादी थे जिन्होंने कैंसर उपचार केंद्र में उनकी देख-रेख करी थी, और उन्होंने धन्यवाद स्वरूप उन लोगों के अधिकारियों को उन कर्मचारियों की सराहना से भरे अनेक पत्र लिख कर भेजे।

   मेरी एक रिश्तेदार ब्रैन्डा को लगभग 20 वर्ष पहले अपने बच्चे की मृत्यु का दुख झेलना पड़ा था, और आज उसके द्वारा किए गए हमदर्दी के कार्यों को अनेक लोग सराहते हैं, समरण करते हैं।

   अकसर देखा जाता है कि जो लोग अत्याधिक दुख - भौतिक या मानसिक, से होकर निकले हैं वे दूसरों को सांत्वना तथा प्रोत्साहन भी सबसे बेहतर और बढ़कर देने पाते हैं।

   परमेश्वर के वचन बाइबल की प्रेरितों के कार्य पुस्तक में एक व्यक्ति का उल्लेख है जिसका नाम था बर्नबास, जिसे उस समय के लोग शान्ति का पुत्र कहते थे (प्रेरितों 4:6); उसके लिए लिखा गया है कि, "वह एक भला मनुष्य था; और पवित्र आत्मा और विश्वास से परिपूर्ण था..." (प्रेरितों 11:24) और वह दूसरों को प्रोत्साहित करता था कि "...सब को उपदेश दिया कि तन मन लगाकर प्रभु से लिपटे रहो" (प्रेरितों 11:23)। उसके इस प्रकार से मसीही विश्वासियों और अन्य लोगों को प्रोत्साहित करने से बहुत से लोग प्रभावित हुए होंगे, तभी तो परमेश्वर के वचन में उसका नाम इतने आदर के साथ लिखा गया है।

   जैसे हम अपने जीवन में किसी से प्रोत्साहन पा कर आशीषित हुए हैं, वैसे ही हमें भी औरों के लिए प्रोत्साहक होना है, अपने अनुभवों से दुसरों को शान्ति और सांत्वना प्रदान करनी है, प्रभु यीशु के प्रेम को उन तक पहुँचाना है। -सिंडी हैस कैस्पर


प्रोत्साहन द्वारा मनुष्य की आत्मा आशा से भर उठती है।

सो हे मेरे प्रिय भाइयो, दृढ़ और अटल रहो, और प्रभु के काम में सर्वदा बढ़ते जाओ, क्योंकि यह जानते हो, कि तुम्हारा परिश्रम प्रभु में व्यर्थ नहीं है। - 1 कुरिन्थियों 15:58

बाइबल पाठ: प्रेरितों 11:22-26
Acts 11:22 तब उन की चर्चा यरूशलेम की कलीसिया के सुनने में आई, और उन्होंने बरनबास को अन्‍ताकिया भेजा। 
Acts 11:23 वह वहां पहुंचकर, और परमेश्वर के अनुग्रह को देखकर आनन्‍दित हुआ; और सब को उपदेश दिया कि तन मन लगाकर प्रभु से लिपटे रहो। 
Acts 11:24 क्योंकि वह एक भला मनुष्य था; और पवित्र आत्मा से परिपूर्ण था: और और बहुत से लोग प्रभु में आ मिले। 
Acts 11:25 तब वह शाऊल को ढूंढने के लिये तरसुस को चला गया। 
Acts 11:26 और जब उन से मिला तो उसे अन्‍ताकिया में लाया, और ऐसा हुआ कि वे एक वर्ष तक कलीसिया के साथ मिलते और बहुत लोगों को उपदेश देते रहे, और चेले सब से पहिले अन्‍ताकिया ही में मसीही कहलाए।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 1-3


शनिवार, 26 जुलाई 2014

मित्र


   अमेरिका के गृह युद्ध के समय देश के दक्षिणी एवं उत्तरी भाग के निवासियों में परस्पर नफरत बैठ गई थी। एक अवसर पर जब राष्ट्रपति एब्राहम लिंकन ने विद्रोही दक्षिण अमेरिका के लोगों के साथ परोपकारी व्यवहार करने की बात कही तो एक आलोचक ने खड़े होकर उन्हें स्मरण दिलाया कि उत्तर तथा दक्षिण में युद्ध चल रहा है, दक्षिण अमेरिका के लोग विद्रोही हैं, शत्रु हैं और उनका नाश किया जाना चाहिए। प्रत्युत्तर में लिंकन ने बड़े शांत और शिष्ट रीति तथा बड़ी बुद्धिमानी से कहा: "जब मैं उन्हें अपने मित्र बना लूँगा तो शत्रु तो स्वतः ही नष्ट हो जाएंगे"।

   लिंकन की कही यह बात गंभीर है और प्रभु यीशु द्वारा अपने चेलों को दिए गए ’पहाड़ी सन्देश’ में दी गई शिक्षा के अनुसार है: "परन्तु मैं तुम से यह कहता हूं, कि अपने बैरियों से प्रेम रखो और अपने सताने वालों के लिये प्रार्थना करो। जिस से तुम अपने स्‍वर्गीय पिता की सन्तान ठहरोगे क्योंकि वह भलों और बुरों दोनों पर अपना सूर्य उदय करता है, और धर्मियों और अधर्मियों दोनों पर मेंह बरसाता है" (मत्ती 5:44-45)।

   हम मसीही विश्वासियों को अपने जीवन में कठिन लोगों का सामना तो करना ही पड़ेगा; कुछ ऐसे भी होंगे जिनके साथ हमें अपने संपर्क एवं व्यवहार के लिए सीमाएं भी निर्धारित करनी पड़ेंगी। लेकिन ऐसे लोगों को भी चोट पहुँचाने अथवा उन्हें नीचा दिखाने से हमें बच कर रहना है क्योंकि यह परमेश्वर का मार्ग नहीं है। इसके विपरीत परमेश्वर का वचन बाइबल हमें सिखाती है कि हम ऐसे लोगों के लिए प्रार्थना करें, उनकी भलाई का सोचें, उनके प्रति संवेदनशील और सकारात्मक रवैया रखें। संभव है इससे कोई शत्रु मित्र में परिवर्तित हो जाए। आवश्यक नहीं कि हमारे इस भले व्यवाहार का प्रत्युत्तर प्रत्येक व्यक्ति सकारात्मक रीति से ही दे, लेकिन तब भी हमें उसके साथ एक सामंजस्यपूर्ण और भले संबंध के लिए प्रार्थना करनी है तथा योजना बनानी है।

  क्या आप किसी ऐसे व्यक्ति को जानते हैं जिसके साथ आपके संबंध कठिन रहे हैं? प्रभु यीशु मसीह की शिक्षा एवं सहायता से उसे मित्र बना लेने की प्रक्रिया आरंभ कर लीजिए। - डेनिस फिशर


जब आप किसी की भलाई कर रहे हों तो उसके लिए आप से नफरत करना कठिन होगा।

बुराई के बदले बुराई मत करो; और न गाली के बदले गाली दो; पर इस के विपरीत आशीष ही दो: क्योंकि तुम आशीष के वारिस होने के लिये बुलाए गए हो। - 1 पतरस 3:9

बाइबल पाठ: मत्ती 5:43-48
Matthew 5:43 तुम सुन चुके हो, कि कहा गया था; कि अपने पड़ोसी से प्रेम रखना, और अपने बैरी से बैर। 
Matthew 5:44 परन्तु मैं तुम से यह कहता हूं, कि अपने बैरियों से प्रेम रखो और अपने सताने वालों के लिये प्रार्थना करो। 
Matthew 5:45 जिस से तुम अपने स्‍वर्गीय पिता की सन्तान ठहरोगे क्योंकि वह भलों और बुरों दोनों पर अपना सूर्य उदय करता है, और धर्मियों और अधर्मियों दोनों पर मेंह बरसाता है। 
Matthew 5:46 क्योंकि यदि तुम अपने प्रेम रखने वालों ही से प्रेम रखो, तो तुम्हारे लिये क्या फल होगा? क्या महसूल लेने वाले भी ऐसा ही नहीं करते? 
Matthew 5:47 और यदि तुम केवल अपने भाइयों ही को नमस्‍कार करो, तो कौन सा बड़ा काम करते हो? क्या अन्यजाति भी ऐसा नहीं करते? 
Matthew 5:48 इसलिये चाहिये कि तुम सिद्ध बनो, जैसा तुम्हारा स्‍वर्गीय पिता सिद्ध है।

एक साल में बाइबल: 
  • श्रेष्ठगीत 5-8


शुक्रवार, 25 जुलाई 2014

कारण


   जो मौरिस आईसक्रीम बनाता है और अपनी बनाई आईसक्रीम में अनेक प्रकार के स्वाद देता है। जो मौरिस एक प्रसिद्ध आईसक्रीम बनाने वाली कंपनी के लिए कार्य करता है जिसके रचनात्मक उत्पाद अपनी गुणवन्ता एवं नवीनता के लिए जाने जाते हैं। जो मौरिस भी अपनी आईसक्रीम बनाने की उत्तमता के लिए जाना जाता है लेकिन वह यह कभी नहीं भूलता कि वह किस कारण से यह कार्य कर रहा है। उसने एक साक्षात्कार में रिपोर्टर रिकार्डो गन्दारा को बताया कि उस कंपनी का एक पुराना कर्मचारी उसे स्मरण दिलाता रहता है, "हम आईसक्रीम क्यों बनाते हैं? क्योंकि यह लोगों को प्रसन्न करने वाला भोजन पदार्थ है। हमारा उद्देश्य है लोगों को खुश रखना।" और इसी कारण जो मौरिस लगन के साथ उत्त्म गुणवन्ता की आईसक्रीम बनाता रहता है।

   मसीही विश्वासी होने के कारण हमारे लिए यह अति अनिवार्य है कि हम अपनी सेवकाई के प्रत्येक कार्य के कारण को स्मरण रखें। यदि हम वह कारण भूल जाएंगे तो हम उन चेलों के समान हो जाएंगे जो इस बात को लेकर आपस में विवाद करने लगे कि उन में से कौन सबसे महत्वपूरण और बड़ा है और इस बात पर उनमें फूट आनी आरंभ हो गई। समस्या के निवारण के लिए मित्रप्रभु यीशु ने उन्हें अपने संसार में आने और कार्य करने के कारण को स्मरण दिलाया: "क्योंकि मनुष्य का पुत्र इसलिये नहीं आया, कि उस की सेवा टहल की जाए, पर इसलिये आया, कि आप सेवा टहल करे, और बहुतों की छुड़ौती के लिये अपना प्राण दे" (मरकुस 10:45)।

   प्रभु यीशु मसीह के अनुयायी होने का तात्पर्य है उसका अनुसरण करना और उसके कार्य को उसी की रीति पर आगे बढ़ाना। हम मसीही विश्वासियों को प्रभु यीशु मसीह में सारे संसार के सभी लोगों के लिए उपलब्ध पापों की क्षमा तथा उद्धार एवं परमेश्वर के प्रेम के सुसमाचार को फैलाने की सेवकाई सौंपी गई है। जैसे प्रभु यीशु ने इस सेवकाई को अपने पृथ्वी के जीवन काल में संपन्न किया वैसे ही हमें भी उसी प्रेम और सहिषुण्ता के साथ इस सेवाकाई को पूरा करना है। हमें यह कभी नहीं भूलना है कि प्रभु यीशु सेवा करने तथा उद्धार देने के लिए आया था ना कि हमें संसार में प्रतिष्ठित, संपन्न अथवा महान बनाने।

   नम्रता, दीनता, प्रेम, सहिषुणता के साथ सारे संसार में प्रभु यीशु में उपलब्ध पापों की क्षमा और उद्धार का सुसमाचार प्रसार ही हमारे प्रभु यीशु की सेवकाई स्वीकार करने का कारण है। - डेविड मैक्कैसलैंड


अपनी नज़रें प्रभु यीशु पर बनाए रखिए और आप कभी अपने जीवन के उद्देश्य से भटकने नहीं पाएंगे।

क्योंकि मैं ने तुम्हें नमूना दिखा दिया है, कि जैसा मैं ने तुम्हारे साथ किया है, तुम भी वैसा ही किया करो। - यूहन्ना 13:15

बाइबल पाठ: मरकुस 10:35-45
Mark 10:35 तब जब्‍दी के पुत्र याकूब और यूहन्ना ने उसके पास आकर कहा, हे गुरू, हम चाहते हैं, कि जो कुछ हम तुझ से मांगे, वही तू हमारे लिये करे। 
Mark 10:36 उसने उन से कहा, तुम क्या चाहते हो कि मैं तुम्हारे लिये करूं? 
Mark 10:37 उन्होंने उस से कहा, कि हमें यह दे, कि तेरी महिमा में हम में से एक तेरे दाहिने और दूसरा तेरे बांए बैठे। 
Mark 10:38 यीशु ने उन से कहा, तुम नहीं जानते, कि क्या मांगते हो? जो कटोरा मैं पीने पर हूं, क्या पी सकते हो? और जो बपतिस्मा मैं लेने पर हूं, क्या ले सकते हो? 
Mark 10:39 उन्होंने उस से कहा, हम से हो सकता है: यीशु ने उन से कहा: जो कटोरा मैं पीने पर हूं, तुम पीओगे; और जो बपतिस्मा मैं लेने पर हूं, उसे लोगे। 
Mark 10:40 पर जिन के लिये तैयार किया गया है, उन्हें छोड़ और किसी को अपने दाहिने और अपने बाएं बिठाना मेरा काम नहीं। 
Mark 10:41 यह सुन कर दसों याकूब और यूहन्ना पर रिसयाने लगे। 
Mark 10:42 और यीशु ने उन को पास बुला कर उन से कहा, तुम जानते हो, कि जो अन्यजातियों के हाकिम समझे जाते हैं, वे उन पर प्रभुता करते हैं; और उन में जो बड़ें हैं, उन पर अधिकार जताते हैं। 
Mark 10:43 पर तुम में ऐसा नहीं है, वरन जो कोई तुम में बड़ा होना चाहे वह तुम्हारा सेवक बने। 
Mark 10:44 और जो कोई तुम में प्रधान होना चाहे, वह सब का दास बने। 
Mark 10:45 क्योंकि मनुष्य का पुत्र इसलिये नहीं आया, कि उस की सेवा टहल की जाए, पर इसलिये आया, कि आप सेवा टहल करे, और बहुतों की छुड़ौती के लिये अपना प्राण दे।

एक साल में बाइबल: 
  • श्रेष्ठगीत 1-4


गुरुवार, 24 जुलाई 2014

अनुभव एवं सदबुद्धि


   अनेक वृद्धों के साथ साक्षात्कार करने के पश्चात लेखक डॉन गोल्ड ने अपनी पुस्तक Until the Singing Stops: A Celebration of Life and Old Age in America प्रकाशित करी। डॉन गोल्ड अपनी दादी से बहुत प्रेम करते थे, उन्हें बहुत सराहते थे। उनकी दादी की यादों ने ही उन्हें प्रेरित किया कि वे अन्य वृद्धों के साथ मिलें, उनसे बातचीत करें और उनके अनुभवों से कुछ शिक्षा लें।

   वे अपने एक अनुभव का बयान करते हैं, एक साक्षात्कार लेने जाते समय वे एक धूल भरे ग्रामीण मार्ग से जाते हुए रास्ता भटक गए। सही रास्ता जानने के लिए वे एक फार्म पर रुके, और एक नवयुवक उनसे बात करने बाहर निकल कर आया। उस लड़के ने उनकी बात सुनी फिर अपने कंधे झटक कर उत्तर दिया, "पता नहीं" और चला गया। इसलिए उन्हें कुछ और रास्ता ऐसे ही तय करना पड़ा। कूछ मील चलने के पश्चात वे फिर से एक अन्य फार्म पर रास्ता फूछने के लिए रुके, और एक वृद्ध किसान उनसे बात करने बाहर निकल कर आया। उनकी बात सुनने के बाद, उस वृद्ध ने बड़े आदर के साथ उन्हें बिलकुल सही और सटीक मार्ग निर्देश दिए और वे अपने गन्तव्य पर पहुँच सके।

   डॉन गोल्ड ने विचारपूर्ण भाव में लिखा, जब मेरी दादी की यादों ने मुझे उनके समान वृद्ध लोगों से बातचीत करने के लिए प्रेरित किया और बाहर लोगों में भेजा, तब संभवतः अनुभव ही वह बात थी जिस की तलाश में मैं निकला था। वे किसी ऐसे को ढूँढ़ रहे थे जो उन्हें जीवन मार्ग पर सही दिशा निर्देश दे सके।

   यदि आप जवान हैं तो किसी ऐसे अनुभवी वृद्ध को खोजें जो परमेश्वर के प्रेम, भलाई और अनुग्रह के सागर से जीवन भर भरपूरी से पीता रहा है। ऐसे लोगों के पास आपको ऐसी सदबुद्धि मिलेगी जो आपको अपने विश्वास में बढ़ने और फलवंत होने में कार्यकारी होगी (भजन 92:12-14)। - डेविड रोपर


मसीह यीशु के साथ संगति ही उसके लिए फलवन्त होने की कुंजी है।

धन्य है वह पुरुष जो यहोवा पर भरोसा रखता है, जिसने परमेश्वर को अपना आधार माना हो। वह उस वृक्ष के समान होगा जो नदी के तीर पर लगा हो और उसकी जड़ जल के पास फैली हो; जब घाम होगा तब उसको न लगेगा, उसके पत्ते हरे रहेंगे, और सूखे वर्ष में भी उनके विषय में कुछ चिन्ता न होगी, क्योंकि वह तब भी फलता रहेगा। - यर्मियाह 17:7-8

बाइबल पाठ: भजन 92:1-15
Psalms 92:1 यहोवा का धन्यवाद करना भला है, हे परमप्रधान, तेरे नाम का भजन गाना; 
Psalms 92:2 प्रात:काल को तेरी करूणा, और प्रति रात तेरी सच्चाई का प्रचार करना, 
Psalms 92:3 दस तार वाले बाजे और सारंगी पर, और वीणा पर गम्भीर स्वर से गाना भला है। 
Psalms 92:4 क्योंकि, हे यहोवा, तू ने मुझ को अपने काम से आनन्दित किया है; और मैं तेरे हाथों के कामों के कारण जयजयकार करूंगा।
Psalms 92:5 हे यहोवा, तेरे काम क्या ही बड़े हैं! तेरी कल्पनाएं बहुत गम्भीर हैं! 
Psalms 92:6 पशु समान मनुष्य इस को नहीं समझता, और मूर्ख इसका विचार नहीं करता: 
Psalms 92:7 कि दुष्ट जो घास की नाईं फूलते- फलते हैं, और सब अनर्थकारी जो प्रफुल्लित होते हैं, यह इसलिये होता है, कि वे सर्वदा के लिये नाश हो जाएं, 
Psalms 92:8 परन्तु हे यहोवा, तू सदा विराजमान रहेगा। 
Psalms 92:9 क्योंकि हे यहोवा, तेरे शत्रु, हां तेरे शत्रु नाश होंगे; सब अनर्थकारी तितर बितर होंगे।
Psalms 92:10 परन्तु मेरा सींग तू ने जंगली सांढ़ का सा ऊंचा किया है; मैं टटके तेल से चुपड़ा गया हूं। 
Psalms 92:11 और मैं अपने द्रोहियों पर दृष्टि कर के, और उन कुकर्मियों का हाल मेरे विरुद्ध उठे थे, सुनकर सन्तुष्ट हुआ हूं।
Psalms 92:12 धर्मी लोग खजूर की नाईं फूले फलेंगे, और लबानोन के देवदार की नाईं बढ़ते रहेंगे। 
Psalms 92:13 वे यहोवा के भवन में रोपे जा कर, हमारे परमेश्वर के आंगनों में फूले फलेंगे। 
Psalms 92:14 वे पुराने होने पर भी फलते रहेंगे, और रस भरे और लहलहाते रहेंगे, 
Psalms 92:15 जिस से यह प्रगट हो, कि यहोवा सीधा है; वह मेरी चट्टान है, और उस में कुटिलता कुछ भी नहीं।

एक साल में बाइबल: 
  • सभोपदेशक 10-12


बुधवार, 23 जुलाई 2014

परेशानी और शांति


   यदि आपने मर्फी के नियम के बारे में सुना नहीं भी हो, तो भी उसे अनुभव अवश्य किया होगा। मर्फी का नियम कहता है, "यदि कोई भी बात बिगड़ सकती है, तो वह बिगड़ेगी अवश्य"; अर्थात अगर कुछ गलत हो सकने की संभावना है तो देर-सवेर वह होकर रहेगा।

   मर्फी का यह नियम मुझे प्रभु यीशु द्वारा अपने चेलों से कहे गए एक सिद्धांत की याद दिलाता है: "...संसार में तुम्हें क्लेष होता है..." (यूहन्ना 16:33)। अर्थात, हम मसीही विश्वासी इस बात के लिए निश्चित रह सकते हैं कि देर-सवेर हमें संसार से परेशानियों का सामना करना ही पड़ेगा। यह संभावना परमेश्वर की आरंभिक योजना के अनुसार नहीं है, लेकिन जब से मानव जाति शैतान के प्रलोभन में फंस कर पाप में पड़ गई, तभी से सृष्टि की सभी बातें पाप के दुषप्रभावों की आधीनता में आ गईं, और परिणामस्वरूप तब से सृष्टि की सभी बातों में गड़बड़ एवं दुष्क्रीया दिखाई देती है।

   जीवन में परेशानी होने की वास्तविकता तो सर्वविदित है किंतु शांति होने की वस्तविकता अकसर नज़र नहीं आती। यह एक रोचक बात है कि जब प्रभु यीशु ने अपने चेलों को परेशानियों के बारे में चिताया, उसके साथ ही, उसी वाक्य में उन्हें अपनी शांति के बारे में आश्वस्त भी किया: "...ढाढ़स बांधो, मैंने संसार को जीत लिया है" (यूहन्ना 16:33)। "जीत लिया" से प्रभु यीशु का तात्पर्य था मैंने ऐसा कर के दे दिया है जिसका प्रभाव आते समयों में भी मिलता रहेगा। क्रूस पर अपने बलिदान और फिर तीसरे दिन अपने पुनरुत्थान के द्वारा ना केवल प्रभु यीशु ने तब संसार के पाप पर विजय प्राप्त कर ली थी, वरन आज भी वह इस विजय को अपने चेलों के जीवन का अभिन्न अंग बनाए रखता है। हम चाहे जितनी और चाहे जैसी परेशानी का सामना करें, प्रभु यीशु की उपस्थिति और शांति सदा ही हम मसीही विश्वासियों के साथ बनी रहती है, हमें संभाले रहती है।

   इसलिए इस पतित संसार से चाहे हमें परेशानियाँ और समस्याएं झेलनी पड़ें, लेकिन सुसमाचार यह है कि प्रभु यीशु की शांति उन सभी कष्टों में हमारे साथ बनी रहेगी, हमें संभाले रहेगी और अन्ततः प्रभु यीशु में हम विजयी ठहरेंगे। - जो स्टोवैल


सभी परेशानियों और समस्याओं के मध्य, विजय एवं शांति प्रभु यीशु में ही उपलब्ध रहती है।

मैं तुम्हें शान्‍ति दिए जाता हूं, अपनी शान्‍ति तुम्हें देता हूं; जैसे संसार देता है, मैं तुम्हें नहीं देता: तुम्हारा मन न घबराए और न डरे। - यूहन्ना 14:27

बाइबल पाठ: यूहन्ना 16:25-33
John 16:25 मैं ने ये बातें तुम से दृष्‍टान्‍तों में कही हैं, परन्तु वह समय आता है, कि मैं तुम से दृष्‍टान्‍तों में और फिर नहीं कहूंगा परन्तु खोल कर तुम्हें पिता के विषय में बताऊंगा। 
John 16:26 उस दिन तुम मेरे नाम से मांगोगे, और मैं तुम से यह नहीं कहता, कि मैं तुम्हारे लिये पिता से बिनती करूंगा। 
John 16:27 क्योंकि पिता तो आप ही तुम से प्रीति रखता है, इसलिये कि तुम ने मुझ से प्रीति रखी है, और यह भी प्रतीति की है, कि मैं पिता कि ओर से निकल आया। 
John 16:28 मैं पिता से निकलकर जगत में आया हूं, फिर जगत को छोड़कर पिता के पास जाता हूं। 
John 16:29 उसके चेलों ने कहा, देख, अब तो तू खोल कर कहता है, और कोई दृष्‍टान्‍त नहीं कहता। 
John 16:30 अब हम जान गए, कि तू सब कुछ जानता है, और तुझे प्रयोजन नहीं, कि कोई तुझ से पूछे, इस से हम प्रतीति करते हैं, कि तू परमेश्वर से निकला है। 
John 16:31 यह सुन यीशु ने उन से कहा, क्या तुम अब प्रतीति करते हो? 
John 16:32 देखो, वह घड़ी आती है वरन आ पहुंची कि तुम सब तित्तर बित्तर हो कर अपना अपना मार्ग लोगे, और मुझे अकेला छोड़ दोगे, तौभी मैं अकेला नहीं क्योंकि पिता मेरे साथ है। 
John 16:33 मैं ने ये बातें तुम से इसलिये कही हैं, कि तुम्हें मुझ में शान्‍ति मिले; संसार में तुम्हें क्‍लेश होता है, परन्तु ढाढ़स बांधो, मैं ने संसार को जीत लिया है।

एक साल में बाइबल: 
  • सभोपदेशक 7-9


मंगलवार, 22 जुलाई 2014

घेरे हुए


   मेरी सहेली मेलिस्सा की 9 वर्षीय पुत्री, सिडनी, बीमार थी, अस्पताल में भर्ती थी और उसे कीमोथैरपी तथा बोन-मैरो ट्रांसप्लांट की आवश्यकता थी। मुझे उसके बारे में एक स्वपन दिखाई दिया जिसमें मैंने देखा कि सिडनी अस्पताल के एक केंद्रीय कक्ष में अपने माता-पिता के साथ है, उस कक्ष के चारों ओर अन्य कमरे बने हैं जिनमें उनके परिवार तथा मित्रगण हैं और वे सभी सिडनी के लिए प्रार्थना कर रहे हैं। वास्तविक जीवन में, भौतिक रूप से, सिडनी परिवार या मित्रजनों से घिरी हुई नहीं थी, वे उसके चारों ओर उपस्थित नहीं थे किंतु आत्मिक रीति से उन सबकी प्रार्थनाओं और प्रेम ने उसे घेर रखा था।

   प्रेरित पौलुस भी प्रार्थनाओं से घिरे रहने की लालसा रखता था। पौलुस द्वारा भिन्न मसीही मण्डलियों को लिखी पत्रियों में से अधिकांश में उसने उन मण्डलियों से अनुरोध किया कि वे उसे अपनी प्रार्थनाओं में प्रभु के सम्मुख स्मरण रखें (2 कुरिन्थियों 1:11; इफिसीयों 6:18-20; कुलुस्सियों 4:2-4; फिलेमॉन 1:22)। रोम की मसीही मण्डली के सदस्यों को पौलुस ने लिखा: "और हे भाइयों; मैं यीशु मसीह का जो हमारा प्रभु है और पवित्र आत्मा के प्रेम का स्मरण दिला कर, तुम से बिनती करता हूं, कि मेरे लिये परमेश्वर से प्रार्थना करने में मेरे साथ मिलकर लौलीन रहो" (रोमियों 15:30)। पौलुस जानता था कि जब तक सहयोगियों तथा सहकर्मियों की प्रार्थना की सामर्थ उसके साथ नहीं है, वह परमेश्वर के लिए अपनी सेवकाई में प्रभावी नहीं हो सकता।

   परमेश्वर का वचन बाइबल हमें बताती है कि प्रभु यीशु भी हमारे लिए प्रार्थना करता है (यूहन्ना 17:20; इब्रानियों 7:25) और परमेश्वर का पवित्र आत्मा भी प्रार्थना में हमारी सहायता करता है कि हम परमेश्वर की इच्छा के अनुसार प्रार्थना कर सकें (रोमियों 8:27)। हम मसीही विश्वासियों के लिए यह कितनी शांति, सांत्वना और सामर्थ की बात है कि अन्य मसीही विश्वासियों, प्रभु यीशु और पवित्र आत्मा की प्रार्थनाएं हमें घेरे हुए रखती हैं, सुरक्षित रखती हैं, प्रभावी बनाती हैं। एक दूसरे के लिए प्रार्थना करते रहें, एक दूसरे को प्रार्थनाओं से घेरे रहें। - ऐनी सेटास


पवित्र आत्मा की प्रेरणा से करी गई प्रार्थना अति प्रभावी होती है।

हमारे लिये प्रार्थना करते रहो, क्योंकि हमें भरोसा है, कि हमारा विवेक शुद्ध है; और हम सब बातों में अच्छी चाल चलना चाहते हैं। - इब्रानियों 13:18

बाइबल पाठ: रोमियों 15:22-33
Romans 15:22 इसी लिये मैं तुम्हारे पास आने से बार बार रूका रहा। 
Romans 15:23 परन्तु अब मुझे इन देशों में और जगह नहीं रही, और बहुत वर्षों से मुझे तुम्हारे पास आने की लालसा है। 
Romans 15:24 इसलिये जब इसपानिया को जाऊंगा तो तुम्हारे पास होता हुआ जाऊंगा क्योंकि मुझे आशा है, कि उस यात्रा में तुम से भेंट करूं, और जब तुम्हारी संगति से मेरा जी कुछ भर जाए, तो तुम मुझे कुछ दूर आगे पहुंचा दो। 
Romans 15:25 परन्तु अभी तो पवित्र लोगों की सेवा करने के लिये यरूशलेम को जाता हूं। 
Romans 15:26 क्योंकि मकिदुनिया और अखया के लोगों को यह अच्छा लगा, कि यरूशलेम के पवित्र लोगों के कंगालों के लिये कुछ चन्दा करें। 
Romans 15:27 अच्छा तो लगा, परन्तु वे उन के कर्जदार भी हैं, क्योंकि यदि अन्यजाति उन की आत्मिक बातों में भागी हुए, तो उन्हें भी उचित है, कि शारीरिक बातों में उन की सेवा करें। 
Romans 15:28 सो मैं यह काम पूरा कर के और उन को यह चन्दा सौंप कर तुम्हारे पास होता हुआ इसपानिया को जाऊंगा। 
Romans 15:29 और मैं जानता हूं, कि जब मैं तुम्हारे पास आऊंगा, तो मसीह की पूरी आशीष के साथ आऊंगा।
Romans 15:30 और हे भाइयों; मैं यीशु मसीह का जो हमारा प्रभु है और पवित्र आत्मा के प्रेम का स्मरण दिला कर, तुम से बिनती करता हूं, कि मेरे लिये परमेश्वर से प्रार्थना करने में मेरे साथ मिलकर लौलीन रहो। 
Romans 15:31 कि मैं यहूदिया के अविश्वासियों बचा रहूं, और मेरी वह सेवा जो यरूशलेम के लिये है, पवित्र लोगों को भाए। 
Romans 15:32 और मैं परमेश्वर की इच्छा से तुम्हारे पास आनन्द के साथ आकर तुम्हारे साथ विश्राम पाऊं। 
Romans 15:33 शान्ति का परमेश्वर तुम सब के साथ रहे। आमीन।

एक साल में बाइबल: 
  • सभोपदेशक 4-6