ई-मेल संपर्क / E-Mail Contact

इन संदेशों को ई-मेल से प्राप्त करने के लिए अपना ई-मेल पता इस ई-मेल पर भेजें : rozkiroti@gmail.com / To Receive these messages by e-mail, please send your e-mail id to: rozkiroti@gmail.com

शनिवार, 3 जनवरी 2015

साथ


   मुझे लोगों के साथ रहना अच्छा लगता है....अकसर! जब हम अपने पसन्द के लोगों के साथ होते हैं तो एक अलग ही प्रकार आनन्द हमारे हृदयों में होता है। लेकिन दुर्भाग्यवश हम सदा ही अपने पसन्द के लोगों के साथ नहीं रहने पाते। कभी कभी लोग कष्टदायक भी होते हैं; शायद इसीलिए किसी ने कहा है, "मैं जितना अधिक लोगों को जानने लगता हूँ, मुझे अपने कुत्ते से उतना अधिक प्रेम होता जाता है!" जब किसी संबंध से हमें कष्ट होता है या उसमें हमें आनन्द नहीं मिलता तो हम दूसरे को दोषी ठहराने लगते हैं और फिर कोई बहाना बनाकर उस संबंध से पृथक होकर अपनी पसन्द के लोगों के साथ संगति ढूंढ़ने लगते हैं।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस ने अपनी एक पत्री में लिखा कि अपने मसीही विश्वासी भाई-बहनों के साथ सप्रेम व्यवहार एवं संबंध बनाए रखें। साथ ही उसने मसीह यीशु के स्वभाव के अनुरूप परस्पर एकमनता बनाए रखने तथा दूसरों के हित के विषय में प्रयासरत रहने की आवश्यकता पर भी ज़ोर दिया (फिलिप्पियों 2:2-5)। इस बारे में थोड़ा विचार कीजिए - प्रभु यीशु ने स्वर्ग के वैभव और महिमा को, अपने प्रत्येक अधिकार को हमारे लिए छोड़ दिया; हमारे पापों की क्षमा और उद्धार के लिए वह एक दास का स्वरूप लेकर स्वर्ग से संसार में आ गया, और हमें बचाने के लिए सबसे बड़ा बलिदान दे दिया - अपने प्राणों का बलिदान, ताकि हम उसमें होकर परमेश्वर के साथ एक आनन्दमय संबंध में आ सकें (इब्रानियों 12:2)। और यह सब उसने हमारे लिए तब किया जब हम पापी ही थे, उसके लिए किसी रीति से आनन्दायक नहीं वरन कष्टदायक ही थे (रोमियों 5:8)।

   इसलिए जब अगली बार आप किसी ऐसे व्यक्ति के साथ हों जिसके साथ निभाना सरल नहीं है, तो प्रभु यीशु से प्रार्थना करें कि आपको ऐसी सामर्थ दे कि आप उस व्यक्ति के साथ प्रभु के प्रेम को दिखा सकें। प्रभु के प्रेम को हर परिस्थिति में प्रदर्शित करने का प्रयास करते रहें, और समय के साथ आपको यह देखकर अचरज होगा कि कैसे परमेश्वर लोगों के प्रति आपके नज़रिये एवं रवैये को बदल देता है। - जो स्टोवैल


दूसरों के साथ निभा पाने की कुंजी है अपने अन्दर प्रभु यीशु का सा मन रखना।

परन्तु परमेश्वर हम पर अपने प्रेम की भलाई इस रीति से प्रगट करता है, कि जब हम पापी ही थे तभी मसीह हमारे लिये मरा। - रोमियों 5:8

बाइबल पाठ: फिलिप्पियों 2:1-11
Philippians 2:1 सो यदि मसीह में कुछ शान्‍ति और प्रेम से ढाढ़स और आत्मा की सहभागिता, और कुछ करूणा और दया है। 
Philippians 2:2 तो मेरा यह आनन्द पूरा करो कि एक मन रहो और एक ही प्रेम, एक ही चित्त, और एक ही मनसा रखो। 
Philippians 2:3 विरोध या झूठी बड़ाई के लिये कुछ न करो पर दीनता से एक दूसरे को अपने से अच्छा समझो। 
Philippians 2:4 हर एक अपनी ही हित की नहीं, वरन दूसरों के हित की भी चिन्‍ता करे। 
Philippians 2:5 जैसा मसीह यीशु का स्‍वभाव था वैसा ही तुम्हारा भी स्‍वभाव हो। 
Philippians 2:6 जिसने परमेश्वर के स्‍वरूप में हो कर भी परमेश्वर के तुल्य होने को अपने वश में रखने की वस्तु न समझा। 
Philippians 2:7 वरन अपने आप को ऐसा शून्य कर दिया, और दास का स्‍वरूप धारण किया, और मनुष्य की समानता में हो गया। 
Philippians 2:8 और मनुष्य के रूप में प्रगट हो कर अपने आप को दीन किया, और यहां तक आज्ञाकारी रहा, कि मृत्यु, हां, क्रूस की मृत्यु भी सह ली। 
Philippians 2:9 इस कारण परमेश्वर ने उसको अति महान भी किया, और उसको वह नाम दिया जो सब नामों में श्रेष्ठ है। 
Philippians 2:10 कि जो स्वर्ग में और पृथ्वी पर और जो पृथ्वी के नीचे है; वे सब यीशु के नाम पर घुटना टेकें। 
Philippians 2:11 और परमेश्वर पिता की महिमा के लिये हर एक जीभ अंगीकार कर ले कि यीशु मसीह ही प्रभु है।

एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 7-9
  • मत्ती 3


शुक्रवार, 2 जनवरी 2015

संगति


   बेसबॉल के खेल में एक खिलाड़ी गेंद फेंकता है तथा दूसरा उसे बल्ले से मारता है। यदि बल्ले से मारने वाला खिलाड़ी निर्धारित बार फेंकी गई बॉल को मार पाने में असफल रहता है तो वह बाहर हो जाता है। इसलिए जिसने भी बेसबॉल के खेल पर आधारित टी-बॉल खेल आरंभ किया वह वास्त्व में बहुत प्रतिभासंपन्न व्यक्ति होगा, क्योंकि इसमें खेल से बाहर होने से पहले प्रत्येक खिलाड़ी को अवसर मिलता है कि वे गेंद को मार सकें और खेल के रोमांच का आनन्द ले सकें; बिना गेंद को मारे कोई भी खेल से बाहर नहीं हो सकता।

   टी-बॉल में बेसबॉल वाली गेंद को रबर के बने एक सतंभ पर, जो 5 या 6 वर्षीय बच्चों की कमर की ऊँचाई के बराबर होता है तथा जिसे ’टी’ कहते हैं, रखा जाता है। प्रत्येक खिलाड़ी को यह अवसर होता है कि वे बल्ला घुमा कर उस गेंद को मारें; वे तब तक यह प्रयास कर सकते हैं जब तक कि बल्ले का प्रहार गेंद पर नहीं हो जाता। गेंद को मारने के बाद खिलाड़ी दौड़ कर ’रन’ लेता है और मैदान में खड़े खिलाड़ियों का प्रयास होता है कि गेंद को पकड़ कर रन लेने वाले खिलाड़ी के रन पूरा करने से पहले ’बेस’ पर खड़े खिलाड़ी तक फेंक कर पहुँचा दें। यदि गेंद बेस पर खड़े खिलाड़ी के पास रन लेने वाले खिलाड़ी से पहले पहुँच जाती है तो रन लेने वाल खिलाड़ी बाहर हो जाता है।

   इस खेल के लिए प्रशिक्षक के रूप में मेरा पहला दिन था और खिलाड़ी भी इस खेल से परिचित नहीं थे, सभी के लिए यह एक नई बात थी। गेंद टी पर रखी गई और पहले खिलाड़ी ने बल्ला लिया और घुमा कर ज़ोर से गेंद को मारा, और गेंद मैदान में बहुत दूर चली गई। गेंद को दूर जाते देख, मैदान में खड़े सभी खिलाड़ी अपने अपने स्थानों को छोड़ उसे लेने भागे; जब एक ने गेंद उठाकर वापस बेस की ओर फेंकने के लिए मुड़कर देखा तो गेंद पकड़ने के लिए बेस पर कोई भी खिलाड़ी नहीं था! सभी खिलाड़ी मैदान में गेंद पकड़ने वाले वाले खिलाड़ी के पास जमा होकर आनन्दित हो रहे थे, अति उत्साहित होकर उल्लास के साथ खूब शोर मचा रहे थे!

   उन नए खिलाड़ियों के समान, जो लोग प्रभु यीशु में नए विश्वासी होते हैं, उनमें भी एक अलग ही उल्लास होता है और उनका यह उल्लास आस-पास के सभी लोगों के लिए बड़े आनन्द का विषय हो जाता है। ना केवल हम मनुष्य, परन्तु स्वर्गदूत भी उनके आनन्द में आनन्दित होते हैं (लूका 15:7)। ये नए मसीही विश्वासी परमेश्वर के प्रेम से भरे होते हैं और उसके बारे में जानने तथा उसके वचन बाइबल से सीखने के लिए जिज्ञासु रहते हैं।

   जो मसीही विश्वास में कुछ पुराने हो चुके हैं, कभी कभी मसीही जीवन की परीक्षाओं, संघर्षों तथा कठिनाईयों के कारण निराश होकर अपने विशवास में आने के समय के आनन्द को भूल जाते हैं। इसलिए नए मसीही विश्वासियों के साथ संगति के अवसरों को तलाशें और नए मसीही विश्वासियों के साथ संगति रखें। यहन दोनों के लिए लाभकारी है क्योंकि परमेश्वर उन नए विश्वसियों के आनन्द तथा जानकारी लेने की जिज्ञासा द्वारा आपको भी उभार सकता है और मसीह यीशु के प्रति आपके समर्पण को नया कर सकता है तथा आपके अनुभव के द्वारा उन्हें सिखा सकता है, उनका मार्गदर्शन कर सकता है। - रैंडी किल्गोर


अपने किए हुए उद्धार का हर्ष मुझे फिर से दे, और उदार आत्मा देकर मुझे सम्भाल। - भजन 51:12

...क्योंकि आज का दिन हमारे प्रभु के लिये पवित्र है; और उदास मत रहो, क्योंकि यहोवा का आनन्द तुम्हारा दृढ़ गढ़ है। - नहेम्याह 8:10

बाइबल पाठ: लूका 15:1-7
Luke 15:1 सब चुंगी लेने वाले और पापी उसके पास आया करते थे ताकि उस की सुनें। 
Luke 15:2 और फरीसी और शास्त्री कुड़कुड़ा कर कहने लगे, कि यह तो पापियों से मिलता है और उन के साथ खाता भी है।
Luke 15:3 तब उसने उन से यह दृष्‍टान्‍त कहा। 
Luke 15:4 तुम में से कौन है जिस की सौ भेड़ें हों, और उन में से एक खो जाए तो निन्नानवे को जंगल में छोड़कर, उस खोई हुई को जब तक मिल न जाए खोजता न रहे? 
Luke 15:5 और जब मिल जाती है, तब वह बड़े आनन्द से उसे कांधे पर उठा लेता है। 
Luke 15:6 और घर में आकर मित्रों और पड़ोसियों को इकट्ठे कर के कहता है, मेरे साथ आनन्द करो, क्योंकि मेरी खोई हुई भेड़ मिल गई है। 
Luke 15:7 मैं तुम से कहता हूं; कि इसी रीति से एक मन फिराने वाले पापी के विषय में भी स्वर्ग में इतना ही आनन्द होगा, जितना कि निन्नानवे ऐसे धर्मियों के विषय नहीं होता, जिन्हें मन फिराने की आवश्यकता नहीं।

एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 4-6
  • मत्ती 2


गुरुवार, 1 जनवरी 2015

भला जीवन

सभी पाठकों की नव वर्ष की शुभ-कामनाएं


   सुन्दरता, संपदा, सामर्थ, प्रेम, विवाहित जीवन, सुख आदि सभी अच्छी बातें हैं लेकिन वे सर्वोत्तम नहीं हैं। सर्वोत्तम है परमेश्वर का प्रेम - परमेश्वर के प्रेम का भागी होना तथा उससे प्रेम करना, उसका मित्र बन जाना, उसे अपने जीवन से महिमा देना। यही सर्वोत्तम जीवन व्यतीत करने की कुंजी है, क्योंकि ऐसा करने से ना केवल इस पृथ्वी के जीवन में संतुष्टि एवं आनन्द मिलता है (युहन्ना 10:10), वरन पृथ्वी के बाद के अनन्त जीवन के लिए भी सभी मसीही विश्वासियों के लिए संतुष्टि एवं आनन्द सुनिश्चित हो जाता है।

   इसीलिए यह आवश्यक है कि हम परमेश्वर के साथ संगति के लिए समय निकालें और उसके प्रेम में विश्राम लेते रहें - उस प्रेम में जिसमें होकर परमेश्वर ने मेरी और आपकी सृष्टि करी तथा संसार के सभी लोगों के उद्धार एवं पाप क्षमा के लिए प्रभु यीशु को बलिदान होने के लिए संसार में भेजा। यही प्रेम हमारे अस्तित्व कारण तथा हमारी आशीषों का आधार है।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में भजनकार ने जिस प्रकार इस बात को व्यक्त किया है वह मुझे बहुत पसन्द है: "परन्तु परमेश्वर के समीप रहना, यही मेरे लिये भला है; मैं ने प्रभु यहोवा को अपना शरणस्थान माना है, जिस से मैं तेरे सब कामों का वर्णन करूं" (भजन 73:28)।

   और, परमेश्वर के समीप रहने का तरीका क्या है? यह करने का एक तरीका है वह बात जो मैंने कई वर्ष पहले आरंभ करी थी और जिसे आप भी सरलता से कर सकते हैं: प्रति प्रातः परमेश्वर के वचन बाइबल में से प्रभु यीशु की जीवनी अर्थात सुसमाचारों (मत्ती, मरकुस, लूका, युहन्ना) में से एक खण्ड पढ़ें और उनमें ध्यान करें कि प्रभु यीशु ने क्या कहा, क्या किया - आखिरकर वह हमें परमेश्वर के बारे में बताने और उसके जीवन को प्रगट करने ही तो आया था (इब्रानियों 1:1-3)। फिर अपने आप को उस पढ़े गए खण्ड के घटनाक्रम में रखें, उसके किसी मुख्य पात्र के स्थान पर अपने आप को खड़ा करें और विचार करें कि यदि आप वहाँ होते तो आपकी प्रतिक्रीया या प्रत्युत्तर क्या होता? प्रभु यीशु के उस प्रेम और करुणा के बारे में ध्यान करें जो उसने आपके प्रति व्यक्त किया, और फिर उसे इन बातों के लिए धन्यवाद करें। - डेविड रोपर


सबसे बड़े अचरज की बात - प्रभु यीशु मुझे जैसे व्यक्ति से भी प्रेम करता है।

चोर किसी और काम के लिये नहीं परन्तु केवल चोरी करने और घात करने और नष्‍ट करने को आता है। मैं इसलिये आया कि वे जीवन पाएं, और बहुतायत से पाएं। - युहन्ना 10:10

बाइबल पाठ: भजन 73:21-28
Psalms 73:21 मेरा मन तो चिड़चिड़ा हो गया, मेरा अन्त:करण छिद गया था, 
Psalms 73:22 मैं तो पशु सरीखा था, और समझता न था, मैं तेरे संग रह कर भी, पशु बन गया था। 
Psalms 73:23 तौभी मैं निरन्तर तेरे संग ही था; तू ने मेरे दाहिने हाथ को पकड़ रखा। 
Psalms 73:24 तू सम्मति देता हुआ, मेरी अगुवाई करेगा, और तब मेरी महिमा कर के मुझ को अपने पास रखेगा। 
Psalms 73:25 स्वर्ग में मेरा और कौन है? तेरे संग रहते हुए मैं पृथ्वी पर और कुछ नहीं चाहता। 
Psalms 73:26 मेरे हृदय और मन दोनों तो हार गए हैं, परन्तु परमेश्वर सर्वदा के लिये मेरा भाग और मेरे हृदय की चट्टान बना है।। 
Psalms 73:27 जो तुझ से दूर रहते हैं वे तो नाश होंगे; जो कोई तेरे विरुद्ध व्यभिचार करता है, उसको तू विनाश करता है। 
Psalms 73:28 परन्तु परमेश्वर के समीप रहना, यही मेरे लिये भला है; मैं ने प्रभु यहोवा को अपना शरणस्थान माना है, जिस से मैं तेरे सब कामों का वर्णन करूं।

एक साल में बाइबल: 

  • उत्पत्ति 1-3
  • मत्ती 1


बुधवार, 31 दिसंबर 2014

विचार


   आज, इस वर्ष के अन्तिम दिन में, जब हम आने वाले नव वर्ष की ओर नई योजनाओं और निर्णयों के साथ देखते हैं, तो बीते समय के परमेश्वर भक्त लोगों की आवाज़ें हमें उस बात के बारे में भी विचार करने के लिए कहती हैं जिसे हम नज़रन्दाज़ करके रखना चाहते हैं - हमारी मृत्यु!

   थोमस केम्पिस (1379-1471) ने लिखा, "वह आनन्द से है जो अपनी मृत्यु की घड़ी को सदा अपने सम्मुख रखता है और प्रतिदिन अपने आप को उस घड़ी के लिए तैयार बनाए रखता है"। फ्रांसिओ फेनलॉन (1651-1715) ने लिखा, "जो लोग मृत्यु के बारे में विचार करना नहीं चाहते और एक अवश्यंभावी बात को नज़रन्दाज़ करके रखना चाहते हैं - एक ऐसी बात जिसके बारे में अकसर विचार करने से हम आनन्दित ही हो सकते हैं, उनके अन्धेपन की हर भर्त्सना कम ही होगी। मृत्यु का विचार केवल सांसारिक परिपेक्ष रखने वाले लोगों को ही परेशान कर सकता है"। ये लोग मृत्यु के विषय एक निराशाजनक मानसिकता में विचाराधीन रहने के बात नहीं कर रहे थे; जीवन के प्रति उनका नज़रिया सकारात्माक तथा गतिशील था और वे भरपूरी का जीवन जीने वाले लोग थे।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में दाऊद के द्वारा अपने एक भजन में कही बात के अनुरूप हमें भी परमेश्वर से प्रार्थना करनी चाहिए; दाऊद ने परमेश्वर से प्रार्थना करी: "हे यहोवा ऐसा कर कि मेरा अन्त मुझे मालुम हो जाए, और यह भी कि मेरी आयु के दिन कितने हैं; जिस से मैं जान लूं कि कैसा अनित्य हूं! देख, तू ने मेरे आयु बालिश्त भर की रखी है, और मेरी अवस्था तेरी दृष्टि में कुछ है ही नहीं। सचमुच सब मनुष्य कैसे ही स्थिर क्यों न हों तौभी व्यर्थ ठहरे हैं" (भजन 39:4-5)। इस भजन में दाऊद आगे उन लोगों के लिए भी लिखता है जो व्यर्थ ही परिश्रम करते रहते हैं, संपदा एकत्रित करते रहते हैं और यह नहीं जानते कि उनके बाद कौन उसका अधिकारी होगा (पद 6)। उसका निषकर्ष था कि परमेश्वर ही है जिसमें विश्वास और आशा बनाए रखने से वह आत्मिक विद्रोह और विनाश से बचा रह सकता है (पद 7-8)।

   इस वर्ष का अन्त और नए वर्ष की आशा एक उपयुक्त समय है इस पृथ्वी पर अपने जीवन की संक्षिप्तता और परमेश्वर पर अपनी आशा और विश्वास पर विचार करने का - और यह निर्णय करने का ये विचार हमारे साथ प्रतिदिन बने रहेंगे। - डेविड मैक्कैसलैंड


मृत्यु की अवश्यंभाविता पर विचार करते रहना जीवन के प्रति सकारात्मक और गतिशील रवैया बनाए रखता है।

हम को अपने दिन गिनने की समझ दे कि हम बुद्धिमान हो जाएं। - भजन 90:12

बाइबल पाठ: भजन 39
Psalms 39:1 मैं ने कहा, मैं अपनी चाल चलन में चौकसी करूंगा, ताकि मेरी जीभ से पाप न हो; जब तक दुष्ट मेरे साम्हने है, तब तक मैं लगाम लगाए अपना मुंह बन्द किए रहूंगा। 
Psalms 39:2 मैं मौन धारण कर गूंगा बन गया, और भलाई की ओर से भी चुप्पी साधे रहा; और मेरी पीड़ा बढ़ गई, 
Psalms 39:3 मेरा हृदय अन्दर ही अन्दर जल रहा था। सोचते सोचते आग भड़क उठी; तब मैं अपनी जीभ से बोल उठा; 
Psalms 39:4 हे यहोवा ऐसा कर कि मेरा अन्त मुझे मालुम हो जाए, और यह भी कि मेरी आयु के दिन कितने हैं; जिस से मैं जान लूं कि कैसा अनित्य हूं! 
Psalms 39:5 देख, तू ने मेरे आयु बालिश्त भर की रखी है, और मेरी अवस्था तेरी दृष्टि में कुछ है ही नहीं। सचमुच सब मनुष्य कैसे ही स्थिर क्यों न हों तौभी व्यर्थ ठहरे हैं। 
Psalms 39:6 सचमुच मनुष्य छाया सा चलता फिरता है; सचमुच वे व्यर्थ घबराते हैं; वह धन का संचय तो करता है परन्तु नहीं जानता कि उसे कौन लेगा! 
Psalms 39:7 और अब हे प्रभु, मैं किस बात की बाट जोहूं? मेरी आशा तो तेरी ओर लगी है। 
Psalms 39:8 मुझे मेरे सब अपराधों के बन्धन से छुड़ा ले। मूढ़ मेरी निन्दा न करने पाए। 
Psalms 39:9 मैं गूंगा बन गया और मुंह न खोला; क्योंकि यह काम तू ही ने किया है। 
Psalms 39:10 तू ने जो विपत्ति मुझ पर डाली है उसे मुझ से दूर कर दे, क्योंकि मैं तो तरे हाथ की मार से भस्म हुआ जाता हूं। 
Psalms 39:11 जब तू मनुष्य को अधर्म के कारण डाँट डपटकर ताड़ना देता है; तब तू उसकी सुन्दरता को पतंगे की नाईं नाश करता है; सचमुच सब मनुष्य व्यर्थ अभिमान करते हैं।
Psalms 39:12 हे यहोवा, मेरी प्रार्थना सुन, और मेरी दोहाई पर कान लगा; मेरा रोना सुनकर शांत न रह! क्योंकि मैं तेरे संग एक परदेशी यात्री की नाईं रहता हूं, और अपने सब पुरखाओं के समान परदेशी हूं। 
Psalms 39:13 आह! इस से पहिले कि मैं यहां से चला जाऊं और न रह जाऊं, मुझे बचा ले जिस से मैं प्रदीप्त जीवन प्राप्त करूं!

एक साल में बाइबल: 
  • प्रकाशितवाक्य 19-22

आप सभी के लिए आता नव-वर्ष आशीष पूर्ण एवं मंगलमय हो

मंगलवार, 30 दिसंबर 2014

चिरस्थायी


   हॉबी लॉबी स्टोर्स को स्थापित करने वाले परिवार के सभी सदस्य नया जन्म पाए हुए मसीही विश्वासी हैं। उनका अध्यक्ष, स्टीव ग्रीन परमेश्वर के वचन बाइबल के बारे में बहुत जोशीला है और वह एक ऐसा संग्रहालय बनाना चाहता है जहाँ सारे संसार से लाई गई बाइबल संबंधी दुर्लभ पुस्तकें और पाण्डुलिपियाँ प्रदर्शित हो सकें। स्टीव का कहना है कि, "हम सभी लोगों में बाइबल की बातों को जानने और सीखने के बारे में रुचि जगाना चाहते हैं। बाइबल की बातों को संसार के सामने रखना इस संग्रहालय का उद्देश्य होगा। जितना प्रेम बाइबल से, या फिर जितना विरोध बाइबल का हुआ है, सारे संसार की किसी भी अन्य पुस्तक का कभी नहीं हुआ। इसकी विलक्षण बातों को संसार के सामने रखा जाना ही चाहिए।"

   समय के साथ बाइबल को मिटा देने के अनेक प्रयास हुए होते रहे हैं, किंतु वह आज भी सारे संसार में सबसे अधिक छपने और खरीदे जाने वाली पुस्तक है, संसार की लगभग प्रत्येक भाषा में बाइबल का या उसके एक भाग का अनुवाद हो चुका है और उसे किसी ना किसी माध्यम से प्रकाशित किया जा चुका है - संसार के इतिहास में किसी भी अन्य पुस्तक को यह उपलब्धी नहीं है; और वह संग्रहालय बाइबल की इस कहानी को दिखाएगा। बाइबल के नए नियम खण्ड की पुस्तकों की आज जो प्रतिलिपियाँ हमारे पास उपलब्ध हैं वे लगभग उस समय की हैं जब उन में लिखी घटनाओं के प्रत्यक्षदर्शी विद्यमान थे - संसार की किसी भी अन्य पुस्तक की, उस में लिखी घटनओं के समय जितनी प्राचीन और इतनी मात्रा में उपलब्ध प्रतिलिपियाँ कहीं भी नहीं हैं। बाइबल की इन प्राचीन पुस्तकों में प्रभु यीशु के बारे में दिए गए विवरण, युनानी दार्शनिक सुकरात अथवा रोमी सम्राट कैसर के बारे में उपलब्ध विवरणों से अधिक विश्वासयोग्य हैं, स्त्यापनीय हैं।

   बाइबल के विषय यह सब कोई अचरज की बात नहीं है क्योंकि परमेश्वर स्वयं बाइबल का लिखवाने वाला और उसे लोगों तथा परिस्थितियों में सुरक्षित रखकर आज तक उसे उपलब्ध करवाते रहने वाला रहा है। इसीलिए यशायाह की पुस्तक में लिखा है, "घास तो सूख जाती, और फूल मुर्झा जाता है; परन्तु हमारे परमेश्वर का वचन सदैव अटल रहेगा" (यशायाह 40:8)।

   जब भी आप बाइबल को एक खुले और पक्षपात रहित मन से पढ़ते हैं, उसका सन्देश आपको परमेश्वर के निकट आने और फिर बाइबल के सन्देश को दूसरों के साथ बाँटने को प्रेरित करता है; क्योंकि बाइबल ही समस्त मानव जाति के लिए परमेश्वर का एकमात्र एवं चिरस्थायी सन्देश है। - डेनिस फिशर


सारे संसार के समस्त साहित्य में बाइबल के तुल्य और कुछ नहीं है।

मैं तेरे पवित्र मन्दिर की ओर दण्डवत करूँगा, और तेरी करुणा और सच्चाई के कारण तेरे नाम का धन्यवाद करूँगा, क्योंकि तू ने अपने वचन को अपने बड़े नाम से अधिक महत्त्व दिया है। - भजन 138:2

बाइबल पाठ: यशायाह 40:1-8
Isaiah 40:1 तुम्हारा परमेश्वर यह कहता है, मेरी प्रजा को शान्ति दो, शान्ति! 
Isaiah 40:2 यरूशलेम से शान्ति की बातें कहो; और उस से पुकार कर कहो कि तेरी कठिन सेवा पूरी हुई है, तेरे अधर्म का दण्ड अंगीकार किया गया है: यहोवा के हाथ से तू अपने सब पापों का दूना दण्ड पा चुका है।
Isaiah 40:3 किसी की पुकार सुनाई देती है, जंगल में यहोवा का मार्ग सुधारो, हमारे परमेश्वर के लिये अराबा में एक राजमार्ग चौरस करो। 
Isaiah 40:4 हर एक तराई भर दी जाए और हर एक पहाड़ और पहाड़ी गिरा दी जाए; जो टेढ़ा है वह सीधा और जो ऊंचा नीचा है वह चौरस किया जाए। 
Isaiah 40:5 तब यहोवा का तेज प्रगट होगा और सब प्राणी उसको एक संग देखेंगे; क्योंकि यहोवा ने आप ही ऐसा कहा है।
Isaiah 40:6 बोलने वाले का वचन सुनाई दिया, प्रचार कर! मैं ने कहा, मैं क्या प्रचार करूं? सब प्राणी घास हैं, उनकी शोभा मैदान के फूल के समान है। 
Isaiah 40:7 जब यहोवा की सांस उस पर चलती है, तब घास सूख जाती है, और फूल मुर्झा जाता है; नि:सन्देह प्रजा घास है। 
Isaiah 40:8 घास तो सूख जाती, और फूल मुर्झा जाता है; परन्तु हमारे परमेश्वर का वचन सदैव अटल रहेगा।

एक साल में बाइबल: 
  • प्रकाशितवाक्य 16-18


सोमवार, 29 दिसंबर 2014

सीमाएं


   मैं इतने वर्षों से लोगों के मध्य कार्य कर रहा हूँ लेकिन आज तक मैं किसी ऐसे व्यक्ति से नहीं मिला हूँ जिसका जीवन परमेश्वर की आज्ञाकारिता के कारण अव्यवस्थित या परेशानियों से भरा हुआ हो। लेकिन आज के इस समय में जब व्यक्तिगत स्वतंत्रता एक अटल, अपरिवर्तनीय अधिकार के रूप में देखी जाती है, परमेश्वर के नियमों के अनुसार जीवन संचालित करने की बात करना उस व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर हमला करने के समान देखा जाता है। जो कोई परमेश्वर की सीमाओं के पक्ष में बोलता है उसे लोग अपने जीवन की सीमाओं से बाहर रखना चाहते हैं। लेकिन व्यक्तिगत स्वतंत्रता के इस उन्माद में हमें इस बात को नज़रन्दाज़ नहीं करना चाहिए कि हमारा समाज जीवन की व्यर्थता और निराशा की बढ़ती हुई भावना से भी ग्रसित होता जा रहा है।

   लेकिन परमेश्वर के लोगों का परमेश्वर की सीमाओं के प्रति एक अलग नज़रिया होना चाहिए। परमेश्वर के वचन बाइबल के भजनकार के समान हमें यह मानकर चलना चाहिए कि आशीषित जीवन परमेश्वर के नियमों में आनन्दित रहने से ही होता है, ना कि उनके साथ रहने, खड़े होने, चलने से जो परमेश्वर के विरुद्ध रहते हैं (भजन 1:1-2)। प्रभु यीशु मसीह का प्रत्येक विश्वासी यह समझ लेगा कि परमेश्वर के नियम हमारे जीवन से आनन्द चुरा लेने के लिए नहीं वरन जीवन को आनन्द से भर देने के लिए हैं। वे नियम परमेश्वर की बुद्धिमता द्वारा लगाए गए बाड़े हैं जो हमें लापरवाही के जीवन द्वारा आने वाले छल और परेशानियों से बचा कर रखते हैं।

   इसलिए अगली बार जब आपके सामने परमेश्वर की सीमाओं को लाँघने का प्रलोभन आए, तो ऐसा करने से पहले उन सीमाओं के अन्दर आपको रखने के पीछे परमेश्वर के प्रेम भरे उद्देश्य पर थोड़ा विचार अवश्य कर लीजिएगा। सीमाओं के लिए कुड़कुड़ाएं नहीं वरन उनके लिए, उनके कारण जीवन में मिलने वाली आशीषों के लिए परमेश्वर का धन्यवाद करें। - जो स्टोवैल


परमेश्वर की सीमाएं आपको उसकी आशीषों के दायरे में बनाए रखती हैं।

क्या ही धन्य हैं वे जो चाल के खरे हैं, और यहोवा की व्यवस्था पर चलते हैं! क्या ही धन्य हैं वे जो उसकी चितौनियों को मानते हैं, और पूर्ण मन से उसके पास आते हैं! - भजन 119:1-2

बाइबल पाठ: भजन 1
Psalms 1:1 क्या ही धन्य है वह पुरूष जो दुष्टों की युक्ति पर नहीं चलता, और न पापियों के मार्ग में खड़ा होता; और न ठट्ठा करने वालों की मण्डली में बैठता है! 
Psalms 1:2 परन्तु वह तो यहोवा की व्यवस्था से प्रसन्न रहता; और उसकी व्यवस्था पर रात दिन ध्यान करता रहता है। 
Psalms 1:3 वह उस वृक्ष के समान है, जो बहती नालियों के किनारे लगाया गया है। और अपनी ऋतु में फलता है, और जिसके पत्ते कभी मुरझाते नहीं। इसलिये जो कुछ वह पुरूष करे वह सफल होता है।
Psalms 1:4 दुष्ट लोग ऐसे नहीं होते, वे उस भूसी के समान होते हैं, जो पवन से उड़ाई जाती है। 
Psalms 1:5 इस कारण दुष्ट लोग अदालत में स्थिर न रह सकेंगे, और न पापी धर्मियों की मण्डली में ठहरेंगे; 
Psalms 1:6 क्योंकि यहोवा धर्मियों का मार्ग जानता है, परन्तु दुष्टों का मार्ग नाश हो जाएगा।

एक साल में बाइबल: 
  • प्रकाशितवाक्य 13-15


रविवार, 28 दिसंबर 2014

भला और बुरा


   आग जलाते समय कभी-कभी हवा तेज़ होती है और मुझे आग जलाने नहीं देती; कभी जब आग जल रही होती है और मध्यम पड़ने लगती है तो हवा के झोंके उसे तेज़ कर देने में सहायक हो जाते हैं। वही हवा एक परिस्थिति में तो मेरे लिए बुरी और दूसरी में मेरे लिए अच्छी हो जाती है! जहाँ वह मेरी योजना और कार्य में बाधा बनती है मैं उसे बुरा मान लेता हूँ, और जहाँ वह मेरी सहायक हो जाती है, मैं उसे अच्छा मान लेता हूँ। हवा तो वही है, फर्क केवल मेरे परिपेक्ष और आँकलन का है।

   यह एक उदाहरण है उस विरोधाभास का जिसके अन्तर्गत हम परिस्थितियों अथवा लोगों के विषय में निर्णय लेते हैं या राय व्यक्त करते हैं। यदि वे हमारी योजनाओं और कार्यविधियों में सहायक होते हैं तो अच्छे हैं, यदि बाधा बनते हैं या सहायक नहीं होते तो बुरे हैं।

   लेकिन भले और बुरे की सही पहचान हमें परमेश्वर से मिलती है, जिसके मानक सदा सिद्ध और पक्षपात रहित होते हैं, जो समय, परिस्थितियों, लोगों और आवश्यकताओं के अनुसार बदलते नहीं हैं। उसकी नज़र में भला या बुरा वह नहीं है जो हम मनुष्यों की योजना और सोच के अनुसार भला या बुरा है; वरन भला या बुरा वह है जो उसके स्थापित मानकों के अनुसार भला या बुरा है, जो उसकी योजनाओं की पूर्ति में सहायक या बाधक है। हम मसीही विश्वासियों के लिए परमेश्वर की योजना है कि हम "...एक चुना हुआ वंश, और राज-पदधारी याजकों का समाज, और पवित्र लोग, और (परमेश्वर की) निज प्रजा हो, इसलिये कि जिसने तुम्हें अन्धकार में से अपनी अद्भुत ज्योति में बुलाया है, उसके गुण प्रगट करो" (1 पतरस 2:9)।

   परमेश्वर की इस योजना की पूर्ति के लिए हमें सब लोगों को आदर देना है, सभी मसीही विश्वासियों से प्रेम रखना है, परमेश्वर के भय और भक्ति में जीवन व्यतीत करना है और अपने ऊपर अधिकार रखने वालों का सम्मान करना है चाहे वे हमारे मन के अनुरूप हों अथवा नहीं (पद 17-18)। हमारे इस व्यवहार को देख कर उन अविश्वासियों में विश्वास की चिंगारी जगने की संभावना बन जाएगी जो बुरी परिस्थितियों में भी हमारे भले व्यवहार को देखेंगे; और हमारा ऐसा व्यवहार परमेश्वर की महिमा और गौरव का कारण ठहरेगा। - जूली ऐकैरमैन लिंक


जब परिस्थितियाँ बुरी प्रतीत हों तो स्मरण रखिए कि परमेश्वर सदैव भला रहता है।

जो मन के टेढ़े है, उन से यहोवा को घृणा आती है, परन्तु वह खरी चाल वालों से प्रसन्न रहता है। - नीतिवचन 11:20

बाइबल पाठ: 1 पतरस 2:9-25
1 Peter 2:9 पर तुम एक चुना हुआ वंश, और राज-पदधारी याजकों का समाज, और पवित्र लोग, और (परमेश्वर की) निज प्रजा हो, इसलिये कि जिसने तुम्हें अन्धकार में से अपनी अद्भुत ज्योति में बुलाया है, उसके गुण प्रगट करो। 
1 Peter 2:10 तुम पहिले तो कुछ भी नहीं थे, पर अब परमेश्वर ही प्रजा हो: तुम पर दया नहीं हुई थी पर अब तुम पर दया हुई है।
1 Peter 2:11 हे प्रियों मैं तुम से बिनती करता हूं, कि तुम अपने आप को परदेशी और यात्री जान कर उस सांसारिक अभिलाषाओं से जो आत्मा से युद्ध करती हैं, बचे रहो। 
1 Peter 2:12 अन्यजातियों में तुम्हारा चालचलन भला हो; इसलिये कि जिन जिन बातों में वे तुम्हें कुकर्मी जान कर बदनाम करते हैं, वे तुम्हारे भले कामों को देख कर; उन्‍हीं के कारण कृपा दृष्टि के दिन परमेश्वर की महिमा करें।
1 Peter 2:13 प्रभु के लिये मनुष्यों के ठहराए हुए हर एक प्रबन्‍ध के आधीन में रहो, राजा के इसलिये कि वह सब पर प्रधान है। 
1 Peter 2:14 और हाकिमों के, क्योंकि वे कुकिर्मयों को दण्‍ड देने और सुकिर्मयों की प्रशंसा के लिये उसके भेजे हुए हैं। 
1 Peter 2:15 क्योंकि परमेश्वर की इच्छा यह है, कि तुम भले काम करने से निर्बुद्धि लोगों की अज्ञानता की बातों को बन्‍द कर दो। 
1 Peter 2:16 और अपने आप को स्‍वतंत्र जानो पर अपनी इस स्‍वतंत्रता को बुराई के लिये आड़ न बनाओ, परन्तु अपने आप को परमेश्वर के दास समझ कर चलो। 
1 Peter 2:17 सब का आदर करो, भाइयों से प्रेम रखो, परमेश्वर से डरो, राजा का सम्मान करो।
1 Peter 2:18 हे सेवकों, हर प्रकार के भय के साथ अपने स्‍वामियों के आधीन रहो, न केवल भलों और नम्रों के, पर कुटिलों के भी। 
1 Peter 2:19 क्योंकि यदि कोई परमेश्वर का विचार कर के अन्याय से दुख उठाता हुआ क्‍लेश सहता है, तो यह सुहावना है। 
1 Peter 2:20 क्योंकि यदि तुम ने अपराध कर के घूंसे खाए और धीरज धरा, तो उस में क्या बड़ाई की बात है? पर यदि भला काम कर के दुख उठाते हो और धीरज धरते हो, तो यह परमेश्वर को भाता है। 
1 Peter 2:21 और तुम इसी के लिये बुलाए भी गए हो क्योंकि मसीह भी तुम्हारे लिये दुख उठा कर, तुम्हें एक आदर्श दे गया है, कि तुम भी उसके चिन्ह पर चलो। 
1 Peter 2:22 न तो उसने पाप किया, और न उसके मुंह से छल की कोई बात निकली। 
1 Peter 2:23 वह गाली सुन कर गाली नहीं देता था, और दुख उठा कर किसी को भी धमकी नहीं देता था, पर अपने आप को सच्चे न्यायी के हाथ में सौपता था। 
1 Peter 2:24 वह आप ही हमारे पापों को अपनी देह पर लिये हुए क्रूस पर चढ़ गया जिस से हम पापों के लिये मर कर के धामिर्कता के लिये जीवन बिताएं: उसी के मार खाने से तुम चंगे हुए। 
1 Peter 2:25 क्योंकि तुम पहिले भटकी हुई भेड़ों की नाईं थे, पर अब अपने प्राणों के रखवाले और अध्यक्ष के पास फिर आ गए हो।

एक साल में बाइबल: 
  • प्रकाशितवाक्य 9-12