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गुरुवार, 2 जुलाई 2015

आश्चर्यकर्म


   परमेश्वर द्वारा रचे गए प्राणियों में तितली अद्भुत रूप से सुन्दर और विलक्षण है। उसके रंगीन पंख, नाज़ुक उड़ान और उसका एक से दूसरे इलाके को प्रवास करना उसे प्राणी जगत की उत्कृष्ठ कृतियों में से एक बना देती हैं। उड़ान भरने की क्षमता रखने वाला यह पतंगा, ना केवल दिखने में आनन्दयक होता है, वरन यह परमेश्वर के अद्भुत रचनात्मक कार्यों का उदाहरण भी प्रदान करता है। तितलियों पर शोध करने वाले वैज्ञानिकों के अनुसार मैजिस्टिक मोनार्क प्रजाति की तितली उत्तरी अमेरिका से मध्य-अमेरिका का 3000 मील का सफर तय करके उसी पेड़ पर पहुँच जाती है जहाँ से उसका और उसके पूर्वजों का जीवन आरंभ हुआ था, और उसे इस प्रकार पहुँचाने का कार्य उसका सूक्षम सा मस्तिष्क करता है। मोनार्क के जीवन में होने वाले कायान्तरण पर ध्यान कीजिए - एक छोटे से अण्डे से निकलने वाला सूक्षम सा केटरपिल्लर (इल्ली) जब पत्ते खा खा कर बड़ा हो जाता है तो वह फिर अपने चारों ओर एक आवरण लपेट कर लटक जाता है, जिसके अन्दर फिर वह एक ऐसा रसायन छोड़ता है जो उसके सारे अंगों को गला कर लुगदी सा कर देता है, अर्थात उसका कोई भी प्रकट अंग नहीं रह जाता। फिर उस आवरण के अन्दर की लुगदी से मस्तिष्क, शरीर, सिर, टाँगें, पंख आदि बनते हैं और एक अति सुन्दर तितली बाहर निकल कर आती है।

   एक तितली विशेषज्ञ का कहना है, "इल्ली के शरीर से तितली का शरीर और पंख बनना, निःसन्देह इस पृथ्वी पर विद्यमान जीवन का एक महान अजूबा है।" एक अन्य विशषज्ञ ने कहा, "इसमें कोई शक नहीं कि यह एक आश्चर्यकर्म है।"

   परमेश्वर के वचन बाइबल में भजनकार परमेश्वर की सृष्टि के बारे में कहता है: "हे यहोवा तेरे काम अनगिनित हैं! इन सब वस्तुओं को तू ने बुद्धि से बनाया है; पृथ्वी तेरी सम्पत्ति से परिपूर्ण है" (भजन 104:24) - और तितली परमेश्वर के उन कार्यों में से एक है। - डेव ब्रैनन


सृष्टि की रचना एक महान रचनाकार की ओर इशारा करती है।

हे मेरे परमेश्वर यहोवा, तू ने बहुत से काम किए हैं! जो आश्चर्यकर्म और कल्पनाएं तू हमारे लिये करता है वह बहुत सी हैं; तेरे तुल्य कोई नहीं! मैं तो चाहता हूं की खोल कर उनकी चर्चा करूं, परन्तु उनकी गिनती नहीं हो सकती। - भजन 40:5

बाइबल पाठ: भजन 104:10-24
Psalms 104:10 तू नालों में सोतों को बहाता है; वे पहाड़ों के बीच से बहते हैं, 
Psalms 104:11 उन से मैदान के सब जीव-जन्तु जल पीते हैं; जंगली गदहे भी अपनी प्यास बुझा लेते हैं। 
Psalms 104:12 उनके पास आकाश के पक्षी बसेरा करते, और डालियों के बीच में से बोलते हैं। 
Psalms 104:13 तू अपनी अटारियों में से पहाड़ों को सींचता है तेरे कामों के फल से पृथ्वी तृप्त रहती है।
Psalms 104:14 तू पशुओं के लिये घास, और मनुष्यों के काम के लिये अन्न आदि उपजाता है, और इस रीति भूमि से वह भोजन- वस्तुएं उत्पन्न करता है, 
Psalms 104:15 और दाखमधु जिस से मनुष्य का मन आनन्दित होता है, और तेल जिस से उसका मुख चमकता है, और अन्न जिस से वह सम्भल जाता है। 
Psalms 104:16 यहोवा के वृक्ष तृप्त रहते हैं, अर्थात लबानोन के देवदार जो उसी के लगाए हुए हैं। 
Psalms 104:17 उन में चिड़ियां अपने घोंसले बनाती हैं; लगलग का बसेरा सनौवर के वृक्षों में होता है। 
Psalms 104:18 ऊंचे पहाड़ जंगली बकरों के लिये हैं; और चट्टानें शापानों के शरणस्थान हैं। 
Psalms 104:19 उसने नियत समयों के लिये चन्द्रमा को बनाया है; सूर्य अपने अस्त होने का समय जानता है। 
Psalms 104:20 तू अन्धकार करता है, तब रात हो जाती है; जिस में वन के सब जीव जन्तु घूमते फिरते हैं। 
Psalms 104:21 जवान सिंह अहेर के लिये गरजते हैं, और ईश्वर से अपना आहार मांगते हैं। 
Psalms 104:22 सूर्य उदय होते ही वे चले जाते हैं और अपनी मांदों में जा बैठते हैं। 
Psalms 104:23 तब मनुष्य अपने काम के लिये और सन्ध्या तक परिश्रम करने के लिये निकलता है। 
Psalms 104:24 हे यहोवा तेरे काम अनगिनित हैं! इन सब वस्तुओं को तू ने बुद्धि से बनाया है; पृथ्वी तेरी सम्पत्ति से परिपूर्ण है।

एक साल में बाइबल: 
  • अय्युब 22-24
  • प्रेरितों 11


बुधवार, 1 जुलाई 2015

वापसी


   अमेरिका के कॉलेजों की परस्पर खेल स्पर्धाओं में सबसे लंबा लगातार चल रहा जीत का सिलसिला जनवरी 18, 2012 को तब समाप्त हुआ जब येल विश्वविद्यालय की टीम ने ट्रिनिटी कॉलेज की टीम को स्क्वैश के खेल के मुकाबले में हरा दिया। 14 वर्षों में लगातार जीते गए 252 स्क्वैश मुकाबलों में जीतते रहने के बाद मिली इस हार के अगली प्रातः ट्रिनिटी कॉलेज के खेल प्रशिक्षक पौल असियान्ते को अपने एक मित्र और फुटबॉल के राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति-प्राप्त तथा जाने-माने प्रशिक्षक द्वारा लिखा गया एक ई-मेल मिला, जिसमें उन्होंने अपने मित्र पौल को लिखा, "यह तुम्हारे लिए वापसी करने का अवसर है!" यह ई-मेल लिखने के दस दिन के बाद उस जाने-माने फुटबॉल प्रशिक्षक की टीम अपने एक खेल मुकाबले में हार गई! कभी ना कभी हार का सामना सभी को करना पड़ता ही है।

   खेल स्पर्धाओं में होने वाली हार के कारण होने वाली ग्लानि, हमारे आत्मिक जीवन में होने वाली हार की ग्लानि को प्रतिबिंबित करती है। यदि हमने परमेश्वर और अपने साथ के अन्य लोगों को दुखी या निराश किया है तो हम उस ग्लानि से कैसे उभर और निकल सकते हैं? सर्वप्रथम, इस बात को कभी नहीं भूलें कि परमेश्वर हमारी रचना को जानता है और यह भी कि हम कमज़ोर पड़ सकते हैं, गिर सकते हैं (भजन 103:14) और अपने लोगों को परमेश्वर का आश्वासन है: "चाहे वह गिरे तौभी पड़ा न रह जाएगा, क्योंकि यहोवा उसका हाथ थामे रहता है" (भजन 37:24)। इसीलिए प्रेरित यूहन्ना अपनी पत्री में लिखता है: "यदि हम कहें, कि हम में कुछ भी पाप नहीं, तो अपने आप को धोखा देते हैं: और हम में सत्य नहीं। यदि हम अपने पापों को मान लें, तो वह हमारे पापों को क्षमा करने, और हमें सब अधर्म से शुद्ध करने में विश्वासयोग्य और धर्मी है। यदि कहें कि हम ने पाप नहीं किया, तो उसे झूठा ठहराते हैं, और उसका वचन हम में नहीं है" (1 यूहन्ना 1:8-10)। परमेश्वर हमें क्षमा करने और सब अधर्म से शुद्ध करने के लिए इसलिए तैयार रहता है क्योंकि सभी मनुष्यों के सभी पापों का दण्ड प्रभु यीशु अपने ऊपर ले चुका है, उसे भोग चुका है; इसलिए अब किसी को अपने पापों का दण्ड भुगतने की आवश्यकता नहीं है, प्रभु यीशु में लाए गए विश्वास और माँगी गई क्षमा के द्वारा सभी पापों के सभी दण्डों से बचा जा सकता है (1 यूहन्ना 2:2)।

   परमेश्वर द्वारा समस्त मानव जाति को उपलब्ध करवाया गया यह क्षमा और वापसी का अवसर हमें पाप के दासत्व से मुक्त कर के अतीत की गलतियों की निराशा में रहने की बजाए पुनः अपने वर्तमान तथा भविष्य को संवारने-सुधारने का अवसर प्रदान करता है। हमें धोकर शुद्ध करने की परमेश्वर की विश्वासयोग्यता, हमें एक शुद्ध मन के साथ परमेश्वर की ओर वापसी के लिए प्रेरित करती है।

   आप की स्थिति, पाप और निराशा आपकी अपनी या दुनिया की नज़रों में चाहे कैसी भी भयानक और गिरी हुई क्यों ना हो, आज परमेश्वर आपको प्रभु यीशु में होकर क्षमा करने और अनन्त काल के आनन्द में वापसी करने के लिए बुला रहा है। क्या आप उसके निमंत्रण को स्वीकार करेंगे? - डेविड मैक्कैसलैंड


अतीत के अंधकार में जीते रहने की बजाए परमेश्वर के साथ आज की ज्योति और कल की उज्जवल आशा के आनन्द में जीएं।

क्योंकि वह हमारी सृष्टि जानता है; और उसको स्मरण रहता है कि मनुष्य मिट्टी ही है। - भजन 103:14

बाइबल पाठ: 1 यूहन्ना 1:5-2:2
1 John 1:5 जो समाचार हम ने उस से सुना, और तुम्हें सुनाते हैं, वह यह है; कि परमेश्वर ज्योति है: और उस में कुछ भी अन्धकार नहीं। 
1 John 1:6 यदि हम कहें, कि उसके साथ हमारी सहभागिता है, और फिर अन्धकार में चलें, तो हम झूठे हैं: और सत्य पर नहीं चलते। 
1 John 1:7 पर यदि जैसा वह ज्योति में है, वैसे ही हम भी ज्योति में चलें, तो एक दूसरे से सहभागिता रखते हैं; और उसके पुत्र यीशु का लोहू हमें सब पापों से शुद्ध करता है। 
1 John 1:8 यदि हम कहें, कि हम में कुछ भी पाप नहीं, तो अपने आप को धोखा देते हैं: और हम में सत्य नहीं। 
1 John 1:9 यदि हम अपने पापों को मान लें, तो वह हमारे पापों को क्षमा करने, और हमें सब अधर्म से शुद्ध करने में विश्वासयोग्य और धर्मी है। 
1 John 1:10 यदि कहें कि हम ने पाप नहीं किया, तो उसे झूठा ठहराते हैं, और उसका वचन हम में नहीं है। 
1 John 2:1 हे मेरे बालकों, मैं ये बातें तुम्हें इसलिये लिखता हूं, कि तुम पाप न करो; और यदि कोई पाप करे, तो पिता के पास हमारा एक सहायक है, अर्थात धार्मिक यीशु मसीह। 
1 John 2:2 और वही हमारे पापों का प्रायश्‍चित्त है: और केवल हमारे ही नहीं, वरन सारे जगत के पापों का भी।

एक साल में बाइबल: 
  • अय्युब 20-21
  • प्रेरितों 10:24-48


मंगलवार, 30 जून 2015

अनुग्रह


   एक संध्या मैं एक नर्सिंग होम गया, मुझे आया देखकर वहाँ भर्ती एक व्यक्ति टॉम मुझसे बातचीत करने के लिए अपने कमरे से बाहर निकल आया। कुछ देर बात करने के पश्चात टॉम ने पूछा, "क्या परमेश्वर इस बात से अपमानित अनुभव करेगा कि मैं इतने वर्षों के बाद अब मसीही विश्वासी बनना चाहता हूँ?" मेरे लिए टॉम का यह प्रश्न आश्चर्यजनक नहीं था। एक पास्टर होने के नाते मैंने इसी प्रश्न को भिन्न रूपों में अनेक वृद्धों से सुना है, उन से सुना है जो नशीली पदार्थों की लत से निकलना चाहते हैं और उन से भी जो अपने दुषकर्मों के कारण जेल में सज़ा काट रहे हैं। इन सब, और इनके समान ही अन्य लोगों को भी लगता है कि उनका वर्तमान या बीता हुआ जीवन उन्हें परमेश्वर के निकट आने या उसके लिए उपयोगी होने में आड़े आएगा और परमेश्वर उन्हें ग्रहण नहीं करेगा। ऐसा सोचने या मानने वाले सभी लोगों के लिए यह खुशखबरी है कि प्रभु यीशु संसार के पापियों के लिए ही आया (मरकुस 2:17) और वे सब उसको प्रीय हैं, उसे ग्रहणयोग्य हैं।

   टॉम के इस प्रश्न के उत्तर में मैंने उसके साथ परमेश्वर के वचन बाइबल के अध्ययन में थोड़ा समय बिताया और उसमें दिए गए कुछ उन लोगों के उदाहरणों को देखा जो अपने बीते या वर्तमान जीवन के कारण यह सोच सकते थे कि वे परमेश्वर को ग्रहणयोग्य नहीं रहे या उसके लिए उपयोगी नहीं रहे किंतु परमेश्वर ने उन्हें ग्रहण भी किया और उपयोग भी किया। जिन लोगों के उदाहरणों को हमने देखा उनमें रहाब नामक वेश्या भी थी (यहोशु 2:12-14; इब्रानियों 11:31) और ज़क्कई नामक चुँगी लेने वाला भी (लूका 19:1-8)। इन सब ने संसार के लोगों को अस्वीकारीय अपने चरित्र और कर्मों के बावजूद प्रभु परमेश्वर की ओर हाथ बढ़ाया और प्रभु ने उन्हें थामा, अपना बनाकर उनके जीवनों को सुधारा और परिवर्तित किया, और अपने लिए उपयोगी भी बनाया।

   हमने बाइबल से प्रभु यीशु द्वारा दाख की बारी में मज़दूरी करने वालों के दृष्टांत को भी देखा (मत्ती 20:1-16) जहाँ दिन के आरंभ में कार्य करने को लिए गए लोग स्वामी के लिए अधिक कार्य कर सके परन्तु दिन ढलते हुए रखे लोग उतना कार्य नहीं कर सके, किंतु दाख की बारी के स्वामी ने दोनों के काम को समान महत्व दिया और समान ही मेहनताना भी दिया। उस स्वामी ने ना किसी को कमतर जाना और ना ही किसी के प्रति अपने अनुग्रह में फर्क रखा।

   हमारा भूतकाल या वर्तमान जैसा भी हो, परमेश्वर हम सबसे प्रेम करता है और अपने प्रेम को हम पर प्रगट करने की लालसा रखता है, हम पर अनुग्रह करना चाहता है, हमारे साथ एक गहरा और स्थाई संबंध बनाना चाहता है। उसके इस अनुग्रह और प्रेम को स्वीकार करना या अस्वीकार करना, यह निर्णय हमारा है। - रैंडी किल्गोर


आज अपना जीवन प्रभु यीशु को समर्पित करने का तात्पर्य है उसे अनन्तकाल के लिए आशीषित तथा सुरक्षित कर लेना।

यीशु ने यह सुनकर, उन से कहा, भले चंगों को वैद्य की आवश्यकता नहीं, परन्तु बीमारों को है: मैं धर्मियों को नहीं, परन्तु पापियों को बुलाने आया हूं। - मरकुस 2:17

बाइबल पाठ: मत्ती 20:1-16
Matthew 20:1 स्वर्ग का राज्य किसी गृहस्थ के समान है, जो सबेरे निकला, कि अपने दाख की बारी में मजदूरों को लगाए। 
Matthew 20:2 और उसने मजदूरों से एक दीनार रोज पर ठहराकर, उन्हें अपने दाख की बारी में भेजा। 
Matthew 20:3 फिर पहर एक दिन चढ़े, निकल कर, और औरों को बाजार में बेकार खड़े देखकर, 
Matthew 20:4 उन से कहा, तुम भी दाख की बारी में जाओ, और जो कुछ ठीक है, तुम्हें दूंगा; सो वे भी गए। 
Matthew 20:5 फिर उसने दूसरे और तीसरे पहर के निकट निकलकर वैसा ही किया। 
Matthew 20:6 और एक घंटा दिन रहे फिर निकलकर औरों को खड़े पाया, और उन से कहा; तुम क्यों यहां दिन भर बेकार खड़े रहे? उन्हों ने उस से कहा, इसलिये, कि किसी ने हमें मजदूरी पर नहीं लगाया। 
Matthew 20:7 उसने उन से कहा, तुम भी दाख की बारी में जाओ। 
Matthew 20:8 सांझ को दाख बारी के स्‍वामी ने अपने भण्‍डारी से कहा, मजदूरों को बुलाकर पिछलों से ले कर पहिलों तक उन्हें मजदूरी दे दे। 
Matthew 20:9 सो जब वे आए, जो घंटा भर दिन रहे लगाए गए थे, तो उन्हें एक एक दीनार मिला। 
Matthew 20:10 जो पहिले आए, उन्होंने यह समझा, कि हमें अधिक मिलेगा; परन्तु उन्हें भी एक ही एक दीनार मिला। 
Matthew 20:11 जब मिला, तो वह गृहस्थ पर कुडकुड़ा के कहने लगे। 
Matthew 20:12 कि इन पिछलों ने एक ही घंटा काम किया, और तू ने उन्हें हमारे बराबर कर दिया, जिन्हों ने दिन भर का भार उठाया और घाम सहा? 
Matthew 20:13 उसने उन में से एक को उत्तर दिया, कि हे मित्र, मैं तुझ से कुछ अन्याय नहीं करता; क्या तू ने मुझ से एक दीनार न ठहराया? 
Matthew 20:14 जो तेरा है, उठा ले, और चला जा; मेरी इच्छा यह है कि जितना तुझे, उतना ही इस पिछले को भी दूं। 
Matthew 20:15 क्या उचित नहीं कि मैं अपने माल से जो चाहूं सो करूं? क्या तू मेरे भले होने के कारण बुरी दृष्टि से देखता है? 
Matthew 20:16 इसी रीति से जो पिछले हैं, वह पहिले होंगे, और जो पहिले हैं, वे पिछले होंगे।

एक साल में बाइबल: 
  • अय्युब 17-19
  • प्रेरितों 10:1-23


सोमवार, 29 जून 2015

प्रेम और प्रार्थना


   बच्चों की एक लोकप्रीय पुस्तक Winni the Pooh में विनी एक अन्य पात्र, कांगा, को छलांग लगाकर भाग निकलते हुए देखती है और सोचती है, "काश मैं भी ऐसे ही छलांग लगा पाती; परन्तु कुछ कर सकते हैं और कुछ नहीं कर सकते - जीवन ऐसा ही है।" हम भी अपने जीवन में देखते हैं कि कुछ लोग ऐसे अदभुत कार्य कर लेते हैं जिन्हेंकर पाना हमारे लिए संभव नहीं; वे कर पाते हैं पर हम नहीं कर पाते - जीवन ऐसा ही है!

   जब हम जीवन के ऐसे समय में पहुँचें जहाँ वह सब करना भी कठिन लगने लगे जिसे हम पहले सरलता से कर लेते थे तो अपने आप को व्यर्थ और अनुपयोगी समझ लेना स्वाभाविक है। यह जीवन का एक सत्य है कि हम सदा ही सब कुछ करने योग्य नहीं रह सकते; किंतु कुछ ऐसा है जो हम हर उम्र में कर सकते हैं - प्रार्थना और प्रेम करना। सत्य तो यह है कि जीवन के अनुभवों से हम इन्हें और भी भलि-भाँति करना सीख लेते हैं।

   परमेश्वर तथा औरों को देने के लिए प्रेम से अच्छी और कोई भेंट नहीं है, और ना ही इस भेंट का मूल्य सांसारिक वस्तुओं से कमतर है; क्योंकि परमेश्वर की सारी व्यवस्था का सार तथा आधार यही है: "उसने उस से कहा, तू परमेश्वर अपने प्रभु से अपने सारे मन और अपने सारे प्राण और अपनी सारी बुद्धि के साथ प्रेम रख। बड़ी और मुख्य आज्ञा तो यही है। और उसी के समान यह दूसरी भी है, कि तू अपने पड़ोसी से अपने समान प्रेम रख। ये ही दो आज्ञाएं सारी व्यवस्था और भविष्यद्वक्ताओं का आधार है" (मत्ती 22:37-40) और प्रेम ही के द्वारा हम परमेश्वर और मनुष्यों के प्रति अपनी सारी ज़िम्मेदारी को पूरा कर सकते हैं तथा सर्वोत्तम उपहार भी प्रेम ही है (1 कुरिन्थियों 13:13)।

   ऐसे ही, हम अन्य लोगों के लिए परमेश्वर से प्रार्थनाएं भी कर सकते हैं। प्रेरित पौलुस ने कुलुस्से के मसीही विश्वासियों को उभारा कि "प्रार्थना में लगे रहो, और धन्यवाद के साथ उस में जागृत रहो" (कुलुस्सियों 4:2) क्योंकि हमारी प्रार्थनाएं इस सृष्टि में एक अद्भुत एवं प्रभावशाली शक्ति हैं जो बड़े सामर्थी कार्य करवा देती हैं।

   प्रेम और प्रार्थना वास्तव में बड़े महान कार्य हैं, वरन हमारे द्वारा हो सकने वाले सबसे महान कार्य हैं। क्यों? क्योंकि हमारा परमेश्वर पिता प्रेमी परमेश्वर है और उसकी सामर्थ हमारी प्रार्थनाओं के द्वारा होने वाले कार्यों से दिखाई देती है। - डेविड रोपर


परमेश्वर अपना प्रेम हमारे हृदयों में उंडेलता है जिससे कि हम उसे दूसरों तक पहुँचा सकें।

पर अब विश्वास, आशा, प्रेम थे तीनों स्थाई है, पर इन में सब से बड़ा प्रेम है। - 1 कुरिन्थियों 13:13

बाइबल पाठ: भजन 92
Psalms 92:1 यहोवा का धन्यवाद करना भला है, हे परमप्रधान, तेरे नाम का भजन गाना; 
Psalms 92:2 प्रात:काल को तेरी करूणा, और प्रति रात तेरी सच्चाई का प्रचार करना, 
Psalms 92:3 दस तार वाले बाजे और सारंगी पर, और वीणा पर गंभीर स्वर से गाना भला है। 
Psalms 92:4 क्योंकि, हे यहोवा, तू ने मुझ को अपने काम से आनन्दित किया है; और मैं तेरे हाथों के कामों के कारण जयजयकार करूंगा।
Psalms 92:5 हे यहोवा, तेरे काम क्या ही बड़े हैं! तेरी कल्पनाएं बहुत गम्भीर हैं! 
Psalms 92:6 पशु समान मनुष्य इस को नहीं समझता, और मूर्ख इसका विचार नहीं करता: 
Psalms 92:7 कि दुष्ट जो घास की नाईं फूलते-फलते हैं, और सब अनर्थकारी जो प्रफुल्लित होते हैं, यह इसलिये होता है, कि वे सर्वदा के लिये नाश हो जाएं, 
Psalms 92:8 परन्तु हे यहोवा, तू सदा विराजमान रहेगा। 
Psalms 92:9 क्योंकि हे यहोवा, तेरे शत्रु, हां तेरे शत्रु नाश होंगे; सब अनर्थकारी तितर बितर होंगे। 
Psalms 92:10 परन्तु मेरा सींग तू ने जंगली सांढ़ का सा ऊंचा किया है; मैं टटके तेल से चुपड़ा गया हूं। 
Psalms 92:11 और मैं अपने द्रोहियों पर दृष्टि कर के, और उन कुकर्मियों का हाल मेरे विरुद्ध उठे थे, सुनकर सन्तुष्ट हुआ हूं। 
Psalms 92:12 धर्मी लोग खजूर की नाईं फूले फलेंगे, और लबानोन के देवदार की नाईं बढ़ते रहेंगे। 
Psalms 92:13 वे यहोवा के भवन में रोपे जा कर, हमारे परमेश्वर के आंगनों में फूले फलेंगे। 
Psalms 92:14 वे पुराने होने पर भी फलते रहेंगे, और रस भरे और लहलहाते रहेंगे, 
Psalms 92:15 जिस से यह प्रगट हो, कि यहोवा सीधा है; वह मेरी चट्टान है, और उस में कुटिलता कुछ भी नहीं।

एक साल में बाइबल: 
  • अय्युब 14-16
  • प्रेरितों 9:22-43


रविवार, 28 जून 2015

दुखद सफलता


   स्कॉटलैंड के निवासी और उपन्यासकार, कवि तथा मसीही सेवक जॉर्ज मैक्डौनल्ड (1824-1905) ने अपनी पुस्तक Unspoken Sermons में एक विसमयकारी बात लिखी जिसे आज भी अनेक लेखकों और वक्ताओं द्वारा उद्धृत किया जाता है; उन्होंने लिखा: "मनुष्य जो कुछ भी परमेश्वर की इच्छा के बाहर करता है उसमें या तो उसे दयनीय असफलता मिलती है - अन्यथा वह और भी अधिक दुखद सफलता का पात्र बनता है।" यह कथन लिखते समय मैक्डौनल्ड मसीही विश्वासियों द्वारा आत्म-त्याग के कठिन विषय और उसे प्रभु यीशु मसीह की शिक्षा, "उसने सब से कहा, यदि कोई मेरे पीछे आना चाहे, तो अपने आप से इन्कार करे और प्रति दिन अपना क्रूस उठाए हुए मेरे पीछे हो ले। क्योंकि जो कोई अपना प्राण बचाना चाहेगा वह उसे खोएगा, परन्तु जो कोई मेरे लिये अपना प्राण खोएगा वही उसे बचाएगा" (लूका 9:23-24) पर लागू करने के बारे में लिख रहे थे।

   मैक्डौनल्ड का कहना था कि वास्तविक आ्त्म-त्याग का अर्थ अपनी स्वाभाविक इच्छाओं को केवल दबा देना नहीं है वरन यह कि "हम प्रत्येक बात को वैसा देखें जैसा हमारा प्रभु देखता था, उनके प्रति वही दृष्टिकोण रखें जैसा प्रभु यीशु का था। हमें परमेश्वर की इच्छा को अपने असतित्व का आधार बनाना होगा....यह नहीं सोचना कि मुझे क्या करना अच्छा लगता है वरन यह कि मेरा प्रभु क्या चाहता है कि मैं करूँ।"

   जो हमें अच्छा लगता है, जो हम चाहते हैं, उसे ही प्राप्त करना "दुखद सफलता" है। वास्तविक सफलता है प्रभु यीशु के लिए अपने प्राणों को भी खो देना; तब ही जिन बातों को हमने प्रभु की इच्छा के लिए छोड़ा था उन्हें प्रभु की इच्छा में होकर आशीष तथा संपूर्ण परिपूर्णता के साथ प्राप्त कर सकने का अवसर और मार्ग मिल सकेगा। - डेविड मैक्कैसलैंड


परमेश्वर के साथ निकटतम और सार्थक रीति से चल पाने से पहले नम्रता तथा आत्म-त्याग की अंतरभावना आती है।

क्योंकि यदि तुम शरीर के अनुसार दिन काटोगे, तो मरोगे, यदि आत्मा से देह की क्रीयाओं को मारोगे, तो जीवित रहोगे। - रोमियों 8:13

बाइबल पाठ: लूका 9:18-27
Luke 9:18 जब वह एकान्‍त में प्रार्थना कर रहा था, और चेले उसके साथ थे, तो उसने उन से पूछा, कि लोग मुझे क्या कहते हैं? 
Luke 9:19 उन्होंने उत्तर दिया, युहन्ना बपतिस्मा देनेवाला, और कोई कोई एलिय्याह, और कोई यह कि पुराने भविष्यद्वक्ताओं में से कोई जी उठा है। 
Luke 9:20 उसने उन से पूछा, परन्तु तुम मुझे क्या कहते हो? पतरस ने उत्तर दिया, परमेश्वर का मसीह। 
Luke 9:21 तब उसने उन्हें चिताकर कहा, कि यह किसी से न कहना। 
Luke 9:22 और उसने कहा, मनुष्य के पुत्र के लिये अवश्य है, कि वह बहुत दुख उठाए, और पुरिनए और महायाजक और शास्त्री उसे तुच्‍छ समझकर मार डालें, और वह तीसरे दिन जी उठे। 
Luke 9:23 उसने सब से कहा, यदि कोई मेरे पीछे आना चाहे, तो अपने आप से इन्कार करे और प्रति दिन अपना क्रूस उठाए हुए मेरे पीछे हो ले। 
Luke 9:24 क्योंकि जो कोई अपना प्राण बचाना चाहेगा वह उसे खोएगा, परन्तु जो कोई मेरे लिये अपना प्राण खोएगा वही उसे बचाएगा। 
Luke 9:25 यदि मनुष्य सारे जगत को प्राप्त करे, और अपना प्राण खो दे, या उस की हानि उठाए, तो उसे क्या लाभ होगा? 
Luke 9:26 जो कोई मुझ से और मेरी बातों से लजाएगा; मनुष्य का पुत्र भी जब अपनी, और अपने पिता की, और पवित्र स्वर्ग दूतों की, महिमा सहित आएगा, तो उस से लजाएगा। 
Luke 9:27 मैं तुम से सच कहता हूं, कि जो यहां खड़े हैं, उन में से कोई कोई ऐसे हैं कि जब तक परमेश्वर का राज्य न देख लें, तब तक मृत्यु का स्‍वाद न चखेंगे।

एक साल में बाइबल: 
  • अय्युब 11-13
  • प्रेरितों 9:1-21


शनिवार, 27 जून 2015

इकठ्ठे


   संसार के अनेक इलाके बर्फ और उसके विसमित करने वाले प्रभावों से परिचित हैं। आकाश से पड़ने वाली बर्फ अनेक छोटे छोटे कणों के एक साथ इकठ्ठा हो जाने से बनती है। यदि उस बर्फ के एक कण को सूक्षम स्तर पर जाकर देखें तो वह जमे हुए पानी का बहुत सुन्दर और अनूठा रूप होता है, और प्रत्येक कण अन्य कणों से भिन्न होता है। बर्फ का एक कण अपने आप में बहुत कमज़ोर होता है; यदि वह आपके हाथ या मुँह पर पड़े तो शीघ्र ही पिघल कर समाप्त हो जाता है। परन्तु जब अनेकों कण एक साथ इकठ्ठा हो जाते हैं तो वे एक ऐसा समूह बनाते हैं जिसकी सामर्थ के आगे कुछ भी टिक नहीं पाता। बर्फ से ढकी ज़मीन और बर्फ से लदे पेड़ सुन्दर दृश्य प्रस्तुत करते हैं किंतु साथ ही वे रास्ते रोक सकते हैं, हर प्रकार का यातायात बाधित कर सकते हैं और जनजीवन को थाम सकते हैं। बर्फ से ढके पहाड़ और इलाके बच्चों के खेलने और मनोरंजन का स्थान, स्की करने के स्थान और मैदानों को जीवन दायक जल देने के स्त्रोत बन जाते हैं। परन्तु भारी हिमपात और बर्फ के खिसकने से विनाश भी होता है। यह सब कुछ इसलिए संभव है क्योंकि अनेक बलहीन और क्षण-भंगुर हिम-कणों के इकठ्ठा हो जाने से उनकी सामर्थ अलग ही हो जाती है।

   कुछ यही स्थिति हम मसीही विश्वासियों के साथ भी है। हम में से प्रत्येक अनूठा है, प्रत्येक के अपने गुण हैं, प्रत्येक की मसीह यीशु के लिए अपनी ही उपयोगिता है। मसीह ने हमें एकाकी रहने और कार्य करने के लिए कदापि नहीं चुना, वरन आरंभ से ही उसने चाहा कि हम एक साथ इकठ्ठा रहकर एक ऐसी सामर्थी मण्डली बनें जो परमेश्वर और उसके उद्देश्यों के लिए कार्यकारी हो, पार्थिव नहीं आलौकिक बातों की खोजी हो और यही संसार के सामने भी प्रस्तुत करे। प्रेरित पौलुस ने भी कुरिन्थुस की मण्डली को लिखी अपनी पहली पत्री में उन्हें स्मरण कराया कि हम सब मिलकर मसीह यीशु की देह बनाते हैं और हम सब को परमेश्वर द्वारा हमें प्रदान किए गए गुणों का उपयोग एक-दूसरे की उन्नति तथा मसीह के नाम की महिमा के लिए करना चाहिए; हम एक साथ इकठ्ठा रहकर कार्य करने के द्वारा ही यह कर सकते हैं।

   परमेश्वर से मिली आशीषों तथा गुणों को परमेश्वर की महिमा के लिए उपयोग कीजिए; अपने आस-पास के लोगों और उनकी आशीषों तथा गुणों के साथ मिलकर सबकी भलाई और मसीह यीशु की महिमा के लिए कार्य कीजिए और परमेश्वर आप में होकर अपनी सामर्थ संसार के सामने प्रकट करेगा। - जो स्टोवैल


अकेले कार्य करने की बजाए हम इकठ्ठे होकर अधिक बेहतर कार्य कर सकते हैं।

क्योंकि जैसे हमारी एक देह में बहुत से अंग हैं, और सब अंगों का एक ही सा काम नहीं। वैसा ही हम जो बहुत हैं, मसीह में एक देह हो कर आपस में एक दूसरे के अंग हैं। - रोमियों 12:4-5

बाइबल पाठ: 1 कुरिन्थियों 12:12-27
1 Corinthians 12:12 क्योंकि जिस प्रकार देह तो एक है और उसके अंग बहुत से हैं, और उस एक देह के सब अंग, बहुत होने पर भी सब मिलकर एक ही देह हैं, उसी प्रकार मसीह भी है। 
1 Corinthians 12:13 क्योंकि हम सब ने क्या यहूदी हो, क्या युनानी, क्या दास, क्या स्‍वतंत्र एक ही आत्मा के द्वारा एक देह होने के लिये बपतिस्मा लिया, और हम सब को एक ही आत्मा पिलाया गया। 
1 Corinthians 12:14 इसलिये कि देह में एक ही अंग नहीं, परन्तु बहुत से हैं। 
1 Corinthians 12:15 यदि पांव कहे कि मैं हाथ नहीं, इसलिये देह का नहीं, तो क्या वह इस कारण देह का नहीं? 
1 Corinthians 12:16 और यदि कान कहे; कि मैं आंख नहीं, इसलिये देह का नहीं, तो क्या वह इस कारण देह का नहीं? 
1 Corinthians 12:17 यदि सारी देह आंख ही होती तो सुनना कहां से होता? यदि सारी देह कान ही होती तो सूंघना कहां होता? 
1 Corinthians 12:18 परन्तु सचमुच परमेश्वर ने अंगो को अपनी इच्छा के अनुसार एक एक कर के देह में रखा है। 
1 Corinthians 12:19 यदि वे सब एक ही अंग होते, तो देह कहां होती? 
1 Corinthians 12:20 परन्तु अब अंग तो बहुत से हैं, परन्तु देह एक ही है। 
1 Corinthians 12:21 आंख हाथ से नहीं कह सकती, कि मुझे तेरा प्रयोजन नहीं, और न सिर पांवों से कह सकता है, कि मुझे तुम्हारा प्रयोजन नहीं। 
1 Corinthians 12:22 परन्तु देह के वे अंग जो औरों से निर्बल देख पड़ते हैं, बहुत ही आवश्यक हैं। 
1 Corinthians 12:23 और देह के जिन अंगो को हम आदर के योग्य नहीं समझते हैं उन्‍हीं को हम अधिक आदर देते हैं; और हमारे शोभाहीन अंग और भी बहुत शोभायमान हो जाते हैं। 
1 Corinthians 12:24 फिर भी हमारे शोभायमान अंगो को इस का प्रयोजन नहीं, परन्तु परमेश्वर ने देह को ऐसा बना दिया है, कि जिस अंग को घटी थी उसी को और भी बहुत आदर हो। 
1 Corinthians 12:25 ताकि देह में फूट न पड़े, परन्तु अंग एक दूसरे की बराबर चिन्‍ता करें। 
1 Corinthians 12:26 इसलिये यदि एक अंग दु:ख पाता है, तो सब अंग उसके साथ दु:ख पाते हैं; और यदि एक अंग की बड़ाई होती है, तो उसके साथ सब अंग आनन्द मनाते हैं। 
1 Corinthians 12:27 इसी प्रकार तुम सब मिल कर मसीह की देह हो, और अलग अलग उसके अंग हो।

एक साल में बाइबल: 
  • अय्युब 8-10
  • प्रेरितों 8:26-40


शुक्रवार, 26 जून 2015

सबसे बुरा समय


   मई 2011 में मिस्सूरी प्रांत का जोपलिन शहर एक भयानक चक्रवादी तूफान से उजड़ गया। उस दिन एक जवान महिला ने तूफान से बचने के लिए स्नान करने वाले बड़े से टब में लेटकर शरण ली और उसका पति उसकी रक्षा के लिए उसके ऊपर लेट गया। तूफान के वेग से टूटते घर के मलबे और उड़ती गिरती हुई वस्तुओं से पति के शरीर पर चोटें पहुँचती रहीं जिनके कारण उसकी मृत्यु हो गई किंतु उस महिला की जान बच गई। स्वाभाविक रूप से उस महिला के सामने प्रश्न था, "ऐसा क्यों?" लेकिन उस तूफान के एक वर्ष बाद उसी महिला ने कहा कि उसे अब इस बात से सांत्वना मिलती है कि उसके जीवन के सबसे बुरे दिन में भी वह अथाह प्रेम की पात्र थी।

   जब मैं किसी के जीवन के सबसे बुरे दिनों के बारे में सोचती हूँ तो मेरा ध्यान परमेश्वर के वचन बाइबल के एक पात्र, अय्युब की ओर जाता है। अय्युब एक बहुत समृद्ध तथा भक्त व्यक्ति था जो परमेश्वर से बहुत प्रेम करता था, उसकी उपासना करता था और परमेश्वर भी उसकी खराई का उदाहरण देता था। लेकिन एक ही दिन में, अलग अलग घटानाओं में उसके दस बच्चे, उसके सारे सेवक और उसके सारे जानवर मारे गए। अय्युब इस बात से बहुत दुखी हुआ और विलाप करते हुए उसने भी परमेश्वर से प्रश्न किया "ऐसा क्यों?" उसने परमेश्वर से कहा, "हे मनुष्यों के ताकने वाले, मैं ने पाप तो किया होगा, तो मैं ने तेरा क्या बिगाड़ा? तू ने क्यों मुझ को अपना निशाना बना लिया है, यहां तक कि मैं अपने ऊपर आप ही बोझ हुआ हूँ?" (अय्युब 7:20)

   अय्युब के मित्रों ने उस पर दोष लगाया कि अवश्य ही उसने पाप किया है जिसका उसे ऐसा प्रतिफल मिला है; लेकिन आगे चलकर परमेश्वर ने उनके इस दोषारोपण को लेकर अय्युब के मित्रों से कहा, "और ऐसा हुआ कि जब यहोवा ये बातें अय्यूब से कह चुका, तब उसने तेमानी एलीपज से कहा, मेरा क्रोध तेरे और तेरे दोनों मित्रों पर भड़का है, क्योंकि जैसी ठीक बात मेरे दास अय्यूब ने मेरे विषय कही है, वैसी तुम लोगों ने नहीं कही" (अय्युब 42:7)।

   परमेश्वर ने अय्युब को उसके दुखों का कोई कारण तो नहीं बताया, परन्तु परमेश्वर ने अय्युब के प्रश्नों को सुना और उन प्रश्नों के लिए उसे दोषी नहीं ठहराया। वरन परमेश्वर ने अय्युब को सृष्टि की हर बात और सारे संचालन पर अपने नियंत्रण को समझाया और अय्युब ने उसकी इस बात को स्वीकार किया (अय्युब 42:1-6)।

   जब हम परीक्षाओं में पड़ें, दुख परेशानियाँ हम पर आएं, तो आवश्यक नहीं कि परमेश्वर उनका कारण भी हमें बताए। लेकिन हम हर परिस्थिति में हर कठिनाई में इस बात से आश्वस्त रह सकते हैं कि परमेश्वर का प्रेम हमारे प्रति कभी कम नहीं होता; वह सदा हमारे साथ रहता है; हमारे दुखों में हमारे साथ दुखी भी होता है और अन्ततः हर बात के द्वारा हमारा भला ही करता है। - ऐनी सेटास


हमारे प्रति परमेश्वर का प्रेम हमें परीक्षाओं से बचाता नहीं वरन उन परीक्षाओं में हमें सुरक्षित रखता है।

और हम जानते हैं, कि जो लोग परमेश्वर से प्रेम रखते हैं, उन के लिये सब बातें मिलकर भलाई ही को उत्पन्न करती है; अर्थात उन्हीं के लिये जो उस की इच्छा के अनुसार बुलाए हुए हैं। - रोमियों 8:28

बाइबल पाठ: अय्युब 7:11-21
Job 7:11 इसलिये मैं अपना मुंह बन्द न रखूंगा; अपने मन का खेद खोल कर कहूंगा; और अपने जीव की कड़ुवाहट के कारण कुड़कुड़ाता रहूंगा। 
Job 7:12 क्या मैं समुद्र हूँ, वा मगरमच्छ हूँ, कि तू मुझ पर पहरा बैठाता है? 
Job 7:13 जब जब मैं सोचता हूं कि मुझे खाट पर शान्ति मिलेगी, और बिछौने पर मेरा खेद कुछ हलका होगा; 
Job 7:14 तब तब तू मुझे स्वप्नों से घबरा देता, और दर्शनों से भयभीत कर देता है; 
Job 7:15 यहां तक कि मेरा जी फांसी को, और जीवन से मृत्यु को अधिक चाहता है। 
Job 7:16 मुझे अपने जीवन से घृणा आती है; मैं सर्वदा जीवित रहना नहीं चाहता। मेरा जीवनकाल सांस सा है, इसलिये मुझे छोड़ दे। 
Job 7:17 मनुष्य क्या है, कि तू उसे महत्व दे, और अपना मन उस पर लगाए, 
Job 7:18 और प्रति भोर को उसकी सुधि ले, और प्रति क्षण उसे जांचता रहे? 
Job 7:19 तू कब तक मेरी ओर आंख लगाए रहेगा, और इतनी देर के लिये भी मुझे न छोड़ेगा कि मैं अपना थूक निगल लूं? 
Job 7:20 हे मनुष्यों के ताकने वाले, मैं ने पाप तो किया होगा, तो मैं ने तेरा क्या बिगाड़ा? तू ने क्यों मुझ को अपना निशाना बना लिया है, यहां तक कि मैं अपने ऊपर आप ही बोझ हुआ हूँ? 
Job 7:21 और तू क्यों मेरा अपराध क्षमा नहीं करता? और मेरा अधर्म क्यों दूर नहीं करता? अब तो मैं मिट्टी में सो जाऊंगा, और तू मुझे यत्न से ढूंढ़ेगा पर मेरा पता नहीं मिलेगा।

एक साल में बाइबल: 
  • अय्युब 5-7
  • प्रेरितों 8:1-25