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सोमवार, 25 जनवरी 2016

सामन्य दिन


   संग्रहालय की एक प्रदर्श्नी, जिसका शीर्षक था "पॉम्पेई का एक दिन" देखते हुए मैं यह देखकर आश्चर्यचकित हुआ कि वहाँ की बातें बारंबार यह दर्शा रहीं थी कि पॉम्पेई के 20,000 लोगों के लिए 24 अगस्त सन 79 ईसवीं का दिन एक सामन्य दिन के समान ही आरंभ हुआ था, और लोग घरों, बाज़ारों और उस समृद्ध रोमी नगर की बन्दरगाह में अपनी सामान्य दिनचर्या में लगे हुए थे। प्रातः लगभग 8 बजे, निकट के वेसुवियस पहाड़ में एक के बाद एक कुछ छोटे विस्फोट दिखाई दिए और दोपहर होते होते एक भयानक ज्वालामुखी विस्फोट हो गया। 24 घंटे से कम के अन्दर ही पॉम्पेई और उसके अधिकांश लोग ज्वालामुखी की राख की मोटी परत के नीचे दफन हो गए थे। सब कुछ बिलकुल अनेपक्षित था।

   प्रभु यीशु ने अपने अनुयायियों से कहा कि एक दिन वे लौट कर आएंगे। उस दिन भी लोग रोज़ की तरह अपने कार्यों में, व्यवसाय में, भोजन करने में, शादी-ब्याह में लगे होंगे: "जैसे नूह के दिन थे, वैसा ही मनुष्य के पुत्र का आना भी होगा" (मत्ती 24:37); लोगों को ज़रा सा अन्दाज़ा भी नहीं होगा कि क्या होने जा रहा है और प्रलय तथा विनाश उन पर आ पड़ेगा।

   यह बताने में प्रभु का उद्देश्य था कि उनके चेले उनके पुनःआगमन के लिए सदा जागरूक और तैयार रहें: "इसलिये तुम भी तैयार रहो, क्योंकि जिस घड़ी के विषय में तुम सोचते भी नहीं हो, उसी घड़ी मनुष्य का पुत्र आ जाएगा" (मत्ती 24:44)।

   किसी एक सामन्य दिन में अचानक ही सृष्टि के प्रभु का स्वागत करना आपके लिए कैसा रहेगा - अनन्त आनन्द का कारण या अनन्त शोक का कारण? - डेविड मैक्कैसलैंड


तैयार रहिए; आज ही प्रभु यीशु का पुनःआगमन संभव है।

सब बातों का अन्‍त तुरन्त होने वाला है; इसलिये संयमी हो कर प्रार्थना के लिये सचेत रहो। - 1 पतरस 4:7

बाइबल पाठ: मत्ती 24:36-44
Matthew 24:36 उस दिन और उस घड़ी के विषय में कोई नहीं जानता, न स्वर्ग के दूत, और न पुत्र, परन्तु केवल पिता। 
Matthew 24:37 जैसे नूह के दिन थे, वैसा ही मनुष्य के पुत्र का आना भी होगा। 
Matthew 24:38 क्योंकि जैसे जल-प्रलय से पहिले के दिनों में, जिस दिन तक कि नूह जहाज पर न चढ़ा, उस दिन तक लोग खाते-पीते थे, और उन में ब्याह शादी होती थी। 
Matthew 24:39 और जब तक जल-प्रलय आकर उन सब को बहा न ले गया, तब तक उन को कुछ भी मालूम न पड़ा; वैसे ही मनुष्य के पुत्र का आना भी होगा। 
Matthew 24:40 उस समय दो जन खेत में होंगे, एक ले लिया जाएगा और दूसरा छोड़ दिया जाएगा। 
Matthew 24:41 दो स्‍त्रियां चक्की पीसती रहेंगी, एक ले ली जाएगी, और दूसरी छोड़ दी जाएगी। 
Matthew 24:42 इसलिये जागते रहो, क्योंकि तुम नहीं जानते कि तुम्हारा प्रभु किस दिन आएगा। 
Matthew 24:43 परन्तु यह जान लो कि यदि घर का स्‍वामी जानता होता कि चोर किस पहर आएगा, तो जागता रहता; और अपने घर में सेंध लगने न देता। 
Matthew 24:44 इसलिये तुम भी तैयार रहो, क्योंकि जिस घड़ी के विषय में तुम सोचते भी नहीं हो, उसी घड़ी मनुष्य का पुत्र आ जाएगा।

एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 12-13
  • मत्ती 16


रविवार, 24 जनवरी 2016

सर्वोत्तम कथा


   मिशनरी मसीही सेवक एगर्टन रायर्सन यंग ने सन 1700 में कनाडा के सॉलट्यु कबीले के लोगों में सेवकाई करी। उस कबीले के मुख्या ने मसीह यीशु में पापों की क्षमा और उद्धार के सुसमाचार को उनके कबीले में लाने के लिए यंग का धन्यवाद किया, और टिप्पणी करी कि यह बात वे अपने जीवन में पहली बार अपने वृद्धावस्था में सुनने पाए। क्योंकि कबीले के मुख्या ने जाना कि परमेश्वर यंग के स्वर्गीय पिता हैं, इसलिए उन्होंने यंग से पूछा, "क्या परमेश्वर मेरे पिता भी हैं?" यंग ने उत्तर दिया, "जी हाँ!" जब यंग का यह उत्तर वहाँ जमा भीड़ ने सुना तो ऊँचे स्वर में अपने हर्ष का प्रगटिकरण किया।

   लेकिन कबीले के मुख्या की बात यहीं आकर समाप्त नहीं हुई; उन्होंने यंग से आगे कहा, "मैं अशिष्ट होना नहीं चाहता, लेकिन मुझे लगता है कि अपने भटके हुए भाई तक यह बात पहुँचाने के लिए आपने बड़ा लंबा समय लिया!"

   अनेकों अवसरों पर मैं अपने जीवन की परिस्थितियों के कारण यह सोचकर विचिलित होता हूँ कि काश मैं इस या उस स्थान के इन या उन लोगों तक जाकर प्रभु यीशु का सुसमाचार सुनाने पाता। लेकिन ऐसे में परमेश्वर मुझे स्मरण दिलाता है कि दूर के स्थानों की ओर नहीं वरन अपने चारों ओर देखो, और मैं उन अनेकों लोगों को देखने पाता हूँ जिन्होंने कभी प्रभु यीशु के सुसमाचार को सुना ही नहीं है। ऐसे में मुझे यह भी स्मरण हो आता है कि मेरे पास सभी को सुनाने के लिए एक अद्भुत कथा है, "...इसलिये कि वह सब का प्रभु है; और अपने सब नाम लेने वालों के लिये उदार है। क्योंकि जो कोई प्रभु का नाम लेगा, वह उद्धार पाएगा" (रोमियों 10:12-13)।

   हम मसीही विश्वासियों को यह कभी नहीं भूलना है कि हमारे पास संसार के सभी लोगों को सुनाने के लिए कोई कहानी मात्र नहीं है, वरन हमारे पास सारे संसार के लिए मानव इतिहास की सबसे आवश्यक, प्रभावशाली तथा सर्वोत्तम कथा है। - रैंडी किलगोर


प्रभु यीशु का सुसमाचार सुनाना एक भूख से तृप्ति पाए व्यक्ति द्वारा किसी अन्य भूखे व्यक्ति को अनन्त भोजन के स्त्रोत का पता देना है।

क्योंकि प्रभु ने हमें यह आज्ञा दी है; कि मैने तुझे अन्याजातियों के लिये ज्योति ठहराया है; ताकि तू पृथ्वी की छोर तक उद्धार का द्वार हो। - प्रेरितों 13:47

बाइबल पाठ: रोमियों 10:11-15
Romans 10:11 क्योंकि पवित्र शास्त्र यह कहता है कि जो कोई उस पर विश्वास करेगा, वह लज्जित न होगा। 
Romans 10:12 यहूदियों और यूनानियों में कुछ भेद नहीं, इसलिये कि वह सब का प्रभु है; और अपने सब नाम लेने वालों के लिये उदार है। 
Romans 10:13 क्योंकि जो कोई प्रभु का नाम लेगा, वह उद्धार पाएगा। 
Romans 10:14 फिर जिस पर उन्होंने विश्वास नहीं किया, वे उसका नाम क्योंकर लें? और जिस की नहीं सुनी उस पर क्योंकर विश्वास करें? 
Romans 10:15 और प्रचारक बिना क्योंकर सुनें? और यदि भेजे न जाएं, तो क्योंकर प्रचार करें? जैसा लिखा है, कि उन के पांव क्या ही सुहावने हैं, जो अच्छी बातों का सुसमाचार सुनाते हैं।

एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 9-11
  • मत्ती 15:21-39


शनिवार, 23 जनवरी 2016

सीमा


   19वीं शताब्दी में कारोबार के लिए पानी के जहाज़ों पर अकसर बेहिसाब माल लाद दिया जाता था जिससे कई बार वे जहाज़ रास्ते में ही डूब जाते थे और उनके नाविक मारे जाते थे। सन 1875 में ब्रिटिश राजनितिज्ञ सैमुएल प्लिम्सोल ने लापरवाही की इस प्रथा को बन्द करने के लिए अभियान चलाया जिसके फलस्वरूप कानून बना कि हर पानी के जहाज़ के बाहर एक रेखा बनाई जाएगी जिससे पता रहे कि माल लादने से वह जहाज़ कितना पानी अन्दर चला गया है। माल लदान की वह रेखा प्लिमसोल रेखा के नाम से जानी गई और आज भी यह रेखा माल लादने की सीमा को दिखाने के लिए पानी के जहाज़ों के बाहर बनाई जाती है।

   उन पानी के जहाज़ों के समान हमारे जीवन भी कभी-कभी भय, संघर्ष और मनोव्यथा से अभिभूत होकर हमें सहने की क्षमता से अधिक बोझिल लग सकते हैं; हमें यह भी लग सकता है कि हम बस अब परिस्थितियों में डूबने की कगार पर हैं। लेकिन ऐसे समयों में हमें स्मरण करना चाहिए कि हमारा एक अद्भुत सहायक है - हमारा परमेश्वर पिता जो हमारी सहायता करने के लिए सदा तत्पर और तैयार रहता है। परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस ने लिखा है, "इसलिये परमेश्वर के बलवन्‍त हाथ के नीचे दीनता से रहो, जिस से वह तुम्हें उचित समय पर बढ़ाए। और अपनी सारी चिन्‍ता उसी पर डाल दो, क्योंकि उसको तुम्हारा ध्यान है" (1 पतरस 5:6-7)। हमारा परमेश्वर पिता हमारे जीवन में आने और हमें अभिभूत करने वाली हर परेशानी को जानता है और उसका समाधन करता है।

   जीवन की परीक्षाएं हमें हमारे सहने से बाहर बोझिल प्रतीत हो सकती हैं, लेकिन हम इस बात से आश्वस्त रह सकते हैं कि हमारा परमेश्वर पिता हमारी सीमाओं को हम से बेहतर जानता है और हमें उन सीमाओं से बाहर किसी परीक्षा में कभी नहीं पड़ने देगा, वरन हर परेशानी में वह हमें उस में से सुरक्षित निकल आने का मार्ग बना कर देगा (1 कुरिन्थियों 10:13)।


परमेश्वर हमें अशान्त जल में जाने देता है जिससे हम उस पर भरोसा करना सीख सकें।

तुम किसी ऐसी परीक्षा में नहीं पड़े, जो मनुष्य के सहने से बाहर है: और परमेश्वर सच्चा है: वह तुम्हें सामर्थ से बाहर परीक्षा में न पड़ने देगा, वरन परीक्षा के साथ निकास भी करेगा; कि तुम सह सको। - 1 कुरिन्थियों 10:13 

बाइबल पाठ: 1 पतरस 5:5-9
1 Peter 5:5 हे नवयुवकों, तुम भी प्राचीनों के आधीन रहो, वरन तुम सब के सब एक दूसरे की सेवा के लिये दीनता से कमर बान्‍धे रहो, क्योंकि परमेश्वर अभिमानियों का साम्हना करता है, परन्तु दीनों पर अनुग्रह करता है। 
1 Peter 5:6 इसलिये परमेश्वर के बलवन्‍त हाथ के नीचे दीनता से रहो, जिस से वह तुम्हें उचित समय पर बढ़ाए। 
1 Peter 5:7 और अपनी सारी चिन्‍ता उसी पर डाल दो, क्योंकि उसको तुम्हारा ध्यान है। 
1 Peter 5:8 सचेत हो, और जागते रहो, क्योंकि तुम्हारा विरोधी शैतान गर्जने वाले सिंह की नाईं इस खोज में रहता है, कि किस को फाड़ खाए। 
1 Peter 5:9 विश्वास में दृढ़ हो कर, और यह जान कर उसका साम्हना करो, कि तुम्हारे भाई जो संसार में हैं, ऐसे ही दुख भुगत रहे हैं।

एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 7-8
  • मत्ती 15:1-20


शुक्रवार, 22 जनवरी 2016

तारणहार


   हम में से कई लोग सीमित संसाधनों के साथ कार्य करने की चुनौती का सामना करते हैं। कभी-कभी हमें कम धन, समय तथा सहायकों की घटी और क्षीण होती कार्यशक्ति के साथ भी पहले के जितने कार्यभार को निभाना ही होता है; और कभी-कभी तो यह कार्यभार घटने की बजाए बढ़ भी जाता है। एक वाक्यांश है जो इस दशा को दर्शाता है - अधिक ईंटें और भूसा कम!

   जब इस्त्राएली मिस्त्र में ग़ुलामी में थे, यह वाक्यांश उनकी तब की दशा पर आधारित है। मिस्त्र के राजा फिरौन ने इस्त्राएलियों को ईंटें बनाने के लिए भूसा उपलब्ध करवाना बन्द कर दिया जिससे कि इस्त्राएलियों को भूसा स्वयं ही जुटाना पड़ता था किंतु फिरौन ने उनकी बनाई ईंटों में घटी नहीं होने दी। ऐसे में ग़ुलाम इस्त्रएली इधर-उधर से भूसा जुटाते भी फिरते थे और फिरौन द्वारा नियुक्त कार्य-निरीक्षकों से अधिक परिश्रम करके ईंटों की संख्या को पूरा करते रहने के लिए ताड़ना भी झेलते थे (निर्गमन 5:13)। इस विकट परिस्थिति से इस्त्राएली इतने हताश हो गए कि उन्होंने परमेश्वर द्वारा मूसा के माध्यम से कही गई बात, "...मैं यहोवा हूं, और तुम को मिस्रियों के बोझों के नीचे से निकालूंगा, और उनके दासत्व से तुम को छुड़ाऊंगा, और अपनी भुजा बढ़ाकर और भारी दण्ड देकर तुम्हें छुड़ा लूंगा" (निर्गमन 6:6) को मानने से इंकार कर दिया (निर्गमन 6:9)।

   चाहे इस्त्राएलियों ने परमेश्वर की बात को मानने से इंकार कर दिया हो परन्तु परमेश्वर फिर भी मूसा को निर्देश और मार्गदर्शन देता रहा, उसे फिरौन के पास जाकर उससे इस्त्राएलियों को छोड़ने के लिए बात करने को तैयार करता रहा। परमेश्वर अपनी प्रजा, इस्त्राएलियों के पक्ष में बना रहा, पृष्ठभूमि में उनके हित के लिए कार्य करता रहा और उन्हें मिस्त्र की ग़ुलामी से छुड़ाकर वाचा किए हुए कनान देश में ले आया।

   जब परिस्थितियाँ कठिन हों तो संभव है कि हम भी उन इस्त्राएलियों के समान हताश होकर परमेश्वर के प्रोत्साहन और आश्वासन को नज़रंदाज़ कर दें; परन्तु ऐसे समयों में भी हमें स्मरण रखना चाहिए कि परमेश्वर ही हमारा तारणहार है (भजन 37:5)। चाहे हमें उसका कार्य दिखाई ना भी दे, वह सदा हमारे पक्ष में कार्य करता रहता है, और हर बात में अन्ततः हमारा भला ही करेगा। - जेनिफर बेन्सन शुल्ट


परेशानी के समय विश्वास में दृढ़ रहने के समय होते हैं।

अपने मार्ग की चिन्ता यहोवा पर छोड़; और उस पर भरोसा रख, वही पूरा करेगा। - भजन 37:5

बाइबल पाठ: निर्गमन 6:1-13
Exodus 6:1 तब यहोवा ने मूसा से कहा, अब तू देखेगा कि मैं फिरौन ने क्या करूंगा; जिस से वह उन को बरबस निकालेगा, वह तो उन्हें अपने देश से बरबस निकाल देगा।
Exodus 6:2 और परमेश्वर ने मूसा से कहा, कि मैं यहोवा हूं। 
Exodus 6:3 मैं सर्वशक्तिमान ईश्वर के नाम से इब्राहीम, इसहाक, और याकूब को दर्शन देता था, परन्तु यहोवा के नाम से मैं उन पर प्रगट न हुआ। 
Exodus 6:4 और मैं ने उनके साथ अपनी वाचा दृढ़ की है, अर्थात कनान देश जिस में वे परदेशी हो कर रहते थे, उसे उन्हें दे दूं। 
Exodus 6:5 और इस्राएली जिन्हें मिस्री लोग दासत्व में रखते हैं उनका कराहना भी सुनकर मैं ने अपनी वाचा को स्मरण किया है। 
Exodus 6:6 इस कारण तू इस्राएलियों से कह, कि मैं यहोवा हूं, और तुम को मिस्रियों के बोझों के नीचे से निकालूंगा, और उनके दासत्व से तुम को छुड़ाऊंगा, और अपनी भुजा बढ़ाकर और भारी दण्ड देकर तुम्हें छुड़ा लूंगा, 
Exodus 6:7 और मैं तुम को अपनी प्रजा बनाने के लिये अपना लूंगा, और मैं तुम्हारा परमेश्वर ठहरूंगा; और तुम जान लोगे कि मैं तुम्हारा परमेश्वर यहोवा हूं जो तुम्हें मिस्रियों के बोझों के नीचे से निकाल ले आया। 
Exodus 6:8 और जिस देश के देने की शपथ मैं ने इब्राहीम, इसहाक, और याकूब से खाई थी उसी में मैं तुम्हें पहुंचाकर उसे तुम्हारा भाग कर दूंगा। मैं तो यहोवा हूं। 
Exodus 6:9 और ये बातें मूसा ने इस्राएलियों को सुनाईं; परन्तु उन्होंने मन की बेचैनी और दासत्व की क्रूरता के कारण उसकी न सुनी।
Exodus 6:10 तब यहोवा ने मूसा से कहा, 
Exodus 6:11 तू जा कर मिस्र के राजा फिरौन से कह, कि इस्राएलियों को अपने देश में से निकल जाने दे। 
Exodus 6:12 और मूसा ने यहोवा से कहा, देख, इस्राएलियों ने मेरी नहीं सुनी; फिर फिरौन मुझ भद्दे बोलने वाले की क्योंकर सुनेगा? 
Exodus 6:13 और यहोवा ने मूसा और हारून को इस्राएलियों और मिस्र के राजा फिरौन के लिये आज्ञा इस अभिप्राय से दी कि वे इस्राएलियों को मिस्र देश से निकाल ले जाएं।

एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 4-6
  • मत्ती 14:22-36


गुरुवार, 21 जनवरी 2016

सामंजस्य


   मुझे पाँच तार वाला बैन्जो बजाना बहुत प्रीय है। लेकिन इस संगीत वाद्य में एक कमी है - उसका पांचवा तार बहुत ही सीमित एवं सरल स्वरों के साथ तालमेल बना सकता है। इसलिए संगीत वादक जब कुछ जटिल संगीत बजाना चाहते हैं तो बैन्जो बजाने वाले को सामंजस्य बनाने के लिए कुछ प्रयास करना पड़ता है, तालमेल बैठाना पड़ता है। किसी संगीत समारोह में अद्भुत संगीत लय देनी हो तो बैन्जो वादक को कुछ सामंजस्य और तालमेल बैठाना ही पड़ता हैं।

   जैसे संगीत वादक, संगीत मण्डली के रूप में संगीत प्रस्तुत करने से पहले अपने अपने साज़ों में परस्पर सामंजस्य स्थापित करते हैं जिससे श्रोताओं के सामने अच्छा संगीत प्रस्तुत कर सकें, वैसे ही हम मसीही विश्वासियों को भी एक दूसरे के साथ सामंजस्य बैठाकर तालमेल के साथ परमेश्वर की सेवकाई को पूरा करना चाहिए। उदाहरणस्वरूप, जिन विश्वासियों को परमेश्वर के वचन को सिखाने का वरदान दिया गया है उन्हें उन लोगों के साथ सामंजस्य बैठाना चाहिए जिनका वरदान सभाएं आयोजित करना है और सभा स्थलों की सफाई और व्यवस्था बनाना है। हम सभी मसीही विश्वासियों को कोई ना कोई आत्मिक वरदान दिया गया है, और हम सबको ताल-मेल के साथ कार्य करके परमेश्वर के उद्देश्यों को पूरा करना है।

   प्रेरित पतरस ने कहा, "जिस को जो वरदान मिला है, वह उसे परमेश्वर के नाना प्रकार के अनुग्रह के भले भण्‍डारियों की नाईं एक दूसरे की सेवा में लगाए" (1 पतरस 4:10)। भण्डारीपन के लिए परस्पर सहयोग होना चाहिए। पहले अपने आत्मिक वरदानों के बारे में विचार कीजिए (रोमियों 12; 1 कुरिन्थियों 12; इफिसियों 4; 1 पतरस 4); फिर विचार कीजिए कि आप अपने इन वरदानों का अन्य संगी विश्वासियों के वरदानों के साथ सामंजस्य कैसे बना सकते हैं जिससे सब कार्य सुचारू रीति से हो सके। जब हमारे आत्मिक वरदान एक दूसरे के पूरक होकर कार्य करेंगे तो परिणाम परमेश्वर की महिमा और हमारा परस्पर तालमेल होगा। - डेनिस फिशर


मसीह यीशु के साथ सामंजस्य बनाए रखने से चर्च में परस्पर तालमेल बना रहता है।

और उसने कितनों को भविष्यद्वक्ता नियुक्त कर के, और कितनों को सुसमाचार सुनाने वाले नियुक्त कर के, और कितनों को रखवाले और उपदेशक नियुक्त कर के दे दिया। जिस से पवित्र लोग सिद्ध हों जाएं, और सेवा का काम किया जाए, और मसीह की देह उन्नति पाए। - इफिसियों 4:11-12

बाइबल पाठ: 1 पतरस 4:7-11
1 Peter 4:7 सब बातों का अन्‍त तुरन्त होने वाला है; इसलिये संयमी हो कर प्रार्थना के लिये सचेत रहो। 
1 Peter 4:8 और सब में श्रेष्ठ बात यह है कि एक दूसरे से अधिक प्रेम रखो; क्योंकि प्रेम अनेक पापों को ढांप देता है। 
1 Peter 4:9 बिना कुड़कुड़ाए एक दूसरे की पहुनाई करो। 
1 Peter 4:10 जिस को जो वरदान मिला है, वह उसे परमेश्वर के नाना प्रकार के अनुग्रह के भले भण्‍डारियों की नाईं एक दूसरे की सेवा में लगाए। 
1 Peter 4:11 यदि कोई बोले, तो ऐसा बोले, मानों परमेश्वर का वचन है; यदि कोई सेवा करे; तो उस शक्ति से करे जो परमेश्वर देता है; जिस से सब बातों में यीशु मसीह के द्वारा, परमेश्वर की महिमा प्रगट हो: महिमा और साम्राज्य युगानुयुग उसी की है। आमीन।

एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 1-3
  • मत्ती 14:1-21


बुधवार, 20 जनवरी 2016

सन्तान


   बच्चों को चर्च के लिए तैयार रखना हमेशा ही हमारे लिए चुनौती भरा रहा है। तैयार होकर चर्च पहुँचने के दस मिनट के अन्दर ही हमारा बेटा छोटा मैथ्यु ऐसा दिखने लगता था मानों उसके कोई अभिभावक हैं ही नहीं। वह चर्च के गलियारे में दौड़ लगाता जिससे उसकी आधी कमीज़ पैन्ट से बाहर हो जाती, उसका चश्मा टेढ़ा हो जाता, जूतियाँ गन्दी हो जातीं और उसके कपड़ों पर बिस्कुट का चूरा गिरा हुआ दिखने लगता। यदि उसे अपने आप पर छोड़ दिया जाता तो वह बदहाल और अव्यवस्थित दिखने लगता था।

   मैं सोचता हूँ कि क्या हम मसीही विश्वासी भी कभी कभी छोटे मैथ्यु के समान ही बदहाल और अव्यवस्थित दिखने लगते हैं? प्रभु यीशु मसीह में विश्वास करने और उसे जीवन समर्पण करने के बाद, मसीह यीशु हमें अपनी धार्मिकता के आत्मिक वस्त्र पहना देता है, लेकिन हम फिर भी संसार की बातों में इधर-उधर भटकने लग जाते हैं और ऐसे जीवन व्यतीत करने लगते हैं मानो हम परमेश्वर की सन्तान हैं ही नहीं। इसीलिए परमेश्वर के वचन में यहूदा की पत्री में दिया गया वायदा कि प्रभु यीशु "...तुम्हें ठोकर खाने से बचा सकता है, और अपनी महिमा की भरपूरी के साम्हने मगन और निर्दोष कर के खड़ा कर सकता है" (यहूदा 1:24) मुझे आश्वस्त करता है, आशा देता है।

   क्या हम ऐसा कुछ कर सकते हैं जिससे हम ऐसे ना दिखें मानों हमारी देखभाल करने वाला हमारा स्वर्गीय पिता है ही नहीं? हम जितना अपने परमेश्वर पिता कि आत्मा के चलाए चलेंगे, उसके समर्पित तथा आज्ञाकारी रहेंगे, उतना ही हम ठोकर खाकर गिरने बचे भी रहेंगे, क्योंकि पवित्र आत्मा हमें सही मार्ग पर सही रीति से चलना सिखाता है और उसमें हमारी सहायता भी करता है। ज़रा सोचिए, हमारे जीवन कितने अधिक स्वच्छ तथा धर्मी होते चले जाएंगे यदि हम नियमित रूप से परमेश्वर के वचन के स्नान से धुलते रहें (इफिसियों 5:26)।

   हमारे लिए यह कैसी बड़ी आशीष है कि प्रभु यीशु का हमसे वायदा है कि वह हमारे अव्यवस्थित, ठोकर खाकर गिरते रहने वाले जीवन लेकर उन्हें पवित्र, निषकलंक और बेझुर्री करके परमेश्वर पिता के सामने प्रस्तुत करेगा (इफिसियों 5:27)। इसलिए हमारे लिए यह आवश्यक है कि हम प्रभु यीशु को अपने जीवन समर्पित करके उसे जीवनों को संवारने दें जिससे संसार के सामने हम उसके प्रेम और देखभाल को परमेश्वर की सन्तान की तरह प्रदर्शित कर सकें। - जो स्टोवैल


हमारे जीवनों में परमेश्वर पिता की उपस्थिति को प्रतिबिंबित करने के लिए हम में उसके पुत्र प्रभु यीशु की उपस्थिति अनिवार्य है।

कि उसको वचन के द्वारा जल के स्‍नान से शुद्ध कर के पवित्र बनाए। और उसे एक ऐसी तेजस्‍वी कलीसिया बना कर अपने पास खड़ी करे, जिस में न कलंक, न झुर्री, न कोई ऐसी वस्तु हो, वरन पवित्र और निर्दोष हो। - (इफिसियों 5:26-27)

बाइबल पाठ: यहूदा 1:20-25
Jude 1:20 पर हे प्रियों तुम अपने अति पवित्र विश्वास में अपनी उन्नति करते हुए और पवित्र आत्मा में प्रार्थना करते हुए। 
Jude 1:21 अपने आप को परमेश्वर के प्रेम में बनाए रखो; और अनन्त जीवन के लिये हमारे प्रभु यीशु मसीह की दया की आशा देखते रहो। 
Jude 1:22 और उन पर जो शंका में हैं दया करो। 
Jude 1:23 और बहुतों को आग में से झपट कर निकालो, और बहुतों पर भय के साथ दया करो; वरन उस वस्‍त्र से भी घृणा करो जो शरीर के द्वारा कलंकित हो गया है।
Jude 1:24 अब जो तुम्हें ठोकर खाने से बचा सकता है, और अपनी महिमा की भरपूरी के साम्हने मगन और निर्दोष कर के खड़ा कर सकता है। 
Jude 1:25 उस अद्वैत परमेश्वर हमारे उद्धारकर्ता की महिमा, और गौरव, और पराक्रम, और अधिकार, हमारे प्रभु यीशु मसीह के द्वारा जैसा सनातन काल से है, अब भी हो और युगानुयुग रहे। आमीन।

एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 49-50
  • मत्ती 13:31-58


मंगलवार, 19 जनवरी 2016

मृत्यु और जीवन


   हमारे शहर में, एक ही दिन में, अलग अलग स्थानों पर, दो लोगों की हत्या हुई। पहला एक पुलिस अधिकारी था जो एक परिवार की सहायता करते समय मार गिराया गया। दूसरा एक बेघर व्यक्ति था जिसे प्रातः अपने मित्रों के साथ शराब पीते हुए गोली मार दी गई।

   सारा शहर उस पुलिस अधिकारी के लिए शोकित रहा; वह जवान और बहुत अच्छा व्यक्ति था जो दूसरों की परवाह किया करता था और उसके पड़ौसी तथा उसके साथी पुलिस वाले उसे बहुत चाहते थे। दूसरे के लिए कुछ अन्य बेघर लोग ही शोकित हुए।

   लेकिन मेरा मानना है कि प्रभु परमेश्वर दोनों की मृत्यु से शोकित हुआ।

   जब प्रभु यीशु ने मरियम, मार्था और मित्रों को लाज़रस की मृत्यु पर रोते देखा, "...तो आत्मा में बहुत ही उदास हुआ, और घबरा कर कहा, तुम ने उसे कहां रखा है?" (यूहन्ना 11:33), यद्यपि यीशु जानते थे कि शीघ्र ही वे लाज़रस को पुनः जीवित करने वाले हैं, परन्तु फिर भी वे उस शोक संतप्त परिवार के साथ रोए (यूहन्ना 11:35)। परमेश्वर के वचन बाइबल के कुछ विद्वानों का मानना है कि प्रभु यीशु के रोने के पीछे ना केवल उस परिवार से उनका लगाव था, वरन मृत्यु और उससे लोगों के जीवनों और मनों में होने वाली पीड़ा और शोक भी इसका कारण थे।

   हानि जीवन का अंग है; परन्तु क्योंकि प्रभु यीशु "पुनरुत्थान और जीवन" (यूहन्ना 11:25) हैं, इसलिए उन पर विश्वास लाने और रखने वाले एक दिन सारे शोक और मृत्यु के दुख से निकलकर अनन्त आनन्द के जीवन में प्रवेश करेंगे। परन्तु जब तक वह समय ना आए, प्रभु हमारे दुःखों में दुःखी होता है, और हम मसीही विश्वासियों से कहता है कि, "आनन्द करने वालों के साथ आनन्द करो; और रोने वालों के साथ रोओ" (रोमियों 12:15)। 


करुणा दूसरों की पीड़ा को दूर करने में सहायता करती है।

यीशु ने उस से कहा, पुनरुत्थान और जीवन मैं ही हूं, जो कोई मुझ पर विश्वास करता है वह यदि मर भी जाए, तौभी जीएगा। - यूहन्ना 11:25 

बाइबल पाठ: यूहन्ना 11:30-37
John 11:30 (यीशु अभी गांव में नहीं पहुंचा था, परन्तु उसी स्थान में था जहां मारथा ने उस से भेंट की थी।) 
John 11:31 तब जो यहूदी उसके साथ घर में थे, और उसे शान्‍ति दे रहे थे, यह देखकर कि मरियम तुरन्त उठके बाहर गई है और यह समझकर कि वह कब्र पर रोने को जाती है, उसके पीछे हो लिये। 
John 11:32 जब मरियम वहां पहुंची जहां यीशु था, तो उसे देखते ही उसके पांवों पर गिर के कहा, हे प्रभु, यदि तू यहां होता तो मेरा भाई न मरता। 
John 11:33 जब यीशु न उसको और उन यहूदियों को जो उसके साथ आए थे रोते हुए देखा, तो आत्मा में बहुत ही उदास हुआ, और घबरा कर कहा, तुम ने उसे कहां रखा है? 
John 11:34 उन्होंने उस से कहा, हे प्रभु, चलकर देख ले। 
John 11:35 यीशु के आंसू बहने लगे। 
John 11:36 तब यहूदी कहने लगे, देखो, वह उस से कैसी प्रीति रखता था। 
John 11:37 परन्तु उन में से कितनों ने कहा, क्या यह जिसने अन्धे की आंखें खोली, यह भी न कर सका कि यह मनुष्य न मरता।

एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 46-48
  • मत्ती 13:1-30