ई-मेल संपर्क / E-Mail Contact

इन संदेशों को ई-मेल से प्राप्त करने के लिए अपना ई-मेल पता इस ई-मेल पर भेजें : rozkiroti@gmail.com / To Receive these messages by e-mail, please send your e-mail id to: rozkiroti@gmail.com

बुधवार, 10 फ़रवरी 2016

गीत


   इंगलैण्ड के वेल्स इलाके में पुरुषों के गायन-समूहों का संगीत वहां की संसकृति का अभिन्न अंग है। दूसरे विश्वयुद्ध के पहले वेल्स के एक गायन-समूह की मित्रतापूर्ण किंतु वर्चस्व की स्पर्धा एक जर्मन गायन-समूह के साथ होती रहती थी। परन्तु दुसरे विश्वयुद्ध के दौरान और पश्चात यह स्पर्धा परस्पर बैर में बदल गई। लेकिन उन दोनों समूहों के बीच का यह तनाव उन दोनों के बीच की स्पर्धा में जीती जाने वाली ट्रॉफी पर लिखे वाक्य के द्वारा दूर हो सकी; उस ट्रोफी पर लिखा था: "मेरे साथ वार्तालाप करने से आप मेरे मित्र होते हैं; मेरे साथ गाने से आप मेरे भाई हो जाते हैं।"

   संगीत द्वारा सहायता और चंगाई परमेश्वर द्वारा दिया गया एक वरदान है जिससे बहुतेरों ने कठिन समयों में राहत पाई है। इसीलिए परमेश्वर के वचन बाइबल में दिए गए भजन संहिता खण्ड के भजन हम से इतनी गहराई से बातें करते हैं। इन भजनों में हम वे भाव पाते हैं जो हमारे दिलों से बातें करते हैं, जो हमें आत्मा की गहराईयों से होकर परमेश्वर से वार्तालाप करने में सहायता करते हैं। उदाहरणस्वरूप दाऊद द्वारा लिखे एक भजन को देखिए: "परन्तु मैं तेरी सामर्थ्य का यश गाऊंगा, और भोर को तेरी करूणा का जयजयकार करूंगा। क्योंकि तू मेरा ऊंचा गढ़ है, और संकट के समय मेरा शरणस्थान ठहरा है" (भजन 59:16); और अचरज कि बात यह है कि दाऊद ने जब यह भजन लिखा तब उसे मारने के लिए निकले लोगों से वह अपनी जान बचाता, छुपता हुआ फिर रहा था। अपनी विपरीत परिस्थितियों के बावजूद दाऊद ने परमेश्वर की दया और सामर्थ को स्मरण रखा और उस पर मनन किया, उसका वर्णन किया जिससे उसका विश्वास और दृढ़ हो सका, उसे परमेश्वर से सहायता तथा सुरक्षा मिलती रही।

   हमारा परमेश्वर हमें आज भी कोई ना कोई ऐसा गीत देगा जो हमें उसकी भलाई और महानता को स्मरण करवाएगी, चाहे हमारी परिस्थिति कैसी भी हो; और उस गीत के गाने से उसपर मनन करने से हम उन परिस्थितियों में भी उभारे जाएंगे, अपने मसीही विश्वास में और दृढ़ हो सकेंगे। - बिल क्राउडर


... इस्राएल के परमेश्वर यहोवा का मैं भजन करूंगी। - न्यायियों 5:3

यहोवा के लिये एक नया गीत गाओ, क्योंकि उसने आश्चर्यकर्म किए है! उसके दाहिने हाथ और पवित्र भुजा ने उसके लिये उद्धार किया है! - भजन 98:1

बाइबल पाठ: भजन 59:6-17
Psalms 59:6 वे लोग सांझ को लौटकर कुत्ते की नाईं गुर्राते हैं, और नगर के चारों ओर घूमते हैं। देख वे डकारते हैं, 
Psalms 59:7 उनके मुंह के भीतर तलवारें हैं, क्योंकि वे कहते हैं, कौन सुनता है? 
Psalms 59:8 परन्तु हे यहोवा, तू उन पर हंसेगा; तू सब अन्य जातियों को ठट्ठों में उड़ाएगा। 
Psalms 59:9 हे मेरे बल, मुझे तेरी ही आस होगी; क्योंकि परमेश्वर मेरा ऊंचा गढ़ है।
Psalms 59:10 परमेश्वर करूणा करता हुआ मुझ से मिलेगा; परमेश्वर मेरे द्रोहियों के विषय मेरी इच्छा पूरी कर देगा।
Psalms 59:11 उन्हें घात न कर, न हो कि मेरी प्रजा भूल जाए; हे प्रभु, हे हमारी ढाल! अपनी शक्ति से उन्हें तितर बितर कर, उन्हें दबा दे। 
Psalms 59:12 वह अपने मुंह के पाप, और ओठों के वचन, और शाप देने, और झूठ बोलने के कारण, अभिमान में फंसे हुए पकड़े जाएं। 
Psalms 59:13 जलजलाहट में आकर उनका अन्त कर, उनका अन्त कर दे ताकि वे नष्ट हो जाएं तब लोग जानेंगे कि परमेश्वर याकूब पर, वरन पृथ्वी की छोर तक प्रभुता करता है।
Psalms 59:14 वे सांझ को लौटकर कुत्ते की नाईं गुर्राएं, और नगर के चारों ओर घूमें। 
Psalms 59:15 वे टुकड़े के लिये मारे मारे फिरें, और तृप्त न होने पर रात भर वहीं ठहरे रहें।
Psalms 59:16 परन्तु मैं तेरी सामर्थ्य का यश गाऊंगा, और भोर को तेरी करूणा का जयजयकार करूंगा। क्योंकि तू मेरा ऊंचा गढ़ है, और संकट के समय मेरा शरणस्थान ठहरा है। 
Psalms 59:17 हे मेरे बल, मैं तेरा भजन गाऊंगा, क्योंकि हे परमेश्वर, तू मेरा ऊंचा गढ़ और मेरा करूणामय परमेश्वर है।

एक साल में बाइबल: 
  • लैव्यवस्था 8-10
  • मत्ती 25:31-46


मंगलवार, 9 फ़रवरी 2016

एकता


   समुद्री दुर्घटना से बचकर एक टापू पर अकेले रह रहे एक व्यक्ति को आखिरकर खोज निकाला गया। जब उसे बचाकर लाने वाले उस टापू पर पहुँचे तो उन्होंने वहाँ तीन झोंपड़ियाँ बनी हुई देखीं। जब उन झोंपड़ियों के बारे में उस व्यक्ति से पूछा गया तो उसने एक की ओर संकेत कर के कहा कि "वह मेरा घर है", फिर दूसरी की ओर संकेत कर के कहा कि "वह मेरा चर्च है"; और फिर तीसरी कि ओर संकेत करके कहा, "वह मेरा भूतपूर्व चर्च है!" हम इस कहानी की मूर्खता पर हंस सकते हैं, परन्तु यह कहानी मसीही विश्वासियों में एकता की आवश्यकता को दिखाती है।

   प्रेरित पौलुस के समय में इफिसुस में स्थित मसीही विश्वासियों की मण्डली में कई प्रकार के लोग थे - अमीर और गरीब, यहूदी और गैर-यहूदी, पुरुष और स्त्री, स्वामी और दास। जहाँ भिन्नता होगी वहाँ तनाव और परस्पर टकराव भी होगा। इसलिए पौलुस ने जो पत्री उनको लिखी उसमें पौलुस की एक चिंता उनकी आपसी एकता को लेकर थी। इस संबंध में पौलुस ने इफिसुस के मसीही विश्वासियों को यह नहीं लिखा कि वे एकता लाने या एकत को संगठित करने के प्रयास करें; वरन पौलुस ने उन्हें लिखा कि, "मेल के बन्ध में आत्मा की एकता रखने का यत्‍न करो" (इफिसियों 4:3)। अर्थात, क्योंकि सभी मसीही विश्वासी एक ही देह, एक ही आत्मा, एक ही आशा, एक ही प्रभु, एक ही विश्वास, एक ही बपतिस्मे और एक ही पिता परमेश्वर के साथ जुड़े हैं (पद 4-6) इसलिए एकता तो उन्हें दे दी गई है; उन्हें तो बस अपने परस्पर व्यवहार द्वारा उसे संसार के सामने प्रगट रखना है।

   प्रभु यीशु में लाए गए विश्वास के साथ हमें मिलने वाली इस एकता को हम कैसे बनाए रख सकते हैं? इसका उत्तर भी पौलुस ने इसी खण्ड में दिया है: "अर्थात सारी दीनता और नम्रता सहित, और धीरज धरकर प्रेम से एक दूसरे की सह लो" (पद 2)। जब भी किसी के विचारों एवं मतों के साथ हमारे विचार तथा मत मेल ना खाएं, तो परमेश्वर के आत्मा की अगुवाइ में प्रेम और सहनशीलता के साथ, हमें अपने विचार और मत नम्रता से व्यक्त करने हैं, उन्हें प्रेम के साथ अपनी बात समझानी है ना कि उन पर अपनी बात जबरदस्ती थोपनी है; आखिरकर हम सभी मसीही विश्वासी एक ही प्रभु के लिए ही तो कार्य कर रहे हैं। - एलबर्ट ली


मसीह के साथ हुई हमारी एकता से ही मसिहीयों के साथ हमारी एकता होती है।

सो यदि मसीह में कुछ शान्‍ति और प्रेम से ढाढ़स और आत्मा की सहभागिता, और कुछ करूणा और दया है। तो मेरा यह आनन्द पूरा करो कि एक मन रहो और एक ही प्रेम, एक ही चित्त, और एक ही मनसा रखो। विरोध या झूठी बड़ाई के लिये कुछ न करो पर दीनता से एक दूसरे को अपने से अच्छा समझो। - फिलिप्पियों 2:1-3

बाइबल पाठ: इफिसियों 4:1-6
Ephesians 4:1 सो मैं जो प्रभु में बन्‍धुआ हूं तुम से बिनती करता हूं, कि जिस बुलाहट से तुम बुलाए गए थे, उसके योग्य चाल चलो। 
Ephesians 4:2 अर्थात सारी दीनता और नम्रता सहित, और धीरज धरकर प्रेम से एक दूसरे की सह लो। 
Ephesians 4:3 और मेल के बन्ध में आत्मा की एकता रखने का यत्‍न करो। 
Ephesians 4:4 एक ही देह है, और एक ही आत्मा; जैसे तुम्हें जो बुलाए गए थे अपने बुलाए जाने से एक ही आशा है। 
Ephesians 4:5 एक ही प्रभु है, एक ही विश्वास, एक ही बपतिस्मा। 
Ephesians 4:6 और सब का एक ही परमेश्वर और पिता है, जो सब के ऊपर और सब के मध्य में, और सब में है।

एक साल में बाइबल: 
  • लैव्यवस्था 6-7
  • मत्ती 25:1-30


सोमवार, 8 फ़रवरी 2016

निवारण


   मैं अपने पोते एलेक्स को वापस उसके माता-पिता के पास छोड़ने जा रहा था। मार्ग में इतनी अधिक गाड़ियां थीं और वे तेज़ रफतार से भी चल रहीं थीं कि मुझे मार्ग का कर देने वाली सही पंक्ति में आना कठिन हो रहा था और ना चाहते हुए भी मैं गलत पंक्ति में फंस गया जिसमें केवल उन गाड़ियों को जाना था जिनके पास पहले से कर चुकाने के लिए भरे हुए पैसों वाले कार्ड हैं। एलेक्स ने मुझसे कहा कि अब मेरी गाड़ी के नंबर की तसवीर खींच कर मुझे चालान भरने के लिए कहा जाएगा। यह जानकर मैं क्षुब्ध हुआ क्योंकि गलत पंक्ति में मैं जान-बूझ कर नहीं वरन मजबूरन आया था, परन्तु फिर भी मुझे गलत पंक्ति में आने का दोषी ठहरकर उस गलती के निवारण के लिए चालान भरना था।

   प्राचीन यहूदियों के लिए भी परमेश्वर की आज्ञाओं का उल्लंघन करना भारी होता था, चाहे वह अनजाने में या ना चाहते हुए ही हुआ हो। पुराने नियम में दी गई परमेश्वर की व्यवस्था इस बात को पहचानती थी कि गलतियाँ अनजाने में या ना चहते हुए भी हो सकती हैं, और इस अनचाहे उल्लंघनों के प्रायश्चित के लिए उस व्यवस्था में उचित बलिदान दिए गए थे: "...यदि कोई मनुष्य उन कामों में से जिन को यहोवा ने मना किया है किसी काम को भूल से कर के पापी हो जाए;" (लैव्यवस्था 4:2)।

   पुराने नियम में दिए गए ये बलिदान इस बात की यादगार थे कि पाप के दुष्परिणाम होते हैं, चाहे वे पाप अनजाने में या ना चाहते हुए ही किए गए हों। ये बलिदान यह भी स्मरण करवाते थे कि इन दुष्परिणामों के निवारण के लिए परमेश्वर ही मार्ग देगा, एक निर्दोष हमारे पापों का दोष लिए हुए बलिदान होगा - जो प्रभु यीशु ने समस्त मानव जाति के लिए करा; उसका बलिदान सभी के पापों के निवारण के लिए था। परमेश्वर का अनुग्रह हमारे सोचने समझने से कहीं अधिक बढ़कर है, वह हमारी हर आवश्यकता का निवारण पहले से कर के रखता है। - डेनिस फिशर


अनुग्रह का अर्थ है वह आशीष प्राप्त करना हम जिसके योग्य नहीं है। 
दया का अर्थ है हमें वह दण्ड नहीं दिया जाना हम जिसके योग्य हैं।

परन्तु परमेश्वर हम पर अपने प्रेम की भलाई इस रीति से प्रगट करता है, कि जब हम पापी ही थे तभी मसीह हमारे लिये मरा। - रोमियों 5:8 

बाइबल पाठ: लैव्यवस्था 4:1-3; रोमियों 3:20-26
Leviticus 4:1 फिर यहोवा ने मूसा से कहा 
Leviticus 4:2 कि इस्त्राएलियों से यह कह, कि यदि कोई मनुष्य उन कामों में से जिन को यहोवा ने मना किया है किसी काम को भूल से कर के पापी हो जाए; 
Leviticus 4:3 और यदि अभिषिक्त याजक ऐसा पाप करे, जिस से प्रजा दोषी ठहरे, तो अपने पाप के कारण वह एक निर्दोष बछड़ा यहोवा को पापबलि कर के चढ़ाए।

Romans 3:20 क्योंकि व्यवस्था के कामों से कोई प्राणी उसके साम्हने धर्मी नहीं ठहरेगा, इसलिये कि व्यवस्था के द्वारा पाप की पहिचान होती है। 
Romans 3:21 पर अब बिना व्यवस्था परमेश्वर की वह धामिर्कता प्रगट हुई है, जिस की गवाही व्यवस्था और भविष्यद्वक्ता देते हैं। 
Romans 3:22 अर्थात परमेश्वर की वह धामिर्कता, जो यीशु मसीह पर विश्वास करने से सब विश्वास करने वालों के लिये है; क्योंकि कुछ भेद नहीं। 
Romans 3:23 इसलिये कि सब ने पाप किया है और परमेश्वर की महिमा से रहित हैं। 
Romans 3:24 परन्तु उसके अनुग्रह से उस छुटकारे के द्वारा जो मसीह यीशु में है, सेंत मेंत धर्मी ठहराए जाते हैं। 
Romans 3:25 उसे परमेश्वर ने उसके लोहू के कारण एक ऐसा प्रायश्चित्त ठहराया, जो विश्वास करने से कार्यकारी होता है, कि जो पाप पहिले किए गए, और जिन की परमेश्वर ने अपनी सहनशीलता से आनाकानी की; उन के विषय में वह अपनी धामिर्कता प्रगट करे। 
Romans 3:26 वरन इसी समय उस की धामिर्कता प्रगट हो; कि जिस से वह आप ही धर्मी ठहरे, और जो यीशु पर विश्वास करे, उसका भी धर्मी ठहराने वाला हो।

एक साल में बाइबल: 
  • लैव्यवस्था 4-5
  • मत्ती 24:29-51


रविवार, 7 फ़रवरी 2016

अवलोकन


   परमेश्वर के वचन बाइबल के पुराने नियम खण्ड की न्यायियों की पुस्तक को पढ़ना किसी किसी को महानायकों वाली बच्चों की कॉमिक्स पढ़ने के समान लग सकता है। इस पुस्तक में दबोरा, बराक, गिदौन और शिमशोन जैसे महान नायकों एवं योद्धाओं का वर्णन है; लेकिन इसी पुस्तक में हम एक और पात्र - ओत्नीएल, के बारे में भी लिखा पाते हैं।

   न्यायियों की पुस्तक में ओत्नीएल के जीवन का वृतांत संक्षिप्त और सीधा सा है (न्यायियों 3:7-11)। इस वृतांत में कोई नाटकीय घटना नहीं दी गई; किसी अद्भुत सामर्थ के प्रदर्शन का वर्णन नहीं किया गया। संक्षिप्त से वर्णन में बस वही लिखा गया जो परमेश्वर ने ओत्नीएल में होकर किया: परमेश्वर ने उसे एक उद्धारक ठहराया (पद 9), उसमें परमेश्वर का आत्मा समाया (पद 10), और परमेश्वर ने राजा कूशत्रिशातैम को ओत्नीएल के हाथ में कर दिया और वह राजा कूशत्रिशातैम पर जयवन्त हुआ (पद 10)।

   ओत्नीएल का यह संक्षिप्त वृतांत हमारा ध्यान उस बात पर केंद्रित करता है जो सबसे महत्वपूर्ण है - परमेश्वर का कार्य। रोचक कहानियों और रोमांचक लोगों के वर्णन कई बार हमारा ध्यान परमेश्वर पर से हटा कर उन मनुष्यों पर केंद्रित कर देते हैं जिन में होकर परमेश्वर कार्य करता है; और पाठक परमेश्वर पर नहीं वरन मनुष्यों पर केंद्रित होकर रह जाते हैं।

   जब मैं छोटा था तो मेरी इच्छा रहती थी कि काश मैं और अधिक गुणवान होता जिससे मैं और अधिक लोगों को प्रभु यीशु के पास ला सकता। लेकिन मेरी सोच गलत थी क्योंकि परमेश्वर अकसर साधारण लोगों को अपने असाधारण कार्य के लिए प्रयोग करता है। जब परमेश्वर की ज्योति हमारे जीवनों से चमकती है तो लोग परमेश्वर की ओर आकर्षित होते हैं (मत्ती 5:16)।

   इसलिए परमेश्वर के लिए उपयोगी होने के लिए यह अति आवश्यक है कि जब लोग हमारे जीवनों का अवलोकन करें तो उन्हें हम नहीं वरन हम में होकर कार्य करने वाला परमेश्वर दिखाई दे। - पो फैंग चिया


हमारी सीमित योग्यताएं परमेश्वर की असीमित सामर्थ को प्रगट करने का माध्यम हो सकती हैं।

उसी प्रकार तुम्हारा उजियाला मनुष्यों के साम्हने चमके कि वे तुम्हारे भले कामों को देखकर तुम्हारे पिता की, जो स्वर्ग में हैं, बड़ाई करें। - मत्ती 5:16

बाइबल पाठ: न्यायियों 3:7-11
Judges 3:7 इस प्रकार इस्राएलियों ने यहोवा की दृष्टि में बुरा किया, और अपने परमेश्वर यहोवा को भूलकर बाल नाम देवताओं और अशेरा नाम देवियों की उपासना करने लग गए। 
Judges 3:8 तब यहोवा का क्रोध इस्राएलियों पर भड़का, और उसने उन को अरम्नहरैम के राजा कूशत्रिशातैम के आधीन कर दिया; सो इस्राएली आठ वर्ष तक कूशत्रिशातैम के आधीन में रहे। 
Judges 3:9 तब इस्राएलियों ने यहोवा की दोहाई दी, और उसने इस्राएलियों के लिये कालेब के छोटे भाई ओत्नीएल नाम एक कनजी छुड़ाने वाले को ठहराया, और उसने उन को छुड़ाया। 
Judges 3:10 उस में यहोवा का आत्मा समाया, और वह इस्राएलियों का न्यायी बन गया, और लड़ने को निकला, और यहोवा ने अराम के राजा कूशत्रिशातैम को उसके हाथ में कर दिया; और वह कूशत्रिशातैम पर जयवन्त हुआ। 
Judges 3:11 तब चालीस वर्ष तक देश में शान्ति बनी रही। और उन्हीं दिनों में कन्जी ओत्नीएल मर गया।

एक साल में बाइबल: 
  • लैव्यवस्था 1-3
  • मत्ती 24:1-28


शनिवार, 6 फ़रवरी 2016

पूर्व और पश्चात


   किसी कठिन परीक्षा से निकलने के पश्चात मसीही विश्वास के जीवन में क्या परिवर्तन आते हैं? मैं इस बारे में सोचने लगा जब मैंने जमाइका निवासी एक पिता की त्रासदी से निकलने की घटना पढ़ी; उस पिता ने घर में घुसपैठ करने वाले लोगों से अपने परिवार कि रक्षा करते हुए गलती से अपनी ही 18 वर्षीय पुत्री को गोली से मार दिया। समाचार पत्रों के अनुसार, इस दुर्घटना के अगले दिन भी वह अपनी आदत के अनुसार चर्च गया, दुःख से बदहाल, परन्तु फिर भी परमेश्वर से सहायता लेने। उसके मसीही विश्वास ने इस दुर्घटना से पूर्व भी उसका मार्गदर्शन किया था, और वह जानता था कि इस दुर्घटना के पश्चात भी उसका मार्गदर्शन वैसे ही और वहीं से ही आएगा।

   इस बात को लेकर मैं अपने जीवन के बारे में सोचने लगा क्योंकि मैंने भी अपनी एक बेटी मेलिस्सा को उसकी किशोरावस्था में खोया है। यह देखने के लिए कि अपनी बेटी की मृत्यु से पहले मैं जीवन और विश्वास के प्रति क्या दृष्टिकोण रखता था, और क्या इस कठिन परीक्षा से होकर निकलने के कारण अब परमेश्वर के प्रति में मेरे विश्वास में कोई परिवर्तन हुआ या नहीं, मैंने अपने कंप्यूटर में संजोए हुए अपने लिखे पुराने लेखों को खोला, और जून 2002 में मेलिस्सा की मृत्यु से पूर्व लिखे गए अपने एक लेख को पढ़ने लगा। उस वर्ष के मई महीने में जो लेख मैंने लिखा, उसमें लिखा था: "दाऊद साहस से परमेश्वर के पास जाने और उससे अपने मन की बात कहने से नहीं हिचकिचाया...हमें भी अपने मन की बात परमेश्वर से कहने से कभी नहीं डरना चाहिए।"

   कठिन समयों से निकलने से पहले मैं परमेश्वर के पास जाया करता था और वह मेरे मन की बात सुनता था; मैंने यह भी पाया कि अब भी मैं परमेश्वर के पास वैसे ही जाता हूँ और वह मेरे मन की बात पहले के समान ही सुनता भी है। इसलिए मैं विश्वास के साथ परमेश्वर से प्रार्थना करता हूँ।

   कठिन समयों और परीक्षाओं से होकर निकलने पर भी हमारा मसीही विश्वास ना केवल सुदृढ़ रहता है वरन और बढ़ता तथा मज़बूत होता है क्योंकि हमारा परमेश्वर हर घटना के पूर्व और पश्चात वही और वैसा ही रहता है। - डेव ब्रैनन


परमेश्वर के वचन बाइबल से हम जो परमेश्वर के बारे में जानने पाते हैं वह हमें उन परिस्थितियों में भी प्रोत्साहित करता है कि उसमें विश्वास बनाए रखें जिनके बारे में हम कुछ नहीं जानते।

परन्तु मैं तो परमेश्वर को पुकारूंगा; और यहोवा मुझे बचा लेगा। सांझ को, भोर को, दोपहर को, तीनों पहर मैं दोहाई दूंगा और कराहता रहूंगा। और वह मेरा शब्द सुन लेगा। - Psalms 55:16-17

बाइबल पाठ: भजन 55:1-8
Psalms 55:1 हे परमेश्वर, मेरी प्रार्थना की ओर कान लगा; और मेरी गिड़गिड़ाहट से मुंह न मोड़! 
Psalms 55:2 मेरी ओर ध्यान देकर, मुझे उत्तर दे; मैं चिन्ता के मारे छटपटाता हूं और व्याकुल रहता हूं। 
Psalms 55:3 क्योंकि शत्रु कोलाहल और दुष्ट उपद्रव कर रहें हैं; वे मुझ पर दोषारोपण करते हैं, और क्रोध में आकर मुझे सताते हैं।
Psalms 55:4 मेरा मन भीतर ही भीतर संकट में है, और मृत्यु का भय मुझ में समा गया है। 
Psalms 55:5 भय और कंपकपी ने मुझे पकड़ लिया है, और भय के कारण मेरे रोंए रोंए खड़े हो गए हैं। 
Psalms 55:6 और मैं ने कहा, भला होता कि मेरे कबूतर के से पंख होते तो मैं उड़ जाता और विश्राम पाता! 
Psalms 55:7 देखो, फिर तो मैं उड़ते उड़ते दूर निकल जाता और जंगल में बसेरा लेता, 
Psalms 55:8 मैं प्रचण्ड बयार और आन्धी के झोंके से बचकर किसी शरण स्थान में भाग जाता। 

एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 39-40
  • मत्ती 23:23-39


शुक्रवार, 5 फ़रवरी 2016

जानकारी


   हाल ही में मैंने अमेरिका में व्यक्तियों के लिए जासूसी का काम करने वाले एक जन के बारे में पढ़ा जो लोगों के दरवाज़े पर जाकर खटखटाता था और जो भी दरवाज़ा खोलता उसे अपनी पहचान बताने वाला बिल्ला दिखाकर कहता, "मुझे पता है कि मुझे आपको मेरे यहाँ आने का कारण बताने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।" अनेक अवसरों पर दरवाज़ा खोलने वाला भौंचका रह जाता और कह उठता, "आपको बात का पता कैसे चला?" और इससे काफी पहले हुए किसी अपराधिक कार्य का भेद खुलना आरंभ हो जाता था। स्मिथसोनियन पत्रिका में इसके विषय में लिखते हुए रौन रोज़ेनबॉम ने लोगों की इस प्रतिक्रिया के बारे में लिखा, "यह विवेक के प्राथमिक बल का कार्य, हृदय के अपने आप से चल रहे भीतरी वार्तालाप का प्रगटिकरण है।"

   हम सब अपने बारे में अनेक ऐसी बातें जानते हैं जो अन्य कोई नहीं जानता - हमारी असफलताएं, हमारे दोष, हमारे पाप - चाहे हम ने परमेश्वर के समक्ष इन सबका अंगीकार कर लिया है, लेकिन वे लौट लौट कर हमें दोषी ठहराने के लिए हमारे सामने आ खड़े होते हैं। प्रभु यीशु के एक निकट अनुयायी, यूहन्ना ने हमारे प्रति परमेश्वर के प्रेम और उसके द्वारा हमें उसकी आज्ञाकारिता में बने रहने के निर्देशों के विषय में लिखा: "इसी से हम जानेंगे, कि हम सत्य के हैं; और जिस बात में हमारा मन हमें दोष देगा, उसके विषय में हम उसके साम्हने अपने अपने मन को ढाढ़स दे सकेंगे। क्योंकि परमेश्वर हमारे मन से बड़ा है; और सब कुछ जानता है" (1 यूहन्ना 3:19-20)।

   परमेश्वर के प्रति हमारा विश्वास हमारे प्रति प्रभु यीशु में होकर किए गए उसके प्रेम और क्षमा के द्वारा आरंभ एवं घनिष्ठ होता है ना कि हमारे किसी कर्म के द्वारा, "...और इसी से, अर्थात उस आत्मा से जो उसने हमें दिया है, हम जानते हैं, कि वह हम में बना रहता है" (1 यूहन्ना 3:24)। परमेश्वर जो हमेशा हमारी हर बात की संपूर्ण जानकारी रखता है, हमारी अपनी आत्मनिन्दा से बढ़कर है, और अपने महान प्रेम में होकर ही हमारे पक्ष में कार्य करता है। - डेविड मैक्कैसलैंड


जिसने मसीह यीशु को स्वीकार कर लिया है, उसे परमेश्वर से दण्ड स्वीकार करने की आवश्यकता नहीं होगी।

और धर्म का फल शांति और उसका परिणाम सदा का चैन और निश्चिन्त रहना होगा। - यशायाह 32:17

बाइबल पाठ: 1 यूहन्ना 3:16-24
1 John 3:16 हम ने प्रेम इसी से जाना, कि उसने हमारे लिये अपने प्राण दे दिए; और हमें भी भाइयों के लिये प्राण देना चाहिए। 
1 John 3:17 पर जिस किसी के पास संसार की संपत्ति हो और वह अपने भाई को कंगाल देख कर उस पर तरस न खाना चाहे, तो उस में परमेश्वर का प्रेम क्योंकर बना रह सकता है? 
1 John 3:18 हे बालकों, हम वचन और जीभ ही से नहीं, पर काम और सत्य के द्वारा भी प्रेम करें। 
1 John 3:19 इसी से हम जानेंगे, कि हम सत्य के हैं; और जिस बात में हमारा मन हमें दोष देगा, उसके विषय में हम उसके साम्हने अपने अपने मन को ढाढ़स दे सकेंगे। 
1 John 3:20 क्योंकि परमेश्वर हमारे मन से बड़ा है; और सब कुछ जानता है। 
1 John 3:21 हे प्रियो, यदि हमारा मन हमें दोष न दे, तो हमें परमेश्वर के साम्हने हियाव होता है। 
1 John 3:22 और जो कुछ हम मांगते हैं, वह हमें उस से मिलता है; क्योंकि हम उस की आज्ञाओं को मानते हैं; और जो उसे भाता है वही करते हैं। 
1 John 3:23 और उस की आज्ञा यह है कि हम उसके पुत्र यीशु मसीह के नाम पर विश्वास करें और जैसा उसने हमें आज्ञा दी है उसी के अनुसार आपस में प्रेम रखें। 
1 John 3:24 और जो उस की आज्ञाओं को मानता है, वह उस में, और वह उन में बना रहता है: और इसी से, अर्थात उस आत्मा से जो उसने हमें दिया है, हम जानते हैं, कि वह हम में बना रहता है। 

एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 36-38
  • मत्ती 23:1-22


गुरुवार, 4 फ़रवरी 2016

आज्ञा


   जब प्रभु यीशु से पूछा गया कि जीवन के लिए सबसे बड़ी आज्ञा क्या है तो उन्होंने कहा, "तू प्रभु अपने परमेश्वर से अपने सारे मन से और अपने सारे प्राण से, और अपनी सारी बुद्धि से, और अपनी सारी शक्ति से प्रेम रखना" (मरकुस 12:30)। इन शब्दों में प्रभु यीशु ने हमारे लिए परमेश्वर की इच्छा का सार बताया।

   मैं सोचता हूँ कि कैसे मैं परमेश्वर से अपने सारे मन, प्राण और बुद्धि से प्रेम रख सकता हूँ? प्रभु यीशु द्वारा कही गई यह बात परमेश्वर के वचन बाइबल के पुराने नियम खण्ड की व्यवस्थाविवरण नामक पुस्तक से ली गई है, जहाँ परमेश्वर ने अपने लोगों को यह आज्ञा दी थी। नील प्लेनटिंगा इसे समझाने के लिए कहते हैं कि "तुम्हें परमेश्वर से अपने सर्वस्व से प्रेम रखना है - जो कुछ तुम्हारे पास है, जो कुछ तुम हो - सब कुछ।"

   जब हम परमेश्वर के साथ अपने संबंध को इस दृष्टि से देखते हैं तो हमारी परिस्थितियों के प्रति हमारा दृष्टिकोण बिलकुल बदल जाता है। जब हम अपने सर्वस्व से परमेश्वर से प्रेम करते हैं तो हमें हमारे कष्ट क्षणिक और हलके प्रतीत होने लगते हैं और उनके कारण हमें मिलने वाले अनन्त के प्रतिफल का महत्व हमें समझ में आने लगता है, जैसा कि प्रेरित पौलुस ने कोरिन्थ के मसीही विश्वासियों को लिखी अपनी दूसरी पत्री में लिखा (2 कुरिन्थियों 4:17)।

   जब हम अपने सर्वस्व से परमेश्वर के प्रति प्रेम के साथ प्रार्थना में उसके पास आते हैं तो हमारे जीवनों पर हमारी सभी शंकाओं और संघर्षों के दुषप्रभाव हलके हो जाते हैं, और जीवन से संबंधित हमारे अति आवश्यक लगने वाले सभी प्रश्न पृष्ठभूमि में विलीन हो जाते हैं क्योंकि हमें यह एहसास हो जाता है कि "हम इसलिये प्रेम करते हैं, कि पहिले उसने हम से प्रेम किया" (1 यूहन्ना 4:19)।

   अपने सर्वस्व से परमेश्वर से प्रेम करने की प्रभु यीशु की आज्ञा, हमारे लिए जीवन को कठिन नहीं, वरन सरल और आशीषित बना देती है। - फिलिप यैन्सी


जो सबसे बहुमूल्य उपहार हम परमेश्वर को दे सकते हैं वह है हमारा प्रेम; यह वह उपहार है जो केवल स्वेच्छा से दिया जा सकता है, बाध्य होकर नहीं।

क्योंकि हमारा पल भर का हल्का सा क्‍लेश हमारे लिये बहुत ही महत्‍वपूर्ण और अनन्त महिमा उत्पन्न करता जाता है। - 2 कुरिन्थियों 4:17 

बाइबल पाठ: मरकुस 12:28-34
Mark 12:28 और शास्‍त्रियों में से एक ने आकर उन्हें विवाद करते सुना, और यह जानकर कि उसने उन्हें अच्छी रीति से उत्तर दिया; उस से पूछा, सब से मुख्य आज्ञा कौन सी है? 
Mark 12:29 यीशु ने उसे उत्तर दिया, सब आज्ञाओं में से यह मुख्य है; हे इस्राएल सुन; प्रभु हमारा परमेश्वर एक ही प्रभु है। 
Mark 12:30 और तू प्रभु अपने परमेश्वर से अपने सारे मन से और अपने सारे प्राण से, और अपनी सारी बुद्धि से, और अपनी सारी शक्ति से प्रेम रखना। 
Mark 12:31 और दूसरी यह है, कि तू अपने पड़ोसी से अपने समान प्रेम रखना: इस से बड़ी और कोई आज्ञा नहीं। 
Mark 12:32 शास्त्री ने उस से कहा; हे गुरू, बहुत ठीक! तू ने सच कहा, कि वह एक ही है, और उसे छोड़ और कोई नहीं। 
Mark 12:33 और उस से सारे मन और सारी बुद्धि और सारे प्राण और सारी शक्ति के साथ प्रेम रखना और पड़ोसी से अपने समान प्रेम रखना, सारे होमों और बलिदानों से बढ़कर है। 
Mark 12:34 जब यीशु ने देखा कि उसने समझ से उत्तर दिया, तो उस से कहा; तू परमेश्वर के राज्य से दूर नहीं: और किसी को फिर उस से कुछ पूछने का साहस न हुआ। 

एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 34-35
  • मत्ती 22:23-46