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रविवार, 27 मार्च 2016

पुनरुत्थान


   मेरी एक सहेली ने, जो छोटे बच्चों की अध्यापिका है, अपने विद्यार्थियों में ज़ोर-शोर से चल रहे एक वार्तालाप को सुना: छोटी मरिया ने प्रश्न पूछा, "कौन-कौन परमेश्वर से प्रेम करता है?" सभी बच्चों का उत्तर था, "मैं करता हूँ; मैं करता हूँ; मैं करता हूँ!" बिली ने कहा, "मैं तो यीशु से प्रेम करता हूं।" इस पर कैली अप्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा, "लेकिन वे तो मर गए थे।" तुरंत ही बिली का प्रत्युत्तर था, "हाँ; लेकिन हर ईस्टर के दिन वे जीवित भी तो हो उठते हैं!"

   स्पष्टतः ईस्टर के संबंध में छोटे बिली और कैली की समझ अभी विकसित हो रही है। लेकिन हम यह जानते हैं कि प्रभु यीशु समस्त मानव जाति के लिए एक ही बार मारा गया और एक ही बार मृतकों में से जी भी उठा (रोमियों 6:10; इब्रानियों 10:12)। निष्पाप और निष्कलंक प्रभु यीश ने अपने बलिदान द्वारा संसार के सभी मनुष्यों के पापों के लिए मृत्यु दण्ड सहने के बाद मृत्यु को हरा दिया और कब्र से तीसरे दिन जीवित होकर सभी मनुष्यों के लिए पाप और मृत्यु के बन्धन को सदा के लिए तोड़ डाला। उनके इस अन्तिम बलिदान (इब्रानियों 10:18) के द्वारा हम मनुष्यों को हमारे पापों और उनके दण्ड से मुक्ति मिलती है, परमेश्वर के साथ संबंध बनाने का माध्यम और उस के साथ अनन्तकाल तक स्वर्ग में रहने का अधिकार मिलता है।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस ने लिखा है, "इसी कारण मैं ने सब से पहिले तुम्हें वही बात पहुंचा दी, जो मुझे पहुंची थी, कि पवित्र शास्त्र के वचन के अनुसार यीशु मसीह हमारे पापों के लिये मर गया। और गाड़ा गया; और पवित्र शास्त्र के अनुसार तीसरे दिन जी भी उठा" (1 कुरिन्थियों 15:3-4)। प्रभु यीशु ने अपने अनुयायियों से वायदा किया है कि वे उनके लिए स्थान तैयार कर रहे हैं और एक दिन हमें अपने साथ वहाँ अनन्तकाल तक रहने के लिए ले कर जाएंगे (यूहन्ना 14:1-3)।

   इसीलिए हम मसीही विश्वासियों के लिए प्रभु यीशु के पुनरुत्थान का आनन्द वर्ष में केवल एक बार मनाने का नहीं वरन प्रतिदिन मनाने का आनन्द है, क्योंकि हमारा प्रभु आकर हमें अपने साथ स्वर्ग में रहने के लिए किसी भी दिन ले जा सकता है। इस सदा काल के आनन्द के लिए हम भी भजनकार के साथ कह सकते हैं, "मैं हर समय यहोवा को धन्य कहा करूंगा; उसकी स्तुति निरन्तर मेरे मुख से होती रहेगी" (भजन 34:1)। - सिंडी हैस कैस्पर


प्रभु यीशु का एक बार का पुनरुत्थान हमारे लिए अनन्तकाल के आनन्द और उत्सव का कारण है।

तुम्हारा मन व्याकुल न हो, तुम परमेश्वर पर विश्वास रखते हो मुझ पर भी विश्वास रखो। मेरे पिता के घर में बहुत से रहने के स्थान हैं, यदि न होते, तो मैं तुम से कह देता क्योंकि मैं तुम्हारे लिये जगह तैयार करने जाता हूं। और यदि मैं जा कर तुम्हारे लिये जगह तैयार करूं, तो फिर आकर तुम्हें अपने यहां ले जाऊंगा, कि जहां मैं रहूं वहां तुम भी रहो। - यूहन्ना 14:1-3

बाइबल पाठ: इब्रानियों 10:10-23
Hebrews 10:10 उसी इच्छा से हम यीशु मसीह की देह के एक ही बार बलिदान चढ़ाए जाने के द्वारा पवित्र किए गए हैं। 
Hebrews 10:11 और हर एक याजक तो खड़े हो कर प्रति दिन सेवा करता है, और एक ही प्रकार के बलिदान को जो पापों को कभी भी दूर नहीं कर सकते; बार बार चढ़ाता है। 
Hebrews 10:12 पर यह व्यक्ति तो पापों के बदले एक ही बलिदान सर्वदा के लिये चढ़ा कर परमेश्वर के दाहिने जा बैठा। 
Hebrews 10:13 और उसी समय से इस की बाट जोह रहा है, कि उसके बैरी उसके पांवों के नीचे की पीढ़ी बनें। 
Hebrews 10:14 क्योंकि उसने एक ही चढ़ावे के द्वारा उन्हें जो पवित्र किए जाते हैं, सर्वदा के लिये सिद्ध कर दिया है। 
Hebrews 10:15 और पवित्र आत्मा भी हमें यही गवाही देता है; क्योंकि उसने पहिले कहा था 
Hebrews 10:16 कि प्रभु कहता है; कि जो वाचा मैं उन दिनों के बाद उन से बान्‍धूंगा वह यह है कि मैं अपनी व्यवस्थाओं को उनके हृदय पर लिखूंगा और मैं उन के विवेक में डालूंगा। 
Hebrews 10:17 (फिर वह यह कहता है, कि) मैं उन के पापों को, और उन के अधर्म के कामों को फिर कभी स्मरण न करूंगा। 
Hebrews 10:18 और जब इन की क्षमा हो गई है, तो फिर पाप का बलिदान नहीं रहा। 
Hebrews 10:19 सो हे भाइयो, जब कि हमें यीशु के लोहू के द्वारा उस नए और जीवते मार्ग से पवित्र स्थान में प्रवेश करने का हियाव हो गया है। 
Hebrews 10:20 जो उसने परदे अर्थात अपने शरीर में से हो कर, हमारे लिये अभिषेक किया है, 
Hebrews 10:21 और इसलिये कि हमारा ऐसा महान याजक है, जो परमेश्वर के घर का अधिकारी है। 
Hebrews 10:22 तो आओ; हम सच्चे मन, और पूरे विश्वास के साथ, और विवेक को दोष दूर करने के लिये हृदय पर छिड़काव ले कर, और देह को शुद्ध जल से धुलवा कर परमेश्वर के समीप जाएं। 
Hebrews 10:23 और अपनी आशा के अंगीकार को दृढ़ता से थामें रहें; क्योंकि जिसने प्रतिज्ञा किया है, वह सच्चा है। 

एक साल में बाइबल: 
  • न्यायियों 1-3
  • लूका 4:1-30


शनिवार, 26 मार्च 2016

गर्व


   मैं 1993 के ईस्टर इतवार को कभी नहीं भूला सकता, जब बर्नहार्ड लैंगर ने मास्टर्स गोल्फ टूर्नामेंट जीता था। गोल्फ के मैदान से बाहर आकर जब लैंगर, गोल्फ स्पर्धा जीतने की सूचक और गोल्फ का सबसे चहेता पुरुस्कार, अपनी हरे रंग की जैकेट लेने के लिए आगे बढ़े तो एक समाचार संवाददाता ने उन से पूछा, "यह अवश्य ही आपके जीवन का सबसे महान दिन होगा?" लैंगर ने बिना किसी हिचकिचाहट के उत्तर दिया, "सबसे उत्कृष्ट टूर्नामेंट जीतना अवश्य ही बड़ा अद्भुत अनुभव है, लेकिन ईस्टर के दिन जीतना - मेरे प्रभु और उद्धारकर्ता के पुनरुत्थान का उत्सव मनाना, इसे और भी अधिक महत्वपूर्ण बना देता है।"

   लैंगर के पास अपनी तारीफ के पुल बाँधने का अवसर था किंतु उन्होंने अपनी प्रशंसा करने की बजाए अपने प्रभु यीशु मसीह की ओर ध्यान मोड़ दिया। प्रेरित पौलुस भी यही बात कह रहा था जब उसने लिखा, "और केवल यही नहीं, परन्तु हम अपने प्रभु यीशु मसीह के द्वारा जिस के द्वारा हमारा मेल हुआ है, परमेश्वर के विषय में घमण्ड भी करते हैं" (रोमियों 5:11)। अपनी उपलब्धियों की ओर लोगों का ध्यान खींचना, और अपनी अच्छाईयों की सूची बनाए रखना सरल होता है। पौलुस ने भी कहा कि वह चाहे तो उसके पास अपनी बड़ाई करने के लिए अनेक बातें हैं, लेकिन प्रभु यीशु मसीह की पहचान के आगे वह अपनी उन बातों को कूड़ा समझता था (फिलिप्पियों 3:8); और उसकी इस बात का अनुसरण करना हमारे लिए भी लाभकारी रहेगा।

   इसलिए यदि आप वास्तव में किसी बात पर गर्व करना चाहते हैं, तो प्रभु यीशु पर जो उसने आप के लिए किया है, उसपर गर्व कीजिए; और ऐसे अवसरों की खोज में रहें जिनके द्वारा आप प्रभु यीशु की ओर लोगों का ध्यान खींच सकें। - जो स्टोवैल


यदि आप अपने आप को लेकर व्यस्त रहेंगे तो फिर ना तो प्रभु यीशु पर गर्व कर सकेंगें और ना ही किसी का ध्यान प्रभु की ओर खींच सकेंगे।

वरन मैं अपने प्रभु मसीह यीशु की पहिचान की उत्तमता के कारण सब बातों को हानि समझता हूं: जिस के कारण मैं ने सब वस्‍तुओं की हानि उठाई, और उन्हें कूड़ा समझता हूं, जिस से मैं मसीह को प्राप्त करूं। - फिलिप्पियों 3:8

बाइबल पाठ: रोमियों 5:1-11
Romans 5:1 सो जब हम विश्वास से धर्मी ठहरे, तो अपने प्रभु यीशु मसीह के द्वारा परमेश्वर के साथ मेल रखें।
Romans 5:2 जिस के द्वारा विश्वास के कारण उस अनुग्रह तक, जिस में हम बने हैं, हमारी पहुंच भी हुई, और परमेश्वर की महिमा की आशा पर घमण्ड करें। 
Romans 5:3 केवल यही नहीं, वरन हम क्लेशों में भी घमण्ड करें, यही जानकर कि क्लेश से धीरज। 
Romans 5:4 और धीरज से खरा निकलना, और खरे निकलने से आशा उत्पन्न होती है। 
Romans 5:5 और आशा से लज्ज़ा नहीं होती, क्योंकि पवित्र आत्मा जो हमें दिया गया है उसके द्वारा परमेश्वर का प्रेम हमारे मन में डाला गया है। 
Romans 5:6 क्योंकि जब हम निर्बल ही थे, तो मसीह ठीक समय पर भक्तिहीनों के लिये मरा। 
Romans 5:7 किसी धर्मी जन के लिये कोई मरे, यह तो र्दुलभ है, परन्तु क्या जाने किसी भले मनुष्य के लिये कोई मरने का भी हियाव करे। 
Romans 5:8 परन्तु परमेश्वर हम पर अपने प्रेम की भलाई इस रीति से प्रगट करता है, कि जब हम पापी ही थे तभी मसीह हमारे लिये मरा। 
Romans 5:9 सो जब कि हम, अब उसके लोहू के कारण धर्मी ठहरे, तो उसके द्वारा क्रोध से क्यों न बचेंगे? 
Romans 5:10 क्योंकि बैरी होने की दशा में तो उसके पुत्र की मृत्यु के द्वारा हमारा मेल परमेश्वर के साथ हुआ फिर मेल हो जाने पर उसके जीवन के कारण हम उद्धार क्यों न पाएंगे? 
Romans 5:11 और केवल यही नहीं, परन्तु हम अपने प्रभु यीशु मसीह के द्वारा जिस के द्वारा हमारा मेल हुआ है, परमेश्वर के विषय में घमण्ड भी करते हैं। 

एक साल में बाइबल: 
  • यहोशु 22-24
  • लूका 3


शुक्रवार, 25 मार्च 2016

जीवन


   सन 2011 की बात है, सरकारी आंकड़ों में गलती से 14,000 लोगों को मृत दिखा दिया गया; उनमें से एक थीं दो बच्चों की माता, 52 वर्षीय, लौरा ब्रुक्स। लौरा चकित और परेशान थी कि उसे मिलने वाली अपंग होने की सरकारी सहायता राशि बन्द हो गई, जिससे उसके द्वारा कर्ज़ तथा मकान का किराया चुकाने के लिए दिए गए चैक बैरंग लौट आए। इस मुद्दे को सुलझाने के लिए वह बैंक गई, तो बैंक के संबंधित अधिकारी ने उसे बताया कि उसका खाता बन्द कर दिया गया है क्योंकि सरकारी दस्तावेज़ों के अनुसार उसकी मृत्यु हो चुकी है! प्रत्यक्ष था कि वे दस्तावेज़ और अधिकारी गलत थे।

   लेकिन प्रेरित पौलुस गलत नहीं था जब उसने इफसुस के मसिही विश्वासियों को लिखा कि एक समय वे मरे हुए थे - आत्मिक रीति से मृतक। उनके मृतक होने का तात्पर्य था कि वे पाप की गुलामी में जीवन बिताने के कारण (इफिसियों 2:5) परमेश्वर से दूर थे, और परमेश्वर के न्याय तथा दण्ड के भागी थे। शारीरिक रूप से जीवित होते हुए भी आत्मिक रीति से मृत्क होना हमारे लिए निराशा की कैसी गंभीर दशा है।

   लेकिन परमेश्वर ने हमारी इस दशा को पलट देने, हमें मृतकों में से जीवित करने का इंतिज़ाम किया है। उस जीवित परमेश्वर ने जो सब को जीवन प्रदान करता है (रोमियों 4:17), अपने महान अनुग्रह, प्रेम और दया में होकर अपने पुत्र प्रभु यीशु को संसार में भेजा जिससे समस्त मानव जाति के लिए पापों की क्षमा और उद्धार का मार्ग खुल सके। प्रभु यीशु मसीह के क्रूस पर दिए गए बलिदान और मृतकों में से पुनरुत्थान के द्वारा हम जीवन के भागी हुए हैं (इफिसियों 2:4-5)।

   जब भी कोई व्यक्ति प्रभु यीशु के मारे जाने और मृतकों में से पुनरुत्थान पर विश्वास लाता है, वह मृत्यु से जीवन में प्रवेश करता है। आज हम मसीही विश्वासी परमेश्वर के इसी प्रेम, दया और अनुग्रह से ही जीवित हैं, स्वर्ग के उत्तराधिकारी हैं, संसार में मसीह यीशु के गवाह हैं। - मार्विन विलियम्स


प्रभु यीशु की मृत्यु को ग्रहण कर लेने से अनन्त जीवन मिल जाता है।

जैसा लिखा है, कि मैं ने तुझे बहुत सी जातियों का पिता ठहराया है उस परमेश्वर के साम्हने जिस पर उसने विश्वास किया और जो मरे हुओं को जिलाता है, और जो बातें हैं ही नहीं, उन का नाम ऐसा लेता है, कि मानो वे हैं। - रोमियों 4:17 

बाइबल पाठ: इफिसियों 2:1-10
Ephesians 2:1 और उसने तुम्हें भी जिलाया, जो अपने अपराधों और पापों के कारण मरे हुए थे। 
Ephesians 2:2 जिन में तुम पहिले इस संसार की रीति पर, और आकाश के अधिकार के हाकिम अर्थात उस आत्मा के अनुसार चलते थे, जो अब भी आज्ञा न मानने वालों में कार्य करता है। 
Ephesians 2:3 इन में हम भी सब के सब पहिले अपने शरीर की लालसाओं में दिन बिताते थे, और शरीर, और मन की मनसाएं पूरी करते थे, और और लोगों के समान स्‍वभाव ही से क्रोध की सन्तान थे। 
Ephesians 2:4 परन्तु परमेश्वर ने जो दया का धनी है; अपने उस बड़े प्रेम के कारण, जिस से उसने हम से प्रेम किया। 
Ephesians 2:5 जब हम अपराधों के कारण मरे हुए थे, तो हमें मसीह के साथ जिलाया; (अनुग्रह ही से तुम्हारा उद्धार हुआ है।) 
Ephesians 2:6 और मसीह यीशु में उसके साथ उठाया, और स्‍वर्गीय स्थानों में उसके साथ बैठाया। 
Ephesians 2:7 कि वह अपनी उस कृपा से जो मसीह यीशु में हम पर है, आने वाले समयों में अपने अनुग्रह का असीम धन दिखाए। 
Ephesians 2:8 क्योंकि विश्वास के द्वारा अनुग्रह ही से तुम्हारा उद्धार हुआ है, और यह तुम्हारी ओर से नहीं, वरन परमेश्वर का दान है। 
Ephesians 2:9 और न कर्मों के कारण, ऐसा न हो कि कोई घमण्‍ड करे। 
Ephesians 2:10 क्योंकि हम उसके बनाए हुए हैं; और मसीह यीशु में उन भले कामों के लिये सृजे गए जिन्हें परमेश्वर ने पहिले से हमारे करने के लिये तैयार किया। 

एक साल में बाइबल: 
  • यहोशु 19-21
  • लूका 2:25-52


गुरुवार, 24 मार्च 2016

गवाह


   बहुत वर्ष पहले की बात है, मैं 38 फीट ऊँचे पुल से गिरने के कारण जान के जोखिम की गंभीर हालत में अस्पताल में भरती था। उस समय में मेरे साथ के बिस्तर पर लेटे मरीज़ की पत्नि मुझसे बात करने को मेरे पास आई और कहा, "मेरे पति ने अभी मुझे बताया है कि आपके साथ क्या हुआ है। हमारा मानना है कि परमेश्वर ने आपकी जान बचाई है क्योंकि वह आपको अपने लिए उपयोग करना चाहता है।"

   यह सुनकर मैं स्तब्ध रह गया। मैं बचपन से चर्च जाता रहा हूँ, लेकिन मैंने कभी यह नहीं सोचा था कि परमेश्वर मेरे जीवन में रुचि रखेगा, मेरे जीवन की बातों में सम्मिलित होना चाहेगा। उस महिला के शब्दों ने मुझे उस उद्धारकर्ता की ओर मोड़ा जिसके बारे में मैंने सुना तो था किंतु व्यक्तगत रीति से उसे नहीं जानता था - मेरे मसीही विश्वास के जीवन में आने का आरंभ यहीं से हुआ था। मैं उस नम्र मसीही गवाह के उन शब्दों के स्मरण को बहुमूल्य जानकर संजोए रहता हूँ, जिसने एक अजनबी के लिए विचार किया और उसे एक ऐसे परमेश्वर के बारे में बताया जिसका प्रेम सच्चा और वास्तविक है। उस महिला के शब्दों से दूसरों के प्रति देखभाल और चिन्ता का भाव, एक उद्देश्य और एक आशा प्रगट होती थी।

   प्रभु यीशु ने अपने चेलों को तथा आज हम मसीही विश्वासियों को यह ज़िम्मेदारी दी है कि हम परमेश्वर के प्रेम के बारे में औरों को बताएं, उसके गवाह बनें: "परन्तु जब पवित्र आत्मा तुम पर आएगा तब तुम सामर्थ पाओगे; और यरूशलेम और सारे यहूदिया और सामरिया में, और पृथ्वी की छोर तक मेरे गवाह होगे" (प्रेरितों 1:8)।

   पवित्र आत्मा की सहायता से हमारे शब्द और गवाही अन्य लोगों के जीवन में अनन्त काल का प्रभाव एवं परिवर्तन ला सकती है। - बिल क्राउडर


प्रेमभरी चिन्ता से कहे गए कुछ शब्द भी हमारी कल्पना से परे प्रभाव दिखा सकते हैं।

और उसने उन से कहा, तुम सारे जगत में जा कर सारी सृष्‍टि के लोगों को सुसमाचार प्रचार करो। - मरकुस 16:15

बाइबल पाठ: प्रेरितों 1:1-11
Acts 1:1 हे थियुफिलुस, मैं ने पहिली पुस्तिका उन सब बातों के विषय में लिखी, जो यीशु ने आरम्भ में किया और करता और सिखाता रहा। 
Acts 1:2 उस दिन तक जब वह उन प्रेरितों को जिन्हें उसने चुना था, पवित्र आत्मा के द्वारा आज्ञा देकर ऊपर उठाया न गया। 
Acts 1:3 और उसने दु:ख उठाने के बाद बहुत से पड़े प्रमाणों से अपने आप को उन्हें जीवित दिखाया, और चालीस दिन तक वह उन्हें दिखाई देता रहा: और परमेश्वर के राज्य की बातें करता रहा। 
Acts 1:4 ओर उन से मिलकर उन्हें आज्ञा दी, कि यरूशलेम को न छोड़ो, परन्तु पिता की उस प्रतिज्ञा के पूरे होने की बाट जोहते रहो, जिस की चर्चा तुम मुझ से सुन चुके हो। 
Acts 1:5 क्योंकि यूहन्ना ने तो पानी में बपतिस्मा दिया है परन्तु थोड़े दिनों के बाद तुम पवित्रात्मा से बपतिस्मा पाओगे। 
Acts 1:6 सो उन्हों ने इकट्ठे हो कर उस से पूछा, कि हे प्रभु, क्या तू इसी समय इस्त्राएल को राज्य फेर देगा? 
Acts 1:7 उसने उन से कहा; उन समयों या कालों को जानना, जिन को पिता ने अपने ही अधिकार में रखा है, तुम्हारा काम नहीं। 
Acts 1:8 परन्तु जब पवित्र आत्मा तुम पर आएगा तब तुम सामर्थ पाओगे; और यरूशलेम और सारे यहूदिया और सामरिया में, और पृथ्वी की छोर तक मेरे गवाह होगे। 
Acts 1:9 यह कहकर वह उन के देखते देखते ऊपर उठा लिया गया; और बादल ने उसे उन की आंखों से छिपा लिया। 
Acts 1:10 और उसके जाते समय जब वे आकाश की ओर ताक रहे थे, तो देखो, दो पुरूष श्वेत वस्‍त्र पहिने हुए उन के पास आ खड़े हुए। 
Acts 1:11 और कहने लगे; हे गलीली पुरूषों, तुम क्यों खड़े स्वर्ग की ओर देख रहे हो? यही यीशु, जो तुम्हारे पास से स्वर्ग पर उठा लिया गया है, जिस रीति से तुम ने उसे स्वर्ग को जाते देखा है उसी रीति से वह फिर आएगा। 

एक साल में बाइबल: 
  • यहोशु 16-18
  • लूका 2:1-24


बुधवार, 23 मार्च 2016

एकता


   परमेश्वर के वचन बाइबल में नीतिवचन 6:16-19 में उन सात बातों का उल्लेख है जिनसे परमेश्वर को घृणा है, और इन बातों में से एक है भाईयों के बीच में झगड़ा उत्पन्न करना। इसी बात के कारण वह एकता जो प्रभु यीशु मसीह मसीही विश्वासी भाईयों में देखना चाहता है (यूहन्ना 17:21-22) वह बिगड़ जाती है।

   जो भेदभाव या झगड़े उत्पन्न करते हैं, कई बार उनका इरादा ऐसा करने का नहीं होता है, वरन वे या तो अपनी व्यक्तिगत या जिस गुट के वे हैं उसकी आवश्यकताओं की पूर्ति करने के प्रयासों में ऐसा कर बैठते हैं (याकूब 4:1-10)। इन झगड़ों और मतभेदों के कारणों को समझने के लिए बाइबल में दी गई कुछ घटनाओं पर विचार कीजिए: क्यों लूत और अब्राहम के चरवाहों में झगड़े हुए (उत्पत्ति 13:1-18); या फिर प्रभु यीशु के चेलों में क्यों विवाद हुआ (लूका 9:46); या फिर कुरिन्थुस की मसीही मण्डली में गुटबाज़ी और मतभेद किस कारण आने पाए (1 कुरिन्थियों 3:1-7)?

   एकता को प्रोत्साहन देने का सबसे कारगर तरीका क्या है? यह आरंभ होता है मन परिवर्तन से; जब हम मसीह यीशु के स्वभाव को अपना लेते हैं तो हमारे अन्दर नम्रता और दूसरों की सेवकाई की भावना भी आ जाती है और केवल मसीह यीशु में होकर ही हम वह सामर्थ भी पा सकते जिसके द्वारा हम केवल अपनी ही नहीं वरन औरों की आवश्यकताओं की भी चिन्ता कर सकें (फिलिप्पियों 2:1-5)। जब हम ऐसा करने लगते हैं तो शीघ्र ही दूसरों की आशाएं और आवश्यकताएं हमारे लिए हमारी अपनी आशाओं और आवश्यकताओं से अधिक महत्वपूर्ण हो जाती हैं।

   जब हम परस्पर प्रेम के बन्धनों में बन्धने लगते हैं तो हमारे आपसी मतभेद और झगड़े आनन्द और एकता में बदल जाते हैं। - डेनिस फिशर


हम अकेले उतना कभी नहीं कर पाते जितना दूसरों के साथ मिलकर कर लेते हैं।

हे भाइयो, मैं तुम से यीशु मसीह जो हमारा प्रभु है उसके नाम के द्वारा बिनती करता हूं, कि तुम सब एक ही बात कहो; और तुम में फूट न हो, परन्तु एक ही मन और एक ही मत हो कर मिले रहो। - 1 कुरिन्थियों 1:10 

बाइबल पाठ: नीतिवचन 6:16-19; फिलिप्पियों 2:1-11
Proverbs 6:16 छ: वस्तुओं से यहोवा बैर रखता है, वरन सात हैं जिन से उसको घृणा है 
Proverbs 6:17 अर्थात घमण्ड से चढ़ी हुई आंखें, झूठ बोलने वाली जीभ, और निर्दोष का लोहू बहाने वाले हाथ, 
Proverbs 6:18 अनर्थ कल्पना गढ़ने वाला मन, बुराई करने को वेग दौड़ने वाले पांव, 
Proverbs 6:19 झूठ बोलने वाला साक्षी और भाइयों के बीच में झगड़ा उत्पन्न करने वाला मनुष्य। 

Philippians 2:1 सो यदि मसीह में कुछ शान्‍ति और प्रेम से ढाढ़स और आत्मा की सहभागिता, और कुछ करूणा और दया है। 
Philippians 2:2 तो मेरा यह आनन्द पूरा करो कि एक मन रहो और एक ही प्रेम, एक ही चित्त, और एक ही मनसा रखो। 
Philippians 2:3 विरोध या झूठी बड़ाई के लिये कुछ न करो पर दीनता से एक दूसरे को अपने से अच्छा समझो। 
Philippians 2:4 हर एक अपने ही हित की नहीं, वरन दूसरों के हित की भी चिन्‍ता करे। 
Philippians 2:5 जैसा मसीह यीशु का स्‍वभाव था वैसा ही तुम्हारा भी स्‍वभाव हो। 
Philippians 2:6 जिसने परमेश्वर के स्‍वरूप में हो कर भी परमेश्वर के तुल्य होने को अपने वश में रखने की वस्तु न समझा। 
Philippians 2:7 वरन अपने आप को ऐसा शून्य कर दिया, और दास का स्‍वरूप धारण किया, और मनुष्य की समानता में हो गया। 
Philippians 2:8 और मनुष्य के रूप में प्रगट हो कर अपने आप को दीन किया, और यहां तक आज्ञाकारी रहा, कि मृत्यु, हां, क्रूस की मृत्यु भी सह ली। 
Philippians 2:9 इस कारण परमेश्वर ने उसको अति महान भी किया, और उसको वह नाम दिया जो सब नामों में श्रेष्ठ है। 
Philippians 2:10 कि जो स्वर्ग में और पृथ्वी पर और जो पृथ्वी के नीचे है; वे सब यीशु के नाम पर घुटना टेकें। 
Philippians 2:11 और परमेश्वर पिता की महिमा के लिये हर एक जीभ अंगीकार कर ले कि यीशु मसीह ही प्रभु है। 

एक साल में बाइबल: 
  • यहोशु 13-15
  • लूका 1:57-80


मंगलवार, 22 मार्च 2016

जल्द ही


   यह घोषणा कि "जल्द ही आ रहा है" किसी आने वाले मनोरंजन कार्यक्रम या खेल कार्यक्रम, या किसी नए उत्पाद की पूर्वघोषणा होती है। इसका उद्देश्य होता है लोगों में एक उत्सुक्ता और प्रत्याशा को उत्पन्न करना जिससे वे उस बात के प्रति आकर्षित रहें, चाहे उसका आना अभी महीनों दूर हो, और अधिक से अधिक संख्या में उसका लाभ उठाएं अथवा उसमें सम्मिलित हों।

   परमेश्वर के वचन बाइबल की अन्तिम पुस्तक, प्रकाशितवाक्य, को पढ़ते समय मैं उस पुस्तक में व्याप्त इस "जल्द ही" के भाव से बहुत प्रभावित हुआ। यह कहने की बजाए कि, "दूर के भविष्य में किसी दिन प्रभु यीशु का दोबारा पृथ्वी पर आगमन होगा", इस पुस्तक में अनेकों बार दर्शाया गया है कि यह शीघ्र होने वाला है, समय निकट है, और पुस्तक के अन्तिम अध्याय में तीन बार प्रभु यीशु कहते हैं कि "मैं शीघ्र आने वाला हूँ।"

   जबकि इन बातों को लिखे लगभग 2000 वर्ष बीत चुके हैं तो फिर यह कैसे संभव है? हमारे अपने समय आंकलन के अनुसार यहाँ कहे गए "जल्द ही" का कोई खास महत्व प्रतीत नहीं होता है। लेकिन परमेश्वर का समय आंकलन हमारे आंकलन से भिन्न है; जो हमें विलंब लगता है वह वास्तव में परमेश्वर का धैर्य है कि अधिक से अधिक लोग प्रभु यीशु में विश्वास लाकर अपने पापों से क्षमा और अनन्त जीवन को पा सकें (2 पतरस 3:8-9)। परमेश्वर ने हमें प्रभु यीशु के पुनःआगमन की कोई तिथि नहीं दी है जिससे हम प्रतिदिन इस आशा के साथ व्यतीत करें कि संभवतः प्रभु का पुनःआगमन आज ही हो जाए: "और उस धन्य आशा की अर्थात अपने महान परमेश्वर और उद्धारकर्ता यीशु मसीह की महिमा के प्रगट होने की बाट जोहते रहें" (तीतुस 2:13), और उसके लिए अपने आप को तैयार रखें, उसके अनुरूप जीवन जीते रहें। - डेविड मैक्कैसलैंड


ऐसे जीएं मानो प्रभु यीशु का पुनःआगमन आज ही होने वाला है।

सब बातों का अन्‍त तुरन्त होने वाला है; इसलिये संयमी हो कर प्रार्थना के लिये सचेत रहो। - 1 पतरस 4:7

बाइबल पाठ: 2 पतरस 3:3-15
2 Peter 3:3 और यह पहिले जान लो, कि अन्‍तिम दिनों में हंसी ठट्ठा करने वाले आएंगे, जो अपनी ही अभिलाषाओं के अनुसार चलेंगे। 
2 Peter 3:4 और कहेंगे, उसके आने की प्रतिज्ञा कहां गई? क्योंकि जब से बाप-दादे सो गए हैं, सब कुछ वैसा ही है, जैसा सृष्‍टि के आरम्भ से था? 
2 Peter 3:5 वे तो जान बूझ कर यह भूल गए, कि परमेश्वर के वचन के द्वारा से आकाश प्राचीन काल से वर्तमान है और पृथ्वी भी जल में से बनी और जल में स्थिर है। 
2 Peter 3:6 इन्‍हीं के द्वारा उस युग का जगत जल में डूब कर नाश हो गया। 
2 Peter 3:7 पर वर्तमान काल के आकाश और पृथ्वी उसी वचन के द्वारा इसलिये रखे हैं, कि जलाए जाएं; और वह भक्तिहीन मनुष्यों के न्याय और नाश होने के दिन तक ऐसे ही रखे रहेंगे। 
2 Peter 3:8 हे प्रियों, यह एक बात तुम से छिपी न रहे, कि प्रभु के यहां एक दिन हजार वर्ष के बराबर है, और हजार वर्ष एक दिन के बराबर हैं। 
2 Peter 3:9 प्रभु अपनी प्रतिज्ञा के विषय में देर नहीं करता, जैसी देर कितने लोग समझते हैं; पर तुम्हारे विषय में धीरज धरता है, और नहीं चाहता, कि कोई नाश हो; वरन यह कि सब को मन फिराव का अवसर मिले। 
2 Peter 3:10 परन्तु प्रभु का दिन चोर की नाईं आ जाएगा, उस दिन आकाश बड़ी हड़हड़ाहट के शब्द से जाता रहेगा, और तत्‍व बहुत ही तप्‍त हो कर पिघल जाएंगे, और पृथ्वी और उस पर के काम जल जाऐंगे। 
2 Peter 3:11 तो जब कि ये सब वस्तुएं, इस रीति से पिघलने वाली हैं, तो तुम्हें पवित्र चाल चलन और भक्ति में कैसे मनुष्य होना चाहिए। 
2 Peter 3:12 और परमेश्वर के उस दिन की बाट किस रीति से जोहना चाहिए और उसके जल्द आने के लिये कैसा यत्‍न करना चाहिए; जिस के कारण आकाश आग से पिघल जाएंगे, और आकाश के गण बहुत ही तप्‍त हो कर गल जाएंगे। 
2 Peter 3:13 पर उस की प्रतिज्ञा के अनुसार हम एक नए आकाश और नई पृथ्वी की आस देखते हैं जिन में धामिर्कता वास करेगी। 
2 Peter 3:14 इसलिये, हे प्रियो, जब कि तुम इन बातों की आस देखते हो तो यत्‍न करो कि तुम शान्‍ति से उसके साम्हने निष्‍कलंक और निर्दोष ठहरो। 
2 Peter 3:15 और हमारे प्रभु के धीरज को उद्धार समझो, जैसे हमारे प्रिय भाई पौलुस ने भी उस ज्ञान के अनुसार जो उसे मिला, तुम्हें लिखा है। 

एक साल में बाइबल: 
  • यहोशु 10-12
  • लूका 1:39-56


सोमवार, 21 मार्च 2016

पहचान


   जब मेरे सबसे छोटे भाई स्कौट का जन्म हुआ तब मैं सीनियर हाई स्कूल में था। हम दोनों में उम्र के इस अन्तर के कारण, उसके बड़े होकर कॉलेज जाने के समय में एक रोचक परिस्थिति हो गई; जब मैं और हमारी माँ उसे कॉलेज में दाखिले के लिए लेकर गए तो जिससे भी हम मिल रहे थे सब यही यह समझते थे कि मैं स्कौट का पिता और हमारी माँ उसकी दादी हैं। अन्ततः हमने लोगों की इस भ्रांति को ठीक करना बन्द कर दिया, क्योंकि हमारे हर प्रयास के बावजूद लोगों को यह समझा पाना कठिन हो रहा था कि परस्पर हमारी पहचान वह नहीं है जैसी वे समझ रहे हैं।

   प्रभु यीशु ने धर्म के अगुवे फरीसियों से, उनकी नज़र में, अपनी पहचान के बारे में प्रश्न पूछा (मत्ती 22:42): "कि मसीह के विषय में तुम क्या समझते हो? वह किस का सन्तान है?" उन फरीसियों का उत्तर था, "उन्होंने उस से कहा, दाऊद का"। इस्त्राएल के लोगों के लिए परमेश्वर द्वारा वाचा किए गए मसीहा की पहचान रखना बहुत महत्वपूर्ण था, और इस संदर्भ में फरीसियों का उत्तर सही तो था परन्तु अधूरा था। परमेश्वर का वचन यह स्पष्ट बताता था कि आने वाला मसीहा आकर अपने पूर्वज पिता दाऊद का सिंहासन संभालेगा, और फरिसियों ने इसी आधार पर उत्तर दिया था; परन्तु प्रभु यीशु को उन फरीसियों को यह भी स्मरण दिलाना पड़ा कि दाऊद अपने वंश में होकर आने वाले जगत के उस उद्धारकर्ता को स्वयं भी "प्रभु" कहकर ही संबोधित करता है - और यह बात वे फरीसी बोल नहीं रहे थे।

   प्रभु यीशु ने अपनी पहचान के बारे में यही प्रश्न अपने चेलों से भी किया, और पतरस ने सही उत्तर देते हुए कहा, "...तू जीवते परमेश्वर का पुत्र मसीह है" (मत्ती 16:16)। आज भी प्रभु यीशु की पहचान से संबंधित यह प्रश्न उतना ही महत्वपूर्ण है। प्रभु यीशु की सही पहचान को जाने तथा माने बिना उसके प्रति सही रवैया, उसके साथ सही संबंध रखना असंभव है। अनन्त जीवन के मार्ग के लिए यीशु को अपना उद्धारकर्ता तथा जीवन का प्रभु स्वीकार करना अनिवार्य है। - बिल क्राउडर


प्रभु यीशु की गलत पहचान रखने से अधिक घातक कोई अन्य गलती नहीं है।

परन्तु जितनों ने उसे ग्रहण किया, उसने उन्हें परमेश्वर के सन्तान होने का अधिकार दिया, अर्थात उन्हें जो उसके नाम पर विश्वास रखते हैं। - यूहन्ना 1:12

बाइबल पाठ: मत्ती 16:13-20
Matthew 16:13 यीशु कैसरिया फिलिप्पी के देश में आकर अपने चेलों से पूछने लगा, कि लोग मनुष्य के पुत्र को क्या कहते हैं? 
Matthew 16:14 उन्होंने कहा, कितने तो यूहन्ना बपतिस्मा देने वाला कहते हैं और कितने एलिय्याह, और कितने यिर्मयाह या भविष्यद्वक्ताओं में से कोई एक कहते हैं। 
Matthew 16:15 उसने उन से कहा; परन्तु तुम मुझे क्या कहते हो? 
Matthew 16:16 शमौन पतरस ने उत्तर दिया, कि तू जीवते परमेश्वर का पुत्र मसीह है। 
Matthew 16:17 यीशु ने उसको उत्तर दिया, कि हे शमौन योना के पुत्र, तू धन्य है; क्योंकि मांस और लोहू ने नहीं, परन्तु मेरे पिता ने जो स्वर्ग में है, यह बात तुझ पर प्रगट की है। 
Matthew 16:18 और मैं भी तुझ से कहता हूं, कि तू पतरस है; और मैं इस पत्थर पर अपनी कलीसिया बनाऊंगा: और अधोलोक के फाटक उस पर प्रबल न होंगे। 
Matthew 16:19 मैं तुझे स्वर्ग के राज्य की कुंजियां दूंगा: और जो कुछ तू पृथ्वी पर बान्‍धेगा, वह स्वर्ग में बन्‍धेगा; और जो कुछ तू पृथ्वी पर खोलेगा, वह स्वर्ग में खुलेगा। 
Matthew 16:20 तब उसने चेलों को चिताया, कि किसी से न कहना! कि मैं मसीह हूं। 

एक साल में बाइबल: 
  • यहोशु 7-9
  • लूका 1:21-38