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रविवार, 10 अप्रैल 2016

निर्देश तथा नियम


   मेरी परवरिश अमेरिका में हुई है, इसलिए मुझे यह बड़ा विचित्र लगता था कि संसार के अनेक देशों में लोग और वाहन सड़क की बांई ओर चलते हैं ना कि दाहिनी ओर, जैसा अमेरिका में है। फिर, जब मैं इंगलैंड में था, तो लंदन घुमाने वाले हमारे एक गाईड ने सड़क के बांई ओर चलने वाले नियम का एक संभावित कारण बताया; उसने कहा कि "सन 1800 के दशकों में पैदल चलने वाले तथा घोड़ा-गाड़ी वाले, दोनों एक ही सड़क का उपयोग करते थे। यदि घोड़ा-गाड़ी सड़क की दाहिनी ओर होती थी तो कभी-कभी गाड़ी चालक का चाबुक पैदल चल रहे किसी व्यक्ति को भी लग जाता था। इस खतरे को दूर करने के लिए यह नियम बना कर लागू किय गया कि सभी वाहन सड़क की बांई ओर ही चलेंगे जिससे पैदल चलने वालों को कोई खतरा ना रहे।"

   जैसे सड़क पर यातायात के नियम हमारी सुरक्षा और भलाई के लिए दिए जाते हैं, परमेश्वर के नियम भी हमारी सुरक्षा और भलाई के लिए हैं, क्योंकि वह हम से प्रेम करता है और सदा, हर बात में हमारा भला ही चाहता है। परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस ने गलतिया की मसीही मण्डली को लिखी पत्री में लिखा: "हे भाइयों, तुम स्‍वतंत्र होने के लिये बुलाए गए हो परन्तु ऐसा न हो, कि यह स्‍वतंत्रता शारीरिक कामों के लिये अवसर बने, वरन प्रेम से एक दूसरे के दास बनो। क्योंकि सारी व्यवस्था इस एक ही बात में पूरी हो जाती है, कि तू अपने पड़ोसी से अपने समान प्रेम रख" (गलतियों 5:13-14)।

   जैसे-जैसे हम परमेश्वर के वचन को अपने हृदयों में बसाते और अपने जीवनों में लागू करते हैं, हम इस बात का भी ध्यान रखें कि हमारे उस दयालु, करुणामय और अनुग्रहकारी परमेश्वर पिता ने हमारे जानने और मानने के लिए निर्देश तथा नियम भी दिए हैं जिससे हम उसे और निकटता से जान सकें, उसके जीवन को जी कर दिखा सकें और उससे आशीष तथा भलाई पाते रहें। - डेनिस फिशर


बाइबल में खोज कर प्राप्त कर लेने के लिए ज्ञान और बुद्धिमता के असीम खज़ाने परमेश्वर ने हमारे लिए रख छोड़े हैं।

भला होता कि उनका मन सदैव ऐसा ही बना रहे, कि वे मेरा भय मानते हुए मेरी सब आज्ञाओं पर चलते रहें, जिस से उनकी और उनके वंश की सदैव भलाई होती रहे! -  व्यवस्थाविवरण 5:29

बाइबल पाठ: गलतियों 5:1-14
Galatians 5:1 मसीह ने स्‍वतंत्रता के लिये हमें स्‍वतंत्र किया है; सो इसी में स्थिर रहो, और दासत्‍व के जूए में फिर से न जुतो।
Galatians 5:2 देखो, मैं पौलुस तुम से कहता हूं, कि यदि खतना कराओगे, तो मसीह से तुम्हें कुछ लाभ न होगा। 
Galatians 5:3 फिर भी मैं हर एक खतना कराने वाले को जताए देता हूं, कि उसे सारी व्यवस्था माननी पड़ेगी। 
Galatians 5:4 तुम जो व्यवस्था के द्वारा धर्मी ठहरना चाहते हो, मसीह से अलग और अनुग्रह से गिर गए हो। 
Galatians 5:5 क्योंकि आत्मा के कारण, हम विश्वास से, आशा की हुई धामिर्कता की बाट जोहते हैं। 
Galatians 5:6 और मसीह यीशु में न खतना, न खतनारिहत कुछ काम का है, परन्तु केवल, जो प्रेम के द्वारा प्रभाव करता है। 
Galatians 5:7 तुम तो भली भांति दौड़ रहे थे, अब किस ने तुम्हें रोक दिया, कि सत्य को न मानो। 
Galatians 5:8 ऐसी सीख तुम्हारे बुलाने वाले की ओर से नहीं। 
Galatians 5:9 थोड़ा सा खमीर सारे गूंधे हुए आटे को खमीर कर डालता है। 
Galatians 5:10 मैं प्रभु पर तुम्हारे विषय में भरोसा रखता हूं, कि तुम्हारा कोई दूसरा विचार न होगा; परन्तु जो तुम्हें घबरा देता है, वह कोई क्यों न हो दण्‍ड पाएगा। 
Galatians 5:11 परन्तु हे भाइयों, यदि मैं अब तक खतना का प्रचार करता हूं, तो क्यों अब तक सताया जाता हूं; फिर तो क्रूस की ठोकर जाती रही। 
Galatians 5:12 भला होता, कि जो तुम्हें डांवाडोल करते हैं, वे काट डाले जाते! 
Galatians 5:13 हे भाइयों, तुम स्‍वतंत्र होने के लिये बुलाए गए हो परन्तु ऐसा न हो, कि यह स्‍वतंत्रता शारीरिक कामों के लिये अवसर बने, वरन प्रेम से एक दूसरे के दास बनो। 
Galatians 5:14 क्योंकि सारी व्यवस्था इस एक ही बात में पूरी हो जाती है, कि तू अपने पड़ोसी से अपने समान प्रेम रख।

एक साल में बाइबल: 
  • 1 शमूएल 15-16
  • लूका 10:25-42


शनिवार, 9 अप्रैल 2016

उसके लिए


   हिटलर की जर्मनी में डीट्रिश बॉनहॉफर के लिए हर दिन खतरे का दिन था, परन्तु फिर भी वे जर्मनी छोड़कर चले नहीं गए। मेरा मानना है कि डीट्रिश का दृष्टिकोण भी प्रेरित पौलुस के समान ही था कि स्वर्ग जाना तो हार्दिक अभिलाषा है किंतु परमेश्वर के उद्देश्यों की पूर्ति के लिए वहाँ बने रहना जहाँ परमेश्वर ने उन्हें रखा है अधिक आवश्यक है (फिलिप्पियों १:२१)। इसलिए डीट्रिश जर्मनी में ही रहे; एक पादरी होने के नाते वे छिप कर आराधना सभाएं भी संचालित करते रहे और हिटलर के दुष्ट प्रशासन का सामना भी करते रहे।

   हर समय उनके जीवन पर मँडराते रहने वाले खतरे के बावजूद, डीट्रिश ने एक पुस्तक भी लिखी - Life Together (साथ का जीवन) जो मसीही सेवकाई के एक रूप - आतिथ्य, पर आधारित है। डीट्रिश ने आतिथ्य के इस सिद्धांत को व्यावाहरिक रूप में परख और प्रदर्शित करके भी दिखाया जब उन्हें मठ का जीवन जीने वाले लोगों के साथ और बाद में गिरिफ्तार होकर जेल में रहना पड़ा। डीट्रिश ने सिखाया कि प्रत्येक भोज, प्रत्येक कार्य, प्रत्येक वार्तालाप प्रभु यीशु मसीह को दूसरों के सामने प्रस्तुत करने का एक अवसर है, चाहे हम कितने भी तनाव से या कैसी भी विपरीत परिस्थितियों से होकर क्यों ना निकल रहे हों।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में हम पढ़ते हैं कि जब इस्त्राएली मिस्त्र की ग़ुलामी से निकलकर वाचा के स्थान की ओर कूच कर रहे थे तब परमेश्वर ने उन्हें निर्देश दिए कि वे परमेश्वर के उदाहरण का अनुसरण करें और परदेशियों, अतिथियों और विध्वाओं के प्रति प्रेम और संवेदनशीलता दिखाएं, उनकी सहायता तथा पहुनाई किया करें (व्यवस्थाविवरण 10:18-19; निर्गमन 22:21-22)। आज हम मसीही विश्वासी भी परमेश्वर के प्रेम के पात्र और उसकी पवित्र आत्मा द्वारा सामर्थी किए गए हैं ताकि दूसरों के प्रति अपने कोमल वचनों और प्रेमपूर्ण व्यवहार द्वारा उन अनेकों अवसरों पर परमेश्वर की सेवा करें जो नित-प्रतिदिन हमें परमेश्वर की ओर से प्राप्त होते रहते हैं।

   क्या हमारे दैनिक जीवन यात्रा में कोई ऐसा है जिसे हम अकेला और खोया हुआ पाते हैं? हम प्रभु यीशु पर विश्वास करके परमेश्वर की सहायता से ऐसे व्यक्ति के साथ दया और मेहनत करके उसे प्रभु यीशु से मिलने वाली अनन्त आशा और शांति के बारे में अवगत करवा सकते हैं; उसके लिए एक नए जीवन का मार्ग उसे दिखा सकते हैं। - रैंडी किलगोर


हम जितना अधिक अपने प्रति परमेश्वर के प्रेम को समझेंगे, उतना ही अधिक उस प्रेम को दूसरों के प्रति प्रदर्शित भी करेंगे।

और परदेशी को न सताना और न उस पर अन्धेर करना क्योंकि मिस्र देश में तुम भी परदेशी थे। किसी विधवा वा अनाथ बालक को दु:ख न देना। - निर्गमन 22:21-22

बाइबल पाठ: व्यवस्थाविवरण 10:12-22
Deuteronomy 10:12 और अब, हे इस्राएल, तेरा परमेश्वर यहोवा तुझ से इसके सिवाय और क्या चाहता है, कि तू अपने परमेश्वर यहोवा का भय मानें, और उसके सारे मार्गों पर चले, उस से प्रेम रखे, और अपने पूरे मन और अपने सारे प्राण से उसकी सेवा करे, 
Deuteronomy 10:13 और यहोवा की जो जो आज्ञा और विधि मैं आज तुझे सुनाता हूं उन को ग्रहण करे, जिस से तेरा भला हो? 
Deuteronomy 10:14 सुन, स्वर्ग और सब से ऊंचा स्वर्ग भी, और पृथ्वी और उस में जो कुछ है, वह सब तेरे परमेश्वर यहोवा ही का है; 
Deuteronomy 10:15 तौभी यहोवा ने तेरे पूर्वजों से स्नेह और प्रेम रखा, और उनके बाद तुम लोगों को जो उनकी सन्तान हो सर्व देशों के लोगों के मध्य में से चुन लिया, जैसा कि आज के दिन प्रगट है। 
Deuteronomy 10:16 इसलिये अपने अपने हृदय का खतना करो, और आगे को हठीले न रहो। 
Deuteronomy 10:17 क्योंकि तुम्हारा परमेश्वर यहोवा वही ईश्वरों का परमेश्वर और प्रभुओं का प्रभु है, वह महान पराक्रमी और भय योग्य ईश्वर है, जो किसी का पक्ष नहीं करता और न घूस लेता है। 
Deuteronomy 10:18 वह अनाथों और विधवा का न्याय चुकाता, और परदेशियों से ऐसा प्रेम करता है कि उन्हें भोजन और वस्त्र देता है। 
Deuteronomy 10:19 इसलिये तुम भी परदेशियों से प्रेम भाव रखना; क्योंकि तुम भी मिस्र देश में परदेशी थे। 
Deuteronomy 10:20 अपने परमेश्वर यहोवा का भय मानना; उसी की सेवा करना और उसी से लिपटे रहना, और उसी के नाम की शपथ खाना। 
Deuteronomy 10:21 वही तुम्हारी स्तुति के योग्य है; और वही तेरा परमेश्वर है, जिसने तेरे साथ वे बड़े महत्व के और भयानक काम किए हैं, जिन्हें तू ने अपनी आंखों से देखा है। 
Deuteronomy 10:22 तेरे पुरखा जब मिस्र में गए तब सत्तर ही मनुष्य थे; परन्तु अब तेरे परमेश्वर यहोवा ने तेरी गिनती आकाश के तारों के समान बहुत कर दिया है।

एक साल में बाइबल: 
  • 1 शमूएल 13-14
  • लूका 10:1-24


शुक्रवार, 8 अप्रैल 2016

परिवर्तित


   मेरा एक मित्र मुझसे हर बात में बेहतर है। वह मुझसे तीव्रबुद्धि है, मुझसे अधिक गंभीरता से विचार कर सकता है, मुझसे अधिक जानता है कि पढ़ने के लिए अच्छी पुस्तकें कहां से मिल सकती हैं और मुझसे अच्छा गोल्फ भी खेल लेता है। उसके साथ समय बिताना मुझे और भी बेहतर और भी विचारात्मक व्यक्ति बनने के लिए उकसाता है, और अच्छी उपलब्धियों के लिए प्रेरित करता है।

   यह एक आत्मिक सिद्धांत को भी हमारे समक्ष लाता है: हम मसीही विश्वासियों के लिए यह अनिवार्य है कि हम परमेश्वर के वचन बाइबल का नियमित अध्ययन करते रहें जिससे हम अपने प्रभु यीशु के संपर्क मे बने रहें, उसके जीवन से सीख सकें, उससे प्रेरणा एवं मार्गदर्शन पाकर अपने जीवन को और बेहतर बनाने के प्रयासरत रहें। प्रभु यीशु के निःस्वार्थ प्रेम से मैं दूसरों से बिना किसी शर्त के प्रेम करना सीखता हूं। प्रभु यीशु द्वारा बुरे से बुरे, तथा अपने दुश्मनों के प्रति भी दिखाए गए अनुग्रह और दया को देखकर मैं अपने क्षमा ना करने और बदला लेने की भावना रखने की भावना के लिए शर्मिंदा होता हूँ।

   मैं और भी धन्यवादी व्यक्ति बनता हूँ जब मुझे यह एहसास होता है कि मेरी गिरी हुई शर्मनाक हालत के बावजूद, प्रभु यीशु मुझ से प्रेम करता है, मेरे साथ बना रहता है और सदा ही मेरी भलाई के लिए कार्यरत रहता है, मुझे अपनी धार्मिकता से ढ़ांपे रहता है। जबकि उसकी मेरे साथ बनी रहने वाली उपस्थिति मुझे और भी अधिक उसके समान बनते जाने के लिए प्रेरित करती है, तो फिर मेरे लिए अपनी वर्तमान स्थिति में जड़ होकर जैसा मैं हूँ वैसा ही बने रहने कठिन हो जाता है। प्रभु यीशु की अद्भुत बुद्धिमता और विलक्षण कार्यविधि मुझे प्रोत्साहित और परिवर्तित करते हैं।

   प्रेरित पौलुस हमें मसीह यीशु को निहारते रहने के आनन्द में रहने का आवाहन करता है; और जब हम ऐसा करने लगते हैं तो हम उसकी समानता में परिवर्तित होते चले जाते हैं (2 कुरिन्थियों 3:18)।


प्रभु यीशु की निकटता में बने रहिए और आप उसकी समानता में परिवर्तित होने लग जाएंगे।

सो यदि कोई मसीह में है तो वह नई सृष्‍टि है: पुरानी बातें बीत गई हैं; देखो, वे सब नई हो गईं। - 2 कुरिन्थियों 5:17

बाइबल पाठ: 2 कुरिन्थियों 3:7-18
2 Corinthians 3:7 और यदि मृत्यु की यह वाचा जिस के अक्षर पत्थरों पर खोदे गए थे, यहां तक तेजोमय हुई, कि मूसा के मुंह पर के तेज के कराण जो घटता भी जाता था, इस्त्राएल उसके मुंह पर दृष्टि नहीं कर सकते थे। 
2 Corinthians 3:8 तो आत्मा की वाचा और भी तेजोमय क्यों न होगी? 
2 Corinthians 3:9 क्योंकि जब दोषी ठहराने वाली वाचा तेजोमय थी, तो धर्मी ठहराने वाली वाचा और भी तेजोमय क्यों न होगी? 
2 Corinthians 3:10 और जो तेजोमय था, वह भी उस तेज के कारण जो उस से बढ़कर तेजामय था, कुछ तेजोमय न ठहरा। 
2 Corinthians 3:11 क्योंकि जब वह जो घटता जाता था तेजोमय था, तो वह जो स्थिर रहेगा, और भी तेजोमय क्यों न होगा? 
2 Corinthians 3:12 सो ऐसी आशा रखकर हम हियाव के साथ बोलते हैं। 
2 Corinthians 3:13 और मूसा की नाईं नहीं, जिसने अपने मुंह पर परदा डाला था ताकि इस्त्राएली उस घटने वाली वस्तु के अन्‍त को न देखें। 
2 Corinthians 3:14 परन्तु वे मतिमन्‍द हो गए, क्योंकि आज तक पुराने नियम के पढ़ते समय उन के हृदयों पर वही परदा पड़ा रहता है; पर वह मसीह में उठ जाता है। 
2 Corinthians 3:15 और आज तक जब कभी मूसा की पुस्‍तक पढ़ी जाती है, तो उन के हृदय पर परदा पड़ा रहता है। 
2 Corinthians 3:16 परन्तु जब कभी उन का हृदय प्रभु की ओर फिरेगा, तब वह परदा उठ जाएगा। 
2 Corinthians 3:17 प्रभु तो आत्मा है: और जहां कहीं प्रभु का आत्मा है वहां स्‍वतंत्रता है। 
2 Corinthians 3:18 परन्तु जब हम सब के उघाड़े चेहरे से प्रभु का प्रताप इस प्रकार प्रगट होता है, जिस प्रकार दर्पण में, तो प्रभु के द्वारा जो आत्मा है, हम उसी तेजस्‍वी रूप में अंश अंश कर के बदलते जाते हैं।

एक साल में बाइबल: 
  • 1 शमूएल 10-12
  • लूका 9:37-62


गुरुवार, 7 अप्रैल 2016

गड़बड़ी


   मैं और मेरे पति ने हाल ही में एक नए घर में आकर रहना आरंभ किया था, जो बाहर से सफेद रंग का था। एक दिन कोई व्यक्ति हमारे घर के सामने स्ट्रॉबेरियों से भरा एक डब्बा रख कर चला गया, और उस पर पर्चा लगा गया कि हमें उन्हें अपने पड़ौसियों के साथ बाँटना है। हमारे तथा हमारे पड़ौसियों के लिए उसकी इच्छा तो भली थी, किंतु डब्बे के हमारे हाथों में आने से पहले, वह पड़ौस के बच्चों के हाथ लग गया और उन्होंने उन स्ट्रौबेरियों को हमारे सफेद घर की दिवारों पर फेंकने का आनन्द लिया। हम जब घर लौट कर आए, तो वे बच्चे हमारे घर की चहारदिवारी के पीछे से छिपकर अपनी करतूत की प्रतिक्रिया देखने को आ गए। हम उनके द्वारा करी गई इस गड़बड़ और गन्दगी को स्वयं भी साफ कर सकते थे, लेकिन इस घटना से बिगड़ सकने वाले संबंधों का ध्यान करके हमने यह आवश्यक समझा कि हम उनसे बातचीत करें और सफाई करने में उनकी सहायता लें।

   परस्पर संबंधों में गड़बड़ी आ जाने से परेशानियां आ सकती हैं; और यही बात फिलिप्पी की मसीही विश्वासियों की मण्डली में दिखाई दे रही थी। उस मण्डली की दो विश्वासयोग्य और प्रमुख सेविकाएं, युओदिया और सुन्तुखे, के बीच में परस्पर गहरा मतभेद आ गया था। प्रेरित पौलुस ने उन्हें और मण्डली को लिखा कि अपने मतभेदों को सुलझा लें (फिलिप्पियों 4:2)। साथ ही पौलुस ने मण्डली के एक अन्य सदस्य से चाहा कि वह भी नम्रता के साथ उनके साथ मिलकर समाधान ढूँढ़ने में सहायता करे: "हे सच्चे सहकर्मी मैं तुझ से भी बिनती करता हूं, कि तू उन स्‍त्रियों की सहयता कर..." (फिलिप्पियों 4:3)।

   ऐसा होना कोई अनोखी या कभी-कभार होने वाली बात नहीं है। हम सबके जीवनों का यह अनुभव है कि हमारे द्वारा भी गड़बड़ियां हुई हैं, हमारे भी औरों के साथ मतभेद गुए हैं, हमने भी अपने प्रीय जनों के मध्य मतभेदों को होते देखा है। पौलुस द्वारा परमेश्वर के वचन बाइबल में कही गई यह बात इस परिस्थिति के समाधान के लिए हमारा मार्गदर्शन करती है - नम्रता के साथ, परस्पर बातचीत से और अपने किसी परिपक्व और निशपक्ष साथी की सहायता तथा प्रभु और उसके वचन से मिलने वाले मार्गदर्शन से यह समाधान संभव है। - ऐनी सेटास


सच्चा प्रेम सामना भी करता है और यथावत भी कर देता है।

हे भाइयो, मैं तुम से यीशु मसीह जो हमारा प्रभु है उसके नाम के द्वारा बिनती करता हूं, कि तुम सब एक ही बात कहो; और तुम में फूट न हो, परन्तु एक ही मन और एक ही मत हो कर मिले रहो। - 1 कुरिन्थियों 1:10

बाइबल पाठ: फिलिप्पियों 4:1-9
Philippians 4:1 इसलिये हे मेरे प्रिय भाइयों, जिन में मेरा जी लगा रहता है जो मेरे आनन्द और मुकुट हो, हे प्रिय भाइयो, प्रभु में इसी प्रकार स्थिर रहो। 
Philippians 4:2 मैं यूओदिया को भी समझाता हूं, और सुन्‍तुखे को भी, कि वे प्रभु में एक मन रहें। 
Philippians 4:3 और हे सच्चे सहकर्मी मैं तुझ से भी बिनती करता हूं, कि तू उन स्‍त्रियों की सहयता कर, क्योंकि उन्होंने मेरे साथ सुसमाचार फैलाने में, क्‍लेमेंस और मेरे उन और सहकिर्मयों समेत परिश्रम किया, जिन के नाम जीवन की पुस्‍तक में लिखे हुए हैं। 
Philippians 4:4 प्रभु में सदा आनन्‍दित रहो; मैं फिर कहता हूं, आनन्‍दित रहो। 
Philippians 4:5 तुम्हारी कोमलता सब मनुष्यों पर प्रगट हो: प्रभु निकट है। 
Philippians 4:6 किसी भी बात की चिन्‍ता मत करो: परन्तु हर एक बात में तुम्हारे निवेदन, प्रार्थना और बिनती के द्वारा धन्यवाद के साथ परमेश्वर के सम्मुख अपस्थित किए जाएं। 
Philippians 4:7 तब परमेश्वर की शान्‍ति, जो समझ से बिलकुल परे है, तुम्हारे हृदय और तुम्हारे विचारों को मसीह यीशु में सुरिक्षत रखेगी। 
Philippians 4:8 निदान, हे भाइयों, जो जो बातें सत्य हैं, और जो जो बातें आदरणीय हैं, और जो जो बातें उचित हैं, और जो जो बातें पवित्र हैं, और जो जो बातें सुहावनी हैं, और जो जो बातें मनभावनी हैं, निदान, जो जो सदगुण और प्रशंसा की बातें हैं, उन्‍हीं पर ध्यान लगाया करो। 
Philippians 4:9 जो बातें तुम ने मुझ से सीखीं, और ग्रहण की, और सुनी, और मुझ में देखीं, उन्‍हीं का पालन किया करो, तब परमेश्वर जो शान्‍ति का सोता है तुम्हारे साथ रहेगा।

एक साल में बाइबल: 
  • 1 शमूएल 7-9
  • लूका 9:18-36


बुधवार, 6 अप्रैल 2016

इच्छा


   मेरे जीवन के लिए परमेश्वर की इच्छा क्या है? मेरे वयस्क होने तक यह प्रश्न बार-बार मेरे सामने आता रहता था; साथ ही संबंधित प्रश्न भी मुझे परेशान करते थे - यदि मैं परमेश्वर की इच्छा को ना जान पाई तो क्या होगा? यदि मैं परमेश्वर की इच्छा को पहचान ही ना सकूँ तो? मुझे लगता कि परमेश्वर की इच्छा को जानना मानो भूसे के ढेर में छिपी सूईं को ढूँढ़ना है - वह इच्छा छिपी हुई है; उसके समान लगने वाली बातों के कारण अस्पष्ट है; नकली बातों की भरमार उस एक सही बात से कहीं अधिक है; और यह असमंजस मुझे बेचैन करता था।

   लेकिन परमेश्वर की इच्छा के प्रति मेरा यह दृष्टिकोण गलत था, क्योंकि परमेश्वर के प्रति मेरा दृष्टिकोण गलत था। हमें इधर-उधर भटकते हुए, व्यर्थ प्रयास करते हुए, अनिश्चित होकर खोजते हुए देखना परमेश्वर को कदापि अच्छा नहीं लगता। वह चाहता है कि हम उसकी इच्छा को जानें; इसीलिए वह अपनी इच्छा को स्पष्ट और सरल बनाकर देता है और इसलिए वह हमें अनेकों-में-से-एक नहीं वरन केवल दो विकल्पों में से एक ही को चुनने कहता है, और ये विकल्प हैं - "जीवन और लाभ" या "मृत्यु और हानि" (व्यवस्थाविवरण 30:15)। इसे और भी सरल बनाते हुए, परमेश्वर कहता है, "जीवन ही को अपना लो" (व्यवस्थाविवरण 30:19)। जीवन को अपनाना, अर्थात परमेश्वर को चुनना और उसके वचन बाइबल का आज्ञाकारी हो जाना।

   जब मूसा ने अपनी मृत्यु से पहले इस्त्राएलियों को अंतिम बार संबोधित किया, तो उसने उन से आग्रह किया कि वे सही चुनाव करें और परमेश्वर के सारे वचन को मानने में चौकसी करें, क्योंकि यही उनके लिए जीवन होगा (व्यवस्थाविवरण 32:46-47)। हमारे लिए परमेश्वर की इच्छा और उसका वचन ही जीवन है; और प्रभु यीशु ही वह शाश्वत, अटल, जीवित वचन है और अनन्त जीवन का स्त्रोत है। परमेश्वर चाहे हमें हर चुनाव को करने का नुस्खा ना भी दे, लेकिन उसने हमारे अनुसरण करने के लिए एक सिद्ध उदाहरण हमें दिया है - प्रभु यीशु मसीह। सही चुनाव करना यदि सरल ना भी लगे, तो भी यदि परमेश्वर का वचन हमारा मार्गदर्शक है और परमेश्वर को महिमा देना हमारा उद्देश्य है, तो परमेश्वर अवश्य ही हमें सदबुद्धि देगा कि हम सही चुनाव कर सकें और उसकी इच्छा के अनुसार जीवन व्यतीत करें। - जूली ऐकैरमैन लिंक


परमेश्वर के मार्गदर्शन का प्रमाण अकसर आगे देखने से नहीं वरन पीछे मुड़कर बीते जीवन पर ध्यान करने से मिलता है।

तब उसने उन से कहा कि जितनी बातें मैं आज तुम से चिताकर कहता हूं उन सब पर अपना अपना मन लगाओ, और उनके अर्थात इस व्यवस्था की सारी बातों के मानने में चौकसी करने की आज्ञा अपने लड़के-बालों को दो। क्योंकि यह तुम्हारे लिये व्यर्थ काम नहीं, परन्तु तुम्हारा जीवन ही है, और ऐसा करने से उस देश में तुम्हारी आयु के दिन बहुत होंगे, जिसके अधिकारी होने को तुम यरदन पार जा रहे हो। - व्यवस्थाविवरण 32:46-47

बाइबल पाठ: व्यवस्थाविवरण 30:11-20
Deuteronomy 30:11 देखो, यह जो आज्ञा मैं आज तुझे सुनाता हूं, वह न तो तेरे लिये अनोखी, और न दूर है। 
Deuteronomy 30:12 और न तो यह आकाश में है, कि तू कहे, कि कौन हमारे लिये आकाश में चढ़कर उसे हमारे पास ले आए, और हम को सुनाए कि हम उसे मानें? 
Deuteronomy 30:13 और न यह समुद्र पार है, कि तू कहे, कौन हमारे लिये समुद्र पार जाए, और उसे हमारे पास ले आए, और हम को सुनाए कि हम उसे मानें? 
Deuteronomy 30:14 परन्तु यह वचन तेरे बहुत निकट, वरन तेरे मुंह और मन ही में है ताकि तू इस पर चले।
Deuteronomy 30:15 सुन, आज मैं ने तुझ को जीवन और मरण, हानि और लाभ दिखाया है। 
Deuteronomy 30:16 क्योंकि मैं आज तुझे आज्ञा देता हूं, कि अपने परमेश्वर यहोवा से प्रेम करना, और उसके मार्गों पर चलना, और उसकी आज्ञाओं, विधियों, और नियमों को मानना, जिस से तू जीवित रहे, और बढ़ता जाए, और तेरा परमेश्वर यहोवा उस देश में जिसका अधिकारी होने को तू जा रहा है, तुझे आशीष दे। 
Deuteronomy 30:17 परन्तु यदि तेरा मन भटक जाए, और तू न सुने, और भटककर पराए देवताओं को दण्डवत करे और उनकी उपासना करने लगे, 
Deuteronomy 30:18 तो मैं तुम्हें आज यह चितौनी दिए देता हूं कि तुम नि:सन्देह नष्ट हो जाओगे; और जिस देश का अधिकारी होने के लिये तू यरदन पार जा रहा है, उस देश में तुम बहुत दिनों के लिये रहने न पाओगे। 
Deuteronomy 30:19 मैं आज आकाश और पृथ्वी दोनों को तुम्हारे साम्हने इस बात की साक्षी बनाता हूं, कि मैं ने जीवन और मरण, आशीष और शाप को तुम्हारे आगे रखा है; इसलिये तू जीवन ही को अपना ले, कि तू और तेरा वंश दोनों जीवित रहें; 
Deuteronomy 30:20 इसलिये अपने परमेश्वर यहोवा से प्रेम करो, और उसकी बात मानों, और उस से लिपटे रहो; क्योंकि तेरा जीवन और दीर्घ जीवन यही है, और ऐसा करने से जिस देश को यहोवा ने इब्राहीम, इसहाक, और याकूब, तेरे पूर्वजों को देने की शपथ खाई थी उस देश में तू बसा रहेगा। 

एक साल में बाइबल: 

  • 1 शमूएल 4-6
  • लूका 9:1-17


मंगलवार, 5 अप्रैल 2016

उपहार


   एक प्रसिद्ध नाटक है Amadeus (अमेडियस) जो 18वीं सदी के एक संगीतज्ञ के परमेश्वर की इच्छा को जानने के प्रयास पर लिखा गया है। इस नाटक का एक पात्र, परमेश्वर भक्त एन्टोनियो सैलिरी की तीव्र इच्छा है कि वह ऐसा संगीतज्ञ बने जिसकी रचनाएं सदा स्मरण करी जाएं, किंतु उसके पास इसकी योग्यता नहीं है। इस बात को लेकर एन्टोनियो बहुत क्षुब्ध रहता है कि परमेश्वर ने उसकी बजाए ऐसा सर्वोत्तम संगीतज्ञ बनाने की योग्य्ता वोल्फ्गैंग अमेडियस मोज़ार्ट को दी है जो परमेश्वर भक्त भी नहीं है तथा स्वभाव से शरारती भी है।

   इस नाटक द्वारा, नाटक के लेखक ने वही प्रश्न उठाया है जो परमेश्वर के वचन बाइबल में अय्युब की पुस्तक के लेखक ने उठाया है, केवल प्रश्न को उठाने का ढ़ंग भिन्न है। अय्युब की पुस्तक में प्रश्न उठाया गया है कि परमेश्वर एक भक्त और धर्मी जन को परेशानियों और दुःख में क्यों आने देता है; जबकि अमेडियस का लेखक प्रश्न उठाता है कि परमेश्वर एक भक्तिहीन और शरारती व्यक्ति को, जो परमेश्वर से किसी भलाई पाने के सर्वथा अयोग्य है, इतनी अनोखी प्रतिभा क्यों प्रदान करता है?

   प्रभु यीशु मसीह द्वारा मज़दूरों और उनको मिलने वाले मेहनताने को लेकर कहा गया दृष्टांत, उप्रोक्त विरोधाभास का एक उत्तर समझता है। उस दृष्टांत में एक स्वामी अपने खेत में मज़दुरी के लिए मज़दुरों को ढूंढ़ने जाता है, और उन्हें काम पर लगाता है, और ऐसा वह दिन में कई बार करता है, दिन के अन्तिम घंटे में भी। दिन की स्माप्ति पर वह सब को उनकी निर्धारित मज़दूरी देता है। जिन मज़दूरों ने सारा दिन उसके लिए काम किया वे समझते हैं कि उन्हें उन लोगों से अधिक मज़दूरी मिलेगी जिन्होंने बस घंटा भर ही काम किया था। लेकिन जब स्वामी सबको एक समान ही मज़दूरी देता है तो वे भौंचके रह जाते हैं और इस असंगति को लेकर प्रश्न उठाते हैं। स्वामी उन्हें उत्तर देता है कि वह उनके साथ कोई अन्याय नहीं कर रहा है क्योंकि जितना उन से कार्य आरंभ करने के समय तय हुआ था, उतनी ही मज़दूरी उसने उन्हें दी है, और साथ ही यह भी समझाता है कि यदि वह अपनी संपत्ति में से, स्वेच्छा से, किसी को कुछ देना चाहे तो इससे कौन और क्योंकर उसे रोक सकता है?

   प्रभु यीशु के इस दृष्टांत द्वारा जो बात समझाई गई है वह है कि परमेश्वर अपनी सुइच्छा से लोगों को अपने अनुग्रह का दान देता है; यह उसकी सप्रेम भेंट है जिसका मज़दूरी के समान आँकलन कदापि नहीं किया जा सकता है। परमेश्वर जिसे जो देना चाहता है, उसे देता है - उसकी यह इच्छा और इसके पीछे छिपी उसकी भावना या योजना चाहे हमारी समझ में आए या ना आए। उसके उपहार उस से किसी रीति से कमा कर नहीं लिए जा सकते, बस धन्यवादी और कृतज्ञ होकर ग्रहण ही किए जा सकते हैं।

   प्रभु यीशु मसीह में होकर मिलने वाली पापों की क्षमा, धार्मिकता और उद्धार भी परमेश्वर के अनुग्रह से मिलने वाले उपहार हैं। हम इन्हें अपनी किसी नेकी या भलाई इत्यादि द्वारा उससे कमा नहीं सकते और ना ही इन बातों के आधार पर परमेश्वर को इन्हें हमें देने के लिए बाध्य कर सकते हैं। जो कोई साधारण विश्वास और सच्चे पश्चाताप के साथ प्रभु यीशु के बलिदान और पुनरुत्थान द्वारा उपलब्ध करवाई गई परमेश्वर की इस अनमोल भेंट को स्वीकार कर लेता है वह परमेश्वर की सनतान और स्वर्ग का अधिकारी हो जाता है। - फिलिप यैन्सी


परमेश्वर के अनुग्रह के क्षेत्र में, "योग्य होना" कोई अर्थ नहीं रखता।

परन्तु परमेश्वर ने जो दया का धनी है; अपने उस बड़े प्रेम के कारण, जिस से उसने हम से प्रेम किया। जब हम अपराधों के कारण मरे हुए थे, तो हमें मसीह के साथ जिलाया; (अनुग्रह ही से तुम्हारा उद्धार हुआ है।) और मसीह यीशु में उसके साथ उठाया, और स्‍वर्गीय स्थानों में उसके साथ बैठाया। कि वह अपनी उस कृपा से जो मसीह यीशु में हम पर है, आने वाले समयों में अपने अनुग्रह का असीम धन दिखाए। क्योंकि विश्वास के द्वारा अनुग्रह ही से तुम्हारा उद्धार हुआ है, और यह तुम्हारी ओर से नहीं, वरन परमेश्वर का दान है। - इफिसियों 2:4-8

बाइबल पाठ: मत्ती 20:1-15
Matthew 20:1 स्वर्ग का राज्य किसी गृहस्थ के समान है, जो सवेरे निकला, कि अपने दाख की बारी में मजदूरों को लगाए। 
Matthew 20:2 और उसने मजदूरों से एक दीनार रोज पर ठहराकर, उन्हें अपने दाख की बारी में भेजा। 
Matthew 20:3 फिर पहर एक दिन चढ़े, निकल कर, और औरों को बाजार में बेकार खड़े देखकर, 
Matthew 20:4 उन से कहा, तुम भी दाख की बारी में जाओ, और जो कुछ ठीक है, तुम्हें दूंगा; सो वे भी गए। 
Matthew 20:5 फिर उसने दूसरे और तीसरे पहर के निकट निकलकर वैसा ही किया। 
Matthew 20:6 और एक घंटा दिन रहे फिर निकल कर औरों को खड़े पाया, और उन से कहा; तुम क्यों यहां दिन भर बेकार खड़े रहे? उन्हों ने उस से कहा, इसलिये, कि किसी ने हमें मजदूरी पर नहीं लगाया। 
Matthew 20:7 उसने उन से कहा, तुम भी दाख की बारी में जाओ। 
Matthew 20:8 सांझ को दाख बारी के स्‍वामी ने अपने भण्‍डारी से कहा, मजदूरों को बुलाकर पिछलों से ले कर पहिलों तक उन्हें मजदूरी दे दे। 
Matthew 20:9 सो जब वे आए, जो घंटा भर दिन रहे लगाए गए थे, तो उन्हें एक एक दीनार मिला। 
Matthew 20:10 जो पहिले आए, उन्होंने यह समझा, कि हमें अधिक मिलेगा; परन्तु उन्हें भी एक ही एक दीनार मिला। 
Matthew 20:11 जब मिला, तो वह गृहस्थ पर कुडकुड़ा के कहने लगे। 
Matthew 20:12 कि इन पिछलों ने एक ही घंटा काम किया, और तू ने उन्हें हमारे बराबर कर दिया, जिन्हों ने दिन भर का भार उठाया और घाम सहा? 
Matthew 20:13 उसने उन में से एक को उत्तर दिया, कि हे मित्र, मैं तुझ से कुछ अन्याय नहीं करता; क्या तू ने मुझ से एक दीनार न ठहराया? 
Matthew 20:14 जो तेरा है, उठा ले, और चला जा; मेरी इच्छा यह है कि जितना तुझे, उतना ही इस पिछले को भी दूं। 
Matthew 20:15 क्या उचित नहीं कि मैं अपने माल से जो चाहूं सो करूं? क्या तू मेरे भले होने के कारण बुरी दृष्टि से देखता है? 

एक साल में बाइबल: 
  • 1 शमूएल 1-3
  • लूका 8:26-56


सोमवार, 4 अप्रैल 2016

रख-रखाव


   मैं जब अपनी बेटियों को कार चलाना सिखा रहा था तो मैंने उन्हें कार के रख-रखाव से संबंधित कुछ बुनियादी बातों पर भी ध्यान देना सिखाया। हम एक स्थानीय सर्विस स्टेशन पर गए जहाँ उन्होंने देखा और सीखा कि जब भी कार में पैट्रोल डलवाएं तो साथ ही इंजन में तेल भी कैसे जाँच लें। इसके महत्व को समझाने के लिए मैंने उन से कहा, "तेल सस्ता होता है; लेकिन इंजन बहुत महंगा है"; अर्थात इंजन में तेल डालने का, इंजन के रख-रखाव का, खर्च तो थोड़ा सा ही है लेकिन तेल या रख-रखाव के अभाव में खराब हो जाने वाले इंजन को बदलना बहुत महंगा होता है। आज, कई सालों बाद भी उन्हें वह बात याद है, और वे मुझे यह बताती रहती हैं।

   ऐसे ही रख-रखाव हमारे आत्मिक जीवनों के लिए भी बहुत आवश्यक है। प्रति-दिन समय निकाल कर परमेश्वर के वचन बाइबल को पढ़ने और प्रार्थना के द्वारा परमेश्वर की आवाज़ को सुनना, उसके अनुसार अपने जीवन को सुधारना, सुचारू रीति से चलाना हमारे व्यक्तिगत जीवन के रख-रखाव का बहुत महत्वपूर्ण भाग है। दाऊद ने भजन 5 में लिखा: "हे यहोवा, भोर को मेरी वाणी तुझे सुनाई देगी, मैं भोर को प्रार्थना कर के तेरी बाट जोहूंगा" (भजन 5:3), और इसके बाद के पदों में उसने अपने हृदय से परमेश्वर की आराधना, धन्यवाद और प्रार्थना के निवेदन करे।

   बहुत से लोगों का नियम है कि वे अपना दिन परमेश्वर के साथ संगति के साथ करके आरंभ करते हैं। अपनी निज किसी भी बात को करने से पहले, वह चाहे खबरें जानना हो या प्रातः का नाश्ता करना हो या फिर ईमेल देखना हो, वे कुछ समय परमेश्वर के वचन बाइबल का एक भाग पढ़ने, परमेश्वर के प्रति उसके प्रेम तथा महानता के लिए धनयवादी होने, आराधना और प्रार्थना करके उससे दिन भर के लिए मार्गदर्शन लेने के द्वारा करते हैं। तो अन्य कुछ लोग दिन के भिन्न समयों में जब अवसर मिलता है परमेश्वर के वचन को पढ़ने और प्रार्थना करने के द्वारा उससे संगति बनाए रखते हैं।

   यह सब ना तो कोई रीति-रिवाज़ है और ना ही किसी धार्मिक रिवाज़ की पूर्ति मात्र है; यह आत्मिक रख-रखाव है - हम प्रतिदिन अपने प्रभु परमेश्वर को स्मरण करते हैं, उसका धन्यवाद करते हैं और उससे आग्रह करते हैं कि वह हमारे हृदयों में, हमारे साथ-साथ बना रहे, हमारा सहायक और मार्गदर्शक हो तथा प्रत्येक अनुचित बात और बुराई से हमें बचाए रखे। - डेविड मैक्कैसलैंड


परमेश्वर के वचन और प्रार्थना में जीवन की जड़ें जमा लेने से ही परिस्थित्यों का सामना करने की स्थिरता आती है।

और हमें परीक्षा में न ला, परन्तु बुराई से बचा; क्योंकि राज्य और पराक्रम और महिमा सदा तेरे ही हैं। आमीन। - मत्ती 6:13

बाइबल पाठ: भजन 5
Psalms 5:1 हे यहोवा, मेरे वचनों पर कान लगा; मेरे ध्यान करने की ओर मन लगा। 
Psalms 5:2 हे मेरे राजा, हे मेरे परमेश्वर, मेरी दोहाई पर ध्यान दे, क्योंकि मैं तुझी से प्रार्थना करता हूं। 
Psalms 5:3 हे यहोवा, भोर को मेरी वाणी तुझे सुनाई देगी, मैं भोर को प्रार्थना कर के तेरी बाट जोहूंगा। 
Psalms 5:4 क्योंकि तू ऐसा ईश्वर नहीं जो दुष्टता से प्रसन्न हो; बुराई तेरे साथ नहीं रह सकती। 
Psalms 5:5 घमंडी तेरे सम्मुख खड़े होने न पांएगे; तुझे सब अनर्थकारियों से घृणा है। 
Psalms 5:6 तू उन को जो झूठ बोलते हैं नाश करेगा; यहोवा तो हत्यारे और छली मनुष्य से घृणा करता है। 
Psalms 5:7 परन्तु मैं तो तेरी अपार करूणा के कारण तेरे भवन में आऊंगा, मैं तेरा भय मानकर तेरे पवित्र मन्दिर की ओर दण्डवत करूंगा। 
Psalms 5:8 हे यहोवा, मेरे शत्रुओं के कारण अपने धर्म के मार्ग में मेरी अगुवाई कर; मेरे आगे आगे अपने सीधे मार्ग को दिखा। 
Psalms 5:9 क्योंकि उनके मुंह में कोई सच्चाई नहीं; उनके मन में निरी दुष्टता है। उनका गला खुली हुई कब्र है, वे अपनी जीभ से चिकनी चुपड़ी बातें करते हैं। 
Psalms 5:10 हे परमेश्वर तू उन को दोषी ठहरा; वे अपनी ही युक्तियों से आप ही गिर जाएं; उन को उनके अपराधों की अधिकाई के कारण निकाल बाहर कर, क्योंकि उन्होंने तुझ से बलवा किया है। 
Psalms 5:11 परन्तु जितने तुझ पर भरोसा रखते हैं वे सब आनन्द करें, वे सर्वदा ऊंचे स्वर से गाते रहें; क्योंकि तू उनकी रक्षा करता है, और जो तेरे नाम के प्रेमी हैं तुझ में प्रफुल्लित हों। 
Psalms 5:12 क्योंकि तू धर्मी को आशीष देगा; हे यहोवा, तू उसको अपने अनुग्रहरूपी ढाल से घेरे रहेगा।

एक साल में बाइबल: 
  • रूत 1-4
  • लूका 8:1-25