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गुरुवार, 14 जुलाई 2016

सामर्थी


   अपने समय में मैं अमेरिका के अनेकों पर्वत पर चढ़ चुका हूँ, और मेरा विश्वास कीजिए, पर्वत-शिखरों पर कुछ नहीं उगता। वे शिखर केवल चट्टान ही होते हैं जिनपर या तो बर्फ या काई आदि होते हैं; अन्न तो वहाँ होता ही नहीं है, इसलिए अन्न की बहुतायत का तो प्रश्न ही नहीं उठता।

   लेकिन परमेश्वर के वचन बाइबल में भजन 72 के लेखक दाऊद ने अपने पुत्र सुलेमान के राज्य में परमेश्वर की सामर्थ के बारे में कहा,  "देश में पहाड़ों की चोटियों पर बहुत सा अन्न होगा..." (भजन 72:16)। जबकि पर्वत-शिखर पर अन्न होना इतना अन्होना है, तो फिर दाऊद परमेश्वर की सामर्थ से संबंधित क्या कह रहा था? सुलेमान का तात्पर्य था कि परमेश्वर की सामर्थ अति निराशाजनक परिस्थिति में भी अनपेक्षित परिणाम उत्पन्न कर सकती है।

   संभव है कि आप आज अपने आप को बहुत गौण समझते हों, परमेश्वर के राज्य के लिए कुछ भी फल ला पाने के लिए अयोग्य समझते हों; हिम्मत रखिए, परमेश्वर आप में होकर भी अपने राज्य के लिए भरपूरी की फसल उत्पन्न कर सकता है - यदि आप उसे ऐसा करने दें तो। मसीही विश्वास का यह एक बड़ा विरोधाभास है - परमेश्वर तुच्छ और अयोग्य समझे जाने वाले लोगों के माध्यम से ही अति महान कार्य करता है; उसके राज्य में उपयोगी तथा कारगर होने के लिए वे ही सबसे उपयुक्त और सबसे योग्य हैं जो सांसारिक परिभाषा से तुच्छ और अयोग्य हैं (1 कुरिन्थियों 1:27-29)।

    हम अपनी नज़रों में बहुत बड़े या अभिमानी होने के कारण परमेश्वर के लिए अनुपयोगी तो हो सकते हैं, किंतु बहुत छोटे होने के कारण परमेश्वर के लिए कभी अनुपयोगी नहीं हो सकते। जैसा प्रेरित पौलुस ने अपने अनुभव में होकर लिखा है, हम निर्बलता में ही बलवंत होते हैं: "इस कारण मैं मसीह के लिये निर्बलताओं, और निन्‍दाओं में, और दरिद्रता में, और उपद्रवों में, और संकटों में, प्रसन्न हूं; क्योंकि जब मैं निर्बल होता हूं, तभी बलवन्‍त होता हूं" (2 कुरिन्थियों 12:10); और परमेश्वर के द्वारा हमें उपलब्ध करवाई गई सामर्थ से हम वह सब कुछ कर सकते जिसके लिए उसने हमें बुलाया और ठहराया है "जो मुझे सामर्थ देता है उस में मैं सब कुछ कर सकता हूं" (फिलिप्पियों 4:13)। - डेविड रोपर


परमेश्वर की सामर्थ अनुभव करने के लिए हमें अपनी सभी योग्यता तथा सामर्थ से खाली होना पड़ेगा।

परन्तु परमेश्वर ने जगत के मूर्खों को चुन लिया है, कि ज्ञान वालों को लज्ज़ित करे; और परमेश्वर ने जगत के निर्बलों को चुन लिया है, कि बलवानों को लज्ज़ित करे। और परमेश्वर ने जगत के नीचों और तुच्‍छों को, वरन जो हैं भी नहीं उन को भी चुन लिया, कि उन्हें जो हैं, व्यर्थ ठहराए। ताकि कोई प्राणी परमेश्वर के साम्हने घमण्‍ड न करने पाए। - 1 कुरिन्थियों 1:27-29

बाइबल पाठ: भजन 72:12-20
Psalms 72:12 क्योंकि वह दोहाई देने वाले दरिद्र को, और दु:खी और असहाय मनुष्य का उद्धार करेगा। 
Psalms 72:13 वह कंगाल और दरिद्र पर तरस खाएगा, और दरिद्रों के प्राणों को बचाएगा। 
Psalms 72:14 वह उनके प्राणों को अन्धेर और उपद्रव से छुड़ा लेगा; और उनका लोहू उसकी दृष्टि में अनमोल ठहरेगा।
Psalms 72:15 वह तो जीवित रहेगा और शेबा के सोने में से उसको दिया जाएगा। लोग उसके लिये नित्य प्रार्थना करेंगे; और दिन भर उसको धन्य कहते रहेंगे। 
Psalms 72:16 देश में पहाड़ों की चोटियों पर बहुत सा अन्न होगा; जिसकी बालें लबानोन के देवदारों की नाईं झूमेंगी; और नगर के लोग घास की नाईं लहलहाएंगे। 
Psalms 72:17 उसका नाम सदा सर्वदा बना रहेगा; जब तक सूर्य बना रहेगा, तब तक उसका नाम नित्य नया होता रहेगा, और लोग अपने को उसके कारण धन्य गिनेंगे, सारी जातियां उसको भाग्यवान कहेंगी।
Psalms 72:18 धन्य है, यहोवा परमेश्वर जो इस्राएल का परमेश्वर है; आश्चर्य कर्म केवल वही करता है। 
Psalms 72:19 उसका महिमायुक्त नाम सर्वदा धन्य रहेगा; और सारी पृथ्वी उसकी महिमा से परिपूर्ण होगी। आमीन फिर आमीन।
Psalms 72:20 यिशै के पुत्र दाऊद की प्रार्थना समाप्त हुई।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 10-12;
  • प्रेरितों 19:1-20



बुधवार, 13 जुलाई 2016

अनुग्रह


   मैंने अपनी कार को उपनाम दिया है - "अनुग्रहरहित"। कार के साथ इतवार की प्रातः मेरे लिए सबसे भारी होती है। मुझे चर्च के लिए जो कुछ चाहिए होता है, वह सब कार में रखकर, चर्च जाने के लिए कार की अपनी सीट पर बैठती हूँ, कार के दरवाज़े बन्द करती हूँ, मेरे पति कार को गैराज से बाहर निकालना आरंभ ही करते हैं कि मेरे सीट-बेल्ट ना बांधने की चेतावनी-सूचक बजना आरंभ हो जाता है! मैं कहती हूँ, "बस एक मिनिट और; मैं अपने स्थान पर व्यवस्थित हो रही हूँ, और फिर मैं बेल्ट बाँध लूँगी" लेकिन कोई फर्क नहीं पड़ता, वह चेतावनी सूचक बजता ही रहता है जब तक मैं बेल्ट बाँध नहीं लेती - मेरी परिस्थितियों पर उसे कोई दया नहीं आती, मुझे उससे कभी कोई माफी नहीं मिलती।

   छोटी सी यह दिक्कत मुझे स्मरण दिलाती है कि जीवन कितना कठिन हो जाए यदि अनुग्रह और दया हमारे जीवनों ना हो। यदि ऐसा हो जाए तो हम में से प्रत्येक को, हर छोटी से छोटी गलती के लिए भी तुरंत ही हिसाब देने के लिए खड़े होना पड़ेगा; हमें पश्चाताप करने या अपनी गलती को सुधारने या अपने व्यवहार को बदलने का कोई अवसर ही नहीं मिलेगा। कोई क्षमा नहीं होगी, कोई दया नहीं की जाएगी, बेहतर हो जाने या सुधरने की कोई आशा नहीं रहेगी।

   आज के इस संसार में जीना कभी-कभी ऐसा ही लगता है मानो हम अनुग्रहरहितता के दलदल में डाल दिए गए हों। जब हमारे छोटे-छोटे अविवेकपूर्ण कार्य या बातें लोगों के समक्ष बढ़ा-चढ़ा कर बड़ी गलतियाँ बना कर प्रस्तुत किए जाते हैं, जब लोग दूसरों की कमियों या गलतियों को नज़रन्दाज़ करना नहीं चाहते, वरन उन्हें स्वार्थसिद्धी की सीढ़ीयाँ बनाकर स्वयं आगे बढ़ जाना चाहते हैं, तो जीवन ऐसे बोझ तले दबा प्रतीत होता है जिस बोझ को हमें उठाने ही नहीं था। लेकिन हम मसीही विश्वासियों के पास एक विलक्षण आशा है - परमेश्वर पिता ने हमारे, तथा संसार के सभी लोगों के पाप के सभी बोझों को उठा लेने के लिए प्रभु यीशु को संसार में भेजा है (मत्ती 11:28)। जो कोई भी साधारण विश्वास के साथ प्रभु यीशु से अपने पापों की माफी माँग लेता है, अपना जीवन उसे समर्पित कर देता है, प्रभु परमेश्वर अपने अनुग्रह में होकर उसके पाप के सभी बोझ उठा लेता है, उसे उन बोझों और उनके दुषपरिणामों से मुक्त कर देता है।

   अब जिनपर प्रभु परमेश्वर की ओर से यह अनुग्रह हुआ है, जिन्होंने प्रभु के इस अनुग्रह की भेंट को स्वीकार किया है, उअनकी यह ज़िम्मेदारी है कि वे इस अनुग्रह के बारे में औरों को बताएँ भी और अपने जीवनों से दूसरों को इसे दिखाएँ भी "जो मनुष्य बुद्धि से चलता है वह विलम्ब से क्रोध करता है, और अपराध को भुलाना उसको सोहता है" (नीतिवचन 19:11)। - जूली ऐकैरमैन लिंक


जब हम अपने प्रति परमेश्वर के अनुग्रह को सधन्यवाद स्वीकारते हैं, 
तब हम इस अनुग्रह को आनन्द के साथ उन्हें भी बाँटते हैं जिन्हें इसकी आवश्यकता है।

हे सब परिश्रम करने वालों और बोझ से दबे लोगों, मेरे पास आओ; मैं तुम्हें विश्राम दूंगा। - मत्ती 11:28

बाइबल पाठ: 1 पतरस 4:1-11
1 Peter 4:1 सो जब कि मसीह ने शरीर में हो कर दुख उठाया तो तुम भी उस ही मनसा को धारण कर के हथियार बान्‍ध लो क्योंकि जिसने शरीर में दुख उठाया, वह पाप से छूट गया। 
1 Peter 4:2 ताकि भविष्य में अपना शेष शारीरिक जीवन मनुष्यों की अभिलाषाओं के अनुसार नहीं वरन परमेश्वर की इच्छा के अनुसार व्यतीत करो। 
1 Peter 4:3 क्योंकि अन्यजातियों की इच्छा के अनुसार काम करने, और लुचपन की बुरी अभिलाषाओं, मतवालापन, लीलाक्रीड़ा, पियक्कड़पन, और घृणित मूर्तिपूजा में जहां तक हम ने पहिले समय गंवाया, वही बहुत हुआ। 
1 Peter 4:4 इस से वे अचम्भा करते हैं, कि तुम ऐसे भारी लुचपन में उन का साथ नहीं देते, और इसलिये वे बुरा भला कहते हैं। 
1 Peter 4:5 पर वे उसको जो जीवतों और मरे हुओं का न्याय करने को तैयार है, लेखा देंगे। 
1 Peter 4:6 क्योंकि मरे हुओं को भी सुसमाचार इसी लिये सुनाया गया, कि शरीर में तो मनुष्यों के अनुसार उन का न्याय हो, पर आत्मा में वे परमेश्वर के अनुसार जीवित रहें। 
1 Peter 4:7 सब बातों का अन्‍त तुरन्त होने वाला है; इसलिये संयमी हो कर प्रार्थना के लिये सचेत रहो। 
1 Peter 4:8 और सब में श्रेष्ठ बात यह है कि एक दूसरे से अधिक प्रेम रखो; क्योंकि प्रेम अनेक पापों को ढांप देता है। 
1 Peter 4:9 बिना कुड़कुड़ाए एक दूसरे की पहुनाई करो। 
1 Peter 4:10 जिस को जो वरदान मिला है, वह उसे परमेश्वर के नाना प्रकार के अनुग्रह के भले भण्‍डारियों की नाईं एक दूसरे की सेवा में लगाए। 
1 Peter 4:11 यदि कोई बोले, तो ऐसा बोले, मानों परमेश्वर का वचन है; यदि कोई सेवा करे; तो उस शक्ति से करे जो परमेश्वर देता है; जिस से सब बातों में यीशु मसीह के द्वारा, परमेश्वर की महिमा प्रगट हो: महिमा और साम्राज्य युगानुयुग उसी की है। आमीन।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 7-9
  • प्रेरितों 18


मंगलवार, 12 जुलाई 2016

नाम


   किसी व्यक्ति के उपनाम अकसर उस व्यक्ति के किसी गुण या शारीरिक विशेषता पर आधारित होते हैं, और उम्र भर उस व्यक्ति के साथ लगे रहते हैं। बचपन में मेरे होंठ चेहरे के अनुपात में काफी मोटे थे और मुझे चिड़ाने के लिए बच्चे मुझे "बड़े होंठोंवाला" कहा करते थे; मैं प्रसन्न हूँ कि बचपन में मेरे प्राथमिक स्कूल में मेरे सहपाठियों द्वारा दिया गया मेरा यह उपनाम मेरे साथ लगा हुआ नहीं है।

   अपने उस उपनाम के विपरीत, मैं परमेश्वर के विभिन्न गुणों और चरित्र को दर्शाने वाले, परमेश्वर के वचन बाइबल में दिए गए, उसके अनेक नामों को बहुत पसन्द करता हूँ। परमेश्वर अद्भुत रूप से बहुआयामी तथा अनेकों गुणों को दिखाने वाला परमेश्वर है, और बाइबल में दिए गए ये नाम यही दिखाते हैं। उन नामों में से कुछ हैं:
  • एलोहिम, परमेश्वर जो ईश्वरों का ईशवर है
  • यहोवा यिरे, परमेश्वर जो प्रावधान करता है
  • एल-शद्दाई, सर्वशक्तिमान परमेश्वर
  • यहोवा राफा, चंगा करने वाला परमेश्वर
  • यहोवा शालोम, शान्ति का परमेश्वर
  • यहोवा शामा, साथ-साथ रहने वाला परमेश्वर
  • यहोवा याहवे, वाचाओं को निभाने वाला हमारा प्रेमी परमेश्वर


   इसलिए इसमें कोई विसमय की बात नहीं है कि बाइबल की नीतिवचन पुस्तक का लेखक हमें स्मरण करवाता है कि "यहोवा का नाम दृढ़ गढ़ है; धर्मी उस में भाग कर सब दुर्घटनाओं से बचता है" (नीतिवचन 18:10)। जब जीवन की परिस्थितियाँ कठिन हों, आप भयभीत या असुरक्षित महसूस करें, तो परमेश्वर के इन तथा अन्य नामों पर मनन करें और उससे प्रार्थना करें। आश्वस्त रहें, प्रभु परमेश्वर अपने नाम के प्रति वफादार रहेगा। - जो स्टोवैल


परमेश्वर के नाम, जो उसके चरित्र को दर्शाते हैं, 
हमें जब भी उसकी आवश्यकता होती है, सांत्वना प्रदान करते हैं।

यहोवा मेरी चट्टान, और मेरा गढ़ और मेरा छुड़ाने वाला है; मेरा ईश्वर, मेरी चट्टान है, जिसका मैं शरणागत हूं, वह मेरी ढ़ाल और मेरी मुक्ति का सींग, और मेरा ऊँचा गढ़ है। - भजन 18:2

बाइबल पाठ: नीतिवचन 18:1-10
Proverbs 18:1 जो औरों से अलग हो जाता है, वह अपनी ही इच्छा पूरी करने के लिये ऐसा करता है, 
Proverbs 18:2 और सब प्रकार की खरी बुद्धि से बैर करता है। मूर्ख का मन समझ की बातों में नहीं लगता, वह केवल अपने मन की बात प्रगट करना चाहता है। 
Proverbs 18:3 जहां दुष्ट आता, वहां अपमान भी आता है; और निन्दित काम के साथ नामधराई होती है। 
Proverbs 18:4 मनुष्य के मुंह के वचन गहिरा जल, वा उमण्डने वाली नदी वा बुद्धि के सोते हैं। 
Proverbs 18:5 दुष्ट का पक्ष करना, और धर्मी का हक मारना, अच्छा नहीं है। 
Proverbs 18:6 बात बढ़ाने से मूर्ख मुकद्दमा खड़ा करता है, और अपने को मार खाने के योग्य दिखाता है। 
Proverbs 18:7 मूर्ख का विनाश उस की बातों से होता है, और उसके वचन उस के प्राण के लिये फन्दे होते हैं। 
Proverbs 18:8 कानाफूसी करने वाले के वचन स्वादिष्ट भोजन की नाईं लगते हैं; वे पेट में पच जाते हैं। 
Proverbs 18:9 जो काम में आलस करता है, वह बिगाड़ने वाले का भाई ठहरता है। 
Proverbs 18:10 यहोवा का नाम दृढ़ गढ़ है; धर्मी उस में भाग कर सब दुर्घटनाओं से बचता है।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 4-6
  • प्रेरितों 17:16-34


सोमवार, 11 जुलाई 2016

कैसा हो?


   मुझे स्मरण हैं 1991 में वे टेलिविज़न समाचार रिपोर्ट्स देखना जब मॉस्को की सड़कों पर अहिंसक क्रांति घटित हो रही थी। रूस के वे नागरिक जो अब तक अपने जीवन की हर बात के लिए सरकार द्वारा निर्धारित और नियंत्रित कार्यक्रमों तथा योजनाओं के अनुसार रहा करते थे, अचानक ही स्थान स्थान पर खड़े होकर कहने लगे, "अब हम स्वतंत्र नागरिकों के समान आचरण करेंगे"; सरकार द्वारा पूर्णतः नियंत्रित अपने जीवन के विरोध में वे सड़कों पर आने लगे और सैनिक टैंकों के सामने आकर खड़े होने लगे। भवनों के अन्दर बैठे नेतृत्व करने वाले सरकारी लोगों और बाहर जमा जन समूह के चेहरों पर दिखने वाले भाव यह स्पष्ट दिखा रहे थे कि वास्तव में कौन भयभीत है और कौन स्वतंत्र है।

   फिनलैंड के टेलिविज़न पर दिखाई जा रही मॉस्को के रेड स्कुएयर में घटित होने वाले बातों को देखकर मुझे "मसीही विश्वास" को समझने का एक नया दृष्टिकोण मिला - मसीही विश्वास मानसिक विक्षेप का विपरीतार्थक शब्द है। भय से ग्रस्त मान्सिक विक्षेपित व्यक्ति हर बात में अपने भय के कारण को देखता है और उसी के अनुसार अपने जीवन को संचालित करता है। उसके आस-पास, या उसके साथ जो कुछ भी होता है, वह उसके भय को और बढ़ाता है।

   इसके विपरीत मसीही विश्वास है; मसीह यीशु पर विश्वास करने वाला व्यक्ति अपने जीवन को भय के आधार पर नहीं वरन परमेश्वर पर लाए गए उसके विश्वास के आधार पर संचालित करता है। उसके आस-पास, उसके जीवन में, चाहे कैसी भी अव्यवस्था और परेशान करने वाली परिस्थितियाँ क्यों ना हों, मसीही विश्वासी यह जानता और मानता है कि सब कुछ परमेश्वर के नियंत्रण में है, और परमेश्वर जो कुछ भी उसके जीवन में आने देगा वह उसकी भलाई ही के लिए है (रोमियों 8:28)। एक मसीही विश्वासी होने के नाते मुझे इस बात पर ध्यान केंद्रित नहीं करना चाहिए कि मेरी भावनाएँ मेरी परिस्थितियों को लेकर क्या हैं, वरन मुझे हर समय इस बोध के साथ रहना चाहिए कि परमेश्वर मुझसे प्रेम करता है और मैं परमेश्वर की सन्तान होने के नाते उसके लिए बहुत महत्वपूर्ण हूँ।

   कैसा हो यदि हम मसीही विश्वासी, हम जो परमेश्वर के राज्य के लोग हैं, परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित यूहन्ना द्वारा लिखी गई बात "हे बालको, तुम परमेश्वर के हो: और तुम ने उन पर जय पाई है; क्योंकि जो तुम में है, वह उस से जो संसार में है, बड़ा है" (1 यूहन्ना 4:4) की सच्चाई को अपने जीवनों में पूर्णत्या मानकर लागू कर लें? कैसा हो यदि हम मसीही समाज में सबसे अधिक दोहराई जाने वाली प्रार्थना - परमेश्वर की इच्छा जैसे स्वर्ग में पूरी होती है वैसे ही पृथ्वी पर भी हो को प्रदर्शित करने वाले जीवन जीने लग जाएं? - फिलिप यैन्सी

जब आप प्रभु परमेश्वर में अपने विश्वास को पोषित करने लगेंगे, 
स्वतः ही आपके सभी भय भूखों मरने लगेंगे।

और हम जानते हैं, कि जो लोग परमेश्वर से प्रेम रखते हैं, उन के लिये सब बातें मिलकर भलाई ही को उत्पन्न करती है; अर्थात उन्हीं के लिये जो उस की इच्छा के अनुसार बुलाए हुए हैं। - रोमियों 8:28

बाइबल पाठ: 1 यूहन्ना 4:1-6, 4:15-19
1 John 4:1 हे प्रियों, हर एक आत्मा की प्रतीति न करो: वरन आत्माओं को परखो, कि वे परमेश्वर की ओर से हैं कि नहीं; क्योंकि बहुत से झूठे भविष्यद्वक्ता जगत में निकल खड़े हुए हैं। 
1 John 4:2 परमेश्वर का आत्मा तुम इसी रीति से पहचान सकते हो, कि जो कोई आत्मा मान लेती है, कि यीशु मसीह शरीर में हो कर आया है वह परमेश्वर की ओर से है। 
1 John 4:3 और जो कोई आत्मा यीशु को नहीं मानती, वह परमेश्वर की ओर से नहीं; और वही तो मसीह के विरोधी की आत्मा है; जिस की चर्चा तुम सुन चुके हो, कि वह आने वाला है: और अब भी जगत में है। 
1 John 4:4 हे बालको, तुम परमेश्वर के हो: और तुम ने उन पर जय पाई है; क्योंकि जो तुम में है, वह उस से जो संसार में है, बड़ा है। 
1 John 4:5 वे संसार के हैं, इस कारण वे संसार की बातें बोलते हैं, और संसार उन की सुनता है। 
1 John 4:6 हम परमेश्वर के हैं: जो परमेश्वर को जानता है, वह हमारी सुनता है; जो परमेश्वर को नहीं जानता वह हमारी नहीं सुनता; इसी प्रकार हम सत्य की आत्मा और भ्रम की आत्मा को पहचान लेते हैं। 
1 John 4:15 जो कोई यह मान लेता है, कि यीशु परमेश्वर का पुत्र है: परमेश्वर उस में बना रहता है, और वह परमेश्वर में। 
1 John 4:16 और जो प्रेम परमेश्वर हम से रखता है, उसको हम जान गए, और हमें उस की प्रतीति है; परमेश्वर प्रेम है: जो प्रेम में बना रहता है, वह परमेश्वर में बना रहता है; और परमेश्वर उस में बना रहता है। 
1 John 4:17 इसी से प्रेम हम में सिद्ध हुआ, कि हमें न्याय के दिन हियाव हो; क्योंकि जैसा वह है, वैसे ही संसार में हम भी हैं। 
1 John 4:18 प्रेम में भय नहीं होता, वरन सिद्ध प्रेम भय को दूर कर देता है, क्योंकि भय से कष्‍ट होता है, और जो भय करता है, वह प्रेम में सिद्ध नहीं हुआ। 
1 John 4:19 हम इसलिये प्रेम करते हैं, कि पहिले उसने हम से प्रेम किया।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 1-3
  • प्रेरितों 17:1-15


रविवार, 10 जुलाई 2016

नज़रें उठाएं


   ब्राज़ील के रीयो-डी-जेनेरियो शहर के साथ लगे कोरकोवाडो पहाड़ के ऊपर 30 मीटर ऊँची और 635 टन वज़न वाली उद्धारकर्ता यीशु की मूर्ति है। यह मूर्ति अपनी बाहें फैलाए रीयो-डी-जेनेरियो शहर की ओर देख रही है और उन बाहों की चौड़ाई 28 मीटर है। रीयो-डी-जेनेरियो शहर में कहीं से भी, चाहे दिन हो या रात, अगर आप उस पहाड़ की ओर नज़रें उठाएंगे तो आपको वह मूर्ति दिखाई देगी।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में हम पाते हैं कि प्रभु यीशु मसीह केवल उद्धारकर्ता ही नहीं, वरन सृष्टिकर्ता परमेश्वर भी हैं जिसने इस समस्त सृष्टि की रचना करी है। बाइबल के भजन 121 का विषयवस्तु यही सृष्टिकर्ता प्रभु परमेश्वर है। भजनकार इस भजन में पाठकों से कहता है कि वे अपनी नज़रें पर्वतों की ओर लगाएं, परमेश्वर की ओर देखें, क्योंकि, "... मुझे सहायता कहां से मिलेगी? मुझे सहायता यहोवा की ओर से मिलती है, जो आकाश और पृथ्वी का कर्ता है" (पद 1-2)। खतरों और परेशानियों से भरे इस संसार में हमारे जीवन को सही मार्गदर्शन तथा आवश्यक सामर्थ देने के लिए केवल परमेश्वर ही सक्षम है।

   हम अपनी नज़रें उस प्रभु परमेश्वर की ओर उठाएं जो हमारा ध्यान रखता है (पद 3), हमारी रक्षा करता है (पद 5-6) जो हर खतरे के समय में हमारा आसरा है और हमें बुराई से बचाए रखता है तथा अनन्तकाल तक अपनी देखभाल में हमें संरक्षित रखता है (पद 7-8)। विश्वास के साथ हम हम प्रभु यीशु की ओर नज़रें उठाएं, उस प्रभु की ओर जो हमारा उद्धारकर्ता, हमारा सृष्टिकर्ता, हमारा सहायक, हमारी आशा और हमारा अनन्तकाल का निवास स्थान है। - बिल क्राउडर


मसीह यीशु क्रूस पर इसलिए चढ़ाया गया ताकि वह अपने विश्वासियों को स्वर्ग में ला सके।

और बहुत देशों के लोग आएंगे, और आपस में कहेंगे: आओ, हम यहोवा के पर्वत पर चढ़कर, याकूब के परमेश्वर के भवन में जाएं; तब वह हम को अपने मार्ग सिखाएगा, और हम उसके पथों पर चलेंगे। क्योंकि यहोवा की व्यवस्था सिय्योन से, और उसका वचन यरूशलेम से निकलेगा। - यशायाह 2:3

बाइबल पाठ: भजन 121
Psalms 121:1 मैं अपनी आंखें पर्वतों की ओर लगाऊंगा। मुझे सहायता कहां से मिलेगी? 
Psalms 121:2 मुझे सहायता यहोवा की ओर से मिलती है, जो आकाश और पृथ्वी का कर्ता है।
Psalms 121:3 वह तेरे पांव को टलने न देगा, तेरा रक्षक कभी न ऊंघेगा। 
Psalms 121:4 सुन, इस्राएल का रक्षक, न ऊंघेगा और न सोएगा।
Psalms 121:5 यहोवा तेरा रक्षक है; यहोवा तेरी दाहिनी ओर तेरी आड़ है। 
Psalms 121:6 न तो दिन को धूप से, और न रात को चांदनी से तेरी कुछ हानि होगी।
Psalms 121:7 यहोवा सारी विपत्ति से तेरी रक्षा करेगा; वह तेरे प्राण की रक्षा करेगा। 
Psalms 121:8 यहोवा तेरे आने जाने में तेरी रक्षा अब से ले कर सदा तक करता रहेगा।

एक साल में बाइबल: 
  • अय्यूब 41-42
  • प्रेरितों 16:22-40


शनिवार, 9 जुलाई 2016

प्रश्न


   जब जीवन में त्रासदी आती है, तो उसके साथ साथा मन में प्रश्न भी आते हैं। किसी करीबी प्रीय जन को खो देने पर हम परमेश्वर से भी अनेकों तीखे प्रश्न कर सकते हैं, जैसे कि "आप ने ऐसा क्यों होने दिया?"; "यह किसका दोष था?"; "क्या आपको मेरे दुःख की कोई चिन्ता नहीं है?" इत्यादि। मेरा विश्वास कीजिए, मैं एक ऐसा पिता हूँ जिसने अपनी पुत्री को उसकी किशोरावस्था में अचानक घटी एक दुर्घटना में खोया है, और मैंने भी अपने शोक में ऐसे ही कई प्रश्न परमेश्वर से किए हैं।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में अय्युब की पुस्तक में भी ऐसे ही कई प्रश्न दर्ज हैं; वे प्रश्न जो अय्युब ने अपने दुःखों और त्रासदी के समय में अपने मित्रों के साथ बैठकर शोक करने के समय में परमेश्वर से पूछे थे। अय्युब ने अचानक आ पड़ने वाली त्रासदी में ना केवल अपना परिवार खोया था, वरन अपनी सेहत और अपनी संपदा भी गँवा दी थी। एक समय अय्युब प्रश्न करता है, "दु:खियों को उजियाला, और उदास मन वालों को जीवन क्यों दिया जाता है?" (अय्युब 3:20)। थोड़ा आगे चलकर अय्युब पूछता है, "मुझ में बल ही क्या है कि मैं आशा रखूं? और मेरा अन्त ही क्या होगा, कि मैं धीरज धरूं?" (अय्युब 6:11); और फिर अय्युब परमेश्वर से कहता है "क्या तुझे अन्धेर करना, और दुष्टों की युक्ति को सफल कर के अपने हाथों के बनाए हुए को निकम्मा जानना भला लगता है?" (अय्युब 10:3)। संसार में अनेकों लोग हैं जिन्होंने असमय और अनायास चले गए किसी प्रीय जन की कब्र पर खड़े होकर अय्युब के प्रश्नों के समान ही प्रश्न उठाए हैं।

   लेकिन अय्युब की पुस्तक के अन्त के अध्याय चौंका देने वाले हैं। उन अन्तिम अध्यायों में (अय्युब 38-41) हम पाते हैं कि परमेश्वर ने अय्युब के प्रश्नों का उत्तर दिया; लेकिन परमेश्वर का उत्तर अप्रत्याशित था। उसकी दुःखदायी परिस्थितियों के लिए परमेश्वर ने अय्युब को कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया, वरन पासा पलटते हुए परमेश्वर ने अय्युब से ही प्रश्न पूछने आरंभ कर दिए - ऐसे प्रश्न जो परमेश्वर की बुद्धिमता और सार्वभौमिकता की ओर ध्यान ले जाते हैं। प्रश्न जो पृथ्वी, सितारों और समुद्र आदि में विदित उसकी अद्भुत कारिगरी पर ध्यान केंद्रित करते हैं। परमेश्वर के सभी प्रश्न केवल एक ही बात की ओर इशारा करते हैं - परमेश्वर सार्वभौम एवं सर्वशक्तिमान है, सब बातों को जानता है, सब बातों और परिस्थितियों पर अधिकार रखता है और सदा ही उन्हें नियंत्रित करता है।

   जब कभी विपरीत परिस्थितियों के कारण हमारे मनों में ऐसे प्रश्न उठें, तो हम मसीही विश्वासियों को यह कभी नहीं भूलना चाहिए कि हमारा परमेश्वर एक प्रेमी पिता है, सदा हमारा भला ही चाहता है, सर्वज्ञानी है और जानता है कि वह क्या कर रहा है। - डेव ब्रैनन


प्रत्येक शोक में हमारी सबसे बड़ी सांत्वना का कारण
 यह समझ रखना है कि सब बातें परमेश्वर ही के नियंत्रण में हैं।

चुप हो जाओ, और जान लो, कि मैं ही परमेश्वर हूं। मैं जातियों में महान हूं, मैं पृथ्वी भर में महान हूं! - भजन 46:10

बाइबल पाठ: अय्युब 38:1-11
Job 38:1 तब यहोवा ने अय्यूब को आँधी में से यूं उत्तर दिया, 
Job 38:2 यह कौन है जो अज्ञानता की बातें कहकर युक्ति को बिगाड़ना चाहता है? 
Job 38:3 पुरुष की नाईं अपनी कमर बान्ध ले, क्योंकि मैं तुझ से प्रश्न करता हूँ, और तू मुझे उत्तर दे। 
Job 38:4 जब मैं ने पृथ्वी की नेव डाली, तब तू कहां था? यदि तू समझदार हो तो उत्तर दे। 
Job 38:5 उसकी नाप किस ने ठहराई, क्या तू जानता है उस पर किस ने सूत खींचा? 
Job 38:6 उसकी नेव कौन सी वस्तु पर रखी गई, वा किस ने उसके कोने का पत्थर बिठाया, 
Job 38:7 जब कि भोर के तारे एक संग आनन्द से गाते थे और परमेश्वर के सब पुत्र जयजयकार करते थे? 
Job 38:8 फिर जब समुद्र ऐसा फूट निकला मानों वह गर्भ से फूट निकला, तब किस ने द्वार मूंदकर उसको रोक दिया; 
Job 38:9 जब कि मैं ने उसको बादल पहिनाया और घोर अन्धकार में लपेट दिया, 
Job 38:10 और उसके लिये सिवाना बान्धा और यह कहकर बेंड़े और किवाड़े लगा दिए, कि 
Job 38:11 यहीं तक आ, और आगे न बढ़, और तेरी उमंडने वाली लहरें यहीं थम जाएं?

एक साल में बाइबल: 
  • अय्यूब 38-40
  • प्रेरितों 16:1-21


शुक्रवार, 8 जुलाई 2016

अनिश्चित समय


   कुछ वर्ष पहले आई आर्थिक मंदी के समय में अनेक लोगों की नौकरियाँ जाती रहीं; दुःख कि बात थी कि मेरे बहनोई भी उन में से एक थे। अपनी परिस्थितियों के बारे में लिखते समय मेरी बहन ने बताया कि उनके सामने अनिश्चितताएँ अवश्य थीं, परन्तु फिर भी उनके अन्दर एक शान्ति थी क्योंकि वे जानते थे कि परमेश्वर उनकी देखभाल कर रहा है।

   प्रभु यीशु मसीह पर विश्वास करने वाले प्रत्येक जन अनिश्चितता के समय में भी शान्त और आश्वस्त रह सकते हैं क्योंकि हम मसीही विश्वासियों को परमेश्वर पिता की ओर से यह आश्वासन है कि हमारा परमेश्वर पिता हम से प्रेम करता है और हमारी देखभाल करता है (मत्ती 6:24-34)। हम अपनी प्रत्येक चिंता और आवश्यकता निःसंकोच, धन्यवाद के साथ उसके पास ला सकते हैं, इस भरोसे के कारण कि वह हमारी प्रत्येक आवश्यकता को पूरा करेगा और हमें अपनी शान्ति में बनाए रखेगा (फिलिप्पियों 4:6-7), जैसा कि प्रेरित पौलुस ने फिलिप्पी के मसीही विश्वासियों को अपनी पत्री में लिखा है। जब पौलुस यह कहता है कि "परमेश्वर की शान्ति जो सारी समझ से परे है..." तो यह दिखाता है कि इस अद्भुत शान्ति को हम चाहे किसी को समझा नहीं पाएं तो भी उसके परिणामों तथा उससे मिलने वाली मन और मस्तिष्क की सुरक्षा को अनुभव अवश्य कर सकते हैं।

   हमारी यह शान्ति इस भरोसे से आती है कि हमारा प्रभु परमेश्वर हमसे प्रेम करता है, हर बात में केवल हमारा भला ही चाहता है, और वही सभी परिस्थितियों और समयों पर नियंत्रण रखने तथा उनका संचालन करने वाला सर्वशक्तिमान परमेश्वर है। केवल वही है जो हर अनिश्चित समय में भी हमारी बेचैनी को शान्त कर सकता है, हमारे मन को आशा से भर सकता है और हर चुनौती एवं परिवर्तन की स्थिति में हमें आराम से रख सकता है। - पोह फैंग चिया


जिसका मन तुझ में धीरज धरे हुए हैं, उसकी तू पूर्ण शान्ति के साथ रक्षा करता है,
 क्योंकि वह तुझ पर भरोसा रखता है। - यशायाह 26:3

किसी भी बात की चिन्‍ता मत करो: परन्तु हर एक बात में तुम्हारे निवेदन, प्रार्थना और बिनती के द्वारा धन्यवाद के साथ परमेश्वर के सम्मुख अपस्थित किए जाएं। तब परमेश्वर की शान्‍ति, जो समझ से बिलकुल परे है, तुम्हारे हृदय और तुम्हारे विचारों को मसीह यीशु में सुरिक्षत रखेगी। - फिलिप्पियों 4:6-7

बाइबल पाठ: मत्ती 6:24-34
Matthew 6:24 कोई मनुष्य दो स्‍वामियों की सेवा नहीं कर सकता, क्योंकि वह एक से बैर ओर दूसरे से प्रेम रखेगा, वा एक से मिला रहेगा और दूसरे को तुच्‍छ जानेगा; “तुम परमेश्वर और धन दोनों की सेवा नहीं कर सकते”। 
Matthew 6:25 इसलिये मैं तुम से कहता हूं, कि अपने प्राण के लिये यह चिन्‍ता न करना कि हम क्या खाएंगे? और क्या पीएंगे? और न अपने शरीर के लिये कि क्या पहिनेंगे? क्या प्राण भोजन से, और शरीर वस्‍त्र से बढ़कर नहीं? 
Matthew 6:26 आकाश के पक्षियों को देखो! वे न बोते हैं, न काटते हैं, और न खत्तों में बटोरते हैं; तौभी तुम्हारा स्‍वर्गीय पिता उन को खिलाता है; क्या तुम उन से अधिक मूल्य नहीं रखते। 
Matthew 6:27 तुम में कौन है, जो चिन्‍ता कर के अपनी अवस्था में एक घड़ी भी बढ़ा सकता है 
Matthew 6:28 और वस्‍त्र के लिये क्यों चिन्‍ता करते हो? जंगली सोसनों पर ध्यान करो, कि वै कैसे बढ़ते हैं, वे न तो परिश्रम करते हैं, न कातते हैं। 
Matthew 6:29 तौभी मैं तुम से कहता हूं, कि सुलैमान भी, अपने सारे वैभव में उन में से किसी के समान वस्‍त्र पहिने हुए न था। 
Matthew 6:30 इसलिये जब परमेश्वर मैदान की घास को, जो आज है, और कल भाड़ में झोंकी जाएगी, ऐसा वस्‍त्र पहिनाता है, तो हे अल्पविश्वासियों, तुम को वह क्योंकर न पहिनाएगा? 
Matthew 6:31 इसलिये तुम चिन्‍ता कर के यह न कहना, कि हम क्या खाएंगे, या क्या पीएंगे, या क्या पहिनेंगे? 
Matthew 6:32 क्योंकि अन्यजाति इन सब वस्‍तुओं की खोज में रहते हैं, और तुम्हारा स्‍वर्गीय पिता जानता है, कि तुम्हें ये सब वस्तुएं चाहिए। 
Matthew 6:33 इसलिये पहिले तुम उसे राज्य और धर्म की खोज करो तो ये सब वस्तुएं भी तुम्हें मिल जाएंगी। 
Matthew 6:34 सो कल के लिये चिन्‍ता न करो, क्योंकि कल का दिन अपनी चिन्‍ता आप कर लेगा; आज के लिये आज ही का दुख बहुत है।

एक साल में बाइबल: 
  • अय्यूब 36-37
  • प्रेरितों 15:22-41