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शुक्रवार, 22 जुलाई 2016

क्षमा


   मैं एक प्रतिभाशाली प्यानों वादिका से वार्तालाप कर रहा था; उसने मुझ से पूछा कि क्या मैं कोई साज़ बजाता हूँ? मैंने उत्तर दिया, "मैं रेडियो बजा लेता हूँ"; उसने हंसते हुए फिर पूछा कि क्या मैंने कभी कोई साज़ बजा पाने की इच्छा रखी है? मैंने थोड़ी शर्मिन्दगी के साथ उत्तर दिया, "लड़कपन में मैंने कुछ समय तक प्यानो सीखा था, फिर उसे छोड़ दिया।" अब अपने व्यसक जीवन में मुझे पछतावा होता है कि मैंने प्यानो सीखना ज़ारी क्यों नहीं रखा, क्योंकि मुझे संगीत का शौक है और मेरी इच्छा होती है कि आज मैं भी कोई साज़ बजा सकूँ। यह वार्तालाप मेरे लिए इस बात को पुनःस्मरण करने का अवसर था कि हमारे जीवनों में हमारे चुनावों का बहुत प्रभाव होता है - और कुछ चुनावों के कारण हमें पछतावा होता है।

    लेकिन कुछ गलत चुनाव ऐसे भी होते हैं जो हमारे अन्दर दीर्घ-कालीन एवं कष्टदायक पछतावा छोड़ जाते हैं - जैसा परमेश्वर के वचन बाइबल के एक नायक राजा दाऊद के साथ हुआ। पहले दाऊद ने एक अन्य पुरुष की स्त्री के साथ व्यभिचार किया और फिर अपने पाप को छुपाने के लिए उस स्त्री के पति को मरवा डाला। इस पाप का दोष-बोध उसके लिए बहुत कष्टदायक बना और इससे ग्रसित होकर उसने अपने एक भजन में लिखा, "जब मैं चुप रहा तब दिन भर कराहते कराहते मेरी हडि्डयां पिघल गई। क्योंकि रात दिन मैं तेरे हाथ के नीचे दबा रहा; और मेरी तरावट धूप काल की सी झुर्राहट बनती गई" (भजन 32:3-4)। लेकिन दाऊद ने अपने पाप का अंगीकार किया और उसे परमेश्वर के सामने मान लिया, जो उसके लिए परमेश्वर से क्षमा और शांति को लेकर आया (पद 5)।

   जब हमारे चुनाव और कार्य हमें पाप और बुराई में ढकेल दें, तो उनका अंगीकार करने और उनके लिए प्रभु यीशु से क्षमा माँग लेने के द्वारा (1 यूहन्ना 1:9) केवल परमेश्वर के अनुग्रह से ही हमें पाप के दोष से छुटकारा मिल सकता है; केवल उस से ही हमें क्षमा की शांति मिल सकती है। केवल परमेश्वर ही है जो हमें सही चुनाव एवं निर्णय ले पाने की बुद्धिमता प्रदान करता है (भजन 32:8)। - बिल क्राउडर


प्रभु परमेश्वर से मिलने वाली क्षमा हमें पछतावे के बन्धनों से स्वतंत्र करती है।

यदि हम अपने पापों को मान लें, तो वह हमारे पापों को क्षमा करने, और हमें सब अधर्म से शुद्ध करने में विश्वासयोग्य और धर्मी है। - 1 यूहन्ना 1:9 

बाइबल पाठ: भजन 32
Psalms 32:1 क्या ही धन्य है वह जिसका अपराध क्षमा किया गया, और जिसका पाप ढ़ाँपा गया हो। 
Psalms 32:2 क्या ही धन्य है वह मनुष्य जिसके अधर्म का यहोवा लेखा न ले, और जिसकी आत्मा में कपट न हो।
Psalms 32:3 जब मैं चुप रहा तब दिन भर कराहते कराहते मेरी हडि्डयां पिघल गई। 
Psalms 32:4 क्योंकि रात दिन मैं तेरे हाथ के नीचे दबा रहा; और मेरी तरावट धूप काल की सी झुर्राहट बनती गई।
Psalms 32:5 जब मैं ने अपना पाप तुझ पर प्रगट किया और अपना अधर्म न छिपाया, और कहा, मैं यहोवा के साम्हने अपने अपराधों को मान लूंगा; तब तू ने मेरे अधर्म और पाप को क्षमा कर दिया।
Psalms 32:6 इस कारण हर एक भक्त तुझ से ऐसे समय में प्रार्थना करे जब कि तू मिल सकता है। निश्चय जब जल की बड़ी बाढ़ आए तौभी उस भक्त के पास न पहुंचेगी। 
Psalms 32:7 तू मेरे छिपने का स्थान है; तू संकट से मेरी रक्षा करेगा; तू मुझे चारों ओर से छुटकारे के गीतों से घेर लेगा।
Psalms 32:8 मैं तुझे बुद्धि दूंगा, और जिस मार्ग में तुझे चलना होगा उस में तेरी अगुवाई करूंगा; मैं तुझ पर कृपा दृष्टि रखूंगा और सम्मत्ति दिया करूंगा। 
Psalms 32:9 तुम घोड़े और खच्चर के समान न बनो जो समझ नहीं रखते, उनकी उमंग लगाम और बाग से रोकनी पड़ती है, नहीं तो वे तेरे वश में नहीं आने के।
Psalms 32:10 दुष्ट को तो बहुत पीड़ा होगी; परन्तु जो यहोवा पर भरोसा रखता है वह करूणा से घिरा रहेगा। 
Psalms 32:11 हे धर्मियों यहोवा के कारण आनन्दित और मगन हो, और हे सब सीधे मन वालों आनन्द से जयजयकार करो!

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 31-32
  • प्रेरितों 23:16-35



गुरुवार, 21 जुलाई 2016

जल


   यद्यपि पृथ्वी का 70 प्रतिशत भाग जल से ढका हुआ है, फिर भी उस जल का 1 प्रतिश्त से भी कम अंश मनुष्यों के पीने योग्य है। जल का संरक्षण और स्वच्छता संसार के अनेकों भागों में बहुत महत्वपूर्ण विषय हैं, क्योंकि जीवन स्वच्छ और पीने योग्य जल के उपलब्ध होने पर निर्भर करता है।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में हम देखते हैं कि एक पापों में भटकी हुई स्त्री को जीवन-जल तक लाने के लिए प्रभु यीशु मसीह ने मार्ग से हटकर यात्रा करी। प्रभु यीशु जान-बूझकर सामरिया के एक ऐसे स्थान से होकर गए, जहाँ से कोई भी शिष्ट एवं सम्मानयोग्य प्रचारक नहीं जाता था। वहाँ उन्होंने उस महिला को जीवन-जल के बारे में बताया; प्रभु यीशु ने उससे कहा, "परन्तु जो कोई उस जल में से पीएगा जो मैं उसे दूंगा, वह फिर अनन्तकाल तक प्यासा न होगा: वरन जो जल मैं उसे दूंगा, वह उस में एक सोता बन जाएगा जो अनन्त जीवन के लिये उमड़ता रहेगा" (यूहन्ना 4:14)।

   यह जीवन-जल स्वयं प्रभु यीशु मसीह ही हैं। जो उन्हें स्वीकार कर लेते हैं, वे अनन्त अविनाशी जीवन भी पा लेते हैं। प्रभु यीशु के अनुयायियों के अन्दर यह जीवन जल एक कार्य और करता है - उनमें से उमड़कर बहने वाला यह जीवन-जल औरों को भी तृप्त करता है, और फिर उन तृप्त होने वालों में से होकर अन्य लोगों की तृप्ति के लिए प्रवाहित होने लग जाता है (यूहन्ना 7:38)।

   जैसे संसार में स्वच्छ पेय जल की उपलब्धता असमान है, वैसा ही इस जीवन-जल के संबंध में भी है। संसार के कई स्थानों पर अभी भी अनेकों ऐसे लोग हैं जो प्रभु यीशु और उसमें लाए गए विश्वास द्वारा सेंत-मेंत मिलने वाली पापों की क्षमा तथा उद्धार के बारे में या तो जानते ही नहीं हैं, या फिर अच्छे से और सही रीति से नहीं जानते हैं। हम मसीही विश्वासियों का यह विशेषाधिकार एवं ज़िम्मेदारी है कि इस पाप और बुराई से भरे संसार के लोगों में उन्हें सच्ची तृप्ति देने वाले इस जीवन-जल को पहुँचाने वाले बनें। - सी. पी. हिया


प्यासे संसार के लिए जीवन-जल का कभी ना समाप्त होने वाले स्त्रोत प्रभु यीशु मसीह ही हैं।

जो मुझ पर विश्वास करेगा, जैसा पवित्र शास्त्र में आया है उसके हृदय में से जीवन के जल की नदियां बह निकलेंगी। - यूहन्ना 7:38 

बाइबल पाठ: यूहन्ना 4:4-14
John 4:4 और उसको सामरिया से हो कर जाना अवश्य था। 
John 4:5 सो वह सूखार नाम सामरिया के एक नगर तक आया, जो उस भूमि के पास है, जिसे याकूब ने अपने पुत्र यूसुफ को दिया था। 
John 4:6 और याकूब का कूआं भी वहीं था; सो यीशु मार्ग का थका हुआ उस कूएं पर यों ही बैठ गया, और यह बात छठे घण्टे के लगभग हुई। 
John 4:7 इतने में एक सामरी स्त्री जल भरने को आई: यीशु ने उस से कहा, मुझे पानी पिला। 
John 4:8 क्योंकि उसके चेले तो नगर में भोजन मोल लेने को गए थे। 
John 4:9 उस सामरी स्त्री ने उस से कहा, तू यहूदी हो कर मुझ सामरी स्त्री से पानी क्यों मांगता है? (क्योंकि यहूदी सामरियों के साथ किसी प्रकार का व्यवहार नहीं रखते)। 
John 4:10 यीशु ने उत्तर दिया, यदि तू परमेश्वर के वरदान को जानती, और यह भी जानती कि वह कौन है जो तुझ से कहता है; मुझे पानी पिला तो तू उस से मांगती, और वह तुझे जीवन का जल देता। 
John 4:11 स्त्री ने उस से कहा, हे प्रभु, तेरे पास जल भरने को तो कुछ है भी नहीं, और कूआं गहिरा है: तो फिर वह जीवन का जल तेरे पास कहां से आया? 
John 4:12 क्या तू हमारे पिता याकूब से बड़ा है, जिसने हमें यह कूआं दिया; और आप ही अपने सन्तान, और अपने ढोरों समेत उस में से पीया? 
John 4:13 यीशु ने उसको उत्तर दिया, कि जो कोई यह जल पीएगा वह फिर प्यासा होगा। 
John 4:14 परन्तु जो कोई उस जल में से पीएगा जो मैं उसे दूंगा, वह फिर अनन्तकाल तक प्यासा न होगा: वरन जो जल मैं उसे दूंगा, वह उस में एक सोता बन जाएगा जो अनन्त जीवन के लिये उमड़ता रहेगा।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 29-30
  • प्रेरितों 23:1-15



बुधवार, 20 जुलाई 2016

मात्रा या माप


   मसीही सेवकाई के भ्रमण के समयों में मुझे अनेकों ऐसे लोगों से मिलने और बात करने के अवसर मिले हैं जो छोटे-छोटे कार्यों द्वारा छोटे स्थानों पर सेवकाई कर रहे हैं। अकसर ये लोग एकाकीपन से ग्रसित रहते हैं, उन्हें लगता है कि उनकी वह सेवकाई बहुत गौण है, उसका कोई विशेष महत्व नहीं है। जब मैं उन लोगों की बातें सुनता हूँ तो मुझे सुप्रसिद्ध मसीही लेखक सी. एस. ल्यूईस की पुस्तक Out of the Silent Planet में एक स्वर्गदूत द्वारा कही गई बात: "मेरे लोगों के पास एक नियम है कि वे कभी मात्रा या माप की बातें आप से नहीं करेंगे...ऐसा करने से आप महत्वहीन को आदर देने लगते हैं और महत्वपूर्ण को नज़रन्दाज़ कर देते हैं" स्मरण हो आती है।

   हमारे समाज की धारणाएं कभी-कभी हम से कहती है कि जितना अधिक या जितना बड़ा उतना ही बेहतर - अर्थात आकार ही सफलता का मापदण्ड है। इस धारणा का सामना करने, इसको अनदेखा करने, इसे बदलने के लिए बहुत सामर्थ चाहिए, विशेषकर किसी ऐसे व्यक्ति को जो किसी छोटे से स्थान पर किसी छोटे प्रतीत होने वाले कार्य द्वारा सेवकाई में मेहनत कर रहा हो। ऐसे में हमें ध्यान बनाए रखना है कि कहीं हम भी तो उसे जो महत्वपूर्ण है, नज़रन्दाज़ तो नहीं कर दे रहे हैं।

   ऐसा नहीं है कि संख्या का कोई महत्व ही नहीं है। संख्या अननतकाल की आवश्यकता रखने वाले जीवित मनुष्यों को दर्शाती है; और हम सब को यह प्रार्थना करते रहना चाहिए कि अधिक से अधिक लोग प्रभु यीशु मसीह पर विश्वास लाकर, उस से पापों की क्षमा माँगकर, सेंत-मेंत में उद्धार पाएं और परमेश्वर के राज्य में प्रवेश करें; लेकिन हमारे कार्य और उसके महत्व का माप संख्याएं नहीं हैं।

   प्रभु परमेश्वर ने हमें उसके लिए करे गए कार्य की मात्रा में, या फिर उस कार्य में संलग्न लोगों की संख्या में संतुष्टि प्राप्त करने के लिए नहीं बुलाया है; वरन उसने हमें बुलाया है कि हम विश्वासयोयता के साथ उसके द्वारा हमें दिए कार्य को उसके लिए पूरा करते रहें। हमारे महान और सर्वसामर्थी प्रभु परमेश्वर की सेवा, उसके द्वारा प्रदान करी गई सामर्थ में होकर करना ही हमारे लिए महानता है - वह सेवा चाहे मात्रा या माप में कैसी ही क्यों ना हो। - डेविड रोपर


जो कोई परमेश्वर की सेवकाई को परमेश्वर की इच्छानुसार करता है, 
वह परमेश्वर की दृष्टि में महत्वपूर्ण है।

क्योंकि किस ने छोटी बातों के दिन तुच्छ जाना है? यहोवा अपनी इन सातों आंखों से सारी पृथ्वी पर दृष्टि कर के साहुल को जरूब्बाबेल के हाथ में देखेगा, और आनन्दित होगा। - ज़कर्याह 4:10

बाइबल पाठ: यशायाह 49:1-6
Isaiah 49:1 हे द्वीपो, मेरी और कान लगाकर सुनो; हे दूर दूर के राज्यों के लोगों, ध्यान लगा कर मेरी सुनो! यहोवा ने मुझे गर्भ ही में से बुलाया, जब मैं माता के पेट में था, तब ही उसने मेरा नाम बताया। 
Isaiah 49:2 उसने मेरे मुंह को चोखी तलवार के समान बनाया और अपने हाथ की आड़ में मुझे छिपा रखा; उसने मुझ को चमकिला तीर बनाकर अपने तर्कश में गुप्त रखा। 
Isaiah 49:3 और मुझ से कहा, तू मेरा दास इस्राएल है, मैं तुझ में अपनी महिमा प्रगट करूंगा। 
Isaiah 49:4 तब मैं ने कहा, मैं ने तो व्यर्थ परिश्रम किया, मैं ने व्यर्थ ही अपना बल खो दिया है; तौभी निश्चय मेरा न्याय यहोवा के पास है और मेरे परिश्रम का फल मेरे परमेश्वर के हाथ में है।
Isaiah 49:5 और अब यहोवा जिसने मुझे जन्म ही से इसलिये रख कि मैं उसका दास हो कर याकूब को उसकी ओर फेर ले आऊं अर्थात इस्राएल को उसके पास इकट्ठा करूं, क्योंकि यहोवा की दृष्टि में मैं आदरयोग्य हूं और मेरा परमेश्वर मेरा बल है, 
Isaiah 49:6 उसी ने मुझ से यह भी कहा है, यह तो हलकी सी बात है कि तू याकूब के गोत्रों का उद्धार करने और इस्राएल के रक्षित लोगों को लौटा ले आने के लिये मेरा सेवक ठहरे; मैं तुझे अन्यजातियों के लिये ज्योति ठहराऊंगा कि मेरा उद्धार पृथ्वी की एक ओर से दूसरी ओर तक फैल जाए।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 26-28
  • प्रेरितों 22



मंगलवार, 19 जुलाई 2016

विश्वासयोग्य


   मेरे दादाजी को कहानियाँ सुनाने का शौक था, और मुझे कहानियाँ सुनने का। उनकी कहानियाँ दो प्रकार की होती थीं, कालपनिक किस्से - जिनमें सत्य का थोड़ा सा अंश तो होता था लेकिन वे जितनी बार सुनाई जातीं उतनी बार उनमें कुछ बदल जाता था, तथा सच्ची कहानियाँ - जो वास्तविक घटनाएं होती थीं और जिनके तथ्य कभी नहीं बदलते थे चाहे उन्हें वे कितनी ही बार क्यों ना सुनाएं। एक दिन मेरे दादाजी ने एक ऐसी कहानी सुनाई जिसके सत्य होने को मान पाना मुझे बहुत कठिन लग रहा था, इसलिए मैंने तुरंत कहा यह कालपनिक है, लेकिन दादाजी ने ज़ोर देकर कहा कि नहीं यह वास्तविक है। यद्यपि जितनी बार उन्होंने उसे सुनाया, उसमें कोई बदलाव नहीं आया, फिर भी उसकी वास्तविकता को मान लेना मुझे कठिन ही लगता रहा।

   एक दिन मैं रेडियो पर एक कार्यक्रम सुन रहा था, और उस कार्यक्रम के प्रस्तुतकर्ता ने वही कहानी वैसे ही सुनाई जैसे दादाजी सुनाया करते थे, और दादाजी की वह कहानी मेरे लिए तुरंत कालपनिक से वास्तविक बन गई। वह एक यादगार और मर्मसपर्शी पल था जिसमें दादाजी मेरे लिए और भी अधिक विश्वासयोग्य हो गए थे।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में भजनकार ने परमेश्वर के कभी ना बदलने वाले स्वभाव के बारे में लिखकर (भजन 102:27) हमें उसकी इसी विश्वासयोग्यता की दिलासा दी है। विश्वासयोग्यता का यही भाव इब्रानियों 13:8 में इन शब्दों में कहा गया है: "यीशु मसीह कल और आज और युगानुयुग एकसा है।" परमेश्वर का सदा विश्वासयोग्य रहना हमारे हृदयों को प्रतिदिन के जीवन में आने वाली परीक्षाओं में दिलासा देता है, हमारी हिम्मत बंधाता है, हमें स्मरण करवाता है कि हमारा कभी ना बदलने वाला, सदा विश्वासयोग्य परमेश्वर पिता इस परिवर्तनशील और अव्यवस्थित दिखने वाले संसार पर भी अपना नियंत्रण बनाए हुए है और अन्ततः वही और उसकी इच्छा ही सर्वोपरी तथा शिरोमणी होगी। - रैंडी किलगोर


जीवन की आंधियों के समय में परमेश्वर के अपरिवर्तनशील होने की
 शांतिदायक बयार को अपने अन्दर प्रवाहित होने दें।

यहोवा, जो इस्राएल का राजा है, अर्थात सेनाओं का यहोवा जो उसका छुड़ाने वाला है, वह यों कहता है, मैं सब से पहिला हूं, और मैं ही अन्त तक रहूंगा; मुझे छोड़ कोई परमेश्वर है ही नहीं। - यशायाह 44:6

बाइबल पाठ: भजन 102:18-28
Psalms 102:18 यह बात आने वाली पीढ़ी के लिये लिखी जाएगी, और एक जाति जो सिरजी जाएगी वही याह की स्तुति करेगी। 
Psalms 102:19 क्योंकि यहोवा ने अपने ऊंचे और पवित्र स्थान से दृष्टि कर के स्वर्ग से पृथ्वी की ओर देखा है, 
Psalms 102:20 ताकि बन्धुओं का कराहना सुने, और घात होने वालों के बन्धन खोले; 
Psalms 102:21 और सिय्योन में यहोवा के नाम का वर्णन किया जाए, और यरूशलेम में उसकी स्तुति की जाए; 
Psalms 102:22 यह उस समय होगा जब देश देश, और राज्य राज्य के लोग यहोवा की उपासना करने को इकट्ठे होंगे।
Psalms 102:23 उसने मुझे जीवन यात्रा में दु:ख देकर, मेरे बल और आयु को घटाया। 
Psalms 102:24 मैं ने कहा, हे मेरे ईश्वर, मुझे आधी आयु में न उठा ले, मेरे वर्ष पीढ़ी से पीढ़ी तक बने रहेंगे! 
Psalms 102:25 आदि में तू ने पृथ्वी की नेव डाली, और आकाश तेरे हाथों का बनाया हुआ है। 
Psalms 102:26 वह तो नाश होगा, परन्तु तू बना रहेगा; और वह सब कपड़े के समान पुराना हो जाएगा। तू उसको वस्त्र की नाईं बदलेगा, और वह तो बदल जाएगा; 
Psalms 102:27 परन्तु तू वहीं है, और तेरे वर्षों का अन्त नहीं होने का। 
Psalms 102:28 तेरे दासों की सन्तान बनी रहेगी; और उनका वंश तेरे साम्हने स्थिर रहेगा।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 23-25
  • प्रेरितों 21:18-40



सोमवार, 18 जुलाई 2016

जड़


   भारत के चेरापूँजी इलाके में रहने वाले लोगों ने अपने इलाके में बहने वाले अनेकों नदी-नालों पर से होकर चलने का एक अनोखा तरीका विकसित कर रखा है। वे लोग वहाँ उगने वाले रबर के वृक्षों की जड़ों को एक पार से दूसरे पार पहुँचाते हैं, उनको सेतु के समान प्रयोग करते हैं। इन जड़ों के सेतुओं को बनकर तैयार होने में 10 से 15 वर्ष तो लगते हैं, लेकिन जब वे तैयार हो चुकते हैं तो बहुत मज़बूत और सैकड़ों साल तक स्थिर बने रहने वाले हो जाते हैं।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में भी उस मनुष्य के लिए जो परमेश्वर पर विश्वास के साथ रहता है लिखा गया है कि वह, "वह उस वृक्ष के समान होगा जो नदी के तीर पर लगा हो और उसकी जड़ जल के पास फैली हो; जब घाम होगा तब उसको न लगेगा, उसके पत्ते हरे रहेंगे, और सूखे वर्ष में भी उनके विषय में कुछ चिन्ता न होगी, क्योंकि वह तब भी फलता रहेगा" (यिर्मयाह 17:8)। क्योंकि उसकी जड़ें गहरी और अच्छे से पोषित रहती हैं, इसलिए वह "वृक्ष" अत्याधिक तापमान भी सह लेता है और अकाल के समय में भी फल देता रहता है।

   दृढ़ता से गहरी जड़ पकड़े हुए वृक्ष के समान ही वे लोग भी हैं जो परमेश्वर पर भरोसा रखते हैं; उन्हें परेशानी की परिस्थितियों में भी स्थिरता और पोषण मिलता रहेगा। इसकी तुलना में वे लोग हैं जो अपने आप पर या अन्य मनुष्यों पर भरोसा रखते हैं, वे अस्थिरता के साथ जीवन व्यतीत करते हैं। बाइबल इन लोगों को मरुभूमि में उगने वाली झाड़ीयों के समान बताती है, जो अकसर अपूर्ण पोषित और अकेली सी होती हैं (पद 6)। जो लोग परमेश्वर को त्याग कर जीते हैं उनके आत्मिक जीवन भी ऐसे ही कुपोषित तथा तन्हा होते हैं।

   आज आप की जड़ें कहाँ हैं? क्या आपने मसीह यीशु में अपने जीवन की जड़ें जमाई हैं: "और उसी में जड़ पकड़ते और बढ़ते जाओ; और जैसे तुम सिखाए गए वैसे ही विश्वास में दृढ़ होते जाओ, और अत्यन्‍त धन्यवाद करते रहो" (कुलुस्सियों 2:7)? यदि हाँ, तो क्या आप भी ऐसे सेतु बन रहे हैं जो दूसरों को प्रभु परमेश्वर तक पहुँचाता है? यदि आप मसीह यीशु को व्यक्तिगत रीति से जानते हैं तो आप ऐसे सेतु होने का कार्य कर सकते हैं और लोगों को बता सकते हैं कि धन्य हैं वे जो प्रभु परमेश्वर पर भरोसा रखते हैं (यिर्मयाह 17:7)। - जेनिफर बेन्सन शुल्ट


जो व्यक्ति परमेश्वर में जड़ें जमाए हुए है उसे कठिन परीक्षाएं भी डिगा नहीं सकतीं।

क्या ही धन्य है वह पुरूष, जो यहोवा पर भरोसा करता है, और अभिमानियों और मिथ्या की ओर मुड़ने वालों की ओर मुंह न फेरता हो। - भजन 40:4

बाइबल पाठ: यिर्मयाह 17:5-10
Jeremiah 17:5 यहोवा यों कहता है, श्रापित है वह पुरुष जो मनुष्य पर भरोसा रखता है, और उसका सहारा लेता है, जिसका मन यहोवा से भटक जाता है। 
Jeremiah 17:6 वह निर्जल देश के अधमूए पेड़ के समान होगा और कभी भलाई न देखेगा। वह निर्जल और निर्जन तथा लोनछाई भूमि पर बसेगा। 
Jeremiah 17:7 धन्य है वह पुरुष जो यहोवा पर भरोसा रखता है, जिसने परमेश्वर को अपना आधार माना हो। 
Jeremiah 17:8 वह उस वृक्ष के समान होगा जो नदी के तीर पर लगा हो और उसकी जड़ जल के पास फैली हो; जब घाम होगा तब उसको न लगेगा, उसके पत्ते हरे रहेंगे, और सूखे वर्ष में भी उनके विषय में कुछ चिन्ता न होगी, क्योंकि वह तब भी फलता रहेगा। 
Jeremiah 17:9 मन तो सब वस्तुओं से अधिक धोखा देने वाला होता है, उस में असाध्य रोग लगा है; उसका भेद कौन समझ सकता है? 
Jeremiah 17:10 मैं यहोवा मन की खोजता और हृदय को जांचता हूँ ताकि प्रत्येक जन को उसकी चाल-चलन के अनुसार अर्थात उसके कामों का फल दूं।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 20-22
  • प्रेरितों 21:1-17


रविवार, 17 जुलाई 2016

स्वरूप


   कार में बैठकर मेरे नए धूप के चश्मे को कुछ देर पहनकर रखने के पश्चात मेरी बेटी ने उन्हें उतारकर मुझे वापस करते हुए कहा, "ये कोई धूप से बचने के चश्मे थोड़े ही हैं, ये तो केवल फैशन के चश्मे  हैं।" फिर मुझे छेड़ने के लिए बोली, "मुझे लगता है कि आपने ये केवल इसलिए खरीदे हैं क्योंकि इन्हें पहनकार आप अच्छे दिखते हैं।" हाँ, मैं मानती हूँ कि मेरी बेटी मुझे पहचानती है; और यह भी कि उस चश्मे को खरीदते समय मैंने उनके सूर्य की किरणों को रोक पाने की क्षमता के बारे में ज़रा भी नहीं विचारा था। बस क्योंकि वे मेरे चेहरे पर अच्छे लग रहे थे, इसीलिए मैंने उन्हें खरीद लिया था।

   प्रायः हम सभी चाहते हैं कि हम अच्छे दिखें। हमें देखकर लोगों को लगे कि हम पूर्ण हैं - हमें ना तो किसी परेशानी और ना ही किसी भय या दुःख को झेलना पड़ रहा है। किंतु हम बाहर से चाहे जो भी दिखाएं, अन्दर की स्थिति तो कुछ और ही होती है; और वास्तविकता छुपती नहीं है, कभी ना कभी बाहर आ ही जाती है।

   इसी प्रकार आत्मिक जीवन में भी सिद्धता का दिखावा करना ना तो हमारे अपने लिए और ना ही हमारे साथ के लोगों के लिए भला होता है। लेकिन मसीह यीशु के विश्वासियों की मंडली में हमें यह आदर है कि हम अपने जीवन और बातें अपने साथ के अन्य विश्वासियों के साथ बाँट सकते हैं, जो हमारे तथा अन्य विश्वासियों दोनों ही के लिए लाभदायक रहता है। जब हम अपने आप को कुछ खुला और पारदर्शी बनाते हैं, तो हमें कुछ और लोग भी मिलते हैं जो हमारे समान ही परिस्थितियों से जूझ रहे हैं, और हम एक दूसरे को सहायता तथा सांत्वना देने वाले हो जाते हैं। मंडली में हम ना केवल परमेश्वर के साथ वरन एक-दूसरे के साथ भी संगति और सहभागिता रखना सीखते हैं, एक दूसरे के साथ आनन्दित होना, एक दूसरे के सहायक होना सीखते हैं। हम अपनी सीमाओं और कमज़ोरियों के प्रति संवेदनशील होकर परमेश्वर की अगुवाई तथा सामर्थ से, अपनी उन अयोग्यताओं की दशा में भी एक दूसरे के लिए तथा परमेश्वर के लिए उपयोगी बनने लगते हैं।

   होने दें कि परमेश्वर आप पर चढ़े दिखावे के हर आवरण को हटा दे, और आप अपने सच्चे स्वरूप में, "प्रेम, और भले कामों में उक्साने के लिये एक दूसरे की चिन्‍ता किया करें" (इब्रानियों 10:24)। - सिंडी हैस कैस्पर


मसीही विश्वासी तब और भी सामर्थी होते हैं जब वे अकेले खड़े नहीं होते।

निदान हम बलवानों को चाहिए, कि निर्बलों की निर्बलताओं को सहें; न कि अपने आप को प्रसन्न करें। हम में से हर एक अपने पड़ोसी को उस की भलाई के लिये सुधारने के निमित प्रसन्न करे। - रोमियों 15:1-2

बाइबल पाठ: इब्रानियों 10:19-25
Hebrews 10:19 सो हे भाइयो, जब कि हमें यीशु के लोहू के द्वारा उस नए और जीवते मार्ग से पवित्र स्थान में प्रवेश करने का हियाव हो गया है। 
Hebrews 10:20 जो उसने परदे अर्थात अपने शरीर में से हो कर, हमारे लिये अभिषेक किया है, 
Hebrews 10:21 और इसलिये कि हमारा ऐसा महान याजक है, जो परमेश्वर के घर का अधिकारी है। 
Hebrews 10:22 तो आओ; हम सच्चे मन, और पूरे विश्वास के साथ, और विवेक का दोष दूर करने के लिये हृदय पर छिड़काव ले कर, और देह को शुद्ध जल से धुलवा कर परमेश्वर के समीप जाएं। 
Hebrews 10:23 और अपनी आशा के अंगीकार को दृढ़ता से थामें रहें; क्योंकि जिसने प्रतिज्ञा किया है, वह सच्चा है। 
Hebrews 10:24 और प्रेम, और भले कामों में उक्साने के लिये एक दूसरे की चिन्‍ता किया करें। 
Hebrews 10:25 और एक दूसरे के साथ इकट्ठा होना ने छोड़ें, जैसे कि कितनों की रीति है, पर एक दूसरे को समझाते रहें; और ज्यों ज्यों उस दिन को निकट आते देखो, त्यों त्यों और भी अधिक यह किया करो।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 18-19
  • प्रेरितों 20:17-38


शनिवार, 16 जुलाई 2016

संतुष्टि


   बोथियुस छठवीं शताब्दी में इटली के राज दरबार में सेवा करने वाला एक निपुण राजनितिज्ञ था। दुर्भाग्यवश वह राजा की नज़रों से गिर गया, उस पर राजद्रोह का दोष लगा कर उसे कैदखाने में मृत्युदण्ड भोगने के लिए डाल दिया गया। मृत्युदण्ड दिए जाने के समय की प्रतीक्षा करते हुए उसने लिखने की सामग्री माँगी जिस से वह अपने विचार और संस्मरण लिख सके। बाद में उसके ये संस्मरण दिलासा और संतुष्टि के लिए आत्मिक आदर्श लेख बन गए। बोथियुस ने कैद में बैठे हुए, अपने भविष्य को लेकर लिखा: "यदि उसे वैसा ना समझे जाए तो कुछ भी दयनीय नहीं है; और इसके विपरीत हर दशा आनन्दमय है यदि उसे भोगने वाला उसमें संतुष्ट है"; मसीह यीशु पर उसका दृढ़ विश्वास उसके इस दृष्टिकोण का जनक था। उसने भली भांति समझ लिया था कि बदलते हुए हालात के प्रति क्या दृष्टिकोण रखना है यह हमारा व्यक्तिगत चुनाव है।

   बोथियुस के वे विचार प्रेरित पौलुस के ऐसे ही विचारों के अनुसार थे। पौलुस ने भी यही दिखाया कि परिस्थितियों से अधिक महत्वपूर्ण है परिस्थितियों के प्रति हमारा दृष्टिकोण। जब पौलुस भी अपनी मसीही सेवकाई के लिए कैद में डाला गया और अपने मृत्युदण्ड की प्रतीक्षा कर रहा था, तो कैद से लिखी फिलिप्पी के मसीही विश्वासियों के नाम अपनी पत्री में वह कहता है, "यह नहीं कि मैं अपनी घटी के कारण यह कहता हूं; क्योंकि मैं ने यह सीखा है कि जिस दशा में हूं, उसी में सन्‍तोष करूं" (फिलिप्पियों 4:11)। पौलुस तथा बोथियुस, दोनों ही ने अपनी संतुष्टि का आधार अपनी परिस्थितियों को नहीं वरन अपने प्रभु परमेश्वर को बनाया था; उस प्रभु को जो कभी नहीं बदलता, जिसका प्रेम अपने अनुयायियों के प्रति कभी कम नहीं होता और जो हर बात और हर परिस्थिति में होकर उनका भला ही करता है।

   आज क्या आप किसी कठिन परिस्थिति को लेकर परेशान और कुंठित अनुभव कर रहे हैं? परमेश्वर आपको संतुष्टि दे सकता है, क्योंकि उसी में होकर चिरस्थाई और वास्तविक संतुष्टि तथा आनन्द मिलता है, जैसा कि परमेश्वर के वचन बाइबल में भजनकार ने लिखा है: "तू मुझे जीवन का रास्ता दिखाएगा; तेरे निकट आनन्द की भरपूरी है, तेरे दाहिने हाथ में सुख सर्वदा बना रहता है" (भजन 16:11)। - डेनिस फिशर


जब किसी परिस्थिति में आपके पास केवल परमेश्वर ही है, 
तो उस परिस्थिति में जो सर्वोत्तम आपको चाहिए वह आपके पास है।

और परमेश्वर सब प्रकार का अनुग्रह तुम्हें बहुतायत से दे सकता है जिस से हर बात में और हर समय, सब कुछ, जो तुम्हें आवश्यक हो, तुम्हारे पास रहे, और हर एक भले काम के लिये तुम्हारे पास बहुत कुछ हो। - 2 कुरिन्थियों 9:8 

बाइबल पाठ: भजन 16
Psalms 16:1 हे ईश्वर मेरी रक्षा कर, क्योंकि मैं तेरा ही शरणागत हूं। 
Psalms 16:2 मैं ने परमेश्वर से कहा है, कि तू ही मेरा प्रभु है; तेरे सिवाए मेरी भलाई कहीं नहीं। 
Psalms 16:3 पृथ्वी पर जो पवित्र लोग हैं, वे ही आदर के योग्य हैं, और उन्हीं से मैं प्रसन्न रहता हूं। 
Psalms 16:4 जो पराए देवता के पीछे भागते हैं उनका दु:ख बढ़ जाएगा; मैं उनके लोहू वाले तपावन नहीं तपाऊंगा और उनका नाम अपने ओठों से नहीं लूंगा। 
Psalms 16:5 यहोवा मेरा भाग और मेरे कटोरे का हिस्सा है; मेरे बाट को तू स्थिर रखता है। 
Psalms 16:6 मेरे लिये माप की डोरी मनभावने स्थान में पड़ी, और मेरा भाग मनभावना है।
Psalms 16:7 मैं यहोवा को धन्य कहता हूं, क्योंकि उसने मुझे सम्मत्ति दी है; वरन मेरा मन भी रात में मुझे शिक्षा देता है। 
Psalms 16:8 मैं ने यहोवा को निरन्तर अपने सम्मुख रखा है: इसलिये कि वह मेरे दाहिने हाथ रहता है मैं कभी न डगमगाऊंगा।
Psalms 16:9 इस कारण मेरा हृदय आनन्दित और मेरी आत्मा मगन हुई; मेरा शरीर भी चैन से रहेगा। 
Psalms 16:10 क्योंकि तू मेरे प्राण को अधोलोक में न छोड़ेगा, न अपने पवित्र भक्त को सड़ने देगा।
Psalms 16:11 तू मुझे जीवन का रास्ता दिखाएगा; तेरे निकट आनन्द की भरपूरी है, तेरे दाहिने हाथ में सुख सर्वदा बना रहता है।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 16-17
  • प्रेरितों 20:1-16